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मजदूर नेता compleet

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मजदूर नेता

मेरा नाम अंजलि सिंग है. मैं एक शादी शुदा महिला हूँ. गुजरात मे सूरत के पास एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री मे हज़्बेंड मिस्टर. ब्रिजभूषण सिंग ( वी कॉल हिम ब्रिज) इंजिनियर के पोस्ट मे काम करते हैं. उनके टेक्सटाइल मिल मे हमेशा लेबर प्राब्लम रहती है.

मजदूरों का नेता भोगी भाई बहुत ही काइयां टाइप का आदमी है. ऑफीसर लोगों को उस आदमी को हमेशा पटा कर रखना पड़ता है. मेरे पति की उस से बहुत पट ती थी. मुझे उनकी दोस्ती फूटी आँख भी नहीं सुहाति थी. शादी के बाद मैं जब नयी नयी आई थी वह पति के साथ अक्सर आने लगा. उसकी आँखें मेरी बदन पर फिरती रहती थी. मेरा बदन वैसे भी काफ़ी सेक्सी था. वह पूरे बदन पर नज़रें फेरता रहता था. ऐसा लगता था मानो वह कल्पना में मुझे नंगा कर रहा हो. शादी के बाद मुझे किसी को यह बताने के बाद बहुत शर्म आती थी. फिर भी मैने ब्रिज को समझाया कि ऐसे आदमियों से दोस्ती छ्चोड़ दे मगर वह तर्क देता था कि प्राइवेट कंपनी मे नौकरी करने पर थोड़ा बहुत ऐसे लोगों से बना कर रखना पड़ता ही है.

उनके तर्क के आगे मैं चुप हो जाती थी. मैने कहा भी कि वह आदमी मुझे बुरी नज़रों से घूरता रहता है. मगर वो मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं देते थे. भोगी भाई कोई 45 साल का भैसे की तरह काला आदमी था. उसका काम हर वक़्त कोई ना कोई खुराफात करना रहता था. उसकी पहुँच उपर तक थी. उसका दबदबा आस पास के कई कंपनी मे चलता था.

बाजार के नुक्कड़ पर उसकी कोठी थी जिसमे वो अकेला ही रहता था. कोई फॅमिली नहीं थी मगर लोग बताते हैं कि वो बहुत ही रंगीला आदमी है और अक्सर उसके घर मे लड़कियाँ भेजी जाती थी. हर वक़्त कई चम्चो से घिरा रहता था. वो सब देखने मे गुण्डों से लगते थे. सूरत और इसके आसपास काफ़ी टेक्सटाइल के छ्होटे मोटे फॅक्टरीस हैं. इन सब मे भोगी भाई की आग्या के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता था. उसकी पहुँच यहाँ के एमएलए से भी ज़्यादा है.

ब्रिज के सामने ही कई बार मेरे साथ गंदे मज़ाक भी करता था. मैं गुस्से से लाल हो जाती थी मगर ब्रिज हंस कर टाल देता था. बाद मे मेरे शिकायत करने पर मुझे बाहों मे लेकर मेरे होंठों को चूम कर कहता,

“अंजू तुम हो ही ऐसी कि किसी का भी मन डोल जाए तुम पर. अगर कोई तुम्हें देख कर ही खुश हो जाता हो तो हमे क्या फ़र्क़ पड़ता है.” घर के मैन डोर की च्चितकनी मे कोई नुखस था. दरवाजे को ज़ोर से धक्का देने पर च्चितकनी अपने आप गिर जाती थी.

होली से दो दिन पहले एक दिन पहले किसी काम से भोगी भाई हमारे घर पहुँचा. दिन का वक़्त था. मैं उस समय बात रूम मे नहा रही थी. बाहर से काफ़ी आवाज़ लगाने पर भी मुझे सुनाई नहीं दिया था. शायद उसने घंटी भी बजाई होगी मगर अंदर पानी की आवाज़ मे मुझे कुच्छ भी सुनाई नहीं दिया.

मैं अपने धुन मे गुनगुनाती हुई नहा रही थी. उसने दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया तो दरवाजे की च्चितकनी गिर गयी और दरवाजा खुल गया. भोगी भाई ने बाहर से आवाज़ लगाई मगर कोई जवाब ना पाकर दरवाजा खोल कर झाँका. कमरा खाली पाकर वह अंदर प्रवेश कर गया. उसे शायद बाथरूम से पानी गिरने की एवं मेरे गुनगुनाने की आवाज़ आई तो पहले तो वह वापस जाने के लिए मुड़ा मगर फिर कुच्छ सोच कर धीरे से दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया. और मूड कर बेड रूम मे प्रवेश कर गया.
 


