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महाकाली--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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“जरूर दे सकता था, परंतु आगे का काम भी तो इससे लेना था। मैं चाहता था कि आगे वो स्वाभाविक तौर पर काम करे। जैसे कि वो अब कर रहा है।” पोतेबाबा गम्भीर हो गया।

मैं समझा नहीं ।”

मोमो जिन्न को सोबरा के पास पहुंचाना है।”

ऐसा क्यों?”

ताकि जथूरा को आजाद कराने के लिए, वो वहां काम कर सके।”

“जब तक उसके भीतर इंसानी इच्छाएं हैं, वो हमारे का नहीं है।” गरुड़ ने कहा। ।

“सही कहा।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया—“परंतु जब मोमो जिन्न सोवरा की जमीन पर उसके पास पहुंच जाएगा, तब हम उसके भीतर से इंसानी इच्छाएं निकाल लेंगे।”

ओह।” गरुड़ ने समझने वाले भाव में सिर हिलाया।

उस स्थिति में मोमो जिन्न फिर जथूरा के हक में सोचने लगेगा। इधर हमने जथूरा को कैद से आजाद कराना है, परंतु सोबरा अवश्य कुछ अड़चन डालेगा जथूरा की आजादी में। तब हम सोबरा के खिलाफ काम करने का आदेश मोमो जिन्न को दे सकते हैं, क्योंकि वो तब सोबरा के पास ही कहीं पर होगा।”

“ये अच्छी चाल है।” गरुड़ मुस्कराया।

ये सब बहुत पहले सोच लिया था मैंने। तभी मोमो जिन्न में इंसानी इच्छाएं डाल दी थीं।

“ठीक किया था आपने। मुझे पता लगा कि आप देवा-मिन्नो को जथूरा की जमीन पर ले आए हैं।”

हां। इस वक्त वो हमारे इसी महल की तरफ ही आ रहे हैं। कमला रानी और मखानी उन्हें ला रहे हैं।”

“देवा-मिन्नों को यहां लाने का आपने कठिन काम कर दिखाया।”

जथूरा का हाथ मेरी पीठ पर है तो मेरा काम क्यों नहीं पूरा होगा।”

जथूरा महान है।” गरुड़ श्रद्धा भाव से बोला।

उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” पोतेबाबा ने कहा।

“अब क्या करना है पोतेबाबा?” गरुड़ ने पूछा।

देवा-मिन्नो के यहां आने पर उन्हें सारी स्थिति स्पष्ट बताकर, जथूरा के आजाद करवाने के लिए कहा जाएगा और...।”

क्या ये जरूरी है कि वो हमारी बात मानें ।”

“मजबूरी है उनकी ।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा।

वो कैसे?”

पूर्वजन्म में प्रवेश करने के बाद वो तभी वापस अपनी दुनिया में पहुंच सकते हैं, जब वो पूर्वजन्म का कोई काम सुधार दें। उसके पश्चात ही उनकी वापसी के दरवाजे खुलेंगे, वरना नहीं। वो इसी दुनिया में भटकते रहेंगे।”

“ओह।” ।

“ऐसी स्थिति में कोई दूसरा काम सुधारने के लिए, काम कहां से ढूंढेगा?”

गरुड़ ने समझने वाले भाव में सिर हिलाया।

देवा-मिन्नो को हमारी बात माननी पड़ेगी।” पोतेबाबा ने कहा।

देवा-मिन्नो जानते हैं कि पूर्वजन्म की धरती पर आने के बाद, बिगड़ा काम सुधारकर ही वे वापस जा सकते हैं?” ।

“अवश्य जानते होंगे गरुड़। क्योंकि देवा-मिन्नो कई बार पूर्वजन्म की धरती पर आ चुके हैं।”

देवा-मिन्नो कब तक महल में पहुंचेंगे?” गरुड़ ने पूछा।

आज दिन ढलने तक वो यहां होंगे।”

“मैं जग्गू और गुलचंद के बारे में बताना चाहता हूं कि वे भी सोबरा की जमीन की तरफ बढ़ रहे हैं।”

“जान चुका हूं। परंतु उनके बारे में कुछ नहीं कह सकता कि वो सोबरा के पास क्यों जा रहे हैं।”

“क्या उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया जाए?" ।

हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो सोबरा के पास जा रहे हैं। हमारा काम तो देवा-मिन्नों से चल जाएगा।”

ठीक है। मैं अब चलता हूं। देवा-मिन्नो के महल में आते ही मैं आ जाऊंगा।" ।

पोतेबाबा ने गरुड़ को देखा। फिर कहा। “तवेरा से दूर रहना।”
 
“अवश्य। मैं इस बात का ध्यान रखेंगा।” गरुड बाहर निकल गया।

पोतेबाबा वहीं बैठा, सोचों में गुम रहा फिर बाहर खड़े सेवक को ऊंचे स्वर में पुकारा।।

सेवक पुनः हाजिर हुआ। “रातुला को बुलाओ।”

“जी।” कहकर सेवक चला गया।

Mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm

गरुड़ फौरन वापस उसी कमरे में पहुंचा और अलमारी से वो ही किताब निकालकर, उसी मंत्र द्वारा उसने सोबरा से बात की।

“कहो गरुड़।” यंत्र में से सोबरा की बारीक-सी आवाज निकली।

पोतेबाबा मोमो जिन्न को खबरी बनाकर, आपकी जमीन पर भेज रहा है।” गरुड़ ने कहा।

वो कैसे?" ।

“पोतेबाबा ने मोमो जिन्न के भीतर इंसानी इच्छाएं डाल दी हैं। मोमो जिन्न घबरा गया है कि ये बात खुलते ही उसे मार दिया जाएगा। इसलिए वो जान बचाने के लिए आपकी तरफ दौड़ा आ रहा है। चूंकि देवा-मिन्नो महल में पहुंचने वाले हैं। उनसे जथूरा पर बांधा तिलिस्म तुड़वाया जाएगा। इस दौरान पोतेबाबा, मोमो जिन्न में डाली इंसानी इच्छाएं वापस ले लेगा तो मोमो जिन्न पुनः जथूरा का सेवक बन जाएगा। तब उसे आदेश देकर, वे उससे काम ले सकते हैं।”

मैं समझ गया। ये बात तुमने मुझे बताकर अच्छा किया।”

“अब आपको सतर्क रहने की जरूरत है।”

मेरी फिक्र मत करो। तुम तवेरा को अपने प्यार में फंसाने की चेष्टा करो और सफल होने की खबर मुझे दो।”

अवश्य सोबरा।”

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रातुला आया। पोतेबाबा ने गम्भीर निगाहों से उसे देखा।

क्या बात है पोतेबाबा। मुझे क्यों बुलाया?”

