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फ्लॅशबॅक 812ए
जयसिंघ को इजाज़त ही मिलते वो खुश हो गया
पर पिताजी को पता था कि आगे क्या हो सकता है
और उसके लिए तय्यार थे पिताजी
इसी लिए ऐसे प्रॉमिस लिए
माजी- क्या बात हुई
पिताजी- वो शहर3 जाएगा
माजी- वो मैं जय की खुशी देख कर समझ गयी
पिताजी- क्या हमने ठीक किया
माजी- बच्चो की खुशी तो चाहिए हमे , मुझे आप पे विश्वास है
पिताजी- विश्वास
माजी- आपने ज़रूर आगे का कुछ सोचा होगा
पिताजी- मैं ने जयसिंघ को कहा कि उसकी शादी मेरे मर्ज़ी से होंगी
माजी- ये तो आपने बहुत अच्छा किया , हमारी बहू जय को बदल देगी
पिताजी- हाँ
माजी- और हम ऐसी बहू ढूंढ़ेंगे जो जय के लिए पर्फेक्ट हो , और वो हमारी बेटी बन कर रहे
पिताजी- मैं ने भी यही सोचा था
माजी- और ऐसे तो हमारा पोता हमारे पास रहेगा
पिताजी- बस जय सिंग को अपना प्रॉमिस याद रहना चाहिए
माजी- मैं उसे याद दिला दूँगी
पिताजी- पर हम उसपे दबाव नही डाल सकते
माजी- वो बाद की बात है , आज आपने सब ठीक कर दिया
पिताजी- तुम खुश हो ना
माजी- वो तो रात मे पता चल जाएगा आपको
पिताजी- आज मना मत करना किसी बात के लिए
माजी- आज तक कभी किया है
पिताजी- अभी हाँ कहती हो और रात मे मना करती हो धीरे करो
माजी- आज नही कहूँगी
पिताजी- चलो मूवी देखते है
माजी- नीता की वजह से हमे मूवी देखने को मिलती है वरना आप तो कभी मुझे दिखाते ही नही
पिताजी- क्यू ,शादी होते ही मेरे पिताजी से छुप कर हम मूवी देखने गये थे ,भूल गयी
माजी-गाइड , याद है मुझे वो मूवी
पिताजी- पर जयसिंघ ने सही कहा जमाना बदल रहा है , कहाँ वो मैं बचपन मे ब्लॅकन्वाइट मूवी देखते और कहाँ ये रंगीन मूवी , सब कुछ बदल गया है
माजी- पर आप नही बदले , आज भी उतना ही प्यार करते हो जितना पहले करते थे
पिताजी- अब मेरा प्यार बढ़ गया है
माजी- अब चुप रहिए , छोटू पास मे ही है
पिताजी- वो बच्चा है
माजी- वो भी बड़ा हो रहा है
पिताजी- रात मे बात करते है
और सब मूवी का मज़ा लेने लगे
छोटू ने इंटर्वल मे 4 समोसे दबा लिए
मूवी ख़त्म होते ही जयसिंघ ने सबको थॅंक्स कहा
और किताबो के लिए जो पैसे जमा किए थे जयसिंघ ने उन पैसो से सबको आइस क्रीम खिलाई
ये देख कर पिताजी को अच्छा लगा
जयसिंघ अपने काम मे लग गया
उसको अच्छे मार्क लाने थे
अपना सपना पूरा करना था
पूजा नेहा और नीता ने अपने भाई के सपने को पूरे करने की तरफ एक कदम बढ़ा दिया
उनके इस एक कदम से जयसिंघ को एक उम्मीद की किरण मिल गयी
छोटू को तो जल्दी खुद का अलग कमरा मिलेगा
जयसिंघ के जाते ही पूरा कमरा उसका होगा
नेहा नीता ने अपना काम कर दिया
