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प्रेम की परीक्षा

इस समय अनु इस बात के लिए बहुत सी पछता रही थी। वह चाह कर भी डोली के लिए कुछ भी ना कर सकी इसके लिए उसके मन में बहुत ही दुख था।

उसने अपने मन में क्या निश्चय कर लिया था कि अब चाहे जो भी हो जाए अब मैं डाली के साथ गलत करने वालों को चाहे वह उसका भाई हो या कोई और अब मैं उसे नहीं छोडूंगी।

परंतु उसे इस बात की खुशी थी कि उसके थोड़े से प्रयास के कारण एक बेगुनाह लड़के को रेप जैसे संगीन इल्जाम से मुक्ति मिल गई थी।

न्यू प्रधान जी से बोलती है कि

अन्नू- प्रधान जी आप चाहे जितना भी जोर लगा लो अब मैं उस लड़के को नहीं छोड़ने वाली हूं चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े और उसके साथ साथ रामू के जिन दोस्तों का जिक्र डाली ने अपने पत्र में किया है उन्हें भी नहीं छोडूंगी।

प्रधान- दरोगा साहिबा मैं भी एक बेटी का पिता हूं मैं या दुख समझ सकता हूं कि एक लड़की के रेप हो जाए और रेप करने वाला और कोई नहीं खुद उसके घर वाले हो तो उस लड़की पर क्या बीती होगी और वह किन हालातों में जीने को मजबूर हो गई इस दुख को समझ सकता हूं परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि डोली पूर्ण रूप से निर्दोष है। माना कि रामू में उसके साथ जोर जबरदस्ती किया और भी लोगों के साथ सोने के लिए मजबूर किया परंतु प्रेम के साथ जो कुछ भी हुआ है उसमें तो वह बराबर की भागीदार रही है प्रेम ने उसके साथ कुछ भी नहीं किया इसके बावजूद उसने प्रेम के ऊपर झूठा इल्जाम लगाया।

अन्नू- मैं मानती हूं कि इसमें डोली की भी गलती है परंतु इसका मतलब यह नहीं है कि आप और आपके साथ प्रेम को सजा देने वाले लोग गुनहगार नहीं हैं माना कि यह पंचायत की अपने रूल हैं परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि आप लोगों को किसी को भी शारीरिक रूप से प्रताड़ना देने की छूट मिल गई है इसके लिए कानून है आपको कानून के पास जाना चाहिए था फिर उसमें जिसकी भी गलती निकलती उसे सजा दिया जाता।

यह सुनकर तो प्रधान जी भी सकते में आ गए उन्हें लगा कि कहीं वह भी कानून के पचड़े में ना पड़ जाए इस बात पर घबराते हुए बोले कि

प्रधान- उस समय हमें जो भी सही लगा हमने वही किया प्रेम को सजा देने की मर्जी सिर्फ मेरी ही नहीं पूरे गांव की थी

अनु- पर मैंने तो सुना है कि यह सजा अपने रामू के कहने पर दी है।

प्रधान- नहीं दरोगा साहिबा यह सत्य नहीं है यह झूठ है चाहे तो आप इसके बारे में किसी से भी पूछताछ कर सकती हैं।

अन्नू- इसके बारे में जो कुछ भी करना होगा वह तो मैं करूंगी इसके लिए मुझे कोई भी रोक नहीं सकता है यह बात आप अच्छी तरह से समझ लीजिए और हां आपको एक बात और बता दूं की प्रेम आज से और अभी से आप लोगों के साथ नहीं जा रहा है वह मेरी फ्रेंड ज्योति के साथ मुंबई जा रहा है।

उधर दिया के घर जहां अभी तक प्रेम रहता था वहां पर घर में काफी औरतों की भीड़ जुटी हुई थी सभी प्रेम को बुरा भला बोल रही थी यह कोई यह कह रही थी कि उसे इतना अच्छा परिवार मिला परंतु वह वह गुंडा और अनाथ था तो उसे परिवार कहां से रास आता तभी एक लड़का हॉस्पिटल से आता है जो गांव का ही था उसने वहां का सारा बात दीया और उसकी मां को बता दी और उसे यह भी बता दिया कि प्रेम अब कभी भी गांव नहीं आएगा उसे उसका परिवार मिल गया है और उसकी बड़ी दीदी जो कि आई हुई थी गांव में ज्योति वह उसे लेकर मुंबई जा रही है ।

यह सुनकर वहां पर कुछ लोग तो खुश हुए और कुछ लोग दुखी परंतु जब यह बात दीपा ने सुनी तो मानो उसके ऊपर पहाड़ ही टूट पड़ा उसे यह विश्वास है कि हो सके तो प्रेम की पापा और उसके पापा जब सच्चाई जाने तो प्रेम को जाने से रोके परंतु जब उसने पूरी बात सुनी और जब उसे यह पता चला कि मुझे वहां पर कोई नहीं रुका और वह शाम तक निकल जाने वाला है तो उसे बहुत ही दुख हुआ उसे लगा कि प्रेम से कभी नहीं मिल सकेगी जब उसने यह बात दिया से कहीं हमें एक बार चलकर प्रेम से जरूर मिलना चाहिए इस पर दिया बोलती है

