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वह अपना लवड़ा मुट्ठीमें पकड़कर उसे नेहाकी बुरकी फांकों पर रगड़ा। शाजिया कि सारी शरीर में चींटी रेंगे जैसे अनुभव हो रहे थे। "mmmaaaammma' उसका बदन में एक हल्का से कम्पन हुआ। "सर... मुझे डर लग रहा है... आपका बहुत बड़ा है... मैंने ऐसे कभी नहीं किया..." वह अपनी खूब चुदी चूत को हथली के नीचे छुपाते बोली।
"अच्छा एक काम करते है.. इसे चुदने की काबिल बनाते है..."
"कैसे....?"
समीर ने उसके जांघों में अपना सर दिया और उसके फांकों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा..."
"ससससस.....ह्ह्हआआ...सर...." शाजिया तिल मिलायी और उसके सिर को अपने बुर पर दबायी।
"अच्छा लग रहा है...?" चाटते पुछा...
शाजिया ने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन अपने कमर उछाली। समीर अपना काम जारी रखा... अपना खुरदरी जीभको उसने शाजिया की फांकों के बिच चलाते अंदर तक अपना जीभ घुसेड़ा...जब तक शाजिया कि बुर पानि छोड़ने लगी।
"हाँ..सर..हाँ.. ऐसे ही... ओफ्फो यह क्या कर रहे है.. मुझे कुछ हो रहा है.. और अंदर डालिये अपना जीभ को..ववाह.. कितना अच्छा है.. चूसो.. सर..चूसो... अम्म्मा" वह उसके चूसन से, बिना पानीके मछलीकी तरह तड़पने लगी।
उसे चूसते चूसते ही समीर ने उसके नितम्बों के बिच उंगलि करने लगा...
"ओह सर यह क्या कर रहे है....आप..." वह अपने गांड की मांसपेशियों को टाइट करती पूछी।
"क्यों अच्छ नहीं लगा...?"
"बहुत अच्छ अहइ ee..ee..eeeee....."
"जस्ट रिलैक्स..और मस्ती करो.." कहते वह उसके बुरको चाटने लगा। पूरा दस मिनिट तक वह उसे चूमता चाटता और चूसता रहा.. कभी कभी उसके भगनासे (clit) को भी दांतों से काटने लगा...
शाजिया तो अब स्वर्गमें थी..सर..सर... अहःअहः... कहती वह झड़ चुकी थी। उसके अंदरसे बहने वाली उस नमकीन रस को छाव के साथ चख रहाथा समीर...
शाजिया उसके मुहं के ऊपर अपने बुर उछालते बोली... सर.. सर.. प्लीज.. कुछ करिये... यह क्या खूजली है.. सर बहुत खुजली हो रही अंदर..." यह बोली।
"शाजिया उस खुजलीको मिठाने का एक ही तरीखा है...?"
"क्या है.. जल्दी करिये..." वह अपनी कूल्हे उछालती बोली।
"तुम्हे चोदना ही उस खुजली की दवा है..."
"तो चोदिये न...."
"तुम तो डर रही हो...."
"नहीं...चाहे कुछ होजये...मेरी फटती है तो फटने दो...पहले चोदो; यह खुजली मेरे से बर्दास्त नहिं होती..." कही और समीरके सर को पकड़ कर अपने उपर खींची।
समीर अपना मुश्तण्ड लेके शाजिया की जांघों में आया.. और अपना डंडे का सूपाड़ा... शाजिया की उभरे फांकों पर रगड़ा..."
"आअह्हह्हह्ह..... सससस.. मामममम.. चोदो चोदो कहते कमर उछालने लगी। समीरने मौका देख कर अपने लंड को अंदर धकेला..."
"faaaaakkkkkk..." के अवाज के साथ उसका लाल टोपा उसके फांकों के बिच फंस गयी।
"सस्ससम्मम्मा" शाजिया तिल मिलाने का नखरे करि। सचमें भी उसका बुर कुछ तंग होगयी है.. वह यहाँ आनेसे एक दिन पहले एक आयुर्वेदिक लेडी डॉक्टरके पास गयी और बोली... "डॉक्टर...मेरा मंगेतर (fiance); मेरा लूज है कहकर मझसे शादी करनेसे इंकार कर रहा है...प्लीज...मेरी शादी बचाइए कोई अच्छा मेडिसिन दीजिये की वह थोडासा टाइट होजाये,," कही... डॉक्टर ने उसे एक ऑइंटमेंट की tube दी और बोली... सम्भोग से एक घंटा पहले इसे अंदर बाहर लेपन करना...
