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प्रेम की परीक्षा

मैं ये सब चुपचाप सुन रहा था क्यूंकि मैं यह तो समझ गया था किअब कोई भी मेरी बात का विस्वास नही करेगा।इसलिए मैं शांत होकर अपनी किस्मत पर रो रहा था किंतु मुझे यह विशवास था कि चाहे कोई मेरी बात का भरोसा कर या ना करे दीदी जरूर विश्वास करेंगी। बापू ने दीदी से कहा कि अब तू यंहा खड़ी हो कर क्या तमाशा देख रही ह चल घर।

दीदी •मैं इसके लिए किस लिए रोऊंगी।(भाई मैं ये जानती हूं तुम ऐसी गिरी हुई हरकत नही कर सकते इसमें जरूर कोई साजिश है मैं इसे पता लगाने के लिए मैं झूठ बोल रही हु मुझे माफ् कर दो)

और दीदी तुरन्त वंहा से चली गयी। तब प्रधान ने बोला

प्रधान•तो हरीश अब इसको कहा रखा जाए रात को।

हरीश•प्रधान जी मैं क्या बोलू अब आप ही बोले

प्रधान•ठीक है मैं इसे अपने घर के एक रूम में इसे बन्द कर देते है।

हरीश•ठीक है ।

प्रधान ने दो आदमी को बोलके मुझे अपने घर के बैठक में बने एक रूम में डलवा दिया मेरे हाथ पैर खोल दिये गए।मैं पूरी रात आने बीते हुए दिन जे बारे सोचने लगा । हमारे अनाथालय में एक लड़का थाजो बोलता था कि हम सब हरामी है दुनिया हमे कुछ दिन के लिए तो अपना सकती है पर हमारे ऊपर कोई व विश्वास नही करेगा।जब हमारे मा बाप ने हमे कूड़े में फेंक दिया तो दुनिया हमे क्या अपनाएगा। आज उसकी भक्त मुझे सच लग रही थी आज कोई भी मेरे ऊपर विश्वास नही कर रहा था बस कब केवल दीपा का सहारा था कि शायद वो मुझपर विश्वास करेगी।

अभी मैं यह सोच ही रह था कि मुझे दरवाजा खुलता हुआ दिखा शायद कोई रूम में आया था। मैंने देखा यह कोई और नही दीपा थी और वह रो रही थी। दीपा ने आकर मेरे पास बैठ गयी और बोली।

दीपा• तुमने ऐसा क्यों किया प्रेम अगर तुम्हें जिस्म की भूख थी तो एकबार मुझसे बोलकर तो देखा होता तुम जहा भी कहते मैं वहां आ जाती । जब मैंने तुम्हें शाम को बोली कि मैं तुमसे प्यार करती हूं तो बड़ी बड़ी बाटे कर रहे थे फिर ऐसा क्यू किया तुमने ।

मैं• दीपा मेरी बात का विश्वास करो मैन ऐसा कुछ भी नही किया मैं सच बोल रहा हु ।

दीपा •तुमने मेरे विश्वास की हत्या कर दी हैमेन शाम को भी दिखी थी कि कैसे तुम चम्पा से चिपके हुए क्या कररहे थे। मैं तुमसे मिलने के बाद घर गयी तुम्हारी दीदी कुछ काम से मेरे घर आई थी तो मैंने उन्हें बताया कि मैंने तुम्हें माफ् कर दिया है और मैं उनके साथ तुम्हारे घर को आरही थी तो देखा था।

मैं •दीपा माना कि मैं शाम को चम्पा के साथ बहक गया था मुझसे गलती हो गयी इस बात का तुम जो भी सजा दोगी मुझे मंजूर है पर मैं डाली के साथ कुछ भी नही किया उल्टे यह तो डाली और रामु की चाल है

दीपा•अब तुम अपना दोष दूसरे पर मत दो मैं तुम्हारे किसी भी बात का व

विश्वासW नही रहा।
 
मैं•नही दीपा तुम तो ऐसा मत बोलो अगर तुम ऐसा सोचोगी तो मैं टूट जाऊंगा।अब तो सिर्फ तुम पर ही भरोसा है मुझे।

दीपा •अब मैं तुमपर भरोषा कैसे करूँ यह तुम्ही बताओ।

मैं•तुम तो मुझ पर विश्वास करो।

और मैने उसका हाथ पकड़ा तो उसने मेरी हाथ की झटक दिया और बोली दीपा•मुझे छुओ मत मैं तुमसे प्यार करती थी करती हूं और करती रहूंगी पर मैं जिस प्रेम से प्यार करती हूं उसकी हत्या तुमने कर दी है ।तुम एक हत्यारे हो और मैं किसी हत्यारे से प्यार नही कर सकती।

मैं•दीपा ऐसा मत कहो मैं मर जाऊंगा ।

दीपा •मैं तुमको कभी माफ नही करूँगी अब मैं जा रही हु शायद मैं अबसे रूम बाहर नही निकलूंगी।क्युकी अब जो तुम्हारी दुर्दशा होगी वो मैं नही देख पाऊंगी।

मैं•नही ऐसा मत करो तुम मुझेछोड कर चली गई तो मैं पागल हो जाऊंगा।मुझे जीते जी मत मारो।कम से कम तुम तो मुझ पर विश्वास करो।

दीपा•चलो मैं मान भी लू की तुमने ऐसा नही किया तो डाली ने ऐसा किस लिए उसे ये सब करके उसे क्या फायदा क्या है।

मैन उसे आज जो भी हुआ मैं उसे सब कुछ बता दिया ये भी बताया कि वो दीदी के पीछे भी पड़ा है वह उन्हें भी बरबाद करना चाहता है मैने उसे डाटा तो उन दोनों ने मिलकर मुझे ही फसा दिया।

दीपा•ओह ये तो बहुत ही बुरा हुआ । अब तो कोई भी तुम्हारा कोई भी विश्वास नही करेंगे।अब क्या करोगे।

मैं दीपा तुम अब तुम ही बताओ क्या करूँ

तभी दरवाजा खुला ओर हमने जो देखा उससे हम दोनों की होश उड़ गए।क्यूंकि सामने कोई और नही दीपा के पाप खड़े थे वो भी बहुत गुस्से में हम दोनों को वो घूर रहे थेऔर बहुत ही गुस्सामे थे

