रात का खाना खाने के बाद सभी लोग अपने अपने कमरों में जाकर सोने की तैयारी करने लगे । विजय और नरेश ने आईडिया बना लिया की किस तरह आज वह अपनी बहनों को एक दुसरे के सामने चुदते देखेंगे, इधर मनीषा भी सभी के सोने का इंतज़ार कर रही थी ताकी वह जल्द से जल्द अपने बापू की सेवा कर सके
"क्या बात है मेरी जान आज बुहत सुंदर लग रही हो" मुकेश ने रेखा को अपनी बाहों में भरते हुए कहा।
"आपको हमें देखने का टाइम कहाँ मिलता है" रेखा ने अपने पति से मूह बनाते हुए कहा।
"यार अब छोड़ो न इन बातों को तुम्हें तो पता है की मैं सारा दिन ऑफिस के कामों से थक जाता हुँ" मुकेश ने अपनी बीवी की नाइटी को उसके आगे से खोलते हुए कहा।
रेखा अपने पति का मूड ख़राब करना नहीं चाहती थी इसीलिए वह चुपचाप मुकेश के अंडरवियर में क़ैद उसके लंड को अपने हाथ से सहलाने लगी।
"आह्ह्ह्ह मेरी जान" मुकेश ने अपनी बीवी का हाथ अपने लंड पर लगते ही सिसकते हुए कहा। उसकी बड़ी बड़ी चुचियों से ब्रा को हटाते हुए उसकी एक चूचि को अपने मूह में भरकर चूसने लगा ।
रेखा का पूरा जिस्म अपनी चूचि को अपने पति के मुँह में जाने से गरम होने लगा और वह सिसकते हुए अपने हाथ से मुकेश के बालों को सहलाने लगी । मुकेश ने अपनी बीवी की दोनों चुचियों को जी भरकर चाटने के बाद सीधा होते हुए अपना अंडरवियर उतार दिया । और अपनी पत्नी की टांगों के बीच आते हुए उसकी पेंटी को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया।
रेखा की चूत अब उसके पति के सामने बिलकुल नंगी थी जिसमें से पानी की बूँदे निकल रही थी।
"आज तो बुहत ज्यादा गर्म हो रही हो मेरी जान" मुकेश ने अपनी बीवी की चूत को देखते हुए कहा और नीचे झुकते हुए उसकी चूत को चूम लिया ।
"आह्ह्ह्ह बुहत दिनों बाद आपने सही तरीके से हमें गरम किया है" रेखा ने सिसकते हुए कहा । रेखा अपने पति को उसकी दीदी के साथ रात को देख चुकी थी और उसके साथ सेक्स करते हुए उसे वह सब याद आ रहा था इसीलिए वह बुहत जयादा गरम हो रही थी । मगर वह इस वक्त अपने पति को कुछ नहीं कहना चाहती थी इसीलिए वह ऐसा कह रही थी।
मुकेश ने अपनी बीवी की टांगों को उसके घुटनों तक मोड़ दिया और नीचे झुकते हुए रेखा की चूत के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगा।
"आजहहह ओह्ह्ह्हह अपना वह डाल दो न क्यों तडपा रहे हो" रेखा ने अपने पति की जीभ से अपनी चूत को चूसने से तड़पते हुए कहा ।
"डालिंग अभी डालता हूँ आज तो तुम्हें इतना गरम देखकर मैं भी बुहत एक्साइटेडट हो गया हू" मुकेश ने अपनी पत्नी की चूत से अपना मुँह हटाते हुए कहा और अपना तना हुआ लंड उसकी चूत पर रखकर एक झटके के साथ उसकी चूत में पेल दिया।
"आहहह डार्लिंग आज तो तुम्हारी चूत बुहत ज्यादा गरम लग रही है और गीली भी" मुकेश ने अपने लंड को अपनी पत्नी की चूत में ज़ोर से आगे पीछे करते हुए कहा।
