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मैं और मेरा परिवार

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679

हम थोड़ी देर ऐसे लेटे रहे.फिर हम नॉर्मल हो गये.

शोभा-तुम ने ऐसा क्यूँ किया.

अवी-मैं ने ठीक ही तो किया. तुम कितना मज़ा ले रही थी.

शोभा-मज़ा तो ले रही थी. पर ये देखो तुम ने क्या किया

मैं ने शोभा के बूब्स देखे .एक बूब्स लाल हो गया था.

अवी-ये कैसे हुआ

शोभा-तुम ने किया ,

अवी-मेरा ध्यान ही नही रहा, आओ मलम लगाकर देता हूँ

शोभा-चोट भी तुम दे रहे हो और मलम भी लगा रहे हो

अवी-मैं ऐसा ही हूँ

और मैं शोभा के बूब्स को चाटने लगा.

शोभा-ये क्या कर रहे हो

अवी-मलम लगा रहा हूँ

शोभा-मलम लगा रहे हो या फिर से चुदाई करने को तय्यार कर रहे हो

अवी-दोनो एक साथ करता हूँ,क्यूँ तुम थक गयी. और नही करना

शोभा-मैं बाथरूम होकर आती हूँ

अवी-जल्दी आना और ये मेरा कॉंडम निकाल दो

शोभा-ये भी मैं करूँ

अवी-लगाया तुमने है, और निकाल दो शायद तुम्हे क्रीम खाने मिल जाए

शोभा-ऐसा कहो ना

शोभा ने कॉंडम निकाल दिया और लंड पर लगा हुआ वीर्य चाटने लगी.

शोभा-क्रीम को वेस्ट क्यूँ किया. मुझे खिला देते

अवी-तब मुझे कुछ ध्यान नही रहा.जल्दी फ्रेश होकर आओ फिर खिलाता हूँ

शोभा ने मेरे लंड पर लगा हुआ वीर्य चाट कर लंड को साफ किया .और बाथरूम मे चली गयी.

और मैं अपने मोबाइल के साथ टाइम पास करने लगा.

थोड़ी देर बाद शोदा फ्रेश होकर आ गयी. मैं ने शोभा को देखते एक फोटो निकाल लिया.

शोभा-फोटो क्यूँ निकाला

अवी-तुम तो कल चली जाओगी फिर ये फोटो देख कर तुम्हे याद करूँगा.

शोभा-अगर वो फोटो किसी ने देख लिया तो

अवी-तुम भी ना ,लो डेलीट कर दिया.

शोभा-वैसे तुम ने उस चोरनी के साथ क्या किया.

अवी-क्या करता ,पोलीस मे दिया और उसके बेटे को हॉस्पिटल मे अड्मिट किया.

शोभा-तुम ने ऐसा किया, मान गये तुम्हे

अवी-वो जाने दो ,मेरे लंड को खड़ा करो

शोभा-तुम कुछ नही करोगे

अवी-तुम्हारे चूस ने के लिए खड़ा नही किया.

शोभा-अच्छा किया ,

और शोभा मेरे लंड को चूसने लगी. अपने थूक से हाथ गीला कर के मूठ मारने लगी. लंड को हिलाने लगी.

शोभा लंड को हाथ से हिलाने लगी और आंडो को मुँह मे लेकर चूसने लगी.

शोभा पेशाब के लिए जैसे बैठ थी है वैसे बैठ कर लंड को चूसने लगी.

इस तरह बैठ ने से उसकी चूत देख कर मैं एग्ज़ाइट हो गया .और लंड खड़ा हो गया.

लंड खड़ा होने के बाद भी शोभा लंड चूस्ति रही.

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद कॉंडम लगाकर शोभा वैसे ही मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत मे लेकर बैठ गयी.

लंड शोभा की मस्तानी चूत मे चला गया

शोभा अब खुद लंड का मज़ा लेने लगी.

मेरा लंड आजतक सबको पसंद आया ,शोभा को पसंद ना आए ये हो नही सकता.

मैं ने शोभा को मज़ा लेने दिया. मुझे उसकी गंद मारने के लिए थोड़ा आराम की ज़रूरत थी.

शोभा अपना पानी निकलने तक कभी मेरे चेस्ट पे हाथ रख कर, तो कभी अपने पैर पकड़ कर, तो कभी अपने हाथ पीछे ले जाकर लंड पर उछल ने लगी.

पानी निकलते ही शोभा लंड पर बैठ कर हाँफने लगी.

अब मेरी बारी थी. मैं ने शोभा को घोड़ी बना दिया.

अवी-शोभा गंद मे लंड लोगि.

शोभा-डाल दो ,पर आराम से ,वरना मैं गालियाँ दूँगी.

शोभा की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं ने उसकी गंद पर थूक दिया और लंड को गंद पर सेट किया.

शोभा की गंद का छेद खुला था जिस से आधे लंड तक ज़्यादा दर्द नही हुआ. और मुझे भी ज़्यादा ज़ोर नही लगाना पड़ा.

फिर चूत की तरह गंद मे भी एक जोरदार धक्का मार कर शोभा को चीखने पे मज़बूर कर दिया.

मार डाला तुम ने आआहह तुम्हारा दर्द....मार डालो....धीरीए.... मारो ...धीरीए

शोभा का दर्द देख कर मैं रुक गया .

शोभा ने जब तक अपनी गंद हिलाई नही तब तक मैं रुका रहा.

शोभा की गंद हिलाते मैं धीरे धीरे उसकी गंद मारने लगा.

शोभा ने खुद अपनी मस्ती का मज़ा लेना सुरू किया.

शोभा मेरे धक्को के साथ अपनी गंद आगे पीछे करने लगी.

साथ मे मुझे गालियाँ देने लगी.

शोभा की गालियाँ और शीष्कारी सुनकर मैं उसकी गंद फाड़ने लगा.

शोभा के बूब्स लाल करने के बाद अब उसके चूतड़ थप्पड़ और धक्के मार कर लाल करने लगा.

इस पोज़िशन मे शोभा की गंद मारने मे ज़्यादा समय दिया.

मेरे धक्को की वजह से उसके बूब्स झूलने लगे.

फिर शोभा के कहने पे मैं ने पोज़िशन चेंज की.

मैं ने शोभा को दीवार के सहारे खड़ा किया और एक पैर को पकड़ कर उपर किया और पीछे से लंड गंद मे डाल दिया.

खड़े खड़े उसकी गंद मारने लगा.

शोभा इसमे मज़ा ढूँढ कर मेरा साथ देने लगी.

कभी लेफ्ट पैर को उपर करके गंद मारने लगा तो कभी राइट पैर को उपर करके धक्के मारने लगा.

खड़े खड़े गंद मारने मे थोड़ी देर मज़ा आया फिर परेशानी होने लगी.

फिर वापस हम बेड पर आ गये .शोभा को मेरे उपर बैठा कर गंद मारने लगा.

इस बार वो उछल नही रही थी , मैं नीचे से उसकी गंद मारने लगा.

अब उसकी गंद मे दर्द होने लगा.

वो मेरे उपर से उठ गयी और कॉंडम निकाल कर मेरा वीर्य निकालने लगी.

अपनी चूत और गंद बचाने के लिए मुँह का बलिदान दिया.

शोभा ने मुझे नाराज़ नही किया. लंड को स्पीड से चूसने लगी.

और मेरा वीर्य खुशी खुशी पीने लगी.

वीर्य निकालने के बाद मैं थक गया था .

और कब मैं सो गया पता नही चला.

 
680

20थ डे

सुबह अलार्म की आवाज़ सुनकर मेरी नींद खुल गयी.

शोभा मुझसे चिपक कर सो रही थी. उसका एक पैर मेरे उपर था.

मैं ने उसका पैर अलग किया और मैं बाथरूम मे चला गया .और फ्रेश होकर शोभा की गंद पर थप्पड़ मार कर जगाया.

अवी-उठो ,सुबह हो गयी

शोभा-टाइम क्या हुआ

अवी-5.30 बज रहे है.

शोभा-अच्छा हुआ जल्दी उठाया ,वरना मुझे कोई देख लेता.

इतना कह कर शोभा उठ कर अपने कपड़े उठाने लगी.ब्रा इधर थी तो पेटिकोट दूसरी तरफ

शोभा के झुकते मैं उसकी गंद को देखने लगा.

मुझे अपनी गंद को घूरता हुआ देख कर शोभा मुश्कूराने लगी.

शोभा-ऐसे क्या देख रहे हो.

अवी-तुम्हारे खूबसूरत बदन को देख रहा हूँ.

शोभा-रात मे मेरे बदन के साथ खेलने के बाद भी मन नही भरा

अवी-तुम हो ही इतनी मस्त कि फिर से प्यार करते रहने का मन हो रहा है.

मेरी बात सुनते शोभा के चेहरे मे स्माइल आ गयी.

शोभा अपने कपड़े लेकर बाथरूम मे चली गयी .और फ्रेश होकर आ गयी.

अवी-चलो चलते है,

शोभा-मैं चली जाउन्गी.

अवी-कैसा लगा,मज़ा आया रात मे

शोभा-तुम मज़े का दूसरा नाम हो. अगली बार मेले मे आउन्गि तो पहले तुम से मिलूंगी.

अवी-मिल लेना अब चलो

शोभा अपनी शॉल लेकर चली गयी और मैं मंदिर चला गया.

चाची का आशीर्वाद लेकर पूजा सुरू हो गयी.

पूजा हो जाने के बाद मैं चाची के पास गया तो वहाँ सीमा चाची के माता पिता और सीमा चाची की बड़ी बहन अपनी फॅमिली के साथ आई थी.

सी चाची-अवी ,इनको पूजा करवा दो

अवी-जी चाची

मैं ने सीमा चाची के माता पिता और बड़ी बहन को पूजा करने मे मदद करने लगा.

फिर हम सब घर चले गये.

घर आते विद्या ने सीमा चाची के माता पिता के लिए नाश्ता बना दिया.

