• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

पाप पुण्य complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
मुझे याद आ गया की दीदी पहले रिशू से भी ऐसे ही कह रही थी पर बाद में मज़े ले लेकर चुदवा रही थी.

दीदी समझ गयी की अब हम नहीं मानेगे तो वो रूम से बाहर भागने लगी. तब मैंने उनको पकड़ लिया और बोला देखो दीदी हमारे साथ कोआपरेट करो ताकि तीनो को ही मज़ा आये.

पर वो नहीं मानी और छूटने के लिए ताकत लगाने लगी. तब तक मनीष पूरा नंगा हो चूका था और उसने रश्मि दीदी की पैंटी दीदी के ही मुह में ठूस दी और नाइटी फाड़ कर उसके हाथ बांध दिए. अब मेरी प्यारी बेहना पूरी तरह से उसके काबू में आ गयी थी. फिर मनीष ने दीदी की ब्रा भी फाड़ दी और उनको मादरजात नंगा कर दिया और पलंग पर पटक दिया.

अब मनीष दीदी के मम्मे चूसने लगा और मैं महीनो का प्यासा उनकी चूत चाटने लगा. क्या बताऊ आप लोगो को उनकी चूत का स्वाद. बस जन्नत का मज़ा आ गया. करीब १० मिनट तक चाटने के बाद दीदी ने पानी छोड़ दिया और मैंने उसे पूरा पी लिया.

अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था मेरा बहुत पुराना ख्वाब अब पूरा होने वाला था. मैंने अपना लंड दीदी की चूत से रगड़ना शुरू किया तो मनीष बोला रुक, पहले मैं चोदुंगा.

मैंने कहा की मेरी सगी बहन है मेरा हक पहला है. यह बोल के मैंने रश्मि दीदी की एक टांग उठा कर अपने कंधे पर रखी और अपना सुपाड़ा उनकी चूत पर लगा कर एक जोर का शॉट लगाया. रश्मि दीदी मचल उठी और मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर चला गया. दोस्तों मुझे विश्वास नहीं हुआ की मेरा सबसे बड़ा ख्वाब आज पूरा हो गया.

मैंने मन ही मन मनीष का शुक्रिया अदा किया.
 
मैंने दीदी के कान के पास मुह ले जाकर कहा, दीदी जब पहली बार रिशू को तुम्हे चोदते देखा था तब से तुम्हे चोदने की मेरी तमन्ना थी. आज पूरी हो गयी. मेरा लंड रिशू जितना न सही पर मज़े तुम्हे पूरे दूंगा. मेरी बात सुनते ही दीदी समझ गयी की उनकी शराफत के नाटक का पर्दाफाश हो चूका है और उन्होंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया. वो समझ चुकी थी की मैं उनके और रिशू के बारे में सब जानता हूँ.

मुझे लगा की अब दीदी ने मुझे स्वीकृति दे दी है की जो करना हो करो तो मैंने उनके मुह से पैंटी बाहर निकाल दी. दीदी के मुह से एक हलकी सी सीत्कार निकली उफ्फ्फ्फ़ आःह.

पर तब तक मनीष ने रश्मि दीदी के मुह में अपना लंड डाल दिया और उनका मुह फिर से बंद कर दिया...

मैं तो महीनो से भरा बैठा था. करीब १५ मिनट धक्के मारने के बाद मैं रश्मि दीदी की चूत में ही झड गया.

अब मैं बेड पर लेट गया और मनीष ने पोजीशन ले ली. मनीष का लंड करीब ६ इंच का था पर काफी मोटा था फिर भी दीदी ने आराम से ले लिया. दीदी धीरे धीरे आह आह की आवाज़ निकाल रही थी. १५ मिनट बाद धक्के लगाने के बाद मनीष भी झड गया. अब हम तीनो बेड पर चुपचाप लेट गए.

थोड़ी देर बाद दीदी मेरे कान में बोली तुमने मनीष को रिशू के बारे में बताया क्या?
 
मैंने न में सर हिला दिया. दीदी को अब जोर से बोली तुम दोनों बहुत गंदे हो और तुमने मुझे भी गन्दा कर दिया. चलो मेरे हाथ खोलो.

ये कहकर वो उठने की कोशिश करने लगी तो मनीष बोला

आओ मेरी जान. हम तुम्हें बाथरूम तक ले चलते हैं. वहाँ हम अपने हाथों से तुम्हारी चूत को साफ करेंगे ओके..

