"मैं यहीं मौजूद हूँ इमरान.....तुम्हारे समीप.....तुम्हारे सामने." थ्रेससिया ने ठंडी साँस लेकर कहा. "तुम अगर मुझे मारोगे तो ये भी एक प्रकार का आनंद ही होगा मेरे लिए...."
थ्रेससिया ने आँखें बंद कर ली.....और स्वप्निल स्वर मे बोली...."इमरान का हाथ मेरा गाल.....इमरान मारो मुझे.....जिस तीव्रता से मुझे तुम से प्यार है उतनी ही शक्ति से मारो......मारो...."
"इमरान ने ठहाका लगाया. और फिर थ्रेससिया के कंधों पर हाथ रख कर बोला...."मैं तुम्हें मारूँगा डार्लिंग......अर्रे सड जाए मेरे हाथ....कीड़े पड़े उसमें...." उसका लहज़ा ठेठ देसी बुढ़ियों के जैसा था.
"मक्कारी नहीं इमरान...." थ्रेससिया आँखें खोल कर गंभीरता से बोली. "तुम्हारा ये लहज़ा मक्कारी से भरा है....पहले तुम्हारे लहजे मे सचाई थी.....जब तुम मार पीट की धमकियाँ दे रहे थे. मगर अब...."
"मैं केवल ये जान'ना चाहता हूँ कि तुम किन लोगों केलिए काम कर रही हो? अगर तुमने ना बताया तो हफ ड्रॅक तो मेरी मुट्ठी मे है ही...."
"ओह्ह....इस हद तक आगे बढ़ चुके हो..." थ्रेससिया ने हैरत से कहा. फिर हंस कर प्यार भरे स्वर मे बोली...."मैं पहले ही जानती थी कि इमरान डियर के देश मे एक नहीं चलेगी.....ओके....अच्छा होगा कि तुम हफ ड्रॅक ही को आज़माओ. ना मैं अपने देश से गद्दारी कर सकती हूँ और ना इस दिल को नर्क मे झोंक सकती हूँ." थ्रेससिया ने सीने पर हाथ रख कर कहा.
"हफ ड्रॅक की तरफ मुझे बढ़ा रही हो ये गद्दारी नहीं हुई?"
"मैने तुम्हें हफ ड्रॅक के बारे मे भी नहीं बताया....तुम पहले से ही जानते हो. इसलिए इस बारे मे मेरी अंतरात्मा मुझे धिक्कारेगी नहीं."
"तुम अब तक यहाँ क्यों बंद रही.....निकल क्यों नहीं गयीं?'"
"जब तक उस ख़तरनाक खोज का थोड़ा सा भाग भी यहाँ शेष रहता.....मैं नहीं जा सकती थी. हम ये काम खामोशी से करना चाहते थे. पहले कोशिश की गयी थी कि इसे छेड़ा ही ना जाए बल्कि ये पता करने की कोशिश की जाए कि ये पदार्थ हासिल कैसे होता है....लेकिन उस मे सफलता नहीं मिली. ओह्ह.......इमरान.....उस मासूम लड़की के लिए मैं बहुत दुखी हूँ......मुझे उस से बहुत लगाव हो गया है. प्लीज़ उसे डॉक्टर के क्रोध से बचाना."
"तुम अपनी बताओ कि तुम्हारे साथ क्या सलूक करूँ?"
"सिर्फ़ एक बार कह दो कि तुम्हें भी मेरा ख़याल है.....उसके बाद मेरी लाश सड़कों पर घसीट'ते फिरना."
"नहीं.....मैं तुम्हारी लाश की जेल्ली बनाउन्गा और हर नाश्ते मे टोस्ट के साथ लगा कर खाउन्गा......लेकिन मुझे दुख है कि इसके लिए मुझे बहुत इंतेज़ार करना पड़ेगा. क्योंकि पहले तो तुम जैल मे रखी जाओगी.....फिर केस चलेगा......उसके बाद ना जाने क्या हो...."
"तुम मुझे हथकड़ियाँ लगाने के बाद ही कह देना कि तुम भी अपने दिल मे मेरे लिए थोड़ी सी जगह रखते हो....इमरान...! मेरा अपराध अपनी जगह पर और दिल......मैं क्या कहूँ......मैं जानती हूँ मेरे शब्द तुम पर से इसी तरह से धलक रहे हैं जैसे किसी चिकने पत्थर से शबनम की बूँदें. मैं अपने अपराध के संबंध मे तुम से किसी प्रकार की छूट नहीं माँग रही.....तुम ये समझना भी मत. मेरे साथ जो दिल चाहे वैसा बर्ताव करो......लेकिन केवल एक बार स्वीकार कर लो कि तुम भी...."
"कि मैं भी....." इमरान ने बुरा सा मूह बना कर ठंडी साँस ली. कुच्छ और भी कहना चाहा. मगर केवल उसे घूर कर रह गया.
"हां....हां.....कहो. चुप क्यों हो गये?"
"मैं अभी इस समस्या के अलावा और किसी टॉपिक पर बात नहीं कर सकता."
"हां.....मैं जानती हूँ कि तुम ऐसे ही हो." थ्रेससिया ने ठंडी साँस ली. उसके चहरे पर गहरी उदासी छा गयी थी.
"हफ ड्रॅक किस को अपनी रिपोर्ट देता है...?"
"यहाँ तुम्हारे देश मे उस से सिनियर कोई नहीं. उसे पार्टी का लीडर समझो..."
"थ्रेसस....." इमरान कुच्छ कहते कहते रुक गया. इस बार फिर उसके लहजे मे प्यार था.
"अहहाअ....." थ्रेससिया ने आँखें बंद कर लीं. ऐसा लग रहा था जैसे वो इमरान के प्यार भरे स्वर के आनंद मे डूब जाना चाहती हो.
"इमरान डार्लिंग...." वो उसी तरह आँखें बंद किए हुए रुक रुक कर बोली...."इस लहजे मे सच्चाई नहीं है.....लेकिन त्रेसस.....आज तक किसी ने भी मुझे इतने फ्री अंदाज़ मे मुझे संबोधित नहीं किया. जो मेरा लीडर हफ ड्रॅक है वो भी मुझे मेडम कह कर पुकारता है.....उफ्फ कितनी मिठास है इस अपनापन भरे अंदाज़ मे.....इमरान मैं प्यासी हूँ.....इस लहजे की प्यासी......इस संबोधन की प्यासी......लोग मुझ से डरते हैं. हफ ड्रॅक भी मुझ से बात करते समय हकलाने लगता है. ओह्ह.....थ्रेसस......" वो अपने होंठों की इस तरह गोल बना ली जैसे किस देना चाहती हो. फिर उसने आँखें खोल दी.
"तुम हालात को पेचीदा बना रही हो थ्रेसस."
"मैं यहीं हूँ इमरान. विश्वास करो....अगर तुम्हारी जगह कोई और होता तो अब तक उसकी हड्डियों का भी पता नहीं चलता. क्योंकि मेरा देश साइंटिफिक डेवेलपमेंट मे पूरी दुनिया से बहुत आगे है. मैं तुम्हें यहाँ तक बता सकती हूँ कि अभी कुच्छ दिन पहले नीला उपग्रह जो आकाश मे दिखाई दिया था.....मेरे ही देश से संबंध रखता था. और सारी दुनिया चीख उठी थी कि वो उस उपग्रह से अंजान हैं. जिन देशों ने सब से पहले अपने उपग्रह अंतरिक्ष मे भेजे थे उन्होने बड़े बोखलाए हुए ढंग से घोषणा की थी कि वो अनोखा नीला उपग्रह उन से संबंध नहीं रखता. मैं तुम्हें अब बताऊ कि वो 'ज़िरोलॅंड' का उपग्रह था. ज़िरोलॅंड जो एक दिन पूरी दुनिया पर शासन करेगा.....और तुम्हारी समझ से जो सब से अधिक डेवेलोप्पेड कंट्री है वो उसके अधीन होंगे.
मैं तो ये कह रही थी कि मैं यहाँ मौजूद हूँ. मुझे हथकड़ियाँ लगा कर पोलीस के हवाले कर दो. मैं ये कभी नही चाहूँगी कि इमरान की बदनामी हो. उस इमरान की जिसे मैं अपनी जान से अधिक प्यार करती हूँ. मगर इमरान डियर ये भी संभव नहीं कि मैं अपने देश से गद्दारी करूँ. दुनिया की कोई शक्ति मुझ से ये नहीं पुछ सकती कि ज़िरोलॅंड कहाँ है."
"मैं भी नहीं थ्रेसस डार्लिंग....?"
"नहीं......तुम्हारी बात अलग है. तुम्हारा मक़ाम अलग है. तुम्हें इसकी अनुमति दे सकती हूँ......कि तुम अपने हाथों से मेरा गला घोंट दो. लेकिन ये असंभव है कि मैं तुम्हें ज़िरोलॅंड का लोकेशन बता दूं."
"फिर बताओ.....मैं तुम्हारा क्या करूँ? तुम्हारा आचार डालूं या सच मुच जेल्ली बना कर खा जाउ?"
"तुम्हारे लिए यही मुनासिब है कि मुझे पोलीस के हवाले कर दो. अपने हाथों से हथकड़ियाँ पहनाओ. ये मेरी सब से बड़ी इच्छा है कि एक बार तुम्हारे हाथों से हथकड़ियाँ पहन लूँ.......क्योंकि ये भी तुम्हारे नाम पर एक बड़ा काला धब्बा है कि कयि टकराव होने के बाद भी तुम मुझे गिरफ्तार नहीं कर सके."
इमरान किसी सोच मे पड़ गया. कुच्छ देर बाद उसने फिर कहा......"वो सुनहरा स्पंज क्या बला है?"
