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परिवार(दि फैमिली) complete

कोमल का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था और अपने दादा के हाथ के अहसास से ही उसकी टाँगें अपने आप खुल चुकी थी।

"बेटी इसका मतलब तुम्हारी चूत को आज तक तुम्हारे सिवा किसी ने नहीं छुआ है" अनिल ने अचानक अपने हाथ को कोमल की टांगों के बीच ले जाकर उसकी फूली हुई कच्ची चूत को सहलाते हुए कहा ।बेटी अपनी टॉप और स्कर्ट उतार दो ना।

नहीं दादाजी मुझे बहुत शरम आ रही है कहते हुए कोमल ने अपना सर झुका लिया।

अनिल ने कोमल को सहलाते हुए उसके टॉप को उतार दिया।कोमल की अनछुई चूचियाँ एक छोटी सी ब्रा में कैद थी जिसे अनिल ने उतार दिया।अब अनिल के सामने एक कच्ची कली की खिलती हुई चूचियाँ थी जो अभी पूरी जवान भी नहीं हुई थी।उसकी सुंदरता को देखकर अनिल का लंड उछलने लगा।इधर अनिल के माथे पर पसीने की बुँदे आ गई।जब अनिल का हाथ पहली बार कोमल की अधखिली चूचियों पर पड़ा तो कोमल मस्ती में सिसियाने लगी और उसके हाथ दादाजी के लंड पर कस गई।

अब अनिल ने अपना सर झुकाया और कोमल की एक चूची को मुँह में भर लिया।

कोमल की चूत से पानी निकलने लगी।उतेज़ना से उसका बुरा हाल हो गया।वह जोर जोर से सिसकारी भरने लगी।इधर अनिल एक बच्चे की तरह अपने तीन गुनी कम उम्र की लड़की की मासूम चूचियों को चूस रहा था।काफी देर तक अनिल अपनी पोती की कच्ची चूचियों को चूसता रहा जैसे उसमे से दूध निकालने की कोशिश कर रहा हो।

कोमल के निप्पल पुरे तन गए थे।वह गरम हो गई थी जिसका लाभ उठाकर अनिल ने अपनी पोती के स्कर्ट और उसकी पेंटी उतार दिया।अब उसके सामने

एक खिलती हुई कच्ची कली पूरी नंगी अपने दादा के सामने थी।कोमल की चूत बिलकुल चिकनी और फूली हुई थी । उसमे सिर्फ हल्के बाल आने अभी शुरू हुए थे।उसकी बुर की क्लिट एकदम टाइट थी।अनिल कोमल की चूत देखकर इतना गरम हो गया की वह कोमल की चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा।कुछ ही देर कोमल की कुँवारी चूत चाटने पर कोमल की आँखे बंद हो गई।

"आहहहहह इसशहहहह ओह्ह्ह्हह दादू" अचानक कोमल की आँखें बंद हो गई और उसने अपने एक हाथ से अनिल के लंड को ज़ोर से सहलाते हुए दुसरे हाथ से उसके हाथ पर रखकर उसे अपनी चूत पर दबा दिया। कोमल कुछ देर तक वैसे ही आँखें बंद करते हुए झडती रही और अपने दादा के लन्ड को अपने कोमल मुलायम हाथों से लण्ड को सहलाती रही।कोमल को झड़ता देखकर अनिल उसके कुँवारी चूत के नमकीन पानी को पीता रहा और वह भी उतेजना के मारे झड़ने लगा।कोमल का पूरा हाथ गन्दा हो गया।

"दादा जी हमें माफ़ कर दो । यह सब ठीक नहीं है" कोमल ने पूरी तरह झडने के बाद जैसे ही अपनी आँखें खोली तो उसे होश आया की वह मज़े के चक्कर में बुहत आगे निकल चुकी है। इसीलिए उसने अपने हाथ को अनिल के लंड से हटाते हुए वहां से उठकर जाने लगी ।

"बेटी तुम किसी बात की चिंता मत करना। मैं यह सब किसी को नहीं बताऊंगा। जब तुम्हारा दिल करे यहाँ पर आ जाना मैं तुम्हारी मर्ज़ी के सिवा कुछ नहीं करूंगा" अनिल ने कोमल को जाता हुआ देखकर उसकी तरफ देखते हुए कहा । कोमल ने अपने दादा की बात सुन ली मगर उसने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चलि गयी ।
 
