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“मिसेज चावला" - वह सख्ती से बोला - "मैं आपसे एक बड़ा सीधा सवाल पूछ रहा हूं। बरायमेहरबानी मुझे उसका सीधा और सच्चा जवाब मिल जाये। कल रात दो बजे से लेकर साढ़े तीन बजे तक आप कहां थीं ?"
"मैं" - वह बोली - "सोनी साहब के साथ इनके फ्लैट में थी।"
"इतनी रात गये आप वहां क्या करने गई थीं ?"
"यह मेरा जाती मामला है।” तब तक बाकी लोग भी उठकर हमारे करीब आ गए थे।
"आप सोनी साहब से मुहब्बत करती हैं ?" बलराज सोनी ने यूं कमला की तरफ देखा जैसे उस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए वह यादव से ज्यादा व्यग्र हो ।
"नहीं ।" - कमला कठिन स्वर में बोली ।
"लेकिन सोनी साहब आपसे मुहब्बत करते हैं और आपसे शादी करना चाहते हैं ?"
"हां । ये जबरदस्ती मेरे पीछे पड़े हुए हैं। कल रात दो बजे भी इसी बाबत इन्होने मुझे फोन किया था और मेरे इनकार की सूरत में फौरन आत्महत्या कर लेने की धमकी दी थी।" "आप इन्हें ऐसी किसी हरकत से रोकने के लिए इतनी रात गए वहां गई थीं ?"
"हां ।"
मुझे लगा यादव वह बात बलराज सोनी से पहले ही कुबुलवा चूका था ।
"आप सुन्दर नगर में स्थित इनके फ्लैट पर तीन बजे के करीब पहुंची थीं। यहां से सुन्दर नगर का फासला तो कार द्वारा मुश्किल से दस मिनट का है । फिर आपको वहां पहुंचने में इतनी देर क्यों लगी ?"
"क्योंकि मैं दुविधा में पड़ गई थी । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं जाऊं या न जाऊं । दो-तीन बार मैं रास्ते से। वापिस लौटी थी । लेकिन अंत में मेरी अंतरात्मा मुझे बुरी तरह कचोटने लगी थी और मैं वहां चली गई थी। मेरी वजह से किसी की जान जाये, यह मुझे मंजूर नहीं हुआ था।"
"हूं। कल शाम ये साहब जूही चावला के बंगले पर नारायण विहार भी पहुंचे थे। वहां ये साहब आपके साथ आपकी कार में वापिसी के लिए रवाना हुए थे लेकिन ये फरमाते हैं कि अपने थोड़ी ही दूर पहुंचने पर इन्हें रस्ते में ही उतार दिया था। ऐसा क्यों किया था आपने ?"
"क्योंकि ये कार में ही तमाशा खड़ा करने लगे थे। ऐसी हरकतें और बातें करने लगे थे जो इन्हें अपने दोस्त की बेवा से नहीं करनी चाहिए थीं ।"
"इन्हें रास्ते में उतारकर आप कहां गई थीं ?"
"सीधी यहां आई थी मैं ।"
"आप वापिस जूही चावला के बंगले पर नहीं गई थीं ?"
"नहीं।"
- उस उत्तर के बाद बड़े ही अप्रत्याशित ढंग से यादव ने कॉन्फ्रेंस वहीं समाप्त कर दी। * वह औरत पतंगबाज थी तो वह पुलिसिया भी कम पतंगबाज नहीं था । ढील दे-देकर खींच रहा था । खींच-खींच कर ढील दे रहा था। लोग विदा लेने लगे।
कमला ने मुझे रुकने के लिए इशारा किया । जाने से पहले एलैग्जैण्डर मेरे पास पहुंचा । "मेरे ऑफिस में आने का है।" - वह बोला।
"तौबा ! एक बार आया था" - मैं हातिमताई के अंदाज में बोला - "दोबारा आने की कतई हवस नहीं है।"
"तो तू जगह बोल ?"
"मेरे फ्लैट में ।"
"कब ?"
"कल सुबह ।"
"कितना मांगता है ?"
"फिफ्टी ।"
"ठीक है। आयेंगा।"
"अकेले आना ।"
उसने सहमति में सिर हिलाया और वहां से विदा हो गया। बाकी लोग भी विदा हो गये । कमला पीछे स्टडी में चली गई। वहां केवल मैं और यादव रह गये।
“लैजर बुक निकालो” - यादव बोला।
तुम कमला चावला को गिरफ्तार कर रहे हो ?"
"वो एक जुदा मसला है। उसका लैजर बुक से कोई वास्ता नहीं है।"
"मेरी राय में सारे कत्ल एलेग्जैण्डर ने किये हैं या करवाए हैं।"
"अपनी राय अपने पास रखो और लैजर बुक निकालो।"
"अगर एलैग्जैण्डर को गिरफ्तार करने का इरादा हो तो बरायमेहरबानी उसे कल दोपहर बाद गिरफ्तार करना ।"
"लैजर बुक !"