"ह्म्म.....मुझे पता है कि वही इन सारी उलझनों का कारण बना है. ना वो हमारे एक आदमी की ग़लती से डॉक्टर की लॅब मे गिर जाता......और ना हमें इन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता. इमरान दा ग्रेट को भी कानो कान खबर ना होती......और हम अपने उद्देश्य पूरा करने मे कामयाब हो जाते. हलाकी वो एक तुच्छ सी चीज़ है. हम जनरल स्पंज की जगहगोलडेन रेशों वाले स्पंज का प्रयोग करते हैं."
"आहहा.....कितना आराम-दायक है वो स्पंज....." इमरान खुश होकर बोला..."एक दो टुकड़े मुझे भी दो. मैं ने एक रात एक तजुर्बा किया था थ्रेसस डार्लिंग."
"कैसा तजुर्बा..."
"नींद नहीं आ रही थी. रात गुज़रती जा रही थी. मैने उसी स्पंज को आइ लोशन मे डाल कर आँखों पर डाल लिया. बस ऐसी मज़े की नींद आई कि पुछो मत. मैं उसी आइ लोशन को अक्सर पी भी लेता हूँ...."
"बकवास शुरू कर दी तुम ने.....सीरियस्ली बातें करो.....मेरे लिए तुम ने क्या सोचा है?"
"आहहा......वो आइ लोशन....असीटिक आसिड और लिक्विफाइड अमोनिया से तैयार किया जाता है.....थ्रेसस डियर....."
थ्रेससिया अचानक उच्छल पड़ी. उसकी आँखें हैरत से फैल गयीं.
"ओह्ह......तुम ये भी जानते हो?" उसने धीरे से कहा.
"और इसके बाद भी तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारी मुहब्बत पर यकीन कर लूँ?"
"ना करो...." थ्रेससिया झल्ला कर चीखी. "लेकिन मैं तुम्हें अपने देश के राज़ों के बारे मे कुच्छ नहीं बताउन्गी. चाहे तुम मुझे कुत्तों से नोचवा डालो...."
"मैं यही करूँगा....." इमरान दाँत पीस कर बोला.
थ्रेससिया कुच्छ ना बोली. वो चुप चाप अपने बेड की तरफ मूड गयी.
"ठहरो......तुम इस जगह से हिल भी नहीं सकतीं."
अचानक थ्रेससिया उसकी तरफ मूडी. उसके हाथों मे पॉइंट टू फाइव का छोटा सा पिस्टल चमक रहा था.
"क्या तुम मुझे रोक सकोगे?" उसने क्रोध भरे स्वर मे कहा. "चलो आज मैं तुम्हारा 'संग आर्ट' भी देखूँगी."
"निश्चित रूप से ऐसे अवसरों पर वही काम आता है." इमरान मुस्कुराया.
"तो ठीक है.....ये थ्रेससिया बिंबोल बी का हाथ है.........मैं देखूँगी तुम कितना फुर्तीले हो."
"फाइयर करो..."
"फाइयर....!" थ्रेससिया ने मुस्कुरा कर पिस्टल उसकी तरफ उछाल दिया जिसे इमरान ने कॅच कर लिया.
"मैं तुम पर फाइयर करूँगी.." वो ज़ोर से हँसी....."ये तो ऐसा ही है जैसे मैं अपने दिल की जगह पर पिस्टल रख कर ट्रॅगर दबा दूं....."
"फिर मैं ही तुम्हें गोली मार दूँगा. क्योंकि मुझे विश्वास है कि थ्रेससिया से कोई राज़ जान पाना बहुत ही कठिन है."
"ओके......तुम गोली ही मार दो. मैं ठंडे दिल से तुम्हारे इस फ़ैसले का स्वागत करती हूँ."
इमरान कुच्छ ना बोला.....उसकी आँखों मे मानसिक उलझन सॉफ सॉफ देखी जा सकती थी.
थ्रेससिया बेड की तरफ चली गयी. फिर इमरान ने उसे लेट'ते हुए देखा और ये भी देखा कि वो अपने उपर चादर खीच रही है. फिर उसने चहरा भी ढक लिया.
इमरान खामोश खड़ा रहा. अचानक उसने थ्रेससिया के क़हक़हे की आवाज़ सुनी. उसने एक झटके से चादर अपने चेहरे से हटा ली थी.
"तुम हार गये इमरान......हहा.....हार गये.....डार्लिंग...." उसने कहा.
उसकी आँखें अत्यधिक नशीली हो गयी थीं. और ऐसा लगने लगा था जैसे वो कुच्छ ही पलों मे सो जाएगी.
"आहहा.....तो क्या अब ये तुम्हारा बेड.....छत फाड़ कर उपर निकल जाएगा? हो सकता है.......मैने लड़की से तुम्हारे फेग्राज़ज़ की कहानी सुनी है."
"नहीं डार्लिंग....."थ्रेससिया की आवाज़ दर्द भरी थी......और होंठो पर एक हल्की सी मुस्कुराहट थी.
"क्या मतलब....?" एका-एक इमरान चौंक पड़ा.
"ये लो..." थ्रेससिया ने कोई चीज़ इमरान की तरफ उछाल दिया......इमरान ने उसे हाथ पर रोका.....और दूसरे ही पल.......
दूसरे ही पल मे उसकी आँखें हैरत से फैल गयीं. ये एक छोटी सी शीशी थी जिसके पेन्दे मे रेड कलर का एक बूँद हिल रहा था और उसके लेबेल पर लिखा था "पॉइजान"
"ये तुम ने क्या किया?" इमरान शीशी फेंक कर उसकी तरफ झपटा.
थ्रेससिया हँसी.....लेकिन अंदाज़ बहुत थका थका सा था.
उसने भर्राई हुई कमज़ोर आवाज़ मे कहा "फिर मैं क्या करती. मैं जानती थी कि तुम मेरी किसी भी सजेशन को नहीं मानोगे. मेरी बातों पर शक करोगे. तुम्हें किसी भी बात का विश्वास दिला पाना बहुत ही कठिन काम है.......क्योंकि तुम ज़िद्दी हो. चलो तुम्हारा अगर एक आँसू भी मेरी लाश पर गिर सका तो मैं यही समझूंगी कि मैने ज़हर पी कर कोई ग़लती नहीं की,.....ये एक तेज़ असर वाली ज़हर है........अच्छा.......जाओ दूर हटो.....हट जाओ......मुझे मरने दो."
इमरान दो कदम पिछे हट गया. थ्रेससिया ने फिर से चेहरे पर चादर खीच ली. इमरान खामोश खड़ा पलकें झपकाता रहा. मगर अब वो यही सोच रहा था कि वो औरत थ्रेससिया बिंबोल बी ऑफ बोहीमिया है......दुनिया की सब से चालाक औरत.
अचानक थ्रेससिया का शरीर काँपने लगा. उसी तरह जैसे वो बर्फ के ढेर मे गिर कर ठंडक का शिकार हो गयी हो.फिर एक झटके के साथ उसकी गर्दन दाएँ तरफ धलक गयी......शरीर अब बिल्कुल शिथिल हो चुका था.
इमरान ने उसे आवाज़ें दी. नब्ज़ टटोली. नाक के सामने हाथ ले जाकर साँस महसूस करने की कोशिश की......लेकिन अब कुच्छ भी नहीं था.
वो हक्का बक्का खड़ा रह गया.
********
डॉक्टर डावर का फ्रांसीसी सेक्रेटरी तलाश करने के बाद भी नहीं मिल सका. उनके बंग्लो के चारों तरफ मिलिटेरी का पहरा था......और थ्रेससिया की लाश पोलीस की निगरानी मे हॉस्पिटल भिजवाई जा चुकी थी. इमरान अभी डॉक्टर के बंग्लो मे ही था. लेकिन उसके चहरे से ये नहीं प्रकट हो रहा था कि उसे थ्रेससिया के मरने पर थोड़ा सा भी दुख हो. वो तो अब सिम्मी को बहलाने की कोशिश कर रहा था.......जिसने थ्रेसससिया की लाश देख कर रोते रोते अपनी आँखें फूला ली थीं.
बड़ी मुश्किल से वो उसे उसके बेडरूम मे भिजवा सका. डॉक्टर डावर बहुत अधिक व्यस्त दिखाई दे रहे थे. अब उनके चेहरे पर भी परेशानी के लक्षण नहीं थे.
कुच्छ देर बाद दोनों फिर उसी तहख़ाने मे दिखाई दिए जहाँ से थ्रेससिया की लाश उठवाई गयी थी.
"मैं सोच भी नहीं सकता था इमरान कि मेरा सेक्रेटरी इतना बड़ा विल्लेन साबित होगा." डॉक्टर डावर ने कहा. उस से बॅस यही एक राज़ छिपा हुआ था कि मैने वो रहस्सयमयी पदार्थ किस तरह हासिल किया था और उसे कहाँ छुपाया था. और उस औरत थ्रेससिया की हरकतों से भी यही प्रकट होता है कि मेरे सेक्रेटरी को विश्वास नहीं था कि वो किस जगह पर छुपाया गया होगा. वरना थ्रेससिया इतना लंबा ड्रामा क्यों खेलती. मतलब ये कि वो लोग केवल संदेह की बुनियाद पर मेरे तहख़ाने मे देखना चाहते थे. और तहख़ाने के बारे मे केवल 3 आदमी जानते थे. मैं, वो सेक्रेटरी और सिम्मी. लेकिन उस पदार्थ या उसके भंडार का पता सेक्रेटरी या सिम्मी को भी नहीं था."
इमरान कुच्छ ना बोला. वो उन चीज़ों को उलट पलट रहा था जो थ्रेससिया से संबंध रखती थी. तभी उसने हेड-फोन के वो सेट उठाए जो सिम्मी के कहने के अनुसार कपल टॅगेज़ ही रहे होंगे.
