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21 डे
कल रात मेले मे शीला की सहेली की चुदाई करके मज़ा आ गया.
पब्लिक प्लेस मे चुदाई करने का अलग मज़ा होता है.
शीला मुझसे नाराज़ थी पर कोई बात नही आज उसको मना लूँगा.
मैं सुबह अपने समय पर उठ कर घर3 पे फ्रेश होने की जगह घर चला गया.
घर पे मेहमान थे.जिस की वजह से मैं घर जाकर उनको समय देना चाहता था.
घर पे सब मंदिर जाने की तय्यारी कर रहे थे.मैं उनके साथ मिक्स होकर मंदिर चला गया.
मंदिर मे हमारे साथ पूजा करने से सीमा चाची की फॅमिली खुश हो गयी.
पूजा करने के बाद हम घर आ गये.सब ने मिलकर नाश्ता किया.
स माँ-सीमा अब हमे चलना चाहिए.
म चाची-माँ और कुछ दिन रुक जाओ ना
स माँ-रुक जाते पर वहाँ गाओं मे घर बार देखना पड़ता है ,कल तेरे कहने मे हम रुक गये थे ना ,
स पिताजी-सीमा तुम्हारी माँ ठीक कह रही है.
अवी-चाची आप कहो तो रोक लूँ
ब चाची-नही अवी, उनको जाने दो, घर खेत भी देखने पड़ते है.
बड़ी चाची के सामने किस की चलती है. सीमा चाची अपने माँ के गले लग गयी.मैं ने भी उनका आशीर्वाद लिया .और उनको शहर तक छोड़ने चला गया.
छोटी चाची ने डेलिवरी के वक्त कहा था कि इनका ख़याल रखने के लिए. मैं ने सीमा चाची के पिताजी के मना करने के बाद भी उनको बस की टिकेट निकाल कर दी .और वो अपने गाओं चले गये.
उनको छोड़ने के बाद मैं घर आ गया.
मेरे घर आते सीमा चाची मेरे कमरे मे आ गयी.
मेरे कमरे मे आते सीमा चाची मेरे गले लग गयी.
और रोने लगी.
सीमा चाची की आँखो मे पानी देख कर मुझे अच्छा नही लग रहा था.
हमेशा हसी मज़ाक करने वाली मेरी चाची की आँखो पानी देख कर मुझे बुरा लग रहा था.
मैं ने सीमा चाची को बेड पर बैठा दिया.और उनके आसू पहुँच ने लगा.
अवी-चाची क्या हुआ ,मुझ से कोई ग़लती हो गयी.
चाची ने फिर मुझे गले लगाया. और रोने लगी.
चाची को रोता हुआ देख कर मैं भी रोने लगा.
अवी-बताइए ना चाची क्या हुआ,आप क्यूँ रो रही है.मैं भी रो दूँगा.
सीमा चाची ने अपने आसू साफ किए
म चाची-तू क्यूँ रो रहा है
अवी-आप को रोता हुआ देख कर मुझे भी रोना आ गया.
म चाची-ये तो खुशी के आसू थे
अवी-खुशी के आसू
म चाची-हाँ, आज पहली बार मेरी माँ पिताजी यहाँ रुके है. और सब तुम ने किया ,मैं आज बहुत खुश हूँ
अवी-खुशी मे कोई रोता है, बिना वजह मुझे रुला दिया.
म चाची-मैं खुश भी हूँ और माँ के जाने से दुखी भी हूँ,
अवी-मैं ने आपको पूछा था कि फिर रोकू क्या लेकिन आपने कुछ नही कहा.
म चाची-वो नही रुकते, बड़ी मुश्किल से कल रुके थे. कल मैं बहुत खुश थी. और ये खुशी तुम ने दी
अवी-आपको खुश देखना ही मेरा सपना है.
म चाची-तुम्हे पता है ,पहली बार जब मेरी माँ और पिताजी यहाँ आए थे तो क्या हुआ था
अवी-क्या हुआ था
म चाची-तुम्हारी दादाजी ने रुकने को कहा था पर वो रुके नही जिस से तुम्हारी दादाजी बहुत गुस्सा हुए थे.
अवी-दादाजी ने क्या कहा था
म चाची-कहा तो कुछ नही पर जब भी मेरे माता पिता यहाँ आते तो तुम्हारे दादाजी गुस्से मे बाहर चले जाते ,मुझे बहुत बुरा लगता था.
अवी-तभी मेरे गुस्सा होने से वो रुक गये
म चाची-हाँ, मेरी माँ फिर से मेरे ससुराल वालो को गुस्सा होने नही देना चाहती थी.इसी लिए वो रुक गये.
अवी-आप जो चाहती थी वो हो गया. अब ये रोना बंद कीजिए
म चाची-ये खुशी के आसू है.हर बार मेरी माँ मेरे घर से बिना कुछ खाए चली जाती थी. कल उनको अपने हाथो से खाना खिला कर मुझे कितनी खुशी हुई है तुम्हे बता नही सकती.
