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परिवार(दि फैमिली) complete

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कंचन के जाते ही विजय का दिमाग चकराने लगा। उसकी सगी बहन उसे अपनी पेंटी के साथ रंग हाथों पकड लिया था, मगर विजय हैरान था की उसकी बहन ने उसे डाँटने के बजाये वहां से मुस्कुरा कर चलि गयी थी । विजय को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उसका लंड बुहत ज्यादा उत्तेजित होकर उसकी पेण्ट में झटके मार रहा था ।

विजय के दिमाग में बार बार अपनी बहन के नंगे बूब्स याद आ रहे थे, विजय ने अपनी पेण्ट को उतारते हुए बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया और अपने अंडरवियर को नीचे करते हुए फिर से अपनी सगी बहन की चुचियों को दिमाग में रखकर अपने लंड को हिलाने लगा । ४-५ मिनट के बाद ही विजय का जिस्म झटके खाने लगा और उसके लंड से वीर्य की बारिश होने लगी।

विजय मुठ मारने के बाद फिर से शावर ऑन करके नहाने लगा और नहाने के बाद बाहर निकलते हुए अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया । विजय ने दरवाज़े को बंद करते हुए आज सिर्फ अंडरवियर में ही सोने का फैसला किया, विजय अभी बेड पर लेटा ही था की कोई उसका दरवाज़ा खटखटाने लगा ।

विजय ने जैसे ही दरवाज़ा खोला उसकी बड़ी बहन कंचन सामने कड़ी थी, विजय ने कंचन को देखते हुए कहा "फिर से क्या हुआ दीदी?",

"वीजू मुझे नींद ही नहीं आ रही है मैंने सोचा अपने भाई के साथ बैठकर कुछ देर बातें करती हू", कंचन ने विजय के अंडरवियर की तरफ निहारते हुए कहा।

विजय अपनी बहन की बात सुनते ही वहां से चलते हुआ अंदर आ गया।विजय अंदर आते ही अपनी पेंट उठा कर पहनने लगा । कंचन ने अपने भाई को पेंट पहनता हुआ देखकर कहा "वीजू क्यों पेंट पहन रहे हो। मैं तेरी बहन हूँ मुझसे कैसा शरमाना" ।

विजय अपनी बहन की बात सुनते ही पेंट को पहने बिना ही वहीँ पर रख दिया और जाकर बेड पर बैठ गया ।कंचन अब भी उसी सलवार कमीज में थी, कंचन ने कमीज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी जिस वजह से बल्ब की रौशनी में उसकी चुचियों के गुलाबी दाने साफ नज़र आ रहे थे।
 
कंचन ने दरवाज़े को अंदर से बंद करते हुए विजय के साथ बेड पर चढ़ कर बैठ गई, विजय इतनी क़रीब से अपनी दीदी को देखकर बौखला गया क्योंके कंचन की चुचियाँ इतने क़रीब से बिलकुल साफ़ नज़र आ रही थी । विजय की ऑंखें बार बार अपनी दीदी की चुचियों को निहार रही थी ।

"क्या देख रहे हो?" कंचन ने बार बार विजय को अपनी चुचियों की तरफ घुरता हुआ देखकर कहा।

"कुछ नही", विजय अपनी दीदी के सवाल पर अपनी नज़रों को हटाते हुए बोला।

"वीजू तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?" कंचन ने विजय से दूसरा सवाल किया।

"नही दीदी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है", विजय ने अपनी दीदी को जवाब दिया।

"क्यों रे तुम्हारे उम्र के लड़के तो ३- ३ गर्लफ्रेंड रखते हैं आजकल। तुम्हारी क्यों नहीं है?" कंचन ने अपने भाई से फिर से सवाल किया।

"दीदी मुझे लड़कयों से बात करने में शर्म आती है" विजय ने शर्म से नज़रें नीचे करते हुए कहा।

"वाह भाई वाह आजकल के लड़के लड़कयों से बात करने के लिए जाने क्या क्या करते फिरते हैं और यह देखो हमारा भोला भाई इसे लड़की से बात करने में शर्म आती है" कंचन ने अपने भाई को टोकते हुए कहा।

