• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

पाप पुण्य complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
पहले मैंने रश्मि दीदी के नीचे से निकल कर मनीष के लिए ज्यादा स्पेस बनाया, जिससे की वो ज्यादा आजाद होकर अपने लंड को दीदी के चूतड़ों में पेल सके.

मेरा सोचना बिल्कुल सही था और मेरे हटते ही मनीष ने शहंशाही अंदाज में अपने रुस्तम लंड को मेरी दीदी के चूतड़ों में पेल दिया. सिसकारियाँ भरते हुए रश्मि दीदी ने अपने चूतड़ स्थिर रखते हुए मूसल लंड के पूरा अन्दर घुस जाने का इंतजार किया और फिर जब मनीष ने हल्के-2 धक्कों से धीरे-2 चोदना शुरू कर दिया तो मैंने भी अपनी दीदी के चूतड़ों के पीछे जाकर अपने लंड से दीदी की गांड को कुरेदना शुरू किया जो पहले से ही मनीष के लंड से पूरी तरह भरी थी.

काफी मशक्कत के बाद आखिर मैंने भी अपने झटके मारते हुए लंड को मनीष के लंड के समान्तर रश्मि दीदी की गांड में घुसेड़ दिया तो उनके मुह से एक गगनभेदी चीख निकल गयी... दर्द तो मुझे भी हुआ पर यह वाकयी गजब का अनुभव था..

मैं रश्मि दीदी की चुदती हुई गांड के अन्दर पहुँच चुका था जहाँ पहले से ही मनीष के लंड ने ग़दर मचाते हुए तबाही ला रखी थी..

और अब दो लंडों के मिल जाने से दुगनी रफ़्तार से चुदाई जरूरी थी और हम दोनों भाइयों ने हमारी बहन की गांड के परखच्चे उड़ाते हुए चुदाई शुरू कर दी.
 
हम दोनों इस समय पूरे आवेश में आकर चोद रहे थे और दीदी की चीखें पूरे घर में गूंजने लगी थी. अब ये मालूम नहीं की दर्द से या मस्ती से..

२५ मिनट बुरी तरह से दीदी की गांड मारने के बाद हमने पोजीशन बदल दी और अब मनीष ने कमर के बल लेटते हुए दीदी की चूत को अपने लंड पर पहना दिया और अपनी हथेलियों को उसके नितम्बों के नीचे रख कर उसे ऊपर-नीचे झुलाने लगा.

तूफान मेल की रफ़्तार धक्के खाने पर मेरी बहन की चूत से पानी के छीटें छूट रहे थे और मैं अपने लंड को हाथ में पकड़े हुए रश्मि दीदी की चूत के सामने जगह बनाने लगा. कुछ कोशिश के बाद मैं भी अपने लंड को दीदी की चूत में फिट करने में कामयाब हो गया.

और फिर जो चुदाई हमने शुरू की.. रश्मि दीदी ने अपना बायाँ पैर खम्भे की तरह आसमान में उठा दिया, और हम दोनों भाई जैसे 200 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से अपने लंडों को दीदी की चूत में पेलते गए...

आखिर रश्मि दीदी फट पड़ी - बहनचोदो तुम अआह लोगो ने आज मेरी फाड़ डाली है..आःह्ह्ह ...सालो एक साथ मेरी भुर आःह्ह में दो लंड इसीईई अआः ह्ह्ह्ह भोसड़ा बनाआ आअआः ....कुत्तो मैं झड़ रही हूँ... ऊऊऊ.. मैं झड़ .. अह्ह्ह मेरी चूत ... हाँईईए तुम दोनों आःह इकट्ठे ही मेरी चूत में झड़ो.. खुशकिस्मत तुम्म्म्महारीईईए बहन आःह दो दो भाई इकट्ठे ही ऐसे, ऐसे, ऐसे, ऐसे, ऐसे..
 
रश्मि दीदी ने मरी हुई सी आवाज में अपनी हार्दिक इच्छा का खुलासा कर दिया और मनीष संग हम दोनों ने उनको कस कर जकड़ लिया और ताबड़तोड़ धक्के लगाने चालू कर दिए.

हम दोनों ने उनकी गुलाबी चूत को अपने भयंकर धक्कों से सुर्ख लाल कर दिया था.

और अचानक मनीष चीखने लगा और तेज़ी से शॉट्स लगाता हुआ रश्मि दीदी की चूत में अन्दर गहरे उतरते हुए उससे चिपक गया. अपने लंड पर मनीष का गर्म वीर्य महसूस होते ही उत्तेजना के चरम पर पहुँचते हुए मैंने भी फव्वारा छोड़ दिया और खूब माल निकालते हुए रश्मि दीदी की दो लंडों से भरी हुई चूत से चिपक गया..