म चाची-माँ आपने बताया नही कि आप मेले मे आ रही है.

स माँ-सब अचानक तय हुआ ,और हम आ गये

म चाची-कम से कम बता देती तो अवी आपको लेने आ जाता

स माँ-मेले के वजह से तुम सब काम मे बिज़ी होंगे इस लिए बताया नही

स पिताजी-तुम सब मंदिर मे होंगे इस लिए हम सीधा वहाँ आ गये

ब चाची-अच्छा हुआ आप आ गये. अब आपको कुछ दिन रुकना होगा.

स माँ-नही बेटी, हम आज ही जाने का सोच कर आए है.

म चाची-दीदी कह रही है तो रुक जाइए ना ,पिछली बार भी नही रुकी थी.

स पिताजी-बेटी तुम्हे तो पता है कि हम बेटी के ससुराल का पानी भी नही पीते

सी चाची-वो पुरानी बाते है.

स बहन- पिताजी रुक जाते है. बच्चे मेला देख लेंगे.

छोटी चाची ने मेरी तरफ इशारा किया. मैं समझा नही कि छोटी चाची क्या कह रही है.

फिर छोटी चाची मेरे पास आकर मेरे कान मे कहा कि इनको रोको ,गुस्सा करो

स माँ-सीमा तुम्हारे पिताजी सही कह रहे है.

अवी-फिर यहाँ आए क्यूँ ,हमारा अपमान करने के लिए कि हम मेहमान नवाज़ी नही कर सकते ये दिखाना चाहते है आप, बेटी के ससुराल मे आकर उनका अपमान कर रहे है,

ब चाची-अवी ,बडो के साथ कैसा बोला जाता है इतनी अकल नही है तुम्हे

सी चाची-दीदी अवी ठीक कह रहा है.

अवी-बैठे क्यूँ है, जाइए यहाँ से,

स माँ-हमारा ऐसा इरादा नही था. हम तो... आप ही कुछ कहिए ना... बेटी के ससुराल वाले गुस्सा होगे तो कैसा चलेगा.

स पिताजी-पर

अवी-इन से बात करने का कोई फ़ायदा नही होगा.

और मैं गुस्से से खड़ा हो गया.

स माँ-बेटा गुस्सा मत करो हम रुकते है.आप ही कुछ कहिए ना

स पिताजी-हम रुक जाते है.

अपने माँ और पिताजी के रुकने की बात से सीमा चाची तो खुश हो गयी.

पर मेरे इस तरह बात करने से बड़ी चाची नाराज़ हो गयी.

अवी-चाची रोक लिया ना,आप जो चाहती है वो कर दिया.

मेरी बात सुनते चाची के साथ बाकी सब मेरी तरफ देखने लगी.

अवी- मैं आप से माफी माँगता हू. मैं बस आपको रोकने के लिए ऐसा बोल रहा था. चाची आप की माँ रुक रही है. नाश्ता तो लेकर आइए.

मेरी बात सुनते बड़ी चाची रिलॅक्स हो गयी.

ब चाची-तो रोक ने लिए नाटक कर रहे थे

अवी-हाँ,

स माँ-सीमा तेरे भतीजेने हमे रोक लिया.

मैं ने सब से माफी माँगी और फिर हम ने नाश्ता किया.

नाश्ता करने के बाद मैं सीमा चाची की फॅमिली को ले जाकर मंदिर और मेले का एक चक्कर लगवाया.

बड़ी चाची ने सीमा चाची की फॅमिली के लिए स्पेशल खाना बनाया .

खाना खाने के बाद वो सब आराम करने और बाते करने लगे .और मैं रणजीतसिंघ के पास चला गया.

थोड़ी देर मेले का काम देखने के बाद वापस घर आ गया.और सीमा चाची के माँ पिता और बहन के साथ बाते करने लगा.

पायल ने मुझे शाम3.30 बजे कॉल किया .मैं ने पायल को 4.00 बजे बुलाया .ताकि मैं ज़्यादा समय घर मे रह सकूँ.

.

 
अपडेट 680 ए

फिर मैं पायल से मिलने चला गया.पायल मुझसे पहले मैदान मे आ गयी

पायल आज भी स्कर्ट पहन कर आई थी. लेकिन ये कल वाली स्कर्ट नही थी.

अवी-आज भी स्कर्ट पहन कर आ गयी.क्या बात है

पायल-बताया था ना कि मैं ने उस्दिन स्कर्ट खरीदे थे

अवी-कितने स्कर्ट खरीदे थे

पायल-3

अवी-तो रोज पहन कर आओगी. मुझे दिखाने

पायल-तुम्हे दिखाना ज़रूरी है. तुम ही ने तो खरीद कर दिया था.

अवी-लेकिन ये कुछ छोटा नही है,

पायल-वो छोड़ो ये बताओ मैं कैसी दिख रही हूँ

अवी-हॉट आंड हॉट आंड सेक्सी

पायल-थॅंक्स ,चलो लेसन सुरू करते है

फिर पायल मुझे कार चलना सिखाने लगी.

आज तो कुछ ज़्यादा ही हॉट बन कर आई थी पायल, उसके खड़े रहने से स्कर्ट से जंघे दिख रही थी.

अब बैठने से तो कुछ ज़्यादा ही हो गया.अगर और थोड़ी उपर हुई तो पैंटी दिख जाए.

आज तो मेरा लंड खड़ा होकर पायल की गंद पे टच हो रहा था.

ये बात पायल को भी पता थी पर वो मुझे कार चलाना सिखाने लगी.

मेरा मन हो रहा था कि अभी पकड़ कर कार मे चूत मार लूँ.

मैं गियर डालने के बहाने से उसकी जाँघो को टच कर सकता था पर मैं ने ऐसा नही किया.

पायल अपने पैर को मेरे गियर डालते समय मेरे हाथो के पास लाती पर मैं ने प्रॉमिस किया था.

पायल ने एक बार मेरी जाँघो पे हाथ रख दिया था,और कस के दबा कर उसे मेरे गोद मे बैठने से कैसा लग रहा है ये बताने लगी.

बार बार पीछे मूड कर अपने बूब्स मेरे मुँह के पास ला रही थी

एक बार तो वो मुझे बताने के लिए ऐसी मूडी कि हमारे होंठो इतने पास आ गये कि लग रहा था हम ने किस कर लिया है.

2 दिन मे मैं ने कार पे कंट्रोल करना सीख लिया था.

पायल अच्छा सिखा रही थी.

मैं भी अपना पूरा ध्यान कार चलाने पे दे रहा था.

पायल के डिस्ट्रब करने से कार सीखने मे मज़ा आ रहा था.

फिर आज का लेसन पूरा हुआ.

अवी-आज के लिए इतना काफ़ी होगा.

पायल-हाँ. मेले मे जाने का टाइम हो गया.

अवी-तो चले

पायल-मुझे ड्रेस चेंज करना है

अवी-तुम बिना वजह इतनी तकलीफ़ ले रही हो ,किसी दिन हवेली आउन्गा तो पहन कर दिखा देना

पायल-उस दिन का इंतज़ार मुझ से नही होगा.

अवी-जैसा तुम्हे अच्छा लगे वैसा करो,

पायल-मैं ड्रेस चेंज करती हूँ

अवी-तुम हवेली मे ऐसी ड्रेस पहनती हो

पायल-ऐसी ड्रेस पहनी तो माँ मुझे मार डालेंगी

अवी-फिर तुम हवेली से ये ड्रेस पहन कैसे आई

पायल-मैं ने ये ड्रेस सलवार कमीज़ के अंदर पहना था. हवेली से बाहर निकलते सलवार कमीज़ निकाल दी.

अवी-इतना कुछ करने की कोई खास वजा

पायल-तुम्हे स्कर्ट पहन कर दिखाना था.

अवी-और कल क्या किया था

पायल-कल हवेली से बाहर आकर ड्रेस चेंज किया था

अवी-कपड़े चेंज कर लो ,चलो देर हो रही है

पायल ने अपना ड्रेस चेंज किया और हम घर आ गये

 
681

घर आकर मेरी बहनों और सीमा चाची की फॅमिली को लेकर मेले मे चला गया.

सीमा चाची की फॅमिली को मेला दिखाने मे मेरी बहनों मे बहुत मदद की

सीमा चाची की फॅमिली को मेला दिखाने के बाद हम घर आ गये.

घर आते चाची ने हमको खाना दिया. सीमा चाची खुश हो गयी कि उनकी फॅमिली रुक गयी.

फिर सीमा चाची के माँ और पिता से इजाज़त लेकर मैं वापस मेले मे आ गया.

शीला और शीला की सहेली से जो मिलना था.

आज मुझे मेले मे आने मे देर हो गयी थी.वो अभी तक मेरा इंतज़ार कर रही थी.

अवी-सॉरी ,आज आने मे देर हो गयी.

शीला फिर गुस्सा हो गयी.

अवी-मेरे घर मेहमान आए थे ,इसी लिए आने मे देर हो गयी

शीला-झूठे बहाने क्यूँ बना रहे हो

अवी- तुम्हे तो मेरी हर बात झूठी लगती है.

सहेली2-मैं ने कहा था ना कि आज ये नये लोगो के साथ मेला देख रहा था

अवी-वो नये लोग मेहमान थे

शीला-तुम सच कह कर रहे हो

अवी-तुम ऐसे नही मानोगी.तुम सब यहीं रूको मैं शीला को मनाके आता हूँ.

मैं शीला को लेकर कल वाले टेबल पर चला गया .और दुकान वाले को लाइट बंद करने को कहा.

अवी-तुम मुझ पे बीवी की तरह गुस्सा क्यूँ करती हो

शीला-तुम्हे ना देख कर गुस्सा हो गयी.

अवी-तुम्हे पता है तुम्हे गुस्सा क्यूँ आता है

शीला-नही

अवी-क्यूँ कि तुम्हे मुझे प्यार करने का मन हो रहा था और मुझे ना देख कर गुस्सा हो गयी.

