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मैं और मेरा परिवार

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अपडेट 911

आज का दिन तो जूनियर के साथ चला गया.

क्लास ना होने से रानी कोमल और मैं कॅंटीन मे बैठ कर टाइम पास करने लगे.

कोमल-ये कविता लीना अब तक क्यूँ नही आई.

रानी-आ जाएगी. उनका पहला दिन था.

कोमल-उनका पहला दिन अच्छा बीते . पहले दिन पे पूरा साल डिपंड होता है.

अवी-मेरी बहनें है ,उनका दिन अच्छा नही गया तो वो दिन को अच्छा बनाना जानती है

रानी-दोनो काफ़ी तेज है.

कविता-कौन तेज है दीदी.

रानी-मैं तुम्हारी बात कर रही थी. और तुम आ गयी.

अवी-100 साल की ज़िंदगी है तुम्हारी.

लीना-इतना जीके क्या करे. आप बस कोल्ड्रींक पिला दो

कोमल-क्या हुआ कॉलेज मे

कविता-कॉलेज मे धमाल किया जिस से थक गयी

रानी-कहा था ना ,कविता लीना तेज है. पहले दिन ही कॉलेज मे बाज़ी मार ली होगी

कविता-भैया ने कहा था पहले दिन धमाल करना तो हम ने कर दिया.

कोमल-क्या किया कॉलेज मे

अवी-पहले ये लो कोल्ड्रींक पी लो

लीना-थॅंक यू भैया.

कोल्ड्रींक पीते ही मेरी बहनें फ्रेश हो गयी.

कोमल-अब बताओ क्या किया कॉलेज मे

कविता-कॉलेज मे जाते ही सीनियर ने हमे बुला लिया. और आपके बारे मे पूछने लगी

कोमल-तो क्या बताया

लीना-कुछ सीनियर हम पे गुस्सा हुए तो कुछ सीनियर हम से अच्छे से बात करने लगे. क्यूँ कि हम आपको जानते थे

कविता- आपकी बहनें होने से , आप दूसरे कॉलेज के होने से थोडा गुस्सा और थोड़ी हमदर्दी मिल रही थी

लीना- साथ ही कुछ सीनियर इस वजह से परेशान थे कि हम ने इस कॉलेज मे अड्मिशन क्यूँ ली , भैया और दीदी तो इस कॉलेज मे है फिर महिला कॉलेज मे अड्मिशन क्यूँ लिया

रानी-फिर तो तुम्हें पूछा होगा कि यहाँ अड्मिशन क्यूँ लिया

कविता-इसी सवाल के जवाब ने तो जो सीनियर गुस्सा हुए वो भी अच्छे से बात करने लगे

कोमल-क्या जवाब दिया

कविता-हम ने कहा. हमारी दीदी ने हमे कहा कि उन्होंने इस महिला कॉलेज मे अड्मिशन ना लेके ग़लती की. महिला कॉलेज बेस्ट है , वो ग़लती हमारे साथ ना हो इस लिए हम ने यहाँ अड्मिशन लिया.

रानी-तुम्हारे जवाब से तुम्हारे सीनियर खुश हो गये. वो कॉलेज हमारे कॉलेज का दुश्मन है.इतना कॉंपिटेशन होता है कि पूछो मत, तुम्हारे जवाब से उनको लगा कि उनका महिला कॉलेज ग्रेट है

लीना-हाँ दीदी, हमारे जवाब से सब सीनियर खुश हुए. स्टूडेंट प्रेसीडेंट तो सबसे ज़्यादा खुश हुई.

अवी-ये बढ़िया किया तुम ने . जीएस को खुश करके अच्छा किया

कोमल-पर हमारे कॉलेज का नाम खराब किया

अवी-कोई बात नही ,कविता लीना को फ़ायदा हुआ ये इम्पोर्टेंट है . फिर आगे क्या हुआ

कविता-फिर कुछ सीनियर ने आपके बारे मे पूछा .

अवी-क्या बताया तुम ने

कविता-हमारे भैया कह रहे थे कि महिला कॉलेज की लड़किया पढ़ाई मे तेज तो है और दिखने मे खूबसूरत है. यहाँ अड्मिशन लेके हम उनके जैसी तेज और खूबसूरत बन जाएगी. महिला कॉलेज की लड़किया ब्रेन वित बेऔथी वाली है.उनकी तारीफ वो भी आपके तरफ से होने वो खुश हो गयी , लड़की तो तारीफ की भूकी रहती है ,

अवी-फिर क्या कहा लड़कियो ने

रानी कोमल-अवी

दोनो की आवाज़ सुनते ही मैं चुप हो गया.

लीना-भैया ने महिला कॉलेज की जो तारीफ की जिस से सीनियर इतने खुश हुए कि हम से भैया का नंबर माँग रहे थे कुछ सीनियर

रानी और कोमल एक साथ बोल पड़ी

रानी कोमल-ग़लती से भी मत देना. वरना मार पड़ेगी

कविता-क्या दीदी, भैया का टाइम पास हो जाता.

कोमल-तू घर चल तेरा टाइम पास निकालती हूँ.

अवी-कविता लीना हम बाद मे बात करते है.

रानी-कविता लीना .अपने तेज दिमाग़ का ईस्तमाल करके कॉलेज लाइफ एंजाय करना

कविता-दीदी हम तो खुल के जियेंगे

रानी-कभी भी मेरी मदद लगे तो माँग लेना.

लीना-थॅंक यू दीदी

रानी-मैं चलती हूँ .देर हो गयी.

कोमल-हम भी चलते है. चलो

और हम रानी को बाइ बोलके अपने गाओं आ गये.

कविता लीना ने अपने तेज दिमाग़ से पहले दिन सीनियर का दिल जीत लिया.

दूसरे कॉलेज की बुराई सुन कर सीनियर खुश हो गये कविता लीना पर

कविता लीना के चेहरे पे जो स्माइल थी वो बता रही थी कि उन्हों कितना एंजाय किया.

कोमल भी खुश थी. उसे मेरे साथ जो मिला था.

कोमल अपने जूनियर को अच्छे से गाइड करके खुश थी.

मैं तो अपने ग्रूप की तीन लड़कियो से दोस्ती करके अपने मोबाइल का इन्बोक्ष फुल करना स्टार्ट करने वाला था.

अगर कुछ बन पाया तो महिला कॉलेज मे अपना झंडा गाढ दूँगा.

कविता लीना को एक बार कहा तो वो मेरा नंबर नोटीस बोर्ड पे लगा देंगी.

चलो आज सब ठीक रहा .

हम ने गाओं से पहले एक पेड़ की जगह सलेक्ट की वहाँ से कोमल मेरी बाइक से स्कूटी एक्सचेंज करेंगी.

कविता और लीना भी अपना राज़ राज़ रखने मे एक्सपर्ट थी.

बुआ कविता और लीना को खुश देख कर कोमल पे नाज़ करने लगी.

कोमल बुआ की बात सुनकर मन ही मन मे हंस रही थी .

कोमल को मैं ने चुप रहने को कहा और अपने घर चला गया.

पहला दिन ठीक गया तो सब दिन ठीक जाएँगे.

मैं अपने घर आकर फ्रेश होके बच्चों के साथ समय बिताने लगा.

फिर शाम मे कोमल के पास चला गया पढ़ाई करने

कोमल-अवी आज तो बच गये

अवी-हाँ,

कोमल-पर कल माँ को पता चला तो

अवी-ऐसे कैसे पता चलेंगा. हम ने अब तक कुछ पता चलने दिया है जो अब पता चलेगा.

कोमल-पर कविता ने बचपाना दिखा कर बता दिया तो

अवी-नही दिखाएगी.

कोमल-इतना यकीन है

अवी-तुम पे जितना है उस से थोड़ा कम

कोमल-थॅंक्स

अवी-वो छोड़ो .ये बताओ कॉलेज मे आज क्या किया

कोमल-पूछो मत आरती की हरकत पे हँसी आ रही थी

अवी-क्या किया आरती ने

कोमल-आज कुछ जूनियर लड़कियो को हम ने अपने क्लास मे बुलाया था.

अवी-रॅगिंग लेने

कोमल-नही. इंट्रो और गाइड करने

अवी-तो वहाँ क्या हुआ

कोमल-जूनियर का इंट्रो लेने के बाद आरती जूनियर को अपने ग्रूप मे शामिल करने लगी. पर जूनियर आरती का पिछा छुड़वा कर हमारे पास आने लगी.

