• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मैं और मेरा परिवार

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
फ्लॅशबॅक 812ए

जयसिंघ को इजाज़त ही मिलते वो खुश हो गया

पर पिताजी को पता था कि आगे क्या हो सकता है

और उसके लिए तय्यार थे पिताजी

इसी लिए ऐसे प्रॉमिस लिए

माजी- क्या बात हुई

पिताजी- वो शहर3 जाएगा

माजी- वो मैं जय की खुशी देख कर समझ गयी

पिताजी- क्या हमने ठीक किया

माजी- बच्चो की खुशी तो चाहिए हमे , मुझे आप पे विश्वास है

पिताजी- विश्वास

माजी- आपने ज़रूर आगे का कुछ सोचा होगा

पिताजी- मैं ने जयसिंघ को कहा कि उसकी शादी मेरे मर्ज़ी से होंगी

माजी- ये तो आपने बहुत अच्छा किया , हमारी बहू जय को बदल देगी

पिताजी- हाँ

माजी- और हम ऐसी बहू ढूंढ़ेंगे जो जय के लिए पर्फेक्ट हो , और वो हमारी बेटी बन कर रहे

पिताजी- मैं ने भी यही सोचा था

माजी- और ऐसे तो हमारा पोता हमारे पास रहेगा

पिताजी- बस जय सिंग को अपना प्रॉमिस याद रहना चाहिए

माजी- मैं उसे याद दिला दूँगी

पिताजी- पर हम उसपे दबाव नही डाल सकते

माजी- वो बाद की बात है , आज आपने सब ठीक कर दिया

पिताजी- तुम खुश हो ना

माजी- वो तो रात मे पता चल जाएगा आपको

पिताजी- आज मना मत करना किसी बात के लिए

माजी- आज तक कभी किया है

पिताजी- अभी हाँ कहती हो और रात मे मना करती हो धीरे करो

माजी- आज नही कहूँगी

पिताजी- चलो मूवी देखते है

माजी- नीता की वजह से हमे मूवी देखने को मिलती है वरना आप तो कभी मुझे दिखाते ही नही

पिताजी- क्यू ,शादी होते ही मेरे पिताजी से छुप कर हम मूवी देखने गये थे ,भूल गयी

माजी-गाइड , याद है मुझे वो मूवी

पिताजी- पर जयसिंघ ने सही कहा जमाना बदल रहा है , कहाँ वो मैं बचपन मे ब्लॅकन्वाइट मूवी देखते और कहाँ ये रंगीन मूवी , सब कुछ बदल गया है

माजी- पर आप नही बदले , आज भी उतना ही प्यार करते हो जितना पहले करते थे

पिताजी- अब मेरा प्यार बढ़ गया है

माजी- अब चुप रहिए , छोटू पास मे ही है

पिताजी- वो बच्चा है

माजी- वो भी बड़ा हो रहा है

पिताजी- रात मे बात करते है

और सब मूवी का मज़ा लेने लगे

छोटू ने इंटर्वल मे 4 समोसे दबा लिए

मूवी ख़त्म होते ही जयसिंघ ने सबको थॅंक्स कहा

और किताबो के लिए जो पैसे जमा किए थे जयसिंघ ने उन पैसो से सबको आइस क्रीम खिलाई

ये देख कर पिताजी को अच्छा लगा

जयसिंघ अपने काम मे लग गया

उसको अच्छे मार्क लाने थे

अपना सपना पूरा करना था

पूजा नेहा और नीता ने अपने भाई के सपने को पूरे करने की तरफ एक कदम बढ़ा दिया

उनके इस एक कदम से जयसिंघ को एक उम्मीद की किरण मिल गयी

छोटू को तो जल्दी खुद का अलग कमरा मिलेगा

जयसिंघ के जाते ही पूरा कमरा उसका होगा

नेहा नीता ने अपना काम कर दिया

वो फिर से अपनी मस्ती मज़ाक मे लग गयी

उनकी मस्ती मज़ाक दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी

माँ तो परेशान हो गयी थी

माँ उनको खाना बनाना सिखाने की जितनी कॉसिश करती दोनो दाल मे कुछ काला कर देती

पर माँ ने हार नही मानी

पिताजी के टोकने के बाद भी पूजा नेहा और नीता को घर के काम सिखाने लगी

थोड़ा मुश्किल था

पर वो माँ थी , अपने बेटी को शादी के बाद गालियाँ सुनने थोड़ी देती

ऐसा ट्रेन किया कि उनके हाथ का कोई खाना खा ले तो उंगलिया चाट ले

लेकिन इस बीच नेहा और नीता ने मस्ती करना बंद नही किया

स्कूल के मास्टर जी से लेकेर प्रिन्सिपल की चेयर के नीचे पटाखे लगा कर उनकी नींद खराब कर दी

उनकी कंप्लेंट किस से करे ,

उनके पिताजी है योगेद्रसिन्घ , और ठाकुरजी उनके अंकल थे

उनका मूड होता खेलनेका तो वो चुपके से घंटी बजा देती

चपरासी जो सोया रहता है उसकी नींद खराब करने से नेहा और नीता को बहुत मज़ा आता था

एक बार तो चपरासी के हाथ लगते लगते बच गयी

फिर भी टीचर की फेव स्टूडेंट मे से एक थी नेहा और नीता

जयसिंघ जितनी पढ़ाई मे तेज नही थी पर कुछ कम भी नही थी

खेल मे तो चॅंपियन थी

हर गेम खेल लेती

और बिना चीटिंग के खेलती

क्यू कि उनको गेम मे कोई हरा ही नही सकता था

जयसिंघ अगर पढ़ाई मे ट्रॉफ़ी लाता तो नेहा नीता गेम जीत कर ट्रॉफ़ी लाती

पिताजी ने उनकी ट्रॉफ़ी को संभाल कर रखा था

घर मे अगर कोई आता तो उनकी नज़र इस ट्रॉफ़ी पे जाती

सभी भाई बहन एक ही स्कूल मे थे

पर सब की क्लास अलग थी बस नेहा नीता एक क्लास मे थी

सबको जयसिंघ स्कूल मे ले जाता और वापस ले आता

पूजा की सहेली भी उसी स्कूल मे थी , मंदा

मंदा को जयसिंघ अच्छा लगता था पर पूजा ने उसे पहले बता दिया कि ऐसे सपने मत देख कि जिसके टूटने के चान्स ज़्यादा है

मंदा उस बात को समझ गयी कि जयसिंघ उसका नही हो सकता

पर उसका भाई राकेश वो पूजा के हाथ का मार खा कर भी चुप बैठने की जगह पूजा के पीछे पीछे लगा रहता था

मंदा ने भी राकेश को कई बार थप्पड़ मारा पर वो कुछ सुनने को तय्यार ही नही था

ये तो बच्पना था बड़ा हो जाएगा तो सब समझ जाएगा

जयसिंघ ने अपने पिताजी को दिए हुए वादे के मुताबिक 1 साल अपने भाई बहनों को दिया

स्कूल के लंच ब्रेक मे सबको एक साथ लेकर पेड़ के नीचे बैठ कर खाना खाते

लंच ब्रेक मे भाई बहन से दोस्त बन जाते

नेहा - भैया ये पेड़ पिताजी ने लगाया हैना

जयसिंघ- हाँ , जिस दिन मुझे स्कूल मे अड्मिशन दिलाने लाए थे तब पिताजी ने मुझे बताया था ,ये हमारे लिए लगाया था ताकि हम इसके छान्व के नीचे खेल सके पढ़ाई कर सके

नेहा - ये पेड़ हमारा हैना

पूजा - हाँ , हम बचपन से इसके छान्व के नीचे खेल कर बड़े हो रहे है

छोटू-अगेर ये अमरूद का पेड़ होता तो कितना अच्छा होता

नेहा- ये छोटू , तुझे मोटू होना है

छोटू- ये दो चोटी वाली बंदर की साली

नेहा - मैं बंदर की साली , पूजा दीदी आपके राजकुमार को बंदर कहा

पूजा - छोटू मार चाहिए

छोटू - मैं भी मारूँगा

जयसिंघ- छोटू पूजा बड़ी हैना,

छोटू- आप सब मेरे छोटे होने का फ़ायदा उठाते है

पूजा - तू तो रोने लगा है

छोटू- आप हर बार मेरा मज़ाक उड़ाती है

पूजा - तू इतना प्यारा है कि प्यार से तुझे छोटू कहते है

नेहा - तू तो हमसे भी बड़ा हो जाएगा एक दिन ,तब तू हमे छोटू कहना

छोटू- उस दिन मैं आपको तंग करूँगा

जयसिंघ- उसके लिए पढ़ाई करनी पड़ती है

छोटू - मुझसे पढ़ाई होती ही नही

नीता - हमारे साथ क्यू नही करता पढ़ाई

छोटू - मैं मास्टर जी के पास जाउन्गा शाम मे पढ़ाई करने

जयसिंघ- वाआअ रे मेरे शेर

पूजा - चलो खाना तो हो गया अब क्या करे

जयसिंघ - इस पेड़ के नीचे बैठ कर बाते करते है ,

नेहा - इस पेड़ के साथ हमने कितने दिन बिताए होंगे

नीता - मुझे नही पता , भैया से पूछो उनका मेद्स अच्छा है

जयसिंघ- हम बड़े होकेर जब भी यहा आएँगे ना हम अपने बचपन को याद करेंगे

नेहा - मुझे बड़ा होना ही नही है मैं ऐसी ठीक हूँ

नीता - मैं भी , बड़े होने पे मस्ती कर ही नही सकते

पूजा - हम करेगे साथ मिलकर

नेहा - वो कैसे

पूजा - हम अपने बच्चो के साथ बच्चा बन कर अपने बचपन को दुबारा जियेंगे

नेहा- ये तो अच्छा सुझाव दिया आपने

नीता - हम अपने बच्चों को इसी स्कूल मे भेजेंगे , वो भी इस पेड़ के नीचे खेलेंगे

छोटू - भैया तो जा रहे है ,

नेहा - वो वापस आएँगे , आएँगे ना भैया

जयसिंघ - तुम्हारे लिए वापस आउन्गा

नीत- हमे भूल गये

जयसिंघ -तुम सबके लिए वापस आउन्गा ,

नेहा - और हम फिर से अपने बच्चो के साथ अपने बचपन को जियेंगे

नीता - ये पेड़ उस बात का गवाह रहेगा

छोटू- मेरे बच्चे तो सब से छोटे रहेंगे उनको भी छोटू कहोगी

नेहा- नही , तू ही छोटू रहेगा , हमारा प्यारा छोटू

पूजा - भैया आप शहर जाओगे तो साल मे एक बार वापस आएँगे ना

जयसिंघ- दीवाली मे आउन्गा

पूजा - मेरे लिए शहर3 से गिफ्ट लाओगे

जयसिंघ- तुम सब के लिए लाउन्गा

नेहा - मुझे मेरा और आपका गिफ्ट चाहिए

जयसिंघ- तुझे तो सबसे ज़्यादा गिफ्ट दूँगा

नीता - भैया वो हमने आपको एक कम्पास दिया था वो कहाँ है

जयसिंघ- वो संभाल कर रखा है

पूजा - आप इस्तेमाल नही करते , हमने पैसे जमा करके आपके लिए लिया था

जयसिंघ- किया ना , पर अब उसको तुम सब की याद बना कर संभाल कर रखा है

नेहा - आप उसको हमेशा अपने पास रखना

जयसिंघ- वो मुझे तुम सब की याद दिलाएगा

नेहा - हम जैसे अपनी डॉल संभालते है वैसे संभाल कर रखना

नीता - हाँ भैया , हमारी डॉल को हम किसी को हाथ लगाने नही देते वैसे आप भी किसी को मत देना

पूजा - क्यू ना हम

जयसिंघ- बोलो ना

पूजा - कुछ नही ,

छोटू- भैया आप जाएँगे तो मैं इस पेड़ का ख़याल रखूँगा

पूजा - तुझे ही रखना होगा

जयसिंघ - अपनी बहनों को ख़याल रखना , मेरे ना होने पे तू अपने आप बड़ा हो जाएगा

छोटू - जी भैया मैं आपकी तारा सबका ध्यान रखूँगा

जयसिंघ - चलो अब क्लास शुरू हो गया है

नेहा - भैया

जयसिंघ- हाँ

नेहा - आपकी बहुत याद आएगी

और नेहा जयसिंघ के गले लग गयी नेहा का देख कर नीता और पूजा भी गले लग गयी

पाँचो भाई बहन कुछ देर ऐसे एक दूसरे के प्यार को फील करने लगे

जयसिंघ- अभी मेरे जाने को 3 महीने बाकी है

नेहा - समय कैसे बीत जाता है पता ही नही चलता

पूजा - ये 2 महीने की छुट्टियाँ हम साथ मे खेतो मे बिताएँगे

जयसिंघ- हाँ, हमारे आम के बगीचे मे

नेहा - खूब मस्ती करेंगे

नीता - वहाँ भी हम अपने बचपन को क़ैद करके रखेंगे

जयसिंघ-चलो अब , वरना मैं रो दूँगा

पाँचो भाई बहन एक एक दिन ऐसे ही हँसी मज़ाक मस्ती , के साथ बिताने लगे

स्कूल मे बने हुए पेड़ मे अपने बचपन की यादो को संभाल कर रखने को कहा

ताकि जब उनके बच्चे यहाँ आए तो ये पेड़ उनको इनके बचपन की कहानी सुनाए

 