मैने पूरे घर मे अकेले होने के कारण कपड़े बाहर बेड पर ही रख रखे थे. उन पर उसकी नज़र पड़ते ही आँखों मे चमक आगयी. उसने सारे कपड़े समेट कर अपने पास रख लिए. मैं इन सब से अंजान गुनगुनाती हुई नहा रही थी. नहाना ख़त्म कर के बदन तौलिए से पोंच्छ कर पूरी तरह नग्न बाहर निकली. वो दरवाजे के पीछे च्छूपा हुआ था इसलिए उसपर नज़र नहीं पड़ी. मैने पहले ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़े होकर अपने हुस्न को निहारा. फिर बदन पर पाउडर च्चिड़क कर कपड़ों की तरफ़ हाथ बढ़ाए. मगर कपड़ों को बिस्तर पर ना पाकर चोंक गयी. तभी दरवाजे के पीछे से भोगी भाई लपक कर मेरे पीछे आया और मेरे नग्न बदन को अपनी बाहों की गिरफ़्त में ले लिया.

मैं एक दम सकते मे अगयी. समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या करें. उसके हाथ मेरे बदन पर फिर रहे थे. मेरे एक निपल को अपने मुँह मे ले लिया और दूसरे को हाथों से मसल रहा था. एक हाथ मेरी योनि पर फिर रहे थे. अचानक उसकी दो उंगलिया मेरी योनि मे प्रवेश कर गयी. मैं एकदम से चिहुनक उठी और उसे एक ज़ोर से झटका दिया और उसकी बाहों से निकल गयी. मैं चीखते हुए मैं डोर की तरफ दौड़ी मगर कुण्डी खोलने से पहले फिर उसकी गिरफ़्त मे अगयी. वो मेरे स्तनों को बुरी तरह मसल रहा था.

“छ्चोड़ कमीने नहीं तो मैं शोर मचाउन्गि” मैने चीखते हुए कहा. तभी हाथ चितकनी तक पहुँच गये. और दरवाजा खोल दिया. मेरे इस हरकत की उसे शायद उम्मीद नहीं थी. मैने एक जोरदार झापड़ उसके गाल पर लगाया और अपने नग्न हालत की परवाह ना करते हुए मैने दरवाजे को खोल दिया. शेरनी की तरह चीखी,

“निकल जा मेरे घर से.” और उसे धक्के मार कर घर से निकाल दिया. उसकी हालत चोट खाए शेर की तरह हो रही थी. चेहरा गुस्से से लाल सुर्ख हो रहा था. उसने फुन्फ्कार्ते हुए कहा,

“साली बड़ी सती सावित्री बन रही है. अगर तू झे अपने नीचे ना लिटाया तो मेरा नाम भी भोगी भाई नहीं. देखना एक दिन तू आएगी मेरे पास मेरे लंड को लेने. उस समय अगर तुझे अपने इस लिंग पर ना कूदवाया तो देखना. मैने भड़क से उस के मुँह पर दरवाजा बंद कर दिया. मैं वहीं दरवाजे से लग कर रोने लगी.

शाम को जब ब्रिज आया तो उसपर भी फट पड़ी. मैने उसे सारी बात बताई और ऐसे दोस्त रखने के लिए उसे भी खूब खरी खोटी सुनाई. पहले तो ब्रिज ने मुझे मनाने की काफ़ी कोशिश की. कहा कि ऐसे बुरे आदमी से क्या मुँह लगना. मगर मैं तो आज उसकी बातों मे आने वाली नहीं थी. आख़िर वो उस से भिड़ने निकला. भोगी भाई से झगड़ा करने पर भोगी भाई ने भी खूब गलियाँ दी. उसने कहा,

“तेरी बीवी नंगी होकर दरवाजा खोल कर नहाए तो इसमे सामने वाले की क्या ग़लती है. अगर इतनी ही सती सावित्री है तो बोला कर कि बुर्क़े में रहे.” उसके आदमियों ने धक्के देकर ब्रिज को बाहर निकाल दिया. पोलीस मे कंप्लेन लिखने गये मगर पोलीस ने कंप्लेन लिखने से मना कर दिया. सब उससे घबराते थे. खैर खून का घूँट पीकर चुप हो जाना पड़ा. बदनामी का भी डर था. और ब्रिज की नौकरी का भी सवाल था. धीरे धीरे समय गुजरने लगा. चौराहे पर अक्सर भोगी भाई अपने चेले चपाटों के साथ बैठा रहता था मैं कभी वहाँ से गुजरती तो मुझे देख कर अपने साथियों से कहता.
 