शीला-तुम्हे ऐसा क्यूँ लग रहा है

अवी-क्यूँ कि तुम बराबर अपने होंठो पे जीभ घुमा रही हो.अपने होंठो को दाँतों से काट रही हो.

शीला-वो तो ऐसे ही

अवी-तो तुम्हे किस नही करना. कल का किस पसंद नही आया.

शीला-कल का किस मेरा पहला किस था.

मैं ने शीला को पकड़ कर किस करना सुरू किया.

अच्चानक हुए हमले के लिए शीला तय्यार नही थी.

वो कल की तरह शॉक्ड होकर मुझे किस करते हुए देख रही थी.

मैं ने उसके उपर होंठ को चूस कर उसे किस करने के लिए इन्वाइट किया पर उस ने रेस्पॉन्स नही दिया.

शीला ने किस करना सुरू नही किया जिस से मैं ने किस करना बंद किया.

अवी-क्यूँ क्या हुआ. दूसरा किस पसंद नही आया.

शीला-अच्छा लगा मुझे

अवी-फिर तुम ने मुझे किस क्यूँ नही किया.

शीला-मैं इसके लिए तय्यार नही थी.

अवी-अब जब तुम किस करोगी तभी हमारा नेक्स्ट किस होगा .

शीला-मुझ मे इतनी हिम्मत नही है

अवी-हिम्मत करनी पड़ती है. चलो अब मेले मे घूमते है

मैं शीला को लेकर उसकी सहेली के पास आ गया.

सहेली2-क्या कर रहे थे अंदर

अवी-तुम्हारी सहेली कुछ करने नही देती

सहेली1-वो ऐसी ही है.और तुम हो कि उसके पीछे पड़े हो

सहेली2-हम तो अभी भी तय्यार है

शीला ने बात बदल दी.

शीला-वो चली गयी गन्ना खाने

सहेली1-हां, चलो हम भी चलते है

अवी-क्यूँ तुम्हे भी गन्ना खाना है

मेरी बात से शीला पानी पानी हो गयी.

शीला की सहेली मेरी बात सुनते शीला को छेड़ते हुए मज़ाक करने लगी.

सहेली2-शीला को फिर गुस्सा आ जाएगा. उसके साथ ज़्यादा मज़ाक करना ठीक नही होगा.

सहेली1-चलो मेले मे घूमते है.

अवी-घूमने की जगह चलो मौत का कुँआ देखने चलते है

सहेली1-वो हम देख चुके है

अवी-आज मेरे साथ चलो ,मज़ा आएगा

शीला-चलो मौत का कुँआ देखते है

फिर हम मौत का कुँआ देखने चले गये.

शीला को यहाँ लाने की एक खास वजह थी.

मौत के कुँआ का स्टेज कार और बाइक के वजह से हिलता है. और उपर जहाँ से हम देखते है वहाँ अंधेरा रहता है और कोई अंदर ना गिरे इस लिए लकड़ी की 3 फीट उची वॉल रहती है.

पिछली बार मैं अपनी बहनों के साथ यहाँ आया था. तब मैं यहाँ मस्ती करने का सोच रहा था पर बहनों की वजह से रानी के साथ कुछ नही कर पाया.

आज शीला के साथ यहाँ कुछ ना कुछ ज़रूर करूँगा.

मैं ने मौत के कुँए की टिकेट ले ली.

और हम मौत का कुँआ देखने के लिए सीढ़ियों से उपर जाने लगे.

सीढ़ियों के उपर छत थी जैसे एक पाइप बनाया गया था.

हमने उपर जाकर मौत का कुँए का शो देखने के लिए एक सेफ जगह सेलेक्ट की.

शीला और उसकी सहेली ने अपनी जगह ले ली .मैं उन के पीछे जाकर खड़ा हो गया.

शीला बीच मे थी. और उसकी सहेली1 लेफ्ट तरफ और सहेली2 राइट तरफ थी .

मैं शीला के पीछे था पर थोड़ा दूर खड़ा था.

फिर भी शीला थोड़ी अनकंफर्टबल फील कर रही थी.

शो सुरू होते उपर की लाइट बंद हो गयी और मैं शीला से चिपक कर शो देखने लगा.

शीला ने कुछ नही कहा ,उसे लगा कि मैं शो देखने के लिए उस से चिपक गया होउंगा. इस लिए वो चुप चाप शो देकने लगी.

मैं शीला से चिपक ने के बाद उसके हाथो पर अपने हाथ रख दिए. शीला ने अपने हाथ वॉल पे रखे थे.

शीला ने पीछे मूड कर देखा .मैं ने शीता को स्माइल दी. वो वापस शो देखने लगी.

मैं ने अपना सर उसके कंधे पर रख दिया और उसके गर्दन पर फूँक मारने लगा.

फिर मैं मे उसकी गर्दन पे किस किया .

शीला ने फिर मेरी तरफ देखा मैं ने उस पे ध्यान नही दिया और गर्दन पे किस करते गया.

शीला किस करने से वो मदहोश होने लगी.

उस पे मेरा नशा छाने लगा.

वो अपनी गर्दन को मोड़ कर मुझे किस करने से रोकने लगी.

जिस से मैं शीला के कान पे हल्का का सा बाइट करने लगा.

शीता के मुँह से आहह निकल गयी.

शीला की सहेली ने हमारी तरफ देखा और हंस के शो देखने लगी.

फिर मैं ने उसके हाथो के उपर से अपने हाथ हटा दिए. अब वो मुझे रोकेंगी नही.

मैं ने आज लूस जीन्स पहना था जिस से जीन्स मे लंड मे तंबू बन गया.

मैं ने शीला की कमीज़ पीछे से उपर की और अपना लंड उसकी गंद से सटा दिया

लंड गंद पर महसूस करते शीला होश मे आ गयी और उसके हाथ वॉल से हट कर मुझे रोकने के लिए बढ़ रहे थे.

मैं ने उसके हाथ वापस पकड़ लिए.और उसकी जाँघो पे रख कर सहलाने लगा.

शीला के हाथो के उपर मेरे हाथ थे जिस से शीला के हाथ उसके जाँघो सहने लगे.

शीला ने अपनी सहेली की तरफ देखा ,उनको शो देखते हुए देख कर शीला रिलॅक्स हो गयी.

शीला ने इधर उधर देखा कोई उसे देख तो नही रहा है.

पर वो बार बार अपनी गर्दन हिला कर मुझे रुकने को कह रही थी.

मैं अपना काम करता गया. शीला की गर्दन पर किस करता गया .और उसे अपने कब्ज़े मे करने लगा.

जाँघो को सहलाते हुए मैं ने अपने हाथ के साथ उसके हाथ को सलवार के अंदर पैंटी मे डाल दिया

चूत के पास हाथ जाते ही शीला अपना हाथ मेरे हाथो से निकालने की कोशिस करने लगी.

पर मैं ने उसके हाथो को नही छोड़ा.

उसके हाथ को अपने हाथ से चूत पर उपर नीचे हिलाने लगा.

ऐसा करने से शीला खुद अपने हाथो से चूत मसल्ने लगी.

शीला की चूत पे जंगल था. शीला ने कभी बाल साफ नही किए ऐसा लग रहा था.

हमारा खेल ऐसे चलता गया. शीला ने हार मान कर अपनी आँखे बंद कर ली.

चूत के साथ खेलना, गंद पे लंड रगड़ना ,जाँघो को सहलाना, गर्दन पे किस करना एक साथ चल रहा था.

इतना काफ़ी था शीला को अपने कब्ज़े मे करने के लिए.

शीला की सहेली हमारा खेल देख कर मेरी तरफ देख कर स्माइल कर रही थी.

और मुझे चियरअप कर रही थी.

मैं ने शीला पे फोकस जमाए रखा.

मैं ने अभी तक शीला की चूत को टच नही किया .

मेरा हाथ शीला के हाथ के उपर था. और शीला मेरे हाथ की मदद से अपनी चूत सहला रही थी.

मतलब जो कर रही थी तो वो शीला खुद कर रही थी.

मौत के कुँए मे कार उपर आते हेडलाइट शीला पर पड़ने से उसके एक्सपेस्षन दिख रहे थे कि वो कितना मज़ा ले रही है.

शीला की चूत मसल्ते मसल्ते हमारे दोनो के हाथ गीले हो गये.

चूत पे हाथ और गंद पे लंड ,शीला झड गयी.

शीला पानी छोड़ने के बाद कमज़ोर पड़ गयी.

मैं ने अपना हाथ पैंटी से बाहर निकाल दिया .और दूसरा हाथ भी उसकी जाँघो से हटा दिया.

मैं ने उसके कंधो को पकड़ कर उसे खड़ा करे रखा.

मैं ने एक हाथ से अपना लंड उसकी गंद से हटा दिया और उसकी कमीज़ ठीक कर दी.

उसका हाथ अभी भी पैंटी के अंदर था

वो अभी तक अपनी आँखे बंद कर के खड़ी थी.

वो अभी तक उसी दुनिया मे खोई थी जहाँ मैं उसे लेकर गया था.

वो उस दुनिया से बाहर निकलने को तैयार नही थी.

मेरा शो होते मौत का कुँआ का शो भी ख़तम हुआ.

पर शीला अभी तक उसी लम्हे को याद कर रही थी.

सहेली1-शीला ,शीला क्या हुआ

सहेली के हिलाने से शीला होश मे आ गयी.

शीला-वो शो सुरू हो गया

सहेली2-शो सुरू नही ख़तम हो गया.

शीला ने थोड़ी देर पहले क्या हुआ वो याद करने लगी.

उसे याद आते उसने अपने हाथ को पैंटी के अंदर देखा.

शीला ने शरमाते हुए अपना हाथ पैंटी से निकाल लिया .और अपनी मुन्डी नीचे करके एग्ज़िट गेट की तरफ जाने लगी.