वो फिर से अपनी मस्ती मज़ाक मे लग गयी
उनकी मस्ती मज़ाक दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी
माँ तो परेशान हो गयी थी
माँ उनको खाना बनाना सिखाने की जितनी कॉसिश करती दोनो दाल मे कुछ काला कर देती
पर माँ ने हार नही मानी
पिताजी के टोकने के बाद भी पूजा नेहा और नीता को घर के काम सिखाने लगी
थोड़ा मुश्किल था
पर वो माँ थी , अपने बेटी को शादी के बाद गालियाँ सुनने थोड़ी देती
ऐसा ट्रेन किया कि उनके हाथ का कोई खाना खा ले तो उंगलिया चाट ले
लेकिन इस बीच नेहा और नीता ने मस्ती करना बंद नही किया
स्कूल के मास्टर जी से लेकेर प्रिन्सिपल की चेयर के नीचे पटाखे लगा कर उनकी नींद खराब कर दी
उनकी कंप्लेंट किस से करे ,
उनके पिताजी है योगेद्रसिन्घ , और ठाकुरजी उनके अंकल थे
उनका मूड होता खेलनेका तो वो चुपके से घंटी बजा देती
चपरासी जो सोया रहता है उसकी नींद खराब करने से नेहा और नीता को बहुत मज़ा आता था
एक बार तो चपरासी के हाथ लगते लगते बच गयी
फिर भी टीचर की फेव स्टूडेंट मे से एक थी नेहा और नीता
जयसिंघ जितनी पढ़ाई मे तेज नही थी पर कुछ कम भी नही थी
खेल मे तो चॅंपियन थी
हर गेम खेल लेती
और बिना चीटिंग के खेलती
क्यू कि उनको गेम मे कोई हरा ही नही सकता था
जयसिंघ अगर पढ़ाई मे ट्रॉफ़ी लाता तो नेहा नीता गेम जीत कर ट्रॉफ़ी लाती
पिताजी ने उनकी ट्रॉफ़ी को संभाल कर रखा था
घर मे अगर कोई आता तो उनकी नज़र इस ट्रॉफ़ी पे जाती
सभी भाई बहन एक ही स्कूल मे थे
पर सब की क्लास अलग थी बस नेहा नीता एक क्लास मे थी
सबको जयसिंघ स्कूल मे ले जाता और वापस ले आता
पूजा की सहेली भी उसी स्कूल मे थी , मंदा
मंदा को जयसिंघ अच्छा लगता था पर पूजा ने उसे पहले बता दिया कि ऐसे सपने मत देख कि जिसके टूटने के चान्स ज़्यादा है
मंदा उस बात को समझ गयी कि जयसिंघ उसका नही हो सकता
पर उसका भाई राकेश वो पूजा के हाथ का मार खा कर भी चुप बैठने की जगह पूजा के पीछे पीछे लगा रहता था
मंदा ने भी राकेश को कई बार थप्पड़ मारा पर वो कुछ सुनने को तय्यार ही नही था
ये तो बच्पना था बड़ा हो जाएगा तो सब समझ जाएगा
जयसिंघ ने अपने पिताजी को दिए हुए वादे के मुताबिक 1 साल अपने भाई बहनों को दिया
स्कूल के लंच ब्रेक मे सबको एक साथ लेकर पेड़ के नीचे बैठ कर खाना खाते
लंच ब्रेक मे भाई बहन से दोस्त बन जाते
नेहा - भैया ये पेड़ पिताजी ने लगाया हैना
जयसिंघ- हाँ , जिस दिन मुझे स्कूल मे अड्मिशन दिलाने लाए थे तब पिताजी ने मुझे बताया था ,ये हमारे लिए लगाया था ताकि हम इसके छान्व के नीचे खेल सके पढ़ाई कर सके
नेहा - ये पेड़ हमारा हैना