अवी-तुम आरती से ज़्यादा काबिल हो

कोमल-सुनो तो. आरती जिस जूनियर को बुलाती वो एक मिनट बोल कर हमारे पास आ जाती. और आरती का पोपट हो जाता

अवी-इस से तो गुस्सा आया होगा आरती को

कोमल-हाँ, गुस्सा आया .और उसने एक जूनियर को पकड़ कर गुस्सा निकालना शुरू किया

अवी-तो उस जूनियर की अच्छी रॅगिंग ली होगी आरती ने

कोमल-वही तो मज़े की बात है. जैसे जूनियर ने अपना पूरा नाम बताया तो आरती के पसीने निकलने लगे

अवी-कौन थी वो जूनियर

कोमल-प्रिन्सिपल सर की बेटी

अवी-व्हाट, आरती का तो नाम सुनते बुरा हाल हुआ होगा

कोमल-पूरा क्लास आरती की हालत पे हँसने लगा.

अवी-और तुम

कोमल-आरती मेरी फ्रेंड थी. मैं ने अपनी हँसी कंट्रोल की. पर मन ही मन मे हंस रही थी.

अवी-तो उस जूनियर का क्या हुआ

कोमल-होना क्या था. प्रिन्सिपल सर का नाम सुनते ही सीनियर भागने लगे .पर हम वही रुक गये और उस जूनियर को गाइड किया

अवी-तो आगे क्या हुआ

कोमल-उस जूनियर को हमारे ग्रूप मे जाय्न किया . और हम से हसके बात करने लगी .आरती वापस क्लास मे आई और हमे हस्ते हुए बात करते हुए देख कर आरती गुस्से मे अपने पैर पटकते हुए वापस बाहर चली गयी.

अवी-इस मे बहुत हँसी आई होगी.

कोमल-हाँ ,पर आरती को लग रहा होगा कि ये सब मैं ने किया.

अवी-जाने दो उसे .तुम फ्रेंड बनाते रहना.

कोमल-फ्रेंड बनाउन्गी पर बेस्ट फ्रेंड सिर्फ़ तुम होंगे

अवी-एस बेस्ट फ्रेंड

कोमल-चलो बातें बहुत हुई हम पढ़ाई करते है.

अवी-एस मेडम

और हम कॉलेज की बातें करते हुए पढ़ाई करने लगे

पढ़ाई करने के बाद मैं घर चला गया
 
चॅप्टर 912

घर आकर खाना खाने के बाद मैं कमरे मे बंद हो गया.

जूनियर लड़कियो ने कुछ जोक वाले मसेज भेजे थे.

उनपे हंस कर रिप्लाइ किया.

थोड़ी देर बाद कविता का मसेज आया.

"भैया हमारे पास बॅलेन्स कम है आप फोन करो"

ये क्या चक्कर है .

मैं ने कविता को फोन किया और लीना को कान्फरेन्स पे लिया.

कविता-भैया सो रहे थे क्या

अवी-नही. कुछ जूनियर के मसेज पढ़ रहा था

लीना-लड़का या लड़की

अवी-लड़की. लड़को के मसेज पढ़ु इतने बुरे दिन नही आए

कविता-आप कहे तो हमारे कॉलेज मे आपका नंबर लीक करूँ

अवी-अभी नही.

लीना-मतलब बाद मे कर सकते है

अवी-तुम पहले कॉलेज मे सेट्ल हो जाओ

कविता-भैया हम तो आज ऐसे सेट्ल हुए कि सेंनोर हमे अपने मे से एक समझने लगे है.

अवी-कॉलेज से याद आया ,तुम नेमुझे पूरी बात बताई नही कॉलेज मे क्या हुआ.

लीना-वही बताने के लिए फोन किया है.

अवी-तो शुरू हो जाओ

कविता-आपका नाम सुनते ही लड़किया पागल हो गयी. कुछ तो हमसे आपका नंबर माँग रही थी.

अवी-फिर क्या हुआ

लीना-फिर जीएस हमे उस हॉल मे ले गयी जहा रॅगिंग ली जा रही थी . ऑडिटोरियम मे

अवी-तुम्हारी रॅगिंग हुई. किसने ली

कविता-जीएस ने

अवी-क्या करने को बोला

लीना-जीएस का मूड नही था ,उसे किसी और तरह से रॅगिंग करनी थी

अवी-किस तरह

कविता-जैसे कपड़े निकालना, थोड़ी नाइटी टाइप की.सेक्सी वाली , नोन्वेज टाइप की , बाय्फ्रेंड , सेक्स वाले क्वेस्चन पूछ रही थी

अवी-तो तुम ने क्या किया

लीना-हम ने जीएस से बात की और जीएस ने जैसे हमारा फिगर पूछा तो हम ने कमीज़ मे हाथ डाल कर ब्रा निकाल कर अपना साइज़ बताया .

अवी-तुम ने ऐसा किया. दिलेर हो तुम

कविता-हमारी इस हरकत से जीएस खुश हो गयी.

अवी-फिर क्या हुआ

लीना-फिर क्या था . जीएस ने हमारे दिलेरी की तारीफ करके दूसरे जूनियर के साथ नॉटी टाइप की रॅगिंग करनी शुरू की. हमारा एग्जाम्पल देकर सबकी रॅगिंग ली.

अवी-फिर तो लड़किया रोई होगी.

कविता-हाँ .कुछ रोने लगी थी जिसको हम ने समझा दिया.फिर क्या था रॅगिंग को सीनियर के साथ जूनियर भी मज़ा लेने लगे.

अवी-क्या मतलब

लीना-हम ने जूनियर को ऐसा समझा कि लग नही रहा था कि रॅगिंग हो रही है. हम तो रॅगिंग का गेम खेलने लगे

अवी-कैसा गेम

कविता-सबने कमीज़ मे हाथ डाल कर ब्रा निकाली. ब्रा को हाथ मे पकड़ कर उसमे पानी भर दिया. और पानी गिरने से पहले अपना इंट्रो देना, फिर से उसमे पानी भरके फिर खाली होने तक कुछ भी करवाना , रेस लगाई सीनियर ने , जो जीतेगा उसकी रॅगिंग बंद साथ मे इनाम मे चोकॉलेट दिया जीएस ने

अवी-ये तो तुम ने बढ़िया किया .वरना लड़किया रॅगिंग का नाम सुनते ही डर जाती है. रॅगिंग को एंजाय करने से दिलेर बन जाते है. हिम्मत बढ़ जाती है.

लीना-हाँ, जूनियर इतने फ्रीली एंजोव कर रहे थे कि लग नही रहा था कि रॅगिंग हो रही है.

अवी-फिर जीएस नेक्या कहा

कविता-जीएस तो खुश हो गयी हम पे. और कहा कि आज जैसी रॅगिंग लेने मे कभी मज़ा नही आया. और सारा क्रेडिट हमे दिया

अवी-और तुम्हारी रॅगिंग

लीना-कल से हमारी रॅगिंग कोई नही लेंगा ऐसा जीएस ने कहा. और हमे अपने ग्रूप मे शामिल कर लिया.

अवी-ये तो अच्छी बात है

कविता-अब देखना भैया हम कितनी मस्ती करेंगे कॉलेज मे

अवी-जो करना धीरे धीरे करना . और जीएस की फ्रेंड बने रहना

लीना-वो तो हम बन जाएँगे पर

अवी-पर क्या

कविता-वो हम ने जीएस को आपका नंबर दिया. उसे माँग लिया तो हम ने दे दिया.

अवी-कोई बात नही कभी कॉल आया तो बात कर लूँगा

लीना-थॅंक यू भैया. आप ना होते तो हमारा क्या होता

अवी-सेनटी मत होना

कविता-सच भैया. आप भैया के साथ हमारे बेस्ट फ्रेंड हो

अवी-अब तो तुम मुझे रुला रही हो.

लीना-भैया आप बहुत अच्छे हो . हमारा कितना ख़याल रखते हो.

अवी-मेरी बहन का ख़याल तो रखना होगा. पर तुम मेरा विश्वास टूटने मत देना. ग़लत काम मत करना

कविता-हमारी तरफ से शिकायत का मौका नही मिलेगा.

अवी-चलो अब सो जाओ .कल कॉलेज जाना है.

लीना-गुड नाइट भैया

कविता-गुड नाइट

अवी-गुड नाइट एंजल

कविता और लीना धमाल करेंगी अपने कॉलेज मे

मुझे अपने पढ़ाई का टेन्षन ना होता ना तो मैं भी उनके साथ मिलके धमाल करता

मुझे पढ़ाई पे ज़्यादा ध्यान देना होगा .वरना इस बार कम मार्क आए तो मुझे खेत मे काम करना होगा.

मैं पढ़ाई पे ज़्यादा फोकस करूँगा.

लो मेरा लंड नाराज़ हो गया.

अरे मैं ने ज़्यादा फोकस कहा ,इस का मतलब मैं चुदाई करना बंद नही करूँगा.

तुझे तेरी खुराक मिलेगी.

लंड तो गुस्से मे खड़ा हो गया.

