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परिवार(दि फैमिली) complete

ओहहहहह भैया मगर आपका यह तो बुहत लम्बा और मोटा दिख रहा है। यह हमारे छोटे से छेद में कैसे घुसेगा" शील ने यों ही अपने भाई के अंडरवियर में उछलते हुए लंड की तरफ देखते हुए बोली।

"दीदी यह मोटा और लम्बा है तभी तो आपके छेद की अच्छी तरह से सफायी करेंगा" नरेश ने अपनी दीदी की बात सुनकर अपने अंडरवियर को उतारते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह भैया आपका तो सच में बुहत मोटा और लम्बा है मगर है बुहत प्यारा" शीला ने अपने भाई के अंडरवियर के उतारने के बाद उसके लंड को अपने हाथ में लेते हुए कहा।

"ओहहहह दीदी मुझे यह जानकार ख़ुशी हुयी की आपको यह पसंद आया" नरेश ने अपनी बहन का हाथ अपने नंगे लंड पर पड़ते ही जोर से सिसकते हुए कहा।

"भइया मगर यह इतना मोटा मेरे छोटे से छेद में कैसे घुसेगा। मुझे तो बुहत चिंता हो रही है" शीला ने अपने भाई के लंड से खेलते हुए अपनी परेशानी बताते हुए कहा।

"हा दीदी आप इसको अपने मुँह से गीला कर दो फिर देखो हम इसे आपके छेद में कैसे घुसाते हैं। तुम्हें चिंता करने की कोई ज़रुरत नही" नरेश ने अपने बहन को बालों से पकडकर उसका मुँह अपने लंड की तरफ झुकाते हुए कहा ।

नरेश ने शीला को बालों से पकड कर नीचे झुका दिया था। अब शीला का मुँह अपने भाई के खडे नंगे लंड के बिलकुल पास था । शीला ने एक आखिरी नज़र अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे पर डाली और अपनी जीभ निकालकर अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे को चाटने लगी ।

"हाहहह दीदी इस पर अच्छी तरह से जीभ घुमाओ" नरेश ने अपनी बहन की जीभ को अपने लंड पर पड़ने से ज़ोर सिसकते हुए कहा। अब शीला अपनी जीभ से अपने भाई के लंड को उसके सुपाडे से लेकर उसके आखरी हिस्से तक अपनी जीभ से चाट रही थी और नरेश मज़े से सिसकते हुए अपने बहन के बालों को सहला रहा था।

शीला ने अचानक अपना मूह खोलते हुए अपने भाई के लंड के मोटे गुलाबी सुपाडे को अपने मुँह में भर लिया और उसे धीरे धीर अपने होंठो से चूसने लगी,

"ओहहहहहह शहहहहह दीदी" नरेश शीला की इस हरकत से पूरा काँप उठा ।

नरेश ने कुछ देर तक अपने लंड को अपनी बहन के मूह में रखने के बाद अपना लंड वहां से निकाल दिया क्योंकी अगर वह अपना लंड कुछ देर तक और वहां रखता तो वह वहीँ पर झड़ जाता जो नरेश उस वक्त नहीं चाहता था।
 
नरेश ने एक तकिया वहां से उठाकर अपनी बहन के चूतडों के नाचे रख दिया और उसकी दोनों टांगों को उसके घुटनों तक मोड़ दिया । ऐसा करने से शीला की चूत बिलकुल बाहर निकलकर उसके भाई के सामने आ गयी, नरेश अपना खडा लंड अपनी बहन की चूत के छेद पर रगडने लगा।

"ओहहहह आहह भैया क्या कर रहे हो" शीला अपने भाई के लंड को अपनी चूत के छेद पर घिसता हुआ महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए बोली । अपने भाई के लंड के घीसने से शीला की चूत से बुहत सारा पानी निकल रहा था।

नरेश ने अपने लंड को अपनी बहन की चूत से निकलते हुए पानी से पूरी तरह गीला करते हुए अपना लंड उसकी चूत के दोनों होंठो को अलग करते हुए उसके छेद में फँसा दिया । नरेश ने अपनी बहन की दोनों टांगों को मज़बूती से थामकर उसकी आँखों में देखने लगा ।