पूजा - हाँ , हम बचपन से इसके छान्व के नीचे खेल कर बड़े हो रहे है
छोटू-अगेर ये अमरूद का पेड़ होता तो कितना अच्छा होता
नेहा- ये छोटू , तुझे मोटू होना है
छोटू- ये दो चोटी वाली बंदर की साली
नेहा - मैं बंदर की साली , पूजा दीदी आपके राजकुमार को बंदर कहा
पूजा - छोटू मार चाहिए
छोटू - मैं भी मारूँगा
जयसिंघ- छोटू पूजा बड़ी हैना,
छोटू- आप सब मेरे छोटे होने का फ़ायदा उठाते है
पूजा - तू तो रोने लगा है
छोटू- आप हर बार मेरा मज़ाक उड़ाती है
पूजा - तू इतना प्यारा है कि प्यार से तुझे छोटू कहते है
नेहा - तू तो हमसे भी बड़ा हो जाएगा एक दिन ,तब तू हमे छोटू कहना
छोटू- उस दिन मैं आपको तंग करूँगा
जयसिंघ- उसके लिए पढ़ाई करनी पड़ती है
छोटू - मुझसे पढ़ाई होती ही नही
नीता - हमारे साथ क्यू नही करता पढ़ाई
छोटू - मैं मास्टर जी के पास जाउन्गा शाम मे पढ़ाई करने
जयसिंघ- वाआअ रे मेरे शेर
पूजा - चलो खाना तो हो गया अब क्या करे
जयसिंघ - इस पेड़ के नीचे बैठ कर बाते करते है ,
नेहा - इस पेड़ के साथ हमने कितने दिन बिताए होंगे
नीता - मुझे नही पता , भैया से पूछो उनका मेद्स अच्छा है
जयसिंघ- हम बड़े होकेर जब भी यहा आएँगे ना हम अपने बचपन को याद करेंगे
नेहा - मुझे बड़ा होना ही नही है मैं ऐसी ठीक हूँ
नीता - मैं भी , बड़े होने पे मस्ती कर ही नही सकते
पूजा - हम करेगे साथ मिलकर
नेहा - वो कैसे
पूजा - हम अपने बच्चो के साथ बच्चा बन कर अपने बचपन को दुबारा जियेंगे
नेहा- ये तो अच्छा सुझाव दिया आपने
नीता - हम अपने बच्चों को इसी स्कूल मे भेजेंगे , वो भी इस पेड़ के नीचे खेलेंगे
छोटू - भैया तो जा रहे है ,
नेहा - वो वापस आएँगे , आएँगे ना भैया
जयसिंघ - तुम्हारे लिए वापस आउन्गा
नीत- हमे भूल गये
जयसिंघ -तुम सबके लिए वापस आउन्गा ,
नेहा - और हम फिर से अपने बच्चो के साथ अपने बचपन को जियेंगे
नीता - ये पेड़ उस बात का गवाह रहेगा
छोटू- मेरे बच्चे तो सब से छोटे रहेंगे उनको भी छोटू कहोगी
नेहा- नही , तू ही छोटू रहेगा , हमारा प्यारा छोटू
पूजा - भैया आप शहर जाओगे तो साल मे एक बार वापस आएँगे ना
जयसिंघ- दीवाली मे आउन्गा
पूजा - मेरे लिए शहर3 से गिफ्ट लाओगे
जयसिंघ- तुम सब के लिए लाउन्गा
नेहा - मुझे मेरा और आपका गिफ्ट चाहिए
जयसिंघ- तुझे तो सबसे ज़्यादा गिफ्ट दूँगा
नीता - भैया वो हमने आपको एक कम्पास दिया था वो कहाँ है
जयसिंघ- वो संभाल कर रखा है
पूजा - आप इस्तेमाल नही करते , हमने पैसे जमा करके आपके लिए लिया था
जयसिंघ- किया ना , पर अब उसको तुम सब की याद बना कर संभाल कर रखा है
नेहा - आप उसको हमेशा अपने पास रखना