"ओहहहह ज़ोर से करो बुहत मजा आ रहा है आज आपका भी बुहत ज्यादा तना हुआ है" रेखा ने भी अपने पति की बता सुनकर अपने चूतडों को उछालते हुए बोली।
मुकेश अपनी पत्नी की बात सुनकर उसे बुहत ज़ोर से चोदने लगा । 5 मिनट बाद ही रेखा का जिस्म काम्पने लगा।
"आह्ह्ह्हह मैं आ रही हू" रेखा ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा । मुकेश अपनी पत्नी को इतना जल्दी झरता हुआ देखकर ख़ुशी से उसे बुहत तेज़ी के साथ पेलने लगा।
"आह्हः डार्लिंग ओह्ह्ह्हह आहहहः" रेखा का जिस्म झटके खाने लगा और वह अपने चूतडों को उछालते हुए मज़े से झरने लगी । रेखा की चूत झरते हुए सिकुड़कर अपने पति के लंड को ज़ोर से जकड लिया जिस वजह से मुकेश भी अपने आप को रोक नहीं पाया और ज़ोर से हाँफते हुए अपनी बीबी की चूत में झरने लगा।
"आह्ह्ह्ह डार्लिंग मैं भी आया" मुकेश झरते हुए ज़ोर से चिल्ला रहा था । मुकेश झरने के बाद अपनी बीवी के ऊपर ढेर हो गया।
"क्या हुआ जान थक गए क्या?" रेखा ने अपने पति को अपने ऊपर से हटाते हुए कहा।
"ओहहहह डार्लिंग तुम्हारी चूत का तो जवाब नहीं। झडते वक्त ऐसे सिकूड़ती है जैसे मेरे लंड को कोई हाथ से मसल रहा हो" मुकेश ने रेखा की साइड में लेटते हुए कहा।
"क्यों जान मनीषा दीदी की चूत झरते वक्त नहीं सिकूड़ती क्या" रेखा ने मुकेश की आँखों में देखते हुए कहा।
"क्या कहा?" मुकेष ने परेशान होते हुए कहा रेखा की बात सुनकर उसके चेहरे का रंग उड़ने लगा था।
"वही जान जो तुमने सुना" रेखा ने अपने पति के शॉकड हुए लंड को सहलाते हुए कहा ।
"तो रात को तुमने हमें देखा था?" मुकेश ने वैसे ही परेशानी वाली हालत में अपनी बीवी से कहा।
"अरे आप तो परेशान हो गये । मैं आपसे नाराज़ नहीं हू" रेखा ने सीधा होते हुए कहा और अपने पति के वीर्य से सने हुए सिकुड़े लंड को अपने मूह में ले लिया।
" आह्ह्ह्ह डार्लिंग तुम तो सच में महान हो" मुकेश अपने लंड को अपनी बीवी के मूह में जाते ही सिसकते हुए बोला।
"नही जान में महान नहीं हूँ मगर मेरी सोच कुछ अलग है मरद और औरत को अपनी जवानी का पूरा मजा लेना चाहिए जो वह किसी से भी ले सके" रेखा ने अपने पति का लंड अपने मुँह से निकालते हुए कहा और अपनी जीभ निकालकर उसे चाटने लगी ।
"ओहहहह मैं समझा नहीं क्या तुम भी किसी से" मुकेश ने सिर्फ इतना कहा।
"हाँ मेरी पति देव मगर मैं अपनी मर्यादा जानती हूँ इसीलिए मैंने घर से बाहर कुछ नहीं किया" रेखा ने सीधी होकर अपने पति की आँखों में देखते हुए कहा।
"घर में मगर किस से" रेखा की बात सुनकर मुकेश के लंड में हलचल होने लगी थी और उसने एक्साइटेडट होते हुए रेखा से पूछा।
"बापु, विजय और नरेश सब के लन्डों का मजा ले चुकी हूँ मैं" रेखा ने बड़ी बेशरमी से कहा।