शीला की आँखों में उस वक्त मस्ती थी । अपने भाई को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर उसने अपने चूतडों को थोडा ऊपर कर दिया । नरेश को उसकी बहन का जवाब मिल गया था । उसने उसकी टांगों को मज़बूती से पकडकर अपने लंड पर दबाव ड़ालते हुए अपनी बहन की चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा।

"आह्ह्ह्ह भैया दर्द हो रहा है" नरेश के थोडे दबाव से ही उसके लंड का सुपाड़ा उसकी बहन की चूत में आधा अंदर जाकर फँस गया। जिस वजह से शीला ने दर्द से चिल्लाते हुए कहा।

"दीदी एक बार तो आपको दर्द सहना होगा। आप एक तकिया उठाकर अपने मूह पर रख लो । लंड घूसने से आपके मूह से चीख़ निकल सकती है जिसे सुनकर यहाँ कोई भी आ सकता है" नरेश ने अपनी बहन को समझाते हुए कहा ।

शीला भी कोई बच्ची नहीं थी। उसे पता था की उसे पहली बार चुदाने में तकलीफ होगी। इसीलिए उसने अपने भाई की बात मानते हुए तकिया उठाकर अपने मूह पर रख दिया । नरेश ने अपनी बहन की टांगों को पकडते हुए अपने लंड को थोडा पीछे करते हुए अपनी पूरी ताक़त के साथ एक धक्का मार दिया।

नरेश का लंड उसकी बहन की कुंवारी झीली को तोड़ते हुए उसकी चूत में आधा घुस गया । शीला अपने भाई का आधा लंड घूसने से बुरी तरह झटपटाने लगी, शीला के मूह पर तकिया न होता तो शायद उसकी चीख़ सुनकर सारा घर वहां पुहंच जाता क्योंकी उसने दर्द के मारे बुहत चीखा था।जो चीख़ें उसके मूह पर तकिया होने की वजह से उस में दब गयी और उसकी आँखों से बुहत आंसू निकल रहे थे ।
 
दीदी बस जो दर्द होना था हो चूका अब सिर्फ मज़ा ही मज़ा आयेगा" नरेश अपना आधा लंड घुसाए ही अपनी बहन के ऊपर झुक गया और उसकी आँखों से आंसू पोछते हुए कहा।

"भइया पर आपका बुहत मोटा है मेरी तो जान ही निकल गयी थी और अब भी बुहत दर्द हो रहा है" शीला ने सुबकते हुए कहा।

"दीदी बस थोडी ही देर में सब कुछ ठीक हो जायेगा। आप अपने ब्लाउज के बटन आगे से खोल दिजिये ताकी मैं आपकी चुचियों को सहलाकर आपका दर्द कम करने में मदद करुं" नरेश ने अपनी दीदी को तसल्ली देते हुए कहा।

"भइया इन्हें सहलाने से मेरी चूत का दर्द कैसे कम होगा" शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोलते हुए कहा।

"दीदी बस तुम देखती जाओ इसका और चूत का आपस में गहरा कनेक्शन होता है। इन्हें हाथ लगाओ तो तुम्हें सीधा अपनी चूत में कुछ होने लगेंगा" नरेश ने अपनी बहन को समझाते हुए कहा ।

नरेश ने अपनी बहन के ब्लाउज के बटन खुलते ही अपने हाथ से उसकी चुचियों को उसके ब्लाउज और ब्रा में से बाहर निकाल लिया और उन्हें अपने हाथों से मसलने लगा । नरेश ने कुछ देर तक अपनी बहन की चुचियों को हाथ से सहलाने के बाद उसकी एक चूचि के दाने को अपना मूह खोलते हुए उस में भर लिया और बुहत ज़ोर से उसे चूसने लगा।

"आह्ह्ह्ह भैया ओह्ह्ह्हह ऐसे ही चूसते रहो। बुहत मज़ा आ रहा है" शीला ने अपनी चूचि के दाने को अपने भाई के मूह में पड़ते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा । शीला की चूत का दर्द अब बिलकुल ख़तम हो चुका था और वह अपनी चूचि को चुसवाते हुए बुहत ज़ोर से सिसककर अपने चूतड़ों को अपने भाई के लंड पर उछाल रही थी ।