हम भी चुप चाप शीला के पीछे पीछे बाहर आ गये.

सहेली1-शो अच्छा था.क्यूँ शीला तुम्हे कैसा लगा

शीला-क्या कहा ,हाँ अच्छा था.

सहेली2-सच मे मज़ा आ गया.

अवी-मेरे साथ बोर शो मे भी मज़ा कर सकते है

सहेली2-वो हम देख कर समझ गये.

सहेली1-शीला तू बहुत लकी है

शीला-शरमाते हुए, चलो अब चलते है

और शीला जाने लगी.

 


682

शीला जाने लगी.

अवी-तुम कहाँ जा रही हो

सहेली2-रूको ना शीला और मेले मे घूमते है

अवी-मेले मे नही. एक बार और मौत का कुँआ देखते है

शीला-मुझे नही देखना

सहेली1-चलना एक बार और देखते है

अवी-रहने दो वो नही आएगी,चलो हम चलते है.

शीला-मुझे बाथरूम जाना है. तुम देख लो

शीला के मना करने के बाद मैं उसकी 2 सहेलियो के साथ मौत का कुँआ देखने चला गया.

हम वापस अपनी जगह पर आ गये. दोनो ने अपनी जगह ले ली

अवी-मैं कहाँ से देखूं

सहेली1-जैसे शीला के साथ देखा था वैसे देखो

अवी-ठीक है. पर तुम उसकी तरह बुरा मत मान लेना.

सहेली2-हम पागल नही है. जो बुरा मान ले.

शो सुरू हो गया और मैं भी सुरू हो गया.

शीला की वजह से जो लंड खड़ा हुआ था उसे उसकी सहेलिया ठंडा करेंगी.

ये मौत के कुँए का आख़िरी शो था इस के बाद वो बंद कर देते है और लास्ट शो लंबा चलता है. ऐसा अनाउन्स हुआ.

शो सुरू होते मैं सहेली1 से जाकर चिपक गया. और मेरा लंड उसकी गंद से टकरा गया.

मुझे इसके साथ शीला जैसा प्यार नही करना था.

डायरेक्ट चुदाई करनी थी.

ये दोनो और शीला मे बहुत फरक था.

शीला को धीरे धीरे लाइन पर लाना होगा तो उसकी सहेलिया तो लाइन मे खड़ी ही हैं.

उनको पता था कि मैं उनको वापस यहाँ क्यूँ लेकर आया हूँ.

दोनो अपनी गंद को थोड़ा बीच से बेंड करके खड़ी थी .

उनको बस इस बात का इंतजार था कि शुरुआत किस से शुरू करूँगा.

और मैं ने शीला की पहली सहेली को सेलेक्ट किया.

उससे पीछे चिपकते ही वो खुश हो गयी.

लाइट ऑफ होते ही मैं सुरू हो गया.

मैं ने अपना हाथ उसकी पैंटी मे डाल दिया.शीला की रासलीला देख कर वो गरम हो चुकी थी.

उसने शीला का शो बहुत एंजाय किया ,जिस से पैंटी मे हाथ जाते मेरा हाथ गीला हो गया.इसकी चूत पे शीला जैसे बाल नही थे.

चूत पर मेरा हाथ महसूस करते उसने अपनी गर्दन मेरी तरफ घुमा दी .

मैं ने उसके होंठो पे किस करना शुरू किया.

शीला जैसी बात उसकी सहेली मे नही थी.

शीला के अनटच होंठो को चूसना कही ज़्यादा मज़ेदार था उसकी फॉर्वर्ड सहेली को किस करने से.

फिर भी दोनो पर्फेक्ट थी मेरी गर्मी निकालने के लिए.

सहेली1 को किस करने के बाद मैं ने उसके कान मे कहा

अवी-हमारे पास टाइम कम है.

सहेली1-तो शुरू हो जाओ,

मैं ने उसकी पैंटी से हाथ निकाल लिया ,मेरा हाथ गीला हो चुका था.जिस से उसकी चूत मे लंड जाने मे आसानी होगी.

और ज़िप खोल कर लंड बाहर निकाला .और पॉकेट से कॉंडम निकाल कर लंड पे लगा लिया.और उसका हाथ पीछे लाकर अपने लंड पर रख दिया.

उसके हाथ मे लंड आते, लंड की साइज़ देखते वो खुश हो गयी.

सहेली 2 हमे कवर करके खड़ी थी. ताकि हम पे किसी की नज़र ना पड़े, और साथ मे वो अपनी चूत भी सहला रही थी. खुद को तय्यार कर रही थी क्यूँ कि उसने मेरी बात सुन ली थी टाइम कम होने की बात

वो मेरे लंड को अपने हाथो से दबा रही थी और मैं ने उसकी सलवार नीचे कर दी. उसकी सलवार एलास्टिक वाली थी.जिस से नीचे गिरने की जगह जाँघो तक नीचे हो गयी.

अंधेरे मे कहा उसकी गंद और चूत के दर्शन करूँ ,जो मिल रहा है उसका मज़ा ले लेता हूँ.

सलवार निकालने के बाद मैं ने उसकी पैंटी को निकाले बिना पहले चूत मे उंगली करके उसे गरम किया.

उसके गरम होते ही पैंटी को थोडा सरका के लंड को चूत पे रख दिया.

चूत पे लंड महसूस करते ही उसने अपनेहोंठो को दबा दिया और दीवार को अपने हाथो से मज़बूती से पकड़ लिया.और अपनी गंद को थोड़ा पीछे किया जिस से लंड चूत मे आराम से जा सके.

पोज़िशन मे आते ही मैं ने एक झटका मारा और लंड चूत मे थोड़ा चला गया. लोगो के चिल्लाने से उसकी आवाज़ दब गयी.

सहेली1-धीरे करो

अवी-एक बार पूरा अंदर जाने दो.

मैं ने फिर मोका देख कर झटका मारकर आधे से ज़्यादा लंड चूत मे डाल दिया.

इस से ज़्यादा अभी डाला तो उसको दर्द होगा. और सब हमारा शो ना देखना सुरू कर दें, मैं उतने ही लंड से उसकी चूत मारने लगा.

पहले मैं धीरे धीरे उसकी चूत मे धक्के मारने लगा.

हमारे बाजू वाले कपल किस कर रहे थे जिस से हमे ज़्यादा परेशानी नही हुई.

रात का लास्ट शो इस इलिए होता है ,फॅमिली वाले नही थे जिस से पूरे कपल शो की जगह खुद मज़ा कर रहे थे.इसी लिए तो लास्ट शो लंबा और टिकेट के रेट बढ़ा देते है.

शीला की सहेली चुदाई कर चुकी थी फिर भी उसको मेरे लंड से दर्द हो रहा था.

वो मेरे लंबे लंड को चूत मे लेकर खुश थी.

सहेली 2 अपनी सहेली की खुशी देख कर अपनी चूत को सहला रही थी.

थोड़ी देर ऐसे ही चूत मारने के बाद मैं ने उसे 2 कदम पीछे आने को कहा जिस से उसकी गंद पीछे आ गयी और वो अपने हाथो को मोड़ कर वॉल पे रख कर शो देखने लगी.

मैं अब आराम से उसकी चूत मारने लगा. वो शो देखते हुए चुदाई का मज़ा ले रही थी.

कार की वजह से पूरा स्टेज हिलने लगता जिस से धक्के मारने मे मज़ा आ रहा था.

अंधेरे मे दूर से देखने पर ऐसा लग नही रहा था कि मैं चुदाई कर रहा हूँ.

जिस तरह स्टेज के हिलने से लोग हिलते हुए शो देख रहे थे, हम भी उसी रिदम मे हिलते हुए चुदाई कर रहे थे.

वो ऐसे पब्लिक मे चुदाई करने से ,मेरे लंबे लंड के धक्को से, चुदाई का पूरा मज़ा लेने से उसका पानी निकल गया.

फिर भी मैं धक्के मार कर पूरा लंड चूत मे डाल कर पेलता गया.

कब पूरा लंड उसकी चूत मे गया था वो पता नही चला पर मज़ा दोनो को मिल रहा था.

सहेली2-मेरा भी ख़याल रखना

सहेली1-मेरा तो होने दे

सहेली2-झूठ मत बोल ,तेरा पानी निकला है

अवी-तुम दोनो झगड़ा मत करो. चलो मेरे पीछे आ जाओ

मैं उन दोनो को लेकर एंट्री गेट के पास गया. टिकेट चेकर सीडियों के नीचे रहता था और शायद राउंड की थी. और छत वाली थी. यहाँ किया तो किसी को पता नही चलेगा.

अवी-ये जगह ठीक है

सहेली2-अब मेरा नंबर है

अवी-तो बन जाओ घोड़ी .

वो अपनी सलवार नीचे करके झुक गयी. मैं ने उसकी पैंटी निकाले बिना लंड चूत मे डालने लगा.

वो मेरा लंड चूत मे लेकर खुश हो गयी. और दर्द से अपनी गंद हिलाने लगी.

उसने अपना मुँह बंद करके रखा और सहेली1 नज़र रख रही थी कोई हमारे तरफ ना आए.

मैं नीचे की तरफ देख कर उसकी चूत मे धक्के मारने लगा.और सहेली 1उपर की तरफ ध्यान रख कर अपना नंबर फिर से लगने का इंतजार कर रही थी.

मैं ने उनको कहा था कि आवाज़ मत करना वो दोनो मेरी बात समझ गयी.

मैं ने सहेली1 को पकड़ कर अपनी तरफ खिचा.और उसकी चूत को मसल्ते हुए सहेली2 की चूत बजाने लगा.

धीरे धीरे धक्के मारने लगा. ताकि सीढ़िया ज़्यादा ज़ोर से हीले नही.

दोनो ने मेरे बारे में जैसा सोचा था वैसा ही मुझे पाया.

दोनो को अब तक जो नही मिला था वो मैं दे रहा था. जहाँ तक कोई गया नही था वहाँ मैं पहुँच गया.