प्रधान• दीपा तू यंहा क्या कर रही है।

दीपा• कुछ भी नही पापा बस ये पानी के चिल्ला रहा था तो बस वही देने आयी थी।

प्रधान•चल ठीक है अब जा कर तू सो जा और तू सुन क्या नाम है तेरा छोड़ जाने दे तेरे नाम से मुझे कोई मतलब नही तुझे अब कुछ भी नही मिलेगा और तुमसे मैं शुबह बात करूंगा चलो दीपा

और वह दोनों वहां से चले गए।

अब हम डाली के घर पर चलते है देखे वह पर क्या हो रहा है।डाली को सभी लोग घेर कर बैठे हुए थे ।डाली ने रो रो कर अपना बुरा हाल कर लिया था गांव की कुछ औरते उसके पास बैठ कर उसे शांत कर रही थी।

1औरत •उस नासपीटे की इतनी हिम्मत की देखो गांव की लड़की पर हाथ डाल दिया।

2औरत•अरे बहन वो तो अनाथ है पता नही किसकी गंदी पैदाइश है मैन तो उसी समय सीमा को बोली थी ऐसे अनाथ लड़के अपने घर मत रख आखिर तेरी बेटी के साथ कहि कुछ कर दिया तो क्या करोगी।
 
अभी यह सब बाते चल ही रही थी कि तभी डाली की माँ डाली के लिए खाना लेकर आई ।डाली की माँ नाम सुमित्रा था और इनकी उम्र लगभग 45 के आस पास थी ये बहुत ही सभ्य और धार्मिक विचारों वाली महिला थी उनका पूरा। समय घर की देखभाल और पूजा पाठ में ही बीतता था ।इनकी जीवन मे एक ही बात का दुख। था कि इनका बेटा रामु इनकी बात नही मानता था और उसकी शिकायते दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी।

सावित्री •बेटी कैसी है तू ठीक तो है ना कहि दर्द तो नही ह ना बेटी।

डाली•मा मुझे बहुत दर्द हो रही है पेट मे उसने मेरे पेट मे भी मारा था।

सावित्री• ला बेटी मैं मालिश कर देती हूं तुझे बहुत आराम मिलेगा।

औरत1 सावित्री बहन मुझे तुमसे कुछ बात करनी है तुम थोड़ी देर के लिए बाहर आओगी।

सावित्री •हा बहन चलो ।

फिर वो दोनो औरते ओर सावित्री बाहर आ गयी

औरत1•बाहें देखो मैं घुमा कर नही बोलूंगी मैं यह कहना चाहती हु की उस लड़के ने डाली के साथ कहि कुछ कर न दिया हो गए जाकर अगर कुछ हुआ तो तुम किसी को मुह दिखकने लायक नही रहोगी।

सावित्री•हा बाहें मैं भी यही सोचकर परेशान हु पर मैं कैसे पुछु यह बात नही समझ मे आ रही है

औरत2 •इसका हल है मेरे पास ।

सावित्री •क्या बहन।

औरत2 •मैं अपनी बेटी शीला को भेज देती हूं वो रात भर रूक भी जाएगी और इससे पूछ भी लेगी ।

औरत1•है इसकी बात भी सही है शिला डाली की सहेली भी है जिससे उसका दर्द भी कम होगी ।

सावित्री•ठीक है जैसा तुम उचित समझो करो मुझे तो कुछ बहु समझ मे नही आ रहा है।

औरत 2 •ठीक है बहन मैं भेज दिति हु जाकर नही तो वो भी सो जाएगी।

अब हम प्रेम के घर यानी कि दिया के घर चलते है।

सीमा (दिया और प्रेम की माँ)•मुझे तो थोड़ा भी यकीन नही हो रहा है कि प्रेम ऐसा भी कर सकता है मुझे लगता है ये कोई साजिश है ।

हरीश•कोई साजिश नही है वो था ही ऐसा ।

दिया•नही बापू आप सब उसे गलत समझ रहे है अगर उसके मन मे ऐसा कुछ भी होता तो वी आज शाम को प्रधान की बेटी दीपा के साथ बहुत कुछ कर सकता था पर उसने ऐसा कुछ भी नही किया ।जब दीपा शाम को उससे अपने प्यार का इजहार कर रही थी ।वो तो उसके साथ भागने को भी तैयार थी पर उसने ऐसा नही किया बल्कि उसे अपने अनाथ होने और गरीब होने का हवाला देकर मना कर दिया ।

यह बाटे सुन कर हरीश ओर सीमा दोनो के होश उड़ गए। दिया फिर बोलना सुरु की

दिया •प्रेम को अगर कुछ करना होता तो वो डाली के साथ नही दीपा के साथ कुछ कर चुका होता। उन्हें तो छोड़ो आप सब जब से उसे घर ले कर तबसे आज तक ना जाने कितनी बार आप दोनों मुझे उसके साथ घर पर अकेले छोड़ कर बाहर गए है।पर उसने कभी भी मुझे गंदी नजरो से नही देखा वी मुझे हमेशा बड़ी बहन के रूप में देखा।

इतना बोल कर दिया रोने लगी और रट हुए अपने रूम में चली गयी ।

हरीश •हा दिया भी ठीक कह रही है अगर आज की घटना को छोड़ दे तो उसने कोई व गक्त काम नही किया है।

सीमा•मैं यह सब कुछ भी नही जानती मुझे बस मेरा बेटा वापस चाहिए।

हरीश•सीमा बात को समझो अब कुछ भी नही हो सकता बो रँगे हाथ पकड़े गया है और रामु इस बात का गवाह है जबकि पूरा गांव जानता है कि रमु और प्रेम दोस्त है तो कोई दोस्त अपने दोस्त को क्यों फ़सएगा।

सीमा•ठीक है अगर कल प्रेम के साथ कुछ हुआ तो मैं भी घर छोड़ कर चली जाऊंगी।

इतना बोल कर सीमा भी चली जाती है । इधर डाली के पास शीला आ गयी थी और उससे सब पूछ कर सावित्री को बता दिया था कि कुछ हुआ नही है रामु समय पर पहुच गया था।