बैठो। तुमसे कोई खास बात करना चाहता हूं।”

रातुला सामने पड़ी उसी कुर्सी पर जा बैठा, जहां थोड़ी देर पहले गरुड़ बैठा था।

“देवा-मिन्नों की कोई समस्या है?”

नहीं, गरुड़ के बारे में बात करना चाहता हूं।” पोतेबाबा ने हौले-से सिर हिलाया।

कहो।”

गरुड़ की नजर तवेरा पर है। उससे ब्याह करना चाहता है।”

“ओह।”

जबकि तवेरा ने गरुड़ के बारे में सोचा भी नहीं है।”

मैंने गरुड़ को इस बारे में समझाया तो वो फौरन पीछे हटने को मान गया, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है। मेरी अनुभवी नजरें धोखा नहीं खा सकतीं। गरुड़ का मन साफ नहीं लग रहा इस बारे मे

वों कैसे?”

मेरे कहने पर गरुड़ का पीछे हटने का रजामंद हो जाना ।”

“और ।”

“तवेरा की नजर गरुड़ पर नहीं है, परंतु गरुड़ उससे ब्याह करने की सोचे बैठा है। जथूरा का दामाद बनने का सपना देख रह्य है ताकि यहां का मालिक बन सके। बात अगर तवेरा की तरफ से भी होती तो जुदा बात थी, परंतु ये सब गरुड़ का अपना फैसला है।

और इतना बड़ा फैसला वो खुद नहीं कर सकता।”

“क्या मतलब?” ।

गरुड़ के पीछे किसी और की विचारधारा चल रही है।”
 
किसकी?”

मैं नहीं जानता।”

फिर तुमने इतनी बड़ी बात कैसे कह दी कि...।” ।

‘गरुड़ ने बेशक तरक्की की है। नीचे से उठकर आज वो जथूरा का सर्वश्रेष्ठ सेवक बन गया है, परंतु उसकी इतनी हिम्मत नहीं हो सकती कि वो तवेरा के साथ ब्याह की सोचने लगे।”

रातुला पोतेबाबा को देखता रहा। चेहरे पर सोचें रहीं। “तुम पहेलियां बुझा रहे हो।”

रातुला कह उठा। “मैंने स्पष्ट कहा है कि गरुड़ की सोचों के पीछे कोई है, परंतु मैं उसे नहीं जानता।”

रातुला ने सिर हिलाकर कहा।

मैं इसमें क्या कर सकता हूं, ये बताओ।” ।

गरुड़ पर नजर रख। ये सोचकर नजर रखो कि गरुड़ जथूरा के हक में नहीं सोचता। जथूरा कैद में है और वो उसकी आजादी की न सोंचकर, उसकी बेटी से ब्याह करने का विचार बना रहा है, ये गद्दारी नहीं तो और क्या है?” ।

रातुला ने सहमति से सिर हिलाया।

तुम्हें पता लगाना है कि गरुड़ क्यों बहक गया है।”

“मैं पता लगाऊंगा। परंतु महाकाली की परछाई पर भी नजर रखनी है मुझे ।”

वों काम छोड़ दो। उस काम पर मैं अभी किसी दूसरे को लगा देता हूं।”

“क्या तुम्हारी बातों से गरुड़ को कोई शक हुआ कि तुम उस पर शक कर रहे हो ।”

ऐसा कुछ नहीं है। वो निश्चिंत है।” ।

मुझे हैरानी होगी अगर गरुड़ वास्तव में बहक गया है तो।” रातुला उठते हुए बोला—“तवेरा से बात की इस बारे में?”

मैं अभी तवेरा के पास ही जा रहा हूं। तवेरा का बुलावा आया है। बात करूंगा उससे । तुम गरुड़ के बारे में असल बात जानों और मुझे खबर दो। हो सकता है कि मेरी सोचें ही गलत हों।”

जथूरा महान है।” रातुला ने कहा।

“उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” पोतेबाबा ने हाथ उठाकर कहा। रातुला बाहर निकल गया।

पोतेबाबा तवेरा के महल में उसके कमरे में पहुंचा। तवेरा को पहले ही पोतेबाबा के आने की खबर मिल चुकी थी।

“जथूरा महान है।” पोतेबाबा ने भीतर प्रवेश करके कहा

“उस जैसा दूसरा कोई नहीं ।”

“मैं कब से आपका इंतजार कर रही थी।” तवेरा ने सामान्य स्वर में कहा।

“सब खैर तो है मेरी बच्ची?” पोतेबाबा बोला।

मालूम पड़ा कि आप देवा और मिन्नो को ले आए हैं।”

“हां, मेरी बच्ची। देवा-मिन्नो जथूरा की जमीन पर आ पहुंचे

“तों देवा-मिन्नो वो तिलिस्म तोड़ देंगे जो महाकाली ने उन दोनों के नाम पर बांधा है।”

“आशा तो यही है मेरी बच्ची ।” ।

मैंने महाकाली से बात की, परंतु वो पिताजी को आजाद करने को तैयार नहीं है।” ।

“वो सोबरा के एहसानों के तले दबी हुई है। इसलिए वो सोबरा के कहने पर, जथूरा को कैद में रखे हुए है। वो तेरी बात नहीं मानेगी। वो जथूरा को आजाद नहीं करेगी।” पोतेबाबा ने कहा।

“अगर मैं उसका साथ देने को तैयार हो जाऊं तो वो पिताजी को आजाद करने को कहती है।”

वो झूठ कहती है।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया।

कैसे?” तवेरा की निगाह पोतेबाबा पर जा टिकी ।
 
तुम अगर उसकी ये बात मान जाओ तो वो कोई दूसरी समस्या खड़ी कर देगी। सोबरा की इजाजत के बिना वो जथूरा को कैद से आजाद नहीं करेगी। ये तो उसने यूं ही बहाना बना रखा है तुम्हारा।

ऐसा मेरा सोचना है। परंतु तुम उसे कभी भी हां मत कहना कि तुम उसके कामों में, उसका साथ दोगी।”

“मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है।” तवेरा गम्भीर स्वर में बोली-“मैंने पिताजी से बात की है, वो कैद में बहुत परेशान हैं और फौरन आजाद होने की इच्छा रखते हैं।”

इसी कोशिश में तो देवा और मिन्नो को यहां लाया गया है।”

“मैं देवा-मिन्नो के साथ रहना चाहूंगी।”

क्यों?