अब शाजिया उसि लेपनको लेप कर आयी है..और उसका चूत कुंवारी चूत की तरह तंग हो चुकी है।
जब शाजिया की मोटे फांकों के बीच अपना सुपाड़ा फंसी तो समीर को भी जन्नत दिखने लगी। 'वाह क्या टाइट चूत है इतना टाइट चूत तो मैं पहले कभी नहीं चोदा' सोचते उसने अपना कमर ऊपर खींचा और एक जोर का शॉट दिया। 8 इंच लम्बा लवड़ा आधे से ज्यादा शाजिया कि तंग बुर में चली गयी।
"आमममममायआ.... mareeeee...re... हाय ,,, हाय। . meree phateeee आहा निकालो.. नहीं... नहीं .. मुझे नहीं चुदाना....जालिम कहिं के.. छोड़ो.. मुझे..." शाजिया दर्द से तड पडाती बोल ही रही थी की समीर ने एक और जोर का शॉट दिया।
उस शॉट से समीर का पूरा का पूरा शाजिया के चूत में जड़ तक चली गयी।
"aaaaaaaahhhhhh ..... बास्टर्ड... छोड़ो मुझे.. मार डालोगे क्या... आअह्हह ..."दर्द के मारे चिल्लाती समीर को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन समीर के बलिष्ट शरीर के सामने उसका एक भी नहीं चली।
समीर ने अब अपना मूवमेंट रोका एक हाथ शाजिया की मुहं पर रखा.. और एक चूची को पूरा अपने मुहं में लेकर चूसते दूसरे की निप्पल को मसल रहा था। शाजिया उसके नीचे छटपटाते उधर इधर हिल रही थी। उसकी ऐसे हिलने से उसका लंड और अंदर समागयी।
दोनों शांत पड़े राहे। कोई तीन चार मिनिट बाद जब दोनों की सांसे कुछ थमी तो समीर ने सर उठाकर उसे देखा। तभी शाजिया ने भी उसे देखि। उसके आंखे आंसू से भरे थे। समीर उस आँसू भरे आँखों को चूमते आंसू चाट गया। फिर उसेके पतले होंठ अपने में लेकर चूसने लगा... उसका छाती मसलना जारी रहा। शाजिया शांत पड़ी रही।
पांच छह मिनिट के ऐसे हरकतों के बाद शाजिया में थोडा सा चलन आया। उसे महसूस हुआ की उसके चूत के अंदर चिकना पानी छूट रहा है.. और वह पानी एक दवा की तरह काम करते उसे राहत देने लगी। यह अहसास समीर को भी हुआ।
सर आप ने तो जान से ही मार डाला मुझे..." वह समीर से बोली...
"मैंने तो तुम चोदो चाहे कुछ होजाये कहने का बाद ही अंदर डाला है..." समीर उसके गाल को चूमते बोला।
शाजिया कुछ बोली नहीं.. उसे मालूम है वह बहुत उत्तेजित हुई थी.. अब वह फिर बुरमें खुजलि महसूस करने लगी। अनजाने में ही उसके कमर ऊपर उठी।
"अच्छा एक काम करते है.. इसे चुदने की काबिल बनाते है..."
"कैसे....?"
समीर ने उसके जांघों में अपना सर दिया और उसके फांकों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा..."
"ससससस.....ह्ह्हआआ...सर...." शाजिया तिल मिलायी और उसके सिर को अपने बुर पर दबायी।
"अच्छा लग रहा है...?" चाटते पुछा...
शाजिया ने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन अपने कमर उछाली। समीर अपना काम जारी रखा... अपना खुरदरी जीभको उसने शाजिया की फांकों के बिच चलाते अंदर तक अपना जीभ घुसेड़ा...जब तक शाजिया कि बुर पानि छोड़ने लगी।
"हाँ..सर..हाँ.. ऐसे ही... ओफ्फो यह क्या कर रहे है.. मुझे कुछ हो रहा है.. और अंदर डालिये अपना जीभ को..ववाह.. कितना अच्छा है.. चूसो.. सर..चूसो... अम्म्मा" वह उसके चूसन से, बिना पानीके मछलीकी तरह तड़पने लगी।
उसे चूसते चूसते ही समीर ने उसके नितम्बों के बिच उंगलि करने लगा...
"ओह सर यह क्या कर रहे है....आप..." वह अपने गांड की मांसपेशियों को टाइट करती पूछी।
"क्यों अच्छ नहीं लगा...?"
"बहुत अच्छ अहइ ee..ee..eeeee....."
"जस्ट रिलैक्स..और मस्ती करो.." कहते वह उसके बुरको चाटने लगा। पूरा दस मिनिट तक वह उसे चूमता चाटता और चूसता रहा.. कभी कभी उसके भगनासे (clit) को भी दांतों से काटने लगा...
शाजिया तो अब स्वर्गमें थी..सर..सर... अहःअहः... कहती वह झड़ चुकी थी। उसके अंदरसे बहने वाली उस नमकीन रस को छाव के साथ चख रहाथा समीर...
शाजिया उसके मुहं के ऊपर अपने बुर उछालते बोली... सर.. सर.. प्लीज.. कुछ करिये... यह क्या खूजली है.. सर बहुत खुजली हो रही अंदर..." यह बोली।
"शाजिया उस खुजलीको मिठाने का एक ही तरीखा है...?"
