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ओहहहहह भैया मगर आपका यह तो बुहत लम्बा और मोटा दिख रहा है। यह हमारे छोटे से छेद में कैसे घुसेगा" शील ने यों ही अपने भाई के अंडरवियर में उछलते हुए लंड की तरफ देखते हुए बोली।
"दीदी यह मोटा और लम्बा है तभी तो आपके छेद की अच्छी तरह से सफायी करेंगा" नरेश ने अपनी दीदी की बात सुनकर अपने अंडरवियर को उतारते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह भैया आपका तो सच में बुहत मोटा और लम्बा है मगर है बुहत प्यारा" शीला ने अपने भाई के अंडरवियर के उतारने के बाद उसके लंड को अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"ओहहहह दीदी मुझे यह जानकार ख़ुशी हुयी की आपको यह पसंद आया" नरेश ने अपनी बहन का हाथ अपने नंगे लंड पर पड़ते ही जोर से सिसकते हुए कहा।
"भइया मगर यह इतना मोटा मेरे छोटे से छेद में कैसे घुसेगा। मुझे तो बुहत चिंता हो रही है" शीला ने अपने भाई के लंड से खेलते हुए अपनी परेशानी बताते हुए कहा।
"हा दीदी आप इसको अपने मुँह से गीला कर दो फिर देखो हम इसे आपके छेद में कैसे घुसाते हैं। तुम्हें चिंता करने की कोई ज़रुरत नही" नरेश ने अपने बहन को बालों से पकडकर उसका मुँह अपने लंड की तरफ झुकाते हुए कहा ।
नरेश ने शीला को बालों से पकड कर नीचे झुका दिया था। अब शीला का मुँह अपने भाई के खडे नंगे लंड के बिलकुल पास था । शीला ने एक आखिरी नज़र अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे पर डाली और अपनी जीभ निकालकर अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे को चाटने लगी ।
"हाहहह दीदी इस पर अच्छी तरह से जीभ घुमाओ" नरेश ने अपनी बहन की जीभ को अपने लंड पर पड़ने से ज़ोर सिसकते हुए कहा। अब शीला अपनी जीभ से अपने भाई के लंड को उसके सुपाडे से लेकर उसके आखरी हिस्से तक अपनी जीभ से चाट रही थी और नरेश मज़े से सिसकते हुए अपने बहन के बालों को सहला रहा था।
शीला ने अचानक अपना मूह खोलते हुए अपने भाई के लंड के मोटे गुलाबी सुपाडे को अपने मुँह में भर लिया और उसे धीरे धीर अपने होंठो से चूसने लगी,
"ओहहहहहह शहहहहह दीदी" नरेश शीला की इस हरकत से पूरा काँप उठा ।
नरेश ने कुछ देर तक अपने लंड को अपनी बहन के मूह में रखने के बाद अपना लंड वहां से निकाल दिया क्योंकी अगर वह अपना लंड कुछ देर तक और वहां रखता तो वह वहीँ पर झड़ जाता जो नरेश उस वक्त नहीं चाहता था।
"दीदी यह मोटा और लम्बा है तभी तो आपके छेद की अच्छी तरह से सफायी करेंगा" नरेश ने अपनी दीदी की बात सुनकर अपने अंडरवियर को उतारते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह भैया आपका तो सच में बुहत मोटा और लम्बा है मगर है बुहत प्यारा" शीला ने अपने भाई के अंडरवियर के उतारने के बाद उसके लंड को अपने हाथ में लेते हुए कहा।
"ओहहहह दीदी मुझे यह जानकार ख़ुशी हुयी की आपको यह पसंद आया" नरेश ने अपनी बहन का हाथ अपने नंगे लंड पर पड़ते ही जोर से सिसकते हुए कहा।
"भइया मगर यह इतना मोटा मेरे छोटे से छेद में कैसे घुसेगा। मुझे तो बुहत चिंता हो रही है" शीला ने अपने भाई के लंड से खेलते हुए अपनी परेशानी बताते हुए कहा।
"हा दीदी आप इसको अपने मुँह से गीला कर दो फिर देखो हम इसे आपके छेद में कैसे घुसाते हैं। तुम्हें चिंता करने की कोई ज़रुरत नही" नरेश ने अपने बहन को बालों से पकडकर उसका मुँह अपने लंड की तरफ झुकाते हुए कहा ।
नरेश ने शीला को बालों से पकड कर नीचे झुका दिया था। अब शीला का मुँह अपने भाई के खडे नंगे लंड के बिलकुल पास था । शीला ने एक आखिरी नज़र अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे पर डाली और अपनी जीभ निकालकर अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे को चाटने लगी ।
"हाहहह दीदी इस पर अच्छी तरह से जीभ घुमाओ" नरेश ने अपनी बहन की जीभ को अपने लंड पर पड़ने से ज़ोर सिसकते हुए कहा। अब शीला अपनी जीभ से अपने भाई के लंड को उसके सुपाडे से लेकर उसके आखरी हिस्से तक अपनी जीभ से चाट रही थी और नरेश मज़े से सिसकते हुए अपने बहन के बालों को सहला रहा था।
शीला ने अचानक अपना मूह खोलते हुए अपने भाई के लंड के मोटे गुलाबी सुपाडे को अपने मुँह में भर लिया और उसे धीरे धीर अपने होंठो से चूसने लगी,
"ओहहहहहह शहहहहह दीदी" नरेश शीला की इस हरकत से पूरा काँप उठा ।
नरेश ने कुछ देर तक अपने लंड को अपनी बहन के मूह में रखने के बाद अपना लंड वहां से निकाल दिया क्योंकी अगर वह अपना लंड कुछ देर तक और वहां रखता तो वह वहीँ पर झड़ जाता जो नरेश उस वक्त नहीं चाहता था।