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पापा की दुलारी जवान बेटियाँ complete

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शालु - पापा बस करिये न दर्द होने लगी मेरी। शायद चाभी ड़ालने से स्किन छिल गई है। अब मत करिये पापा बहुत दर्द हो रहा है।

बंसल - बेटी तो फिर कैसे होगा?

शालु - मैं क्या करूँ दर्द हो रही है।

बंसल - तो कहाँ से लुब्रीकेंट लॉऊँ? अगर तुम नहीं दोगी तो? क्या मैं अपना निकालूँ?

शालु - हाँ पापा आप अपना पेशाब क्यों नहीं निकालते?

बंसल - मैं पेशाब की बात नहीं कर रहा, मैं मुट्ठ की बात कर रहा हू। उसमे ज्यादा चिकनाइ होती है।

शालु - छी पापा वो कैसे निकलेगा?

बंसल ने बिना देर किये अपना लंड पेंट से बाहर निकाल लिया और शालु को दिखाते हुए कहा। बेटी इसको रगडने से निकलेगा।

(शालू पापा का बड़ा सा लंड देख कर घबरा जाती है)

बंसल - बेटी अगर तुम इसे हाथ में लेकर रगड़ो तो जल्दी निकल जायेगा

शालु - मैं नही।।।

बंसल - पकडो बेटी, (कहते हुए बंसल ने शालू का हाथ पकड़ लिया और अपने खड़े लंड पे रख लिया)

शालु - ओह पापा कितना गरम है ये।

बंसल - अब तुम इसकी स्किन खीच कर नीचे खोलो।

(शालू ने वैसा ही किया लंड को पूरा खोल दिया। लंड के स्मेल शालू को पागल कर रही थी। वो लंड पकड़ कर ऊपर नीचे हिलाने लगी)

बंसल - और तेजी से हिलाओ बेटी।। मेरा मुट्ठ निकाल दो।

शालु - ओके पापा, ये लीजिये।

शालु तेजी से लंड हिलाने लगी, और फिर कुछ ही पलों में बंसल का मुट्ठ शालू के हथेली पे निकल गया।

शालु - ओह पापा ये आपने क्या किये मेरे हाथ पे ही निकाल दिया।

बंसल - सॉरी बेटी।

शालु - आपका कितना ज्यादा निकला है पापा। मैं चाभी को इसमे भिगोती हू। शालु चाभी को हाथ में लेकर पापा के मुट्ठ में डूबाने लगती है।

बंसल - अब स्टार्ट कर के देखो बहुत ग्रीसिंग हो गई।

शालु कार स्टार्ट करती है, हाँ पापा ये तो स्टार्ट हो गई। दोनों ने राहत की साँस ली।
 
कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
अपडेट में देरी के लिए सॉरी।अपडेट आज शाम को।
 
शालु - पापा, आपने तो पूरा सीट गन्दा कर दिया।

बंसल - तुमने भी तो गन्दा कर दिया देखो तुम्हारी बुर से कितना पानी निकल रहा है सीट पे।

शालु के लिए पापा के द्वारा बुर शब्द का इस्तेमाल करना बहुत शॉकिंग था।

शालु - लेकिन पापा आपका ज्यादा गिरा है।

बंसल - तुम्हारे हाथो से गिरा है न। तुम्हारी गलती है।

शालु - आपने भी तो मेरा निकाला।

बंसल - तो ठीक है तुम मेरा साफ़ कर दो और मैं तुम्हारा।

शालु - (बंसल आगे बढ़ कर शालू की साड़ी और पेटीकोट उतार देता है। शालू पूरी नंगी होती है। बंसल नीचे झुक कर शालु के मोटी थाइस चाटने लगता है।

शालु - ओह्ह पापा।

बंसल अपनी जीभ से शालु की बुर चाटने लगता है। शालु मदहोश हो जाती है।

बंसल - बेटी क्या किसी ने तुम्हारी बुर चाटी है कभी?

शालु - नहीं पापा।आज तक किसी ने मेरी बुर नहीं चाटी।

बंसल - क्या तुम्हे अच्छा लग रहा है?

