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प्रेम की परीक्षा

सुमित्रा •ऐसा क्या कर दिया है जो आप ऐसा बोल रही है।

अन्नू•आप कुछ भी नही जानती है अगर आप जानती तो आप शर्म से अपना चहेरा किसी को नही दिखा सकती थी।

डाली•नही मैडम आप कुछ भी नही बताए नही तो माँ बर्दाशत नही कर पायेगी।

सुमित्रा•तू तो अब कुछ बोल मत नही तो मुझसे बुरा ओर कोई नही होगा।

अन्नू•आप जानती है कि रामु और डाली के जिस्मानी सम्बन्ध है और कल रात को जब ये घर के पीछे एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे तो प्रेम ने इन्हें ऐसा करते देख लिया था तो इनदोनो ने मिलकर उसे ही आरोपी शिद्ध कर दिया।

सुमित्रा तो यह सुनते ही जैसे उसके ऊपर पहाड़ ही टूट पड़ा और वह रोने लगी साथ मे डाली के गाल पर झापड़ मारने लगी जिसके कारण उसके दोनों हाथों की उंगलियों के निशान पड़ गए और बोली

सुमित्रा•डाली बोल दे कि यह सब जो बोल रहे है झूठ हैं मेरे संस्कार इतनी खराब तो नही थे

रामु•हा माँ तू सच बोल रही है यह लोग क्या कह रहे है मुझे कुछ बनी नही समझ मे आ रहा है क्या कोई भी अपनी ही बाहें के साथ ऐसी गिरी हुई हरकत कर सकता है यह सब इन लोगो की चाल है कि हम प्रेम पर लगाये हुए सभी आरोप वापस ले

यह सुनकर तो जैसे अन्नू घायल शेरनी की भांति गुस्से में उसे घूरने लगी और दहाड़ते हुए बोली।

अन्नू•तू और कितना झूठ बोलेगा अगर तू अपनी सलामती चाहता है तो तो अब सच बोल दे नही तो अब तेरा सच ओर झूठ का फैसला मसीन करेगी इस बारे में चाहे तो तू कल्लू से पूछ सक्तक है पर यह भी सोच ले अगर मैने ऐसा किया तो फिर तेरी एक भी हड्डी सही सलामत नही बचेगी।

यह सुनकर कल्लू के होश उड़ जाते है और वह तुरन्त रामु के पास जाकर बोलता है कि

कल्लू•देख रामु मैं पहले चोर था यह कहने में मुझे कोई शर्म नही ।मैं ही नही शहर के सारे गुंडे जिनके नाम सुनकर ही थर थर कापने लगते है यही है वो झूठ बोल तुझे कोई फायदा नही है उल्टा तेरी हालत और भी खराब हो जायेगी

अन्नू•कल्लू छोड़ जाने दे कहते है ना कि लातो के भूत बातो से नही मानते ।

वह हवलदार को आदेश देती है कि इसे पकड़ कर गाड़ी में दाल दो।

दो हवलदार आगे आकर उसे पकड़ने लगते है तोउसकी हालत खराब हो जाती है और वह चिल्ला उठा

रामु•यह सब सच है और वह रोने लगा

यह सुनते ही सुमित्रा बेहोश हो गयी।तब अन्नू ने हवलदार को आदेश दिया कि छोड़ दो

इतनी देर से शांत दीपा अचानक ही उठ कर आगे आकर रामु को मारने लगती है और बोलती है कि

दीपा•आज तुम्हारे कारण मैं अपने प्यार से दूर हो गयी हु अगर प्रेम को कुछ भी हुआ तो मैं तुम्हे जिंदा नही छोडूंगी।

यह सुनते ही वहां सबके पैरो ठाले जकमीं खिसक जाती है कि दीपा प्रेम से प्यार करती है यह बात तो सिर्फ दिया ही जानती थी और कोई नही ।इस लिये यह सबके लिए एक नई बात थीऔर यह कहते कहते दीपा रोने लगती है और

