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मेरी कमसिन जवानी की आग complete

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मुझे सारी बातें बहुत सेक्सी और मजेदार लग रही थीं. मेरा जोश और बढ़ रहा था मैंने मनोहर को अपनी बांहों में कस के पकड़ लिया और बोली- हां मेरे राजा, चलूंगी तेरे साथ, जहां तू बोलेगा, तू मुझे अपनी बीवी आज से अभी से मान लें, तू बहुत हरामी है मादरचोद मनोहर क्या मस्त चोदता है.. आह मनोहर अपना पूरा लौड़ा अन्दर मेरी चूत में घुसा दे और घुसा आहहहह वोहहहह मनोहर मुझे बिल्कुल तेरे जैसे लंड की जरूरत थी, तुम तीनों बहुत मस्त हो.. तुम तीनों साले कुत्तों.. मेरे को चोद चोद के छिनाल बना दो.. हरामियों क्या गजब की चुदाई करते हो.

चाचा बोले- मेरा लौड़ा अब अकड़ रहा है इस संध्या कुतिया को और चोदना था, पर अब लगता है मैं खाली होने वाला हूं. मेरा लंड रस निकलने ही वाला है, तुम दोनों जवान हो, इसे चोदते रहना और चोद चोद के ऐसा बना दो कि संध्या बिना हम लोगों से चुदवाए रह ही नहीं पाए.मैं बोली- चाचा पूरा डालो गांड में और जमकर चोदो, अभी मत निकालना चाचा.. मेरा बहुत मन कर रहा है. मुझे चोद चोद कर बेहोश कर दो.

चाचा ने एकदम से मेरे दोनों मम्मों को पीछे से पकड़ कर कसके दबाने लगे. चाचा अकड़ कर मेरी गांड में जोर-जोर से लंड घुसाने लगे. मेरे मुँह से ‘उंहहह ऊंहहह ओह..’ की आवाज अपने आप निकलने लगी.

चाचा मुझसे बोले- अब मेरा लंड रस निकल रहा है.. तेरे कहां डाल दूं संध्या.. तू बता?मैं बोली- मुझे कुछ नहीं पता.. जहां तेरे को ठीक लगे चाचा.. और जहां ज्यादा मस्त लगे.. वहीं अपना लंड रस भर दे.

तभी चाचा मेरी गांड में जोर से अपना गरम गरम लंड का रस डालने लगे. मेरी गांड के अन्दर गरम रस लंड का अहसास मैं बता नहीं सकती, पर बहुत ही मस्त लग रहा था. मैं बिल्कुल मदहोश हो गई और चाचा खाली होकर थक कर बेहोश की तरह मेरी पीठ से लिपट गए.

चाचा हांफते हुए बोले- आह.. साली तू बहुत बड़ी रंडी है संध्या.

वे मेरी पीठ पर पांच मिनट तक लिपटे पड़े रहे. फिर मेरी पीठ को चूमते हुए उठकर मुझसे अलग हो गए.

चाचा बोले कि पिछले पचास साठ वर्षों में मुझे इतना मजा कभी नहीं आया, तू लाजवाब है संध्या. इतनी खूबसूरत और इतनी सेक्सी लड़की मैंने कहीं नहीं देखी.दिनेश को चाचा बोले- दिनेश तू संध्या की गांड मार ले.. गांड में अपना लंड डाल कर इसकी गांड मार.. संध्या से मस्त गांड इस दुनिया में किसी की नहीं हो सकती. तेरी लाइफ बन जाएगी दिनेश.. अपने लंड से ये मौका मत जाने दे. जिसने संध्या की गांड सिर्फ देख ली उससे सौभाग्यशाली मर्द कोई नहीं.. और जिसको संध्या की गांड चोदने को मिल गई, समझो उसका जीवन सफल हो गया.

इतना सुनते ही दिनेश ने मेरे मुँह से अपना लंड बाहर निकाल कर सीधे उठकर मेरे पीछे पीठ की तरफ आके मेरे से लिपट गया और उसने अपना लंड मेरे कूल्हों को फैला कर गांड के छेद पर रख दिया.

चाचा दो मिनट पहले ही मेरी गांड में अपना लंड रस खाली किया था, वही चाचा के लंड रस की चिकनाहट थी. दिनेश का लंड एक मिनट के अन्दर पूरा अन्दर मेरी खुली हुई गांड में चला गया. फिर भी दिनेश और ताकत लगा रहा था कि उसका पूरा लौड़ा मेरी गांड में घुस जाता.

इधर मेरी चूत में लंड लगाए मनोहर बोला कि संध्या तुम बहुत बड़ी छिनाल रंडी बनोगी और यह धंधा तुम्हें बहुत सूट करेगा.. तुम बहुत बड़ी वाली चुद्दकड़ लड़की हो. आज से तू मेरी बीवी है मैं तेरी हर दिन बहुत जोर जोर से चुदाई किया करूंगा. फिर अपने दोस्तों से भी चुदवाया करूंगा.

ये कहते हुए मनोहर मेरी गर्दन पकड़ कर जोर जोर से मुझे चोदने लगा. वो लगातार मेरी चूत पर धक्के मार रहा था. तभी दिनेश पीछे अपना पूरा लंड गांड में अन्दर तक डाल दिया. लंड रस की चिकनाहट के कारण पूरा का पूरा लंड अन्दर गांड में बड़े ही मस्त तरीके से घुस रहा था. मेरी गांड से फच फच की आवाज भी आने लगी.

दिनेश मुझसे बोला- तू बहुत मस्त रंडी है.. इतनी चुदासी है तू संध्या फिर रोज बिना चुदवाये तू कैसे रह पाती होगी.मैं बोली- तू सच कह रहा है, मेरा दिन रात चुदवाने का मन करता रहता है, लगता है कि कोई भी मर्द आये और बस मेरे जिस्म को मसलने लगे और मेरे मुँह में अपना लंड डाल दे, फिर चूत का और गांड को इतना चोदे कि मुझे कुछ होश नहीं रहे. ये सब अभी कुछ महीने से ऐसा लगने लगा है, जब से कमलेश सर ने सेक्सी कहानियां पढ़ने के लिए वो पुस्तकें और मैगज़ीन मुझे दी हैं.

मनोहर बोला- तेरा कमलेश सर, वही ट्यूशन वाला.. भोसड़ी वाले ने बहुत सही काम किया है. तू संध्या बिल्कुल चिंता मत कर, हम तुझे मौका मिलते ही चोद दिया करेंगे.. बता ठीक है चुदवायेगी न रोज?मैं बोली- साले कुत्तो, तुम बहुत मस्त चोदते हो.. तेरी बीवी जैसी हूं मनोहर और इन दोनों चाचा और दिनेश की रखैल बन गई हूं. मुझे ऐसे ही रोज चोदना और मेरी चूत और गांड में अपने ये मस्त लंड डाले ही रहना. मैं तुम तीनों से रोज चुदवाऊंगी और जहां बोलोगे, वहां चुदवाने चले चलूंगी

मैं इस वक्त ये जो भी बोल रही थी, बिल्कुल मदहोशी में बोले जा रही थी. मुझे कुछ होश और समझ नहीं थी कि मैं क्या बोल रही हूं.

मेरी बातें सुनकर सुनकर मनोहर और दिनेश फुल एक्साइटेड हो गए. मनोहर मेरे होंठों को अपने होंठों और जीभ से रगड़ने लगा और चूसने लगा.

तभी दिनेश पीछे मेरी गांड में तेजी से अपना लंड चलाने लगा. अन्दर बाहर करने लगा और जमके मेरी गांड चुदाई करने लगा. मेरी गांड से फच फच फच की आवाज रूम में गूंजने लगीं. दिनेश ने मेरी कमर को पकड़ा तो मैंने अपनी कमर और उठा दी. इससे मेरी गांड ऊपर हो गई, तो दिनेश मेरी गांड में और जोर से धक्के मारने लगा.

अब गांड में दिनेश का लंड जड़ तक पहुंचने लगा, जिससे मैं बिल्कुल पागल हो गई और चिल्लाने लगी- आह.. जोर जोर से चोद साले.. और अन्दर तक डाल मादरचोद दिनेश.. अपना लंड पेल.. फाड़ दे मेरी गांड मादरचोद और घुसा साले कुत्ते.. तेरी छिनाल बीवी हूं.. चोद कमीने जितना चोद सकता है…

वो लंड ठोकने लगा, मैं भी अपनी कमर उठा कर बोली- दिनेश आह.. और डाल बहुत मजा आ रहा है तेरा लंड बहुत मस्त है और मेरी गांड फट जाए ऐसे चोद…

ऐसा मैं जब कहने लगी तो दिनेश और जोश में आकर मेरी गांड में अपनी पूरी ताकत से लंड डालकर बोला- तू साली रंडी है एक नंबर की.. तेरे को आज चोद चोद कर मैं तेरी गांड का भुर्ता बना दूंगा.

