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पाप पुण्य complete

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रश्मि दीदी की नरम नरम विशाल गद्देदार गांड़ में अपना लंड़ रगड़ने से उसे एक अलग ही सुख का अहसास हो रहा था और उसकी उत्तेजना भी अपने चरम में पहुंच जाती है.

रिशू दीदी की गांड मे अपने लंड़ को रगड़ते हुए ही दीदी के गालों को चूम कर बोला "अभी क्या जल्दी है जान? अभी तो १२.३० ही बजा है, और तुम्हें तो मोनू की बेकार फिकर हो रही है वो अभी नहीं आयेगा और आ भी गया तो क्या. उसके सामने ही उसकी बहन चोदूंगा और वो अपना लंड हिलाएगा.

रश्मि दीदी यह सुन कर चौंक गयी पर वो कुछ कहने के लिये मुंह खोलने कोशिश करती इससे पहले ही रिशू ने अपने होंठ रश्मि के होठों से लगा दिए और उनकी मदमस्त जवानी का रस पीने लगा.

रिशू का लंड़ रश्मि दीदी की गांड मे दस्तक दे रहा था और उसके दोनों हाथ दीदी की चून्चियो को मसल रहे थे साथ ही वो दीदी के होठों से जवानी का रस चूम रहा था. दीदी चाह कर भी कुछ बोल नहीं बोल पाइ और लगातार अपने बदन को मसले जाने के कारण वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी और दीदी की वासना फ़िर उछाल मारने लगी.
 
अब रिशू ने अपने दांये हाथ को दीदी की चूंची से हटाया और धीरे धीरे उनके पेट से स्पर्श करते हुए उसने अपना दांया हाथ दीदी की उभरी हुई जवान चूत पर रख दिया. अपनी जवान चूत पर रिशू का हाथ लगते ही दीदी पर एक मदहोशी सी छाने लगती है और वो रिशू का लंड़ फिर से अपनी चूत में लेने के लिये मचलने लगी.

रिशू के हाथ अब रश्मि दीदी की चूत की दरारों के उपर घूम रहा था और दीदी का बदन फ़िर से उत्तेजना के मारे थरथराने लगता है. कुछ देर तक दीदी की चूत को सहलाने के बाद रिशू ने अपनी एक उंगली दीदी की चूत के अंदर ड़ाल दी और उसे हौले हौले अंदर बाहर करने लगा.

रश्मि दीदी मारे उत्तेजना के गरम हो गयी और उनकी चूत से पानी निकलने लगा. उनके पैरों की शक्ति अब जवाब देने लगती है और अब खड़े रह पाना दीदी के लिये काफ़ी कठिन हो गया.

दीदी की चूत से निकलने वाले पानी के अपने हाथों से लगते ही रिशू समझ जाता है कि रश्मि अब फ़िर से गरम हो चुकी है और लंड लेने के लिए तैयार है पर वो तय नहीं कर पा रहा की लंड फिर से दीदी की चूत में डाले या फिर उनकी गद्देदार गांड मारे.
 
अब रिशू और भी तेजी से उनकी चूत से खेलने लगा और अपनी उंगली दीदी की चूत से और भी तेजी से रगड़ने लगा.

रश्मि दीदी अब पूरी तरह से बेकाबू हो गयी और उसके मुंह से आह्ह्ह आह्ह्ह्ह ओफ़्फ़्फ़ सीऽऽऽऽऽ सीऽऽऽऽऽऽऽऽ की अवाजें निकलने लगी.

दीदी के लिये उस पोजीशन में खड़े रहना अब संभव नहीं था. एकतरफ रिशू का लंड़ बुरी तरह से उनकी गांड़ से चिपका हुआ था और उसका एक हाथ रश्मि की दोनों चूंचीयों को मसल रहा था और दूसरी तरफ दूसरा हाथ उनकी चूत से खिल्वाड़ कर रहा था.

रश्मि दीदी को बेहद आनंद आ रहा था लेकिन कुछ ही देर पहले वो रिशू के लंड के स्वाद चख चुकी थी इसलिये अपनी चूत में केवल एक छोटी सी उंगली से उन्हें वो सुख और संतुष्टी नहीं प्राप्त हो रही थी जो उसे कुछ देर पहले रिशू के लंड़ से मिली थी.