"क्या कहा मुझे यकीन नहीं हो रहा है" रेखा की बात सुनकर मुकेश का लंड पूरी तरह तनकर झटके खाने लगा और उसने हैंरानी से अपनी बीवी की तरफ देखते हुए कहा ।
"जान इतना हैंरान क्यों हो रहे हो। अभी जो बात मैं तुम्हें बताने वाली हूँ तुम और ज्यादा हैंरान हो जाओगे" रेखा ने अपने पति के लंड को तना हुआ देखकर अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाकर उसे अपनी चूत के छेद पर सेट करते हुए बोली और उसपर अपने वजन के साथ बैठ गई ।
"आह्ह्ह्ह डार्लिंग अब इस से ज्यादा चौकाने वाली क्या बात है की तुम अपने ससुर बेटे भांजे सब से चुदवा चुकी हो" मुकेश ने अपना लंड अपनी बीवी की चूत में घूसने से सिसकते हुए उसकी चुचियों को अपने हाथों से दबाते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह जान तो सुनो तुम्हारी बड़ी बेटी अपने भाई विजय से तुम्हारी बहन अपने बेटे नरेश से और नरेश अपनी बड़ी बहन शीला को चोद चूका है" रेखा ने अपने पति के लंड पर ज़ोर से ऊपर नीचे होते हुए कहा।
"डालिंग मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा है" मुकेश ने अपनी पत्नी की बात सुनकर उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को बुहत ज़ोर से दबाते हुए कहा । रेखा की बाते सुनकर मुकेश का लंड लोहे की तरह सख्त और मोटा होता जा रहा था ।
"ओहहहह जान मेरी बाते सुनकर तुम्हारा लंड तो बुहत ज्यादा मोटा और सख्त होता जा रहा है" रेखा ने मज़े के मारे सिसकते हुए कहा।
"डारलिंग बस यही राज़ हैं या कुछ और भी है" मुकेश को रेखा की बातों से बुहत मजा आ रहा था इसीलिए उसने अपने चूतडों को उछालकर रेखा की बुर चोदते हुए कहा ।
"जान अब क्या सुनना चाहते हो तुम्हारी बहन बापू और विजय से भी चुदवाना चाहती है। हो सकता है अभी वह बापू से चुदवा ही रही हो" रेखा ने मस्ती में ज़ोर से उछलते हुए कहा । उसका जिस्म अब अकडने लगा था।
"आजहहहह डार्लिंग तुम्हारी बाते सुनकर मेरा लंड झरने वाला है" मुकेश ने रेखा की बात सुनकर ज़ोर से सिसकलते हुए कहा।
"जान मैं भी आने वाली हूँ बस एक मिनट" रेखा अपने पति की बात सुनकर उसके लंड पर पागलोँ की तरह कुदने लगी।
"आह्ह्ह्ह ओहह ओहहहहहह जान" कुछ ही देर में रेखा का जिस्म झटके खाते हुए झरने लगा और उसकी चूत ने फिर से सिकुडते हुए अपने पति के लंड को दबा दिया।
"आआह्ह्ह डार्लिंग ओह्ह्ह्हह" मुकेश भी ज़ोर से चिल्लाते हुए झरने लगा । रेखा अपनी आँखें बंद किये हुए झर रही थी और झरते हुए अपने पति के लंड पर ज़ोर से उछल रही थी, मुकेश ने भी झरते हुए अपनी आँखें बंद कर ली थी और उसके लंड से आज जाने कितनी देर तक वीर्य की बूँदे निकल कर उसकी पत्नी की चूत में गिरने लगी।
कुछ ही देर में दोनों पति पत्नी शांत होकर एक दुसरे से लिपटे हुए पड़े थे । मुकेश का लंड सिकुड़ कर उसकी पत्नी की चूत से निकल चूका था।
