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कंचन के जाते ही विजय का दिमाग चकराने लगा। उसकी सगी बहन उसे अपनी पेंटी के साथ रंग हाथों पकड लिया था, मगर विजय हैरान था की उसकी बहन ने उसे डाँटने के बजाये वहां से मुस्कुरा कर चलि गयी थी । विजय को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उसका लंड बुहत ज्यादा उत्तेजित होकर उसकी पेण्ट में झटके मार रहा था ।
विजय के दिमाग में बार बार अपनी बहन के नंगे बूब्स याद आ रहे थे, विजय ने अपनी पेण्ट को उतारते हुए बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया और अपने अंडरवियर को नीचे करते हुए फिर से अपनी सगी बहन की चुचियों को दिमाग में रखकर अपने लंड को हिलाने लगा । ४-५ मिनट के बाद ही विजय का जिस्म झटके खाने लगा और उसके लंड से वीर्य की बारिश होने लगी।
विजय मुठ मारने के बाद फिर से शावर ऑन करके नहाने लगा और नहाने के बाद बाहर निकलते हुए अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया । विजय ने दरवाज़े को बंद करते हुए आज सिर्फ अंडरवियर में ही सोने का फैसला किया, विजय अभी बेड पर लेटा ही था की कोई उसका दरवाज़ा खटखटाने लगा ।
विजय ने जैसे ही दरवाज़ा खोला उसकी बड़ी बहन कंचन सामने कड़ी थी, विजय ने कंचन को देखते हुए कहा "फिर से क्या हुआ दीदी?",
"वीजू मुझे नींद ही नहीं आ रही है मैंने सोचा अपने भाई के साथ बैठकर कुछ देर बातें करती हू", कंचन ने विजय के अंडरवियर की तरफ निहारते हुए कहा।
विजय अपनी बहन की बात सुनते ही वहां से चलते हुआ अंदर आ गया।विजय अंदर आते ही अपनी पेंट उठा कर पहनने लगा । कंचन ने अपने भाई को पेंट पहनता हुआ देखकर कहा "वीजू क्यों पेंट पहन रहे हो। मैं तेरी बहन हूँ मुझसे कैसा शरमाना" ।
विजय अपनी बहन की बात सुनते ही पेंट को पहने बिना ही वहीँ पर रख दिया और जाकर बेड पर बैठ गया ।कंचन अब भी उसी सलवार कमीज में थी, कंचन ने कमीज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी जिस वजह से बल्ब की रौशनी में उसकी चुचियों के गुलाबी दाने साफ नज़र आ रहे थे।
विजय के दिमाग में बार बार अपनी बहन के नंगे बूब्स याद आ रहे थे, विजय ने अपनी पेण्ट को उतारते हुए बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया और अपने अंडरवियर को नीचे करते हुए फिर से अपनी सगी बहन की चुचियों को दिमाग में रखकर अपने लंड को हिलाने लगा । ४-५ मिनट के बाद ही विजय का जिस्म झटके खाने लगा और उसके लंड से वीर्य की बारिश होने लगी।
विजय मुठ मारने के बाद फिर से शावर ऑन करके नहाने लगा और नहाने के बाद बाहर निकलते हुए अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया । विजय ने दरवाज़े को बंद करते हुए आज सिर्फ अंडरवियर में ही सोने का फैसला किया, विजय अभी बेड पर लेटा ही था की कोई उसका दरवाज़ा खटखटाने लगा ।
विजय ने जैसे ही दरवाज़ा खोला उसकी बड़ी बहन कंचन सामने कड़ी थी, विजय ने कंचन को देखते हुए कहा "फिर से क्या हुआ दीदी?",
"वीजू मुझे नींद ही नहीं आ रही है मैंने सोचा अपने भाई के साथ बैठकर कुछ देर बातें करती हू", कंचन ने विजय के अंडरवियर की तरफ निहारते हुए कहा।
विजय अपनी बहन की बात सुनते ही वहां से चलते हुआ अंदर आ गया।विजय अंदर आते ही अपनी पेंट उठा कर पहनने लगा । कंचन ने अपने भाई को पेंट पहनता हुआ देखकर कहा "वीजू क्यों पेंट पहन रहे हो। मैं तेरी बहन हूँ मुझसे कैसा शरमाना" ।
विजय अपनी बहन की बात सुनते ही पेंट को पहने बिना ही वहीँ पर रख दिया और जाकर बेड पर बैठ गया ।कंचन अब भी उसी सलवार कमीज में थी, कंचन ने कमीज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी जिस वजह से बल्ब की रौशनी में उसकी चुचियों के गुलाबी दाने साफ नज़र आ रहे थे।