जयसिंघ- वो मुझे तुम सब की याद दिलाएगा
नेहा - हम जैसे अपनी डॉल संभालते है वैसे संभाल कर रखना
नीता - हाँ भैया , हमारी डॉल को हम किसी को हाथ लगाने नही देते वैसे आप भी किसी को मत देना
पूजा - क्यू ना हम
जयसिंघ- बोलो ना
पूजा - कुछ नही ,
छोटू- भैया आप जाएँगे तो मैं इस पेड़ का ख़याल रखूँगा
पूजा - तुझे ही रखना होगा
जयसिंघ - अपनी बहनों को ख़याल रखना , मेरे ना होने पे तू अपने आप बड़ा हो जाएगा
छोटू - जी भैया मैं आपकी तारा सबका ध्यान रखूँगा
जयसिंघ - चलो अब क्लास शुरू हो गया है
नेहा - भैया
जयसिंघ- हाँ
नेहा - आपकी बहुत याद आएगी
और नेहा जयसिंघ के गले लग गयी नेहा का देख कर नीता और पूजा भी गले लग गयी
पाँचो भाई बहन कुछ देर ऐसे एक दूसरे के प्यार को फील करने लगे
जयसिंघ- अभी मेरे जाने को 3 महीने बाकी है
नेहा - समय कैसे बीत जाता है पता ही नही चलता
पूजा - ये 2 महीने की छुट्टियाँ हम साथ मे खेतो मे बिताएँगे
जयसिंघ- हाँ, हमारे आम के बगीचे मे
नेहा - खूब मस्ती करेंगे
नीता - वहाँ भी हम अपने बचपन को क़ैद करके रखेंगे
जयसिंघ-चलो अब , वरना मैं रो दूँगा
पाँचो भाई बहन एक एक दिन ऐसे ही हँसी मज़ाक मस्ती , के साथ बिताने लगे
स्कूल मे बने हुए पेड़ मे अपने बचपन की यादो को संभाल कर रखने को कहा
ताकि जब उनके बच्चे यहाँ आए तो ये पेड़ उनको इनके बचपन की कहानी सुनाए
जयसिंघ को इजाज़त ही मिलते वो खुश हो गया
पर पिताजी को पता था कि आगे क्या हो सकता है
और उसके लिए तय्यार थे पिताजी
इसी लिए ऐसे प्रॉमिस लिए
माजी- क्या बात हुई
पिताजी- वो शहर3 जाएगा
माजी- वो मैं जय की खुशी देख कर समझ गयी
पिताजी- क्या हमने ठीक किया
माजी- बच्चो की खुशी तो चाहिए हमे , मुझे आप पे विश्वास है
पिताजी- विश्वास
माजी- आपने ज़रूर आगे का कुछ सोचा होगा
पिताजी- मैं ने जयसिंघ को कहा कि उसकी शादी मेरे मर्ज़ी से होंगी
माजी- ये तो आपने बहुत अच्छा किया , हमारी बहू जय को बदल देगी
पिताजी- हाँ
माजी- और हम ऐसी बहू ढूंढ़ेंगे जो जय के लिए पर्फेक्ट हो , और वो हमारी बेटी बन कर रहे
पिताजी- मैं ने भी यही सोचा था
माजी- और ऐसे तो हमारा पोता हमारे पास रहेगा
पिताजी- बस जय सिंग को अपना प्रॉमिस याद रहना चाहिए
माजी- मैं उसे याद दिला दूँगी
पिताजी- पर हम उसपे दबाव नही डाल सकते
माजी- वो बाद की बात है , आज आपने सब ठीक कर दिया
पिताजी- तुम खुश हो ना
माजी- वो तो रात मे पता चल जाएगा आपको
पिताजी- आज मना मत करना किसी बात के लिए
माजी- आज तक कभी किया है
पिताजी- अभी हाँ कहती हो और रात मे मना करती हो धीरे करो
माजी- आज नही कहूँगी
पिताजी- चलो मूवी देखते है