फिर मनीष ने उनको गोद में ले लिया और दीदी उसके साथ बाथरूम में चली गई. मैं भी उसके पीछे गया.

मनीष ने उनको शावर के नीचे बिठा दिया था और उन पर पेशाब करने लगा.

रश्मि दीदी बोली क्या कर रहे हो मनीष. तो उसने कहा तुम्हे नहला रहा हूँ.

मैंने कहा यार क्या कर रहे हो. जल्दी से दीदी को साफ़ करो. अभी तो कायदे से चोदना है दीदी को. दिल नहीं भरा.

तब मनीष ने शावर खोला और दीदी को आराम से नीचे बैठा कर गर्म पानी से चूत साफ करने लगा.

दीदी: आह.. आराम से.. दुखता है.. तुम लोगो के डंडे छोटे सही पर मोटे तो है. कितनी बेदर्दी से मेरी छोटी सी चूत में घुसा दिए तुम दोनों ने. सूखी ले ली मेरी.

मनीष: अरे रश्मि.. तेरी चूत तो ऐसी थी कि उंगली जाने से भी दर्द करती. अब लौड़ा गया है.. तो थोड़ा तो दु:खेगा ही.. पर तुझे अबकी बार ज़्यादा मज़ा आएगा.. देख लेना..

अब उसको क्या पता की दीदी पता नहीं कितना चुदवा चुकी है और वो भी रिशू के हलब्बी लंड से और उसके अलावा किसी और से भी चुदवाया हो तो मुझे पता नहीं.
 
रश्मि दीदी ने भी हमारे लौड़े को पानी से साफ किया और प्यार से उसको सहलाने लग गई. काफ़ी देर तक हम लोग एक-दूसरे को साफ करते रहे और नहाते रहे. फिर हमारे लौड़े दुबारा खड़े हो गए थे. ये देख कर दीदी बोली तुम दोनों का मन भी नहीं भरा और मेरा भी नहीं पर इस बार कुछ मेरा भी ख्याल रखना.

मनीष: अरे तेरी जवानी तो ऐसी है.. कि लंड अपने आप इसे सलामी देने लगता है. पहली बार तो सब जल्दबाज़ी में हुआ तो ठीक से मैं तुम्हारे इन रसीले होंठों का मज़ा नहीं ले पाया. इन कच्चे आमों का रस नहीं पी पाया.. अब सुकून से इनको चूस कर मज़ा लूँगा. तेरी महकती चूत को चाट कर उसकी सूजन कम करूँगा.

मनीष की बातों से दीदी भी अब उत्तेज़ित होने लगी थी. वो बोली तो मैंने भी कहाँ मज़ा लिया. तुम लोगो ने मुझे बाँध जो दिया था. चलो बेडरूम में चलो और मनीष ने फिर से दीदी को गोद में उठाया और हम वापस बेडरूम में आ गए

बेडरूम में आते ही मनीष ने दीदी को पलंग पर लिटा दिया और ६९ की पोजीशन में आकर उनकी चूत के होठों को कुरेदने लगा. अब रश्मि दीदी के लिए भी खुद को संभालना मुश्किल हो चला था और वो भी खुल कर चुदाई के मूड में आ गई और मेरे लंड को चाटने लगी. उन्हें दिक्कत न हो तो मैं भी सर दूसरी तरफ करके लेट गया और मनीष को देखने लगा.

क्योंकि दीदी की चूत मनीष के मुंह के सामने थी तो उसने पहले उसे चूमा और कुछ देर में ही उसने उसे अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. शुरू-2 में तो वो सिर्फ अपनी जीभ की नोक को दीदी की चूत से छुआ रहा था लेकिन फिर उसने रश्मि दीदी की चूत से आने वाली खुशबू से सुध-बुध खोकर दीदी की गुलाबी-इत्र सी महकती हुई चूत को पूरी तरह से चाटना शुरू कर दिया.
 
रश्मि दीदी को इतना मजा आने लगा कि वो मस्ती में कराहती हुई और जोरों से मेरा लंड चूसने लगी. अचानक उन्होंने उत्तेजनावश मेरा लंड छोड़ दिया और मनीष का लंड चूसने लगी. मनीष का लंड दीदी के गुलाबी होठो के बीच किसी मोटे बैगन सा नजर आ रहा था.