दीदी बदहवासी में अपना पूरा जोर लगा कर गोल घुम कर रिशू से लिपट गयी. रिशू भी दीदी को अपने सीने से चिपका कर उनके चेहरे को बेतहशा चूमने लगा. रश्मि दीदी की विशाल चूंचीया अब रिशू की छाती से चिपकी हुई थी और वो खुद उसकी बाहों में. रिशू उन्हें चूमे जा रहा था और अपने हाथों से उसकी दोनों बड़ी गांड़ को मसलते जा रहा था.

रिशू ने कुछ देर तक दीदी को अपनी बाहों में थामे रखा. रिशू दीदी के बदन की गर्मी का सुख लेता रहा और उनके नंगे जिस्म को सहलाते रहा फिर उसने अपने पैरों को ढीला छोड़ दिया और घुटनों के बल नीचे बैठ गया. उसने अपने दोनों हाथों से दीदी की गांड़ को पकड़ लिया और अपना मुंह उनकी चूत में लगा दिया.
 
अब रश्मि दीदी बेजान सी खड़ी थी और रिशू उनकी बुर चूस रहा था. दीदी के हाथ रिशू के सर पर तेजी से घुम रहे थे, उनकी आंखे बंद थी और मुंह से सिसकियां निकल रही थी. दीदी के देख कर ऐसा लग रहा था कि उन्हें रिशू का अपने जिस्म से खिलवाड़ बहुत पसंद आ रहा था और वो चाहती थी कि रिशू उसके नंगे जिस्म से जी भर कर खेले.

कुछ देर तक खड़ी रह कर अपनी बुर चूसवाने के बाद रश्मि दीदी का हौसला पस्त हो जाता है उनके पैरों में जान नहीं बची थी कि वो उनके गदराये बदन का भार उठा सके. अब दीदी भी नीचे बैठ गयी और उनके नीचे बैठते ही रिशू ने हौले से धक्का दे कर उन्हें वहीं लिटा दिया. जमीन पर बिछा कालीन अब बिस्तर का काम कर रहा था.

रिशू और रश्मि दीदी दोनों में अब वो धैर्य नहीं बचा कि वो पलंग तक जाये लिहाजा दीदी भी बिना किसी विरोध के कालीन पर पीठ के बल लेट गयी. नंगी रश्मि दीदी नीचे लेट कर कामवासना से अपने दोनों पैरों को उपर नीचे करने लगी और अपनी दोनों चूंचीयों को अपने ही हाथों से मसलने लगी.

थोड़ी थोड़ी देर में वो अपने होठों को अपने ही दातों से काट रही थी और दीदी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी. दीदी का ये मौन निमंत्रण पा कर पहले से ही उत्तेजित रिशू और भी कामांध हो जाता है और फ़ैसला करता है की एक बार और चूत लेने के बाद वो रश्मि की गांड मारेगा.
 
ये सोच कर वो दीदी की दोनों जांघो को को फ़ैला कर उसके बीच में बैठ गया और अपने लंड़ में मुंह से थुक निकाल कर लगाने लगा और अपने लंड़ को चिकना करने लगा. फिर उसने अपना लंड रश्मि दीदी की चूत में लगा कर एक हल्का सा धक्का दिया जिससे लंड आधा रश्मि दीदी की चूत मे घुस गया.

दीदी की चूत जो 2 बार चुदने से काफी खुल चुकी थी आराम से आधा लंड अपने अन्दर ले लेती है. दीदी भी अपनी बुर में होने वाली वासना की खुजली से बचैन थी और इस बात का इंतजार कर रही थी रिशू अब उनके जिस्म से खेलना छोड़ कर अपना लंड़ उनकी बुर में ड़ाले और चोदना शुरु करे. रिशू का लंड़ अपनी चूत में पा कर दीदी बेहद आनंद का अनुभव करने लगी और अपनी चूत को उपर उछाल उछाल कर वो रिशू का पूरा लंड़ अपनी चूत मे लेने की कोशिश करने लगी.

