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परिवार(दि फैमिली) complete

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दोस्तों आज मनीषा के घर की तरफ चलते हैं याद है न आपको मनिषा, उसकी बेटी शीला और पिंकी उसका बेटा नरेश, पति महादेव रमेश और आखरी प्राणी उसके पति का बॉस मनीषा का यार शीला और पिंकी का असल पिता सुरज।

मानिषा के घर पुहंचते ही दूसरी रात को उसका यार सूरज उससे मिलने आ गया था । मनीषा के पति को उसने फिर से किसी प्रोजेक्ट के सिलसिले में बाहर भेज दिया था।

"मानिषा डार्लिंग अब तो मेरी दोनों बेटियाँ बुहत बड़ी हो गई हैं कब दिलवा रही मुझे उनकी कमसीन वर्जिन चूत" सूरज ने मनीषा को बुहत ज़ोर से चोदते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह डार्लिंग तुम्हारी बड़ी बेटी की सील तो किसी ने पहले ही तोड़ी है" मनीषा ने भी अपने चूतडों को उछालकर अपने यार से चुद्वाते हुए कहा।

"क्या कहा तूने किस साले ने मेरी बेटी की सील तोड़ी?" सूरज ने मनीषा की बात सुनकर हैंरान होते हुए कहा।

"डालिंग कोई और नहीं उसके भाई नरेश ने ही शीला की जवानी लूटी है" मनीषा ने सूरज को देखते हुए कहा।

"साला बहनचोद कोई और नहीं मिली उस कुते को चोदने के लिये" सूरज ने नरेश को गाली देते हुए कहा।

"साली तेरी चूत भी कुछ खुली खुली लग रही है । किस किससे चुदवाकर आई हो" सूरज ने मनीषा की चूत में तेज़ धक्के मारते हुए कहा।

"तुमने ही तो मुझे नए लन्डों से चुदवाने की कला सिखाई थी तो मैंने भी बस अपने पिता और बेटे से चुदवा लिया" मनीषा ने सूरज को बताते हुए कहा।

"साली तुम तो बड़ी रंडी निकली अपने पिता और बेटे से चुदवा लिया" सूरज ने गुस्से और उत्तेजना के मारे मनीषा को तेज़ी के साथ चोदते हुए कहा।

"हाँ और अपने भैया से भी और भतीजे से भी चुदवा लेती अगर एक दो दिन और मिल जाता" मनीषा ने जानबूझकर सूरज को जोश दिलाते हुए कहा।

"साली कुतिया तेरी चूत है या कोई रंडी की चूत।जिसमें हर किसी ने इसमें डुबकी लगा ली" सूरज ने पागलोँ की तरह मनिषा की चूत को बुहत तेज़ी के साथ चोदते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह ऐसे ही मैं झरने वाली हू" मनीषा ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा और अपनी टांगों को सूरज की कमर में डाल दिया।

"ले साली कुतिया मैं भी झरने वाला हू" सूरज ने मनीषा के ऊपर झुककर उसे तेज़ी के साथ चोदते हुए कहा।

"उई इसशहहह आह्ह" मनीषा सूरज के भयानक चुदाई से चिल्लाते हुए झरने लगी उसने झरते हुए अपनी आँखों को बंद कर दिया और अपने नाखुनो को सूरज के पीठ में गडा दिया।
 
"ओहहह साली रंडी आअह्ह्ह मैं भी आया" सूरज मनीषा के नाख़ून अपनी पीठ पर गडने से चीख़ पड़ा। मगर अगले ही पल वह हाँफते हुए मनीषा की चूत में वीर्य गिराने लगा । सूरज झडते हुए मनीषा की चूत में तेज़ धक्के मारने लगा । मनीषा ने भी अपनी चूत में गरम वीर्य को गिरता हुआ महसूस करके सूरज को कसकर पकार लिया, सूरज पूरी तरह झरने के बाद मनीषा के ऊपर ही ढेर हो गया।