"दर्द कैसा है अब" नरेश ने अपनी बहन की एक चूचि को अपने मुँह से निकालकर कहा और उसकी दूसरी चूचि को अपने मूह में भर लिया।

"ओहहहहह भैया अब दर्द बिलकुल नहीं है। आप वहां पर कुछ करो ना" शीला ने अपने भाई के सर को पकडकर अपनी चूचि पर दबाते हुए अपने चूतड़ों को वेसे ही उत्तेजना में उछालते हुए बोली।

नरेश अपनी बहन की बात सुनकर अपनी मुँह को उसकी चुचियों से हटा दिया और अपनी बहन की टांगों को पकडकर अपने आधे लंड से ही हलके धक्कों के साथ चोदने लगा।

"ओहहहहह आहह भैया" शीला अपने भाई के लंड को अपनी चूत में रगड देता हुआ पाकर मज़े के मारे ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडों को उछाल उछाल कर अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेने लगी ।
 
शीला को अपने भाई का मोटा लंड बुहत ज़ोर की रगड दे रहा था । जिस वजह से शीला को इतना मज़ा आ रहा था की वह बुहत ज्यादा उत्तेजित होते हुए सिसक रही थी । नरेश ने अपनी बहन को इतना मजा लेकर चुदवाते हुए देखकर अपने धक्कों की रफ़्तार तेज़ कर दी और अपनी बहन की चूत में अपने लंड को तेज़ी के साथ अंदर बाहर करने लगा।

शीला जिसे अपने भाई के हलके धक्कों से ही इतना मज़ा आ रहा था। वह अपने भाई के लंड को अपनी चूत में इतनी तेज़ी से अंदर बाहर होता हुआ पाकर मज़े से पागल होने लगी । शीला का पूरा जिस्म अकडने लगा और वह अपने भाई के हर धक्के के साथ जोर से सिसकने लगी और अपने भाई को चूमने लगी।

नरेश समझ गया की उसकी बहन झरने वाली है। इसीलिए वह उसकी चूत में तेज़ी के साथ ज़ोर लगाकर धक्के मारने लगा। जिस वजह से हर धक्के के साथ उसका लंड उसकी बहन की चूत में और अंदर घूसने लगा । शीला को तो जैसे होश ही नहीं था वह बस झरने के बिलकुल क़रीब थी । इसीलिए उसका पूरा जिस्म बुहत ज़ोर से कांप रहा था और उसके मूह से अब सिसकियों की गूँज बढती ही जा रही थी।

"आआह्ह्ह्हह भैया ओहहहह मेरे अंदर से कुछ निकल रहा है ओह्ह्ह्हह्ह शीला ने बस इतना ही कहा उसकी आँखें मज़े से बंद हो गई और उसके चूतड़ बुहत ज़ोर से नरेश के लंड पर उछलने लगे । शीला की चूत से पानी की नदियां बहने लगी, नरेश अपनी बहन को झरता हुआ देखकर अपने लंड को पूरा निकालकर उसकी चूत में बुहत ज़ोर से पेलने लगा। जिस वजह से नरेश का लंड उसकी बहन के पानी बहाती गीली चूत में पूरा घुस गया ।
 
शीला ने कुछ देर तक यों ही मज़े से आहें भरते हुए झरने के बाद अपनी आँखें खोल दी । नरेश अपनी बहन की चूत में अब अपना पूरा लंड बुहत तेज़ी के साथ अंदर बाहर कर रहा था।

"दीदी कैसा लग रहा है" नरेश ने वैसे ही अपनी बहन को चोदते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह भैया मै बता नहीं सकती। बुहत मजा आया आप बुहत अच्छे हो" शीला ने अपने भाई की बात सुनकर सिसकते हुए कहा । नरेश ने अपनी बहन के नीचे से तकिया निकालते हुए उसकी टांगों के बीच आ गया ।

नरेश ने अपनी बहन की एक चूचि को अपने मूह में लेते हुए अपने लंड से उसकी चूत में बुहत तेज़ी के साथ धक्के मारने लगा । शीला की चूत एक बार झरने के बाद अंदर से गीली हो चुकी थी । इसीलिए नरेश का लंड अब आसानी से उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था ।