“ब्रिज की बीवी बड़ी कंटीली चीज़ है. उसकी छतियो को मसल मसल कर मैने लाल कर दिया था. चूत मे भी उंगली डाली थी. नहीं मानते हो तो पूछ लो.” “क्यों अंजलि याद है ना मेरे हाथों का स्पर्श” “कब आ रही है मेरे बिस्तर पर”

मैं ये सब सुन कर चुपचाप सिर झुकाए वहाँ से गुजर जाती थी. दो महीने बाद की बात है. अचानक शाम को ब्रिज के फॅक्टरी से फोन आया,

“मेडम, आप मिस. सिंग बोल रही हैं?”

“हां बोलिए” मैने कहा.

” मेडम पोलीस फॅक्टरी आई थी और सिंग साहब को गिरेफ्टार कर ले गयी.”

“क्या? क्यों?” मेरी समझ मे ही नहीं आया की सामने वाला क्या बोल रहा है.

“मेडम कुच्छ ठीक से समझ मे नहीं आरहा है. आप तुरंत यहाँ आजाईए.” मैं जैसी थी वैसी ही दौरी गयी ब्रिज के ऑफीस. मे एक सूती की साडी पहनी हुई थी.

वहाँ के मालिक कामदार साहब से मिली तो उन्हों ने बताया कि दो दिन पहले उनके फॅक्टरी मे कोई आक्सिडेंट हुआ था जिसे पोलीस मर्डर का केस बना कर ब्रिज के खिलाफ चार्जेशेट दायर कर दी थी. मैं एकदम चकित रह गयी. ऐसा कुच्छ भी नहीं हुआ था.

“लेकिन आप तो जानते हैं कि ब्रिज ऐसा आदमी नहीं है. वो आपके के पास पिच्छले कई सालों से काम कर रहा है. कभी आपको उनके खिलाफ कोई भी शिकायत मिली है क्या.” मैने मिस्टर. कामदार से पूचछा.

” देखिए म्र्स. सिंग मैं भी जानता हूँ कि इसमे ब्रिज का कोई भी हाथ नहीं है मगर मैं कुच्छ भी कहने मे असमर्थ हूँ.”

” आख़िर क्यों?”

” क्योंकि उसका एक चस्मदीद गवाह है. भोगी भाई” मेरे सिर पर जैसे बम फट पड़ा मेरी आँखों के सामने सारी बातें सॉफ होती चली गयी.

” वो कहता है की उसने ब्रिज को जान बूझ कर उस आदमी को मशीन मे धक्का देते देखा था.”

“ये साब सारा सर झूठ है वो कमीना जान बूझ कर ब्रिज को फँसा रहा है.” मैने लगभग रोते हुए कहा.

” देखिए मुझे आपसे हमदर्दी है मगर मैं आपको कोई भी मदद नहीं कर पा रहा हूँ. इनस्पेक्टर गवलेकर का भी भोगी भाई से अच्छी दोस्ती है. सारे वर्कर्स ब्रिज के खिलाफ हो रहे हैं. मेरी मानो तो आप भोगी भाई से मिल लो वो अगर अपना बयान बदल ले तो ही ब्रिज बच सकता है.”

“थूकती हूँ मैं उस कमीने पर” कहकर मैं वहाँ से पैर पटकती हुई निकल गयी. मगर मेरे समझ मे नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ. मैं पोलीस स्टेशन पहुँची. वहाँ काफ़ी देर बाद ब्रिज से मिलने दिया गया. उसकी हालत देख कर तो मुझे रोना आ गया. बाल बिखरे हुए थे. आँखों के नीचे कुच्छ सूजन थी शायद पोलीस वालों ने मारपीट भी की होगी. मैने उस से बात करने की कोशिश की मगर वो कुच्छ ज़्यादा नहीं बोल पाया. उसने बस इतना ही कहा,

” अब कुच्छ नहीं हो सकता. अब तो भोगी भाई ही कुच्छ कर सकता है.” मुझे किसी ओर से आशा की कोई किरण नहीं दिखाई दे रही थी. आख़िर कर मैने भोगी भाई से मिलने का निर्णय किया. शायद उसे मुझ पर रहम अजाए. शाम के लगभग आठ बज गये थे. मैं भोगी भाई के घर पहुँची. गेट पर दरवान ने रोका तो मैने कहा,

“साहब को कहना म्र्स. सिंग आई हैं.” गार्ड अंदर चला गया. कुच्छ देर बाद बाहर आकर कहा,

“अभी साहब अभी बिज़ी हैं कुच्छ देर इंतेज़ार कीजिए.” पंद्रह मिनिट बाद मुझे अंदर जाने दिया. मकान काफ़ी बड़ा था. अंदर ड्रॉयिंग रूम मे भोगी भाई दीवान पर आधा लेटा हुआ था. उसके तीन चम्चे कुर्सियों पर बैठे हुए थे. सबके हाथों मे शराब के ग्लास थे. सामने टेबल पर एक बॉटल खुली हुई थी. मैने कमरे की हालत देखते हुए झिझक्ति हुई अंदर प्रवेश किया.
 