"साली छिनाल मुझे अपनी बड़ी बेटी को चोदना है। जल्दी से कोई रास्ता निकाल" सूरज ने कुछ देर तक अपनी साँसों को ठीक करने के बाद मनीषा के ऊपर से हटकर बेड पर सीधा लेटते हुए कहा।

"ना बाबा मैं अपने पाँव पर खुद ही कुलहाड़ी क्यों मारू। अगर शीला का जवान जिस्म तुम्हें मिल गया तो फिर मुझे तो भूल ही जाओगे" मनीषा ने सूरज को देखकर कहा।

"साली कुतिया तेरी चूत की खुजलि भी मैं ही मिटाता रहूँगा और तु जो मांगेगी तुझे दूँगा।" सूरज ने गुस्से में मनीषा को गाली देते हुए कहा।

"ठीक है मैं कुछ करती हूँ। तुम अभी चले जाओ मगर कल सुबह आ जाना और दो दिन तक यहीं रहना" मनीषा ने सूरज को समझाते हुए कहा।

"ठीक है मैं कल आ जाऊँगा" सूरज ने बेड से उठते हुए कहा और अपने कपडे पहनकर वहां से निकल गया। ।शीला ने अपने घर आने के बाद एक दो बार नरेश के साथ सेक्स किया था मगर जाने क्यों शीला का मन अब सेक्स में कम ही लगता था। आज भी वह अपने कमरे में सोयी हुयी थी वह पिछले दो दिनों से नरेश के पास नहीं गयी थी, इधर नरेश का भी वही हाल था। वह बस अपनी हवस मिटाने के लिए ही शीला को चोदता था उसका लगाव भी सेक्स में कम हो चुका था।

मानिषा ने हर रोज़ की तरह सुबह सवेरे उठकर सबके लिए नाश्ता बनाया जिसे सभी मिलकर खाने लगे।

"शीला तुम आज कॉलेज मत जाना तुम्हारे पिता के बॉस आने वाले हैं। वह दो रोज़ तक यहीं रहेंगे तो काम में मेरी कुछ मदद कर देना" मनीषा ने शीला की तरफ देखते हुए कहा।

"ठीक है माँ" शीला ने अपनी माँ को जवाब दिया।

"माँ पहले कभी तो वह यहाँ नहीं आये है?" नरेश ने अपनी माँ को देखते हुए कहा।

"हाँ लेकिन इस बार उसे कोई ज़रूरी काम है दो दिन यहाँ रहकर वह उसी काम के सिलसिले में चले जाएंगे" मनीषा ने सफेद झूठ बोलते हुए कहा । मनीषा की बात सुनकर नरेश चुप हो गया और अपनी छोटी बहन पिंकी के साथ कॉलेज के लिए निकल गया।

"शीला तुम अपने कमरे में जाकर आराम करो। जब सूरज आ जायेंगे मैं तुम्हें बुला लुंगी" मनीषा ने शीला को देखते हुए कहा।

"जी माँ" शीला अपनी माँ की बात सुनकर वहां से उठकर कमरे में चलि गयी । सूरज 10 बजे वहां पर पुहंच गया उसके हाथ में एक बैग भी था। मनीषा उसे बाहर बिठाकर शीला को ले आई।
 
"हल्लो बेटी अरे तुम तो बुहत बड़ी हो गई हो। अब तो तेरे हाथ भी पीले करने की बारी आ चुकी है" सूरज ने शीला को हाथ देकर अपने गले लगाते हुए कहा । सूरज ने पहले भी शीला को देखा था मगर आज जिस नज़र से वह उसे देख रहा था उस नज़र से पहले कभी नहीं देखा था। शीला को गले लगाते हुए उसकी चुचियों के स्पर्श से ही सूरज का लंड उसकी पेण्ट में फड़फड़ा रहा था।