तभी मैं उससे बोली- हां दिनेश ऐसे ही जमके चोद.. तभी मेरी प्यास बुझेगी और जोर से अपनी रखैल को चोद कुत्ते.. तेरा लौड़ा बहुत मस्त है, लगता है बस तू मुझे चोदता ही रहे उंहहह ऊंहहह उंहहह दिनेश आहहहह.. मेरे कुत्तों और चोदो.. मेरी गांड को यूं ही रगड़ कर हर पल अपने लंड से तू चोदते रहना दिनेश मुझे बहुत मजा आ रहा है.

बस मैं अपने मुँह ऐसी आवाजें निकाल रही थी. इधर मेरी चूत में मनोहर काफी देर से अपना लंड डाले जमके मेरी चुदाई कर रहा था. पर अब उसने अपने लंड की स्पीड एकदम से बढ़ा दिया और मेरे मम्मों को पूरी ताकत से दबाता और चूसता हुआ लंड पेले जा रहा था.

इसके साथ वो मुझे इतनी गंदी गंदी गालियां और बातें बोल रहा था कि मेरे होश और जोश दोनों में बिल्कुल आग लग रही थी.

मनोहर बोला- संध्या तू बहुत बड़ी रंडी है तेरी चूत बिल्कुल जन्नत से भी ज्यादा मजे दे रही है, क्या मस्त गर्माहट तेरी चूत में है.. तुझे तो बिल्कुल रंडी की तरह 5-10 लंड एक साथ चोदें, तब तेरी प्यास बुझेगी.

वो मेरे होंठों को अपने होंठों से चाटने लगा और जोर जोर से धक्का लगाने लगा.

मेरी चुदाई की कहानी वासना से सराबोर कर देने वाली है, आपको जरूर पसंद आई होगी

कहानी जारी रहेगी

 
अब तक की इस चुदाई की कहानी में आपने पढ़ा कि चाचा ने मेरी गांड में अपना माल छोड़ दिया था और उनकी जगह अब दिनेश ने ले ली थी. अब दिनेश मेरी गांड मार रहा था और मनोहर मेरी चूत में अपना मूसल पेले हुए मुझे धकापेल चोदे जा रहा था.

अब आगे..

मनोहर बोला कि संध्या लगता है कि अब मैं झड़ने वाला हूं.. मेरे लंड का रस बस निकलने वाला है.तभी मनोहर का शरीर एकदम से अकड़ गया. वो बहुत तेजी से मेरी चूत में धक्का मारने लगा. मेरी चूत से बहुत तेज फच फच फच की आवाज आने लगी.

मनोहर पूरा अपना लंड निकाल कर मेरी चूत में जड़ तक ठोक रहा था. मुझे अब जन्नत नजर आने लगी. बेहद मजा आ रहा था.उसी समय मुझे न जाने कैसा महसूस होने लगा और मैंने भी मनोहर को जोर से पकड़ के अपनी बांहों में पूरी ताकत से चिपका कर कस लिया. अपनी जीभ से मनोहर का सीना और बाकी का बदन भी चाटने लगी.

मुझे ऐसा लगा जैसे मैं हवा में उड़ रही हूं, मैं मनोहर से बोली- यार मुझे ये क्या हो रहा है.. कुछ समझ नहीं है मुझे, अब मुझे बस चोद चोद के पागल कर दे.. आह और चोद साले बहुत जोर से मुझे कुछ-कुछ हो रहा है..मेरा पूरा जिस्म अब मचल के अकड़ने लगा, मुझे कुछ समझ भी नहीं आया और मेरी चूत के अन्दर से चूत रस की गरम गरम पिचकारी निकल पड़ी.

मनोहर बोला- संध्या तेरा काम तो हो गया.. आह.. बेहद गर्म है तेरा चूत रस और इतना ज्यादा निकल रहा है कि लगता है.. मेरा लंड डूब जाएगा.

साधारणतया लड़कियों की चूत से इतना ज्यादा और इतना गर्म चूतरस नहीं निकलता है. मगर वाकयी मेरा चूत रस कुछ ज्यादा ही टपकने लगा था.

मनोहर बोले जा रहा था- लगता है संध्या तू बहुत ही ज्यादा सेक्सी और गर्म लड़की है.. कुछ स्पेशल बात है तुझमें, आह.. ‌संध्या अब तो तू झड़ गई है.. तेरी चूत से बहुत मस्त गरम रस निकल गया.. आज तेरी प्यास बुझ गई.. तू अब बिल्कुल तृप्त हो गई..

मैं भी पहले से बिल्कुल जोश में थी, सो मनोहर से ऐसे लिपट गई, जैसे मेरे जिस्म में और मनोहर के शरीर में कोई अंतर ही न हो. ऐसे मदहोश होकर मैं अपने होश खो बैठी, जैसे बिल्कुल बेहोश हो गई हूं.

तभी दिनेश मेरे पीछे मेरी गांड को और जोर से चोदने लगा और बोला- रंडी साली संध्या तू बहुत मस्त चुदवाती है.. आहहहह वाउउउ क्या तो तेरी गांड है.. चाचा सच बोल रहे थे कि जिसने तेरी गांड में लंड डाल लिया उसका जीवन धन्य हो जाएगा.

मैं मस्त हवा में उड़े जा रही थी मेरी चूत और गांड के दोनों छेद लंड से चुदाई कर रहे थे. तभी दिनेश मेरे बालों को पकड़कर बोला कि अब मेरा भी काम तमाम होने वाला है संध्या.. आह ले..वो जोर से मेरे बालों की चोटी खींच कर मुझे पीछे से कमर उठा-उठा कर जोर जोर से लंड अपना डालकर चोदने लगा, साथ में गंदी गाली बकने लगा.

मेरी गांड में भी कुछ-कुछ अजीब सा होने लगा था. करीब 5 मिनट बाद दिनेश बोला- आह ले.. मेरे लंड का रस.. मेरा आ रहा है.. आह.. मैं बस झड़ने ही वाला हूं, तू बता संध्या कहां डालूं?मैं बोली- आह.. मुझे नहीं पता दिनेश जहां अच्छा लगे डाल दे.. बस मुझे बिल्कुल पागल कर दे.

मेरे को कुछ नहीं समझ आ रहा था, तभी दिनेश अपना लंड गांड से निकाल कर मेरे मुँह तरफ आकर मेरे मुँह में लंड डाल दिया और बोला- ये ले संध्या, लंड का जूस पी.

जैसे ही मुँह में लंड पूरा घुसा कि एकदम गरम गरम लंड रस की पिचकारी मेरे अन्दर तक घुस गई और उसे मैं ना चाहते हुए भी पी गई. दिनेश का लंड रस बहुत गर्म रस था और एक अजीब सा टेस्ट लगा, पर मस्त था. मैं पूरा का पूरा रस निचोड़ कर पी गई.

अब मेरे मुँह में ही दिनेश का लंड छोटा हो गया, मतलब कि दिनेश झड़ कर पूरा खाली हो गया.

इसके बाद मेरे मुँह से दिनेश ने लंड निकाल लिया और बोला- कैसा टेस्ट लगा मेरे लंड रस का?मैं चुत में लंड का मजा लेते हुए बोली- आह बहुत मस्त है दिनेश.. बहुत मजा आया.. बहुत टेस्टी मलाई थी.

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था टेस्ट के लिए क्या बोलूं.

दिनेश उठ कर कपड़े पहनकर वहीं एक किनारे बैठ गया. इतने में मनोहर जोर से मेरी कमर को उठाया और मेरी चूत में पूरा लंड अन्दर घुसा कर बोला- संध्या तेरी चूत और तू बहुत ही मस्त है.

मनोहर करीब 5 से 7 मिनट तक मेरी चूत को जमकर रगड़कर चोदता रहा. वो गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था.तभी चाचा बोले- मनोहर क्या खाता है मादरचोद तू.. तेरा स्टेमिना तो घोड़े जैसा है.. संध्या को तेरे जैसे मर्द की जरूरत है.

मैं एकदम पसीने से लथपथ हो गई और मनोहर के शरीर से तो पसीना बह चला. मेरे मुँह से जोर जोर से ‘उंहहह ऊंह उम्म्ह… अहह… हय… याह… वोहहह आहहहह मेरे कुत्ते मेरे राजा ऊंहहह..’ अपने आप निकल रहा था.

