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भाभी का बदला

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उस दिन वेडनेसडे था, जैसे ही हम क्लास ख़तम कर के कॉलेज से बाहर आए, तान्या ने पूछा तो फिर क्या मूड है?

मैं बोला, भूख लगी है लंच कर लेते हैं

तान्या तुरंत तय्यार हो गयी और अपनी कार वहीं पार्किंग में छोड़ के मेरी कार में ही आ गयी. हम एक अच्छे से 2न्ड फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में गये और एक कॉर्नर टेबल पर बैठ गये.वहाँ लगे ग्लास में से शहर की मेन रोड और उस पर रेंगता ट्रॅफिक सॉफ नज़र आ रहा था.

तान्या आज बहुत सुंदर लग रही थी, उसने अपने काले गहने बाल आज खोल रखे थे. आज उसने वाइट टी-शर्ट जिस पाट कुछ लिखा हुआ था और डार्क ब्लू जीन्स पहन रखी थी. मुझे अपने आप को विश्वास दिलाना पड़ रहा था कि बस हम दोनो अकेले में बैठे हैं, और ऐसा लग रहा था कि वो भी मुझे पसंद करती है.

लंच आ चुका था, हम प्रॉजेक्ट्स के बारे में और बाकी क्लासमेट्स के बारे मे बातें करते हुए खाना खा रहे थे. तान्या ने हाथ धोने के लिए आए गरम पानी में से नींबू उठाकर मेरे फेस पर फेंक दिया और फिर खिलखिलाकर हँसने लगी.

वेटर ने जब पूछा कि डिज़र्ट में क्या लोगे, तो हम एक दूसरे को देखने लगे और फिर मैं बोला, मेरा तो कुछ मीठा खाने का मन कर रहा है.

तान्या हंसते हुए बोली, हां मैं भी खाउन्गि. दोनो ने आइस्क्रीम का फ्लेवर डिसाइड कर के ऑर्डर प्लेस कर दिया. अच्छा हुआ तुम ने ऑर्डर कर दिया, नही तो तुम ये ही सोचते हैं कि मैं बहुत ज़्यादा मीठा खाती हूँ.

मैने शरारत करते हुए कहा, कोई बात नही, तुम्हारा साथ पाने के लिए, ये बंदा कुछ भी करने को हाजिर है.

तान्या कुछ सोचते हुए मेरी तरफ देखने लगी.

तान्या: थॅंक यू, राज...

मैने अपना सिर हिलाया और मुस्कुरा दिया.

कुछ देर में आइस्क्रीम आ गयी और हम खाने लगे. शुरू में तान्या थोड़ा चुप चुप थी पर अब वो खुल के बातें कर रही थी. कुछ देर पहले की तान्या जो मुझे एक आकर्षक और स्वावलंबी लड़की नज़र आ रही थी, वो अब मुझे अपना शिकार लगने लगी थी. तान्या मुझे बता रही थी कैसे उस को बचपन में बहुत ज़्यादा खाने की आदत थी और कैसे उसने इस पर काबू पाया.

तान्या ने आगे बताया कि कैसे वो 10+2 के दौरान एक लड़के की दीवानी हो गयी थी. बात करते करते वो प्लेट पर चम्मच से डिज़ाइन बनाती जा रही थी. जब उस लड़के के पापा जो आर्मी में थे उनका ट्रान्स्फर जम्बू&कश्मीर हो गया और वो लड़का जम्बू&कश्मीर चला गया तो कैसे वो डिप्रेशन में आ गयी थी. डिप्रेशन के एक साल के दौरान एक बार फिर से वो बहुत ज़्यादा खाने लगी थी.

तान्या फिर शांत हो गयी, मैं बेसब्री से उसके आगे बोलने का इंतेजार करने लगा.

तान्या ने आँखे उठाकर एक उम्मीद भरी नज़र से मुझे देखा, फिर आगे बोली, मुझे वास्तविकता स्वीकार करने में बहुत टाइम लगा. मैं अब इस बात से सावधान रहती हूँ, हँसी मज़ाक तो सब के साथ कर लेती हूँ लेकिन अपना दिल, अब मैं सिर्फ़ अब अपने पति को ही दूँगी. कुछ देर तान्या चुप रही, मैं उसके आगे बोलने का वेट करता रहा.चम्मच रखते हुए तान्या ने अपना हाथ बढ़ाया और मैने उसका हाथ खुशी से पकड़ लिया.

तान्या: मुझे ये देख के बहुत अच्छा लगा कि तुम मुझसे कभी नाराज़ नही हुए. मुझे लगा तुम सोच रहे होंगे कि ये कैसी लड़की है? हां मैं दूसरी लड़कियों की तरह नही हूँ, लेकिन मुझे इस बात का पता है. तुमने इतने दिनों में कभी भी मेरे साथ किसी बात की ज़बरदस्ती नही की, और हमेशा ये सोचते रहे होंगे कि जाने कब पटेगी? इतना बोल कर तान्या हँसने लगी.

हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, फिर मैने अपन गला सॉफ करते हुए कहा, तान्या तुम बहुत सुंदर हो, मुझे बहुत अच्छी लगती हो, थॅंक यू.

मेरा हाथ पकड़े हुए तान्या नीचे देखने लगी.

तुम जैसी भी हो, लेकिन मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मैं तुमको इतना चाहता हूँ कि और ऐसा कभी कुछ नही कर सकता जो तुमको बुरा लगे. मैं सच कह रहा हूँ, तुम भी अगर मेरे साथ ऑनेस्ट रहोगी तो हम एक दूसरे को बेहतर जान पाएँगे. मुझे पक्का नही मालूम लेकिन कभी कभी मुझे लगता है कि शायद हमारे पेरेंट्स मेरी दीदी की शादी के बाद कहीं हमारी शादी कराने का प्लान तो नही बना रहे?

तान्या के गाल गुलाबी हो गये और उसने मुस्कुराते हुए कहा, पता नही, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो अच्छा ही होगा. उसने इधर उधर देखा और फिर ज़ोर से हँसने लगी, हम कुछ ज़्यादा ही सीरीयस हो गये, है ना?

मैने भी हंसते हुए जवाब दिया, कोई बात नही, जो होगा अच्छा ही होगा...

कुछ देर और बातें करने के बाद हम तान्या की कार लेने कॉलेज की पार्किंग पहुँचे और फिर हाथ हिलाकर बाइ किया. वो अपनी कार चला के चली गयी और मैं अपने घर आ गया.

उस दिन शाम को मैं डॉली दीदी के रूम में गया और आज मेरी तान्या के साथ हुई सारी बातों को बता दिया. दीदी सब कुछ सुनते हुए बस मुस्कुराती रही.

दीदी: वाह, ये तो बहुत अच्छा हुआ, लगता है वो तुमसे शादी से पहले ही प्यार करने लगी है. मेरी तरफ आइब्रोज चढ़ा के देखते हुए दीदी आगे बोली, देख राज, अब कोई गड़बड़ मत करना, और फिर हँसने लगी. मैने भी शरारती लहजे में जवाब दिया, हां दीदी मैं ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा.

दीदी शायद मेरे दिमाग़ में चल रहे विचारों को पढ़ पा रही थी, दीदी ने मुझसे पूछा, राज, तुम किस बात से परेशान हो?

 
मैं घबराता हुआ बोला, दीदी मुझे लगता है, कि अगर हम ने शादी से पहले ऐसा वैसा कुछ किया, आप को तो मालूम ही है कि मुझसे सब्र नही होता, और मैं कुछ ग़लती कर बैठा तो तान्या पता नही कुछ ग़लत ना समझ ले? और शादी के लिए मना ना कर दे.

दीदी ने मेरी तरफ देखा और फिर खड़े होकर मुझे एक झप्पी दी. मेरे गले में अपनी बाहें डाल के मेरी आँखों में आँखें डाल के देखते हुए बोला, हे राज, मैं हूँ ना, तुम्हारी बड़ी बेहन तुम्हारी हर प्राब्लम को सॉल्व करने के लिए.

राज: हां दीदी वो तो ठीक है, लेकिन वो सब तो हम, मेरा पॉर्न अडिक्षन दूर करने के लिए कर रहे थे (मैने समझाते हुए कहा), मुझे लगता है कि मुझे आप का किसी तरह से ग़लत इस्तेमाल नही करना चाहिए.

दीदी ने कंधे उँचकाते हुए कहा, जब भी मुझे ऐसा कुछ लगेगा, मैं तुम को बता दूँगी, दीदी मे अपने निचले होठ को दाँत से काटते हुए कहा, मुझे लगता है कि हम दोनो को ये बात मालूम है कि मुझे भी इस सब में मज़ा आ रहा है.

हम दोनो एक दूसरे की आँखों में देखते रहे और कुछ देर वहीं खड़े रहे.

तुम बहुत अच्छी हो दीदी, सारी दुनिया एक तरफ और मेरी दीदी एक तरफ, इसीलिए आइ लव यू दीदी. दीदी ये सुनकर थोड़ा हँसी और मैने अपना माथा दीदी के माथे से लगा दिया.

दीदी: अरे भाई मेरे बारे में इतनी अच्छी अच्छी बाें मत करो, मैं बहुत लालची हूँ. मैं तुम्हारी उतनी ही हेल्प कर रही हूँ जितनी तुम मेरी कर रहे हो. आगे दीदी ने स्वीकार करते हुए कहा, मुझे बहुत अच्छा लगता है जब तुम मुझे स्पेशल फील करवाते हो. मुझे मालूम था कि मैं तुम्हारे लिए इंपॉर्टेंट हूँ लेकिन अब........ आगे बोलने से पहले दीदी थोड़ा रुकी, उनके गाल थोड़ा लाल हो गये थे.... लेकिन अब जब तुम मुझे इतना पसंद करते हो, मुझे तुम्हारी बड़ी बेहन होने पर गर्व है.

मैं मुस्कुराया, तो फिर ये मान लिया जाए कि हम दोनो एक दूसरे की हेल्प कर रहे हैं, और मुझे किसी मुसीबत से बचाने के लिए नही कर रहे

दीदी ने दूसरी तरफ देखा और मूँह बना के बोली, लगता है हम किसी मुसीबत से बचने की बजाय उसी मुसीबत में फँसते जा रहे हैं, हंस के आगे बोली, हां ये थोड़ा कॉंप्लिकेटेड तो है लेकिन एक बात पक्की है कि हम दोनो एक दूसरे की हेल्प कर रहे हैं. और ये सब अब केवल अकेले तुम्हारे लिए नही हो रहा.

हां दीदी, मुझे ये सुन कर अच्छा लगा, मैने दीदी की बात मानते हुए कहा. हम ने एक दूसरे को देखा और फिर एक छोटी सी झप्पी ले ली.

जब हम अपने अपने रूम में जाने को हुए तो दीदी ने पूछा, तो तुम तान्या के साथ अगली बार डेट पर कब जा रहे हो ?

अभी पक्का नही है लेकिन शायद फ्राइडे को, मैने कहा.