"बेटी वह तुम्हारे कमरे के साथ जो कमरा है सूरज को उस कमरे में छोड आओ ताकी यह फ्रेश हो सके । जब तक मैं इनके लिए कुछ बनाती हूँ" मनीषा ने मुस्कुराते हुए शीला से कहा । शीला सूरज के बैग को उठाकर उसे कमरे की तरफ ले जाने लगी । सूरज भी अपनी बेटी के पीछे पीछे जाने लगा। उसकी नज़र शीला के चूतडों में अटकी हुयी थी जो चलते हुए इधर उधर हिल रहे थे।

"अंकल यह रहा आपका कमरा किसी और चीज़ की ज़रुरत हो तो हमें याद कर लेना" शीला ने बैग को कमरे के अंदर रखते हुए सूरज से कहा।

"ठीक है बेटी शुक्रिया" सूरज ने मुस्कराते हुए शीला से कहा। वह मन ही मन में शीला को उसे अंकल कहने पर मुस्कुरा रहा था । शीला वहां से अब जा चुकी थी। सूरज अपनी पेण्ट और शर्ट को उतारकर बाथरूम में घुस गया और बिलकुल नंगा होकर नहाने लगा। नहाते हुए वह अपने लंड को हाथों से सहलाते हुए शीला को चोदने के ही बारे में सोच रहा था।

"शीला बेटी ज़रा चाय और बिस्कुटस तो सूरज को दे आना । मैं खाने की तयारी कर रही हूँ" मनीषा ने अपनी बेटी के कमरे में दाखिल होते हुए कहा।

"जी माँ अभी आई" शीला ने अपनी माँ को जवाब दिया और बेड से उठकर किचन में चलि गयी । शीला ने चाय और बिस्कुटस उठाये और उन्हें सूरज के कमरे की तरफ ले जाने लगी शीला ने कमरे के बाहर आकर दरवाज़ा नॉक किया।

"आ जाओ दरवाज़ा खुला है" अंदर से सूरज की आवाज़ आई ।शीला दरवाज़ा खोलकर अंदर दाखिल हो गई और चाय बिस्कुटस को टेबल पर रख दिया। शीला जैसे ही सीधा हुयी उसकी आँखें हैंरत से फटी की फटी रह गयी क्योंकी सूरज सिर्फ एक अंडरवियर में खड़ा अपना बदन पोंछ रहा था।

"थैंक्स बेटी" सूरज ने शीला को देखते हुए कहा । शीला अपना कन्धा नीचे करते हुए वहां से जाने लगी।

"अरे बेटी कहाँ चलि बैठ जाओ न । जब तक में चाय पी लू। इसी बहाने तुमसे भी कुछ बाते हो जाएंगी" सूरज ने शीला को जाता हुआ देखकर रोकते हुए कहा।

"जी ठीक है अंकल" शीला ने सर झुककर एक सोफ़े पर बैठते हुए कहा।
 
सुरज भी अपना बदन पोंछने के बाद वैसे ही एक अंडरवियर पहना हुआ सीधा शीला के पास सोफ़े पर जा बैठा । शीला का जिस्म सूरज को नंगा ही अपने पास बैठता देखकर सिहरने लगा और वह चोरी चोरी सूरज के बदन को देखने लगी। शीला को यकीन नहीं हो रहा था की इतनी ज्यादा उम्र के बावजूद सूरज का बदन बिलकुल गठीला था। एक सेहतमन्द नौजवान की तरह।

"बेटी किस कॉलेज में हो?" सूरज ने अपने एक हाथ को शीला की जाँघ पर रखते हुए कहा।

"जी मैं आचार्य नरेन्दर देव कॉलेज में हूँ" शीला ने हकलाते हुए कहा उसका पूरा जिस्म सूरज के हाथ लगने से काँप रहा था।

"गूड़ और सुनाओ पढ़ाई के बाद क्या इरादा है" सूरज ने इस बार अपने हाथ को शीला की जाँघ पर आगे पीछे करते हुए कहा।

"जी फ़िलहाल कुछ सोचा नहीं है" शीला के मुँह से बड़ी मुश्किल से निकला । उसका जिस्म से पसीना निकलने लगा था । अचानक शीला की नज़र सूरज के अंडरवियर पर पड़ी। जिस में अब उसका मुसल लंड खड़ा होकर झटके मार रहा था।

