फिर विजय ने अपना लंड बाहर निकाल लिया.. तो कोमल विजय का लंड चूसने लगी, और अपनी दीदी की चूत का सारा रस चाट गई। कुछ देर लौड़ा चूस कर उसने विजय के लंड को अपनी दीदी की चूत पर लगा दिया।
फिर विजय के बमपिलाट झटके शुरु हो गए और कंचन के मुँह से फिर से ‘आआ.. आआअहह.. उऊहह..’ निकलने लगा।
तो कोमल ने कंचन के मुँह के पास अपनी चूत कर दी और कंचन के मुँह को दोनों टाँगों के बीच फंसा लिया।
विजय लगातार झटके मार रहा था और सामने से कोमल की चूचियों को चूस रहा था। कुछ देर बाद फिर विजय ने कंचन को उल्टा किया और बेड पर पेट के बल घोड़ी बना दिया.. और पीछे से उसकी गाण्ड मारने लगा… कुछ देर झटके मारने के बाद फिर से दोनों लंड चूसने लगीं।
कुछ देर बाद विजय लेट गया और विजय के लंड के पास दोनों एक-दूसरे के गाण्ड से गाण्ड सटा कर बैठ गई.. और बारी-बारी से चुदने लगी।
पहले कंचन चुदीं.. फिर कंचन हटीं.. तो कोमल चुदने लगीं.. तब तक विजय अपनी दीदी के चूतड़ों को मसलने लगा।
फिर जब कंचन चुदने लगीं.. तो कोमल भी दीदी की गाण्ड में अपनी गाण्ड टकराने लगी.. जब दोनों के चूतड़ों टकराते थे.. तो विजय को बहुत अच्छा लगता था।
कुछ देर बाद जब तीनों को लगा कि अब वे झड़ने वाले हैं.. तो दोनों विजय के लंड के पास पहुँच गईं और अपने भाई के लौड़े को चूसने लगीं।
जैसे ही विजय ने रस छोड़ा.. तो दोनों चुदासी चूतें.. विजय का सारा रस पी गईं.. और चूत का रस भी दोनों एक-दूसरे का पी गई और वे तीनों वहीं निढाल हो कर सो गए।
कुछ देर बाद सभी फ्रेश हुए और दोनों ने मिल कर नाश्ता बनाया और सब नाश्ता करने लगे।
कंचन और कोमल एक साथ बोलीं- हाँ.. बहुत मजा आया.. वैसे भी अब तो आप हमारे पति बन गए हैं।
विजय- अभी नहीं.. आज हम लोग शादी करते हैं.. तब होंगे।
कंचन- शादी.. वो कैसे करोगे?
विजय- मेरे पास एक आइडिया है।आज कुछ देर बाद दादाजी और मम्मी पापा अपनी गांव की जमींन बेचने जा रहे है वो कल शाम तक आएंगे।तो मेरा आइडिया ये है की............
उन दोनों के चूतड़ों के उभार मस्त दिख रहे थे और चोलियाँ चूचियों तक ही थीं। चोली और लहंगे के अलावा बाकी का भाग नंगा था.. मतलब कमर.. पेट पूरा नंगा था.. विजय का तो फिर से लंड खड़ा हो गया।
विजय- दोनों हॉट और सेक्सी लग रही हो.. एकदम मस्त माल लग रही हो।
कोमल बोली- ऊऊहह.. तैयार भी तो इसी लिए हुए हैं।
विजय- मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है यार..
कंचन- तो कंट्रोल करो.. अभी कुछ नहीं मिलने वाला है।
विजय- कुछ नहीं.. थोड़ा बहुत तो मिलना चाहिए ना यार..
कोमल- नो.. कुछ नहीं.. सब कुछ मिलेगा.. लेकिन कुछ देर बाद..