"वीजू अगर तुम्हें लड़कयों से बात करने में शर्म आती है तो आज से मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड बन जाती हूँ", कंचन ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए कहा।

"मगर दीदी आप हमारी गर्लफ्रेंड कैसे बन सकती हो। आप तो मेरी बहन हो", विजय ने अपनी दीदी की बात सुनते हुए कहा।

"यार अब तुम्हें सिखाने के लिए तुम्हारी गर्लफ्रेंड बन रही हूं। जब तुम शरमाना छोडकर मुझसे बात करने लगोगे तो फिर तुम किसी को भी अपनी गर्लफ्रेंड बना सकते हो", कंचन ने विजय को समझाते हुए कहा।

"वीजू एक बात बताओ तुम्हें लड़कयों में सब से अच्छा क्या लगता है?" कंचन ने अपने भाई से सवाल किया।

"जी दीदी मुझे शर्म आ रही है", विजय ने अपनी बहन के सवाल पर शरमाते हुए कहा।

"देखो यार अब मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड और तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो इसीलिए शरमाना छोडो और बताओ" कंचन ने अपने भाई को डांटते हुए कहा।

"दीदी मुझे लड़कयों की वह सब से अच्छी लगती है" विजय ने हिचकिचाते हुए अपनी दीदी की चुचियों की तरफ इशारा करते हुए कहा।

"च तो हमारे भाई को लड़कयों की चुचियाँ सब से अच्छी लगती है, देखो विजु तुम इतना शरमाओगे तो कैसे चलेगा इसे चूचियाँ कहते हैं कम से कम इनका नाम तो लो" कंचन ने विजय को धक्का देते हुए कहा।
 
वीजू सच बताना पढाई करते वक्त तुम मेरी चुचियों को देख रहे थे न?", कंचन ने विजय की आँखों में देखते हुए कहा।

"जी दीदी" विजय शरमाते हुए सिर्फ इतना कह पाया।

"वीजू अब मैं तुम्हारी गर्ल फ्रेंड हैं हम से शर्माओ मत।क्या तुम्हें मेरी चुचियां अच्छी लगती है", कंचन ने फिर से अपने भाई से पूछा।

"जी दीदी आपकी चुचियां मुझे बुहत अच्छी लगती है" विजय ने इस बार कुछ शर्म छोडकर कहा।

"वीजू एक और बात तुम बाथरूम में मेरी पेंटी के साथ क्या कर रहे थे?, सच बताना में किसि से नहीं कहूँगी। कंचन ने अपने भाई को खुलता हुआ देखकर कहा।

"दीदी आपकी पेंटी को देखकर मुझे न जाने क्या हो गया था। मैं आपकी पेंटी की खुशबु सूंघ रहा था की आप आ गयी", विजय ने भी सीधा जवाब देते हुए कहा।

"मेरी पेंटी की खुश्बु उस में कौन सी परफ्यूम लगी थी जो तुम सूंघ रहे थे" कंचन ने फिर से अपने भाई से पूछा।

"दीदी मैंने लड़कों से सुना था की लड़की की पेंटी में उसकी चूत की खुशबु होती है", विजय बिलकुल बेशरम बनते हुए अपनी दीदी से कहा।

"हाय राम तो तुम अपनी दीदी की चूत की खुशबु सूंघ रहे थे। नालायक बता तुम्हें उसकी खुशबु कैसी लगी" कंचन ने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा।

"दीदी उसकी खुशबु बुहत अच्छी थी" विजय ने फिर से उसी बेशरमी से कहा।

"दीदी एक बात कहां बुरा तो नहीं मानोंगी", विजय ने अपनी दीदी की चुचियों की तरफ देखते हुए कहा।

"हा पूछो बुरा नहीं मानूँगी", कंचन ने अपने भाई को इतना जल्दी अपने से फ्री होता देखकर हैरान होते हुए कहा।

"दीदी टॉवल देते वक्त मैं आपकी चुचियों को नंगा देख लिया था। मैंने आज तक किसी लड़की को नंगा नहीं देखा । क्या आप एक बार मुझे नंगी होकर अपना जिस्म दिखा सकती हो" विजय ने एक ही साँस में अपनी दीदी को कह दिया ।