"अंकल एक मिनट में अभी आई" शीला सूरज के लंड को देखकर पानी पानी हो गई और वह सोफ़े से उठकर बहाना बनाकर बाहर निकल गयी।

"कब तक भागेगी बेटी अब तो तुझे मेरे लंड से चुदना ही है" शीला के जाते ही सूरज ने हँसते हुए कहा और चाय पीने लगा । शीला भगती हुयी अपने कमरे में आ गयी थी । उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे । वह बेड पर बैठे हुए तेज़ साँसें ले रही थी । आज कई दिन बाद शीला को फिर से अपने जिस्म में वही गर्मी महसूस हो रही थी जो उसे अपनी मामी के घर में महसूस होती थी, शीला को अचानक सूरज के अंडरवियर का उभार याद आया जिसे देखकर वह यहाँ भाग आई थी। बुहत ही बड़ा और मोटा था शायद उसका यह सब सोचते हुए अचानक ही शीला खुद ही शर्म के मारे हंसने लगी की वह क्या सोच रही है।

शीला कुछ देर बाद फिर से उठकर सूरज के कमरे में चलि गयी कप और ट्रे उठाने । इस बार शीला ने दरवाज़ा नहीं खटखटाया और सीधे ही अंदर घुस गयी ।शीला को सूरज कहीं भी नज़र नहीं आया। वह कप और ट्रे उठाकर जाने ही वाली थी की उसका ध्यान बाथरूम की तरफ गया। जहाँ से पानी की आवाज़ आ रही थी। वह समझ गयी के सूरज नहा रहा है मगर वह अभी तो नहाकर निकला था यही सोचकर वह बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी। बाथरूम का दरवाज़ा भी खुला हुआ था। वह जैसे ही बाथरूम के दरवाज़े के पास पुहंची उसने देखा सूरज सीधा खड़ा होकर हाँफते हुए अपने हाथ से कुछ हिला रहा है सूरज का पीठ शीला की तरफ नहीं था जिस वजह से वह उसे देख नहीं पाया।

शीला को पहले तो कुछ समझ में नहीं आया मगर अगले ही पल वह समझ गयी की सूरज मुठ मार रहा है और वह जल्दी से वहां से जाने लगी। जाते हुए उसे आवाज़ सुनायी दी " ओह्ह्ह शीला मेरी बेटी आहहह्ह्ह्ह्ह् शायद सूरज झड रहा था । मगर वह उसका नाम क्यों ले रहा था ओहहहह भगवान कहीं वह उसे याद करके तो मुठ नहीं मार रहा था। यह सब सोचकर शीला का जिस्म फिर से गरम होने लगा । उसके जिस्म से पसीना निकलने लगा । वह जल्दी से कमरे से निकलकर किचन में आ गई।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
कुछ देर के बाद जब सभी अपने अपने रूम में आराम करने चले गए तब शीला भी अपने रूम में आकर आराम करने लगी।जब मनीषा ने शीला को बेड पर लेटे देखा तो वह सूरज के कमरे में घुस गई।रुम में घुसते ही सूरज ने मनिषा को अपनी बाहोँ में भरकर चूमने लगा।शीला की जांघो पर हाथ फेरकर उसे बहुत मज़ा आया था।

इधर शीला जब पेशाब करने बाथरूम जा रही थी तो अपने अंकल का दरवाजा बंद देखकर उसने खिड़की से देखा जो थोड़ी सी खुली हुई थी। जिसे देखकर वो पूरी तरह से गरम होने लगी।

शीला खिड़की से झांकते हुए अपनी माँ को अपने पापा के बॉस से किस करते हुए देख रही थी।

उन दोनों ने तकरीबन दस मिनट तक किस किया।दोनों एक दूसरे के जीभ को चूस चाट रहे थे।उसकी माँ कितनी बेशर्म बन गई थी.. वह बहुत गरम हो गई थीं और अंकल का भरपूर साथ दे रही थीं।

