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"अवश्य। परंतु बुरी खबर भी है।"
"वो क्या?"
"उनके साथ जथूरा की बेटी तवेरा भी...।"
"ये बात मैं जानता हूं महाकाली।" सोबरा कह उठा।
"नीलकंठ के बारे में भी जानता है?"
“नीलकंठ?" सोबरा चौंका—“नीलकंठ का इस मामले से क्या वास्ता?"
“वो मिन्नो को चाहता था।” महाकाली की आवाज सुनाई दे रही थी।
"जानता हूं।"
“उसकी चाहत ने अब फिर जोर मारा है। मिन्नो को कोई खतरा न हो, इसलिए वो मिन्नो के साथ हो गया है।"
“परंतु नीलकंठ तो समाधि में...।"
"वो समाधि में ही है, परंतु अपनी शक्तियां उसने मिन्नो के साथ कर दी हैं।"
“तो ये बात है। तूने उसे समझाया नहीं।" ___
"मेरी बात तो सुनने को तैयार नहीं। लेकिन वो मिन्नो को बचा नहीं सकेगा।” महाकाली के स्वर में क्रोध आ गया था। ___
“नीलकंठ को बीच में नहीं आना चाहिए था।” सोबरा ने गम्भीर स्वर में कहा। ___
“मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस तरह कोई भी महाकाली का मुकाबला नहीं कर सकता। .. "
तभी जगमोहन कह उठा।
"मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं महाकाली।"
“बोल जग्गू।” महाकाली की आवाज आई।
“तुम मुझे जानती हो?"
"मैं सबको जानती हूं। मुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। बता, क्या बात है?"
“ये जथूरा और सोबरा की बात है। दो भाइयों का मामला है। तुम इनके बीच में क्यों आती हो?" जगमोहन बोला। -
“सोबरा की वजह से मुझे आना पड़ा। वरना, ऐसे कामों की मुझे फुर्सत ही कहां है।" महाकाली की आवाज आई।
“सोबरा को मना कर... "
“सोबरा का एक एहसान था मुझ पर, उसी कारण सोबरा की बात मानकर ये काम कर रही हूं।"
सोबरा के होंठों पर शांत मुस्कान टिकी थी।
"देवराज चौहान का क्या करेगी तू?"
“वो सब कल सुबह जथूरा को आजाद कराने के लिए चल रहे हैं। उस तिलिस्मी पहाडी पर आएंगे, जहां मैंने जथरा को कैद कर रखा है।” महाकाली की आवाज कानों में पड़ रही थी।
"तू देवराज चौहान से डरती है?" ।
“मैं क्यों डरूंगी देवा-मिन्नो से। वो मेरे लिए कोई अहमियत नहीं रखते।" ___
"तो फिर उन्हें मुसीबत में डालने का इंतजाम क्यों करके आई है?" जगमोहन बोला। __
_क्योंकि जथूरा की आजादी का तिलिस्मी ताला मैंने देवा-मिन्नो के नाम से बांध दिया था। मैंने सोचा दोनों में झगड़ा है, तो कभी दोनों इकट्ठे होंगे ही नहीं और जथूरा की आजादी का तिलिस्मी ताला हमेशा बंद रहेगा। परंतु पोतेबाबा दोनों को इकट्ठा करके यहां ले आया। देवा-मिन्नो जथूरा को आजाद कराने की चाह रखते हैं।" __
“इसका मतलब तुझे डर है कि दोनों जथूरा को आजाद करा लेंगे।"
महाकाली की आवाज नहीं आई। कुछ पल शांति रही फिर महाकाली की आवाज आई।
“सारा खेल देवा-मिन्नो के ग्रहों का है। इन दोनों के ग्रह जब इकट्ठे हो जाएं तो ये कठिन से कठिन काम को भी सरलता से कर लेते हैं। सिर्फ इसी बात से मुझे तनिक चिंता है।"
“मतलब कि तू डरती है दोनों से।"
“ऐसा मत बोल।"
"मेरी बात मानेगी?"
"कह।"
"देवा-मिन्नो या उनके किसी साथी की जान मत लेना। जथूरा को आजाद कर दे।”
"मैं तेरी बात क्यों मानूं?"
"शराफत के नाते।
“यहां सिर्फ कर्म चलते हैं। शराफत नहीं चलती।” महाकाली की आवाज में हंसी आ गई—“देवा-मिन्नो रुकने को तैयार नहीं। वो जानते हैं कि महाकाली की कैद में है जथूरा, फिर भी वो आगे बढ़ने को तैयार हैं तो मैं पीछे क्यों हटूं?" ।
"देवराज चौहान और मोना चौधरी के ग्रह मिलकर तुझे हरा देंगे।"
"वो क्या?"
