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Guest
उस दिन वेडनेसडे था, जैसे ही हम क्लास ख़तम कर के कॉलेज से बाहर आए, तान्या ने पूछा तो फिर क्या मूड है?
मैं बोला, भूख लगी है लंच कर लेते हैं
तान्या तुरंत तय्यार हो गयी और अपनी कार वहीं पार्किंग में छोड़ के मेरी कार में ही आ गयी. हम एक अच्छे से 2न्ड फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में गये और एक कॉर्नर टेबल पर बैठ गये.वहाँ लगे ग्लास में से शहर की मेन रोड और उस पर रेंगता ट्रॅफिक सॉफ नज़र आ रहा था.
तान्या आज बहुत सुंदर लग रही थी, उसने अपने काले गहने बाल आज खोल रखे थे. आज उसने वाइट टी-शर्ट जिस पाट कुछ लिखा हुआ था और डार्क ब्लू जीन्स पहन रखी थी. मुझे अपने आप को विश्वास दिलाना पड़ रहा था कि बस हम दोनो अकेले में बैठे हैं, और ऐसा लग रहा था कि वो भी मुझे पसंद करती है.
लंच आ चुका था, हम प्रॉजेक्ट्स के बारे में और बाकी क्लासमेट्स के बारे मे बातें करते हुए खाना खा रहे थे. तान्या ने हाथ धोने के लिए आए गरम पानी में से नींबू उठाकर मेरे फेस पर फेंक दिया और फिर खिलखिलाकर हँसने लगी.
वेटर ने जब पूछा कि डिज़र्ट में क्या लोगे, तो हम एक दूसरे को देखने लगे और फिर मैं बोला, मेरा तो कुछ मीठा खाने का मन कर रहा है.
तान्या हंसते हुए बोली, हां मैं भी खाउन्गि. दोनो ने आइस्क्रीम का फ्लेवर डिसाइड कर के ऑर्डर प्लेस कर दिया. अच्छा हुआ तुम ने ऑर्डर कर दिया, नही तो तुम ये ही सोचते हैं कि मैं बहुत ज़्यादा मीठा खाती हूँ.
मैने शरारत करते हुए कहा, कोई बात नही, तुम्हारा साथ पाने के लिए, ये बंदा कुछ भी करने को हाजिर है.
तान्या कुछ सोचते हुए मेरी तरफ देखने लगी.
तान्या: थॅंक यू, राज...
मैने अपना सिर हिलाया और मुस्कुरा दिया.
कुछ देर में आइस्क्रीम आ गयी और हम खाने लगे. शुरू में तान्या थोड़ा चुप चुप थी पर अब वो खुल के बातें कर रही थी. कुछ देर पहले की तान्या जो मुझे एक आकर्षक और स्वावलंबी लड़की नज़र आ रही थी, वो अब मुझे अपना शिकार लगने लगी थी. तान्या मुझे बता रही थी कैसे उस को बचपन में बहुत ज़्यादा खाने की आदत थी और कैसे उसने इस पर काबू पाया.
तान्या ने आगे बताया कि कैसे वो 10+2 के दौरान एक लड़के की दीवानी हो गयी थी. बात करते करते वो प्लेट पर चम्मच से डिज़ाइन बनाती जा रही थी. जब उस लड़के के पापा जो आर्मी में थे उनका ट्रान्स्फर जम्बू&कश्मीर हो गया और वो लड़का जम्बू&कश्मीर चला गया तो कैसे वो डिप्रेशन में आ गयी थी. डिप्रेशन के एक साल के दौरान एक बार फिर से वो बहुत ज़्यादा खाने लगी थी.
तान्या फिर शांत हो गयी, मैं बेसब्री से उसके आगे बोलने का इंतेजार करने लगा.
तान्या ने आँखे उठाकर एक उम्मीद भरी नज़र से मुझे देखा, फिर आगे बोली, मुझे वास्तविकता स्वीकार करने में बहुत टाइम लगा. मैं अब इस बात से सावधान रहती हूँ, हँसी मज़ाक तो सब के साथ कर लेती हूँ लेकिन अपना दिल, अब मैं सिर्फ़ अब अपने पति को ही दूँगी. कुछ देर तान्या चुप रही, मैं उसके आगे बोलने का वेट करता रहा.चम्मच रखते हुए तान्या ने अपना हाथ बढ़ाया और मैने उसका हाथ खुशी से पकड़ लिया.
तान्या: मुझे ये देख के बहुत अच्छा लगा कि तुम मुझसे कभी नाराज़ नही हुए. मुझे लगा तुम सोच रहे होंगे कि ये कैसी लड़की है? हां मैं दूसरी लड़कियों की तरह नही हूँ, लेकिन मुझे इस बात का पता है. तुमने इतने दिनों में कभी भी मेरे साथ किसी बात की ज़बरदस्ती नही की, और हमेशा ये सोचते रहे होंगे कि जाने कब पटेगी? इतना बोल कर तान्या हँसने लगी.
हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, फिर मैने अपन गला सॉफ करते हुए कहा, तान्या तुम बहुत सुंदर हो, मुझे बहुत अच्छी लगती हो, थॅंक यू.
मेरा हाथ पकड़े हुए तान्या नीचे देखने लगी.
तुम जैसी भी हो, लेकिन मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मैं तुमको इतना चाहता हूँ कि और ऐसा कभी कुछ नही कर सकता जो तुमको बुरा लगे. मैं सच कह रहा हूँ, तुम भी अगर मेरे साथ ऑनेस्ट रहोगी तो हम एक दूसरे को बेहतर जान पाएँगे. मुझे पक्का नही मालूम लेकिन कभी कभी मुझे लगता है कि शायद हमारे पेरेंट्स मेरी दीदी की शादी के बाद कहीं हमारी शादी कराने का प्लान तो नही बना रहे?
तान्या के गाल गुलाबी हो गये और उसने मुस्कुराते हुए कहा, पता नही, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो अच्छा ही होगा. उसने इधर उधर देखा और फिर ज़ोर से हँसने लगी, हम कुछ ज़्यादा ही सीरीयस हो गये, है ना?
मैने भी हंसते हुए जवाब दिया, कोई बात नही, जो होगा अच्छा ही होगा...
कुछ देर और बातें करने के बाद हम तान्या की कार लेने कॉलेज की पार्किंग पहुँचे और फिर हाथ हिलाकर बाइ किया. वो अपनी कार चला के चली गयी और मैं अपने घर आ गया.
उस दिन शाम को मैं डॉली दीदी के रूम में गया और आज मेरी तान्या के साथ हुई सारी बातों को बता दिया. दीदी सब कुछ सुनते हुए बस मुस्कुराती रही.
दीदी: वाह, ये तो बहुत अच्छा हुआ, लगता है वो तुमसे शादी से पहले ही प्यार करने लगी है. मेरी तरफ आइब्रोज चढ़ा के देखते हुए दीदी आगे बोली, देख राज, अब कोई गड़बड़ मत करना, और फिर हँसने लगी. मैने भी शरारती लहजे में जवाब दिया, हां दीदी मैं ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा.
दीदी शायद मेरे दिमाग़ में चल रहे विचारों को पढ़ पा रही थी, दीदी ने मुझसे पूछा, राज, तुम किस बात से परेशान हो?
मैं बोला, भूख लगी है लंच कर लेते हैं
तान्या तुरंत तय्यार हो गयी और अपनी कार वहीं पार्किंग में छोड़ के मेरी कार में ही आ गयी. हम एक अच्छे से 2न्ड फ्लोर पर बने रेस्टोरेंट में गये और एक कॉर्नर टेबल पर बैठ गये.वहाँ लगे ग्लास में से शहर की मेन रोड और उस पर रेंगता ट्रॅफिक सॉफ नज़र आ रहा था.
तान्या आज बहुत सुंदर लग रही थी, उसने अपने काले गहने बाल आज खोल रखे थे. आज उसने वाइट टी-शर्ट जिस पाट कुछ लिखा हुआ था और डार्क ब्लू जीन्स पहन रखी थी. मुझे अपने आप को विश्वास दिलाना पड़ रहा था कि बस हम दोनो अकेले में बैठे हैं, और ऐसा लग रहा था कि वो भी मुझे पसंद करती है.
लंच आ चुका था, हम प्रॉजेक्ट्स के बारे में और बाकी क्लासमेट्स के बारे मे बातें करते हुए खाना खा रहे थे. तान्या ने हाथ धोने के लिए आए गरम पानी में से नींबू उठाकर मेरे फेस पर फेंक दिया और फिर खिलखिलाकर हँसने लगी.
वेटर ने जब पूछा कि डिज़र्ट में क्या लोगे, तो हम एक दूसरे को देखने लगे और फिर मैं बोला, मेरा तो कुछ मीठा खाने का मन कर रहा है.
तान्या हंसते हुए बोली, हां मैं भी खाउन्गि. दोनो ने आइस्क्रीम का फ्लेवर डिसाइड कर के ऑर्डर प्लेस कर दिया. अच्छा हुआ तुम ने ऑर्डर कर दिया, नही तो तुम ये ही सोचते हैं कि मैं बहुत ज़्यादा मीठा खाती हूँ.
मैने शरारत करते हुए कहा, कोई बात नही, तुम्हारा साथ पाने के लिए, ये बंदा कुछ भी करने को हाजिर है.
तान्या कुछ सोचते हुए मेरी तरफ देखने लगी.
तान्या: थॅंक यू, राज...
मैने अपना सिर हिलाया और मुस्कुरा दिया.
