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तभी कमला रानी की निगाह देवराज चौहान पर पड़ी। देवराज चौहान उसे ही देख रहा था। कमला रानी ने मुस्कराकर आंख दबा दी। देवराज चौहान ने गहरी सांस ली और मुंह फेर लिया।
'हाथ नहीं रखने देगा। नखरे वाला है।' कमला रानी बड़बड़ा उठी।
तभी मोना चौधरी देवराज चौहान के पास पहुंची।
"मैं सोच रही हूं कि हमें महाकाली की तिलिस्मी पहाड़ी के बारे में खास जानकारी नहीं है।"
“पोतेबाबा खास कुछ नहीं बता पाया।" देवराज चौहान ने कहा।
“ऐसे में हमारे लिए खतरे बढ़ जाएंगे...हमें...।"
“तुम नीलकंठ से तिलिस्मी पहाड़ी के बारे में जानकारी ले सकती हो।”
मोना चौधरी ने देवराज चौहान को देखा। देवराज चौहान की निगाह मोना चौधरी पर थी। “तुमने ठीक कहा। कल पूछंगी नीलकंठ से।”
"वो कैसे आएगा तुम्हारे पास?"
“मन-ही-मन पुकारूंगी तो वो आ जाएगा। यही बात उसने मेरे मन में डाली थी।"
/
देवराज चौहान ने स्नानघर वाली दिशा की तरफ देखकर कहा। “पोतेबाबा कमला रानी और मखानी से कोई बेहद खास बात करके गया है।"
"तुम कैसे कह सकते हो?"
“इस वक्त पोतेबाबा का आना इसी बात की तरफ इशारा करता है।"
“मैं मालूम कैसे करूं दोनों से?"
"कोई फायदा नहीं। वे बताने वाले नहीं।” देवराज चौहान ने इंकार में सिर हिलाया।
- “तुम्हें क्या लगता है कि पोतेबाबा हमसे कुछ छिपा रहा है?" मोना चौधरी बोली। ____
"मैं तो इतना जानता हूं कि वो हमें अपने काम के लिए इस्तेमाल कर रहा है। ये बात जानते हुए भी हम कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि पूर्वजन्म में आने के बाद हम तभी वापस जा सकते हैं, जब यहां का कोई बिगड़ा काम संवार दें।" __
“ये नियम किसने बनाया?"
“मैं नहीं जानता। परंतु हमारी वापसी के दरवाजे तभी खुलेंगे, जब हम जथूरा को आजाद करा लेंगे।"
“माना कि न आजाद करा सके तो?"
"तब के बारे में मैं कुछ नहीं जानता। जो भी हो, हमें सफल होने की पूरी चेष्टा करनी है।”
जगमोहन, सोहनलाल और नानिया सुबह जब उठे तो दिन निकल आया था। कुछ खास छेदों में से होकर सूर्य की किरणें भीतर
आ रही थीं।
“हम देर तक सोए रहे।” जगमोहन बोला। सोहनलाल ने नानिया को देखा। दोनों की नजरें मिलीं।
नानिया मुस्करा पड़ी। उसके चेहरे पर सुबह की खूबसूरती चमक रही थी। ___
“कम-से-कम सुबह के वक्त का तो खयाल कर लो।” जगमोहन कह उठा।
"हम गुड मॉर्निंग कर रहे हैं।” सोहनलाल ने जगमोहन से कहा।
"ऐसे होती है गुड मॉर्निंग।” ।
“तुम भी प्यार करना सीख लो, तो गुडमॉर्निंग करना जान जाओगे।” सोहनलाल मुस्करा पड़ा।
“तुम्हारा दोस्त चिढ़ता क्यों है हमारे प्यार से?" नानिया कह उठी।
"चिढ़ता नहीं है।"
"चिढ़ता है।"
"ये इसकी सामान्य हरकत है, जिसे तुम चिढ़ता महसूस कर लेती हो।” सोहनलाल ने कहा।
“सच में बहुत अजीब है तुम्हारा दोस्त।"
"प्यार के रंग से दूर है, इसलिए ।”
“तुम सीधे हो जाओ सोहनलाल ।” जगमोहन कह उठा—“एक औरत के चक्कर में तुम पूरी तरह बिगड़ गए हो।"
“सुना।” नानिया तीखे स्वर में कह उठी—“कहता है, मैंने तुम्हें बिगाड़ दिया है।"
"तुम इसकी बातों की परवाह मत करो। ये इसी तरह की बातें करता है।"
जगमोहन खड़ा होता कह उठा।
"हमें नहा-धोकर, सोबरा से मिलना है। ताकि उसे बता सकें कि हमने देवराज चौहान को समझाने का फैसला कर लिया है।"
तभी एक युवती ने भीतर प्रवेश किया।
"जाग गए आप लोग। मैं सोबरा के आदेश पर आपको जगाने ही आई थी।” वो बोली। ___
“हम सोबरा से मिलना चाहते हैं।" ____
“अवश्य, परंतु पहले नहा-धोकर कुछ खा लीजिए। उसके बाद ही सोबरा से मुलाकात होगी।" उसने कहा।
“नहाना-खाना जरूरी है क्या?" जगमोहन बोला।
'हाथ नहीं रखने देगा। नखरे वाला है।' कमला रानी बड़बड़ा उठी।
तभी मोना चौधरी देवराज चौहान के पास पहुंची।
"मैं सोच रही हूं कि हमें महाकाली की तिलिस्मी पहाड़ी के बारे में खास जानकारी नहीं है।"
“पोतेबाबा खास कुछ नहीं बता पाया।" देवराज चौहान ने कहा।
“ऐसे में हमारे लिए खतरे बढ़ जाएंगे...हमें...।"
“तुम नीलकंठ से तिलिस्मी पहाड़ी के बारे में जानकारी ले सकती हो।”
मोना चौधरी ने देवराज चौहान को देखा। देवराज चौहान की निगाह मोना चौधरी पर थी। “तुमने ठीक कहा। कल पूछंगी नीलकंठ से।”
"वो कैसे आएगा तुम्हारे पास?"
