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मजबूरी का फैसला complete

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दुसरे दिन वकास काफी देर सोता रहा | जब उसकी आँख खुली तो रात वाला सारा वाकया उसको दुबारा याद आ गया | क्योंकि वकास के दिमाग पर रात को चड़ने वाली मणि उसके लंड के रास्ते कल रात ही निकल गयी थी | इसीलिए अब वकास को अहसास होने लगा कि उसने अपनी बहन और बहनोई की निहायत प्राइवेट बातें सुन कर बहुत गलत किया है |

यह सोच कर वो अपने आप को कोसता अपने कमरे से बाहर आया | वो बाथरूम में जाने के लिए अकरम और ज़ाकिया के कमरे के सामने से गुज़रा तो देखा कि ज़ाकिया के कमरे का दरवाज़ा थोडा खुला था | अकरम सुबह सुबह जॉब पर जा चूका था | ज़ाकिया कमरे में लगे शीशे के सामने अपने हाथ अपने सीने पर रखे साइड पोज में ऐसे खड़ी थी कि उसके जिस्म का राईट साइड वाला हिस्सा वकास की निगाहों के सामने था |

न्यू यॉर्क में अच्छी सेहतमंद खुराक और दो कमरों के अपार्टमेंट में कोई खास काम काज ना होने की वजह से ज़ाकिया का ज्यादा टाइम टीवी के सामने सोफे पर बैठ कर फ्रेंच फ्राइज खाते और कोका कोला पीते ही गुजरता था |

जिस वजह से ज़ाकिया का पतला जिस्म अब काफी भर गया था | उसके मम्मे पहले से काफी फ़ैल कर बड़े हो गए और उनका साइज़ दो सालो में ही 38 हो गया था |

ज़ाकिया की गांड भी पीछे से काफी बड़ी हो गई थी | उसकी गांड बिलकुल काली (अफ्रीकन अमेरिकन) औरतों की तरह बाहर को निकली हुई थी | जिसकी वजह से जब ज़ाकिया चलती तो उसकी गांड पीछे से चल चल करती और देखने वालो के लंडो का बुरा हाल कर देती |

वकास के कदम अपनी बहन को अपने सामने देख कर ज़मीं पर जैसे जम गए और वो अपनी बहन के जिस्म का जायज़ा लेने लगा |

ज़ाकिया के हाथ उसके मम्मो के निचे बंधे होने की वजह से ज़ाकिया के मम्मे ऊपर की तरफ उठ गये थे और साइड पोज में देखने से वकास को ज़ाकिया के बड़े बड़े गुदाज मम्मे उसकी कमीज़ से और भी नुमायाँ और बड़े नज़र आ रहे थे |

थोड़ी हील वाली जुती पहनने की वजह से ज़ाकिया की मस्त गांड पीछे से और ज्यादा उठी हुई महसूस हो रही थी और ज़ाकिया के बड़े चुतड का उभार वकास को ज़ाकिया के बड़े चाक वाली कमीज़ सलवार में से बहुत वाजिया दिखाई दे रहा था |

अपनी बहन को कमरे में ऐसे स्टाइल में खड़ा देख कर वकास के ज़ेहन में रात वाली सारी बातें एक फिल्म की तरह दुबारा दौड़ गईं और उसका लंड जो पेशाब आने की वजह से पहले ही उसके पजामे में फुल खड़ा था मजीद सख्त हो गया |

इससे पहले ज़ाकिया की नज़र वकास और पजामे में खड़े उसके लंड पर पड़ती वकास जल्दी से बाथरूम में चला आया |

बाथरूम में वकास ने जब पेशाब किया तो लंड फुल खड़ा होने की वजह से पहले तो उसका पेशाब ही नहीं निकल रहा था | मगर फिर जब निकला तो खड़े लंड से उसके पेशाब की धार दूर तक गई |

पेशाब से फारिग होने पर वकास के लंड को थोडा सकूँ तो मिला मगर अब भी उसका लंड पजामे में बैठने का नाम नहीं ले रहा था | वकास अब अपनी बहन के नाम की मुठ नहीं मारना चाहता था | इसीलिए वो बाथरूम के कमोड़ पर बैठ कर अपने लंड के ठंडा होने का इंतज़ार करने लगा |जब थोड़ी देर बाद उसका लंड थोडा ढीला पड गया तो वो हाथ मुंह धो कर बाहर आ गया |

वकास दुबारा ज़ाकिया के कमरे के सामने से गुज़रा तो देखा कि कमरे का दरवाज़ा खुला पड़ा है और ज़ाकिया कमरे में नहीं है |

तभी उसे किचन से आवाज़ आई , तो उसे ज़ाकिया की किचन में मौजूदगी का पता चला | वकास किचन की तरफ चल पड़ा | वकास जैसे ही किचन में दाखिल हुआ तो देखा कि ज़ाकिया अपने कानों पर वॉकमैन का हैडफ़ोन लगाए गाने सुन रही थी और साथ साथ चूल्हे के सामने खड़ी नाश्ता भी बना रही थी |

ज़ाकिया का मुंह चूल्हे की तरफ होने की वजह से उसकी बाहर निकली हुई बड़ी और मोटी गांड वकास की भूखी नज़रों के सामने थी |

वकास ने किचन के दरवाज़े पर खड़े खड़े थोड़ी देर अपनी बहन की मस्त गांड का दीदार किया | फिर ज़ाकिया को आवाज़ दी |

वकास : ज़ाकिया , मेरी चाय भी बना देना |

ज़ाकिया को कानो में लगे हैडफ़ोन की वजह से आवाज़ नहीं सुनाई दी तो वकास चुपके से ज़ाकिया के पीछे जा कर खड़ा हो गया और उसके कंधे पर हाथ रख दिया | हाथ ज़ाकिया के कंधे पर रखते ही वकास को ऐसे लगा जैसे उसने किसी गरम चीज़ को छु लिया है | ज़ाकिया का प्यासा जिस्म अब भी दहक रहा था |

ज़ाकिया जो कि अपने आप में मगन थी | किसी हाथ को अपने कंधे पर अचानक महसूस कर के एकदम से चौंक कर पलटी और उसने अपना मुंह वकास की तरफ घुमा लिया और बोली “कौन?”

“ओह भाई, तुम कब उठे”, कहते हुए ज़ाकिया ने अपने कानो से हैडफ़ोन उतारकर साइड पर रख दिया |

“ज़ाकिया लगता है जैसे तुम को बुखार है , तुम्हारा जिस्म तो आग की भट्ठी की तरह दहक रहा है, तुम अपने कमरे में जा कर आराम करो, मैं खुद नाश्ता बना लूँगा” |

“नहीं भाई मैं ठीक हूँ , बस शायद चूल्हे के ज्यादा करीब होने की वजह से जिस्म थोडा गर्म हो गया है” , ज़ाकिया ने वकास से कहा |

अब भला ज़ाकिया कैसे अपने भाई से कहती कि उसके जिस्म में यह गरमी और किस चीज़ के लिए है |

“अच्छा ठीक है, तुम मेरा नाश्ता भी बना दो, मुझे बाहर काम से जाना है” ,कहता हुआ वकास किचन से बाहर चला आया |

वो भी समझ गया था कि उसकी बहन के बदन की “तपस की वजह” किचन का चूल्हा नहीं बल्कि कुछ और है | बहन के प्यासे बदन की आग को बुझाने का सामान तो उसके पास था | मगर बहन भाई के मुकदस रिश्ते में बंधे होने की वजह से वकास बहुत ही बेबस था |

जब से ज़ाकिया न्यू यॉर्क आई थी | उसका ज्यादा टाइम घर पर ही गुजरता था | अकरम उसको महीने में कभी कबार एक दो दफा किसी देसी स्टोर पर खाने पीने की चीजें लेने या कभी किसी अमेरिकन डीपार्टमेंट स्टोर पर घर का सामान खरीदने के लिए साथ ले जाता |

इस से ज्यादा अकरम ज़ाकिया को घर से बाहर जाने की इजाज़त नहीं देता था | इसीलिए इन दो सालो में ज़ाकिया के लिए न्यू यॉर्क जा अमेरिका सिर्फ उनका अपार्टमेंट के दो कमरे ही थे | इसकी वजह तो यह थी कि ज़ाकिया और अकरम की उम्र में ज़मीं आसमान का फरक होने की वजह से अकरम को जवान लड़के लड़कियों की तरह घूमना फिरना पसंद नहीं था |

दूसरा उम्र के फर्क की वजह से अकरम ज़ाकिया पर शक भी करता था | अकरम को यह अंजाना डर भी लगा रहता था कि अगर उसने ज़ाकिया को बाहर घुमने फिरने की आजादी दी तो हो सकता है कि वो किसी और के साथ अपना टांका फिट कर ले | इसीलिए उसने कभी ज़ाकिया को अकेले घर से बाहर नहीं जाने दिया |

वकास को अकरम की यह आदत पसंद नहीं थी | मगर वो दोनों मियां बीवी के दरमियाँ कुछ बोल कर घर का माहोल खराब नहीं करना चाहता था | इसीलिए उसने अकरम से कभी इस सिलसिले में बात ना की |

उस रात के वाक्या के बाद अगले दिन अकरम जॉब पर खड़ा अपनी ही सोचो में गुम था | अकरम शादी के पहले दिन से लेकर आज तक सिर्फ और सिर्फ अपने बूढ़े लंड का पानी निकालता और सो जाता | उसने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की , कि क्या ज़ाकिया की भी जिन्सी तसल्ली हुई जा नहीं |

अकरम यह बात बाखूबी जानता था कि अगर किसी जवान औरत का शोहर अपनी बीवी की चुदाई में तसल्ली ना कर सके तो फिर मजबूरन एक ना एक दिन वो औरत घर से बाहर अपना मुंह मारने लगती है | इस बात को सोच कर अकरम रात वाली बात से बहुत ज्यादा खोफ्ज़दा हो गया और उसने उस दिन के बाद ज़ाकिया का अपने और वकास के साथ घर से बाहर जाना भी बंद कर दिया |

यह बात ज़ाकिया को पसंद नहीं आई | मगर वो एक शरीफ बीवी की तरह ना चाहते हुए भी खामोश हो गई | इसी तरह दो महीने मजीद गुज़र गए | अब ज़ाकिया अपने घर में बिलकुल एक कैदी जैसी जिंदगी बसर कर रही थी |

अकरम घर के सामान के साथ साथ ज़ाकिया को रोजमर्रा इस्तेमाल की चीज़ें भी खुद ही खरीदकर लाता था | ज़ाकिया का इस माहोल में दम घुटने लगा | मगर वो फिर भी खामोश रही |

एक सुबह जब वकास काम से घर वापिस आ रहा था कि उसको घर से फ़ोन आया |

वकास : हेल्लो |

“भाई तुम किधर हो, जल्दी से घर आ जाओ “, दूसरी तरफ से ज़ाकिया की रोती हुई आवाज़ वकास के कानो में पड़ी |

वकास : खैरियत है , तुम रो क्यों रही हो?

वकास ज़ाकिया की आवाज़ सुन कर घबरा गया |

ज़ाकिया : भाई अकरम को कुछ हो गया है, आप जल्दी घर पहुँचो |

इतनी देर में वकास घर के बिलकुल सामने पहुँच गया था | वो टैक्सी को पार्क करके दौड़ता हुआ घर में दाखिल हुआ तो देखा कि ज़ाकिया अकरम के पास बिस्तर पर बैठी रो रही है |

वकास ने जल्दी से आगे बढकर अकरम के जिस्म को हाथ लगाया तो महसूस किया कि अकरम का जिस्म बिलकुल ठंडा पड़ा है और उसके जिस्म में कोई हरकत नहीं |

वकास ने फोरन 911 (इमरजेंसी वालों) को कॉल की | कॉल करने के 5 मिनट अन्दर ही एम्बुलेंस वाले घर पहुँच गए | उन्होंने अकरम को चैक किया | वकास और ज़ाकिया को बताया कि शुगर लो होने की वजह से उसका सोते में ही इन्तिकाल हो गया है |

वकास , और खास तौर पर ज़ाकिया पर यह बात बिजली बन कर गिरी | अकरम जैसा भी था आखिर उसका शोहर था और अब वो भरी जवानी में बेवा हो गयी थी |

 
ज़ाकिया बहुत रोई | मगर अकरम तो उससे दूर जा चूका था | पाकिस्तान में अकरम का कोई और रिश्तेदार तो था नहीं | इसलिए उसको न्यू यॉर्क में ही दफन कर दिया गया | अकरम की मौत के बाद ज़ाकिया बहुत उदास रहने लगी और उसको घर अब काटने को दौड़ता था |

इसीलिए ज़ाकिया ने एक दिन वकास को कहा , “भाई अब अकरम के बाद मेरा इधर रहने का कोई मकसद नहीं, इसीलिए आप मुझे पाकिस्तान भेज दो” |

वकास : ज़ाकिया तुम जाना चाहती हो ठीक है , लेकिन अगर तुम बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ?