दीदी: ओके तो फिर जाकर आराम करो, और अगर किसी चीज़ की कभी भी ज़रूरत हो तो मुझे जगाने में संकोच मत करना, ऐसा कह कर स्माइल करते हुए दीदी अपने रूम में चली गयी.

मैने अपना सिर हिलाया और दीदी को पीछे से मूँह बनाकर चिढ़ाने लगा.

फ्राइडे को मैं और तान्या अपनी डेट पर गये, और मैं अपने आप को तान्या और दीदी के साथ हुई सारी घटनाओं के बाद काफ़ी स्वच्छन्द और हल्का फील कर रहा था. हम ने डेट पर काफ़ी मज़ा किया, उस दिन हम एक पास ही के एक हिस्टॉरिकल जगह पर गये, हम जिस होटेल के रेस्टोरेंट में लंच के लिए पहुँचे वहाँ पर फॉरिन टूरिस्ट्स का एक ग्रूप भी आया हुआ था, वो सब बियर पी कर डॅन्स पार्टी कर रहे थे, उन्होने जब अपनी तरफ हम को देखता हुआ पाया तो हम दोनो को भी इन्वाइट किया, हम ने उनके इन्विटेशन को ठुकराना सही नही समझा और उन फॉरिन टूरिस्ट्स को डॅन्स में जाय्न कर लिया. डॅन्स करते हुए तान्या के साथ इतना करीब आना और हँसना, तान्या का इतने लोगों के बीच मुझको पकड़ना एक अद्भुत घटना थी, जिस पर विश्वास करना मुश्किल था.

रात को जब हम तान्या के अपार्टमेंट पहुँचे तो मैने पहले ही सोच लिया था कि आज तान्या को डोर पर छोड़ते समय उसको एक झप्पी का ऑफर करूँगा, जब हम गुडनाइट विश करेंगे. मैं बहुत खुश हुआ तान्या ने मुझको गुड नाइट विश करते समय मुझे खुशी खुशी झप्पी दी. हालाँकि मेरा उसके लिए प्यार, इस से कुछ और ज़्यादा की उम्मीद कर रहा था.

तान्या घर के अंदर चली गयी, और मैं अपनी कार में बैठ के अपने घर आ गया. मैं दीदी के उस इन्विटेशन के बारे में सोच रहा था जो दीदी ने डेट से लौटने के बाद उनके पास आकर रिलॅक्स होने के लिए मुझे दिया था, मैं दीदी से मिलने को बेचैन था. मुझे मालूम था कि मेरे को जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए लेकिन मेरे दिमाग़ में दीदी का वो मुस्कुराता हुआ चेहरा घूम रहा था जब हम इस बारे में बातें कर रहे थे. मैं याद कर रहा था कैसे दीदी पिछली कुछ बार से कितना ज़्यादा गरम हो जाती है, जब हम वो सब करते हैं.

मैने मोबाइल को ऑन कर के देखा, रात का एक बज रहा था. मम्मी पापा तो हमेशा की तरह सो ही चुके थे, और लग रहा था कि डॉली दीदी भी सो चुकी है. मुझे थोड़ी निराशा हुई, मैं बाथरूम में नहाने चला गया, फिर अपने रूम में आके एक मॅगज़ीन पढ़ने लगा. थोड़ी देर बाद मॅगज़ीन पढ़ने में मन नही लगा. मुझे दीदी की कमी खलने लगी थी, मैं दीदी से मिलने के लिए मचलने लगा.

मैं दीदी के रूम में धीरे धीरे पहुँचा और थोड़ा सा डोर खोल के अंदर झाँक के देखा कि दीदी बेड पर है या नही. दीदी अपने बेड पर सो रही थी और एक चादर ओढ़ के उसके अंदर सिंकूडी हुई लेटी हुई थी. रूम के अंदर ब्लाइंड्स में से आ रही चाँदनी की रोशनी इतना उजाला कर रही थी कि मैं दीदी के बेड तक आसानी से पहुँच गया. मैं बेड के पास जाकर धीरे से बोला, डॉली दीदी और दीदी के कंधे के उपर अपना हाथ रख दिया, और फिर बोला डॉली दीदी. दीदी थोड़ा हिली और नींद में ही बोली ह्म...

दीदी मैं घर आ गया हूँ, मैने कहा. दीदी अब थोड़ा ज़्यादा हिली और शायद थोड़ा ज़्यादा जाग गयी. मैने फिर से दोहराया, इस बार उसने सुन लिया, लेकिन अभी वो पूरी तरह से जागी नही थी.

दीदी ने धीरे से कहा, ओके. दीदी ने अपनी आँखें मसली, वो जाग गयी थी लेकिन अभी भी पूरी तरह नही. कुछ देर बाद दीदी ठीक से जागी कर अपने होश में आई और मेरी तरफ देख के स्माइल किया. फिर बोली, तो तुम मुझसे मिलने आए हो, मैं भी तुमको मिस कर रही थी, यहाँ बैठो ना.

मैने दीदी का कहना मानते हुए उनके बेड के किनारे पर बैठ गया. दीदी ने आराम से हमारी डेट के बारे में पूछा और मेरी सारी बात को जाग कर देर तक सुनती रही.

मैने दीदी से पूछा कि उनका दिन कैसा बीता, तो दीदी ने दिन भर में हुई दो तीन बातें बताईं, बताते बताते अब वो पूरी तरह जाग चुकी थी.

दीदी ने धीरे से पूछा, तो फिर क्या रिलॅक्स होने में कुछ हेल्प चाहिए? मैने हां में सिर हिलाया. दीदी ने एक छोटी से जमहाई ली और बोली, मेरा बेड से उतरने का मन नही कर रहा, आओ तुम ही उपर आ जाओ, चादर के अंदर, ठीक है?

ठीक है दीदी, मैं बोला. मैं दीदी के चादर के अंदर घुस गया और बेड शीट में से आ रही किसी पर्फ्यूम की खुश्बू को सूंघने लगा. वो खुश्बू दीदी के शरीर की खुसबु से बेहद मिलती थी, ये सोच के ही मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. मैं ये जंग हार चुका था.

दीदी आप ठीक हो ना, ऐसे कोई दिक्कत तो नही है आपको? दीदी ने बस म्मह... ही आवाज़ निकाली और खिसक कर अपनी पीठ मेरे और पास कर ली. दीदी अपना मूँह बंद कर हल्के हल्के हंस रही थी, तभी उसने मेरा खड़ा लंड अपनी गान्ड के उपर महसूस किया.

दीदी ने पूछा, अगर हम इस दानव को शांत कर दें तो तुम रिलॅक्स हो जाओगे?

हां दीदी...

दीदी ने सुझाव देते हुए कहा, ऐसा करो तुम अपना शॉर्ट्स उतार दो. दीदी फुसफुसाकर बोली, मानो ऐसा करने से जो कुछ हम कर रहे थे वो और ज़्यादा गोपनीय हो जाएगा.

मैने बिना कुछ सोचे अपने शॉर्ट्स और टी-शर्ट को निकाल के फेंक दिया. और करवट लेकर दीदी की पीठ की तरफ मूँह कर के लेट गया. दीदी खिसक कर मेरे पास आई, और मुझे मेरी बाहें दीदी के गिर्द लपेटने का इशारा किया, मैने डरते हुए अपनी बाहों में दीदी को ले लिया. मैने अपनी बाहें दीदी की पतली कमर के गिर्द लपेट ली, जहाँ मेरा हाथ दीदी के पेट को छू रहा था, वहाँ दीदी ने अपना हाथ मेरे हाथ के उपर रख दिया. चादर के अंदर नंगे लेटे हुए दीदी को इस तरह पकड़े हुए, मेरे शरीर में 440 वॉल्ट का करेंट दौड़ने लगा.

कुछ आगे करो राज, दीदी फुसफुसाई

 
कुछ आगे करो राज, दीदी फुसफुसाई

मैं अपने लंड को उपर की तरफ धकेलने लगा, और दीदी की गान्ड पर घिसने लगा. दीदी ने मेरे हाथ को ज़ोर से पकड़ लिया था, लेकिन अब भी वो शांत थी. मैने अपने आप को थोड़ा पीछे किया और फिर ज़ोर से एक उपर की तरफ झटका मारा. दीदी का नाइट्गाउन गान्ड के बीच घुस गया था और मेरा लंड बीच के दरार में फँस गया था. दीदी को ज़ोर से पकड़ के लंड से दीदी की गान्ड पर उपर नीचे झटके मारने लगा.

थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद, हम दोनो के शरीर अब गरम होने लगे थे, और थोड़ा पसीना भी आने लगा था. दीदी की गान्ड पे मेरा लंड टिका हुआ था, और नाइट्गाउन के कपड़े के उपर से घिस्से मार रहा था. जब मैं ज़ोर से झटका मारता तो दीदी अपने हाथ से मेरी बाँह को ज़ोर से पकड़ लेती. यकायक दीदी ने करवट लेनी शुरू की और अपने शरीर को घुमाने लगी, दीदी ने मेरी बाँह को पकड़ रखा था इसलिए मैं दीदी के साथ साथ दीदी के उपर आ गया, अब दीदी पेट के बल लेटी हुई थी, और मैं दीदी के उपर था, दीदी थोड़ा कराही. दीदी ने मेरे हाथ पकड़ के अपने हिप्स पर रख दिए और अपने दोनो हाथ खुद के सिर के नीचे. जब मैं झटके मारने शुरू किए तो दीदी खुशी से करहाने लगी.

दीदी के उपर जिस तरह मैं चढ़ा हुआ था, उस एग्ज़ाइट्मेंट औट थ्रिल की वजह से मेरे को कुछ समझ नही आ रहा था. मेरा लंड दीदी की गान्ड की गोलाईयों के बीच घुस के, उपर नीचे होकर घिस्से मारने में व्यस्त था. मुझे विश्वास नही हो रहा था कि हम ऐसा कुछ कर रहे हैं. मुझे विश्वास नही हो रहा था दीदी ने मुझे अपने उपर खींच लिया है. दीदी की करहाना बता रहा था कि दीदी ने मुझे अपने शरीर को जैसे मैं चाहूं वैसे उसे करने की अनुमति दे दी थी. दीदी भी उतना ही एग्ज़ाइटेड थी जितना कि मैं.