“आ बैठ.” भोगी भाई ने अपने सामने एक खाली कुर्सी की तरफ इशारा किया.

” वो वो मैं आपसे ब्रिज के बारे में बात करना चाहती थी.” मैं जल्दी वाहा से भागना चाहती थी.

” ये अपने सुदर्शन कपड़ा मिल के इंजिनियर की बीवी है. बड़ी सेक्सी चीज़ है.” उसने अपने ग्लास से एक घूँट लेते हुए कहा. सारे मुझे वासना भरी नज़रों से देखने लगे. उनकी आँखों मे लाल डोरे तेर रहे थे.

“हाँ बोल क्या चाहिए?”

” ब्रिज ने कुच्छ भी नहीं किया” मैने उससे मिन्नत की.

“मुझे मालूम है”

“पोलीस कहती हैं की आप अपना बयान बदल लेंगे तो वो छूट जाएँगे”

“क्यों? क्यों बदलू मैं अपना बयान?

“प्लीज़, हम पर?..”

“सड़ने दो साले को बीस साल जैल में. आया था मुझसे लड़ने.”

“प्लीज़ आप ही एक मात्र आशा हो.”

” लेकिन क्यूँ? क्यूँ बदलू मैं अपना बयान? मुझे क्या मिलेगा” भोगी भाई ने अपने मोटे जीभ पर होंठ फेरते हुए कहा. क्रमशः.............
 
गतान्क से आगे................

” आप कहिए आपको क्या चाहिए. अगर बस मे हुआ तो हम ज़रूर देंगे” कहते हुए मैने अपनी आँखें झुका ली. मुझे पता था कि अब क्या होने वाला है. भोगी भाई अपनी जगह से उठा. अपना ग्लास टेबल पर रख कर चलता हुआ मेरे पीछे आ गया. मैं आँखें सख्ती से बंद कर उसके पैरों के पद्चाप सुन रही थी. मेरी हालत उस खरगोश की तरह हो गयी थी जो अपना सिर झाड़ियों मे डाल कर सोचता है कि भेड़िए से वो बच जाएगा. उसने मेरे पीछे आकर सारी के आँचल को पकड़ा और उन्हे छातियो पर से हटा दिया. फिर उसके हाथ आगे आए और सख्ती से मेरी छातियो को मसल्ने लगे.

“मुझे तुम्हारा जिस्म चाहिए पूरे एक दिन के लिए” उसने मेरे कानों के पास धीरे से कहा. मैने सहमति मे अपना सिर झुकलिया.

“ऐसे नहीं अपने मुँह से बोल” उसने मेरे ब्लाउस के अंदर अपने हाथ डॉल कर सख्ती से चूचियो को निचोर्ने लगा. इतने लोगों के सामने मैं शरम से गढ़ी जा रही थी. मैने सिर हिलाया

“मुँह से बोल”

“हां” मैने धीरे से बुद बुदाया.

“ज़ोर से बोल. कुच्छ सुनाई नहीं दिया. तुझे सुनाई दिया रे चापलू?” उसने एक से पूचछा.

“नहीं” जवाब आया.

“मुझे मंजूर है.” मैने इस बार कुच्छ ज़ोर से कहा.

“क्यों फूलणदेवी जी, मैने कहा था ना तू खुद आएगी मेरे घर और कहेगी की प्लीज़ मुझे चोदो. कहाँ गयी तेरी अकड़? तु पूरे 24 घंटों के लिए मेरे कब्ज़े में रहेगी. मैं जैसा चाहूँगा तुझे वैसा ही करना होगा.. तुझे अगले 24 घंटे बस अपनी योनि खोल कर रंडियों की तरह चुदवाना है. उसके बाद तू और तेरा मर्द दोनो आज़ाद हो जाओगे.”उसने कहा” और नहीं तो तेरा मर्द तो 20 साल के लिए अंदर होगा ही तुझे भी वेश्याव्र्त्ती के लिए अंदर करवा दूँगा. फिर तो तू वैसे ही वहाँ से पूरी वेश्या बन कर ही बाहर निकलेगी.”

“मुझे मंजूर है” मैने अपने आँसुओं पर काबू पाते हुए कहा. वो जाकर वापस अपनी जगह जाकर बैठ गया.