ज़ाकिया : जी आप कहें |

वकास : ज़ाकिया मुझसे जाली शादी की वजह से तुम को अमेरिका आए हुए दो साल से ज्यादा का अरसा बीत चूका है और कुछ महीनों बाद तुम अपनी अमेरिकन सिटीजनशिप के लिए अप्लाई कर सकती हो | इसीलिए बेहतर होगा कि तुम थोडा रुक जाओ और अमेरिकन पासपोर्ट लेकर ही पाकिस्तान जाओ |

ज़ाकिया : भाई लेकिन जब मुझे अब इधर रहना ही नहीं तो मुझे सिटीजनशिप की क्या जरुरत है ?

वकास : ज़ाकिया बहन , हो सकता है कि तुम को मेरी बात बुरी लगे , लेकिन सच यह है कि तुम अभी जवान हो , इसीलिए अगर कल को किसी और से शादी करती हो तो अपने पेपर्स की वजह से तुम अपने शोहर को साथ लेकर दुबारा इधर आ सकती हो |

ज़ाकिया अब अमेरिका और रुकने को तैयार नहीं थी लेकिन वकास उसको पाकिस्तान वापिस भेजने को खुश नहीं था | इस की वजह शायद यह थी कि उसके अन्दर का जानवर जो पहले ही अपनी बहन की जवानी की तपश की वजह से थोडा थोडा जाग उठा था | अब घर में बहन के साथ अकेला होने की वजह से अन्दर से पूरी तरह बाहर आने को बेताब था और किसी अच्छे मौके को तलाश रहा था |

ज़ाकिया ने वापिस जाने की जिद पकड रखी थी | इसपर वकास ने अपनी माँ से बात की | शरीफा बीबी ने भी जब ज़ाकिया को समझाया तो वो इस शर्त पर रुकने को राज़ी हुई कि वकास उसको लेकर किसी और अपार्टमेंट में शिफ्ट करेगा | क्योकि उस अपार्टमेंट में ज़ाकिया को अकरम की बहुत याद सताती थी |

अकरम की मौत के बाद वकास वैसे भी दो बेडरूम का रेंट अकेले अफ्फोर्ड नहीं कर सकता था | इसीलिए वो ज़ाकिया के साथ एक और बिल्डिंग में वन बेडरूम अपार्टमेंट ले कर मूव हो गया |

दुसरे घर में भी पहले कुछ दिन ज़ाकिया बहुत अपसेट रही | वो हर वक़्त उदास और परेशान रहती | उसका घर के किसी काम में दिल नहीं लगता था |

वकास ने अब दिन को टैक्सी चलानी शुरु करदी | अब रात को वो घर ही होता था | वन बेडरूम होने की वजह से ज़ाकिया अंदर कमरे में सोती और वकास अब बाहर टीवी लाउंज में एक सोफा कम बेड पर सोने लगा | वकास से अपनी बहन ज़ाकिया का इस तरह हर वक़्त परेशान रहना बर्दास्त नहीं हो रहा था | वो चाहता था कि ज़ाकिया अब आहिस्ता आहिस्ता नार्मल ज़िन्दगी की तरफ लोट आए |

वकास को इल्म था कि यह काम मुश्किल जरुर है | मगर नामुमकिन नहीं | वकास ने इस काम को पूरा करने का बीढा उठाया |

पहले वकास कोई छुट्टी किये बिना हफ्ते के सातों दिन 12 घंटे टैक्सी चलाता था | अब वकास ने सोचा कि वो सन्डे को एक छुट्टी जरुर करेगा और उसदिन वो ज़ाकिया को अपने साथ न्यू यॉर्क सिटी की सैर करवाएगा |

इस तरह एक तो ज़ाकिया का दिल भी जल्दी बेहल जायेगा और दूसरा उसको ज़ाकिया के करीब रहने का मौका भी मिलेगा |

यह सोच कर उसने इस बारे में ज़ाकिया से बात की | ज़ाकिया पहले तो बाहर घुमने फिरने पर राज़ी नहीं थी | मगर जब वकास ने जिद की तो वो उसके साथ बाहर चलने को तैयार हो गई |

वकास हर वीकेंड पर ज़ाकिया को एक नई जगह पर ले जाता | कभी कभी वो दोनों रात को किसी रेस्तरां में खाना खाते और कभी कोई मूवी देखते |

शुरू में ज़ाकिया को यह सब पसंद ना आया क्योंकि अगर किसी जानवर को भी घर में बाँध दिया जाये तो वो भी इंसान के दिल में जगह बना लेता है और अकरम आखिर एक इंसान था और सब से बढ़कर उसका सरताज |

मागर कहते हैं ना , कि वक़त सब से बड़ा मरहम होता है | इसीलिए अहिस्ता आहिस्ता ज़ाकिया भी नार्मल जिन्दगी की तरफ लौट आई और उसने भी जिन्दगी को एन्जॉय करना शुरू कर दिया |

दो महीनो में ही वकास ने ज़ाकिया को न्यू यॉर्क की पूरी सैर करा दी | ज़ाकिया खुश थी कि उसका भाई उसका इतना ख्याल रखता था | ज़ाकिया भी अब अपने भाई की कंपनी को जैसे एन्जॉय करने लगी थी |

वो शाम होने पर घडी देखने लगती कि कब वकास घर वापिस आए | जब वकास घर आता तो दोनों बहन भाई इकट्ठे मिल कर खाना खाते और फिर शाम को घर के पास ही बने एक छोटे से पार्क में सैर को जाते | घर वापिस आ कर वो इकट्ठे थोडा टीवी देखते हुए आपस में थोडा बातचीत करते और फिर अपने अपने बिस्तर पर सो जाते | जिंदगी अब अपनी रूटीन पर चल पड़ी थी |

अकरम जब जिंदा था तो वो ज़ाकिया को अमेरिकन टीवी देखने की इजाज़त नहीं देता था | क्योंकि अमेरिकन टीवी पर नार्मल प्रोग्राम में भी कोई न कोई सेक्सी सीन होता था और किस्सिंग तो हर मूवी में आम होती है | इसीलिए अकरम ज़ाकिया को अमेरिकन टीवी देखने से मना करता था | जिसकी वजह से उन दिनों ज़ाकिया ज्यादातर वीसीआर पर या फिर डिश नेटवर्क पर इंडियन प्रोग्राम्स ही देखती |

नये घर में शिफ्ट होने की वजह से वकास ने डिश का कनेक्शन अभी चालू नहीं करवाया था | आज वकास के काम पर जाने के बाद ज़ाकिया घर के काम निपटा कर टीवी देखने बैठ गई | ज़ाकिया ने आज काफी महीनो बाद टीवी ओन किया | देसी प्रोग्राम्स तो अभी ओन नहीं हुए थे | इसीलिए ज़ाकिया ने रिमोट को हाथ में लेकर चैनल्स यूं ही इधर उधर घुमाना शुरू कर दिए |

थोड़ी देर बाद उसने रिमोट को एक स्पेनिश टीवी पर रोक दिया | जिधर शायद कोई स्पेनिश जुबान का ड्रामा चल रहा था | ज़ाकिया को स्पेनिश जुबान की समझ तो नहीं थी | मगर इसके बावजूद उसको स्पेनिश प्रोग्राम देखना अच्छा लगा | इसकी वजह तो शायद यह थी कि स्पेन पर 100 साला मुस्लिम रूल की वजह से अक्सर स्पेनिश लोगो के फेस और उनका रेहन सेहन देसी लोगो से बहुत मिलता है |

दूसरा उस ड्रामा में एक स्पेनिश हीरो ज़ाकिया को अच्छा लगा था और ज़ाकिया यह ड्रामा देखने लगी | एक दो सीन के बाद ड्रामा में हीरो और हेरोइन के किस्सिंग सीन चालू हो गई | क्योंकि ज़ाकिया को अब अकरम का कोई खतरा तो था नहीं | इसीलिए वो बड़े इत्मिनान से वो किस्सिंग सीन देखने लगी |

पता नहीं आज क्यों ज़ाकिया का दिल बेकाबू हो रहा था | शायद जिंदगी नार्मल होने का असर अब ज़ाकिया को भी महसुस होने लगा | आज उसका दिल और जिस्म ड्रामे में मौजूद गर्म सीने को देखते हुए गर्म होने लगा |

आहिस्ता आहिस्ता ज़ाकिया के जिस्म की भूख ने काफी वक़्त के बाद दुबारा सर उठाना शुरू कर दिया था | पहले तो अकरम उसके जिस्म की गर्मी को किसी ना किसी तरह ठंडा कर देता था | मगर अब ज़ाकिया अपने जिस्म की आग को कैसे ठंडा करे | यह अभी ज़ाकिया को समझ नहीं आ रहा था |

ज़ाकिया को महसूस हुआ कि उसकी शलवार निचे से जैसे गीली हो रही है | पहले तो ज़ाकिया इसको अपना वहम समझी | मगर फिर थोड़ी देर बाद ज़ाकिया उठ कर बाथरूम में चली गई और अपनी शलवार और पैंटी को उतार दिया | ज़ाकिया ने देखा कि वाक्या ही उसकी पैंटी ड्रामे के सेक्सी सीन की वजह से गीली हो गई थी | उसकी चूत के गर्म पानी का निशान उसकी पैंटी पर साफ़ नज़र आ रहा था |

ज़ाकिया अपनी चूत के इस तरह गर्म होने पर हैरान हुई | ज़ाकिया की लाख कोशिश के बावजूद आज उसके जिंसी ज़ज्बात दुबारा से सर उठा चुके थे |

ज़ाकिया ने अपनी गोरी फूली हुई चूत पर एक हसरत भरी निगाह डाली और अपनी कमीज़ और ब्रज़िएर भी उतारने के बाद अपने कपड़ो को बाथरूम के दरवाज़े के पीछे टांग दिया और फिर शावर के निचे खड़े हो कर ठंडा पानी खोल कर अपने गर्म जिस्म को शावर के ठन्डे पानी से ठंडा करने लगी |

अपने सख्त और जवान जिस्म पर हाथ फेरते फेरते ज़ाकिया के निप्प्लस बिलकुल तन गए और ज़ाकिया के जिस्म की आग और भड़क उठी | उसका दिल चाहता था कि कोई आकर उसे प्यार करे और उसके जवान जिस्म की सारी गर्मी निकाल दे | ज़ाकिया यह जानती थी कि यह कभी ना पूरी होने वाली आरज़ू थी | इसीलिए उसके हाथ बेबसी के आलम में अपने गोरे जिस्म पर फिसलते रहे | बड़े बड़े मम्मो की ऊँचाइयों पर घुमते रहे | चूत की गरम गहराईयों मे खोते रहे और ज़ाकिया के जिस्म की आग इसी तरह जलती रही |

उधर दूसरी तरफ शनिवार होने की वजह से टैक्सी का काम भी कुछ कम था और वैसे भी नाजाने क्यों आज वकास का दिल भी काम में नहीं लग रहा था | वकास ने दिन के एक बजे एक कस्टमर को “जैक्सन हाइट्स” में ड्राप किया | वकास काफी टाइम बाद “जैक्सन हाइट्स” आया था | इसीलिए वो गाडी पार्क कर के विंडो शापिंग को निकल पड़ा |

एक इंडियन फैशन शॉप के बाहर लगे डिस्प्ले में वकास को एक इंडियन स्टाइल की शलवार कमीज़ पसंद आई तो उसने अन्दर जा कर इंडियन आंटी से उस स्टाइल में कुछ डिफरेंट कलर्स दिखाने को कहा और साथ ही घर फ़ोन मिलाया ताकि ज़ाकिया से उसका साइज़ मालूम कर सके |

फ़ोन की बेल काफी देर बजती रही | मगर ज़ाकिया को बाथरूम में होने की वजह से आवाज़ सुनाई नहीं दी | वकास ने अपने अंदाज़े से ही मध्यम साइज़ की ड्रेस खरीद ली | दुकान से बाहर आ कर वकास ने दुबारा घर फ़ोन मिलाया | ज़ाकिया ने अब बाथरूम का पानी बंद कर दिया था | जिसकी वजह से उसको अब फ़ोन की घंटी की आवाज़ सुनाई दी तो वो नंगी ही दौड़ती हुई आई और फ़ोन रिसीव किया |

वकास : ज़ाकिया काफी देर से फ़ोन कर रहा हूँ, किधर हो?