तो तुझे अभी तेरी खुराक चाहिए. चल तू भी क्या याद करेगा ,आज तुझे तेरी खुराक मिल जाएगी.

विद्या को फोन करके मैं ने अपने कमरे मे बुला लिया.

विद्या का नाम सुनते ही लंड खुश होकर फुदकने लगा.

विद्या-तुम तो पूरे तैयार हो

अवी-मैं ने तुम्हें नही बुलाया. इस (लंड) ने तुम्हें बुलाया है

विद्या-मुझे पता था तुम मुझे नही बुलाओगे. पर मेरा दीवाना(लंड) मेरे बिना ज़्यादा दिन रह नही सकता.

अवी-तो प्यार करना शुरू करो. देखो तुम्हारा नाम सुनते ही फुदकने लगा है.

विद्या तो इसी का इंतजार करती रहती है.

विद्या के रहने से मेरा लंड हमेशा खुश रहेगा.

विद्या अपने प्यारे दीवाने को मुँह मे लेकर चूसने लगी.

रति तो आजकल सुबह आती है और शाम मे अपने घर चली जाती है. उसे मैं ने कुछ पैसे दिए थे और मंगला काकी को भी रति की शादी के लिए पैसे दे दिए.

रति और मंगला काकी के बीच मे जो ग़लतफहमी थी वो ख़तम हो गया था .अब वो मिलके रहने लगी.

जल्दी मंगला काकी अच्छा लड़का देख कर रति की शादी कर देंगी. ऐसे छोटी चाची की तरफ से सुनने मे आया था.

कुवरसिंघ के माफी माँगने के बाद से रति खुश रहने लगी .और मैं ने उसके बाद रति की चुदाई नही की ,अब विद्या जो थी मेरे पास

विद्या की वजह से मुझे और चाची को काफ़ी सपोर्ट मिल गया.

विद्या जिस तरह घर का ध्यान रखती है, जिस तरह बच्चो को संभालती ,जैसे सीमा चाची की सहेली बन गयी उस से मैं विद्या को उसकी खुराक देने लगा.

आज तो विद्या ने मुझे कुछ करने नही दिया.

आज वो मेरी चुदाई करना चाहती थी.

मैं ने विद्या को प्यार करने की इजाज़त दी.

विद्या ने पहले मेरे लंड को जी भर के प्यार किया

फिर मेरे लंड के लिए अपनी चूत के डोर खोल दिए.

कभी चूत का डोर खोल देती तो कभी गंद का डोर खोल के मेरे लंड को अपने अंदर लेती.

मैं उसे चुदाई करते हुए देख रहा था.

विद्या ने बड़े प्यार के साथ चुदाई करके मेरे लंड को खुश किया.

विद्या को मेरा वीर्य पीना पसंद था इस लिए वो ज़्यादा से ज़्यादा मेरा वीर्य चूत की जगह मुँह मे लेती.

विद्या के मेरा वीर्य पी पी कर उसकी खूबसूरती मे चार चाँद लग रहे थे.

विद्या की खूबसूरती को देख कर मेरा मन फिर से उसकी चुदाई करने का होरहा था.

पर ज़्यादा खाने की लालच नही करनी चाहिए.

विद्या आज की खुराक मिलते ही मेरे गले लग कर बातें करने लगी.

उसकी प्यारी प्यारी बातें सुनते सुनते मैं सो गया.

मेरे सोते ही विद्या अपने कमरे मे चली गयी.

रति की चुदाई करते हुए पकड़े जाने का डर लगा रहता था.

पर विद्या पूरा इंतज़ाम करके आती थी ताकि हम पकड़े ना जाए.

विद्या अपने कमरे मे जाते हुए मुझे कपड़े पहना कर गयी. मेरा बहुत ध्यान रखती है.

इसी लिए वो मेरे घर की एक सदस्य है.
 
चॅप्टर 913

पढ़ाई ,कॉलेज ,फॅमिली मे कैसे दिन निकल जाते है पता नही चलता.

कविता और लीना साथ मे हो तो हर दिन हँसते खेलते हुए निकल जाते है.

कविता और लीना अपनी कॉलेज लाइफ अपने तरह से एंजाय कर रही थी.

वो इतनी जल्दी अपने सीनियर के साथ अड्जस्ट हुई की वो खुद को जूनियर कम सीनियर ज़्यादा समझने लगी थी.

कविता लीना मेरे नाम का इस्तेमाल करके फ़ायदा उठाना जानती थी.

कविता लीना की टेन्षन ख़तम होने से सब अच्छे से चलने लगा.

रानी के साथ रात मे फोन पे लवर की तरह बातें करना.

दिन मे कोमल मे सामने रानी से एक फ्रेंड की तरह मिलना .चुपके से आइस क्रीम खाना तो कभी इसी शॉप के कभीं मे प्यार करते हुए कोल्ड्रींक पीना.

ज़्यादा याद आने पर सनडे को रानी के घर जाके आंटी के हाथो का खाना खाते हुए रानी से प्यार करना.

रानी के साथ हर दिन स्पेशल जैसा लगता था.

कोमल भी अपने पढ़ाई के साथ साथ कॉलेज मे मस्ती करने लगी थी

लाइब्रेरी के साथ साथ कॅंटीन मे भी आने लगी.

रियल दुनिया को समझने की कोशिस करने लगी. किताबो के बाहर की दुनिया कितनी हसीन है ये कोमल समझ गयी.

कोमल को मेरे रूप मे एक बेस्ट फ्रेंड मिला था.

कोमल को जब भी उड़ना होता तो वो मेरे सपोर्ट के साथ उड़ने लग जाती.

उसका जब दिल करता कि आइस क्रीम खाना है तो मैं उसके दिल की बात जान कर उसे आइस क्रीम ले आता.

कविता और लीना के दूसरे कॉलेज मे होने से कोमल खुद को फ्री महसूस करने लगी

अगर वो दोनो यहाँ होती तो कोमल को उनके बारे मे सोचना पड़ता.

पर अब तो कोमल पिछले साल से ज़्यादा एंजाय करना सीख गयी.

कोमल तो किसी किसी वीकांड पे रानी के घर पे रुक जाती.

कोमल और रानी उस वीकॅंड पे बहुत एंजाय करती थी.

खास बात ये थी कि रानी और कोमल वीकॅंड पे साथ रही तो मोबाइल स्विच ऑफ रखती.

मुझे उनके ऐसा करने पे गुस्सा आ जाता पर अच्छा भी लगता की रानी और कोमल बहनों की तरह रहती है.

जब किसी वीकॅंड पे रानी हमारे गाओं आती तब तो रानी के पास मेरे लिए टाइम नही होता था.

कभी चाची से मिलना कभी बुआ से बाकी समय कोमल साथ रहती.

फिर भी मैं खुश था ,रानी मेरे आँख के सामने जो होती.

अभी कल की बात ले लो,

कल तो रानी और कोमल ने कॉलेज बंक मारने का प्लान बनाया.

कोमल बंक मार सकती है , ये सब के लिए शॉक्ड था

फिर क्या था हम तीनो कभी इधर घूमने गये तो कभी उधर खाना खाने चले जाते.

कल तो हम ने बंक मारके बहुत एंजाय किया.साथ मे मूवी देखी , शॉपिंग की , मस्ती मज़ाक करने मे पूरा दिन चला गया

जब ये बात कविता लीना को पता चली तो वो गुस्सा हो गयी.

उनको भी हमारे साथ एंजाय करना था .

कविता और लीना को कैसे मनाना है ये मुझे पता था.

मैं ने उनके लिए उनके कॉलेज के पास एक घर रेंट पे लिया.ऐसा घर लिया कि वहाँ के मकान मालिक दूसरे शहर रहते थे जिस से कविता लीना आराम से अपने फ्रेंड के साथ पार्टी कर पाएँगी.

मुझे उनपे पूरा भरोसा था .कि वो मेरा विश्वास टूटने नही देंगी.

मेरे हाथो मे के देखते कविता लीना खुश हो गयी.

मकान देखते ही उछल पड़ी क्यूँ कि कुछ ज़रूरत की चीज़े मैं ने अरेंज की थी.

बेड ,टीवी, फ़्रीज़, म्यूज़िक सिस्टम, एट्सेटरा .जिसे देखते कविता और लीना खुश हो गयी.

और मुझे प्रॉमिस किया कि वो मुझे सारी बात बताएँगी.

मेरा मन तो हुआ की कॅमरा लगा दूं पर उनको आज़ादी से रहने दूं.

जितने ज़्यादा रिस्ट्रिक्षन उतनी ज़्यादा ग़लत रास्ते पे जाने का ख़तरा होता है.

दोनो मुझे बता देती कि उन्हों मकान मे क्या किया.

