• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

परिवार(दि फैमिली) complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
फिर सूरज अंकल ने शीला के छोटे-छोटे संतरों को चूसना छोड़ कर होंठों का किस लेना शुरू कर दिया- तू तो मेरी गुड़िया रही है बेटी.. मैं तो कब से तेरे पकने का इंतज़ार कर रहा था.. आआह्ह्ह..

अंकल ने उसे चूमते हुए ख़ुशी ज़ाहिर की।

कुछ देर के बाद शीला पूरी तरह से गर्म हो गई। फिर अंकल ने अपना लोअर खोला और अपना लण्ड उसके हाथ में थमा दिया। उनका लण्ड अब तन कर पूरा 90 डिग्री का हो गया था।

शीला पहले तो शरमाई.. लेकिन कुछ देर के बाद जब उन्होंने फिर से लण्ड पकड़ाया.. तो वह थोड़ा खुल गई।

अंकल ने बोला- इसे सहलाओ और आगे-पीछे करो।

शीला वैसा ही करने लगी।

अंकल ने फिर शीला की गीली चूत में एक उंगली डाल दी। वह जोर से ‘आह्ह्ह..’ करके सिस्कार उठी। कुछ देर के बाद अंकल ने शीला की चूड़ीदार पजामी उतार दिया।

‘वाह.. क्या कमसिन सी पिंक.. बिना बाल की चूत है.. आज तो मैं तुझे पूरी जवान बनाऊंगा.. मेरी गुड़िया रानी..’

अंकल ने हाँफते हुए कहा।

शीला की चूत पूरी भीगी हुई थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.. हल्का सा रोंया ही अब तक आया था। उसकी चूत पूरी पावरोटी की तरह फूली हुई थी।

फिर अंकल ने शीला को अपना लण्ड चूसने के लिए बोला.. उसने मना कर दिया।

अंकल ने बोला- कुछ नहीं होता..

शीला बोलने लगी- नहीं.. मुझे अच्छा नहीं लग रहा है..

‘देखो इस तरह से चूसो..’

यह कहते हुए जय अंकल ने शीला की चूत को चूसना शुरू कर दिया।

शीला चिल्लाने लगी- आह्हह्हह्हह.. अंकल नहीं.. बस करो..

अंकल अपनी जीभ से उसे चोद रहे थे.. शीला के मुँह से सिसकारियाँ फूट रही थीं ‘अंकल आह्ह.. मेरी चूत में आग लग रही है.. अहह्ह्ह.. कुछ करो..’

वे लगातार शीला की चूत को चूसते रहे।

शीला जोर से चिल्ला रही थी- और जोर से.. आह्ह..शीला अपने हाथ से उनके सिर को अपनी चूत के ऊपर खींच रही थी। अपने पैरों को कभी ऊपर तो कभी दोनों जांघों को जोर से दबा रही थी.. कभी-कभी उसकी साँसें फूल जाती थीं।

कुछ देर के बाद शीला की चूत ने पानी छोड़ दिया.. अंकल ने सारा का सारा पानी पी लिया।
 
शीला बिस्तर पर नंगी निढाल पड़ी थी। अंकल शीला के गोरे दुबले-पतले नाज़ुक जिस्म को देख रहे थे। वह जोर से हाँफ़ रही थी.. जैसे कोई कई मील से दौड़ कर आई होऊँ।

‘डरती है मेरी गुड़िया रानी.. अंकल से डरती है? कुछ हुआ मेरी बेबी.. मज़ा आया ना?’

अंकल ने मुझे सीधे लिटा कर प्यार से कहा।

शीला ने हाँ में सिर हिलाया।

अब अंकल का मुँह उसके सामने था.. उनका चेहरा लाल हो चुका था। अंकल ने अपने इनर को उठाया.. लोअर नीचे सरका कर अपने लौड़े को बाहर निकाला।

शीला को थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था.. पर कामोत्तेजना बहुत हो रही थी। अंकल ने उसकी टांगें फैला दीं और खुद टांगों के बीचों-बीच आ गए।

उन्होंने लौड़े पर थूक लगाया और योनिद्वार के ठीक बीचों-बीच शीला को उनका लौड़ा महसूस हुआ। उन्होंने शीला के दोनों घुटनों को अपने हाथों से थामा और जोर का एक धक्का लगाया ‘आआआ.. ईईई आश्स्श्श्श.. माँ….