तब दिया उठ कर आगे आती है और उसे शांत कराति है
 
भाई लोग छोटे उपडेट के लिए माफ कर दे क्या करूँ कोशिश करता हु की बड़ा दु पर मोबाइल से टाइप करता हु नही हो पाता है और थोड़ी रोजी रोटी का भी सवाल है तो कुछ कम भी करना पड़ता है परंतु कोशिश यही रहता है हमेशा की उपडेट डेली दे सकू

और आप सभी लोगो का तहे दिल से सुक्रिया
 
दिया•शांत हो जा मत रो कुछ भी नही होगा प्रेम को ।

अन्नू•अब वह मेरी जिमेदारी है उसकी चिंता तुम मत करो ।

अभी यह सब बाते चल रही थी कि सुमित्रा को होश आया जाता है क्योंकि डाली उसके चेहरे पर पानी मार रही थी ।जब होश में आई तो वह डाली को देख कर उसे अपने पास से जाने को बोलने लगी और बोली

सुमित्रा•तू मेरे सामने से अभी जा मैं तुझसे बाद में बात करती हूं पहले तो मुझे जाकर उस प्रेम से तुम दोनों की गलती की माफी मांगनी है क्योंकि तुम दोनों के कारण आज वह जिंदगी और मौत के बीच मे है और जो उसकी बेइज्जती हुई है वह छोड़ कर। वह अनाथ था बेचारा अब जाकर उसे परिवार का प्यार मिला था पर तुम दोनों के कारण अभी वह उससे भी वंचित हो गया है

अन्नू• मा जी आप उसकी चिंता ना करे अब वह मेरी जिमेदारी है

पर दीपा ने जब यह सुना कि प्रेम अन्नू की जिम्मेदारी है तो वह कुछ समझ नही पाई और अन्नू से पूछी

दीपा•मैं कुछ समझी नही मैडम आप कहना क्या चाहती है।

अन्नू •अभी मैं नही समझा सकती अभी मेरी सहेली आयगी तो वह सब समझा देगी।

तभी दिया रामु के हाथों पर कुछ देखती है तो वह कुछ सोच में पड़ जाती है अचानक उसे याद आता है कि जो कटे का निशान रामु के हाथ पर है वही निशान जो उस रात कुछ लड़को ने जो हमला किया था अन्नू पर वैसा ही था

तब वह रामु के पास जाकर उससे बोलती है कि

दिया •ये निशान जो तुम्हारे हाथ पर है वह कबसे है ।

यह सुनकर रामु की होश उड़ जाते है वो समझ भी नही पाता कि यह अचानक इस निशान के बारे में क्यों पूछ रही है

इस सवाल का जवाब रामु की माँ सुमित्रा देती है

सुमित्रा•बेटी यह निशान तो बचपन मे चोट लगने के कारण पड़े थे पर यह तुम क्यों पूछ रही हो

दिया •नही चाची कुछ भी नही बस कुछ याद आया तो पूछ ली।

सुमित्रा•नही बेटी कुछ बात तो है बताओ

दिया मन ने सोचती है मेरे पास कोई सबूत तो है नही सिर्फ निशान के कारण ही इस पर उस हमले का इल्जाम नही लगा सकती

सुमित्रा•रामु तूने दिया के साथ तो कोई हरकत तो नही की है ना क्योंकि अब तुझपर भरोसा नही है मुझे

रामु •नही माँ मैंने कुछ भी नही किया है।

दीपा फिर अन्नू से पूछती है कि

दीपा•मैडम प्रेम के बारे में आप कुछ कहने वाली थी बोलिये

अन्नू फिर एक फोन मिलाती है कुछ देर बात करती है और फिर आ कर सबसे कहती है कि अभी कुछ देर में मेरी वो सहेली आ रही है जिसके भाई का चहेरा प्रेम से मिलता है

तभी घर मे से एक औरत दौड़ती हुई आती है और कहतीहै कि

औरत1•सुमित्रा बहन मैंने डाली के कमरे की दरवाजा खुलवा रही पर वो काफी देर से पर वह नही खोल रही है मुझे डर लग रही है बहन