“क्योंकि मैं इस काम में उनकी सहायता कर सकती हूं। जादूगरनी महाकाली ने तरह-तरह के जाल बिछा रखे होंगे। मैं उन जालों से उन्हें बचा सकती हूं। तंत्र-मंत्र की विद्या में मैं पूरी तरह निपुण हूं।”

ये तुमने ठीक कहा।”

परंतु मन में आशंका है कि देवा-मिन्नो ने ये काम करने से इनकार कर दिया तो?” ।

ये बात मुझ पर छोड़ दो। मैं सब ठीक कर लूंगा।”

“मुझे आपका ही सहारा है।”

मैं अंत तक तेरे साथ हूँ मेरी बच्ची।” पोतेबाबा ने कहा-“मैं गरुड़ के बारे में कुछ पूछना चाहता हूं।”

पूछिए।”

गरुड़ का झुकाव तुम्हारी तरफ है। मेरी उससे बात हुई है। वो तुमसे ब्याह करने की सोच रहा है।” उसका झुकाव और उसकी सारी सोच एकतरफा ही हैं।” तेरी तरफ से कोई बात नहीं है इस बारे में?”

“नहीं। मैंने तो कभी गरुड़ के बारे में सोचा भी नहीं।” तवेरा ने कहा-“कुछ होता तो मैं आपसे अवश्य कहती।”

“यही मैं जानना चाहता था।”

“मुझे पिताजी की आजादी की चिंता है।”

“मुझे तुमसे ज्यादा है। जब से सोबरा ने जथूरा को कैद किया है मेरे कंधों पर बोझ ज्यादा बढ़ गया है। मेरी सोचों को कुछ पल के लिए भी आराम नहीं मिलता। जथूरा आकर अपने काम संभाले तो मैं आराम करूं।” ।

“देवा-मिन्नों के महल में आ जाने पर मुझे खबर देना। मैं भी बातचीत में शामिल होऊंगी।”

“अवश्य मेरी बच्ची। देवा-मिन्नो के आते ही मैं तुम्हें खबर कर दूंगा।”

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रातुला ने उस कमरे की तलाशी ली, जिसे गरुड़ इस्तेमाल करता था। | अलमारी में रखी वो किताब उसे मिली जिसके भीतर वो यंत्र छिपाकर रखा था।

उस यंत्र पर नजर पड़ते ही रातुला की आंखें सिकुड़ीं।

रातुला उस यंत्र को पहचानने की भूल नहीं कर सकता था। ऐसा यंत्र पहले भी जथूरा के दो सेवकों के पास से बरामद हो चुका था। जिन्होंने इस बात को स्वीकार किया था कि इस यंत्र के द्वारा वे सोबरा से बात करते हैं। उन्हें यहां की खबरें देते हैं। तो क्या गरुड़ भी जथूरा की खबरें सोबरा को देता है? गरुड़ क्या सोबरा का खबरी है? ‘नहीं, ये नहीं हो सकता। रातुला बड़बड़ा उठा। परंतु उस यंत्र को वो झुटला भी नहीं सकता था।

रातूला ने यंत्र वाली किताब वैसे ही अलमारी में वापस रखी और अलमारी, फिर कमरा बंद करके बाहर निकल गया। उसका मस्तिष्क उलझा हुआ था।

गरुड़ सोबरा का खबरी था। जासूस था। परंतु गरुड़ का रुतबा देखकर, ये बात विश्वास करने को मन नहीं कर रहा था।

रातुला पीछे वाले हॉल में पहुंचा। पोतेबाबा वहां नहीं था। रातुला ने सेवक से कहा।

पोतेबाबा को खबर भेजो कि मैं उससे मिलना चाहता हूं।” सेवक चला गया।

रातुला उसी हॉल में रहा। हर पल उलझन और परेशानी में रहा।

पोतेबाबा का इंतजार करता रहा। तीन घंटे बाद पोतेबाबा वहां पहुंचा।

जथूरा महान है।” पोतेबाबा कह उठा।

उस जैसा दूसरा कोई नहीं।” रातुला ने उठते हुए कहा। पोतेबाबा की नजरें रातुला के चेहरे पर थीं।

तुमने आने में बहुत देर लगा दी।” रातुला ने कहा।

तवेरा से मिलने के बाद, कुछ कामों में व्यस्त हो गया था। फिर भी मैं जल्दी ही आ गया। तुम परेशान क्यों हो?”

बात ही कुछ ऐसी है।”

गरुड़ के बारे में?”

हो ।”

कहो।” पोतेबाबा ने गहरी सांस ली।

क्या तुम इस बात पर यकीन करोगे कि गरुड़ सोबरा का खबरी है।”

पोतेबाबा चौंका।

यकीन नहीं हुआ?”

“अगर तुम कहोगे तो मैं अवश्य यकीन करूंगा।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा। | रातुला ने पोतेबाबा को उस अलमारी में मौजूद किताब में छिपा रखे यंत्र के बारे में बताया।

सुनते ही पतेबाबा कह उठा। इसमें कोई शक नहीं कि सोबरा के लोग ही वो यंत्र इस्तेमाल करते हैं।”

“इसका मतलब गरुड़, यहां की खबरें सोबरा को देता रहता है।” रातुला ने कहा।

पोतेबाबा बेहद गम्भीर दिखने लगा।

“शायद यकीन करने को मन नहीं कर रहा?” रातुला धीमे स्वर में कह उठा।

मुझे यकीन आ गया है।”

इतनी जल्दी...कैसे?”

अब सोचता हूं कि हमारी चालें सोबरा को कैसे पता चल जाती हैं। क्यों वो हमें हरा देता है। स्पष्ट है कि गरुड़ ही उन चालों के बारे में सोबरा को बताता रहा है। जो बातें हम बड़ों के अलावा कोई नहीं जानता, वो सोबरा कैसे जान जाता है। मैं हमेशा परेशान होता था ये सोचकर परंतु आज मुझे जवाब मिल गया कि गड़बड़ कहां से हुई।”
 
गरुड़ ने हमें बहुत बड़ा धोखा दिया।” रातुला बोला।

“यकीनन ।” पोतेबाबा शांत और गम्भीर नजर आ रहा था। दोनों के बीच चुप्पी रही।

फिर रातुला ही बोला। क्या सोच रहे हो पोतेबाबा?”