फ्लॅशबॅक 812 फ

पाँचो भाई बहन साथ साथ वक्त बिताने लगे

पिताजी चाहते थे कि वो हमारे ऐसे ही साथ रहे

उनको जो चाहिए वो पिताजी ने दिया

उनकी सारी ग़लतियो को माफ़ करके उनके साथ एक दोस्त की तरह रहते थे

नेहा नीता और पूजा के लिए तो उनके हीरो थे पिताजी

माँ को अपनी बेटियो की चिंता लगी रहती थी कि आज उनको इतना प्यार मिल रहा है तो आगे जाकर शादी के बाद वो कैसे एक दूसरे से दूर रहेंगी

माँ अपने तरीके से अपने बेटियो को बड़ा कर रही थी

पिताजी तो अपना सारा समय अपने बच्चो और अपने दोस्त ठाकुर के साथ बिताते थे

नेहा नीता जैसे जैसे बड़ी हो रही थी उनकी मस्तिया बढ़ रही थी

पिताजी को रात का समय माँ के साथ बिताना अच्छा लगता था पर नेहा नीता ने वो अभी समय अपने लिए माँग लिया

पिताजी अपनी बेटियो की हर बात मानते थे

ऐसे मे नेहा और नीता बिना कहानी सुने सोती ही नही थी

पिताजी उनको नयी नयी कहानी सुनाते थे

पिताजी को भी उनको कहानी सुनाना अच्छा लगता था

माँ भी अपनी परियो वाली कहानी सुनाती थी

पर नेहा और नीता की फेव कहानी थी पिताजी और ठाकुर की दोस्ती की कहानी

पिताजी तो नेहा और नीता के लिए हीरो थे ऐसे मे उनके बहादुरी की कहानी सुनना उनको अच्छा लगता था

पिताजी ने उनको कई बार वो कहानी सुनाई फिर नेहा उसी कहानी को सुनने की ज़िद्द करती

नेहा ने ज़िद्द की तो नीता उसका साथ देती

पिताजी- आज फिर कहानी सुननी है

नीता- हाँ

माजी- बहुत देर हो गयी ,अब सो जाओ फिर कभी कहानी सुन लेना

नेहा - हमे आज सुननी है कहानी

पिताजी- नेहा रात काफ़ी हो चुकी है ,

नेहा- पिताजी

पिताजी- ठीक है , सिर्फ़ एक कहानी सुनाउन्गा

माजी- आप ये क्या कर रहे हो , ये कहानी सुनते सुनते यही सो जाएँगी

नेहा - माँ , पिताजी हमे उठा कर अपने कमरे मे ले जाएँगे

नीता- सूपरमन है पिताजी

पिताजी- तो मैं शुरू करता हूँ

नेहा - एक मिनिट पिताजी

और नेहा पिताजी की गोद मे सर रख कर लेट गयी

और नीता माँ की गोद मे सर कर कहानी सुनने को तय्यार हो गयी

नीता- अब बताइए कहानी

पिताजी- एक बहुत बड़ा जंगल था ,

उस जंगल मे एक शेर रहता था ,

वो शेर उस जंगल का राजा था ,

अपने बच्चो के साथ वो हँसी खुशी जंगल मे रहता था ,

नेहा - पिताजी रुकिये

पिताजी- क्या हुआ पसंद नही आई

नीता- हम ये कहानी नही , आपकी और ठाकुरजी की कहानी सुननी है

पिताजी- पिछले हफ्ते तो बताई थी ना

माजी- कितनी बार सुनोगी , तुम्हारी वजह से मुझे भी याद हो गयी है कहानी

नेहा - माँ , वो हमारी फेव कहानी है

पिताजी- नेहा दूसरी बताऊ , उस से भी बढ़िया वाली

नेहा- नही , मुझे तो वही सुननी है

नीता - माँ आपको भी वो कहानी पसंद हैना , पिताजी ने ठाकुरजी को बचाया था

माजी- मुझे भी.पसंद है पर इसका ये मतलब नही कि उसे बार बार सुनी जाए

नेहा- पिताजी आख़िरी बार

पिताजी- ठीक है , पर तुम सोना नही वरना मैं दुबारा नही बताउन्गा

नेहा - ये कहानी सुनते हुए हम कभी सोते है क्या

नीता- आप बताइए , शुरू से , और सब कुछ बताना

पिताजी- अच्छा बाबा बताता हूँ

बात उन दिनो की है जब मैं जवान था

मेरी शादी भी नही हुई थी ,

मैं अपने पिताजी के साथ खेत मे जाता था ,

मैं उस समय 7 थ क्लास तक पढ़ा था ,

हमारे गाओं मे सबसे पढ़ा लिखा था मैं , ठाकुरजी का बेटा भी मुझसे ज़्यादा पढ़ा था , विलायत मे पढ़ कर आया था

( अवी- रणजीतसिंघ के बच्चे

अवी के पापा जयसिंघ - रणजीतसिंघ

अवी के दादाजी - ठाकुर प्रतापसिंघ

अवी के दादाजी के पिताजी - ठाकुरजी,

इस तरह चलेंगे , जेनरेशन टू जेनरेशन , करेंट्ली रणजीतसिंघ ठाकुर बना है , तो हम अवी के दादाजी और अवी के दादाजी के पिताजी की कहानी सुनेगे और उस वक्त के ठाकुर की कहानी सुनेगे )

प्रतापसिंघ विलायत मे पढ़ने के बाद वो वापस गाओं आ आया था अपने पूर्वजों की विरासत चलाने

प्रतापसिंघ मुझ से आगे मे छोटा था

पर उसकी पढ़ाई उसकी हैसियत बड़ी थी ,

मेरे पिताजी मुझे कहते थे कि वो ठाकुर है उनको समान दिया करो

मैं तो पहलवान था फिर भी मैं अपने पिताजी की बात मान कर ठाकुरजी के साथ प्रतापसिंघ को भी इजाज़त देता था

मैं इतना पड़ा लिखा होने के बाद भी अपने पिताजी के साथ खेतो.मे जाता था

पिताजी मुझे मना करते थे पर मैं इस मिट्टी की कीमत जानता था

इस मिट्टी से जुड़ा हुआ था मैं

पिताजी.मुझे हिसाब किताब करने को बोलते पर मैं जो काम दिखता वो करने लगता

मेरे काम से पिताजी खुश रहते थे

उनको लगा था कि मैं बड़ा ऑफीसर बन जाउन्गा और अपने गाओं को भूल जाउन्गा पर मैं ने ऐसा नही किया

मैं ने अपनी पढ़ाई अपने गाओं की तरक्की मे लगा दी जिसे देख कर पिताजी का सर उचा हो गया

मैं ने पिताजी और ठाकुरजी को बोल कर हमारे गाओं मे पाठशाला शुरू की

हमारे गाओं मे स्कूल की शुरुआत मैं ने की थी

ठाकुरजी और पिताजी ने मेरा पूरा साथ दिया

स्कूल की शुरुआत एक छोटे से कमरे से हुई ,

एक रिटायर मास्टर जी और मैं बच्चो को पढ़ाते थे

ठाकुरजी ने अपने पॉवर का इस्तेमाल करके सरकार को स्कूल को फंड और नये मास्टर देने को कहा

और हमारे गॉव का स्कूल चालू हो गया

नये मास्टर जी आते ही मैं ने वहाँ पढ़ाना बंद किया

सब इस स्कूल को गाओं मे शुरू करने से मेरा शुक्रिया अदा करने लगे

आज तुम सब उसी स्कूल मे पढ़ते हो

जयसिंघ पूजा नेहा नीता छोटू , तुम उस स्कूल मे पढ़ते हो

मैने तो 25 किमी दूर तहसील के गॉव स्कूल मे अपनी पढ़ाई की थी ,

मैं साइकल से तहसील मे जाता और पढ़ाई करता था , उस समय साइकल भी बड़ी मुश्किल से मिलती थी , ऐसे मे मैं अपने साथ 2 दोस्तो को भी लेकर जाता , पूरा दिन निकल जाता था स्कूल जाने आने मे ,

इसी लिए कोई स्कूल नही जाता था

ये बात मुझे बचपन मे समझ मे आ गयी थी

जिस से मैं ने अपने गाओं मे स्कूल शुरू किया

गाओं के ज़्यादातर बच्चे कसरत करने मे लगे रहते थे ऐसे मे स्कूल स्टार्ट होते ही सब स्कूल मे जाने को तय्यार हो गये

ठाकुरजी ने बहुत पैसे लगाए स्कूल को अच्छा बनाने मे

ये तो हो गया मेरी पढ़ाई के बारे मे

मैं पढ़ाई के साथ कसरत भी करता था , इस ज़िल्ले मे मुझे कुस्ति मे हराने वाला पैदा नही हुआ था

मेरे किस्से धीरे धीरे सबको पता चल रहे थे

तुम्हारी माँ भी एक दिन मेरी कुस्ति देखने आई थी

और तभी मेरे पिताजी ने तुम्हारी माँ को मेरे लिए पसंद कर लिया था

और कुस्ति के मैदान से मैं सीधा शादी के मंडप मे बैठ गया

ये तो बाद की बात है

मैं शादी के पहले जो हुआ वो बताता हूँ ,

जैसे कि मैं ने बताया कि मैं पढ़ाई करने के बाद पिताजी को खेतो मे मदद करने लगा

हमारे खेत जंगल से लग कर थे

और हमारे खेतो के पीछे के जंगल से अजीब अजीब आवाज़े आती है जिस से हमारे खेत मे काम करने को बहुत कम लोग आते थे

इस लिए मैं ज़्यादा से ज़्यादा काम करता था ,

एक दिन तो एक बैल के पैर मे चोट लग गयी

और हमे बीज बोने ज़रूरी थे

तो मैं बैल के साथ हल को चलाने लगा ,

तुम्हे पता है मेरे ऐसा करने पे मेरे पिताजी ने मुझे शाबाशी नही दी

मुझे एक थप्पड़ मारा था ,

ऐसा करने से मुझे कुछ हो जाता था तो

उस दिन के बाद मैं ने दुबारा वैसा नही किया

पर पता है मैं ने वैसा क्यूँ किया था

नेहा- क्यूँ किया था पिताजी

पिताजी- उस समय हमारे गाओं मे एक पिक्चर दिखाने वाला आया था ,

पता है कौन सी पिक्चर थी

नीता - मुझे पता है

माजी- कहानी ऐसे सुनो कि तुम पहली बार सुन रही हो

पिताजी- मदर इंडिया

उस मूवी मे हल चलाते हुए देखा था तो मैं ने भी वैसा ही किया

नेहा - आपकी ये बीमारी नीता को लगी है , राजेश खन्ना की दीवानी

नीता- देखो ना माँ नेहा क्या कह रही है

पिताजी- नेहा ,

नेहा - सॉरी नीता

अब ठाकुरजी के बेटे प्रतापसिंघ ठाकुर(रणजीतसिंघ का बाप )की बात बताता हूँ

जैसे मैं ने बताया कि प्रतापसिंघ विलायत मे पढ़ कर आया था

विलायत मे पढ़ने के बाद भी उसको भी मेरी तरह अपनी जनम भूमि से प्यार था

इस गाओं मे आते ही उस ने स्कूल को और बेहतर बना दिया

प्रतापसिंघ अपने पिताजी की तरह ही था

पर उसको भी कुस्ति का शौक था

प्रतापसिंघ कुस्ति देखने आता था

पर वो भी अच्छे से कुस्ति खेलता था

ऐसे एक दिन हमारे गाओं मे खुशी का खेल शुरू हो गया

ठाकुरजी के साथ प्रतापसिंघ भी आ गया और उसका सौतेला भाई भी आ गया

प्रतापसिंघ के सौतेले भाई के साथ मेरी बनती नही थी

पर प्रतापसिंघ को मेरा स्कूल शुरू करना अच्छा लगा था

ठाकुरजी को दो बेटे थे , उनकी दो बीवी के दो बेटे

प्रतापसिंग ठाकुर के सौतेले भाई को हवेली का राजा बनना था

पर ठाकुरजी को अपने बड़े बेटे को जो विलायत मे पढ़ कर आया था प्रतापसिंघ उसे अपना वारिस बनाना था

पर वारिश बनाने से पहले ठाकुरजी को हार्ट अटॅक आ गया और वो चल बसे

पर अंदर की बात ये थी कि जो मुझे पिताजी ने बताई थी कि उनके छोटे बेटे ने ठाकुरजी को ज़हर दिया था

ये बात लोगो को पता नही चलने दी

और ठकुराइन ने प्रतापसिंघ को ठाकुर बना दिया जिस से उसका सौतेला भाई उसे अपना दुश्मन समझने लगा