अंकल उनके गाल के बाद उनके चूचियों पर चुम्बन करने लगे, इससे वो उत्तेजित हो गईं। वह उनके चूचियों को सहला रहे थे.. और उनके चूचुकों को अपनी उँगलियों से दबा कर मसल रहे थे.. उसकी माँ पूरी तरह गर्म हो गई थीं।

यह सब देख कर शीला के दिल में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी थी। उसका हाथ खिड़की पर खड़े हुए ही अपनी सलवार के अन्दर न चाहते हुए भी चला गया था।

उधर अंकल ने अपना हाथ उसकी माँ के पेट के ऊपर से सहलाते हुए उनकी सलवार में सरका दिया था.. शायद उनका हाथ उसकी माँ की चूत पर था।

‘आह्ह्ह.. सूरज..’

माँ मचल उठी थीं.. फिर अंकल उसकी माँ को अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर ले गए। उनको बिस्तर पर लेटा कर पीछे से उनकी कुर्ती खोलने लगे।

उसकी माँ ने फिर से थोड़ी ना-नुकुर की..

पर अंकल ने कहा- अब मुझे मत रोको.. जब भी मैं तुम्हारे जिस्म को मज़ा देता हूँ, हर बार तुम ऐसे करती हो कि जैसे मैं पहली बार तुम्हारे साथ ऐसा कर रहा होऊँ? हर बार तुम ना नुकुर करती हो?

शीला की माँ की चूत पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी.. इसलिए सूरज अंकल को भी कोई दिक्कत नहीं हुई। पाँच मिनट बाद सूरज अंकल बिस्तर पर माँ के ऊपर जा पहुँचे और माँ के पीठ की चुम्मियाँ लेने लगे।

शीला यह सब देख रही थी.. लेकिन उसने खिड़की अधखुली थी इसलिए माँ.. अंकल को कोई शंका नहीं हुई।
 
सूरज अंकल धीरे धीरे उसकी माँ के दूध दबाने लगे.. उसकी माँ के मुँह से आवाजें निकलनी शुरू हो गई थीं।सूरज अंकल ने धीरे से उसकी माँ की गुलाबी सलवार का नाडा खोल दिया और धीरे से कुर्ती भी ऊपर सरका दी। शीला की माँ अब अधनंगी हो चुकी थीं। उन्होंने अपनी कमर पर एक काली डोरी बांधी हुई थी। सूरज अंकल के द्वारा अपनी माँ की चुदाई को देख कर शीला पागल हो रही थी।

सूरज अंकल ने इतनी जोर से उसकी माँ के दूध दबाए और चूसे कि उसकी माँ ‘आ.. आहा.. अआ.. हह्हा..आआह्ह.. धीरे से..’ करने लगीं।

सूरज अंकल ने धीरे-धीरे उसकी माँ की सलवार घुटनों तक सरका दी और उनकी काली चड्डी के ऊपर से ही उसकी माँ के चूतड़ दबाने और चूमने लगे।उसकी माँ ने करवट बदली और खुद ही अपने जम्पर को उतार कर फेंक दिया।शीला की माँ अब ब्रा और पैंटी में थीं।

शीला ने आज पहली बार अपनी माँ का गोरा जिस्म नंगा देखा था। ब्रा-पैंटी में वो शीला को उस समय बहुत ही कामुक.. सुन्दर और मासूम लग रही थीं, वे 38 साल की होने के बावजूद इस वक़्त जवान लड़की लग रही थीं।

अंकल उसकी माँ को अपनी बाँहों में लेकर.. उनके होंठों को चूसने लगे, अब वो भी अंकल का साथ दे रही थीं।

शीला के लिए यह अनुभव जन्नत से कम नहीं था। सूरज अंकल ने उठकर उसकी माँ के पाँव सहलाने शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करने लगे। माँ अपना पाँव हटाने लगीं।

वह दोनों किसी प्रेमी जोड़े की तरह एक-दूसरे से खेल रहे थे, उनके अन्दर कोई जल्दबाजी नहीं थी, दोनों एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे।