हम करीब 5 मिनट तक लंडों को रश्मि दीदी की चूत में डाले हुए बूंद-2 झड़ते रहे.. मेरे ख्याल से किसी भी हालत में आधा कप तो हम दोनों ने निकाला ही होगा रश्मि दीदी की चूत में..

यह तो गजब हो गया..

हम दोनों ने न सिर्फ दीदी की चूत मारी, गांड भी छेदी, फिर दो-2 लंडों को पहले गांड में घुसेड़ा, फिर भी मन नहीं भरा तो चूत में भी दो-2 लौड़ों को ठूंस कर चुदाई की...

आज तो रश्मि दीदी रिशू की चुदाई को भी भूल गयी होगी. मैंने खुद नहीं सोचा था की दीदी और हम इतना आगे बढ़ जायेंगे. ऐसा तो मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखा था.
 
आधे घंटे हम वैसे ही पड़े रहे पर मनीष का अभी मन नहीं भरा था. वो उठा और जाकर किचेन से शहद ले आया और रश्मि दीदी की चूत में भर दिया और गांड पर भी लगा दिया और चाटने लगा. दीदी पहले तो कुछ बोली नहीं पर १० मिनट बाद वो भी अब अपनी मस्ती में आ गई थी मेरे लौड़े पर जीभ फेरने लगी. उनकी चूत फिर से लंड मांगने लगी थी.

आह.. दीदी उफ़.. तुम्हारे ये मखमली होंठ आह.. मेरे लौड़े को पागल बना रहे हैं.. और तुम्हारी जवानी मुझे पागल बना रही है आह.. मेरे मुह से बेसाख्ता निकल गया.

दीदी: बेहेन्चोद अपनी बेहेन को चोद डाला और दीदी दीदी करता है. खबरदार अगर चुदाई के वक़्त मुझे दीदी कहा तो.

दीदी के मुह से गाली सुनकर न जाने क्यों मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने कहा वाह दीदी मज़ा आ गया तुम्हारे मुह से ऐसी बात सुनके

रश्मि: मोनू .. मुझे पता चल चुका है की जो मज़ा नंगेपन में है.. वो शराफ़ात में नहीं.. उफ़.. तेरा ये गर्म लौड़ा मुझे चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है. तुम्हारी ये बहन अब पूरी तरह तुम दोनों की है.. आ जाओ नोंच डालो मेरे जिस्म को.. कर दो मुझे अपने इस लौड़े से ठंडी.. आह.. अब मेरा जिस्म जलने लगा है.

दीदी सीधी होकर बाँहें फैलाए बिस्तर पर लेट गई. मनीष दीदी के पास लेट गया और उनके एक निप्पल को दबाने लगा.. उसके होंठों को चूसने लगा. मैंने दीदी के पैर मोड़े और टाँगों के बीच लेट गया और उनकी पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत पर धीरे से अपनी जीभ रख दी और मैं अपनी जीभ से उसकी चूत की मालिश करने लगा. अब हम तीनो एक-दूसरे को चूमने और चाटने में बिज़ी हो गए थे.

मनीष अब ज़ोर-ज़ोर से उनके मम्मों को दबाने और चूसने लग गया.
 
दीदी- आह.. मनीष उफ़.. आराम से आह.. चूसो.. आह.. सारा रस पी जाओ.. आह.. मज़ा आ रहा है मोनू.. आह.. आह.. सस्सस्स आह.. मोनू.. दर्द हो रहा है आह.. प्यार से मालिश करना.. आह.. तेरी बहन हूँ आह.. उफफ्फ़.

दस मिनट तक हमारी मस्ती चलती रही. अब हम वासना की आग में जलने लगे थे. मनीष का लौड़ा टपकने लगा.

दीदी- आह.. उहह.. मोनू मज़ा आ रहा है.. इससस्स.. आह.. खूब चूसो.. आह.. और दबा के.. ससस्स चूसो.. आह.. मज़ा आ गया. अब मैं चूची पीने ऊपर गया और मनीष ने मेरी जगह ले ली. वो अब आइस्क्रीम की तरह चूत को चाट रहा था.. दीदी की चूत से रस टपकना शुरू हो गया था.. वो अब तड़पने लग गई थी.