शीला की तो जैसे जान ही निकल गई..वह छूटने के लिए तड़पने लगी। नीचे उसकी चूत में जलन सी हो रही थी।

‘धीरे से.. धीरे से.. कुछ नहीं होगा मेरी गुड़िया रानी को..’

यह कहते हुए अंकल शीला के कमसिन छोटी छोटी चुचियों को मसलने लगे और उसे चूमने लगे।

पहली बार शीला की चूत में किसी इतना मोटा लण्ड गया था। कॉलेज में उसे कई सारे लड़के उसे लाइन मारते थे.. लेकिन उसने सोचा नहीं था कि यह सौभाग्य सूरज अंकल को मिलेगा।

लगभग 5 मिनट में शीला का दर्द कुछ ख़त्म हुआ.. तो उसे अच्छा लगने लगा और वह खुद ही कमर हिलाने लगी और कूल्हे उठाने लगी।

अंकल ने उसकी कमर के नीचे तकिया लगाया और हल्के-हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए और लगभग दो मिनट में उनकी रफ्तार बहुत तेज हो गई।

अब शीला को भी बहुत मजा आ रहा था.. उसकी चूत में मीठी सी चुभन मुझे आनन्द भरी टीस दे रही थी।

लगभग 7-8 मिनट तक धक्के लगाने के बाद शीला को चरमोत्कर्ष प्राप्त होने लगा और उसकी चूत के अन्दर संकुचन सा महसूस हुआ। मुझे योनि के अन्दर कुछ रिसता हुआ सा महसूस हुआ.. अंकल ने लौड़ा झटके से बाहर निकाला और सारा वीर्य शीला की चूत और उसके पेट पर गिरा दिया.. और उसके ऊपर गिर गए।
 
वे झड़ चुके थे और लम्बी-लम्बी सांसें लेने लगे।

शीला चूत में थकान महसूस हो रहा था..

तब अंकल ने पूछा-मज़ा आया बेटी।

शीला शरमाने लगी।उसने चड्डी चूत पर चढ़ा ली।

कुछ देर बाद अंकल उसके छोटे-छोटे चूतड़ों को मसलने लगे और फिर से उसकी चड्डी को कमर तक खिसका दिया। शीला आँखें बंद करके चुपचाप लेटी हुई थी।

अंकल अब उसके पीछे आ गए थे। उनका लौड़ा उसकी चूत में दुबारा घुसने के लिए तैयार था..इस बार अंकल ने शीला को बेड पर कुतिया बना दिया और पीछे से अपना 9 इंच लंबा लंड शीला की छोटी सी बुर में पेल दिए।एक ही झटके में शीला की कमसिन चूत में इतना मोटा लंड घुसने पर शीला कसमसाने लगी लेकिन शीला की चूत गीली थी इसलिए उसे ज्यादा दर्द नहीं हुआ।कुछ ही धक्के मारने के बाद सूरज को बहुत मज़ा आने लगा।वह अपनी पूरी ताकत के साथ शीला को पेलने लगा।

आह बेटी कितनी गरम और टाइट चूत है तेरी।आह गुड़िया जी चाहता है दिन रात अपना लंड तेरी टाइट चूत में पेलता रहूँ।जोर जोर से पेलते हुए सूरज बोला।

आह अंकल चोदो मुझे मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है।शीला भी कई दिनों से प्यासी थी इसलिए वह भी अपने अंकल से चुदते समय अपना लाज शर्म भूल चुकी थी।

