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दुसरे दिन वकास काफी देर सोता रहा | जब उसकी आँख खुली तो रात वाला सारा वाकया उसको दुबारा याद आ गया | क्योंकि वकास के दिमाग पर रात को चड़ने वाली मणि उसके लंड के रास्ते कल रात ही निकल गयी थी | इसीलिए अब वकास को अहसास होने लगा कि उसने अपनी बहन और बहनोई की निहायत प्राइवेट बातें सुन कर बहुत गलत किया है |
यह सोच कर वो अपने आप को कोसता अपने कमरे से बाहर आया | वो बाथरूम में जाने के लिए अकरम और ज़ाकिया के कमरे के सामने से गुज़रा तो देखा कि ज़ाकिया के कमरे का दरवाज़ा थोडा खुला था | अकरम सुबह सुबह जॉब पर जा चूका था | ज़ाकिया कमरे में लगे शीशे के सामने अपने हाथ अपने सीने पर रखे साइड पोज में ऐसे खड़ी थी कि उसके जिस्म का राईट साइड वाला हिस्सा वकास की निगाहों के सामने था |
न्यू यॉर्क में अच्छी सेहतमंद खुराक और दो कमरों के अपार्टमेंट में कोई खास काम काज ना होने की वजह से ज़ाकिया का ज्यादा टाइम टीवी के सामने सोफे पर बैठ कर फ्रेंच फ्राइज खाते और कोका कोला पीते ही गुजरता था |
जिस वजह से ज़ाकिया का पतला जिस्म अब काफी भर गया था | उसके मम्मे पहले से काफी फ़ैल कर बड़े हो गए और उनका साइज़ दो सालो में ही 38 हो गया था |
ज़ाकिया की गांड भी पीछे से काफी बड़ी हो गई थी | उसकी गांड बिलकुल काली (अफ्रीकन अमेरिकन) औरतों की तरह बाहर को निकली हुई थी | जिसकी वजह से जब ज़ाकिया चलती तो उसकी गांड पीछे से चल चल करती और देखने वालो के लंडो का बुरा हाल कर देती |
वकास के कदम अपनी बहन को अपने सामने देख कर ज़मीं पर जैसे जम गए और वो अपनी बहन के जिस्म का जायज़ा लेने लगा |
ज़ाकिया के हाथ उसके मम्मो के निचे बंधे होने की वजह से ज़ाकिया के मम्मे ऊपर की तरफ उठ गये थे और साइड पोज में देखने से वकास को ज़ाकिया के बड़े बड़े गुदाज मम्मे उसकी कमीज़ से और भी नुमायाँ और बड़े नज़र आ रहे थे |
थोड़ी हील वाली जुती पहनने की वजह से ज़ाकिया की मस्त गांड पीछे से और ज्यादा उठी हुई महसूस हो रही थी और ज़ाकिया के बड़े चुतड का उभार वकास को ज़ाकिया के बड़े चाक वाली कमीज़ सलवार में से बहुत वाजिया दिखाई दे रहा था |
अपनी बहन को कमरे में ऐसे स्टाइल में खड़ा देख कर वकास के ज़ेहन में रात वाली सारी बातें एक फिल्म की तरह दुबारा दौड़ गईं और उसका लंड जो पेशाब आने की वजह से पहले ही उसके पजामे में फुल खड़ा था मजीद सख्त हो गया |
इससे पहले ज़ाकिया की नज़र वकास और पजामे में खड़े उसके लंड पर पड़ती वकास जल्दी से बाथरूम में चला आया |
बाथरूम में वकास ने जब पेशाब किया तो लंड फुल खड़ा होने की वजह से पहले तो उसका पेशाब ही नहीं निकल रहा था | मगर फिर जब निकला तो खड़े लंड से उसके पेशाब की धार दूर तक गई |
