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परिवार(दि फैमिली) complete

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उसके पिताजी धीरे से कंचन की पीठ से चिपक कर लेट गये… उनका लंड खड़ा था… उसका स्पर्श कंचन की चूतड़ों की दरार पर हो रहा था, उसके सुपारे का चिकनापन कंचन को बड़ा प्यारा लग रहा था।

मुकेश कंचन की चूचियों को इतनी कसकर मसल रहे थे जैसे उखाड़ ही लेंगे। वह कंचन की चूचियों को मसलते हुए बोले- बेबी, कोल्ड क्रीम और टॉवल तो लेकर आ!

‘पिताजी, क्रीम क्यों?’

‘अरे लेकर आ… तब बताऊँगा!’

कंचन क्रीम और टॉवल ले बैडरूम में पहुंची, कंचन बहुत खुश थी, जानती थी कि उसके पिता ने क्रीम क्यों मंगाई है।

कमरे में पहुंची तो पिताजी बोले- आओ बेटी।

कंचन गुदगुदाते मन से अपने पिता के पास बैठ गई, पिताजी कंचन के पीछे आये और अपने दोनों हाथ उसकी कड़ी चूचियों पर लाये और दोनों को प्यार से

दबाने लगे। अपने पिताजी के हाथ से चूचियों को दबवाने में कंचन को बड़ा मजा आ रहा था।

मुकेश अपनी बेटी कंचन की कड़ी चूचियों को मुट्ठी में भरकर दबा रहे थे साथ ही दोनों घुंडियों को भी मसल रहे थे, कंचन मस्ती से भरी मजा ले रही थी।

तभी उसके पिताजी ने पूछा- बेटी, तुमको अच्छा लग रहा है?

‘हाय पिताजी, बहुत मजा आ रहा है।’

मुकेश ने कंचन की चूचियाँ मसलते हुए उसे कुतिया की अवस्था में आने को कहा तो कंचन को यकीन हो गया कि आज पिताजी अब लंड उसकी गांड में घुसाएँगे।

कंचन कुतिया बन गई, पीछे से आकर उसके पिता ने कंचन के संतरे जोर से पकड़ लिए और लंड उसकी गांड की दरार पर दबा दिया।

कंचन ने लंड को गांड ढीली कर के रास्ता दे दिया और उसके पिता के लंड का सुपारा एक झटके में छेद के अन्दर था।

‘पिताजी… हाय रे… मेरी गांड मार दी… फ़ाड़ दिया मेरी पिछाड़ी को…’ कंचन के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।

उसी समय अनिल अपने रूम से कंचन के रूम की तरफ जा रहा था।उसका मन भी कंचन को चोदने का था क्योंकि उसकी बहु को मासिक शुरू हो गया था। तभी उसे कंचन की चीख सुनाई दी।वह खिड़की दी दरार से अंदर देखने लगा।जहाँ मुकेश अपनी बेटी कंचन की गांड मार रहा था।कंचन की गांड चुदाई देखकर अनिल बहुत गरम हो गया और अपना लंड सहलाते हुए कंचन की लाइव चुदाई देखने लगा।
 
मुकेश का लंड अब कंचन की गांड की गहराइयों में उसकी सिसकारियों के साथ उतरता ही जा रहा था।

‘कंचन बेटी जो बात तुझमें है, तेरी मम्मी में नहीं है!’ पिताजी ने आह भरते हुए कहा।

लंड एक बार बाहर निकल कर फिर से अन्दर घुसा जा रहा था, हल्का सा दर्द हो रहा था। पर पहले भी कंचन गांड चुदवा चुकी थी।

अब मुकेश ने अपनी उंगली कंचन की चूत में घुसा दी थी और दाने के साथ उसकी चूत को भी मसल रहे थे। कंचन आनन्द से सराबोर हो गई, उसकी मन की इच्छा पूरी हो रही थी…।

‘कुछ मत बोलो पिताजी, बस चोदे जाओ… हाय कितना मज़ा आ रहा है… चोद दो अपनी बच्ची की गांड को…’ कंचन बेशर्मी पर उतर आई थी।

