S
StoryPublisher
Guest
कमरे के अन्दर तुम्हारे भैया गुलाबी को 15 मिनट तक पेलते रहे. फिर उसकी चूत मे झड़ने लगे. गुलाबी भी एक दो बार झड़ चुकी थी.
गुलाबी की चूत को अपने वीर्य से भरकर मेरे पति नीचे उतरे तो गुलाबी ने उठकर अपने कपड़े पहन लिये.
झाड़ू लेकर वह कमरे के बाहर निकली तो फिर रामु और मुझे खड़ा पाया.
हमे देखकर मुस्कुराकर बोली, "हाय, आप लोग हमे अपना काम करने देंगे या नही?"
"हमे पता है तु किसन भैया और बड़े भैया के बिस्तर पर कौन सा काम कर रही थी." रामु बोला.
"पता कैसे नही होगा!" गुलाबी चहक कर बोली, "दरवाजों की छेद पर आंखें गाड़े जो पड़े रहते हो कि बीवी किस किससे मुंह काला करवा रही है!"
"बस बहुत हो गया." मैने कहा, "गुलाबी, जा जल्दी से बाबूजी के कमरे मे झाड़ू लगा और फिर रसोई मे जा. बहुत काम है वहाँ."
"पर भाभी!" गुलाबी ने मेरे कान मे धीरे से कहा, "हमरी चूत से किसन भैया और बड़े भैया का पानी चू रहा है."
"साली, दो दो मर्दों से अपनी टंकी भरवायेगी तो चूयेगा नही?" मैने हंसकर कहा, "पर पहले बाबूजी के कमरे का काम खतम कर. तुने ऐसे ही बहुत देर कर दी है. सासुमाँ बहुत गुस्सा करेंगी."
गुलाबी तीखे नयनों से अपने पति को देखकर, अपनी गांड मटकाते हुए ससुर और सासुमाँ के कमरे मे घुस गयी.
"चलो रामु, अब वहाँ का तमाशा देखते हैं." मैने कहा.
"भाभी, हमे तो लगता है वहाँ भी कुछ होने वाला है." रामु बोला.
"अरे देखो ना!" मैने कहा, "जो भी होगा तुम्हे बहुत मज़ा आयेगा."
रामु और मैं गुलाबी के पीछे पीछे ससुरजी के कमरे के पास गये.
गुलाबी ने रोज़ की तरह झाड़ू लगाने से पहले अपने पीछे दरवाज़ा बंद कर लिया. पर आज अन्दर का नज़ारा बहुत अलग था.
रात को तुम्हारे मामाजी और मैने काफ़ी देर रात तक चुदाई की थी और रोज़ की तरह नंगे ही सो गये थे. जब गुलाबी कमरे मे घुसी तो देखा ससुरजी पलंग पर पीठ के बल नंग-धड़ंग सो रहे हैं. उनका लौड़ा खड़ा नही था और उनके पेट पर लिटा हुआ था. फिर भी काफ़ी मोटा और लगभग 6 इंच का दिख रहा था.
गुलाबी पहले तो चौंक गयी, फिर खड़े-खड़े ससुरजी के नंगे शरीर और सोये हुए लौड़े को देखने लगी.
"मालिक ऐसे नंगे क्यों सोये हुए हैं?" रामु ने पूछा, "काफ़ी बड़ा लौड़ा है उनका."
"लगता है सासुमाँ की रात को बहुत चूत मारे हैं वो." मैने कहा.
"बहुत गरम औरत है, मालकिन." रामु बोला, "दिन मे हमरे साथ और रात को फिर मालिक के साथ!"
"सासुमाँ की उम्र के औरतों मे चुदास जवान लड़कियों से भी ज़्यादा होती है." मैने कहा.
"हूं. पर भाभी, ई ससुरी गुलाबी का कर रही है?" रामु ने पूछा.
मेरे ससुरजी खर्राटें मारकर सो रहे थे और गुलाबी खड़े-खड़े ससुरजी के लन्ड को देखे जा रही थी.
उसकी आंखों मे एक शरारती चमक थी. उसने सुनिश्चित किया कि ससुरजी पूरी नींद मे हैं. फिर उसने हाथ बढ़ाकर ससुरजी के लौड़े को छुआ.
