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बजाज की उपन्यास

जग से एक ग्लास पानी प्रगति को दिया। पानी पीने के बाद प्रगति उठकर जाने लगी तो शेखर ने उसे बैठे रहने को कहा और बोला कि अपनी कहानी उसे सुनाये। क्या बात है ? क्यों रोई ? उसे क्या तकलीफ है ?

प्रगति ने थोड़ी देर इधर उधर देखा और फिर एक लम्बी सांस लेकर अपनी कहानी सुनानी शुरू की। उसने बताया किस तरह उसकी शादी उसकी मर्ज़ी के खिलाफ एक गंवार, क्रूर,शराबी के साथ करा दी थी जो उम्र में उस से १५ साल बड़ा था। उसके घरवालों ने सोचा था कि पुलिस वाले के साथ उसका जीवन आराम से बीतेगा और वह सुरक्षित भी रहेगी। उन्होंने यह नहीं सोचा कि अगर वह ख़राब निकला तो उसका क्या होगा? प्रगति ने थोड़ी हिचकिचाहट के बाद अपने दाम्पत्य जीवन की कड़वाहट भी बता डाली। किस तरह उसका पति उसके शरीर को सिर्फ अपने सुख के लिए इस्तेमाल करता है और उसके बारे मैं कुछ नहीं सोचता। किस तरह उसके साथ बिना किसी प्यार के उसकी सूखी योनि का उपभोग करता है, किस तरह उसका वैवाहिक जीवन नर्क बन गया है। जब उसने अपने १३ साल के बेटे के मरने के बारे में बताया तो वह फिर से रोने लगी। किस तरह से उसके घरवाले उसे ही उसके बेटे के मरने के लिए जिम्मेदार कहने लगे। किस तरह उसका पति एक और बच्चे के लिए उसके साथ ज़बरदस्ती सम्भोग करता था और अपने दोस्तों के सामने उसकी खिल्ली उड़ाता था।

शेखर आराम से उसकी बातें सुनता रहा और बीच बीच में उसका सिर या पीठ सहलाता रहा। एक दो बार उसको पानी भी पिलाया जिस से प्रगति का रोना कम हुआ और उसकी हिम्मत बढ़ी। धीरे धीरे उसने सारी बातें बता डालीं जो एक स्त्री किसी गैर मर्द के सामने नहीं बताती। प्रगति को एक आजादी सी महसूस हो रही थी और उसका बरसों से भरा हुआ मन हल्का हो रहा था। कहानी ख़त्म होते होते प्रगति यकायक खड़ी हो गई और शेखर के सीने से लिपट गई और फिर से रोने लगी मानो उसे यह सब बताने की ग्लानि हो रही थी।

शेखर ने उसे सीने से लगाये रखा और पीठ सहलाते हुए उसको सांत्वना देने लगा। प्रगति को एक प्यार से बात करने वाले मर्द का स्पर्श अच्छा लग रहा था और वह शेखर को जोर से पकड़ कर लिपट गई। शेखर को भी अपने से १५ साल छोटी लड़की-सी औरत का आलिंगन अच्छा लग रहा था। वैसे उसके मन कोई खोट नहीं थी और ना ही वह प्रगति की मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था। फिर भी वह चाह रहा था कि प्रगति उससे लिपटी रहे।

थोड़ी देर बाद प्रगति ने थोड़ी ढील दी और बिना किसी हिचकिचाहट के अपने होंट शेखर के होंटों पर रख दिए और उसे प्यार से चूमने लगी। शायद यह उसके धन्यवाद करने का तरीका था कि शेखर ने उसके साथ इतनी सुहानुभूति बरती थी। शेखर थोड़ा अचंभित था। वह सोच ही रहा था कि क्या करे !

जब प्रगति ने अपनी जीभ शेखर के मुँह में डालने की कोशिश की और सफल भी हो गई। अब तो शेखर भी उत्तेजित हो गया और उसने प्रगति को कस कर पकड़ लिया और जोर से चूमने लगा। उसने भी अपनी जीभ प्रगति के मुँह में डाल दी और दोनों जीभों में द्वंद होने लगा। अब शेखर की कामुकता जाग रही थी और उसका लिंग अंगडाई ले रहा था। एक शादीशुदा लड़की को यह भांपने में देर नहीं लगती। सो प्रगति ने अपना शरीर और पास में करते हुए शेखर के लिंग के साथ सटा दिया। इस तरह उसने शेखर को अगला कदम उठाने के लिए आमंत्रित लिया। शेखर ने प्रगति की आँख में आँख डाल कर कहा कि उसने पहले कभी किसी पराई स्त्री के साथ ऐसा नहीं किया और वह उसका नाजायज़ फायदा नहीं उठाना चाहता।

अब तो प्रगति को शेखर पर और भी प्यार आ गया। उसने कहा- आप थोड़े ही मेरा फायदा उठा रहे हो। मैं ही आपको अपना प्यार देना चाहती हूँ। आप एक अच्छे इंसान हो वरना कोई और तो ख़ुशी ख़ुशी मेरी इज्ज़त लूट लेता। शेखर ने पूछा कि वह क्या चाहती है, तो उसने कहा पहले आपके गेस्ट रूम में चलते हैं, वहां बात करेंगे।
 