तुमने बहुत अच्छा काम कर दिया। सोबरा गरुड़ द्वारा बहुत बड़ा षड़यंत्र रच रहा है। सोबरा जथूरा की नगरी को अपने कब्जे में लेना चाहता है। तभी तो गरुड़ की नजर तवेरा पर है। यकीनन गरुड़ सोबरा के कहने पर चल रहा है। मैंने तो पहले ही कहा था कि गरुड़ में इतना हौसला नहीं कि वो तवेरा से ब्याह के बारे में सोच सके।”

अब क्या किया जाए?” पोतेबाबा ने रातुला को देखा और खामोशी से टहलने लगा। रातुला पोतेबाबा को देखता रहा। वहां खामोशी लम्बी होने लगी तो रातुला ने कहा। गरुड़ को बेहद सख्त सजा दी जानी चाहिए पोतेबाबा ।”

पोतेबाबा ने रातुला को देखा।

“उसने जथूरा को धोखा दिया है। नगरी में इससे बड़ा जुर्म कोई दूसरा नहीं है। उसे सजा-ए-मौत दी जाए।”

पोतेबाबा बरबस ही मुस्करा पड़ा।

“मुस्करा क्यों रहे हो?” रातुला ने पूछा।

गरुड़ को सजा-ए-मौत देने से हमें क्या फायदा?”

“फायदा?”

हां। हमें वो ही काम करना चाहिए, जिससे कि हमें भी फायदा हो। जथुरा के हक में अच्छा हो।”

“मैं समझा नहीं।” रातुला ने उलझन्-भरे स्वर में कहा-“तुम किस फायदे की बात कर रहे हो?”

“सोबरा गरुड़ को हथियार बनाकर फायदा उठाता रहा, अब हम भी थोड़ा-सा फायदा उठा लेते हैं।”

कैसे?”

गरुड़ को हम वो ही खबरें देंगे, जो हम सोबरा को बताना चाहेंगे।”

ओह–समझा।” रातुला ने सिर हिलाया।

गरुड़ से हमने बहुत धोखा खाया, कुछ धोखा गरुड़ को भी देना चाहिए। रही बात गरुड़ की सजा की तो वो हमारे हाथ में ही है। हम कभी भी गरुड़ को सोबरा का खबरी होने की सजा दे देंगे, परंतु सबसे पहले तुम एक काम करो रातुला ।”

“क्या?”

किसी को गरुड़ के उस कमरे में छिपा दो। हमें इस बात की पूरी तसल्ली कर लेनी चाहिए कि गरुड़ सोबरा को यहां की खबरें दे रहा था। जिसे वहां छिपाओ, उसे सब समझा देना।”

मैं ऐसा ही करूंगा।” ।

“गरुड़ की असलियत जानकर मुझे दुख पहुंचा।” पोतेबाबा ने गम्भीर स्वर में कहा।

“मुझे भी।” रातुला ने सिर हिलाया।

पोतेबाबा ठिठका। सोच रहा था वों।

कैसी खबरें देंगे गरुड़ को कि वो सोबरा को बताए?”

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सोबरा गरुड़ के द्वारा, जथूरा की जमीन का मालिक बनना चाहता है। तभी तो सोबरा के कहने पर, गरुड़ तवेरा के करीब जाने की चेष्टा में है। उससे ब्याह करना चाहता है तो सबसे पहले हम ये बात तवेरा को बताकर कहेंगे कि वो भी गरुड़ के साथ प्यार का नाटक करे और जो खबरें देने को कहूं, वो उसे दे।”

ये ठीक कहा।”

सोबरा कभी नहीं चाहेगा कि जथूरा कैद से आजाद हो। इसलिए उसे गरुड़ से हमारे खिलाफ काम करवाना पड़े तो वो जरूर करवाएगा। परंतु गरुड़ द्वारा उसे गलत खबरें मिल रही होंगी तो सोबरा अवश्य मात खा जाएगा।”\\

पोतेबाबा ने कठोर स्वर में कहा-“अब सोबरा वो ही सोचेगा, जो हम चाहेंगे। हमारी चालें सोबरा की सोचों को बदल देंगी।”

रातुला ने सिर हिलाया।।

परंतु मैं अपनी एक चाल गरुड़ को बता चुका हूं। वो गलत हुआ।”

कैसी चाल?”

मोमो जिन्न के बारे में । जो सोबरा की जमीन की तरफ जा रहा है। उसमें मोमो जिन्न का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। सोबरा उसे कैद कर लेगा या मार देगा। जबकि मोमो जिन्न बेहद काबिल जिन्न है। उसे बचाना होगा।”

| कैसे?”

“वो मैं ठीक कर लूंगा।” पोतेबाबा ने सिर हिलाया—“तुम उस कमरे में किसी को छिपा दो कि जब गरुड़ सोबरा से उस यंत्र के द्वारा बात करे तो उसकी बातें सुनकर, उसके गद्दार होने का यकीन हमारा पूरी तरह विश्वास में बदल सके।”

ये इंतजाम मैं अभी करता हूं।”

शेष बातें फिर करेंगे।”

रातुला वहां से चला गया। | पोतेबाबा भी बाहर निकला और तेजी से एक तरफ बढ़ गया। उसके चेहरे पर सख्ती के भाव थे। माथे पर बल नजर आ रहे थे। सात-आठ मिनट चलने के बाद पोतेबाबा ने उस कमरे में प्रवेश किया, जहां बीस से ज्यादा कम्प्यूटर और स्क्रीनें चमक रही थीं। लाल वर्दी पहने जथूरा के सेवक हर तरफ व्यस्त नजर आ रहे थे।

पोतेबाबा कुर्सी पर बैठे एक सेवक के पास पहुंचा। काम में व्यस्त सेवक उस पर नजर मारते ही कह उठा। “जथूरा महान है।”

उस जैसा कोई दूसरा नहीं।” पोतेबाबा ने कहा-“फौरन इस काम को करो। मोमो जिन्न का सॉफ्टवेयर चालू करो और उसमें मौजूद इंसानी इच्छाओं को हटा दो।” ।

“ओह! मोमो जिन्न् में इंसानी इच्छाएं डाल दी गई थीं।” वो सेवक बोला।

“तब ऐसा करना जरूरी था। अब उन इच्छाओं को हटा देना जरूरी है।” पोतेबाबा ने कहा।

“मैं अभी इस काम पर लग जाता हूं।” सेवक बोला।।

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मोमो जिन्न, लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा तेजी से आगे बढ़े जा रहे थे। जंगल खत्म होने को था। सामने खुश्क पहाड़ नजर आने लगे थे, जो कि धूप में तपते से लग रहे थे।