वो दोनो शीला को लकी मान रही थी. पर शीला से उनको मैं मिल गया.

उन दोनो ने कभी सोचा नही था कि मैं उनकी चुदाई करूँगा.

पर मेरा गन्ना शीला से पहले उनको मिला था

सहेली2-शीला सच मे पागल है

अवी-वो पागल नही हुई.उसे प्यार हुआ है.

सहेली1-और हमे

अवी-तुम्हारी प्यास बुझा रहा हूँ

सहेली2-ज़ोर से मारो

मैं ने सहेली1 को दूर किया और शीला की दूसरी सहेली 2 को चोदने लगा.

ये बहुत समय ले रही थी .चलो कोई बात नही इसका पानी भी निकाल दूँगा.

मेरा लंड उसका पानी निकालने की पूरी कोशिस करने लगा. और कोशिस करने वालो की जीत होती है.

मैं ने फाइनली उसका पानी निकाल दिया.

वो पूरी तरह से संतुष्ट हो गयी.

उसका तो हो गया पर शीला की सहेली1 फिर तय्यार हो गयी.

मैं सीढ़ियों पे बैठ गया और वो लंड पे बैठ गयी.

और धीरे धीरे लंड पर उछलने लगी.

उसकी सहेली2 की चुदाई के वक्त वो चूत मे उंगली कर रही थी. जिस से इस बार वो जल्दी जड़ जाएगी.

मैं ने थोड़ी देर उसको उछलने दिया फिर उसको सीढ़ियों पे बैठा कर चूत को फैलाने को कहा.

और उसकी चूत मे लंड डाल कर धक्के मारने लगा.

उसने जल्दी अपनी चूत को बहने दिया.

अब शीला की दूसरी सहेली2 की बारी थी पर हमारे पास उतना टाइम नही था.

मैं ने लंड को हिला कर वीर्य निकालने का फ़ैसला किया.

मुझे तो उनकी गंद मारने का मन हो रहा था.

मुझे दोनो मे कोई इंटेरेस्ट नही था. मैं तो खुद को हल्का कर रहा था.

मैं कॉंडम निकाल कर लंड को हिलाने लगा.

वो दोनो मेरे लंड के सामने मुँह खोल कर बैठ गयी.

पता नही शीला इनकी सहेली कैसी बनी.

शीला सीधी सादी ,और उसकी सहेलिया पूरी फॉर्वर्ड

शीला वर्जिन और उसकी सहेलिया फटी हुई.

मैं ने लंड को हिला कर पहली पिचकारी शीला की सहेली1 के मुँह मे डाली और दूसरी पिचकारी दूसरी सहेली2 के मुँह मे डाली.

दोनो मज़े मे मेरा वीर्य पी गयी.

शो भी ख़तम हो गया

अवी-चलो यहाँ से

सहेली1-आज चुदाई मे बहुत मज़ा आया

सहेली2-हां, शीला ने क्या मिस्ड किया है उसे पता नही है.

अवी-शीला को इसके बारे में मत बताना

सहेली2-क्यूँ?

अवी-क्यूँ कि वो स्पेशल है.वो तुम से अलग है.

सहेली1-इसी लिए तुम ने अब तक कुछ नही किया

अवी-उसके मर्ज़ी के बिना कुछ नही करूँगा. चले अब

फिर हम एंट्री गेट से बाहर आ गये.

शीला अपनी सहेली3 के साथ हमारा इंतज़ार कर रही थी.

हमारे आते हम मेले से बाहर आने लगे.

शीला मुझ से दूर होकर चल रही थी. और मुझसे बात नही कर रही थी.

मैं ने भी शीला से बात नही की और हम अपने अपने रास्ते चले गये.

मैं बाइक लेकर घर3 चला गया. और जाकर सो गया

 
683

21 डे

कल रात मेले मे शीला की सहेली की चुदाई करके मज़ा आ गया.

पब्लिक प्लेस मे चुदाई करने का अलग मज़ा होता है.

शीला मुझसे नाराज़ थी पर कोई बात नही आज उसको मना लूँगा.

मैं सुबह अपने समय पर उठ कर घर3 पे फ्रेश होने की जगह घर चला गया.

घर पे मेहमान थे.जिस की वजह से मैं घर जाकर उनको समय देना चाहता था.

घर पे सब मंदिर जाने की तय्यारी कर रहे थे.मैं उनके साथ मिक्स होकर मंदिर चला गया.

मंदिर मे हमारे साथ पूजा करने से सीमा चाची की फॅमिली खुश हो गयी.

पूजा करने के बाद हम घर आ गये.सब ने मिलकर नाश्ता किया.

स माँ-सीमा अब हमे चलना चाहिए.

म चाची-माँ और कुछ दिन रुक जाओ ना

स माँ-रुक जाते पर वहाँ गाओं मे घर बार देखना पड़ता है ,कल तेरे कहने मे हम रुक गये थे ना ,

स पिताजी-सीमा तुम्हारी माँ ठीक कह रही है.

अवी-चाची आप कहो तो रोक लूँ

ब चाची-नही अवी, उनको जाने दो, घर खेत भी देखने पड़ते है.

बड़ी चाची के सामने किस की चलती है. सीमा चाची अपने माँ के गले लग गयी.मैं ने भी उनका आशीर्वाद लिया .और उनको शहर तक छोड़ने चला गया.

छोटी चाची ने डेलिवरी के वक्त कहा था कि इनका ख़याल रखने के लिए. मैं ने सीमा चाची के पिताजी के मना करने के बाद भी उनको बस की टिकेट निकाल कर दी .और वो अपने गाओं चले गये.

उनको छोड़ने के बाद मैं घर आ गया.

मेरे घर आते सीमा चाची मेरे कमरे मे आ गयी.

मेरे कमरे मे आते सीमा चाची मेरे गले लग गयी.

और रोने लगी.

सीमा चाची की आँखो मे पानी देख कर मुझे अच्छा नही लग रहा था.

हमेशा हसी मज़ाक करने वाली मेरी चाची की आँखो पानी देख कर मुझे बुरा लग रहा था.

मैं ने सीमा चाची को बेड पर बैठा दिया.और उनके आसू पहुँच ने लगा.

अवी-चाची क्या हुआ ,मुझ से कोई ग़लती हो गयी.

चाची ने फिर मुझे गले लगाया. और रोने लगी.

चाची को रोता हुआ देख कर मैं भी रोने लगा.

अवी-बताइए ना चाची क्या हुआ,आप क्यूँ रो रही है.मैं भी रो दूँगा.

सीमा चाची ने अपने आसू साफ किए

म चाची-तू क्यूँ रो रहा है

अवी-आप को रोता हुआ देख कर मुझे भी रोना आ गया.

म चाची-ये तो खुशी के आसू थे

अवी-खुशी के आसू

म चाची-हाँ, आज पहली बार मेरी माँ पिताजी यहाँ रुके है. और सब तुम ने किया ,मैं आज बहुत खुश हूँ

अवी-खुशी मे कोई रोता है, बिना वजह मुझे रुला दिया.

म चाची-मैं खुश भी हूँ और माँ के जाने से दुखी भी हूँ,

अवी-मैं ने आपको पूछा था कि फिर रोकू क्या लेकिन आपने कुछ नही कहा.

म चाची-वो नही रुकते, बड़ी मुश्किल से कल रुके थे. कल मैं बहुत खुश थी. और ये खुशी तुम ने दी

अवी-आपको खुश देखना ही मेरा सपना है.

म चाची-तुम्हे पता है ,पहली बार जब मेरी माँ और पिताजी यहाँ आए थे तो क्या हुआ था

अवी-क्या हुआ था

म चाची-तुम्हारी दादाजी ने रुकने को कहा था पर वो रुके नही जिस से तुम्हारी दादाजी बहुत गुस्सा हुए थे.

अवी-दादाजी ने क्या कहा था

म चाची-कहा तो कुछ नही पर जब भी मेरे माता पिता यहाँ आते तो तुम्हारे दादाजी गुस्से मे बाहर चले जाते ,मुझे बहुत बुरा लगता था.

अवी-तभी मेरे गुस्सा होने से वो रुक गये

म चाची-हाँ, मेरी माँ फिर से मेरे ससुराल वालो को गुस्सा होने नही देना चाहती थी.इसी लिए वो रुक गये.

अवी-आप जो चाहती थी वो हो गया. अब ये रोना बंद कीजिए

म चाची-ये खुशी के आसू है.हर बार मेरी माँ मेरे घर से बिना कुछ खाए चली जाती थी. कल उनको अपने हाथो से खाना खिला कर मुझे कितनी खुशी हुई है तुम्हे बता नही सकती.

अवी-फिर तो मुझे इनाम मिलना चाहिए,मैं आप से कुछ मांगू

म चाची-हाँ तेरा तो पूरा हक है मुझ पे

अवी-आप प्रॉमिस कीजिए दुबारा कभी रोएंगी नही, मुझे आपके चेहरे पे खुशी देखना ज़्यादा अच्छा लगता है.

म चाची-मैं प्रॉमिस करती हूँ

अवी-ऐसे नही किस करके बोलिए

म चाची-किस, तू नही सुधरेगा ,

और सीमा चाची ने मुझे किस किया.

अवी-ये हुई ना बात

म चाची-वैसे अवी तुम्हे मेरी माँ पे इतना गुस्सा नही करना चाहिए था.

अवी-क्यूँ ना करता ,आपको खुश जो करना था.

म चाची-क्यूँ कि तू उनसे छोटा है.

अवी-उमर मे छोटा हुआ तो क्या हुआ रिश्ते मे बड़ा हूँ

म चाची-बुद्धू रिश्ते मे भी तुम छोटे हो.

अवी-मैं उनका दामाद हूँ ,और दामाद कुछ भी कर सकता है

म चाची-तू दामाद ,तू उनके पोते जैसा है.

