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“जरूर दे सकता था, परंतु आगे का काम भी तो इससे लेना था। मैं चाहता था कि आगे वो स्वाभाविक तौर पर काम करे। जैसे कि वो अब कर रहा है।” पोतेबाबा गम्भीर हो गया।
मैं समझा नहीं ।”
मोमो जिन्न को सोबरा के पास पहुंचाना है।”
ऐसा क्यों?”
ताकि जथूरा को आजाद कराने के लिए, वो वहां काम कर सके।”
“जब तक उसके भीतर इंसानी इच्छाएं हैं, वो हमारे का नहीं है।” गरुड़ ने कहा। ।
“सही कहा।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया—“परंतु जब मोमो जिन्न सोवरा की जमीन पर उसके पास पहुंच जाएगा, तब हम उसके भीतर से इंसानी इच्छाएं निकाल लेंगे।”
ओह।” गरुड़ ने समझने वाले भाव में सिर हिलाया।
उस स्थिति में मोमो जिन्न फिर जथूरा के हक में सोचने लगेगा। इधर हमने जथूरा को कैद से आजाद कराना है, परंतु सोबरा अवश्य कुछ अड़चन डालेगा जथूरा की आजादी में। तब हम सोबरा के खिलाफ काम करने का आदेश मोमो जिन्न को दे सकते हैं, क्योंकि वो तब सोबरा के पास ही कहीं पर होगा।”
“ये अच्छी चाल है।” गरुड़ मुस्कराया।
ये सब बहुत पहले सोच लिया था मैंने। तभी मोमो जिन्न में इंसानी इच्छाएं डाल दी थीं।
“ठीक किया था आपने। मुझे पता लगा कि आप देवा-मिन्नो को जथूरा की जमीन पर ले आए हैं।”
हां। इस वक्त वो हमारे इसी महल की तरफ ही आ रहे हैं। कमला रानी और मखानी उन्हें ला रहे हैं।”
“देवा-मिन्नों को यहां लाने का आपने कठिन काम कर दिखाया।”
जथूरा का हाथ मेरी पीठ पर है तो मेरा काम क्यों नहीं पूरा होगा।”
जथूरा महान है।” गरुड़ श्रद्धा भाव से बोला।
उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” पोतेबाबा ने कहा।
“अब क्या करना है पोतेबाबा?” गरुड़ ने पूछा।
देवा-मिन्नो के यहां आने पर उन्हें सारी स्थिति स्पष्ट बताकर, जथूरा के आजाद करवाने के लिए कहा जाएगा और...।”
क्या ये जरूरी है कि वो हमारी बात मानें ।”
“मजबूरी है उनकी ।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा।
वो कैसे?”
पूर्वजन्म में प्रवेश करने के बाद वो तभी वापस अपनी दुनिया में पहुंच सकते हैं, जब वो पूर्वजन्म का कोई काम सुधार दें। उसके पश्चात ही उनकी वापसी के दरवाजे खुलेंगे, वरना नहीं। वो इसी दुनिया में भटकते रहेंगे।”
“ओह।” ।
“ऐसी स्थिति में कोई दूसरा काम सुधारने के लिए, काम कहां से ढूंढेगा?”
गरुड़ ने समझने वाले भाव में सिर हिलाया।
देवा-मिन्नो को हमारी बात माननी पड़ेगी।” पोतेबाबा ने कहा।
देवा-मिन्नो जानते हैं कि पूर्वजन्म की धरती पर आने के बाद, बिगड़ा काम सुधारकर ही वे वापस जा सकते हैं?” ।
“अवश्य जानते होंगे गरुड़। क्योंकि देवा-मिन्नो कई बार पूर्वजन्म की धरती पर आ चुके हैं।”
देवा-मिन्नो कब तक महल में पहुंचेंगे?” गरुड़ ने पूछा।
आज दिन ढलने तक वो यहां होंगे।”
“मैं जग्गू और गुलचंद के बारे में बताना चाहता हूं कि वे भी सोबरा की जमीन की तरफ बढ़ रहे हैं।”
“जान चुका हूं। परंतु उनके बारे में कुछ नहीं कह सकता कि वो सोबरा के पास क्यों जा रहे हैं।”
“क्या उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया जाए?" ।
हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो सोबरा के पास जा रहे हैं। हमारा काम तो देवा-मिन्नों से चल जाएगा।”
ठीक है। मैं अब चलता हूं। देवा-मिन्नो के महल में आते ही मैं आ जाऊंगा।" ।
पोतेबाबा ने गरुड़ को देखा। फिर कहा। “तवेरा से दूर रहना।”
मैं समझा नहीं ।”
मोमो जिन्न को सोबरा के पास पहुंचाना है।”
ऐसा क्यों?”