अब सूरज शीला को बुरी तरह से चोद रहा था।एक ही घंटे में उसने शीला पर चुदाई के कितने आसान आजमा लिए थे फिर से अंकल शीला को कुतिया बनाकर चोद रहे थे शीला भी अपनी गांड पीछे करके चुदवा रही थी वह झड़ने वाली थी इसलिए वह अपनी गांड अंकल के लंड पर धकेल रही थी।अंकल भी अब झड़ने वाले थे दोनों एक साथ ही झड़ने लगे।सूरज अंकल ने अपना सारा माल शीला की चूत में ही छोड़ दिया।

शीला एकदम से थक कर चूर हो गई थी। ऐसा लग रहा था कि न जाने कितनी दूर से दौड़ लगा कर आई हो।

कुछ देर अंकल का लण्ड उसकी चूत में ही पड़ा रहा.. अंकल ने अपनी आँखें खोलीं और उसके सुनहरे घने बालों में अपना दुलार भरा हाथ फिराया।फिर दोनों एक-दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे।

उन्होंने अपना लण्ड शीला की चूत से बाहर खींचा..

फिर अंकल ने लोअर पहना और बाथरूम में घुस गए..

शीला चुपचाप हल्की सी आँख खोलकर उनको देख रही थी.. जैसे ही वो अन्दर घुसे.. वह जल्दी-जल्दी अपनी पजामी ऊपर खींची.. कपड़े और बाल ठीक-ठाक किए और जल्दी से वहाँ से बाहर निकल आई.. क्यूंकि उसका मन अंकल से नजर मिलाने को नहीं हो रहा था।

कुछ देर बाद सूरज अंकल उसके नजदीक आए और उन्होंने उसके गालों पर एक ज़ोरदार पप्पी ली और 2 दिन बाद वापस आने का वादा करके चले गए।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
अगले दिन नरेश बाथरूम जा रहा था तभी पिंकी के कमरे से गुजरते हुए उसकी नज़र खुली खिड़की से अंदर चली गई।अंदर उसकी छोटी बहन पिंकी अपने कपडे चेंज कर रही थी।इस समय वह एक छोटी सी ब्रा और पेंटी में खड़ी थी।नरेश अपनी छोटी बहन की खिलती जवानी को देखकर अपने होंठो पर जीभ फेरने लगा।पिंकी की चूचियां अभी अर्धविकसित थी जिसे देखकर नरेश के मुँह में पानी आ गया।वह अपनी छोटी बहन की कमसिन जवानी को भोगने का उपाय लगाने लगा।

बहुत सोचने के बाद नरेश ने एक दोस्त की आईडी पर एक मोबाइल सिम लिया और whatsapp पर अपनी छोटी बहन के नंबर पर भाई बहन की चुदाई की चार पांच कहानियाँ भेज दी।

उस समय पिंकी नरेश के पास ही बैठी हुई थी, अनजान नंबर से आये मैसेज को देख कर उसने चेक किया तो उसमें नरेश की भेजी हुई सेक्स कहानी थी।

पिंकी ने नरेश के पास बैठे बैठे ही थोड़ी सी पढ़ी तो वो शर्म से लाल हो गई, उसने मोबाइल बंद किया और उठ कर अपने कमरे में चली गई।

नरेश जानता था कि पिंकी वो कहानी जरूर पढ़ेगी, उसने चेक करने के लिए पिंकी के कमरे के दरवाजे के पास जाकर देखा तो पिंकी सच में मोबाइल पर वो कहानियाँ पढ़ रही थी और उसकी आँखें वासना की लाली से भर गई थी।

नरेश को अपनी चाल कामयाब होती नजर आ रही थी।

पिंकी कहानियाँ पढ़ती रही और नरेश छुप कर उसको देखता रहा। पिंकी कहानियाँ पढ़ते पढ़ते गर्म होने लगी थी तभी तो उसका हाथ अपनी स्कर्ट के अन्दर जा चुका था और वो अपने हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी।

एक बार तो नरेश के मन में आया कि लोहा गर्म है, मार दे हथोड़ा…

पर जल्दबाजी घातक हो सकती थी, उसने सब्र करना ठीक समझा।

थोड़ी देर बाद उसने हैलो का मैसेज पिंकी के नंबर पर भेजा तो थोड़ी देर बाद पिंकी का भी मैसेज आया- हू आर यू?