"वीजू मैं तो तुझे शरीफ समझती थी, मगर तुम तो एक नंबर के बदमाश निकले । अगर तुम अपनी गर्लफ्रेंड को नंगा देखना चाहो तो मैं दिखा सकती हूं, मगर तुम्हारी बहन होने के नाते मैं नंगी नहीं हो सकती", कंचन ने भी अपनी दिल की हसरत पूरी होते देखकर विजय से कहा।
 
ठीक है दीदी मुझे अपनी गर्लफ्रेंड को नंगा देखना है" विजय ने खुश होते हुए कहा।

"वीजू मैं सिर्फ तुम्हारे लिए यह सब कर रही हूँ किसी को गलती से भी इस बारे में पता नहीं चलना चाहिये" कंचन ने विजय को समझाते हुए कहा।

"दीदी मैं किसी को नहीं बताऊंगा" विजय ने अपनी बहन की बात सुनते हुए कहा।

"ठीक है मैं तुम्हें अभी अपना नंगा जिस्म दिखाती हूँ।" यह कहते हुए कंचन ने बेड से उठते हुए अपनी कमीज उतार दी ।

विजय अपनी बहन की नंगी चुचियों को बल्ब की रौशनी में चमकता हुआ देखकर पागल होने लगा । कंचन ने अपने भाई की तरफ देखते हुए अपनी सलवार भी उतार दिया। कंचन अब सिर्फ एक छोटी सी पेंटी में थी जिस में उसके आधे चूतड़ नंगे दिखाई दे रहे थे।

विजय का लंड उसके अंडरवियर में बुहत ज़ोर से अकड़कर खडा हो चुका था, कंचन ने आखरी बार अपने भाई को देखते हुए अपनी पेंटी में हाथ डालकर उसे भी उतार दिया । विजय अपनी बहन की गुलाबी चूत देखकर बुहत ज्यादा एक्साइटेड हो गया। क्योंकी उसने आज तक किसी भी लड़की की चूत नहीं देखा था और पहली बार में ही वह अपनी सगी बहन की चूत को देख रहा था ।

"वीजू इतने गौर से क्या देख रहे हो", कंचन ने अपने भाई को अपनी चूत की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा।

"दीदी आप सच में बुहत सूंदर हो, आपकी चूत तो इतनी सूंदर है की मैं बता नहीं सकता", विजय ने अपनी बहन की तारीफ करते हुए कहा।

"अच्छी तरह से देख लिया हो तो मैं अपने कपड़े पहन लू" कंचन ने अपने भाई से कहा।

"नही दीदी ऐसा ज़ुल्म मत करना अभी कहाँ देखा है। प्लीज मेरे क़रीब आकर बैठो । मैं आपके प्यारे जिस्म को क़रीब से देखना चाहता हूं"। विजय ने अपनी बहन को मिन्नत करते हुए कहा।

"वीजू अब तुम हद से ज़्यादा बढते जा रहे हो", कंचन ने गुस्से का दिखावा करते हुए अपने भाई से कहा।

"आप मेरी अच्छी बहन हो,प्लीज मेरी यह बात मान लो", विजय ने फिर से गिडगिडाते हुए कहा।

"ठीक है मगर बाद में तुम्हारी कोई बात नहीं मानुँगी", कंचन ने अपने भाई की बात मानते हुए बेड पर आकर बैठते हुए कहा।
 
अपनी सगी बहन का नंगा होकर इतना क़रीब बैठने से विजय का पूरा बदन एक्साईटमेंट में कांप रहा था। कंचन की नज़र अपने भाई के क़रीब बैठते ही उसके अंडरबीयर में बने तम्बू पर पडी । कंचन मन ही मन में बुहत खुश हो रही थी की उसका भाई इतनी जल्दी उसके बहकावें में आ गया ।

विजय अपनी ऑखों से कभी अपनी बहन की नंगी गुलाबी चुचियों को देखता तो कभी अपनी नज़र नीचे करते हुए उसकी गुलाबी चूत को देखता । विजय को एतबार नहीं आ रहा था की उसकी सगी बड़ी बहन उसके सामने नंगी बैठी है।

"वीजू यह तुम्हारे अंडरवियर में तम्बू क्यों बना हुआ है?" कंचन ने इतनी देर की ख़ामोशी को तोड़ते हुए कहा।