कोमल वहां से जाते हुए अपने कमरे में आ गयी।

"दीदी तुम आ गयी जल्दी से बताओ क्या हुआ?" पिंकी ने कोमल के बेड पर बैठते ही उसके साथ चिपककर बैठते हुए कहा।

"क्या बताऊँ दीदी तुम्हें?" कोमल ने पिंकी की तरफ शरारत से देखते हुए कहा ।

"दीदी अब छोड़ो भी और बताओ न तुमने नाना के साथ इतनी देर क्या किया?" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर उसकी आँखों में देखते हुए कहा । कोमल ने पिंकी की बात सुनकर उसको बालों से पकडकर अपने होंठ को उसके होंठो पर रख दिया और पिंकी के होंठो को ज़ोर से चूसने लगी ।

"हाहहह दीदी क्या हुआ तुम्हें तुम भी ना" कुछ देर बाद जैसे ही कोमल ने पिंकी को छोड़ा उसने बुहत ज़ोर से हाँफते हुए कोमल से कहा । कोमल ने अनिल के साथ हुयी एक एक बात पिंकी को बता दी।

"दीदी मुझे आपकी बातों का एतबार नहीं हो रहा है क्या नाना जी भी इतने गंदे है" कोमल की बात सुनकर पिंकी ने हैंरान होते हुए कहा ।

"अरे पगली यह गन्दा वन्दे कुछ नहीं होता बस हर मरद को अपने मज़े के लिए एक औरत की ज़रुरत होती है और जब मरद के सामने कोई हमारे जैसी जवान कच्ची कली हो तो वह यह नहीं सोचता की वह उसकी बेटी या बहन है बस उसे उसकी जवानी का मजा लेने की चिंता होती है" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा ।

"दीदी शायद आप सच कह रही हैं तभी तो नाना ने तुम्हारा पूरा फ़ायदा उठाया" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर कहा।

"पिंकी दीदी वैसे एक बात है मजा तो मुझे भी बुहत आया मगर मैं उनका लम्बा और मोटा लंड देखकर डर गयी थी इसीलिए आगे नहीं बढी" कोमल ने पिंकी से चिपकते हुए कहा ।

"कोमल दीदी एक बात पूछूँ?" पिंकी ने कोमल की तरफ देखते हुए कहा।

"हाँ दीदी कहो क्या बात है" कोमल ने पिंकी की बात सुनकर कहा।

"वो दीदी आपने जब नाना के लंड को अपने हाथ में लिया तो आपको कैसा लगा था" पिंकी ने कोमल की आँखों में निहारते हुए कहा ।

"पिंकी दीदी बस पूछो मत जब मैंने दादा के लंड को छुआ तो वह बुहत ज्यादा गरम और सख्त था। उसे छूते ही मेरे पूरे शरीर में अजीब किस्म की सिहरन होने लगी और मुझे अपनी चूत में च्यूटी के काटने का अहसास होने लगा" कोमल ने पिंकी की बात सुनकर उसके साथ चिपककर उसे गले लगाते हुए कहा ।

"दीदी एक बात और है वह मैंने सुना है मरद जब औरत को छूता है तो बच्चा होता है अब अगर तुम्हें बच्चा हो गया तो" पिंकी ने मासूमियत से कोमल की तरफ देखते हुए कहा।

"पगली बच्चा ऐसे ही नहीं होता है मरद जब लड़की की चूत में लंड डालकर अपना वीर्य अंदर गिराता है तभी बच्चा होता है" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा ।
 
कोमल दीदी आपको यह सब कैसे पता चला" पिंकी ने हैरान होते हुए कहा।

"दीदी वह मुझे दादा ने ही बताया था" कोमल ने पिंकी को जवाब देते हुए कहा।

"हम्म्म्म कोमल दीदी फिर तुमने पूरा मजा क्यों नहीं लिया" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर उसे चिढाते हुए कहा।

"पिंकी दीदी दादा का बुहत ही बड़ा और मोटा था उस फिल्म वाले की तरह। मैं डर गयी थी की वह मेरी चूत की छोटी सी छेद में कैसे जाएगा" कोमल ने पिंकी को अपनी चिंता के बारे में बताते हुए कहा ।

