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उसके बारे में भी इसी प्रकार लिखा आया। नाम–मोना चौधरी। जन्म स्थान दिल्ली।। कद–पांच फुट, सात इंच। पूर्वजन्म का नाम मिन्नो। इसी प्रकार पोतेबाबा ने एक-एक करके सबके बारे में जाना।
आखिरकार पोतेवावा कुर्सी से उठता कह उठा। “सब ठीक है।”
जग्गू, गुलचंद इनमें नहीं हैं।” उस व्यक्ति ने पूछा।
उनके बारे में अभी मुझे खबर नहीं। परंतु इतना जानता हूं कि वो दोनों, कालचक्र से निकलकर, जथूरा की जमीन पर आ पहुंचे हैं।”
पोतेबाबा नजरें दौड़ाता कह उठा–“गरुड़ कहां है?”
सुबह वो जिन्नों के महल में जाने को कहकर निकला था।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया और आगे बढ़ गया। उस हाल को पार करके बो अन्य हाल में पहुंचा। वहां पर आठ-दस लोग ही थे।
“जथूरा महान है।” अपने काम में व्यस्त एक लाल वर्दी वाला उसे देखते ही कह उठा।
उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” पोतेबाबा ने जवाब दिया। सबके साथ इसी प्रकार शुरुआती बात हुई।
मोमो जिन्न कहां है?” पोतेवाबा कुर्सी पर बैठे एक व्यक्ति के पास पहुंचकर बोला।
“वो पनडुब्बी में जथूरा की जमीन पर आ पहुंचा है अन्य सबके साथ।” उस व्यक्ति ने कहा “उसके साथ लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा हैं। वो तीनों उन सबको छोड़कर, कहीं चले गए हैं।”
पता करो, वो कहां हैं?” पोतेबाबा बोला।। उस व्यक्ति की उंगलियां बटनों से खेलने लगीं।
आधे मिनट के बाद ही स्क्रीन पर मोमो जिन्न, लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा नजर आए। जो कि तेजी से जंगल में आगे बढ़ते जा रहे थे। ये देखकर वो कह उठा।
“ये रहे, वो कहीं जा रहे हैं शायद। पता करता हूं कि वो किधर की दिशा में हैं।"
उसकी उंगलियां पुनः बटनों पर चलीं। तभी स्क्रीन पर लिखा आया। मोमो जिन्न सोबरा के इलाके की दिशा की तरफ बढ़ रहा है।
मोमो जिन्न तो उन दोनों के साथ सोबरा के इलाके की तरफ जा रहा है।” उसके होंठों से निकला।।
पोतेबाबा मुस्करा पड़ा। उस व्यक्ति ने गर्दन घुमाकर पोतेबाबा को देखा और पूछा।
क्या मोमो जिन्न को उस दिशा में जाने का कोई काम सौंपा गया है?”
“नहीं।”
तो वो उस तरफ क्यों जा रहा है?”
जाने दो उसे ।”
मोमो जिन्न का चैकअप करूं। कुछ गड़बड़ लग रही है। पोतेबाबा।”
कुछ मत करो। जग्गू और गुलचंद के बारे में पता लगाओ।” उनकी आखिरी स्थिति क्या थी?” ।
“वो दोनों कालचक्र से बाहर निकल आए हैं।” उस व्यक्ति की उंगलियां पुनः स्विचों पर चलने लगीं। पोतेबाबा शांत-सा खड़ा रहा। चेहरे पर सोचों के भाव थे। इसी प्रकार पांच मिनट बीत गए।
तभी उस व्यक्ति के होंठों से निकला।
ये रहे। ये तो तीन हैं।”
तीन कौन?”
तीसरी औरत है कोई ।” कहने के साथ ही उसने कोई स्विच दबाकर दो पल का इंतजार किया तो फिर स्क्रीन पर नानिया का चेहरा दिखने लगा, जो कि पसीने से भरा था। वो तेजी से आगे बढ़ती जा रही थी।
“मैं इस औरत को नहीं पहचानता।”
वो व्यक्ति बोला–“मैं नहीं...।”
ये कालचक्र की नानिया है। जिसे सोबरा ने रानी साहिबा बना रखा था।”
ओह, तो जग्गू और गुलचंद के साथ ये भी बाहर आ गई है।”
पता करो, क्या ये तीनों इसी तरफ आ रहे हैं?” पोतेबाबा ने कहा।
वो पुनः स्विचों के साथ खेलने लगा। मिनट-भर बाद बोला।
ये तीनों भी सोबरा की जमीन की तरफ बढ़ रहे हैं।”
“ये नहीं हो सकता।” पोतेबाबा के होंठों से निकला।
सैटलाइट तो ये ही सिग्नल दे रहा है।” पोतेबाबा की नजरें स्क्रीन पर जा टिकीं ।
एक बार फिर चैक करो।” मैं सही कह रहा हूं।”
‘हैरानी है कि ये क्यों सोबरा की जमीन की दिशा की तरफ जा रहे हैं।” पोतेबाबा ने कहा।
“इन्हें रोकें क्या?” पोतेबाबा के चेहरे पर सोंच के भाव उभरे।
इन पर आंधी छोड़कर इन्हें भटका देते हैं।” वो व्यक्ति बोला।
“अभी कुछ मत करो।” पोंतेबाबा ने कहा-“ये कब तक सोबरा की जमीन पर पहुंच जाएंगे?” ।
“रात तक। मेरे खयाल में नानिया ही इन्हें रास्ता दिखा रही है,
वो आगे चल रही है।” ।
“मैं सोच रहा हूं क्या ये सोबरा के पास पहुंचकर, जथूरा को कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं?” पोतेबाबा ने कहा।
“इस बारे में तो आप ही बताएंगे।”
देवा-मिन्नों, नगरी की तरफ आ रहे हैं। हमें इनकी परवाह नहीं करनी चाहिए।”
मोमो जिन्न का सोबरा के पास जाना हैरानी वाली समस्या है
।
मोमो जिन्न की कोई समस्या नहीं।”
जग्गू और गुलचंद का क्या करूं?”