पेशाब से फारिग होने पर वकास के लंड को थोडा सकूँ तो मिला मगर अब भी उसका लंड पजामे में बैठने का नाम नहीं ले रहा था | वकास अब अपनी बहन के नाम की मुठ नहीं मारना चाहता था | इसीलिए वो बाथरूम के कमोड़ पर बैठ कर अपने लंड के ठंडा होने का इंतज़ार करने लगा |जब थोड़ी देर बाद उसका लंड थोडा ढीला पड गया तो वो हाथ मुंह धो कर बाहर आ गया |
वकास दुबारा ज़ाकिया के कमरे के सामने से गुज़रा तो देखा कि कमरे का दरवाज़ा खुला पड़ा है और ज़ाकिया कमरे में नहीं है |
तभी उसे किचन से आवाज़ आई , तो उसे ज़ाकिया की किचन में मौजूदगी का पता चला | वकास किचन की तरफ चल पड़ा | वकास जैसे ही किचन में दाखिल हुआ तो देखा कि ज़ाकिया अपने कानों पर वॉकमैन का हैडफ़ोन लगाए गाने सुन रही थी और साथ साथ चूल्हे के सामने खड़ी नाश्ता भी बना रही थी |
ज़ाकिया का मुंह चूल्हे की तरफ होने की वजह से उसकी बाहर निकली हुई बड़ी और मोटी गांड वकास की भूखी नज़रों के सामने थी |
वकास ने किचन के दरवाज़े पर खड़े खड़े थोड़ी देर अपनी बहन की मस्त गांड का दीदार किया | फिर ज़ाकिया को आवाज़ दी |
वकास : ज़ाकिया , मेरी चाय भी बना देना |
ज़ाकिया को कानो में लगे हैडफ़ोन की वजह से आवाज़ नहीं सुनाई दी तो वकास चुपके से ज़ाकिया के पीछे जा कर खड़ा हो गया और उसके कंधे पर हाथ रख दिया | हाथ ज़ाकिया के कंधे पर रखते ही वकास को ऐसे लगा जैसे उसने किसी गरम चीज़ को छु लिया है | ज़ाकिया का प्यासा जिस्म अब भी दहक रहा था |
ज़ाकिया जो कि अपने आप में मगन थी | किसी हाथ को अपने कंधे पर अचानक महसूस कर के एकदम से चौंक कर पलटी और उसने अपना मुंह वकास की तरफ घुमा लिया और बोली “कौन?”
“ओह भाई, तुम कब उठे”, कहते हुए ज़ाकिया ने अपने कानो से हैडफ़ोन उतारकर साइड पर रख दिया |
“ज़ाकिया लगता है जैसे तुम को बुखार है , तुम्हारा जिस्म तो आग की भट्ठी की तरह दहक रहा है, तुम अपने कमरे में जा कर आराम करो, मैं खुद नाश्ता बना लूँगा” |
“नहीं भाई मैं ठीक हूँ , बस शायद चूल्हे के ज्यादा करीब होने की वजह से जिस्म थोडा गर्म हो गया है” , ज़ाकिया ने वकास से कहा |
अब भला ज़ाकिया कैसे अपने भाई से कहती कि उसके जिस्म में यह गरमी और किस चीज़ के लिए है |
“अच्छा ठीक है, तुम मेरा नाश्ता भी बना दो, मुझे बाहर काम से जाना है” ,कहता हुआ वकास किचन से बाहर चला आया |
वो भी समझ गया था कि उसकी बहन के बदन की “तपस की वजह” किचन का चूल्हा नहीं बल्कि कुछ और है | बहन के प्यासे बदन की आग को बुझाने का सामान तो उसके पास था | मगर बहन भाई के मुकदस रिश्ते में बंधे होने की वजह से वकास बहुत ही बेबस था |