मेरे दिमाग़ में आया कि कहीं ऐसा मौका फिर मिले या ना मिले, मैने दीदी के हिप्स को कस के पकड़ के ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने शुरू कर दिए. मेरा लंड गान्ड की गोलाईयों के बीच अंदर तक घुस के नाइट्गाउन के उपर से घिस्से मार रहा था. ओढी हुई चादर मेरी पीठ के उपर चिपक के मेरे झटकों के साथ साथ आगे पीछे हो रही थी. दीदी ने एक ज़ोर की साँस ली और फिर अपने हिप्स को थोड़ा उपर उठा लिया, जिस से उनकी गान्ड पर मेरी पहुँच ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ सके. मैं इशारा समझ के लंड को सही तरह से उस जगह पर फिक्स करके झटके मारने लगा, चाँदनी की रोशनी में दीदी की स्माइल मैं देख पा रहा था. मैने अपने हाथ को थोड़ा उपर कर के दीदी की पंसलियों तक ले गया, दीदी के उरोजो से बस थोड़ा नीचे, मेरे हाथ दीदी की चूंचियों को बस थोड़ा सा छू रहे थे. दीदी फिर खुशी से कराही. दीदी ने अपने पैर थोड़ा और ज़्यादा फैला दिए. मेरे कुछ समझ में नही आ रहा था, मैं और ज़ोर से गान्ड की गोलाईयों के बीच झटके मारने लगा. हर बार जब मैं पीछे होता तो अगली बार लंड के सुपाडे को और ज़्यादा अंदर तक घुसाने का प्रयास करता. जवाब में दीदी ने भी अब अपने घुटनों पर ज़ोर डाल के अपनी गान्ड को और उपर उठा लिया था.

हम दोनो अब इस खेल में पूरी तन्मयता से डूबे हुए थे. हम दोनो ने फील किया कि नाइट्गाउन थोड़ा उपर चढ़ गया था और उसके किनारे में से नीचे घुस के मेरा लंड अब दीदी की पैंटी के उपर से घिस्से लगा रहा था. मेरे लंड का सुपाड़ा दीदी की गान्ड के निचले हिस्से की दरार में घुस रहा था, लेकिन अब ऐसा कोई तरीका नही था जिस से मैं नाइट्गाउन को चुपचाप नीचे कर सकता. मैं फिर से झटके मारने लगा, और गान्ड के उपर से अपने लंड को दबा दबा के घिसने लगा, दीदी भी मेरे जितना ही नर्वस थी लेकिन उन्होने मुझे रोका नही. दीदी ने अपनी पैंटी के उपर से अपने छोटे भाई को अपनी गान्ड के उपर लंड दबा के घिस्से मारने दिए.

मैं पैंटी के उपर से, उस दरार में अपना लंड घुसाने लगा. हर छोटे झटके के साथ मैं महसूस कर रहा था कि दीदी का शरीर कितना सॉफ्ट है. मैने अपने आँखें बंद कर ली, और दीदी के हिप्स को पकड़ के धीरे धीरे झटके मारने लगा.

दीदी थोड़ा हिली और फिर थोड़ा रुकी. दीदी अपने हाथ अपनी कमर पर ले गयी, और जब तक मैं कुछ समझ पाता कि वो क्या कर रही है, मुझे लगा दीदी ने अपनी पैंटी नीचे कर दी, मेरा लंड अब दीदी की नंगी गान्ड की दारर में घुसा हुआ था. दीदी अब काँप रही थी, वो अपनी नंगी गान्ड की गोलाईयों को मेरे लंड के उपर दबा रही थी.

मेरा शरीर अब गरम हो चुका था और मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था. मेरा शरीर दीदी की नंगी त्वचा का स्पर्श पाकर रोमचित हो रहा था. दीदी के शरीर की गर्माहट को महसूस करते हुए मैं वैसे ही दीदी के उपर लेटा रहा. दीदी की गान्ड की दरार में अपना लंड घुसा के अब मैं आसानी से झटके मार के लंड को घिस रहा था. अब लंड को घिस्से मारने में कोई दिक्कत नही हो रही थी. कुछ पलों के बाद मेरा लंड गान्ड की गोलाईयों के बीच घुस के मज़े ले रहा था.

दीदी के कराहने की आवाज़ मुझे एनकरेज कर रही थी, मैने दीदी के चेहरे की तरफ देखा, दीदी की गान्ड की गोलाईयों के बीच मेरा लंड फँसा हुआ था. मैने अपनी लटकते हुए टट्टों को भी दीदी की गान्ड के स्पर्श को महसूस करने दिया, दीदी मज़े से कराह रही थी. दीदी की स्किन का स्पर्श मुझे आनंदित कर रहा था, दीदी की गान्ड कितनी चिकनी और गरम थी.

मैं अब जोश में ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा, गान्ड की दरार में हर झटके के साथ दीदी के मूँह से हल्के हल्के गुर्राने की आवाज़ निकलने लगी. दीदी के पसीने और मेरे प्रेकुं ने उस जगह में काफ़ी चिकनाहट कर दी थी, मैं इस चीज़ का पूरा मज़ा ले रहा था. अंधेरे में हम दोनो भाई बेहन, चादर के अंदर मस्ती कर रहे थे. मैने दीदी की छाती पर हाथ ले जाकर उनको ज़ोर से पकड़ा और अपने शरीर का पूरा दबाव दीदी के नाज़ुक शरीर पर डाल दिया. लग रहा था के मैं बस छूटने ही वाला हूँ, मैं पूरी तरह दीदी के उपर आ गया, और दीदी के हान्फ्ते हुए चेहरे के पास ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगा.

अंत में मैने दीदी के हिप्स को टाइट पकड़ लिया, और अपने लंड के सुपाडे को, जो कि घिस्से मार मार के जबरदस्त फूल गया था, आगे बढ़ बढ़ के दरार में ज़्यादा से ज़्यादा घुसाने की कोशिश करने लगा. मेरे टट्टों में गोलियाँ उपर चढ़ आई थी, और मैने गुर्राते हुए दीदी की गान्ड की गोलाईओं के बीच अपना गरम गरम वीर्य उंड़ेलना शुरू कर दिया. कुछ पिचकारी दीदी की पीठ पर भी गिरी, और पानी लुढ़क के दोनो हिप्स के बीच की दारर में बहने लगा.

मैं दीदी के उपर हान्फ्ते हुए लेटा रहा, दीदी मेरे नीचे लेटी थी, मेरी बाहों पर अपने हाथ फेर रही थी, और अपनी गान्ड की गोलाअयों को मेरे लंड पर घिस रही थी. मैने टिश्यू पेपर लेकर दीदी की पीठ और गान्ड की दरार के बीच जमा अपने पानी को सॉफ किया. ये हम दोनो के बीच एक नाज़ुक पल था. दीदी मेरे सामने बिल्कुल निढाल पड़ी थी, और ये वो पल थे जो किसी भी पति पत्नी के बीच बहुत प्राइवेट होते हैं.

 
दीदी की आँखों में एक अलग ही चमक थी.

दीदी के रूम से अपने रूम में आने के बाद मैं सारी रात ये ही सोचता रहा.

सॅटर्डे सुबह मैं सो कर काफ़ी लेट उठा, सूरज की किरणों ने मेरे रूम को रोशन कर रखा था, मैने फिर से चादर ओढ़ ली. बड़ी ज़ोर से आ रही पेशाब ने मुझे बेड से निकलने पर मजबूर कर दिया, मैं बाथरूम में जाके फ्रेश हुआ, और अपने बाल थोड़े ठीक किए, दाँतों को ब्रश किया, फिर किचन में हल्का सा ब्रेकफास्ट करने को चल दिया.

घर में बड़ी शांति थी, मैने बाहर झाँक के देखा, बाहर पापा की कार नही थी, फिर मुझे याद आया मम्मी पापा को आज हमारे किसी रिश्तेदार के गृह प्रवेश में जाना था. दीदी का पता नही चल रहा था, वो कहाँ है, ये ढूँढने के लिए मैं सभी रूम देख चुका था, जब मैं अंडरग्राउंड स्टोर रूम की तरफ गया तो देखा कि वहाँ की लाइट जल रही है. मैं नीचे जाने के लिए सीढ़ियों पर उतरने लगा, मैने देखा दीदी पुराने कपड़ों को फोल्ड कर रही थी.

दीदी ने मुझ को देख के कहा, तो उठ गये महाराज...

मैने अपनी आँखें मसल्ते हुए कहा... हां उठ गया....

दीदी चुटकी लेते हुई बोली... बड़ी बढ़िया नींद आई होगी आज तो....

मैने भी शरारती लहजे में जवाब दिया... हां एक दम मस्त नीद आई आज...

दीदी मुस्कुराइ और फिर कपड़े फोल्ड करती रही. मैं दीदी को कुछ मिनटों तक देखता रहा और मन ही मन सोचता रहा कि दीदी कपड़े पहन कर भी कितनी सुंदर लगती है, दीदी ने सफेद पॅंट-शर्ट पहना हुआ था और अपने बालों का पोनीटेल बना रखा था. दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी तरफ देखते हुए पाकर थोडा मुस्कुराइ, फिर कपड़े फोल्ड करने शुरू कर दिए. वो कुछ और कपड़े उठाने के लिए थोड़ा झुकी, मैं दीदी को देखता रहा.

मैं थोड़ा पास आकर वहाँ रखे एक बॉक्स पर बैठ गया.

दीदी सीधी खड़ी होकर अपनी एक पुरानी वाइट ब्रा को फोल्ड कर रही थी. मैने देखा कि वाइट ब्रा के कप्स पर छोटे छोटे पिंक फ्लवर बने हुए थे. मैने गुस्ताख़ी करते हुए पूछा, दीदी आपकी ब्रा का साइज़ कितना है? दीदी ने अचंभित होते हुए मेरी तरफ देखा, मुझे एहसास हुआ दीदी ठीक वैसे ही देख रही थी जैसे उसने 1-2 महीने पहले, यानी कि ये सब कुछ शुरू होने से पहले देखा होता, यदि मैने इस तरह को कोई सवाल पूछ होता.

दीदी फिर थोड़ा मुस्कुराइ और शरमाते हुए बोली, पता नही मुझे शरम क्यों आ रही है...

वाउ.., तुमको शरम आ रही है... मैने मुस्कुराते हुए कहा. दीदी ने मुझे शरमाते हुए देखा और फिर अपना मूँह दूसरी तरफ फेर लिया.

दीदी ने हंसते हुए अपना चेहरा अपने हाथों से छिपा लिया और फिर मेरी तरफ देखा. दीदी दो कदम मेरे पास आई , और वो ब्रा मेरे हाथ में दे दी. मैने वो ब्रा हाथ में पकड़ ली, दीदी वहीं पर खड़ी रही, मैने ब्रा के पीछे हुक्स के पास लगे छोटे से टॅग को देखा, उस पर लिखा था साइज़ 34.

साइज़ 34 , ठीक है बढ़िया है, क्यों दीदी? मैने उपर दीदी की तरफ देखते हुए पूछा.

दीदी ने अपनी भोहें चढ़ा कर मेरे हाथ से ब्रा ले ली, और बोली... ठीक है या नही ... तुम बताओ?

कुछ सेकेंड की शांति के बाद मैने दीदी की तरफ देखा, कुछ पल के बाद दीदी ने फिर से अपनी भोहें चढ़ा ली, शायद वो मेरे जवाब का इंतेजार कर रही थी.

सॉरी, मैने सोचा तुम.... मैं बोला

कुछ पल के बाद दीदी कन्फ्यूज़ होकर बोली... क्या सोचा?

राज : मैने सोचा कि आप मुझे वो खोल के दिखाओगी

दीदी के गाल गुलाबी हो गये और वो बोली, राज तुम पहले भी देख चुके हो...