मुकेश का मोटा लंड तेजी से कंचन की गाँड में उतरता जा रहा था… अब मुकेश ने बिना लंड बाहर निकाले कंचन को उल्टी लेटा कर उसके भारी चूतड़ों पर सवार हो गये और हाथों के बल पर शरीर को ऊँचा उठा लिया और अपना लंड कंचन की मतवाली गाँड में पेलने लगे… उनका ये फ्री स्टाईल चोदना कंचन को बहुत भाया।

‘पिताजी, मेरी चूत का भी तो ख्याल करो या बस मेरी गांड ही मारोगे?’ कंचन ने अपने बाप से कहा।

‘मेरी मासूम बच्ची, मेरी तो शुरू से ही तुम्हारी गांड पर नजर थी… इतनी प्यारी सी गांड… उभरी हुई और इतनी गहरी… हाय मेरी जान… मेरा असल मकसद तेरी मासूम गुलाबी चूत और गांड चोदना ही था।’मुकेश ने अपनी बेटी की गांड मारते हुए कहा।

मुकेश ने लंड बाहर निकाल लिया और कंचन की चूत को अपना निशाना बनाया- जान… चूत तैयार है ना, ले ये गया मेरा लंड तेरी चूत में… हाय इतनी चिकनी और गीली…’ और उसका लंड पीछे से ही कंचन की चूत में घुस पड़ा।

एक तेज मीठी सी टीस चूत में उठी, चूत की दीवारों पर रगड़ से मेरे मुख से आनन्द की सीत्कार निकल गई।

‘हाय रे… पिताजी मर गई… मज़ा आ गया… और करो….’ उसके पिताजी का लंड गाँड मारने से बहुत ही कड़ा हो रहा था… उसके पिताजी अपने चूतड़ खूब उछाल उछाल कर कंचन की चूत चोद रहे थे।

कंचन की चूचियाँ भी बहुत कठोर हो गईं थीं, उसने पिताजी से कहा- पिताजी, मेरी चूचियाँ जोर से मसलो ना… खींच डालो!’

उसके पिताजी तो चूचियाँ पहले से ही पकड़े हुए थे पर हौले-हौले से दबा रहे थे। कंचन के कहते ही उन्हें तो मज़ा आ गया, उसके पिता ने कंचन की दोनों चूचियाँ मसल के रगड़ के चोदना शुरू कर दिया।
 
कंचन के दोनों चूतड़ों की गोलाईयाँ उसके पापा के पेड़ू से टकरा रहीं थीं… लंड चूत में गहराई तक जा रहा था… कंचन घोड़ी बनी हुई थी । उसके पिता घोड़े की तरह धक्के मार मार कर अपनी बेटी को चोद रहे थे।

कंचन के पूरे बदन में मीठी-मीठी लहरें उठ रहीं थीं,वह अपनी आँखों को बन्द करके चुदाई का भरपूर आनन्द ले रही थी, उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।

मुकेश के भी चोदने से लग रहा था कि मंज़िल अब दूर नहीं है, उनकी तेजी और आहें तेज होती जा रही थी… मुकेश ने अब अपनी बेटी के चूचुक जोर से खींचने चालू कर दिये थे। चूचक खिंचने और मसलने के साथ साथ मुकेश जोर जोर से अपनी बेटी को पेल रहा था।अब कंचन की चूत और गांड दोनों का छेद पूरा खुल गया था। मुकेश अब पूरा लंड बाहर निकाल लेता और कभी अपनी बेटी की गांड में तो कभी चूत में एक ही झटके में पूरा जड़ तक पेल देता। फिर कस कस के पेलने लगता।

आधे घंटे तक मुकेश अपनी बेटी को कुतिया बनाकर उसकी चूत और गांड मारता रहा।कंचन भी अपनी गांड पीछे धकेल के चुदवा रही थी।

कंचन भी अब चरम सीमा पर पहुँच रही थी, उसकी चूत ने जवाब देना शुरू कर दिया था, उसके शरीर में रह रह कर झड़ने जैसी मिठास आने लगी थी।