"ओह्ह.....ये सब बकवास है." डॉक्टर डावर ने कहा. "मैं पहले ही देख चुका हूँ. इन मे कुच्छ भी विशेष नहीं है. ये ट्रॅग्युलर प्लेट नाक के नीचे आकर होन्ट को छुपा लेते हैं. इसलिए एक दूसरे के होन्ट की हरकत नहीं देखी जा सकती. वरना सिम्मी भी अंदाज़ा कर लेती कि वो लड़की उसे मूर्ख बना रही है."
"मगर वो गोता-खोरी का ड्रेस...." इमरान एक तरफ रखे उस ड्रेस की तरफ इशारा करते हुए कहा....."बहुत कुच्छ है इसमे डॉक्टर.....इस मे हेड फोन भी है और ऑक्सिजन की थैलियों के नीचे एक छोटी सी मशीन भी......शायद इसके द्वारा पानी मे भी एक दूसरे से बात कर सकते हैं. और सब से अधिक आश्चर्य-जनक चीज़ वो छोटी सी पिस्टल है जो उस ड्रेस की एक जेब से मिला है. आप ऐसे ही इसका ट्रॅगर दबाइए......कुच्छ भी नहीं होगा. केवल एक हल्की सी 'ट्रिच' की आवाज़ सुनाई देगी. इसकी नाल पानी मे डूबा कर ट्रॅगर दबाइए फिर देखिए क्या होता है."
"सॉरी.....इसका प्रयोग मैने आपके बॅग्लो के बाहर वाले तालाब मे कुच्छ देर पहले किया था......उसकी सारी मछलियाँ टुकड़े टुकड़े हो गयीं."
"ये तुम ने क्या किया......अर्रे वो बहुत कीमती मछलियाँ थीं.....ओ माइ गॉड....मुझे मशविरा तो कर लिया होता."
"बस अब ग़लती तो हो ही गयी.....मैं आपको स्विट्ज़र्लॅंड की फिशस मंगवा दूँगा जिन की दुम पर 'मधुबाला ज़िंदाबाद' लिखा होता है."
"हाएन्न.....ये क्या बकवास है?" डॉक्टर डावर उसे हैरत से देखने लगे.
"ऐसी बातों पर इसी तरह मेरा दिमाग़ खराब हो जाता है. मैं आपको एक आश्चर्य-जनक आविष्कार के बारे मे बता रहा था और आप को अपनी मछ्लियो की चिंता होने लगी."
"दर्ज़नों आविष्कार मेरी जेब मे पड़ी रहती हैं. लेकिन अब वैसी मछलियो कभी ना मिल सकेंगी. मैं एक रेर नस्ल 'ब्लॅक-गोल्ड फिश' पर कुच्छ रिसर्च कर रहा था. तुम ने उन सब का सत्यानाश कर दिया. लाओ........देखूं वो पिस्टल...."
इमरान ने पिस्टल निकाल कर डॉक्टर डावर को दिया. ये किसी चमकदार मेटल का साधारण पिस्टल लग रहा था.
डॉक्टर डावर ने उसके मूह को उंगली से बंद कर के ट्रॅगर दबा दिया. हल्की सी 'ट्रिच' की आवाज़ सुनाई दी......और फिर डॉक्टर उसकी नाल के मूह से उंगली हटा कर नाक के समीप ले गये. अचानक इमरान ने फिर उनके चेहरे का रंग उड़ता हुआ देखा.
"इमरान....." वो निढाल सी आवाज़ मे बोले..."मैं पूरी तरह लूट चुका हूँ. खुदा उस सेक्रेटरी का सत्यानाश करे....जिसने मुझे बिल्कुल तबाह कर दिया. अर्रे मैं उसे अपने बेटे से अधिक मानता था. इस प्रकार के एक हथियार के आविष्कार की सोच मैने ही सबसे पहले की थी......जो पानी के अंदर काम कर सके. और इतना हल्का फूलका हो कि उसके इस्तेमाल मे कोई कठिनाई ना हो. मगर......फिर कयि उलझनें ऐसी आ पड़ीं कि मेरा दिमाग़ दूसरी तरफ आकर्षित हो गया. हलाकी इस पर मेरा काम लगभग पूरा ही हो चुका था. लेकिन मैने इस हथियार को कोई विशेष आकर नहीं दे पाया था. क्या पानी मे इसका ट्रॅगर दबाने से रेड कलर की चमकदार लहरें निकलती थीं?"
"जी हां...."
"बॅस...." वो ठंडी साँस लेकर बोले....."अब मुझे निश्चिंत रहना चाहिए कि केवल एक राज़ के अलावा
मेरे सभी राज़ किसी दूसरे देश के साइंटिस्ट तक पहुच चुके हैं."
"शायद आपका वो राज़ वही स्पेस ब्लॅक होल बनाने वाला पदार्थ है...."
"हां.....मगर ये आवश्यक नहीं है कि वो राज़ ही रह पाए. उसकी काफ़ी मात्रा वो लोग निकाल ले
गये हैं. हो सकता है कि उस पर उनका कोई एक्सपेरिमेंट उन्हें उसके हासिल करने की विधि की तरफ भी ले
जाए....."
"इस पिस्टल मे कॉन सी चीज़ प्रयोग होती है?"
"एक विशेष प्रकार की बॅटरी जिसे अटॉमिक एनर्जी से चार्ज किया जाता है. मेरा ख़याल है
कि.........ठहरो....मुझे देखने दो...."
डॉक्टर डावर थोड़ी देर तक उस पिस्टल को उलट पलट कर देखते रहे. उन्होने उसके दस्ते मे एक बॉक्स सा
पैदा कर लिया. शायद वो किसी बटन के दबाने के कारण प्रकट हो गया था. उन्होने उस बॉक्स से
कोई ठोस और ग्रे कलर की एक स्क्वाइर शेप्ड वस्तु निकाली और हथेली पर रख कर इस प्रकार हाथ को
हिलाने लगे जैसे उसका वज़न का अनुमान लगा रहे हों.
अंत-तह उन्होने कहा...."मेरे विचार से अगर ये 30 साल तक लगातार 24 घंटे प्रयोग मे रहे तब भी
इसे दुबारा चार्ज करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी."
"अच्छी बात है.....इसे उसी तरह रख दीजिए......और मैं अब समंदर की सैर करूँगा...."
"क्या मतलब...?"
"एक समय मे मुझे फ्रॉग-मॅन बनने का भी शौक रह चुका है..."
"तुम सोचे समझे बिना इस प्रकार का कोई कदम मत उठाओ.....मैं तो इस समय केवल शार्ली के
बारे मे सोच रहा हूँ. कहीं ये केवल संयोग ही ना हो कि वो इस समय यहाँ नहीं है."
"ये शार्ली कॉन है?"
"वही......मेरा सेक्रेटरी....."
"आहहा.....लेकिन कुच्छ देर पहले आपने कोई दूसरा नाम बताया था...."
"मैं उसे शार्ली ही कह कर संबोधित करता था. बिल्कुल उसी तरह प्यार से जैसे अपने बच्चों को
संबोधित करते हैं. इमरान......ही ईज़ आ जीनियस.....बहुत शरीफ भी......मैं कैसे विश्वास
करूँ...."
इमरान कुच्छ ना बोला. वो थ्रेससिया की चीज़ें जमा कर रहा था. अचानक किसी तरफ लगी हुई घंटी बज
इमरान संभला और फिर उसने भी हँसना शुरू कर दिया. इसके अलावा और करता भी क्या. उसकी समझ मे ही नहीं आ रहा था कि उसे क्या कहना चाहिए.
डॉक्टर डावर समीप ही खड़े उसे इश्स तरह घूरे जा रहे थे जैसे उनके विचार से उसका दिमाग़ खराब हो गया हो.
"इमरान डार्लिंग....." दूसरी तरफ से आवाज़ आई. फिर ऐसा लगा जैसे दूसरी तरफ से एक फ्लाइयिंग किस भी दिया गया हो..
"अर्रे बाप रे...." इमरान बडबडाया.
"मैने तुम्हें एक शानदार मोका दिया था इमरान...." आवाज़ आई "लेकिन तुम शंकाओं और संदेहों का शिकार बने रहे. अब बताओ कैसी रही. कल के न्यूज़ पेपर्स मे यही तो छापेन्गे की थ्रेससिया इमरान को चकमा दे कर निकल गयी. अगर तुम ने मेरे हाथों मे हथकड़ियाँ लगा दी होतीं तो मेरे निकल जाने की ज़िम्मेदारी तुम पर नहीं आती. वैसे ना मेरे हाथ हथकड़ियों केलिए बने हैं और ना मैं खुद हवालात केलिए. बोलो......तुम से ग़लती हुई थी या नहीं?"
"नहिंन्न्न्......" अचानक इमरान ने क्रोध भरे स्वर मे कहा.
"अर्रे......खफा हो गये डियर.....सुनो तो सही.....तुम्हारे देश का यही एक आर्ट मुझे बेहद पसंद है. इसी की सहायता से मैं कयि बार बड़े बड़े ख़तरों से निकल गयी हूँ, तुम भी 'योगा और प्राणायाम' की थोड़ी प्रॅक्टीस कर लो. कभी ना कभी काम आ ही जाएँगी."
"मैं प्राण लेने का स्पेशलिस्ट हूँ.,..."