“चल शुरू हो जा. अपने सारे कपड़े उतार मुझे औरतों के बदन पर कपड़े अच्छे नहीं लगते” उसने ग्लास अपने होंठों से लगाया,

अब ये कपड़े कल शाम के दस बजे के बाद ही मिलेंगे. चल इनको भी दिखा तो सही कि तुझे अपने किस हुष्ण पर इतना गुरूर है. मैने काँपते हाथों से ब्लाउस के बटन खोलना शुरू कर दिया. सारे बटन्स खोलकर ब्लाउस के दोनो हिस्सों को अपनी चूचियो के उपर से हटाया तो ब्रा मे कसे हुए मेरे दोनो योवन उन भूखी आँखों के सामने आगाए. मैने ब्लाउस को अपने बदन से अलग कर दिया. चारों की आँखें चमक उठी. मैने बदन से सारी हटा दिया. फिर मैने झिझकते हुए पेटिकट की डोरी खींच दी. पेट्कोट स्रसारता हुआ पैरों पर ढेर हो गया चारों की आँखों मे वासना के सुर्ख डोरे टर रहे थे. मैं उनके सामने ब्रा और पॅंटी मे खड़ी होगयी.

“मैने कहा था सारे कपड़े उतारने को” भोगी भाई ने गुर्राते हुए कहा.

“प्लीज़ मुझे और जॅलील मत करो” मैने उससे मिन्नतें की.

“अबे राजे फ़ोन लगा गोवलेकर को. बोल साले ब्रिज को रात भर हवाई जहाज़ बना कर डंडे मारे और इस रंडी को भी अंदर कर दे”

 


“नहीं नहीं, ऐसा मत करना. आप जैसा कहोगे मैं वैसा ही करूँगी.” कहते हुए मैने अपने हाथ पीछे लेजा कर ब्रा का हुक खोल दिया. ब्रा को आहिस्ता से बदन से अलग कर दिया. आब मैने पूरी तरह से समरपन का फ़ैसला कर लिया. ब्रा के हटते ही मेरे दूधिया उरोज रोशनी मे चमक उठे. चारों अपनी अपनी जगह पर कसमसने लगे. तीनो गरम हो चुके थे. उनके पॅंट पर उभार सॉफ नज़र अरहा था. भोगी भाई लूँगी के ऊपर से ही अपने लिंग पर हाथ फेर रहा था. लूँगी के उपर से ही उसके उभार को देख कर लग रहा था की अब मेरी खैर नहीं. मैने अपनी उंगलियाँ पॅंटी की एलास्टिक मे फँसैई तो भोगी भाई बोल उठा.

“ठहर जा. यहाँ आ मेरे पास” मैं उसके पास आकर खड़ी हो गयी. उसने अपने हाथों से मेरी योनि को कुच्छ देर तक मसला फिर पॅंटी को नीचे करता चला गया. आब मैं पूरी तरह नंगी हो कर उसके सामने खड़ी थी.

“राजे जा और मेरा कॅमरा उठा ला” मैं घबरा गयी.

“आपने जो चाहा मैं दे रही हूँ फिर ये सब क्यूँ”

“तुझे मुह्न खोलने के लिए मना किया था ना” एक आदमी एक मूवी कॅमरा ले आया. उन्हों ने सेंटर टेबल से सारा समान हटा दिया. भोगी भाई मेरी योनि पर हाथ फिरा रहा था. मेरे योनि पर रेशमी घुंघराले बलों को सहला रहा था.

” चल बैठ यहाँ” उसने सेंटर टेबल की ओर इशारा किया. मैं सेंटर टेबल पर बैठ गयी. उसने मेरी टाँगों को ज़मीन से उठा कर टेबल पर रखने को कहा. मैने वैसा ही किया.

” अब टाँगें चौरी कर” मैं शर्म से दोहरी हो गयी मगर मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था. मैने अपनी टाँगों को थोड़ा फैलाया.

” और फैला” मैने टाँगों को उनके सामने पूरी तरह फैला दिया. मेरी योनि उनके आँखों के सामने बेपर्दा थी. योनि के दोनो लब खुल गये थे. मैं चारों के सामने योनि फैला कर बैठी हुई थी. उनमे से एक मेरी योनि की तस्वीरें ले रहा था.

” अपनी चूत मे उंगली डाल कर उसको चौड़ा कर.” भोगी भाई ने कहा. वो अब अपनी तहमद खोल कर अपने काले मूसल जैसे लिंग पर हाथ फेर रहा था. मैं तो उसके लिंग को देख कर ही सिहर गयी. गधे जैसा इतना मोटा और लंबा लिंग मैने पहली बार देखा था. लिंग भी पूरा काला था. मैने अपनी योनि मे उंगली डाल कर उसे सबके सामने फैला दिया. चारों हँसने लगे.
 