ताकि जथूरा को आजाद कराने के लिए, वो वहां काम कर सके।”
“जब तक उसके भीतर इंसानी इच्छाएं हैं, वो हमारे का नहीं है।” गरुड़ ने कहा। ।
“सही कहा।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया—“परंतु जब मोमो जिन्न सोवरा की जमीन पर उसके पास पहुंच जाएगा, तब हम उसके भीतर से इंसानी इच्छाएं निकाल लेंगे।”
ओह।” गरुड़ ने समझने वाले भाव में सिर हिलाया।
उस स्थिति में मोमो जिन्न फिर जथूरा के हक में सोचने लगेगा। इधर हमने जथूरा को कैद से आजाद कराना है, परंतु सोबरा अवश्य कुछ अड़चन डालेगा जथूरा की आजादी में। तब हम सोबरा के खिलाफ काम करने का आदेश मोमो जिन्न को दे सकते हैं, क्योंकि वो तब सोबरा के पास ही कहीं पर होगा।”
“ये अच्छी चाल है।” गरुड़ मुस्कराया।
ये सब बहुत पहले सोच लिया था मैंने। तभी मोमो जिन्न में इंसानी इच्छाएं डाल दी थीं।
“ठीक किया था आपने। मुझे पता लगा कि आप देवा-मिन्नो को जथूरा की जमीन पर ले आए हैं।”
हां। इस वक्त वो हमारे इसी महल की तरफ ही आ रहे हैं। कमला रानी और मखानी उन्हें ला रहे हैं।”
“देवा-मिन्नों को यहां लाने का आपने कठिन काम कर दिखाया।”
जथूरा का हाथ मेरी पीठ पर है तो मेरा काम क्यों नहीं पूरा होगा।”
जथूरा महान है।” गरुड़ श्रद्धा भाव से बोला।
उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” पोतेबाबा ने कहा।
“अब क्या करना है पोतेबाबा?” गरुड़ ने पूछा।
देवा-मिन्नो के यहां आने पर उन्हें सारी स्थिति स्पष्ट बताकर, जथूरा के आजाद करवाने के लिए कहा जाएगा और...।”
क्या ये जरूरी है कि वो हमारी बात मानें ।”
“मजबूरी है उनकी ।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा।
वो कैसे?”
पूर्वजन्म में प्रवेश करने के बाद वो तभी वापस अपनी दुनिया में पहुंच सकते हैं, जब वो पूर्वजन्म का कोई काम सुधार दें। उसके पश्चात ही उनकी वापसी के दरवाजे खुलेंगे, वरना नहीं। वो इसी दुनिया में भटकते रहेंगे।”
“ओह।” ।
“ऐसी स्थिति में कोई दूसरा काम सुधारने के लिए, काम कहां से ढूंढेगा?”
गरुड़ ने समझने वाले भाव में सिर हिलाया।
देवा-मिन्नो को हमारी बात माननी पड़ेगी।” पोतेबाबा ने कहा।
देवा-मिन्नो जानते हैं कि पूर्वजन्म की धरती पर आने के बाद, बिगड़ा काम सुधारकर ही वे वापस जा सकते हैं?” ।
“अवश्य जानते होंगे गरुड़। क्योंकि देवा-मिन्नो कई बार पूर्वजन्म की धरती पर आ चुके हैं।”
देवा-मिन्नो कब तक महल में पहुंचेंगे?” गरुड़ ने पूछा।
आज दिन ढलने तक वो यहां होंगे।”
“मैं जग्गू और गुलचंद के बारे में बताना चाहता हूं कि वे भी सोबरा की जमीन की तरफ बढ़ रहे हैं।”
“जान चुका हूं। परंतु उनके बारे में कुछ नहीं कह सकता कि वो सोबरा के पास क्यों जा रहे हैं।”
“क्या उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया जाए?" ।
हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो सोबरा के पास जा रहे हैं। हमारा काम तो देवा-मिन्नों से चल जाएगा।”
ठीक है। मैं अब चलता हूं। देवा-मिन्नो के महल में आते ही मैं आ जाऊंगा।" ।
पोतेबाबा ने गरुड़ को देखा। फिर कहा। “तवेरा से दूर रहना।”