अब कंचन अपने आप को रोक ना सकी और अपनी चूत और ऊपर दी, बस उसके पिता के दो भरपूर लंड के झटके पड़े कि चूत बोल उठी कि बस बस… हो गया- पिताजी ऽऽऽऽऽ बस… बस… मेरा माल निकला… मैं गई… आऽऽई ऽऽऽअऽ अऽऽऽआ…

कंचन ज़ोर लगा कर अपनी चूचियाँ उनसे छुड़ा ली, बिस्तर पर अपना सर रख लिया और झड़ने का मज़ा लेने लगी।

उसके पिता का लंड भी आखिरी झटके लगा रहा था।

फिर आह… उनका कसाव कंचन के शरीर पर बढ़ता गया और उन्होंने अपना लंड बाहर खींच लिया।

झड़ने के बाद कंचन को थोड़ी तकलीफ़ होने लगी थी… थोड़ी राहत मिली… अचानक उसके चूतड़ और उसकी पीठ उसके पिताजी के लंड की फ़ुहारों से भीग उठी… उसके पिताजी झड़ रहे थे, रह रह कर कभी पीठ पर वीर्य की पिचकारी पड़ रही थी और अब कंचन के चूतड़ों पर पड़ रही थी।

उसके पिताजी लंड को मसल मसल कर अपना पूरा वीर्य निकाल रहे थे।

जब पूरा वीर्य निकल गया तो मुकेश ने पास पड़ा तौलिया उठाया और कंचन की पीठ को पौंछने लगे- कंचन बेटी, तुमने तो आज मुझे मस्त कर दिया!

पिताजी ने अपनी बेटी के चेहरे को किस करते हुए कहा।

कंचन चुदने की खुशी में कुछ नहीं बोली पर धन्यवाद के रूप में उन्हें फिर से बिस्तर पर खींच लिया और अपने पिताजी के लंड को अपने होठो में लेकर चाट चाटकर साफ करने लगी और फिर अपने पिता के होंठो को चूसने लगी।

कुछ देर सुस्ताने के बाद मुकेश कंचन के रूम से निकल कर अपने रूम में चला गया।
 
अनिल ने जब अपने बेटे को कंचन के रूम से बाहर जाते देखा तो वह धीरे से अपनी पोती के रूम में घुस गया और दरवाजा बंद करने लगा।

कंचन अपने दादाजी को अपने रूम में देखकर चौंक गईं और बोली।अरे दादाजी आप इस समय।

मुकेश कंचन की तरफ बढ़ा और उसने कंचन को अपनी मजबूत बाँहों में भर कर चूमने लगा।

कंचन अपने दादाजी की बाँहों में कसमसा रही थी और छुटने की कोशिश कर रही थी।छोड़िये न दादाजी कंचन बोल रही थी।

कुछ देर अपनी पोती को चूमने के बाद मुकेश ने अपने कपडे उतार दिए उसका 9 इंच का लंड तम्बू बना हुआ था।

कंचन ने देखा कि उसके दादा ने अपने कपडे उतार दिए थे. उनका मोटा लंड पूरा खड़ा था.

‘बेटी आज तेरी चुदाई देख के मैं पागल हो गया हूँ, तुझे चोदे बिना मैं कैसे छोड दूँ ?’

‘प्लीज़ दादा जी मैं बहुत थक गयी हूँ’कंचन बोली।

‘तुझे वैसे भी कुछ करना नही हैं मेरी जान. बस नीचे लेटी रह और मुझे तेरी मस्तानी गांड मारने दे’ दादाजी बोले।

गांड मारने की बात सुनकर कंचन डर गयी.