ये तो बाद की बात पहले क्या हुआ वो बताता हूँ

तुम्हे मैं उस कुस्ति की कहानी बताता हूँ

गाओं मे कुस्ति का खेल शुरू हो गया

हर तरफ मेरा नाम ही ले रहे थे गाओं वाले

उनको पता था कि मैं जीतने वाला हूँ

पंचकोशी मे मुझे टक्कर देने वाला पहलवान नही था

और हुआ भी ऐसा ही मैं एक एक करके सारे पहलवान को पछाड़ता गया

आख़िरी कुस्ति मेरी दूसरे गाओं के पहलवान से थी

मैं ने उसे भी पछाड़ दिया

और जैसे हर पहलवान चॅलेंज देता है मैं ने भी वही किया

पर ये क्या मेरा चॅलेंज प्रतापसिंघ से कबुल किया

जब तक आप चॅलेंज नही देते आप विन्नर नही बनते

हर बार मेरा चॅलेंज कोई स्वीकार नही करता था

पर इस बार प्रतापसिंघ ने चॅलेंज स्वीकार किया

प्रतापसिंघ के खड़े होते ही पूरा गाँव चुप हो गया

सब प्रतापसिंघ की तरफ देखते रह गये

मैं भी शॉक्ड हो गया ,

मैं ठाकुर के साथ कैसे लड़ सकता हूँ

कोही ठाकुर पे हाथ उठाने का सोच भी नही सकता

मैं अपनी पिताजी की तरफ देखने लगा

प्रताप सिंग ने चॅलेंज स्वीकार किया तो मैं पीछे भी नही हट सकता था

पिताजी ने मुझे शांत दिमाग़ से काम लेने का इशारा किया

और प्रतापसिंघ ने लंगोट मे मैदान मे एंट्री मारी

प्रतापसिंघ- तुम अच्छा लड़ते हो

योगेंद्रसिंघ- मैं आप से लड़ नही सकता

प्रतापसिंघ- क्यू डर गये

योगेंद्रसिंघ- मैं डरता नही किसी से , पर आप ठाकुर हो

प्रतापसिंघ- कुस्ति के मैदान मे सिर्फ़ मैं एक खिलाड़ी हूँ

योग्र्न्द्रसिन्घ- ( बात तो ठीक है , पर प्रतापसिंघ हार गया तो ठाकुर की इज़्ज़त मिट्टी मे मिल जाएगी )

प्रतापसिंघ विलायत से आया था उसे ज़्यादा कुछ पता नही था ठाकुर को कैसे रहना चाहिए

वरना वो कभी चॅलेंज नही देता

अब अगर वो हार गया तो उसके ठाकुर बनते ही उसकी इजाज़त कम हो जाएगी , हर कोई इस हार से प्रतालसिंघ को पहचानेगा

मैं क्या करूँ

मैं ने पिताजी की तरफ देखा तो पिताजी ने मुझे हारने का इशारा किया

मेरे हारने से सिर्फ़ मैं हारुन्गा

पर प्रतपसनघ के हारने से पूरा गाओं हार जाएगा , ठाकुर की फॅमिली हार जाएगी

मैं ने पिताजी की बात मान ली

और मेरे और प्रतापसिंघ के बीच मे कुस्ति शुरू हो गयी

सब देखने वाले अपनी साँस रोक कर कुस्ति देख रहे थे

ना मेरा नाम ले रहे थे और ना ठाकुर का नाम ले रहे थे

पिन ड्रॉप स्लिएंट था

ठाकुरजी अपने सर पे हाथ रख कर कुस्ति देख रहे थे

पिताजी ठाकुरजी की टेन्षन को समझ गये

होने वाला ठाकुर हार जाएगा तो उसकी इज़्ज़त कम हो जाएगी

मैं इस बात का ध्यान रख रहा था

प्रतापसिंघ को मुझपे भारी पड़ने दे रहा था

मैं थकने का ड्रामा कर रहा था

क्यू कि इस से पहले मैं 7 कुस्ति खेल चुका था

और मैं प्रतापसिंघ के हाथो से हार गया

चॅलेंजर जीत गया

प्रतापसिंघ ने मुझे हरा दिया

पर प्रतापसिंघ को मेरी हार का पता चल गया , इतना पढ़ा लिखा जो था

प्रतापसिंघ ने मुझे कुछ नही कहा

ठाकुरजी ने मेरे पिताजी को शुक्रिया कहा , उनके बेटे को जिताने के लिए

प्रतापसिंघ ने जब गदा उठाई तो मुझे अपने पास बुलाया

प्रतापसिंघ- ये गदा योगेंद्रसिंघ की है , वो असली चॅंपियन है , अगर मैं 7 कुस्ति खेलता तो कभी जीत नही पाता , इतना थकने के बाद भी योगेंद्रसिंघ ने जल्दी हार नही मानी , वो है असली चॅंपियन

पर योगेंद्रसिंघ ने मुझे कड़ी टक्कर दी , मैं एक कुस्ति खेल कर ये गदा जीत नही सकता , योगेंद्रसिंघ ने सभी पहलवानो को हराया है , वो असली चॅंपियन है

और प्रतापसिंघ ने मुझे गदा दी और मेरे गले लग गया

प्रतापसिंघ- तुम जान बुझ कर हारे हो मुझे पता है , हम ये मॅच कही और अकेले मे खेलेंगे

योगेंद्रसिंघ- जब आप कहोगे तब खेलेंगे

और इस तरह हमारी कहानी स्टार्ट हुई

 


फ्लॅशबॅक 812 जी

नेहा - पिताजी आप हार कर जीत गये

पिताजी- कभी कभी हमे अपने से ज़्यादा दूसरो के बारे मे सोचना पड़ता है

नीता- आपने गाओं वालो के बारे मे सोचा है

पिताजी- हाँ , गाओं ठाकुर चलाते है , ठाकुर की वजह से गाओं का नाम होता है

नेहा - फिर आपने क्या किया

पिताजी- फिर तो हमारी कुस्ति कभी ख़तम ही नही हुई

नीता- आप अकेले मे कुस्ति खेली ठाकुरजी के साथ

पिताजी- हाँ , केयी बार

नेहा - कौन जीता

पिताजी- कभी रिज़ल्ट निकला ही नही

नीता- मतलब

पिताजी- हर बार हमारी कुस्ति अधूरी रह जाती

नेहा - आगे क्या हुआ

पिताजी- सुनो

उस कुस्ति के बाद प्रतापसिंघ मेरी दोस्ती होने लगी

ठाकुरजी ने मेरे पिताजी को दावत पे बुलाया उस कुस्ति के बाद

मैं भी गया था हवेली पे

वहाँ ठाकुरजी ने मेरी तारीफ की , प्रतापसिंघ ने भी मेरी तारीफ की

फिर ठाकुरजी और पिताजी बात करने लगे

और मैं प्रतापसिंघ के साथ हवेली के पीछे चला गया

प्रतापसिंघ- कुस्ति खेलने को तय्यार हो

योगेंद्रसिंघ- यहाँ पर

प्रतापसिंघ -यही पर क्यू डर गये

योगेंद्रसिंघ- मैं डरता नही किसी से

प्रतापसिंघ- तो आओ मैदान मे

और हम हवेली के पीछे कुस्ति खेलने लगे

सबसे छुपाते हुए कुस्ति खेल रहे थे

ये डिसाइड करने के लिए कि हममे से बेस्ट कौन है

हमारी कुस्ति हर बार बहुत लंबी चलती इस बार ठाकुरजी और मेरे पिताजी घूमते हुए हवेली के पीछे आए

तो हम रुक गये और गले मिल कर एक दूसरे से पूछने लगे चोट तो नही लगी

ठकुज़ी- क्या हुआ कपड़े खराब कैसे हो गये ,ये क्या हाल बना रखा है

प्रतापसिंघ- पिताजी वो हम गिर गये थे

योगेंद्रसिंघ- ठाकुरजी , हम एक खरगोश पकड़ रहे थे कि हमारी ये हालत हो गयी

और हम वहाँ से खिसक गये

ठाकुरजी और मेरे पिताजी हँसने लगे उनको पता था कि हम क्या कर रहे थे , उनको पता चल गया था कि इस से हमारी दोस्ती मज़बूत हो जाएगी

हवेली के पीछे कुस्ति खेलने के बाद प्रताप सिंग शाम मे मेरे खेत मे आता

मेरे पिताजी के जाते ही हम कुस्ति खेलते पर सूरज ढलने की वजह से कुस्ति पूरी नही होती

धीरे धीरे हमे उस मे मज़ा आने लगा

हम कुस्ति मज़े के लिए कब खेलने लगे पता ही नही चला

जहाँ अकेले मिले वही शुरू हो जाते

कभी हवेली मे कभी खेत मे , कभी मंदिर के पीछे

तो कभी नदी के पीछे

कही भी शुरू हो जाते

अब कोई हार रहा होता तो दूसरा जानबूझ कर कुस्टी खेलना बंद करता ताकि ये कुस्ति कभी ख़तम ना हो

एक दिन हम हवेली के पीछे कुस्ति खेल रहे थे कि एक नौकर भागते हुए आ गया और बताया कि ठाकुरजी को आटॅक आया है

हम वैसे ही ठाकुरजी के पास आ गये

पर तब तक देर हो चुकी थी

पिताजी ने बताया की ठाकुरजी को जहर दिया गया है

पर ये बात प्रतापसिंघ से ठकुराइन ने छुपा दी

गाओं के ठाकुर के जाते ही नया ठाकुर कौन बनेगा इसकी बाते होने लगी

सबको लगता प्रतापसिंघ बने , पर प्रतापसिंघ का सौतेला भाई ठाकुर बनना चाहता था

उसको प्रतापसिंघ का नाम ज़्यादा सुनाई दे रहा था

उसकी माँ भी यही चाहती थी

प्रतापसिंघ के सौतेले भाई को अपना हक छीनते हुए दिख रहा था

ऐसे मे उस ने प्रतापसिंघ को रास्ते से हटानेंका फ़ैसला किया

उसने ये अफवा फैला दी कि जंगल मे एक भेड़िया आया है

जंगल मे हमारे गाओं की तरफ जंगली जानवर नही आते है

प्रतापसिंघ के सौतेले भाई ने अपने कुत्ते से एक बच्चे पे हमला करवाया और कहा कि भेड़िया ने मारा है

भेड़िया का डर गाओं मे फैलते ही सब हवेली आ गये मदद माँगने

अब तक ठाकुर किसी को बनाया नही गया था

ऐसे मे गाओं वालो की मदद कौन करेगा ,

प्रतापसिंघ खड़ा हो गया , और भेड़िया के शिकार पे निकल ने की घोषणा की

इसी लिए सब प्रतापसिंघ को ठाकुर बनाना चाहते थे

मुझे ये बात पता ही नही थी

2 दिन से मैं भेड़िया की वजह से खेतो मे जो बैल थे उनकी रखवाली कर रहा था

प्रतापसिंघ उसके सौतेले भाई के जाल मे फस गया

प्रतापसिंघ अपने 2 साथियो के साथ जंगल की तरफ निकल गया

प्रतापसिंघ पहले मंदिर की तरफ गया पर वहाँ उसे कुछ नही मिला

ऐसे मे वो हमारे खेत के पीछे वाले जंगल मे भेड़िया के शिकार पे निकल गया

मैं खेत मे पड़ा पड़ा बोर हो गया था

ऐसे मे मुझे प्रतापसिंघ जंगल मे जाते हुए दिखाई दिया

मुझे कुस्ति खेलने का मन हुआ तो मैं भी प्रतापसिंघ के पीछे पीछे जाने लगा

प्रतापसिंघ अपने साथियो के साथ जंगल के कंदर मे आ गया

जहाँ उसके लिए जाल बनाया गया था

उस खंडहर मे जाते ही प्रतापसिंघ के साथियो ने प्रतापसिंघ को धक्का दे कर गिरा दिया

ये प्रतपांघ के भाई के हाथो बिक चुके थे

दोनो प्रातपासिंघ के सामने गन लेकर खड़े थे

प्रतापसिंघ के साथ धोका हुआ

अपने भाई को देख कर समझ गया कि ये उसकी चाल है

प्रतापसिंघ इतनी आसानी से हार नही मान सकता था

प्रतापसिंघ ने अपने दिमाग़ का इस्तेमाल करके अपने भाई को कुस्ति खेलके हराने को कहा

उसका भाई प्रतापसिंघ की बातों मे फस गया और वो कुस्ति खेलने लगे

मैं भी वहाँ पहुच चुका था

मैं ने सब कुछ सुन लिया था और देख भी लिया था

मैं बस सही मोके की तलाश मे था

प्रतापसिंघ अपने भाई के साथ हाथा पाई कर रहा था

और वो 2 साथी गन लेकर सब देख रहे थे

मैं उनका ध्यान भटकने का इंतज़ार कर रहा था

और जैसे उनसे ग़लती हुई मैं उन दोनो पे टूट पड़ा

पहले तो उनकी गन दूर फेक दी

और उन दोनो को अपनी ताक़त दिखाने लगा

मेरे आते ही प्रतापसिंघ को मदद मिल गयी उसकी हिम्मत वापस आ गयी

हम दोनो मिलकर सबको मारने लगे

प्रतापसिंघ के साथ , उसके भाई के आदमियो को मारने लगा

हमे अपने आदमियो को मारता हुआ देख प्रतापसिंघ का भाई छुप गया

हम एक एक करके सबको मारने लगे

ऐसे मे प्रतापसिंघ के सौतेले भाई के हाथ गन लग गयी

उसने प्रतापसिंघ को निशाना बना दिया

मैं ये देखते ही प्रतापसिंघ और गन के बीच मे आ गया

गोली मेरे हाथ मे लग गयी

और मेरी चीख निकल गयी

जिस सुनकर प्रताप हरकत मे आ गया और उसने भी गन उठा ली

पर तब तक उसका भाई भाग चुका था

प्रतापसिंघ- ये क्या किया तुमने

योगेंद्रसिंघ-तुम्हे कुस्ति मे हराए बिना मरने कैसे देता

प्रत्पसिंघ- पागल हो तुम , अगर तुम मर जाते तो

योगेंद्रसिंघ - मुझे कुछ नही होगा , बिना तुम्हे हराए मैं मरूँगा नही

प्रतापसिंघ- पर आज तुमने मुझे हरा दिया दोस्त

योगेंद्रसिंघ - दोस्त

प्रतापसिंघ-अब कुछ मत कहो , चलो मैं तुम हॉस्पिटल लेकर जाता हूँ

और प्रतापसिंघ मुझे हॉस्पिटल लेकर गया

गाओं वालो को पता चल गया कि भेड़िया कौन था

अब उस भेड़ियो को प्रतापसिंघ छोड़ेगा नही

मैं ने प्रतपांघ को बचाया था इसलिए पिताजी खुश हो गये उस बार उन्होने ये नही कहा कि मुझे कुछ हो जाता तो , उन्हो ने कहा कि तुम ने गाओं के लिए गोली खाई है