“देखा मुझसे पंगा लेने का अंजाम. बड़ा गुरूर था इसको अपने रूप पर. देख आज मेरे सामने कैसे नंगी अपनी योनि फैला कर बैठी हुई है.” भोगी भाई ने अपनी दो मोटी मोटी उंगलियाँ मेरी योनि मे घुसा दी. मैं एक दम से सिहर उठी. मैं भी अब गरम होने लगी थी. मेरा दिल तो नहीं चाह रहा था मगर जिस्म उसकी बात नहीं सुन रहा था. उसकी उंगलियाँ कुच्छ देर तक अंदर खलबली मचाने के बाद बाहर निकली तो योनि रस से चुपड़ी हुई थी. वह अपनी उंगलिओ को अपनी नाक तक ले जाकर सूँघा फिर सब को दिखा कर कहा,

“अब ये भी गरम होने लगी है.” मेरे होंठों पर अपनी उंगलियाँ च्छुआ कर कहा.

“ले चाट इसे.” मैने अपनी जीभ निकाल कर अपने कामरस को पहली बार चखा. सारे एक दम से मेरे बदन पर टूट पड़े. कोई मेरी चूचियो को मसल रहा था तो कोई मेरी योनि मे उंगली डाल रहा था. मैं उनके बीच मे छटपटा रही थी. भोगी भाई ने सबको रुकने का इशारा किया. मैने देखा उसके कमर से तहमद हटी हुई है. और काला भुजंग सा लिंग तना हुआ खड़ा है. उसने मेरे सिर को पकड़ा और अपने लिंग पर दाब दिया.

“इसे ले अपने मुँह मे” उसने कहा

“मुँह खोल.” मैने झिझकते हुए अपना मुँह खोला तो उसका लिंग अंदर घुसता चला गया. बड़ी मुश्किल से ही उसके लिंग के उपर के हिस्से को मुँह मे ले पा रही थी. वा मेरे सिर को अपने लिंग पर दाब रहा था. उसका लिंग गले के द्वार पर जाकर फँस गया. मेरा दम घुटने लगा मैं च्चटपटा रही थी. उसने अपने हाथों का ज़ोर मेरे सिर से हटाया. कुच्छ सेकेंड्स के लिए कुच्छ राहत मिली तो मैने अपना सिर उपर खींचा. लिंग के कुच्छ इंच बाहर निकलते ही उसने वापस मेरा सिर दबा दिया. इस तरह वो मेरे मुँह मे अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा. मैने कभी मुख मैथुन नहीं किया था इसलिए मुझे शुरू शुरू मे काफ़ी दिक्कत हुई. उबकाई सी आ रही थी. धीरे धीरे उसके लिंग की अभ्यस्त हो गयी. अब मेरा शरीर भी गर्म हो गया था. मेरी योनि गीली होने लगी.

बाकी तीनों मेरे बदन को मसल रहे थे. मुख मैथुन करते करते मुँह दर्द करने लगा था मगर वो था कि छ्चोड़ ही नहीं रहा था. कोई बीस मिनिट तक मेरे मुँह को चोदने के बाद उसका लिंग झटके खाने लगा. उसने अपना लिंग बाहर निकाला.

” मुँह खोल कर रख.” उसने कहा. मैने मुँह खोल दिया. ढेर सारा वीर्य उसकी लिंग से तेज धार सी निकल कर मेरे मुँह मे जा रही थी. जिसे एक आदमी मूवी कॅमरा मे क़ैद कर रहा था जब मुँह मे और आ नही पाया तो काफ़ी सारा वीर्य मुँह से छातियो पर टपकने लगा. उसने कुच्छ वीर्य मेरे चेहरे पर भी टपका दिया.

” बॉस का एक बूँद वीर्य भी बेकार नहीं जाए” एक चम्चे ने कहा. उसने अपनी उंगलियों से मेरी चूचियो एवं मेरे चेहरे पर लगे वीर्य को समेट कर मेरे मुँह मे डाल दिया. मुझे मन मार कर भी सारा गटाकना पड़ा…….
 


इस रंडी को बेडरूम मे ले चल.” भोगी भाई ने कहा. दो आदमी मुझे उठाकर लगभग खींचते हुए बेडरूम मे ले गये. बेडरूम मे एक बड़ा सा पलंग बिच्छा था. मुझे पलंग पर पटक दिया गया. भोगी भाई अपने हाथों मे ग्लास लेकर बिस्तर के पास एक कुर्सी पर बैठ गया.