"ओहहहह डार्लिंग आज तो तुमने मुझे निचोड ही दिया" मुकेश ने अपनी पत्नी के होंठो को चूमते हुए कहा ।
"आप ही तो अपनों के बारे में सुनकर उत्तेजित हो गये थे इसीलिए तो आज पहली बार आपने मुझे भी शांत कर दिया है" रेखा ने अपने पति की बात सुनकर हँसते हुए कहा । दोनों पति पत्नी बुहत थक चुके थे इसीलिए वह दोनों कुछ ही देर में ऐसे ही नंगे एक दुसरे की बाहों में नींद की आग़ोश में चले गये।
विजय और नरेश प्लान के मुताबिक अपने कमरे से उठते हुए अपनी बहनों के कमरे में जाने लगे।
"भइया आप और नरेश भाई आप दोनों यहाँ कैसे" कंचन जो अभी बाथरूम से फ्रेश होकर निकली थी बोलू। वह नाईट गाऊन लपेटे हुए थी उसने अपने दोनों भाइयों को एकसाथ देखकर हैंरान होते हुए कहा ।
"कंचन ऐसे ही हम बोर हो रहे थे तो सोचा आज साथ बैठकर बातें करते है" विजय ने दरवाज़ा अंदर से बंद करते हुए कहा।
"बिल्कुल सही सोच भाई। हमने एक साथ कभी बात ही नहीं की है" विजय की बात सुनकर शीला जो बेड पर नाईट गाऊन में लेटी हुयी थी उठकर खुश होते हुए बोली।
अगला अपडेट बहुत ही धमाकेदार होगा।जिसमे ग्रुप सेक्स और बहनों की अदला बदली होनेवाली है।आप सभी को कमेंट के लिए थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
नरेश सीधा जाकर शीला के साथ बेड पर बैठ गया । विजय भी जाकर बेड की दूसरी तरफ बैठ गया, कंचन अपने बाल सुखाने के बाद अपने भाई विजय के पास जाकर बैठ गयी और चारों आपस में बातें करने लगे ।बातें करते हुए विजय ने अचानक अपने हाथ को कंचन की जाँघ पर रख दिया ।
कंचन ने फ़ौरन विजय का हाथ पकड़कर दूर झटक दिया।
"अरे यार अब हम सब से कुछ छुपा तो नहीं है फिर हम एक दुसरे से क्यों शर्मा रहे हैं ।चलो खुलकर एन्जॉय करो" नरेश ने कंचन की तरफ देखते हुए अपना हाथ शीला की जाँघ पर रखकर उसकी जाँघ को सहलाते हुए कहा।
"नरेश सही कह रहा है दीदी अब हमें एक दुसरे से नहीं शरमाना चाहिये" विजय ने कंचन को कमर से पकडकर अपनी गोद में बिठाते हुए कहा।
"छोड़ो बदमाश तो आप दोनों इसीलिए यहाँ आये हो" कंचन ने अपने भाई की गोद से उठते हुए शीला के पास जाकर बैठते हुए कहा ।
"हाँ दीदी यह बेशर्म इसीलिए यहाँ आये हैं" शीला ने भी नरेश का हाथ अपनी जाँघ से हटाकर उसे धक्का देते हुए विजय की तरफ करते हुए कहा।
"यार हमने क्या गलत कहा है" विजय ने दोनों लड़कियों की तरफ हैंरानी से देखते हुए कहा।
"हाँ विजय सही कह रहा है । तुम दोनों ज़्यादा नखरे मत करो" नरेश ने भी विजय का साथ देते हुए कहा।
"वाह भाई उल्टा चोर कोतवाल को डांटे" कंचन ने दोनों की बात सुनने के बाद उसकी तरफ देखते हुए कहा और शीला और कंचन ज़ोर से हंसने लगीं ।
"च तो आप दोनों ऐसे नहीं मानेंगी?" विजय ने अपनी शर्ट उतारते हुए कहा।
"अरे भैया कुछ तो शर्म करो। शीला दीदी भी यहीं है" कंचन ने विजय का इरादा समझकर हैंरान होते हुए कहा।।