उस दिन से पिताजी सर उठा कर चलने लगे

प्रतापसिंघ और मेरी दोस्ती हो गयी

प्रतापसिंघ ने ठकुराइन को सारी बात बता दी और प्रतापसिंघ को ठाकुर बनाया गया

और हमारी दोस्ती मज़बूत हो गयी

इस कुस्ति मे मैं जीत गया

उस के बाद हमने कभी कुस्ति नही खेली

हमारी दोस्ती की वजह से हम बहुत मज़ा मस्ती करने लगे

हमारी दोस्ती गाओं मे मशहूर हो गयी

और गाओं को नया ठाकुर मिल गया

पिताजी हमारी दोस्ती से खुश थे

उनको गाओं की बागडोर नये कंधो पे देख कर अच्छा लगा

नेहा - और ठाकुर ,ठाकुरजी बन गये

पिताजी- हाँ

नीता- पिताजी वो निशान अभी तक होगा

पिताजी- कितनी बार देखा है तुमने

नेहा - आप हमारे साथ कुस्ति खेलोगे

पिताजी- नही , मैं हार जाउन्गा

नीता- आप तो रियल लाइफ के हीरो हो

पिताजी- मैं कोई हीरो नही हूँ , हीरो तो मेरी बेटी है

नेहा - मैं हेरोयिन हूँ

पिताजी- हाँ बाबा , तुम हेरोयिन हो

नीता- पिताजी , प्रतापठाकुर जी आपके दोस्त है , तो हमारे क्या हुए

पिताजी- तुम्हारे भी दोस्त है तभी तो तुम उनको ठाकुरजी कहते हो

माजी- चलो अब अपने कमरे मे , कहानी ख़तम हुई

नेहा - 25 बार सुनी है

पिताजी- और कितनी बार सुनना है

नीता- हम तो ज़िंदगी भर सुनेंगे

पिताजी- अरे बाप रे

नेहा - पिताजी भैया आपके जैसे पहलवान नही है

पिताजी- वो गधा है ,

नीता- पढ़ाई मे आपके जैसे है भैया

पिताजी- वो बचपन मे कसरत करता था अभी भी वो मुझे कुस्ति मे हरा सकता है

माजी- चलो अब बहुत हो गया है ,

नेहा - पिताजी कल नयी कहानी सुननी है

नीता- पिताजी ठाकुरजी के भाई का क्या हुआ

पिताजी- उसका मुझे नही पता , उसको उसके बाद देखा नही किसीने

माजी- तुम अभी गयी नही तो मार पड़ेगी

नेहा - ये हमारे पिताजी का कमरा है आप जाइए

पिताजी- नेहा

नीता- चलो नेहा , माँ को सोना है

पिताजी- तुम भी सो जाओ वरना कल स्कूल नही जाओगी

नेहा - उस स्कूल मे तो हमे जाना पसंद है , क्यू कि वो स्कूल आपने शुरू किया है

और नेहा नीता के साथ अपने कमरे मे चली गयी

सोने से पहले नेहा ने पूजा की नींद खराब की और खुद सो गयी

पूजा को नेहा की इस हरकत की आदत पड़ गयी थी

 


फ्लॅशबॅक 812एच

नेहा और नीता हर दिन नयी नयी मस्ती करने मे लगी हुई थी

मस्ती के साथ वो पढ़ाई भी करती थी

पर पूजा तो पढ़ाई कम और अपनी सहेली के साथ टाइम पास ज़्यादा करती थी

जयसिंघ तो ज़ोर लगा कर पढ़ाई कर रहा था

उसे अच्छे मार्क लेकर शहर3 जाना था

एग्ज़ॅम हो गयी

जयसिंघ को पूरी उम्मीद थी कि उसके शहर3 जाने की टिकेट उसे मिल जाएँगी

छुट्टियाँ शुरू होते आम का सेशन शुरू हो गया

आम का बगीचा धीरे धीरे बड़ा हो रहा था

एक हेक्टर तक बड़ा हो गया

एक पेड़ से शुरुआत हुई थी

बात 3 ,4 साल पुरानी है

एक दिन पूरी फॅमिली खेत मे गयी थी

पिताजी और माँ खेत मे काम कर रही थी

जयसिंघ पूजा नेहा नीता और छोटू खेल रहे थे

खेलते खेलते नेहा और नीता को आम का एक छोटा पौधा दिखाई दिया

दोनो ने उस पौधे को ज़मीन से निकाल कर अपने पिताजी के पास ले गयी

नेहा - पिताजी

पिताजी- क्या है नेहा

नेहा- देखिए हमे क्या मिला

पिताजी- क्या है

पिताजी को नेहा के हाथ मे आम का पौधा दिखाई दिया

माजी-ये क्या किया ,इस को बाहर क्यू निकाला

पिताजी- कहाँ मिला तुम्हे ये पौधा

नेहा - वो वहाँ दूर झाड़ियों मे मिला

पिताजी- तो

नीता- हम उसे निकाल कर ले आए

पिताजी- मिट्टी के साथ निकाला

नेहा - हाँ

पिताजी- पर तुम यहाँ क्यू लेकर आई हो

नीता- हम इसको हमारे खेत मे लगते है

पिताजी- तो लगा दो पर इसकी देखभाल तुम्हे करनी होगी

माजी-तुम दोनो कुछ भी करती रहती हो,अब ये नया भूत घुस गया तुम्हारे दिमाग़ मे

पिताजी- नेहा जाओ लगा दो खेत मे

नेहा - जी पिताजी

पिताजी- पर इसकी देखभाल भी करना

नीता- मैं भी करूँगी पिताजी

माजी- चलो अच्छा है ये दोनो उस पौधे के पीछे लगी रहेंगी ,

नेहा और नीता ने पौधा खेत मे लगा दिया

उसको पानी दिया

और वापिस पिताजी के पास आ गयी

नेहा - पिताजी पौधा लगा दिया

पिताजी- जाओ अब खेलो और घर जाते हुए फिर से पानी देना

नीता- जी

और नेहा नीता फिर से खेलने लगी

शाम मे घर जाने से पहले नेहा ने पौधे को पानी दिया

ऐसे 1 हफ़्ता निकल गया

नेहा नीता रोज उस आम के पौधे को पानी देती

वो पौधा जीने की जगह मार रहा था

नेहा और नीता ये समझ ही नही पा रही थी कि हो क्या रहा है

वो तो पानी दे रही है फिर पौधे के पत्ते गिर क्यूँ रहे है

नेहा भाग कर अपने पिताजी के पास आ गयी

.नेहा को ऐसे हफ्ते हुए देख कर पिताजी ने उसको पानी दिया

पिताजी- क्या हुआ ऐसे भाग क्यूँ रही हो

नेहा - जल्दी चलिए मेरे साथ

पिताजी- क्या हुआ और नीता कहाँ है

नेहा- जल्दी चलिए

पिताजी नेहा के साथ जाने लगे

माँ भी पिताजी के पीछे पीछे जाने लगी

नेहा पिताजी को लेकर उस आम के पौधे के पास आ गयी

नेहा - पिताजी देखिए ये पौधा तो मर रहा है

माजी- पागल , तूने खेत के बीच मे लगाया पौधा

पिताजी-तुम रूको , नेहा क्या हुआ

नेहा - पिताजी ये पौधा मर रहा है

पिताजी- तुम ने ग़लत जगह लगाया है

नीता- आपने तो कहा कि खेत मे लगा दो

माजी- तो क्या बीच मे लगाओगी खेत के

पिताजी-नेहा यहाँ क्यू लगाया पौधा

नेहा - ताकि ये खेत के बीच मे खड़ा रख कर सभी पौधो को छाँव दे

पिताजी- ये तो अच्छा सोचा तुमने

माजी- उस से पता है क्या होगा

पिताजी- तुम चुप रहो

नीता- पर ये तो

पिताजी- मैं कुछ करता हूँ , तुम एक लकड़ी लेकर आओ नेहा

नेहा भाग कर एक लकड़ी लेकर आ गयी

पिताजी- जयसिंघ , सेंखहत लेकर आओ

जयसिंघ भी खत लेकर आ गया

पिताजी- जयसिंघ खेत के बाजू मे जो पक्की मिट्टी है वो लेकर आओ

जयसिंघ मिट्टी लेकर आ गया

पिताजी- ये मिट्टी आम के पेड़ के लिए ठीक नही है , पक्की मिट्टी चाहिए ,ताकि पेड़ को मज़बूती मिले

नीता- जी

पिताजी- अब हम यहाँ जगह बना देंगे , इस पक्की मिट्टी से जगा बना देंगे

माजी- इस से तो खेत की जगह वेस्ट हो जाएगी

पिताजी- थोड़ी जगह से कुछ नही होगा

पिताजी ने नेहा और नीता के पौधे के लिए जगा बना दी

उस पौधे को खाद दिया और लकड़ी की मदद से सहारा दिया

और उस पौधा मे फिर से जान आ गयी

पिताजी- अब रोज पानी देना देखना एक दिन बहुत बड़ा पेड़ बन जाएगा

नेहा- जी , और बड़ा होने पर हम इसके आम खाएँगे

पिताजी- अब इसका ध्यान रखना कुछ दिन

नेहा खुश हो गयी

नेहा और नीता पौधे के साथ खेलने लगी

उनको खेलता हुआ देख कर पिताजी को अच्छा लगा

माजी- ये आपने क्या किया खेतो के बीच की अच्छी जगह वेस्ट कर दी

फिराजी- कुछ नही होता, देखो नेहा और नीता कितनी खुश है

माजी- वो तो है

जयसिंघ- पिताजी मेरे दिमाग़ मे एक आइडिया आया है

पिताजी- बोलो

जयसिंघ- उधर देखिए क्या दिखता है

पिताजी- जंगल

जयसिंघ- जंगल के आगे

पिताजी- एक बंजर खेत है और उसके बाद हमारा खेत है

जयसिंघ- ठीक से देखिए

माजी- तुम कहना क्या चाहते है

पिताजी- मैं समझ गया जयसिंघ कहना क्या चाहता है

माजी- मुझे भी बताइए

पिताजी- नेहा का वो आम का पेड़ बड़ा हो गया तो जंगल दिखेगा नही

माजी- एक पेड़ से जंगल कैसे छुप सकता है

जयसिंघ- क्यू ना हम वहाँ पर आम का बगीचा बना दे ताकि जंगल छुप जाए और लोग हमारे खेत मे काम करने भी आ जाएँगे

पिताजी- ये तुम ने अच्छा सोचा

माजी- पर उसके लिए तो काफ़ी टाइम लगेगा , 3 4 साल लग जाएँगे

पिताजी- हम धीरे धीरे जंगल को छुपा देंगे

जयसिंघ- पहले एक हेक्टर से शुरुआत करते है

पिताजी- तुम सही कह रहे हो , जंगल भी छुप जाएगा और गर्मियो के दिनो मे आमदनी भी हो जाएगी

माजी- हाँ , ये अच्छा रहेगा

पिताजी-नेहा नीता पूजा छोटू इधर आओ

सब भाग कर पिताजी के पास आ गये

पूजा- पिताजी आपने बुलाया

पिताजी- तुम सबको एक काम करना होगा

नीता- कैसा काम

पिताजी- नेहा तुम्हारा पौधा तो अकेला हैना

नेहा - हाँ

पिताजी- उसको दोस्त नही चाहिए खेलने को

.