ज़ाकिया : बाथरूम में शावर ले रही थी भाई |

वकास : अच्छा मैं आज जल्दी घर आ रहा हूँ , खाना तैयार है?

ज़ाकिया : भाई आप आ जाओ मैं खाना तैयार कर लेती हूँ |

फ़ोन रखते ही ज़ाकिया ने अलमारी से एक नया शलवार कमीज़ सूट निकलाकर पहन लिया और जल्दी से किचन में जा कर खाना तैयार करने लगी | ज़ाकिया का जिस्म अभी तक जल रहा था |

कुछ ही देर में वकास भी घर पहुँच गया | वकास ने ज़ाकिया के लिए खरीदा हुआ सूट गाडी में रखा | वो ज़ाकिया को थोडा सरप्राइज देना चाहता था | वकास घर में आने के फोरन बाद ही हाथ मुंह धोने बाथरूम में चला गया |

वकास ने अंदर से बाथरूम का दरवाज़ा लॉक किया तो उसकी नज़र दरवाज़े के पीछे टंगे हुए ज़ाकिया के कपड़ो पर पड़ी जो कि उसके पजामे के ऊपर लटक रहे थे |

 
पहले वाले अपार्टमेंट में दो बाथरूम होने की वजह से वकास और ज़ाकिया का अलग अलग बाथरूम था | लेकिन नये घर में एक ही बाथरूम की वजह से दोनों बहन भाई एक ही बाथरूम शेयर करने लगे थे |

जिस की वजह से दोनों बहन भाई की पहले जो थोड़ी बहुत प्राइवेसी थी | वो अब बिलकुल कम होने लगी | वकास ने ज़ाकिया के कपड़ो के निचे लटका हुआ अपना पजामा निकालना चाहा तो ज़ाकिया की पैंटी और ब्रज़िएर नीचे फ्लोर पर गिर गए | वकास ने झुककर अपनी बहन के दोनों अंडर गारमेंट्स उठाये और उनको अपने हाथों में लेकर उन का जायज़ा लेने लगा | ज़ाकिया का सफ़ेद कलर का देसी स्टाइल का ब्रज़िएर था | वकास ने बड़े प्यार से ब्रा का स्ट्रेप वाली जगह पर नज़र डाली ताकि बहन की ब्रज़िएर का साइज़ जान सके | जैसे ही उसने ब्रा पर 38 साइज़ पड़ा तो वो मस्त हो गया |

बहन के ब्रज़िएर को देखते हुए वकास के ज़ेहन में अपनी बहन ज़ाकिया का जिस्म घूमने लगा | उसको यूं महसूस हुआ कि जैसे ज़ाकिया यह ब्रज़िएर पहने उसके सामने खड़ी है | ब्रज़िएर में ज़ाकिया की बड़ी बड़ी गोल सफ़ेद छातियाँ ऐसे लग रही थी कि जैसे उनको ब्रज़िएर में ज़बरदस्ती क़ैद किया हुआ हो और वो ब्रज़िएर को फाड़ कर बाहर आने को मचल रही हों |

ब्रज़िएर के साथ साथ वकास ने अपनी बहन की पैंटी का भी जायज़ा लेने लगा | ज़ाकिया की छोटी सी पैंटी भी सफ़ेद कलर की थी | जिस पर छोटे छोटे काले रंग की लाइन्स बनी हुई थी |

ज़ाकिया की पैंटी पर उसका पसीना और चूत से निकलने वाले ताज़े पानी के निशान अभी भी खुशक नहीं हुए थे | वकास ने पैंटी की चूत वाली जगह पर निशान देखा तो एक लम्हे में समझ गया कि यह निशान उसकी बहन ज़ाकिया की गर्म फुद्दी से निकलने वाले पानी का है |

वकास जोशीले जज्बात में अपनी आँखें बंद करके दिन में ही सपने देखने लगा | वकास के सपनो में उसकी बहन ज़ाकिया की गांड पैंटी में लिपटी उसकी आँखों के सामने दौड़ने लगी | ज़ाकिया की गांड की बड़ी बड़ी पहाड़ियाँ छोटी सी सेक्सी पैंटी में फंसी गज़ब ढा रही थी |

वकास बेइख्तियार पैंटी को अपने नाक और मुंह के करीब लाया और पैंटी को सुंघा तो बहन की जवान चूत की भीनी भीनी महक वकास को मदहोश कर गई |

वकास ने अपनी बंद आँखें खोलीं | अपनी जुबान को बाहर निकला और बहन की पैंटी की गीली जगह पर अपनी जुबान रख दी | वकास को बहन की चूत के पानी का नमकीन टेस्ट अपनी जुबान पर महसूस हुआ | तो वो पैंटी को पागलो की तरह चाटता चला गया |

“ज़किआआआआ तुम्हारी चूत की खुशबू बहुत मीठी है मेरी बहन , और तुम्हारी चूत का स्वाद बहुत्त्त्तत्त्त्त ही मज़ेदाररररर है मेरी बहनननननननन” वकास दीवानों की तरह अपनी बहन की पैंटी को चूमता और चाटता रहा | साथ साथ उसके हाथ अपने लंड से भी खेलते रहे |

 
वकास अपने ख्यालों में मस्त था कि ज़ाकिया की आवाज़ उसे हकीकी दुनिया में वापिस ले आई | ज़ाकिया उसको किचन से बुला रही थी कि खाना लग गया है | वकास ने जल्दी से बहन के सारे कपड़ो को पहले वाली हालत में दरवाज़े के पीछे लटका दिया और पजामा चेंज किया |

वकास का लंड अभी भी पजामे में खड़ा था और किसी भी तरह बैठने का नाम नहीं ले रहा था | वकास ने पजामे के निचे एक तंग अंडरवियर पहनकर अपने लंड को थोडा काबू किया और बाथरूम से बाहर निकल आया |

दोनों बहन भाई ने मिल कर खाना खाया | खाना खाते ही वकास पर नींद की खुमारी आने लगी तो वो आराम की गरज से सोफे पर ही लेट गया |

सोफे पर लेटते ही वकास ने खर्राटे लेना शुरू कर दिया | ज़ाकिया भी भाई को सोता देखकर अपने कमरे में थोडा आराम करने चली गई | वकास जब सो कर उठा तो टीवी लाउंज में लगी घडी शाम के 6 बजा रही थी |

वकास को बाथरूम से पानी की आवाज़ सुनाई दी तो वो समझ गया कि ज़ाकिया अन्दर बाथरूम में है | वकास जल्दी से उठा और फिर टैक्सी से ज़ाकिया के लिए खरीदा हुआ शलवार कमीज़ सूट ज़ाकिया के बिस्तर पर रख कर दुबारा टीवी लाउंज में बैठ कर टीवी देखने लगा |

ज़ाकिया जब बाथरूम से बाहर निकलकर अपने कमरे में दाखिल हुई तो उसकी नज़र अपने बिस्तर पर पड़े शापिंग बैग पर पड़ी | ज़ाकिया ने हैरत से बैग खोला तो उसको हलके पीले कलर की छोटी सी रेशमी स्लीवेलेस कमीज़ और वाइट कलर की पटिआला स्टाइल की रेशमी शलवार नज़र आई |

ज़ाकिया हैरान हुई कि यह कपडे किधर से आए ? और किसके हैं? ज़ाकिया ने सूट को हाथ में उठाया और टीवी लाउंज में चली आई | टीवी लाउंज में वकास उसे टीवी देखता मिला |

ज़ाकिया : भाई यह कपडे किस के हैं?

वकास : यह मैं तुम्हारे लिए लेके आया हूँ , ज़ाकिया |

यूं तो शादी के बाद अकरम ने ज़ाकिया को पैसों की कोई कमी नहीं होने दी थी | मगर अकरम ने कभी भी ज़ाकिया को कोई गिफ्ट खुद खरीद कर नहीं दिया था |

इसीलिए जब उसके भाई ने पहली बार उसे एक सूट तोहफे में दिया तो ज़ाकिया को दिली तोर पर ख़ुशी महसूस हुई | मगर फिर भी ज़ाकिया ने हैरत से वकास को देखते हुए पूछा |

ज़ाकिया : मेरे लिए मगर किस ख़ुशी में भाई ?

वकास : ख़ुशी तो कोई खास नहीं बस मै “जैक्सन हाइट्स” में गया था , उधर यह सूट पसंद आया तो सोचा तुम्हारे लिए खरीद लूं |

ज़ाकिया : मगर भाई यह तो मेरे साइज़ का भी नहीं और स्लीवेलेस भी है , तुम को पता है कि मैं इस तरह के कपडे नहीं पहनती , तुम इसको वापिस कर दो |

वकास जिसने इतने प्यार से अपनी बहन के लिए यह सूट लिया था उसको ज़ाकिया की यह बात पसंद नहीं आई तो वो बोला “ज़ाकिया मैं इतने प्यार से तुम्हारे लिए लाया हूँ अगर तुमने नहीं पहनना तो इसे ट्रेश में फैंक दो” |

ज़ाकिया समझ गई कि वकास को उसका इन्कार बुरा लगा है | वो अपने भाई को नाराज़ नहीं करना चाहती थी |

इसीलिए उसने वकास का दिल रखने को कहा, “अच्छा भाई आप नाराज़ मत हो , मैं इन को कभी पहन लूंगी”|

“कभी नहीं आज और अभी इनको पहन कर तैयार हो जाओ , आज बाहर किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने चलते हैं”, वकास यह कहते हुए शावर लेने बाथरूम में घुस गया |

ज़ाकिया अब मुश्किल में पड गई | उसने भाई से जल्दी में यह कपडे पहने का वादा तो कर लिया था | उसको यह नहीं पता था कि उसको अपना वादा इतनी जल्दी निभाना पड जाएगा |

अब ना चाहते हुए “अच्छा भाई” कहते हुए ज़ाकिया कपडे उठाये हुए अपने कमरे में वापिस आ गई | ज़ाकिया ने अपने कपडे उतारे और अपने भाई की लाई हुई शलवार कमीज़ पहनने लगी | ज़ाकिया आमतौर पर बंद गले वाले खुले खुले कपडे पहनने की आदि थी | वकास की खरीदी हुई कमीज़ लो कट थी | जिस का साइज़ भी ज़ाकिया को थोडा तंग महसूस हो रहा था |

ज़ाकिया के मम्मे अब पहले से काफी बड़े हो चुके थे | इस वजह से जब ज़ाकिया ने कमीज़ पहनी तो वो उसकी बड़ी बड़ी छातिओं पे जा कर फंस गई | ज़ाकिया ने जैसे तैसे करके और अपने बड़े बड़े मम्मो को दबा कर वो कमीज़ पहन ही ली |

शलवार पहनने के बाद ज़ाकिया ने थोडा हल्का सा मेकअप किया | हाथों में चूड़ी पहनी | गले में नेकलेस डाला और कानो में मैचिंग इअर रिंग पहने |

फिर अपना दुपट्टा सीने पर लिया और कमरे में लगे | शीशे में अपने आप का जायज़ा लेने लगी | तो वो अपना रूप देख कर खुद ही शर्मा गई |

कपडे की फिटिंग टाइट होने की वजह से यह सूट ज़ाकिया के जिस्म से चिपका हुआ था | जिसकी वजह से उसके जवान भरे जिस्म का अंग अंग नुमायां हो रहा था |

कमीज़ छातियों पर भी काफी तंग होने की वजह से ज़ाकिया के मम्मे कमीज़ में दबे हुए थे और कमीज़ लो कट होने की वजह से ज़ाकिया के मम्मे और भी उभर कर बाहर को निक्ले हुए साफ़ नज़र आ रहे थे |