अवी-परी कौन है

म चाची-हमारी बेटी

अवी-फिर आप मेरी बीवी हुई ना

म चाची-देखा जाए तो हाँ

अवी-तो आपकी माँ मेरी कौन हुई

म चाची-सास

अवी-आप समझ गयी. फिर भी अपने पति को प्यार नही कर रही हो

म चाची-मेरे पातिदेव को प्यार चाहिए,

अवी-हाँ, कुछ मीठा खाने का मन हो रहा है

म चाची-अभी तो खाया मीठा

अवी-और खाना है

चाची ने फिर से मुझे किस किया.

इस बार मैं भी चाची के होंठो को चूस कर उनका साथ देने लगा.

किस करने के बाद हम फिर से बाते करने लगे की.छोटी चाची आ गयी.

सी चाची-क्या बाते हो रही है ,

अवी-लो आ गयी आपकी सौतन

सी चाची-क्या कहा तूने

अवी-आप दोनो मेरी बीवी है तो आप सौतन हो गयी कि नही

म चाची-2 कहाँ 3 है ,दीदी को भूल गया.

अवी-मुझे याद है पर आप उनको नही बता रही है उसका क्या

सी चाची-बता दूँगी.पहले हम से तो प्यार कर लो

अवी-कर लूँ

सी चाची-मेरा मतलब था कि.

अवी-जाने दीजिए, मुझे ऐसे प्यार करने मे मज़ा आने लगा है. चुपके चुपके

सी चाची-तो दीदी के साथ यहाँ प्यार हो रहा था.

म चाची-हाँ,हम प्यार कर रहे थे कि तू बीच मे आ गयी.

सी चाची-आपको मेरा आना अच्छा नही लगा. कबाब हड्डी हो गयी मैं

म चाची-नही तो क्या. कितने दिन बाद अवी अकेले मे मिला उसमे भी तू आ गयी.

छोटी चाची ने अपना चेहरा छोटा किया और जाने के लिए पलट गयी.

म चाची-मीना कहाँ जा रही है .

सी चाची-यहाँ मेरी ज़रूरत नही है. यहाँ रुक कर क्या करूँ

अवी-आप भी ना ,बिना वजह मेरी प्यारी चाची को नाराज़ किया ,अब उनको कैसे मनाउ

और छोटी चाची को पकड़ कर अपनी गोद मे गिरा दिया और किस करने लगा.

म चाची- मीना तुम हमेशा मुझे परेशान करती है. आज तेरा नंबर आ गया.

सी चाची-दीदी ,आप भी ना ,मुझे कितना बुरा लग रहा था. बता नही सकती

म चाची-मैं क्या करती पातिदेव का हुकुम था उनको मीठा खाना है, मैं ने तो खिला दिया पर उनको और खाना था .

सी चाची-पहले बता देती थी तो मना थोड़े ही करती.

अवी-चाची उसमे इतना प्यार नही मिलता जितना आपको मनाने से मिला है.

म चाची-अब ऐसा लग रहा कि मैं कबाब मे हड्डी को गयी हूँ

अवी-अब आप शुरू मत होना. और वैसे भी मुझे कबाब भी पसंद है और हड्डी भी. आप दोनो डिसाइड करो कौन क्या बन ना चाहता है

सी चाची-मैं हड्डी ठीक रहूंगी.

म चाची-नही. तू कबाब अच्छी लगेगी

सी चाची-दीदी आप कबाब अच्छी लगेंगी.

अवी-आप दोनो आराम से डिसाइड करो मैं चलता हूँ मेले मे

छोटी चाची और सीमा चाची को प्यार करने के बाद मैं मंदिर चला गया.

 


684

चाची से प्यार करने के बाद मैं रणजीतसिंघ से मिलने के लिए मंदिर मे चला गया.

रणजीतसिंघ की सेक्रेटरी टेंट के बाहर खड़ी थी.

अवी-तुम बाहर क्यूँ खड़ी हो और रणजीतसिंघ कहाँ है

सेक्रेटरी-सर हवेली गये है. थोड़ी देर मे आ जाएँगे.

अवी-और तुम यहा क्यूँ खड़ी हो जैसे पहेरेदारी कर रही हो

सेक्रेटरी-वो अंदर

अवी-अंदर ,अंदर कौन है

सेक्रेटरी-अंदर एक लड़की है,सर ने उस लड़की के साथ मज़ा करने के लिए बुलाया है.

अवी-उसे बुला कर रणजीतसिंघ कहाँ गया.

सेक्रेटरी-वो यही थे. उस लड़की के साथ पर बड़े सर(ठाकुर)का फोन आया और उनको बीच मे छोड़ कर जाना पड़ा

अवी-ये तो मेरे लिए अच्छा हुआ. तुम यहीं रूको मैं अंदर जाकर काम पूरा करके आता हूँ.

सेक्रेटरी-ऐसा मत करना वरना सर मुझ पे गुस्सा होगे. तुम को करना है तो मेरे साथ कर लो

अवी-तुम्हारे साथ भी करूँगा पर मेले के बाद ,और हां अंदर किसी को आने मत देना.

रणजीतसिंघ की सेक्रेटरी मुझे रोक ने की पूरी कोशिस कर रही थी. पर मैं ने उसकी बात नही सुनी.और अंदर आ गया.

टेंट मे एक लड़की सिर्फ़ कमीज़ पहन कर बैठ थी. उसकी सलवार पास मे पड़ी थी.

उसने मुझे देखते,अपने आपको छुपाना सुरू किया.

मैं उस लड़की के पास जाकर बैठ गया. वो लड़की दिखने मे ठीक ठाक थी.

अवी-डरो मत, मुझे रणजीतसिंघ ने भेजा है

लड़की-वो कहाँ है

अवी-वो किसी काम मे फस गये इस लिए मुझे भेजा है. तुम्हे प्यार करने के लिए

लड़की-वो ऐसा क्यूँ करेंगे.तुम झूठ बोल रहे हो

अवी-अगर मैं झूठ बोल रहा होता तो सेक्रेटरी मुझे अंदर नही आने देती.

वो कुछ सोचने लगी.

लड़की-(रणजीतसिंघ से तो ये अच्छा दिख रहा है. इसको रणजीतसिंघ के साथ देखा है. ये झूठ क्यूँ बोलेगा)ठीक है.

उसके हां करते मैं उसकी कमीज़ उपर करके उसकी चूत देखने लगा.

उसकी चूत पर हल्के बाल थे और वो वर्जिन थी.

वो मुझे अपनी चूत की तरफ ऐसा देखते हुए देख कर शरमा गयी और कमीज़ नीचे की.

वर्जिन चूत मज़ा आ जाएगा.उसकी वर्जिन चूत देख कर मैं उस पे टूट पड़ा .और उसके होंठो पे किस करने लगा.

उसको आराम से लेना होगा वरना टेंट के बाहर भीड़ लग जाएगी.

उसने मेरे होंठो पे अपने होंठ रख कर लॉक कर दिए.

ये था अनाड़ी किस, चलो कोई बात नही इसमे भी मज़ा ढूँढ लूँगा.

मैं उसे किस करते हुए बूब्स को अपने चेस्ट को रगड़ने लगा.

उसको किस करने के बाद मैं ने उसे सास लेने के लिए छोड़ दिया.

उसके साँस लेने से बूब्स एक रिदम मे हिलने लगे.

मैं ने ज़्यादा देर ना करते हुए उसकी कमीज़ निकाल दी.क्यूँ कि रणजीतसिंघ आ गया तो मैं कुछ नही कर पाउन्गा. कमीज़ निकलते वो पूरी नंगी हो गयी.

उसके नंगे होते ही मैं ने सोफे पर उसे लिटा दिया.और मैं उसके उपर आकर बूब्स के साथ खेलने लगा.

रणजीतसिंघ के माल के साथ खेलने मे मज़ा आ रहा था.

रणजीतसिंघ जब देखेगा कि उसके माल को मैं हजम कर गया तो उसका चेहरा देखने लायक होगा.

रणजीतसिंघ ने अब तक मुझे घटिया माल सप्लाइ की थी

आज इसकी चुदाई करके रणजीतसिंघ को झटका दूँगा.

उसके बूब्स छोटे थे .जिस से वो मेरे हाथ मे आराम से आ रहे थे.

उसके छोटे बूब्स को चूसने और मसल्ने मे मज़ा आ रहा था.

क्यूँ कि थोड़ी देर पहले रणजीतसिंघ इसके बूब्स के साथ खेल रहा था .और उसके जाते मैं हाथ साफ कर रहा था.

जब रणजीतसिंघ इसकी फटी हुई चूत देखेगा तो उसकी गंद फट जाएगी.

शेर के शिकार का शिकार करने मे जो मज़ा है वो किसी और मे नही हो सकता.

रणजीतसिंघ इसकी फटी हुई चूत देखेगा तो मुझ पर गुस्सा होगा.

होने दो गुस्सा पर आज रणजीतसिंघ की चिड़िया को उड़ा ले जाउन्गा.

मैं अपना काम मन लगा कर रहा था. अभी मन लगा के कर रहा था बाद मे लंड लगा कर करूँगा.

जब वो लंबी साँस लेती तो उसकी चेस्ट फूल जाती और बूब्स गायब हो कर सिर्फ़ निपल दिखने लग जाते

ऐसे निपल को चूसने का एक्षपीरियंस लेने लगा.

उसकी बूब्स को चूस्ते हुए मैं उसकी चूत मे उंगली भी करने लगा. ताकि वो जल्दी गरम हो जाए.

मुझे रणजीतसिंघ के आने से पहले इसकी चुदाई करनी होगी.

थोड़ी देर बूब्स और चूत के साथ खेलने के बाद मैं उसके उपर से उठ कर खड़ा हो गया.

जीन्स और अंडरवेर घुटने तक नीचे कर ली. और मेरा लंड उसको दिखाने लगा.

वो मेरे लंड को देखती रह गयी.

रणजीतसिंघ के काले लंड से मेरा गोरा लंड कही ज़्यादा दमदार था.