"विजय तुम सही कह रहे हो यह ऐसे नहीं मानेंगी" नरेश ने भी अपनी शर्ट उतारते हुए कहा।
"दीदी लगता है दोनों पागल हो गये है" शीला ने कंचन की तरफ देखते हुए कहा।
"हाँ हम पागल हो गये है" विजय ने कहा और अपनी पेण्ट को भी उतार दिया ।
नरेश ने भी अपनी पेण्ट को उतार दिया।
"देखो आप दोनों ऐसे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते अगर तुम दोनों से कुछ ज़बर्दस्ती करने की कोशिश की तो हम चिल्ला देंगी" कंचन ने दोनों लड़कों को देखकर उन्हें वॉर्निंग देते हुए कहा।
हाँ दीदी आप सही कह रही हैं हम चिल्ला देंगे" शीला ने भी कंचन का साथ देते हुए कहा।
"तो चिल्लाओ किसने रोका है" विजय ने आगे बढ़कर कंचन की नाइटी को पकडकर ज़ोर से खींचते हुए कहा। । कंचन की नाइटी बुहत पतली थी विजय के ज़ोर देने पर वह फटकर कंचन के जिस्म से अलग हो गई ।
"देखो भाई मैं सच कह रही हूँ । मैं चिल्ला दूंगी मुझे छोड दो" कंचन ने अपने हाथों से अपनी बड़ी बड़ी चुचियों को छुपाते हुए कहा । कंचन की नाइटी उतरने के बाद उसकी बड़ी बड़ी चुचियाँ उसकी ब्रा में ही आधी नंगी होकर विजय और नरेश के सामने आ गयी थी। जिन्हें वह अपने हाथों से ढकने की कोशिश कर रही थी।
"नरेश यह सिर्फ धमकियाँ दे रही हैं कुछ नहीं करेंगी। आप भी शीला दीदी की नाइटी को उतारो। साले ऐसे क्या मेरी दीदी के जिस्म को घूर रहे हो" विजय ने नरेश को चुपचाप खडे कंचन को घूरता हुआ देखकर उसे टोकते हुए कहा।
"हाँ भैया अभी उतारता हूँ" नरेश ने विजय की बात सुनकर अपनी नज़रों को कंचन के जिस्म से हटाते हुए कहा ।
"नही भैया मेरी नाइटी को मत फाड़ना। मेरे पास एक ही है" शीला ने नरेश को अपनी तरफ आता हुआ देखकर चिल्लाते हुए कहा।
"दीदी फिर क्या हुआ वैसे भी अब आपको हर रात नंगा ही सोना पडेगा" नरेश ने शीला की तरफ बढते हुए मुसकुराकर कहक़।
"भइया एक मिनट रुको।इसे मैं खुद उतार देती हूँ" अचानक शीला ने नरेश से कहा ।
"दीदी आप क्या कह रही हो" कंचन ने शीला की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
"दीदी हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है" शीला ने कंचन की तरफ देखते हुए कहा।
"दीदी यह हुयी न बात आप कंचन से ज्यादा चालाक है" विजय ने शीला की तारीफ करते हुए कहा।
"विजय तुम्हें तो मैं देख लूंग़ी" कंचन ने विजय की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
"दीदी आप गुस्से में कितनी अच्छी लगती हो। मैं भी तो आपको देखने दिखाने आया हूँ" विजय ने अपनी बहन की बात सुनकर हँसते हुए कहा ।
"दीदी आप अपनी नाइटी जल्दी से उतार दो। यह दोनों बहन भाई आपस में ऐसे ही प्यार करते है" नरेश ने शीला को चुप खडा देखकर कहा । शीला नरेश की बात सुनकर अपनी नाइटी को उतारने लगी।