नेहा- हम हैं उसके दोस्त

पिताजी- और रात मे उसे डर लग गया तो

नेहा - हाँ , मैं तो ये सोचा ही नही

पिताजी- हम एक काम करते है , कल मैं तुम सबके लिए आम लेकर आउन्गा

छोटू - आम , मुझे ज़्यादा चाहिए

माजी- मेरे भी खा लेना

पिताजी- हम आम खाएँगे , और उसको ज़मीन मे लगा देंगे , फिर उस से आम का पौधा निकलेगा और फिर हमारा सुन्दर आम का बगीचा बन जाएगा

नेहा - आम का बगीचा, पिताजी आप बहुत अच्छे हो

नीता- फिर तो हम आम के बगीचे मे छुट्टियों मे खेल भी सकते है

जयसिंघ- पिताजी हम पौधे खरीद कर भी लगा सकते है

पिताजी- उस से अच्छा है हम खुद अपनी मिठास से पौधा बनाए ,

माजी- पहले तो जगह पक्की करनी होगी

नेहा - हाँ , अभी जैसा किया है

पिताजी- हम मिलकर बनाएँगे , पूरी छुट्टियों मे हम यही मस्ती करते हुए आम का बगीचा बनाएँगे

नीता- इसमे तो बहुत मज़ा आएगा

पूजा - मुझे भी काम करना होगा

पिताजी- हम सब थोड़ा थोड़ा काम करेंगे , रोज 2 पौधे लगाएँगे

अगेर सब ठीक रहा तो हमारा बगीचा तय्यार हो जाएगा

और सब ने पिताजी का साथ दिया

एक दूसरे की मदद करते हुए

एक दूसरे के कंधे से कंधा मिला कर आम का बगीचा बनाने मे लग गये

छोटू आम खा कर गुठली गाढ देता

जयसिंघ और पिताजी मिट्टी को पक्की बना देते ,

माजी और पूजा गुठली के लिए खड्डाी तय्यार करती

और नेहा नीता उस मे गुठली डाल कर खड्डार भर देते

फिर वहाँ पौधे के लिए लकड़ी का सहारा और खाद और पानी का इंतज़ाम कर दिया

सब इस तरह से आम का बगीचा बनाने मे लग गये

उम्मीद बहुत कम थी कि खेत की ज़मीन पर मज़बूत पेड़ लग जाएगा

पर सब का हौंसला इतना ज़्यादा था कि पिताजी ने बहुत मेहनत की पेड़ वहाँ खड़े रह सके

पेड़ को पानी की जगह पसीने से बड़ा किया गया

उसको इतना प्यार दिया गया कि आसमान को जल्दी से छुने लगा

बारिश के मोसम के बाद तो पौधे बड़े हो गये

पर बारिश ज़्यादा होने से कुछ पौधे गिर गये थे

पर उनका फिर से सहारा दे कर खड़ा किया

और देखते देखते आम का बगीचा खिलने लगा

धीरे धीरे आम का बगीचा जंगल को छुपाने लगा

नेहा और नीता बगीचा देख कर खुश हो गयी

गाओं वाले भी इसे अपनी रोज़ी रोटी के नज़रिए से देखने लगे

धीरे धीरे आम का बगीचा बड़ा हो गया

माजी- ये तो हो गया , मुझे तो विश्वास नही हो रहा है

पिताजी- सबने इतनी मेहनत जो की है

पूजा - अगले साल तो आम भी लग जाएँगे

पिताजी- हाँ , अगके साल आम लग जाएँगे

नेहा - पिताजी मैं बहुत खुस हूँ

पिताजी- तुम्हारा पौधा कहाँ है

नीता -वो तो सब से बड़ा बन गया है वो देखिए

पिताजी- चलो आज उसी के नीचे खाना खाते है

माजी-पूजा मेरी मदद करो

और सब आम के बगीचे मे बैठ कर खाना खाने लगे

अपने मेहनत से लगाए हुए पेड़ की छाँव के नीचे बैठ कर खाना खाने से सब को सुकून मिल रहा था

 


फ्लॅशबॅक 812 !

आम के बगीचे मे ये छुट्टियाँ एंजाय करने के लिए जयसिंघ अपने भाई बहनों के साथ आया था

कुछ साल पहले लगाए हुए आम के पेड़ अब बड़े हो चुके थे

इस साल पहली बार आम लगे थे

पिताजी सबको खेत मे लेकर आए थे

जयसिंघ इन छुट्टियों के बाद पढ़ाई करने के लिए शहर3 जाने वाला था

पर जाने से पहले वो ये सारी छुट्टियाँ अपने भाई बहनों के साथ बिताने वाला था

माँ भी खुश थी कि उनका बेटा अपने सपने पूरे करने जा रहा है

लेकिन वो अपने आम के बगीचे को देख कर खुश थी

सब के प्यार मेहनत पसीने से बना हुआ था ये बगीचा

नेहा के लगाए हुए उस एक पौधे से इतना बड़ा बगीचा बन गया था

ये बगीचा उनके लिए पैसे कमाने की जगह उनके प्यार की निशानी जैसा था

इस आम के बगीचे से उनकी यादे जुड़ी थी

पिताजी और माँ ने अपने बच्चो की तरह इनको बड़ा किया था

नेहा नीता को तो यकीन नही हो रहा था कि उनका नन्हा सा पौधा इतना बड़ा हो गया कि उसे आम लगे है

सब कुछ एक सपने जैसा दिख रहा था

पूजा - पिताजी ये हमने लगाया है , हमारी मेहनत से ये बना है

पिताजी- हाँ, , हम सब ने मिलके बनाया है

जयसिंघ- ये तो जैसा सोचा था उस से अच्छा बन गया

माजी- जंगल तो अब दिखाई नही दे रहा है

छोटू- मुझे तो आम खाने है

नेहा- पहले मैं खाउन्गी

नीता- पहले मैं

पूजा - बड़ी मैं हूँ ,

जयसिंघ- सब से बड़ा मैं हूँ

छोटू- माँ

माजी- आप ही बताए मैं तो इनमे नही पड़ूँगी

पिताजी- एक साथ हमला करते है , आज तो पेट भरके आम खाएँगे

नेहा - ये चीटिंग है भैया जीत जाएँगे

पिताजी- मैं हूँ ना

नेहा और नीता को पिताजी ने अपने गोद मे उठा लिया

पिताजी- अब देखना कौन जीतेंगा

नेहा - पिताजी ही जीतेंगे

छोटू - माँ

माजी- मैं तुझे उठा कर नही भाग सकती , पर मैं वहाँ पहले जा रही हूँ , तू जल्दी आना मैं आम तोड़ कर दूँगी

और माँ चलके आम के बगीचे मे चली गयी

पिताजी नेहा और नीता के साथ तय्यार हो गये ,

जयसिंघ भी तय्यार था , पूजा और छोटू ने लाइन मार्क की

माँ के हाथ दिखाते ही सब आम के बगीचे की तरफ भागने लगे

जयसिंघ सबसे आगे था

फिर पिताजी

लास्ट मे पूजा थी

नेहा- पिताजी हम हार रहे है

नीता - पिताजी और तेज़

पिताजी- तुम पकड़े रहना

और पिताजी अपनी पूरी ताक़त लगा कर भागने लगे

नेहा- पिताजी छोटू पास आ रहा है

नीता- हम भैया के पास पहुँच गये है

पूजा - मैं थक गयी हूँ मुझसे नही होगा

छोटू- नेहा तुझे हरा कर रहूँगा

माजी- पूजा रूको मत थोड़ी कॉसिश करो

और पिताजी जयसिंघ के साथ भागने लगे

नेहा - पिताजी बस थोड़ी दूर और

पिताजी- तुम पकड़ी रहना

और छोटू भागते हुए नीचे गिर गया

छोटू नीचे गिरते ही रोने लगा

छोटू के गिरते ही माँ उधर से भाग कर छोटू के पास आने लगी

पूजा भी जो चल रही थी वो भी भाग कर छोटू के पास आने लगी

नेहा - पिताजी छोटू गिर गया

पिताजी ने पलट कर देखा

नेहा- पिताजी रुक जाइए ,,

नीता- छोटू के पास चलिए

पिताजी- ये रेस

नेहा - कुछ नही होता , छोटू रो रहा है उसे चोट लगी है

पिताजी नेहा के जवाब से खुश हो गये

पिताजी ने जयसिंघ की तरफ देखो

जयसिंघ आम के बगीचे की तरफ जा रहा था

पिताजी को इस से बहुत दुख हुआ

पिताजी वापस छोटू के पास आ गये

माँ भी छोटू के पास आ गयी और छोटू को अपने गले लगा लिया

पूजा ने अपनी नॅपकिन निकाल कर छोटू के पैर पे लगा दी

नेहा - पागल है क्या , इतनी ज़ोर से भागने की ज़रूरत क्या थी

माजी- चुप कर , वो रो रहा है

नीता - आम भागे थोड़े ही जा रहे थे

पिताजी- कुछ नही हुआ , चोट लगने से मज़बूत होते है

माजी- मेरे बेटे को दर्द नही हुआ , वो अभी रोना बंद करेगा

छोटू - मुझसे चला नही जा रहा है

माजी - मेरी गोद मे आ

छोटू को ज़्यादा चोट नही आई

छोटू जल्दी चुप हो गया

पर सब यहाँ थे

सब छोटू को रोता हुआ देख कर उसके पास आ गये

पर जयसिंघ कहाँ है

माँ और पिताजी ने बगीचे की तरफ देखा तो जयसिंघ वहाँ पहुँच गया था

ये देख कर पिताजी को बहुत दुख हुआ ,

जयसिंघ बड़ा है उसको सबको साथ लेकर चलना चाहिए , ऐसे बीच रास्ते मे छोटू को छोड़ कर जयसिंघ ने ग़लत किया

अपने बेटे की जीत को देख कर माँ को बुरा लगा

ऐसी जीत माँ को नही चाहिए

बड़ा बेटा होने के नाते उसे यहाँ होना चाहिए था

वो बिल्कुल अँधा हो चुका है

नेहा नीता उस से छोटी है पर वो जीतने की जगह छोटू के पास आ गयी

पूजा से भागा नही जा रहा था फिर भी वो भाग कर छोटू के पास आई ,

पर जयसिंघ ने जीतने पे ध्यान दिया

पिताजी को ये उम्मीद नही थी जयसिंघ से

वो दिन ब दिन अपने ज़िम्मेदारी से दूर भाग रहा है

पिताजी को गुस्सा आ रहा था ते बात माँ ने देख ली , माँ ने उनका हाथ पकड़ कर उनको रोक लिया , बेटा कैसा भी हो माँ को प्यारा ही होता है

सब ने छोटू को सहारा दिया

और सब मिलकर आम के बगीचे मे आ गये

जयसिंघ- छोटू ज़्यादा चोट तो नही लगी

छोटू - नही भैया

नेहा - भैया आप जीत गये

जयसिंघ - हाँ ,

पूजा - पहला आम आप को मिलेगा

जयसिंघ - शरत वैसी ही लगी थी ,

जयसिंघ ने आम उठा लिया पर पिताजी ने रोक लिया

जतसिंघ - क्या हुआ पिताजी

पिताजी - उस आम पर छोटू का हक है

पिताजी - छोटू ये लो आम

जयसिंघ -पिताजी मैं भी तो ..........

जयसिंघ की बात पूरी होने से पहले पिताजी बोल पड़े

पिताजी-जितना ज़रूरी नही होता तुम कैसे जीते हो ये ज़रूरी होता है , तुम हार गये हो

माजी - जय , रेस कोई भी हो ,अपनो को साथ लेकर चलना चाहिए , तुम बड़े हो , तुम्हे तो छोटू के पास होना चाहिए था , पर तुमने जितना ज़रूरी समझा , तू जीत तो गया है पर हम हार गये है ,

पिताजी- तूने अपने माता पिता को हरा दिया है

जयसिंघ ने अपना सर नीचा कर लिया

पिताजी - छोटू ये लो आम , तुम सब भी लो , तुम ने छोटू के लिए रेस छोड़ कर ये बता दिया कि जीतना ज़रूरी नही होता , हार मे अगर सब साथ हो तो जीतने से ज़्यादा खुशी मिलती है

और पिताजी ने जयसिंघ को ये बताया कि वो कहाँ ग़लत था

छोटू ने पहला आम खा लिया

फिर नेहा नीता और पूजा ने भी अपना इनाम का आम खा लिया

जयसिंघ आज जीत कर हार गया

फिर भी वो खुश था कि छोटू को इनाम का आम मिला है

अजीब था जयसिंघ

वो पढ़ाई मे 1स्ट था पर रियल लाइफ मे वो लास्ट रह गया

पूजा - एक से क्या होगा , आज तो पेट भरके खाने वाले थे

छोटू - मैं तो पेड़ पे चढ़ नही पाउन्गा

जयसिंघ - तू बता तुझे कौन सा आम खाना है मैं तोड़ कर दूँगा

जयसिंघ ने एक छोटी सी कॉसिश की पिताजी से माफी माँगने की

पर कुछ ग़लतियो की माफी हम नही दे सकते , वो समय देता है

क्यू कि ये पहली बार नही हुआ कि जयसिंघ ने अपने भाई बहनों का साथ छोड़ा है

पर पिताजी चाहते थे कि ये आख़िरी बार हो

माँ चाहती कि जयसिंघ दुबारा ऐसा ना करे

नेहा - मैं तो खुद तोड़ूँगी आम

पिताजी - नेहा ध्यान से

नीता- मैं भी खुद तोड़ूँगी ,

पूजा-पिताजी आप नेहा के साथ रहिए मैं नीता को देखती हूँ

पिताजी - जयसिंघ की तरफ देखते हुए , तू बेटी नही मेरा बेटा है

जयसिंघ को इस बात से बहुत बुरा लगा ,

पर वो इस बात का किस तरह से इसका मीनिंग समझेगा ये उसपे था

छोटू के तो मज़े हो रहे थे

नेहा और नीता भी उसे आम तोड़ कर दे रही थी

माँ छोटू को अपने हाथ से आम खिला रही थी

छोटू - माँ आज तो पेट भर के खाउन्गा

माजी - सब तेरा ही है,

माँ जैसे जतसिंघ को बोल रही हो कि उसने सब कुछ खो दिया है

पूजा भी बड़ी होने का फ़र्ज़ अच्छे से निभा रही थी

पिताजी अपने सभी बच्चो से खुश थे बस एक जयसिंघ अपनी ज़िम्मेदारी को समझ जाता यो उनकी टेन्षन ख़तम हो जाती