माजी- नीता की वजह से हमे मूवी देखने को मिलती है वरना आप तो कभी मुझे दिखाते ही नही
पिताजी- क्यू ,शादी होते ही मेरे पिताजी से छुप कर हम मूवी देखने गये थे ,भूल गयी
माजी-गाइड , याद है मुझे वो मूवी
पिताजी- पर जयसिंघ ने सही कहा जमाना बदल रहा है , कहाँ वो मैं बचपन मे ब्लॅकन्वाइट मूवी देखते और कहाँ ये रंगीन मूवी , सब कुछ बदल गया है
माजी- पर आप नही बदले , आज भी उतना ही प्यार करते हो जितना पहले करते थे
पिताजी- अब मेरा प्यार बढ़ गया है
माजी- अब चुप रहिए , छोटू पास मे ही है
पिताजी- वो बच्चा है
माजी- वो भी बड़ा हो रहा है
पिताजी- रात मे बात करते है
और सब मूवी का मज़ा लेने लगे
छोटू ने इंटर्वल मे 4 समोसे दबा लिए
मूवी ख़त्म होते ही जयसिंघ ने सबको थॅंक्स कहा
और किताबो के लिए जो पैसे जमा किए थे जयसिंघ ने उन पैसो से सबको आइस क्रीम खिलाई
ये देख कर पिताजी को अच्छा लगा
जयसिंघ अपने काम मे लग गया
उसको अच्छे मार्क लाने थे
अपना सपना पूरा करना था
पूजा नेहा और नीता ने अपने भाई के सपने को पूरे करने की तरफ एक कदम बढ़ा दिया
उनके इस एक कदम से जयसिंघ को एक उम्मीद की किरण मिल गयी
छोटू को तो जल्दी खुद का अलग कमरा मिलेगा
जयसिंघ के जाते ही पूरा कमरा उसका होगा
नेहा नीता ने अपना काम कर दिया
वो फिर से अपनी मस्ती मज़ाक मे लग गयी
उनकी मस्ती मज़ाक दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी
माँ तो परेशान हो गयी थी
माँ उनको खाना बनाना सिखाने की जितनी कॉसिश करती दोनो दाल मे कुछ काला कर देती
पर माँ ने हार नही मानी
पिताजी के टोकने के बाद भी पूजा नेहा और नीता को घर के काम सिखाने लगी
थोड़ा मुश्किल था
पर वो माँ थी , अपने बेटी को शादी के बाद गालियाँ सुनने थोड़ी देती
ऐसा ट्रेन किया कि उनके हाथ का कोई खाना खा ले तो उंगलिया चाट ले
लेकिन इस बीच नेहा और नीता ने मस्ती करना बंद नही किया
स्कूल के मास्टर जी से लेकेर प्रिन्सिपल की चेयर के नीचे पटाखे लगा कर उनकी नींद खराब कर दी
उनकी कंप्लेंट किस से करे ,
उनके पिताजी है योगेद्रसिन्घ , और ठाकुरजी उनके अंकल थे
उनका मूड होता खेलनेका तो वो चुपके से घंटी बजा देती
चपरासी जो सोया रहता है उसकी नींद खराब करने से नेहा और नीता को बहुत मज़ा आता था
एक बार तो चपरासी के हाथ लगते लगते बच गयी
फिर भी टीचर की फेव स्टूडेंट मे से एक थी नेहा और नीता
जयसिंघ जितनी पढ़ाई मे तेज नही थी पर कुछ कम भी नही थी
खेल मे तो चॅंपियन थी
हर गेम खेल लेती
और बिना चीटिंग के खेलती
क्यू कि उनको गेम मे कोई हरा ही नही सकता था
जयसिंघ अगर पढ़ाई मे ट्रॉफ़ी लाता तो नेहा नीता गेम जीत कर ट्रॉफ़ी लाती