शालु - हाँ पापा और चाटिये ।

बंसल अपना लौंडा हाथ में लेता है ..शालू की चूत को दूसरे हाथ की उंगलियों से फैलाता है और अपना सुपाड़ा चूत के मुँह पर रखता है..लौडे के चूत पर छूने के महसूस से शालू सीहर उठती है ...आँखें बंद कर लेती है...

बंसल लौडे पर अपनी चूतड़ का वज़न डालता हुआ एक हल्का झटका मारता है..शालू की चूत इतनी गीली थी की उसका आधे से ज़्यादा लंड उसकी बेटी की शानदार ,रसीली चूत के अंदर फिसलता हुआ चला जाता है..शालू के मुँह से हल्की सिसकारी निकल जाती है ....."आआअहह....हा आह..."

बंसल भी चूत के अंदर की गर्मी , गीलापन और मुलायम सी पकड़ का अपने लौडे पर महसूस कर सिहर उठता है ....और फिर एक ज़ोर का धक्का लगाता है ..उसका पूरा लंड जड़ तक अपनी बेटी की चूत के अंदर दाखिल हो जाता है ..

शालु मज़े में उछल पड़ती है .... " हां ....आह पापा .आह ..आह .... अब रोकिए मत ...प्लीज़ ....बस गो ऑन ..गो ऑन ...फक मी हार्ड ...ज़ोर से ..ज़ोर से पेलो पापा.... .आह आह ....बस ऐसे ही मेरे अच्छे अच्छे पापा ..मेरी जान से प्यारे पापा..चोदिये अपनी बेटी को...मज़े ले ले के चोदिये ......आआआआआआह ..""

बंसल के धक्के ज़ोर पकड़ते जाते और शालू मस्ती की आगोश में कुछ भी बड़बड़ाती जाती ......

" हां बेटी ..मेरी जान ..मेरी रानी बेटी ..मेरी प्यारी बेटी..ले ना..ले ना बेटी मेरा लौंडा ..मेरा लंड ..मेरा सब कुछ ले ले ना ....सब कुछ तेरा ही तो है ना.. आह तेरे अंदर इतना मज़ा है बेटी ..कितना आराम है..कितना शूकून है ....उफफफफ्फ़ ..आह ....ले ले ..यह ले ..." बंसल भी बड़बड़ाता हुआ जोरदार धक्के पे धक्का लगाकर अपनी बेटी की चूत में पेलता जा रहा था ..

उस के नीचे उसकी अपनी बेटी चूतड़ उछाल उछाल कर लंड अंदर ले रही थी...थोड़ा भी लंड बाहर नही छोड़ती ...
 
मस्ती के एक अजीब ही आलम में थे दोनों ..मानो हवा में उड़ रहे थे....इस दुनिया से बेख़बर किसी और ही दुनिया में थे ....जहाँ कोई और नही था सिर्फ़ दो थे..और साथ थी थप थप. फच फच..की आवाज़ , बदन से बदन टकराने की आवाज़ ..होंठों से होंठ चूसने की चटखार ....आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..उउउउउउउउउउह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाईईईईईईईईईईईईई ....की सिसकारियाँ ..

शालू-अब ये आप क्या कर रहे हो पापा।

बंसल-बेटी मैं अपने लंड से तुम्हारी बुर की ग्रीसिंग कर रहा हूँ।

शालू ने अपनी टाँगों से बंसल के चूतड़ जकड़ लिए थे ...और अपनी ओर दबाती जाती ..बंसल के धक्के ज़ोर पकड़ते जाते..ज़ोर ..और ज़ोर ..और ज़ोर ..और ज़ोर .....और फिर शालू की चूतडो ने उछाल मारी .....उसकी चूत ने पापा के लौडे को बूरी तरह जकड़ लिया..मानो पापा के लौडे को चूस लेगी अपनी चूत से ....और फिर एक दम से चूत ढीली पड़ गयी ..टाँगें थरथरा उठी ..बदन कांप उठा ....और वो पापा के नीचे ढीली पड़ गयी..उसकी चूत से रस का सैलाब छूट रहा था ....