विजय- वही तो.. कुछ देर इंतज़ार नहीं हो रहा है.. मन हो रहा है कि बस शुरू हो जाऊं और खास करके तुम दोनों ने कपड़े भी इतने हॉट पहने हैं कि मैं तो क्या.. कोई बूढ़ा भी कंट्रोल नहीं कर पाएगा।
कंचन और कोमल एक साथ हंसने लगीं।
विजय- ह्म्म्म्म .. ओके.. जो करना है.. जल्दी करो।
कंचन- हाँ बस अब शुरू ही कर देती हूँ।
विजय लण्ड पर हाथ फेरता हुआ बोला- हाँ जल्दी करो।
कोमल- ओके आओ.. अब शुरू करते हैं।
इतना सुनते ही विजय सीधा कंचन को बांहों में लिया और चूमने लगा।
तभी कोमल बीच में आई और दोनों को अलग करते हुए बोली- अभी रूको.. वो दोनों का हाथ पकड़ कर सामने एक जगह पर ले गई.. जहाँ एक मोटी मोमबत्ती रखी थी। उसने मोमबत्ती जलाई और विजय के कंधे पर एक धोती रख कर कंचन की ओढ़नी से गाँठ बाँध दी और बोली- अब फेरे शुरू करो..
विजय बोला- मैं फेरा अलग स्टाइल में शुरू करूँगा।
विजय ने कंचन को गोद में उठा लिया.. उसका एक हाथ कंचन की नंगी कमर पर था और दूसरा नंगी पीठ पर कर घूमने लगा।
उसके बाद विजय ने कोमल को भी बुला लिया और फिर तीनों ने मिल कर फेरे पूरे किए। फेरे पूरे होने के बाद विजय ने अपनी दोनों बहनों की माँग को भरा और मंगलसूत्र पहनाया ।
इस तरह तीनों की शादी हो गई और आज विजय को एक नहीं दो-दो बीवियाँ चोदने को मिल गई थीं। विजय ने दोनों बहनों सॉरी बीबियों को गले से लगाया।
विजय- अब तो तुम दोनों मेरी बीवियाँ बन गई हो.. चलो सुहागरात मनाते हैं।
कंचन और कोमल एक साथ बोलीं- हाँ हम दोनों कमरे में जा रही हैं.. ‘आप’ कुछ देर में आना।
विजय- आप?
कंचन- हाँ.. पत्नियाँ अपने पति का नाम नहीं लेती हैं।
विजय- ओहो.. तो चलो हम भी साथ चलते हैं।
कंचन और कोमल एक साथ बोलीं- नो कुछ देर बाद आना.. आप हमारे पतिदेव हैं।
विजय- अपने पति को तड़फा रही हो..
कंचन- नहीं तड़फा नहीं रही हूँ.. बस कुछ देर बाद आ जाइएगा।
विजय- ठीक है.. जैसी आपकी इच्छा।
कोमल- हाँ ये हुई ना हमारे पति जैसी बात..
विजय की दोनों बहनें गाण्ड मटकाती हुई कमरे में चली गईं और विजय अपना लण्ड सहलाते हुए इंतज़ार करता रहा। कुछ देर इंतज़ार के बाद दोनों ने विजय को भी रूम में बुलाया.. विजय जैसे ही रूम में गया।
विजय को यकीन ही नहीं हुआ कि ये उसका ही कमरा है.. क्योंकि पूरा कमरा बड़े ढंग से सजाया हुआ था.. हल्की दूधिया रोशनी जल रही थी और उस लाइट में विजय को तो सिर्फ़ उसकी दोनों बीवियों के दूधिया गुंदाज बदन दिख रहे थे। वह जैसे ही अन्दर गया.. उन दोनों ने विजय के पैर छूकर आशीर्बाद लिया और उसको एक कुर्सी पर बैठाया और बोलीं- आओ स्वामी आपका मुँह मीठा कराते हैं।
कंचन एक रसगुल्ले को लेकर विजय की तरफ़ आई.. विजय ने आधा रसगुल्ला अपने मुँह में दबा कर कंचन को अपनी तरफ़ खींचा और बचा हुआ आधा रसगुल्ला उसको अपने होंठो से खिलाने लगा।
जैसे ही विजय और कंचन दोनों नजदीक आए..दोनों रसगुल्ला खाने के साथ ही एक दूसरे के होंठों का चुम्बन करने लगे।
अब तो रसगुल्ला दुगूना मीठा लग रहा था। मीठा रसगुल्ला और ऊपर से कंचन के रसीले होंठ.. आह्ह.. विजय को तो मजा आ गया।
कुछ देर बाद वे दोनों अलग हुए और विजय कोमल को भी खीचकर किस करने लगा.. कुछ देर चुम्बन करने के बाद वे सभी अलग हुए।
कंचन बोली-भाई आज सुहागरात में आपके लिए एक विशेष सरप्राइज़ है।
विजय क्या सरप्राइज़ है कुछ हमें भी तो बताओ