अब सबको सुबह का इन्तजार था जैसे ही शुबह हुई पूरे गांव के लोग प्रधान के घर आ गए थे बस उसमे 3 लोग नही थे जो कि ये मानते थे कि प्रेम ऐसा नही कर सकता 1 तो दीपा थी जो सब जानती थी और 2 उसकी माँ और बहन दिया

अब पूरे गांव के लोगो के आ जाने बाद प्रधान ने उसे घर से बाहर निकलवाया।

मैं•चाचा जी मेरी बात का विश्वाश करे मैने ऐसा कुछ नही किया।

प्रधान •चुफो जा वरना इतना मार खायेगा की उठना भी मुश्किल हो जाएगा

तब मैंने चारों तरफ निगाह उठा कर देखा तो मुझे ना ही माँ दिखाई दी और ना ही दीदी ।फिर मेरी निगाह दीपा को ढूढने लगी पर वह नजर नही आई अब मैं पूरी तरह से टूट गया और सोचा जब किसी को मुझपर विश्वास ही नही रहा तो अब जो हो जाये सब ठीक ही है।

फिर प्रधान ने नाउ बुलवाया ओर मेरे बल मुड़वा दिया गया और मेरे चेहरे पर कालिख पोत दिया गया ।तभी मेरी निगाह डाली और रमु पर पड़ी दिया तो कुछ उदाश दिख रही थी पर रामु खुश था हो भी क्यों नही अब उसका रास्ता साफ हो गया था पर अब मैं क्या कर सकता था कब बस अपना तमाशा बनते देख रहा था तभी मैने देखा रामु प्रधान जी कुछ बात कर रहा है फिर रमु दो आदमी को बाहर लेकर गया ओर दो टोकरे उनके सर पर रख कर लाया फिर वहां पर रख दिया गया मैन देखा कि वो टमाटर था पूरा दो टोकरे और रामु हश रहा था मन ही मन।

प्रधान •इसे इस पेड़ में बांध दो और इसकी आंखों में काली पट्टी बांध दो।

मेरे साथ ऐसा ही हुआ अब ना ही मैं हिल सकता था और न ही कुछ देख देख सकता ।। तभी मेंरे कानों आवाज पड़ी

आवाज 1•प्रधान जी अब क्या सजा है इसकी

प्रधान•अब पहले इसे तो टमाटर से मारो इसे फिर गधे पर पूरा गांव घुमाया जाएगा

यह सुन कर मैं अंदर से हिल गया

तभी मेरे ऊपर एक टमाटर पड़ा अभी मैं इससे संभला भी नही था कि मेरे ऊपर टमाटर की बरसात होने लगी यह बारिश करीब 5 मिंट तक चला जब यह बारिश शांत हुई टी मुझमे इतनी भी हिम्मत नही रही कि मैं खड़ा हो सकू

फिर मुझे खोल दिया गया और उसके बाद मेरी आँखों से पट्टी भी खोल दिया गया ।जब मेरी आँखें खुली तो मेेरे सामने अंधेरा अंधेरा था मुझे कुछ भी दिखाई नही दे रहा था परंतु कुछ देर बाद मुझे दिखाई देने लगा तो मैंने देखा कि अपने घर जे चार ओर दीपा खड़ी थी और रो रही थी और हाथ जोड़कर माफी मांग रही थी पर मुझमें अब इतनी हिमंत नही थी मैं ज्यादा देर तक ऊपर देख पाता मेरी नजरे नीचे की तरफ झुक गयी तभी मुझे एहसास हुआ कि कुछ लोग मेरे पास आ रहे है तो मैंने उधर देखा तो मेरे होश उड़ गए क्योंकि उधर से लोग एक गधे को केजर आ रहे थे और उनके हाथ ने जूते चप्पल की माला थी फिर मेरी निगाह ऊपर गयी तो मुझे अब वंहा पर दीपा नही खड़ी थी शायद वह चली गयी थी मेरी दुर्दसा उसे नही देखा गया ।

फिर मुझे वो चप्पलो की माला पहना दी गयी और पूरे गांव ।के घुमाया गया।जब वी मेरे घर के सामने आए तो माँ मुझे इस हालत में देख कर बेहोश हो कर गिर गयी ।मुझे अपने ऊपर हर जुल्म कबूल था पर जब माँ बेहोश हुई तो मैं आने आपको रोक न सका और तुरन्त कूद कर मा के पास पहुच गया उसे उठा कर अंदर पहुचाया ।तभी मेरे सर पर पीछे से किसी ने डंडे स्व प्रहार किया पीछे न्यूड कर देखा तो वह कोई और नही मेरी दीदी थी मैं कुछ नही कर सका और बेहोश हो गया
 
इधर दीपा का रो रोकर बुरा हाल था जब उसकी माँ ने पूछा कि बेटी तुझे क्या हुआ है तो वो कछु भी नही बोली परन्तु बार बार पूछने पर उसने सारी बाते बता दिया जो भी कल रात को प्रेम ने उसे बताया था और दीपा अपनी माँ से बोली

दीपा•माँ अगर प्रेम को कुछ हुआ तो मैं व अपने आप को खत्म कर लूंगी

दीपा की माँ का नाम शीला जो प्रधान के विचारों से उलट शांतिप्रिय महिला थी जो भगवान को तो नही मानती थी पर दुसरो को इसके लिए बाध्य नही करती थी वो कर्म करने में विशवास रखने एल महिला थी।

शीला•ऐसा कु बोल रही है तू उसे अगर कुछ हुआ तो तुझे क्या फर्क पड़ेगा रुक कहि तू उससे प्यार तो नही करती ना

दीपा हॉ माँ करती तो हु पर वो मुझसे प्यार करता भी है और नही भी

शीला•मैं कुछ समझी नही

दीपा•माँ कल रात को जब मैं उससे मिली और पूछी तुमने ऐसा क्यों किया तो उसने सारी बात मुझे बताया कि वो इस गांव में सिर्फ मेरे लिए रुका था परंतु जब मैंने शाम को उससे अपने प्यार का इजहार किया तोउसने यह कह कर मना कर दिया कि मैं तुम्हारे लायक नही हु मैं एक अनाथ हु और तुम्हारे पापा मुझे कभी भी स्वीकार नही करेंगे और फिर मैं तुम्हे ले जाकर रखूंगा कहा मेरे तो कोई घर भी नही है