 
तभी मनोहर बोला- ओह मेरी रंडी संध्या, मेरे लंड का काम तमाम होने वाला है.

इतना बोला ही था कि मनोहर के लंड से गरम गरम पिचकारी लंड रस की निकलना शुरू हो गई. मेरी चूत में बहुत गरम गरम लंड रस अन्दर घुसने लगा. मैंने मनोहर को कस के पकड़ लिया. उसने भी मुझे पूरी ताकत से बांहों में अपने जकड़ लिया और मेरे दूध को भी अपने मुँह में भर लिया.

वो बोला- तुम संध्या बहुत मस्त माल हो, आज से संध्या, तू मेरी बीवी हो गई हो है. ऐसा लगता है मुझे कि मैं एक दिन भी बिना तुझे चोदे अब नहीं रह पाऊंगा. मैं सब छोड़ दूंगा, पर तुझे नहीं छोड़ूंगा, क्या गजब चुदवाती है तू, तेरी चूत में लंड लगाते ही ऐसा लगता है, जैसे पागल हो जाऊंगा.. ऐसी सेक्स की मदहोशी आती है. तेरे जैसी चुदाई कोई नहीं करवाती साली संध्या.. तू लाजवाब है.

मनोहर ने बहुत जोर जोर से पूरा अन्दर चूत में घुसा के अपने लंड रस का लावा भर दिया. इस तरह पूरा खाली होकर मेरे ऊपर मनोहर बेहोश की तरह लेट गया, जैसे उसे कुछ होश ही ना हो.

दो पल बाद उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मुझे बांहों में भर कर बोला- तू बहुत कमाल की है, आज तक संध्या तेरे जैसी लड़की के बारे में सुना भी नहीं.. देखा भी नहीं.. तू बहुत ही मस्त एकदम अलमस्त माल है.. दुनिया की सबसे सेक्सी और हॉट लड़की है तू संध्या, तुझे एक बार जो देख लेगा उसे बस जिंदगी में सिर्फ तुम मिल जाओ, उसकी यही ख्वाहिश होगी और जिसने तुझे चोद लिया.. समझो उसका जीवन सफल हो गया. हम तीनों बहुत किस्मत वाले हैं, जो इस तरह तुझे देखा और सबसे बड़ी बात कि हम तीनों ने तुझे चोदा.. आज का दिन हम तीनों का सबसे अच्छा दिन है. संध्या अब तू बता तुझे कैसा लगा?

मैं हांफते हुए बोली- मुझे अभी भी कुछ होश नहीं, बिल्कुल पता नहीं कि क्या कहूं कैसे बताऊं? बस आज का ये दिन ये पल कभी नहीं भूलूंगी, बहुत ही मस्त बहुत ही सेक्सी टाइम रहा, मुझे बेइंतहा मजा आया. अभी ऐसा लग रहा है जैसे मेरे बदन की पूरी गर्मी उतर गई, मेरे जिस्म की हर ख्वाहिश पूरी हो गई, मैं बहुत ही कम उम्र की लड़की हूं. अभी स्कूल में पढ़ती हूं, पर अभी से मेरे जिस्म को मर्दों की जरूरत होने लगी है. ये सभी लड़कियों के साथ होता है या मुझमें कुछ स्पेशल है.. मुझे नहीं मालूम.

चाचा बोले- देखो संध्या तुम्हारा फिगर एक नंबर का है, भले ही उम्र कम है तो क्या हुआ, एज से कुछ नहीं होता अभी तुमने एक साथ तीन तीन वो भी बड़े बड़े लंड अपने तीनों होल में डलवाये और पूरी संतुष्ट भी हुईं. तुमने हम तीनों को भी पूरी तरह से संतुष्ट किया है. तुम बहुत स्पेशल हो.मैं बोली- चाचा अब मैं बहुत थक गई हूं और बिल्कुल शांत होकर लेटे रहना चाहती हूं.

तब चाचा अपने चेलों से बोले कि उठो जल्दी और यहां से निकल लो, अपना काम हो गया और संध्या भी तृप्त हो गई. अब जल्दी उठो कपड़े पहनो और निकलो, कहीं कोई आ गया तो दिक्कत न हो जाए.तीनों जल्दी जल्दी उठे और कपड़े पहन कर मुझसे बोले- चलो संध्या फिर मौका मिलते ही तुझे मिलेंगे.

मैं बोली- चाचा, बाहर वह मेरा भाई लालजी और बहन का बेटा होगा, उसे अन्दर भेज देना, पता नहीं वो दोनों बेवकूफ कहां हैं?चाचा बोले- ठीक है.. तू भी संध्या उठकर यहां सब साफ कर ले और जो रजाई में थोड़े खून के धब्बे हैं, इनको धो दे और अपने बदन को साफ कर जल्दी, कहीं कोई तेरे घर के ना आ जाएं.मैं बोली- ठीक है.

यह कहकर चाचा, दिनेश और मनोहर तीनों लोग घर से निकल गए. मैं उठी और रजाई में लगे खून के धब्बे पानी से साफ किए. मैंने एक गीले कपड़े से पूरी चूत को साफ किया और पीछे गांड को भी अच्छे से साफ कर लिया. मैंने एक स्कर्ट और टॉप पहन लिया. अब मैं तखत पर लेट गई.

तभी मेरी बहन का बेटा पीयूष और मौसी का लड़का लालजी अन्दर आ गए.अन्दर आते ही लालजी बोला- संध्या बता क्या हुआ तेरे साथ सच सच बता?

मैं बोली कि तुम दोनों बेवकूफों की बेवकूफी के कारण आज मुझे बहुत बहुत मजा आया, आज पहली बार मैंने अपने सारे अरमान जो अन्दर आ रहे थे, वह अरमान पूरे कर लिए.लालजी बोला- क्यों क्या हुआ ऐसा संध्या?मैं बोली- उन तीनों ने मुझे आज जम के चोदा है. अब तुमसे क्या छुपाना. लालजी उन तीनों ने इतना चोदा और ऐसे चोदा कि मुझसे सच में चलते नहीं बन रहा है.

ये कह कर जैसे ही मैं खड़ी हुई पानी पीने के लिए और चलने की कोशिश की तो मेरी चूत में बहुत जलन और दर्द होने लगा. चलते भी नहीं बन रहा था, ऐसे ही तेज़ दर्द गांड में हुआ तो मैं बोली कि कुत्तों ने कैसे चोदा कि उस समय बहुत मजा आया और अब दर्द हो रहा है.

लालजी बोला- अब हम लोगों के लिए तुम क्या बोल रही हो संध्या?तो मैं बोली- अभी कुछ नहीं… मुझे चुपचाप लेटे रहने दो और पीयूष, तुम अपने दोस्त को मना कर दो कि वो नहीं आए. अभी मेरे होश नहीं बहुत दर्द हो रहा है, फिर कभी देखूंगी.. शायद कल परसों में यह गुड्डा गुड्डी की शादी का खेल खेलूंगी. अभी आज बिल्कुल होश नहीं है.

तब लालजी और पीयूष बोले- ठीक है, ऐसा ही ठीक है.. आज तुम आराम कर लो.. पर यह बता दो कि तुम्हें मजा आया कि नहीं?तो मैं बोली- तुम दोनों को थैंक्स तुम दोनों की वजह से मुझे बहुत मजा मिला.. न तुम लोगों के साथ नंगे लेटे पाते.. न वो लोग मुझे चोदते. परंतु जितना मजा मिला, उतना ही दर्द भी हो रहा है. पर कोई बात नहीं जो एंजॉयमेंट मेरा हुआ, उसके लिए इससे ज्यादा भी दर्द मुझे हो तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता है.

वो दोनों बोले- ठीक है संध्या तुम्हें तो मजा मिल गया.. अब हम लोग फिर अपना लंड हिला कर ही काम चला लेते हैं.इतना कहकर वह दोनों चले गए और मैं लेटी रही.

थोड़ी देर में मम्मी और मेरा भाई घर आ गए. मुझे लेटा देखकर मम्मी पूछने लगीं कि संध्या तुझे क्या हुआ.. क्यों लेटी है… खाना नहीं बनाएगी क्या?मैं बोली- मम्मी मैं पानी भरने गई तो फिसल गई थी, मुझे हल्की चोट लगी है. मम्मी ऐसा लगता है कि कमर के पास हल्का मोच आ गई है, मुझे दर्द हो रहा है इसलिए लेटी हूं.मम्मी बोलीं- ठीक है ज्यादा तो नहीं लगी?मैं बोली- नहीं, पर अभी नॉर्मल नहीं हूं.मम्मी बोलीं- तू आराम कर ले संध्या.. कोई बात नहीं.. खाना मैं बना लूँगी.