दादाजी कंचन के रूम के अंदर आने लगे. कंचन को अभी भी याद था कि 8 इंच के लंड से गांड चुदवा कर कितना बुरा हाल हुआ हैं. दादाजी के 9 इंच का लंड तो उसे मार ही डालेगा. वह बहुत ही डर रही थी।

‘तेरी चिकनी गांड को आज अच्छी तरह से चोदुन्गा, कितने दिनो से तेरी छोटी सी गांड में अपना लंड डालने का जी कर रहा था, लेकिन तेरे पिता को तेरी गांड मारते हुए देखकर मैं बहुत गरम हो गया हूँ बेटी।आज इस मौके को नहीं जाने दूँगा’ दादाजी बोले।

‘प्लीज़ मुझे आज छोड दीजिये दादाजी। आज मैं बहुत थक गई हूँ मेरी गांड में थोड़ी दर्द भी है आप किसी दूसरे दिन कर लेना’ कंचन बोली।
 
पर दादाजी को सिर्फ़ कंचन की गांड दिख रही थी । मुकेश के द्वारा कंचन की गांड चुदाई देखकर वह बहुत गरम हो गए थे।वो कुछ सुन नही रहे थे और जल्दी जल्दी कंचन को नंगा कर रहे थे.जब कंचन पूरी नंगी हो गई तो उन्होंने कही से एक क्रीम की बॉटल निकाल ली और दोनो हाथों में क्रीम डाल के अपने लंड पे लगा लिया. फिर वो थोड़ी और क्रीम हाथों में ले कर कंचन की गांड पे मसलने लगे. एक मिनिट में कंचन की गांड क्रीम से चमकने लगी.

‘हाई क्या मस्त गांड हैं तेरी बिटिया। इसमें लंड घुसाने में बहुत मज़ा आएगा।’दादाजी ने यह कहकर कंचन को कुतिया बना दिया। और उसकी गांड की भूरी छेद को मसलने लगे।

कुछ देर ऐसे गांड मसलने के बाद उन्होंने थोड़ी क्रीम अपनी दो उंगलियों में लेकर अचानक कंचन की गांड में घुसेड दी.

अचानक उनकी मोटी उंगलियाँ गांड में जाने से कंचन चीख पड़ी ‘आऐईयईई…’ ठंडा ठंडा क्रीम कंचन की गांड में बहुत महसूस हो रहा था. दादाजी ने दो मिनिट तक ऐसे ही अपनी उंगलिया कंचन की गांड में अंदर बाहर की. फिर उन्होंने अपनी उंगलियाँ निकाल दी.

‘बहुत क्रीम हो गया बेटी. अब मेरे लंड की बारी है’ ये कह के दादाजी ने अपना मोटा लौडा कंचन की गांड के छेद पे रख दिया…..

कुछ देर तक वो अपना लंड कंचन की गांड पर रगड़ते रहे। जब उन्होंने देखा की लौंडिया थोड़ा नॉर्मल हो गई हैं तो दादाजी ने एक करारा झटका लगाया उसका 3 इंच तक लंड कंचन की गान्ड को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया । कंचन के मुँह से चीख निकल गई क्योंकि उसके दादाजी का लंड उसके पिता से ज्यादा मोटा था।

मररर्र्ररर गैईईइ हाइईईईईईईईईई मेरिइईईईईई फाद्द्दद्ड दीईईईई बचाऊऊऊओ।

दादाजी ने फिर दूसरा झटका मारा अब 5 इंच लंड कंचन की गांड के अंदर था । पर दादाजी का लंड इतना मोटा था कि क्रीम लगाने के बावजूद पूरा अंदर जा नहीं रहा था.

‘लगता हैं थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ेगा’ कह के दादाजी ने अपना लंड गान्ड के छेद से 3-4 इंच पीछे ले कर ज़ोर से आगे धकेला. उनका मोटा लंड कंचन के गान्ड के छोटे से छेद को चीरता हुआ 7 इंच तक अंदर घुस गया.