नरेश कुछ देर सोचता रहा फिर उसने भी मैसज किया- मैं आपका दीवाना हूँ। जब भी आपको देखता हूँ आपको अपनी बाहों में भरने को जी चाहता है और आपको चूमने को जी चाहता है और आपके साथ एक बार चुदाई करने का जी चाहता है
 
पिंकी का जवाब आया- बकवास बंद करो, जब मैं आपको जानती ही नहीं तो आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे ऐसे मैसज करने की। अगर दुबारा ऐसा मैसज किया तो मैं अपने भाई को बोल दूंगी।

नरेश- हा हा हा… वैसे तुम्हें कहानियाँ कैसी लगी?

पिंकी का कोई जवाब नहीं आया।

नरेश ने दुबारा फिर मैसज किया कि अगर पिंकी और कहानियाँ पढ़ना चाहे तो वो उसे और भेज देगा।

पिंकी का फिर कोई जवाब नहीं आया।

नरेश ने एक और कहानी पिंकी के नंबर पर भेज दी।

पिंकी ने फिर से कहानी पढ़नी शुरू कर दी।

इस बार नरेश ने देखा की पिंकी ने अपनी पेंटी उतार दी और स्कर्ट को भी ऊपर कर लिया और कहानी पढ़ते पढ़ते एक ऊँगली अपनी चूत में डाल कर हिलानी शुरू कर दी।

नरेश ने चुपचाप से उसकी ऐसा करते हुए एक वीडियो बना लिया।

अगले दो दिन तक नरेश ने कोई मैसज नहीं भेजा।

तीसरे दिन नरेश के पास पिंकी का हैलो का मैसेज आया।

नरेश का दिल जोर जोर से धड़कने लगा, उसने हिम्मत करके हैल्लो का जवाब दिया।

पिंकी का मैसेज आया कि अगर उसके पास और कहानियाँ है तो वो उसे भेज दे।

नरेश ने पूछा कि क्या उसे वो कहानियाँ पसंद आई तो पिंकी ने हाँ में जवाब दिया साथ ही पूछा कि क्या वो सारी कहानियाँ सच हैं?

नरेश ने हाँ बोला तो पिंकी पूछने लगी कि कोई लड़की कैसे अपने सगे या कजिन भाई से ऐसे सेक्स कर सकती है।

नरेश ने लिख दिया कि वो भी अपनी सगी बहन के साथ सेक्स करता है क्यूंकि यह बिल्कुल सेफ है, ना तो बाहर मुँह मारने की जरूरत और घर की इज्जत घर में ही रह जाती है।

पिंकी ने जवाब में कमीना लिखा।

तो नरेश ने बदले में पूछ लिया कि क्या कहानियाँ पढ़ कर पिंकी का मन नहीं किया कि वो भी अपने भाई के साथ चुदाई के मज़े ले।

पिंकी ने मना कर दिया और बोली कि उसे सेक्स में कोई रूचि नहीं है।

नरेश ने पूछा कि अगर रूचि नहीं है तो वो और कहानियाँ क्यों मांग रही है।

तो पिंकी ने जवाब दिया कि सिर्फ टाइमपास के लिए।
 
नरेश भी अब कमीनेपन पर आ गया था, वो चुपचाप पिंकी के पास जाकर बैठ गया और उसने पिंकी से मेसेज में पूछ लिया कि क्या पिंकी ने कभी अपने भाई का लंड देखा है?

मैसेज पढ़ते ही पिंकी ने नरेश की तरफ देखा और फिर जवाब लिख दिया कि ‘नहीं उसने नहीं देखा है।’

नरेश ने पूछा कि क्या तुम्हारा का दिल करता है अपने भाई का लंड देखने का?