दीदी- आह..ससस्स.. मोनू.. आह.. मेरी चूत की आग बहुत बढ़ गई है.. आह.. अब उफफफ्फ़.. सस्सस्स.. मोनू आह.. लौड़ा घुसा दो.. आह.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह.. प्लीज़ मोनू.. आह.. फक मी आह.. फक मी.. सस्सस्स आह…

मनीष भी अब बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गया था. उसके लौड़े से भी रस की बूँदें टपकने लगी थीं.. मेरे बदले वो बैठ गया और लौड़े को दीदी की चूत पर टिका कर धीरे से दबाने लगा.

दीदी- आह.. चोदो मुझे आह.. उई घुसा दो आह.. पूरा डालो.. आह.. मेरी चूत को फाड़ दो आज.. आह.. आईई..

मनीष ने धीरे-धीरे अब कमर को हिलाना शुरू कर दिया था. हर झटके के साथ वो लौड़े को थोड़ा आगे बढ़ा देता और दीदी की आह.. निकल जाती. कुछ ही देर में उसने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और मैं दीदी के ऊपर लेटकर उनके निप्पल को चूसने लगा.
 
दीदी- आह.. अब चुदाई शुरू कर दो.. मुझे दर्द नहीं हो रहा है.. आह.. करो न.. आह.. चोद दो मुझे.. आह.. आज मेरी सारी गर्मी निकाल दो आह..

मनीष स्पीड से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगा. दीदी भी गाण्ड उठा कर उसका साथ देने लगी. चुदाई जोरों से शुरू हो गई.. कमरे का तापमान बढ़ने लगा.

‘ठप.. ठप.. पूछ..फ्छ.. आह.. उहह.. इससस्स.. आह.. उहह.. उहह..’ की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं.

दीदी- आह हाँ भैया आह्ह्ह .. आह.. येस्स्स्सस्स्स्स .. आह.. जोर सीई .. आईईइ ओउ सस्स..

मनीष- ले रश्मि.. आह.. आज आह.. मेरा पॉवर देख.. आह.. तेरी चूत का आह चूरमा बना दूँगा मैं.. आह.. आज के बाद तू जब भी उहह.. चूत को देखेगी.. आह.. मेरी याद आएगी तुझे..

दस मिनट तक मनीष स्पीड से दीदी को चोदता रहा. साला मुझसे झूठ बोला था की सिर्फ एक बार लड़की चोदी है, मनीष तो पक्का चोदू था. पहले 2 बार झड़ चुका था इसलिए अबकी बार कहाँ वो जल्दी झड़ने वाला था. अब तो उसका टाइम और बढ़ गया. मगर दीदी दीदी की चूत लौड़े की चोट ज़्यादा देर सह ना पाई और उनके रस की धारा बहने को व्याकुल हो गई.

दीदी- आई आई.. आह.. जाल्दीईइ अआह . मईए झड अआह ईईईई .. आह.. गई.. आह.. ज़ोर से पेलो.. आहह.. उहह आह..
 
मनीष ने और तेज़ी से लौड़े को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया. दीदी का बाँध टूट गया.. वो झड़ने लगी. कुछ देर बाद वो शान्त पड़ गई.. मगर मनीष का अभी बाकी था.. वो धीरे-धीरे कमर को हिला रहा था. दीदी अब शान्त लेट गई थी.. उनका सारा जोश ठंडा हो गया था. तभी अचानक मनीष ने अचानक लंड तेजी से अन्दर बाहर करना शुरू किया और दीदी की चूत में झड गया.

उसके बाद मनीष एक तरफ लुढ़क गया और मैं घुटनों के बल बिस्तर पर खड़ा हो गया.. जिसे देख कर दीदी मुस्कुराई.

दीदी- क्या हुआ बहनचोद?

मोनू: रश्मि डार्लिंग तुम दोनों का तो हो गया अब जरा मेरे लंड को थोड़ा चूस कर चिकना कर दे.. उसके बाद तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा.. तेरी चूत की गर्मी तो निकल गई.. अभी मेरा रस निकलना बाकी है.

दीदी हँसती हुई मेरे लंड को चूसने लगी.. अपने मुँह में पूरा लौड़ा लेकर अच्छी तरह उसको थूक से तर कर दिया.

मोनू: आह्ह.. आह्ह.. बस दीदी.. अब बन जा घोड़ी.. आज तेरी सवारी करूँगा.. आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता आह्ह.. आह्ह..