अन्नू•आपको ऐसा क्यों लग रहा है कि डाली अंदर कुछ कर लेगी।

सुमित्रा दौड़ती हुई घर के अन्दर जाती है औऱ दरवाजा खुलवाने की कोशिश करती है पर अंदर से कोई भी जवाब नही आ रहा था

फिर वह अन्नू के पास गई पर सारी बात बताई ।यह सुन कर अन्नू सहित सभी परेशान हो जाते है अन्नू दो सिपाही को दरवाजा तोड़ने को कहती है।

सिपाहीयो ने थोड़ी मेहनत करने के बाद दरवाजा तोड़ देते है और अंदर की नजारा देख कर सबके पैरो तले जमीन खिसक जाती है और सुमित्रा तो अंदर का नजारा देख कर ही बेहोश हो गयी

अंदर डाली अपने मुह में अपना दुपटा से कस कर बांध लिया था कि उसके मुह से आवाज ना निकलर अपने हाथ की नसे काट ली ओर खून बहुत ज्यादा निकल रही थी
 
यह सब देखकर तो मानो सबको लकवा मकर गया किसी को कुछ भी समझ मे नही आया कि यह क्या हो गया है।सुमित्रा तो यह देख करहि बेहोश हो गयी पर अन्नू ने तुरन्त ही हॉस्पिटल ले कर गयी वही जहाँ पर प्रेम का इलाज हो रहा था । वहाँ सभी डाली को इस हालत में देख कर सब ने यही सोचा कि डाली ने प्रेम की उस हरक्तके कारण ही यह सब किया है। तुरन्त डाली के पापा प्यारेलाल जो कि एक निहायत कमीना इन्शान था।

प्यारेलाल•मेरी बेटी के साथ यह सब क्या हो गया प्रधान जी अब तो मैं इस लड़के को नही छोडूंगा मेरी बेटी की हालत की ज़िमेदार यही लड़का है

प्रधान•अब तो इसका फैसला पंचायत में होगी

अन्नू•मेरी सभी से यह बिनती है कि पूरा बात जाने बिना कोई भी किसी तरह के हरकत मत करना वरना अंजाम बबूत बुरा होगा।

तब तक डॉक्टर भी डाली को चेक करके आ गए और बोले

डॉक्टर•देखिए इंस्पेक्टर जहाँ तक मुझ समझ मे आया है यह केश आत्महत्या का है और लड़की की भी हालत नाजुक है उसका खून बहुत ज्यादा गिर गया है हम अपनी तरफ से कोशिश कररहे परन्तु मुझे उम्मीद बहुत कम है बाकी भगवान के ऊपर है

अन्नू •डॉक्टर आपको किसी भी तरह इस लड़की का बचना बहुत ही जकरूरी हैकप कुछ भी करे

तब अन्नू प्रश्न के पास गुई ओर उनसे बोली

अन्नू•अब आप गांव में जा कर इस लड़की के भाई को बोलये की वह आ अपना जुर्म कबूल करले वरना उसकी हालतमे खराब कर दूंगी

प्रधान•इंस्पेक्टर आप यह क्या कह रही हो मुझे Iकुछ भी समझ मे नजी आ रहा है।

अन्नू•मैं आपको एक चांस दे रही हु की आप अपने हिसाब से उसे समझ कर उसे अपने आपको कानून के हवाले करने को बोल दे।

प्रधान•मैं कुछ समझा नही आप को जो भी बोलना खुल कर बोले।

अन्नू•हा तो सुनिए अपने जिस गलती की सजा प्रेम को दी है वह गलती तो उसने की ही नही है और इसमें जिसकी गलती थी उसमें से एक तो अभी हॉस्पिटल ले कर आई हूं और एक अभी भी गांव में है।

तभी डॉक्टर आता है और उसके हाथ मे एक कागज था और वह कागज वो अन्नू के हाथ मे पकड़ाता है और बोलता है कि

डॉक्टर•आपने जिस लड़की को अभी लेकर आई है यह कागज उसके पास से मिला है इस लड़की ने इसमें अपनी हत्या का इल्जाम किसी रामु नाम के लड़के पर की है
 