जैसे मनीष की जीभ दीदी की चूत में गहरी होने लगी वैसे ही रश्मि दीदी ने हम दोनों के लंड इकट्ठे मुह के अन्दर लेने की कोशिश करने लगी लेकिन दोनो भाइयों के लंड दीदी के छोटे से मुंह में नहीं समा पा रहे थे. आखिर थक कर रश्मि दीदी ने इशारे से बताया कि अब उन्हें चूत में लंड डलवाना है और मनीष बिस्तर से उतर कर लंड पकड़ कर नीचे खड़ा हो गया और हम दोनों ने मिलकर अपनी बहन को कमर के बल लेटा दिया.

अब मनीष उनकी दिलकश चूत को सहलाने लगा और मैं शानदार चूचियाँ. रश्मि दीदी से सहन नहीं हुआ और वह मनीष का तना हुआ लंड पकड़ कर अपनी चूत से रगड़ने लगी. मनीष आनन्द के अतिरेक से फटा जा रहा था और उसने लंड को दीदी की गुलाबी चूत के मुंह पर रख कर निशाना लगा लिया.

मुझे ये देखते हुए इस समय अलौकिक आनन्द की अनुभूति हो रही थी. सच अपनी बहन को चुदते देखने का सुख खुद चोदने से कम नहीं है जिन्होंने देखा है वो लोग जानते ही है...

इसबार जरा धीरे-2 अन्दर घुसाना.. तेरा लंड बड़ा मोटा है. अपनी बहन का थोडा ख्याल रखना भैया. दीदी ने मुस्कुरा कर मनीष से कहा.

मनीष ने मुस्कराहट के साथ अपने लंड के सुपारे को रश्मि दीदी की चूत के मुंह से भिड़ा कर अन्दर डालना शुरू किया. रश्मि दीदी खुद भी पागल हुई जा रही थी और मोटे सुपारे को अपनी भट्टी जैसी चूत के अन्दर पाकर दीदी ने मनीष को कसकर पकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगी.
 
मनीष भी दीदी के होठ चूसने लगा.

मैं इस समय अपने मौसेरे भाई से चूत चुदाती हुई मेरी छिनाल दीदी के मुंह को चोदने में लगा था. मैं बीच बीच में उनके चूतड़ सहलाता हुआ उनकी चूत के दाने को सहला रहा था और मेरे हाथ से रगड़ खाता मनीष का लंड मेरी बहन की चूत का बाजा बजा रहा था.

मनीष अचानक उतावला हो उठा और उसने झटके के साथ रश्मि दीदी की चूत से अपना सुपाड़ा बाहर निकाल कर पूरा का पूरा अन्दर घुसेड़ दिया

‘आआआ.. मर गई. आई.. तूने मेरी चूत फाड़ दी. ओए.. आआ.. हाँ ऐसे ठीक है.. थोडा धीरे मारो. ऊऊऊओ.. हाँ.. ऐसे.’ चूत पर हुए अचानक हमले से मेरी बहन रोआंसी सी हो आई, लेकिन मनीष ने खुद को सँभालते हुए धीरे धक्कों के साथ चुदाई जारी रखते हुए स्थिति को संभाल लिया

अब वो बिना जल्दी किए धीरे-2 मेरी दीदी की नर्म-गुलाबी चूत को चोदने लगा और मेरी रश्मि दीदी वासना के सुख सागर में गोते लगाने लगी, उनके मुख से तेज सिसकारियाँ निकलने लगी और उनकी मुख-मुद्रा बता रही थी कि उसके सुख की कोई सीमा नहीं थी

‘ओ ओ ओ.. आआआ.. आआआ.. आ आ आ आआ.. सीई..आआआ.. स्स्स्सीई..’ रश्मि दीदी के मुख से वास्तविक ख़ुशी भरी सिसकारियाँ निकलने लगी

बैंगन जैसा मोटा और लोहे की राड जैसा सख्त मनीष का लंड दीदी की अँधेरी सुरंग की गहराइयों को नापने लगा जो खुद भी अपनी जीभ से उसे गर्मजोशी से जवाब दे रही थी. वासना से कामांध होकर दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चाटने लगे. इस दौरान चुदाई की स्पीड हर धक्के के साथ बढ़ती जा रही थी और दीदी के गले से निकलने वाली आवाज हर धक्के के साथ तेज होती जा रही थी.

‘ओए.. आआ.. हाँ. ऐसे.. और.. ऊऊऊऊ.. ओओ.. ओओ.. आआ.. और जोर से.. चलो चोदो जोर से. और थोडा जोर से.. ओओ.. ओओ.. हाँ ऐसे. हाय कितना मजा आया इस बार.. हाय ऐसे ही चोदो ना फिर से.. अपनी पूरी जीभ डाल दो मेरे मुंह में.’ मेरी बहन ने बिना किसी शर्मो-हया के मनीष की जीभ को चूसना शुरू कर दिया.
 