“इसी तरह चलता रहा तो मैं मर जाऊंगा।” लक्ष्मण दास ने कहा और वहीं नीचे बैठ गया।

मोमो जिन्न और सपन चड्ढा ठिठके। पलटे।

थोड़ा सा और चल ले।” मोमो जिन्न प्यार से कह उठा।

“मेरी ये उम्र भाग-दौड़ की नहीं है। लक्ष्मण दास हाथ हिलाकर बोला।

“बात समझ यार ।” मोमो जिन्न ने खुशामद भरे स्वर में कहा—“सोबरा की जमीन पर पहुंचकर हम सुरक्षित हो जाएंगे। जथूरा के सेवकों ने हमारी स्थिति भांप ली तो, वो हमें सोबरा की जमीन पर नहीं पहुंचने देंगे। उन्हें पता चल गया कि मुझमें इंसानी इच्छाएं आ गई हैं तो वो मुझे मार देंगे।”

लक्ष्मण दास कुछ नहीं बोला।

“तू मेरा यार नहीं है।” मोमो जिन्न ने कहा।

थकान से मेरी टांगें कांप रही हैं।” लक्ष्मण दास मरे स्वर में बोला–“गर्मी से जान निकली जा रही है।”

“मेरी खातिर, अपनी खातिर, सोबरा से कहकर मैं तुमकों वापस तुम्हारी दुनिया में भिजवा दूंगा। यहां से उठो। आधे से ज्यादा रास्ता पार हो गया है। शाम तक हम सोबरा की जमीन पर होंगे।”

“मैं भी थक गया हूं।” सपन चड्ढा ने कहा और जमीन पर जा बैठा।

“तुम दोनों मुझे मुसीबत में डाल दोगे।” मोमो जिन्न मुंह बनाकर कह उठा–“मैं नहीं बनूंगा।” ।

“हमें अपने साथ लाना ही नहीं चाहिए था।” सपन चड्ढा ने कहा।

तुम दोनों को साथ न लाता तो, फिर मेरा काम ही क्या था। वापस जाता तो वो मेरा परीक्षण करके, मेरे शरीर में आ चुकी इच्छाओं के बारे में जानते और मुझे मार देते। तुम दोनों के कारण ही तो...।”

अब हमें आराम करने दो।”

मैं तो नींद लूंगा।” लक्ष्मण दास सच में बहुत थका हुआ था।

मेरे लिए तो मुसीबत खड़ी हो गई।” मोमो जिन्न ने आसपास नजरें घुमाईं–“ये दोनों बेवकूफ हैं, हालातों को समझते नहीं हैं कि जथूरा के सेवक हमारे लिए खतरा खड़ा कर देंगे।” |

“देवराज चौहान, मोना चौधरी, बाकी लोग अब कहां होंगे?” सपन चड्ढा ने पूछा।

“मुझे क्या पता?”

“तुम जिन्न हो। पता कर सकते...।” ।

मैं अपनी ताकतों का इस्तेमाल करूंगा तो उन्हें सिग्नल मिल जाएगा कि मैं किस दिशा में हूं। मुझे खामोश रहना होगा।”

“तुम कैसे अजीब जिन्न हो, जो जथूरा के सेवकों से डरते हो ।”

“जथूरा का सेवक हूं मैं, मुझ पर अधिकार कर रखा है उसने । वो मेरा मालिक है। मुझे उससे डरना पड़ता है।”

लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा की नजरें मिलीं।

ये बेकार का जिन्न है।”

कैसा भी जिन्न है, हमें तो इसने फंसा दिया।”

ऐसा मत सोचो। ऐसा मत कहो। मैं तुम दोनों का यार हूं। तुम्हारा भला कर रहा...”

हमारा भला कर रहा है या अपना ।” सपन चड्ढा ने तीखे स्वर में कहा।

“तुम दोनों मेरा विश्वास कभी नहीं करते। जबकि मैं तुम्हारे साथ कितने प्यार से पेश आता हूं। लामा जिन्न होता मेरी जगह तो अब तक तुम दोनों की हालत बिगाड़ चुका होता। मेरी शराफत का फायदा उठा...।”

“तू और शरीफ।” सपन चड्ढा ने बड़े तीखे स्वर में कहा-“तू तो...।”

सपन चड्ढा के शब्द अधूरे ही रह गए। उसने मोमो जिन्न के चेहरे के भाव बदलते देखे। लक्ष्मण दास की निगाह भी उस पर टिक गई। \

तभी मोमो जिन्न ने गहरी सांस ली और दोनों को देखा। अगले ही पल उसकी गर्दन इस तरह टेढ़ी हो गई जैसे किसी की बात सुन रहा हो। आंखें बंद हो गई थीं इस दौरान उसकी।

जथूरा के सेवकों की तरफ से इस हरामी को नया ऑर्डर मिल रहा होगा।” सपन चड्ढा बोला।

“मुझे तो भूख लग रही है।”

मुझे भी, लेकिन यहां खाने को क्या मिलेगा?”

मोमो जिन्न उसी मुद्रा में समझने वाले ढंग में सिर हिला रहा था। फिर मोमो जिन्न सामान्य अवस्था में आ गया और उन्हें देखा।

अब क्या कहा जथूरा के सेवकों ने?”

तुम कौन होते हो पूछने वाले।” मोमो जिन्न तेज स्वर में बोला।

“क्या मतलब?” ।

“अपनी औकात में रहो।”

“तुम...तुम हमें औकात में रहने को कह रहे हो।” सपन चड्ढा के माथे पर बल पडे।।

होश में रहो, जिन्न के ज्यादा मुंह नहीं लगते।”

तुम पागल तो नहीं हो गए।”

तुम घटिया जाति के मनुष्य, सर्वश्रेष्ठ जिन्न को पागल कहते हो।” मोमो जिन्न ने कठोर स्वर में कहा “मैं तुम दोनों को अभी मिट्टी में मिला दूंगा। मेरे सामने जुबान मत चलाओ।” |

लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा की नजरें मिलीं। चेहरे पर हैरानी थी।

इसे क्या हो गया है?” पागल हो गया लगता है।”

मोमो जिन्न के होंठों से हुंकार निकली।

जिन्न को पागल कहते हो। जबकि जिन्न कभी भी पागल नहीं होता।”

“तेरे को हो क्या गया है?”