"कोमल दीदी नाना ने तुम्हें इतना बताया है फिर इस बारे में तुमने क्यों नहीं पुछा की हमारी चूत का छेद बुहत छोटा है इसमें इतना मोटा और लम्बा लंड कैसे घुसेगा" कोमल की बात सुनकर पिंकी ने उससे कहा । कोमल ने पिंकी की बात सुनकर उसे बताया की दादा ने उसे क्या कहा था और उसके बाद दोनों कच्ची कलियाँ एक दुसरे से लिपट कर आपस में बातें करने लगीं ।

मुकेश की अचानक आँख खुल गयी उसने देखा की उसकी पत्नी उसके साथ ही बेड पर लेटी हुयी है । मुकेश ने टाइम देखा तो 5 बज रहे थे इसका मतलब सभी के उठने का टाइम हो गया था, मुकेश ने अपना मुँह रेखा की आधी नंगी चुचियों पर रख दिया जो उसकी साँसें लेने के साथ बुहत ज़ोर से उछल रही थी और अपनी पत्नी की चुचियों को चाटने लगा ।

"ओहहहह क्या हुआ जी क्यों सता रहे हो सोने दो ना" अपने पति के होंठो को अपनी चुचियों पर महसूस करते ही रेखा ने सिसकते हुए कहा।

"5 बज गये है जी उठो हमें चाय पीनी है" मुकेश ने रेखा की चुचियों से अपना मुँह हटाते हुए कहा।

"क्या 5 बज गये" रेखा अपने पति की बात सुनकर उठते हुए बोली और बाथरूम में चलि गयी ।

रेखा थोडी देर के बाद बाथरूम से निकल आई और ड्रेसिंग टेबल के सामने खुद को ठीक करने लगी

"डारलिंग क्या देख रही हो इतनी ख़ूबसूरत हो की तुम्हारा चेहरा देखकर आईना भी शर्मा जाए" मुकेश ने अपने पत्नी के पीछे आकर उसे अपनी बाहों में भरते हुए कहा ।

"क्या बात है मैं देख रही हूँ आप आज ज़रा ज्यादा ही रोमांटिक हो रहे है" रेखा ने अपने पति को टोकते हुए कहा।

"कुछ नही डार्लिंग आपके हुस्न का ही असर है" मुकेश ने अपनी पत्नी की बात से चौकते हुए कहा।

"नही जी आप मुझसे कुछ मत छुपाइये मुझे पता है की ज़रूर कोई बात है" रेखा ने अपने पति की बाहों को अपनी कमर से हटाकर सीधा होते हुए कहा ।
 
" वो डार्लिंग अब क्या कहुँ तुमसे" मुकेश ने अपना कन्धा झुकाते हुए अपनी बेटी के साथ होने वाला सीन अपनी पत्नी को बता दिया।

"च तो यह बात है मैं भी कहुँ आज मेरे पतिदेव को क्या हो गया है" रेखा ने अपने पति की बात सुनकर उसे टोकते हुए कहा।

"डारलिंग मगर वह सब इतफ़ाक़ से हुआ था" मुकेश ने अपनी सफायी देते हुए कहा ।

"हाँ हुआ तो इतफ़ाक़ से ही था मगर आपका दिल तो इसे हकीकत में भी करना चाहता है" रेखा ने मुकेश की आँखों में देखते हुए कहा।

"नही डार्लिंग मेरा ऐसा कोई ख़याल नही" मुकेश ने अपनी पत्नी के सामने शर्म से अपना कन्धा झुकाते हुए कहा।

"झूठ मत कहो अगर तुम कंचन का मजा लेना चाहो तो मुझे कोई ऐतराज़ नहीं क्योंकी मैं भी तो अपने बेटे से मजा ले चुकी हुँ" रेखा ने मुकेश के बिलकुल क़रीब जाते हुए कहा ।

डारलिंग सच कहुँ तो मेरा दिल तो बुहत करता है मगर डर लगता है" मुकेश ने अखिरकार अपनी पत्नी के सामने खुलते हुए कहा।

"ह्म्मम्म डर किस बात का। तुम अपनी बेटी के साथ फुल मजा ले सकते हो क्योंकी वह नरेश और विजय दोनों से चुदवा चुकी है। इसीलिए अगर वह नखरा करे तो तुम उसे कह देना की तुम्हें सब कुछ पता है" रेखा ने अपने पति को आईडिया देते हुए कहा ।

"क्या कहा डार्लिंग तुमने मेरे दिल की बात छीन ली" मुकेश ने अपनी पत्नी की बात सुनकर उसके होंठो पे एक किस करते हुए कहा।