सूरज अंकल उनकी पायल को चूमने लगे और हाथ से पाँव पर मालिश करने लगे। सूरज अंकल धीरे से माँ की पैंटी की तरफ पहुँचे और उसे उतार कर किनारे रख दी।

उनका लण्ड जो इतना खड़ा हो चुका था कि चड्डी फाड़ रहा था। अंकल पूरे नंगे हुए और माँ की टांगें ऊपर करके अपना 9 इंच का लण्ड माँ की फूली हुई चूत में डाल दिया।

माँ सिसकार उठीं- अअह आआ.. आआह.. अहह..हाहा आआहह्ह..हा सूरज धीरे-धीरे.. शीला उठ जाएगी.. अहह्ह..सिइइइ..

माँ ने शीला के जाग जाने के डर से अपनी आवाजें बंद कर लीं। सूरज अंकल धीरे-धीरे चुदाई की गति तेज करने लगे। माँ की चूड़ियाँ खन-खन कर रहीं थीं।

अंकल उनको तेज-तेज चोदने लगे।

शीला की माँ भी अंकल के कंधे को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थीं.. वैसे ही सूरज अंकल भी तेज स्पीड में उनकी चूत में धक्के लगा रहे थे। उनका 9 इंच का लण्ड माँ की चूत में पूरा पेवस्त हो रहा था। माँ अपनी टांगें ऊपर किए हुए बिस्तर पर पड़ी लम्बी-लम्बी साँसें भर रहीं थीं।
 
तकरीबन आधे घंटे तक सूरज अंकल शीला की माँ को लण्ड डालकर चोदते रहे.. उसके बाद वे दोनों शांत हो गए। इसी के साथ उनकी पायलों की ‘छुन-छुन’ भी बंद हो गई थी। शायद सूरज अंकल झड़ चुके थे।

वह दोनों काफ़ी देर बिस्तर पर नंगे ही पड़े रहे.. उसके बाद फिर वो दूसरी बार के लिए तैयार हुए।

कुछ देर बाद उन्होंने माँ को फिर से चूमना-चाटना शुरू कर दिया। माँ ने भी सूरज अंकल के लण्ड को मुँह में लेकर उनके लौड़े को चूसना शुरू किया। पहली चुदाई के सारे वीर्य साफ़ को किया।

सूरज अंकल माँ को फिर से प्यार करने लगे। उनके दूध दबाने शुरू कर दिए। अब जय अंकल का लौड़ा फिर से हाहाकारी हो गया था। इस बार उन्होंने माँ को उल्टा किया.. मतलब अंकल ने माँ को कुतिया बना दिया।

‘ऐसे पीछे नहीं सूरज…’

‘तुम जानती हो मुझे कुतिया बना कर तुम्हारी गाण्ड मारना बहुत अच्छा लगता है.. मनिषा..’

सूरज अंकल ने अपना मूसल माँ की गाण्ड के छेद में लगाया और उनके चूतड़ों पर एक थपकी दी।

शीला सोच भी नहीं सकती थी कि उसकी माँ आज पूरी रंडी बनी हुई थीं।

शीला की माँ समझ गईं कि अब ये थपकी देने का मतलब है कि उनकी गाण्ड में लौड़े की शंटिंग शुरू होने वाली है। उन्होंने खुद को गाण्ड मराने के लिए तैयार कर लिया था।

सूरज अंकल ने माँ की गाण्ड में शॉट मारा.. ‘आआह्ह्ह.. धीरे-धीरे सूरज..’

‘बस बस मनिषा.. हो गया..’

माँ के हलक से एक घुटी सी चीख निकली.. सूरज अंकल का हाहाकारी लण्ड माँ की चूत की सहेली उनकी गाण्ड में पूरा घुस चुका था।

मनिषा- प्लीज सूरज.. धीरे-धीरे दर्द हो रहा है..

माँ के चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था।

‘क्यों.. क्या तुम्हारा पति तुम्हारी गाण्ड नहीं मारता हैं?’