"तुम सचमुच गुस्से मे लग रहे हो....अब इसमे मेरी क्या ग़लती है. मुझे वहाँ से एक आंब्युलेन्स मे लाद कर हॉस्पिटल लाया गया. हॉस्पिटल के कॉंपाउंड मे गाड़ी रुकी. जैसे ही वो लोग मुझे स्ट्रेचर पर डालने लगे मैने सोचा एक छीन्क ही सही. बॅस मेरा छीन्कना ही कयामत हो गया. वो लोग उच्छल उच्छल कर भागे. कॉंपाउंड मे चारों तरफ भूत भूत का शोर गूंजने लगा. मुझे बहुत गुस्सा आया. तुम्ही सोचो कि ये मेरी शान और प्रतिष्ठा के खिलाफ था. बस मैं उन्हें बुरा भला कहती हुई कॉंपाउंड से बाहर निकल गयी. और अब एक चौराहे के टेलिफोन बूथ से तुम्हें कॉल कर रही हूँ."
"अच्छा अब कॉल कर चुकी हो तो मैं अब डिसकनेक्ट कर दूं.......क्योंकि बहुत काम पड़े हुए हैं." ( बर्तन धोना, झाड़ू लगाना, खाना बनाना, कपड़े धोना एट्सेटरा एट्सेटरा )
"ऐज यू विश....." थ्रेससिया के स्वर मे अप्रसन्नता थी.
इमरान ने फोन रख दिया. मेज़ के पास से अभी हटा भी नहीं था कि फिर घंटी बजी. इस बार सफदार का कॉल था और वो थ्रेससिया के ज़िंदा होने की सूचना दे रहा था. वो आंब्युलेन्स मे इस आशंका मे बैठ कर गया था कि शायद थ्रेससिया के गिरोह से मुठभेड़ हो जाए. इमरान ने सफदार की इस सूचना पर कोई कॉमेंट नहीं किया.......केवल हैरत प्रकट कर के फोन काट दिया.
थोड़ी देर तक वो सिम्मी से उस जगह के बारे मे पुच्छ ताछ करता रहा जहाँ थ्रेससिया का फेग्राज़ज़ गिरा था. लेकिन वो इस समय सिम्मी को बाहर जाने पर तैयार नहीं कर सका. हलाकी सिम्मी एक निडर लड़की थी लेकिन घटनाओं ने उसे किसी हद तक बे-हिम्मत बना दिया था. वो इमरान को किचन मे ले गयी और फिर खिड़की से वो जगह दिखाने लगी जहाँ फेग्राज़ज़ गिरा था. उसने इसके लिए बहुत अधिक शक्ति वाला टॉर्च का इस्तेमाल किया था. नीचे फ़ौजी मौजूद थे. उन्होने मूड कर देखा और फिर बडबडाते हुए समुद्रा-तट की तरफ आकर्षित हो गये.
कुच्छ देर बाद इमरान बाहर आया. इस समय कोई दूसरा समंदर मे गोता लगाने का विचार भी दिल मे नहीं लाता. लेकिन इमरान गोता-खोरी का ड्रेस पहन कर साहिल की तरफ चला जा रहा था. ये वही ड्रेस था जो थ्रेससिया छोड़ गयी थी.......और इमरान ने काफ़ी समय तक उसका निरीक्षण किया था.......और उसकी विशेषताएँ याद रखने की कोशिश किया था.
वो बहुत खामोशी से बाहर आया. जब वो साहिल पर पहुच गया तब उसे उन फ़ौजियों पर बहुत गुस्सा आया जिनकी गफलत से उसे यहाँ तक आने मे किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई थी.
वो धीरे से पानी मे उतर गया. लेकिन जैसे ही उसका सर पानी मे डूबा.......अचानक उसके चारों तरफ रौशनी ही रौशनी फैल गयी. इतनी तेज़ रौशनी कि पानी मे भी अपना रास्ता और दिशा तय कर सकता था.
फिर उसने किसी की आवाज़ सुनी. उसे उस हेड फोन की याद आई जो गोता खोरी के ड्रेस के इन्नर भाग मे अटॅच्ड हुआ था. आवाज़ उसी हेड फोन से आ रही थी. लेकिन बोलने वाला ऐसी भाषा मे कह रहा था जो इमरान के लिए अपरिचित था. वैसे उसने सब से पहले "मेडम थ्रेससिया.......मेडम थ्रेससिया' की पुकार सुनी थी.
उसने सोचा कहीं ये ड्रेस ही सूचना के आदान-प्रदान का कारण ना बना हो. जिस तरह पानी मे आते ही उसके एक भाग से रौशनी फूटने लगी थी.........उसी तरह कहीं उसने उसके पानी मे उतरने की सूचना किसी को ना भेज दी हो. ये ड्रेस थ्रेससिया से संबंध रखता था. और इमरान ने महसूस किया था कि किसी अग्यात जगह से अज़ बोलने वाले ने इसी तरह बार बार थ्रेससिया का नाम लिया था जैसे उसे संबोधित करना चाहता हो.
इमरान ने फ़ैसला करने मे अधिक देर नहीं लगाई. उसने सोचा कि अब यहाँ ठहरना जान बुझ कर मौत को निमंत्रण देना होगा. वो बहुत तेज़ी से पानी की सतह पर उभरा. जब तक उसका सर पानी मे डूबा रहा आवाज़ें लगातार आती रहीं. लेकिन उपर सर उभारते ही उसके चारो तरफ फैली रौशनी भी गायब हो गयी और आवाज़ों के आने का क्रम भी टूट गया. वो धीरे धीरे पानी काट'ता हुआ किनारे की तरफ बढ़ रहा था. मगर अचानक उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उसकी टाँगें पकड़ कर खीच लिया हो. इमरान बेबसी से हाथ पैर हिलाता हुआ तह की गहराइयों की तरफ जाता रहा. तभी उसके कानों मे कोई अपरिचित भाषा सुनाई दी. उसने सोचा ये निश्चित कोई आदमी ही है जो उसे तह की तरफ खीच रहा है.
अचानक इमरान नारी स्वर मे हंसा......उसने थ्रेससिया की हँसी की नकल उतारने की कोशिश की थी. तुरंत उसकी टाँगें छोड़ दी गयीं. वो बराबर उसी तरह हँसे जा रहा था.......और उसके कानों मे मेडम.....मेडम के साथ ही दूसरे शब्द भी सुनाई देते रहे. शायद वो आदमी अपनी बाद-तमीज़ी पर दुख प्रकट कर रहा था.
इमरान ने पिस्टल निकाला........और दूसरे ही पल उसकी नाल से रेड कलर की लहरें निकल कर उस आदमी से टकराई......फिर पता नही वो आदमी किस तरह हज़ारों टुकड़ों मे बँट गया.
अब इमरान दुबारा उपर उठ रहा था. अगर उसने थोड़ी सी भी चूक की होती तो शायद उसी के टुकड़े गहराई से उपरी सतह की तरफ जाता दिखाई देता.
अब उसे विश्वास हो चला था कि ये लिबास खुद कम्यूनिकेशन का सोर्स है. हो सकता है हर एक की ड्रेस की पहचान भी अलग हो.
इमरान सतह पर फिर उभरा और किनारे की तरफ बढ़ने लगा. इस बार वो आसानी से किनारे तक पहुच गया. लेकिन उसे आशंका थी कि इस घटना की सूचना निश्चित रूप से उन लोगों को हो गयी होगी जिन से वो व्यक्ति जुड़ा हुआ था.
इमरान नरकुल की झाड़ियों मे आ छिपा. उसकी निगाहें पानी की सतह पर थीं. मगर 20 मिनूट तक वेट करने के बाद भी कोई नयी घटना सामने नहीं आई.
कुच्छ देर बाद वो और डॉक्टर बंग्लो के एक कमरे मे एक बड़े टेबल के निकट खड़े उन टुकड़ों को देख रहे थे जो समंदर की लहरों ने किनारे ला फेके थे. उनका रंग काला था लेकिन ये गोश्त के लोथडे ही लग रहे थे.
"तुम....." डॉक्टर डावर इमरान की आँखों मे देखते हुए कुच्छ कहते कहते रुक गये.
"क्या मैने ग़लती की थी?" इमरान ने बोखला कर मूर्खों की तरह पुछा.
डॉक्टर के होंठो पर हल्की सी मुस्कुराहट दिखाई दी.
"मैं सोच रहा हूँ कि तुम्हें आदमी की किस केटेगरी मे रखूं....." उन्होने कहा.
"उस केटेगरी मे जिस का होना और ना होना दोनों समान हैं."
"नहीं.....तुम जैसा आदमी आज तक मेरी नज़रों से नहीं गुज़रा."
"मैं ग़लत नहीं कह रहा.......पहले आपकी निगाह से नहीं गुज़रा था.......अब गुज़रा हूँ......और हो सकता है थोड़ी देर बाद आप मुझे पहचानने से इनकार कर दें....."
ठीक उसी समय सिम्मी ने कमरे मे प्रवेश किया........और डॉक्टर ने जल्दी से आयिल-क्लॉत का एक टुकड़ा उन गोश्त के टुकड़ों पर डाल दिया जो समुद्र तट से लाए गये थे.
"पापा......वो ज़िंदा है.......खुदा की कसम.......उसी की आवाज़ सुनी हूँ......" सिम्मी हाँफती हुई बोली.
"क्या कह रही हो.......किसकी आवाज़ थी?" डॉक्टर डावर ने बहुत ठहरे हुए स्वर मे पुछा.
"सुनहरी लड़की की......खुदा की कसम पापा......उस ने अभी अभी मुझ से फोन पर बात की है."
"अब तुम सो जाओ......" डॉक्टर डावर ने ठंडी साँस लेकर कहा. "तुम उस लड़की से अत्यधिक प्रभावित हुई हो........मुझे डर है कि कहीं तुम्हारे मस्तिष्क पर इसका बुरा प्रभाव ना पड़े......"
"पापा.......विश्वास कीजिए..."