Bhai hamre dadiji ka death ho gya h 4din pahle isliye update dene me thodi der ho sakti h iske liye maf krde
 
यह सब सुन के प्रधान जी बोलते हैं कि

प्रधान• दरबार साहिब आप जो कुछ भी बोलना चाहती है खुल कर बोलिए और डॉक्टर साहब यह क्या कह रहे हैं रामू तो इस लड़की का भाई है वह इसकी हत्या कैसे कर सकता है।

डॉक्टर• नहीं प्रधान जी आप जो समझ रहे हैं ऐसा कुछ भी नहीं है इस लड़की की किसी ने हत्या नहीं की है इसने तो आत्महत्या की है और शायद ही अब उसकी जान बचाया जा सके क्योंकि इसने अपनी जान बचाने के लिए जरा सी भी कोशिश नहीं किए इसका खून बहुत ज्यादा निकल चुका है तो उसे बचाना बहुत ही मुश्किल है और हां यह लड़की 3 महीने की गर्भवती है यह मां बनने वाली थी।

प्रधान• आप क्या बोल रहा है डॉक्टर साहब आपको समझ रहे हैं यह लड़की की अभी शादी भी नहीं हुई है तो यह मां कैसे बन सकती है।

डॉक्टर• मैं झूठ क्यों बोलूंगा मैं वही बता रहा हूं जो मैंने चेक किया और जो रिपोर्ट निकला है वही बता रहा हूं और हां आपको एक बात और बतानी थी आप जिस लड़के को लेकर आए हैं उसकी याददाश्त जा चुकी है उससे अपनी पिछली जिंदगी के बारे में कुछ भी याद नहीं है उसे सिर्फ अपनी दीदी के मारने के बारे में ही याद है इसलिए मेरी आप लोगों को सलाह है कि किसी भी तरह उस लड़की को इसके सामने नहीं आने दिया जाए अन्यथा कुछ भी हो सकता है।

इंस्पेक्टर अन्नू• डॉक्टर साहब आप उसकी चिंता ना कर क्योंकि अब यह लड़का गांव नहीं जाने वाला है यह हमारे साथ शहर में ही रहेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी मैं लेती हूं और हां प्रधान जी आप भी एक बार सुन लीजिए अब आपकी कोई भी पहुंच काम नहीं आएगी क्योंकि अब मैं रामू को छोड़ने वाली नहीं हूं उसने ना सिर्फ एक लड़के को झूठे इल्जाम में फसाया और साथ ही साथ अपनी बहन की भी जिंदगी खराब की है अब मैं उसे नहीं छोड़ने वाली हूं।

अनु अपने दो हवलदार ओं के साथ गांव की तरफ चल देती है और गांव जाकर रामू की मां से मुलाकात करती है और उन्हें सब कुछ सच सच बताती है की कैसे रामूने डाली क्यों फोर्स करके उसके साथ जबरदस्ती की और साथ ही साथ अपने दोस्तों के साथ भी जबरदस्ती सुलाता था।

रामू की मां यह सब सुनकर अपने अपने होश खो बैठती है उसे इस बात का विश्वास ही नहीं होता है कि उसका बेटा खुद की बहन के साथ ऐसा कर सकता है।
 
दोस्तों आप लोगों से मैं दिल से माफी मांगता हूं कि मैं इतने दिनों तक अपडेट नहीं दे सका परंतु उसकी कमी अब मैं पूरा करूंगा अब आप लोगों को कोई भी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा
 
यह सब सुनकर उसकी मां की हालत बहुत ही खराब हो जाती है उसे विश्वास ही नहीं होता है कि रामू ऐसा कर सकता है।

इधर से और रामू को पता चलता है कि पुलिस उसे पकड़ने के लिए आई हुई है तो वह अपने दोस्त के पास जाकर छुप जाता है उसे यह पता नहीं था कि अन्नू बला है जोकि मुजरिमों को पाताल से भी ढूंढ कर निकाल लेती है दुआ किस खेत की मूली है।