जब से ज़ाकिया न्यू यॉर्क आई थी | उसका ज्यादा टाइम घर पर ही गुजरता था | अकरम उसको महीने में कभी कबार एक दो दफा किसी देसी स्टोर पर खाने पीने की चीजें लेने या कभी किसी अमेरिकन डीपार्टमेंट स्टोर पर घर का सामान खरीदने के लिए साथ ले जाता |
इस से ज्यादा अकरम ज़ाकिया को घर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं देता था | इसीलिए इन दो सालो में ज़ाकिया के लिए न्यू यॉर्क जा अमेरिका सिर्फ उनका अपार्टमेंट के दो कमरे ही थे | इसकी वजह तो यह थी कि ज़ाकिया और अकरम की उम्र में ज़मीं आसमान का फरक होने की वजह से अकरम को जवान लड़के लड़कियों की तरह घूमना फिरना पसंद नहीं था |
दूसरा उम्र के फर्क की वजह से अकरम ज़ाकिया पर शक भी करता था | अकरम को यह अंजाना डर भी लगा रहता था कि अगर उसने ज़ाकिया को बाहर घुमने फिरने की आजादी दी तो हो सकता है कि वो किसी और के साथ अपना टांका फिट कर ले | इसीलिए उसने कभी ज़ाकिया को अकेले घर से बाहर नहीं जाने दिया |
वकास को अकरम की यह आदत पसंद नहीं थी | मगर वो दोनों मियां बीवी के दरमियाँ कुछ बोल कर घर का माहोल खराब नहीं करना चाहता था | इसीलिए उसने अकरम से कभी इस सिलसिले में बात ना की |
उस रात के वाक्या के बाद अगले दिन अकरम जॉब पर खड़ा अपनी ही सोचो में गुम था | अकरम शादी के पहले दिन से लेकर आज तक सिर्फ और सिर्फ अपने बूढ़े लंड का पानी निकालता और सो जाता | उसने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की , कि क्या ज़ाकिया की भी जिन्सी तसल्ली हुई जा नहीं |
अकरम यह बात बाखूबी जानता था कि अगर किसी जवान औरत का शोहर अपनी बीवी की चुदाई में तसल्ली ना कर सके तो फिर मजबूरन एक ना एक दिन वो औरत घर से बाहर अपना मुंह मारने लगती है | इस बात को सोच कर अकरम रात वाली बात से बहुत ज्यादा खोफ्ज़दा हो गया और उसने उस दिन के बाद ज़ाकिया का अपने और वकास के साथ घर से बाहर जाना भी बंद कर दिया |
यह बात ज़ाकिया को पसंद नहीं आई | मगर वो एक शरीफ बीवी की तरह ना चाहते हुए भी खामोश हो गई | इसी तरह दो महीने मजीद गुज़र गए | अब ज़ाकिया अपने घर में बिलकुल एक कैदी जैसी जिंदगी बसर कर रही थी |
अकरम घर के सामान के साथ साथ ज़ाकिया को रोजमर्रा इस्तेमाल की चीज़ें भी खुद ही खरीदकर लाता था | ज़ाकिया का इस माहोल में दम घुटने लगा | मगर वो फिर भी खामोश रही |
एक सुबह जब वकास काम से घर वापिस आ रहा था कि उसको घर से फ़ोन आया |
वकास : हेल्लो |
“भाई तुम किधर हो, जल्दी से घर आ जाओ “, दूसरी तरफ से ज़ाकिया की रोती हुई आवाज़ वकास के कानो में पड़ी |
वकास : खैरियत है , तुम रो क्यों रही हो?