दीया- तुमने सुना नहीं कि मेरे जाने से प्रेम की जान को और भी ज्यादा खतरा पहुंच सकता है मैं यह नहीं चाहती हूं कि प्रेम को कुछ हो मैं इस बात से संतोष कर लूंगी की मेरा भाई चाहे जहां भी है वह खुश है और अच्छा है भगवान ने एक बात और अच्छी की की उससे उसकी याददाश्त छीन ली नहीं तो वहां पर जाकर भी खुश नहीं रहता और उसे यहां की अच्छी और बुरी यादें दोनों सताती रहती जिसके कारण उसे और भी ज्यादा दुख होता और वहां पर रहना उसका मुश्किल हो जाता।
 
दीपा:- दीदी आपके यह बात तो सही है कि उसे आपको देखकर झटका लग सकता है परंतु यह क्यों नहीं सोच रही है कि अगर हम लोग से आज नहीं मिले तो शायद फिर कभी नहीं मिल पाएंगे।

सीमा:- दीया दीपा सच बोल रही है हमें चलकर एक बार प्रेम से मिलना चाहिए और उसकी दीदी बात करना चाहिए कि वह प्रेम को कुछ दिन के लिए यहां पर छोड़ दे।

दिया:- मां मेरे हिसाब से तो ठीक नहीं रहेगा किंतु अगर आप यह कहती हो कि मिल लेना चाहिए तो हम लोग उससे जरूर मिलेंगे परंतु इस बात का ध्यान रखना कि कोई भी यह बात ना करें कि उसे यहां पर छोड़ दिया जाए मेरे हिसाब से उसके घर वाले बहुत पैसे वाले हैं और वह इसका इलाज अच्छे से अच्छे से करा सकते हैं हमें तो खाने के लिए भी सोचना पड़ता है तो हम उसके लिए दवा कहां से करेंगे।

यह फैसला करके तीनों हॉस्पिटल के लिए निकल जाते हैं और वहां पर पहुंचते हैं तो तू देखते हैं कि जाने की सारी तैयारी हो चुकी थी सिर्फ को कागजी कार्रवाई बाकी थी इसलिए ही अभी तक वहां से कोई गया नहीं था ।

अन्नू उन्हें देखती है तो ज्योति को लेकर उनके पास आती है और उनका परिचय करवाती है आपस मे।

ज्योति सीमा को देखकर तुरंत ही उसका पर सोती है और कहती है कि

ज्योति:- आंटी आपने मेरे भाई की देखभाल की और उसे अपने बेटे जैसा रखा है जिसके लिए हम आपके सदा आभारी रहेंगे अगर जरूरत पड़े तो आप हमें जरूर याद कीजिएगा हम आपकी यथा संभव मदद करने की कोशिश जरूर करेंगे।

सीमा:- बेटी मुझको तुमसे कुछ बात करनी है अगर तुम चाहो तो हम अकेले में कुछ बातें कर सकते हैं।

ज्योति:- हां जी क्यों नहीं हूं जरूर बातें कर सकते है।

ज्योति अनु से बोलती है कि चलो हम लोग कहीं से नाश्ता करके आते हैं तो फिर वहां से अनु ज्योति और सीमा तीनों ही ज्योति की गाड़ी में बैठ कर एक रेस्टोरेंट की तरफ चल देते हैं। वहां पहुंचकर अनु तीनों के लिए काफी का ऑर्डर देती है और तीनों एक टेबल पर बैठ जातेहै।

ज्योति:- आंटी बोली आप क्या कहना चाहती हैं जो वहां पर आप नहीं बोलना चाहती थी।

सीमा:- देखो बेटा मैं झूठ नहीं बोलूंगी कि मैंने प्रेम को बचपन से पाला है हां मैंने उसकी 4 साल से देखभाल की है और उसे अपने बेटे के समान ही प्यार और ममता दी है। कल उसे झूठा इल्जाम लगाकर इतना सब कुछ उसके साथ किया गया और आज तो मेरी ही बेटी ने उसे मार दिया जिसके कारण उसका यह हाल हुआ है।

अन्नू:-आंटी जी दीया से मारने के लिए मैन ही कहा था कि उसे ऐसा मरना की वह बेहोश ही जाए परन्तु मुझे यह पता नही था कि ऐसा करने से उसके दिमाग पर इतना गहरा असर होगा कि उसकी यादाश्त चली जायेगी ।इसके लिए मैं आपसे माफी मांगती हु ।

सीमा:-नही बेटी इसके लिए तुम माफी क्यों मांगती यह तो अच्छा ही हुआ कि उसकी यादाश्त चली गयी जिसके कारण उसे तकलीफ थोड़ी कम होगी।किन्तु मैं कहना चाहती हु की क्या आप लोग प्रेम को कुछ दिन मेरे साथ नही छोड़ सकती है।

अन्नू:-आंटी वह पर प्रेम का इलाज अच्छे से हो सकेगा इसलिए उसे वह जाने दे ।आप को जब भी प्रेम से मिलने जा सकती है।

ज्योति:-आंटी मैं आपके दुख को समझ सकती हूं अगर आपको बुरा न लगे तो मेरे पास आपके लिए एक उपाय है ।

अन्नू:-मैं कुछ समझी नही तू कहना क्या चाहती है?

