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Guest
दिन में हुई चुदाई की हल्की सी टीस अभी भी पिंकी की चूत में थी, तभी तो जब नरेश ने चूत पर अपनी जीभ घुमाई तो पिंकी के चेहरे पर मस्ती और दर्द के मिलेजुले भाव नजर आ रहे थे।
नरेश पिंकी की चूत की पुतियों को अपनी उँगलियों से खोल खोल कर जीभ को अन्दर तक डाल डाल कर चाट रहा था। पिंकी भी मस्ती में जल बिन मछली की तरह कसमसा रही थी, सिसकारियाँ कमरे में एक मादक संगीत की तरह गूंजने लगी थी।
कुछ देर बाद पिंकी की चूत से कामरस निकलने लगा, अब वो लंड को चूत में लेने के लिए तड़पने लगी थी। नरेश भी अपनी प्यारी बहन की कामरस से सराबोर चूत को अपने लंड से चोद कर तृप्त करने के लिए बेताब था, उसने भी बिना देर किये अपना मूसल पिंकी की चूत के मुहाने पर लगाया और एक जोरदार धक्के के साथ लगभग दो-तीन इंच लंड चूत में दाखिल कर दिया।
पिंकी दर्द से तड़प उठी, उसकी चीख निकल जाती अगर नरेश ने समय पर अपना हाथ पिंकी के मुँह पर ना लगा दिया होता।
पिंकी की आँखों से आँसू टपक पड़े, कराहते हुए पिंकी ने दोनों हाथ जोड़ कर नरेश से लंड को बाहर निकालने की गुजारिश की।
नरेश को एक बार तो अपनी प्यारी बहन पर तरस आया पर चुदाई करते हुए रहम चूतिया लोग करते हैं, उसने बिना पिंकी की तरफ ध्यान दिए दो तीन जोरदार धक्के लगाए और पूरा लंड पिंकी की कमसिन चूत की गहराई में उतार दिया।
पिंकी छटपटा रही थी पर नरेश तो पिंकी की गर्म गर्म चूत का एहसास अपने कड़क लंड पर पाकर जन्नत की सैर कर रहा था।
उसे पिंकी के दर्द से ज्यादा अपने लंड को मिल रहे सुख और आनन्द का ख्याल था।
जानती पिंकी भी थी कि जो दर्द होना था हो चुका, अब तो अगले पल सिर्फ और सिर्फ मस्ती के है पर दर्द तो आखिर दर्द है।
नरेश ने कुछ देर लंड को ऐसे ही अन्दर डाल कर रखा और शांति से पिंकी के ऊपर लेट कर पिंकी के रसीले पतले होंठ चूमता रहा और अपने हाथों से पिंकी के संतरों को मसलता रहा।
पिंकी अब शांत हो गई थी- भाई… तुम बहुत गंदे हो… अपनी बहन का तुम्हें बिल्कुल भी ख्याल नहीं है… अगर आराम से करते तो तुम्हारा क्या जाता… मैं कोई भागी थोड़े ही जा रही थी… कितना दर्द कर दिया…
नरेश पिंकी की चूत की पुतियों को अपनी उँगलियों से खोल खोल कर जीभ को अन्दर तक डाल डाल कर चाट रहा था। पिंकी भी मस्ती में जल बिन मछली की तरह कसमसा रही थी, सिसकारियाँ कमरे में एक मादक संगीत की तरह गूंजने लगी थी।
कुछ देर बाद पिंकी की चूत से कामरस निकलने लगा, अब वो लंड को चूत में लेने के लिए तड़पने लगी थी। नरेश भी अपनी प्यारी बहन की कामरस से सराबोर चूत को अपने लंड से चोद कर तृप्त करने के लिए बेताब था, उसने भी बिना देर किये अपना मूसल पिंकी की चूत के मुहाने पर लगाया और एक जोरदार धक्के के साथ लगभग दो-तीन इंच लंड चूत में दाखिल कर दिया।
पिंकी दर्द से तड़प उठी, उसकी चीख निकल जाती अगर नरेश ने समय पर अपना हाथ पिंकी के मुँह पर ना लगा दिया होता।
पिंकी की आँखों से आँसू टपक पड़े, कराहते हुए पिंकी ने दोनों हाथ जोड़ कर नरेश से लंड को बाहर निकालने की गुजारिश की।
नरेश को एक बार तो अपनी प्यारी बहन पर तरस आया पर चुदाई करते हुए रहम चूतिया लोग करते हैं, उसने बिना पिंकी की तरफ ध्यान दिए दो तीन जोरदार धक्के लगाए और पूरा लंड पिंकी की कमसिन चूत की गहराई में उतार दिया।
पिंकी छटपटा रही थी पर नरेश तो पिंकी की गर्म गर्म चूत का एहसास अपने कड़क लंड पर पाकर जन्नत की सैर कर रहा था।
उसे पिंकी के दर्द से ज्यादा अपने लंड को मिल रहे सुख और आनन्द का ख्याल था।
जानती पिंकी भी थी कि जो दर्द होना था हो चुका, अब तो अगले पल सिर्फ और सिर्फ मस्ती के है पर दर्द तो आखिर दर्द है।
नरेश ने कुछ देर लंड को ऐसे ही अन्दर डाल कर रखा और शांति से पिंकी के ऊपर लेट कर पिंकी के रसीले पतले होंठ चूमता रहा और अपने हाथों से पिंकी के संतरों को मसलता रहा।
पिंकी अब शांत हो गई थी- भाई… तुम बहुत गंदे हो… अपनी बहन का तुम्हें बिल्कुल भी ख्याल नहीं है… अगर आराम से करते तो तुम्हारा क्या जाता… मैं कोई भागी थोड़े ही जा रही थी… कितना दर्द कर दिया…