ज़ाकिया आज बहुत अच्छी तरह से तैयार हुई और बहुत ही प्यारी लग रही थी |

ज़ाकिया ने कोशिश की कि उसकी चूचियां किसी ना किस तरह उसके छोटे से दुपट्टे में छुप जायें | इसके लिए उसने दुपट्टे को फैला कर अपने सीने को ढांपने की कोशिश भी की |

मगर उसका दुपट्टा भी रेशमी होने की वजह से उसकी जवान छातिओं से सरक सरक जा रहा था | जिसकी वजह से ज़ाकिया के सीने के उभार और भी नुमायाँ हो रहे थे |

ज़ाकिया को समझ नहीं आ रही थी कि वो कैसे इस रूप में अपने ही भाई का सामना करे |

मगर साथ ही उसे यह ख्याल आया कि उसकी भाई ही तो उसके लिए यह कपडे खुद खरीद कर लाया है | अब अगर कपड़ो की फिटिंग की वजह से उसका जिस्म नुमायाँ हो रहा है तो उसमें उसका क्या कसूर है |

ज़ाकिया एक कशमकश में थी कि वो इन कपड़ो को उतार कर कोई दूसरा सूट पहन ले | वो अभी इसी सोच में थी कि उसे वकास की आवाज़ आई , “ज़ाकिया मैं तैयार हूँ , तुम ज़रा जल्दी करो ना” |

भाई की आवाज़ सुनकर ज़ाकिया ने अपने भाई का इन कपड़ो में सामना करने की हिम्मत कर ही ली और अपनी तैयारी को एक फाइनल टच देकर कमरे से बाहर आई |

वकास बाहर सोफे पर तैयार बैठा गैस का बिल देख रहा था | इसीलिए उसकी नज़रें अभी अपनी बहन ज़ाकिया पर नहीं पड़ी |

ज़ाकिया कमरे में बिछे कारपेट पर दबे पांव आहिस्ता आहिस्ता चलती हुई वकास के सामने वाले सोफे पर बैठ गई और अपनी हील वाली जूती को पहन कर जुती के स्ट्रेप बंद करने के लिए झुकी |

इस तरह झुकने से ज़ाकिया के मम्मे उसकी कमीज़ से एक दम बाहर छलक पड़े |

इतने में सामने बैठे वकास की नज़र जब अपनी बहन के मम्मो पर पड़ी | तो वो अपनी बहन की जवानी को यूं आजाद देख कर हैरान रह गया |

 
वकास ने पहले तो फोरन अपनी नज़रें झुका लीं | लेकिन फिर दुसरे ही लम्हे दुबारा नजरें उठाई तो वो अपनी बहन का हुसन देखता ही रह गया |

उभरे हुए गोरे गोरे मम्मे और लो कट से नज़र आता पूरा क्लीवेज , वकास की नज़र चिपकी ही रह गई | उसकी हालत तो देखने जैसी हो गयी थी | ज़ाकिया अपनी स्ट्रेप बांधने में मशरूफ थी और वो ऐसे बीहेव कर रही थी | जैसे उसे पता ही नहीं |

ज़ाकिया ने स्ट्रेप को बांधा और अपनी ही धुन में उठी और सीधी हो कर खड़ी हो गई | उसने एक लम्बी सांस भरी और हलके से छोड दी | ऐसा करने से छाती भर आई तो मम्मो की मूवमेंट भी हुई |

वकास के दिल पर तो जैसे चिंगारी चल गई | इसी लम्हे दोनों बहन भाई की नज़रें एक दुसरे से मिलीं तो दोनों ने एक दम से अपनी नज़रें चुरा लीं जैसे वो एक दुसरे के चोर हों |

ज़ाकिया को अब बहुत शर्म आ रही थी | वो अपने भाई से आँखें नहीं मिला पा रही थी | इसीलिए वो सर निचे करके खड़ी थी |

आज काफी टाइम बाद दुबारा वकास को स्लीवलेस कमीज़ में अपनी बहन की गोरी बाहें और बड़ी बड़ी सफ़ेद छातियाँ देखने को मिली थी | वकास अपने दिल में सोचने लगा कि वो अपने ही घर में कैसे कयामत के हसीं जिस्म के साथ रह रहा है | वो उसकी बहन ही सही , था तो एक हसीं औरत का हसीं जिस्म |

और अपनी बहन का मस्त जवान बदन वकास के जिस्म में आग लगा रहा था | उसका लंड उसकी पेंट में फुल तन गया | वकास दम बाखुद हो कर अपनी बहन के जवान बदन का नजारा किये जा रहा था | ज़ाकिया ने चोर नज़रों से वकास की तरफ देखा तो उसने भाई को अपनी तरफ ही देखते पाया |

ज़ाकिया को अपने ही भाई का उसे इस बेखुदी से देखना अजीबा सा लगा |

इतनी देर में वकास बेईख्तियार सोफे से उठा | ज़ाकिया के पास आकर उसे जोर से अपने साथ भींच लिया और ज़ाकिया के सर पे एक छोटा किस कर के बोला, “वाऊ !!! तुम तो गज़ब की खुबसूरत लग रही हो ,मेरी बहन” |

एक ही घर में रहते हुए दोनों बहन भाई इससे पहले कभी इतने नज़दीक नहीं आए थे और ना ही कभी आपस में इतने फ्री हुए थे | इसीलिए वकास का उसे यूँ अपने साथ लिपटना ज़ाकिया को अजीब सा महसूस हुआ |

ज़ाकिया हैरान थी | उसे समझ नहीं आई कि उसके भाई को आज क्या हुआ है | ज़ाकिया ने अपने भाई से अलग होने की कोशिश की, “छोडो भाई, मेरे कपडे खराब हो जायेंगे” |

आज पहली बार वकास ने अपनी बहन के बदन को यूँ अपनी बाँहों के घेरे में लिया था | इसीलिए उसका दिल कर रहा था कि वक़त इधर ही ठहर जाए |

वकास ने बहन को छोड़ने की बजाय उसको इतना जोर से पकड़ा कि उसके मुम्मे वकास के जवान चोडे सीने में दब गए | वकास का लंड फुल खड़ा हुआ था और ज़ाकिया के जिस्म की गर्मी से वकास की हालत बहुत बुरी हो रही थी | दोनों बहन भाई एक दुसरे के साथ पूरे चिपक गये | दो प्यासे बदन एक लम्हे में एक दुसरे में जज़ब हुए |

दोनों बहन भाई के जिस्म दुपहर में होने वाले वाक्य की वजह से अभी तक गर्म थे | इसीलिए जब ऊपर छाती से छाती टकराई तो निचे भाई के लंड ने (वकास के लाख रोकने के बावजूद) रेशमी शलवार के ऊपर से पहली बार बहन की फुद्दी के दरवाज़े पर एक हलकी सी दस्तक दी |

(इंडियन मूवी “दिल तो बच्चा है” के एक गाने में नसीरुद्दीन शाह ने इसीलिए कहा है कि ) “लंड सा कोई कमीना नहीं” |

लगता था कि आज वकास का लंड पूरी तरह अपनी कमीनगी पर उतर आया था |

ज़ाकिया कोई बच्ची तो थी नहीं , वो एक शादीशुदा मच्योर औरत थी | इसीलिए जैसे ही उसे अपनी गुदाज टांगों के दरमियाँ कोई सखत सी चीज़ चुभी तो वो एक लम्हे में ही समझ गई किके यह क्या है |

इससे पहले कि दोनों बहन भाई के जवान गरम बदन , जवानी की प्यास में मजीद बहकते | ज़ाकिया ने अपने आप को भाई की मज़बूत ग्रिफ्त से आजाद करवा लिया |

भाई के जवान तगड़े लंड का अपनी गर्म चूत पर थोडा अहसास होते ही ज़ाकिया की सांसें रुक सी गयीं | उसे यकीन ना हो रहा था कि वाक्य ही उसके भाई का लंड उसे अपनी टांगों के दरमियाँ महसुस हुआ है |

ज़ाकिया ने वकास से अलग होते ही अपने भाई के चेहरे पर एक हैरतजूदा नज़र डाली | वकास को गुदाज मम्मो को अपनी सखत छाती से टकराने और बहन की चूत पर लंड टच होने का बहुत मज़ा आया | मगर वकास ने इस मज़े का इज़हार अपने चेहरे से नहीं किया |

वो अपने चेहरे से ऐसे ज़ाहिर कर रहा था | जैसे उन दोनों के दरमियाँ कुछ खास बात नहीं हुई | वकास ने ज़ाकिया से अलग होते ही कमरे की दीवार पर लटकी हुई टैक्सी की चाभी उठाई और बोला

वकास : चलो ज़ाकिया चलें |

टैक्सी में भाई के साथ सफर करते ज़ाकिया की सांसें अभी तेज़ चल रही थी | एक पाकिस्तानी रेस्टोरेंट में पहुँचकर ज़ाकिया वकास के सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई | दोनों के दरमियाँ टेबल पड़ी थी | वकास वेटर के दिए हुए रेस्टोरेंट मेनू को हाथ में लिए देख रहा था |

ज़ाकिया ने भी एक मेनू उठाया और टेबल पर रख कर पड़ने लगी | अपने सीने के निचे हाथ डाले ज़ाकिया टेबल पर झुकी हुई थी | जिसकी वजह से ज़ाकिया की बड़ी और खुबसूरत चूचियां और दिखाई देने लगी |

दोनों बहन भाई दिखने में मसरूफ थे लेकिन वकास की नज़र ज़ाकिया के बदन पर ही लगी हुई थी | वो चोरी चोरी अपनी बहन के मुम्मो को देखकर गर्म हो रहा था |

आखिर कुछ देर बाद ज़ाकिया ने वकास को मुखातिब किया ,“भाई आपने जो भी चीज़ खानी है , जल्दी से आर्डर कर दो , बहुत भूख लगी है” |

वकास चौंका और उसने अपनी नज़रों के सामने से मेनू हटाया और साथ ही उसकी नज़र अपनी बहन की गोरी छातियों पर पड़ी |

“खाना तो मैं चाहता हूँ , तुम्हारी इन गोरी बड़ी छातियों को मगरररररर” वकास के दिल की बात उसके होंठो पर आते आते रुक गई |

“आज तुम जो चाहो आर्डर कर दो”, वकास ने जवाब दिया |

ज़ाकिया ने वेटर को बुला कर खाने का आर्डर किया और खाना आने पर दोनों बहन भाई भूखो की तरह खाने पर टूट पड़े | खाने के दौरान ज़ाकिया चटनी बहुत इस्तेमाल करती थी | इसीलिए अब भी चटनी की बोतल उसके पास ही रखी थी |

वकास भी अपने प्लेट में चाटनी डालना चाहता था | इसीलिए जब उसने ज़ाकिया के पास पड़ी चटनी को देखा तो ज़ाकिया समझ गयी कि भाई को क्या चाहिए तो वो बोली , “भाई आप को चटनी चाहिए”

“चाटनी तो मैं चाहता हूँ अगर तुम चाटने दो तो” , वकास के मुंह से बेईख्तियार निकल पड़ा |

 
वकास का दिल धक धक करने लगा कि कैसे यह बात उसके मुंह से स्लीप हो गई और न जाने अब ज़ाकिया उसकी बात का कैसे रियेक्ट करे |

लेकिन ज़ाकिया को वाक्स की बात की समझ ना आई बल्कि वकास की बात ज़ाकिया के दिमाग के ऊपर से गुज़र गई और वो कुछ ना बोली |

वकास ने दिल में शुकर किया , चटनी ले कर प्लेट में डाली और दुबारा खाने में मसरूफ हो गया | खाने के बाद दोनों जब घर वापिस आये तो रात काफी हो चुकी थी | घर के बाहर ज्यों ही वकास ने टैक्सी पार्क की | ज़ाकिया वकास से पहले टैक्सी से निकली और घर का दरवाज़ा खोलने लगी |

दरवाजा खोलते हुए ज़ाकिया को ना जाने क्यों वहम हुआ कि उसके बड़े बड़े कुल्हों और पीठ पर उसके अपने भाई की तपती निगाहें जमी हुई है | मगर उसकी हिम्मत ना हुई कि वो मुड कर पीछे देखे |

शायद अपने वहम को यकीन में बदलता देखने की ज़ाकिया में हिम्मत ना थी | वकास गाड़ी से निकलकर अपार्टमेंट कोम्प्लेकस की लॉबी में लगे मेल बोक्स की तरफ गया और उधर से अपनी मेल चेक की |

मेल बॉक्स में पाकिस्तान से आया हुआ एक लिफाफा वकास के मुम्तिज़र था | वकास ने लिफ़ाफे को खोला तो उस में उसकी अम्मी का लिखा हुआ ख़त और दो तस्वीरें थी |

बाहर ही खड़े खड़े खत पड़ने के बाद वकास ने तस्वीरों को देखा और मुस्कुराता हुआ घर में दाखिल हुआ |

वकास को टीवी लाउंज में ज़ाकिया नज़र ना आई तो उसने आवाज़ दी “ज़ाकिया किधर हो , इधर आओ”

ज़ाकिया : भाई ,मैं कपडे बदल कर आती हूँ |

थोड़ी देर बाद ज़ाकिया टीवी लाउंज में आई और वकास के सामने वाले सोफे पर बैठ गई | वकास अभी तक हाथ में पकड़ी तस्वीरों को देख कर मुस्कराए जा रहा था |

ज़ाकिया: भाई यह ख़त और फोटो किसकी हैं और तुम इतना मुस्कुरा क्यों रहे हो ?