ज्योति:-आंटी अंकल क्या करते यंहा गांव में?
 
सीमा:- गांव में तो अपनी कोई खेतीवाड़ी है नहीं जो कोई काम करें वहीं एक कंपनी में काम करते हैं और उसी में अपना खर्च पानी कैसे भी करके चलाता है।

ज्योति: आंटी जी अगर आप बुरा ना माने तो मैं यह कहती हूं कि आप लोग भी मुंबई में आकर ही बस जाएं तो अच्छा होगा।

सीमा:- बेटी शहर में रहना कोई छोटी बात तो है नहीं और अपने पास बहुत ज्यादा पैसे भी नहीं है कैसे-कैसे करके तो घर का खर्च चलता है तुम ही बताओ इस हालत में हम लोग शहर में जाकर कैसे रह सकते हैं।

ज्योति:- मैं भी जानती हूं कि शहर में रहना मुश्किल है परंतु असंभव नहीं है जहां तक रही रहने की बात तो उस का इंतजाम कर दूंगी शहर में मैंने अपने नाम का एक flake ले रखा है उसे मैं आप लोग को दे दूंगी और जी बात कमाने खाने की तो उसके लिए मैं अंकल जी को एक दुकान खुला दूंगी आप यह मत समझना कि मैं आप पर कोई एहसान कर रही हूं मैं तो सिर्फ इतना ही साथी हूं कि जहां प्रेम रहे उसी के आसपास आउंगी रहे ताकि आप लोगों कम से कम यह संतोष रहे कि प्रेम जहां पर हुई है सकुशल है।

सीमा:- नहीं बेटी मैं ऐसा नहीं कर सकती इसके लिए मुझे अपने पति से पूछना होगा इतना बड़ा फैसला मैं अकेले नहीं कर सकती हूं या उनका पैतृक गांव है क्या पता कहीं ऐसे छोड़कर जाना चाहे या ना जाना चाहे।

ज्योति:- आंटी ही मुझे इस बात की कोई भी जल्दी नहीं है आप अपना सोचने का पूरा समय नहीं सकती हूं और अपने परिवार में बात करके इस बात का फैसला विकास सकती हैं अगर आपको अच्छा लगे तो अन्नू को बता दीजिएगा वह मुझे इस बात का जानकारी दे देगी और मैं वहां पर सारा इंतजाम करके आप लोग को बुला लूंगी।

अन्नू:- अब हमें यहां से चलना चाहिए हमें यहां पर आए हुए काफी देर हो चुकी है वहां पर सभी लोग हमारा इंतजार कर रहे होंगे और हमें ट्रेन को मेकर हमारे घर भी चलना है शाम को 8:00 बजे तुम्हारी फ्लाइट है।

ज्योति:- हां चलो इस बारे में तो हम बाद में बात कर सकते हैं अभी हमें यहां से चलना चाहिए।

सीमा:- बेटी तुमने मुझे बताया नहीं कि तुम प्रेम को लेकर जाओगी या उसे छोड़ कर।

ज्योति:- नई आंटी जी मेरी वहां पर हॉस्पिटल में बात हो चुकी है हमें कल प्रेम को हॉस्पिटल में दिखाना भी है। जिसके कारण हमें प्रेम कॉलेज आना होगा लेकिन आप मेरी बात पर विचार जरुर कीजिएगा अगर आपको अच्छा लगे तो सिर्फ मुझे कॉल कर दीजिएगा मैं तुरंत ही सारी व्यवस्था करके मैं आप लोगों को बुला लूंगी और हां हां दीपा से बोलिएगा कि वह चिंता न करें ।

फिर अनु बोलती है कि चलो यहां से जल्दी से हम लोगों को लेट हो रहा है फिर वहां से सभी लोग निकल लेते हैं और फिर हॉस्पिटल पहुंचते हैं तो वहां पर दिया जो कि छुपकर प्रेम को देख रही थी और देखने के साथ रो भी रही थी और दीपा उसे चुप करा रही थी।

अनु जाकर प्रधान और हरीश से मिलती है और उन्हें बताती है कि हम लोग प्रेम को लेकर जा रहे हैं और रही बात रामू की तो उसे हम लोग कल अदालत में पेश करेंगे वहां पर जो फैसला होगा वही मान्य होगा।

प्रेम के सर पर पट्टी बनी हुई थी और वह इस तरह से लोगों को देख रहा था कि जैसे किसी को पहचान ही न रहा हो
 
उसे इस हालत में देख कर के दीया और दीपा दोनों की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे परंतु संध्या के जाने से यह डर था कि शायद प्रेम को झटका ना लग जाए और उसकी तबीयत ज्यादा खराब ना हो जाए जिसके कारण दीया दूर से ही उसे देख रही थी और दीपा अपने पापा के कारण उसके पास नहीं जा पा रही थी। दोनों ही दूर से उसे देख रही थी और आंखों से बारिश हो रही थी।