राज: तो आप नही दिखाओगी?

दीदी ने थोड़ा झिझकते हुए इंतेजार किया, तब तक, जब तक लगे कि उनकी भी कुछ समझ में नही आ रहा. फिर दीदी ने एक लंबी गहरी साँस ली, और फिर अपनी शर्ट को उपर कर दिया. दीदी ने अपनी शर्ट अपनी चूंचियों से भी उपर चढ़ा ली. दीदी ने अंदर ब्रा नही पहन रखी थी, दीदी की नंगी चूंचियाँ देख के मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. दीदी की चून्चियो को जैसे ही आज़ादी मिली तो दीदी के निपल्स खड़े होकर एक दम तन गये. दीदी ने फिर अपनी शर्ट नीचे कर ली.

हालाँकि दीदी की आँखों में चमक थी, लेकिन उनको जो कुछ हो रहा था उस का एहसास था, दीदी ने पूछा, तो ठीक है राज?

मैने दीदी की तरफ देखा और एक गरम मुस्कुराहट के साथ जोश में बोला, दीदी आप बहुत सुंदर हो, आप के वो दोनो एक दम पर्फेक्ट हैं.

दीदी मुस्कुराइ और फिर कुछ पुराने कपड़ों को फोल्ड करने लगी, फिर बोली, थॅंक्स राज, कितना अच्छा होता अगर भगवान मेरा सब कुछ ऐसा ही सुंदर बनाता.

मैने पूछा, दीदी आप कहना क्या चाहती हो?

दीदी ने बिना मेरी तरफ देखे हुआ कपड़े फोल्ड करते हुए बोला, मेरा मतलब था कि कितना अच्छा होता अगर मेरा पूरा शरीर ही सुंदर होता.

मैने एक पल दीदी की तरफ देखा और फिर धीरे से बोला, दीदी मैं आपका सब कुछ देख चुका हूँ, और आपका सब कुछ बहुत सुंदर है.

दीदी ने एक दम कपड़े फोल्ड करने बंद किए, और मेरी तरफ देखा.

दीदी: राज, तुम्हारे जैसा भाई अभी तक किसी बेहन को नही मिला होगा.

मैं मुस्कुराया और अविश्वास में अपने कंधे उँचका दिए.

दीदी कपड़ों को हाथ में लेकर बोली, पता नही क्यों आज सुबह जब मैं उठी तभी से मैं कुछ उदास थी. मैं अपने आप के बारे में मोटी, बदसूरत और ना जाने क्या क्या सोच रही थी. तुम्हारी बातों से मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा है, दीदी ने स्माइल करते हुए कहा. हालाँकि एक बात बता दूं कि तुमने मेरा सब कुछ अभी इतने गौर से नही देखा है.

मैं पिछले कुछ हफ्तों की रील अपने दिमाग़ में चलाने लगा, मेरे समझ में नही आया कि दीदी क्या कह रही है, मैने ऐसा क्या नही देखा है?

डॉली दीदी बिल्कुल चुप थी.

राज: दीदी बताओ ना, प्लीज़ घबराओ नही सब ठीक है

दीदी अपना होंठ दाँतों से काटते हुए उस बॉक्स के पास आई जहाँ पर मैं बैठा हुआ था. दीदी एक पल के लिए मेरे सामने खड़ी हो गयी, फिर अपने हाथ के अंगूठे को अपनी पॅंट की एलास्टिक में फन्साते हुए उसे धीर धीरे नीचे करने लगी. दीदी की पॅंट के साथ उनकी ब्लू पैंटी भी नीचे आ रही थी, दीदी की झान्टे अब दिखने लगी थी, अब पॅंट और पैंटी वहाँ पर आ चुकी थी जहाँ से जांघें शुरू होती हैं.

दीदी: मुझे नही मालूम...... दीदी थोड़ा हक्लाई और फिर जिस तरह वो मेरे सामने खड़ी थी थोड़ा नर्वस भी थी, क्यों कि दीदी की झान्टे अब सॉफ दिखाई दे रही थी. दीदी ने हिम्मत कर के पूछा, क्या मेरा ये सब भी उतना ही सुंदर है, उतना जितनी की मेरी बाकी शरीर.

मेरे को विश्वास नही हो रहा था कि दीदी ऐसे मुझे अपने प्राइवेट पार्ट्स दिखाएगी. मैं इस दृश्य को अपने दिमाग़ में संजोए जा रहा था, और मेरे दिमाग़ में इसकी वीडियो तय्यार हो रही थी. जो कुछ मैं देख रहा था, दीदी की हल्की हल्की झान्टे, और वो दोनो टाँगों के बीच झान्टो से सज़ा हुआ छोटा सा त्रिकोण. दीदी की दोनो टाँगों के बीच, चूत का आकार लेने को बेकरार नीचे के वो आउटर लिप्स, दीदी की स्किन जो क्रीस बनाकर चूत कर रूप ले रही थी, उस को देख रहा था, वो फूली हुई चूत और वो चूत के बाहर वाले लिप्स जो दीदी को एक बेहद आस्कर्षक लड़की बना रहे थे. दीदी की नाभि से थोड़ा नीचे से शुरू हुई झान्टे चूत को एक ट्राइंगल बना के ढकने का प्रयास कर रही थी, और फिर नीचे कुछ इंच की एक लकीर बना रही थी. दीदी ने अपनी झान्टे ट्रिम कर रखी थी, उनको एक जंगल का रूप देने से पहले ही काट दिया गया था, लेकिन चूत की वो लकीर झान्टो के बीच शुरू होती हुई सॉफ नज़र आ रही थी, लग रहा था कि वो कितनी सॉफ्ट है. दीदी के शरीर से निकलती हुई मादक गंध मुझे पागल कर रही थी.

 
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दीदी ने होश में आते हुए धीरे से कहा: राज....

मैने दीदी की तरफ देखा और बोला: दीदी आप का सब कुछ बहुत सुंदर है, सच में. मैं उस नशे में बोले जा रहा था.

मैं खड़ा हुआ और दीदी की आँखों में आँखें डालकर दीदी की तरफ आगे बढ़कर दीदी को अपनी बाहों में भर लिया. दीदी ने भी अपनी पॅंट की परवाह ना करते हुए मुझ को बाहों में ले लिया, और मेरे कान के पास ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगी. मैं दीदी की पीठ पर हाथ फिरा रहा था. मेरा लंड दीदी की चूत के अगले नंगे भाग पर दबाव बना रहा था, दीदी की पैंट और पैंटी अभी भी नीचे खिसकी हुई थी.

डॉली दीदी ने मेरी कमर पर हाथ रखा और मेरे से चिपक गयी. मैं दीदी के बालों में कहीं खो गया और दीदी के पूरे शरीर पर हाथ फेरने लगा. दीदी ने मुझे धकेलते हुए बॉक्स के उपर लिटा दिया, अब मेरे पैर बॉक्स के नीचे और शरीर का बाकी हिस्सा बॉक्स के उपर था. दीदी ने मेरी तरफ देखे बिना, बॉक्स के दोनो तरफ अपने पैर कर लिए और मेरे चेहरे के उपर दोनो पैर फैला के खड़ी हो गयी. मैने तुरंत दीदी के एक पैर को थोड़ा उठा के, और अपना सिर उँचा कर अपना मूँह दीदी की चूत पर रख दिया. मेरा चेहरा अब चूत के अगले भाग में घुसा हुआ था और दीदी ने मुझे कस के पकड़ रखा था. दीदी की पैंट और पैंटी हालाँकि काफ़ी नीचे थी, लेकिन मैने उन दोनो को उंगली फँसा के थोड़ा और नीचे कर दिया. दीदी की चूत अब सॉफ दिखाई दे रही थी, और दीदी अपनी झान्टो से धकि चूत को मेरे चेहरे पर रगड़ रही थी. मेरी नाक और मूँह दीदी की चूत से निकलती मादक सुगंध से भर चुके थे, और आग में घी का काम कर रहे थे. जैसे ही मैने अपने मूँह के होंठ खोले तो दीदी की झान्टो को अपनी जीभ पर घिसते हुए महसूस किया , और दीदी की हल्की हल्की सिसकियाँ सुनाई देने लगी. दीदी अपनी गान्ड को हिला रही थी, और अपनी चूत को मेरे उपर घिस रही थी. मैं चाहता था कि दीदी की पॅंट को पूरा उतार दूं जिस से मैं दीदी को ठीक तरह से टच कर सकूँ, चूत का स्वाद ले सकूँ, और अपने होंठों से दीदी की टाँगों के बीच चूस सकूँ. जिस तरह से दीदी अपने आप को मेरे सामने प्रेज़ेंट कर के ये सब ऑफर कर रही थी, मुझे अपने आप पर कंट्रोल नही हो रहा था. मेरे हाथ दीदी के हिप्स पर थे, और दीदी की पैंट को नीचे कर रहे थे, दीदी ने ऐसा करने से बिल्कुल नही रोका.

तभी उपर किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी, हम दोनो घबरा गये. दीदी तुरंत मेरे उपर से हटी और अपने कपड़े और बाल ठीक किए. सीढ़ियों पर किसी के बेसमेंट की तरफ उतरने की आवाज़ सुनाई दी, जहाँ कि हम दोनो थे, मैं भी उठकर अपने कपड़े ठीक करने लगा, और अपने मूँह पर लगे माय्स्चर को सॉफ कर के नॉर्मल होने की कोशिश करने लगा. दीदी पुराने कपड़ों के खुले हुए बॉक्स के पास चली गयी और हाथ में एक शर्ट उठा के उसको फोल्ड करने लगी, तभी मम्मी अंदर आ गयी.

मम्मी : गुड मॉर्निंग, बच्चों, अर्रे वाह डॉली, ये पुराने कपड़ों को फोल्ड कर रही हो. मम्मी ने हम दोनो की तरफ देखा और फिर पूछा, सब ठीक तो है ना?

हां मम्मी, बस थोड़ी देर पहले ही मैं उठा हूँ... मैने कहा

डॉली दीदी ने मम्मी की तरफ देखते हुए बोला, हां मम्मी मैं सोच रही थी कि राज यहाँ से जाए तो मैं अपने ये सारे कपड़े तसल्ली से फोल्ड कर लूँ. दीदी ने मुझ पर गुस्सा होते हुए दिखाने का नाटक किया.

मैने उठ के जाते हुए कहा, सॉरी दीदी, लेकिन ऐसा नही है कि आज से पहले मैने कोई ब्रा देखी ही ना हो...

मम्मी: दोनो अपना अपना काम करो, और फिर से लड़ाई मत करो, मम्मी ने प्यार से डाँटते हुए कहा

मैने भगवान का शुक्रिया अदा किया और वहाँ से चल दिया, वो दोनो बातें कर रही थी, मैं उपर अपने रूम में आ गया. मैने खिड़की में से पापा को कार का बॉनेट उठा कर कुछ चेक करते हुए देखा..