मनीष मुझे आश्चर्यचकित करते हुए पूरी तरह से स्थिति को काबू में कर, बहुत मंझे हुए खिलाड़ी की तरह अपनी मौसेरी बहन की नर्म-गुलाबी चूत को चोदे जा रहा था. उसका ६ इंच लम्बा किसी कलाई जैसा मोटा लंड मस्ती के साथ रश्मि दीदी की चिपचिपी हो चुकी चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था.

दीदी आनन्द में डूबकर छटपटा रही थी और किसी जानवर जैसी आवाजें निकाल रही थी और मनीष के साथ चुम्बन में व्यस्त थी- आआ.. जरा और जोर से चोदो मुझे.. हाय कितना मजा आ रहा है. थोड़ा रगड़ कर चोदो जरा.. फाड़ दो मेरी चूत को... ..ओए मस्त.. मस्त. हाय कितना मोटा लंड है तुम्हारा. बिलकुल गधे के लंड जैसा.. हाय कितना चिपचिपा हो गया है अन्दर तो.. लेकिन कितना मस्त..’ वासना में दीदी डूब उतरा रही थी.

कुछ मिनटों बाद अचानक मनीष ने अपना लंड दीदी की चूत से बाहर निकाल लिया और दोनों अलग हो गए. चुदासी दीदी ने अब मेरे लंड की तरफ देखा. उन्होंने अपनी नर्म-गुलाबी जीभ से मेरे लंड को चुभलाना शुरू कर दिया और मैं जन्नत में पहुच गया...

उधर मनीष जो अपना मूसल लंड दीदी की गोरी गांड के छेद से भिड़ाने में लगा हुआ था उसने अचानक एक झटका मार कर लंड का सुपाडा दीदी की गांड के अन्दर सरका दिया.

‘आआआह… आआ.. ओए. हाय कितना दर्द हो गया. निकाल ले.. उई माँ. बेहनचोद तूने तो मेरी गांड भी फाड़ डाली..’ रश्मि दीदी अचानक मनीष का सुपाडा गांड में जाने से हुए दर्द से चिल्लाने लगी- ऊऊऊ.. निकाल ले बाहर. मैं कह रही हूँ कुत्ते.
 
लेकिन इस बार मनीष ने लंड पूरा बाहर न निकाल कर सुपाड़ा अन्दर रखा और उसे अन्दर बाहर करता रहा.

थोड़ी देर में रश्मि दीदी नार्मल हो गई और धक्कों में मनीष का साथ देते हुए कहने लगी- आ.. हे भगवान कितना दर्द हुआ था.. बोलना तो चाहिए पहले... तूने तो जैसे जलती हुई रॉड ही मेरी गांड में घुसेड़ दी. भयानक दर्द हुआ ..उफ्फ कितना डरावना लंड है तुम्हारा. मुझे तो ऐसा लगा मानो मेरी गांड ही चीर दी हो... जा मोनू जरा तेल या क्रीम ले आ जल्दी से.

मैं जल्दी से तेल आ गया. दीदी ने डिब्बे से थोडा तेल निकाल कर मनीष के लंड को तर कर दिया और थोडा तेल उसने अपनी गांड पर मल दिया और बोली हां भैया अब लगाओ धक्का..

इस बार जब मनीष के गांड पर हल्का सा दबाव लगाते ही उसका मूसल लंड फिसलता हुआ रश्मि दीदी कि गांड में सरक गया और आसानी के साथ अन्दर बाहर होने लगा. अब रश्मि दीदी के चेहरे कि मुस्कराहट भी लौट चुकी थी,

वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही ले ली थी.. लेकिन अब ठीक है.. मजा आ रहा है.. हाँ ऐसे ही चोदो मेरी गांड. हाय.. आऊ.. हाँ ऐसे. थोडा धीमे प्लीज.. हाँ ऐसे. हाँ हाँ.. चलो चोदते रहो अपनी बहन की गांड.. कितना मस्ती आती है जब तुम धीमे-2 मेरी गांड में घुसाते हो और तेजी से बाहर निकालते हो.. हाय मेरे मोनू तू भी आजा.. मैं चाहती हूँ कि तू मेरी चूत चोदे और मनीष मेरी गांड मारे.
 