” चलो शुरू हो जाओ” उसने अपने चम्चो से कहा. तीनो मुझ पर टूट पड़े. मेरी टाँगें फैला कर एक अपना मुँह मेरी योनि पर चिपका दिया. अपनी जीभ निकाल कर मेरे योनि को चूसने लगा. उसकी जीभ मेरे अंदर गर्मी फैला रही थी. मैने उसके सिर को पकड़ कर अपने योनि पर ज़ोर से दबा रखा था. मैं छटपटाने लगी.मुँह से

“आहूऊहह ऑफ आहह उ” जैसी आवाज़ें निकल रही थी. मैं अपना सिर झटक रही थी अपने उपर काबू रखने के लिए मगर मेरा शरीर था की बेकाबू होता जा रहा था.

बाकी दोनो मे से एक मेरे निपल्स पर दाँत गढ़ा रहा था तो एक ने मेरे मुँह मे अपना लिंग डाल दिया. सामूहिक संभोग का द्रिश्य था. और भोगी भाई पास बैठा मुझे नौचते हुए देख रहा था. भोगी भाई का लेने के बाद इस आदमी का लिंग तो बच्चे जैसा लग रहा था. वो बहुत जल्दी झाड़ गया. अब जो आदमी मेरी योनि चूस रहा था वो मेरी योनि से अलग हो गया. मैने अपनी योनि को जितना हो सकता था उँचा किया कि वो वापस अपनी जीभ अंदर डाल दे. मगर उसका इरादा कुच्छ और ही था.

उसने मेरे टाँगों को मोड़ कर अपने कंधे पर रख दिया और एक झटके मे अपना लिंग मेरी योनि मे डाल दिया. इस अचानक हुए हमले से मे छॅट्पाटा गयी. अब वो मेरी योनि मे तेज तेज झटके मारने लगा. दूसरा जो मेरी छातियोंको मसल रहा था मेरी छाती पर सवार हो गया और मेरे मुँह मे अपना लिंग डाल दिया. फिर मेरे मुँह को योनि की तरह चोदने लगा. उसके अंडकोस मेरी ठुड्डी से रगर खा रहे थे. दोनो ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहे थे. मेरी योनि पानी छ्चोड़ने लगी. मैं चीखना चाह रही थी मगर मुँह से सिर्फ़“उम्म्म्म उंफ़्ह” जैसी आवाज़ ही निकल रही थी. दोनो एक साथ वीर्य निकाल कर मेरे बदन पर लुढ़क गये. मैं ज़ोर ज़ोर से साँसें ले रही थी. बुरी तरह थक गयी थी मगर आज मेरे नसीब मे आराम नहीं लिखा था. उनके हट ते ही भोगी भाई उठा और मेरे पास आकर मुझे खींच कर उठाया और बिस्तर के कोने पर चौपाया बना दिया. फिर वो बिस्तर के पास खड़े होकर अपना लिंग मेरी टपकती योनि पर लगाया और एक झटके से अंदर डाल दिया. योनि गीली होने के कारण उसका मूसल जैसा लिंग लेते हुए भी कोई दर्द नहीं महसूस हुआ. मगर ऐसा लग रहा था मानो वो मेरे पूरे शरीर को चीरता हुआ मुँह से निकल जाएगा. फिर वो धक्के देने लगा. मजबूत पलंग भी उसके धक्के से चरमराने लगा. फिर मेरी क्या हालत हो रही होगी इसकी तो सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है. मैं चीख रही थी.

 


“आहह ऊओ प्लीज़. प्लीज़ म्मुझे छोड़ दो. अया अया नाअहीइन प्पल्ल्लीस्ससी” मैं तड़प रही थी मगर वो था कि अपनी रफ़्तार बढ़ाता ही जा रहा था. पूरे कमरे मे फूच फूच की आवाज़ें गूँज रही थी. बाकी तीनो उठ कर मेरे करीब आ गये थे और मेरी चुदाई का नज़ारा देख रहे थे. मैं बस दुआ कर रही थी कि उसका लिंग जल्दी पानी छ्चोड़ दे. मगर पता नही वो किस चीज़ का बना हुआ था कि उसकी रफ़्तार मे कोई कमी नहीं आ रही थी. कोई आधे घंटे तक मुझे चोदने के बाद उसने अपना वीर्य मेरी योनि मे डाल दिया. मैं मुँह के बल बिस्तर पर गिर गयी. मेरा पूरा शरीर बुरी तरह टूट रहा था. गला सूख रहा था.

“पानी” मैने पानी माँगा तो एक ने एक ग्लास पानी मेरे होंठों से लगा दिया. मेरे होठ वीर्य से लिसडे हुए थे उन्हे पोंच्छ कर मैने गटगट पूरा पानी पी लिया.