पिताजी को खुद पे गुस्सा आ रहा था

उनको ऐसा लग रहा था कि जयसिंघ को अच्छी परवरिश नही दे पाए है

उसको पढ़ा लिखा कर ग़लती की ऐसा लग रहा था पिताजी को

गाओं मे स्कूल खोला ताकि सब यहाँ पढ़ सके पर उसको तो बाहर जाना है

जयसिंघ के दिमाग़ मे क्या चल रहा था ये उसी को पता होगा

जयसिंघ को समझना चाहिए था कि पिताजी ने ऐसा क्यूँ कहा था कि एक साल अपने भाई बहनों को देना

अपने भाई बहनों के प्यार को फील करके जयसिंघ शहर3 जाने से मना करेगा पर सब कुछ उल्टा हो रहा था

अब उम्मीद की सिर्फ़ एक किरण थी

जयसिंघ की शादी लड़की से नही देवी से की जाए

ऐसी देवी जो अपने देवेर को बेटे जैसा प्यार करे , अपनी ननद को अपनी बहन समझे , सास ससुर को माता पिता जैसा आदर दे

ससुराल को अपना घर समझ कर उसे प्यार से भर दे ,

इस घर को टूटने ना दे

जयसिंघ को बदल दे ,

जयसिंघ को ये बताए कि फॅमिली क्या होती है , आपमे किसे कहते है , प्यार किसे कहते है ,

अगर ऐसी देवी नही मिली तो जयसिंघ को पिताजी हमेशा के लिए खो देंगे

माँ को भी पिताजी के माथे की लकीर सॉफ दिखाई दे रही थी

माँ को पता था कि पिताजी क्या सोच रहे है

जयसिंघ के बारे मे सोच रहे होंगे

नेहा नीता भी बड़ी हो रही थी

उनको भी समझ मे आ रहा था कि ये हो क्या रहा है

पिताजी के बातों का मतलब वो भी समझती थी

पिताजी को ज़्यादा दुख ना पहुँच इस लिए पूजा हमेशा आगे आकर सबका ध्यान रखती है

पूजा को पता है कि भैया की वजह से पिताजी कितने अपसेट रहते है ऐसे मे वो और पिताजी को दुख नही देना चाहती थी

बस एक अकेला जयसिंघ है जो ये बात समझ नही रहा था

इतना पढ़ाई मे तेज है पर रियल लाइफ मे वो फैल हो गया था

क्या पता उसके दिमाग़ मे कुछ और चल रहा होगा

पिताजी अपना मूड खराब करके , जयसिंघ की वजह से अपने बेटियो का दिन खराब नही करेंगे

पिताजी ने अपने दर्द को अपने छीने मे छुपा लिया और सब के साथ आम का मज़ा लेने लगे

नेहा अपने पिताजी के सबसे करीब थी

उसने पिताजी की ये खूबी धीरे धीरे अपने अंदर ले ली

नेहा ने अपने पिताजी से सीखा अपने दर्द को दबा कर रखना

हम अच्छी चीज़े भी सीखते है और बुरी चीज़े भी सीखते है ,

जयसिंघ को पिताजी की स्माइल देख कर लगा होगा कि पिताजी भूल गये और उसको माफ़ किया

पर जयसिंघ ग़लत था

वो उसके लिए नही अपनी बेटियो के अपने चेहरे पे स्माइल लेकर आए है

इस आम के बगीचे मे दिन भर हँसी मज़ाक करके सब खुश थे

छोटू का पेट तो टाइट हो गया था

उसे तो माँ ने अपनी गोद मे उठा कर घर ले आई

नेहा नीता हमेशा की तरह अपने पिताजी के साथ चलती थी

जयसिंघ को अकेला चलते हुए देख कर पूजा उसका हाथ पकड़ कर चलती थी

 
क्या करूँ पापी पेट का सवाल था इसलिए इतने दिन दूर रहा फ्रेंड्स

और अभी भी टाइम कम मिल रहा है पर जितना हो सकेगा अपडेट देता रहूँगा
 
Flashback 812 J

जय सिंग जीतनी बार भी अच्छा करने की कॉसिश करता उस से ग़लती हो ही जाती थी

पिताजी कितनी बार उसकी ग़लतियो को नज़रअंदाज़ करते

माँ को भी इस बार गुस्सा आया था

पर माँ ज़्यादा देर अपने बेटे से गुस्सा कैसे रहती ,

माँ के माफ़ करने से जयसिंघ को अच्छा लगा

अब तो गर्मिया होने से सब पूरा दिन खेत मे बिताते थे

आम के बगीचे मे खेल कर दिन बिता रहे थे

नेहा नीता पूजा जयसिंघ और छोटू नये नये खेल खेलने लगे

पिताजी अपने काम मे लगे रहते थे

माँ उनको मदद करती थी

बच्चों को खेलते हुए देख कर वो टेन्षन फ्री हो जाते थी

जयसिंघ जब भी ग़लती करता था तब पिताजी और माँ उसको बता देती थी

नेहा नीता के लिए ये छुट्टियाँ नयी मस्ती लेकर आई थी

दोनो काफ़ी खुश थी

पर ये दिन भी कैसे बीत गये पता भी नही चला

पिताजी तो चाह रहे थे कि ये गर्मिया कभी ख़तम ही ना हो

उनको पता था कि अब जयसिंघ शहर3 जाने की बात करेंगा

जयसिंघ को तो रिज़ल्ट का इंतज़ार था

और जैसा जयसिंघ चाहता था वैसा ही हुआ

जयसिंघ अच्छे मार्क्स से पास हो गया

उसने पिछले साल से भी ज़्यादा मार्क ले ली

मास्टर जी ने उसके पास होने की खुशी मे स्कूल मे फंक्षन रखा था

जयसिंघ आज बहोत खुश था क्यू कि उसे शहर3 पढ़ने जाने को मिलेगा

पिताजी को समझ नही आ रहा था कि वो खुश हुए या रोए

बेटे के मार्क देख कर उनको खुश होना चाहिए था पर उनको इस बात से रोना आ रहा था कि अब जयसिंघ उनसे दूर चला जाएगा

उनको पता था कि ये दूरिया कभी कम नही होंगी

जयसिंघ ने घर आते पिताजी को रिज़ल्ट दिखाकर सब से पहले अपने शहर3 जाने की बात कही

जयसिंघ- पिताजी मैं ने अपना वादा पूरा कर दिया अब मुझे शहर3 जाने दीजिए

पिताजी ने सिर्फ़ हाँ मे गर्दन घुमाई और अपने कमरे मे चले गये

जयसिंघ तो अपनी खुशी मे डूबा हुआ था

उसको अपने पिताजी का दर्द दिखाई नही दे रहा था

पर नेहा अपने पिता जी के पास चली गयी

नेहा - पिताजी आप रो रहे है

पिताजी - नही , ये तो खुशी के आँसू है , तुम्हारे भाई पास हो गया

नेहा - पिताजी मैं बड़ी हो गयी हूँ ,

पिताजी - तू कभी बड़ी मत होना , तू ऐसी ही रहना , मेरे पास

नेहा - मैं आपको कभी छोड़ कर नही जाउन्गी

नेहा पिताजी के गले लग गयी

पिताजी - तेरी जैसी समाज अगर जयसिंघ को होती तो सब अच्छा होता

नेहा - भैया को बस और पड़ना है इसलिए शहर3 जा रहे है , वो वापस ज़रूर आएँगे

पिताजी - (खास तेरी बात सच हो ) जाएँगा कहाँ हम उसका कान पकड़ कर लाएँगे

नेहा - एक कान नीता पकदेगी और दूसरा कान मैं पकडूगी

पिताजी -तू ही , उसको घर लेकर आना

नेहा - चाहिए ना , वरना भैया को बुरा लगेगा

पिताजी -तू चल मैं थोड़ी देर मे आता हूँ

नेहा के जाते ही माँ.पिताजी के पास आ गयी

माजी- जय पास हो गया

पिताजी -तुम.क्या चाहती हो बस इतना बताओ

माजी- उसे जाने दीजिए , उसने शहर3 जाने के लिए साल भर बहोत मेहनत की है , अगर उसे जाने नही दिया तो वो टूट जाएगा

पिताजी -तुम क्या चाहती हो वो बताओ

माजी- मैं उसके बिना रह लूँगी , वो एक दिन वापस ज़रूर आएगा

पिताजी -तुम क्या चाहती हो

माजी- उसे उसके सपने पूरे करने दीजिए , उसको बड़ा आदमी बनना है बनने दो

पिताजी -तूमे पता हैना है वो एक बार गया तो वापस आने के चान्स कम है

माजी- मैं उसे वापस लेकर आउन्गि ,

पिताजी -तुम नही कर पाओगी

माजी- हम साथ मिल कर उसे वापस लेकर आएँगे

पिताजी -मैं कल ही शहर3 जाने का सोच रहा था बाद मे खेती की वजह से जा नही पाउन्गा

माजी- आप खुद को अकेला मत समझना मैं आपके साथ हूँ , और आपके साथ ही रहूंगी

पिताजी -जयसिंघ को बता दो कि हम कल शहर3 जाएँगे , उसे सब कुछ पता हॉंगा , उसे तय्यार रहने को कहो

माजी- आप कहेंगे तो उसे अच्छा लगेगा वरना वो समझेगा कि आप.खुश नही है

पिताजी -मैं खुश कैसे हो सकता हूँ

माजी-मेरे लिए ,

पिताजी -चलो

पिताजी बाहर आ गये

पिताजी - जयसिंघ

जयसिंघ- जी पिताजी

पिताजी- हम कल शहर3 जाएँगे

जयसिंघ-कल

पिताजी -बाद में खेतो के कामो की वजह से आ नही पाउन्गा

जयांघ-कल तो फॉर्म नही निकलेंगे

पिताजी -हम देख कर आते है , 1 2 दिन वही रुकेंगे , पूछ ताछ करेंगे

जयसिंघ-ये ठीक रहेगा , वैसे मैं ने सारी इन्फो निकाल ली है , हमे ज़्यादा प्राब्लम नही होंगी

पिताजी -पैसे कितने लगेंगे

जयसिंघ-रिज़र्वेशन मे अड्मिशन हुआ तो कुछ भी नही लगेंगे ,

पिताजी -ठीक है , हम कल निकल जाएँगे

जयसिंघ-जी

पूजा - भैया , आप शहर3 जा रहे है

जयसिंघ-हाँ ,

पूजा - हमे भूल मत जाना

जयांघ-तूमे कैसे भूल सकता हूँ

छोटू - भैया आप जब भी शहर से वापस आएँगे तब मेरे लिए गिफ्ट लाना

जयसिंघ- सबके लिए गिफ्ट लाउन्गा

नेहा - मुझे नये नये ड्रेस चाहिए

जयसिंघ- तुझे परी जैसा सज़ा दूँगा

नीता - और मुझे

जयसिंघ- तुझे अप्सरा

पिताजी -सुनो , आज खाने मे स्वीट बनाना , जयसिंघ पास हो गया है

माजी - जी ,

पिताजी -जयसिंघ , तय्यारी करो शहर3 जाने की , मेहनत करना , और हाँ खुद को.कभी भूलना मत , तुम क्या हो ये बात हमेशा याद रखना ,

जयसिंघ-जी पिताजी

पिताजी- मेरे गले नही लगोगे

जयसिंघ को लगा कि पिताजी नाराज़ रहेंगे

पर पिताजी को खुश देख कर जयसिंघ खुश हो गया

और जयसिंघ पिताजी के गले लग गया ,

पिताजी ने ये माँ की वजह से किया

लेकिन इसी से जयसिंघ खुश हो गया

बाकी सब भी दोनो के गले लग गये

सबके दिल जयसिंघ के जाने से रो रहे थे पर चेहरे पे स्माइल थी

जयसिंघ को तो आज नया जनम.मिल गया था

जयसिंघ कल जाएगा

इस लिए सब जयसिंघ के साथ वक्त बिताने लगे

पिताजी कल के जाने का इंतज़ाम करने लगे

और बाकी सब जतसिंघ के कमरे मे थे

जल्दी ये कमरा छोटू का हो जाएगा

जयसिंघ- छोटू अब तेरे अकेले का कमरा होगा ये

छोटू- मेरे अकेले का कमरा

पूजा - बच्चू ज़्यादा खुश मत हो

छोटू- क्या मतलब ,

पूजा - इतने बड़े कमरे मे तू अकेला रहेगा , , तुझे डर नही लगेगा ,

छोटू- माँ को बुला लूँगा

पूजा - मैं आ जाती हूँ यहा पर , बड़ा कमरा है , हम साथ मे रहेंगे , मैं तुझे छोटू भी नही कहूँगी