दीदी की इच्छा सुन कर मैं सातवे आसमान पर पहुच गया और एक आज्ञाकारी भाई की तरह दीदी के नीचे लेट गया और रिशू के लंड से भोसड़ा बन चुकी दीदी की प्यारी चूत को चोदने लगा और मनीष मेरी प्यारी सी दीदी की गुलाबी गांड का कचूमर निकालने लगा.

‘आआह.. गज़ब.. मजा मजा मजा...’ दीदी सुध-बुध खोकर चिल्ला रही थी, जबकि मैं स्वयं भी ऐसा शानदार नजारा देख कर उत्तेजना से फटा जा रहा था.

आज मेरा दूसरा सपना भी पूरा हो रहा था.. पहला दीदी को चोदना और दूसरा 2इन1.. मैं हमेशा से रश्मि दीदी के साथ डबल पेनेट्रेशन करना चाहता था, और आज मेरी इच्छा पूरी ही रही थी.

पहले तो मनीष धीरे-2 धक्के लगाता हुआ मेरी दीदी की गांड को रवां करता रहा और थोड़ी देर बाद उसने अपने धक्कों में तेजी लाते हुए धुआंधार रफ़्तार से मेरी कमसिन बहन की गांड कुटाई चालू कर दी.

इस समय मेरे लंड को रश्मि दीदी की चूत के अन्दर भी मनीष के लंड का साफ़ एहसास हो रहा था और उसके लंड के भरपूर धक्कों की चोट मेरे लंड को भी खूब महसूस हो रही थी..

फिर मनीष लगातार अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ता जा रहा था और रश्मि दीदी की चूत में स्थित मेरे लंड को उसकी गांड में होने वाली कुटाई साफ़ महसूस हो रही थी.. वास्तव में तो मनीष का लंड रश्मि दीदी की गांड मार रहा था लेकिन चूत में घुसे मेरे लंड को भी उसके भयानक घिस्से महसूस हो रहे थे.

रश्मि दीदी तो मस्ती में सातवें असमान पर थी.. मुझे तो यकीं ही नहीं हो रहा था.. मनीष का मोटा लंड बिना किसी परेशानी के मेरी प्यारी बहन की कमसिन गांड में अन्दर-बाहर हो रहा था...

‘आआआआ.. ओईईईईई.. और और और और तेज..आ ऊऊ.. जोर से धक्के मारो.. आआआआ.. आईई.. ऐसे.. ऊऊऊऊऊ.. आआआ. रगड़ के मारो मनीष.. आआईईई.. आह कैसी मस्ती आ गई.. जैसे मर्जी चोदो मुझे मनीष, और तुम भी मोनू..’

रश्मि दीदी आंख मार कर मुस्कुराते हुए बोली- ..आज से तुम दोनों मेरे भाई नहीं पति हो... दोनों इकट्ठे घुसेड़ो.. मेरी चूत और गांड एक झटके में ही भरा करो अपने धक्कों से.. हाआआआन.. ये तो असली जन्नत है.. गजब. जरा रुकना मेरे प्यारे पतियों.. काफी देर से मैंने आपके लंडों का स्वाद नहीं चखा.. इस बार मैं दोनों को इकट्ठे ही अपने मुंह में लेना चाहती हूँ..
 
हम दोनों भाइयों ने अपने औजार रश्मि दीदी की भट्टियों से बाहर निकाले और हमारी रानी बेहना ने बिना देर किये उन्हें अपने दोनों हाथों की मुट्ठी में पकड़ कर सहलाते हुए अपनी जीभ से उनकी मसाज करने लगी.

हमारे लंड पूरे तनाव के साथ खड़े हुए थे और उत्तेजना में झटके मार रहे थे.

हमारी बहन ने पहले बारी-2 से दोनों लंडों को चूसना आरंभ किया, और फिर इकट्ठे ही मुंह में डालने की कोशिश करने लगी और वो इसमें कामयाब भी होने लगी थी.

‘वाह जानेमन. तुम तो गजब ढा रही हो.. दोनों ले लिए अपने छोटे से मुंह में?’ मैंने अपनी बहन की प्रशंसा की तो वो शर्मा कर अपनी आँखें छुपाने लगी..

‘मुझे लगता है कि हमारी प्यारी दीदी हमारे लौडों को एक साथ अपने सबसे छोटे छेद में भी ले सकती है...’

मेरे इतना कहते ही एक पल को तो सन्नाटा छा गया, लेकिन अगले ही पल मेरी बहन ने इस चैलेंज को स्वीकार करते हुए मुस्कराहट के साथ अपना सर हिला कर सहमति जताई.
 
Back
Top