अभी यह सब ही रहा था कि एक सफेद गाड़ी आकर राम के घर के सामने आकर रूकती है और उसमें से एक लड़की निकलकर बाहर आती है और इधर उधर देखने लगती है मानो वो किसी को खोज रही हो तब तक उसकी नजर अनु पर पड़ती है तो वह उसके पास आने लगती है ।

यह लड़की और कोई नहीं उस लड़के की बहन है जिसका चेहरा प्रेम से मिलता है ।

इधर दिया की हालत बहुत ज्यादा खराब था उसे यह समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैंने जो किया वो सही या गलत क्योंकि उसे अब पता चल गया था कि उसकी भाई की याददाश्त चली गई है और उसे सिर्फ यही याद है कि उसे उसकी बहन ने मारा था। डॉक्टर ने प्रेम के सामने जाने से मना किया है अगर उसके सामने गई तो उसकी जान को खतरा हो सकता है।

दीया अपनी मां से बोलती है कि

दीया• मां क्या तुमको ऐसा लग रहा है कि मैंने जानबूझकर प्रेम को चोट पहुंचाई है मैं तो उसे इसलिए मारी की उसे यह शर्मिंदगी ना झेलना पड़े क्योंकि मेरी सहेली की जो बड़ी बहन इंस्पेक्टर है और उसने हमें सलाह दी कि किसी भी तरह से उसे हॉस्पिटल पहुंचा दिया जाए ताकि यह केस पुलिस तक पहुंच सके और वह उसे कार्रवाई कर सके। अनु दीदी के आ जाने से मैं इस बात का विश्वास हो गया है कि प्रेम के साथ नाइंसाफी नहीं होगी।

मां- दीया तुम अपने आप को सजा मत दो तुमने कोई गलती नहीं की तुम तो उसका भला ही चाहती थी अब उसे सदमा लग गया तो कोई क्या कर सकता है तुम चिंता मत करो भगवान ने चाहा तो सब अच्छा ही होगा । मैं तो इसलिए परेशान हूं कि गांव के कुछ लोग कह रहे थे की प्रेम अब गांव में नहीं रहेगा उसे तुम्हारी सहेली की दीदी पुलिस इंस्पेक्टर है हां उसे अपने साथ रखेंगे।

इधर वह लड़की आकर अनु के गले मिलती है और पूछती है कि तुम्हें तो हॉस्पिटल में रहना चाहिए था तो तुम यहां पर क्या कर रही हो ।

अनु- यार तुम यह बात तो जानती हो कि मैं सभी गुनाहों के लिए माफ कर सकती हो पर अगर कोई लड़का किसी लड़की के जीवन के साथ खिलवाड़ करे तो मैं उसे कतई माफ नहीं करती।

उस लड़की का नाम ज्योति है जो कि शहर में मशहूर फैशन डिजाइनर और और इसकी उम्र 28 साल है या बहुत कम उम्र में उस मुकाम पर पहुंच चुकी है जहां पर पहुंचने के लिए लोगों को बहुत समय लगता है।

यह देखने में किसी भी तरह से बॉलीवुड की हीरोइनों से कम नहीं लगती है उसका फिगर 36 26 36 है और रंग तो ऐसा माना कि दूध में हल्दी मिला दी गई हो सब मिलाकर इसका रूप ऐसा है मानो आसमान से कोई परी उतर आई।

ज्योति अनु से बोलती है कि

ज्योति- तुम तो बोल रही थी कि वह बेगुनाह है फिर यह क्यों बोल रही हो कि उसने एक लड़की का जीवन तबाह कर दिया अगर उसने ऐसा किया है तो फिर हम उसे अपने घर कैसे ले जा सकते हैं।

अनु- तेरी यही आजत तो मुझे बहुत बुरी लगती है तू तो पहले पूरी बात सुनेगी नहीं बीच में ही बोल देगी पहले पूरी बात सुनाकर फिर अपनी राय बनाया कर आई मेरी बात समझ में तुझे।