वकास ज़ाकिया की आवाज़ सुन कर घबरा गया |
ज़ाकिया : भाई अकरम को कुछ हो गया है, आप जल्दी घर पहुँचो |
इतनी देर में वकास घर के बिलकुल सामने पहुँच गया था | वो टैक्सी को पार्क करके दौड़ता हुआ घर में दाखिल हुआ तो देखा कि ज़ाकिया अकरम के पास बिस्तर पर बैठी रो रही है |
वकास ने जल्दी से आगे बढकर अकरम के जिस्म को हाथ लगाया तो महसूस किया कि अकरम का जिस्म बिलकुल ठंडा पड़ा है और उसके जिस्म में कोई हरकत नहीं |
वकास ने फोरन 911 (इमरजेंसी वालों) को कॉल की | कॉल करने के 5 मिनट अन्दर ही एम्बुलेंस वाले घर पहुँच गए | उन्होंने अकरम को चैक किया | वकास और ज़ाकिया को बताया कि शुगर लो होने की वजह से उसका सोते में ही इन्तिकाल हो गया है |
वकास , और खास तौर पर ज़ाकिया पर यह बात बिजली बन कर गिरी | अकरम जैसा भी था आखिर उसका शोहर था और अब वो भरी जवानी में बेवा हो गयी थी |
यह सोच कर वो अपने आप को कोसता अपने कमरे से बाहर आया | वो बाथरूम में जाने के लिए अकरम और ज़ाकिया के कमरे के सामने से गुज़रा तो देखा कि ज़ाकिया के कमरे का दरवाज़ा थोडा खुला था | अकरम सुबह सुबह जॉब पर जा चूका था | ज़ाकिया कमरे में लगे शीशे के सामने अपने हाथ अपने सीने पर रखे साइड पोज में ऐसे खड़ी थी कि उसके जिस्म का राईट साइड वाला हिस्सा वकास की निगाहों के सामने था |
न्यू यॉर्क में अच्छी सेहतमंद खुराक और दो कमरों के अपार्टमेंट में कोई खास काम काज ना होने की वजह से ज़ाकिया का ज्यादा टाइम टीवी के सामने सोफे पर बैठ कर फ्रेंच फ्राइज खाते और कोका कोला पीते ही गुजरता था |
जिस वजह से ज़ाकिया का पतला जिस्म अब काफी भर गया था | उसके मम्मे पहले से काफी फ़ैल कर बड़े हो गए और उनका साइज़ दो सालो में ही 38 हो गया था |
ज़ाकिया की गांड भी पीछे से काफी बड़ी हो गई थी | उसकी गांड बिलकुल काली (अफ्रीकन अमेरिकन) औरतों की तरह बाहर को निकली हुई थी | जिसकी वजह से जब ज़ाकिया चलती तो उसकी गांड पीछे से चल चल करती और देखने वालो के लंडो का बुरा हाल कर देती |
वकास के कदम अपनी बहन को अपने सामने देख कर ज़मीं पर जैसे जम गए और वो अपनी बहन के जिस्म का जायज़ा लेने लगा |
ज़ाकिया के हाथ उसके मम्मो के निचे बंधे होने की वजह से ज़ाकिया के मम्मे ऊपर की तरफ उठ गये थे और साइड पोज में देखने से वकास को ज़ाकिया के बड़े बड़े गुदाज मम्मे उसकी कमीज़ से और भी नुमायाँ और बड़े नज़र आ रहे थे |
थोड़ी हील वाली जुती पहनने की वजह से ज़ाकिया की मस्त गांड पीछे से और ज्यादा उठी हुई महसूस हो रही थी और ज़ाकिया के बड़े चुतड का उभार वकास को ज़ाकिया के बड़े चाक वाली कमीज़ सलवार में से बहुत वाजिया दिखाई दे रहा था |
अपनी बहन को कमरे में ऐसे स्टाइल में खड़ा देख कर वकास के ज़ेहन में रात वाली सारी बातें एक फिल्म की तरह दुबारा दौड़ गईं और उसका लंड जो पेशाब आने की वजह से पहले ही उसके पजामे में फुल खड़ा था मजीद सख्त हो गया |
इससे पहले ज़ाकिया की नज़र वकास और पजामे में खड़े उसके लंड पर पड़ती वकास जल्दी से बाथरूम में चला आया |