अवी-लंड चूसा है कभी

लड़की-अभी थोड़ी देर पहले रणजीतसिंघ का लंड चूसा था.

अवी-रणजीतसिंघ का, मेरा भी चूस लो, तुम्हे मेरा लंड पसंद आएगा.

वो उठ कर सोफे पर बैठ गयी.और मेरे लंड को हाथ मे लेकर देखने लगी. और एक झटके मे लंड को मुँह मे ले लिया.

रणजीतसिंघ का लंड और मेरा लंड साथ मे लड़की के सामने होगा तो लड़की मेरा लंड चूसना पसंद करेगी.

इसी लिए मैं ने रणजीतसिंघ के साथ मिलकर किसी की चुदाई नही की.

वरना हर चुदाई मे रणजीतसिंघ को बुरा लग जाता क्यूँ कि लड़की मेरे लंड को अपने अंदर ज़्यादा देर रखती.

वो धीरे धीरे मेरे लंड को चूस कर मुझे मज़ा देने लगी.

उसके लंड चूसने से मुझे मज़ा मिल रहा था और चूत मे डालने के लिए लंड चिकना हो गया.

रणजीतसिंघ इतनी अच्छी माल को छोड़ कर कैसे जा सकता है. उसके जैसा गधा वही होगा.

उस ने थोड़ी देर मेरा लंड चूस कर गीला कर दिया.

वो सोफे पर बैठ कर मेरा लंड चूस रही थी. मैं ने उसे वैसे बैठ रहने को कहा.और उसको आराम से बैठने को कहा और उसके पैर को उठा कर उपर किए.

ऐसा करने से उसकी चूत सोफे के एड्ज पर आ गयी .और उसका वेट सोफे पर आ गया.

मैं वैसे खड़े रह कर उसके उपर झुकने लगा.और लंड को उसकी चूत पर सेट किया.

उसने अपनी आँखे बंद की मैं ने पॉकेट से रुमाल निकाल कर उसके मुँह मे डाल दिया. उसको पता था कि मैं ने ऐसा क्यूँ किया.

चिको का बंदोबस्त करने के बाद मैं ने पहला झटका मारा ,टोपा उसकी चूत मे चला गया.

लंड इस लड़की की चूत मे जा रहा था और गंद फट रही थी सेक्रेटरी की

रणजीतसिंघ मुझे इस लड़की की चुदाई करते हुए देखेगा तो सेक्रेटेरी की गंद फाड़ देगा.

सेक्रेटेरी दुआ कर रही थी कि मेरे कुछ करने से पहले रणजीतसिंघ आ जाए ताकि उसकी जान बच जाए.

सेक्रेटेरी ने मुझे रोकने की कोशिस की थी पर मैं कहाँ उसकी बात मान ने वाला था.

सेक्रेटेरी ने अपनी चूत मारने को कहा ,पर वर्जिन चूत मैं कैसे जाने देता.

टोपा अंदर जाते ही उसने आँखे खोली .और मैं ने दूसरा झटका मारकर उसे लड़की से औरत बना दिया.

दर्द से उसकी आँखो से पानी निकलने लगा. थोड़ा लंड अभी बाहर था. मैं मे उतने लंड को धीरे से थोड़ा बाहर निकाल कर फिर अंदर कर दिया.

उसकी आँखो से पानी निकलता गया. मैं ने उसके मुँह से कपड़ा निकाल लिया.

कपड़ा निकालते ही वो रोने लगी. उसके चीखने से पहले मैं ने उसे किस करना सुरू किया.

लंड को वैसे चूत मे रख कर उसे किस करने लगा.और एक हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा.ताकि उसका दर्द जल्दी ख़तम हो जाए.

उसकी चूत सहलाते हुए मैं धीरे धीरे लंड को हिलाने लगा.

इधर दर्द इस लड़की को हो रहा था और थोड़ी देर बाद ऐसा दर्द सेक्रेटेरी को होगा.

सेक्रेटेरी टेंट के अंदर नही आई पर रणजीतसिंघ को कॉल ज़रूर कर रही होगी.

चुदाई से पसीने हमारे निकलने चाहिए पर पसीने सेक्रेटेरी के निकल रहे थे.

खून इस लड़की की चूत सेनिकल रहा था पर सेक्रेटेरी के बदन का खून डर के मारे सुख गया था.

ऐसी चुदाई करने मे मज़ा आता है जहाँ लंड किसी औरकी चूत मे हो और गंद किसी औरकी फट रही है

मैं तो इस लड़की से ज़्यादा सेक्रेटेरी के बारे में सोच रहा था.

उसकी कसी हुई चूत मे लंड अंदर बाहर करने से मुझे मज़ा आ रहा था और उसको दर्द हो रहा था.

लेकिन इस बीच एक अच्छी बात ये हुई कि उसका पानी निकल गया.ओरल सेक्स और रणजीतसिंघ के साथ मस्ती करने से उसका पानी निकल गया.

पानी निकलने से खेल मे मज़ा आना सुरू हुआ.

हम टेंट मे खेल खेल रहे थे और सेक्रेटेरी पहेरेदारी कर रही थी.

क्यूँ कि थोड़ी देर मे उसकी गंद फटने वाली है

रणजीतसिंघ मुझे क्या कहेगा इस से ज़्यादा ये इम्पोर्टेंट था कि सेक्रेटेरी के साथ क्या करेगा.

मैं ने उसको किस करना बंद किया और धीरे धीरे चोदने लगा.

ऐसा चोदने लगा कि उसको भी मज़ा आने लगा.

उसको मज़ा लेता हुआ देख कर मैं भी जोश मे आ गया और पता भी नही चला कब पूरा लंड उसकी चूत मे चला गया.

हम दोनो चुदाई का पूरा मज़ा लेने लगे.

फिर मैं ने उसकी चूत से लंड बाहर निकाला. लंड पे खून लगा हुआ था. मैं ने खून साफ किए बिना सोफे पर उसके पीछे बैठ गया.

उसको सही पोज़िशन मे ला कर लंड को धीरे धीरे चूत मे डालने लगा.

चूत मे लंड जाते ही मैं धक्के मारने लगा.

वो भी मेरे लंड का पूरा साथ देने लगी.

उसे काले लंड की जगह गोरा लंड मिला था.

लंबा और मोटा लंड मिला था.

एक जवान लंड मिला था.

वो अपनी पहली चुदाई का भरपूर मज़ा लेने लगी.

मैं उसकी गर्दन घुमा कर उसे किस करते हुए धक्के मारने लगा.

वो पहली चुदाई मुझसे मेरे लंड से करवा कर बहुत खुश थी.

इसका सबूत उसकी चूत दे रही थी. उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया.

उसकी चूत से पानी निकलते ही मैं ने वापस लंड बाहर निकाल लिया. और उसे सोफे पर लिटा दिया.

और मैं उसके उपर आकर लंड को चूत मे डाल कर दना दन पेलने लगा.

3 र्ड बार उसकी चूत मे लंड डालने से चूत लंड को आराम से अंदर आने देने लगी.

चूत के खुलते मैं अपनी मर्ज़ी से उसकी चूत मारने लगा.

वो शीष्कारिया लेते हुए धक्को का साथ देने लगी.

उसका साथ मिलते लंड झटके मारते हुए अपनी खुशी का इज़हार करने लगा.

अभी तक ना मेरा वीर्य निकला था और ना सेक्रेटेरी अंदर आई थी.

लेकिन इसकी चुदाई करते हुए बहुत समय हो चुका था जिस से अब मेरा वीर्य और सेक्रेटेरी के आने का समय हो गया था.

मैं ने अपनी गति बढ़ा कर चुदाई करना सुरू किया.

और एक जोरदार झटके के साथ मैं ने उसकी चूत मे वीर्य डाल दिया.

इधर मेरा वीर्य निकला था और उधर सेक्रेटेरी रणजीतसिंघ के साथ अंदर आ गयी

वीर्य उसकी चूत मे डाल कर मैं उसके उपर गिर गया और उधर रणजीतसिंघ अंदर आकर हमे देखने लगा.

 


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मैं उस लड़की के उपर गिर गया.

रणजीतसिंघ-गुस्से से अवी

रणजीतसिंघ की आवाज़ सुनकर मैं होश मे आ गया.और उसकी चूत से लंड निकाल कर खड़ा हो गया.

उस लड़की ने अपने बदन को कपड़ो से छुपा लिया.

मेरा लंड अभी तक खड़ा था और ढीला पड़ रहा था.मेरे लंड पे उसका खून और वीर्य लगा हुआ था.

सेक्रेटेरी तो बस मेरे लंड को देख रही थी. उसकी आँखे मेरे लंड से हट नही रही थी.

रणजीतसिंघ भी मेरे गोरे लंड को देख कर कुछ पल के लिए देखता रहा .और सोच रहा होगा कि उसका काला लंड काश मेरे लंड जैसा होता.

सेक्रेटरी-

अवी-कहाँ खो गये तुम दोनो

मैं ने रणजीतसिंघ को होश मे लाया

रणजीतसिंघ-ये तुमने ठीक नही किया.

अवी-क्या ठीक नही किया

रणजीतसिंघ-मैं उस लड़की की चुदाई करने वाला था,

अवी-तो कर लो ,बहुत मज़ा देती है.

रणजीतसिंघ-क्या कर लो ,मेरे पहले तुम ने उसकी चुदाई कर ली. मुझे तुम से ऐसी उम्मीद नही थी. तुम ने अपने दोस्त को धोका दिया

सेक्रेटरी-सर मैं ने रोका था अवी को पर वो अंदर चला गया

रणजीतसिंघ-तुम ने अवी को बताया नही कि इसके साथ मैं करने वाला हूँ

सेक्रेटरी-कहा था सर ,फिर भी वो अंदर चला गया. मैं ने तो

रणजीतसिंघ-मैं ने तो क्या

सेक्रेटरी-मैं ने अवी से कहा था कि मेरे साथ कर लो ,और इसको आपके लिए रहने दो पर

रणजीतसिंघ-अवी ये सब ठीक नही हुआ. तुम ने अपने दोस्त को धोका दिया

अवी-मैं ने कोई धोका नही दिया.