कंचन देखो भाई हम लोगों की सुहागरात है इसीलिए सुहाग रात को अपने दूल्हे के लिए कोई ना कोई कुँवारी चीज देनी चाहिए। तुमने तो मेरी चूत और गांड दोनों पहले ही चोद दी है। कोमल की भी चूत की चुदाई तुम कर चुके हो लेकिन कोमल की गांड अभी कुंवारी है हम लोग चाहते हैं कि आज तुम कोमल की कुंवारी गाँड की सील तोड़ दो इसमें मैं तुम्हारी हेल्प करूंगी ताकी कोमल को कम तकलीफ हो और उसकी गांड की चूदाई भी हो जाए।
विजय ठीक है मुझे भी कुँवारी गांड का मजा मिलेगा मैं भी कोमल की गांड को अपने मोटे लंड से फाड़ दूंगा।
कोमल- क्या बात करते हो भइया। तुम भी दीदी की बातों में आ गए मुझे अपनी गांड नहीं मरवानी है तुम्हें मेरी गाँड चाहिए तो इसे प्यार से चोदना।
यह कहकर कोमल चुप हो जाती है फिर कंचन और विजय मिलकर कोमल के सभी कपड़े उतार देते हैं और कोमल को गांड दिखाने को कहते हैं। जब कोमल अपनी गांड को पीछे की तरफ उभार देती है जिसे देख कर विजय का लंड पूरी तरह फनफना जाता है।कंचन विजय के कपडे भी उतार देती है।
फिर कंचन एक क्रीम लेकर आती है और कोमल के गांड के छेद पर मालिश करने लगती है कोमल की गांड का छेद जब थोड़ा मुलायम हो जाता है तब उसमें अपनी एक उंगली पेल देती है जब उसकी एक उंगली आराम से अंदर बाहर होने लगती है अपनी दूसरी भी अपनी छोटी बहन के गाँड में पेलने लगती है।
इधर विजय अपने लंड को सहला रहा है तभी कंचन विजय के आगे बैठ जाती है और उसके लंड को अपने मुंह में भर कर चूसने लगती है विजय का लंड कंचन की मुंह के थूक से पूरा गीला हो जाता है जब लंड पर पुरा थूक लग जाता है तब कंचन विजय के लंड को कोमल की गाँड के भूरे छेद पर सेट करती है धक्का मारने का इशारा करती है ।
विजय अपनी छोटी बहन के गांड पर अपने लंड को रखे हुए जोर का झटका मारता है और विजय का इतना मोटा लंड एक ही झटके में 3 इंच तक कोमल की कुंवारी गांड में घुस जाता है।
कोमल दर्द के मारे चिल्लाने लगती है मेरी गांड फट गई आह मम्मी दीदी मुझे बचा लो प्लीज दीदी भैया को बोलो अपना लंड मेरी गांड से निकाल ले मुझे बहुत दर्द हो रहा है दीदी प्लीज।
कंचन और विजय मिलकर कोमल के हर अंग को सहलाने लगते हैं और विजय कोमल की चुचियों को सहलाने लगता है जब कुछ देर में कोमल शांत हो जाती है तभी कंचन फिर से इशारा करती है विजय एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लंड कोमल की गांड में पेल देता है। कोमल की गाँड पूरी तरह से फट जाती है।उसमें से खून निकलने लगता है ।
कोमल इतनी जोर से चिल्लाती है पूरा घर कांप उठता है लेकिन कंचन जल्दी ही अपनी छोटी बहन के मुंह पर अपना मुंह रख देती है और कोमल के होठों को चूसने लगती है।
कुछ देर तक विजय शांत रहता है और कुछ देर में जब कोमल के पूरे बदन को सहलाने के बाद जब वह थोड़ा शांत हो जाती है तब विजय कुतिया बनी कोमल को पेलने लगता है । अब विजय का पूरा लंड कोमल की गांड में जड़ तक घुस रहा है। विजय को इतना मजा आ रहा है की वह और जोर जोर से कोमल की गांड मार रहा है । विजय को अपनी छोटी बहन की गांड मारने में बहुत मजा आ रहा है कोमल की गांड इतनी टाइट है कि विजय के लंड को पूरा जकड़ लेती है लेकिन विजय अपनी पूरी ताकत के साथ कोमल को पेलने लगता है।