बाथरूम में वकास ने जब पेशाब किया तो लंड फुल खड़ा होने की वजह से पहले तो उसका पेशाब ही नहीं निकल रहा था | मगर फिर जब निकला तो खड़े लंड से उसके पेशाब की धार दूर तक गई |
पेशाब से फारिग होने पर वकास के लंड को थोडा सकूँ तो मिला मगर अब भी उसका लंड पजामे में बैठने का नाम नहीं ले रहा था | वकास अब अपनी बहन के नाम की मुठ नहीं मारना चाहता था | इसीलिए वो बाथरूम के कमोड़ पर बैठ कर अपने लंड के ठंडा होने का इंतज़ार करने लगा |जब थोड़ी देर बाद उसका लंड थोडा ढीला पड गया तो वो हाथ मुंह धो कर बाहर आ गया |
वकास दुबारा ज़ाकिया के कमरे के सामने से गुज़रा तो देखा कि कमरे का दरवाज़ा खुला पड़ा है और ज़ाकिया कमरे में नहीं है |
तभी उसे किचन से आवाज़ आई , तो उसे ज़ाकिया की किचन में मौजूदगी का पता चला | वकास किचन की तरफ चल पड़ा | वकास जैसे ही किचन में दाखिल हुआ तो देखा कि ज़ाकिया अपने कानों पर वॉकमैन का हैडफ़ोन लगाए गाने सुन रही थी और साथ साथ चूल्हे के सामने खड़ी नाश्ता भी बना रही थी |
ज़ाकिया का मुंह चूल्हे की तरफ होने की वजह से उसकी बाहर निकली हुई बड़ी और मोटी गांड वकास की भूखी नज़रों के सामने थी |
वकास ने किचन के दरवाज़े पर खड़े खड़े थोड़ी देर अपनी बहन की मस्त गांड का दीदार किया | फिर ज़ाकिया को आवाज़ दी |
वकास : ज़ाकिया , मेरी चाय भी बना देना |
ज़ाकिया को कानो में लगे हैडफ़ोन की वजह से आवाज़ नहीं सुनाई दी तो वकास चुपके से ज़ाकिया के पीछे जा कर खड़ा हो गया और उसके कंधे पर हाथ रख दिया | हाथ ज़ाकिया के कंधे पर रखते ही वकास को ऐसे लगा जैसे उसने किसी गरम चीज़ को छु लिया है | ज़ाकिया का प्यासा जिस्म अब भी दहक रहा था |
ज़ाकिया जो कि अपने आप में मगन थी | किसी हाथ को अपने कंधे पर अचानक महसूस कर के एकदम से चौंक कर पलटी और उसने अपना मुंह वकास की तरफ घुमा लिया और बोली “कौन?”
“ओह भाई, तुम कब उठे”, कहते हुए ज़ाकिया ने अपने कानो से हैडफ़ोन उतारकर साइड पर रख दिया |
“ज़ाकिया लगता है जैसे तुम को बुखार है , तुम्हारा जिस्म तो आग की भट्ठी की तरह दहक रहा है, तुम अपने कमरे में जा कर आराम करो, मैं खुद नाश्ता बना लूँगा” |
“नहीं भाई मैं ठीक हूँ , बस शायद चूल्हे के ज्यादा करीब होने की वजह से जिस्म थोडा गर्म हो गया है” , ज़ाकिया ने वकास से कहा |
अब भला ज़ाकिया कैसे अपने भाई से कहती कि उसके जिस्म में यह गरमी और किस चीज़ के लिए है |
“अच्छा ठीक है, तुम मेरा नाश्ता भी बना दो, मुझे बाहर काम से जाना है” ,कहता हुआ वकास किचन से बाहर चला आया |
वो भी समझ गया था कि उसकी बहन के बदन की “तपस की वजह” किचन का चूल्हा नहीं बल्कि कुछ और है | बहन के प्यासे बदन की आग को बुझाने का सामान तो उसके पास था | मगर बहन भाई के मुकदस रिश्ते में बंधे होने की वजह से वकास बहुत ही बेबस था |
जब से ज़ाकिया न्यू यॉर्क आई थी | उसका ज्यादा टाइम घर पर ही गुजरता था | अकरम उसको महीने में कभी कबार एक दो दफा किसी देसी स्टोर पर खाने पीने की चीजें लेने या कभी किसी अमेरिकन डीपार्टमेंट स्टोर पर घर का सामान खरीदने के लिए साथ ले जाता |