"दीदी यह सब आपके हुस्न का कमाल है" विजय ने अपनी बहन की तारीफ करते हुए कहा ।

"वीजू मगर मुझे देखने से इस तम्बू का क्या काम?" कंचन ने अन्जान बनने का नाटक करते हुए अपने भाई से कहा।

"दीदी सच में आपको इसके बारे में पता नही" विजय ने हैंरान होते हुए अपनी बहन से पूछा।

"वीजू सच में मुझे पता नहीं है" कंचन ने जवाब देते हुए कहा ।

"दीदी आप देखना चाहेंगी इसे?" विजय ने अपनी बहन की ऑखों में देखते हुए कहा।

"हा विजु दिखाओ मुझे मैं देखना चाहती हूँ" कंचन ने हवस भरी नज़रों से अपने भाई के अंडरवियर की तरफ देखते हुए कहा ।

विजय ने अपनी बहन की बात सुनते ही अपने अंडरवियर में हाथ ड़ालते हुए अपने चुतडो को थोडा ऊपर करते हुए उसे उतार दिया, अंडरवियर के उतरते ही विजय का ८ इंच लम्बा लंड आज़ाद होकर कंचन की ऑखों के सामने लहराने लगा । कंचन ने आज तक किसी मरद का लंड नहीं देखा था।
 
कंचन ने अपनी ऑखों के सामने अपने छोटे भाई के लम्बे लंड को लहराता हुआ देखकर हैरान होते हुए कहा "वीजू यह तुम्हारी नुनी इतनी बड़ी कैसे हो गई, मैंने तुम्हारी नुनी बचपन में नहाते हुए देखी थी।

"दीदी तब में बच्चा था, मगर अब मैं एक जवान मरद हूँ और मरद जब जवान होता है तो उसकी नुनी बड़ी होकर लंड कहलाती है" ।

कंचन ने नीलम से सुना था के जब लंड चूत में जाता है तो बुहत मजा आता है, मगर विजय का बड़ा और मोटा लंड देखकर वह सोचने लगी की इतना मोटा और लम्बा लंड उसकी छोटी चूत में घुसेगा क्या।

विजय के लंड का रंग गोरा और उसका सुपाडा लाल था ।

"वीजू तुम ने कहा था के यह मेरे जिस्म का कमाल है, इसका क्या मतलब हुआ?" कंचन ने अपने भाई के गोरे लंड के लाल सुपाडे को देखते हुए कहा ।

"हा दीदी मैंने सच कहा था, क्योंकी मरद का लंड तब ही लम्बा और मोटा होता है जब वह किसी लड़की को नंगा देख ले या उसके बारे में गन्दा सोचे" विजय ने अपनी बड़ी बहन को समझाते हुए कहा।

"मगर विजु यह लड़की को देखकर क्यों बड़ा और मोटा हो जाता है?" कंचन ने इस बार जानबूझकर अन्जान बनने का नाटक करते हुए अपने छोटे भाई से पूछा।

"दीदी मैंने भी अपने दोस्तो से सुना था की अगर इस लंड को लड़की की चूत में घुसाया जाए तो उसे बुहत मजा आता है और लड़की को बच्चा भी होता है" विजय ने अपनी बहन को बताया ।

"वीजू क्या तुम मुझे बेवक़ूफ़ समझते हो यह इतना बड़ा लंड लड़की की छोटी सी चूत में कैसे घुसेगा?", कंचन ने विजय का मज़ाक उड़ाते हुए कहा।

"दीदी मैं सच बोल रहा हूँ, इसे लड़की की चूत में घुसाया जाता है" विजय ने अपनी बहन को यकीन दिलाते हुए कहा ।

"वीजू तुम इतने यकीन से कैसे कह रहे हो" कंचन ने अपने भाई को शक भरी निगाह से देखते हुए कहा।

"वो दीदी मैंने अपने एक दोस्त को किसी लड़की की चूत में लंड को घुसाते हुए देखा था" विजु ने हडबडाते हुए अपनी दीदी को जवाब दिया ।

"तुम तो बड़े बदमाश निकले विजू, मगर मुझे यकीन नहीं आता" कंचन ने अपने भाई से कहा।

"दीदी एक आइडिया है जिस से आपको यकीन हो जायेगा" विजय ने अपनी बड़ी दीदी की गुलाबी चूत को देखते हुए कहा।