बंसल के लौडे ने अपनी बेटी के चूत रस की फुहार की गर्मी महसूस की ...उसका लॉडा और शरीर गनगना उठा ..सीहर उठा और वो भी एक जोरदार धक्का लगाते हुए लंड से अपनी बेटी की चूत में पीचकारी की धार छोड़ दी..लंड झटके पे झटका खा रहा था बेटी की चूत में ...दोनों कुछ देर शांत रहे एक दूसरे को चूसते हुए।

शालू एक हाथ से बंसल का लंड बाहर निकालती है और फिर उसे कस कस के चूसने लगती है।वह अपने जीभ से अपने पापा का लंड ऐसे चाट रही थी की बंसल का लंड फिर से फ़ुफ़कारने लगा।अब बंसल अपनी बेटी के गरम मुँह को ही चोदने लगता है जैसे मुँह न होकर उसकी बेटी की चूत हो। अपनी बेटी के मुह की गर्मी पाकर बंसल एक बार फिर शालु के मुह में ही स्खलित हो जाता है। शालु पापा का मुट्ठ चाट कर साफ़ करती है।
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शालु - पापा आपने तो कार के साथ साथ मेरी भी ग्रीसिंग कर दी।

बंसल - हाँ, मैं तो तुम्हारी हर रोज ग्रीसिंग करूंगा। इस शहर में न तुम्हारी मम्मी उर्मिला है न ही मेरी छोटी बेटी है। तो हम दोनों हर रोज सेक्स कर सकते है। क्या तुम्हे अपने पापा के साथ सेक्स करने में ऐतराज़ है।

शालु - नहीं पापा मैं तो आपकी होना चाहती हूँ आपसे चुदने में मुझे बहुत मजा आया। मैं भी आपको अपनी चूत का सुख देना चाहती हूँ।

बंसल और शालु दोनों अपनी पहली चुदाई का बहुत आनन्द लेते है। बंसल अपने पेंट की ज़िप बंद करता है और उधर शालु अपनी साड़ी सवारने में लगी होती है। बंसल ड्राइवर सीट पे बैठा होता है और शालु बगल के सीट पे, जब वो गियर पे रखी अपनी पेंटी को उठाती है तो बंसल उसका हाथ पकड़ लेता है।

बंसल - रहने दो बेटी, साड़ी तो पहन लिया न अंदर कच्छी पहनने की क्या जरुरत है।

शालु - ठीक है पापा, आप कहते हैं तो नहीं पहनती हूँ।

बंसल कार स्टार्ट कर धीरे धीरे सड़क की ओर बढ़ने लगता है। कार की हेडलाइट टूट जाने के कारण उसे काफी दिक्कत होती है। कार की रफ़्तार ३०-४० से कम की होती है। बंसल बड़े ही सावधानी से गाड़ी चला रहा होता है। शालु बगल में बैठी बोर हो रही होती है। उसे थोड़ी शरारत सूझती है और वो अपना हाथ पापा के पेंट के ऊपर सीधा लंड पे रखती है।

शालु - ओह पापा, ये तो कितना छोटा हो गया।

बंसल - बेटी इतना सारा रस निकाल कर अब ये थक गया है। लेकिन तुम इसे छेड़ोगी तो ये दूबारा खड़ा हो जाएगा।

शालु पापा का एक हाथ पकड़ कर अपने घुटने पे रखते हुये साड़ी के साथ ही ऊपर की ओर खिचती है। ऐसा करने से शालु की मोटी जाँघ नंगी हो जाती है और बंसल अपने हाथ शालु की जाँघो पे फेरने लगता है। बंसल को पता है की शालु ने पेंटी नहीं पहनी है वो अपनी हथेली को उसकी गरम चूत के पास ले जाना चाहता है। शालु भी गरम हो जाती है और अपनी जाँघे फैला बंसल के रफ़ हथेली को अपनी नंगी गिली चूत पे रगडने लगती है।
 
बंसल का लंड अब अपने कण्ट्रोल से बाहर हो चूका था, किसी तडपती मछली की तरह लंड पेंट के अंदर ही फडफडाने लगता है। शालु पेंट का ज़िप खोलती है और लंड को बाहर निकाल कर सहलाने लगती है।

बंसल - आह बेटी।। तुम मुझे पागल कर रही हो।। जोर से अपना हाथ हिलाओँ और मेरे लंड का पानी निकाल दो।