"क्या है.. जल्दी करिये..." वह अपनी कूल्हे उछालती बोली।
"तुम्हे चोदना ही उस खुजली की दवा है..."
"तो चोदिये न...."
"तुम तो डर रही हो...."
"नहीं...चाहे कुछ होजये...मेरी फटती है तो फटने दो...पहले चोदो; यह खुजली मेरे से बर्दास्त नहिं होती..." कही और समीरके सर को पकड़ कर अपने उपर खींची।
समीर अपना मुश्तण्ड लेके शाजिया की जांघों में आया.. और अपना डंडे का सूपाड़ा... शाजिया की उभरे फांकों पर रगड़ा..."
"आअह्हह्हह्ह..... सससस.. मामममम.. चोदो चोदो कहते कमर उछालने लगी। समीरने मौका देख कर अपने लंड को अंदर धकेला..."
"faaaaakkkkkk..." के अवाज के साथ उसका लाल टोपा उसके फांकों के बिच फंस गयी।
"सस्ससम्मम्मा" शाजिया तिल मिलाने का नखरे करि। सचमें भी उसका बुर कुछ तंग होगयी है.. वह यहाँ आनेसे एक दिन पहले एक आयुर्वेदिक लेडी डॉक्टरके पास गयी और बोली... "डॉक्टर...मेरा मंगेतर (fiance); मेरा लूज है कहकर मझसे शादी करनेसे इंकार कर रहा है...प्लीज...मेरी शादी बचाइए कोई अच्छा मेडिसिन दीजिये की वह थोडासा टाइट होजाये,," कही... डॉक्टर ने उसे एक ऑइंटमेंट की tube दी और बोली... सम्भोग से एक घंटा पहले इसे अंदर बाहर लेपन करना...
अब शाजिया उसि लेपनको लेप कर आयी है..और उसका चूत कुंवारी चूत की तरह तंग हो चुकी है।
जब शाजिया की मोटे फांकों के बीच अपना सुपाड़ा फंसी तो समीर को भी जन्नत दिखने लगी। 'वाह क्या टाइट चूत है इतना टाइट चूत तो मैं पहले कभी नहीं चोदा' सोचते उसने अपना कमर ऊपर खींचा और एक जोर का शॉट दिया। 8 इंच लम्बा लवड़ा आधे से ज्यादा शाजिया कि तंग बुर में चली गयी।
"आमममममायआ.... mareeeee...re... हाय ,,, हाय। . meree phateeee आहा निकालो.. नहीं... नहीं .. मुझे नहीं चुदाना....जालिम कहिं के.. छोड़ो.. मुझे..." शाजिया दर्द से तड पडाती बोल ही रही थी की समीर ने एक और जोर का शॉट दिया।
उस शॉट से समीर का पूरा का पूरा शाजिया के चूत में जड़ तक चली गयी।
"aaaaaaaahhhhhh ..... बास्टर्ड... छोड़ो मुझे.. मार डालोगे क्या... आअह्हह ..."दर्द के मारे चिल्लाती समीर को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन समीर के बलिष्ट शरीर के सामने उसका एक भी नहीं चली।
समीर ने अब अपना मूवमेंट रोका एक हाथ शाजिया की मुहं पर रखा.. और एक चूची को पूरा अपने मुहं में लेकर चूसते दूसरे की निप्पल को मसल रहा था। शाजिया उसके नीचे छटपटाते उधर इधर हिल रही थी। उसकी ऐसे हिलने से उसका लंड और अंदर समागयी।
दोनों शांत पड़े राहे। कोई तीन चार मिनिट बाद जब दोनों की सांसे कुछ थमी तो समीर ने सर उठाकर उसे देखा। तभी शाजिया ने भी उसे देखि। उसके आंखे आंसू से भरे थे। समीर उस आँसू भरे आँखों को चूमते आंसू चाट गया। फिर उसेके पतले होंठ अपने में लेकर चूसने लगा... उसका छाती मसलना जारी रहा। शाजिया शांत पड़ी रही।
पांच छह मिनिट के ऐसे हरकतों के बाद शाजिया में थोडा सा चलन आया। उसे महसूस हुआ की उसके चूत के अंदर चिकना पानी छूट रहा है.. और वह पानी एक दवा की तरह काम करते उसे राहत देने लगी। यह अहसास समीर को भी हुआ।
सर आप ने तो जान से ही मार डाला मुझे..." वह समीर से बोली...
"मैंने तो तुम चोदो चाहे कुछ होजाये कहने का बाद ही अंदर डाला है..." समीर उसके गाल को चूमते बोला।
शाजिया कुछ बोली नहीं.. उसे मालूम है वह बहुत उत्तेजित हुई थी.. अब वह फिर बुरमें खुजलि महसूस करने लगी। अनजाने में ही उसके कमर ऊपर उठी।