पूजा छोटू को मस्का लगा रही थी

छोटू- मैं अकेला रहूँगा

पूजा- मैं तुझे रोज 10 पैसे दूँगी

छोटू - सच

नेहा - हाँ , मैं भी दूँगी, तू माँ को कहना कि तू पूजा दीदी के साथ रहना चाहता है

छोटू - आपने बाद में नही दिया तो

नीता- ये ले , अभी दे रही है

छोटी को सबने 10 10 पैसे दिए

छोटू- मैं अभी माँ को बता कर आता हूँ

छोटू भाग गया

जयसिंघ- तुम तीनो ने छोटू को उल्लू बना दिया

पूजा - भैया नेहा नीता बड़ी हो रही है , वो कमरा हम तीनो के लिए छोटा है

जयसिंघ- तुम तीनो यहाँ आ जाओ

नेहा - वो कमरा हम नही छोड़ेंगे

नीता- हम ने दीदी से बात की है

जयसिंघ- तुम सबके तो मज़े होंगे अब

नेहा - आपके बिना हम मज़ा कैसे कर सकते है भैया , ये आपने सोच भी कैसे

जयसिंघ- मुझे पता है तुम सब को मेरी याद आएगी

पूजा - मत जाओ ना भैया

जयसिंघ- मुझे जाना हॉंगा , मैं ये हम सबके लिए कर रहा हूँ ,

नेहा - क्या मतलब

जयसिंघ- देखो जमाना कहाँ से कहाँ चला गया है

नेहा - तो

जयसिंघ -हमे भी जमाने के साथ बदलना चाहिए

पूजा - बदल तो रहे हैं ना

जयसिंघ- तुम संज्झी नही , शहर मे जाकर देखो लोग बाइक से जाते है और हमे साइकल से जाना पड़ता है

नेहा - भैया साइकल पे कितना मज़ा आता है

जयसिंघ- तुम अभी बच्ची हो, तुम नही समझोगी ,

नीता- समझा दो ना भैया

जयसिंघ- तुम्हे कैसे समझाऊ , शहर मे सब कुछ मिलता है

नेता - क्या यहाँ जैसी मस्ती कर सकते है , क्या ऐसा प्यार मिलता है

जयसिंघ- वहाँ पर बड़ी बड़ी बिल्डिंग है , बड़े बड़े घर है कुछ भी हाथों से करने की ज़रूरत नही पड़ती

पूजा - वो छोटे छोटे कपड़े पहना

जयसिंघ- वो स्टाइल है

पूजा - मैं ऐसी ठीक हूँ

नेहा -मैं भी

जयसिंघ- तुम देखना जब मैं वापस आउन्गा तो तुम भी शहर चलने की बात कहोगी

नेहा - कुछ भी हो जाए मैं गाओं छोड़ कर कही नही जाउन्गी ,

पूजा - मैं भी

नीता- नेहा नही जाएगी तो मैं भी.नही जाउन्गी

जयसिंघ- वो बाद मे देखेंगे , कल तो मैं जा रहा हूँ

नीता- आप क्यूँ जा रहे हो

जयसिंघ -हम सब के लिए जा रहा हूँ , मैं सबकी लाइफ बदल दूँगा

नेहा - मुझे नही बदलनी मेरी लाइफ , मैं ऐसी ही ठीक हूँ

जयसिंघ- वो बाद मे देखेंगे , आज की बात करो

नीता- भैया मत जाओ ना

जयसिंघ-नीता क्या तुम एक ही बात कर रही हो

नीता - आप जाओगे तो हमे स्कूल कौन लेकर जाएगा

जयसिंघ- मैं तुम्हे बड़े कॉलेज मे लेकर जाउन्गा

नेहा - भैया ,आप कल के बारे मे क्यूँ सोच रहे आज के बारे मे सोचिए ना ,

जयसिंघ- पगली मैं हमेशा के लिए थोड़ी जा रहा हूँ

नेहा - तो

जयसिंघ- एक दो साल बाद वापस आउन्गा (ग्रेजुएशन के बाद वापस आउन्गा)

नेहा -पक्का प्रॉमिस

जयसिंघ- प्रॉमिस , अब मेरी पॅकिंग करने मे मदद करो

पूजा - मैं करती हूँ ,

और सब जयसिंघ की मदद करने लगे

 
फ्लॅशबॅक 812के

जयसिंघ को शहर जाने की इजाज़त मिल गयी

पिताजी ने शहर3 ले जाने का फ़ैसला किया

कल पिताजी जयसिंघ को शहर ले जाने वाले थे

नेहा नीता पूजा को जयसिंघ के जाने से दुख हो रहा था

वो ये दर्द कम करने के लिए अपना ध्यान दूसरी तरफ लगा रही थी

वो कमरे के बारे मे इस लिए बात कर रहे थे कि भैया के जाने के बारे मे सोच कर वो रोना ना शुरू कर दे

अगेर वो रोई तो पिताजी को दर्द होगा , माँ को दर्द होगा

पूजा ने ही नेहा और नीता को समझाया कि उनको क्या करना चाहिए

पूजा की बात नेहा और नीता को समझ मे आ गयी

नेहा और नीता ने अपने दर्द को अपने अंदर छुपा दिया

पिताजी की झूठी स्माइल को जयसिंघ समझ नही पाया

माँ खाना तो बना रही थी , पर उनका रोना बंद ही नही हो रहा था

रशोई घर मे छुप छुप के रो रही थी

अजीब से हालत बन गये थे

माँ रशोई घर मे सब से छुप कर रो रही थी , पिताजी का दिल रो रहा था , पूजा अपनी बहनों को रोने से रोक रही थी , छोटू खुश था उसे पूजा के साथ रहने मिलेगा ,

अकेला जयसिंघ ऐसा था कि उसका दिल भी खुश था और उसके चेहरे की स्माइल भी असली थी

पर जयसिंघ के दिमाग़ मे क्या चल रहा था ये कोई बता नही सकता था

जयसिंघ ने भी कुछ सोच ही होगा

वो अपने भाई बहनों को ऐसे छोड़ कर कभी नही जा सकता

उसके खून मे ये नही था

जयसिंघ ने भी अपने पिताजी से बहुत कुछ सीखा था

जयसिंघ क्यू शहर3 जा रहा था उसकी असली वजह तो सिर्फ़ जयसिंघ को पता थी

जयसिंघ क्या खुद के लिए शहर3 पढ़ने जा रहा है या अपनी फॅमिली के लिए

जयसिंघ ने सपने क्या सिर्फ़ उसके लिए देखा है या उसने प्युरे फॅमिली के लिए कुछ सोच रखा था

किसी के दिल की बात जान ना मुश्किल होता है

कोई बताता एक है और सोचता कुछ और है और उसके दिमाग़ मे होता कुछ और है

अजीब दुनिया मे जीते है हम

जो दिखता है उसी को सच मानते है

सब की सोच अलग होती है ,

जयसिंघ और पिताजी की सोच भी अलग होंगी

उनका समय अलग था , उनका बचपन अलग था , उनकी परवरिश जिस तरह हुई उसी तरह उनकी सोच थी

पिताजी को सिर्फ़ एक डर है की जयसिंघ वापस नही आएगा

वो वही रह कर जीना चाहता है

पर जयसिंघ क्या चाहता है ये किसी को नही पता

जयसिंघ को कभी ऐसा हमदर्द साथी मिला ही नही जिसको अपने दिल की बात बता सके

पिताजी के पास माँ थी ,

नेहा के पास नीता थी

पूजा के पास उसकी सहेली थी

पर जयसिंघ , वो अकेला था

पता नही कब तक जयसिंघ अकेला रहेगा

सब ने खाना तो खा लिया जयसिंघ के पास होने की खुशी मे

झूठी स्माइल दिखा दी

जयसिंघ को हँसी हँसी रवाना जो करना था

जयसिंघ उस रात सो नही पाया

ये जयसिंघ को भी पता नही कि उसे नींद क्यू नही आई

हमारी किस्मत मे जो लिखा है उसे बदल नही सकते

जयसिंघ की किस्मत मे आगे क्या लिखा था ये उसे भी नही पता

माँ तो रात भर पिल्लो मे सर कर रोती रही

पिताजी चेयर पे बैठ कर छत की तरफ देखते हुए रात बिता दी

नेहा नीता एक दूसरे के गले लग कर सोने की कॉसिश कर रही थी

पूजा अपने बहनों को देख रही थी

उनके सोने का इंतज़ार कर रही थी

छोटू छोटा होने से उसे ये बात समझ नही आई

एक अजीब सा सन्नाटा था घर मे

सुबह ऐसा लगा कि सब उसी का इंतज़ार कर रहे थे कि ये रात कब ख़तम.होती है

सब के कमरे का डोर एक साथ खुला

सब समझ गये की रात मे कोई नही सोया

सबकी आँखे बता रही थी कि वो रात भर जागती रही

एक दूसरे को देखते नज़रें चुराने लगे

माँ बिना किसी की तरफ देके रशोई घर मे चली गयी

जयसिंघ वापस अपने कमरे मे चला गया

पिताजी जयसिंघ के कमरे मे गये

पिताजी- जयसिंघ

जयसिंघ- जी पिताजी

पिताजी- तुमसे कुछ बात करनी थी

जयसिंघ- जी

पिताजी- मुझे एक बात बताओगे कि तुम शहर3 क्यूँ जाना चाहते हो

जयसिंघ- आपको पता है पिताजी

पिताजी- मुझे पता है मेरा बेटा ऐसा नही हो सकता ,

जयसिंघ- पिताजी

पिताजी- बस इतना बता कि तू अपने लिए जा रहा है , तुझे तेरी माँ की कसम सच बताना

जयसिंघ- मैं हम सबके लिए जा रहा हूँ

पिताजी- मुझे यही सुनना था , मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है ,

जयांघ अपने पिताजी के गले लग गया

पिताजी- तय्यारी कर , हमे शहर3 जाना है , खूब पढ़ना , बड़ा ऑफीसर बनना ,

और पिताजी अपने कमरे मे वापस चले गये

उनको जयसिंघ का जवाब सुनकर सुकून मिला

रात भर जिस सवाल ने उनको सोने नही दिया वो जवाब मिलते उनके सर से टेन्षन कम हो गया

पिताजी जयसिंघ को शहर3 ले जाने को तय्यार हो गये

माँ पिताजी के चेहरे की चमक देख कर समाज नही पाई की उनको हुआ क्या है

पिताजी ने उनको बताया कि सब ठीक है ,

माँ को यही सुनना था

जयसिंघ ने पूजा नेहा नीता और छोटू को प्यार किया

माँ और पिताजी के पैर छु कर आशीर्वाद लिया

नेहा नीता की आँखों मे आसू तो आए पर इतना तो चलता है

पिताजी के बिना रहने का ये नेहा नीता का 1 स्ट चान्स था

नेहा को अपने भाई पे बहुत गुस्सा आ रहा था कि उनके वजह से पिताजी के बिना रहना पड़ेगा

पर पूजा और माँ ने उनको संभाल लिया

आज सिर्फ़ अड्मिशन करने गया है जयसिंघ

पिताजी ने जयसिंघ के रहने पढ़ाई का सारा इंतज़ाम कर दिया

जयसिंघ को जहा पढ़ना था वहाँ अड्मिशन दिलवा दी

फिर उसके बाद जयसिंघ 2 हफ्ते बाद अपना समान लेकर शरर3 की तरफ जाने लगा

उस दिन नेहा नीता पूजा अपने आँसू रोक नही पाई

बस जब तक आँखो से दूर नही हुई तब तक वहाँ से कोई हिला भी नही

पिताजी ने जयसिंघ को फिर से कुछ बाते बताई जो उसको इस सफ़र मे काम आएँगी

जयसिंघ के जाते पूजा घर के बड़ी बेटी से बड़ा बेटा बन गयी

पिताजी की शेरनी बेटी तो थी ही पर आज बेटा भी बन गयी

पूजा ने पिताजी को विश्वास दिलाया कि वो अपने भाई बहन को साथ लेकर चलेगी ,

पिताजी जयसिंघ के जाने के बाद कुछ दिन हवेली पे रुके

वो घर आए ही नही

उनको कुछ दिन अकेला रहना था

पर नेहा नीता पिताजी के बिना अकेली पड़ गयी थी

माँ ने नेहा नीता को हवेली भेजा पिताजी को वापस लाने

नेहा को देखते पिताजी वापस आ जाएँगे ये माँ को पता था

नेहा नीता ने पिताजी को वापस घर लाया

पिताजी भी समझ गये कि अगर वो ऐसे रहेंगे तो बाकियो का क्या हॉंगा

जयसिंघ तो चला गया

उसकी सज़ा नेहा नीता को क्यूँ दे

पिताजी दूसरे दिन से वापस पहले वाले रूप मे आ गये

नेहा और नीता के साथ मस्ती करने लगे

पर इस बार उनके मस्ती मज़ाक मे जयसिंघ की कमी महसूस की जा सकती थी

अब सब कुछ बदल गया था

पूजा अपने भाई बहन को स्कूल ले जाती

उनकी ज़रूरतो का ध्यान रखती

उनको हँसाना , मनाना , उनकी इच्छा पूरी करने की ज़िम्मेदारी पूजा पे आ गयी थी

पूजा को देख कर पिताजी जयसिंघ को भूलते गये

पूजा ने पिताजी का विश्वास टूटने नही दिया

नेहा भी अब बड़ी हो रही थी

अब नेहा बड़ी शरारत करती थी

नीता नेहा का साथ देते हुए मस्ती करती थी

छोटू को कुछ दिन पूजा ने पैसे दिए पर जैसे कमरा चेंज किया वैसे ही पैसे देना बंद हुआ