‘नहीं.. वह गाण्ड मारने के शौक़ीन नहीं हैं.. मुझे इन्हीं धक्कों का और तुम्हारे लण्ड का बड़ी बेसब्री से इन्तजार था। मुझे मालूम था सूरज कि तुम्हारा लौड़ा इतना मज़ा देता है.. आह्ह.. चोदो मुझे और जोर से चोदो..’

सूरज अंकल माँ के ऊपर कुत्ते जैसे चढ़े थे.. माँ की गाण्ड पर जैसे ही चोट पड़ती.. उनके दोनों चूचे बड़ी तेजी से हिलते। सूरज अंकल ने उनके हिलते हुए दुद्धुओं को अपने हाथों से पकड़ लिया.. जैसे सूरज अंकल ने माँ की चूचियों का भुरता बनाने की ठान ली हो।

उनकी गाण्ड को करीब दस मिनट तक ठोकने के बाद वे माँ की पीठ से उतरे और फिर उन्होंने माँ को चित्त लेटा दिया। अब उन्होंने माँ की कमर के नीचे तकिया लगाया और उनके पैर फैला कर उनकी चूत में अपने मूसल जैसे लौड़े को घुसेड़ दिया।
 
माँ भी नीचे से अपनी कमर उठा कर थाप दे रही थीं, माँ के मुँह से अजीब सी आवाजें निकलने लगीं थीं- चो..द.. सूरज.. और..ज्जोर.. स्से..धक्के.. मारर.. मेरेरेरे.. राज्ज्ज्ज..जा !

और फिर वो अचानक शिथिल पड़ गईं.. माँ झड़ चुकी थीं।

सूरज अंकल ने भी तूफानी गति से धक्के मारते हुए उनकी चूत में अपने लण्ड का लावा छोड़ दिया।

उन दोनों की चुदाई देखकर शीला की भी चूत गीली हो गई थी.. उसने अपनी उंगली से अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया था।

शीला को मालूम था कि आज सूरज अंकल माँ को देर तक चोदेंगे.. शीला को महसूस किया कि जब चुदाई होती है.. तो फिर उन दोनों को.. समय की तो जैसे सुध ही नहीं रहती है।

सूरज अंकल का इंजन अभी माँ की चूत में शंटिंग कर रहा था। शीला की आँखें मुंदने लगी थीं.. कुछ देर बाद वह अपने बेड पर आकर सो गई।

अब तो अंकल और माँ के बीच के सभी परदे शीला के सामने खुल चुके थे.. माँ भी अपनी पूरी मस्ती से अपनी चूत कि चीथड़े उड़वाने में लग चुकी थीं।

कुछ देर बाद शीला जब उठी.. तो देखा कि सूरज अंकल शीला के साथ ही लेटे थे। वह उसे पूरी तरह से चिपटाए हुए थे।

शीला ने अंकल से पूछा- माँ कहाँ हैं?

अंकल- वह तो बाजार चली गईं।

‘ठीक है.. मैं आपके लिए चाय बना दूँ?’

अंकल ने सिगरेट सुलगाते हुए ‘हाँ’ में सिर हिला दिया था। थोड़ी देर बाद शीला चाय लेकर आ गई थी। अंकल में उसे पास में बैठने के लिए इशारा किया।

शीला वहीं उनके पास बैठ गई।

‘ कुछ देर पहले तुम सो रहीं थी या जाग रही थीं?’ अंकल ने प्यार से शीला के सिर पर हाथ फेरते हुए सवाल किया।

अचानक इस तरह के सवाल से शीला सकपका गई थी। अंकल को शायद ये मालूम पड़ गया था कि माँ और उनकी चुदाई का शीला ने पूरा नजारा देखा है।