लड़कियो की पार्टी मे मैं ज़्यादा इंटेरफेआर क्यू करूँ. पर जब कविता लीना बताती कि डॅन्स किया ,ट्रूथ आंड डेर खेला, तो मुझे बड़ा मज़ा आता.

कविता लीना ने बताया कि कुछ सीनियर बीयर लाई थी. पर दोनो ने हाथ भी नही लगाया.

लड़कियो ने अपना एक अड्डा जैसा बना दिया था उस मकान को. फ्रीली रहती वहाँ पर

कविता और लीना पार्टी के वीडियो बना देती मुझे दिखने के लिए .जिस मे लड़किया ब्रा मे डॅन्स कर रही थी.

वीडियो मे कविता लीना को होश मे देख कर रिलॅक्स हो जाता .और हम वीडियो डेलीट कर देते .ताकि ग़लत हाथो मे ना आ जाए.

राज अपने स्कूल मे बिज़ी था.

छोटा होने से वो अकेला रह गया था.

कविता लीना के शहर जाने से राज थोड़ा उदास हो गया. क्यू की उसके साथ स्कूल जाने वाला ,मस्ती करने वाला. खेलने वाला कोई नही था.

ऐसे मे मैं ने विद्या को राज पे ध्यान रखने को कहा. विद्या शाम मे राज के साथ खेलने जाती साथ मे उसकी पढ़ाई लेती .

राज को विद्या की कंपनी अच्छी लगी. विद्या भी राज के साथ अपने बचपन मे जो नही किया वो करने लगी. राज के साथ मस्ती मज़ाक करने लगी.

विद्या राज की पढ़ाई लेती जिस से पूजा बुआ को आराम मिलता .और पूजा बुआ कभी दूसरे बुआ के घर जाती तो कभी चाची से मिलने आ जाती.

दोपेहर मे तो तीनो बुआ अकेली रह जाती ,बच्चे बड़े जो हो गये थे.

इस लिए बुआ दोपेहर का टाइम साथ मे बिताती या फिर चाची के साथ दोपेहर मे बातें करती.

चाची तो अब खुश रहने लगी.

बचे

घर मे मैं ने उनके लिए सारी सुविधा का इंतज़ाम किया था.

चाचा बच्चों की वजह से शहर कम जाते थे .जिस से चाची को अच्छा लगता.

चाचा अपने खेत के काम मे लग गये थे .

चाचा खेतो मे अपने दोस्त से मिल लेते.

चाचा कभी खुश रहते तो कभी उदास हो जाते

चाचा को मैं आज तक समझ नही पाया.

चाचा के दिल की बात जिस दिन पता चलेगी तब सब ठीक हो जाएगा.

ये तो हुआ गाओं का हाल ,दुबई मे अंकल जल्द से जल्द गाओं वापस आना चाहते थे.

पैसे बहुत कमा लिए .अब उनको फॅमिली पे खर्च करने का समय आया था.

जल्दी स्वेता दीदी सीतल दीदी की शादी हो जाएगी.

पर शादी से पहले वो अपने प्यार को नयी उचाई पे ले जाना चाहती थी.

रोहन ने मुझे बताया कि चारो जम्मू कश्मीर ,गये थे टूर पे. वहाँ कुछ पल साथ बिताके चारो खुश थे.

लव बर्ड के खुश रहने से मैं खुश था.

पता नही पूनम दीदी का क्या हाल चाल है.

उनका फोन आना भी बंद हो गया.

स्वेता दीदी की तरफ से खबर मिल जाती. पर पूनम दीदी से मिलना था मुझे, दिल की बहुत अच्छी है पूनम दीदी.ज्योति बुआ से बिल्कुल अलग है पूनम दीदी ,

ज्योति बुआ और पूनम की सोच मे ज़मीन आसमान का फरक है.

ज्योति बुआ पैसो के लिए कुछ भी कर सकती है ऐसा पूजा बुआ ने बताया था.

अब तक तो चाचा और ज्योति बुआ के बारे मे कोई खबर नही आई.

लगता है ज्योति बुआ पैसो के लिए शहर2 मे भी चुदवाती होगी.

ज्योति बुआ थोड़ा प्यार पाने के लिए चुदाई करती तो समझ जाता ,फिज़िकल नींद पूरी ना हो तो क्या होता है मुझे पता है

पैसो का लालच बहुत गंदा होता है. पैसे भाई भाई को दुश्मन बना देता है. हेस्ट खेलते घर को बर्बाद कर देता है

पता नही ज्योति बुआ की किस्मत उनको किस तरफ ले जाएगी.

पर मेरी किस्मत मुझे ख़ुसीयन दे रही है.

मैं अपनी किस्मत को कभी नाराज़ नही होने दूँगा.
 
चॅप्टर 914

वीकॅंड आते सब फ्री होने की जगह बिज़ी हो जाते.

कॉलेज गर्ल साथ मे वीकॅंड मनाने लगी

इस वीकॅंड पे कोमल रानी के घर पे गयी

कोमल और रानी जब भी वीकॅंड साथ मे बिताती तो बहुत एंजाय करती थी

कोमल दूसरे दिन जब ये बात कविता और लीना को बताती कि उसने रानी के साथ ये किए वो किए तो उनको दिल भी करता कि वो भी ऐसी पार्टी करे

ये बात कोमल भी समझ गयी जिस से इस बार कोमल कविता और लीना को अपने साथ रानी के घर लेकर गयी ,

4 कॉलेज गर्ल पूरी नाइटी मस्ती करेंगे

,कविता और लीना को भी कोमल अपने साथ लेकर गयी यो नेहा बुआ और नीता बुआ भी साथ मे वक्त बिता कर पुराने दिन याद करती

लेकिन मैं अकेला पड़ जाता

ये रानी भी ना.

रानी मेरी गर्लफ्रेंड है या मेरे फॅमिली की. समझ नही आता.

रानी ने पिच्छला वीकॅंड मेरे साथ बिताया तो ये वीकॅंड कोमल के साथ बिता रही थी.

आज तो मैं बोर हो जाउन्गा.

जूनियर का मेसेज आया था कि वो सब पंकज और करीम भी मूवी देखने जा रहे है .मुझे बुलाया था पर मैं ने पहले मना किया.

पर मुझे पता होता कि कोमल रानी के घर जा रही है तो मैं जूनियर के साथ मूवी देखने चला जाता.

मेरी जूनियर तो मुझसे चिपक के रहती है ऐसे मे मूवी देखते हुए चान्स बन जाता.

कोई बात नही ,नेक्स्ट टाइम जूनियर के साथ सेट्टिंग कर लूँगा.

पर आज क्या करूँ

विद्या भी राज के घर गयी है. वो आज राज के साथ वक्त बिताएँगी.

बुआ ने भी आज पूरा दिन चाची के साथ रहने का प्लान बना चुकी है.

बुआ आज लंच और डिन्नर हमारे इधर करेंगी .साथ ही दोपेहर मे" कभी कभी " मूवी देखने वाली है.

बुआ ना होती तो छोटी चाची मेरे साथ रहती पर बुआ के आते ही औरतों की नोन स्टॉप बातें शुरू हो गयी.

राजेश होता तो मज़ा आ जाता पर वो अगले वीकॅंड पे आएगा.

आज तो पूरा सनडे खराब हो जाएगा.

ऐसे मे मैं अपने मोबाइल पे टाइम पास करने लगा.

पर मोबाइल भी कुछ समय बाद बोर लगने लगा.

ऐसे मे गाओं का एक चक्कर लगा लेता हूँ.

गाओं मे घूमते हुए कोई ना कोई मिल जाता है.

उसी के साथ टाइम पास कर लूँगा.

मैं चाची को बता कर बाहर घूमने चला गया.

गाओं मे लोग ,स्कूल के सामने जमा होते है.

मैं भी वही जाके पुराने गाओं वाले दोस्तो केसाथ पुराने दिनो को याद करने लगा.

आज सनडे होने से मोना का भाई भी वहाँ टाइम पास करने आ गया.

मैं ने मोना के भाई को नाश्ता ऑफर किया.और हम बातें करने लगे

अवी-क्या बात है तुम तो आज कल दिखाई नही देते

मोना का भाई-हाँ वो मैं शहर की कंपनी पे नौकरी करने लगा हूँ

अवी-ये तो अच्छी बात है.लगता है अब तुम सुधर रहे हो

मोना का भाई-हाँ, जितनी मस्ती करनी थी कर ली. अब सेट्ल होके फ्यूचर के बारे मे सोच रहा हूँ

अवी-तुम तो सीरीयस हो गये

मोना का भाई-होना पड़ता है. आज कल खुद का खुद देखना पड़ता है. मोना शहर मे सेट्ल हो गयी मैं भी शहर मे रहने चला जाउन्गा

अवी-मोना तो पूरी बदल गयी शहर जाके

मोना का भाई-शादी होते उसकी किस्मत बदल गयी. उसी ने मुझे नौकरी पे लगाया है.और जल्दी शादी करूँगा.