“मैं...मुझमें ।” मोमो जिन्न एकाएक नजरें चुराता कह उठा–“से इंसानी इच्छाएं निकल गई हैं।”

“तो तुम फिर से असली जिन्न बन गए।” लक्ष्मण दास हड़बड़ाया।

*असली-नकली क्या होता है।” मोमो जिन्न ने कठोर स्वर् में कहा।।

यार तुम तो हमारे यार हो ।”

“यार ।” मोमो जिन्न के होंठों से हुंकार निकली—“लगता है तुम लोग शिष्टता भूल गए ।”

“शिष्टता?” लक्ष्मण दास, सपन चड्ढा ने एक-दूसरे को देखा।

ये अब वो नहीं रहा।” बुरे फंसे ।”

अब हमारा क्या होगा?”

क्यों मोमो जिन्न। अब हमारा क्या होगा?” लक्ष्मण दास ने मोमो जिन्न से पूछा।

“तुम दोनों मेरे गुलाम हो।”

वों दोस्ती वाली बात ख़त्म हो गई?”

“जिन्न किसी का दोस्त नहीं होता। जिन्न या तो मालिक होता है या गुलाम होता है।”

हमारा क्या होगा?”

इस बारे में जथूरा के सेवक हुक्म देंगे।”

हममें जो पहले बात हुई थी, वो सारी खत्म?”

तब की बात दूसरी थी। तब मेरे में किसी ने इंसानी इच्छाएं डाल दी थीं ।”
 
“अब उन इच्छाओं को क्या हुआ?”

“वो निकाल ली गईं।”

कुछ खाना पसंद करोगे?” सपन चड्ढा एकाएक कह उठा।

तमीज से बात करो। जिन्न कभी भी कुछ नहीं खाते। तुम दोनों बहुत बदतमीज हो गए हो।” मोमो जिन्न ने गुस्से से कहा।

अभी तो तू हमें यार-यार कह रहा था।”

तब मैं भटक गया था। लेकिन अब ठीक है।”

तू तो ठीक है, लेकिन हमारा क्या होगा?”

“हमें यहां से चलना होगा।”

कहाँ?” ।

महाकाली की पहाड़ी की तरफ।”

“महाकाली—ये कौन है?”

जादूगरनी है। बहुत ताकतवर है।”

तो ह...हमें वहां क्यों ले जा रहे हैं?”

“मैं नहीं जानता। मुझे जथूरा के सेवकों की तरफ से हुक्म मिला है, उधर जाने का ।” ।

“लक्ष्मण! ये तो हमें जादूगरनी की पहाड़ी की तरफ ले जा रहा है। हम बुरे मरेंगे।”

ये कब हमारा पीछा छोड़ेगा?” लक्ष्मण दास ने मोमों जिन्न से कहा।

“जथूरा के सेवकों ने तुम्हें महाकाली पहाड़ी की तरफ जाने को कहा है?”

हो ।”

तो तुम जाओ, हमें क्यों ले...।” ।

“तुम दोनों मेरे गुलाम हो। तुम्हें भी मेरे साथ चलना होगा, वरना भटक जाओगे।”

अब सोबरा के पास नहीं जाना तुम्हें?”

“सोबरा के पास मेरा क्या काम ।” मोमो जिन्न ने कठोर स्वर मैं कहा।

अभी तो तुम वहां की तरफ जा रहे थे।”

तब इंसानी इच्छाओं ने मुझे भटका दिया था। लेकिन अब मैं ठीक हो चुका हूं।”

तू तो बात-बात पर रंग बदलता है।”

खबरदार, ठीक से बात करो। मैं जिन्न हूं। तुम दोनों का मालिक।”

लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा की नजरें मिलीं।

सुना तूने।” ये तो जलेबी-बड़ी खाई सब भूल गया।” “यारी की बड़ी-बड़ी कसमें खाता था, वो भी भूल गया।”

कहता था जिन्न कभी झूठ नहीं बोलता। लेकिन ये तो मुझे सच बोलता दिखता हीं नहीं ।”

“तुम दोनों को शिष्टता सिखानी होगी।” मोमो जिन्न बोला।

“तेरे किए-थरे पर हीं तो बात कर रहे हैं कि...।”

वो बीती बातें हैं, नई बातें करो।” मोमो जिन्न ऊंचे स्वर में बोला—“उठो यहां से, हमें महाकाली की पहाड़ी की...।”

वहां हमारा क्या काम। वो तो जादूगरनी है। हमें मार देगी।”

काम वहां जाकर पता चलेगा। बाकी का आदेश बाद में मिलेगा।” ।

तुझमें जब इंसानी इच्छाएं आ गई थीं तो हमने तेरा कितना साथ दिया। अगर तब जथूरा के सेवकों को पता चल जाता तो वो तुम्हारी

जान ले लेते। तब हमने तुम्हें बचाया।” लक्ष्मण दास ने कहा।

हमने तेरे को ख़ाने को भी दिया तब ।”

खामोश रहो। जिन्न से खाने-पीने की बातें मत करो। वो मेरा बुरा वक्त था। अब तुम लोग मुझसे शिष्टता से पेश आओ। मैं जथूरा

का सेवक हूं। ये बात हमेशा ध्यान रखो।” ।

क्या मुसीबत है?”

मुझे भूख लगी है।” लक्ष्मण दास कह उठा।

तुम इंसानों की यही समस्या है कि बात-बात पर खाने को कहते हो।”

भूख लगती है तो कहेंगे नहीं क्या ।” ।

“अब चलो यहां से, रास्ते में फल के पेड़ मिलेंगे तो खा लेना।” मोमो जिन्न हुक्म देने वाले स्वर में बोला।।
 
लक्ष्मण दास और सपन चड्ढा उठ खड़े हुए। “चल सपन् ।”

वों जादूगरनी...।”

“बोलो, जथूरा महान है।” मोमो जिन्न कह उठा।

लेकिन...।”

बोलो।” मोमो जिन्न कठोर स्वर में कह उठा।

जथूरा महान है।” दोनों एक साथ कह उठे।

याद रखो, जो बात कहूं वो एक ही बार में मान लिया करो, वरना कपड़े उतरवाकर, नंगा करके घुमाऊंगा।”

‘हरामी कहीं का।' सपन चड्ढा बड़बड़ा उठा।

क्या कहा?” मोमो जिन्न ने हुंकार भरी।

“जथूरा महान है।”

“हां, ऐसे ही बोला करो। जथूरा के अच्छे सेवक बनो। तरक्की करोगे।”

नगरी की चारदीवारी दिखने लगी थीं।।

कमला रानी।” भौरी का स्वर् कानों में पड़ा-“ये ही है जथूरा की नगरी।”

यहां तो बड़े-बड़े महल बने दिखाई दे रहे हैं।”

“हां। ये तो एक नगरी है ऐसी कई नगरियां हैं जथूरा की, जहां उसके काम होते हैं।”

वो कैसी जगह है?” मखानी ने कमला रानी से पूछा। जथूरा की नगरी है, वहीं पर हमें जाना है।” सब तेजी से आगे बढ़ते जा रहे थे। सूर्य पश्चिम की तरफ खिसक चुका था।

छोरे । यो तो बोत शानदारों जगहो लागे हो ।” बांकेलाल राठौर कह उठा।

येई जथूरा की नगरी होईला बाप ।”

तंम पैले इधर आयो हो?”