"मैं चाय बनाने जा रही हूँ और तुम्हारे पास तुम्हारी बेटी कंचन ही चाय लेकर आएगी" रेखा ने मुस्कराते हुए कहा और अपने पति से दूर होते हुए वहां से बाहर चलि गयी ।

रेखा के जाते ही मुकेश बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होने के बाद सोफ़े पर बैठकर अपनी बेटी का इंतज़ार करने लगा । मुकेश का लंड आज उसकी पेण्ट में ही बुहत ज़ोर से उछल रहा था क्योंकी उसे अपनी बेटी का जवान और ख़ूबसूरत जिस्म से खेलने की इजाज़त मिल गयी थी ।

रेखा बाहर निकलने के बाद सीधा अपनी बेटी कंचन के कमरे में जाने लगी । रेखा जैसे ही कंचन के कमरे के बाहर पुहंची दरवाज़ा अंदर से बंद था रेखा ने दरवाज़े को नॉक किया कुछ ही देर में कंचन ने आँखें मलते हुए दरवाज़ा खोला।

"बेटी फ्रेश होकर किचन में आ जाओ। मैं चाए बना रही हूँ और हाँ सब को उठा देना" रेखा ने कंचन से कहा और खुद किचन में जाकर चाए बनाने लगी ।
 
कंचन अपनी माँ के जाते ही बाथरूम में घुस गयी और फ्रेश होने के बाद शीला को उठाते हुए खुद अपने कमरे से निकल गयी । कंचन अपने कमरे से निकलकर अपने भाइयों के कमरे का दरवाज़ा खटखटाने लगी, कुछ ही देर में नरेश ने आकर दरवाज़ा खोला ।

"दीदी आप अंदर आओ ना" नरेश ने कंचन को अपने सामने देखकर खुश होते हुए कहा। नरेश की हालत से पता चल रहा था की वह अभी नींद से उठा है,

"भइया आप विजय को भी उठा दिजिये चाय तैयार है" कंचन ने नरेश से कहा और वहां से जाने के लिए मुडी ही थी के नरेश ने उसे पीछे से पकडा और खींचकर कमरे में ले गया ।

"वाह दीदी क्या ख़ुश्बू आ रही है आपके रेशमी बालों से एक किस तो दे दो" नरेश ने अंदर होते ही कंचन को सीधा करते हुए कहा।

"भइया आप भी न कुछ तो शर्म करो" कंचन ने बनावटी गुस्सा करते हुए कहा।

"दीदी क्या करुं इसमें मेरा क्या क़सूर है आप ही तो अपने बालों को खोलकर ऐसे तैयार होकर सामने आई हैं की मैं अपना कण्ट्रोल खो बैठा" नरेश ने कंचन के खुले हुए बालों में अपना हाथ ड़ालते हुए कहा ।

"भइया मम्मी मेरा किचन में इंतज़ार कर रही है" कंचन ने नरेश से अलग होते हुए कहा।

"तो करने दो मैं बस एक किस की तो बात कर रहा हुँ" नरेश ने कंचन की आँखों में देखते हुए कहा।

"ठीक है भैया सिर्फ एक किस्स" कंचन ने शर्म से अपना कन्धा झुकाते हुए कहा ।

"हाँ दीदी सिर्फ एक किस्स" नरेश ने खुश होते हुए कहा । कंचन नरेश की बात सुनकर उसके क़रीब आ गयी और अपने गुलाबी होंठो को नरेश के गाल पर रखकर एक किस दे दिया।

"दीदी यह क्या इसे भी कोई किस कहता है । मैंने वहां नहीं यहाँ पर किस करने को कहा था" नरेश ने कंचन की तरफ देखकर अपने होंठो पर अपने हाथ को रखते हुए कहा ।

"भइया आप भी ना" कंचन ने नरेश की बात सुनकर गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए कहा और फिर से नरेश के क़रीब जाते हुए अपने होंठो को नरेश के होंठो पर रख दिया, कंचन के होंठ जैसे ही नरेश के होंठो पर पडे उसने अपने हाथों से कंचन के सर को पकड लिया और कंचन के दोनों नाराम गुलाबी होंठो को बुरी तरह चूसने लगा ।