वकास ने ख़त ज़ाकिया को देते हुए कहा, “ख़त अम्मी का है और यह तसवीरें रेहाना बाजी के देवर और नन्द की हैं | जिनसे अम्मी ने मेरा और तुम्हारा रिश्ता तै करना है” |

ज़ाकिया ने अम्मी का ख़त पड़ा और फोटो को देख कर एक तरफ पटकते हुए बोली, “भाई मैंने तो अभी दुबारा शादी नहीं करनी , इसीलिए मुझे तो आप लोग माफ करें , हाँ आप को अब शादी कर लेनी चाहिए” |

“मेरी तो दो दफा शादी हो चुकी है , एक ग्रीन कार्ड लेने के लिए और दूसरी तुमसे , तुम्हें ग्रीन कार्ड दिलवाने के लिए , अब अमेरिकन लॉ के मुताबिक मैं अपनी दूसरी बीवी के होते तीसरी शादी तो नहीं कर सकता”, वकास ज़ाकिया की आँखों में आँखें डालते हुए बोला |

वकास को अपनी बहन को तंग करने में मज़ा आता था | इसीलिए वो ज़ाकिया को छेड़ने के मूड में था |

भाई के मुंह से अपने आप को उसकी “बीवी” कहते सुन कर ज़ाकिया शर्मा गई |

वकास की बात बहुत हद तक सही तो थी | घर में बेशक वो बहन भाई थे | मगर “जाली निकाहनामें की वजह से” घर से बाहर दुसरे लोगो की नज़र में तो वो एक “मियां बीवी” थे |

ज़ाकिया : भाई , लेकिन कुछ ही टाइम बाद जब मैं अमेरिकन सिटीजन बन जाउंगी तो फिर तो आप मुझे पेपर्स में जाली तलाक देने के बाद शादी कर सकते हो ना |

वकास : हाँ मगर यह अब नामुमकिन लगता है ?

ज़ाकिया : वो क्यों भाई ?

“वो इसीलिए कि मुझे अब शादी उस लड़की से करनी है जो तुम से ज्यादा प्यारी और खुबसूरत हो और मुझे यकीन है कि इस दुनिया में मेरी बहन से ज्यादा प्यारी लड़की कोई हो नही सकती, इसीलिए मेरी शादी तो तुम अब इम्पॉसिबल समझो” ,वकास ने अपनी बहन को मस्का मारते हुए कहा |

भाई की बात सुन कर ज़ाकिया का चेहरा शर्म से सुरख़ हो गया | वो चुप रही | बोलती भी तो क्या वकास ज़ाकिया के जवाब का मुतिज़र था | वो इन्तिज़ार कर रहा था कि ज़ाकिया उसकी बात से चिडे और उससे बहस करे | मगर ज़ाकिया अपने भाई से जान छुड़ाने के लिए सोफे से उठी और बोली, “भाई आप भी हद्द करते हैं” | यह कहते हुए ज़ाकिया सोने के लिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गई |

ना जाने क्यों ज़ाकिया को दिल ही दिल में उसके भाई का उसे अपनी “बीवी” कहना , उसकी “तारीफ” करना अच्छा लगा | मगर वो इसका इज़हार अपने भाई के सामने नहीं करना चाहती थी |

ज़ाकिया ने अन्दर से कमरे की कुण्डी लगाई और बिस्तर पर गिर गई | ज़ाकिया बिस्तर पर जाते ही सो गई और जोर जोर से खर्राटे लेने लगी | बाहर वकास को भी बहन के खर्राटे सुनाई देने लगे | वकास सोफे से उठ कर ज़ाकिया के कमरे की तरफ गया तो देखा कि ज़ाकिया के कमरे का दरवाज़ा बंद है | वकास को पता था कि ज़ाकिया हमेशा दरवाज़ा अन्दर से लॉक कर के सोती है | मगर फिर भी उसने अपनी तसल्ली के लिए दरवाज़े को थोडा जोर लगा कर चेक किया तो उसे यकीन हो गया कि दरवाज़ा अन्दर से लॉक है |

वकास वापिस टीवी लाउंज में आया और अपनी पेंट उतार दी | अब वो सिर्फ अपने अंडरवेअर में टीवी लाउंज में खड़ा था और उसका लंड अपनी बहन के बदन की गर्मी की वजह से अभी तक उसके अंडरवेअर में फुल तन कर खड़ा था |

थोड़ी देर बाद वकास अपने सोफे कम बेड पर बैठ कर टीवी देखने लगा | टीवी देखते हुए वकास ने अंडरवेअर के दरमियाँ में से अपनी खड़ा हुआ लंड निकाला और लंड पर अपना हाथ मारने लगा | लंड से खेलते हुए वकास को बेडरूम की तरफ से थोड़ी आवाज़ आई तो वो समझा कि ज़ाकिया बाथरूम में गई है |

वकास का खून खुशक हो गया | अब वो जल्दी से उठ कर पेंट या पजामा तो पहन नहीं सकता था | इसीलिए उसने फोरन अपने लंड पर कम्बल डाल लिया | थोड़ी देर बाद जब बाथरूम से मजीद कोई आवाज़ ना आई तो वो समझ गया कि उसका वहम था |

वकास ने अपने लंड से कम्बल हटाया और ज़ाकिया के मस्त जवान जिस्म को अपने ज़ेहन में याद करते लंड से दुबारा खेलने लगा |

आज अपनी बहन के गर्म जिस्म का खुला नज़ारा देखकर वकास को बहुत स्वाद आया था | वकास ने थोड़ी देर लंड से खेलने के बाद अपना अंडरवेअर भी उतार दिया और दोनों हाथों से अपने टट्टे और लंड को पकड़ कर मुठ मारने लगा |

वकास ज़ाकिया के नाम की मुठ लगाते उसकी गर्म फुद्दी , गोल बाहर को निकली गांड और चौड़े बड़े मम्मो को याद करता अपने लंड से खेलता रहा और फिर ख्यालों में ही अपनी गर्म मणि अपनी बहन की प्यासी चूत में उड़ेल दी |

वकास के लंड ने इतनी ज्यादा मणि छोड़ी कि उसकी मणि ने वकास के सोफे पर पड़ी चादर और कम्बल को खराब कर दिया था |

वकास ने टेबल पर पास पड़े टिशु पेपर्स से अपनी टांगों और बेड पर लगी मणि साफ़ की और सोने के लिए लेट गया |

चूँकि फारिग होने के बाद वकास को काफी सकून मिला था इसीलिए वो लेटते ही नींद की वादी में चला गया |

 
(हर इंसान अपनी ज़िन्दगी में अक्सर रात को सोते हुए ख्वाब देखता है , कहते हैं कि इंसान अक्सर जो दिन भर सोचता और देखता है वही रात को ख्वाब की सुरत में भी उसके सामने आता है )

कुछ ऐसे ही हालात अन्दर कमरे में अपने बिस्तर पर सोती ज़ाकिया की थी | जो रात के पिछले पहर नींद में दिन वाले स्पेनिश ड्रामे के हीरो का ख्वाब देख रही थी | असल में दोपहर को ड्रामा के गर्म सीन देखने की वजह से ज़ाकिया के जिस्म में जो गर्मी पैदा हुई थी, उस गर्मी को ज़ाकिया ने बाथरूम में नहाते वक़्त अपने हाथों से कम करने की कोशिश की थी |

लेकिन वकास का बेवक्त फोन आने से ज़ाकिया अपनी चूत का पानी निकाल कर फारिग ना हो पाई |

इसीलिए लगता था कि दिन की गर्मी का असर ज़ाकिया के दिल ओ दिमाग पर अभी तक छाया हुआ था जो ज़ाकिया के नींद में होने की वजह से अब एक ख्वाब की शक्ल में उसके सामने आने लगा |

अपने ख्वाब में ज़ाकिया स्पेनिश हीरो की बाँहों में हीरोइन की जगह अपने आप को देख रही थी |

ज़ाकिया के ख्वाब में हीरो और ज़ाकिया पूरे नंगे खड़े थे | दोनों के होंठ एक दुसरे में जज़ब थे और वो एक दुसरे के साथ जबरदस्त क़िस्म की किस्सिंग कर रहे थे |

ज़ाकिया के हाथ हीरो की कमर और गांड पर फिसल रहे थे | जबकि ज़ाकिया हीरो का एक हाथ अपनी नंगी चूत के ऊपर बेताबी से फिरता हुआ महसुसू कर रही थी |

थोड़ी ही देर में , चूत पर गर्मजोशी से हाथ फेरते हीरो के हाथ की दो उँगलियाँ एक दम ज़ाकिया की प्यासी फुद्दी की गहराईओं में गडप से दाखिल हो गई |

यूँ ही ज़ाकिया को हीरो की उँगलियाँ अपनी चूत में दाखिल होती हुई महसूस हुई | ज़ाकिया एक दम से सिस्करीईइ, “आह्ह्ह्हह्ह” और साथ ही ज़ाकिया की आंखें खुल गयीं |

यूँ पकी नींद से अचानक उठने पर पहले तो ज़ाकिया को समझ नहीं आई कि वो किधर है और यह सब क्या हुआ है |

दुसरे ही लम्हे ज़ाकिया ने महसूस किया कि उसका अपना हाथ उसकी शलवार के अन्दर है और उसके हाथ की दो उँगलियाँ उसकी चूत के अन्दर घुसी हुई तेजी से अन्दर बाहर हरकत कर रही हैं |

ज़ाकिया की चूत पानी पानी हो रही थी | ज़ाकिया अपनी इस हरकत पर खुद भी हैरान हुई कि उसे यह क्या हो गया है | अब उसे समझ आई कि वो जिस बात को एक ख्वाब समझी थी | वो ख्वाब नहीं बल्कि काफी हद तक एक हकीकत थी |

फर्क सिर्फ इतना था कि उसकी चूत से खेलने और उसमें दाखिल होने वाली उँगलियाँ किसी हीरो की नहीं बल्कि उसकी अपनी ही थी |

ज़ाकिया के हाथ अभी तक उसकी शलवार के अन्दर था और वो आहिस्ता आहिस्ता अपनी चूत से खेल रही थी |

ज़ाकिया ने शलवार के अन्दर से तो हाथ निकाल लिया | मगर बिस्तर पर लेटी लेटी शलवार के ऊपर से अपनी फुद्दी पर हाथ फेरती रही |

चूत से खेलते खेलते ज़ाकिया का दिमाग आज दिन में भाई वकास और उसके दरमियाँ होने वाली बातों की तरफ मुड गया |

(यह हकीकत है कि औरत चाहे कोई भी हो , वो हमेशा तारीफ की भूखी होती है, हर औरत चाहती है कि कोई उसका ख्याल रखे , उसको पसंद करे और उसकी तारीफ करे )

शादी के बाद जब भी ज़ाकिया ने कोई नए कपडे पहने या कभी कहीं जाने के लिए तैयार हो कर अकरम के सामने आई तो वो हमेशा इसी बात की मुतिज़र रही कि अकरम उसे देखे और तारीफ करे |