"नरेश शीला दीदी का जिस्म भी कुछ कम नहीं है इसे देखकर तो मेरा मन ख़राब हो रहा है" विजय ने शीला की नाइटी उतरने के बाद उसकी तरफ घूरते हुए कहा।
"थैंक्स यार पर मुझे तो कंचन दीदी का भरा हुआ जिस्म देखकर कुछ हो रहा है" नरेश ने कंचन की तरफ देखते हुए कहा।
"चुप हो जाओ तुम दोनों क्या कह रहे हो" कंचन ने अचानक गुस्से से चिल्लाते हुए कहा।
"नरेश अभी तो दोनों को हमने पूरा नंगा नहीं देखा है। पूरा जिस्म देखने के बाद ही पता चलेगा की कौन ज्यादा ख़ूबसूरत है" विजय ने कंचन के चिल्लाने की कोई परवाह न करते हुए नरेश से कहा ।
"हाँ विजय तुमने सही कहा । चलो जल्दी से इनके कपडे उतारते है" नरेश ने विजय की बात सुनकर हँसते हुए कहा और दोनों अपनी बहनों की तरफ बेड की तरफ बढ़ने लगे।
"ठहरो तुम दोनों हमें थोडा टाइम दो" अचानक शीला ने चिल्लाते हुए कहा।
"हम्म्म्म शीला तुम बुहत चालाक हो । जल्दी से कंचन को समझाओ जब तक हम बेड पर लेटते हैं" विजय ने शीला की बात सुनकर कहा और नरेश के साथ बेड पर जाकर बैठ गया।
"कंचन दीदी यह दोनों वैसे भी मानने वाले नहीं हैं । हमें इनकी बात माननी होगी" शीला ने कंचन को समझाते हुए कहा ।
"दीदी यह गलत कर रहे है" कंचन ने गुस्सा करते हुए कहा।
"कंचन तुम कुछ ज्यादा ही नखरे दिखा रही हो । तुम भी तो मजा लेना चाहती थी। इसी तरह वह भी मजा लेने के लिए यह सब कर रहे है" शीला ने कंचन की बात सुनकर अपना मुँह बनाते हुए कहा।
"लेकिन दोनों के सामने मुझे नंगा होने में शर्म आ रही है" कंचन ने शीला की बात सुनकर कहा।
"दीदी वह दोनों हमारे भाई हैं और वैसे भी वह हमें आधा नंगा तो देख चुके हैं आओ अब शर्म छोड़ो" शीला ने कंचन का हाथ पकडते हुए बेड की तरफ ले जाते हुए कहा ।
"नरेश लगता है वह दोनों मान गई" विजय ने दोनों को बेड की तरफ आता हुआ देखकर खुश होते हुए कहा।
"शीला क्या हुआ तुम दोनों ने क्या फैसला किया?" नरेश ने दोनों के बेड के पास आते ही सवाल किया।
"हम दोनों राज़ी हैं मगर हमारी भी एक शर्त है जब तक हम नहीं कहेंगी आप दोनों हमें हाथ नहीं लगाओगे" कंचन ने इस बार बोलते हुए कहा।
"ये क्या शर्त हुई" विजय ने बीच में बोलते हुए कहा।
"हाँ हमें मंज़ूर है तुम दोनों जल्दी से नंगी हो जाओ" नरेश ने विजय की बात को काटते हुए कहा ।
"नरेश यह ज़रूर कोई चालाकी कर रही है" विजय ने फिर से नरेश से कहा।
"अरे यार इस में कौन सी चालाकी हो सकती है । तुम चुप हो जाओ" नरेश ने विजय को डाँटते हुए कहा । विजय को मजबूरन नरेश के सामने चुप होना पडा।
"शीला दीदी पहले आप अपने कपड़े उतारिये" कंचन ने शीला की तरफ देखते हुए कहा।
"दीदी आप मेरे ब्रा के हुक खोल दें" शीला ने कंचन की बात सुनकर अपनी पीठ को कंचन की तरफ करते हुए बोली । कंचन शीला की ब्रा को अपने हाथों से खोलने लगी, विजय की हालत शीला की तरफ देखते हुए खराब होती जा रही थी ।