अभी इन्हें कुछ मत कहो। इन पर नजर अवश्य रखो।”
जो हुक्म।”
पोतेबाबा के चेहरे पर सोच के भाव थे।
“मुझे मखानी और कमला रानी के बारे में पता चला। इन दोनों के बारे में पहले कभी सुना नहीं।”
“कालचक्र का हिस्सा हैं ये।”
परंतु कालचक्र में इनका नाम कभी नहीं आया।”
भौरी और शौहरी को जानते हो?”
“अवश्य।”
भौरी और शौहरी ने जरूरत के मुताबिक इन दोनों को बाहरी दुनिया से इकट्ठा किया है।”
तो अब ये दोनों कालचक्र के बीच ही गिने जाएंगे?”
“हां। कालचक्र इन्हें स्वीकार कर चुका है। तुम जग्गू-गुलचंद, नानिया पर नजर रखो।” पोतेबाबा ने कहा और वहां से आगे बढ़ गया। उस हाल से बाहर निकला तो एक राहदारी में चल पड़ा। | सामने से जो भी आता ‘जथूरा महान है' के शब्दों के साथ आगे बढ़ जाता था।
पांच मिनट बाद कई राहदारियां पार करने के पश्चात पोतेबाबा नीचे जाते रास्ते की तरफ बढ़ गया, जो कि महल के नीचे तहखाने की तरफ जाता था। चौड़ा रास्ता, सुनसान था। नीचे जाकर रास्ता दाएं-बाएं दो भागों में बंट रहा था। पोतेबाबा दाईं तरफ वाले रास्ते पर बढ़ गया। ये रास्ता अब अंधेरे से भरा होने लगा।
आखिरकार पोतेवावा कुर्सी से उठता कह उठा। “सब ठीक है।”
जग्गू, गुलचंद इनमें नहीं हैं।” उस व्यक्ति ने पूछा।
उनके बारे में अभी मुझे खबर नहीं। परंतु इतना जानता हूं कि वो दोनों, कालचक्र से निकलकर, जथूरा की जमीन पर आ पहुंचे हैं।”
पोतेबाबा नजरें दौड़ाता कह उठा–“गरुड़ कहां है?”
सुबह वो जिन्नों के महल में जाने को कहकर निकला था।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया और आगे बढ़ गया। उस हाल को पार करके बो अन्य हाल में पहुंचा। वहां पर आठ-दस लोग ही थे।
“जथूरा महान है।” अपने काम में व्यस्त एक लाल वर्दी वाला उसे देखते ही कह उठा।
उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” पोतेबाबा ने जवाब दिया। सबके साथ इसी प्रकार शुरुआती बात हुई।
मोमो जिन्न कहां है?” पोतेवाबा कुर्सी पर बैठे एक व्यक्ति के पास पहुंचकर बोला।
“वो पनडुब्बी में जथूरा की जमीन पर आ पहुंचा है अन्य सबके साथ।” उस व्यक्ति ने कहा “उसके साथ लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा हैं। वो तीनों उन सबको छोड़कर, कहीं चले गए हैं।”
पता करो, वो कहां हैं?” पोतेबाबा बोला।। उस व्यक्ति की उंगलियां बटनों से खेलने लगीं।
आधे मिनट के बाद ही स्क्रीन पर मोमो जिन्न, लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा नजर आए। जो कि तेजी से जंगल में आगे बढ़ते जा रहे थे। ये देखकर वो कह उठा।
“ये रहे, वो कहीं जा रहे हैं शायद। पता करता हूं कि वो किधर की दिशा में हैं।"
उसकी उंगलियां पुनः बटनों पर चलीं। तभी स्क्रीन पर लिखा आया। मोमो जिन्न सोबरा के इलाके की दिशा की तरफ बढ़ रहा है।
मोमो जिन्न तो उन दोनों के साथ सोबरा के इलाके की तरफ जा रहा है।” उसके होंठों से निकला।।
पोतेबाबा मुस्करा पड़ा। उस व्यक्ति ने गर्दन घुमाकर पोतेबाबा को देखा और पूछा।
क्या मोमो जिन्न को उस दिशा में जाने का कोई काम सौंपा गया है?”