मैने नहा के अपने कपड़े चेंज कर लिए, और थोड़ी देर बाद जब डॉली दीदी से मिला, तो हम दोनो ने एक दूसरे को बताया कि हम कितना डर गये थे जब मम्मी वहाँ पर एक दम आ गयी थी.

दीदी: सॉरी राज, लगता है मैं कुछ ज़्यादा ही भावनाओं में बह गयी थी, दीदी ने फुसफुसाते हुए कहा. हम दोनो डाइनिंग टेबल पर बैठ के खाना खा रहे थे और मम्मी पापा दोनो किचन में थे.

राज: दीदी, मेरे से किस बात का सॉरी कह रही हो? वो तो बस मम्मी पापा....मेरा मतलब...

डॉली दीदी: जो कुछ मैने किया उस से तुम को बुरा तो नही लगा ना. मैं तो इसी बात से परेशान थी

राज: अर्रे नही दीदी, मेरे को क्यों बुरा लगेगा, बिल्कुल नही दीदी, मैने दीदी का हाथ अपने हाथ में लेकर दबा दिया.

दीदी मुस्कुराइ और मेरे हाथ को दबाते हुए बोली, मैं ये बात याद रखूँगी...

अगले एक डेढ़ हफ्ते मैं काफ़ी बिज़ी रहा. असाइनमेंट्स, कुछ और काम, और तान्या के साथ कभी कभार डेट्स, इन सब में इतना बिज़ी रहा कि ज़्यादातर मैं घर से दूर ही रहा. अगर डॉली दीदी ने अगले फ्राइडे को मेरे घर से निकलने से पहले वो बात ना बोली होती तो अब तक मैं काफ़ी परेशान हो चुका होता. हम दोनो एक दूसरे को बता रहे थे कैसे हम इतना ज़्यादा बिज़ी हैं और स्ट्रेस में भी हैं (दीदी भी काफ़ी बिज़ी थी इस बीच). हम दोनो इस बात से सहमत थे कि कैसे काम के प्रेशर ने हमारे मूड और हमारी दोस्ती और पास आने पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है. दीदी मेरे पास आई और उसने हंसते हुए कहा, मुझे लगता है हम को कुछ स्पेशल करना चाहिए. मैने पूछा ऐसा क्या स्पेशल कर सकते हैं? दीदी ने अपना होंठ काटते हुए कहा, क्यों ना हम दोनो नंगे होकर बिना एक दूसरे को टच किए मस्ती करें? मुझे ऐसी परिस्तिथि में कोई रास्ता नज़र नही आ रहा था. मैने बस हां में अपनी गर्दन हिला दी.

ये सोच सोच के कि हम ने क्या करने का डिसाइड किया था, इंतेजार करना मुश्किल होता जा रहा था. हालाँकि 2 हफ्ते बीत चुके थे लेकिन ना तो मैने पॉर्न देखी थी और ना मूठ मारी थी, तान्या एक महीने के बाद भी अपनी चूत देने को तय्यार नही थी. तो उस फ्राइडे की रात को जब मम्मी पापा सोने के लिए अपने बेडरूम में जा चुके थे और हम दोनो ड्रॉयिंग रूम में मूवी देख रहे थे, मैने दीदी की तरफ देखा, हम दोनो एक दूसरे को देख के मुस्कुराए. दीदी उठ के मेरे पास 3 सीटर सोफे पर बैठ गयी, मैने दीदी की फैली हुई बाँह पर अपना सिर रख दिया और दीदी को अपनी दोनो बाहों में भर लिया. हम उस डिसिशन लेने के कारण, दोनो आज कुछ ज़्यादा ही प्यार और केर दिखा रहे थे. हम आज से पहले कभी ऐसे नही बैठे थे, इस तरह मैने दीदी को कभी बाहों में नही भरा था, दीदी का सिर मेरी छाती पर टिका था, लेकिन आज ये सब उचित लग रहा था.

थोड़ी देर बाद हम ड्रॉयिंग रूम से उठ के टीवी बंद करके बेडरूम में जाने लगे. बिना कुछ बोले हम अपने ड्यूप्लेक्स घर की सीढ़ियों पर उपर चढ़ के मेरे बेडरूम तक पहुँचे, और डोर को अपने पीछे बंद कर लिया. दीदी मेरी तरफ देख के स्माइल करते हुए पास आई और मेरी एक झप्पी ले ली. मैने भी दीदी को अपनी बाहों में लेते हुए दीदी को अपने और पास कर लिया. कुछ देर हम एक दूसरे को आँखों में आँखें डाल के देखते रहे और मुस्कुराते रहे. दीदी अपना होंठ दाँतों से काट रही थी और अपनी आइब्रोज को चढ़ा रही थी. हम थोड़ा हट के कुछ फुट की दूरी पर खड़े हो गये.

मैने पूछा, तो फिर तय्यार हो दीदी? दीदी जैसे पहले से तय्यार थी उसने एग्ज़ाइटेड होकर तुरंत हां में अपनी गर्दन हिला दी.

हम एक साथ अपने कपड़े उतारने लगे. मैं जब अपनी टी-शर्ट उतार रहा था तब दीदी अपनी पॅंट के बटन खोल के नीचे खींच रही थी. हम थोड़ा रुके, और एक दूसरे को थोड़ा नर्वस्ली लेकिन एग्ज़ाइटेड हो के देखा, हम दोनो अंडरवेर पहने खड़े थे. थोड़ा ज़्यादा ही मस्ती में दीदी ने अपनी ब्रा का हुक खोला और उसे धीरे धीरे उतार के दूर फेंक दिया, दीदी की मस्त मस्त चूंचियाँ अब मेरे सामने थी. ब्रा से आज़ाद होने के बाद दीदी के निपल खुली हवा मिलते ही थोड़ा कड़क होना शुरू हो गये.

दीदी ने ब्रा फेंकने के बाद मुझे आशा भरी निगाहों से देखा. मैं कुछ देर के लिए संकोच करने के बाद अपने बॉक्सर को नीचे करने लगा, दीदी ये सब देख रही थी. मैने बॉक्सर्स में से अपने पैर निकाले और फिर सीधा खड़ा हो गया, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था, और उपर दीदी की तरफ पॉइंट कर के सलामी दे रहा था. दीदी उसे कुछ देर देखती रही, और फिर मुझे देख के मुस्कुराइ. दीदी नीचे झुकी और पैंटी नीचे करके दीदी ने मेरे उपकार का बदला दे दिया, दीदी ने जब अपनी पैंटी को नीचे की तरफ सरकाया तो दीदी की मस्त मखमली त्वचा और वो हल्की हल्की ट्रिम की हुई झान्टे जो दीदी के दोनो पैरों के बीच घुस रही थी, उनका दीदार हो गया. दीदी फिर सीधा हुई और अपने पोनीटेल में बँधे बालों को ठीक किया, मेरी तरफ स्माइल किया, मुझे अपने सुंदर नग्न शरीर की तरफ देखता हुआ पाकर, संकोच में अपने होंठो को दाँतों से काटने लगी.

दीदी वाकई में बहुत सुंदर थी, उनका शरीर एक दम गठीला और बेदाग था, दीदी के उभार लाजवाब थे. मेरे को ये सोच के बड़ा अजीब लगा कि मैं अपने शरीर की तुलना दीदी से कर रहा हूँ, दीदी की कोमल त्वचा, एक जैसे कंधे, और एक जैसी मसल टोन. दीदी भी मेरे नंगे शरीर को देख रही थी, और मेरे खड़े लंड पर उसका विशेष ध्यान था. दीदी ने अपनी आँखों में आए किसी आइब्रो के बाल को निकाला, फिर मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी.

दीदी ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा, ऐसा लगता है कि तुम पूरी तरह तय्यार हो. तुम चाहो तो मैं और ज़्यादा झुक के थोड़ी जगह बना देती हूँ?

राज: हां दीदी, भगवान के लिए प्लीज़.....

दीदी मुस्कुराइ और मेरे बेड पर उल्टी होकर लेट गयी, और अपने दोनो हाथ बेड पर अपने सिर की तरफ रख दिए. अपना एक घुटना उपर उठा के, मेरी तरफ अपने कंधे के उपर से पीछे घूम के देखा. दीदी की चूत अब पूरी तरह से दिखाई दे रही थी. दीदी ने मुझे पास आने के लिए एनकरेज किया, मैं अब दीदी के पीछे करीब 4 फुट की दूरी पर खड़ा था, दीदी देख रही थी मैं कैसे अपना लंड हिला रहा हूँ. मैं दीदी के गान्ड की गोलाईयों को घूर के देख रहा था, और उनके बीच अंदर की तरफ धन्से छिपे हुए गान्ड के छेद को, मैं दीदी की चूत के दोनों होठों को घूरे जा रहा था. मैं कल्पना कर रहा था कि चूसने पर इनका स्वाद कैसा होगा, वो छूने पर कैसी लगेंगे, और साथ साथ मूठ भी मारता जा रहा था.

तुम होने वाले हो क्या राज? दीदी ने धीरे से पूछा. जब मैने हां में सिर हिलाया तो दीदी ने कहा, अभी नही, थोड़ा रूको, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसा बोल के दीदी खड़ी होने लगी.

मैं रुक गया और लंड को अपने हाथ से छोड़ दिया, थोड़ा अजीब लगा लेकिन मुझे दीदी पर विश्वास था. दीदी बेड पर पहले मेरी तरफ मूँह कर के बैठ गयी, और फिर घूम के बेड पर पीठ के बल लेट गयी. दीदी ने मेरी बाँह पकड़ी और अपनी तरफ खींचा, और फिर अपनी नशीली आँखों से मेरी तरफ देखने लगी.

हम एक दूसरे को टच नही करेंगे.... लेकिन तुम मेरे उपर तो आ जाओ?

मैं बिना एक पल गँवाए, अपने चारों हाथ पैरों पर बेड पे सरकने लगा. मेरा लंड अब भी क़ुतुब मीनार के माफिक खड़ा था, लेकिन मैं इस चीज़ का ध्यान रखे हुआ था कि कहीं वो दीदी को ग़लती से भी टच ना कर ले. दीदी ने अपने दोनो घुटने थोड़ा उपर किए और टाँगों को थोड़ा फैला दिया, जिस से मैं दीदी के और पास जा सका, और अपने दोनो हाथ गद्दे पर दीदी की छाती के दोनो तरफ रख दिए. एक पल के संकोच के बाद मैं थोड़ा और आगे खिसका, अब मेरी दोनो जांघें दीदी की जांघों के बीच थी और मेरा लंड दीदी के पेट के उपर फनफना रहा था. हम ने एक दूसरे की तरफ थोड़ा घबराते हुए देखा. मैने दीदी की चूंचियों पर एक नज़र दौड़ाई और फिर दीदी की तरफ स्माइल करने का साहस किया. दीदी ने भी स्माइल किया.