कंचन इस अचानक हमले के लिए बिलकुल तैयार नहीं थी इसीलिए वह नरेश से छूटने के लिए झटपटाने लगी मगर वह नरेश को अपने आप से दूर न कर सकी । नरेश कुछ देर तक लगातार कंचन के दोनों होंठो को चूसने के बाद उससे अलग हो गया, नरेश के अलग होते ही कंचन बुहत ज़ोर से साँसें लेते हुए बुरी तरह हाँफने लगी ।
 
"क्या हुआ दीदी मजा आया" नरेश ने कंचन को हाँफता हुआ देखकर मुस्कराते हुए कहा।

"बदमाश तुम्हें तो मैं देख लूंग़ी" कंचन ने गुस्से से नरेश की तरफ देखा और अपने कपड़ों को ठीक करते हुए बाहर निकल गयी ।

कंचन ने बाहर आकर पहले कोमल और पिंकी को उठाया और फिर अपनी माँ के पास किचन में चली गई।

"आ गयी बेटी क्या बात है आज तो बुहत ज्यादा सूंदर लग रही हो" रेखा ने कंचन को देखकर उसकी तारीफ करते हुए कहा । कंचन अपनी माँ के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर शरमा गयी और अपना कन्धा नीचे झुका लिया ।

"बेटी जाओ पहले तुम अपने पिता को चाय देकर आओ" रेखा ने चाय का एक कप और कुछ बिसकुटस ट्रे में रखकर कंचन को देते हुए कहा । कंचन ट्रे को उठाकर अपने पिता के कमरे में जाने लगी और अपने पिता के कमरे के पास पुहंच कर दरवाज़े को नॉक करने लगी।

"दरवाज़ा खुला है आ जाओ" मुकेश ने दरवाज़े के खटकाने से वहीँ पर बैठे हुए कहा ।

कंचन अपने पिता की आवज़ सुनकर अंदर दाखिल हो गई और अपने पिता के पास जाकर चाय की ट्रे को टेबल पर रखने लगी । मुकेश ने जैसे ही अपनी बेटी को देखा उसके होश ही उड़ गए क्योंकी कंचन के बाल खुले हुए थे और वह ताज़ा फ्रेश होकर आई थी इसीलिए वह बुहत ज्यादा सूंदर लग रही थी। कंचन जैसे ही ट्रे को नीचे रखने के लिए झुकी उसके गले से पल्लु खिसककर नीचे गिर गया और उसकी दो जवान गोल गोल गोरी चुचियां आधी नंगी होकर मुकेश के आँखों के सामने आ गयी ।

मुकेश का लंड अपनी बेटी की जवान चुचियों को देखकर उसकी पेण्ट में बुहत ज़ोर के झटके खाने लगा।

"पिताजी चाय" कंचन ने ट्रे के रखने के बाद वैसे झुके हुए ही उनकी तरफ देखते हुए कहा । कंचन ने जैसे ही देखा की उसका पिता उसकी चुचियों को घूर रहा है वह जल्दी से सीधा हो गई और अपने पल्लु को वापस अपनी चुचियों पर रख दिया ।

"बेटी आज तो तुम बुहत सूंदर लग रही हो" मुकेश ने चाय का कप उठाकर अपनी बेटी की तरफ देखते हुए कहा।

"पिताजी मम्मी मेरा इंतज़ार कर रही है क्या मैं जाऊँ?" कंचन ने अपने पिता की बात सुनकर शर्म से अपना कन्धा झुकाते हुए कहा ।

"अरे बेटी छोड़ो मम्मी को आओ मेरे पास आकर बैठो। आज कितने दिनों के बाद तो तुमसे बात करने का मौका मिला है" मुकेश ने चाय के कप में से एक चुसकी लेते हुए कहा । अपने पिता की बात सुनकर कंचन की साँसें बुहत ज़ोर से चलने लगी और वह धीरे धीरे चलते हुए अपने पिता के साथ सोफ़े पर आकर बैठ गयी ।
 
"अरे बेटी तुम इतना डरी हुयी क्यों हो इधर आओ मेरे पास" मुकेश ने कंचन के बैठने के बाद चाय का कप ख़तम किया और उसके बाद कंचन को कलाई से पकडकर अपने पास करते हुए कहा । कंचन अब सोफ़े पर अपने पिता से बिलकुल सट कर बैठी थी ।

"बेटी उस दिन वाली बात किसी को बतायी तो नही" मुकेश ने कंचन की आँखों में देखते हुए कहा।

"नही" कंचन ने सिर्फ इतना कहा वह अपने पिता की बात सुनकर शर्म से पानी पानी हो रही थी।