शीला अपने भाई के हरक़तों से फिर से गरम होने लगी और अपनी टांगों को अपने भाई की कमर में लपेट दिया और अपने चूतडों को बुहत ज़ोर से उछालते हुए अपने भाई से चुदवाने लगी । नरेश १० मिनट तक ऐसे ही बेतहाशा अपना लंड अपनी सगी बहन की चूत में अंदर बाहर करते हुए अब हाँफते हुए झरने लगा।

नरेश के लंड से उसकी बहन की चूत में पिचकारियों की बारिश होने लगी । शीला भी अपने भाई का गरम वीर्य अपनी चूत में गिरते ही मज़े के मारे दूसरी बार झरने लगी, शीला ने इस बार झरते हुए अपने भाई की पीठ में अपने नाखूनों को गडा दिया और नरेश ने भी अपनी बहन की चूचि को अपने दांतों के बीच लेकर ज़ोर से काट दिया

दोनों भाई बहन ज़ोर से चीखते हुए झरने का मज़ा लेने लगे । कुछ देर बाद दोनों शांत होकर एक दुसरे से अलग हो गये, दोनों ने जल्दी से कपड़े पहन लिए क्योंकी दिन का वक्त था और किसी भी वक्त कोई आ सकता था।
 
शीला की नज़र अचानक बेड पर बीछी हुयी चादर पर खून की बूँदों पर पडी।

"भइया यह खून कहाँ से आया" शीला ने परेशान होते हुए कहा।

"दीदी जब कोई लड़की पहली बार इसे अंदर लेती है तो थोडा सा खून निकलता है तुम परेशान मत हो और अब कभी भी तुम्हारी चूत में से खून नहीं निकलेगा" नरेश ने शीला को समझाते हुए कहा ।

शीला नरेश की बात सुनकर कुछ शांत हुयी और वहां से जाने लगी।

"आह्ह्ह्ह भैया में ठीक तरीके से चल नहीं पा रही हू" शीला ने जैसे ही जल्दी से चलने की कोशिश की तो उसे अपनी टांगों के बीच बुहत दर्द महसूस हुआ और वह चीखते हुए बोली।

"दीदी आप ऐसा करो। मैं यह चादर बदल देता हूँ तुम यहीं पर सो जाओ। मैं कोई पेन किलर टेबलेट लाता हूँ अगर कोई पूछे तो कहना तुम्हें मोच आ गयी है" नरेश ने अपनी बहन की बात सुनकर उसे सलाह देते हुए कहा।

"ठीक है भैया पर जल्दी से कोई टेबलेट लाओ" शीला ने अपनी भाई को देखते हुए कहा ।

"अभी लाया आप सो जाओ यहां" नरेश ने जल्दी से चादर बदलते हुए कहा । शीला वहीँ पर सो गयी और नरेश कमरे से निकल कर बाहर चला गया।

"दीदी उठो यह रही टेबलेट" थोड़ी ही देर में नरेश गोली लेकर वापस आ चुका था। उसने अपनी दीदी को उठाते हुए कहा।

शीला ने उठकर गोली खाली और फिर वहीँ लेट गई, ऐसे ही सारा दिन काम काज में ख़तम हो गया और सभी टेबल पर बैठकर रात का नाश्ता करने लगे । नाश्ता करने के बाद सभी अपने अपने कमरों में जाकर सोने की तैयारी करने लगे ।

रेखा की चूत अपने बेटे से चुदवाने के ख़याल से ही अभी से गीली हो रही थी, वह सोच रही थी की आज वह अपने बेटे से चुद्वायेगी ज़रूर मगर सताने के बाद ।मुकेश का हाल भी यही था। उसका लंड आज अपनी दीदी की चूत मिलने की ख़ुशी में ज़ोर से झटके खा रहा था।
 
दोस्तों आपलोगों के सहयोग के लिए बहुत बहुत थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
दोनों पति पत्नी आते ही बिना एक दुसरे से बात किये उल्टा होकर सोने का नाटक करने लगे, मनीषा अपने कमरे में अपने भाई का इंतज़ार कर रही थी । उसकी चूत भी अपने भाई से चुदवाने के ख्याल से ही रस टपका रही थी । वह सोच रही थी आज वह अपने भैया के लंड का सारा डर मिटाकर उससे ऐसे चुदवायेगी की वह भी सारी उम्र याद करेगा की उसकी बहन भी कोई चीज़ थी ।