अवी-अरे याद आया. तुम्हें मैं ने शहर मे एक लड़की के साथ देखा था.(सेल्स गर्ल)

मोना का भाई-उसी के साथ शादी करके शहर मे सेट्ल हो जाउन्गा.

अवी-शादी मे बुलाना मत बुलाना

मोना का भाई-ज़रूर बुलाउन्गा.अभी 1 2 साल बाकी है

अवी-तुम तो सेट्ल हो जाओगे .मैं भी देखता हूँ कुछ ना कुछ.

मोना का भाई-तुम बड़े लोग हो ,तुम्हें क्या टेन्षन है

अवी-मैं भी इंसान हूँ

मोना का भाई-अच्छा जोक था.अच्छा अब मैं चलता हूँ ,शहर जाके आता हूँ

अवी-गर्लफ्रेंड से मिलने जा रहे हो

मोना का भाई-तुम्हारी भाभी से मिल लेता हूँ. और मोना से भी मिल लूँगा.

और मोना का भाई शहर की बस मे बैठ कर चला गया.

मोना का भाई तो सुधर गया .अच्छी बात है ,उसको अपने फ्यूचर का टेन्षन है.

सेल्स गर्ल के लिए अब मोना का भाई पर्फेक्ट साथी रहेगा.

गाओं के लड़के लाइन पर आ रहे है. धीरे धीरे काम पे लग जाएँगे

गाओं के लिए अच्छा रहेगा.

मोना के भाई के जाते ही मैं दूसरे लड़को के साथ बात करने लगा कि मुझे किसी ने आवाज़ दी.

मैं ने आवाज़ की दिशा मे देखा तो ,मुझे प्रिन्सिपल सर बुला रहे थे.

मैं प्रिन्सिपल सर के पास चला गया.

अवी-सर आप

प्रिन्सिपल-तुम तो आज कल कही दिखते नही.

अवी-सर कॉलेज की वजह से बिज़ी रहता हूँ

प्रिन्सिपल-अच्छी बात है, पढ़ाई पे ध्यान दे रहे हो .पर कभी कभी मिलने आ जाया करो

अवी-आप अपने स्कूल की वजह से बिज़ी रहते हो ऐसे मे डिस्ट्रब करना

प्रिन्सिपल-मैं अकेले बोर हो जाता हूँ. तुम्हारी कंपनी अच्छी लगती है

अवी-मैं नेक्स्ट टाइम ज़रूर आउन्गा

प्रिन्सिपल-आज क्या करे हो वो बोलो

अवी-सर आज तो मैं फ्री हूँ

प्रिन्सिपल-तो चलो घर चल के बात करते है

अवी-अभी

प्रिन्सिपल-चलो तुम्हें एक गुड न्यूज़ बतानी है

अवी-कैसी गुड न्यूज़

प्रिन्सिपल-चलो तो सब पता चल जाएगा

अवी-चलिए .

प्रिन्सिपल-ये हुई ना बात

प्रिन्सिपल सर मुझे अपने साथ अपने घर ले गये.

चलो इस बहाने से किरण से मिल लूँगा .और गुड न्यूज़ क्या है वो पता कर लूँगा.

काफ़ी दिन हो गये किरण से मिले हुए.
 
चॅप्टर 915

मैं प्रिन्सिपल सर के साथ उनके घर आ गया.

काफ़ी दिन हो गये यहाँ आकर. किरण से भी मिले हुए काफ़ी दिन हो गये.

किरण , किरण तो माँ बनने वाली थी.

मैं इतनी बड़ी बात कैसे भूल गया.वो तो मेरे बच्चे की माँ बन गयी थी.

मैं ये बात कैसे भूल गया.मैं अपने बच्चे के बारे मे भूल गया.

किरण को मुझे बताना चाहिए था. मैं दूसरे कामो मे इतना डूब गया कि किरण के बारे मे भूल ही गया.

किरण मेरे बच्चे की माँ है .उसने मुझे एक फोन तो कर दिया होता.

ग़लती मेरी भी है मुझे बात नोट करके रखनी चाहिए थी. आज के बाद इम्पोर्टेंट बातों को मोबाइल मे नोट करके रखूँगा.

किरण से मिलके माफी माँग लूँगा. पहले देख तो लूँ मुझे बेटी हुई या बेटा हुआ है.

किरण से संदर क्यूट बेटी हुई तो अच्छा रहेगा.

प्रिन्सिपल-अवी क्या सोच रहे हो

अवी-कुछ नही

प्रिन्सिपल-चलो अंदर तुम्हें एक खूसखबरी सुनाता हूँ

और मैं प्रिन्सिपल सर के साथ अंदर चला गया.

घर मे जाते ही मेरी आँख किरण को ढूँढने लगी. मेरे बच्चे को देखने के लिए मेरा दिल धड़क रहा था.

अवी-सर ,किरण भाभी नही दिखाई दे रही.

प्रिन्सिपल-तुम्हे याद है मुझे लगा तुम भूल गये होगे.

अवी-आप दादा बन गये ये बात मैं कैसे भूल सकता हूँ. आपने मेले मे बताई थी.

प्रिन्सिपल-किरण को बेटी हुई है. मैं दादा बन गया.

मैं जो चाहता था वही हुआ ,किरण को बेटी हुई है. मैं एक और बेटी का बाप बन गया .

किरण जैसी क्यूट होगी और मेरी तरह स्मार्ट बनेगी.

परी जैसी होगी किरण की बेटी. परी की तरह क्यूट

कितना अच्छा होता अगर मैं किरण के पास होता ,उसे कितनी खुशी मिलती.

प्रिन्सिपल-अवी ,क्या हुआ दिन मे सपने देख रहे हो

अवी-मुबारक हो सर आप दादा बन गये

प्रिन्सिपल-थॅंक यू, मैं तो कब से दादा बनना चाहता था पर आज कल फॅमिली प्लॅनिंग ज़्यादा करते है

अवी-(मुझे पहले बता देते तो अब तक पूरी हॉकी टीम बना देता इस घर को) चलो आपकी इच्छा पूरी हो गयी.

प्रिन्सिपल-भगवान ने मेरी सुन ली.

अवी-सिर भाभी कहाँ है.

प्रिन्सिपल-रूको अभी बुलाता हूँ.

प्रिन्सिपल-सम्धन जी किरण को बाहर लेकर आना ,मेहमान आए है.

सांदन-जी ,

अवी-सम्धन, भाभी की माँ आई है.

प्रिन्सिपल-हाँ, यहाँ कोई औरत नही है बहू की देखभाल करने को तो सम्धन को बुला लिया

अवी-उनका भी तो घर होगा.

प्रिन्सिपल-समधी जी 1 साल पहले भगवान के पास चले गये ,जिस से उनके यहाँ सम्धन और उनको बेटा रहता है. तो मैं ने यहाँ बुला लिया

अवी-अच्छा किया. भाभी की माँ अच्छे से देखभाल कर पाएँगी.

प्रिन्सिपल-इसी लिए बुलाया है. मुझे तो इसमे का कुछ पता नही. औरतों के काम औरतों को आते है.

अवी-सही कहा आपने

किरण-पिताजी आपने बुला मुझे

बात करते हुए जैसे ही किरण की नज़र मुझपे पड़ी तो वो चुप हो गयी.

किरण को एक पल के लिए लगा होगा कि भाग कर मेरे गले लग जाए और मुझसे शिकायत करे इतने दिन बाद आने से

पर दूसरे पल किरण को गुस्सा आया कि मैं ने उसके बारे मे सोचा भी नही. इतने दिनो बाद मिलने आया हूँ.

किरण के गाल गुस्से से लाल हो गये

किरण ने मेरी तरफ देख कर मुँह टेडा किया.

किरण-पिताजी आपने मुझे बुलाया

प्रिन्सिपल-बहू देखो तुमसे मिलने कौन आया है.अवी आया है

किरण-मैं इससे मिलके क्या करूँ.

प्रिन्सिपल-बहू ऐसे क्यूँ बोल रही हो. अवी ने मंदिर मे दर्शन करवाए थे जिस से हमारे घर मे लक्ष्मी पैदा हुई है.

किरण-तो अब टाइम मिला आने का

प्रिन्सिपल-बहू तुम्हें आज क्या हुआ है.कैसी बातें कर रही हो

किरण-पिताजी मेरा सर दर्द कर रहा है .मुझे आराम करना है

किरण तो मुझ पे कुछ ज़्यादा ही गुस्सा है.

प्रिन्सिपल-तुम आराम करो ,मेरी पोती कहाँ है

किरण-प्रिया सो रही है

अवी-प्रिया ,प्यारा नाम रखा है

मेरी बात सुनते ही किरण ने फिर अपना मुँह टेडा किया .