मगर अकरम हमेशा ज़ाकिया पर एक सरसरी निगाह डालकर खामोश रहता | जो ज़ाकिया को अच्छा नहीं लगता था |

इसीलिए आज पहली बार जब वो भाई की पसंद के कपडे पहन कर उसके सामने आई और जिस तरह उसके भाई ने उसको देखा और तारीफ की वो नाजाने क्यों ज़ाकिया के दिल को अच्छी लगी |

लेकिन साथ साथ वकास के आज के दिन का “रविया” ज़ाकिया के लिए काफी हैरतकुन भी था |

( कुदरत ने औरत को यह “खूबी” अता की है कि जब एक मर्द उसके जिस्म पर निगाह डालता है तो औरत की सिक्स्थ सेंस उसे फ़ौरन यह बता देती है कि यह मर्द उसे किस नज़र से देख रहा है )

ज़ाकिया ने भी आज पहली बार अपने भाई वकास को अपने जिस्म के पोशीदा और छुपाए हुए नाज़ुक हिसों से खेलते और देखते महसूस किया था |

भाई का ख्याल आते ही ज़ाकिया की चूत से खेलती हुई उँगलियाँ रुक गईं |

“स्पेनिश हीरो का ख्वाब देखते यह वो अचानक अपने ही भाई के बारे में क्यों सोचने और उस पर शक करने लगी है”, यह सोच कर ज़ाकिया अपने आप से शर्मिंदा सी हुई |

“यह कैसे हो सकता है कि एक भाई अपनी ही बहन पर गन्दी नज़र डाले, यह नामुमकिन है” |

बिसतर पर पड़ी ज़ाकिया अपने आप से लडती रही कि उसका भाई एक शरीफ इंसान है और वो बेवजह अपने भाई को गलत समझ रही है |

दुसरे ही लम्हे ज़ाकिया के ज़ेहन में वो मंज़र दौड़ गया | जब वकास का खड़ा हुआ लंड उसे अपनी गुदाज टांगों के दरमियाँ चुबता हुआ महसूस हुआ था |

“क्या वाकई ही उसका भाई उसके लिए गर्म हुआ था ?”

ज़ाकिया सोच में पड गयी | वो भाई की निगाहों का मतलब तो गलत समझ सकती है लेकिन उसके जिस्म से टच होने वाले उस तने हुए लंड का मतलब वो क्या समझे |

“वकास बेशक उसका भाई है , मगर है तो एक जवां मर्द” और ज़ाकिया ने आज पहली बार अपने मरहूम शोहर के इलावा किसी और मर्द के लंड को अपने जिस्म के साथ टच होते महसूस किया था |

“क्या गर्म रोड जैसा था” , यह सोच कर ज़ाकिया के जवान जिस्म में एक सनसनी सी दौड़ गई | उसका भाई एक मर्द के रूप पहली बार उसके सामने आया था |

ना चाहते हुए भी ज़ाकिया की अपनी चूत पर उसकी उँगलियाँ खुद बाखुद हरकत करने लगी |

अब उसके बदन में सुरसुराहट होने लगी थी | ज़ाकिया ने कई बार अपनी चूत को शलवार के उपर से ही दबाया और सिसकारी मारी ......स्स्स्सीईईइ......ईईईईईईई......

अब की बार ज़ाकिया की उँगलियाँ उसकी गर्म चूत में मज़ीद तेज़ी से चलने लगी |

“ऊफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ नहींइइइइइ.... यह मै क्या कर रही हूँ” , ज़ाकिया ने अपनी प्यासी चूत पर फिसलते हाथ को रोक लिया |

ज़ाकिया के जिस्म में गर्मी दौड़ रही थी | जिसकी वजह से ना सिर्फ उकी चूत पानी छोड़ रही थी | बल्कि उसका पूरा जिस्म भी चूत की गर्मी के असर से पसीने पसीने हो रहा था |

ज़ाकिया बिस्तर से उठी और दरवाज़े पर लगी कुण्डी को चेक किया कि वो लगी हुई है जा नहीं |

उसके बाद ज़ाकिया ने अपने कपडे उतारे और सिर्फ ब्रा और पैंटी में बिस्तर पर औंधे मुंह आ कर लेट गई |

इस तरह लेटने से उसका अंडरवियर उसकी बड़ी गांड में फंस गया और उसकी बाहरी गांड की बड़ी बड़ी पहाड़ियाँ फ़ैल गयीं |

ज़ाकिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और वकास के ख्याल को ज़ेहन से निकालने के लिए उसने दुबारा स्पेनिश हीरो का ख्याल अपने ज़ेहन में लेने की कोशिश की |

लेकिन ज़ाकिया के ज़ेहन में हीरो का चेहरा आने की बजाए रेस्टोरेंट में भाई के साथ गुज़ारे वक़्त का ख्याल आया और वो दुबार भाई के रवइये के बार में सोचने लगी |

रेस्टोरेंट में भी कई बार उसे महसुस हुआ था कि उसके भाई की गर्म निगाहें उसके सीने पर टिकी हुई हैं | जैसे वो बेताब हो कि कब वो ज़रा सी झुके और कब वो अपनी बहन की उभरी हुई जवान छातियों का नज़ारा करे |

ज़ाकिया को यकीन था कि जब वो घर का दरवाज़ा खोलने में मशरूफ थी | तो उसका भाई उसके पीछे से उसके बड़े बड़े कूल्हों को घुर रहा था |

भाई की अपनी खुबसुरती के बार में कहे हुए अल्फाज़ ज़ाकिया के कानो में रस घोलते जा रहे थे |

“यह मुझे क्या हो गया है , क्यों बार बार भाई का ख्याल मेरे ज़ेहन में आ रहा है” , ज़ाकिया ने खुद को अपने भाई के ख्यालों से निकालते हुए अपने आप से खुद ही सवाल किया |

ज़ाकिया के बदन में लगी आग कपडे उतारने से भी कम ना हुई | ज़ाकिया को अभी भी नाजाने क्यों गर्मी महसूस हो रही थी |

ज़ाकिया एक हाथ अपनी कमर से पीछे ले गई और अपने ब्रेज़िएर की हुक खोल कर ब्रेज़िएर उतार दी और सीधी हो कर बिस्तर पर लेट गई |

ज़ाकिया ने अपना एक हाथ अपने अंडरवियर में डाला और चूत से खेलने लगी |

ज़ाकिया की चूत बहुत पानी छोड़ रही थी | जिससे ज़ाकिया की चूत की गर्मी मजीद बढ़ने लगी | ज़ाकिया ने अपने दुसरे हाथ से अपना अंडरवियर भी उतार दिया था | कि उसका हाथ पूरी आज़ादी से उसकी चूत के साथ खेल सके |

ज़ाकिया की चूत पर उसका हाथ पूरी रफ़्तार से हरकत में था और ज़ाकिया तेजी से अपनी चूत के मोटे लबों के दरमियाँ से अपनी ऊँगली को अपनी गुदाज चूत के अन्दर घुसा रही थी |

ज़ाकिया अपनी टाँगे खोले बिस्तर पर पड़ी पड़ी अपनी फुद्दी की आग को अपने हाथों से कम करने की कोशिश में मशगुल थी |

उस लम्हे ज़ाकिया की फुद्दी की आग ने उसको इतना बेकाबू कर दिया था कि उसकी सोच समझ की शक्ति जैसे ख़त्म हो गई |

उसे अब ना किसी हीरो का ख्याल था न वो अपने भाई के बारे में सोच रही थी | उसे फिक्र थी तो बस यह कि वो अपनी फुद्दी की भडकी हुई आग को कैसे ठण्ड करे |

फिर चूत से खेलते खेलते आखिर ज़ाकिया को मंजिल मिल ही गई | उसकी चूत ने इतना पानी छोड़ा कि वो पानी उसकी गुदाज रानों के दरमियाँ में से बहता बिस्तर की चादर में जज़ब हो गया |

आज काफी टाइम बाद ज़ाकिया ने अपनी फुद्दी से इस तरह खेला और उसकी चूत बहुत ज्यादा छूटी थी | मगर फिर भी ज़ाकिया को सकून नहीं मिला | उसका जिस्म फिर भी प्यासा ही रहा |

रातभर ज़ाकिया करवटें बदलती रही | रात भर बिना कुछ किए ही ज़ाकिया कई बार गीली हो गई |

आज दोनों बहन भाई घर की दीवार को दोनों तरफ अपने अपने जिस्म की आग को अपने हाथों से मिटाने की नाकाम कोशिश में मशगुल थे | लेकिन वो कहते हैं ना कि

“इश्क ऐसी आग है ज़ालिम

लगे ना लगे , बुझे ना बुझे”

इसीलिए यह भी वो आग थी जो मुठ या ऊँगली से अब बुझने वाली नहीं थी |

 
दुसरे दिन वकास सुबह 5 बजे टैक्सी लेकर “सिटी” में अपने काम पर चला गया | ज़ाकिया रात में काफी देर जागने की वजह से काफी थक गई थी | इसीलिए वो काफी देर तक सोती रही | सुबह जब ज़ाकिया सो कर उठी तो उसका बदन टूट रहा था | जिस वजह से ज़ाकिया से बिस्तर से उठा भी नहीं जा रहा था |

ज़ाकिया ने सोचा कि पहले शावर लेकर फ्रेश हो जाए उसके बाद नाश्ता करके वो अपने और भाई के लिए शाम का खाना बनाएगी | ज़ाकिया नींद की खुमारी में ही चलती हुई बाथरूम में आई और कपडे उतारे |

ज़ाकिया का जिस्म अभी तक रात वाले सपने की वजह से तप रहा था | वो शावर खोल कर शावर के निचे खड़ी हो गई | वो अपने आग जैसे तपते जिस्म पर ठंडा पानी डाल कर उसे ठंडा करने के यतन करने लगी |

ठंडा ठंडा पानी ज़ाकिया के गोर मोटे मम्मो से फिसलता हुआ ज़ाकिया की गुलाबी रस से लिपटी हुई तंग गर्म और प्यासी चूत के ऊपर दौड़ता बाथरूम के टब में गिरता चला गया जिससे ज़ाकिया के जवान जिस्म में बिजलियाँ दौड़ने लगीं | काफी देर नहाने के बाद ज़ाकिया कपडे पहन कर बाथरूम से बाहर आई और घर के काम काज में मशरूफ हो गई |

शाम के 5 बजे वकास टैक्सी से ऑफ हो कर घर आया तो उसे ज़ाकिया टीवी लाउंज में टीवी देखती हुई मिली |

“ज़ाकिया जल्दी से खाना लगा दो, बहुत भूख लगी है” , वकास सोफे पर बैठा और नज़रें झुकाकर अपने बूट के तस्मे खोलते हुआ बोला |

“अच्छा भाई , आप हाथ मुंह धो लो, मैं इतनी देर में रोटी बनती हूँ”, ज़ाकिया भी भाई को देखने की बजाए टीवी स्क्रीन को देखते हुए किचन की तरफ चली गई |

आज दोनों बहन भाई आप में नज़रें मिलाने से कतरा रहे थे | शायद रात में होने वाली हरकतों की वजह से दोनों के दिल में एक शर्मिंदगी सी थी |

या उन को डर था कि अगर उनकी नज़रों का आपस में मिलाप हुआ तो कहीं उनके दिल का हाल उनकी आँखों से व्यान ना हो जाए |

वकास ने सिर्फ मुंह हाथ धोने की बजाए जल्दी से शावर लिया और कपडे चेंज करके बाहर आ गया |

ज़ाकिया ने इतनी देर में खाना लगा दिया था | खाने के दौरान भी दोनों बहन भाई आपस में थोड़े खींचे खींचे रहे |

खाना ख़त्म करते ही वकास ने ज़ाकिया से कहा , “मैं एक दोस्त के घर उसके वालिद का फातिहा पड़ने जा रहा हूँ और शायद वापिस आने में कुछ देर हो जाये, इसीलिए तूम मेरा इंतज़ार ना करना” |

“अच्छा भाई” , ज़ाकिया ने जवाब दिया |

वकास के बाहर जाते ही ज़ाकिया ने भी अपने अम्मी अब्बू को पाकिस्तान फ़ोन मिलाया और उनसे बातों में लग गई |