ऑफिस का एक कमरा बतौर गेस्ट-रूम इस्तेमाल होता था जिसमें बाहर से आने वाले कंपनी अधिकारी रहा करते थे। उधर रहने की सब सुविधाएँ उपलब्ध थीं। प्रगति, शेखर का हाथ पकड़ कर, उसे गेस्ट-रूम की तरफ ले जानी लगी। कमरे में पहुँचते ही उसने अन्दर से दरवाज़ा बंद कर लिया और शेखर के साथ लिपट गई।

उसकी जीभ शेखर के मुँह को टटोलने लगी। प्रगति को जैसे कोई चंडी चढ़ गई थी। उसे तेज़ उन्माद चढ़ा हुआ था। उसने जल्दी से अपने कपड़े उतारने शुरू किए और थोड़ी ही देर में नंगी हो गई। नंगी होने के बाद उसने शेखर के पांव छुए और खड़ी हो कर शेखर के कपड़े उतारने लगी। शेखर हक्काबक्का सा रह गया था। सब कुछ बहुत तेजी से हो रहा था और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे।

वह मंत्र-मुग्ध सा खड़ा रहा। उसके भी सारे कपड़े उतर गए थे और वह पूरा नंगा हो गया था। प्रगति घुटनों के बल बैठ गई और शेखर के लिंग को दोनों हाथों से प्रणाम किया। फिर बिना किसी चेतावनी के लिंग को अपने मुँह में ले लिया। हालाँकि शेखर की शादी को २० साल हो गए थे उसने कभी भी यह अनुभव नहीं किया था। उसके बहुत आग्रह करने के बावजूद भी उसकी पत्नी ने उसे यह सुख नहीं दिया था। उसकी पत्नी को यह गन्दा लगता था। अर्थात, यह शेखर के लिए पहला अनुभव था और वह एकदम उत्तेजित हो गया। उसका लिंग जल्दी ही विकाराल रूप धारण करने लगा।

प्रगति ने उसके लिंग को प्यार से चूसना शुरू किया और जीभ से उसके सिरे को सहलाने लगी। अभी २ मिनट भी नहीं हुए होंगे कि शेखर अपने पर काबू नहीं रख पाया और अपना लिंग प्रगति के मुँह से बाहर खींच कर ज़ोरदार ढंग से स्खलित हो गया। उसका सारा काम-मधु प्रगति के स्तनों और पेट पर बरस गया। शेखर अपनी जल्दबाजी से शर्मिंदा था और प्रगति को सॉरी कहते हुए बाथरूम चला गया।

प्रगति एक समझदार लड़की थी और आदमी की ताक़त और कमजोरी दोनों समझती थी। वह शेखर के पीछे बाथरूम में गई और उसको हाथ पकड़ कर बाहर ले आई। शेखर शर्मीला सा खड़ा था। प्रगति ने उसे बिस्तर पर बिठा कर धीरे से लिटा दिया। उसकी टांगें बिस्तर के किनारे से लटक रहीं थीं और लिंग मुरझाया हुआ था। प्रगति उसकी टांगों के बीच ज़मीन पर बैठ गई और एक बार फिर से उसके लिंग को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मुरझाये लिंग को पूरी तरह मुँह में लेकर उसने जीभ से उसे मसलना शुरू किया।

शेखर को बहुत मज़ा आ रहा था। प्रगति ने अपने मुँह से लिंग अन्दर बाहर करना शुरू किया और बीच बीच में रुक कर अपने थूक से उसे अच्छी तरह गीला करने लगी। शेखर ख़ुशी के मारे फूला नहीं समा रहा था। उसके हाथ प्रगति के बालों को सहला रहे थे। धीरे धीरे उसके लिंग में फिर से जान आने लगी और वह बड़ा होने लगा। अब तक प्रगति ने पूरा लिंग अपने मुँह में रखा हुआ था पर जब वह बड़ा होने लगा तो मुँह के बाहर आने लगा। वह उठकर बिस्तर पर बैठ गई और झुक कर लिंग को चूसने लगी। उसके खुले बाल शेखर के पेट और जांघों पर गिर रहे थे और उसे गुदगुदी कर रहे थे।

अब शेखर का लिंग बिलकुल तन गया था और उसकी चौड़ाई के कारण प्रगति के दांत उसके लिंग के साथ रगड़ खा रहे थे। अब तो शेखर की झेंप भी जाती रही और उसने प्रगति को एक मिनट रुकने को कहा और बिस्तर के पास खड़ा हो गया। उसने प्रगति को अपने सामने घुटने के बल बैठने को कहा और अपना लिंग उसके मुँह में डाल दिया। अब उसने प्रगति के साथ मुख-मैथुन करना शुरू किया। अपने लिंग को उसके मुँह के अन्दर बाहर करने लगा। शुरू में तो आधा लिंग ही अन्दर जा रहा था पर धीरे धीरे प्रगति अपने सिर का एंगल बदलते हुए उसका पूरा लिंग अन्दर लेने लगी। कभी कभी प्रगति को ऐसा लगता मानो लिंग उसके हलक से भी आगे जा रहा है।
 
खर को बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। उसने अपने धक्के तेज़ कर दिए और मानो भूल गया कि वह प्रगति के मुँह से मैथुन कर रहा है। प्रगति को लिंग कि बड़ी साइज़ से थोड़ी तकलीफ तो हो रही थी पर उसने कुछ नहीं कहा और अपना मुँह जितना ज्यादा खोल सकती थी खोल कर शेखर के आनंद में आनंद लेने लगी। शेखर अब दूसरी बार शिखर पर पहुँचने वाला हो रहा था। उसने प्रगति के सिर को पीछे से पकड़ लिया और जोर जोर से उसके मुँह को चोदने लगा
 
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