शीला•यह सब उसने कहा।

दीपा •हा माँ अगर वो चाहता तो आज वो सब कुछ कर सकता जो उसपर इल्जाम लगा है पर उसने ऐसा कुछ भी नही किया बल्कि जब मैंने ऐसा करने की प्रयास किया तो मुझे मना कर दिया और वहां से चला गया

तबतक चम्पा दौड़ती हाफते हुई आयी और बोली

चम्पा •दीपा प्रेम की हालत बहुत हु खराब है दिया ने उसके सर पर डंडे से मार दिया है जिसके कारण वह बेहोश हो गया है और बड़े पापा ने उसे कुछ लोगो की मदद से हॉस्पिटल में भर्ती कराया है डॉक्टर ने हालत नाजुक बताया है

दीपा •नही ऐसा नही कर सकती दिया दीदी उन्होंने ऐसा क्यों किया क्या गांव के लोगो ने सजा कम दिया था जो उन्होंने उसे मार दिया

चम्पा •बड़े पापा ने भी यही पूछा था कि तुमने ऐसा क्यों किया तो उन्होंने कुछ जवाब नही दिया बस रोते हुए घर के अंदर भाग गई औऱ बड़ी मम्मी ने जब इस बारे में सुना तो उन्होंने दिया को मारा और अभी प्रेम के पास गई है

दीपा•माँ मुझे भी प्रेम को देखने जाना है मैं जा रही हूँ

शीला•नही मैं इसकी इजाजत नही दे सकती अगर तुम्हारे पापा जान गए तो मुझे बहुत डांटेंगे।

दीपा •कम से कम दिया के पास जाने दो मैं उससे पूछना चाहती हु उसने ऐसा क्यों किया । इसकी इजाजत तो दोगी ना आप।

शीला •हा तू जा सकती है पर ध्यान से किसी भी तरह तुम्हारे पापा को ये पता ना चले कि तू उसे पसंद करती है नही तो उसे ओर भी मुसीबत उठानी पड़ सकती है।

दीपा •ठीक है माँ।

फिर चम्पा ओर दीपा दोनो दिया के घर चल दिए।दोनो घर जा कर देखती है कि दिया अपने दोनों हाथों को दीवाल पर मार रही थी और उसके दोनों हाथों से खून निकल रहा था फिर भी वो मारे जा रह थी रुकने का नाम ही नही ले रही थी दीपा जल्दी से जाकर उसके हाथ को पकड़ लेती है और उसे रोकती हुए बोलती है

दीपा• दीदी आप ऐसा क्यों कर रही है आपके हाथो से कितना खून निकल रहा है आप ओर ज्यादा चोटिल हो जाएंगी।

दिया•हो जाने दो मुझे मत रोको मैं इसी लायक हु मैने उसे मारा उसकी हालत बहुत ही नाजुक है।

दीपा •हा दीदी मैं भी यही पूछने थी कि अपने उसे क्यों मारा सबकी तरह आपको भी लगता है कि उसने डाली का रेप करने की कोशिश की है।

दिया •नही मैं जानती हूं वो ऐसा कुछ भी नही कर सकता मैं उसके साथ पिछले 4 साल हु मुझसे ज्यादा कोंन जानता है कि वो कैसा है

दीपा•फिर आपने उसे क्यों मारा ।

दिया •मेरी सहेली की बड़ी बहन रचना के कहने पर।

दीपा •उन्होंने ऐसा क्यों बोला और वी होती कौन हैं ऐसा बोलने वाली।

दिया•क्यूंकि वो पुलिस में दरोगा है और अभी कुछ देर मे वी हॉस्पिटल आयंगी
 
आप सभी मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद मुझे उम्मीद नही थी मुजजे इतना अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा ।भाई लोग इसमें सेक्स इनपुट कम होगा इसके लिए माफ कर दे
 
दीपा •मुझे अभी भी ये बात समझ मे नही आ रही है कि उन्होंने ऐसा करने को क्यों बोली। अगर ऐसा करने से प्रेम को कुछ हो गया तो क्या करती आप।

दिया• मैंने ज्यादा तेज नही नही मारा था पर ना जाने क्यों वह बेहोश हो गया।

दीपा•दीदी आप जानती है कि मैं उसे अपने दिलो जान से बढ़ कर चाहती हूँ अगर उसे कुछ हो गया तो मैं आपको कभी भी माफ नही कर पाऊंगी।

उधर हॉस्पिटल में डॉक्टर प्रेम को चेक करने के बाद प्रधान और हरीश जो दोनों लोग साथ मे खड़े थे उनके पास आया और बोला

डॉक्टर•मरीज के साथ कौन है।

प्रधान•हम सब उसके साथ ही है वो अनाथ है।

हरीश•क्या बात है डॉक्टर साहब कोई खतरे की बात है क्या

डॉक्टर•वैसे मरीज तो अभी खतरे से बाहर है और उसे सर पर चोट भी ज्यादा गहरी नही है फिर भी मरीज के दिमाग पर लगता है कोई गहरा सदमा पहुचा है उसे जल्द ही होश आ जाएगा पर उसे अभी देख भाल की जरूरत है और उसे दिमाग पर ज्यादा जोर नही डालने दिया जाए नही तो वो पागल भी हो सकता है।

तभी वहाँ पर एक इंस्पेक्टर अपने 4 हवलदार के साथ आती है वो कोई और नही दिया कि सहेली की दीदी थी जिनकी पोस्टिंग हाल ही में हुई थी ।इनका नाम अन्नु है और इनकी लंबाई 5फिट 6 इंच थी इनके सरीर पर कहि भी चर्बी का नमो निशान नजी था और इनका फिगर तो किसी भी हीरोइन को व मात देती थी और ये चहरे से बहुत ही मासूम दिखती थी पर गुंडो में इनके नाम का कहर चलता था गुंडे बदमाश तो इनका नाम सुन कर काँपते है।