पिताजी ने उनकी ट्रॉफ़ी को संभाल कर रखा था
घर मे अगर कोई आता तो उनकी नज़र इस ट्रॉफ़ी पे जाती
सभी भाई बहन एक ही स्कूल मे थे
पर सब की क्लास अलग थी बस नेहा नीता एक क्लास मे थी
सबको जयसिंघ स्कूल मे ले जाता और वापस ले आता
पूजा की सहेली भी उसी स्कूल मे थी , मंदा
मंदा को जयसिंघ अच्छा लगता था पर पूजा ने उसे पहले बता दिया कि ऐसे सपने मत देख कि जिसके टूटने के चान्स ज़्यादा है
मंदा उस बात को समझ गयी कि जयसिंघ उसका नही हो सकता
पर उसका भाई राकेश वो पूजा के हाथ का मार खा कर भी चुप बैठने की जगह पूजा के पीछे पीछे लगा रहता था
मंदा ने भी राकेश को कई बार थप्पड़ मारा पर वो कुछ सुनने को तय्यार ही नही था
ये तो बच्पना था बड़ा हो जाएगा तो सब समझ जाएगा
जयसिंघ ने अपने पिताजी को दिए हुए वादे के मुताबिक 1 साल अपने भाई बहनों को दिया
स्कूल के लंच ब्रेक मे सबको एक साथ लेकर पेड़ के नीचे बैठ कर खाना खाते
लंच ब्रेक मे भाई बहन से दोस्त बन जाते
नेहा - भैया ये पेड़ पिताजी ने लगाया हैना
जयसिंघ- हाँ , जिस दिन मुझे स्कूल मे अड्मिशन दिलाने लाए थे तब पिताजी ने मुझे बताया था ,ये हमारे लिए लगाया था ताकि हम इसके छान्व के नीचे खेल सके पढ़ाई कर सके
नेहा - ये पेड़ हमारा हैना
पूजा - हाँ , हम बचपन से इसके छान्व के नीचे खेल कर बड़े हो रहे है
छोटू-अगेर ये अमरूद का पेड़ होता तो कितना अच्छा होता
नेहा- ये छोटू , तुझे मोटू होना है
छोटू- ये दो चोटी वाली बंदर की साली
नेहा - मैं बंदर की साली , पूजा दीदी आपके राजकुमार को बंदर कहा
पूजा - छोटू मार चाहिए
छोटू - मैं भी मारूँगा
जयसिंघ- छोटू पूजा बड़ी हैना,
छोटू- आप सब मेरे छोटे होने का फ़ायदा उठाते है
पूजा - तू तो रोने लगा है
छोटू- आप हर बार मेरा मज़ाक उड़ाती है
पूजा - तू इतना प्यारा है कि प्यार से तुझे छोटू कहते है
नेहा - तू तो हमसे भी बड़ा हो जाएगा एक दिन ,तब तू हमे छोटू कहना
छोटू- उस दिन मैं आपको तंग करूँगा
जयसिंघ- उसके लिए पढ़ाई करनी पड़ती है
छोटू - मुझसे पढ़ाई होती ही नही
नीता - हमारे साथ क्यू नही करता पढ़ाई
छोटू - मैं मास्टर जी के पास जाउन्गा शाम मे पढ़ाई करने
जयसिंघ- वाआअ रे मेरे शेर
पूजा - चलो खाना तो हो गया अब क्या करे
जयसिंघ - इस पेड़ के नीचे बैठ कर बाते करते है ,
नेहा - इस पेड़ के साथ हमने कितने दिन बिताए होंगे
नीता - मुझे नही पता , भैया से पूछो उनका मेद्स अच्छा है
जयसिंघ- हम बड़े होकेर जब भी यहा आएँगे ना हम अपने बचपन को याद करेंगे
नेहा - मुझे बड़ा होना ही नही है मैं ऐसी ठीक हूँ
नीता - मैं भी , बड़े होने पे मस्ती कर ही नही सकते