विजय और नरेश भी अपने कमरे में करवटे ले रहे थे की अचानक उनका दरवाज़ा खटकने लगा, विजय ने जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने शीला खडी थी । शीला नाइटी पहने हुए थी।

"विजय भैया क्या हाल है जाओ तुम्हारी बहन तुम्हारा इंतज़ार कर रही है" शीला ने अंदर दाखिल होते ही जानबूझकर अपना जिस्म विजय से रगडते हुए वहां से अंदर दाखिल हो गई और विजय को देख कर मुस्कराते हुए कहा।

विजय का लंड शीला के जिस्म के छुने से उचलने लगा और विजय जल्दी से वहां से निकलकर अपनी बहन के कमरे में आ गया । विजय जैसे ही कंचन के कमरे में दाखिल हुआ उसने देखा की कंचन बेड पर पूरे कपड़े पहन कर लेटी हुयी थी।

"भइया मैं आज कुछ नहीं कर पाऊँगी। मुझे अभी तक बुहत दर्द है और साथ में बुखार भी हो गया है" कंचन ने अपने भैया को वहां पर देखकर कहा।

"दीदी फिर बुलाया क्योँ" विजय ने मुँह बनाते हुए कहा।

"भइया मैंने नहीं बुलाया। उस शीला को अपने भाई के साथ सोना था इसीलिए उसने तुझे यहाँ भेज दिया" कंचन ने अपने भैया को देखते हुए कहा।

"ठीक है दीदी आप सो जाओ कोई बात नही" विजय ने अपनी बहन की बात सुनकर कहा । कंचन अपने भाई की बात सुनकर अपना मूह दुसरे तरफ करके सो गयी।

मुकेश ने देखा की उसकी बीवी सो गयी है तो वह अपने बेड से जल्दी उठकर अपने कमरे से निकल गया ।

रेखा जो सोने का नाटक कर रही थी । वह अपने पति को उठता हुए देखकर हैंरान रह गयी और खुद भी उठकर चुप चाप बाहर निकलते हुए देखने लगी की उसका पति कहाँ जा रहा है । रेखा ने देखा की उसका पति सीधे मनीषा के कमरे में घुस गया, रेखा का हैंरानी के मारे बुरा हाल था । उसके माथे से पसीना निकल रहा था।
 
रेखा खुद भी मनीषा के कमरे के पास जाते हुए इधर उधर देखने लगी । उसे एक खिड़की नज़र आ गयी जहाँ से अंदर का नज़ारा साफ़ दिखाई दे रहा था । मुकेश जैसे ही अपनी बहन के कमरे में दाखिल हुआ मनीषा उसके गले लग गयी और दोनों के होंठ एक दुसरे के होंठो से मिलकर एक दुसरे का होंठो का रस चूसने लगे ।

रेखा अंदर का नज़ारा देख कर हैंरान और गरम हो गयी, उसका हाथ अपने आप उसकी नाइटी के अंदर जाकर अपनी पेंटी के ऊपर से ही अपनी चूत को सहलाने लगा और वह अंदर देखने लगी । मनीषा और मुकेश ने कुछ देर तक एक दुसरे के होंठो को चूसने के बाद एक दुसरे से अलग होते हुए अपने अपने कपडे उतारने लगे ।

दोनों भाई बहन अपने कपडे उतारने के बाद बिलकुल नंगे होकर फिर से एक दुसरे से लिपट गए । मुकेश ने अब मनीषा के काँधे को चूमते हुए नीचे होता हुआ उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को चूसने लगा।

"आह्ह्ह्ह भैया कैसा लग रहा है आपको अपनी बहन की चुचियों का स्वाद" मनीषा ने अपने भाई का मुँह अपनी चुचियों पर पडते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा जो रेखा को अच्छी तरह से सुनायी दे रहा था।

"दीदी बुहत मीठा है दिल कर रहा है इन्हे अपने दांतों से चबा दूँ" मुकेश ने अपनी दीदी के एक चूचि को अपने मुँह से निकालते हुए कहा और उसकी दूसरी चूचि को पूरा अपने मुँह में भर लिया, मुकेश ने अपनी बहन की चूचि को ज़ोर से चूसने के बाद अपने मुँह से निकालते हुए उसकी दोनों चुचियों को ऊपर से ही अपने दांतों से काटने लगा ।