फिर अनु ने ज्योति को पूरी कहानी सुना दी कैसे क्या हुआ और प्रेम के साथ क्या हुआ और फिर उसे हॉस्पिटल ले जाया गया वहां पर डॉक्टर ने क्या कहा और उस लड़की ने क्या बयान दिया अब शायद ही उस लड़की को बचाया जा सके वह लड़की इतनी ज्यादा शर्मिंदा हो गई थी वह अपनी मां से नजर भी नहीं मिला सकती थी इस कारण उसने आत्महत्या करने की कोशिश की और इसमें कामयाब भी हो गई है क्योंकि डॉक्टर ने कहा है कि उसे बचाना नामुमकिन है।

तब तक उनके दो हवलदार जो कि रामू को खोजने के लिए गए हुए थे राम को पकड़ कर ले कर आ गया जब रामू की मां ने मुझे देखा था सबके सामने ही उसे मरने लगी और उससे कहीं मेरी परवरिश में क्या कमी रह गई थी कि जो तू ऐसा काम करने लगा क्या मैंने तुझे यही शिक्षा दी थी तुझे शर्म नहीं आई अपनी बहन के साथ ऐसी हरकत करते हुए ।

रामू की मां अनु से बोलती है कि, बेटी आज से मेरा कोई बेटा नहीं है क्या मेरे लिए मर चुका है मैं उसका चेहरा भी देखना पसंद नहीं करूंगी तुम जो चाहे इस को सजा दे सकती हो इसी और मेरी नजरों के सामने से दूर कर दो मैं इसका चेहरा भी नहीं देखना चाहती इसने मेरी फूल जैसी बेटी को कहीं का भी नहीं छोड़ा और साथ ही साथ मुझे गांव में भी कहीं नजर मिलाने लायक नहीं छोड़ा मैं यह किसी को क्या मुंह दिखाऊंगी अपना।
 
इतना सब बोलते हुए रामू की मां बेहोश हो गई और वहीं पर गिर पड़ी। नीचे गिरने से पहले ही अन्नू ने उन्हें पकड़ लिया था और जमीन पर गिरने नहीं दिया जिसके कारण उन्हें कोई चोट नहीं आई। अनु ने अपनी हवलदार ओं को आदेश दिया कि इसे पकड़ कर ले जाओ और हवालात में डाल दो । अब इससे मैं शाम को पूछताछ करूंगी।

यह सुनकर हवलदार रावण को पकड़कर लेकर चले गए जब तक वहां पर दीपा और दिया दोनों ही आ गई थी और अनु से प्रेम की हाल चाल पूछने लगी तो अनु ने उन्हें बताया की प्रेम की हालत बहुत ही खराब है हां उसकी याददाश्त चली गई है उसे सिर्फ इतना ही याद है कि उसकी बहन ने उसे मारा है इस बात का मुझसे बहुत ही गहरा सदमा पहुंचा है डॉक्टर ने बोला है कि जिस लड़की ने इसे मारा है वह इसके सामने ना आए अन्यथा कुछ भी हो सकता है।

यह सुन कर दिया और भी ज्यादा रोने लगी और अपने आप को भला बुरा कहने लगी कि मैंने ऐसा क्यों किया।

दीया- अनु दीदी क्या मैं एक बार प्रेम को दूर से देख सकती हूं मैं उसके पास नहीं जाऊंगी।

अनु- दीया अभी मैं कुछ भी नहीं कर सकती हूं उसके लिए मुझे डॉक्टर से परमिशन लेनी पड़ेगी तभी मैं कुछ जवाब दे पाऊंगी और हां तुम्हें एक बात बतानी थी।

डीजे- क्या बात है दीदी बोलो

अन्नू- अब मैं जो कुछ भी कहने जा रही हूं अब से तुम बहुत ही ध्यान से सुनना प्रेम और कोई नहीं ज्योतिका बिछड़ा हुआ भाई है जो कि बचपन में ही खो गया था बाद में बहुत खोजने पर भी नहीं मिला इसकी शक्ल हुबहू उसके जुड़वा भाई रवि से मिलती है ऐसी शक्ल देख कर मैंने पहचाना तो इसकी बहन को भी बुला लिया यह है इसकी बहन ज्योति।