“नहीं।”
तो वो उस तरफ क्यों जा रहा है?”
जाने दो उसे ।”
मोमो जिन्न का चैकअप करूं। कुछ गड़बड़ लग रही है। पोतेबाबा।”
कुछ मत करो। जग्गू और गुलचंद के बारे में पता लगाओ।” उनकी आखिरी स्थिति क्या थी?” ।
“वो दोनों कालचक्र से बाहर निकल आए हैं।” उस व्यक्ति की उंगलियां पुनः स्विचों पर चलने लगीं। पोतेबाबा शांत-सा खड़ा रहा। चेहरे पर सोचों के भाव थे। इसी प्रकार पांच मिनट बीत गए।
तभी उस व्यक्ति के होंठों से निकला।
ये रहे। ये तो तीन हैं।”
तीन कौन?”
तीसरी औरत है कोई ।” कहने के साथ ही उसने कोई स्विच दबाकर दो पल का इंतजार किया तो फिर स्क्रीन पर नानिया का चेहरा दिखने लगा, जो कि पसीने से भरा था। वो तेजी से आगे बढ़ती जा रही थी।
“मैं इस औरत को नहीं पहचानता।”
वो व्यक्ति बोला–“मैं नहीं...।”
ये कालचक्र की नानिया है। जिसे सोबरा ने रानी साहिबा बना रखा था।”
ओह, तो जग्गू और गुलचंद के साथ ये भी बाहर आ गई है।”
पता करो, क्या ये तीनों इसी तरफ आ रहे हैं?” पोतेबाबा ने कहा।
वो पुनः स्विचों के साथ खेलने लगा। मिनट-भर बाद बोला।
ये तीनों भी सोबरा की जमीन की तरफ बढ़ रहे हैं।”
“ये नहीं हो सकता।” पोतेबाबा के होंठों से निकला।
सैटलाइट तो ये ही सिग्नल दे रहा है।” पोतेबाबा की नजरें स्क्रीन पर जा टिकीं ।
एक बार फिर चैक करो।” मैं सही कह रहा हूं।”
‘हैरानी है कि ये क्यों सोबरा की जमीन की दिशा की तरफ जा रहे हैं।” पोतेबाबा ने कहा।
“इन्हें रोकें क्या?” पोतेबाबा के चेहरे पर सोंच के भाव उभरे।
इन पर आंधी छोड़कर इन्हें भटका देते हैं।” वो व्यक्ति बोला।
“अभी कुछ मत करो।” पोंतेबाबा ने कहा-“ये कब तक सोबरा की जमीन पर पहुंच जाएंगे?” ।
“रात तक। मेरे खयाल में नानिया ही इन्हें रास्ता दिखा रही है,
वो आगे चल रही है।” ।
“मैं सोच रहा हूं क्या ये सोबरा के पास पहुंचकर, जथूरा को कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं?” पोतेबाबा ने कहा।
“इस बारे में तो आप ही बताएंगे।”
देवा-मिन्नों, नगरी की तरफ आ रहे हैं। हमें इनकी परवाह नहीं करनी चाहिए।”
मोमो जिन्न का सोबरा के पास जाना हैरानी वाली समस्या है
।
मोमो जिन्न की कोई समस्या नहीं।”
जग्गू और गुलचंद का क्या करूं?”
अभी इन्हें कुछ मत कहो। इन पर नजर अवश्य रखो।”
जो हुक्म।”
पोतेबाबा के चेहरे पर सोच के भाव थे।
“मुझे मखानी और कमला रानी के बारे में पता चला। इन दोनों के बारे में पहले कभी सुना नहीं।”
“कालचक्र का हिस्सा हैं ये।”
परंतु कालचक्र में इनका नाम कभी नहीं आया।”
भौरी और शौहरी को जानते हो?”
“अवश्य।”
भौरी और शौहरी ने जरूरत के मुताबिक इन दोनों को बाहरी दुनिया से इकट्ठा किया है।”
तो अब ये दोनों कालचक्र के बीच ही गिने जाएंगे?”
“हां। कालचक्र इन्हें स्वीकार कर चुका है। तुम जग्गू-गुलचंद, नानिया पर नजर रखो।” पोतेबाबा ने कहा और वहां से आगे बढ़ गया। उस हाल से बाहर निकला तो एक राहदारी में चल पड़ा। | सामने से जो भी आता ‘जथूरा महान है' के शब्दों के साथ आगे बढ़ जाता था।
पांच मिनट बाद कई राहदारियां पार करने के पश्चात पोतेबाबा नीचे जाते रास्ते की तरफ बढ़ गया, जो कि महल के नीचे तहखाने की तरफ जाता था। चौड़ा रास्ता, सुनसान था। नीचे जाकर रास्ता दाएं-बाएं दो भागों में बंट रहा था। पोतेबाबा दाईं तरफ वाले रास्ते पर बढ़ गया। ये रास्ता अब अंधेरे से भरा होने लगा।