दीदी घुटनों के बल अच्छी तरह पर फैला कर घोड़ी बन गई.. वैसे तो रिशू ने उनको घोड़ी बना बना कर एक्सपर्ट कर दिया था पर मेरे साथ तो पहली बार था.. जिस तरह वो घोड़ी बनी थी.. मुझको बहुत अच्छा लगा कि मेरी बहन एकदम पर्फेक्ट घोड़ी बनी है
 
मैंने कहा, वाह.. दीदी क्या जबरदस्त घोड़ी बनी है तू.. अब ठुकाई का मज़ा आएगा.. तेरी चूत कैसे फूली हुई है.. उफ़फ्फ़ साली ऐसी चूत देख कर लौड़े की भूख ज़्यादा बढ़ जाती है

मैंने लौड़े को चूत पर टिकाया और पूरा एक साथ अन्दर धकेल दिया

दीदी- आईईइ.. मोनू आराम से.. आह्ह.. एक बार में पूरा घुसा दिया.. आह्ह.. आज तो आराम से करो.. कल से जैसे चाहो चोद लेना..

मोनू: अरे सॉरी यार.. तेरी चूत देख कर बहक गया था.. अब ख्याल करूँगा

मैं अब दीदी की कमर पकड़ कर चोदने लगा.. मेरे हाथ दीदी की मुलायम गाण्ड को भी सहला रहे थे. बीच-बीच में दीदी की गाण्ड के छेद में उंगली भी घुमा रहा था. थोड़ी देर की मस्ती के बाद दीदी भी गरम हो गई और गाण्ड को पीछे धकेल कर मज़े को दुगुना बनाने लगी

दीदी- आह.. आह.. मोनू.. आह्ह.. आज की रात हर तरीके से मुझे चोदो.. आह.. आह.. फास्ट करो.. और तेज मोनू आह्ह.. मज़ा आ रहा है

मैं अब तेज़ी से चोदने लगा. मेरा लौड़ा अब फूलने लगा था. कितना सह पाता वो चूत की गर्मी को आख़िर मेरे लौड़े ने रस की धारा चूत में मारनी शुरू कर दी. उसका अहसास पाकर दीदी की चूत भी झड़ गई. दो नदियों के मिलन के जैसे उनके कामरस का मिलन हो गया.

अब हम दोनों भी शान्त पड़ गए.. दीदी की कमर में दर्द हो गया. जैसे ही मैने लौड़ा बाहर निकाला.. वो बिस्तर पर कमर के बल लेट गई और लंबी साँसें लेने लगी. मनीष भी उसके पास ही लेट गया.

दीदी- उफ़फ्फ़ मोनू.. इस बार तो तुम दोनों ने लंबी चुदाई की.. आह्ह.. मेरी चूत की खुराक पूरी कर दी.

मोनू: अब तो तुमको चुदने की इतनी आदत हो गयी है दीदी फिर बिना चुदे नींद कैसे आती है.
 
दीदी के जवाब देने से पहले ही मनीष ने फिर से रश्मि दीदी की चूत में शहद लगा दिया. तब दीदी ने उसको बोला बस मनीष बस अब हिम्मत नहीं है. अब सुबह होने वाली है. हम थोडा सो लेते है. हम दोनों ने दीदी की बात मान ली और हम सो गए.

सुबह मेरी नींद थोडा जल्दी खुल गयी मैंने देखा की हम तीनो नंगे एक दुसरे से गुथे हुए सो रहे थे. मनीष का लंड सुबह सुबह नींद में भी खड़ा है और रश्मि दीदी की चूत से वो शहद बह रहा था जो मनीष ने रात में डाला था. वो दोनों अभी भी गहरी नींद में सो रहे थे..

मैंने शहद की शीशी उठाई और उसे किचन में वापस रखने जाने लगा पर जैसे ही मैंने रूम का डोर खोला मनीष का पालतू जर्मन शेफर्ड रॉकी अन्दर घुस गया.

शायद मनीष ने रात में उसे खोल दिया होगा. रॉकी एक ३ फीट ऊँचा हत्ता कट्टा कुत्ता था जो की शहद की महक सूंघ कर सीधे जा कर रश्मि दीदी की चूत चाटने लगा. मैं जब किचेन से वापस आया तो मैंने देखा की दीदी जाग गयी है और राकी के चूत चाटने से डर भी रही है और मस्त भी हो रही है और रॉकी का भी लंड बाहर निकल आया था.

अब मैंने मनीष को भी जगा दिया. अपने कुत्ते को हमारी बहन की चूत चाटते देख मनीष का खड़ा लंड और सख्त हो गया.

मनीष बोला: मोनू, हमारी बहन बड़ी नसीब वाली है. २४ घंटे में ३ अलग अलग लंड. रात भर हमसे मज़े लिए और सुबह सुबह कुत्ते से चुदेगी. चल रश्मि जल्दी से कुतिया बन जा.
 
Back
Top