प्रिन्सिपल-सोने दो उसे. अवी का मुँह मीठा करने के लिए मिठाई लाना

किरण-इतने दिन बाद मुँह मीठा नही किया जाता

किरण तो थर्ममीटर तोड़ देंगी इतनी गरम है.

प्रिन्सिपल-तुम भी आराम करो .लगता है तुम्हारा सर ज़्यादा दर्द कर रहा है.

किरण ने एक बार मेरी तरफ देखा और पैर पटकते हुए अपने कमरे मे चली गयी.

पर वापस दीवार के पीछे छुप कर हमारी बातें सुनने लगी.

प्रिन्सिपल-अवी बहू की बात का बुरा मत मान लेना,पता नही आज उसे क्या हुआ

अवी-इसमे बुरा क्या मानना है. सही तो कहा इतने दिनो बाद मिठाई नही मिलती

प्रिन्सिपल-मैं तो तुम्हें उसी दिन मिठाई देने आया था जिस दिन मैं दादा बन गया था

अवी-कब

प्रिन्सिपल-मई महीने की बात है. पर तुम घर पे नही थे.

अवी-मैं तो हमेशा घर पे होता हूँ

प्रिन्सिपल- तुम्हारी चाची ने कहा कि तुम अपने फ्रेंड के साथ हॉलिडे पे गये हो

अवी-हाँ, तब आप आए थे. तब तो मैं मेंटली बीमार था.

प्रिन्सिपल-क्या हुआ था तुम्हें

अवी-मेले के काम के वजह से पढ़ाई नही हुई .और रिज़ल्ट इतना खराब आया कि मैं 1 हफ़्ता ठीक से सो नही पाया. मैं मेंटली बीमार हो गया था.

मेरी बात सुनते किरण ने अपने सर पे हाथ रखा .उसने बिना वजह मुझपे गुस्सा किया. मैं मिरर मे किरण को देख रहा था.

प्रिन्सिपल-इतना टेन्षन मत लिया करो. पढ़ाई इस साल नही की तो अगले साल अच्छी हो जाती है. इतना प्रेसर नही लेना चाहिए.सेहत के लिए अच्छा नही होता.

अवी-हाँ, इसी लिए दिमाग़ को आराम देने के लिए घूमने चला गया.

प्रिन्सिपल-अच्छा किया .घूमने से दिमाग़ को शांति मिलती है

अवी-उसी समय आप आ गये .तब मैं यहाँ गाओं मे होता तो ज़रूर मिलने आता

प्रिन्सिपल-तुम ने इतना कहा यही काफ़ी है. वैसे बाद मे मैं भूल गया था तुम्हें बताने को.

अवी-आज हम मिल गये .वरना पता नही मुझे कब पता चलता.

प्रिन्सिपल-चलो जाने दो. मैं तुम्हारे लिए मिठाई लाता हूँ

अवी-मिठाई. मुझे तो लगा आप पार्टी दोगे

प्रिन्सिपल-तुम पीते तो मैं पार्टी देता.

अवी-बीयर पीनी शुरू की है.

प्रिन्सिपल-चलो मेरे रूम मे .वहाँ बैठक लगाते है

अवी-हाँ चलिए बीयर के साथ गुस्सा भी पी जाउन्गा

प्रिन्सिपल-क्या कहा

किरण मेरी बात सुनते अपने कमरे मे चली गयी.

अवी-कुछ नही.

और हम प्रिन्सिपल सर के कमरे मे चले गये.

सर ने अपने लिए रूम और मेरे लिए बीयर निकाल ली.

और सर ने पीना शुरू किया. मैं सिर्फ़ दिखने के ग्लास मुँह को लगा रहा था. मुझे आज बीयर पीने का मूड नही था.

प्रिन्सिपल-तुम क्या बोल रहे थे

अवी-मैं बोल रहा था कि आपका बेटा कहाँ है.

प्रिन्सिपल-उसे ज़्यादा दिन छुट्टी नही मिली .वो कुछ दिन के लिए आकर चला गया.

अवी-आर्मी मॅन

प्रिन्सिपल-आर्मी वालो का ऐसा ही होता है.

अवी-आपने बताया था कि आपका बेटा यहाँ पास के बेस पे ट्रान्स्फर करने वाला है

प्रिन्सिपल-कोशिस कर रहा है वो. 1 2 साल तो और लग जाएँगे . उसके यहाँ आते ही बहू खुश हो जाएगी.

अवी-वो तो है पर

सम्धन शराब के लिए चखना ले आई. और वापस चली गयी

प्रिन्सिपल-क्या कह रहे थे तुम

अवी-भाभी तो भैया के आने से खुश हो जाएगी पर

प्रिन्सिपल-पर क्या

अवी-आप कब तक अकेले रहेंगे,

प्रिन्सिपल-क्या मतलब

अवी-आपको शराब पिलाने वाली होनी चाहिए

प्रिन्सिपल-इस उमर मे तुम मुझे शादी करने को बोल रहे हो

अवी-शादी की कौन बात कर रहा है.

प्रिन्सिपल-तो रंडी रखने को बोल रहे हो

अवी-एक पार्टनर रख सकते है .उसको भी किसी के सहारे की ज़रूरत हो

प्रिन्सिपल-ऐसा पार्टनर मुझे इस उमर मे कहाँ मिलेगा.

अवी-सर आपकी उमर हुई ही क्या है

प्रिन्सिपल-मैं तो आज भी जवान हूँ

सर को शराब चढ़ गयी.

प्रिन्सिपल-पर मैं कहाँ पार्टनर ढूंढूंगा

अवी-कही और जाने की ज़रूरत क्या है.

प्रिन्सिपल-क्या मतलब

अवी-आप अकेले हो आपकी सम्धन अकेली है, दोनो को अपना अकेला पन दूर करना चाहिए

प्रिन्सिपल-सम्धन , बहू क्या कहेगी.

अवी-उसे कौन बताएगा

प्रिन्सिपल-नही मुझसे नही होगा.

अवी-क्यूँ नही होगा.

प्रिन्सिपल-वो कहाँ मैं कहाँ.

अवी-सर जवानी मे आपने कितनी लड़कियो कोपटाया है ये सम्धन क्या चीज़ है.

प्रिन्सिपल-मुझे पार्टनर की ज़रूरत नही है

अवी-पार्टनर की ज़रूरत नही है तो आपका हथियार संधान का नाम सुनते ही खड़ा क्यूँ हुआ.

प्रिन्सिपल-वो तो

अवी-आप को सम्धन अच्छी लगती है. ये आपका हथियार बोल रहा है.

प्रिन्सिपल-है तो अच्छी पर डर लगता है

अवी-कैसा डर ,डर भगाने के लिए शराब है

प्रिन्सिपल-उसने बहू को बता दिया तो

अवी-एक काम कीजिए सम्धन को सेक्स की गोलियाँ देना शुरू कर दीजिए . अपना हथियार दिखाना शुरू करो, एक दिन अपनी खुजली मिटाने खुद आपके हथियार के पास आएँगी

प्रिन्सिपल-प्लान अच्छा है.पर

अवी-पर वर छोड़िए .अपनी आँख बंद करके सम्धन के सपने देखिए .आपको जवाब मिल जाएगा

प्रिन्सिपल सर ने मेरे कहते ही आँख बंद की और आँख बंद होते ही सर लूड़क गये

सर तो अब कुछ घंटे उठेंगे नही.

सर को जल्दी सुलाने के लिए सम्धन का इस्तेमाल किया.

सर अब सपने मे अपने सम्धन की चुदाई करेंगे और मैं किरण से आराम से मिल लूँगा.

सम्धन का नाम.नही लेता तो सर मुझे पकाते रहते और मैं किरण से मिल नही पाता

किरण से मिलने के लिए सर को सम्धन के सपने दिखाने ज़रूरी थे

सर तो लूड़क गये .मैं किरण से मिलके आता हूँ. उसकी माँ को भी कुछ ना कुछ करके निपटा दूँगा. ताकि किरण से अकेले मे मिल पाउन्गा.
 
चॅप्टर 916

सर को सम्धन के सपने दिखा कर सुलाने के बाद मैं किरण के कमरे मे चला गया

किरण प्रिया को दूध पिला रही थी.

किरण की माँ मुझे कही दिखाई नही दी.

मैं ने डोर पे नॉक किया.

अवी-क्या मैं अपनी बेटी को मिलने के लिए अंदर आ सकता हूँ.

किरण-सिर्फ़ बेटी से मिलना हो तो मत आना

अवी-प्रिया की नानी कहाँ है

किरण-प्रिया तुम्हारी नानी को बाहर भेजा है कुछ समान लाने

अवी-तो क्या मैं अंदर आ सकता हूँ

किरण-प्रिया मैं ने किसी को रोका नही है तुमसे मिलने के लिए

किरण प्रिया से बोलने का नाटक करके मुझसे बात कर रही थी.