अनु ने ज्योति को पास बुलाया और दीया से परिचय कराया । ज्योति उम्र में दिया से बड़ी है इसलिए दीया ने उसे भी दीदी बुलाया।

दोस्तों माना कि यह बात सच है परंतु इस बात में अनु को भी कोई भी सच्चाई के बारे में मालूम नहीं है वह तू प्रेम को अपने पास रखने के लिए इस बात को फायदा उठा रही थी की प्रेम और रवि की सकल एक दूसरे से काफी ज्यादा मिलती-जुलती थी या यूं कहें कि हुबहू कार्बन कॉपी है
 
अनु इसी बात का फायदा उठा रही थी या बात आगे चलकर सभी को मालूम पड़ेगी परंतु अभी इस बात की सच्चाई को कोई भी नहीं जानता है।

तब ज्योति ने आगे आकर बोला कि

ज्योति- आप सभी लोगों का किस प्रकार से धन्यवाद करूं यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है आप लोगों ने ना सिर्फ मेरे भाई की जान बचाई है अपितु इसके साथ साथ और भी कई लोगों की जान बचाई है और हां आप लोग प्रेम की चिंता ना करें वह हमारे साथ मुंबई में रहेगा अब उसकी पूरी जिम्मेदारी हमारी है।

दीपा यह सुनकर तो मानो पागल हो गई उसे यह समझ में ही नहीं आ रहा था कि उसके साथ यह हो क्या रहा है अभी तो उसने प्यार का इजहार भी नहीं सही से किया था और यह सब क्या हो गया। दीपा चिंतित स्वर में अनु से बोलती है कि

दीपा- दीदी इसमें मेरी क्या गलती है मैं और प्रेम एक दूसरे से प्यार करते हैं हमें इसकी सजा क्यों दी जा रही है।

यह बात सुनकर ज्योति मुस्कुराते हुए बोली

ज्योति- अगर तुम उससे सच में प्यार करती हो तो तो तुम इस बात की चिंता मत करो वह कहीं नहीं जाएगा मैं तुमसे वादा करती हूं कि मैं तुम्हें प्रेम से मिलवाऊंगी यह मेरा वादा है तुमसे

जब तक दिया की मां भी वहां पर आ चुकी थी और सारी बातें सुनकर फिर लगा उसका बेटा उससे छीना जा रहा है वह यह बात बर्दाश्त नहीं कर पाई और वह रोने लगी तब सब ने मिलकर उसे समझाया कि अभी प्रेम का यहां पर रहना उसकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है अभी उसे इलाज की जरूरत है जो यहां पर संभव नहीं हो सकता है उसके लिए मुझे शहर जाना ही पड़ेगा।

ज्योति और अनु ने सबको समझाया और वहां से हॉस्पिटल की तरफ आ गई। हॉस्पिटल में अभी भी भीड़ लगी हुई थी और कुछ रोने की आवाज में भी आ रही थी। तब अनु को झटका लगा की शायद डोली अब नहीं रही और उसे इस बात पर और भी ज्यादा गुस्सा आ गया गुस्से में जैसे हो पागल हो उठी थी उसने तुरंत ही ज्योति को हॉस्पिटल में उतारा और खुद पुलिस स्टेशन पहुंच गई।

वहां पर जाकर देखा कि रामू को एक जेल में बंद किया गया है और वह शांति से सो रहा है उसे सोता हुआ है देख कर अनु को और भी ज्यादा गुस्सा आ गया वह तुरंत रामू के पास के और उससे बोली की

अन्नू- अब तो तू खुश है ना तेरी वजह से एक लड़की की जान चली गई अब तुझे तो भगवान भी नहीं बचा सकता है मुझसे मैं तेरी वह दशा करूंगी तुझे अपने पैदा होने पर भी अफसोस होगा।