दीपा:- दीदी देख रही हो प्रेम ऐसे देख रहा है जैसे कि वह किसी को पहचान ही ना रहा हो मुझे तो बहुत ही डर लग रहा है कि यदि उसकी याददाश्त वापस नहीं आई तो मैं क्या करूंगी मुझे तो उसके बिना जीना मुश्किल हो जाएगा ।

दिया:- अभी डॉक्टर के करने के अनुसार मैं उसके पास नहीं जा सकती हूं परंतु मां उसके पास गई है जरूर कुछ ना कुछ करेगी।

उधर अनु ज्योति और सीमा तीनों ही प्रेम के पास पहुंच कर उसके पास खड़ी हो जाती हैं। सीमा प्यार से उसके सर पर हाथ फिरती है तो प्रेम उसे ऐसे देखता है जैसे कि वह उसे पहचान ही ना रहा हो। उसे ऐसे देखते हुए देखकर उसकी आंखों में आंसू आ जाता है और वह अपनी आंखों से आंसू बहाने से रोक नहीं पाती है।

सीमा:- ज्योति बेटी इसका ख्याल रखना और आज के बाद तुम्हारे हवालेहै।

ज्योति:- आंटी जी आप इस बात की बिल्कुल भी चिंता ना करें यह आपका बेटा है तो मेरा भी भाई है और बचपन में ही खो गया था उसके बाद आज जाकर मिला है तो आप इस बात की चिंता बिल्कुल भी ना करें कि हम इसका ख्याल नहीं रखेंगे।

इसके बाद ज्योति कुछ देर के लिए शांत हुई और फिर बोली की आंटी जी आप मेरी बात पर विचार जरूर करिएगा आप लोगों को आप रहने के खाने के लिए कुछ भी तकलीफ नहीं होगा और आप लोग वहां पर रहेंगे तो हमें भी प्रेम देखभाल करने के लिए आसानी होगी।

और हां अगर इस बात पर आप लोगों का विचार बन जाए तो अनु को जरूर बता दीजिएगा यह हमें बता देगी और हम वहां पर व्यवस्था कर आप लोगों को बुला लेंगे अच्छा आंटी जी अब मैं चलती हूं मुझे अभी अनु के घर भी जाना है वह अभी इसके घर पर नहीं गई हूं और वहां पर अनु की मम्मी मुझे अपनी बेटी के समान मानती हैं ।अगर मैं वहां पर नहीं गई और उन्हें पता चला कि मैं यहां पर आई थी और फिर भी उसे नहीं मिली तो मैं इस बात का बहुत ही बुरा लगेगा ।अभी 4:00 बज रहे हैं शाम को 8:00 बजे ही फ्लाइट है तो आंटी के पास भी एक घंटा रुक कर फिर हम लोग एयरपोर्ट के लिए निकल लेंगे।

अनु देखती है कि दीया और दीपा दोनों ही दूर खड़ी होकर के प्रेम को देख रही है और पास आने की हिम्मत नहीं हो रही है दीया को आने के लिए तो डॉक्टर ने मना किया है और दीपा अपने पिताजी के कारण प्रेम से नहीं मिल पा रही है। ज्योति को दोनों को दिखाती है तो ज्योति बोलती है कि चलो उनसे भी मिल लेते हो और उन्हें भी कुछ संताना दे देंगे

और फिर मुझे दीपा से भी कुछ बात करनी है। यह वही लड़की है ना जोकी इस प्रेम से प्यार करती है।

ज्योति:- यह कैसा प्यार है जो कि एक बार भी देखने के लिए नहीं आई और आई भी है तो दूर से खड़ी होकर देख रही है।

अन्नू:- यह शहर की लड़की नहीं है देहात की लड़की है और अभी इसके अंदर शर्म और हया बाकी है यहां पर इसके पिताजी खड़े हैं तो यह कैसे मिलने के लिए आ सकती है वह छोड़ो उसको जाकर बोल दो कि प्रेम के ठीक हो जाने के बाद तुम इन दोनों का मिलन करवोगी
 
ज्योति:- शायद तुम भूल रही हो कि वहां पर कोई और भी है जो इंतजार कर रही है।

अन्नू:- जो तुम कहना क्या चाहती हो कि यहां से जाने के बाद हम प्रेम को दीपा के बारे में कुछ भी नहीं बताएंगे। माना कि जो तुम कह रही हो वह भी सच है परंतु इस बात को भूल नहीं सकते हैं कि दीपा का यह पहला प्यार है और पहले प्यार को बोलना बहुत ही मुश्किल होता है इस बात को तुम से अच्छा और कौन समझ सकता है।

ज्योति:- यार मैंने तुमको कितनी बार कहा है कि मुझे उसकी याद मत दिलाया करो। लेकिन तुम तो मेरी बात सुनती ही नहीं हो ।उसकी बात छोड़ो क्या हम प्रेम और दीपक के बारे में बात कर सकते हैं। अगर तुम्हारी इजाजत हो तो।

फिर दोनों वहां से चलकर वहां पहुंचती है जहां पर दीपा और दिया पहले से ही खड़ी थी दिया रो रही थी और दीपा उसे चुप करा रही थी । दीया बार-बार यही बोल रही थी कि प्रेम की इस हालत के जिम्मेदार मैं हूं मैं अपने आप को कभी माफ नहीं कर सकती हूं।