मैं आराम करने लगी, मुझसे 3 दिन तक ठीक से चलते नहीं बना था और हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था. फिर 3 दिन बाद मैं ठीक हुई थी.

यह बात जो मैंने लिखी है, इसमें एक भी शब्द झूठ नहीं है.. पूरा का पूरा एक-एक शब्द बिल्कुल सही लिखा है. मुझे अपनी कसम है और मम्मी की कसम है अगर इसमें से लिखा एक शब्द भी झूठ हो. ऐसा सभी कहते हैं कि एक बार मुझे जो भी मर्द देख लेगा वह बिना मुझसे मिले रह नहीं पायेगा. जब तक मुझसे वो मिल नहीं लेगा, उसको कहीं सुकून नहीं मिलेगा. उसकी हर ख्वाइश और हर सपने में सिर्फ मैं ही रहूंगी, ऐसा सभी कहते हैं.

अब मुझ में ऐसी क्या बात है, मैं खुद भी नहीं जानती!

यह बात पूरी तरह से सच है कि जितने भी मर्द मुझे देखते हैं, वो चाहे कितने भी क्लोज रिलेटिव हों, चाहे जितने बूढ़े हों सभी के सभी.. बस मुझे पाना चाहते हैं, मेरे साथ सोना चाहते हैं.

यही सच्चाई है. मेरी यह सच्ची कहानी आपको कैसी लगी.

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कहानी जारी रहेगी

 
बात उस समय की है जब नवंबर महीने में मेरी मौसी की बेटी की शादी होने वाली थी, मेरी मौसी मम्मी को हर दिन चार बार फोन लगाया करती थी, कि जल्दी से जल्दी मेरे पास आ जाओ यहां कोई काम करने वाला नहीं है.तभी मम्मी मुझे लेकर शादी के 15 दिन पहले मौसी के गांव मनका चली गई, वहां शादी का माहौल था पर मेरे लिए वहां कई लोग अजनबी थे जिन्हें पहली बार देख रही थी.

परंतु सभी लोग मेरी मम्मी को बहुत अच्छे से जानते थे, मुझे देखकर बोलते थे कि यह तुम्हारी बेटी बड़ी हो गई.तब मम्मी कहती- यह अभी तो छोटी है. बस यह बड़ी दिखने लगी है.

मौसी के घर में जितने मर्द थे, सभी मेरी तरफ एकटक देखते रहते, कोई मेरा नाम पूछता, कोई मुझे बस घूरकर देखता ही रहता, वहां बूढ़े या जवान सब … पता नहीं क्यों मेरी तरफ एक अजीब सी नजर से मुझे देखते थे, मैं भी सोचूं कि पता नहीं ऐसी क्या बात है मुझमें जो सभी बस घूरे ही जाते हैं जैसे कभी लड़की ही ना देखी हो.पर फिर मैंने सोचा कि जाने दो जैसे भी हैं.

वहां मेरे मौसी का बेटा था उसका नाम लालजी और उसके सगे ताऊ जी का बेटा अंकित था, वे दोनों घर का पूरा काम किया करते थे, दोनों ही मेरे रिश्ते में भाई लगते थे, अंकित मुझसे दो-तीन साल उम्र में बड़ा था, जबकि लालजी मुझ से 1 साल छोटा था, मैं लालजी से बहुत घुली मिली थी और अंकित से बस एक दो बार छोटे में मिली थी, इसलिए उससे ज्यादा बात नहीं करती थी.

दो दिन बाद मम्मी ने कहा- सोनू, खाना तू परोसा कर आज से!तो मैं खाना परोस रही थी, जैसे ही झुक के खाना देने लगी तब मैंने देखा कि वहां बैठे सभी मर्द, एक दो को छोड़कर, सब मेरी तरफ घूरे जा रहे थे.

जब मैंने इसका कारण देखा तो समझ आया कि मैंने जो टॉप पहना था वह झुकने पर गले से बिल्कुल नीचे तरफ पूरा खुल जाता था जिससे मेरे पूरे बूब्स सीधे नजर आते थे.

मैं अंकित को जब दोबारा दाल देने गई तो वह बोला- बहुत मस्त हैं!मैं देखने लगी तो पाया कि वह एकदम मेरे बूब्स तरफ देखे जा रहा था. तो मैं शरमा कर खड़ी हो गई पर उसकी नजरें अब बिल्कुल अलग ही तरह से मेरे बदन पर थी.

उसके बाद मुझे उसी दिन शाम को दरवाजे पर मैं खड़ी थी, अंकित कहीं बाहर से आया, आस पास कोई नहीं था तो वो वहीं खड़ा हो गया और इतनी बदतमीजी से बात की कि मैं बता नहीं सकती.वो बोला- संध्या तू बहुत ही खूबसूरत है. बहुत हाट एन्ड सेक्सी लुक है तेरा! तुझे सोच कर ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है और तुझे देख लेता हूं तो कन्ट्रोल ही नहीं होता. लगता है तुझे सीधे चोद दूं, और कोई भी मर्द जाति का तुझे देख लेगा उसका तुझे चोदने का मन करेगा ही! संध्या चल दे ही दे … बुरा मत मानना जब से तू आई है मेरा बुरा हाल है!

मैं बोली- तुम बहुत कमीने हो! मैं तुम्हारी मम्मी और पापा मतलब मौसी और मौसा को यह सब बता दूंगी कि तू ऐसी गन्दी बात मुझसे करता है. मैं तेरी छोटी बहन लगती हूं रिश्ते में, तू मेरे बारे में ऐसा सोचता है.अंकित बोला- तू जा अभी बता दे सबसे कि मैं तुमसे चोदने को मांगता हूं, जा अभी बता संध्या!मैं बोली- बताऊंगी ही!और वहां से चली गई.

उस समय उसके पापा मम्मी नहीं मिले, एक घंटे के बाद लगभग जब अंकित के पापा मम्मी मुझे दिखे, मैंने सोचा कि बता दूं अंकित की बदतमीजी!लेकिन उनके सामने जैसे ही गई, मेरी हिम्मत टूट गई, सोचने लगी कि क्या बताऊं कि मुझे अंकित चोदने को बोलता है?मैं टाल गयी.

उसकी मम्मी मुझे बोली- सोनू तू तो बड़ी दिखने लगी है पढ़ाई ठीक चल रही है तेरी?मैं बोली- जी मौसी जी!और चली गई.

वो फिर रात के भोजन के समय एक मिनट के लिए सामने आया. वहीं पास में कुछ लोग और खड़े थे, फिर भी अंकित पास आकर बोला- संध्या मान जा और चुदाई करवा ले! मुझसे अच्छा लन्ड और कहीं नहीं पायेगी.फिर मुझे गुस्सा आया पर कुछ नहीं बोली.वो बोला- तू किसी से कुछ नहीं बतायेगी क्योंकि तू अंदर से चुदासी है, मैं तुझे चोदूंगा जरूर संध्या … चाहे कुछ भी हो जाये!इतना बोल कर चला गया.

मैं एकदम उसी की बात सोच रही थी बिस्तर पर लेट कर कि क्या क्या बोल रहा था और उसकी बात सोचकर सच में जाने कैसे गर्म हो गई और मेरा मन करने लगा कि काश अभी आकर अंकित मुझे मसल दे; मुझे अपनी बांहों में भर कर रगड़ डाले!ऐसा सोचते सोचते मेरी पैंटी गीली हो गई.

सुबह सुबह करीब 5:00 बजे मैं मूतने के लिए टॉयलेट गई, जैसे ही मैं अंदर घुसी और टायलेट का दरवाजा बंद करने लगी कि थोड़ा धक्का सा लगा और बाथरूम के अन्दर अंकित घुस गया और बोला- मुझे बहुत जोर से लगी है, पहले मैं करूंगा!और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और खिटकिल्ली लगा कर बंद कर दिया.

 
मैं बोली- मुझे बाहर जाने दो, तुम्हीं कर लो पहले! गेट खोलो!और मैं गेट खोलने को बढ़ी तो अंकित ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला- मरवायेगी क्या? बाहर दो तीन लोग खड़े हैं लाइन में और आवाज भी जोर से मत कर! वरना लोग तो यही सोचेंगे कि तू मुझसे बाथरूम में चुदवा रही थी, कुछ अभी करवायी भी नहीं और सूखा इल्ज़ाम लगवा देगी.