"क्या आइडिया है" कंचन ने अपने भाई के लंड को देखते हुए कहा।
 
दीदी अगर आप इजाज़त दें तो मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में घुसाकर देखूं की यह उस में जाता है या नही" विजय ने भोला बनते हुए कहा।

"बदमाश तुम अपनी सगी बहन के साथ गंदा काम करोगे, तुम्हें शर्म नहीं आती" कंचन ने अपने भाई को डाँटते हुए कहा ।

"मैं अपनी दीदी नहीं अपनी गर्लफ्रेंड के साथ गन्दा काम करना चाहता हूँ" विजय ने फिर से मासूम बनते हुए कहा।

"वीजू तू बुहत बदमाश हो गया है तो मुझे बातों के जाल में न फंसा" कंचन ने मुस्कुराते हुए कहा ।

कंचन अपने भाई का बड़ा और मोटा लंड देखकर डर गयी थी वरना वह कब की उसे इजाज़त दे देती।

"दीदी क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड नहीं हो?" विजय ने अपनी दीदी से पुछा।

"वीजू मैं तुम्हारी गर्लफ्रेंड हूं, मगर मैं तुम्हारे साथ वह सब कुछ नहीं कर सकती" कंचन ने अपने भाई को समझाते हुए कहा ।

"दीदी देखो न यह कितना सख्त और गरम हो गया है अपनी गर्लफ्रेंड को नंगा देखकर" विजय ने अचानक अपनी दीदी का हाथ पकडते हुए अपने लंड पर रख दिया । विजय के लंड पर हाथ पड़ते ही कंचन का पूरा बदन सिहर उठा।

कंचन को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसका हाथ किसी गरम लोहे पर रख दिया गया हो, उसे अपने पूरे शरीर में अजीब किस्म की गुदगुदी महसूस हो रही थी ।"वीजू बदमाश मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी " कंचन ने अपना हाथ अपने भाई के लंड से हटाते हुए उसे मारने को उठाया ।

विजय अपनी बहन से बचने के लिए सीधा लेट गया। कंचन अपने भाई के बैठने से सीधी होकर उसके ऊपर गिर पडी । कंचन की चुचियां उसके ऊपर गिरने से विजय के सीने में दब गयी ।

"आह्ह कंचन की चुचियां अपने भाई के सीने में दबते ही उसके मूह से सिसकी निकल गई" ।।।। विजय की भी हालत बुहत बुरी थी अपनी दीदी के अपने ऊपर गिरने से कंचन की चुचियां उसके सीने से और उसका लंड उसकी दीदी के चुतडो पर दब रहा था ।

विजय ने बिना कुछ सोचे समझे अपने दोनों हाथों से अपनी दीदी को बाँहों में भरते हुए अपने होंठ अपनी सगी बहन के होंठो पर रख दिये । कंचन को भी उस वक्त कुछ समझ में नहीं आ रहा था अपने भाई के होंठ अपने होंठों पर पड़ते ही उसका पूरा जिस्म मज़े से सिहर उठा।
 
कंचन और विजय दोनों की ज़िंदगी का यह पहला चुम्बन था, कंचन और विजय दोनों अपने होंठ एक दुसरे के लबों से मिलते ही किसी दूसरी दुनिया में पुहंच गए । कंचन ने भी मज़े से अपने हाथों को अपने भाई के बालों में घुमाते हुए उसके साथ चुम्बन का मजा लेने लगी ।

विजय अपनी बहन का विरोध ख़तम होते ही उसे खीचते हुए पूरा अपने ऊपर सुला दिया, कंचन अब अपनी दोनों टाँगें को अपने भाई के पेट पर फैलाकर लेटी थी और अपने भाई के चुम्बन का जवाब चुम्बन से दे रही थी ।

विजय को अपनी बहन के गुलाबी लबों को चूसते हुए बुहत मजा आ रहा था और उसका फनफनाता हुआ लंड उसकी बड़ी बहन कंचन की गांड पर टक्कर मार रहा था, कंचन भी अपने भाई से अपने होंठ चुसवाते हुए बुहत गरम हो चुकी थी जिस वजह से उसकी चूत से पानी निकल कर अपने छोटे भाई के पेट पर गिर रहा था ।

