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कोमल का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था और अपने दादा के हाथ के अहसास से ही उसकी टाँगें अपने आप खुल चुकी थी।
"बेटी इसका मतलब तुम्हारी चूत को आज तक तुम्हारे सिवा किसी ने नहीं छुआ है" अनिल ने अचानक अपने हाथ को कोमल की टांगों के बीच ले जाकर उसकी फूली हुई कच्ची चूत को सहलाते हुए कहा ।बेटी अपनी टॉप और स्कर्ट उतार दो ना।
नहीं दादाजी मुझे बहुत शरम आ रही है कहते हुए कोमल ने अपना सर झुका लिया।
अनिल ने कोमल को सहलाते हुए उसके टॉप को उतार दिया।कोमल की अनछुई चूचियाँ एक छोटी सी ब्रा में कैद थी जिसे अनिल ने उतार दिया।अब अनिल के सामने एक कच्ची कली की खिलती हुई चूचियाँ थी जो अभी पूरी जवान भी नहीं हुई थी।उसकी सुंदरता को देखकर अनिल का लंड उछलने लगा।इधर अनिल के माथे पर पसीने की बुँदे आ गई।जब अनिल का हाथ पहली बार कोमल की अधखिली चूचियों पर पड़ा तो कोमल मस्ती में सिसियाने लगी और उसके हाथ दादाजी के लंड पर कस गई।
अब अनिल ने अपना सर झुकाया और कोमल की एक चूची को मुँह में भर लिया।
कोमल की चूत से पानी निकलने लगी।उतेज़ना से उसका बुरा हाल हो गया।वह जोर जोर से सिसकारी भरने लगी।इधर अनिल एक बच्चे की तरह अपने तीन गुनी कम उम्र की लड़की की मासूम चूचियों को चूस रहा था।काफी देर तक अनिल अपनी पोती की कच्ची चूचियों को चूसता रहा जैसे उसमे से दूध निकालने की कोशिश कर रहा हो।
कोमल के निप्पल पुरे तन गए थे।वह गरम हो गई थी जिसका लाभ उठाकर अनिल ने अपनी पोती के स्कर्ट और उसकी पेंटी उतार दिया।अब उसके सामने
एक खिलती हुई कच्ची कली पूरी नंगी अपने दादा के सामने थी।कोमल की चूत बिलकुल चिकनी और फूली हुई थी । उसमे सिर्फ हल्के बाल आने अभी शुरू हुए थे।उसकी बुर की क्लिट एकदम टाइट थी।अनिल कोमल की चूत देखकर इतना गरम हो गया की वह कोमल की चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा।कुछ ही देर कोमल की कुँवारी चूत चाटने पर कोमल की आँखे बंद हो गई।
"आहहहहह इसशहहहह ओह्ह्ह्हह दादू" अचानक कोमल की आँखें बंद हो गई और उसने अपने एक हाथ से अनिल के लंड को ज़ोर से सहलाते हुए दुसरे हाथ से उसके हाथ पर रखकर उसे अपनी चूत पर दबा दिया। कोमल कुछ देर तक वैसे ही आँखें बंद करते हुए झडती रही और अपने दादा के लन्ड को अपने कोमल मुलायम हाथों से लण्ड को सहलाती रही।कोमल को झड़ता देखकर अनिल उसके कुँवारी चूत के नमकीन पानी को पीता रहा और वह भी उतेजना के मारे झड़ने लगा।कोमल का पूरा हाथ गन्दा हो गया।
"दादा जी हमें माफ़ कर दो । यह सब ठीक नहीं है" कोमल ने पूरी तरह झडने के बाद जैसे ही अपनी आँखें खोली तो उसे होश आया की वह मज़े के चक्कर में बुहत आगे निकल चुकी है। इसीलिए उसने अपने हाथ को अनिल के लंड से हटाते हुए वहां से उठकर जाने लगी ।
"बेटी तुम किसी बात की चिंता मत करना। मैं यह सब किसी को नहीं बताऊंगा। जब तुम्हारा दिल करे यहाँ पर आ जाना मैं तुम्हारी मर्ज़ी के सिवा कुछ नहीं करूंगा" अनिल ने कोमल को जाता हुआ देखकर उसकी तरफ देखते हुए कहा । कोमल ने अपने दादा की बात सुन ली मगर उसने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चलि गयी ।