कुछ देर के ही गांड चुदाई में कंचन भी कोमल के हर अंग से छेड़छाड़ करती रहती है जिससे जल्दी ही कोमल झड़ने लगती है । विजय भी कोमल की गांड से अपना लंड निकाल लेता है और कंचन के मुंह में पेल देता है कंचन अपनी बहन की गांड से निकले लंड को चूसने लगती है।
जब लंड पूरा साफ हो जाता है तो विजय फिर से उसे कोमल की गांड में पेल देता है विजय कुछ देर तक कोमल की गांड में लंड पेलता है और उसे निकालकर फिर से कंचन के मुंह में पेलने लगता है इस तरह से कुछ ही देर में विजय कंचन के गरम मुँह में झडने लगता है जिसे दोनों बहने चाट चाट कर साफ कर देती है।
कोमल- भइया आज तो आपने इतनी बेदर्दी से मेरी चुदाई की की मैं बता नहीं सकती।आपको अपनी नई नवेली बीबी पर थोड़ी भी दया नहीं आई।
विजय-अरे मेरी जान सुहागरात को हर लड़की को दर्द सहना पड़ता है।अगर उस दिन सभी लड़के रहम करने लगे तो हो चुकी सुहागरात।
कोमल-अच्छा भाई अब थोड़ी देर दीदी के साथ मजा करो.. मैं बाद में आऊंगी। वैसे भी मैं एक बार अपनी कुँवारी गांड चुदवा चुकी हूँ.. दीदी का आज फर्स्ट-टाइम है।
विजय- तब तक तुम क्या करोगी?
कोमल- लाइव शो का मजा लूँगी.. इतना सेंटी क्यों हो रहे हो.. इसके बाद मैं भी आने वाली हूँ।
विजय- ओके मेरी जान.. लव यू।
कोमल- ओके भाई.. एंजाय करो।
अब कोमल सामने सोफे पर बैठ गई और कंचन दूध का गिलास लेकर विजय के पास आई। विजय ने थोड़ा दूध पिया और थोड़ा उसको भी पिलाया।
फिर विजय ने कंचन को गोद में उठा लिया और बोला-दीदी मुझे तुम्हारे ये वाले दूध पीना है।
विजय कंचन की चोली के ऊपर की खुली जगह पर किस करने लगा.. तो उसके गहने उसे दिक्कत करने लगे। तब विजय ने उसको बिस्तर के पास बैठाया और एक-एक करके उसके सारे गहने उतार दिए।
फिर गर्दन और चूचियों के बीच की जगह पर किस करने लगा.. साथ ही विजय कंचन की कमर को भी सहलाए जा रहा था।
कंचन विजय को पकड़े हुए थी और विजय चोली के ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूस रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद विजय उसके पीछे गया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा और आगे हाथ बढ़ा कर उसकी मस्त चूचियों को भी दबाने लगा।
उसकी गर्दन पर किस करते-करते विजय नीचे को बढ़ने लगा और उसकी नंगी पीठ पर किस करने लगा.. साथ ही विजय उसकी चूचियों को भी दबाता रहा।
कुछ देर किस करने के बाद उसकी चोली की कपड़े की चौड़ी पट्टी को अपने दांतों के बीच दबा कर खींच दिया.. चोली एकदम से खुल गई। विजय चोली को हटा दिया और अब वो ऊपर सिर्फ़ रेड ब्रा में थी.. जो पीछे एक पतली सी डोर से बन्धी हुई थी। जिसकी वजह से नीचे से उसकी आधी चूचियों को ऊपर की तरफ़ उठी हुई थीं।
वैसे भी कंचन की चूचियाँ विजय की जिन्दगी की अब तक की सबसे बेस्ट चूचियाँ थीं। एकदम गोल बॉल की तरह.. और दूध की तरह गोरी चूचियां.. एकदम टाइट.. अगर ब्रा नहीं भी पहने.. तब भी एकदम सामने को तनी रहें.. झूलने की कोई गुंजाइश नहीं।
विजय उसकी अधखुली चूचियों को ही चूमने लगा।
कुछ देर किस करने के बाद विजय उसकी ब्रा के अन्दर उंगली डाल कर निप्पल को ढूँढने लगा।
वैसे ढूँढने की ज़रूरत नहीं थी.. निप्पल खुद इतना कड़क था.. जो कि दूर से ही ब्रा के ऊपर दिख रहा था।
विजय उसके निप्पल को पकड़ कर ब्रा से बाहर निकाल लिया। गुलाबी निप्पल को देख कर लग रहा था कि वो बाहर निकलने का इंतज़ार ही कर रहा था.. मानो बुला रहा हो कि आओ और चूसो मुझे..