विजय अपनी बहन के दोनों लबों को अपने मूह में भरकर चूस रहा था, कंचन की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी और वह अपनी चूत को अपने सगे भाई के पेट पर ज़ोर से रगड रगड कर अपने होंठ चुसवा रही थी।

विजय ने अपने मूह से अपनी बड़ी बहन के होंठों को निकालते हुए उसके गर्दन को चुमने लगा और अपने हाथों को उसकी पीठ से रेंगता हुआ अपनी अपनी बड़ी बहन की चुचियों को पकड लिया ।

कंचन अपने भाई के हाथ अपनी चुचियों पर पड़ते ही कांप उठी, विजय अपनी सगी बहन की नरम चुचियों को दबाता हुआ अपना मूह उसके काँधे से नीचे लाते हुए उसकी चुचियों तक आ गया और अपनी बड़ी बहन की एक चूचि के गुलाबी दाने को अपने मूह में भर लिया ।

"आह्ह शी ईईईईईईईईईईई

कंचन अपने चूचि का निप्पल अपने छोटे भाई के मूह में जाते ही मज़े से तड़पते हुए सिसक उठी", विजय अपनी बड़ी बहन की नरम चूचि को एक हाथ से सहलाते हुए दुसरे हाथ से उसकी पीठ सहला रहा था ।

विजय का लंड उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोरों से कंचन की गांड से टकरा रहा था, विजय अपनी सगी बहन की अनछुई चूचि को बुहत ज़ोर से चूस रहा था । विजय को अपनी बड़ी बहन की चूचि चूसते हुए बुहत मजा आ रहा था।
 
कंचन के जिस्म ने अब अकडना शुरू कर दिया था, अपने बड़े भाई के इतने ज़ोर से उसकी चूचि चूसने से उसके पूरे जिस्म में अनोखे मज़े से सिहरन हो रही थी । कंचन की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी, उसे अपनी चूत में भी बुहत ज़ोर की गुदगुदी महसूस हो रही थी ।

कंचन ने अपने भाई के बालों को सहलाते हुए अपनी चूत ज़ोर से उसके पेट पर रगडने लगी, कंचन अपनी चूचि के चूसने से बुहत ज़्यादा उत्तेजित होकर झरने के क़रीब पुहंच गयी थी । कंचन ने अचानक अपने छोटे भाई के मूह में अपनी चूचि को ज़ोर से दबा दिया ।

कंचन ने अपनी चूचि को इतनी ज़ोर से अपने छोटे भाई के मूह में दबाया की उसकी चूचि आधे से ज़्यादा उसके छोटे भाई के मूह में चली गई । कंचन का बदन बुहत ज़ोर से काँपने लगा, वह बुहत ज़ोर से आहें भरते हुए अपनी चूत को विजय के पेट पर रगड रही थी ।

कंचन का पूरा जिस्म उतेजना के मारे काम्पने लगा। कंचन की चूत अचानक झटके खाने लगी और वह "उह आह्ह इश करते हुए वह झरने लगी" । विजय को अपने पेट पर कुछ गर्म गर्म सा अह्सास हुआ, यह अह्सास उसकी बड़ी बहन की चूत से निकालते हुए पानी का था।

कंचन की चूत कुछ देर तक अपने भाई के पेट पर पानी छोड़ती रही, कुछ देर बाद कंचन बिलकुल शांत होकर अपने छोटे भाई के ऊपर पडी थी । विजय अभी तक अपनी बड़ी बहन की नरम नरम चुचियों को सहलाने और चुसने में खोया हुआ था ।

विजय अपनी बहन को शांत देखकर उसको अपनी बाँहों में भरते हुए अपने ऊपर से उठाकर सीधा सुला दिया और खुद उसकी टांगों को चौड़ा करते हुए अपनी बड़ी बहन के ऊपर चढ गया ।

विजय अपनी बड़ी बहन के ऊपर ऐसे चढा हुआ था की उसक लंड सीधा कंचन की चूत पर रगड रहा था । विजय अपने लंड को बुहत ज़ोर से अपनी बड़ी बहन की कुँवारी चूत पर रगडते हुए उसकी चुचियों को अपने हाथों से सहलाने लगा ।