"बेटी इसका मतलब तुम्हारी चूत को आज तक तुम्हारे सिवा किसी ने नहीं छुआ है" अनिल ने अचानक अपने हाथ को कोमल की टांगों के बीच ले जाकर उसकी फूली हुई कच्ची चूत को सहलाते हुए कहा ।बेटी अपनी टॉप और स्कर्ट उतार दो ना।
नहीं दादाजी मुझे बहुत शरम आ रही है कहते हुए कोमल ने अपना सर झुका लिया।
अनिल ने कोमल को सहलाते हुए उसके टॉप को उतार दिया।कोमल की अनछुई चूचियाँ एक छोटी सी ब्रा में कैद थी जिसे अनिल ने उतार दिया।अब अनिल के सामने एक कच्ची कली की खिलती हुई चूचियाँ थी जो अभी पूरी जवान भी नहीं हुई थी।उसकी सुंदरता को देखकर अनिल का लंड उछलने लगा।इधर अनिल के माथे पर पसीने की बुँदे आ गई।जब अनिल का हाथ पहली बार कोमल की अधखिली चूचियों पर पड़ा तो कोमल मस्ती में सिसियाने लगी और उसके हाथ दादाजी के लंड पर कस गई।
अब अनिल ने अपना सर झुकाया और कोमल की एक चूची को मुँह में भर लिया।
कोमल की चूत से पानी निकलने लगी।उतेज़ना से उसका बुरा हाल हो गया।वह जोर जोर से सिसकारी भरने लगी।इधर अनिल एक बच्चे की तरह अपने तीन गुनी कम उम्र की लड़की की मासूम चूचियों को चूस रहा था।काफी देर तक अनिल अपनी पोती की कच्ची चूचियों को चूसता रहा जैसे उसमे से दूध निकालने की कोशिश कर रहा हो।
कोमल के निप्पल पुरे तन गए थे।वह गरम हो गई थी जिसका लाभ उठाकर अनिल ने अपनी पोती के स्कर्ट और उसकी पेंटी उतार दिया।अब उसके सामने
एक खिलती हुई कच्ची कली पूरी नंगी अपने दादा के सामने थी।कोमल की चूत बिलकुल चिकनी और फूली हुई थी । उसमे सिर्फ हल्के बाल आने अभी शुरू हुए थे।उसकी बुर की क्लिट एकदम टाइट थी।अनिल कोमल की चूत देखकर इतना गरम हो गया की वह कोमल की चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा।कुछ ही देर कोमल की कुँवारी चूत चाटने पर कोमल की आँखे बंद हो गई।
"आहहहहह इसशहहहह ओह्ह्ह्हह दादू" अचानक कोमल की आँखें बंद हो गई और उसने अपने एक हाथ से अनिल के लंड को ज़ोर से सहलाते हुए दुसरे हाथ से उसके हाथ पर रखकर उसे अपनी चूत पर दबा दिया। कोमल कुछ देर तक वैसे ही आँखें बंद करते हुए झडती रही और अपने दादा के लन्ड को अपने कोमल मुलायम हाथों से लण्ड को सहलाती रही।कोमल को झड़ता देखकर अनिल उसके कुँवारी चूत के नमकीन पानी को पीता रहा और वह भी उतेजना के मारे झड़ने लगा।कोमल का पूरा हाथ गन्दा हो गया।
"दादा जी हमें माफ़ कर दो । यह सब ठीक नहीं है" कोमल ने पूरी तरह झडने के बाद जैसे ही अपनी आँखें खोली तो उसे होश आया की वह मज़े के चक्कर में बुहत आगे निकल चुकी है। इसीलिए उसने अपने हाथ को अनिल के लंड से हटाते हुए वहां से उठकर जाने लगी ।
"बेटी तुम किसी बात की चिंता मत करना। मैं यह सब किसी को नहीं बताऊंगा। जब तुम्हारा दिल करे यहाँ पर आ जाना मैं तुम्हारी मर्ज़ी के सिवा कुछ नहीं करूंगा" अनिल ने कोमल को जाता हुआ देखकर उसकी तरफ देखते हुए कहा । कोमल ने अपने दादा की बात सुन ली मगर उसने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चलि गयी ।