तो पिंकी ने मना कर दिया।

नरेश पिंकी के पास बैठा हुआ पिंकी के चेहरे के हावभाव पढने की कोशिश कर रहा था।

स्पष्ट था कि पिंकी मैसेज पढ़ कर गर्म हो रही थी और बार बार अपने भाई की तरफ और भाई के लोअर में बने तम्बू की तरफ देख रही थी।

पिंकी नहीं जानती थी की खुद उसका भाई उसके पास बैठ कर ये कमीनापन कर रहा था।

नरेश ने फिर से एक मैसेज किया कि अगर उसका भाई उसको चोदना चाहे तो क्या वो उसको चोदने देगी?

पिंकी ने दो तीन गालियाँ लिख कर वापिस भेजी और मोबाइल से नेट बंद कर दिया।

मोबाइल बंद होते ही नरेश उठ कर पिंकी के बिल्कुल पास बैठ गया और पिंकी के बदन के साथ सटते हुए उसको अपने फ़ोन में एक फनी विडियो क्लिप दिखाने लगा।

पर उसने गौर किया की पिंकी का ध्यान मोबाइल पर कम नरेश के टावर पर ज्यादा है।

उसने बेशर्मी से पिंकी के सामने ही अपने लंड को पकड़ कर नीचे दबाया जैसे तो उसको सेट करने की कोशिश कर रहा हो।

नरेश का लंड कम से कम आठ इंच का लम्बा और लगभग अढाई इंच का मोटा था। लोअर में तम्बू बना हुआ साफ़ नजर आ रहा था।

नरेश ने जब अपने लंड को मसला तो पिंकी ने एकदम से अपनी नजरे दूसरी तरफ घुमा ली और उठ कर अपने कमरे की तरफ तेज कदमों से चली गई।

नरेश की लगाईं हुई आग अब भड़कने लगी थी।

पिंकी के जाने के कुछ देर बाद नरेश उठ कर पिंकी के कमरे की तरफ गया तो दरवाजा अन्दर से बंद था। पर नरेश जानता था कि कहाँ से पिंकी के कमरे के अन्दर झाँका जा सकता है।

वो जल्दी से वहाँ पहुंचा तो नरेश की आशा के अनुरूप पिंकी अपनी चूत ऊँगली से रगड़ रही थी।

घर में अगर बाकी लोग ना होते तो शायद नरेश उसी समय पिंकी को चोदने उसके कमरे में पहुँच जाता। पर अभी घर पर मम्मी और शीला भी थे।
 
नरेश ने फिर से दो तीन दिन पिंकी को कोई मैसज नहीं किया और पिंकी के मैसेज का इंतजार करने लगा।

तीसरे दिन पिंकी का मैसज आया की कहानी भेजो।

नरेश ने फिर से उसको दो-तीन कहानियाँ भेज दी।

पिंकी ने फिर से कहानियाँ पढ़ी और फिर से अपनी चूत में ऊँगली कर ली। अब नरेश का मन मचलने लगा था पिंकी की कुँवारी चूत में अपना लंड घुसाने को।

बहुत हिम्मत करके उसने पिंकी को चेक करने की सोची। शाम के समय जब शीला और मम्मी रसोई के काम में व्यस्त थी तो नरेश ने देखा पिंकी मोबाइल पर कुछ कर रही थी, शायद कहानी ही पढ़ रही थी।

नरेश पिंकी के कमरे में गया और पिंकी से बिलकुल चिपक कर बैठ गया और उसने अपना हाथ पिंकी के कंधे पर रखा और पिंकी से बोला- क्या बात है पिंकी आजकल सारा सारा दिन मोबाइल से ही चिपकी रहती हो, भाई से बात करने का भी समय नहीं है तुम्हारे पास?