,,, मैंने जेब से लैजर बुक की जेरोक्स कापियां निकलकर उसे सौंप दी ।
"मैं" - वह बोली - "सोनी साहब के साथ इनके फ्लैट में थी।"
"इतनी रात गये आप वहां क्या करने गई थीं ?"
"यह मेरा जाती मामला है।” तब तक बाकी लोग भी उठकर हमारे करीब आ गए थे।
"आप सोनी साहब से मुहब्बत करती हैं ?" बलराज सोनी ने यूं कमला की तरफ देखा जैसे उस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए वह यादव से ज्यादा व्यग्र हो ।
"नहीं ।" - कमला कठिन स्वर में बोली ।
"लेकिन सोनी साहब आपसे मुहब्बत करते हैं और आपसे शादी करना चाहते हैं ?"
"हां । ये जबरदस्ती मेरे पीछे पड़े हुए हैं। कल रात दो बजे भी इसी बाबत इन्होने मुझे फोन किया था और मेरे इनकार की सूरत में फौरन आत्महत्या कर लेने की धमकी दी थी।" "आप इन्हें ऐसी किसी हरकत से रोकने के लिए इतनी रात गए वहां गई थीं ?"
"हां ।"
मुझे लगा यादव वह बात बलराज सोनी से पहले ही कुबुलवा चूका था ।
"आप सुन्दर नगर में स्थित इनके फ्लैट पर तीन बजे के करीब पहुंची थीं। यहां से सुन्दर नगर का फासला तो कार द्वारा मुश्किल से दस मिनट का है । फिर आपको वहां पहुंचने में इतनी देर क्यों लगी ?"
"क्योंकि मैं दुविधा में पड़ गई थी । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं जाऊं या न जाऊं । दो-तीन बार मैं रास्ते से। वापिस लौटी थी । लेकिन अंत में मेरी अंतरात्मा मुझे बुरी तरह कचोटने लगी थी और मैं वहां चली गई थी। मेरी वजह से किसी की जान जाये, यह मुझे मंजूर नहीं हुआ था।"
"हूं। कल शाम ये साहब जूही चावला के बंगले पर नारायण विहार भी पहुंचे थे। वहां ये साहब आपके साथ आपकी कार में वापिसी के लिए रवाना हुए थे लेकिन ये फरमाते हैं कि अपने थोड़ी ही दूर पहुंचने पर इन्हें रस्ते में ही उतार दिया था। ऐसा क्यों किया था आपने ?"
"क्योंकि ये कार में ही तमाशा खड़ा करने लगे थे। ऐसी हरकतें और बातें करने लगे थे जो इन्हें अपने दोस्त की बेवा से नहीं करनी चाहिए थीं ।"
"इन्हें रास्ते में उतारकर आप कहां गई थीं ?"
"सीधी यहां आई थी मैं ।"
"आप वापिस जूही चावला के बंगले पर नहीं गई थीं ?"
"नहीं।"
- उस उत्तर के बाद बड़े ही अप्रत्याशित ढंग से यादव ने कॉन्फ्रेंस वहीं समाप्त कर दी। * वह औरत पतंगबाज थी तो वह पुलिसिया भी कम पतंगबाज नहीं था । ढील दे-देकर खींच रहा था । खींच-खींच कर ढील दे रहा था। लोग विदा लेने लगे।
कमला ने मुझे रुकने के लिए इशारा किया । जाने से पहले एलैग्जैण्डर मेरे पास पहुंचा । "मेरे ऑफिस में आने का है।" - वह बोला।
"तौबा ! एक बार आया था" - मैं हातिमताई के अंदाज में बोला - "दोबारा आने की कतई हवस नहीं है।"
"तो तू जगह बोल ?"
"मेरे फ्लैट में ।"
"कब ?"
"कल सुबह ।"
"कितना मांगता है ?"
"फिफ्टी ।"
"ठीक है। आयेंगा।"
"अकेले आना ।"
उसने सहमति में सिर हिलाया और वहां से विदा हो गया। बाकी लोग भी विदा हो गये । कमला पीछे स्टडी में चली गई। वहां केवल मैं और यादव रह गये।
“लैजर बुक निकालो” - यादव बोला।
तुम कमला चावला को गिरफ्तार कर रहे हो ?"
"वो एक जुदा मसला है। उसका लैजर बुक से कोई वास्ता नहीं है।"
"मेरी राय में सारे कत्ल एलेग्जैण्डर ने किये हैं या करवाए हैं।"
"अपनी राय अपने पास रखो और लैजर बुक निकालो।"
"अगर एलैग्जैण्डर को गिरफ्तार करने का इरादा हो तो बरायमेहरबानी उसे कल दोपहर बाद गिरफ्तार करना ।"
"लैजर बुक !"
,,, मैंने जेब से लैजर बुक की जेरोक्स कापियां निकलकर उसे सौंप दी ।