पानी पीने के बाद शरीर मे कुच्छ जान आई. तीनो वापस मेरे बदन से चिपक गये. अब मैं बिस्तेरके किनारे पैर लटका के बैठ गयी. एक का लिंग अपनी दोनो चूचियो के बीच ले रखी थी और बाकी दोनो के लिंग को बारी बारी से मुँह मे लेकर चूस रही थी. वो मेरी चूचियो को चोद रहा था. मैं अपने दोनो हाथों से अपनी चूचियो को उसके लिंग पर दोनो ओर से दबा रखी थी. उसने मेरी चूचियो पर वीर्य गिरा दिया. फिर बाकी दोनो मुझे बारी बारी से चौपाया बना कर चोदे. उनके वीर्य पात हो जाने के बाद वो चले गये.

मैं बिस्तर पर चित पड़ी हुई थी. दोनो पैर फैले हुए थे. मेरी योनि से वीर्य चुहकर बिस्तर पर गिर रहा था. मेरे बाल चेहरा छातिया सब पर वीर्य फैला हुआ था. छातियो पर दांतो के लाल नीले निशान नज़र आ रहे थे. भोगी भाई पास खड़ा मेरे बदन की तस्वीरें खींच रहा था मगर मैं उसे मना करने की स्थिति मे नहीं थी. गला भी दर्द कर रहा था. भोगी भाई बिस्तर के पास आकर मेरे निपल्स को पकड़ कर उन्हे उमेठते हुए अपनी ओर खींचा. मैं दर्द के मारे उठती चली गयी और उसके बदन से सॅट गयी.

” जा किचन मे. भीमा ने खाना बना लिया होगा. टेबल पर खाना लगा. और हाँ तू इसी तरह रहेगी” मुझे कमरे के दरवाजे की तरफ धकेल कर मेरे नग्न नितंब पर एक चपत लगाई.

क्रमशः.............

 
गतांक से आगे.......................

मैं अपने शरीर को सिकोर्ते हुए इक हाथ से अपने स्तन युगल को और एक

हाथ से अपने टाँगों के जोड़ को ढकने की असफल कोशिशी करती हुई

किचन मे प्रवेश हुई. अंदर 45 साल का एक रसोइया था. जिसने मुझे

देख कर एक सीटी बजाई. और मेरे पास आकर मुझे सीधा खड़ा कर

दिया. मैं झुकी जा रही थी. मगर उसने मेरी नहीं चलने दिया.

ज़बरदस्ती मेरे सीने पर से हाथ हटा दिया.

"शानदार"उसने कहा. मई शर्म से दोहरी हो रही थी. एक निचले स्तर

के गँवार का सामने मे अपनी इज़्ज़त बचाने मे असमर्थ थी. उसने फिर

खींच कर योनि पर से दूसरा हाथ हटाया. मैने टाँगें सिकोड ली.

यह देख कर उसने मेरे स्तनो को मसल दिया. स्तानो को उस से बचाने के

लिए नीचे की ओर झुकी तो उसने अपनी दो उंगलियाँ मेरी योनि मे पीछे

की तरफ से डाल दिया. मेरी योनि वीर्य से गीली हो रही थी.

"खूब चुदी हो लगता है" उसने कहा.

"शेर खुद खाने के बाद कुच्छ बोटियाँ गीदडो के लिए भी छोड़

देता है. एक आध मौका साहब मुझे भी देंगे.तब तेरी खबर

लूँगा"कहकर उसने मुझे अपने बदन से लपेट लिया.

"कय्यमजी ने खाना लगाने के लिए कहा है." मैने उसे धक्का देते

हुए कहा. उसने मुझसे अलग होने से पहले मेरे होंठों को एक बार कस

कर चूम लिया.

" चल तुझे तो तसल्ली से चोदेन्गे पहले साहब को जी भर के मसल

लेने दो."उसने कहा. फिर मुझे खाने का समान पकड़ने लगा.

मैने टेबल पर खाना लगाया. फिर डिन्नर उसकी गोद मे बैठ कर लेना

पड़ा. वो भी नग्न बैठा था. उसका लिंग सिक्युडा हुआ था. मेरी योनि

उसके नरम पड़े लिंग को चूम रही थी. खाते हुए कभी मुझे

मसलता कभी चूमता जा रहा था. उसके मुँह से शराब की दुर्गंध

अराही थी. वो जब भी मुझे चूमता. मुझे उसपर गुस्सा आ जाता. खाते

खाते ही उसने मोबाइल पर कही रिंग किया.
 
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