रणजीतसिंघ-इसके साथ चुदाई करके क्या किया

अवी-मज़ा लिया ,और मैं ने तुम्हारे बारे में सोच कर इसकी चुदाई की

रणजीतसिंघ-मेरे बारे में सोच कर मैं समझा नही.

अवी-समझाता हूँ पहले पानी कहाँ है ये बताओ ,लंड साफ करना है.

रणजीतसिंघ-इसे पानी दो

सेक्रेटरी ने मुझे पानी नही दिया और खुद पानी लाकर मेरे लंड को साफ करने लगी.

रणजीतसिंघ अपनी चेयर पे जाकर बैठ गया. वो लड़की अभी तक वैसे ही पड़ी थी.

सेक्रेटेरी ने मेरे लंड को साफ किया और लंड पे एक किस किया.

सेक्रेटरी-इसे मैं अपने अंदर जल्दी लेकर रहूंगी.

फिर मैं ने कपड़े पहन लिए और रणजीतसिंघ के पास जाकर बैठ गया.

अवी-मैं ने तुम्हारे बारे में सोच कर इसकी चुदाई की.

रणजीतसिंघ-अच्छे से बताओ

अवी-तुम ने क्या कहा था कि मुझे मेले मे मज़े करवाउंगा पर तुम ने कुछ भी मज़ा नही करवाया.

रणजीतसिंघ-तुम ही ने तो मना किया था.

अवी-किया था पर अब मैं फ्री हूँ,और जैसे ही इस लड़की को देखा तो सोचा तुम बाद मे इसको मेरे पास भेजोंगे इस से अच्छा है कि मैं यहीं चुदाई कर लूँ

रणजीतसिंघ-मैं तुम्हे कोई और देता ,

अवी-मैं ने तुम्हे गिफ्ट देते हुए ऐसा नही सोचा था.मैं ने चुदाई करने की जगह तुम्हे कुवारि गंद दी थी.

रणजीतसिंघ-मेरे कहने का वो मतलब नही था.

अवी-फिर क्या था. तुम अच्छी लड़कियो के साथ मज़े करो ,तुम्हारे मज़े हो जाने के बाद मेरे पास भेजो. जैसे उस औरत को भेजा था.(पहली औरत रणजीतसिंघ ने मेरे पास भेजी थी)

रणजीतसिंघ-तुम बात को कहाँ से कहाँ ले जा रहे हो

अवी-तुम ने बात ही ऐसी की ,मुझे धोकेबाज कह रहे थे.

रणजीतसिंघ-कूल यार, जाने दो जो हो गया सो हो गया.

अवी-कैसे भूल जाउ ,मैं ने इस लड़की की चुदाई करते हुए तुम्हारे बारे में सोचा था.

रणजीतसिंघ-बताया तुम ने

अवी-वो नही बताया. तुम्हे पता है कि मुझे तुम्हारी तरह गंद मारने मे मज़ा आता है.

रणजीतसिंघ-हां पता है

अवी-फिर भी मैं ने इसकी गंद को हाथ नही लगाया ,तुम्हारे लिए इसकी गंद को टच भी नही किया. सोचा तुम्हे एक और कुवारि गंद मिल जाएगी.और तुम हो कि

रणजीतसिंघ-तुम ने सच मे ऐसा सोचा

अवी-फिर शक कर रहे हो. जाकर उसकी गंद देख लो

रणजीतसिंघ-सॉरी यार, मैं ने बात समझे बिना,गुस्से मे कुछ भी बोल दिया.

अवी-गुस्सा तो मुझे भी आता है.

रणजीतसिंघ-मैं क्या करता ,मैं भी इसकी चूत और गंद मारना चाहता था ,तुम्हे इसके साथ देख कर गुस्सा आ गया. सॉरी

अवी-ठीक है.(ग़लती होने पे उल्टा गुस्सा करने पे ग़लती किस की है और सॉरी कौन बोलता है पता नही चलता)

रणजीतसिंघ-मुँह से बोलो कि माफ़ किया.चाहे तो इसकी गंद भी तुम मार लो

अवी-वो गंद तुम्हारे लिए है, और दोस्त पे भरोसा करना सीखो

रणजीतसिंघ-दुबारा ऐसा नही होगा.

अवी-ठीक है. उस लड़की को पेन किल्लर और प्रेगेन्सी रोकने की गोली दे देना

सेक्रेटरी-मैं ने खिला दी.

अवी-स्मार्ट हो तुम

रणजीतसिंघ-वो छोड़ो मैं क्या कह रहा हूँ वो सुनो

अवी-सुन रहा हूँ

रणजीतसिंघ-कल और परसो मेले का काम तुम्हे देखना है.मुझे ज़रूरी मीटिंग अटेंड करनी है. एक नयी फॅक्टरी ले रहा हूँ.

अवी-देख लूँगा, पर लास्ट के 2 दिन तुम्हे देखना होगा.

रणजीतसिंघ-ठीक है. 22 23 तुम और 24 25 को मैं

अवी-मैं देख तो लूँगा पर

रणजीतसिंघ-ये सेक्रेटरी रहेंगी यहाँ और कुछ लड़किया भेज दूँगा ,एंजाय करना

अवी-ये हुई ना बात

सेक्रेटरी-लड़कियो की क्या ज़रूरत है मैं हूँ ना

अवी-डियर, तुम यहीं रहोगी. वो लड़किया मेले के बाद चली जाएँगी.मेला हो जाने दो फिर तुम ही तुम होगी

सेक्रेटरी-समझ गयी.

अवी-वैसे उन प्रॉस्टिट्यूट का क्या हुआ. तुम पता करने वाली थी ना.

सेक्रेटरी-हाँ वो

उसके कुछ बोलने से पहले उसका हाथ पकड़ कर मेरी गोद मे बैठा दिया और उसको किस करने लगा.

उसकी लिपस्टिक खाने लगा. वो पहले खुद को संभालने लगी फिर मेरा साथ देने लगी.

अवी-अब बोलो

मैं उसकी जाँघो पे हाथ घुमाने लगा

सेक्रेटरी-उनके बारे में सब पता किया है.वो 12 लड़किया और औरतें है

अवी-शहर मे भी रंडीपना करती है

सेक्रेटरी-नही. उनका एजेंट कोई और है. वो उनको अपने घर रखता है. और क्लाइंट के साथ उनको बाहर भेज कर काम करवाता है. वो औरतें क्लाइंट के पास जाती है क्लाइंट को उसके बारे में कुछ पता नही होता ,डील एक एजेंट करता है.

अवी-तुम ने तो पूरी बाइयोग्रफी निकाल ली

सेक्रेटरी-निकालनी पड़ी. अब वो एजेंट यहाँ मेले मे क्लाइंट ढूंढता है फिर लड़की को कॉल कर क्लाइंट के साथ जंगल मे भेजता है.

अवी-और क्या पता किया

सेक्रेटरी-ज़्यादा पैसे वो एजेंट रखता है और उन औरतों को कम पैसे देता है. वो औरतें कई दिन से उसके पास है.

अवी-तो हमे उसे एजेंट को पकड़ना होगा.

रणजीतसिंघ-उसको तो मैं संभाल लूँगा.

सेक्रेटरी-उन औरतों मे से कुछ औरतो की फॅमिली है शहर मे, उनकी फॅमिली वालो इसके बारे में पता नही है. 8 औरतें दिन मे अच्छे और रात मे गंदे काम करती है. बाकी की 4 आरतें उस एजेंट के साथ रहती है.

मैं ने उसकी चूत पे हाथ रखा.और उसकी चूत को कपड़ो के उपर से मसल्ने लगा

अवी-तुम ने अच्छा काम किया

सेक्रेटरी-हमें आज रात मे उनको पकड़ना होगा.

रणजीतसिंघ-मैं अपने आदमियो को काम मे लगा दूँगा

अवी-हम उनको पोलीस मे देते है

सेक्रेटरी-वो एजेंट पोलीस को पैसे देता है

रणजीतसिंघ-मैं अपने आदमियो की मदद लूँगा

अवी-तुम को तो मीटिंग की तय्यारी करनी होगी

रणजीतसिंघ-मीटिंग की तय्यारी हो गयी

सेक्रेटरी-सर का काम करने का तरीका अलग है.वो मीटिंग से पहले ही पूरा काम कंप्लीट करते है.

अवी-ठीक है.रात मे कब पकड़ना है उनको

सेक्रेटरी- शाम9.00 बज़े के बाद

अवी-मुझे कॉल कर देना ,मैं उस समय मेले मे रहता हूँ

सेक्रेटरी-मैं कर लूँगी.

रणजीतसिंघ-ये तो हो गया. अब काम देखते है

अवी-चलो एक चक्कर मार कर आते है,पर इस लड़की का क्या

सेक्रेटरी-मैं हूँ ना,मैं इसे देख लूँगी.

अवी-तो उठो मेरे उपर से

सेक्रेटरी-थोड़ी देर बैठने दो ना, अच्छा लग रहा है.

अवी-क्यूँ पानी नही निकाला

सेक्रेटरी-निकल रहा है.

रणजीतसिंघ-निकाल दो इसका पानी,बिचारी दिन भर खुजाति रहेगी

मैं सेक्रेटरी को किस करते हुए चूत मसल्ने लगा.

वो मेरा लंड देख कर गरम हो चुकी थी जिस से उसका पानी जल्दी निकल गया.

सेक्रेटरी का पानी निकालने के बाद मैं और रणजीतसिंघ मेले का काम देखने लगे.

मेले का काम देखने के बाद मैं घर चला गया.

रणजीतसिंघ के शिकार का शिकार करके मज़ा आ गया.

 
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