कंचन को विजय का लंड अपनी चूत पर ऊपर से नीचे तक रगडता हुआ महसूस हो रहा था, कंचन को डर लगने लगा कहीं उसके भाई ने अपना लम्बा और मोटा लंड उसकी चूत में घुसेड दिया तो वह बर्दाशत नहीं कर पायेगी और उसके चीख़ने से पकडे जाने का डर था।

"क्या कर रहे हो विजु " कंचन ने अचानक अपने भाई को धक्का देते हुए अपने ऊपर से हटा दिया।

"दीदी क्या हुआ बुहत मजा आ रहा था, प्लीज करने दो ना" विजय ने गिडगिडाते हुए कहा।

"बुहत हो चुका, मैं इसके आगे नहीं जा सकती" कंचन गुस्से से उठते हुए अपने कपडे पहनने लगी ।

"देखो न दीदी यह कैसा मुझे तँग कर रहा है" विजय भी बेड से उठते हुए अपनी बड़ी दीदी के सामने खडा होकर अपने खडे लंड की तरफ इशारा करते हुए बोला,

"तंग मत कर विजू", कंचन ने अपनी सलवार पहंनते हुए कहा ।
 
प्लीज मेरी प्यारी दीदी इसका कुछ करो ना" विजय ने फिर से अपनी दीदी को मिन्नत करते हुए कहा।

"वीजू में इसका क्या कर सकती हूं, तुम अपने हाथ से इसे शांत कर दो" कंचन ने अपनी सलवार को भी पहनते हुए कहा ।

"दीदी मुझे नहीं पता हाथ से कैसे करते है, प्लीज आप ही कर दो ना" विजय ने फिर से अपनी बड़ी बहन को तंग करते हुए कहा।

"वीजू मैंने भी सहेली से सुना था की उसका बॉयफ्रैंड उसको याद करके अपने हाथ से इसको शांत करता है, मुझे कुछ नहीं पता" कंचन ने अपने छोटे भाई के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा।

"दीदी चलो बेड पर बैठो न। मैं कुछ नहीं करूंगा आपके साथ" विजय ने अपनी बहन को हाथ से पकडते हुए बेड की तरफ खींचते हुए कहा, कंचन भी अपने भाई की बात को मानते हुए उसके साथ बेड पर बैठ गयी ।

"दीदी मेरा एक दोस्त बता रहा था की जब वह अपने लंड को हाथ में लेकर ऊपर से नीचे तक सहलाता है तो उसे बुहत मजा आता है और इस में से पानी भी निकलता है" विजय ने बेड पर बैठते ही अपनी बड़ी बहन को बताया ।

"वीजू तू मुझे कुछ मत बता, जो करना है भले करो" कंचन ने अपने भाई से कहा।

"दीदी आप मेरी गर्लफ्रेंड है, थोडी देर के लिए अपने हाथ से इसे नहीं सहला सकती ? विजय ने मूह बनाते हुए अपनी बड़ी बहन को कहा ।

"वीजू लगता है तुम ऐसे नहीं मनोगे" यह कहते हुए कंचन ने अपना हाथ आगे करते हुए अपने भाई के लंड को पकड लिया और उसे आगे पीछे करते हुए सहलाने लगी । आह्हः विजय अपनी बड़ी बहन का नरम हाथ अपने लंड पर पडते ही अपनी आँखें बंद करके सिसक उठा।

कंचन ऐसे ही कुछ देर तक अपने छोटे भाई के लंड को ऊपर नीचे करती रही, अचानक विजय ने अपना हाथ अपनी दीदी के हाथ के ऊपर रख दिया और ज़ोर से सिसकते हुए उसे आगे पीछे करने लगा । कंचन को कुछ समझ में आता इससे पहले ही विजय के लंड से वीर्य की पिचकारियां निकलनी शुरू हो गई ।

कंचन थोडा झुक कर अपने भाई का लंड ऊपर नीचे कर रही थी, जिस वजह से उसके भाई के लंड से निकलता हुआ वीर्य सीधा उसके मूह और उसकी चुचियों के ऊपर कपड़ों पर गिरने लगा ।
 
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