शालु - ओह पापा आप कितनी जल्दी उत्तेजित हो जाते हो। अपना ध्यान गाडी चलाने पे लगाईये मैं तो ऐसे ही आपको टेस्ट कर रही थी। होटल चल कर शांत कर दूंगी आपको अभी नही। (कहते हुए शालु बंसल का हाथ अपने साड़ी के अंदर से निकाल देती है और लंड को भी छोड़ देती है)

बंसल - शालु बेटी तुम बहुत बदमाश हो, मुझे अपनी चूत दिखा के कहती हो की मत चोदीये।। होटल चलो तुम्हारी चूत को मसल मसल कर लाल कर दूंगा।

बंसल अपनी गाडी की रफ़्तार बढा देता है, थोड़ी दूर आगे जाने पे उसे सामने से जीप की हेडलाइट चमकती दिखाइ पड़ती है।

बंसल - ओह।। ये क्या? इस जंगल में चेक पोस्ट?

शालु - क्या हुआ पापा?

बंसल - बेटी लगता है कुछ पुलिस चेकिंग चल रही है। रुको मैं देखता हूँ।

तभी एक पुलिस वाला कार के नज़दीक आकर अपने डण्डे से कार के शीशे पे २ बार चोट मारता है।

पोलिस मैन - चलो चलो कार साइड में लगाओ।।

बंसल - (कार का शीशा खोलते हुए), क्या बात है इंस्पेक्टर साहब?

पोलिस मैन - (बहुत ही बेरहमी से) चल चल बाहर निकल।

बनसल गाडी को साइड में खड़ी कर बाहर निकलता है

पोलिस मैन - (शराब के नशे में चूर) लाइसेंस दिखाओ।। इतनी रात गए कहाँ से आ रहा है तू? और ये लौंडिया कौन है तेरे साथ?

बनसल - देखिये आप तमीज से बात करिये।

पोलिस मैन - साला हमें तमीज सीखाता है बहनचोद। ये डंडा पूरा तेरी गांड में घुसेड दूंगा। अबे तिवारी इधर आ देख साला ये बहनचोद मुझे धमकी देता है।
 
(पुलिस वाला एक और पुलिस वाले को बुलाता है, दोनों के मुह से शराब की बू आ रही थी। पुलिस वाला फिर पूछता है, सीधे सीधे बताता है की नहीं या घुसेडू ये डंडा।।कौन है ये लौंडिया?)

बंसल - (घबराते हुए) देखिये हम इस शहर में नए हैं मेरी गाडी खराब हो गई थी। और ये मेरी बेटी है शालू।

पोलिस वाला शालु को ऊपर से नीचे तक घूरता है, फिर दुसरे पुलिस वाले से धीरे से कहता है। साली बड़ी गरम माल है ये तो, पेंटी उतार के बैठी है। पुलिस वाला हाथ बढा कर शालु की पेंटी को गियर से उठाता है और सूँघते हुए बंसल से कहता है।

पोलिस मैन बंसल से - क्यों रे।।? तू तो बोल रहा था ये रंडी तेरी बेटी है? साले तो ये अपनी कच्छी उतार के क्यों बैठी है गाडी में? हमे बेवकूफ समझता है? इतनी रात गए रंडी घुमा रहा है और हमे बोलता है की ये बेटी है तुम्हारी?

बानसाल - नहीं साहब, मैं सच कहता हूँ ये मेरी बेटी है। हम जंगल में फंस गए थे आप हमे जाने दे। ये रहा मेरा ड्राइविंग लाइसेंस और ये मेरी बेटी का भी। देखिये फादर'स नाम में मेरा नाम है। ये मेरी बेटी ही है इंस्पेक्टर साहब छोड़ दिजिये हमे। चाहे तो कुछ रुपये ले लिजीये लेकिन हमे छोड़ दिजिये।

शालु - देखिये इंस्पेक्टर साहब, हम अच्छे घर से है। मेरे पापा एक बहुत ही बड़ी कंपनी में काम करते है। आप प्लीज हमे जाने दे।

पोलिसेवाला लड़की की बात सुनता है, और उसे कार से बाहर निकलने को कहता है। देखो भाई, यहाँ रोज ऐसे मुजरिम आते हैं और सभी कुछ न कुछ बहाने भी बनाते है। हम सबको ऐसे तो नहीं छोड़ सकते, आखिर हम एक जिम्मेदार पुलिस अफसर है।