अन्नू:- दीया शांत हो जाओ क्या तुम्हें मेरी बात का विश्वास नहीं है। तुम मेरी इस बात का विश्वास कर सकती हो कि तुम्हारे भाई का वहां पर अच्छे से ख्याल रखा जाएगा वह कहीं और नहीं अपने घर ही जा रहा है इसलिए तुम इतना चिंता क्यों कर रही हो।

दिया:- दीदी मुझे जैसी अभागन आपको और कहां पर मिलेगी जो मैं अपने भाई के पास भी नहीं जा सकती हूं क्योंकि मेरे जाने से उसकी तबीयत खराब हो सकती है और मैं जाऊं भी तो किस मुंह से जाऊं उसकी हालत के जिम्मेदार तो मैं खुद ही हूं।

अन्नू:- तुमको ऐसा क्यों लगता है कि तुम उसके इस हालत की जिम्मेदार हो बल्कि तुमने तो उसकी रक्षा ही की है गांव वालों से अगर तुमने उसको मारा नहीं होता तो शायद वह भी होश भी ही होता और फिर उसे और भी बुरी तरह से जलील किया जाता। जिसके कारण उसके दिमाग पर और भी गहरा असर जाता और और शायद पागल भी हो सकता था ।

दिया:- दीदी माना कि आप सच कह रही हैं फिर भी मैं अपने दिल को कैसे समझाऊं कि उसके इस हालत की जिम्मेदार मैं खुद ही हूं।

दीपा जो इतनी देर से सब कुछ शांति से खड़ी होकर सॉन्ग रही थी वह ज्योति से बोलती है कि

दीपा:- दीदी अगर आपकी इजाजत हो तो क्या मैं प्रेम से मिल सकती हूं अगर आपको बुरा ना लगे तो आप भी मेरे साथ चलिए और कम से कम एक बार मुझे प्रेम को दिखा तो दीजिए फिर शायद कभी जीवन में मिलना हो या ना हो क्योंकि यह तो मैं भी नहीं जानती हूं कि उसका याददाश्त कब वापस आएगी और अगर उसकी याददाश्त वापस आने से पहले ही और उसके जीवन में कोई और लड़की आ गई तो फिर मेरा क्या होगा।

अनु और ज्योति दीपा की बातें सुनकर स्तब्ध रह जाती हैं वह सोचने पर मजबूर हो जाती है कि हम उसे वह बात बताएं या ना बताएं। लेकिन कुछ सोचकर वह उसे कुछ भी नहीं बताती हैं और उसे इस बात का विश्वास दिलाते हैं कि समय आने पर उन दोनों की मुलाकात जरूर करवाएंगे। वह अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे कि तुम दोनों का मिलन संभव हो सके।

दीपा:- दीदी अगर हम चाहे तो क्या कभी प्रेम से आकर कहां पर मिल सकते हैं।

ज्योति:- हां जरूर अगर तुम मुंबई आपसे कोई तो जरूर मिल सकती हो अगर नहीं हो पाई तो एक बार मुझे फोन करके बताना मैं इसे लेकर यहां पर आ जाऊंगी घुमाने के बहाने लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है कि जब तुम यहां पर खड़ी होकर अपने पापा के सामने उससे मुलाकात नहीं कर पा रही हो तो मुंबई आ कर कैसे मिलोगी और सबको क्या बताओगी।
 
दीपा : दीदी आप इस बात की चिंता ना करे वह मैं देख लुंगी |

अन्नू :पर कैसे तुम मुंबई कैसे जाओगी |

दीपा ;- दीदी वहां पर मेरे रिलेशन वाले रहते हैं इसलिए मुझे वहां पर आने जाने में कोई दिक्कत नहीं है और रही बात पापा की तो जब मैं वहां पर अपने रिश्तेदार कहां जाऊंगी तो उनका कुछ पूछने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है|

ज्योति ;- चलो ठीक है दीपा हम चलते हैं और यह लो मेरा नंबर तुमने जब भी बात करने का मन करें तो मुझे कॉल कर लेना मैं कैसे भी करके उनसे बात करा ही दूंगी |

,, इसके बाद वहां से सभी लोगों विदा लेकर के अन्नू और ज्योति प्रेम को लेकर अन्नू के घर पर चल दी |

अन्नू के घर पर उसके माँ और पिता ही थे | अन्नू अपने माँ बाप की दो बेटियाँ ही थी उसके और कोई भी भाई नहीं था | अनु की एक बहन थी जिसका नाम था शालिनी और वह दिया कि बहुत ही खास सहेली थी|

अनु और ज्योति प्रेम को लेकर के अनु के घर पर पहुंचे एंबुलेंस का आवाज सुनकर के अनु की मां घबरा उठी वह यह सोचने पर मजबूर हो गई थी कि कहीं मेरी बेटी को चोट और तो नहीं आ गई या कुछ एक्सीडेंट तो नहीं हो गया ना|

वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि मेरी बेटी yh पुलिस का काम करे प्रणति अन्नू बचपन से ही पुलिस बननी चाहती थी यह उसके बचपन का सपना था जिसे वह हर हालत में पूरी करना चाहती थी और वह पूरी की जिसका नतीजा यह था कि आज इसके जैसी बहादुर पुलिस वाली पूरे डिपार्टमेंट में नहीं थी उसने बहुत से खतरनाक देशों को सॉल्व किया था|
 
Shalini or uski maa Ghar Mein Baithe Hue TV dekh rahi thi to Awaaz sunkar Annu ki man Shalini se bolane Ki Beti jakar Dekho Bahar Kaisi Ghadi Aayi Hai aur usmein kaun hai hi aur apni didi ko bhi phone lagao.

