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तभी मखानी पास आ पहुंचा।
“क्या कर रही है इसके साथ?" मखानी की आवाज में नाराजगी के भाव थे।
“भैया से बात कर रही हूं। तुझे क्या?"
“भायो?" बांकेलाल राठौर सकपकाया।
“समझा कर, इसे बहला रही हूं।"
“बहला रही हो मुझे?" मखानी ने आंखें निकालीं।
"तम दोनों को बहला रही हैं।"
“यो तो बोत खतरनाको हौवे । यो तो.... "
तभी बांदा एक कमरे के बंद दरवाजे के सामने रुकता कह उठा।
“इस कमरे में दुल्हन है।" भीतर से ढोलकी की और खिलखिलाने की आवाजें आ रही थीं। “आप लोग एक-एक करके यहां से भीतर जाएंगे और दुल्हन हैं।"
आपको पसंद या ना पसंद करने के बाद दूसरे दरवाजे से बाहर निकाल देगी।" बांदा ने मुस्कराकर सबको देखते हुए कहा।
"तुम खेल क्या खेलना चाहते हो?"
"कोई खेल नहीं देवा। ये तो ब्याह की रस्म निभाई जा रही है।" बांदा ने कहा।
"इस रस्म की आड़ में तुम क्या करना चाहते हो?"
“मैं तो महाकाली का हुक्म बजा रहा हूं।”
"और महाकाली नहीं चाहती कि हम तिलिस्म तोड़कर, जथूरा को आजाद कराएं।"
“वो क्या चाहती है, मैं नहीं जानता। मैं तो उसके आदेशानुसार काम कर रहा हूं।" बांदा ने सबको देखते हए कहा-"कि इस काम में औरतों का कोई काम नहीं, इसलिए वो पहले एक-एक कमरे में जाएंगी, जिन्हें दूसरी तरफ से निकाल दिया जाएगा। उसके बाद मदों की बारी शुरू होगी।"
देवराज चौहान और मोना चौधरी की नजरें मिलीं।
"इसके बाद हम बांदा की कोई बात नहीं मानेंगे।" देवराज चौहान ने सिर हिला दिया। बांदा ने दरवाजा खटखटाया।
अगले ही पल दरवाजा खुला। दरवाजा खोलने वाली बीस बरस की हसीन और खूबसूरत लड़की थी, जिसने आसमानी रंग का सूट पहन रखा था। दुपट्टा ओढ़ रखा था। चुटिया कूल्हों तक लम्बी थी।
"हुक्म?" वो बांदा से बोली।
“युवतियों को एक-एक करके भीतर ले जाओ और दूसरे रास्ते से बाहर निकाल दो।"
“जी।” फिर वो आगे खड़ी नगीना से बोली—“आइए।" नगीना उसके साथ जाने लगी तो मोना चौधरी ने टोका। "पहले मैं जाऊंगी।"
"ठीक है। आप आ जाइए।" आगे बढ़कर मोना चौधरी ने भीतर प्रवेश किया। दरवाजा पुनः बंद हो गया।
भीतर से हंसने-खिलखिलाने की, युवतियों की आवाजें बराबर आ रही थीं।
दो मिनट बाद दरवाजा खुला। वो ही आसमानी सूट वाली युवती थी।
“अब आप आइए।" नगीना कमरे में प्रवेश कर गई।
दरवाजा पुनः बंद हो गया।
"दरवाजा बंद करने की क्या जरूरत है?" महाजन कह उठा।
"ब्याह वाला घर है।" बांदा ने कहा—“सब युवतियां शरारत से भरी पड़ी हैं। इस वक्त इन्हें कुछ भी कहना ठीक नहीं।”
"ये एक-एक को क्यों भीतर ले जा रही है। हमें इकठे भी तो भीतर ले जाया जा सकता है।” तवेरा ने कहा। __
“ये बात तो ये युवतियां ही जानें।” ।
तभी दरवाजा खुला और आसमानी सूट वाली युवती कमला रानी से बोली।
“तुम आओ।"
कमला रानी ने मखानी से कहा। "तुम ब्याह के लिए हां मत करना।”
मखानी ने कमला रानी के कान में कुछ कहा। जिसे सुनकर कमला रानी ने मुस्कराकर कहा। "उसकी तू फिक्र मत कर। तेरे को उसमें नहला दूंगी।"
"ठीक है।” मखानी खुशी से भर उठा—“मैं ब्याह नहीं करूंगा।"
कमला रानी कमरे में चली गई। दरवाजा फिर बंद हो गया।
“छोरे।" बांके रुस्तम राव के कान में बोला।
"बोल बाप।”
"म्हारे को तो दुल्हनो के बदले यो आसमानी कपड़ों वाली ही बोत पसंद आ गयो हो।"
"तेरे को तो सब पसंद आईला बाप।"
“यो उम्रो ही ऐसी हौवे । सबो ही भलो लगे हो।"
“कमला रानी तेरे से क्या बात करेला बाप?"