अन्नू•यहां पर मरीज के साथ को है और यह किसके घर पर रहता था।

प्रधान•इसे मैने ही भर्ती किया है इंस्पेक्टर और हमने तो कोई रिपोर्ट तो नही लिखाया फिर आप यंहा कैसे।

अन्नू•यह तो मेरे आधे सवाल का जवाब है आधे जवाब कौन देगा।

हरीश • यह मेरे साथ रहता था।

अन्नू•तो अपने उसे गोद लिया था जहाँ तक मुझे पता चला है यह आनाथ था क्या अपने गोद लेने की कागजी कार्रवाई करवाई थी।

हरीश•नही मैने ऐसा कुछ नही किया था

तभी डॉक्टर आते हुए दिखा तो अन्नू ने उन्हें रोका और उसके हालात के बारे में पूछा।डॉक्टर•इंस्पेक्टर मुझे आपसे कुछ बात करनी है

अन्नू• हा तो बोलिये डॉक्टर

डॉक्टर •यंहा पर बात करना उचित नही होगा शायद आप मेरे केबिन में आये।

अन्नू•जरूर डॉक्टर

फिर अन्नू ओर डॉक्टर दोनो चले गए ।वहां एक खामोशी सी छा गयी।तब हरीश ने प्रधान से बोला

हरीश •प्रधान जी आप अपने दोस्त कमीश्नर से बात करे और पूछे यह इंस्पेक्टर यहा कैसे आयी है और क्या करने मे नही चाहता मेरी और बदनामी हो।

प्रधान •ठीक है हरीश मैं बात करता हु ओर देखता हूं क्या हो सकता है।

फिर प्रधान ने कमिश्नर से बात किया ।प्रधान अपनी मोबाइल निकाल कर कमिश्नर को फोन किया।उधर फोन उठा तो एक आवाज आई

प्रधान •हा त्यागी जी कैसे है आप

कमिश्नर त्यागी•हा बोलिये प्रधान जी आज हमारी याद कैसे आ गयी

फिर प्रधान ने कमिश्नर त्यागी को सब बता दिया और यह भी बता दिया कि कोई लेडी इंस्पेक्टर आयी है और डॉक्टर के पास गई है म क्या करे कुछ उपाय बताए

त्यागी•क्या नाम है उस इंस्पेक्टर का

प्रधान•नाम तो नही मालूम पर तुम्हारे लिए को से मुस्किल है पता करना है इंस्पेक्टर

त्यागी •ठीक है मैं पता करके बोलता हु ओर उस इंस्पेक्टर को भी देखता हूं।

प्रधान•ठीक है मैं 10 मिनट में काल करता हु
 
इधर 7इंस्पेक्टर अन्नू और डॉक्टर दोनो डॉक्टर की केबिन में पहंचते है।

अन्नू•हा तो डॉक्टर साहब ऐसी क्या बात है जो आपको मुझे अकेले में मिलकर बात करनी है।

डॉक्टर•इंस्पेक्टर जहाँ तक मुझे लगता है इस मरीज के साथ बहुत बुरा सलूक किया गया है शायद शारीरिक और मानसिक दोनो तरह से इसे टार्चर किया गया है।

अन्नू•हा इसबारे में मझे मालूम है और रही बात इसके सर पर चोट लगने की वो मेरे कहने पर ही मारी गई थी।

डॉक्टर •तभी मैं सोचु की जँहा इतना ज्यादा टॉर्चर किया गया है उसे सर पर सिर्फ हल्का चोट क्यों लागिजबकी इसके सर पर बाल भी नही है तो इस हिसाब से चोट ज्यादा लगनी चाहिए।

अन्नू •कुछ और बात हो बताए यह सब मैं जानती हूं।

डॉक्टर•हा एक जरुरी बात बतानी है आपको जहां तक मुझे पता चला है यह अनाथ है और जहाँ पर यह रहता था वहाँ से भी निकाला जा चुका है और अनाथयालय में देखभाल अछि तरह से नही हो सकती इसे इस समय देखभाल की सख्त जरूरत है क्योंकि यह जहाँ तक मुझे अनुमान हैं यह शारीरिक रुप से चाहे जितना मजूबत हो जाये पर अभी इसकी मानसिक हालात अच्छी नही रहेगी।

अन्नू•आप कहना क्या चाहते है मकई समझी नही डॉक्टर।

डॉक्टर•जहाँ तक मुझे लगता है अपने इसके सर पर मारने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का चुनाव किया जो इसके दिल के बहुत करीब था और यह वह सदमा बर्दाश्त नही कर पाया और बेहोश हो गया है परंतु मौजूदा हालात क्या है यह तो उसके होश में आने के बाद ही पता चलेगा

अन्नू• ठीक है डॉक्टर वो सब तो ठीक है पर अब इसका कुछ तो उपाय होगा।

तभी केबिन का दरवाजा खुलता है और एक नर्स आती है जिसकी ड्यूटी प्रेम के कमरे में रखी गयी थी

वह आकर डॉक्टर से बोली

नर्स•डॉक्टर मरीज को होश तो आ गया है पर वह अजीब तरह की हरकत कर रहा है

डॉक्टर •चलो देखता हूं

अन्नू•डॉक्टर मैं भी चल सकती हूं देखने

डॉक्टर•है चलिए

फिर सब लोग प्रेम के कमरे जाते और देखते है कि प्रेम बुरी तरह से रो रहा है औरकुछ बड़बड़ा रहा था फिर डॉक्टर उसकी जांच करने लगा।तो प्रेम ने उससे पूछा।

प्रेम•दीदी आपने मुझे क्यों मारा क्या आपको भी यही लगता है कि मैने डाली की रेप करने की कोशिश की है बोलो न दीदी आप कुछ बोलती क्यों नही है।

अन्नू तो जैसे प्रेम के चहरे को देख कर अपने होश ही खो बैठी थी उसे समझ मे नही आ रहा था जो वो देख रही है वो सच है या कोई ख्याब है ।ऐसा कैसे हो हो सकता है 2लोग की सकल एक जैसे कैसे हो सकती है ।तभी डॉक्टर ने अन्नू को हिलाया तो अन्नू को जैसे होश आया।ओर वो डॉक्टर से तुरन्त बोली