ससुरजी ने कोई हरकत नही की तो उसने लन्ड को अपनी छोटी से मुट्ठी मे लिया और हिलाकर देखने लगी. फिर उसने नीचे लटके बड़े से पेलड़ को उंगलियों से सहला के देखा.
गुलाबी के कोमल हाथ के स्पर्श से ससुरजी का लौड़ा खड़ा होने लगा.
गुलाबी को और मज़ा आने लगा और वह थोड़ा और जोर से ससुरजी का लौड़ा हिलाने लगी. ससुरजी तो नींद मे डूबे थे पर उनका 8 इंच का औज़ार जाग उठा था. गुलाबी पलंग पर बैठ गयी और ससुरजी के खड़े लन्ड से खेलने लगी.
"ई साली छिनाल तो मालिक से चुदाने की पूरी योजना बनाये बैठी है!" रामु बोला. उसने अपने पैंट की ज़िप खोल दी और अपना खड़ा लन्ड बाहर निकालकर सहलाने लगा.
पर तुम्हारे मामाजी को तो होश ही नही था कि उनकी जवान, सुन्दर नौकरानी उनका लन्ड हिला रही है!
गुलाबी की साहस थोड़ी और बढ़ी तो उसने अपना सर ससुरजी के लौड़े पर झुकाया और जीभ निकालकर उनके मोटे सुपाड़े को चाटा. वह खुद गनगना उठी और ससुरजी भी नींद मे कसमसा उठे.
जब ससुरजी ने और कोई प्रतिक्रिया नही की तो गुलाबी उनके खड़े लन्ड को जीभ से ऊपर से नीचे चाटने लगी. वह लौड़े के जड़ पर जीभ लगाती और फिर चाटकर सुपाड़े तक ले जाती. फिर नीचे ले जाती और फिर ऊपर ले आती. ऐसा उसने कई बार किया.
अपनी पत्नी की यह अश्लील हरकतें देखकर रामु की तो हालत ही खराब हो गयी. "हाय भाभी! कैसी रंडी की तरह कर रही है गुलाबी! मालिक जाग जायेंगे तो का होगा!" बोलकर वह अपना लन्ड पकड़कर हिलाने लगा.
"रामु, औरत चुदासी हो जाती है तो उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है." मैने कहा और अन्दर देखने लगी.
अब और साहस करके गुलाबी ने ससुरजी का लन्ड अपने मुंह मे ले लिया और चूसने लगी.
ससुरजी और कसमसाने लगे और उनकी नींद हलकी हो गई. देखकर गुलाबी ने तुरंत अपना मुंह हटाया और खड़ी होगी. ससुरजी के खड़े, थूक से चमकते लन्ड को देखते हुए वह कमरे मे जल्दी-जल्दी झाड़ू लगाने लगी.
गुलाबी की लन्ड चुसाई से ससुरजी की नीद जल्दी ही खुल गई. आंखें खोलकर पहले उन्होने गौर किया की वह पूरी तरह नंगे लेटे हैं, और फिर देखा कि उनका लन्ड तनकर खड़ा है और गीलेपन से चमक रहा है. आश्चर्य चकित होकर उन्होने गुलाबी की तरफ़ देखा जो कमरे मे झाड़ू लगा रही थी जैसे कुछ भी नही हुआ था.
"ऐ छोकरी!" तुम्हारे मामाजी गरजकर बोले, "क्या कर रही थी अभी तु?"
"कुछ नही मालिक." गुलाबी ने भोलेपन से कहा, "हम तो कमरे मे झाड़ू लगा रहे हैं."
"अभी नही. थोड़ी देर पहले क्या कर रही थी?"
"कुछ नही, मालिक." गुलाबी फिर बोली, "झाड़ू ही लगा रहे थे."
"तो फिर मेरा यह..." अपने खड़े लन्ड की तरफ़ इशारा करके बोले.
गुलाबी लजा के बोली, "हम कमरे मे आये तो आप ऐसे ही सो रहे थे."
उसने फिर बिस्तर पर पड़े चादर को ससुरजी के कमर तक खींच दिया. लन्ड चादर मे तंबू बना के खड़ा रहा.