अंकित का इतना कहना हुआ कि किसी ने बाहर से दरवाजा खटखटाया और बोला- कौन है जरा जल्दी करो?अंदर से अंकित ने बोला- मैं अंकित हूं! अभी अभी अंदर आया हूं मुझे समय लगता है, या तो इंतजार करिए नहीं तो डब्बा लेकर मैदान चले जाओ!इतना कहकर अंकित धीमे से बोला- मेरे पीछे ही एक दो लोग आ रहे थे. अगर बाहर गयी तो आज तू खुद भी फंसेगी और मुझे भी फंसायेगी. इसलिए तू मेरी बात मान और कुछ करके ही बदनाम होते हैं.

बहुत ही जोर से सू-सू लगी थी मुझे और बहुत तेजी से प्रेशर बना था. मुझे अंकित बोला- शरमा मत, तू अपना काम कर ले, मैं पीछे घूम जाता हूं.मुझे शर्म आ रही थी तो अंकित बोला- मजबूरी में सब करना पड़ता है, ये एक ऐसी चीज है कि संध्या इसे तुम रोक नहीं सकती.सच बोला ये बात अंकित ने!

और वहीं टायलेट में वो पीछे घूम गया, मैंने हिम्मत की और तब तक अपना लोवर नीचे खिसका कर उतार दी. अब पैंटी बस बची थी उसे भी खिसका कर नीचे घुटनों तक कर दी, अंकित एकदम मेरी तरफ घूमा, मुझे उसी हालत में देखा और बिल्कुल पकड़ के लिपट गया मुझसे और बोला- बहुत मस्त हो संध्या!मैंने जोर से उसे एक थप्पड़ मार दिया, थप्पड़ पड़ते ही वह वहीं टॉयलेट में में पूरी ताकत से मुझसे लिपट गया और मेरे होठों को चूम लिया, फिर मेरी तरफ घूम गया और मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया.

मैं पता नहीं क्यों … पर चिल्लाई नहीं, ना आवाज की.उसका फायदा वह उठाने लगा और सीधे मेरी चूत में अपना हाथ रख कर मेरी चूत में अपनी उंगली जल्दी-जल्दी डालने लगा, निकालने लगा और ऐसे जकड़ लिया था कि मैं कुछ कर नहीं सकती थी, और जोर दो-तीन मिनट ऐसे रगड़ा मेरी चूत को कि जो मुझे गुस्सा आ रहा था जिसके कारण मैंने उसके कंधे पर अपने दांतों से काट भी दी थी, वह गुस्सा अब मेरा न जाने कहां गायब होने लगा, मुझे इस खेल में मजा सा आने लगा.

इतने में फिर से किसी ने दरवाजा खटखटाया तो अंकित अंदर से बोला- मैं लेट्रिन कर रहा हूं 15 मिनट बाद आना!मैं बिल्कुल डर गई कि अब क्या होगा? अंदर हम दोनों को कोई देख लेगा तो मैं तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी.मैं बिल्कुल घबराकर चुप हो गई.

तभी बाहर से आवाज आई, वो भी किसी पुरुष की- जल्दी फ्री हो जाओ, मुझे भी जोर से लगी है!इतने में अंकित धीरे से मुझसे बोला- अब अगर तुमने कोई हरकत की तो मैं सबको बोल दूंगा कि तुमने मुझे यहां बुलाया है और मेरा तुम्हारा पहले से ही सब होता है.

मैं कुछ नहीं बोली और एकदम शांत हो गई जिससे अंकित मेरी पैंटी को नीचे खिसका कर सीधे मेरे पैर से उतारने लगा मैं उसे मना करने लगी पर नहीं माना और पैंटी उतार करके वहीं रख दी. अब मेरी टांग खोल कर मुझे बोला- झुक जाओ!मैं नहीं झुकी तो पकड़ के झुका दिया और सीधे मेरी दोनों टांगों के बीच बैठकर मेरी चूत को चाटने लगा और जोर से जीभ चलाने लगा.

इतने में अब मुझे कुछ कुछ होने लगा.तभी वह बोला- अब शोर नहीं मचाना संध्या, तुम क्या मस्त माल हो! जब से आई हो, मेरे ही नहीं यहां सभी मर्दों के होश उड़े हुए हैं, तुम तो मुझसे छोटी हो पर मुझसे बहुत बड़ी लगने लगी हो, यह जादू तभी होता है लड़कियों में जब वो जमकर चुदाई करवाती हैं. कितनी भी छोटी उम्र की लड़की हो, उसकी शादी कर दो, फिर देखो वह पांच छः महीने में पूरी औरत बन जाती है. सिर्फ इस कारण कि वो हर दिन में हर रात में दो तीन राउंड चुदाई करवाती है. वैसे ही संध्या तुम भी इतनी उम्र में बिल्कुल मस्त माल बन गई हो, हर औरत तेरे सामने फेल है. सच बता कितने लोगों से अब तक में चुदवा चुकी हो? कितने लन्ड ले चुकी हो संध्या? बताओ संध्या?

 
यह कहते हुए अंकित जोर-जोर से मेरी चूत को चाटने लगा.अब मेरी हालत खराब होने लगी, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं?

मुझसे अंकित ने एक अजीब सा सवाल किया जो सुनकर मैं सन्न रह गई, वो बोला- संध्या, मैं बहुत अच्छे से जान गया हूं कि तुम बहुत चुदाई करवा चुकी हो. पर एक सवाल का जवाब इमानदारी से देना, क्या तुम कभी पैसे लेकर चुदी हो? या किसी मर्द ने तुम्हें पैसे दिया है चोदने के बाद? अगर सच बोलेगी तो मैं तुझे बहुत पैसे दिला दूंगा अपने ही गांव में!फिर बोला- चल अच्छा एक बात बता खुल कर संकोच मत करना; अगर मैं तुझे पैसे दिलवाऊं तो तू चुदवायेगी? मेरे दो अंकल हैं, एक नेता हैं, दूसरे रिटायर इंजीनियर; दोनों बहुत पैसे वाले हैं, उन्हें नया नया माल चाहिए. दोनों एक साथ करते हैं, और लड़की पसंद आयी तो बहुत पैसे देते हैं. बता संध्या, सच बोल दे … तेरा ही फायदा है, यहाँ से बीस किलोमीटर दूर मानिकपुर शहर है, वहां ले चलकर शापिंग वो लोग करवा देंगे, तेरी ऐश हो जायेगी. सच सच बता दे संध्या, बात कर लूं?

मैं बोली- तू बहुत कमीना है! मैं इस तरह की लड़की नहीं हूं, समझे और न मैं करती हूं न करूंगी!मुझे जोर से सू-सू आ रही थी, मैं बोली- छोड़ मुझे … बहुत सू सू आ रही है.पर इतना गन्दा था अंकित, बोला- कर दे … मुझे तेरी सेक्सी टेस्टी सू-सू पीनी है.

अंकित नहीं हटा और मेरी सू-सू छूट गई, अंकित बिल्कुल मुंह नहीं हटाया मेरी चूत से और पूरी मेरी सू-सू गटक गया. वो इतना गन्दा होगा, मैं सोच नहीं सकती थी. अजीब ही लड़का है, पर उसकी यह हरकत मुझे उत्तेजित कर गयी और जाने मुझे क्या अजीब सी फीलिंग हुई.

इतने में अंकित बोला- संध्या, तेरी पेशाब बहुत टेस्टी है, पीके मजा आ गया! संध्या अब तू सीधे घूम जा!और कमर पकड़ के मेरी मुझे सीधे घुमा दिया.

मैंने सोची जाने क्या करेगा यह! मुझे नहीं पता था.इसके बाद जैसे ही मैं सामने हुई तो मेरी पूरी चूत खुल गई, मेरी खुली चूत अंकित के आंखों के सामने थी, वह खा जाने वाली नजरों से उसे देख रहा था.

उसके बाद अपनी हथेली से मेरी चूत को रगड़ने लगा और बोला- संध्या, तू बहुत गजब की माल है, क्या मस्त तेरी चूत है बिल्कुल लाल सुर्ख पड़ी हुई है, बहुत मजा आएगा! मैं तुझे जो बोला हूं, सोच ले. तुझे यहां दस से पंद्रह दिन रहना है मैं तुझे मालामाल करवा दूंगा. तू किसी ना किसी से तो चुदवाएगी ही और पहले भी चुदाई करवाती ही रही होगी, पर मेरी एक बात मान ले तू कभी भी किसी से फ्री में मत चुदवाना, सब करना पर उसके लिए कुछ पैसे बोल दिया कर, तुझे मजा भी मिलेगा और कुछ पैसे भी आ जाएंगे. आज कल सभी लड़कियां यही करती हैं, इसमें कोई बुराई नहीं … जो चीज करना ही है उसमें कुछ पैसे मिल जाएं तो क्या बुरी बात है.