 
तुमको ये अच्छे लगते हैं, राज? दीदी ने पूछा. मैं बस मुस्कुरा कर रह गया. दीदी अपने दोनो हाथों को अपनी चूंचियों पर ले गयी और उन्हे मेरे सामने सहलाने लगी. काश इनको तुम दबा रहे होते राज? दीदी ने अपनी थोड़ी से नर्वुसनेस को छुपाते हुए कहा.

दीदी, आप सोच भी नही सकती, ये मुझे कितने अच्छे लगते हैं, मैने कहा. मैं देख रहा था कैसे दीदी की उंगलियाँ उन मुलायम मम्मों को हल्का हल्का दबा रही थी और जैसे ही दीदी की उंगली खड़े हुए निपल को छूती, दीदी अंदर अंदर ही अंदर सिसक उठती. यकायक मैने अपने आप को एक बाँह पर संभाला और दूसरे हाथ से अपने खड़े लंड को पकड़ के आगे पीछे करके हिलाने लगा.

दीदी ने नीचे देखा कैसे मैं अपनी हथेली में लंड को पकड़ के, लंड की लंबाई तक उपर नीचे कर रहा हूँ. मैं देख रहा था दीदी अपनी चूंचियों को मसल रही थी, और अब अपने निपल्स की थोड़ा ज़्यादा चुटकी भर रही थी.

दीदी ने पूछा, काश ये हाथ तुम्हारा होता? मैने हां में सिर हिलाया, और कब अपने आप मेरी जीभ मेरे होंठों पर घूम गयी मुझे पता भी नही चला.

मैं भी ऐसा ही चाहती हूँ राज, दीदी ने कहा.

मैने दीदी के चेहरे की तरफ देखा, दीदी अब भी नीचे मेरे को मूठ मारते हुए, मैं क्या कर रहा हूँ ये देख रही थी. दीदी ने अपना एक हाथ चून्चि पर से हटा के नीचे अपनी पसलियों पर फिराते हुए अपने पेट पर ले आई. मैने अपनी पीठ थोड़ा पीछे की जिस से मैं नज़ारा ले सकूँ, मैने देखा दीदी का हाथ अपनी झान्टो पर से रेंगता हुआ अपनी दोनो जाघो के बीच पहुँच गया था. धीरे लेकिन यक़ीनन दीदी की उंगलियाँ नीचे की तरफ जा रही थी, पेट और चूत के बीच, झान्टो से घिरे उस तोड़ा उठान लिए हुए भाग से होती हुई, अब चूत में सरक चुकी थी. हम दोनो किसी और ही दुनिया में खो गये थे, और एक दूसरे को देख रहे थे, मैं अपने लंड पर झटके मार रहा था, दीदी की चूत से बस 6 इंच उपर, जहाँ दीदी की उंगलियाँ दोनो जांघों के बीच कही गायब हो गयी थी. दीदी ने अपने घुटने थोड़े चौड़े किए और हल्का सा काँपी, मैने अपने मूठ मारने की स्पीड को थोड़ा धीमा किया और दीदी के हाथ की कलाई को हिलते हुए देखने लगा, जिस से ये पता चल रहा था कि उंगलियाँ क्या कर रही हैं. मैने उपर की तरफ देखा तो दीदी का एक हाथ अपनी चूंचियों को मसल रहा था, मैने फिर नीचे देखा.

दीदी अब हाँफने लगी थी. वो ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रही थी, और मेरे लंड की तरफ देखते हुए काँप रही थी. दीदी ने अपना निचला होंठ दाँतों से काटा, फिर हल्के से कराही, और अपने हिप्स को थोड़ा घुमा के अपनी चूत और उपर कर दी. दीदी ने अपने टाँगें और चौड़ी कर दी, दीदी ने अपने पैर के पंजे मेरी पिंदलियों पर रख दिए, और अपनी जांघों के बीच मुझे ज़ोर से जकड लिया. दीदी के अपनी चिकनी चूत पर फिसलती उंगलियों की आवाज़ और मेरे लंड के प्रेकुं छोड़ने के कारण आई चिकनाई के मेरे लंड पर फैलने के बाद मूठ मारने के कारण आ रही आवाज़ें हमारे लिए नयी नही थी. कुछ देर बाद दीदी लंबी लंबी साँसें ले रही थी और काँप रही थी, उसी तरह से जैसे कि मैं, दीदी के चेहरे में अपना चेहरा घुसा के हाँफ रहा था. दीदी ने अपना हाथ चूंची से हटा के मेरी गर्दन में डाल दिया, और ज़ोर ज़ोर से सहलाने लगी और मेरे को ज़ोर से पकड़ के गुर्राते हुए हिलने लगी.

मैने पहले से चेतावनी देते हुए कहा, दीदी मैं बस छूटने ही वाला हूँ !!

दीदी गुर्राई... हे भगवान... निकाल दो राज....फिर दीदी ने अपने हाथ को अपनी चूत से हटा के मेरे कंधे को पकड़ लिया.

दीदी के काँपते हुए पैरों ने मुझे ज़ोर से जकड रखा था, और वो अपनी गान्ड आगे पीछे कर रही थी. कुछ झटकों के बाद मैं झड़ने लगा, लंड ने वीर्य की पिचकारियों से दीदी के पूरे पेट और छाती को गीला कर दिया. दीदी ने करहाते हुए अपनी गान्ड थोड़ी उपर उठाई, और दीदी की चूत का सामने वाले उठे हुए झान्टो से ढके भाग ने मेरी गोलियों को छू गया. मैने बिना हीले अपनी गोलियों को दीदी की चिकनी त्वचा पर थोड़ा और दबा दिया, इस हरकत के बाद मेरे मूँह से भी गुर्राने की आवाज़ निकली और मैं वीर्य की धार पर धार दीदी के उपर छोड़ने लगा.

अब बर्दाश्त करना मेरे बस की बात नही थी, मैने अपने लंड नीचे किया जिस से वो दीदी की झान्टोन के उपर छू सके. दीदी की मेरे वीर्य से सनी स्किन के उपर मैने अपने लंड को दबाया और आगे पीछे करने लगा, दीदी के मूँह से सिसकियाँ निकलने लगी और वो अपनी गान्ड उठाने लगी. मैं अपने लंड को दीदी की चिकनी स्किन के उपर हर जगह घिसने लगा, जिस के कारण मेरे वीर्य का पानी सारी जगह फैल गया, दीदी की झान्टे भी गीली हो गयी. दीदी ने मेरे सिर को पकड़ा और मेरे चेहरे को अपनी तरफ खींचा और एक भूखी शेरनी की तरह मुझे किस करने लगी. मैने भी अपने लंड को हाथ में से छोड़ दिया और दीदी के उपर पूरी तरह लेट गया, मेरा लंड अभी भी दीदी की झान्टोन के त्रिकोण और पेट पर फिसल रहा था. मैने दीदी को अपनी बाहों में भर लिया, जब हम एक दूसरे को गले लगा कर एक दूसरे के शरीर को घिस रहे थे, तब दीदी की चूंचियाँ मेरी छाती से दब्ति हुई महसूस हो रही थी. दीदी ने मुझे अपने पैरों से मुझे ज़ोर से अपनी तरफ जकड रखा था, और मैं अपने लंड को ऐसे उपर नीचे कर रहा था मानो हम सेक्स कर रहे हों, दीदी भी अपनी गान्ड उठा उठा के मेरा साथ दे रही थी. दीदी की जीभ को मैने अपने होंठों पर महसूस किया, और बस कुछ पलों में हम फ्रेंच किस कर रहे थे, अपनी जीभ को दूसरे की जीभ पर बिल्कुल मगन हो कर फिरा कर चूस रहे थे.

बिल्कुल जन्नत की तरह महसूस हो रहा था, जब तक दोनो का क्लाइमॅक्स ठंडा पड़ता हम वैसे ही एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे. ये एक अजीब सी फीलिंग थी, जो कुछ हम दोनो ने अभी अभी किया था. मेरे दिमाग़ में बहुत कुछ चल रहा था, मेरी सग़ी बड़ी बेहन मेरे नीचे, मेरे वीर्य के पानी सनी हुई, नंगी लेटी हुई थी. दीदी को अपनी बाहों में लिए मुझे अब एहसास हुआ कि दीदी की साँसें और हार्ट बीट अब नॉर्मल हो चुकी हैं, तो मुझे किसी चीज़ का पछतावा नही हुआ. और जब दीदी ने मेरी तरफ घूम के मेरी गर्दन पर एक नाज़ुक सा किस किया, तो मुझे यकीन हो गया कि दीदी को भी इस बात का कोई पछतावा नही है.

हम एक दूसरे को अपनी बाहों में लिए ऐसे पूरी तरह नंगे ही लेटे रहे, पसीने से भीगे हुए और वीर्य के पानी से सने हुए. सुबह करीब 5 बजे दीदी उठी, और अपने सुंदर नग्न शरीर पर मेरा एक ब्लंकेट ओढ़ा, अपने कपड़े उठाए और चली गयी, पर जाने से पहले आधी नींद में एक प्यारा सा खुशी से भरा स्माइल दे गयी.

काले घने बाल जो लहरों में नीचे की तरफ आ रहे थे, मानो उगते हुए सूरज की रोशनी में समुंदर में लहरें अंगड़ायाँ ले रही हो.... आँखों में शरारत भरी चमक... कोमल गुलाबी होंठ... जो कि प्यार का रहस्या छुपाए हुए थे...

राज?

उसके हल्के से टच से मानो मेरे शरीर में बिजली का करेंट दौड़ गया...

राज !

मैं अपने ख्यालो में डूबे हुआ था, अपना नाम सुन के होश में आया और तान्या को मेरी तरफ खीजकर देखते हुए पाया.

तान्या: अब तुम्हारा टर्न है राज, आज तुम किस दुनिया में खोए हुए हो?

शरम को छुपाते हुए मुझे अहसास हुआ कि मैं दिन में फिर से आज भी दीदी के सपने देख रहा था, ये आज पहली बार नही हो रहा था. मैं होश में आकर खड़ा हुआ और तान्या के पास से ग़ुजरकर बोलिंग बॉल को रिटर्न से उठाने चल पड़ा. मेरा पहला शॉट बेकार गया. बॉल के रिटर्न होने का वेट करते मैने तान्या की तरफ देखा, वो मुझे घूर रही थी और उसकी आँखों में खुशी नही थी.

मेरे अगले शॉट में और भी कम पिन्स गिरी.

जैसे ही मैं बैठने के लिए लौटा, तो तान्या ने मुझे रोक लिया. तान्या ने पूछा, तुम्हारे साथ प्राब्लम क्या है राज? ऐसा लग रहा है जैसे तुम यहाँ होकर भी यहाँ नही हो.

मैं तुरंत बचाव की मुद्रा में आ गया, और बोला, तान्या, प्लीज़ थोड़ा चुप रहोगी प्लीज़, मैं ठीक हूँ.

शायद मैने ग़लत कहा था. मैने तान्या की आँखों पर परदा डालने की कोशिश की, लेकिन वो परदा अब दीवार को रूप ले रहा था. तान्या बोली, ओके ठीक है, और उठकर बोल करने चली गयी.