पूजा - हम करेगे साथ मिलकर
नेहा - वो कैसे
पूजा - हम अपने बच्चो के साथ बच्चा बन कर अपने बचपन को दुबारा जियेंगे
नेहा- ये तो अच्छा सुझाव दिया आपने
नीता - हम अपने बच्चों को इसी स्कूल मे भेजेंगे , वो भी इस पेड़ के नीचे खेलेंगे
छोटू - भैया तो जा रहे है ,
नेहा - वो वापस आएँगे , आएँगे ना भैया
जयसिंघ - तुम्हारे लिए वापस आउन्गा
नीत- हमे भूल गये
जयसिंघ -तुम सबके लिए वापस आउन्गा ,
नेहा - और हम फिर से अपने बच्चो के साथ अपने बचपन को जियेंगे
नीता - ये पेड़ उस बात का गवाह रहेगा
छोटू- मेरे बच्चे तो सब से छोटे रहेंगे उनको भी छोटू कहोगी
नेहा- नही , तू ही छोटू रहेगा , हमारा प्यारा छोटू
पूजा - भैया आप शहर जाओगे तो साल मे एक बार वापस आएँगे ना
जयसिंघ- दीवाली मे आउन्गा
पूजा - मेरे लिए शहर3 से गिफ्ट लाओगे
जयसिंघ- तुम सब के लिए लाउन्गा
नेहा - मुझे मेरा और आपका गिफ्ट चाहिए
जयसिंघ- तुझे तो सबसे ज़्यादा गिफ्ट दूँगा
नीता - भैया वो हमने आपको एक कम्पास दिया था वो कहाँ है
जयसिंघ- वो संभाल कर रखा है
पूजा - आप इस्तेमाल नही करते , हमने पैसे जमा करके आपके लिए लिया था
जयसिंघ- किया ना , पर अब उसको तुम सब की याद बना कर संभाल कर रखा है
नेहा - आप उसको हमेशा अपने पास रखना
जयसिंघ- वो मुझे तुम सब की याद दिलाएगा
नेहा - हम जैसे अपनी डॉल संभालते है वैसे संभाल कर रखना
नीता - हाँ भैया , हमारी डॉल को हम किसी को हाथ लगाने नही देते वैसे आप भी किसी को मत देना
पूजा - क्यू ना हम
जयसिंघ- बोलो ना
पूजा - कुछ नही ,
छोटू- भैया आप जाएँगे तो मैं इस पेड़ का ख़याल रखूँगा
पूजा - तुझे ही रखना होगा
जयसिंघ - अपनी बहनों को ख़याल रखना , मेरे ना होने पे तू अपने आप बड़ा हो जाएगा
छोटू - जी भैया मैं आपकी तारा सबका ध्यान रखूँगा
जयसिंघ - चलो अब क्लास शुरू हो गया है
नेहा - भैया
जयसिंघ- हाँ
नेहा - आपकी बहुत याद आएगी
और नेहा जयसिंघ के गले लग गयी नेहा का देख कर नीता और पूजा भी गले लग गयी
पाँचो भाई बहन कुछ देर ऐसे एक दूसरे के प्यार को फील करने लगे
जयसिंघ- अभी मेरे जाने को 3 महीने बाकी है
नेहा - समय कैसे बीत जाता है पता ही नही चलता
पूजा - ये 2 महीने की छुट्टियाँ हम साथ मे खेतो मे बिताएँगे
जयसिंघ- हाँ, हमारे आम के बगीचे मे
नेहा - खूब मस्ती करेंगे
नीता - वहाँ भी हम अपने बचपन को क़ैद करके रखेंगे
जयसिंघ-चलो अब , वरना मैं रो दूँगा
पाँचो भाई बहन एक एक दिन ऐसे ही हँसी मज़ाक मस्ती , के साथ बिताने लगे
स्कूल मे बने हुए पेड़ मे अपने बचपन की यादो को संभाल कर रखने को कहा
ताकि जब उनके बच्चे यहाँ आए तो ये पेड़ उनको इनके बचपन की कहानी सुनाए