मुझे अंकित की यह बात सच में पसंद आई और अच्छी लगी पर मैं उसे अभी कुछ नहीं बोली.इतने में अंकित मुझे बोला- संध्या, तू अपनी टॉप थोड़ा ऊपर कर ले! तेरे दूध भी देख लूं!

उस टॉयलेट में जहां हम दोनों घुसे थे, उसमें बिल्कुल जगह नहीं थी. छोटे से गांव का टॉयलेट था, तो मैं सिर्फ खड़ी रह सकती थी, उसमें लेटने की जगह नहीं थी, इतने में अंकित ने खुद मेरे टॉप को अपने हाथों से चढ़ा के गर्दन तक किया और नीचे जो समीज पहनी थी, उसे भी ऊपर किया, अब अंकित को जैसे ही मेरे बूब्स दिखे तो बिल्कुल पागल सा हो गया और अंकित ने अपने एक हाथ से मेरे नंगे दूध पर अपना हाथ लगाया और जोर से दबा दिया. और फिर दोनों बूब्स को बारी-बारी से जमकर दबाने लगा.

फिर अचानक उसने इतने जोर से दूध को कस कर दबाया कि मेरी चीख निकल गई.वो मेरी चुची मसलते हुए बोला- संध्या, तू कब से चुदवाना शुरू करवा चुकी है, इतने मस्त तेरे फीचर्स हैं इतना जबरदस्त फिगर है वो भी इतनी छोटी उम्र में! संध्या तू लाजवाब है, इतनी छोटी उम्र में किसी भी लड़की का इतना मस्त फिगर नहीं होता है, तुम संध्या बहुत ज्यादा चुदाई करवा चुकी हो, सच बता मुझे भी!

परन्तु मैं आज सच में कुछ नहीं बोल रही थी.

 
तभी उसने मेरे एक दूध को पकड़ के मुंह में भर लिया, और जैसे ही चूसना शुरू किया, जाने मुझे क्या होने लगा, मैं बहुत जोर से सांस लेने लगी.इतने में उसने अपना लोअर और अपनी अंडर वियर को खींचकर एक हाथ से नीचे कर दिया और मेरी जांघों पर अपने लन्ड को मेरी चूत के पास रगड़ने लगा, चूत के अगल बगल और ऊपर नीचे लन्ड टच करता रहा और मैं मदहोश होती चली गई.

अंकित की इस अजीब सी हरकत से मेरी हालत लगातार खराब होती जा रही थी.

तभी उसने अपने लन्ड को पकड़ कर वहीं खड़े खड़े मेरी चूत में फिट करने लगा, पर अंकित से नहीं बन रहा था, बस चूत के उपर ही उसका लन्ड मेरी जांघों में रगड़ने लगा.

अब वो मेरे बूब्स को पीने लगा, साथ ही अपनी उंगली एक ले जाकर मेरी चूत में जोर से घुसा दी और उंगली को जैसे अंदर घुसाई, अपने आप मैंने उसे कस के पकड़ लिया और बोली- मार डालेगा अंकित क्या? अब मुझसे नहीं रहा जा रहा, तुझे अभी जो करना है कर ले … क्योंकि मैं अब अपने बस में नहीं हूं.

मेरे मुंह से कुछ भी अपने आप निकल रहा था- अंकित, तू बहुत मस्त लड़का है, चल जो तेरा मन है अभी कर ले!तब अंकित बोला- संध्या तू बहुत मस्त है, बहुत सेक्सी है और तू सच में बहुत गर्म चुदासी लड़की है, लाखों करोड़ों में कोई एक तेरे जैसी होती है, तू इसका फायदा उठा, मैं तुझे उन दोनों अंकल से मिलाना चाहता हूं, तुझे उन दोनों से चुदवाना चाहता हूं, बस तू मान जा संध्या … तू बहुत फायदे में रहेगी और बहुत मजा आयेगा.

ऐसा कह कर अंकित ने पूरी जीभ मेरी चूत में घुसा दी और इतना ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चाटने लगा कि मैं अंकित का सर पकड़ के अपनी चूत में दबाने लगी और अब मैं जाने किस नशे में हो गई थी, मैं बोली- अगर हिम्मत है अंकित तो अभी बुलवा दे अपने दोनों अंकल को … अभी जो करना है कर ले! मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी है, जल्दी बुला अपने अंकलों को!मैं ऊंहहह आहहहह करने लगी.

अंकित बोला- तू साली बहुत मस्त चीज़ है संध्या … अब रूक जा, तुझे अभी तो नहीं पर दो दिन के अंदर इतने अमीर बड़े लोगों के साथ सुलवाऊंगा कि तेरी लाइफ बन जाएगी.और अंकित बोला- संध्या ले मेरा लौड़ा जमकर चूस!और अंकित खड़ा हो गया, अपने लन्ड को अपने हाथ से पकड़ा और मेरे सर को झुका कर मेरे मुंह में लन्ड अपना रख दिया.

जैसे ही मेरे होंठों में लन्ड छुआ, उसकी एक अजीब सी महक मेरे नाक में समा गई, इतना गर्म था अंकित का लन्ड कि लगा जैसे मेरे होंठ जल जायेंगे.तभी अंकित ने मेरी चूत में एक साथ दो उंगलियां डाल दी.मैं तड़प उठी और सीधे अंकित का लन्ड कस कर पकड़ लिया और मुंह में डालने लगी. पर उसका लौड़ा आठ इंच से भी बड़ा और बहुत मोटा था इसलिए मेरे मुंह में घुस नहीं रहा था, नार्मल लड़कों से बहुत बड़ा था, मैं अपने जीभ से अंकित का लन्ड चाटने लगी और चूसने लगी.

उधर नीचे मेरे चूत में अंकित अपनी दो उंगलियां घुसाये हुआ था और उन्हें चूत में अंदर बाहर करने लगा.अब मैं बिल्कुल मदहोश हो गई थी, मैं अपनी कमर उठा उठा कर उंगलियां और अंदर बाहर करवाने लगी.

अब पूरा का पूरा मुंह खोला तो अंकित ने अपना लन्ड मेरे मुंह में घुसा दिया और बोला- संध्या, तू साली कुतिया … तुझे जो चोदेगा वो दुनिया का सबसे लकी इंसान होगा. क्या मस्त लन्ड चूसती है रे ! इतनी कम उम्र में तूने एक नंबर की रंडियों को भी फेल कर दिया. गजब है तू … और चूस ले मेरा लौड़ा … आहहहह वोहहहह मेरी डार्लिंग ऊंहहह उंहहह!

सिसकारियों की आवाज लगातार अंकित के मुंह से निकल रही थी कि तभी अचानक जोर से टायलेट का दरवाजा किसी ने खटखटाया और बोला- अंकित, निकल जल्दी … तू वहीं सो गया क्या?जो आवाज आई, उसे सुनते ही अंकित ने जल्दी से अपना लन्ड मेरे मुंह से बाहर निकाला, मुझे छोड़ा, अपने कपड़े पहन कर बोला- लगता है पिटूंगा आज! ये मेरे पापा हैं.

इतना सुनते ही मैं बहुत डर गई और घबराने लगी, मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े पहने और खड़ी हुई, अंकित से बोली- प्लीज़ मुझे बचा लो! ऐसे हम दोनों को टायलेट में अंदर देख लेंगे तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी.अंकित बोला- तू डर मत, कुछ नहीं होगा बस अंदर रहना, जब मैं बोलूं तभी बाहर आना! पहले मैं बाहर जाता हूं!मैं बहुत डर रही थी.

कहानी जारी रहेगी

 
मैं बहुत डर गई और घबराने लगी, मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े पहने और खड़ी हुई, अंकित से बोली- प्लीज़ मुझे बचा लो! ऐसे हम दोनों को टायलेट में अंदर देख लेंगे तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचूंगी.अंकित बोला- तू डर मत, कुछ नहीं होगा बस अंदर रहना, जब मैं बोलूं तभी बाहर आना! पहले मैं बाहर जाता हूं!मैं बहुत डर रही थी.

तभी अंकित ने दरवाजा खोला और बाहर गया.बाहर उसके पापा थे, उसने पापा से बोला- अंदर पानी नहीं है, मुझे भी बाल्टी चाहिए, अंदर पानी डालूंगा टायलेट में, तब आपके जाने लायक होगा.उसके पापा जैसे ही वहाँ से हटे, अंकित ने जल्दी से गेट खोला और मुझे बोला- जल्दी बाहर आ संध्या!मेरे बाहर आते ही मुझे अंकित बोला- यहीं खड़ी रह और बोलना मुझे जाना है अंदर!