"उनके साथ जथूरा की बेटी तवेरा भी...।"
"ये बात मैं जानता हूं महाकाली।" सोबरा कह उठा।
"नीलकंठ के बारे में भी जानता है?"
“नीलकंठ?" सोबरा चौंका—“नीलकंठ का इस मामले से क्या वास्ता?"
“वो मिन्नो को चाहता था।” महाकाली की आवाज सुनाई दे रही थी।
"जानता हूं।"
“उसकी चाहत ने अब फिर जोर मारा है। मिन्नो को कोई खतरा न हो, इसलिए वो मिन्नो के साथ हो गया है।"
“परंतु नीलकंठ तो समाधि में...।"
"वो समाधि में ही है, परंतु अपनी शक्तियां उसने मिन्नो के साथ कर दी हैं।"
“तो ये बात है। तूने उसे समझाया नहीं।" ___
"मेरी बात तो सुनने को तैयार नहीं। लेकिन वो मिन्नो को बचा नहीं सकेगा।” महाकाली के स्वर में क्रोध आ गया था। ___
“नीलकंठ को बीच में नहीं आना चाहिए था।” सोबरा ने गम्भीर स्वर में कहा। ___
“मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस तरह कोई भी महाकाली का मुकाबला नहीं कर सकता। .. "
तभी जगमोहन कह उठा।
"मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं महाकाली।"
“बोल जग्गू।” महाकाली की आवाज आई।
“तुम मुझे जानती हो?"
"मैं सबको जानती हूं। मुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। बता, क्या बात है?"
“ये जथूरा और सोबरा की बात है। दो भाइयों का मामला है। तुम इनके बीच में क्यों आती हो?" जगमोहन बोला। -
“सोबरा की वजह से मुझे आना पड़ा। वरना, ऐसे कामों की मुझे फुर्सत ही कहां है।" महाकाली की आवाज आई।
“सोबरा को मना कर... "
“सोबरा का एक एहसान था मुझ पर, उसी कारण सोबरा की बात मानकर ये काम कर रही हूं।"
सोबरा के होंठों पर शांत मुस्कान टिकी थी।
"देवराज चौहान का क्या करेगी तू?"
“वो सब कल सुबह जथूरा को आजाद कराने के लिए चल रहे हैं। उस तिलिस्मी पहाडी पर आएंगे, जहां मैंने जथरा को कैद कर रखा है।” महाकाली की आवाज कानों में पड़ रही थी।
"तू देवराज चौहान से डरती है?" ।
“मैं क्यों डरूंगी देवा-मिन्नो से। वो मेरे लिए कोई अहमियत नहीं रखते।" ___
"तो फिर उन्हें मुसीबत में डालने का इंतजाम क्यों करके आई है?" जगमोहन बोला। __
_क्योंकि जथूरा की आजादी का तिलिस्मी ताला मैंने देवा-मिन्नो के नाम से बांध दिया था। मैंने सोचा दोनों में झगड़ा है, तो कभी दोनों इकट्ठे होंगे ही नहीं और जथूरा की आजादी का तिलिस्मी ताला हमेशा बंद रहेगा। परंतु पोतेबाबा दोनों को इकट्ठा करके यहां ले आया। देवा-मिन्नो जथूरा को आजाद कराने की चाह रखते हैं।" __
“इसका मतलब तुझे डर है कि दोनों जथूरा को आजाद करा लेंगे।"
महाकाली की आवाज नहीं आई। कुछ पल शांति रही फिर महाकाली की आवाज आई।
“सारा खेल देवा-मिन्नो के ग्रहों का है। इन दोनों के ग्रह जब इकट्ठे हो जाएं तो ये कठिन से कठिन काम को भी सरलता से कर लेते हैं। सिर्फ इसी बात से मुझे तनिक चिंता है।"
“मतलब कि तू डरती है दोनों से।"
“ऐसा मत बोल।"
"मेरी बात मानेगी?"
"कह।"
"देवा-मिन्नो या उनके किसी साथी की जान मत लेना। जथूरा को आजाद कर दे।”
"मैं तेरी बात क्यों मानूं?"
"शराफत के नाते।
“यहां सिर्फ कर्म चलते हैं। शराफत नहीं चलती।” महाकाली की आवाज में हंसी आ गई—“देवा-मिन्नो रुकने को तैयार नहीं। वो जानते हैं कि महाकाली की कैद में है जथूरा, फिर भी वो आगे बढ़ने को तैयार हैं तो मैं पीछे क्यों हटूं?" ।
"देवराज चौहान और मोना चौधरी के ग्रह मिलकर तुझे हरा देंगे।"