रिशू दीदी की मंशा समझ गया और एक जोर के झटके के साथ अपना पूरा का पूरा लंड़ रश्मि दीदी की चूत में ड़ाल दिया. लंड़ के झटके के साथ अंदर जाने के साथ ही दीदी के मूह से एक जोर की आह्ह्ह्ह्ह निकल गयी. उनकी आंखे बंद हो गयी और मुंह खुल गया. फिर वो बार बार अपनी जीभ अपने होठों पर फ़ेरने लगी.

कामवासना के अतिरेक में उनका सर कभी दाएं तो कभी बायें घूम रहा था. पूर्णत: उन्मुक्त और नंगी दीदी ने अपने जिस्म को पूरी तरह से ढ़ीला करके रिशू को समर्पित कर दिया और रिशू के लंड़ के लिये अपनी चूत में प्रवेश को और भी असान बना दिया.
 
अब वो रिशू के लंड़ को को अपनी चूत की गहराईयों तक महसूस करना चाहती थी. नंगी रश्मि दीदी नागिन की तरह कमरे के कालीन में बलखाने लगी और उनके ऐसे बलखाने से वो और भी मादक लगने लगी और दीदी ने रिशू को अपनी चूत में और तेजी से प्रहार करने के लिये मजबूर कर दिया.

रिशू ने भी दीदी के जिस्म पर ऐसा अधिकार जमा लिया कि उन्हें चोदने के लिये अब उसे दीदी की सहमति की भी जरुरत नहीं रह गई थी. रिशू ने जबरन ही सही लेकिन जब दीदी को मजबूर करके नंगी किया और उनकी बूर को चोदा तब दीदी को अपने बदन के जवान होने का अहसास हुआ और ये भी अहसास हुआ कि उनके जवान जिस्म की जरुरते ऐसी हैं जिसे केवल एक मर्द ही पूरा कर सकता है.

रश्मि दीदी की हालत ऐसी हो गई थी कि रिशू का लंड़ ही उनकी एकलौती जरुरत बन गयी थी और उस लंड को लेने के लिए न तो उसे किसी मखमली बिस्तर की जरुरत और ना ही पलंग की और इसीलिये रिशू ने जब उन्हें कमरे के कालीन में चोदने के लिये लिटाया तो वो बिना किसी विरोध के उसी जगह चुदने के लिये तैयार हो गई.

रश्मि दीदी रिशू से चुदने के बाद काफ़ी हल्का महसूस कर रही थी. अपने शरीर में उसे एक अजीब बेचैनी जो महसूस होते रहती थी जिसे वो समझ नहीं पाती थी उसकी वो बेचैनी शांत हो गई थी. पहली बार की चुदाई ने ही उसके मन और मस्तिष्क को प्रसन्न कर दिया और ये बोनस सेक्स उनके लिये एक दवा का काम कर रहा था.
 
दीदी अपनी पहली चुदाई से खुश तो थी पर उस चुदाई ने उनकी चुदने की भूख को और बढा दिया था और दीदी और भी मादक हो गयी थी. रिशू उनकी इस मादकता को अब महसूस कर रहा था. नंगी रश्मि दीदी की मादक अदाओं ने रिशू को उत्तेजना की चरम उंचाईयों तक पहुंचा दिया और उसका लंड़ और भी कड़क हो गया.

अब वो और तेजी से रश्मि दीदी की चूत में प्रहार करने लगा. वो दीदी की दोनों विशाल चूंचीया अपने हाथों पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगा. दीदी भी वासना के सागर में तैरने लगी और अपनी कमर को झटके मार मार कर उछालने लगी और रिशू के लंड़ को अपनी चूत की गहराईयों तक पहुंचाने मे उसका साथ देने लगी.

रिशू एक तरफ़ तो दीदी की चूत में तजी से अपना लंड़ अंदर बाहर कर रहा था और दूसरी तरफ़ उनकी चूंचीयों को भी मसले जा रहा था. अब दीदी ने अपने हाथ उसके दोनों हाथ पर रख लिये और मसलने लगी. दीदी अपनी छातियों को और भी जोर मसलने के लिये रिशू को उकसा रही थी. कुछ देर के बाद दीदी ने अपने हाथ उसके हाथों से हटाए और वो अपने हाथों से उसकी पीठ बाहों और सिर को सहलाने लगी.
 