पिंकी ने घबरा कर मोबाइल साइड में रख दिया, उसने कुछ जवाब नहीं दिया पर नरेश ने अपनी छोटी बहन के शरीर में कुछ कम्पन सी महसूस की।

पिंकी नरेश की बाहों में सिमटती जा रही थी, नरेश के स्पर्श ने शायद पिंकी की पेंटी में हलचल मचा दी थी।

नरेश ने अपना हाथ पिंकी के कंधे से सरका कर उसकी बगल में रख दिया और पिंकी को अपनी और खिंच कर बिलकुल अपनी बाहों में भर लिया।

ऐसा करने से उसका हाथ पिंकी की चूची पर पड़ गया।

नरेश को जब पिंकी की मुलायम चूची का एहसास हुआ तो नरेश ने चूची को हल्के से दबा दिया। पिंकी अपनी चूची पर अपने भाई का हाथ महसूस करते ही उचक पड़ी और एकदम से नरेश से अलग होकर रसोई में चली गई।

उस दिन के बाद से अब नरेश हर समय पिंकी के बदन को छूने की कोशिश करता। शुरू शुरू में तो पिंकी झट से उठ कर वहाँ से चली जाती थी पर जब ये हर रोज होने लगा तो पिंकी को भी शायद ये अच्छा लगने लगा था, अब वो आराम से बैठी रहती थी या यूँ कहिये की वो अब नरेश से कुछ ज्यादा ही चिपक कर बैठी रहती थी।

नरेश भी कभी उसके गाल कभी माथे पर चूमता और बीच बीच में पिंकी को चूची को स्पर्श करता या हल्के से दबा देता।

वो दोनों ये सब अपनी मम्मी और शीला की निगाह से बचा कर करते थे, अब दोनों को ही एक दूसरे का स्पर्श अच्छा लगने लगा था। ऐसे ही करीब चार पाँच दिन निकल गए।
 
और उस दिन…

नरेश शाम को चार बजे अपने कॉलेज से वापिस आया तो देखा कि घर पर कोई नहीं था, वो पहले अपनी मम्मी के कमरे में गया, वो वहाँ नहीं थी।

फिर शीला का कमरा देखा तो वो भी नहीं थी।

आखिर में जब वो पिंकी के कमरे के पास पहुँचा तो पिंकी मोबाइल पर शायद कोई कहानी पढ़ रही थी और उसने स्कर्ट उतार कर साइड में रखी हुई थी, पेंटी भी जांघो से नीचे थी, एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ की ऊँगली चूत में थी।

नरेश को एक दम से अपने कमरे में देख कर पिंकी घबरा गई और उसने जल्दी से अपनी पेंटी ऊपर की और स्कर्ट उठा कर जल्दी से बाथरूम में घुस गई।

नरेश ने पिंकी को आवाज दी पर पिंकी ने कोई जवाब नहीं दिया।

‘पिंकी… पिंकी, अगर तुम बाहर नहीं आई तो मैं सब कुछ मम्मी को बता दूंगा.. एक मिनट में बाहर आओ वरना…’

पिंकी ने डरते हुए दरवाजा खोला, वो स्कर्ट पहन चुकी थी, वो घबरा कर रोने लगी।

नरेश ने उसका हाथ पकड़ा और उसको लेकर बेड पर बैठ गया- यह क्या कर रही थी पगली…?

‘भैया… प्लीज मम्मी को कुछ मत बताना… यह गलती दुबारा नहीं होगी!’ कह कर पिंकी जोर जोर से रोने लगी।

नरेश को तो जैसे सुनहरा मौका मिल गया था पिंकी को अपना बनाने का, उसने पिंकी को अपने सीने से लगा लिया और चुप करवाने के बहाने पिंकी के शरीर पर अपना हाथ घुमाने लगा- कोई बात नहीं पिंकी.. इस उम्र में ये सब हो जाता है… तू तो मेरी अच्छी बहन है ना… मैं किसी को कुछ नहीं बताउँगा, वैसे मम्मी और शीला कहाँ गए है?