“मन-ही-मन पुकारूंगी तो वो आ जाएगा। यही बात उसने मेरे मन में डाली थी।"
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देवराज चौहान ने स्नानघर वाली दिशा की तरफ देखकर कहा। “पोतेबाबा कमला रानी और मखानी से कोई बेहद खास बात करके गया है।"
"तुम कैसे कह सकते हो?"
“इस वक्त पोतेबाबा का आना इसी बात की तरफ इशारा करता है।"
“मैं मालूम कैसे करूं दोनों से?"
"कोई फायदा नहीं। वे बताने वाले नहीं।” देवराज चौहान ने इंकार में सिर हिलाया।
- “तुम्हें क्या लगता है कि पोतेबाबा हमसे कुछ छिपा रहा है?" मोना चौधरी बोली। ____
"मैं तो इतना जानता हूं कि वो हमें अपने काम के लिए इस्तेमाल कर रहा है। ये बात जानते हुए भी हम कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि पूर्वजन्म में आने के बाद हम तभी वापस जा सकते हैं, जब यहां का कोई बिगड़ा काम संवार दें।" __
“ये नियम किसने बनाया?"
“मैं नहीं जानता। परंतु हमारी वापसी के दरवाजे तभी खुलेंगे, जब हम जथूरा को आजाद करा लेंगे।"
“माना कि न आजाद करा सके तो?"
"तब के बारे में मैं कुछ नहीं जानता। जो भी हो, हमें सफल होने की पूरी चेष्टा करनी है।”
जगमोहन, सोहनलाल और नानिया सुबह जब उठे तो दिन निकल आया था। कुछ खास छेदों में से होकर सूर्य की किरणें भीतर
आ रही थीं।
“हम देर तक सोए रहे।” जगमोहन बोला। सोहनलाल ने नानिया को देखा। दोनों की नजरें मिलीं।
नानिया मुस्करा पड़ी। उसके चेहरे पर सुबह की खूबसूरती चमक रही थी। ___
“कम-से-कम सुबह के वक्त का तो खयाल कर लो।” जगमोहन कह उठा।
"हम गुड मॉर्निंग कर रहे हैं।” सोहनलाल ने जगमोहन से कहा।
"ऐसे होती है गुड मॉर्निंग।” ।
“तुम भी प्यार करना सीख लो, तो गुडमॉर्निंग करना जान जाओगे।” सोहनलाल मुस्करा पड़ा।
“तुम्हारा दोस्त चिढ़ता क्यों है हमारे प्यार से?" नानिया कह उठी।
"चिढ़ता नहीं है।"
"चिढ़ता है।"
"ये इसकी सामान्य हरकत है, जिसे तुम चिढ़ता महसूस कर लेती हो।” सोहनलाल ने कहा।
“सच में बहुत अजीब है तुम्हारा दोस्त।"
"प्यार के रंग से दूर है, इसलिए ।”
“तुम सीधे हो जाओ सोहनलाल ।” जगमोहन कह उठा—“एक औरत के चक्कर में तुम पूरी तरह बिगड़ गए हो।"
“सुना।” नानिया तीखे स्वर में कह उठी—“कहता है, मैंने तुम्हें बिगाड़ दिया है।"
"तुम इसकी बातों की परवाह मत करो। ये इसी तरह की बातें करता है।"
जगमोहन खड़ा होता कह उठा।
"हमें नहा-धोकर, सोबरा से मिलना है। ताकि उसे बता सकें कि हमने देवराज चौहान को समझाने का फैसला कर लिया है।"
तभी एक युवती ने भीतर प्रवेश किया।
"जाग गए आप लोग। मैं सोबरा के आदेश पर आपको जगाने ही आई थी।” वो बोली। ___
“हम सोबरा से मिलना चाहते हैं।" ____
“अवश्य, परंतु पहले नहा-धोकर कुछ खा लीजिए। उसके बाद ही सोबरा से मुलाकात होगी।" उसने कहा।
“नहाना-खाना जरूरी है क्या?" जगमोहन बोला।