वाक्स काफी रात गए वापिस लौटा तो ज़ाकिया अपने कमरे में जा के सो चुकी थी |

इस तरह करते करते एक हफ्ता गुज़र गया और दोनों बहन भाई के दरमियाँ कोई ख़ास बात ना हुई |

अगले रविवार को वकास दिन के 10 बजे ही काम ख़त्म कर के घर लौट आया |

ज़ाकिया जो अभी अभी नाश्ता से फारिग हुई थी | अपने भाई को इतनी जल्दी घर में देख कर थोड़ी हैरान हुई |

“भाई आज खैरिअत है? जल्दी वापिस आ गये, आप की तबितर तो ठीक है? कहीं टैक्सी तो खराब नहीं हो गई?” ज़ाकिया ने वकास पर सवालों की बोछार कर दी |

“सब ठीक है बस तुम जल्दी से तैयार हो जाओ, आज तुम्हे एक जगह लेकर जाना है” ,वकास ने बहन से कहा |

“किधर जाना है भाई?” , ज़ाकिया ने सवाल किया |

“ज़ाकिया तुम्हे शायद पता हो , या ना हो कि हर साल अगस्त के महीने ब्रुकलीन में कोन आइलैंड अवेनुए पर पाकिस्तान इंडिपेंडेंट डे की ख़ुशी में पाकिस्तानी मेला मनाया जाता है और आज मैं तुमको इस मेले में ले जाना चाहता हूँ”, वकास ने अपनी बहन को बताया |

“ठीक है भाई , मैं अभी तैयार होती हूँ”, ज़ाकिया ख़ुशी से बोली और कमरे में जा कर तैयार होने लगी |

जब से ज़ाकिया न्यूयॉर्क आई थी | तो कोन आइलैंड के एरिया में रहते हुए भी अकरम कभी भी ज़ाकिया को पाकिस्तानी मेला में नहीं लेकर गया था |

अब अकरम की मौत के बाद, बावजूद इसके कि वो लोग, कोन आइलैंड के एरिया से थोड़ी दूर ब्रुकलीन वीच के एरिया में शिफ्ट हो गये थे | ज़ाकिया आज पहली बार अपने भाई के साथ इस मेले में शरीक होने जा रही थी |

थोड़ी देर में ज़ाकिया तैयार हो कर टीवी लाउंज में आई | जिधर वकास उसके इंतज़ार में बैठा था |

“चलो भाई, मैं तैयार हूँ” , ज़ाकिया ने भाई से कहा |

आज फिर वकास अपनी बहन की तैयारी को देख कर काफी खुश हुआ | वो सोचने लगा कि अमेरिका में आने के बाद उसकी बहन को अब आहिस्ता आहिस्ता फैशन की थोड़ी सूझ बूझ और मेकअप करने का थोडा बहुत सलीका आ गया है |

इसी लिए कहते हैं

“खुदा जब हुसन देता है ,

तो नजाकत आ ही जाती है” |

इसी तरह जब इन्सान की जेब में जब पैसा आता है तो फिर सलीका भी आ ही जाता है |

ज़ाकिया तैयार हो कर बहुत सेक्सी लग रही थी | उसने रेड कलर की टाइट रेशमी शलवार कमीज़ पहन रखी थी और उसका दुपट्टा भी रेशमी था |

उसका मुंह मेकअप की वजह से चमक रहा था और होंठों पर फुल रेड लिपस्टिक थी |

ज़ाकिया रेड शलवार कमीज़ में बनी संवरी एक नई नवेली दुल्हन ही लग रही थी |

बहन की यह तैयारी वकास को अच्छी लगी | वकास के दिल में बहन के लिए प्यार उमड़ आया |

वकास को यह पता था कि वो अपनी बहन को चोदने की ख्वाहिश अपने दिल में रख तो सकता है और अपने ख्वाबों में अपनी बहन के नाम की मुठ भी मार सकता है | लेकिन हकीकत में यह काम अगर नामुमकिन ना सही मगर मुश्किल जरुर है |

इसीलिए वकास अपने अरमानो का गला घोटने और यह शेर दिल ही दिल में पड़ता बाहर निकल गया कि

“हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले,

बहुत निकले मेरे अरमान , मगर फिर भी कम निकले” |

ज़ाकिया भी ख़ामोशी से अपने भाई के पीछे चल पड़ी | घर से निकल कर वकास अपनी टैक्सी की तरफ जाने की बजाए घर के करीब बने रेलवे स्टेशन की तरफ चल पड़ा |

“भाई क्या हमने अपनी टैक्सी में नहीं जाना” , ज़ाकिया भाई को ट्रेन स्टेशन की तरफ जाता देख कर बोली |

“तुम को पता है कि आम दिनों में न्यूयॉर्क में गाडी की पार्किंग मिलना आसान नहीं और आज तो कोन आइलैंड के एरिया में पार्किंग मिला नामुमकिन है, इसीलिए हम क्यों ट्रेन से जायेंगे” , वकास ने ज़ाकिया से आगे चलते चलते जवाब दिया |

वो दोनों न्यूयॉर्क अवेनुए के स्टॉप पे उतरकर स्टेशन से बाहर आये और मेले की लोकेशन कोन आइलैंड अवेनुए और फोस्टर अवेनुए की तरफ पैदल चल पड़े | जोकि स्टेशन से तकरीबन चार ब्लाक दूर था |

पैदल चलते ज़ाकिया और वकास ने रास्ते में देखा कि उनके साथ साथ और भी काफी पाकिस्तानी मर्द ,औरतें और बच्चे मेले की तरफ आ जा रहे थे |

मेले में मुक्तलिफ़ एशिया के बहुत सारे स्टाल्स थे | जिन पर लोगो का काफी रश था | ज़ाकिया को इस जगह आकर बहुत अच्छा लग रहा था | आज इतने पाकिस्तानियों के दरमियाँ आकर ज़ाकिया को ऐसे लग रहा था कि जैसे वो न्यूयॉर्क नहीं बल्कि पाकिस्तान के ही किसी शहर में घूम रही हो |

इधर उधर नज़रें दुडाते ज़ाकिया की नज़र एक स्टाल पर पड़ी | जिधर एक आदमी गन्ने का जूस निकाल कर बेच रहा था |

ज़ाकिया को अपने बचपन की याद आ गई | जब वो अपने गाँव में कमाद की कटाई के वक़्त चौधरियों के डेरे पर जाती और वहां से वो गर्म गर्म “रू”(गन्ने का जूस) पीती और ताज़ा ताज़ा बना हुआ “गुड” खाती थी |

आज न्यूयॉर्क में इतने सालों बाद गन्ने के जूस का स्टाल देख कर ज़ाकिया का दिल “रू” पीने को मचल गया |

“भाई मुझे गन्ने का जूस पीना है” , ज़ाकिया ने वकास से फरमाइश की |

वकास : कौन से गन्ने का जूस पीना पसंद करेगी मेरी बहन |

वकास ने अपनी पेंट की जेब में डाले हुए हाथ से अपने लंड को आहिस्ता से टटोला और ज़ाकिया को छेड़ते हुए पुछा |

“कौनसा ,क्या मतलब वो सामने एक ही तो जूस का स्टाल है भाई” , ज़ाकिया वकास की दो मीनिंग बात को ना समझी और जूस के स्टाल की तरफ इशारा करते हुए बोली |

 
“तुझे वो ही गन्ना नज़र आया है बेवकूफ , तू नहीं जानती कि गन्ना तो मेरा भी बहुत बडा और मजेदार है , कभी इसके टेस्टी जूस का स्वाद भी तो चखो, मेरी जान”, वकास दिल ही दिल में ज़ाकिया को कोसता सड़क के पार गन्ने के स्टाल की तरफ़ चल पड़ा |

दोनों बहन भाई जूस पीने में मशरूफ थे कि किसी ने वकास के पीछे उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा “किदां चौधरी साब” |

“चौधरी साब” हम कब से चौधरी हो गये? यह कौन है? जो भाई को चौधरी कह कर बुला रहा है |

ज़ाकिया यह सोचते , वकास के साथ ही पीछे की तरफ मुड़ी तो देखा का एक इंडियन सरदार जी अपनी पगड़ी बांधे और हाथ में ऑरेंज जूस की एक बोतल थामे उनके पीछे खड़े थे |

वो वकास का एक इंडियन दोस्त मनजीत सिंह बाजवा था | जो कि वकास की तरह एक टैक्सी ड्राईवर था और उसके साथ ही “सिटी” में येलो कैब चलाता था |

मनजीत सिंह अपने तीन पाकिस्तानी रूम मेटस के साथ “किंग्स हाईवे” के एरिया में रहता था |

वैसे तो मनजीत सिंह और उसके पाकिस्तानी रूम मेटस अपने अपने मुल्कू से दूर परदेस में एक ही घर में अमन और प्यार से रहते थे |

लेकिन जब कभी इंडिया/पाकिस्तान का क्रिकेट मैच होता तो उनके घर में भी इंडिया/पाकिस्तान के बॉर्डर वाला ही माहौल होता था |

जब कभी इंडिया मैच जीत जाता तो मनजीत के पाकिस्तान रूम मेटस घर के बर्तन तोड़ते और जब कभी पाकिस्तान मैच जीता जाता तो फिर मनजीत सिंह घर के बर्तन की शामत ले आता |

अब काफी बर्तन जाया करने के बाद , उन सब ने इस बात का यह हल निकाला कि वो बाज़ार से प्लास्टिक के डिस्पोजेबल बर्तन ले आयें |

ताकि “ना रहे बांस और ना बजेगी बांसुरी” |

“मनजीत सिंहा तू इथे की कर रेहें” वकास ने अपने इंडियन दोस्त मनजीत सिंह को पाकिस्तानी मेले में देख कर हैरान होते पंजाबी में पूछा |

“ओह भाऊ, आप ता इबरार-उल-हक (पाकिस्तानी पंजाबी सिंगर) दे फेन हाँ , आपां ओनु सुनन आयां” (ओ भाई हम तो इबरार के फेन हैं हम तो उसको सुनने आये हैं) मंजीत ने इंडियन पंजाबी लहजे में बोलते हुए कहा |

वकास : “अच्छा तो कल्ले ही आये हो बाकी रुममेटस किथे ने” (अच्छा अकेले ही आये हो बाकी रुममेटस कहाँ हैं ) |

“ओ भी आये होए ने, इधर उधर फिरदे पये ने” (वो भी आये हुए हैं इधर उधर घूम रहे होंगे) मंजीत सिंह ने हाथ में पकड़ी बोतल से घूंट पीते हुए कहा |

ज्यों ही मनजीत सिंह ने ऑरेंज जूस की बोतल को मुंह से लगाया तो उसके करीब खड़े वकास को एक “मखसूस” किसम की बू आई | तो वो फोरन समझ गया कि मंजीत सिंह के हाथ में पकड़ी बोतल में ऑरेंज जूस नहीं बल्कि शराब है |

(अमेरिका में हर किस्म की आजादी होने के बावजूद पब्लिक पैलेस में खुलेआम शराब पीना मना है | इसीलिए मनजीत सिंह ने शराब ऑरेंज जूस की बोतल में डाली हुई थी | ताकि अगर कोई पुलिस वाला देखे तो यह ही समझे कि वो ऑरेंज जूस ही पी रहा है | )

“चौधरी लगदा है तुवाडे नाल एह अपनी परजाई जी ने? मनजीत सिंह ने ज़ाकिया की तरफ देखते वकास से सवाल पूछा |

“आहो”(हाँ) वकास ने ज़ाकिया की तरफ देखा और जिझ्कते हुए जवाब दिया |

“सत श्री अकाल परजाई जी” मनजीत सिंह ने अपने दोनों हाथ बांधते हुए सिखी स्टाइल में ज़ाकिया को मुखतिब हुआ |

“सलाम भाई साब” ज़ाकिया ने भी मनजीत सिंह को जवाब दिया |

“तुवाडे किन्ने बच्चे हैं भाऊ” मनजीत सिंह ने वकास से दुबारा सवाल किया |

“बच्चेएएएए ते अजे कोई नहीं सरदार जी” वकास जो अब मंजीत सिंह के बढते हुए सवालों से थोडा परेशान होने लगा था , आहिस्ता से बोला |