विजय कौन सा पीछे रहने वाला था वह भी टूट पड़ा उस पर..विजय उसके एक निप्पल को मसलने लगा और दूसरे को होंठ के बीच दबाने और चूसने लगा।
कुछ देर बाद विजय ने अधखुली चूचियों के ऊपर चिपकी ब्रा भी खोल दिया.. जैसे ही ब्रा को खोला.. उसकी दोनों चूचियाँ छलकते हुए बाहर आ गईं।
विजय के अनुसार कंचन की चूचियाँ उसके चुदाई किये हुए लड़कियों में अब तक की सबसे बेहतरीन चूचियाँ हैं.. तो जैसे ही उसकी मदमस्त चूचियाँ उछलते हुए बाहर आईं.. विजय उन चूचियों पर टूट पड़ा।
विजय उसकी मस्त चूचियों को चूसने और मसलने लगा और पूरी चूचियों को मुँह में लेने की कोशिश करने लगा। वो इतनी बड़ी गेदें थीं.. जिनके साथ खेल तो सकते थे.. लेकिन खा नहीं सकते थे। विजय बस उसकी बड़ी बड़ी चूचियों से दूध निकलने की कोशिश करते रहा। वो भी चूचियों को चुसवाने के मज़े ले रही थीं।
अब तो कंचन ऊपर से पूरी नंगी थी.. एक तो गोरा बदन और दूधिया रोशनी में कयामत लग रही थी। विजय उसके पूरे बदन को चूमता-चाटता रहा।
अब दोनों एक-दूसरे के बदन पर किस करने लगे और एक-दूसरे को जकड़ कर पकड़े हुए थे। अब विजय अपनी दीदी के चूतड़ों को लहंगे के ऊपर से ही मसलने लगा और वो विजय के लंड को सहलाने लगी।
विजय का लंड तो पहले से ही खड़ा था ही.. और उसके पकड़ने के बाद तो और टाइट हो गया.. उसका लौड़ा बिल्कुल लोहे की तरह सख्त हो गया था।
कंचन विजय के लंड को मसलने लगी और वो विजय के पेट पर किस करते हुए नीचे की तरफ़ बढ़ रही थी।
वो विजय के खड़े लंड के आस-पास किस करने लगी।विजय ने तो आज की सुहागरात की तैयारी में पहले से ही झांटों का जंगल साफ़ कर रखा था।
वो अपने मुलायम होंठ से विजय के लंड पर किस करने लगी.. और कुछ देर में लंड के ऊपर वाले भाग को चाटने लगी। वो विजय के लंड को पूरा अन्दर लेने की कोशिश करने लगी, कुछ ही देर के बाद विजय का पूरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी।
आज पहली बार विजय को महसूस हो रहा था कि कंचन दिल से लंड चूस रही है.. क्योंकि वह बता नहीं सकता.. कितना मज़ा आ रहा था।
कंचन विजय का लंड चूस रही थी और विजय उसके सिर को सहला रहा था। वो विजय के लंड को मसल-मसल कर चूस रही थी.. जैसे किसी पोर्न मूवी में लंड चूसते हैं। विजय तो अन्दर तक हिल गया था.. उसने विजय के लंड चूस कर ही आधा मज़ा दे दिया था।
कंचन विजय का लौड़ा तब तक चूसती रही.. जब तक वह झड़ नहीं गया।
विजय के झड़ने के बाद कंचन उसका सारा माल पी गई और विजय के लंड को चाट-चाट कर साफ़ कर दिया, फ़िर उसके बगल में लेट गई और विजय के बदन पर उंगली फिराने लगी।
विजय उठा और कंचन के लहँगे को घुटनों तक उठा दिया और उसके पैरों को चूमने लगा।
उसके एकदम चिकने पैरों को चूमते-चूमते विजय ऊपर को बढ़ने लगा और अपने सिर को उसके लहँगे के अन्दर घुसेड़ दिया। अब विजय कंचन के मखमली जाँघों को चूमने लगा। कुछ देर तक ऐसा करने के बाद उसके हाथ कंचन की पैन्टी पर गए.. जो गीली हो चुकी थी। विजय से अब बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हुआ और वह उसकी भीगी पैन्टी को चाटने लगा।