कंचन ने ब्रा के हुक खोलकर शीला की ब्रा को उसके जिस्म से हटा दिया । शीला की ब्रा तो उतर गयी मगर उसकी पीठ बेड की तरफ होने की वजह से विजय को कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था।
"शीला अब सीधी हो जाओ। क्यों इतना नखरा कर रही हो" नरेश को कंचन का नंगा जिस्म देखने की जल्दी से जिस वजह से उसने शीला को टोकते हुए कहा।
शीला अपने भाई की बात सुनकर सीधा होने लगी । शीला सीधा तो हो गई मगर उसके हाथ उसकी चुचियों के सामने थे।
"शीला दीदी अपने हाथ तो हटाओ ना" विजय से रहा नहीं गया और उसने शीला को देखते हुए कह दिया,
"शीला दीदी अब हाथ हटाओ न देख नहीं रही हो साला की तुम्हें देखने के लिए मरा जा रहा है" नरेश ने अपनी बहन को देखते हुए कहा ।
"भइया मुझे बुहत शर्म आ रही है" शीला ने अपना सर नीचे करते हुए कहा।
"यार तुम अपनी आँखों को बंद कर लो फिर तुम्हें शर्म नहीं आएगी" नरेश ने अपनी बहन को सलाह देते हुए कहा।
"ठीक है भइया" शीला ने अपने भाई की बात मानते हुए अपनी आँखों को बंद करते हुए अपने दोनों हाथों को अपनी चुचियों से हटाकर अपनी आँखों पर रख दिये ।
"क्या यार तेरी बहन की चुचियां तो बुहत मस्त है मेरा दिल तो इन्हें छुने का हो रहा है" विजय ने शीला की चुचियों के नंगा होते ही उत्तेजना के मारे शीला की तरफ देखते हुए कहा।
"साले तुम्हें किसने रोका है आ ज़रा नज़दीक से देख ले" नरेश ने अपनी बहन के बाज़ू को पकडते हुए उसे बेड पर बिठाते हुए कहा ।
शीला अपने बाज़ू को खींचने से लडख़ड़ाती हुयी बेड पर गिर गयी और उसके दोनों हाथ उसकी आँखों से हटी गये।
"नरेश भैया आप उसकी इजाज़त के बिना उसे नहीं छु सकते" कंचन ने अचानक चिल्लाते हुए कहा।
"सॉरी दीदी मगर जब तक आप दोनों पूरी नंगी नहीं हो जाती हमें अपने हाथों का इस्तेमाल तो करना पडेगा" कंचन की बात सुनकर विजय ने मुस्कराते हुए कहा ।कंचन अपने भाई की बात सुनकर चुप हो गयी,
"भइया आप बुहत बेशरम हो गये हो । अपनी बहन का नंगा जिस्म अपने दोस्त को दिखाते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती" शीला ने अपनी आँखें खोलकर नरेश को डाँटते हुए कहा ।
"शीला दीदी मैं कोई पराया थोडे हूँ जैसे यह तुम्हारा भाई है वेसे में भी हूँ" विजय ने शीला की बात सुनकर उसे समझाते हुए कहा।
"पता है मुझे तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो" शीला ने विजय को टोकते हुए कहा।
"अरे दीदी आप समझदार हो । हम जीतनी शर्म कम करेंगे उतना ज्यादा मजा ले पाएँगे" विजय ने शीला के बिलकुल नज़दीक आते हुए कहा ।
"क्या चाहते हो भैया। हमारी चुचियों को तो ऐसे घूर रहे हो जैसे खा ही जाओगे" शीला ने विजय को अपनी चुचियों की तरफ घूरता हुआ देखकर कहा।
"मेरी तो चाहत कब से इन्हें खाने का है मगर मैं इन्हें छु नहीं सकता" विजय ने अपनी जीभ को निकालकर अपने होंठो पर फिराते हुए कहा।