अन्नू•डॉक्टर मैं यह नही जानती आप क्या करोगे कैसे करोगे पर आप को जो कुछ भी करना हो कर पर यह लड़का अच्छा होना चाहिए ।आप किसी भी चीज की चिंता ना करे आप को जो करना है बेफिक्र हो कर करे जिसे चाहे उसे बुलाये इसकी कोई चिंता नही है जितने पैसे लगेंगे सारे मैं दूंगी।

डॉक्टर को भी समझ मे नही आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या ही गया है कि अन्नू ऐसा क्यों बोल रही है

अन्नू तुरन्त रूम से बाहर आकर दो हवलदार को बुलाती है और उनसे बोलती है

अन्नू•चाहे कोई भी उसे रूम के नदव्र नही जकने देना सिर्फ 2 लोग को छोड़ कर

ओर वह डॉक्टर और नर्स को बुलाती है उन्हें दिखती है

दोनो हवलदार बोलते है ठीक है

फिर अन्नू दूसरे तरफ जा कर किसी से फोन पर बाटे करने लगती है यह बात करीब 10 मिंट तक चला और वह फोन काटने के बाद प्रधान के पास जाती है तबतक कमिश्नर तयगी कक फोन आता है वह फोन उठा कर उससे बाटे लगती है फिर फोन कट जाता है

फिर त्यागी प्रधान को फोन करता है।

त्यागी•प्रधान अब इस बारे मे आपकी कोई भी सहायता नही कर सकता।मैं ही नही कोई भी नही कर सकता ।वह एक आंधी है जिसे काबू करना किसी के लिए मुश्किल है बस आप भगवान से यही दुआ करे उस लड़की ने जो इल्जाम उस लड़के पर लगाया है वह सही हो वरना उसके कहर से कोई भी नही बच पायेगा।

प्रधान• ऐसा क्या हो गया है जो आप ऐसा बोल रहे है

तयगी•यह तो मैं भी नही जानता ऐसा क्या हो गया है पर अभी मुझे ऊपर से फोन आया था मुझे उसके किसी भी कम में दखलन्दाजी करने से सख्त मन किया गया है।

तबतक अन्नू एक आंधी की तरह हॉस्पिटल से बाहर निकल गयी और सीधे प्रेम के गांव यानी कि दिया के पास पहुच गयी ।
 
अन्नू जब दिया के घर पहुची तो देखती है वह वहाँ पर दिया के साथ ओर भी 2 लड़किया है और उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी पर दिया ने अपना रो

रो कर अपना बुरा हाल कर लिया था।जब उन तीनो ने गाड़ी रुकने की आवाज सुनी तो दिया ने दीपा से कहा

दिया•दीपा जाकर देखो कौन आया है।

दीपा •ठीक है दीदी

दीपा जब बाहर आकर देखती है तो उसे अन्नू दिखाई देती है वो अभी वर्दी में थी तो दीपा को पहचानने में थोड़ी भी देर नही लगी। और उसने तुरंत जाकर उन्हें बुलाकर दिया के पास ले कर गयी

अन्नू • दिया ये तुमने अपना क्या हालत कर ली है और तुम्हारे हाथ मे ये चोट कैसे आयी

दीपा•मैम इन्होंने अपने जिस हाथ से प्रेम को मारा था उसी हाथ को दीवाल पर मार के अपने को सजा दे रही थी मैं तबसे इन्हें समझा रही हु पर ये समझने को तैयार नही है

अन्नू (मन मे तब तो इसे अभी प्रेम की हालत के बारे में बताना उचित नही होगा वैसे कोई बात नही मुझे तो सच्चाई पता करनी है)अन्नू दीपा से

अन्नू•वैसे तुम कौन क्या लगती हो तुम इसकी

दीपा•मैं इस गांव के प्रधान की बेटी हु ओर प्रेम की दोस्त हु और यह दिया की छोटे चाचा की लड़की चम्पा

अन्नू•यंहा पर क्या हुआ है कोई बताएगा मुझे एक बात बता दु मुझे झूठ बोलने वालों से सख्त नफरत है और यकीन करो मेरा की मैं रेप करने वाले को नही छोड़ती तो सच बताओ मुजजे क्या हुआ है

फिर दीपा ने अन्नू को सारी बाते बता दिया जो प्रेम ने उससे बताया था यह सुनने के बाद तो अन्नू की आंखों से तो मानो लावा फुट रहे हो और वह तुरन्त दीपा से पूछी

अन्नू•इन सब बातों को तुम कैसे जानती हो अगर तुम जानती थी इसके बारे ने सबको बताया क्यू नही तुमने

दीपा •मैं प्रेम से प्यार करती हूं और प्रेम भी मुझसे प्यार करता है पर अपनी गरीबी और अनाथ जोन कारण जब मैंने कल उसे बोली कि मैं तुमसे प्यार करती हूं तो उसने मुजजे मना कर दिया फिर साम के समय जब थोड़ा अंधेरा हुआ था तब कुछ गांव के लोग प्रेम को मारते हुए हमारे घर पर ले कर आये तब हमें पता चला कि क्या हुआ है मुझे इन सभी लोग के बातो पर विश्वास तो नजी था पर मैने औऱ दिया दीदी ने सैम को प्रेम को चम्पा के साथ रास्ते मे किस करते देखा तो मुजजे लगा हो सकता है मुझे प्रेम को पहचानने कोई गलती बो गयी हो।

यह सुनते ही कि सायं के समय जो कुछ भी हुआ वो दीपा भी जानती है तो उसका मुह सरम से झुक गया

अन्नू •तो तुम ये सब बाटे जो मुझे बताया इससे तो यही सिद्ध होता है कि प्रेम ऐसा कर सकता है

दीपा •नही यह सच नही है पखले मेरी पूरी बात तो सुन ले

अबतक दिया भी शांत ही गयी थी और उठ कर सभी के लिए चाय बनाने चली गयी फिर दीपा ने बोलना सुरु किया