पोलिस मैन - सुन रे लड़की हमे तेरी तलाशी लेनी होगी। आज़कल जमाना ख़राब है साला लौंडिया लोग ज्यादा चलाक होती है और क्रिमिनल भी।

बंसल - जी, देखिये आप ऐसे तलाशी नहीं ले सकते मेरी बेटी की। आप किसी फीमेल अफसर को बुलाइये।

पोलिस मैन - क्यों रे, तू फिर हमे कानून सिखायेंगा। साले तलाशी लेने दे चुप चाप नहीं तो अगर मेरा दिमाग घूमा न तो तुम दोनों को डण्डे मारते पुलिस स्टेशन ले जाऊँगा। वहां सिर्फ हम नहीं हमारे बड़े साहब लोग भी तलाशी लेंगे तेरी बेटी की समझा?

शालु - पापा, आप प्लीज इनके मुह न लगीये। इन्हे तलाशी लेने दिजिये।

 
पोलिस मैन - बेटी तेरी ज्यादा समझदार लगती है। चल हाथ ऊपर कर।

शालु अपने हाथ ऊपर कर लेती है, पुलिस वाला पीछे से पहले तो उसके बाजू को छुता है फिर पीठ फिर उसकी कमर। फिर उसकी चौड़ी गांड को छुता ही नहीं सहलाता भी है। पुलिस वाला धीरे से दूसरे पुलिस वाले को कहता है। साली की गांड कितनी बड़ी है ऐसा लगता है रोज चुद्वाती है। शालु और बंसल ये सब सुन कर भी चुप रहते है। उसके बाद दुसरा पुलिस वाला शालु के ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचि पकड़ लेता है।

पोलिस मैन - ओह वाह।। तूने तो अंदर ब्रा भी नहीं पहनी।

पोलिस वाला उसकी चूचि को ब्लाउज से आज़ाद कर देता है,और लगातार मसलते रहता है।

पोलिस मैन - चल अब झुक जा नीचे तलाशी लेनी है।

शालु कार के बोनट पे आगे की ओर झुक जाती है, जैसे ही वो झुकती है पुलिस वाला पीछे से उसकी साड़ी उठा देता है और उसकी नंगी गांड तीनो मरदों के सामने नंगी हो जाती है। पुलिस वाला उसकी नंगी गांड को सहलाने लगता है और अपनी ऊँगली गांड से नीचे ले जाते हुए सीधा शालु की चूत में डाल देता है। शालु कराह उठती है, बंसल ये सब अपने आँखों के सामने होता देखता है लेकिन एक मजबूर बाप की तरह वहीँ खड़ा रहता है। दुसरा पुलिस वाला उसकी ब्लाउज ऊपर कर शालु की चूचियां नंगी कर देता है और एक हाथ से अपना लंड बाहर निकाल लेता है। पुलिस वाले का काला मोटा सा लंड देख कर शालु घबरा जाती है।

शालु - इंस्पेक्टर साहब ये आप क्या कर रहे हैं?

पोलिस मैन - सुन लडकी, तलाशी ले रहा हूँ ज्यादा नखरे मत कर चुप चाप झुकी रह। ज्यादा दिमाग ख़राब करेगी तो अच्छा नहीं होगा।

शालू डर के चुप हो जाती है।

(उधर दुसरा पुलिस वाला घुटनो पे बैठ शालु की चूत पे अपनी जीभ रख देता है। शालु मचल जाती है, अपने हाथ से लंड बाहर निकाल कर मुट्ठ मारते हुए वो शालु की चूत जोर जोर से चाटने लगता है)

दूसरे पुलिस वाला जो उसकी चूचिया दबा रहा था अब वो अपने लंड को हाथ में पकडे शालु के मुँह के पास आता है।

पोलिस मैन - ले चूस साली, चूस इसे। मुझे पता है तेरी बुर गिली हो चुकी है। अपने पापा से शरमा मत चूस मेरे लंड को। शहर में ये सब आम बात है। यहाँ तो अपने पापा के सामने बस नंगी है, कई रंडियां तो अपने पापा से चुदती भी हैं।

शालु मन ही मन अपने आप से कहती है, उनमें से एक रंडी तो मैं भी हूँ जो अभी अभी अपने पापा से चूदी हूँ ।