“कोई बच्चे नहीं , किना अरसा होया शादी नू” मनजीत सिंह ने एक और सवाल दागा |

“तकरीबन तीन साल” वकास ने ना चाहते हुए भी जवाब दिया |

वकास देख रहा था कि उसके साथ साथ ज़ाकिया भी मनजीत सिंह के बढ़ते हुए सवालों से थोड़ी परेशान लग रही थी |

मगर वो उसे कैसे बताए कि मनजीत सिंह उस वक़त सरुर की हालत में था |

सरदार जी तो आम हालत में भी बहुत ज्यादा जिंदा दिल और मजाक करने में खुले डूले होते हैं और जब उन्होंने “पीती” हुई हो तो फिर जट्टां दे पूत किसी के काबू में नहीं आते |

“वकास भाऊ तू वी बड़ा सीधा है , मेरी एन्नी सोहनी वोहटी होंदी ते आपां ने ते फट्टे चुक देने सन, इने टाइम विच आपां ते इंडिया दी क्रिकेट टीम बना दिंदा भाऊ” यह कह कर मनजीत सिंह खुद ही खिलखिला कर हंस पड़ा |

उधर ज़ाकिया और वकास दोनों की हालत भी देखने वाली थी | मनजीत सिंह के इतने खुले मजाक ने उन दोनों को बहुत शर्मसार कर दिया |

दोनों बहन भाई शर्म के मारे एक दुसरे को देखने की बजाए इधर उधर देखने लगे |

वकास को समझ नहीं आई कि वो मनजीत सिंह की इस बात का क्या जवाब दे |

इसीलिए उसें मनजीत सिंह से रुखसत लेने में ही बेहतरी समझी और वो मनजीत सिंह को सलाम करके ज़ाकिया के साथ आगे बढ़ गया |

आगे बढ़ते हुए ज़ाकिया के दिमाग में मनजीत सिंह की बातें अभी तक दौड़ रही थी |

राह चलते चलते ज़ाकिया इस बात पर भी गौर करने लगी कि उसे अपने भाई के सामने मनजीत सिंह की कही गई इतनी ओपन बातों पे शर्मिंदगी तो जरुर हुई मगर नाजाने क्यों उसे गुस्सा नहीं आया था |

इसकी वजह शायद यह थी कि उसके भाई के कहने के मुताबिक उनका आपस में भाई बहन के रिश्ते का तो सिर्फ उन दोनों को इल्म था |

बाहर, दुनिया की नज़र में तो वो एक मियां बीवी ही थे और इसीलिए तो आज मनजीत सिंह उनसे बच्चो के बारे में पूछ रहा था |

आज मनजीत सिंह की अनजाने में कही हुई बातों ने ज़ाकिया को अपने और भाई के दरमियाँ “मियां बीवी” के जाली रिश्ते के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया |

ज़ाकिया के दिल में ख्याल आया कि काश वकास उसका भाई ना होता तो कितना अच्छा होता |

“धत, मैं यह क्या ख्याल दिल में ले आई” ज़ाकिया ने अपने दिमाग से यह बात निकालने की कोशिश की |

“वकास तो मेरा भाई है उससे तो असल शादी नामुमकिन है , लेकिन अगर अब मैं कभी दुबारा शादी करुगी तो उस आदमी से जो मेरे भाई की तरह स्मार्ट हो , जो भाई की तरह हँसमुख हो और भाई ही की तरह मेरा ख्याल रखे” |

ज़ाकिया , वकास के साथ चलते हुए अपनी ही धुन में सोचती जा रही थी कि उसे मनजीत सिंह की कही हुई एक और बात याद आ गई |

“भाई हम लोग तो ज़ात के मोची हैं यह अब तुम अचानक एकदम “चौधरी” कब से बन गए , क्या आपने किसी हकीम से अपना इलाज करवा लिया है?” ज़ाकिया ने भाई से मजाक करते हुए पूछा |

“मेरी बहन पैसा बड़ी ज़ालिम चीज़ है, जब यह इंसान की जेब में आता है तो फिर किसी भी मोची को “चौधरी” बनते देर नहीं लगती” वकास ने बहन की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए जवाब दिया |

थोड़ी देर बाद ही सडक के दरमियाँ बने हुए स्टेज से इबरार की आमद का एलान हुआ तो वो दोनों बहन भाई भी इबरार के गाने सुनने उस तरफ चले गए और फिर शाम तक काफी एन्जॉय किया |

शाम के 7 बजे गये थे और शाम का अँधेरा छाने लगा | अभी दोनों बहन बहाई मेले में ही थे कि थोड़ी थोड़ी फुहार पड़ने लगी | जिससे एक दम थोड़ी ठण्ड सी हो गई |

इसीलिए वकास ने अब घर वापिस जाने का इरादा किया | दोनों बहन भाई कुछ ही दूर बने बस स्टॉप की तरफ बढ़ने लगे |

ज़ाकिया वकास से थोडा आगे चल रही थी और वकास अपनी बहन के पीछे उसकी कमर और गांड पर नज़रें जमाये हुए चल रहा था |

ज़ाकिया भाई के आगे चलती जा रही थी और चलते चलते उसके कुल्हे थोडा हिलना शुरू हो गये थे | ज़ाकिया की कमर इतनी लचकदार थी कि उसके एक हलके से झटके से ही उसके भारी कुल्हे थिरक उठते थे |

और उनका यूँ थिरकना किसी भी मर्द के दिल का सकूँ बर्बाद करने की पूरी पूरी हिम्मत रखता था | वकास भी आखिर एक मर्द था और वो भी अपनी बहन के थिरकते कूल्हों का लुत्फ उठा रहा था |

थोड़ी देर बाद ही बस स्टॉप आ गया | बस स्टॉप लोगो के रश की वजह से भरा पड़ा था |

अभी बस के आने में थोड़ी देर थी | इसीलिए दिन भर की थकी हारी ज़ाकिया बस स्टॉप के साथ लगे लोहे के एक जंगले पर अपनी गांड टिका कर बैठ गई | वकास उसके पीछे आ कर खड़ा हो गया और अपनी बहन की गांड का नज़ारा करने लगा |

जंगले पर बैठने से ज़ाकिया की (भारी गोश्त से बड़ी हुई) गांड की मोटी मोटी पहाड़ियाँ लोहे के राड के दोनों तरफ लटकने लगी |

ज़ाकिया का जंगले पर बैठने का स्टाइल तबाहकुण था और यह स्टाइल देख कर वकास दिल में सोचने लगा कि काशशश वो लोहे का यह राड ही होता तो आज उसकी बहन उस पर अपनी मस्त गांड टिका कर बैठी होती |

वकास का लंड अपनी ही बहन के बदन के नजारों को देख कर जाग उठा और उसको बेचैन करने लगा |

थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद बस आई तो सब लोगो के साथ वो दोनों भी उसमें सवार हो गये |

बस में कोई सीट खाली नहीं थी और ज़ाकिया और वकास के पीछे बस में सवार होने वाले लोगो की लाइन लगी हुई थी |

इसीलिए वो ड्राईवर को टिकट के पैसे देकर बस के पिछले हिस्से में जाकर खड़े हो गये और बस अपनी मंजिल की तरफ चल पड़ी |

 
ज़ाकिया बस के दरमियाँ लगा हुआ डंडा पकडे खड़ी थी जो बस में लगे ए.सी. की वजह से काफी ठंडा हो रहा था |

वकास भी अपनी बहन के पीछे बस की छत के साथ लगे हुए रोड को पकडे खड़ा था |

थोड़ी देर बाद बस ड्राईवर ने अचानक बस को एक दम जोर से ब्रेक लगायी | जिसकी वजह से ज़ाकिया और वकास दोनों अपना संतुलन खो बैठे |

ज़ाकिया का जिस्म अपने सामने लगे बस के डंडे से टकराया जिससे ज़ाकिया की भारी चूचियां और गर्म चूत लोहे के डंडे में फंस गईं |

वकास ने अपने आप को सँभालने की कोशिश की | मगर उसका जिस्म उसके कण्ट्रोल में ना रहा और वो भी इख़्तियार अपनी बहन के जिस्म के साथ पीछे से टकरा गया |

वकास ने अपने आप को गिरने से बचाने के लिए जब ज़ाकिया का सहारा लेने की कोशिश की तो वकास का एक हाथ ज़ाकिया की गांड के ऊपर लगा और दूसरा हाथ बहन के दोनों मम्मों पर जा पहुंचा |

वकास पूरी तरह पीछे से अपनी बहन के जिस्म से चिपक गया | उसका लंड अपनी बहन के चूतडों की दरार में दबा हुआ था और उसका हाथ अपनी बहन की बड़ी छाती की सख्त और गोलायिओं का मज़ा ले रहा था |

वकास बस का झटका बोलकर अपनी बहन की मस्त फिगर ,उसके सॉफ्ट, बड़े चुतड और बहन के जिस्म की मदहोश कर देने वाली खुशबू में खो गया |

दूसरी तरफ ज़ाकिया डंडे को थामे होने की वजह से गिरने से बच गई मगर उसे आगे से ठन्डे लोहे की रगड अपनी पतली शलवार के ऊपर से अपनी जवान गर्म चूत पर महसूस हुई तो पीछे से उसे भाई का हाथ अपने मोटे मम्मे पर और उसका गर्म लंड अपनी चुतड की दीवार में दबा हुआ महसूस हुआ |

भाई के हाथ अपने जिस्म के नाज़ुक हिस्सों पर महसूस करते ही ज़ाकिया एक दम घबरा गई |

“भाई आप मुझ में ही घुसे जा रहे हो , थोडा पीछे हट के खड़े हो ना प्लीज”, ज़ाकिया ने बड़ी मुश्किल से भाई को अपने पीछे से हटाते हुए कहा |

“मैं कहाँ घुस रहा हूँ मेरी बहन, यह तो बस वाला मुझे तुझमें घुसा रहा है”, वकास ने बहन के जिस्म से पीछे हटते जवाब दिया और अपने हाथ अपनी बहन के गुदाज जिस्म से हटा कर दुबारा सीधा खड़ा हो गया |

वकास पीछे तो हट गया मगर वो खुश था कि आज उसे अपनी बहन की छाती और गांड को छूने का मौका नसीब हुआ था |

वो सोचने लगा कि उसकी बहन की गोलाईयां लिए हुए मुकम्मल छाती बिलकुल पके हुए आम की तरह है जिसे दबाओ तो फौरन रस छलक पड़े |

और उसकी बहन की गांड किसी पर्शियन कारपेट की तरह गुदाज थी | जिसके ऊपर लंड रखो तो वो पूरे का पूरा गांड की दरार में घुसता चला जाए |

वकास अपनी सोचों में मगन था और ज़ाकिया यह सोचने में लगी थी कि उसके भाई को आजकल यह क्या होता जा रहा है |

कुछ दिन पहले घर में उसने अपने भाई के लंड को अपनी चूत से छूते हुए महसूस किया तो उस बात को वो अपना वहम समझ कर भूल गई | मगर आज उसका भाई उसके जिस्म के नाजुक और पोशीदा हिस्सों को बहाने से छूना महज एक इतेफाक नहीं हो सकता था |

ज़ाकिया अपने जिस्मानी हिस्सों पर अपने भाई के गर्म हाथों की तपिश अब भी महसूस कर रही थी |

ज़ाकिया ने मेले में कई मर्दों की गर्म प्यासी निगाहें अपने जवान जिस्म के उभरे हुए हिस्सों पर चुब्ती हुई महसूस की थी |

“शयद मेरा जिस्म, दुसरे मर्दों की तरह मेरे सगे भाई को भी अपनी तरफ खींचता है, मगर क्यों? वो कोई आम मर्द नहीं बल्कि मेरा सगा भाई है?

मगर इस “क्यों” का जवाब शायद ज़ाकिया के पास भी नही था |

घर के करीब पहुँच कर दोनों बहन भाई बस से उतरे और ख़ामोशी से चलते हुए घर में दाखिल हो गये | कुछ दिन ऐसे ही गुज़रे और अगस्त का महीना अपने इख्तियाम को पंहुचा |

सितम्बर का महीना स्टार्ट हुआ तो वकास को पाकिस्तान से एक बहुत बुरी खबर मिली कि उसके माँ बाप को उनके एक ड्राईवर (जिसको उन्होंने ने हाल में ही लाहौर वाले घर में नौकरी पर रखा था) ने अपने साथियों के साथ मिल कर, लूटने के बाद उनका क़त्ल कर दिया है |

 
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