"उईई भैया क्या कर रहे हो निशान हो जाएंगे" मनीषा ने चीखते हुए कहा।

तो हो जाने दो ना" मुकेश ने वैसे ही अपनी दीदी की चुचियों को काटते हुए कहा।

"पति देखेगा तो क्या कहूँगी" मनीषा ने अपने भाई के लंड को अपने हाथ में लेते हुए कहा जो पूरा तनकर झटके खा रहा था ।

"आह्ह्ह्ह कह देना की तुम्हारे भाई ने इन्हें काट दिया है" मुकेश ने अपने लंड पर अपनी बहन का हाथ पडते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

"भइया आप भी न अगर उन्होने ने गुस्से में मुझे छोड दिया तो" मनीषा ने अपने भाई के लंड को वैसे ही सहलाते हुए कहा।
 
" तो मेरे पास आ जाना सारी ज़िंदगी अपने भाई के लंड से चुद्वाती रहना" विजय ने अब नीचे होते हुए घुटनों के बल बैठते हुए कहा । ऐसा करते हुए मनीषा को अपने भाई का लंड अपने हाथों से छोडना पडा, मुकेश ने नीचे बैठकर अपनी बहन की चूत को अपने नाक से सूँघते हुए अपने होंठो से चूमने लगा ।

"हाहहह भाई अंदर कुछ हो रहा है आपकी जीभ नहीं इसे आपका लंड चाहिए। दोपहर से आपकी जीभ के लगने से हमारी चूत फडक रही है" मनीषा ने अपने भाई को बालों से पकडकर अपनी चूत पर दबाते हुए कहा ।रेखा का पूरा जिस्म अपने पति और उसकी बहन की बातों से गरम होकर तप चूका था और अब इस बात को सुनकर वह ज्यादा हैंरान हो गई की दिन को भी वह दोनों आपस में कुछ कर चुके थे।

"ठीक है दीदी आपकी चूत को अब अपने लंड से ही शांत करता हूँ" मुकेश ने अपनी बहन की बात सुनकर सीधा खडा होते हुए उसे अपने बाहों में उठाकर सीधा बेड पर लिटा दिया, रेखा का हाथ अब उसकी पेंटी के ऊपर बुहत ज़ोर से चलने लगा था । मुकेश ने अपनी बहन की टांगों को उसके पेट पर रखते हुए अपना लंड उसकी गीली चूत पर घीसने लगा ।

"आह्ह्ह्ह भैया घुसाओ न क्यों तडपा रहे हो" मनीषा ने ज़ोर से सिसककर अपने चूतडों को उछालते हुए कहा।

"क्या घुसाउं दीदी" मुकेश ने वैसे ही अपनी बहन को तडपाते हुए कहा।

"भइया आप भी न मुझे अपने भाई का लंड अपनी चूत में चाहिए अब जल्दी से घुसाओ" मनीषा ने उत्तेजना के मारे ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा । मुकेश ने अपनी बहन के मुँह से यह सुनते ही अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखते हुए एक ही धक्के में पूरा उसकी चूत में घुसा दिया।

"आहहहह भैया ज़ोर से अपनी बहन को चोदो। ओहहहह फाड़ दो हमारी चूत को" मनीषा अपने भाई का लंड घुसते ही ज़ोर से सिसकते हुए चिल्लाने लगी ।

रेखा का सारा जिस्म अकड़कर झटके खाने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड दिया । रेखा ने झरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और अपने हाथ को ज़ोर से अपनी पेंटी पर रगडने लगी, रेखा ने जब अपनी आँखें खोली तो उसका पति अब भी अपनी दीदी को चोद रहा था ।

रेखा बुहत हैंरान थी की उसका पति उसे 5 मिनट से ज्यादा चोद ही नहीं पाता था और वह अपनी बहन को 10 मिनट से चोद रहा है । वह खडे खडे बुहत थक चुकी थी। इसीलिए वह वहां से जाने लगी, विजय भी कमरे से निकलकर बाहर आ गया और सोचने लगा की उसकी माँ अब तक क्यों नहीं आई तभी उसकी नज़र अपनी माँ पर पडी वह ख़ुशी से उछल पडा।
 
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