 
उधर बंसल अपनी बेटी को दो पुलिस वालों से एक साथ चुदाई देखकर उत्तेजित हो जाता है।एक पुलिस वाला शालू को बोनट पे लिटा के उसकी बुर में अपना मोटा काला लन्ड एक झटके से घुसा देता है।शुक्र था की शालू की चूत गीली रहती है।इसलिए पुलिस वाले का लंड शालू की चूत को फाड़ता हुआ आधा घुस जाता है।

शालू के मुँह से चीख निकल जाती है जिसे सुनकर दूसरा पोलिसवाला अपना काला मोटा लण्ड शालू के मुँह में पेल देता है।अब दोनों पोलिसवाले शालू को किसी सड़क के किनारे किसी कुतिया की तरह चोदने लगते है।बंसल इस चुदाई को देखकर बहुत उतेजित हो जाता है।एक पुलिस वाला कुतिया बनी शालू की चूत चोदता है तो दूसरा उसके मुँह में पेलने लगता है फिर दोनों जगह बदल लेते है।

बंसल को बिश्वास नहीं होता की उसकी बेटी कैसे किसी रंडी की तरह पोलिसवालों का काला मोटा लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही है।

फिर पोलिसवाले शालू को बीच सड़क पर कुतिया बनाके चोदने लगते है।एक पुलिस वाला तो शालू को गन्दी गन्दी गालियां देते हुए चोदता है।

पुलिस मैन-साली रंडी कितनी गरम चूत है तेरी।आज तक मैंने बहूत सारी रंडियों को चोदा है।लेकिन तेरे जैसी गरम चूत किसी की नहीं।तेरा बाप बहुत लक्की है।

फिर पुलिस वाले उसे बोनट पे सीधा लिटा कर उसकी बुर को बारी बारी से चोदते है। शालु ने अपने सपने में भी कभी ऐसा नहीं सोचा था की कभी वो दिन आएगा जब वो अपने पापा के सामने दो मरदों से चुदेगी। वो उत्तेजना से भर उठती है और पुलिस वालों का मोटा काला लंड बार बार मुह में ले कर चुस्ती रहती है।आधे घंटे की चुदाई में पुलिस वालों की हालत अब ख़राब हो चुकी थी।

पोलिस मैन - रंडी साली और चूस मेरे लंड को।। कहते हुए वो अपना माल शालु के मुह के अंदर ही छोड़ देता है।

दूसरे पुलिस वाला अपने लंड को मसलते हुए शालु के नज़दीक आता है और उसके गाल और होठ पे अपना गाढा सफ़ेद पानी गिरा देता है। शालु दोनों पुलिस वालों का वीर्य पी जाती है और उनका लंड भी अपने जीभ से साफ़ कर देती है।

पोलिस मैन - आज कितने दिनों बाद इतनी जबरदस्त चुदाई मिली है मजा आ गया। साली रंडी ने तो कमाल ही कर दिया। मैंने आज़तक किसी रंडी को इस तरह से लंड का चाटते नहीं देखा था। वाह बंसल तेरी बेटी तो कमाल है और समझदार भी। इसने तेरी तरह बेवकूफ़ी नहीं कि, बल्कि हमसे चुद कर अपनी और तुम्हारी जान बचाई है, वरना पुलिस स्टेशन में इतने डण्डे पडते की तू सोच भी नहीं सकता। चल जा तेरी बेटी ने हमे खुश किया है इसलिए तुम दोनों को छोड रहा हूं।

पोलिस वाले अपनी पेंट का ज़िप बंद कर अपनी जीप की तरफ बढ़ जाते है। बंसल शालु की तरफ आता है, शालु अपने चेहरे से दोनों पुलिस वालों का मुट्ठ साफ़ कर रही होती है।

बंसल - बेटी, मुझे माफ़ कर देना मैं कुछ नहीं कर पाया।

शालु - नहीं पापा, आप की इसमे कोई गलती नहीं है। नशे में धुत्त उन पुलिस वालों से उलझना कहाँ की समझदारी है। अच्छा हुआ उन्होंने हमें छोड़ दिया। अगर ये हमे पुलिस स्टेशन ले जाते तो हमारी कितनी बदनामी होती पापा।

(शालू अपने पेटिकोट का नाडा बाँधती है)
 
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