अवी-मैं तो प्रिया और प्रिया की माँ से मिलने आया हूँ.

किरण-प्रिया तुम दूध पियो मैं तुम्हारे पापा से बात करती हूँ

अवी-क्या मैं अंदर आ सकता हूँ

किरण-तुम अभी तक वही खड़े हो .अपनी बेटी से मिल लो वरना कहोगे कि मिलने नही दिया

मैं किरण के पास आकर प्रिया के सर पे हाथ घुमाने लगा.

किरण-प्रिया को डिस्ट्रब मत करो ,वो दूध पी रही है

अवी-प्रिया की माँ को डिस्ट्रब कर सकता हूँ

किरण-तुम इतने दिन बाद क्यूँ आए

अवी-मुझे किसी ने खबर नही की.

किरण-पर तुम्हें पता था ना कि मैं माँ बनने वाली हूँ .तो एक बार मिलने आ जाते

अवी-मेले के काम मे तुम्हारी बात को भूल गया.

किरण-भूल गये.

अवी-मैं झूठ नही बोलूँगा. सच कड़वा होता है पर सच बोलना ज़रूरी होता है. किरण मैं इतना बिज़ी था कि मुझे सच मे याद नही रहा.

किरण-झूठ बोल देते मैं खुश हो जाती,सच क्यूँ बोला

अवी-अपनी बेटी के सामने झूठ बोल कर उसे झूठ बोलना सिखाऊ

किरण-ठीक है. कहाँ थे इतने दिन

अवी-तुम ने सब सुन लिया ना

किरण-इतनी टेन्षन क्यूँ लेते हो,तुम्हें कुछ हो जाता तो

अवी-तुम तो बीवी जैसे बोल रही हो

किरण-शादी नही की पर हूँ तो तुम्हारी बीवी ना .तुम्हारी बेटी की माँ

अवी-वो तो है. बहुत प्यारा नाम रखा है प्रिया

किरण-तुम्हें पसंद आया

अवी-हाँ

किरण-वहाँ तुम होते तो तुम्हें नाम रखने को बोलती

अवी-नही, सच मे अच्छा नाम रखा है. मुझे पसंद आया.

किरण-प्रिया मुझ पे गयी है

अवी-तुम्हारी तरह खूबसूरत होगी बड़ी बनके ,और अच्छा हुआ तुम पे गयी जिस से ज़्यादा गड़बड़ नही हुई.

किरण-पर आँख तुम्हारी जैसी है.

अवी-मैं प्रिया को दुनिया दिखाउन्गा.

किरण-सच

अवी-हाँ, तुम्हें क्या लगा माँ बनाके छोड़ दूँगा तुम्हें

किरण-कुछ कुछ ऐसा लगा था.

अवी-मैं प्रिया का पूरा ख़याल रखूँगा. इतना प्यार दूँगा कि उसे लगना चाहिए कि उसका पापा मैं हूँ.

किरण-ये बोल के तुम ने मेरा गुस्सा ख़तम कर दिया.

अवी-पर मैं तुमपे गुस्सा हूँ.

किरण-मैं ने क्या किया

अवी-एक फोन तो कर देती.

किरण-नंबर नही था.

अवी-सर को बोलती

किरण-एक बार कहा था तो पिताजी ने कहा कि तुम गाओं मे नही हो. अगर बार बार कहती तो शक हो जाता.

अवी-बात मे दम है.

किरण-फिर सोचा गाओं आकर तुम्हें बता दूं.

अवी-तो बताया क्यूँ नही.

किरण-मैं बाहर कैसे जा सकती हूँ. पर अच्छा हुआ तुम आ गये

अवी-आ गया हू. वापस नही जाउन्गा.

किरण-तुम्हें कुछ करने की ज़रूरत नही है मैं प्रिया का पूरा ध्यान रकूँगी.

अवी-अगर प्रिया को कुछ हुआ तो तुम्हें मार पड़ेगी.

किरण-तुम्हारी अमानत को मैं कुछ नही होने दूँगी.

अवी-मैं तो आता रहूँगा अब ,पर कभी ज़रूरत पड़ी तो मुझे फोन करना

किरण-ये क्या बताने की बात है. पहला फोन तुम्हें करूँगी

अवी-तुम्हें थॅंक्स कहने का दिल कर रहा है.

किरण-क्यू?

अवी-इतनी प्यारी बेटी जो दी है

किरण-बेटा होता तो

अवी-मुझे तो बेटी चाहिए थी. तुम्हारी तरह खूबसूरत

किरण-मुझे भी बेटी चाहिए थी.

अवी-देखो कितने प्यार से दूध पी रही है.

किरण-तुम्हारी तरह है. बस दूध के साथ खेलती रहती है

अवी-कल तक मैं दूध चूस रहा था

किरण-अब तुम्हारी बेटी. उसे पीने दो तुम कुछ मत करना

अवी-एक बार

किरण-नही. दूध कम तैयार हो रहा है

अवी-तुम अपनी खुराख बड़ा दो ,मेरी बेटी को भूका मत रखना

किरण-मैं भूकी रहूंगी पर प्रिया को भूका नही रहने दूँगी.

अवी-ये तो सो भी गयी.

किरण-बड़ी मुश्किल से सोती है तंग मत करो

अवी-कितनी प्यारी है.

किरण-तुम्हारी पहली बेटी है इस लिए इतना प्यार दिखा रही हो

अवी-जैसे कि तुम्हारी दूसरी हो

किरण-मेरे कहने का मतलब था कि

अवी-रहने दो. यहाँ कब्से आया हूँ एक ग्लास पानी नही पूछा

किरण-बीयर पी रहे थे ना

अवी-तुम्हें क्या लगता है बीयर पीके अपनी बेटी के पास आता.

किरण-पर तुम ने तो कहा था

अवी-वो सर से जल्दी पिच्छा छुड़ाने के लिए कहा था.

किरण-रूको मैं तुम्हारे लिए टी बना कर लाती हो

अवी-वो बाद मे करना पहले अपनी माँ से पिछा छुदाओ .वो कभी भी आती होगी.

किरण की माँ-किरण

अवी-लो आ गयी तुम्हारी माँ

किरण-तुम अलमारी मे चुप जाओ मैं माँ को सुलाती हूँ

अवी-क्या करोगी.

किरण-मेरे पास नींद की गोली है वही खिला दूँगी. फिर हम आराम से बातें करेंगे

और मैं अलमारी मे छुप गया किरण अपनी माँ को सुलाने चली गयी.

लेकिन ये क्या किया माँ तो इसी रूम मे आ गयी.

किरण ने अपनी माँ को पानी मे नींद गोली डाल कर दे दी.

किरण की माँ पानी पीते किरण के साथ बातें करने लगी.

उस पे नींद की गोली का असर होने मे टाइम था.

थोड़ी देर बाद किरण की माँ का सर भारी होने लगा. वो वही पर बेड पे लेट गयी.

किरण ने अपनी माँ को आवाज़ दी चेक करने के लिए कि वो सो रही कि नही.

किरण को यकीन हो गया तो किरण ने मुझे आवाज़ दी

किरण-अवी अब बाहर आ जाओ

मैं अलमारी से बाहर निकलते लंबी लंबी सासे लेने लगा.

किरण ने मुझे पानी दिया.

अवी-तुम ने मुझे मार दिया था

किरण-क्या करती माँ को सुलाना ज़रूरी था.

अवी-तुम्हारी माँ की तो

किरण-क्या कहा

अवी-तुम्हारी माँ ने मरवा दिया था मुझे

किरण-अब कोई प्राब्लम नही होगी .वो सो रही है

अवी-मतलब हम दोनो अकेले

किरण-तुम फिर शुरू हो गये

अवी-कितने महीने हो गये तुम्हें प्यार किए

किरण-तो

अवी-आज इतना अच्छा दिन है. खुशख़बरी सुनाई है तुम ने

किरण-तो

अवी-कुछ मीठा हो जाए

किरण-कुछ मीठा नही मिलेगा.

अवी-ऐसे कैसे आज तो मैं मीठा ख़ाके रहूँगा.

किरण-आज नही फिर कभी

अवी-अब तो रोज मुँह मीठा करूँगा.

किरण-तो तुम नही मानोंगे.

अवी-अब किस दे भी दो

और मैं ने किरण को अपनी बाहों मे लेकर किस करना शुरू किया.

किरण मेरे बाहों मे आते पिघल गयी.

किरण मुझे इतने दिनो की दूरी को ख़तम करने वाला किस कर रही थी.

किरण को किस करते ही पुराने दिन याद आ गये.

आज तो किरण को प्यार करके जाउन्गा.