नेई बाप ।”

फिर थारो कैसो पतो हौवे कि यो जथूरा की नगरी होवे।”

*आपुन का दिल कहेला बाप ।”

ये कौन-सी जगह है?” नगीना ने चलते हुए ऊंचे स्वर में पूछा।

“जथूरा की नगरी है ये। हमें यहीं जाना हैं।” मखानी ने कहा।

सब पसीने से भीगे हुए थे। एक पल के लिए भी वो रुके नहीं थे।

पारसनाथ मोना चौधरी से बोला। “यहां हमारे लिए खतरा हो सकता है।”

“सम्भव है।” मोना चौधरी गम्भीर स्वर में बोली-“जथूरा ने कभी नहीं चाहा कि हम यहां तक आएं।”

तो अब क्या करना चाहिए हमें?”

“वहां जथूरा की हुकूमत है। हमारी एक नहीं चलने वाली।” महाजन ने कहा।

उसकी बातें सुन रही नगीना कह उठी।

जथूरा ही तो हमें यहां तक लाया है। फिर उससे डर कैसा।”

जथूरा लाया है हमें यहां?” महाजन ने नगीना को देखा।

ह्म। मोमो जिन्न उसका गुलाम है। वो पनडुब्बी जथूरा की थी। हम खुद तो नहीं आ पहुंचे थे पनडुब्बी में।”

“जथूरा से डरने की जरूरत नहीं है।” दो कदम आगे चलता देवराज चौहान कह उठा।

हमारे वहां पहुंचते ही वो हमें कैद कर सकता है।”

“नाहक ही चिंता मत करो। हम इस वक्त जथूरा के अधिकार में ही हैं, परंतु अब तक उसने कुछ नहीं किया हमारा ।” देवराज चौहान ने कहा-“कमला रानी और मखानी हमारे मार्गदर्शक बने हुए हैं। ये दोनों जथूरा के कालचक्र के हिस्से हैं। यानी कि जो कुछ भी हो रहा है, जथूरा की मर्जी से हो रहा है।”

यकीन है तुम्हें?”

बहुत हद तक।” कुछ देर बाद ही वो सब नगरी की दीवार के पास जा पहुंचे। भौरी कमला रानी के कानों में, रास्ते के बारे में बताती जा रही थी।

कमला रानी और मखानी एक दीवार के पास जाकर रुके। वहां दो पहरेदार मौजूद थे और छोटा-सा दरवाजा था, जो कि बंद था। पहरेदारों ने बिना कुछ पूछे, उन्हें देखते ही दरवाजा खोल दिया।
 
“आप लोग भीतर जा सकते हैं।” एक पहरेदार बोला।

म्हारे को तो लागे हो कि जथूरो म्हारी खूब इज्ज़त करो हो ।”

*ज्यादा इज्जत भी ठीक नेई होईला बाप ।”

काये को?”

*औकात की पोल खुलेला तब ।”

छोरे, म्हारी औकातो पूरो फिट हौवो। म्हारी कोई पोलो न हौवे ।” सब उस छोटे-से दरवाजे से, झुकते हुए भीतर प्रवेश कर गए। सामने ही नगरी की शाम मौजूद थी। लोग सड़कों पर आ-जा रहे थे।

कहीं घोड़ागाड़ी, कहीं बैलगाड़ी, ठेलागाड़ी। हर कोई काम में व्यस्त था।

लाल वर्दी में सैनिक आते-जाते दिखाई दे रहे थे।

पूरो शहर बसा रखो हो जथूरो ने।” । सबने ठिठककर हर तरफ नजरें घुमाईं।

देवराज चौहान कमला रानी और मखानी के पास जाकर बोला। “हमने कहां जाना है?”

“उधर, वो जो लाल महल दिखाई दे रहा है।” कमला रानी ने कहा।

वहां जथूरा है?”

पता नहीं, लेकिन तुम लोगों को वहीं ले आने को कहा गया है।

” किसने कहा है?”

“भौरी ने।” कमला रानी के होंठों से निकला।

“भौरी कौन...?”

“ज्यादा सवाल मत पूछो। हमारे पीछे चले आओ।” कमला रानी और मखानीं आगे बढ़ गए। बाकी उसके पीछे थे। नगीना पास आकर कह उठी।

क्या हम इनके पीछे चलकर ठीक कर रहे हैं?”

“अब ठीक गलत का सवाल नहीं रहा। हम जथूरा की नगरी में आ पहुंचे हैं।” देवराज चौहान ने कहा।

क्या उसका कुछ याद आया जो अपनी आजादी के लिए तड़प रहा है।”

नहीं। मैं नहीं समझ पाया कि वो कौन हैं।” अब वो सड़क के किनारे-किनारे आगे बढ़ने लगे थे। उसी पल मोना चौधरी चलते-चलते पास आई और बोली। “क्या पता हम खतरे में फंसने जा रहे हैं।”

मुझे ऐसा नहीं लगता।” देवराज चौहान ने कहा-“जथूरा हमारा बुरा चाहता तो हमारे लिए अपने सैनिक भेज चुका होता।”

लेकिन जथूरा ने अभी तक अपना दोस्ताना भी तो नहीं दिखाया।”

“हमारे सामने इंतजार करने और देखने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।”

“जगमोहन यहां आ गया होगा?” नगीना ने पूछा।

“जल्दी ही हमें सब कुछ पता चल जाएगा। मुझे लगता है जथूरा ने हमें पूर्वजन्म में बुलाया है।”

“लेकिन वो तो हमें पूर्वजन्म में आने से रोक रहा था। मोना चौधरी कह उठी।

देवराज चौहान ने जवाब में कुछ नहीं कहा।

“कमला रानी ।” साथ चलता मखानी कह उठा–“हम महल में जाते ही एकांत ढूंढेंगे।”

क्यों?