अवी-फिर तो मुझे इनाम मिलना चाहिए,मैं आप से कुछ मांगू
म चाची-हाँ तेरा तो पूरा हक है मुझ पे
अवी-आप प्रॉमिस कीजिए दुबारा कभी रोएंगी नही, मुझे आपके चेहरे पे खुशी देखना ज़्यादा अच्छा लगता है.
म चाची-मैं प्रॉमिस करती हूँ
अवी-ऐसे नही किस करके बोलिए
म चाची-किस, तू नही सुधरेगा ,
और सीमा चाची ने मुझे किस किया.
अवी-ये हुई ना बात
म चाची-वैसे अवी तुम्हे मेरी माँ पे इतना गुस्सा नही करना चाहिए था.
अवी-क्यूँ ना करता ,आपको खुश जो करना था.
म चाची-क्यूँ कि तू उनसे छोटा है.
अवी-उमर मे छोटा हुआ तो क्या हुआ रिश्ते मे बड़ा हूँ
म चाची-बुद्धू रिश्ते मे भी तुम छोटे हो.
अवी-मैं उनका दामाद हूँ ,और दामाद कुछ भी कर सकता है
म चाची-तू दामाद ,तू उनके पोते जैसा है.
अवी-परी कौन है
म चाची-हमारी बेटी
अवी-फिर आप मेरी बीवी हुई ना
म चाची-देखा जाए तो हाँ
अवी-तो आपकी माँ मेरी कौन हुई
म चाची-सास
अवी-आप समझ गयी. फिर भी अपने पति को प्यार नही कर रही हो
म चाची-मेरे पातिदेव को प्यार चाहिए,
अवी-हाँ, कुछ मीठा खाने का मन हो रहा है
म चाची-अभी तो खाया मीठा
अवी-और खाना है
चाची ने फिर से मुझे किस किया.
इस बार मैं भी चाची के होंठो को चूस कर उनका साथ देने लगा.
किस करने के बाद हम फिर से बाते करने लगे की.छोटी चाची आ गयी.
सी चाची-क्या बाते हो रही है ,
अवी-लो आ गयी आपकी सौतन
सी चाची-क्या कहा तूने
अवी-आप दोनो मेरी बीवी है तो आप सौतन हो गयी कि नही
म चाची-2 कहाँ 3 है ,दीदी को भूल गया.
अवी-मुझे याद है पर आप उनको नही बता रही है उसका क्या
सी चाची-बता दूँगी.पहले हम से तो प्यार कर लो
अवी-कर लूँ
सी चाची-मेरा मतलब था कि.
अवी-जाने दीजिए, मुझे ऐसे प्यार करने मे मज़ा आने लगा है. चुपके चुपके
सी चाची-तो दीदी के साथ यहाँ प्यार हो रहा था.
म चाची-हाँ,हम प्यार कर रहे थे कि तू बीच मे आ गयी.
सी चाची-आपको मेरा आना अच्छा नही लगा. कबाब हड्डी हो गयी मैं
म चाची-नही तो क्या. कितने दिन बाद अवी अकेले मे मिला उसमे भी तू आ गयी.
छोटी चाची ने अपना चेहरा छोटा किया और जाने के लिए पलट गयी.
म चाची-मीना कहाँ जा रही है .
सी चाची-यहाँ मेरी ज़रूरत नही है. यहाँ रुक कर क्या करूँ
अवी-आप भी ना ,बिना वजह मेरी प्यारी चाची को नाराज़ किया ,अब उनको कैसे मनाउ
और छोटी चाची को पकड़ कर अपनी गोद मे गिरा दिया और किस करने लगा.
म चाची- मीना तुम हमेशा मुझे परेशान करती है. आज तेरा नंबर आ गया.
सी चाची-दीदी ,आप भी ना ,मुझे कितना बुरा लग रहा था. बता नही सकती
म चाची-मैं क्या करती पातिदेव का हुकुम था उनको मीठा खाना है, मैं ने तो खिला दिया पर उनको और खाना था .
सी चाची-पहले बता देती थी तो मना थोड़े ही करती.
अवी-चाची उसमे इतना प्यार नही मिलता जितना आपको मनाने से मिला है.
म चाची-अब ऐसा लग रहा कि मैं कबाब मे हड्डी को गयी हूँ
अवी-अब आप शुरू मत होना. और वैसे भी मुझे कबाब भी पसंद है और हड्डी भी. आप दोनो डिसाइड करो कौन क्या बन ना चाहता है
सी चाची-मैं हड्डी ठीक रहूंगी.
म चाची-नही. तू कबाब अच्छी लगेगी
सी चाची-दीदी आप कबाब अच्छी लगेंगी.
अवी-आप दोनो आराम से डिसाइड करो मैं चलता हूँ मेले मे
छोटी चाची और सीमा चाची को प्यार करने के बाद मैं मंदिर चला गया.