अपनी बेटी प्रिया को प्यार करूँगा.

प्रिया की माँ को प्यार करके इतना प्यारा गिफ्ट देने का सेलेब्रेशन करूँगा .
 
चॅप्टर 917

किस करके किरण खुश हो गयी.

किरण को यही तो चाहिए था.कितने महीने बीत गये मुझे प्यार करके

किरण के होंटो का गुलाबी रस पीकर मुँह मीठा कर के दिल खुश हो गया.

किरण के किस करने मे शिकायत थी नाराज़गी थी प्यार था बेताबी थी अपनापन था.

किरण तो एक किस मे दुनिया घूम कर आ गयी.

अवी-किरण तुम तो बहुत टेस्टी हो गयी हो.

किरण-तुम्हें अपना टेस्ट करवाने मे सुकून मिलता है.

अवी-फिर तो तुम्हें पूरा टेस्ट करके जाउन्गा आज

किरण-आज टेस्ट करने के लिए सही समय नही है. मेरी माँ यही है. मेरे ससुर दूसरे रूम मे है

अवी-तो क्या हुआ हम पहले भी सर के रहते प्यार करते थे

किरण-तब की बात अलग थी. अब हमारे साथ एक नयी जान जुड़ी है

अवी-प्रिया के लिए ही तो उसकी माँ को प्यार करना चाहता हूँ.

किरण-प्रिया का नाम लेकर तुम मुझे प्यार करना चाहते हो. पर मैं नही करने वाली.

अवी-तुम मत करो .तुम्हारी माँ को प्यार करता हूँ.

किरण-क्या कहा. मेरी माँ को ,मार पड़ेगी.

अवी-देखो इस उमर मे भी जवान लग रही है.

किरण-ए मिसटर ,वो मेरी माँ है.

अवी-तो क्या हुआ ,कितनी हॉट लग रही है तुम्हारी माँ,तुम्हारी माँ की वजह से तुम इतनी हॉट हो. तुम्हारी माँ को देखते ही कच्चा खाने का मन हो रहा है.

किरण-ऐसा सोचना भी मत .मेरे रहते किसी और की तरफ देखना भी मत

अवी-तुम तो मेरी बीवी जैसी बात कर रही हो.

किरण-मेरा मतलब था कि मैं हू ना. मेरी माँ के बारे मे क्यूँ बात कर रहे हो.

अवी-क्यूँ तुम्हें बुरा लग रहा है .

किरण-और नही तो क्या.

अवी-मैं तो बस तारीफ कर रहा था.तुम तो ऐसे गुस्सा हो रही हो जैसे मैं ने तुम्हारी माँ के साथ सेक्स किया हो.

किरण-बातों बातों मे तुम कैसे फसाते हो वो मुझे पता है. दूर रहना मेरी माँ से

अवी-मैं उनका दामाद हूँ ,थोड़ा प्यार तो करना पड़ेगा

किरण-दामाद हो तो मुझसे प्यार करो जितना करना है.

अवी-तुम गुस्सा होती हो तो और हसीन लगती हो.

किरण-तुम मेरे सामने ऐसी बात मत किया करो

अवी-फिर मुझे तुम्हारा प्यार मिलेगा ना .

किरण-ओह तो इस लिए मुझे गुस्सा दिला रहे थे

अवी-स्मार्ट होती जा रही हो मेरे साथ रह के

किरण-बातों मे घुमा कर मुझे फसा लिया. मैं नही करने वाली प्यार

अवी-अभी तुम ने कहा था तुम्हें प्यार करू

किरण-वो तो मैं

अवी-सोच लो तुम्हारी माँ यही पर है.

और किरण अपनी जगह से उठ कर मेरे गोद मे आकर बैठ गयी.

अवी-ये हुई ना बात

किरण-तुम मुझे किसी दिन फसवा दोगे

अवी-फसाया तो बचाउन्गा मैं ही.

किरण-दूध को हाथ मत लगाओ ,समझा करो .

मैं ने किरण के बूब्स से हाथ हटा कर उसके पेट पर अपनी उंगली घुमाने लगा

अवी-अब ठीक है

किरण-और नीचे मत जाना

मैं ने किरण की पेटिकोट मे हाथ डाल दिया. और उसकी चूत को मसल्ने लगा.

किरण-अवी ऐसा मत करो. मुझे कुछ कुछ हो रहा है.

अवी-होने दो

किरण-अगर कोई आ गया तो मैं प्यासी रह जाउन्गी.

अवी-कोई भी आए आज हमे कोई अलग नही कर सकता.

किरण-यहाँ माँ भी है मुझे शरम आ रही है

अवी-सोचो यहाँ तुम्हारी माँ सो रही है और उनकी बेटी मेरे साथ प्यार करेंगी. सोचो यहाँ तुम्हारी बेटी प्रिया सो रही है और उसकी माँ उसके पापा को प्यार करेगी . तुम्हारी माँ और बेटी के रहते प्यार करके मे इतना मज़ा आएगा.

किरण-बिल्कुल नही. मुझे शरम आ रही.

अवी-3 जेनरेशन यहाँ है.

किरण-अवी , तुम्हें मज़ा नही आएगा .मेरी ढीली है

अवी-तो क्या हुआ पिछवाड़ा तो टाइट है.

किरण-अवी उंगली मत करो

अवी-लो फिर तुम्हारी माँ को उंगली करता हूँ

और मैं किरण की माँ की चूत पे सारी के उपर से हाथ रख दिया.

किरण ने ये देखते ही मेरा हाथ पकड़ कर अपने सारी के अंदर डाला

किरण-तुम मेरी माँ से दूर रहो

अवी-तुम्हारी माँ की चूत गरम है.प्यासी है तुम्हारी माँ

किरण-रहने दो .पर तुम मेरे हो.

अवी-अब रोकोगी

किरण-नही. जो करना है कर लो,बस मुझे प्यार करते रहना चाहते कुछ भी हो

अवी-बहुत प्यार दूँगा तुम्हें

किरण-तो करो ना प्यार

मैं ने अपने हाथ उसके सारी के अंदर से निकाल दिए.

किरण-क्या हुआ

अवी-मैं ने सुबह से कुछ नही खाया.लंच का टाइम हो गया है. भूक लगी थी.

किरण-मुझे खा लो

अवी-तुम्हें खाने के लिए एनर्जी चाहिए ना

किरण-तुम प्रिया का ध्यान रको ,मैं 10 15 मिनट मे नाश्ता बना कर लाती हूँ.

अवी-साथ मे टी भी लाना

किरण-आज अपने हाथ से खाना खिलाउन्गी.

और किरण मुझे किस करके किचन मे चली गयी.

और कमरे मे मैं प्रिया और किरण की माँ रह गये.

प्रिया सोती हुई क्यूट दिख रही थी.

मैं ने प्रिया के माथे पे एक किस की और अपने गले से गोल्ड की चैन निकाल कर प्रिया को पहना दी.

अपने पापा की तरफ से प्रिया के लिए एक छोटा सा गिफ्ट था.

प्रिया को सोने दिया और मैं किरण की माँ की तरफ चला गया.

आफ्टर 15 मिनट

किरण मेरे लिए नाश्ता लेकर आ गयी.

किरण-ये क्या कर रहे हो तुम

मेरा लंड मेरे हाथ मे था .

किरण-तुम कर क्या रहे हो

अवी-वो मैं ... मैं तो तुम्हारे लिए तैयार कर रहा था

किरण मुझे घूर के देखने लगी.

अवी-ऐसे क्या देख रही हो , देखो तुम्हारे लिए कैसे खड़ा हो गया.

किरण-वो दिख रहा है पर मेरा इंतजार करते

अवी-कैसे करता .अगर सर को होश आ गया तो

किरण-लो तुम अपना नाश्ता कर्लो मैं अपना नाश्ता करती हूँ

मैं बेड पे बैठ कर नाश्ता करने लगा और किरण मेरे लंड को प्यार करने लगी.

जैसे ही किरण ने मेरे लंड को मुँह मे लिया तो उसे अजीब सा टेस्ट लगा

किरण ने लंड मुँह से बाहर निकाल लिया.

किरण-ये आज ऐसा टेस्ट क्यूँ लग रहा है

अवी- ,इतने दिन बाद मुँह मे लिया है इस लिए ऐसा लग रहा है.

किरण-और ये चिप चिपा क्या लगा रखा है

अवी-वो वो, तुम्हारे इंतजार मे कम निकल गया

किरण-मुझे लगा कि ,जाने दो

अवी-क्या लगा तुम्हें

किरण-कुछ नही.मुझे प्यार करने दो

और किरण वापस लंड चूसने लगी और मैं ने नाश्ता फिनिश किया.

फिर मैं भी किरण के साथ प्यार मे शामिल हो गया.
 
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