इमरान मूर्खों की तरह हंस पड़ा........औ सिम्मी उसे खा जाने वाली निगाहों से घूर्ने लगी. फिर उसने कोई जली कटी बात कहने केलिए मुहह खोला ही था कि इमरान बोखला कर बोला......"हां.....वो ज़िंदा है."
"क्या मैं झूट बोल रही हूँ?" सिम्मी दाँत पीस कर हिस्टर्रिया वाले ढंग से चीखी.
"बेबी......बेबी....." डॉक्टर डावर उसके कंधे पर हाथ रख कर बोले.
"पापा......ये आदमी मुझे अकारण गुस्सा दिलाया करता है."
"बेबी......ये मेरा बेटा है.......इसलिए इसका अपमान ना करो. क्या तुम सीआइबी के डाइरेक्टर जनरल मिस्टर रहमान को जानती हो?"
"हां.....मैं जानती हूँ...." सिम्मी का लहज़ा अब भी नाराज़गी भरा था.
"ये रहमान का लड़का अली इमरान है.......संभव है तुम ने इसके बारे मे भी सुना होगा...."
"जी हाँ.....सुने हैं......ये सुरैया दीदी के भाई हैं ना...." उसने बुरा सा मूह बना कह कहा.
"अर्रे.....सत्यानाश हो...." इमरान बडबडाया.
"मैने सुरैया दीदी से ही इनके चर्चे सुने हैं....घर मे ही इन से कॉन खुश है...."
"सुरैया कॉन है?" डॉक्टर डावर ने पुछा.
"इन की बहन..."
"ओह्ह......इमरान मेरी ज़िंदगी ऐसी है कि मैं किसी से भी परिचित नहीं हूँ.......यहाँ तक कि अपने जिगरी दोस्तों के बच्चों तक से पहचान नहीं रखता. अब ये सिम्मी आती जाती रहती है तुम्हारे यहाँ और अक्सर सुना है तुम्हारे घर की लड़कियाँ भी यहाँ आती हैं...."
"बॅस ऐसी ही ज़िंदगी मेरी भी है. दो साल बाद अभी पिच्छले दिनों दोबारा घर गया था....." इमरान ने खुश होकर कहा. "मुझे ऐसी ज़िंदगी बहुत पसंद है....अरे माँ बाप तो बहुत मिल जाएँगे.....लेकिन बीता हुआ समय दुबारा नहीं मिल सकता...."
"देखा आप ने........ये ऐसे आदमी हैं." सिम्मी व्यंग से बोली.
"अब तुम लोग लडो मत......मैं वैसे ही बहुत परेशान हूँ...." डॉक्टर डावर ने कहा और इमरान से बोले....."हां.....तुम ने अभी क्या कहा था कि वो ज़िंदा है....?"
"और मैने ग़लत नहीं कहा था.......क्योंकि मैने आप दोनों की मौजूदगी मे ही उस से बात की थी......उसी समय जब मैं हंस रहा था और आप मुझे इस तरह घूर रहे थे जैसे मेरा दिमाग़ खराब हो गया हो.....और फिर उसके बाद मेरे एक साथी ने उसके जीवित होने की पुष्टि भी कर दी थी." फिर उसने थ्रेससिया के छीक्ने और उसके रफू-चक्कर होने की कहानी डॉक्टर डावर को सुना दी.
"मगर ये हुआ कैसे.....उसकी लाश तक अकड़ गयी थी....." डॉक्टर डावर ने हैरत से कहा.
"अर्रे.....वो थ्रेससिया बिंबोल बी ऑफ बोहीमिया है." इमरान ने एक ठंडी साँस लेकर कहा. और फिर उसने उसकी कयि घटनाए छेड़ दी.....इस समय उसे समझ मे नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना चाहिए......इसलिए वो टाइम-पास केलिए शुक्राल की कहानी ले बैठा.....कि किस तरह थ्रेससिया और अलफ़ंसे के चक्कर मे पड़ने के बाद शुक्राल तक जा पहुचा.(*)
उन घटनाओ की कहानी इतनी रोचक थी कि डॉक्टर डावर जैसे व्यस्त आदमी भी आराम से एक सोफे पर लेट गये. उनका मूह हैरत से खुला हुआ था. सिम्मी भी कभी भयभीत और कभी उसकी आँखें चमकाने लगती.
अचानक इमरान ने डॉक्टर डावर को संबोधित करते हुए कहा....."आप को याद है ना कि तहखाना मे आप अपने पैरों के नीचे कुत्ते के पिल्ले की आवाज़ सुन कर उच्छल पड़े थे...."
"हां भाई..." डॉक्टर डावर चौंक कर बोले...."वो क्या था.....मुझे ऐसा लगा था जैसे मेरे पैरों के नीचे कोई कुत्ते का पिल्ला दब कर चीख उठा हो...."
"अंकल नहीं कह सकते...." सिम्मी बोल पड़ी...."मैं भी तुम्हारे डॅडी को अंकल कहती हूँ.....डॉक्टर....डॉक्टर....कितना बुरा लगता है...."
"नहीं....." इमरान ठंडी साँस लेकर बोला...."मैं अब अपने डॅडी को भी डॅडी नहीं कहता......क्यों कि कयि साल से किसी दूसरे डॅडी की तलाश मे हूँ......मगर अभी तक नहीं मिल सका."
"ये क्या बकवास शुरू कर दी तुम लोगों ने......हां इमरान फिर क्या हुआ?" डॉक्टर डावर ने ने क्रोधित स्वर मे कहा मगर लहजे मे बनावट थी.
"हां डॉक्टर......फिर जब हम थ्रेसससिया को लेकर शुक्राल से वापस आ रहे थे वो अपने उसी आर्ट का प्रदर्शन की धमकी देकर निकल गयी थी. हम दुर्गम रास्तों से गुज़र रहे थे. आप खुद सोचिए अगर वही कुत्ते का पिल्ला खच्चरों और टट्टू के पैरों के नीचे दब कर भी चीखना शुरू कर देते तो हम कहाँ होते. हज़ारों फीट की उँचाई से नीचे गिरने के बाद हमारा हलवा बन जाता. इस तरह वो निकल जाने मे कामयाब हो गयी थी. डॉक्टर वो दुनिया की सब से शातिर और चालाक औरत है. अब इसी बार देखिए.....वो प्राणायाम की मदद से निकल गयी. मगर आप विश्वास कीजिए कि मैं भी धोका खा गया था.
"आप वैसे भी मुझे कोई अकल्मंद आदमी नहीं लगते." सिम्मी जल कर बोली.
"ना लगता हुंगा..." इमरान ने दर्द भरे स्वर मे कहा...."वैसे क्या मैं पुच्छ सकता हूँ कि सुरैया से कब से जान पहचान है?"
"बहुत दिनों से."
"ओके...." इमरान सर हिला कर रह गया.
"क्यों.....क्या बात है?" डॉक्टर डावर ने चौंक कर पुछा.
"सुरैया इस परिवार मे एक ऐसी लड़की है जिस से शैतान तो बहुत साधारण चीज़ है इमरान भी पनाह माँगता है....." इमरान ने बड़े भोलेपन से कहा.
"ओके....ओके....वो भी तुम्हारी ही बहन है...." डॉक्टर हँसने लगे.
इमरान कुच्छ ना बोला....उसके होन्ट हिल रहे थे और आँखें फर्श पर थीं. ऐसा लग रहा था जैसे कोई कॅम बिलने वाली लेकिन चिडचिडी लड़की अकेलेपन मे बडबडा कर अपने दिल का बुखार निकाल रही हो.
"मगर डॉक्टर...." कुच्छ देर बाद उसने सर उठा कर कहा..."मुझे आपके व्यवहार पर हैरत है. आपका इतना ज़बरदस्त नुकसान हुआ है.....मतलब एक नहीं बल्कि कयि राज़ दूसरों तक पहुच गये होंगे......लेकिन मैने आपके चहरे पर परेशानी के भाव नहीं देखे. बस कुच्छ समय के लिए आप के चेहरे पर कष्ट दिखाई दिया.....लेकिन कुच्छ ही देर बाद आप इस तरह नॉर्मल हो जाते जैसे कोई बात ही ना हुई हो."
"ह्म्म...." डॉक्टर डावर मुस्कुराए.....और उनकी ये मुस्कुराहट बेजान भी नहीं थी. वो कुच्छ पल इमरान की आँखों मे देखते रहे फिर बोले...."मुझे इन बातों की परवाह कम होती है. अभी ऐसे ही सैकड़ों प्लांस मेरे दिमाग़ मे मौजूद हैं. इसलिए एक-दो के नष्ट हो जाने से मेरी थिंकिंग केपॅसिटी पर क्या प्रभाव पड़ सकता है. मेरे लिए क्या ये खुशी कम है कि मैं अपने दिमाग़ की महान उचाईयों से इन तुच्छ चोरों पर घृणा की निगाहें डालता हूँ. तुम इन बातों से मुझ घमंडी समझोगे......मगर मैं इसे घमंड नहीं समझता. वही कहता हूँ जो दूसरे मेरे लिए कहते हैं. मैने दुनिया को बहुत कुच्छ दिया है इमरान....."
तभी फोन की घंटी बजी......और इमरान उठ गया. दूसरी तरफ से बोलने वाला ब्लॅक-ज़ीरो था.
"क्वीन्स रोड वाली बिल्डिंग जिस मे हफ ड्रॅक रहता था शोलों मे घिरी हुई है. फाइयर ब्रिगेड अभी तक आग पर कंट्रोल नहीं पा सके हैं. लेकिन अजीब बात ये है कि उस इमारत से कोई भी बाहर नहीं निकला. फिरे ब्रिगेड के कुच्छ आदमी अंदर इसी लिए गये थे कि लोगों को बाहर निकालें लेकिन उन्हें अंदर कोई भी नहीं मिला."