"बुहत अच्छा क्या तुम्हें पता है जब तुम छोटी थी तो मैं तुम्हें अपनी गोद में बिठाकर खिलाता था। आओ आज मुझे फिरसे अपनी बेटी को अपनी गोद में बिठाना है" मुकेश ने कंचन के बाज़ू को पकडते हुए कहा ।

"नही पिताजी" कंचन ने अपने पिता की बात सुनकर इन्कार करते हुए कहा।

"अरे क्यों बेटी तुम बड़ी हो गई तो क्या हुआ मेरे लिए तो तुम वही छोटी लाड़ली बेटी हो" मुकेश ने कंचन की बात सुनकर मुँह बनाते हुए कहा । अचानक दरवाज़ा खुला और रेखा ट्रे लेकर कमरे में दाखिल हुयी ।

कंचन अपनी माँ को देखकर अपने पिता से थोडा दूर होकर बैठ गयी।

"अरे बेटी तुमने तो आने में देर कर दी। इसीलिए मैं तुम्हारी चाय यहीं लेकर आ गई" रेखा ने ट्रे को टेबल पर रखते हुए कहा।

"डालिंग देखो तुम्हारी बेटी अपने पिता से डर रही है। तुम्हें पता है मैंने बचपन से इसे अपनी गोद में बिठाकर खिलाया है और जब आज मैंने इसे प्यार से अपनी गोद में बैठने के लिए कहा तो यह शरमा गई" मुकेश ने रेखा की तरफ देखते हुए कहा ।

"क्यों कंचन अपने पिता का दिल मत दुखाओ चाय पीकर एक दफ़ा उनकी गोद में बैठ जाओ" रेखा ने अपने पति की बात सुनकर कंचन को डाँटते हुए कहा । कंचन के पास अब और कोई रास्ता नहीं था उसने जैसे ही चाए ख़तम की रेखा ट्रे को लेकर वहां से जाने लगी।

"सुना बेटी अब तो तेरी माँ ने भी इजाज़त दे दी है" रेखा के जाते ही मुकेश ने कंचन के क़रीब जाते हुए उसके हाथ को पकड लिया ।

कंचन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे। बस वह तेज़ साँसें लेते हुए सोफ़े से उठकर अपने पिता की गोद में बैठने लगी, कंचन ने जैसे ही अपने चूतडों को अपने पिता की गोद में रखा उसे अपने चूतड़ो के बीच कोई चीज़ बुहत ज़ोर से चुभ गयी । कंचन समझ गई की वह क्या है इसीलिए वह वापस उठने ही लगी थी की मुकेश ने अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकडकर अपनी गोद पर बिठा दिया ।
 
कमेंट के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
कंचन अपने पिता की की गोद में बैठ तो गयी मगर उसके चूतडों में मुकेश का लंड बुरी तरह से चूभ रहा था इसीलिए वह बार बार वहां से उठने की कोशिश कर रही थी।

"क्या हुआ बेटी बार बार क्यों उठ रही हो" मुकेश ने अपनी बेटी को कमर से पकडे हुए ही कहा।

"कुछ नहीं पिता जी बस ऐसे ही" कंचन अपने पिता का सवाल सुनकर शरम से पानी पानी होते हुए बोली और मजबूरन वह अब बिना हिले अपने पिता की गोद में बैठी रही ।

कंचन को महसूस हो रहा था की उसके पिता का लंड उसके चुप होकर बैठने के बाद बुरी तरह से उसके चूतडों के बीच घुसकर चूभ रहा था । कंचन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे,

"बेटी तुम्हें पता है बचपन में तुम मेरी गोद में बैठकर ही खाना ख़ाती थी" मुकेश ने कंचन के चुप होकर बैठने के बाद अपने हाथ को उसकी कमर से ले जाकर उसके चिकने पेट पर रखते हुए कहा ।

कंचन ने अपने पिता की बात का कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप वहीँ पर बैठी रही । अचानक मुकेश ने अपना मुँह कंचन की पीठ पर रख दिया और वह अपने हाथ को अपनी बेटी के जवान चिकने पेट पर फिराने लगा, अपने पिता के हाथ को अपने पेट और उनके मूह को अपनी पीठ पर महसूस करके कंचन की साँसें बुहत ज़ोर से चलने लगी और उसे अपने पूरे जिस्म में अजीब किस्म की सिहरन का अहसास होने लगा ।