Shalini jakrke baher dekhti h to use do gadi dikhai deti hai ek black color ki gadi thi jisme annu or jyoti thi or uske pichhe ambulance thi .Annu ko dahi salamat dekh kr vo raht ki sans leti h ki didi ko kuchh bhi nhi huq hai to uski sath me ye bat nhi ati hai ki didi phir ynha kise lekr ayi hai or jyoti didi ynha pr kya kr rahi hai.

Vah Jaati Hai Daud karke Jyoti ke Gale Lagti Hai aur FIR Unka pair chhutti hai aur puchti hai ki

Shalini:- didi Aap Yahan per Achanak Kaise a gai aap to agale mahine Aane wali thi Mere janmdin per FIR Achanak

Annu:- chal tu shant rah sari baten yhi per hi poochh Legi ya use ander bhi jane degi.pichhr gadi me iska bhai dipak hai use thodi chot lagi hai sayd tu usase bachapan me mili thi tu meri madad kr use ghar me le jane me t.

tbtk do compounder prem ko gadi se utar annu ke paas lekr ate hto use dekhe shalini ko jhatka lagta hai or turnt hi annu se bolti hai ki

Shalini:-didi ap jhuth ku bol rhi hai yh koi joti didi ka bahi nhi varn mai to ise bhut achhi trah se janti hu yah to meri saheli diya ka god liya hua bhai hai or isase bhi Badi Baat yah Hai Ki aaj main aur Diya donon Jinda Thodi Hain iski vajah sirf yahi hai Prem.

Annu. Yah Baat To acchi Tarah Se Janti thi ki. Diya Jab iski Saheli Hai to yah Prem Ko Janti Hogi uske chukne ka Karanyah nhi tha ki vah Prem Ko pahchanti Hai. Vah is Baat se chuki thi ki prem ne kuchh aisa kiya tha ki jiske karn shalini or diya dono hi aj sahi salamat hai.

Annu:- abhi Ham Ish bare Mein bad mein baat karenge abhi to tum meri madad kro ise ghar me le chalne me.

Yah sunkar Shalini bahut Gambhir Mudra Mein Aakar ke Prem Ko pakad kar ghar mein le Jaati Hai Jahan Jyoti aur uski donon baithkar aapas Mein baten kar rahi thi aur Jyoti unhen kya batane Mein Lagi hui thi ki kaise dipak ko chot lagi hai

Annu Jo vahan per Prem Kolekr ati hai or sofe pr baitha deti hai or apni maa ke pass jakr baith jati hai or maa se bolti hai ki

Annu:- man aaj main bahut jyada hi thak gayi hun aur sath mein Jyoti bhi I hui hai aur yah bhi thaki Hui Hai To Kya Ek coffee Pila sakti ho

Annu mom:- han beti ismein Kuchh poochhne Ki Baat Hai .mai abhi bna kr lati hu . Shalini chal Jara Tu Meri madad Kara De.

Annu:-nhi maa tu ise mat lekr jaa mujhe isase kuchh bat krni hai

Annu mom:-ok tu bat kr mai abhi ati hu or beti yhi joti ka bhai hai na jise chot lag gyi hai .

Annu :-haa maa yhi hai abhi yh kuchh der rukega phir tu ise dekh lena achhi trah.

Annu apni Man Ko jaldi se isliye bhejna chahti thi ki Kyunki Dar tha ki ki Kahin Shalini sach na bol de nhi to jo hm soch rahe ki dipak ki jagh prem ko le jakr ghr pr milane ko vh plan khi bekar na ho jaye . Ager bat khul jaye ki dipak is duniya me nhi hai to uske sath koi or jindgi bhi khatm ho jayegi

Deepak ko mare hue aj mahine se upar ho gaya hai lekin aaj tk hm dono ki himmat na hui h ki jyoti ke ghar jakr sach bol sake.

Jab Annu kimaa vha se chali jati hai to Annu shalini se bolti hai ki

Annu :-dekh meri pyari bahna yh ladka Dipak nhi prem hai is bat ko hmare siwa kewal tum hi janti ho or koi bhi nhi janta hai .Jb tk mai na khu tbbtk tum is bat ko kisi se bhi nhi bologe chahe vh koi bhi puchhe.jahir si bat hai ise ynha pr chot lagi h to tujhse koi bhi call krke puchh sakta hai Dipak ko chot kaise lagi to tu bs itna hi kahna ki mai kuchh bhi nhi janti mai to isase mili bhi nhi thi iske bare me annu di hi janti hai.