"हफ ड्रॅक वहाँ मौजूद है?"
"नहीं कोई भी नहीं है. उसकी तलाश चल रही है. जहाँ जहाँ भी उसके मिलने की संभावना हो सकते थे.....खोजा गया लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका."
"उसे तलाश करने की कोशिश करो....उसके दूसरे आदमियों पर तो तुम लोगों की निगाहें थी ही....इसलिए उन मे से जो भी जिस समय और जहाँ जिस हाल मे मिले उसे घेरो और हेड क्वॉर्टर पहुचा दो."
"ऑल राइट सर...." ब्लॅक ज़ीरो ने कहा और इमरान ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया. रिसीवर रख कर वो सिम्मी की तरफ मुड़ा.
"हां आप ने ये नहीं बताया कि उसने फोन पर आपको क्या कहा था."
"कुच्छ नहीं....बस वो मुझ से माफी माँग रही थी. कह रही थी कि अब तो तुम्हें हालात का पता चल ही चुका होगा. मगर ये सच है कि मुझे तुम से बहुत प्यार हो गया है. मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे दिल मे मेरे प्रति किसी प्रकार का मैल रह जाए. मैं तुम्हें या तुम्हारे पापा को किसी प्रकार का नुकसान पहुचाए बिना वो चीज़ निकाल ले जाती जो मुझे चाहिए थी.....ओह्ह पापा....वो क्या चीज़ थी....."
वो चुप होकर डॉक्टर की तरफ देख कर उत्तर की प्रतीक्षा करने लगी.
"कुच्छ भी नहीं..." डॉक्टर ने आँखें बंद किए किए जवाब दिया. "तुम इन उलझनों मे मत पडो.....जाओ अब सो जाओ."
"अच्छा.....मैं नहीं पुछुन्गि पापा. मगर इस समय आपके निकट रहना चाहती हूँ....."
ये कुच्छ उस शहर की बात नहीं थी......बल्कि उन घटनाओं से पूरे देश मे बेचैनी फैल गयी थी. लेकिन इसकी जानकारी किसी को नहीं थी कि डॉक्टर डावर की लॅबोरेटरी मे वो घटनाएँ क्यों घटीं. अर्थात डॉक्टर डावर की वो ख़तरनाक खोज अब भी राज़ ही मे थी. वैसे ये और बात है कि नीले उपग्रह और चमकदार लकीरों की चर्चा कयि देशों के न्यूज़ पेपर्स ने की थीं.
लेकिन उन देशों ने भी किसी नीले उपग्रह के अस्तित्व पर आश्चर्या प्रकट किया था....जो इन दिनों कृत्रिम उपग्रहों की दौड़ मे एक दूसरे को पिछे करना चाहते थे.
वो ज़माना भी अजीब था. कृत्रिम उपग्रहों की समास्सया 'कबूतर-बाज़ी' की तरह 'उपग्रह-बाज़ी' की सीमा मे प्रवेश कर गया था. लेकिन ये बात शांतिप्रिय लोगों केलिए अच्छा शगुन था. क्योंकि इंटरनॅशनल गुंडे अब एक दूसरे को युद्ध की धमकियाँ देने की जगह कृत्रिम उपग्रहों के क्षेत्र मे शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे. लेकिन उन मे से अभी तक कोई भी हार नहीं माना था.
वो एक दूसरे को कहते फिरते थे कि 'ये रहा हमारा उपग्रह.......ये इतना भारी है और पृथ्वी से इतनी दूरी पर चक्कर लगा रहा है. कोई उस से बड़ा और उस से अधिक दूरी पर चक्कर लगाने वाला उपग्रह अंतरिक्ष मे भेज सको तो ठीक वरना इसे स्वीकार कर लो कि हम तुम से अधिक शक्तिशाली हैं.
प्रतिद्वन्दी देश इस से भी बड़ा उपग्रह छोड़ देता और फिर वही खिचा-तानी शुरू हो जाती. लेकिन कोई किसी से भी हार मानने को तैयार नहीं था.
अचानक एक दिन एक देश का उपग्रह अंतरिक्ष मे टुकड़े टुकड़े होकर बिखर गया. इस पर पूरी दुनिया मे तरह तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे. लेकिन जानी पहचानी दुनिया मे केवल 2 व्यक्ति इस राज़ को जानते थे कि क्या हुआ. इमरान और डॉक्टर डावर. वो उपग्रह ठीक उसी जगह पर फटा था जहाँ उन दोनों ने नीले उपग्रह को चमकदार लकीरों का जाल बनाते देखा था.
डॉक्टर डावर की लॅबोरेटरी और और बंग्लो के आस पास अब भी मिलिटेरी का पहरा था. लेकिन उस रात से जब थ्रेससिया फरार हुई थी......अब तक कोई नयी घटना सामने नही आई थी. डॉक्टर डावर भी अक्सर चुप-चाप दिखाई देते. उनका अधिकतर समय अब बंगलो मे ही गुज़रता था. सिम्मी को भी इस पर बड़ी हैरत थी. अक्सर तो वो उस से कहते "बेबी.....ज़रा कैरम तो निकालो......खेलेंगे....."
और फिर वो सच मुच उसके साथ बिल्कुल बच्चों की तरह कॅरोम खेलना शुरू कर देते. सिम्मी केलिए उनका आज-कल का व्यवहार आश्चर्यजनक था. इस से पहले कभी वो अपनी बोद्धिक स्तर(लेवेल) से कभी नीचे नहीं आए थे.
आज कल उन्हें हर समय इमरान की तलाश भी रहती थी. मकसद इसके अलावा और कुच्छ नहीं होता था कि हँसने हँसाने मे टाइम पास किया जाए. मगर इमरान तो इन दिनों सिरे से गायब ही हो गया था. उसके लिए उन्होने कयि बार रहमान साहब को भी फोन किया था......लेकिन वो भी इमरान के बारे मे कुच्छ नहीं बता पाए थे.
आज तो वो दिन भर बंग्लो मे टहलते रहे थे या सिम्मी के साथ कभी ताश खेलते और कभी लुडो या कॅरोम. उन्हें इस बात का बहुत दुख था कि उनके सेक्रेटरी शार्ली ने उनके साथ बड़ा फ्रॉड किया था. उस रात से जब वो हैरत भरी घटनाएँ हुई थीं अब तक शार्ली दिखाई नहीं दिया था.
शाम होते ही उनके चेहरे पर इतनी अधिक बेज़ारी और उकताहट दिखाई देने लगी कि सिम्मी को पुच्छना ही पड़ा.
"हां बेबी मैं आज-कल बहुत अधिक उलझनों से ग्रस्त हूँ." उन्होने उत्तर दिया था.
"मुझे भी बताइए...."
"क्या बताउ......मेरी समझ मे नहीं आता कि क्या करूँ. काश मैं केवल एक लकडहारा होता."
"आप कैसी बातें कर रहे हैं पापा...!"
"मैं खुद भी समझता हूँ कि ये बेतुकी बातें हैं......मगर आदमी इतना मजबूर है कि...........कभी वो इतनी उँचाइयों को छुने लगता है जहाँ फरिश्तों को भी साँस रुकने लगे.......और कभी ऐसी गहराई मे गिरता है जहाँ खुद उसे अपनी अस्तित्व से इनकार कर देना पड़ता है......अर्थात वो खुद को पहचान नहीं पाता."
"क्या बच्चों जैसी बातें कर रहे हैं आप....?" वो दोनों ही इमरान की आवाज़ सुन कर चौंक पड़े. वो दरवाज़े मे इस तरह बुरा सा मुँह बनाए खड़ा था जैसे किसी बुद्धिमान व्यक्ति के मूह से कुच्छ मूर्खता-पूर्ण बातें सुनी हो.
"क्या मतलब....?" डॉक्टर डावर झल्ला कर खड़े हो गये. उन्हें शायद उसकी ये बेतुके ढंग से दखल देना अच्छा नहीं लगा था.
"म्म.....मतलब ये कि आप यहाँ बैठे हैं और वहाँ आप की लॅबोरेटरी पर सात विभिन्न रंगों के उपग्रह मंडरा रहे हैं."
"नहियईईन्न्न्न्...." डॉक्टर डावर के स्वर मे हैरत थी.
"हां....हां....मैं अभी दूरबीन से देख कर आ रहा हूँ. वो उसी जगह हैं जहाँ हम ने चमकदार लकीरों का जाल देखा था.....वो गोल घेरे के रूप मे लगातार चक्कर लगा रहे हैं...."
"ओह्ह...." वो बहुत तेज़ी से दरवाज़े से बाहर निकल गये.
इमरान कुच्छ पर मूर्खों की तरह मूह खोल कर मुस्कुराता रहा फिर बैठता हुआ बोला....."बड़ी उँची उँची बातें कर रहे थे. मगर तुम ने देखा कि किस प्रकार बच्चों की तरह दौड़ते हुए गये......हरे....लाल....नीले पीले उपग्रहों को देखने....."
"मुझे गुस्सा नहीं आएगा......मेरे दादी ने तो अक्सर मुझ को गुस्से मे गधे का बच्चा तक कह दिया है.......मगर मैने कभी बुरा नहीं माना......वैसे इसे अच्छी तरह समझ लो कि मनुष्य का सब से महान उपलब्धि मूर्खता है. मैं ये भी मानता हूँ कि मनुष्य को अब तक परम ज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई..........जिस दिन प्राप्त कर लेगा वो मूर्ख हो जाएगा....और यही उसकी महानतम उपलब्धि होगी....."
सिम्मी ने मेज़ से पेपर-वेट उठा कर इमरान पर खींच मारा.