‘वो मार्किट में गए हैं कुछ सामान लेने…’

पिंकी चुप हुई तो नरेश ने पिंकी का चेहरा ऊपर उठाया और उसकी आँखों से बहते आँसुओं को अपने होठों से चूम लिया। पिंकी की आँखें बंद हो गई थी।

नरेश ने मौके का फायदा उठाया और अपने होंठ अपनी छोटी बहन के जवान रसीले होंठों पर रख दिए।

पिंकी ने छूटने की कोशिश की पर नरेश की मजबूत पकड़ से छुट नहीं पाई, नरेश अब पिंकी के रसीले होंठो का रस पीने में लगा था।

कुछ देर छूटने के लिए छटपटाने के बाद पिंकी ने भी समर्पण कर दिया और अब उसका शरीर ढीला पड़ने लगा था। नरेश ने पिंकी के कुँवारे होंठ चूमते हुए एक हाथ पिंकी की मुलायम अनछुई चूची पर रख दिया और मसलने लगा।

पिंकी की साँसें तेज हो गई थी और वो भी अब अपने बड़े भाई से चिपकती जा रही थी।
 
नरेश ने पिंकी को खड़ा किया और उसके टॉप को ऊपर करने लगा तो पिंकी ने नरेश को रोकने की कोशिश की- ये सब ठीक नहीं है भाई… हमें ऐसा नहीं करना चाहिए… आखिर हम बहन भाई हैं।

‘पिंकी, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ… और बहुत दिनों से तुम्हें अपना बनाने का सपना देख रहा हूँ… आज अगर मेरा सपना पूरा होने जा रहा है तो प्लीज मुझे मत रोको..’

पिंकी ‘नहीं भाई नहीं भाई’ करती रही पर नरेश ने उसकी एक ना सुनी और उसका टॉप उतार दिया।

पिंकी ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी, टॉप उतारते ही उसकी दोनों संतरे के साइज़ की तनी हुई चूचियाँ नरेश के सामने थी।

नरेश को तो जैसे कुबेर का खजाना मिल गया था, उसने कुछ देर पिंकी की दोनों चूचियों को अपने हाथों में मसला और फिर पिंकी की एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा।

पिंकी के जवान जिस्म को पहली बार किसी मर्द के हाथों का ऐसा मज़ा मिला था, वो मस्ती के मारे कांपने लगी थी।

नरेश बेड पर बैठे बैठे नीचे खड़ी पिंकी की चूचियाँ चूस रहा था और उसके हाथ पिंकी की नंगी पीठ पर, पिंकी की गदराए चूतड़ों पर घूम रहे थे।

चूचियाँ चूसते चूसते नरेश ने पिंकी की स्कर्ट खोल दी और स्कर्ट पल भर में ही पिंकी के कदम चूमने लगी।

स्कर्ट नीचे होते ही नरेश ने अपना एक हाथ पिंकी की कुंवारी चूत पर रख दिया।

पेंटी में कसी पिंकी की कुँवारी चूत भट्टी की तरह गर्म थी, पूरी पेंटी पिंकी की चूत से निकले कामरस से सराबोर हो रही थी।

नरेश नीचे घुटनों के बल बैठा और उसने पिंकी की टांगें खुली की और फिर अपना मुँह पिंकी की चूत पर लगा दिया और जीभ से चाटने लगा।

पिंकी की टांगें जवाब देने लगी थी, उससे अब खड़ा नहीं हुआ जा रहा था।

नरेश ने पिंकी की पेंटी को भी उसकी जांघों से नीचे खींच दिया।

पिंकी की हलके भूरे रोये वाली कुंवारी गुलाबी चूत देखते ही नरेश ने अपनी जीभ चूत पर लगा दी।

जीभ के पहले स्पर्श को महसूस करते ही पिंकी की चूत ने कामरस छोड़ दिया।

नरेश की जीभ कामरस का स्वाद महसूस करते ही और जोर जोर से चूत पर चलने लगी और सारा कामरस चाट गई।
 
Back
Top