इस से ज्यादा अकरम ज़ाकिया को घर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं देता था | इसीलिए इन दो सालो में ज़ाकिया के लिए न्यू यॉर्क जा अमेरिका सिर्फ उनका अपार्टमेंट के दो कमरे ही थे | इसकी वजह तो यह थी कि ज़ाकिया और अकरम की उम्र में ज़मीं आसमान का फरक होने की वजह से अकरम को जवान लड़के लड़कियों की तरह घूमना फिरना पसंद नहीं था |
दूसरा उम्र के फर्क की वजह से अकरम ज़ाकिया पर शक भी करता था | अकरम को यह अंजाना डर भी लगा रहता था कि अगर उसने ज़ाकिया को बाहर घुमने फिरने की आजादी दी तो हो सकता है कि वो किसी और के साथ अपना टांका फिट कर ले | इसीलिए उसने कभी ज़ाकिया को अकेले घर से बाहर नहीं जाने दिया |
वकास को अकरम की यह आदत पसंद नहीं थी | मगर वो दोनों मियां बीवी के दरमियाँ कुछ बोल कर घर का माहोल खराब नहीं करना चाहता था | इसीलिए उसने अकरम से कभी इस सिलसिले में बात ना की |
उस रात के वाक्या के बाद अगले दिन अकरम जॉब पर खड़ा अपनी ही सोचो में गुम था | अकरम शादी के पहले दिन से लेकर आज तक सिर्फ और सिर्फ अपने बूढ़े लंड का पानी निकालता और सो जाता | उसने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की , कि क्या ज़ाकिया की भी जिन्सी तसल्ली हुई जा नहीं |
अकरम यह बात बाखूबी जानता था कि अगर किसी जवान औरत का शोहर अपनी बीवी की चुदाई में तसल्ली ना कर सके तो फिर मजबूरन एक ना एक दिन वो औरत घर से बाहर अपना मुंह मारने लगती है | इस बात को सोच कर अकरम रात वाली बात से बहुत ज्यादा खोफ्ज़दा हो गया और उसने उस दिन के बाद ज़ाकिया का अपने और वकास के साथ घर से बाहर जाना भी बंद कर दिया |
यह बात ज़ाकिया को पसंद नहीं आई | मगर वो एक शरीफ बीवी की तरह ना चाहते हुए भी खामोश हो गई | इसी तरह दो महीने मजीद गुज़र गए | अब ज़ाकिया अपने घर में बिलकुल एक कैदी जैसी जिंदगी बसर कर रही थी |
अकरम घर के सामान के साथ साथ ज़ाकिया को रोजमर्रा इस्तेमाल की चीज़ें भी खुद ही खरीदकर लाता था | ज़ाकिया का इस माहोल में दम घुटने लगा | मगर वो फिर भी खामोश रही |
एक सुबह जब वकास काम से घर वापिस आ रहा था कि उसको घर से फ़ोन आया |
वकास : हेल्लो |
“भाई तुम किधर हो, जल्दी से घर आ जाओ “, दूसरी तरफ से ज़ाकिया की रोती हुई आवाज़ वकास के कानो में पड़ी |
वकास : खैरियत है , तुम रो क्यों रही हो?
वकास ज़ाकिया की आवाज़ सुन कर घबरा गया |
ज़ाकिया : भाई अकरम को कुछ हो गया है, आप जल्दी घर पहुँचो |
इतनी देर में वकास घर के बिलकुल सामने पहुँच गया था | वो टैक्सी को पार्क करके दौड़ता हुआ घर में दाखिल हुआ तो देखा कि ज़ाकिया अकरम के पास बिस्तर पर बैठी रो रही है |
वकास ने जल्दी से आगे बढकर अकरम के जिस्म को हाथ लगाया तो महसूस किया कि अकरम का जिस्म बिलकुल ठंडा पड़ा है और उसके जिस्म में कोई हरकत नहीं |
वकास ने फोरन 911 (इमरजेंसी वालों) को कॉल की | कॉल करने के 5 मिनट अन्दर ही एम्बुलेंस वाले घर पहुँच गए | उन्होंने अकरम को चैक किया | वकास और ज़ाकिया को बताया कि शुगर लो होने की वजह से उसका सोते में ही इन्तिकाल हो गया है |
वकास , और खास तौर पर ज़ाकिया पर यह बात बिजली बन कर गिरी | अकरम जैसा भी था आखिर उसका शोहर था और अब वो भरी जवानी में बेवा हो गयी थी |