‘आआआआऐययईईईईईईईईईईई’ कंचन ज़ोर से चिल्ला बैठी. कंचन को ऐसा लगा कि किसी ने उसके गांड के अंदर चाकू घुसेड दिया हो।

‘आआआहह…. कितनी टाइट हैं और गरम गांड है तेरी आआआआहह….’ करके दादाजी मज़ा ले रहे थे।

दादाजी अपने पूरे शरीर का वज़न नीचे की ओर धकेल रहे थे और अपने लंड को पूरे ज़ोर से कंचन की गान्ड में और ज़्यादा घुसेडने की कोशिश कर रहे थे. उनका लंड बहुत ही धीरे धीरे कंचन की गान्ड को फैला के आगे जा रहा था. कंचन दर्द के मारे छटपटा रही थी, उसकी आँखों से दर्द झलक रहा था।
 
दादाजी कंचन के उपर लेटे हुए थे और अपना लंड और आगे धकेलने की कोशिश कर रहे थे, पर कंचन की गांड इतनी टाइट थी कि उनका लंड अभी भी सिर्फ़ 8 इंच तक ही अंदर गया था. ज़ोर लगाके दादाजी का सारा शरीर पसीने से गीला हो गया था.कंचन भी पसीने से लतपथ हो गयी थी.

दादाजी ने अब अपना लंड लगभग पूरा बाहर निकाल के फिर से ढेर सारा क्रीम कंचन की गांड और अपने लंड पर लगा दिया और फिर से पूरे ज़ोर से धक्का मारा. इस बार उनका लंड फिर से 8 इंच कंचन की गान्ड में घुस गया.

कंचन चिल्ला चिल्ला कर अपने दादाजी के नीचे छटपटा रही थी. दादाजी को कंचन की हालत देख और मज़ा आ रहा था. उसका लंड अभी सिर्फ़ 8 इंच तक ही कंचन की गान्ड में घुसा था. दादाजी ने अब अपना लंड धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया. दादाजी अपना लंड लगभग पूरा बाहर निकालते और फिर 8 इंच तक अंदर घुसेड देते. कंचन की गान्ड का छेद इतना टाइट था कि हर बार जब दादाजी अपना लंड बाहर लेते तो छेद फिर से सिकुड जाता और दादाजी को अपना लंड अंदर घुसेड़ने में ज़ोर लगाना पड़ता.कंचन की टाइट गान्ड से दादाजी को मज़ा आ रहा था. कुछ देर दादाजी ने कंचन की गान्ड को ऐसे ही 8 इंच तक चोदा पर अब उनसे सबर नही हो रहा था.

उन्होंने अब एक तगड़ा धक्का लगा के अपना पूरा 9 इंच का मोटा लंड कंचन की गान्ड में घुसेड दिया. ‘आआआआहह… आआआआआअहह.’

दादाजी ने अपना पूरा लंड कंचन की गान्ड के अंदर घुसा के रखा और ज़ोर से उसके बाल पकड़ के खीच दिए. फिर धीरे धीरे उन्होंने कंचन की गान्ड की चुदाई शुरू की. पूरा 9 इंच का गरम लौडा अब अंदर-बाहर होने लगा. हरेक बार जब वो अपना लंड अंदर धकेलते कंचन पूरा बदन आगे की ओर सरकने लगता और दादाजी कंचन के बाल खीच उसे सरकने से रोक लेते. इतनी टाइट गान्ड को चोद के दादाजी को बहुत मज़ा आ रहा था और वो बहुत उत्तेजित हो गये थे.

कुछ देर की गांड चुदाई में अब कंचन को धीरे धीरे मज़ा आने लगा।अब कंचन भी अपनी गांड उठाकर अपने दादा से जोर-जोर से चुदवा रही थी उसके दादा जी अपना लंड को कंचन के गांड में जड़ तक पेल रहे थे।
 
आह कंचन बेटी क्या मस्त गांड है तेरीईईईईईईई।मज़ा आ गया तेरी गांड मारकर।कितनी टाइट और गरम गांड है तेरी मेरी गुड़िया।आज तूने अपने दादा को मस्त कर दिया।क्या रंडियो के जैसी गांड चुदवा रही है मेरी गुड़िया बहुत मस्त है तू।अनिल अपनी पोती की गांड मारते हुए कुछ भी बड़बड़ा रहा था।

आह दादाजी चोद के फाड़ डालो मेरी गांड को अपने मोटे लंड से।

आधे घंटे तक चोदने के बाद उनका झरना शुरू हो गया और उन्होंने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी. ऐसा करने से कंचन का दर्द और बढ़ गया.