और छोटू का मज़ाक उड़ाना शुरू हो गया

फिर से छोटू अपनी माँ के पास शिकायत लेकर आता था

पिताजी फिर से नेहा की ग़लतियो को छुपाते थे

जयसिंघ दीवाली मे घर आता था

सबको गिफ्ट लाता

पर उनका गिफ्ट तो जयसिंघ था

जयसिंघ के आते फिर से कुछ दिन हँसी मज़ाक चलता था

एक दूसरे को किससे बताने मे दिन निकल जाते

और जयसिंघ वापस शहर3 चला जाता

और सुबह सुबह फिर से माँ की आवाज़ सुनाई देती

माँ- नेहा तूने ये क्या किया , आज मेरा उपवास(फास्ट) है और तूने नॉनवेज बनाया है , तू मार खाएगी मेरे हाथ से

नेहा -पिताजी मुझे छुपा दीजिए माँ मुझे मारना चाहती है

पिताजी - बेड के नीचे छुप जा , मैं तेरी माँ को भगा दूँगा

पूजा - नीता तूने मेरे मेरे ड्रेस को हाथ कैसे लगाया , तू आज बचेगी नही

नीता - पिताजी दीदी मार रही है

पिताजी - पूजा छोड़ दे वो बच्ची है

छोटू- माँ , मेरे पैंट को नेहा ने काट कर छोटा बना दिया

नेहा- छोटू का छोटा पैंट ,

और नेहा नीता हँसने लगी

फिर से नेहा और नीता के नाम से घर गूंजने लगा
 
813

सी चाची - तुम रो क्यू रहे हो

अवी - ऐसे ही , आप आगे बताइए

सी चाची - तू रो क्यूँ रहा है

अवी - पापा ने ऐसा क्यूँ किया

सी चाची - क्या किया तेरे पापा ने

अवी - वो कैसे अपने भाई बहन को छोड़ कर जा सकते है

सी चाची - मुझे क्या पता , और तुझे कहा था ना कि कुछ पूछना मत

अवी - कैसे ना पुच्छू , आपको बताना होगा

सी चाची - क्या बताऊ

अवी - पापा ने ऐसा क्यू किया

सी चाची - तूने कहानी ठीक से सुनी नही

अवी - पापा को ऐसा नही करना चाहिए था

सी चाची - तो क्या करना चाहिए था

अवी - यही गाओं मे रह कर अपने भाई बहानो के साथ रहना चाहिए था

सी चाची - तू ईडियट है

अवी - आप जवाब दीजिए

सी चाची - तू पहले रोना बंद कर

अवी - ये रोना बंद नही होगा

सी चाची - तो तुझे जवाब भी नही दूँगी

अवी - चाची , आपको मुझे तंग करने मे मज़ा आता है

सी चाची - तुझे रोता हुआ देख कर दर्द होता है

अवी - बताइए ना चाची

सी चाची - देख तूने प्रॉमिस किया था कि कुछ नही पूछेगा , और तूने पूछ लिया फिर भी मैं बता रही हूँ ,पर ये रोना बंद करना होगा तुझे

अवी - मुश्किल हॉंगा

सी चाची - कुछ मुश्किल नही.होता , सुमन दीदी या मेरे बारे मे सोच रोना बंद हो जाएगा

अवी - जी

और मैं ने आँसू पोंच्छ लिए

सी चाची - अब रोया तो बताउन्गी नही

अवी - नही रोउंगा

सी चाची - तो पूछ क्या पूछना है

अवी - पापा ने ऐसा क्यूँ किया

सी चाची - तूने लास्ट मे सुना नही क्या कि तेरे पापा के दिमाग़ मे क्या चल रहा है ये सिर्फ़ उनको पता है

अवी - ये कैसा जवाब हुआ

सी चाची - इस जवाब से पता चलता है कि तेरे पापा ग़लत भी थे और ग़लत नही भी थे

अवी - मैं समझा नही

सी चाची - तुम्हारे दादाजी ने आख़िर मे क्या पूछा था तेरे पापा से

अवी - तुम किसके लिए शहर जा रहे हो

सी चाची - तुम्हारे पापा ने क्या कहा

अवी - सबके लिए

सी चाची - तो

अवी - तो क्या

सी चाची - तो मैं क्या बताऊ

अवी - आप मुझे परेशान क्यू कर रही है

सी चाची - तू परेशान क्यू हो रहा है

अवी - मेरे पापा की वजह से , उन्होने ने ऐसा क्यू किया ,नेहा बुआ को क्या हो गया कि हस्ती खेलती नेहा बुआ इतनी नफ़रत लेके जी रही है ,

सी चाची - मुझे क्या पता

अवी - आप बता क्यूँ नही रही है

सी चाची - क्यू कि ये कहानी यहाँ तक ही थी

अवी - क्या मतलब

सी चाची - यहाँ से आगे दूसरी कहानी शुरू होती है

अवी - तो कीजिए ना

सी चाची - कैसे करू ,

अवी - बताइए ना आगे क्या हुआ

सी चाची - आज तू एक कहानी सुन कर इतना रो रहा था तो दूसरी कहानी सुनेगा तो तेरी नींद खराब हो जाएगी , ना बाबा मैं ऐसा नही कर सकती

अवी - मैं नही रोउंगा , आप बताइए

सी चाची - मुझे बता पेट भरने पे हम गुलाब जामुन खाते है क्या नही , गुलाब जामुन को फ़्रीज़ मे रखते है और फिर से जब भूक लगती है तब खाते है

अवी - मतलब आगे क्या हुआ वो नही बताएँगी आप

सी चाची - आज के लिए इतना काफ़ी है

अवी - ऐसा आधा अधूरा बता कर आप ग़लत कर रही थी

सी चाची - तुम ने कुछ देर पहले क्या कहा था , जब मैं ने आधे अधूरे जवाब के बारे मे बोला था तब

अवी - वो तो

सी चाची - तू दीदी के आधे अधूरे जवाब से खुश था तो अब मेरी आधी कहानी से खुश हो जा

अवी - चाची

सी चाची - तूने ही कहा था

अवी - प्लीज़ चाची

सी चाची - तूने सुमन दीदी से क्या पूछा था

अवी - क्या ?

सी चाची - कि नेहा बुआ के बारे मे तुम्हे कुछ पता नही है , तूने जानना है , मैं ने जब कहा कि नेहा बुआ को अपने प्यार से बदल देना तो तूने क्या कहा कि तुझे कुछ पता नही है नेहा बुआ के बारे मे , तो मैं ने तुझे बता दिया

अवी - चाची आप मेरी बातों को मुझ पे ईस्तमाल कर रही है

सी चाची - अवी तूने कहा था कि थोड़ा थोड़ा बता दूं , तो अब थोड़ा बताया है बाकी बाद मे बताउन्गी

अवी - आप ऐसा कैसे कर सकती हो

सी चाची - तू ऐसा कैसे कर सकता है , सुमन दीदी को तूने पूछा कैसे

अवी - ग़लती हो गयी

सी चाची - देख अवी आधा अधूरा सच बहुत डेंजर होता है

अवी - तो आप पूरा सच बता दीजिए

सी चाची - तू उस सच को सुनने के लिए अभी तय्यार. नही हो

अवी - चाची

सी चाची - अवी मुझ पे विश्वास रख मैं तुझे सच बता दूँगी बस सही समय आने दे

अवी - और वो समय कब आएगा

सी चाची - जल्दी आएगा , अब तो बहुत जल्दी आएगा

अवी - चाची बस और थोड़ा ही बताओ , एक छोटी सी कहानी बता दो

सी चाची - अवी ये कोई प्रवचन नही है , इस सच से सबकी लाइफ जुड़ी है , एक ग़लत कदम और सब कुछ बिखर जाएगा

अवी - आप ऐसे डराइए मत

सी चाची - तो तू अब कुछ मत पूछ

अवी - नही पूछूँगा पर

सी चाची - पर क्या

अवी - इस आधे सच के साथ मेरा क्या होगा ये आपने सोचा नही

सी चाची - कुछ नही होगा , तुझे समझ मे आ जाएगा की आधा सच कैसा होता है

अवी - पर चाची पापा ने ऐसा

सी चाची - ये कहानी के बारे मे तू कुछ सोचना मत

अवी - क्यू ?

सी चाची - क्यू कि इस मे 25% ही सच था बाकी सब झूठ था ( सब कुछ सच था )

और चाची हँसने लगी

मैं चाची की तरफ देखता रह गया

सी चाची- ऐसे क्या देख रहा है , ये तो सिर्फ़ कहानी थी , तू तो सच समझ बैठा

और चाची हँसने लगी

अवी - आपने मुझसे झूठ कहा, और हंस क्यूँ रही है

सी चाची - तुझे ये बताने के लिए कि जो सच तू जानना चाहता है वो कैसा है

अवी - कैसा

सी चाची - आधा सच सिर्फ़ दर्द देता है जैसे तुझे दर्द हो रहा है

अवी - मतलब ऐसा ™कुछ नही हुआ

सी चाची - सिर्फ़ नेहा के बारे मे जो बताया वो सच था

अवी - नेहा बुआ के बारे मे

सी चाची - तूने तो कहा कि नेहा के नफ़रत को कम करने के लिए , तुझे नेहा के बारे मे जानना है , तो मैं ने बता दिया

अवी - पापा वाली बाते

सी चाची - वो मैं ने मिर्च मसाला लगा कर बता दिया ( सब कुछ सच था )

अवी - चाची आप ने बिना वजह से मुझे रुला दिया

सी चाची - मेरा बचपन से सपना था कि राइटर बनू ,देखो कैसे झूठ को सच बना कर बताया तुम्हे ( सब सच था )

अवी - नेहा बुआ की बात तो सच थी ना

सी चाची - हाँ , तुम्हारे पापा को तो खुद दादाजी ने भेजा था , तुम्हारे पापा तो जाना ही नही चाहते थे (झूठ)

अवी - तो हम शहर 3 क्यूँ रहते थे

सी चाची - वो तो बाद की बात है , बाद मे एक छोटा सा झगड़ा हुआ और तुम्हारे पापा शहर 3 रहने चले गये

अवी - पक्का ये झूठ था , क्यू कि मुझे तो ये सच ही लग रहा है

सी चाची - ये झूठ था ( सब सच था )

अवी - फिर आपने मेरे पहले जवाब का आन्सर ये क्यू नही दिया , क्यू पापा की बात को एक्सप्लेन किया

सी चाची - बताया ना मुझे राइटर बनना था , तू मेरा 1 रीडर , तो तेरे रिव्यू को देख रही थी

अवी - आप बहुत गंदी हो, बिना वजह डरा दिया मुझे

सी चाची - अब समझ मे आया कि आधा सच कैसा होता है

अवी - जी

सी चाची - अब बताऊ थोड़ा थोड़ा सच

अवी - नही , सब कुछ एक साथ बताना

सी चाची - दुबारा सुमन दीदी को तंग करोगे

अवी - नही

सी चाची - देख तुझे छोटी सी बात बताने को इतनी बड़ी कहानी बतानी पड़ी

अवी - पर आपकी कहानी सच लग रही थी

सी चाची - गधे , मैं ने पहले ही कहा था कि मैं कहानी बता रही हूँ , तुझे तभी समझ जाना चाहिए था

अवी - मैं गधा हूँ

सी चाची - और नेहा की बाते सच है , ये भूलना मत

अवी - जी

सी चाची - और तुम्हारे दादाजी की बाते कुछ सच थी

अवी - जैसे स्कूल और कुश्ती के बारे मे

सी चाची - स्टोरी मे थोड़ा रियल मसाला डालना पड़ता है

अवी - समझ गया , तभी आप मुझे कसरत करने को बोलती है

सी चाची - बता ना मैं राइटर बन सकती हूँ

अवी - नही

सी चाची - क्यूँ ?

अवी - आप ने लास्ट मुझे रुला दिया

सी चाची - और क्या ग़लती की

अवी - आपने रीडर को सच बताया ये कभी नही करना चाहिए

सी चाची - ये ग़लती हो गयी

अवी - तो आप लिखना शुरू कर दीजिए आप अच्छा लिखती हो

सी चाची - और तुम नेहा के बारे मे सोचना शुरू कर दो

अवी - अभी नही , जब आप सच बताएँगी तब सोचूँगा , तब तक अब जैसा रहता हूँ वैसे ही नेहा बुआ को खुश रखूँगा

सी चाची - यही जवाब चाहिए था मुझे

अवी - पर आपने मुझे रुलाया है

सी चाची - तुझे सीख देनी ज़रूरी थी

अवी - मैं समझ गया कि हम थोड़ा थोड़ा खाना खा सकते है पर सच पूरा सुनना चाहिए , हर चीज़ो को कंपेर नही करना चाहिए

सी चाची - और मिसाल सही देनी चाहिए

अवी - जी

सी चाची - अब क्या देख रहा है

अवी - क्या सच मे ये झूठ था

सी चाची - अब क्या कसम खाऊ , तू.कहेगा तो कसम भी खा लूँगी ( मत बोलना कसम खाने को)

अवी - इतनी सी बात के लिए कसम , बस आप जल्दी मुझे सारी बाते बता देना

सी चाची - (बच गयी मैं और सुमाम दीदी भी बच गयी ,) कहा ना कि जल्दी बता दूँगी

अवी - तो अब मैं राजेश की कहानी बताऊ

सी चाची - रुक एक मिनिट

सी चाची - रुक एक मिनिट

अवी - क्या हुआ चाची

सी चाची - मुझे रोने की आवाज़ आ रही है , अमित उठ गया होगा

अवी - पर राजेश की कहानी

सी चाची - मैं अभी अमित को सुला के आती हूँ , तू तब तक मेरी कहानी को भूल जा

अवी - जी

और छोटी चाची अमित के पास चली गयी
 
Back
Top