रश्मि दीदी के नरम हाथों के अपने बदन में घुमने से रिशू को बेहद आनंद आ रहा था और अब मारे उत्तेजना के उसने दीदी की दोनों चूंचीयों को छोड़ दिया और उनके जिस्म पर लुड़क गया और दीदी को अपनी बाहों में भर लिया. दोनों नंगे जिस्म एक बार फ़िर गुत्थम गुत्था हो गये और रिशू ने दीदी के होठों पर अपने होठ रख दिया और चूसने लगा.

कुछ देर तक दीदी के होठों को चूसने के बाद रिशू अपनी जीभ उनके होठों पर फ़िराने लगा और फ़िर धीरे से उनके मुंह के अंदर अपनी जीभ ड़ाल दी और दीदी की जिभ से रगड़ने लगा. रिशू की जीभ के अपनी जिभ से टकराने से रश्मि दीदी को बेहद मजा आने लगता है और वो उसकी जीभ को चूसने लगती है. कुछ देर तक अपनी जीभ दीदी के मुंह रखने के बाद रिशू ने उसे बाहर निकाला और दीदी को उनकी जीभ अपने मुंह के अंदर ड़ालने के लिये बोला.

रश्मि दीदी ने अपनी जीभ उसके मुंह में ड़ाली तो रिशू उसे चूसने लगा. दीदी की जीभ चूसने से उसे ऐसा आनंद मिला की वो सब कुछ भूल कर उसी काम में लग गया. रश्मि के मुंह से निकलने वाले रस से रिशू सराबोर हो कर वो उसे पीने लगा.

दोनों ने एक दूसरे को जोर से भींच कर रखा हुआ था और बारी बारी एक दूसरे के मुंह मे अपनी जीभ ड़ालते और एक दूसरे को उसे चूसने का आनंद दे रहे थे. लगभग १५-२० मीनट तक इस क्रिया को दोहराने से दोनों के शरीर में ऐसी गर्मी पैदा हो जाती है कि दोनों ही पसीने से लथपथ हो जाते है. गर्मी इतनी बढ़ गयी कि रिशू को रश्मि को अपनी बाहों से छोड़ना पडा और वो फ़िर से उकड़ू बैठ कर उसे चोदने लगा.
 
रिशू अपने हाथ अब कालीन पर रख कर दीदी की बूर में तजी से लंड़ पेल रहा था तभी रश्मि दीदी रिशू के हाथ को उठाकर अपनी चूंची पर रखने का प्रयास करती है रिशू समझ जाता है कि रश्मि अपनी चूंची को मसलवाना चाहती है लेकिन वो अपने हाथ उसके चूंची पर नहीं रखता और उसे कहता है

"मेरी रांड, जैसा तू मेंरे हाथों से इसे मसलवाना चाहती है वैसे ही इन्हें मसल तभी मुझे समझ आयेगा कि तुझे क्या और कैसे मसलवाना पसंद है."

दीदी ने पहले तो मना किया और बोली "नहीं, मुझे शरम आती है"

तब रिशू कहता है "मसलवाने में शरम नहीं आती कुतिया तो फ़िर खुद मसलने में कैसी शरम, जो मैं कहता हुं वो कर. तुझको रंडीयों जैसे करते देख कर मुझे मजा आएगा और मैं तुम्हे और मज़े से चोदुंगा मेरी रांड. अब और मजे लेने हो तो नखरे मत कर और करो जो मैं कहता हुं कर. और सुन मेरे साथ सेक्स करते समय आगे से कभी शर्म वर्म की बात मत करना समझी नही तो पूरा मजा कभी भी नहीं ले पायेगी."

रश्मि दीदी थोड़ी न नुकुर करके उसकी बात मान लेती है और अपने हाथों से अपने चूंचीयों को मसलने लगती है.
 
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