Shalini: lekin didi Meri ek baat samajh mein nahin a rahi hai ki aap log Prem Ko Deepak Banakar Jhooth Kyon bolna chahti Hain Agar kal ko Deepak Wapas a Gaya to aap log kya bologi

Shalini ki yah Baat sunkar ke Jyoti Rone lagti hai aur bolati hai ki

Jyoti:- Deepak kabhi bhi Wapas Nahin a sakta hai
 
Shalini:-jyoti didi ap kya kahna chahti hai khul kr kahiye mai kuchh bni nhi samjh pa rhi hu. Ap aisa ki kah kah rhi hai ki Deepak kabhi bhi wapas nhi aa sakte hai .

Annu. Kuki mare hue log kbhi wapas nhi ate hai .Deepak ko mare hue 1 mahine se bhi jyada ho gye hai lekin abhi bhi Jyoti ne ghar pr iske bare me kuchh bhi nhi bataya hai .Isliye hmlog prem ko deepak bna kr vha pr sabse milana chahte hai.

Shalini.:-to iske liye apne ise kaise mnaya kuki yah to diya ke ghar walo ko bhut chahta hai unke bagair rah nhi sakta hai.

Annu:-isme hme kuchh bhi karne ki jarurt nhi padi .Kuki ek durghatna me iski yadasht chali gai hai or yh kisi ko bni nhi pahachan rha hai.

Shalini.:-To phir ap log ne Diya se kya boli jo vo ise ap log ko shopne ko taiyar ho gyi khi aisa to nhi h na ap log ne kuchh jhuth bolke use vha se lekr ayi hai.

Jyoti Jo itni der se donon Logon ki baten sun rahi thi usase rha nhi gya to vh boli ki

Jyoti:- dekho shalini halat ki najukta ko samjho ager yh sachhai khul gyi ki Deepak mar chuka hai to vha kai log ki jan jane ka khatra hai .Maa to pahle se hi usko lekr bhut chintit rahti hai or vah to hart ki marij bhi hai ager use iska pata chala to uske sath kuchh bhi hi sakta hai.or mai yah nhi chahti hu kiaisa kuchh bhi ho

Shalini:-thik h mana ki abhi uski yadsht chali gyi hai ager vh kal ko thik jo jata hai to kya bologi ap usase .

Jyoti:-maine iska ilaj pahle hi dhudh liya hai isliye to tumhari saheli ke puri family ko setal karne ke liye bol chuki hu or mai kisi achhe docter se bat krungi ki iski halt to achhi ho jaye pr ise pahle ka kuchh bhi yad na aye.problm keval ek ka hi hai jo isase pyar krti hai uska nam Deepa hai janha tk mujhe lgta hai ager usne koshish ki to iski yadasht wapas aa bhi shakti hai prntu mai aisa hone nhi dungi.

Tbtk vahan per uski maa Kafi Lekar a Jaati Hai pr sbhi log shant hi jate hai.

Tb Annu ki maa jyoti se puchhti hai ki

Annu mom:-to beti tum log wapas kab ja rhi ho or ghar me sb kaise hai .Vha pr sb achha to hai na.

Jyoti:-haa aunty ji vha pr sbhi kuchh thik hai sirf bhai ko chot lag gayi hai smjh nhi paa rhi hu ghar pr kya bolu sbhi log chintit honge.

Annu mom:-to kya abhi tk tumne ghar pr kuchh bhi nhi batai ho .Bhi tbhi se mai soch rhi thi ki Deepak ko itna jyada chot lagi hai or tum akele hi ayi ho

Tb Annu ki man Prem se puchti hai ki

Annu mom:- beta tumhe kuchh taklif to nhi hai na ager kuchh chaiye to mujhe batana

Prntu prem kuchh bolne ke bajaye sirf sunau bhav se unki tarf dekhta hai or unhe pahachanane ki koshish krta hai prntu na pahchan pane ke karn use ulajhan hone lagti hai or uske sar me dard hone lagta hai to jyoti jo uske pass hi baithi thi usake sar pr hath ferti pr puchhti hai ki

Jyoti:-tkalif jyada ho rhi hai to thodi der aram kr kr lo hme abhi sfar bhi krna hai .

Phir annu or jyoti milkr dono use annu ki room me lekr chali jatti hai or use bed pr sula deti hai.

Jyoti :-yar mujhe bhi thoda fresh hona hai ager tera koi kapda aisa ho jo mujhe ho jaye to dena

Jyoti:-tere size or mere size me fark hai tujhe to shalini ki hogi tu bathroom me fresh ho mai uska kapda lekr ke ati hu

Ab ye log ynha pr normal bat hi karenge hm log thoda ab ganv pr ghum le vha ka kya hal hai use bhi dekh lete hai.
 
Idhar Annu aur Jyoti hospital se Prem Ko Le jaane ke bad vahan per Sabhi log Apne apne ghar jaane ke liye taiyar Hone Lage vahan per sirf bacche the the Doli Ke Parivar wale aur Prem Ke Ghar wale sath mein pardhan ji the.

Diya aur uski maa Seema karo RO kar Bura hal tha or vha pr mojud kuchh mahilaye un dono ko shant kra rhi thi or thik Iske viprit Deepa ekadam Shant Khadi thi Mano ki Kuchh Hua Hi Na Ho.