‘देखो शीला बेटी.. मैं तुम्हारा अंकल हूँ.. तुम्हारी माँ का ख्याल रखना मेरा फ़र्ज़ है.. तुम बड़ी हो गई हो.. समझदार हो.. मैं जानता हूँ तुम हमदोनों की चुदाई देख रही थी।अगर तुम मुझे खुश कर दो तो तुम्हे बहुत बड़ा सरप्राइज दूंगा।तुम्हारे लिए एक स्कूटी और एक बढ़िया स्मार्ट फोन तुम्हे गिफ्ट दूंगा। तुम्हे कोई प्रॉब्लम भी नहीं होगा।इस बात को समझ सकती हो।’

शीला ने बिना कोई जवाब दिए अपना सिर शर्म से नीचे झुका लिया था।
 
‘वैसे कितने साल की हो गई हो तुम?’

‘पिछले महीने में 20 साल की..’ शीला ने धीरे से शरमाते हुए जवाब दिया था।

अंकल ने शीला को अपने सीने से लगा लिया- बड़ी हो गई है मेरी बच्ची.. तू फ़िक्र मत कर.. वैसे तुम कॉलेज कैसे जाती हो।

कभी रिक्शा से या कभी बस से जाती हूँ । शीला ने बताया।

अंकल : देखो बेटी । मैं तुम्हारे लिए एक स्कूटी खरीद देता हूँ।फिर तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। इसके लिए

मैं तुम्हारी माँ से बात करता हूँ..

अंकल ने मुझे गले लगाये हुए ही शीला की पीठ पर सहलाते हुए कहा था। शीला किसी मासूम बच्चे की तरह उनसे चिपकी हुई थी।

अंकल ने शीला को अपनी ओर खींचा और अपनी गोद में झटके से खींच लिया.. अब दोनों बिस्तर पर गिर गए।

शीला बुरी तरह घबरा गई.. वह हल्की सी आवाज में बोली- अंकल प्लीज मुझे जाने दो..

‘कुछ नहीं होगा तुझे मेरी गुड़िया रानी..’

अंकल शीला के कंधों पर किस करने लगे.. शीला को अच्छा लग रहा था.. परन्तु शर्म भी आ रही थी.. क्यूंकि वे उसके अंकल थे।

वह छूटने की कोशिश करने लगी.. परन्तु अंकल ने शीला को पीछे से जकड़ रखा था।

अचानक उनका हाथ शीला को अपनी टांगों के बीच महसूस हुआ। अंकल शीला की मासूम योनि को मसल रहे थे। उसे बहुत अच्छा लग रहा था.. परन्तु थोड़ा अजीब भी.. क्यूंकि यह सब अंकल के साथ पहली बार हो रहा था।

अंकल ने शीला को मुँह के बल बिस्तर पर लिटा लिया और उसके ऊपर लेट कर उसकी पीली जालीदार कुर्ती की ज़िप खोल कर उसकी पीठ पर चुम्बन करने लगे। शीला चुपचाप सिसकारियाँ भर रही थी।

अंकल ने शीला के छोटी छोटी चूचियों को मसलना शुरू कर दिए.. शीला के चूतडों पर उसे उनके लौड़ा का दबाव साफ़ महसूस हो रहा था। नीचे उसकी योनि में कुलबुलाहट सी होने लगी थी। योनि को और साथ में भगांकुर को मसलवाने को मन कर रहा था।

फिर अंकल ने शीला की काली चूड़ीदार पजामी नीचे खिसका दी और उसकी गुलाबी रंग की चड्डी की एक झटके में नीचे खिसका लिया। शीला को शर्म सी महसूस हो रही थी परन्तु आनन्द भरी सनसनाहट में लिपटी..वह चुपचाप लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी। उसे लग रहा था कि उसकी योनि में कुछ खुजली हो रही है.. उसे मिटने के लिए वह कुछ अन्दर लेने को मचल रही थी।

शीला को सीधा करके अंकल की उंगली अब आसानी से उसकी गुलाबी चूत में जा रही थी। वह बहुत जोर से सिसकारियाँ ले रही थी ‘उन्नन्नह्हह.. आअह्हह.. ऊऊह्ह. आहन्न.. आहऊर चूसो..।
 
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