दीपा•जब सब बाटे पता चली तो पापा ने उसे हमारे घर के एक कमरे में बंद कर दिया इधर घर मे मेरी हालत बहुत ही खराब थी कि जब मैंने प्रेम से प्यार के बारे में बोला तो मुझे मन कर दिया फिर उसने ऐसा क्यों किया जबकि वो चाहता तो मेरे साथ उस समय सब कर सकता था जब मैंने उसे अपने तन और मन से अपना सब कुछ मान लिया था और उसे सब कुछ सौपने को तैयार भी थी मुज्जसे नही रह गया तो जब पापा सोने के लिए अपने कमरे में गए तो मैं उसके पास गई और इन सब बातों को पूछने लगी तब उसने सारी सच्चाई बताई मुझे तो मैंने सारी बात पापा को बतानी चाही तो पापा ने सुबह बात करने को बोल कर सोने के लिए चले गए।

अन्नू•तुम तो बोल रही थी कि तुम्हारे पापा सोने गए थे फिर कब बात की

दीपा•जब मैं और प्रेम बाटे कर रहे थे तो पापा पेशाब करने के लिए बाहर आये थे तो उन्हें लगा कि कोई उस रूम है तो वो वहां पर आए जब वह वहां पर मुझे देखा तो गुस्सा होने लगे तो मैंने उनसे झूठ बोल दिया कि मैं इसे पानी देने के लिए आई थी यह पानी मांग रहा था तब जाकर पापा ने गुस्सा कम किया मुझ पर जब मकई बाहर ककर बात करनी चाही तो उन्होंने मुझे बोला कि हम सुबह बात करंगे इसलिए बात नही कर पाई रात में लेट सोने के कारण मेरी नीद लेट खुली तो मैंने देखा कि अब लेट हो चुका था इसे जो सजा देनी थी बो सुरु हो चुका था तो मैं अब कुछ भी नही कर पाई सिर्फ देखने और रोने के शिवा

अन्नू यह सब बाटे सुन कर कुछ देर तक खामोश रही तबतक दिया भी चाय लेकर आ गयी तो सबने चाय पी फिर अन्नू ने कहा कि

अन्नू•देखो दिया अब जो मैं कहने जा रही हु उसे ध्यान से सुनना प्रेम की सकल मेरे एक सहेली की भाई जो कि इस सहर से सबसे बड़े उधोगपति राजेन्द्र प्रताप का इकलौता बेटा था उससे मिलती है और वह अभी कुछ ही दिन पहले एक एक्सीडेंट में मार गया है और यह बात केवल मैं और नेरी सहेली जानती है और कोई भी नही सब यही जानते है कि वह कहि ओर गया हुआ है मैन उसे फोन कर दिया है बस वह भी कभी आती होगी चलो तब तक उस लड़की से मिल जाय जो यह इल्जाम लगाई है

अन्नू दीपा से बाहर जाकर एक हवलदार को बुलाओ तो

दीपा तुरन्त बाहर गयी और बुला कर लाई।हवलदार आते ही सैलूट मार कर पूछा

हवलदार,•जी मैम आपने बुलाया

अन्नू•हा क्या इस तरफ कोई गुड़ा बदमाश या चोर है जो मेरे बारे में जानता हो

हवलदार•हा मैम वो कल्लू चोर है ना जिसकी आपने कई बार धुलाई की है उससे अच्छा और कौन जानता है

अन्नू •ठीक है जाकर उसे बुला कर लाओ ।

हवलदार यह सुनकर तुरन्त ही वहां से चला गया और कल्लू के घर पहुचा तो देखा कि वह बाहर ही सोया है तो जाकर उसे जगाया तो कल्लू गुस्सा हो गया और गुस्से में चिलाते हुआ पूछा अबे कौन है जो सुबह ही दिमाग खरक़ब् कर रहा है

हवलदार•ओ कल्लू उठ अन्नू मैडम यहां पर आई है और तुझे बुला रही है

कल्लू अन्नू का नाम सुनते ही ऐसे उठा जैसे कि किसी बहुत का नाम सुन लिया और बोला

कल्लू•क्या साहब अब तो मैंने सारे गलत काम छोड़ दिया अब वह क्यों बुला रही है।

हवलदार•यह तो मैं नही जानता पर इतना जरूर जानता हूं कजर तू नही चला तो तेरी एक भी हड्डी सही सलामत नही बचेगी क्युकी मैडम आज बहुत गुस्से में है

कल्लू •हा साहब सच ही बोलते उनसे भाग कर कोई भी जा सकता क्युकी अगर भागा तो दुगना मार पड़ेगी चलो उनसे भी मिल ही लेते है।

फिर वो दोनों दिया के घर पहुचे तो अन्नू वहां घर के बाहर ही खड़ी मिल गयी
 
अन्नू को देखकर तो कल्लू की हालत वैसे ही पतली हो जाती है पर आज उसे इतना भरोषा था कि मैंने लगभग 2 महीने से कोई गलत काम नही किया है तो दरोगा साहिबा कुछ करेंगी नही फिर कल्लू ने जा कर अन्नू को सलाम की या और बोला

कल्लू•मैडम मैन अभी सारी गलत कामो को छोड़ दिया है फिर अपने मुझे किस जुर्म में गिरफ्तार कर रही है मैडम अपने जो पिछली बार मारा था उससे तो मैं अभी तके उभर नही पाया और इस समय तो मैं छोटा सा सब्जी का दुकान चला रहा हु ।

अन्नू •अरे रुक जा पहले मेरी बात तो सुन ले मैने तुझे गिरफ्तार करने के लिए नही बुलाया है मैने तुम्हे इसलिये बुलाया है ताकि तू मेरे बारे में किसी को समझ सके मैं नही चाहती कि मुझे किसी पर बेवजह बल का प्रयोग करना पड़े

कल्लू •किसे समझना है मैडम

अन्नू•तूने सुना होगा कि आज एक लड़के को रेप के लिए गांव की पंचायत ने एक लड़के को सजा दी हैऔर मुजजे लगता है कि वह लड़की झूठ बोल रही है।