Iska Karan yah nahin tha Ki Prem Ka jaane ka Uske Dukh nahin tha Varun Uske na Rone ka Karan yah tha ki ki Uske Pitaji bhi yahan per the vah andar andar Tu Ro Rahi Thi parantu Samne se ekadam Shant Bhav se Khadi Thi.

Jaisa ki doston aap Sabhi log Jante Hain Ki pahle Pyar Ko Bhulana Aasan Nahin Hota Hai aur is halat mein Main Jab ki vah Apne Prem Ko purn rup se pa bhi saki thi thi uske dil ke halt ko samjh sakte hai. Uske Bhagya kividambna bhi dekho jise vh itna pyar krti hai phale to vh samajik karn se uske pyar ko swikar nhi kr rha tha or ab to vah use pahachan bhi nhi payega .

Agar vah Kisi bhi Tarah Se Apne Ghar Walon Ko Mana Bhi Le Tu is baat ki kya guarantee Thi Ki Prem Uske Pyar Ko manega aur uske pyar ko accept Bhi Karega.

Jab usne Dekha ki Diya aur uski man donon hi Shant Nahin Ho Pa rahi hai To vah donon Logon Ko jakar Shant karane lagti hai aur bolati hai ki

Deepa:-chachi ap shant ho jaye roiye nhi hme to is bat ki khushi honi chahiye ki kam se use uska parivar to mil gya .Janha pr uski achhe se dekh bhal to ho sakegi.

Seema'- beti Tum Nahin Janu Kisi ek man ke dil ka kya hal hai Mana ki maine use Janm nahin diya tha Ham to main use Apne bete se kam Pyar bhi nahin diya. Is baat ki Khushi ko mujhe bhi hai ki uska Parivar Mil Gaya parantu Main apne dil ko kaise samjhaun Jo yah Marne Ko taiyar Nahin Hai Ki mera beta Mujhse chhin Gaya Main iske liye Dali aur Ramu ko kabhi bhi Maaf Nahin karungi Agar donon Logon Ne Aisi Harkat na ki hoti to Prem Ke Sath Aisa Kuchh Hota aur na hi Uske Parivar Walon Ko Iske bare Mein Kuchh Bhi Maloom chalta aur mera beta bhi mere paas rehta. Main Janti Hun Ki Mujhe Sabhi log is Baat ke liye Swarthi kahenge main yah sab sunane ke liye taiyar hun.Deepa apne mn sochti hai ki Chachi ji aap ko mai kya batau A ap to apni dukh ko kah de rahi hain parantu Main Kya Karun main Apna dukj kisse kahun aap kya Jaane Ki is samay Mere Man per kya beet rahi hai mujhe Mera Pyar Mila Ne Se Pahle Hi bichhad Gaya aur Shayad ab main Jivan Mein Kisi Aur se Itna Pyar Kar Bhi Na Saku Agar vah mujhe nahin mila to main apne aapko Kisi Aur Ka Bhi Nahin hone Dungi Agar Mera Pyar Saccha Hai To Mujhe Mera Pyar Jarur milega. Mujhe Apne Pyar per pura Bharosa Hai

Tab Pradhan Ji aur Harish donon log vahan per Aate Hain aur Pradhan Ji bolate Hain Ki

Pradhan :- bhabhi ji Ab Main Yahan Se Chalna chahie Kyunki Prem to Yahan Se Ja chuka hai Ham Yahan per baith kar kya karenge aur aap apne aap ko Shanti rakhiye aur Deepa beti Ham bhi ghar chalet to Achcha Hi Ho Diya beti Tu Bhi apni Man ko ghar Lekar chalo aur tum bhi apne aap ko Sambhalo.

Harish:-ha seema dukh to hai mujhe bhi jis trah se vh ynha se gya hai or sabse jyada dukh to is bat ka hai use utna chot ganv walo ki harkt se nhi hua jo diya ke marne ke karn hua hai .Diya kya tumhe bhi uske uper vishwas nhi tha jo tumne aisa kiya.

Behan ki is Baat Ko sunkar Rone Lagi aur Rote Hue bolati Hai Ki

Diya:- Mujhse yah Galti Ho Gai ki main use Thodi Tej Maar Diya use Gaon Walon Ki ki harkaton se bachane ke liye Anu didi Ne Hi Mujhe a yah upay bataya tha ki agar use ke body se Kahin Bhi thoda bhi Khoon nikal Jaaye to use turant hi Hospital Lekar a Jana Jahan per main sab Kuchh Sambhal Lungi parantu Mujhe yah baat samajh mein nahin I ki Anu didi Ne use Dekhkar yah Kaise pahchan liya ki yah Jyoti didi ka bhai hai

Pradhan Ji sari baten per rok Laga kar Kahate Hain ki abhi Hamen yahan se Chalna chahie Kyunki yah sari Baat To Ham Ghar per bhi jakar kar sakte hain ya baten Yahan Par karna Jaruri Nahin Hai vahan Dolly ki last ki postmortem ho chuki hai aur unke Ghar wale bhi uski body ko Le
 
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