कंचन भी अब गरम होने लगी थी और उसे अपनी पिता की हरक़तों से मजा आ रहा था । कंचन इतना गरम हो गई थी की अब वह खुद अपने चूतडों को ज़ोर लगाकर अपने पिता के लंड पर दबा कर हिला रही थी।

"बेटी तुमने तो आज मुझे तेरे बचपन की याद दिला दी तो बताओ तुम्हें कैसा महसूस हो रहा है?" मुकेश ने अपनी बेटी के चूतडों के हिलने से खुश होते हुए उससे सवाल किया ।

"पिताजी मुझे अच्छा लग रहा है" कंचन ने सिर्फ इतना कहा । कंचन की बात सुनकर मुकेश को जैसे ग्रीन सिग्नल मिल गया इसीलिए मुकेश ने अब अपने हाथ को अपनी बेटी के चिकने पेट से फिसलाते हुए ऊपर उसकी चुचियों के क़रीब ले जाने लगा, अपने पिता के हाथ को अपनी चुचियों की तरफ जाता हुआ देखकर कंचन की साँसें बुहत ज़ोर से चलने लगी और उसका दिल अगले पल के बारे में सोचकर बुहत ज़ोर से धडकने लगा ।
 
मुकेश का हाथ उसकी बेटी की चुचियों के बिलकुल नज़दीक पुहंच चूका था और वह अपने हाथ को बिना रोके ऊपर करता जा रहा था । कंचन महसूस कर रही थी की उसके पिता का हाथ जैसे जैसे उसकी चुचियों के क़रीब हो रहा था वैसे वैसे उनका लंड ज़ोर के झटके खा रहा था और उनकी साँसें तेज़ होती जा रही थी ।

"नही पिताजी बस" अचानक कंचन को जाने क्या हुआ उसने अपने हाथ को अपने पिता के हाथ पर रख दिया और उसके हाथ को अपनी चुचियों के पास ही रोक दिया।

"अरे सॉरी बेटी मैं तो भूल ही गया की हमारी बेटी जवान हो चुकी है। लगता अब तुम्हारे लिए जल्दी ही कोई दूल्हा ढूढ़ना पडेगा" मुकेश ने कंचन के हाथ को अपने हाथ पर पडते ही कहा ।

"पिताजी अब मैं जाऊं" कंचन ने तेज़ साँसें लेते हुए कहा।

"बेटी बस एक बार मुझे तुम एक किस दे दो जैसे बचपन में टॉफ़ी लेने के बाद देती थी" मुकेश ने अपनी बेटी के पेट से अपने हाथ को हटाते हुए कहा।

"पिताजी मुझसे नहीं होगा मुझे शर्म आ रही है" कंचन ने जल्दी से अपने पिता की गोद से उठकर उसके क़रीब ही सोफ़े पर बैठते हुए कहा ।

कंचन की हालत बुहत खराब हो चुकी थी । उसकी चूत से उत्तेजना के मारे पानी टपक रहा था।

"बेटी अपने पिता से कैसी शरम । ठीक है अगर तुम शर्मा रही हो तो मैं ही तुम्हें किस कर देता हुँ" मुकेश ने कंचन की बात सुनकर खुश होते हुए कहा । अपने पिता की बात सुनकर कंचन की हालत और ज्यादा खराब होने लगी क्योंकी अब मुकेश खुद उसे किस करने वाला था ।

"बेटी ऐसा करो तुम अपना सर मेरी गोद में रखकर अपनी आँखें बंद कर लो । मैं खुद ही अपनी फूल जैसी बेटी का किस लूँगा" मुकेश ने कंचन के हाथ को पकडकर उसे अपने पास खीचते हुए कहा । कंचन को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे बस उसे चुपचाप अपने पिता की बात को मानना था। इसीलिए वह चुपचाप अपने पिता की गोद में सर रखकर लेट गयी ।

"ओहहहह मेरी स्वीटी तुम कितनी अच्छी हो" मुकेश ने अपनी बेटी के के सर को अपनी गोद पर महसूस करते ही खुश होते हुए कहा और अपने हाथ से कंचन के एक गाल की चिकोटी ले ली । मुकेश अब थोडा झुककर अपनी बेटी को किस करने के लिए नीचे झुकने लगा। कंचन ने जैसे ही देखा उसका बाप उसे किस करने के लिए नीचे हो रहा है उसने अपनी आँखों को बंद कर दिया ।
 
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