कुछ देर में आइस्क्रीम आ गयी और हम खाने लगे. शुरू में तान्या थोड़ा चुप चुप थी पर अब वो खुल के बातें कर रही थी. कुछ देर पहले की तान्या जो मुझे एक आकर्षक और स्वावलंबी लड़की नज़र आ रही थी, वो अब मुझे अपना शिकार लगने लगी थी. तान्या मुझे बता रही थी कैसे उस को बचपन में बहुत ज़्यादा खाने की आदत थी और कैसे उसने इस पर काबू पाया.
तान्या ने आगे बताया कि कैसे वो 10+2 के दौरान एक लड़के की दीवानी हो गयी थी. बात करते करते वो प्लेट पर चम्मच से डिज़ाइन बनाती जा रही थी. जब उस लड़के के पापा जो आर्मी में थे उनका ट्रान्स्फर जम्बू&कश्मीर हो गया और वो लड़का जम्बू&कश्मीर चला गया तो कैसे वो डिप्रेशन में आ गयी थी. डिप्रेशन के एक साल के दौरान एक बार फिर से वो बहुत ज़्यादा खाने लगी थी.
तान्या फिर शांत हो गयी, मैं बेसब्री से उसके आगे बोलने का इंतेजार करने लगा.
तान्या ने आँखे उठाकर एक उम्मीद भरी नज़र से मुझे देखा, फिर आगे बोली, मुझे वास्तविकता स्वीकार करने में बहुत टाइम लगा. मैं अब इस बात से सावधान रहती हूँ, हँसी मज़ाक तो सब के साथ कर लेती हूँ लेकिन अपना दिल, अब मैं सिर्फ़ अब अपने पति को ही दूँगी. कुछ देर तान्या चुप रही, मैं उसके आगे बोलने का वेट करता रहा.चम्मच रखते हुए तान्या ने अपना हाथ बढ़ाया और मैने उसका हाथ खुशी से पकड़ लिया.
तान्या: मुझे ये देख के बहुत अच्छा लगा कि तुम मुझसे कभी नाराज़ नही हुए. मुझे लगा तुम सोच रहे होंगे कि ये कैसी लड़की है? हां मैं दूसरी लड़कियों की तरह नही हूँ, लेकिन मुझे इस बात का पता है. तुमने इतने दिनों में कभी भी मेरे साथ किसी बात की ज़बरदस्ती नही की, और हमेशा ये सोचते रहे होंगे कि जाने कब पटेगी? इतना बोल कर तान्या हँसने लगी.
हम दोनो ने एक दूसरे की तरफ देखा, फिर मैने अपन गला सॉफ करते हुए कहा, तान्या तुम बहुत सुंदर हो, मुझे बहुत अच्छी लगती हो, थॅंक यू.
मेरा हाथ पकड़े हुए तान्या नीचे देखने लगी.
तुम जैसी भी हो, लेकिन मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मैं तुमको इतना चाहता हूँ कि और ऐसा कभी कुछ नही कर सकता जो तुमको बुरा लगे. मैं सच कह रहा हूँ, तुम भी अगर मेरे साथ ऑनेस्ट रहोगी तो हम एक दूसरे को बेहतर जान पाएँगे. मुझे पक्का नही मालूम लेकिन कभी कभी मुझे लगता है कि शायद हमारे पेरेंट्स मेरी दीदी की शादी के बाद कहीं हमारी शादी कराने का प्लान तो नही बना रहे?
तान्या के गाल गुलाबी हो गये और उसने मुस्कुराते हुए कहा, पता नही, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो अच्छा ही होगा. उसने इधर उधर देखा और फिर ज़ोर से हँसने लगी, हम कुछ ज़्यादा ही सीरीयस हो गये, है ना?
मैने भी हंसते हुए जवाब दिया, कोई बात नही, जो होगा अच्छा ही होगा...
कुछ देर और बातें करने के बाद हम तान्या की कार लेने कॉलेज की पार्किंग पहुँचे और फिर हाथ हिलाकर बाइ किया. वो अपनी कार चला के चली गयी और मैं अपने घर आ गया.
उस दिन शाम को मैं डॉली दीदी के रूम में गया और आज मेरी तान्या के साथ हुई सारी बातों को बता दिया. दीदी सब कुछ सुनते हुए बस मुस्कुराती रही.
दीदी: वाह, ये तो बहुत अच्छा हुआ, लगता है वो तुमसे शादी से पहले ही प्यार करने लगी है. मेरी तरफ आइब्रोज चढ़ा के देखते हुए दीदी आगे बोली, देख राज, अब कोई गड़बड़ मत करना, और फिर हँसने लगी. मैने भी शरारती लहजे में जवाब दिया, हां दीदी मैं ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा.
दीदी शायद मेरे दिमाग़ में चल रहे विचारों को पढ़ पा रही थी, दीदी ने मुझसे पूछा, राज, तुम किस बात से परेशान हो?