“प्यार जो करना है। मैंने बहुत सब्र कर लिया।”

“शौहरी से पूछ इस बारे में।”

“उससे थोड़े न प्यार करना है, जो उससे पूछु ।”

“एकांत तो वो ही दिलवाएगा।” “तू भौरी से बात कर इस बारे में।”

वो बहुत व्यस्त हैं। इधर-उधर की बात तो सुनने को भी राजी नहीं ।”

मखानी ने धीमे से शौहरी को पुकारा।।

“क्या है?” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी।

मुझे और कमला रानी को एकांत चाहिए।”

तेरे को कोई दूसरी बात नहीं सूझती?” शौहरी ने डांट-भरे स्वर में कहा। ।

“दूसरी बात तो तब सूझे जब ये बात पूरी हों। जब भी करता हूं, तू टाल देता है।”

अभी बात मत कर।”

क्यों? यहां बहुत बुरा हुआ पड़ा है। मैंने तो अब जाना, यहां आकर ।”

क्या हुआ हैं?”

जथूरा नगरी में नहीं है, वो कहीं पर कैद है।”

अच्छा, तेरे को पहले क्यों नहीं पता थी ये बात?”

“मैं कालचक्र से वास्ता रखता हूं। नगरी में मेरा आना-जाना ही कहां होता है। अब आया तो पता चला।”

जथूरा को किसने कैद किया?”

शौहरी की आवाज नहीं आई।

“जवाब दे।” मखानी बोला।

महल में पहुंचकर जवाब मिल जाएगा।”

तू क्यों नहीं बताता?” ।

मैं व्यस्त हूं। मुझे जाना होगा।”

इतनी बातें कर रहा है तो, इस मामूली-सी बात का जवाब नहीं दे सकता।”

कोई और बात कर।” ।

“मेरे पास ये ही बात है कि मैंने कमला रानी से प्यार करना है। बहुत मन कर रहा है कि प्यार करूं ।”

शौहरी की तरफ से आवाज नहीं आई। “शौहरी ।” कोई जवाब नहीं ।

साला। मेरे काम की बात सुनते ही खिसक गया।”

क्या हुआ?” कमला रानी ने पूछा।

मेरी बात की कोई परवाह ही नहीं कर रहा।” मखानी मुंह बनाकर कह उठा।।

कमला रानी मुस्करा पड़ी।
 
“तू भी दांत फाड़ती है।”

“मैं तो सोच रही हूं कि जब जवानी में तेरे को औरत नहीं मिलतीं होगी, तब तेरा कैसा हाल होता होगा।”

तब की बात और थी।”

*और क्यों?" ।

तब मैं हाथ से काम चला लेता था।” मखानी ने गहरी सांस लीं।

तो अब भी...।”

अब पुराना खिलाड़ी हो गया हूं। अब हाथों वाली बात खत्म। अब तो औरत के बिना काम नहीं संवरता।”

एक बात कहूं तेरे से?”

बोल ।”

। दुनिया में ये काम सबसे बेकार का होता है। बिल्कुल फुर्सत का।”

ये तू कहती है।”

क्यों, मैं क्यों नहीं कह सकती।”

एक नम्बर की हरामी है तू। तेरे मुंह से ये बात जंचती नहीं।” मखानी ने चिढ़कर कहा-“तेरे को ये सब नहीं पसंद तो ठीक है, मैं कोई दूसरी ढूंढ़ लूंगा।”

“मेरे बिना तेरा मन लग जाएगा?”

क्यों नहीं, मुझे तो औरत चाहिए, तू नहीं तो दूसरी तीसरी सही।”

मतलबी है तू।” ।

“कुछ भी कह लें। मैं परवाह नहीं करता। यहां सूखा पड़ा हूं और सबको बातें सूझ रही हैं।”

वे सब लाल महल के करीब आ पहुंचे थे।

इसे यहां बड़ा महल कहा जाता है।” कमला रानी सबको सुनाती कह उठी।

यहां कोई हम पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा?” नगीना ने पूछा।

जथूरा की नगरी में कोई, किसी पर ध्यान नहीं देता, यहां कामों को महत्त्व दिया जाता है।” कमला रानी बोली।

“हमारे स्वागत के लिए भी कोई नहीं है।” महाजन बोला—“क्या जथूरा को पता है कि हुम आ रहे हैं।”

। “सबको, सब कुछ पता है। महल के भीतर आप सबका इंतजार हो रहा है।”

*अजीब बात है।” कमला रानी और मखानी महल की सीढ़ियां चढ़ने लगे। बाकी सब उनके पीछे थे।

अगल-बगल से लाल वर्दी में जथूरा के सेवक आ जा रहे थे, परंतु उनसे जैसे किसी को कोई मतलब ही नहीं था। सब अपने कामों में व्यस्त थे।

महल के भीतर पहुंचे थे।

सजावट से भरपूर महल था वो। सबकी नजरें घूमने लगीं महल में।

“मेरे पीछे आते रहो।” कमला रानी बोली-“हमें महल के बीच वाले हॉल में पहुंचना है।”

कमला रानी और मखानी के पीछे वे सब एक राहदारी में आगे बढ़ते चले गए।

महल का वैभव देखते ही बनता था।

म्हारे को समझ न आवे कि जथूरो इतनों बड़ो महल का, का करो हो?”

“आराम करेला वो।”

कित्ता भी आराम करो हो, पर ये महल तो बोत बड़ो हौवे। जथूरा का साइज भी बोत बड़ो हौवो?”

“वो छोटा होईला।”

“म्हारे को महलो जंचो हो।”

मखानी कमला रानी के कान में बोला।

यहां हमारा काम बन जाएगा।” वो खुश था।

“काम-कैसा काम मखानी?”

वो ही एकांत वाला, इतना बड़ा महल है, हमें प्यार करने की जगह मिल जाएगी।”

देखते हैं ।” कमला रानी की नजरें महल में दौड़ रही थीं।

“एक चुम्मी दे दे।”

नहीं। बिल्कुल नहीं ।” कमला रानी ने सख्त विरोध भरे स्वर में कहा। |

मखानी ने फुर्ती से कमला रानी की चुम्मी ली और मुस्कराकर

बोला। मैं भूल गया था कि औरत से कोई चीज मांगते नहीं। ले लेते हैं।”

अब तू समझदार हो गया है।” कमला रानी बोली।

मखानी कुछ कहने लगा कि पीछे से बांकेलाल राठौर् पास आया। तन्ने म्हारे सामने इसकी इज्जतो लूटने की कोशिश करो हो।”
 
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