कंचन अब चिल्ला चिल्ला कर उनको बुरा भला बोल रही थी ‘आाऐययईईई… जाने दो मुझे आप कितने गंदे हो दादाजी’ पर इससे दादाजी को और मज़ा मिल रहा था. वो अपने मोटे लंड से कंचन की गान्ड में अपना वीर्य निकालने लगे. ‘आआआआआहह… ये ले साली कुतिया आआआआआहह….’ कंचन को गान्ड में दादाजी का गरम वीर्य महसूस हो रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे उसकी पूरी गान्ड उससे भर गयी हो. दादाजी की चुदाई से अब ‘पुच पुच’की आवाज़ आ रही थी. तीन चार मिनिट तक दादाजी झड़ते रहे. आख़िर उनका झडना बंद हुआ और वो उसके उपर लेट गये. उनका लंड उन्होंने कंचन के गान्ड के अंदर ही रखा. उनका मोटा लंड अभी भी कंचन की गान्ड के अंदर थोड़े थोड़े झटके खा रहा था. उनका पूरा वज़न कंचन के उपर होने के कारण उनको अपने उपर से हटा नही पा रही थी.

‘प्लीज़ अब तो बाहर निकालो इसको’ कंचन ने उनसे दर्द से कराहते हुए कहा।

‘आअहह चुप बैठ साली रंडी’ अभी निकलता हूँ पूरा मज़ा तो ले लेने दे।

कुछ देर बाद दादाजी का लंड कंचन के गान्ड के अंदर बैठ गया. इसके बाद उन्होंने कंचन की गान्ड से अपना लंड आख़िर बाहर निकाला. लंड निकालने पे कंचन की गान्ड से दादाजी का ढेर सारा वीर्य बाहर बह गया.

‘वाह मज़ा आ गया’ कह के दादाजी ने अपने कपड़े पहन लिए और कंचन की गांड को साफ करके उसे अच्छे से सुलाकर चले गए।
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
अब चलते हैं मनीषा के घर जहां सूरज शीला के साथ सेक्स करने के बाद वापस 2 दिनों के लिए चला गया है फिर जब वह लौट के आता है तो साथ में 1 बहुत अच्छा स्मार्टफोन और एक स्कूटी लेकर आता है जो वह शीला को गिफ्ट देता है शीला बहुत खुश हो जाती है।पिंकी और नरेश कॉलेज गए है शीला को आज उसकी मम्मी ने रोक लिया है क्योंकि आज सूरज आनेवाला है और जब अकेले में शीला अपने अंकल से मिलती है तो सूरज शीला को अपनी बाँहों में भरकर चूमने लगता है।

थोड़ी देर बाद शीला अपने अंकल से अलग हुई तो अंकल ने शीला की नाइटी उतार दी अब वो पूरी नंगी थी उसे ऐसे देख कर सूरज ने भी अपने कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा हो गया जैसे ही शीला की नज़र सूरज अंकल के लंड पर पड़ी उसके मुंह से आह सी निकल गई उसने अपने पेंटी के अंदर उंगली डाल ली और अपनी चुत को सहलाने लगी

”मैंने तो अपना वादा पूरा कर दिया तो आज मेरी बेटी क्या गिफ्ट दे रही है अपने प्यारे अंकल को” सूरज बोला।

”आज मैं अपने अंकल को वो गिफ्ट दूँगी जिसके लिए पता नहीं वो कब से मरे जा रहे है”शीला सूरज अंकल को आँख मारते हुए बोली।

”आख़िर वो गिफ्ट है क्या” अंकल ने शरारत से बोला।

शीला पलट कर खड़ी हो गई अब उसकी पीठ और उसके बडे बडे चूतड़ सूरज के सामने थे अचानक वो टाँगे फैला कर नीचे झुक गई जिससे उसकी गांड पूरी तरह ओपन हो कर अंकल के सामने आ गई। सूरज अंकल शीला की गांड का भूरा छेद फटी हुई आंखों से देखने लगे।

