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“बेटी कभी किसी ने इस छेद को प्यार किया है?” महेश अब ज्योति के गांड में उंगली अंदर बाहर कर रहे थे.
“आआी…ईईस्स्स्स… जी किसी ने कभी नहीं किया.” ज्योति अब समझ गयी थी कि अब उसके पिताजी उसकी गांड भी मारना चाहते थे.ज्योति को नहीं मालूम था कि पापा को गांड मारने का भी शौक है. अपने ही बाप से गांड मरवाने की बात सोच सोच कर ज्योति बहुत उत्तेजित हो गयी थी और उसकी चूत तो इतनी गीली थी कि रस बह कर उसकी टाँगों पे बह रहा था. आख़िर वही हुआ जिसका उसे अंदेशा था.
इधर महेश ज्योति की गांड में उंगली करते हुए बोले,
“ ज्योति बेटी हम तुम्हारे इस गुलाबी छेद को भी प्यार करना चाहते हैं.”
“हाय पिताजी आपको हमारे चूतड इतने पसंद हैं तो कर लीजिए जी भर के उस छेद से प्यार. आज के दिन मैं पूरी तरह से आपकी हूँ.”ज्योति बोली।
“शाबाश मेरी जान , ये हुई ना बात. हमे पता था की हमारी प्यारी बिटिया हमे गांड ज़रूर देगी. अब अपने ये लाजबाब चूतड थोडे से और ऊपर करो” ज्योति ने अपने चूतड ऊपर की ओर इस तरह उचका दिए कि उसके बाप का लंड आसानी से उसकी गांड में जा सके. पिताजी ने ज्योति की गांड से उंगली निकाली और नीचे झुक के अपनी जीभ उसकी गांड के छेद पे टीका दी. ज्योति तो वासना से इतनी भड़क उठी थी की अब और सहन नहीं हो रहा था. वासना के नशे में वो धीरे धीरे गांड चाट रहे थे और कभी कभी जीभ गांड के छेद में घुसेड देते. एक हाथ से वो मेरी चूत सहला रहे थे.
“सच बेटी तुम्हारी गांड बहुत ही ज़्यादा स्वादिष्ट लग रही है. तुम्हारी गांड में से बहुत मादक खुश्बू आ रही है.” ज्योति को आज तक ये बात समझ नहीं आई थी कि मरद लोगों को औरत की गांड चाटने में क्या मज़ा आता है. अब महेश ने ज्योति की चूत के रस में से सना हुआ लंड अपनी बेटी की कुँवारी गांड के छेद पे टिका दिया.
हाय राम ! ज्योति के पिताजी अब उसकी गांड मारने जा रहे थे. ज्योति भी कुतिया बनी उस पल का इंतज़ार कर रही थी जब उसके बाप का लंड उसकी कुँवारी गांड में प्रवेश करेगा.महेश ने अपनी बेटी के चूतरो को पकड़ के चौड़ा किया और साथ ही एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.
“आआी…ईईस्स्स्स… जी किसी ने कभी नहीं किया.” ज्योति अब समझ गयी थी कि अब उसके पिताजी उसकी गांड भी मारना चाहते थे.ज्योति को नहीं मालूम था कि पापा को गांड मारने का भी शौक है. अपने ही बाप से गांड मरवाने की बात सोच सोच कर ज्योति बहुत उत्तेजित हो गयी थी और उसकी चूत तो इतनी गीली थी कि रस बह कर उसकी टाँगों पे बह रहा था. आख़िर वही हुआ जिसका उसे अंदेशा था.
इधर महेश ज्योति की गांड में उंगली करते हुए बोले,
“ ज्योति बेटी हम तुम्हारे इस गुलाबी छेद को भी प्यार करना चाहते हैं.”
“हाय पिताजी आपको हमारे चूतड इतने पसंद हैं तो कर लीजिए जी भर के उस छेद से प्यार. आज के दिन मैं पूरी तरह से आपकी हूँ.”ज्योति बोली।
“शाबाश मेरी जान , ये हुई ना बात. हमे पता था की हमारी प्यारी बिटिया हमे गांड ज़रूर देगी. अब अपने ये लाजबाब चूतड थोडे से और ऊपर करो” ज्योति ने अपने चूतड ऊपर की ओर इस तरह उचका दिए कि उसके बाप का लंड आसानी से उसकी गांड में जा सके. पिताजी ने ज्योति की गांड से उंगली निकाली और नीचे झुक के अपनी जीभ उसकी गांड के छेद पे टीका दी. ज्योति तो वासना से इतनी भड़क उठी थी की अब और सहन नहीं हो रहा था. वासना के नशे में वो धीरे धीरे गांड चाट रहे थे और कभी कभी जीभ गांड के छेद में घुसेड देते. एक हाथ से वो मेरी चूत सहला रहे थे.
“सच बेटी तुम्हारी गांड बहुत ही ज़्यादा स्वादिष्ट लग रही है. तुम्हारी गांड में से बहुत मादक खुश्बू आ रही है.” ज्योति को आज तक ये बात समझ नहीं आई थी कि मरद लोगों को औरत की गांड चाटने में क्या मज़ा आता है. अब महेश ने ज्योति की चूत के रस में से सना हुआ लंड अपनी बेटी की कुँवारी गांड के छेद पे टिका दिया.
हाय राम ! ज्योति के पिताजी अब उसकी गांड मारने जा रहे थे. ज्योति भी कुतिया बनी उस पल का इंतज़ार कर रही थी जब उसके बाप का लंड उसकी कुँवारी गांड में प्रवेश करेगा.महेश ने अपनी बेटी के चूतरो को पकड़ के चौड़ा किया और साथ ही एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.