अगले आधे घंटे हम दोनो के बीच शांति छाइ रही. बोलिंग का खेल, मानो मस्ती ना होकर एक ऐसा काम हो गया था जिसे हम ज़बरदस्ती कर रहे थे. मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था.
 
हालाँकि आज तान्या एक दम सेक्सी मस्त माल लग रही थी, लेकिन उसने हम दोनो के बीच फिज़िकल ना होने की जो दीवार बना रखी थी – एक ऐसी दीवार जो मेरे और दीदी के बीच नही थी. मुझे ये दीवार बिल्कुल पसंद नही थी. मैं तान्या के साथ वो सब करना चाहता था जो मैं दीदी के साथ कर रहा था. ये नाराज़गी अब गुस्से और निराशा में तब्दील होती जा रही थी.

मैं जानता था, मैं ये सब होते हुए देख रहा था. मुझे मालूम था कि मैं ये सब नही चाहता था, जो कुछ भी हो रहा है. मैं उसको अपने आप से दूर कर रहा था.

फाइनली गेम ख़तम हुआ, हम ने शूस वापस किए और मैने पेमेंट कर दिया. तान्या मेरा इंतेजार किए बिना गेट से बाहर चली गयी. जैसे ही हम बाहर निकले, इस से पहले कि मैं कुछ बोलता और तान्या से माफी मागता, तान्या का मोबाइल बज उठा. तान्या एंट्रेन्स गेट के साइड में चली गयी और मैं उस के पास खड़ा हो गया, तान्या ने अपने छोटे से पर्स में से मोबाइल निकाला और बातें करने लगी.

तान्या ने उसको नमस्ते किया, जिस किसी ने भी कॉल किया था, तान्या के चेहरे का रंग एक दम उड़ गया, क्या? तान्या ने पूछा. एक पल को शांत होकर वो सुनती रही. कैसे.... मेरा मतलब है कब? तान्या की आँखों में आँसू आ गये. फोन को कान पर लगाए हुए ही, अपने दूसरे हाथ से अपने गालों पर लुढ़क रहे आँसू को पोन्छा. ओके.... ठीक है...मैं.... फिर मैं आपको कल कॉल करूँ? उसकी आवाज़ भर्रा गयी थी. बाइ.... नमस्ते.... तान्या ने कॉल काट दिया, और नज़रें उपर कर के सितारों और पार्किंग में जल रही पीली हलोजन लाइट्स को देखने लगी.

क्या हुआ तान्या? इस से पहले कि मैं ये बोल भी पाता, तान्या बीच में बोल पड़ी, मुझे जाना होगा, थॅंक्स फॉर टेकिंग मी आउट, तान्या ने बस इतना कहा और अपनी कार की तरफ चल दी. मैं वहाँ पर मूक बन के खड़ा रहा, और देखता रहा, तान्या ने कार स्टार्ट की, लाइट जलाई और ड्राइव कर के चली गयी.

जैसे ही मैने अपनी जेब में हाथ डाला, मुझे याद आया कि आज तो तान्या मुझे अपनी कार में लेकर आई थी.... मेरे पास तो कार थी ही नही.

मैने पूरे घटना क्रम को अपने दिमाग़ में दोहराया, फिर अपना मोबाइल निकाल कर दीदी को डाइयल किया. दीदी ने तीसरी घंटी पर फोन उठाया, उसको बड़ा हास्यास्पद लगा कि मैं बोलिंग अल्ले पर अकेला खड़ा हूँ. दीदी ने मेरी आवाज़ सुन के समझ गयी कि कुछ तो गड़बड़ है, और बोली तुम चिंता मत करो बस मैं कुछ देर में वहाँ पहुँचती हूँ.

मैं पार्किंग की छोटी सी बाउंड्री पर बैठ गया और जो कुछ उस शाम हुआ था उसके बारे में सोचने लगा. तान्या के प्रति अपनी फीलिंग्स के बारे में सोचने लगा – अच्छी भी और खराब भी. मैं समझ तो रहा था कि उस कॉल में क्या बात हुई होगी, लेकिन श्योर नही था. तान्या ने मुझे कुछ भी उस बारे में नही बताया था, इस का मतलब उसकी भावनाओं को मैने बहुत ठेस पहुँचाई थी.

मैं जब इस आत्म चिंतन में डूबा हुआ था, तभी पार्किंग की बाउंड्री के पास जहाँ मैं बैठा था तेज स्पीड में, एक कार आकर रुकी, मैं एकदम ठिठक गया. दीदी मुझे घबराया हुआ देख के कार की विंडो में से ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी.

अच्छा सॉरी राज, अब अंदर आ जाओ, मेरे लिए दीदी ने कार का गेट खोला और मैं कार के अंदर बैठ गया. क्या हुआ भाई? वो तुमको यहाँ अकेला क्यों छोड़ गयी?

दीदी ने कार बॅक की, फिर पार्किंग से बाहर निकाल के सड़क पर ले आई.

राज: उसके मोबाइल पर किसी जान पहचान वाले का कॉल आया था, उनकी बातों से ऐसा लगा कि शायद किसी का आक्सिडेंट हो गया है या ऐसा ही कुछ. मुझे लगता है कि शायद वो भूल गयी कि हम दोनो आज एक ही कार में आए थे.

कुछ देर की शांति के बाद दीदी ने मेरी तरफ नज़र फिराई और पूछा, उः..हा... और क्या हुआ? मैने दीदी की तरफ देखा. दीदी आगे बोली, मुझे लगता है कुछ और भी हुआ है.

मैने अपने लिप्स को एक दूसरे के दातों के नीचे दबाते हुए कहा, शायद मैं उसको इग्नोर कर रहा था.

दीदी एक पल खामोश रहने के बाद बोली, तुमको पता है तुमने ऐसा क्यों किया? मुझे लगता था कि तुम उसको वाकई में बहुत प्यार करते हो.

मैं अब भी करता हूँ दीदी ! पर पता नही क्यों. मुझे लगता है वो अब भी मुझसे दूरी बना के रखना चाहती है. मैं उस से करीब आकर प्यार करने की उम्मीद नही रखता. लेकिन मेरे को ये बात समझ नही आती कि वो मुझको अपने करीब समझती है या नही, उस तरह से जैसा हम एक दूसरे के साथ करते हैं.

थोड़ी देर के लिए फिर से खामोशी छा गयी.

राज.... मैं ये पूछना तो नही चाहती, लेकिन क्या तुम दिन में भी ये ही सपने देख रहे थे कि हम आज रात क्या करने वाले हैं? कहीं इस वजह से तो तुम उसको इग्नोर नही कर रहे थे?

मैने झिझकते हुए कहा, हां दीदी...

दीदी ने तुरंत कार को सड़क के साइड में रोक लिया, मैं एक पल को चौंक गया- बहुत सारी गाड़ियाँ हम को पास कर के जा रही थी, दीदी ने पार्किंग लाइट्स ऑन कर दी.

दीदी: राज, सच सच बताओ, तुम उसको प्यार करते हो या नही?

यह कोई बहुत कठिन सवाल नही था, मैं तुरंत बोला, हां दीदी, करता हूँ....

कुछ बोलने से पहले डॉली दीदी ने मेरी तरफ देखा, तो फिर तुमको होश में रहना चाहिए, आई समझ में, ओके? तुमने पहले मुझे बताया था कि वो जल्दी से किसी पर विश्वास नही कर पाती. वो उस हादसे से अभी पूरी तरह उबर नही पाई है, और तुमने आज उसके दिल पर गहरी चोट पहुँचाई है.

दीदी जिस तरह से ज़ोर ज़ोर से मुझसे बोल रही थी, वो मेरे लिए चौंकाने वाला था. जिस ईमानदारी से दीदी ने ये सब कहा था, वो मुझे बुरा लगना चाहिए था, लेकिन मैं दीदी के तान्या के प्रति दया भाव को समझ पा रहा था.

तो मुझे क्या करना चाहिए? मेरा मतलब, उसने फोन पर बात की और बस बाइ बाइ कर के चली गयी... कितनी बेवकूफी की बात है...

तान्या रहती कहाँ है? दीदी ने पूछा. इस से पहले कि मैं कुछ बताता दीदी ने कार सड़क पर चलानी शुरू कर दी थी.

दीदी: मैं नही चाहती की जो कुछ हम दोनो कर रहे हैं उस की वजह से तुम्हारे और तान्या के बीच कोई गड़बड़ हो. ओके? आया समझ में? मैं सीरियस्ली कह रही हूँ. मैं तुम्हारी बेहन हूँ राज, और हम दोनो प्यार नही कर सकते, ओके? तान्या तुमको उतना नही समझती जितना मैं तुमको समझती हूँ. वो तुम्हारे साथ इतना जल्दी नही खुलेगी, जितना जल्दी तुम चाहते हो.

कुछ दूर जहाँ तान्या के अपार्टमेंट की बिल्डिंग थी, उस मेन सड़क पर दीदी ने कार को मोड़ दिया.

राज: तो मुझे क्या करना चाहिए? अगर इन केस आज हमारी बातचीत होती है, तो उसको बीच में रोक कर, अपनी रिलेशन्षिप के बारे में बात करने को, मैं तो उस से नही कह पाउन्गा.

दीदी ने एक गहरी साँस ली, और बोली, नही तुम अपनी रिलेशन्षिप के बारे में कोई बात मत करना. लड़कियाँ चाहती हैं कि तुम उनका पीछा करो, उनको बाकी लोगों के गंदी नज़रों से बचाओ. हम लड़कियाँ उम्मीद करती हैं कि जब ज़रूरत हो तब तुम हम को प्रोटेक्ट करोगे. आज रात तुम उसको ज़रूरत से ज़्यादा भाव दो, जिस से उसको लगे कि तुम उसके लिए किसी से भी लड़ने को तय्यार हो.

मैं दीदी को सवाल भरी नज़र से देखने लगा.

दीदी ने मुझे ऐसे देख के पहचान लिया, दीदी के होंठों पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी. दीदी बोली, ओके, जब तुमने कॉल किया था, तब मैं एक रोमॅंटिक नॉवेल पढ़ रही थी. रूको, सच्ची मैं सही कह रही हूँ. आज तान्या के साथ ऐसी बेवकूफी भरी कोई हरकत मत करना, नही तो मैं तुमसे कभी बात नही करूँगी, ऐसा कहकर दीदी मुस्कुरा दी.

हम तान्या के अपार्टमेंट्स पर पहुँच चुके थे, दीदी ने पार्किंग में कार को पार्क कर दिया. एक लंबी साँस लेते हुए मैने कार का दरवाजा खोला, और कार से बाहर निकल आया. एक लास्ट बार दीदी की तरफ एक नज़र घुमाई, दीदी मेरे को एनकरेज करने के लिए मुस्कुरा दी, मैने अपना मोबाइल जेब से निकाला और तान्या का नंबर डाइयल करने लगा.