“दानों फैंको हो अंम पे। ईब वो देखो हो कि म्हारा ब्याह हो जाइयो तो सबो कुछ देने में तैयार होवे वो।"
“सब कुछ क्या बाप?"
"मत पूछो छोरे। म्हारो पूरा ध्यानो दुल्हनो पर हौवे। तन्ने म्हारे कम्पोटिशन में नेई आणो।"
“नेई बाप। इस मामले में आपुन नेई पड़ेला।"
“समझदारो हौवो तम।”
तभी दरवाजा खुला। तवेरा भीतर गई। दरवाजा बंद हो गया।
“यो तो बोतो ही देर लगो हो।"
"हौंसला रखेला बाप।"
"म्हारो दिल बजो हो जोरों से।"
“घबराने का नेई बाप।”
"तंम म्हारे साथो हौवो न?"
“पक्का बाप।”
“थारा ही सहारो हौवे ईब म्हारे को। म्हारे को पसीनो आयो हो।"
“दुल्हन देखने से पहले ही तू पसीने से भीगेला बाप ।”
"म्हारो यो ही आदतो हौवे।”
तभी दरवाजा खुला और उस युवती ने सब पर नजर मारी। बांदा कह उठा।
" सब से पहले कौन जाना चाहेगा?"
“मैं जाऊंगा।” देवराज चौहान बोला।
दरवाजे पर खड़ी आसमानी कपड़े वाली युवती मुस्कराकर बोली।
“आइए। दुल्हन आपका इंतजार कर रही है।" देवराज चौहान खुले दरवाजे से भीतर प्रवेश कर गया। युवती ने दरवाजा बंद कर लिया।
"देवराज चौहानो तो गयो। ईब पीछो वाले दरवाजे से ही बाहरो निकलो हो।”
__ “ये शादीशुदा होईला। तुरंत पीछे वाले दरवाजे से दुल्हन इसे निकाईला।
”
"म्हारे को डर लगो हो कि दुल्हनो देवराज चौहानो को पसंदो न कर लयो।"
"देवराज चौहान शादी को तैयार नेई होईला बाप।”
"म्हारा चांसो खूबो हो।"
“पक्का बाप।”
तभी दरवाजा खुला। वो आसमानी कपड़े वाली युवती दिखी।
बांदा आगे खड़े महाजन से बोला। “तुम जाओ।”
महाजन खुले दरवाजे से भीतर प्रवेश कर गया।
"देवराज चौहानो को पसंद तो न करो हो दुल्हनो?" बांके ने जल्दी पूछा।
युवती उसे देखकर मुस्कराई और दरवाजा बंद कर लिया।
“क्या कर रही है इसके साथ?" मखानी की आवाज में नाराजगी के भाव थे।
“भैया से बात कर रही हूं। तुझे क्या?"
“भायो?" बांकेलाल राठौर सकपकाया।
“समझा कर, इसे बहला रही हूं।"
“बहला रही हो मुझे?" मखानी ने आंखें निकालीं।
"तम दोनों को बहला रही हैं।"
“यो तो बोत खतरनाको हौवे । यो तो.... "
तभी बांदा एक कमरे के बंद दरवाजे के सामने रुकता कह उठा।
“इस कमरे में दुल्हन है।" भीतर से ढोलकी की और खिलखिलाने की आवाजें आ रही थीं। “आप लोग एक-एक करके यहां से भीतर जाएंगे और दुल्हन हैं।"
आपको पसंद या ना पसंद करने के बाद दूसरे दरवाजे से बाहर निकाल देगी।" बांदा ने मुस्कराकर सबको देखते हुए कहा।
"तुम खेल क्या खेलना चाहते हो?"
"कोई खेल नहीं देवा। ये तो ब्याह की रस्म निभाई जा रही है।" बांदा ने कहा।
"इस रस्म की आड़ में तुम क्या करना चाहते हो?"