इतने में तुंरत अंकित के पापा आ गए बाल्टी लेकर … मुझे खड़े देखे तो बोले- सोनू तू कब आ गई?मैं बोली- अभी आई हूं मौसा!अंकित के पापा बोले- ठीक है, पहले तू चली जा, बाद में मैं जाऊंगा.

अब मेरी जान में जान आई, मैं अंदर जाकर पांच मिनट बाद निकली और वहाँ से चली गई. पर अब मेरी हालत बहुत खराब थी, मुझे अंकित प्यासा छोड़ गया था, मेरा पूरा जिस्म अकड़ रहा था, पूरा बदन टूट रहा था, कभी भी लड़की को ऐसे नहीं छोड़ना चाहिए.मैं बता नहीं सकती कि मुझे क्या फील हो रहा था.

सुबह ग्यारह बजे तक मैं तीन पैंटी बदल चुकी थी, इतनी गीली हो जा रही थी, कोई मर्द जात दिखे तो उसकी जिप के पास मेरी निगाह चली जा रही थी.मैं बस यही सोचती कि काश कैसे भी आकर मुझे कोई अपनी बांहों में भर ले, और मेरे जिस्म को मसल दे … आज मेरी तमन्ना पूरी कर दे … मेरी प्यास बुझा दे, मेरे साथ जमकर सब वो करे जो मेरे गर्मी को शांत कर सके.परंतु ऐसा कोई नहीं मिला, कैसे मिलता जब तक कि कोई बातचीत ना हुई हो.

ऐसे ही तड़पते हुए रात हो गई. खाना खाने के बाद अब मैं सोने के लिए गई तो हालत और खराब हो गई. पहले तो यह बता दूं कि मौसी के यहाँ उनके परिवार और रिश्तेदार सबका बिस्तर एक हॉल में लगा करता है. मौसी के यहाँ ज्यादा बड़ा घर नहीं है, एक कमरे में सब सामान था और एक कमरा छोटा था इसलिए हाल के फर्श में ही 15-16 लोग एक साथ नीचे बिछा के लेटते थे. करीब 6-7 लेडीज थी और 10-12 जेन्ट्स!

जब मैं लेटी तो करीब 10:30 बजे रात का समय हो चुका था पर मुझे बिल्कुल नींद नहीं आ रही थी, मेरे को सुबह के बाद अंकित भी नहीं दिखा, पता नहीं कहाँ चला गया था. मेरे बगल में बिस्तर खाली पड़ा था पर बिछा हुआ था उस बिस्तर में तीन जेन्ट्स आ गए. उनमें से एक अंकल को पहचानती थी, वो मेरी मौसी की ननद के पति थे, वो आर्मी से रिटायर्ड हो चुके हैं.और दो कौन है नहीं जानती थी, पर थे मौसी के रिलेटिव ही.मेरी दूसरी तरफ मौसी की सास लेटी थी.

रात को करीब एक बजे लगभग सब सो गए थे तब अचानक मेरे कंधे को पकड़ कर किसी ने दबाया. आंख खोली तो पूरा अंधेरा था, हाल में कुछ भी नहीं दिख रहा था.तभी धीरे से अंकित की आवाज मेरे कानों में आई, वह बोला- मैं हूं, घबराओ नहीं, अंकित हूं, थोड़ा इधर खिसको, मुझे भी बगल से लिटा लो.

मैं जैसे ही अंकित की आवाज सुनी, मुझे लगा जैसे कोई अपना हो, मैं बहुत धीरे से बोली- यहाँ जगह नहीं है, कहाँ लेटोगे? जहाँ रोज लेटते हो, वहीं जाओ, यहाँ जगह नहीं है.अंकित बोला- मुझे यहीं तुम्हारे बगल से लेटना है, थोड़ा खिसको, तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है, यहाँ बन जाएगा थोड़ा और खिसको!मैं बोली- उधर, अंकल लोग लेटे हैं.तो अंकित बोला- अंकल की तरफ खिसको, इधर दादी हैं, इस तरफ मैं लेट जाऊंगा, तुम्हें बहुत जरूरी बात बताने आया हूं प्लीज खिसको.और मैं पता नहीं क्यों … पर खिसक गई.

जैसे ही उधर खिसकी तो देखा कि अंकल को मैं टच हो गई क्योंकि जगह बिल्कुल कम थी पर थोड़ी जगह निकल आई और अंकित लेट गया.अब जिधर दादी लेटी थी, उधर अंकित हो गया और दूसरे साइट में अंकल लोग लेटे थे, बीच में मैं हो गई. अंकित और मेरे बीच में पांच अंगुल का फासला था उधर दूसरे बगल अंकल से तो सिर्फ दो ही अंगुल का फासला बचा बस अगर मैं करवट लूं तो अंकल को टच कर जाती, मैं अंकल की तरफ अपना चेहरा कर ली थी और अंकित की तरफ पीठ इस तरह लेटी हुई थी.

करीब तीस मिनट तक अंकित चुपचाप लेटा रहा, उसके बाद बहुत धीरे से अंकित ने कान में आवाज दी- संध्या सुनो, सुन रही हो संध्या?मैं सुन रही थी, जग भी रही थी पर कुछ नहीं बोली, सोई हुई बन गई.चार पांच बार और आवाज लगाई अंकित ने, फिर बोला- बड़ी जल्दी तुझे नींद आ गई? मैं तुझसे मिलने आया हूं, और तुझे कुछ बताने भी आया हूं और तू कुंभकरण की तरह सो गयी.

 
करीब 15 मिनट और बिल्कुल किसी बिना हरकत के अंकित लेटा रहा मुझे भी नींद आने लगी थी, मैं सोची शायद अंकित सो गया, अचानक पीछे तरफ से अंकित ने अपना हाथ मेरे सीने में रख दिया और वैसे ही हालत में तीन चार मिनट रखे रहा तो मुझे लगा कि नींद में आ गया होगा.परन्तु पांच मिनट बाद मेरे पिछवाड़े में कुछ लम्बी सख्त चीज चुभने लगी और तुंरत जो पांच अंगुल का फासला मेरे और अंकित के बीच था वह खत्म हो गया और अंकित मेरी तरफ थोड़ा खिसक के आया और मेरी पीठ तरफ चिपक गया, मैं नीचे स्कर्ट पहने हुई थी और ऊपर टाप, टाप ढीली थी टाप के नीचे समीज पहनी थी, दिन में मेरी 2 पैंटी खराब हो चुकी थी इस लिए धोकर सुखाने डाल दी थी, मेरे पास अब पैंटी नहीं बची थी इसलिए सिर्फ स्कर्ट पहनी थी, स्कर्ट के नीचे पैंटी नहीं थी.

जैसे अंकित मेरी पीठ से चिपका, उसका जो मेरे पीछे चुभ रहा था, मैं समझ गई कि अंकित का लन्ड है और अंकित सो नहीं रहा क्योंकि उसका लन्ड खड़ा हुआ था. अब मेरे मन के अंदर कौतूहल शुरू हो गया. तभी अंकित मेरे बूब्स को धीरे धीरे दबाने लगा वो भी टॉप के ऊपर से ही, अंदर ही अंदर मेरे अजीब सी हरकत शुरू हो गई, पर मुझे डर भी लगा कि कहीं कोई जग ना जाए पर मैं पता नहीं क्यों अंकित को मना नहीं कर पायी और उसे यह भी नहीं लगने दिया कि मैं जग रही हूं, मैं सोई ही बनी रही.

वो थोड़ी देर टॉप के ऊपर से धीरे-धीरे से मेरे बूब्स दबाता रहा, अचानक उसने मेरे पीछे जो मेरी गांड में उसका लन्ड टच हो रहा था, उसे स्कर्ट के ऊपर से ही दबाना रगड़ना शुरू कर दिया, उसकी इन हरकतों से मुझे अजीब सा लगने लगा और वही सुबह बाली फीलिंग मेरे अंदर बढ़ने लगी.

मेरे चुप रहने से अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी और अब वो मेरे बूब्ज़ जोर से दबाने लगा. जैसे ही मेरे बूब्स दबे, मुझे कुछ-कुछ होने लगा और मेरे को आप बहुत समय नहीं लगा और मैं भूलने लगी कि मैं कहाँ लेटी हूं और सच कहूं तो भूल ही गई की यहाँ 15-20 लोग इस हाल में लेटे हैं.