दो बार कॉल करने के बाद तान्या ने मेरा कॉल रिसीव किया. उसकी आवाज़ से पता चल रहा था कि वो बहुत थकि हुई है, लेकिन उसकी आवाज़ में थोड़ा सा माफी माँगने वाला अंदाज था, उसने छूटते ही कहा, आइ’म सॉरी, मैं भूल गयी थी कि आज हम दोनो एक ही कार से गये थे.

मेरे दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी. मैने कहा, हे, इट’स ओके, तान्या. मुझे मालूम है आज मैने बहुत बेवकूफी भरी हरकतें की, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.

दूसरी तरफ से कोई जवाब नही आया. दीदी कार में बैठी हुई सब देख रही थी.

तान्या (कुछ पल के बाद) : हां, तुम आज ना जाने कैसी हरकतें कर रहे थे, पर चलो ठीक है कम से कम तुमको रीयलाइज़ तो हुआ.

राज: हां सीरियस्ली, आइ’म वेरी सॉरी. मैं... बाहर... मतलब तुम्हारे अपार्टमेंट के बाहर ही खड़ा हूँ. किसी से लिफ्ट माँग के यहाँ तक आया हूँ. मुझे मालूम है वो जो कॉल आया था वो इंपॉर्टेंट था और उस से तुम परेशान हो. मैं इसी वजह से यहाँ आया हूँ. मुझे मालूम है कि तुम मुझसे अभी नाराज़ हो, और ये सही भी है, मैं सब कुछ मानने को तय्यार हूँ, मैं तुम्हारे पास आना चाहता हूँ.

 
तान्या (फिर से थोड़ी खामोशी के बाद): तुम यहाँ हो?

"म्म ह्म."

तान्या ने गहरी साँस लेते हुए कहा, मैं किसी से नही मिलना चाहती.

मैने तान्या पर ज़्यादा ज़ोर नही डालना चाहता था, लेकिन...., मैं किसी तरह आगे बोला, तान्या मैं तुम्हारी वाकई में बहुत केर करता हूँ, सच कह रहा हूँ. मुझे नही पता कि क्या हुआ है, लेकिन एक बात पक्की है कि अगर तुम परेशान हो, तो मैं भी तुम्हारे साथ उतना ही परेशान हूँ.

तान्या ने कुछ भी बोलने से पहले करीब एक मिनिट तक इंतेजार किया. और जब बोली, तो मेरे दिल की धड़कन मानो बंद हो गयी.

तान्या: मैं.... मुझे लगता है मुझे तुम्हारी इस समय ज़रूरत है. मैं अभी तुम से मिलने नीचे आती हूँ.

मेरे को विश्वास ही नही हुआ, बस उसको सुनता ही रह गया. मैने दीदी की तरफ थंब-अप का इशारा किया, दीदी मुस्कुरा दी, और पार्किंग में से अपनी गाड़ी निकाल के ड्राइव कर के चली गयी. कुछ देर बाद तान्या की परछाई एंट्री वाले रास्ते में लगे शीशे पर, जिस पर धूल जमी हुई थी, दिखाई दी. थोड़ा सा दरवाजा खुलने पर वो ठीक से दिखाई दी, तान्या की आँखें सूजी हुई थी और लाल हो रही थी, बाल बिखरे हुए थे, और उसने बॉक्सर्स और टी-शर्ट पहन रखे थे.

आज से पहले वो इतनी खूबसूरत मुझे पहले कभी नही लगी थी.

मैं आगे बढ़कर उसके पास गया, उसकी परेशानी से भरी आँखों में देखा, और हम दोनो ने एक दूसरे को अपनी बाहों में ले लिया. थोड़ी ही देर में उसकी आँखों से निकलते आँसू ने मेरी टी-शर्ट को कंधे पर गीला कर दिया. कुछ पल के बाद, वो मुझे अपने साथ उपर अपने अपार्टमेंट में ले गयी. डोर के पास बुद्धा की बड़ी सी मूर्ति रखी थी, वो मुझे अपने साथ अंदर ले गयी. उसने बताया कि उसके मम्मी और पापा पिछले दो दिनों से गाँव गये हुए हैं क्योंकि तान्या के दादाजी की तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी.

उस रात होने को कुछ नही हुआ, लेकिन बहुत कुछ बदल गया. हम दोनो सोफे के उपर घंटों बैठे रहे, तान्या ने एक हल्का सा गरम चादर ओढ़ रखा था, उसने मुझे बताया कि उसके दादाजी की आज डेत हो गयी है, और वो अपने दादू से कितना प्यार करती थी. वो अपने दादू के साथ बीते हुए पलों की कहानियाँ मुझे सुबह होने तक सुनाती रही, कुछ मज़ाक भरी और कुछ दर्द भरी. जब वो रोती तो मैं उस को संभाल लेता, उसकी पीठ पर हाथ फिराता और उसको संभालने के लिए एनकरेज करता, जो कुछ मैं कर सकता था, वो बेस्ट करने की कोशिश कर रहा था.

नींद के आगोश में जाने से पहले, तान्या ने मेरी आँखों में देखा, और फुसफुसाई, आइ लव यू, थॅंक यू. और अपने काँपते हुए होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया, और इतना जोरदार किस किया, जिसकी मैने कल्पना भी नही की थी. उसके बाद तान्या ने एक गहरी साँस ली, और मुझसे चिपक कर सो गयी.

मेरी नींद पहले खुल गयी, मुझे तुरंत कुछ अलग सा एहसास हुआ, फिर मुझे याद आया कि मैं कहाँ पर हूँ. तान्या अब भी सिंकूड कर मेरे से चिपकी हुई लेटी हुई थी, सोते हुए उसके होंठ खुले हुए थे. मैने धीरे से अपने हाथ उठा के अपनी आँखें मसली और फिर सोफे पर सहारा लेकर बैठ गया, और चारों तरफ देखने लगा.

कल रात बातें करते हुए, मैने तान्या से एक पल को भी नज़र नही हटाई थी, और मैने उसका अपार्टमेंट का कोई समान नही देखा था. एक लड़की को अपनी गोद में लेटा हुआ पाकर मुझे विश्वास नही हो रहा था, एक ऐसी लड़की जिसको एंजिन्स पर वर्क करना अच्छा लगता था, ड्रॅगनफ्लीस और बटरफ्लाइस ( टिड्डे और तितलियाँ) उसको बेहद पसंद थी. शो केस में रखे इनके लोहे के तार, ग्लास ऑर क्ले स्कल्प्चर्स जो फ्रेम किए हुए थे, और शोकेस को सज़ा रहे थे, इस चीज़ का गवाह थे. जो कंबल हम ने ओढ़ रखा था उस पर भी बटरफ्लाइस बनी हुई थी.

तभी मुझे एहसास हुआ कि तान्या की एअर रिंग्स भी छोटे छोटे ड्रॅगनफ्लीस की बनी हुई हैं. मुझे लगा कि मैं कितना बेवकूफ़ हूँ कि मैने अभी तक इस चीज़ पर गौर ही नही किया.

एक खिड़की से सूरज की किरणों से रोशनी आ रही थी, मैं रूम में रखी बाकी चीज़ों को निहारने लगा, आर्टिफिशियल प्लॅंट्स ऐसे थे, कि यकीन ही ना हो कि ये नकली हैं. मैने दीवार पर टॅंगी किसी पुरुष के चेहरे की फोटो को देखा, पूरे कमरे में बस यह ही एक फोटो थी, मैने अनुमान लगाया जहाँ तक हो ये तान्या के दादाजी की ही होगी.

करीब आधे घंटे बाद, तान्या थोड़ा हिली और फिर अपनी आँखें मसल्ने लगी. उसने अपना हाथ मेरी छाती पर रख दिया, और एक गहरी साँस लेकर, मुस्कुराइ, उसकी आँखें अभी भी आधी बंद थी. तान्या ने एक छोटी सी जमहाई ली और फिर अंगड़ाई ली, फिर अपना चेहरा उठा कर मेरी तरफ देखा. मैं उस को देख के मुस्कुरा दिया, और तान्या के माथे पर आई बालों की एक लट को देखने लगा, उस लट को हटाने का तान्या ने कोई प्रयास नही किया, बस मेरे को देख के स्माइल करती रही.

मेरे साथ कल रात में स्टे करने के लिए थॅंक्स, तान्या ने खराश भरी आवाज़ से कहा.

राज: माइ प्लेषर. थॅंक यू फॉर लेट्टिंग मी स्टे.

तान्या फिर से मुस्कुराइ और मेरे सीने पर अपना सिर रख दिया.

तान्या: राज, तुम ऐसे पहले व्यक्ति हो जो मेरे अपार्टमेंट में पूरी रात रुका हो.

मैने तान्या के बालों में उंगली फिराते हुए कहा, आइ’म सॉरी लेकिन सिचुयेशन ही कुछ ऐसी थी

तान्या ने खिड़की की तरफ और फोटो की तरफ देखते हुए कहा, हां... मैं समझ सकती हूँ. उसने एक गहरी साँस ली और बोली हां शायद ये मेरी ज़रूरत थी....

कुछ देर बाद हम दोनो उठ के खड़े हो गये. तान्या ने मेरे पास आकर मुझे एक जोरदार झप्पी दी, और फिर मुझे अपनी तरफ खींचते हुए एक गरम किस करते हुए मुझे जकड लिया. मैने तान्या के कंधों को अपनी बाहों में जकड रखा था, और ऐसा लग रहा था मानो तान्या पिघलती जा रही हो.

तान्या ने मुझे बताया कि बाथरूम किधर है, मैं फ्रेश होकर अपने फेस को वॉश किया, और अपने बालों को थोड़ा गीला कर के उनको जितना हो सके स्टाइलिश बनाने का प्रयास किया. जब मैं बाथरूम से बाहर निकला तो लिविंग एरिया में कोई नही था, मैं अंदाज़े से बेडरूम की तरफ चल दिया.

दरवाजा आधा खुला हुआ था, मैने सोचा कि तान्या शायद अंदर है, मैं रूम के अंदर घुस गया... और फिर ठिठक गया. तान्या मुझे दिखाई दे रही थी, उसका मूँह दूसरी तरफ था, वो अपने बालों का पोनीटेल बनाने में बिज़ी थी, तान्या ने इस वक़्त सिर्फ़ ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी. मैं चुपचाप खड़े होकर बस तान्या के बालों को उसके नंगे कंधों पर आगे पीछे होते देखता रहा, तान्या की मस्त पीठ , घुमावदार कमर, उसके गोरे गोरे नग्न टाँगें... किसी ने सही कहा है... औरत का शरीर एक जन्नत की तस्वीर है, ये बात एक पुरुष ही समझ सकता है, तान्या को इस रूप में देख के मुझे ऐसा ही लगा. वो मेरी दीदी जैसी दुबली तो नही थी लेकिन उसका माँस सही जगह पर, सही मात्रा में था, वो एक मूरत जैसी लग रही थी, सुंदर कुवर्व्स और लाइन्स... तान्या के शरीर में जो बात थी वो शायद आज तक मैने किसी और लड़की में महसूस नही की थी.

 
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