कल्लू•मैडम मैन भी सुना पर मुझे पक्का यकीन है कि प्रेम को झूठा फसाया गया है क्योंकि मैं रामु को बहुत अच्छी तरह से जानता हूं वो एक नम्बर का कमीना ओर घटिया लड़का है वह गांव की सभी लड़कियों पर गंदी नजर रखता है यंहा तक कि उसने अपनी बहन को भी नही छोड़ा है ।

अन्नू•यह तुम कैसे कह सकता है कि उसका सम्बन्ध अपनी बहन से भी है

कल्लू •आपसे क्या छुपा है मैं एक बार रात ने चोरी के लिए निकला था तो मैंने अपने आंखों से खुद देखा था

अन्नू दिया को बुलाती है और दिया से बोलती है कि मुझे उस लड़की के हर्ले कर चलो।दिया और दीपा दोनो सभी के साथ डाली के घर पहुचती है तोदेखती है वहा पर गांव की बहुत सारी औरते जमा थी ।अन्नू ने दिया से पूछा कि डाली को है तो दिया ने इशारा से बता दिया कि यही डाली है

गांव की सारी औरते पुलिश को देख कर एक तरफ हो गयी । तब सुमित्रा आगे आ कर अन्नू को बैठने को बोली । अन्नू बैठ गयी और सभी से वहां से जकने के लिए बोली ।अब वहां पर सिर्फ कल्लू ,दीपा,दिया, और 2 हवलदार के अलावा सुमित्रा और डाली थी । तब अन्नू बोली

अन्नू•मा जी आपका बेटा रामु नही दिख रहा है वह कहा है उसे भी बुलाकर लाये

सुमित्रा• अभी बुला कर लाती हु

तब सुमित्रा घर अंदर गयी और रामु को बुलाकर बाहर ले कर आई फिर अन्नू से बोली

सुमित्रा •दरोगा साहिबा मेरी बेटी के साथ गलत करने वाले को गिरफ्तार कर ली आप ।

अन्नू •नही अभी नही अभी वह हॉस्पिटल में उसकी हालत नाजुक है पर मैं यंहा पर डाली और रामु से पूछताछ करने के लिए आई हूं।

सुमित्रा • कैसी पूछताछ अपराधी तो वह है ना।

अन्नू •वही पता करने आई हूं बस कुछ प्रश्न है उन्ही के उत्तर चाहिए बस

तब अन्नू ने कल्लू को बुलाया उसे बोली कि रामु को अच्छी तरह से समझा दे कि मेरे हर प्रश्न कक सही उत्तर दे वरना मैं झूठ बोलने वालों की क्या हालत करती हूं

कल्लू ने जाकर रामु को सब बताया जिसे सुनकर उसकी हालत पतली हो गई और वह रोने लगा तो अन्नू ने उसे डॉट कर चुप कराया और बोली

अन्नू•देख सच बोलना क्योंकि सारी बाते मुझे पहले से ही पता है बस तेरे मुह से सुनना है तेरी बहन तो नाबालिग है वह तो बच जाएगी पर तु अपना सोच तेरे साथ क्या होगा और जब मैं अपने ओर आती हु तो मुर्दे भी बोलने लगते है।

यह सुनकर तो रामु की हालत और खराब हो गयी। फिर भी वह कुछ बोल नही रहा था वह सिर्फ रोये जा रहा था
 
तब कल्लू आगे आया और प्रेम को समझाते हुए बोला

कल्लू •देख रामु मैं लाख बुरा इन्शान सही पर आज मैं सुधर गया हूं और अपनी बीवी बच्चों के साथ सुख से रह रहा हु इसका पूरा श्रेय मैडम को जाता है इसलिए जो सच है वो बता दे नही तो तेरी रक्षा कोई भी नही कर पायेगा।

इतनी देर से खड़ी सुमित्रा को कुछ भी समझ मे नही आ रहा था यह हो क्या रहा है और सब रामु से किस गलती की बात कर रहे है तब वह पूछी

सुमित्रा• दरोगा साहिबा आप किस गलती की बात कर रही है मैं कुछ समझ नही पा रही हु कृपया मुझे सारी बात समझाए।

डाली जो इतनी देर से सर को नीचे करके बैठी थी कुछ बोल नही रही थी वह अन्नू की तरफ देख कर उसे अपनी माँ से कुछ भी ना बताने की गुहार की पर अन्नू ने उसे अनदेखा करते हुए उसकी मां की तरफ देखने लगी ।यह देख कर डाली को कुछ भी नही सुझा तो वो अन्नू के पैर पकड़ ली और अपने किये की माफी मागने लगी। क्योंकि डाली को यह समझ मे आ चुकी थी कि जो भी हमने किया है प्रेम के साथ वह सब इनको मालूम हो चुका है अगर यह बात माँ को पता चला कि मेरे भाई के साथ जिस्मानी सम्बन्ध है तो माँ को बहुत दुख होगा इसलिए वह अन्नू से यह बात नही बताने के लिए सिफारिश करती है और अन्नू से बोलती है कि

डाली•मैडम मुझे माफ़ करदे मुझसे गलती हो गयी अब आगे से ऐसी गलती नही करूँगी।

अन्नू• अभी शान्त हो जाओ नही अभी यंही पर सारी गर्मी उतार लुंगी तुम्हारी।तुम्हारे जैसे लड़की के कारण आज सरीफ लड़के भी बदनाम हो रहे है ।आज उस लड़के की ये हालत है कि उसके साथ कुछ भी हो सकता है वह पागल भी हो सकता है और शायद मर भी सकता है।

अभी तक शान्त रामु बोलता है कि

रामु•मैडम हमारी कोई ऐसी मनसा नही थी मैं तो सिर्फ यही चाहता था कि वह इस गांव से चला जाये ताकि मेरा रास्ता साफ हो जाये

सुमित्रा•उसकी ऐसी हालत करके तेरा कोंन सा मतलब सिद्ध हो रहा था अगर उस लड़के को कुछ भी हुआ तो ठीक नही होगा तेरे लिए और तुम दोनों ने मिलकर उस प्रेम को झूठा फसाया है।और तू बता कलमुँही तुझे ऐसा झूठ बोलते सरम नही आई

अन्नू•अभी तो आप कुछ भी नही जानती है अगर आप अपने बच्चों की करतूत सुनेंगी तो आप को बहुत दुख होगा।
 
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