"गुड...." इमरान खुद को बचा कर उठता हुआ बोला....."मुझे इतनी ही देर यहाँ रुकना था......टाटा....."
फिर वो भी बाहर निकल गया.
* * * * *
डॉक्टर डावर के कदम तेज़ी से लॅबोरेटरी की तरफ उठ रहे थे. अंधेरा अच्छी तरह फैल चुका था....और समंदर की तरफ से आने वाली हवा सामान्य से अधिक भरी लग रही थी. उनके चारों तरफ सन्नाटा का सम्राज्य था. उन घटनाओं के बीते कयि दिन हो चुके थे. अब फ़ौजियों का पहरा केवल उन बिल्डिंग्स के आस पास था जहाँ डॉक्टर डावर के अनुसार इसकी ज़रूरत थी. लेकिन वो रास्ता तो एकदम वीरान ही था.....जिस पर वो चल रहे थे.
अचानक उन्होने किसी चीज़ से ठोकर खाई......और मूह के बल ज़मीन पर चले आए. फिर संभलने भी नहीं पाए थे कि दो-तीन आदमी उन पर टूट पड़े. एक हाथ उनके मूह पर पड़ा और मज़बूती से जमा रहा. फिर उनका गला भी घोंटा जाने लगा. वो इस तरह बेकाबू कर दिए गये कि हिलना भी कठिन था. धीरे धीरे उनका मस्तिष्क अंधकार मे डूबता चला गया......और वो बेहोश हो गये.
और फिर जब उन्हें होश आया तब वो अंदाज़ा नहीं कर सके कि कितनी देर बेहोश रहे. वैसे उन्हें अंदाज़ करने का समय ही नहीं मिला था. क्योंकि होश आते ही उनकी नज़र सब से पहले अपने सेक्रेटरी शार्ली पर पड़ी......जो उन पर झुका हुआ था.
वो उठ बैठे और आँखें फाड़ फाड़ कर चारों तरफ देखने लगे. ये एक ट्रॅग्युलर रूम था. लेकिन सब तरफ से बंद. केवल एक तरफ एक छोटा सा दरवाज़ा था. छत भी साधारण कमरों की छतों से नीची थी और दीवारों पर सेमेंट का प्लास्टर नहीं था बल्कि वो किसी मेटल की लग रही थीं. या संभव है लकड़ी की रही हों....और उनकी पोलिश के कारण डॉक्टर सही अनुमान नहीं लगा पा रहे थे.
वहाँ शार्ली के अलावा चार और लोग भी मौजूद थे.
"मुझे तुम से ऐसी आशा नहीं थी." डॉक्टर डावर शार्ली को घूरते हुए बोले.
"आइ'म वेरी सॉरी डॉक्टर......मैं सच मुच बहुत दुखी हूँ कि मुझे ये सब करना पड़ा.......वैसे वास्तविकता ये है कि मैं कभी आपका वफ़ादार नहीं था. मैं तो अपने देश केलिए काम कर रहा था. लेकिन मुझे आप से बहुत अधिक प्रेम है. देखिए अगर हालात इतने नहीं उलझते......तो ना आप को यहाँ लाया जाता और ना मैं ही गायब होता. सब काम पहले की ही तरह चलता रहता."
"ढीठ.....और बेशरम हो तुम...." डॉक्टर डावर गरजे. "तुम इतनी दिलेरी से ये सब कह रहे हो......जैसे बहुत अच्छाई का काम किया हो...."
"यस सर श्योर....." शार्ली ने गंभीरता से कहा....."मुझे अपने उस कारनामे पर गर्व है....क्योंकि इस तरह मैने अपने देश की तरक्की मे हिस्सा लिया है. क्या मेरे देश-वासी इसे एक अच्छा और प्रशन्श्नीय काम नहीं मानेंगे?"
डॉक्टर डावर केवल दाँत पीस कर रह गये.
"देखिए डॉक्टर......आप इस शताब्दी के बहुत बड़े साइंटिस्ट्स मे से हैं....." शार्ली ने कहा..."लेकिन आपका देश आप से कोई लाभ नहीं उठा सकता. क्योंकि वो धनी देश नहीं है. आपके दिमाग़ मे जितनी स्कीम हैं.....सभी शानदार हैं. दुनिया को उन से लाभ मिलना चाहिए. ये आप पर दुनिया का हक़ बनता है. लेकिन आप अगर सही और आप के महत्व को जानने वाले हाथों मे ना पहुचे तो दुनिया आपकी खोजों से कोई लाभ हासिल नहीं कर पाएगी. इस लिए हम ने फ़ैसला किया है कि आप को पूरे सम्मान के साथ अपने देश मे ले जाएँ. मुझे विश्वास है कि आप जल्द ही हमारी सरकार के विग्यान एवं प्राद्योगिकी विभाग के सलाहकार नियुक्त कर दिए जाएँगे."
"तुम्हारा दिमाग़ तो नहीं खराब हो गया है? तुम मुझे मेरी मर्ज़ी के खिलाफ कहीं नहीं ले जा सकोगे."
"मैं आप को किसी काम केलिए मजबूर करना नहीं चाहूँगा. इस पनडुब्बी मे भी आप को अपना बॉस समझता हूँ."
"शार्ली.....इस का परिणाम अच्छा नहीं होगा..."
"बॉस...." शार्ली सम्मान के साथ सीने पर हाथ जोड़ कर बोला...."दो ही उपाए हैं.....या तो आप हमारे साथ चलिए......या फिर आप उस ब्लॅक-होल निर्माण करने वाले पदार्थ का फ़ॉर्मूला बता दीजिए.....जिसे मुझ से भी छुपाया था...."
"किस देश से संबंध है तुम्हारा....?"
"ये मैं तब बता दूँगा जब आप इन दोनों मे से कोई एक बात मानने पर तैयार हो जाएँ...."
"दोनों ही बेकार हैं...वैसे तुम लोग उस पदार्थ की थोड़ी सी मात्रा चुरा ले जाने मे सफल हो गये थे. उस पर प्रयोग करो....खुद ही फ़ॉर्मूला भी पा लोगे...."
"ऐसा हो नहीं सका.....मेरे देश के वैग्यानिको ने प्रयास तो किया था...."
"ये बहुत अच्छा हुआ......मैने भी अपना भंडार नष्ट कर दिया है. अब तुम्हें शीशे के उन पॉट्स मे साधारण पानी के सिवा कुच्छ नहीं मिलेगा. और तुम मुझ से वो फ़ॉर्मूला पुच्छ रहे हो? वो मेरे साथ ही क़बर मे जाएगा. दुनिया की कोई शक्ति भी मुझे उसका फ़ॉर्मूला बताने पर मजबूर नहीं कर सकेगी.....मूर्ख आदमी.....वो दुनिया का सब से विध्वंशक पदार्थ था. उसकी डिस्ट्रक्टिव पवर आटम और हाइड्रोजन बॉंब्स से भी काई गुना अधिक होगी."
"तुम बेकार अपना टाइम बर्बाद कर रहे हो." अचानक एक आदमी ने शार्ली से कहा. "अगर तुम इस पर टॉर्चर करा होता नहीं देख सकते तो यहाँ से चले जाओ. हम देख लेंगे...."
शार्ली कुच्छ ना बोला....वो चिंतित निगाहों से डॉक्टर डावर की तरफ देख रहा था.
डॉक्टर डावर अपनी जेबें टटोल रहे थे. अचानक उन्होने रिवॉल्वार निकाल लिया. इन दिनों वो हर समय जेब मे रिवॉल्वार डाले रहते थे. मगर उन्हें हैरत थी कि उन लोगों ने वो रिवॉल्वार उनकी जेब मे ही क्यों पड़ा रहने दिया.
उन्होने देखा कि वो लोग भयभीत या चकित होने की बजाए मुस्कुरा रहे थे.
"डॉक्टर, ये तीनों पंखे आप देख रहे हैं ना....." शार्ली ने छत की तरफ उंगली से इशारा करते हुए कहा...."ये भी आप ही का आविष्कार था. आप जानते हैं कि जैसे ही आप फाइयर करेंगे.....इन तीनों से तेज़ रौशनी फूटेगी.....और रिवॉल्वार से निकली गोली मोम से भी अधिक नर्म होकर हम मे से किसी के शरीर पर चिपक जाएगी. इसलिए अपनी गोली को व्यर्थ नष्ट मत कीजिए...."
डॉक्टर डावर ने एक लंबी साँस खींची.
"मैं आपको केवल 15 मिनट का समय दे सकता हूँ. आप फिर सोच लीजिए. उसके बाद मैं यहाँ से चला जाउन्गा.....क्योंकि मुझ से आपकी तकलीफ़ देखी नहीं जाएगी....ये चारों तकलीफ़ देने के स्पेशलिस्ट हैं."
डॉक्टर डावर ने अपना मूह मज़बूती से बंद कर लिया था.
"मैं तुम्हें फ़ॉर्मूला नहीं बताउन्गा.....और ना तुम मुझे अपने साथ ले जा सकोगे....वैसे हो सकता है कि तुम मेरी लाश यहीं कहीं फेंक जाओ."
"मैं जा रहा हूँ डॉक्टर मुझे बहुत दुख है."
शार्ली दरवाज़े की तरफ बढ़ गया.....लेकिन दरवाज़े मे पैर रखते ही उसके मुँह से हल्की सी कराह निकली और वो उच्छल कर अपने एक साथी पर आ पड़ा.
डॉक्टर डावर भी मूड कर दरवाज़े की तरफ देखने लगे. वहाँ उन्हें एक आदमी दिखाई दिया जो सर से पैर तक गोताखोरी की ड्रेस मे छुपा हुआ था. फिर उन्होने उसका चेहरा खुलते हुए देखा. उसने ड्रेस का उपरी भाग उलट कर पिछे डाल दिया.