“मैं तो महाकाली का हुक्म बजा रहा हूं।”
"और महाकाली नहीं चाहती कि हम तिलिस्म तोड़कर, जथूरा को आजाद कराएं।"
“वो क्या चाहती है, मैं नहीं जानता। मैं तो उसके आदेशानुसार काम कर रहा हूं।" बांदा ने सबको देखते हए कहा-"कि इस काम में औरतों का कोई काम नहीं, इसलिए वो पहले एक-एक कमरे में जाएंगी, जिन्हें दूसरी तरफ से निकाल दिया जाएगा। उसके बाद मदों की बारी शुरू होगी।"
देवराज चौहान और मोना चौधरी की नजरें मिलीं।
"इसके बाद हम बांदा की कोई बात नहीं मानेंगे।" देवराज चौहान ने सिर हिला दिया। बांदा ने दरवाजा खटखटाया।
अगले ही पल दरवाजा खुला। दरवाजा खोलने वाली बीस बरस की हसीन और खूबसूरत लड़की थी, जिसने आसमानी रंग का सूट पहन रखा था। दुपट्टा ओढ़ रखा था। चुटिया कूल्हों तक लम्बी थी।
"हुक्म?" वो बांदा से बोली।
“युवतियों को एक-एक करके भीतर ले जाओ और दूसरे रास्ते से बाहर निकाल दो।"
“जी।” फिर वो आगे खड़ी नगीना से बोली—“आइए।" नगीना उसके साथ जाने लगी तो मोना चौधरी ने टोका। "पहले मैं जाऊंगी।"
"ठीक है। आप आ जाइए।" आगे बढ़कर मोना चौधरी ने भीतर प्रवेश किया। दरवाजा पुनः बंद हो गया।
भीतर से हंसने-खिलखिलाने की, युवतियों की आवाजें बराबर आ रही थीं।
दो मिनट बाद दरवाजा खुला। वो ही आसमानी सूट वाली युवती थी।
“अब आप आइए।" नगीना कमरे में प्रवेश कर गई।
दरवाजा पुनः बंद हो गया।
"दरवाजा बंद करने की क्या जरूरत है?" महाजन कह उठा।
"ब्याह वाला घर है।" बांदा ने कहा—“सब युवतियां शरारत से भरी पड़ी हैं। इस वक्त इन्हें कुछ भी कहना ठीक नहीं।”
"ये एक-एक को क्यों भीतर ले जा रही है। हमें इकठे भी तो भीतर ले जाया जा सकता है।” तवेरा ने कहा। __
“ये बात तो ये युवतियां ही जानें।” ।
तभी दरवाजा खुला और आसमानी सूट वाली युवती कमला रानी से बोली।
“तुम आओ।"
कमला रानी ने मखानी से कहा। "तुम ब्याह के लिए हां मत करना।”
मखानी ने कमला रानी के कान में कुछ कहा। जिसे सुनकर कमला रानी ने मुस्कराकर कहा। "उसकी तू फिक्र मत कर। तेरे को उसमें नहला दूंगी।"
"ठीक है।” मखानी खुशी से भर उठा—“मैं ब्याह नहीं करूंगा।"
कमला रानी कमरे में चली गई। दरवाजा फिर बंद हो गया।
“छोरे।" बांके रुस्तम राव के कान में बोला।
"बोल बाप।”
"म्हारे को तो दुल्हनो के बदले यो आसमानी कपड़ों वाली ही बोत पसंद आ गयो हो।"
"तेरे को तो सब पसंद आईला बाप।"
“यो उम्रो ही ऐसी हौवे । सबो ही भलो लगे हो।"
“कमला रानी तेरे से क्या बात करेला बाप?"
“दानों फैंको हो अंम पे। ईब वो देखो हो कि म्हारा ब्याह हो जाइयो तो सबो कुछ देने में तैयार होवे वो।"
“सब कुछ क्या बाप?"
"मत पूछो छोरे। म्हारो पूरा ध्यानो दुल्हनो पर हौवे। तन्ने म्हारे कम्पोटिशन में नेई आणो।"
“नेई बाप। इस मामले में आपुन नेई पड़ेला।"
“समझदारो हौवो तम।”
तभी दरवाजा खुला। तवेरा भीतर गई। दरवाजा बंद हो गया।
“यो तो बोतो ही देर लगो हो।"
"हौंसला रखेला बाप।"
"म्हारो दिल बजो हो जोरों से।"
“घबराने का नेई बाप।”
"तंम म्हारे साथो हौवो न?"
“पक्का बाप।”
“थारा ही सहारो हौवे ईब म्हारे को। म्हारे को पसीनो आयो हो।"
“दुल्हन देखने से पहले ही तू पसीने से भीगेला बाप ।”
"म्हारो यो ही आदतो हौवे।”
तभी दरवाजा खुला और उस युवती ने सब पर नजर मारी। बांदा कह उठा।
" सब से पहले कौन जाना चाहेगा?"
“मैं जाऊंगा।” देवराज चौहान बोला।
दरवाजे पर खड़ी आसमानी कपड़े वाली युवती मुस्कराकर बोली।
“आइए। दुल्हन आपका इंतजार कर रही है।" देवराज चौहान खुले दरवाजे से भीतर प्रवेश कर गया। युवती ने दरवाजा बंद कर लिया।
"देवराज चौहानो तो गयो। ईब पीछो वाले दरवाजे से ही बाहरो निकलो हो।”
__ “ये शादीशुदा होईला। तुरंत पीछे वाले दरवाजे से दुल्हन इसे निकाईला।
”
"म्हारे को डर लगो हो कि दुल्हनो देवराज चौहानो को पसंदो न कर लयो।"
"देवराज चौहान शादी को तैयार नेई होईला बाप।”
"म्हारा चांसो खूबो हो।"
“पक्का बाप।”
तभी दरवाजा खुला। वो आसमानी कपड़े वाली युवती दिखी।
बांदा आगे खड़े महाजन से बोला। “तुम जाओ।”
महाजन खुले दरवाजे से भीतर प्रवेश कर गया।
"देवराज चौहानो को पसंद तो न करो हो दुल्हनो?" बांके ने जल्दी पूछा।
युवती उसे देखकर मुस्कराई और दरवाजा बंद कर लिया।