दीदी ने दरवाजा खोला और बोली, बड़ी देर कर दी. तुम्हारा दोस्त ऊपर तुम्हारे कमरे में बैठा बैठा बोर हो गया होगा.
दीदी को क्या पता की मैं अभी थोड़ी देर पहले देख कर गया हूँ की मेरा दोस्त कैसे अपना लंड दीदी की चूत में बोर कर रहा था पर वो मुझसे सारी बात छुपाना चाहती है ये सोच कर मैंने राहत की सांस ली. मैंने भी उनकी कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा, दीदी वो किताब जिस लड़के को दी थी उसी के घर गया था. वो घर पर नहीं था तो उसका वेट कर रहा था. पर वो वापस ही नहीं आया तो मैं लौट आया. मैं दीदी की तरफ देख कर बोला.
दीदी बिलकुल नार्मल लगने की कोशिश कर रही थी. मेरे जाने के बाद शायद वो फिर से नहाई थी क्योंकि उनके बाल गीले थे. अरे तुम्हारा दोस्त पता नहीं इतनी देर से ऊपर क्या कर रहा है. जाओ देखो जाकर. दीदी ने फिर सफ़ेद झूठ बोला पर वो मुझसे और क्या कहती की तेरे जाने के बाद तेरे दोस्त ने चोद चोद कर मेरी चूत के चीथड़े कर दिए.
खैर मैं अपने कमरे में आ गया. वहां रिशू बेड पर लेटा हुआ मुस्कुरा रहा था. वो मुझसे बोला क्यों बे पूरा शो देखा या बीच में ही खिसक गया था. मैंने कुछ जवाब नहीं दिया. तभी दीदी की आवाज़ आई नीचे आ जाओ. मैंने खाना लगा दिया है. अपने दोस्त को भी ले आना.
हम दोनो नीचे जा कर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए. दीदी ने खाना लगा दिया और हम तीनो खाना खाने लगे. रिशू बोला, वह दीदी खाना तो बहुत अच्छा बना है.
दीदी बोली, थैंक यू पर एक बात बताओ तुम्हारी उम्र तो मेरे बराबर है तो दीदी क्यों कहते हो, नाम से पुकारा करो मुझे. ये वो ही बात थी जो कुछ देर पहले रिशू ने दीदी से कही थी.