"इमरांणन्न्...." डॉक्टर डावर की आवाज़ मे हज़ारों खुशियाँ और ठहाके गूँज रहे थे.
"आओ तुम भी आओ दोस्त...." उन मे से एक आदमी ने मुस्कुरा कर कहा...."मुझे बहुत देर मे पता चल सका कि सारे झंझट की जड़ तुम ही हो....."
"हान मिस्टर हफ ड्रॅक......." इमरान ने गंभीरता से उत्तर दिया. "मुझे भी आशा नहीं थी कि यहीं तुम से भी मुलाकात हो जाएगी. अच्छा अब तुम सब अपने हाथ उपर उठा लो."
शार्ली ने ठहाका लगाया. हफ ड्रॅक भी हँसने लगा. फिर हफ ड्रॅक बोला.....
"डॉक्टर के हाथ मे भी तुम रिवॉल्वार देख ही रहे होगे. लेकिन उन से पुछो कि ये कितने बेबस हैं...."
"रिवॉल्वार.......हुहह....." इमरान बुरा सा मुँह बना कर बोला...."अर्रे मैं केवल तमाचे मार मार कर तुम सबों को ख़तम कर सकता हूँ...."
"पकड़ लो इसे...." अचानक हफ ड्रॅक गुर्राया.......और एक आदमी इमरान की तरफ बढ़ा.
"पीछे हटो...." इमरान ने एक काली सी चीज़ आगे कर दी. और ये काली चीज़ रब्बर के पाइप का एक सिरा था.
"इमरान.....क्या मूर्खता फैला रहे हो....?" डॉक्टर डावर भर्राई हुई आवाज़ मे बोले. "अकल से काम लो."
तभी रब्बर के पाइप से पानी की धार निकली और वो उच्छल कर पिछे हट गया. धार बंद हो गयी.
"ओह्ह.....पकडो...." हफ ड्रॅक दाँत पीस कर चीखा.
वो आदमी फिर झपटा. पाइप से धार फिर निकली. लेकिन इस बार धार के भीतर लाल रंग की बिजलियाँ सी कोंध रही थीं. जैसे ही धार आदमी के शरीर पर पड़ी उसके चीथड़े उड़ कर सारे कमरे मे बिखर गये. कुच्छ लोतड़े उन लोगों से भी टकराए.
धार फिर बंद हो गयी. अब कमरे मे एक डरावनी सी खामोशी छा गयी थी. डॉक्टर डावर तो शायद चेतना शून्य से होकर रह गये थे.
"अब तुम सब......" इमरान मुस्कुरा कर बोला...."मुझे दुनिया का सब से बड़ा साइंटिस्ट मान लो. मेरी रेडी मेड खोपड़ी हर समय चालू रहती है.......और मैं चुटकी बजाते ऐसे ऐसे आविष्कार करता हूँ कि.......ऊपप्स्सस.....क्या तुम सब अब भी अपने हाथ उपर नहीं उठाओगे?"
डॉक्टर डावर कुच्छ ऐसे तल्लीन हो गये थे कि सब के साथ उन्होने भी अपने हाथ उपर उठा दिए.
"शार्ली....बेटा...." इमरान ने मुस्कुरा कर कहा....."अब ये सुखमय कर्तव्य भी तुम ही निभाओ.....अपने तीनो साथियों के हाथ पैर बाँध दो. क्यों कि मैं इनका कीमा बनाना पसंद नहीं करता. ये केवल एक नमूना दिखाया था......"
"ये लो.....ये डोर भी अपने साथ ही लाया था....." इमरान ने भीगी हुई डोर का गोला बाएँ हाथ से उसकी तरफ उच्छाल दिया.
"चलो जल्दी करो....वरना मुझे तुम सब पर थोड़ी सी भी दया नहीं आएगी...."
शार्ली ने झुक कर गोला उठाया. उनके चेहरों से ये साफ झलक रहा था कि वो सब बिल्कुल निराश हो चुके हैं.
शार्ली ने उन से कुच्छ कहा. लेकिन इमरान उनका मतलब नहीं समझ सका. उन तीनो ने उसका उत्तर भी दिया. लेकिन उत्तर देते समय उनके चेहरे और भी अधिक सियाह पड़ गये. फिर इमरान ने उन्हें ज़मीन पर लेट'ते देखा. शार्ली किसी ऐसी विधवा की तरह दुखी लग रहा था जिसका इकलौता जवान बेटा मर गया हो. वो एक एक के हाथ पैर बाँधता रहा. फिर वो उनकी तरफ मुड़ा. उसका चेहरा अत्यंत भयानक हो गया था. आँखों से नफ़रत का ज्वालामुखी फूट रहा था. तभी वो गुर्रा कर बोला...."तुम हमें ज़िंदा नहीं ले जा सकोगे...."
"क्या तुम्हें पता है कि थ्रेससिया किस तरह का फ्रॉड कर के निकल गयी थी?" इमरान ने पुछा.
"मैं जानता हूँ..."
"तो अब अधिक फ्रॉड नहीं चलेगा. मैं तुम्हारी लाशें दफ़न करा के चालीस दिन तक तुम्हारी क़बरों पर धुनि रमाउन्गा. और फिर देखूँगा कि 'प्राणायाम' किस चिड़िया का नाम है....."
"हम सच मुच अपने देश पर बलिदान हो रहे हैं." शार्ली बोला. हमें मेडम थ्रेससिया की तरह वो आर्ट नहीं आता. ये देखो......ये ज़हरीली सुई उन तीनो को समाप्त कर चुकी है........और अब मैं भी......"
"तुम ऐसा नहीं कर सकोगे...."
"मुझे कॉन रोकेगा...."
"मैं....." इमरान बोला और साथ ही रब्बर के पाइप से पानी की धार निकल कर शार्ली के चेहरे पर पड़ी. ये उसके लिए अप्रत्याशित था. इसलिए वो बोखला कर आगे की तरफ झुक गया.....उसने अपने दोनों हाथों से अपना चहरा ढक लिया. ऐसा करते समय सुई उसके हाथों से गिर गयी होगी.....यही सोच कर इमरान ने अगले ही पल उस पर छलान्ग लगा दी......लेकिन शार्ली उस से पहले ही गिर चुका था. इमरान का जिस्म एक बेजान शरीर से टकराया. शार्ली भी ख़तम हो चुका था.
डॉक्टर डावर भी उन आदमियों के शरीर टटोलते फिर रहे थे.
"बड़ा धोका खाया डॉक्टर....." इमरान भर्राई हुई आवाज़ मे बोला. ये 'प्राणायाम नहीं बल्कि सच मुच ज़हर से मर गये हैं. देखिए इनके शरीर नीले पड़ गये हैं. इसी लिए वो बेहिचक तीनो को बाँध रहा था. इस तरह उसे तीनों को ख़तम करने का मौका मिल गया. और फिर उसने खुद को भी मार डाला. ये लोग नहीं बताना चाहते कि ये किस देश के हैं. अच्छा डॉक्टर अभी अब चुप चाप यहाँ से खिसक लीजिए. समंदर बहुत विशाल है....और मुझे विश्वास है कि समंदर ही उनकी विचित्र तरक्की का एक मात्र सोर्स है."
डॉक्टर डावर को भी गोताखोरी की ड्रेस पहना कर यहाँ लाया गया था. वो अब तक उसी ड्रेस मे थे.
इमरान ने बहुत तेज़ी से अपना और उन का ड्रेस ठीक ठाक किया.....फिर वो उस पनडुब्बी से निकल कर पानी मे आ गये. ये पनडुब्बी बनावट के हिसाब से साधारण पनडुब्बियों से अलग था. पानी के भीतर भी इसके दरवाज़े खोले जा सकते थे लेकिन ऐसा करते समय पानी की एक बूँद अंदर नहीं जा सकती थी.
अचानक इमरान के ड्रेस मे लगे हुए हेड-फोन से थ्रेससिया की आवाज़ आई...जो कह रही थी....."जाओ जाओ इमरान....तुम से खुदा ही समझे.....तुम ने बड़ा ज़ुल्म किया है.....मैने तुम्हारी एक एक हरकत अपनी आँखों से देखी है. तुम्हारे कारण उन आदमियों की कीमती जाने गयीं.....जो सही अर्थ मे मेरे देश की बेहतरीन पूंजी थे. मैं दिल के हाथों मजबूर हूँ. वरना तुम अपनी हरकतों का परिणाम देखते. तुम अभी पानी मे हो.....सतह पर नहीं उभरे हो.....मैं पलक झपकते तुम्हें ख़तम कर सकती हूँ. जाओ......अब मैं चाहती हूँ कि फिर कभी तुम से भेंट ना हो. जाओ.....तुम्हारी शकल देखते ही मैं बेबस हो जाती हूँ.....मेरा हाथ तुम पर नहीं उठता......और मैं सोचती हूँ कि मैं कुतिया हूँ. मुझे एक दिन उन चारों आत्माओं से शर्मिंदा होना पड़ेगा. जिन्होने मेरे देखते ही देखते अपनी जाने कुर्बान कर दी. जाओ निकलो.....जल्दी सतह पर उभरो.....कहीं मैं अपना फ़ैसला बदल ना लूँ.......तुम बोलते क्यों नहीं.....बोलो...."
इमरान चुप ही रहा. वो थ्रेससिया की बातों मे नहीं आ सकता था. उसने सोचा संभव है ये भी उसकी चाल हो सकती है. शायद उसके बोलते ही वो उस जगह का लोकेशन जान जाए जहाँ इस समय दोनों हैं. हो सकता है वो इसी लिए उसको संबोधित कर रही हो.