अचानक अंकित अपना एक हाथ नीचे ले गया और मेरी स्कर्ट उठाने लगा. जैसे ही स्कर्ट के अंदर हाथ डाला, सीधे उसकी हथेली मेरी पिछवाड़े गांड में टच हो गई और पूरी नंगी मेरे गांड में अपनी हथेली चलाने लगा. उसकी इस हरकत से मेरी हालत और तेजी से खराब होने लगी.

तभी वो अपनी दो उंगलियां मेरी पीछे तरफ मेरी जांघों को थोड़ा फैला कर जहाँ सुराख था, उसमें डालने लगा तो मुझे गुदगुदी सी हुई. और वो मेरी स्कर्ट उतारने लगा और धीरे-धीरे खिसका कर उतार भी दी. फिर मेरे कान में बोला- संध्या तू जाग रही है क्या?मैं कुछ नहीं बोली और सोई ही बनी रही. मेरे नीचे कुछ भी नहीं बचा, मैं पूरी नंगी हो गई क्योंकि स्कर्ट के अलावा और कुछ भी नहीं पहनी थी नीचे … ऊपर टॉप और समीज पहनी हुई थी. मैं सोने का नाटक करती ही रही.

इतने में अंकित ने अपना हाथ मेरी समीज के अंदर घुसा दिया और मेरे पेट मेरी नाभि को हाथ से रगड़ने लगा, मेरी नाभि में उंगली भी डाल कर घुमाने लगा, मुझे अजीब सा कुछ होना शुरू हो गया.इसके बाद सीधे अंकित अपना लोवर और अंडरवियर उतारने लगा. जैसे ही उसका लोवर और अंडरवियर उतरा, उसने अपना नंगा सख्त लन्ड मेरी गांड में टच करा दिया और उसे धीरे-धीरे मेरे कूल्हों में घुमाने लगा.

उसकी इस हरकत से मेरे अंदर बिल्कुल आग सी लग गई. इसके बाद उसने मेरे टाप और समीज को ऊपर करना शुरू कर दिया, दोनों को ऊपर सीने के ऊपर गर्दन के पास कर दिया. अब मेरे बूब्स बिल्कुल खुले नंगे हो गए तो गर्दन के नीचे से पूरा का पूरा मेरा जिस्म बिना कपड़ों के हो गया, मतलब पूरी नंगी हो चुकी थी.

अंकित अपने हथेली से मेरे बूब्स को दबाने लगा सहलाने लगा, थोड़ी देर बाद अब अंकित मेरे बूब्स जोर जोर से दबाने लगा और मेरी गांड के छेद के पास अपना लन्ड रगड़ने लगा. मेरी हालत बहुत नाजुक स्थिति में पहुंच गई, मैं अब बर्दाश्त कर पाने की स्थिति में नहीं बची थी.

तभी वह एक हाथ नीचे लाकर मेरी नाभि से कमल पर हाथ चलाता हुआ नीचे की तरफ लाया और अपनी हथेली मेरी चूत में रख दी और अपनी हथेली से हल्के हल्के चूत के बालों को सहलाने लगा. थोड़ी देर तक उसकी यह हरकत चलती रही और फिर अचानक मेरी चूत में अपनी उंगली डाल दी.

जैसे ही उंगली मेरी चूत में गई, मैं बिल्कुल तड़प उठी, मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं क्या करूं. मुझे पहले लगा कि मैं घूम के लिपट जाऊं अंकित से और उसको गले लगा कर उससे जमके चोदन करवा लूं. पर मैंने पता नहीं क्यों इतना धैर्य दिखाया और अभी भी सोने का नाटक ही करती रही.

 
तभी अचानक अंकित मेरे चूत में उंगली पूरी घुसा दी और उसे अंदर बाहर करने लगा, और मेरे कान में बिल्कुल पास आकर धीरे-धीरे बोलने भी लगा- संध्या तू बहुत मस्त माल है तेरी चूत इतनी गर्म है कि लग रहा है कि मेरी उंगली जल जाएगी, आज मैं तुझे जन्नत की सैर कराऊंगा, तू बहुत मस्त है. जब से तुझे सुबह से टच किया और तेरी चूत को चाटा था, वही तेरे चूत की महक मेरे जिस्म में समा गई है मैं सुबह से तीन चार बार मुट्ठ मार चुका हूं तुझे सोच सोच कर!

और इतना कहते ही अंकित जोर-जोर से अपनी उंगली मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगा. मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी और बहने लगी तो अब वही चूत का रस अंकित निकाल कर मेरे पिछवाड़े में मेरी गांड में लगाने लगा मेरे कूल्हे फैलाकर मेरी गांड के सुराख में जहाँ छेद था वहाँ एक उंगली हल्के से डालने लगा.मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी पूरी पागल सी हो रही थी.

इतने में अंकित ने अपना लन्ड मेरे गान्ड के छेद में टिका दिया और अपने मुंह से ढेर सारा थूक निकालकर लंड पर लगाया. अंकित ने मेरे कूल्हों को अपने हाथ से फैलाया और थोड़ा सा मेरे पैर को और किनारे किया, वो भी अपने हाथ से … अब उसका लौड़ा पूरी तरह मेरी गान्ड में सेट हो चुका था.अंकित बोला- संध्या, अब तू तैयार हो जा … मैं तुझे आज बहुत चोदने वाला हूं, मैं और मेरा लन्ड बहुत तड़प रहे हैं, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा. मैं तेरी मस्त गांड का दीवाना हूं.

और इस तरह से अचानक, मुझे अंदाजा नहीं था, उसने पूरा जोर लगाकर मेरी गांड में अपना लन्ड इतनी जोर से घुसा दिया कि मुझे लगा कि मैं दर्द के मारे मर गई. मुझे कुछ होश नहीं रहा दर्द के कारण अब मुझे कुछ समझ नहीं आया और मेरे मुंह से चीख निकल गई. ऐसा लगा कि मेरी गान्ड फट गई, मेरे बगल से चार अंगुल के अंतर में जो अंकल लेटे थे, मेरी मौसी के ननद के पति, उनसे लिपट गई दर्द के मारे, और इतनी जोर से पकड़ा उनको कि अंकल की नींद खुल गई. वो अंकल आर्मी में थे तो चौकन्ने रहना उनकी आदत में है. वो तुरंत उठ कर बैठ गए और सीधे अपने मोबाइल की लाइट जला कर देखा. कुछ बोले बिना उन्होंने अपने मोबाइल की लाइट से सब देख लिया और अपने मोबाइल से विडियो रिकार्डिंग भी कर ली अंकित जब लन्ड मेरी गान्ड में डाले था.

मैं उनसे लिपटी ही हुई थी, उन्होंने चुदाई की हालत में मुझे और अंकित को देखा तो अंकित घबरा गया, उसने जल्दी से अपना लन्ड मेरी गांड में से निकाला तो भी मुझे बहुत दर्द हुआ.

अंकल के बगल में दो अंकल और लेटे हुए थे, उनमें से तुरंत एक अंकल को उन अंकल ने उठाया, बोले- मुन्ना भाई उठो!वो भी उठ के बैठ गये, पर अंकित तब तक अपनी अंडरवियर और लोवर पहनकर चुपचाप लेट चुका था.

पर मैं वैसी ही हालत में आंख बंद किए लेटी हुई थी, सोई बनी हुई थी परन्तु मुझे इतना डर लग रहा था इतनी घबराहट कि लगता था धरती फट जाए और मैं उसमें समा जाऊं. डर के मारे मेरी हालत बहुत खराब हो गई, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं, मैं अपने कपड़े पहन लूं इतनी हिम्मत और इतनी समझ नहीं आई, बस वैसी ही हालत में आंख बंद करके लेटी रही. तभी आर्मी वाले अंकल बोले- देखो मुन्ना भाई, ये लड़की और ये जो बगल में लड़का लेटा है, दोनों चुदाई कर रहे थे. ये देख, छोटी सी विडियो क्लिप बनाई है दस पन्द्रह सेकंड की!और उन अंकल को दिखाई.

दूसरे अंकल का पहला रिएक्शन यही था- राज भाई, ये लड़की बहुत मस्त माल है, ये तो हिरोइनों की तरह दिखती है, किसकी लड़की है तुम पहचानते हो?आर्मी वाले अंकल का नाम राजधर त्रिपाठी है, उनको सब राज ही कहते हैं, राज अंकल ने कहा- हाँ मुन्ना भाई, ये मेरे साले की साली जो तपा में ब्याही है, उसकी सबसे छोटी बेटी है इसका नाम संध्या है पर घर में सब लोग इसे सोनू कहते हैं, मैं भी सोनू ही कहता हूं. और इस लड़के को तो मुन्ना भाई तुम पहचान ही गये होगे?

 
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