यह सुनकर रामू की हालत और भी ज्यादा खराब हो गई उसने देखा कि अन्नू एक मोटा सा डंडा लेकर आई और उसे बांधकर लटका दिया गया । और उसे बुरी तरह से थर्ड डिग्री टॉर्चर को सहना पड़ा अनु से तब तक मरती रही जब तक कि वह बेहोश ना हो गया और बेहोश होने के बाद भी उसने उसे नहीं छोड़ा जहां जहां पर उसे घाव आए थे वहां वहां पर उसने नमक और लाल मिर्च छिड़काव कर दिया बेहोशी की हालत में भी रामू दर्द से बुरी तरह तड़प उठा ।

अनु उसके बेहोश होने के बाद वापस हॉस्पिटल को आ गई अन्नू का यही एक आदत थी वह हर अपराधी को क्षमा कर सकती थी परंतु किसी भी रेपिस्ट को वह कभी भी क्षमा नहीं किया चाहे वो कितनी भी बड़े बाप की औलाद हो। उसकी नजर में यह सबसे बड़ा अपराध है की कोई भी किसी भी लड़की के मर्जी के खिलाफ जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए यह उसे कहीं से भी मंजूर नहीं था।

वह हॉस्पिटल में आकर ज्योति से मिली ज्योति वहां पर आकर डॉक्टर से बातचीत करके प्रेम को मुंबई ले जाने के लिए तैयार कर लिया था डॉक्टर भी खुशी से तैयार हो गए क्योंकि वहां पर प्रेम का बहुत ही अच्छी तरह से इलाज हो सकता था।

परंतु जब यह बात प्रधान और बाकी गांव वालों को पता चला तो खासतौर से हरीश को पता चली तो यह बात उसे नागवार गुजरी उसने तुरंत ही इस बात का विरोध किया। तो इस बात पर अनु ने यह जवाब दिया कि

अन्नू- अंकल मैं आपकी भावनाओं को समझ सकती हूं पर मैं आपसे यह पूछती हूं कि जब प्रेम पर झूठा इल्जाम लगाया गया था तो आपने भी तो उस बात का विश्वास कर लिया था आगे इस बात की क्या गारंटी है कि आगे किसी भी बात को लेकर आप प्रेम से नाराज नहीं होंगे और नाराज होना तो एक बात है आप लोगों ने तो उसे सजा भी दी थी जिसका नतीजा यह हुआ कि आज प्रेम की हालत अच्छी नहीं है और वह अपनी याददाश्त खो खो बैठा है और हां आप लोगों को एक बात और बता दु की मेरे साथ में यह जो लड़की खड़ी है इसका नाम ज्योति है और यह मुंबई की बहुत ही बड़े बिजनेसमैन की बेटी है और यह प्रेम जो कि बचपन में ही अपने मां बाप से बिछड़ गया था वह इसकी बड़ी बहन है और यह इसे अपने साथ मुंबई लेकर जा रही है वहां पर वह इसका इलाज कर आएगी और अपने घर वालों के साथ रखेगी।

यह बात सुनकर सब आश्चर्यचकित रह गे की अचानक ही प्रेम का परिवार उसे मिल गया और भी कोई ऐरा गैरा नहीं एक बिजनेसमैन का बेटा है।

इधर ज्योति ने डॉक्टर के साथ मिलकर प्रेम को डिस्चार्ज करने की सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर ली।

इधर अचानक फिर से रोने की आवाज आने लगी तो अनु का ध्यान उस तरफ गया तो उसने डॉक्टर से पूछा कि

अनू- डॉक्टर साहब यह क्या हुआ है कौन रो रहा है

तो डॉक्टर ने जवाब दिया कि

डॉक्टर - इंस्पेक्टर आपने जिस लड़की को भर्ती कराया था वह आप इस दुनिया में नहीं रही उसकी मौत हो चुकी है ।

यह सुनकर अनु को बहुत ही ज्यादा दुख हुआ उसे इस बात का पछतावा रहा कि वह डाली को बचाने के लिए कुछ भी ना कर शकी
 
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