”देख लो अंकल अपने गिफ्ट को अच्छे से देख लीजिये। आज मैं आपको गिफ्ट में अपनी गांड दे रही हूँ आप अब इसके साथ कुछ भी कर सकते हो” शीला बोली

सूरज अंकल को अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था उन्हें लग रहा था के जैसे उनके कान बज रहे हो उनका मुंह खुला का खुला ही रह गया था।

”क्या हुआ अंकल आप कुछ बोलते क्यों नहीं, क्या मेरा गिफ्ट अच्छा नहीं लगा” शीला बोली।

”मैं इसके साथ कुछ भी कर सकता हूँ, इसे चोद भी सकता हूँ”अंकल शीला के ठीक पीछे खड़े होते हुए बोले।

”हाँ अंकल ये आज से आपकी है आप इसे मार भी सकते है और फाड़ भी सकते है” शीला अपनी मस्त गांड अपने अंकल को दिखाते हुए बोली।
 
सूरज ने अपने हाथ शीला की गांड पर रखे और शीला के बडे बडे चूतडों को सहलाने लगा उसका लंड भी अब शीला की गांड के छेद पर टकराने लगा था अपनी गांड पर लंड टकराने से शीला बहुत ज्यादा एक्साईटेड हो गई थी उसकी चुत भल भल पानी छोडने लगी थी।

अब सूरज अंकल शीला की गांड की दरार में उंगली फिराने लगे थे ऐसा करने से शीला को अजीब सी गुदगुदी लग रही थी मजे के मारे उसकी आंखें बंद हो गई थी तभी उसे अंकल का हाथ अपनी चुत पर महसूस हुआ अब अंकल ने अपनी एक उंगली शीला की चुत में डाल दी और ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगे।

शीला को ऐसा लगा जैसे वो झड़ने वाली हो तभी अंकल ने अपनी गीली उंगली शीला की गीली चुत से निकाली और उसकी टाइट गांड में घुसेड़ दी अचानक हुए इस हमले को शीला सह नहीं पाई उसकी टाँगे मूंड़ गई और वो घुटनों के बल बैठ कर झड़ने लगी।

सूरज भी अब शीला के सामने आकर घुटनों के ऊपर बैठ गया और शीला के रसीले होंठ चूसने लगा और बोला ”मुझे अपनी गांड गिफ्ट करने के थॅंक्स बेटी, मैं कब से इसमें अपना लंड डालने के लिए तड़प रहा था”

" कह कर अंकल ने ज़ोर से शीला की चुचियां दबा दी

”आहह…. अंकल धीरे करो ना दर्द होता है, चलो थोडा मुझे प्यार करो ताकि गांड मरवाने में मुझे ज्यादा तकलीफ ना हो” कह कर शीला अंकल के सामने बैठ गई और अंकल का लंड पकड़ लिया और बोली ”हाय अंकल कितने दिन हो गये आप का लंड से प्यार किये हुए” और नीचे बैठ कर अंकल का लंड चूसने लगी उसे लंड चूसते हुए देख कर अंकल अपने होठों पर जीभ फेरने लगे अब वो पूरा गरम हो गये थे। कुछ देर तक शीला अंकल का लंड चूसते रही तो अंकल बोले ”अगर तुम ऐसा ही करते रही तो मैं अपना गिफ्ट कब लूँगा”

उसकी बात सुन कर शीला जो की सेक्स के नशे में टुन्न हो चुकी थी बोली ”हाय अंकल बहुत जल्दी है ना आपको अपनी बेटी की गांड मारने की तो। लो मार ले लो मेरी गांड”

सूरज उठा और जा कर एक तेल की बोतल उठा लाया और अपने लंड पर अच्छे से तेल मलने लगा उसे ऐसा करते देख शीला बेड पर चढ़ कर घोड़ी बन गई और अपना मुंह तकिया से लगा लिया जिससे उसकी गांड और भी बाहर आ गई ।
 
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