चॅप्टर 935 डी
हमारी फॅमिली दावत तो हो गयी.
गाँव के लिए जो दावत रखी थी उसके लिए टाइम था
हम घर जाने के बजाय आम के बगीचे मे आराम करते हुए बातें करने लगे.
यहाँ लॅडीस ज़्यादा थी , लॅडीस ,वो भी इतनी सारे एक साथ मिल जाए तो, जो बातों को सिलसिला शुरू हुआ नोन स्टॉप चलता रहा.
कचछर कछर पछर पचछर.
छोटी हो या बड़ी हो, हम उमर हो तो बातें तो कहाँ से शुरू होती है और कहाँ ख़तम हो जाती पता नही चलता.
बातें आज के जनमदिन से शुरू हुई फिर लीना के बर्तडे से होते हुए 1980 मे नेहा बुआ और नीता बुआ के बर्तडे तक चली गयी. वहाँ से जो टॉप गियर डाला तो बच्चो के 18थ बर्तडे की बात शुरू हुई.
बर्तडे की बातें शादी मे कॉनवर्ट हुए, स्वेता दीदी की शादी मे ये करेंगे वो करेंगे. उनके बच्चों का बर्तडे ऐसे ही मानाएँगे.
बातें स्वेता दीदी के होने वाले बच्चों तक चली गयी. वहाँ से यू तुर्न ऐसा लिया कि गाँव के बारे मे बातों को सिलसिला रानी की मम्मी ने शुरू किया.
गाँव से शहर,शहर से पढ़ाई, पढ़ाई ने बचपन, बचपन से मैं, मुझसे चाची. चाची से उनके फॅमिली के बारे मे बातें शुरू हो गयी.
ऐसा लग रहा था पूरी ज़िंदगी की बातें आज कर लेगी.
मैं तो पक गया, इतना पक गया कि जलने लगा.
राजेश ने तो बढ़िया आइडिया सोचा था. राज के साथ वो पेड़ पे चढ़ कर फोटो देखने लगा.
मुझे तो ज़िम्मेदार लड़के की तरह अपनी गर्दन हाँ मे घुमाने के लिए चाची के पास बैठना पड़ा.
वो अच्छा हुआ बावरची आ गया.
बावरची ने बताया कि खाना तैयार हो गया.
बावरची को देखते ही मुझे गुस्सा आया .पर वो अपना सर नीचे झुका कर बात कर रहा था जिस से मेरा गुस्सा कम हुआ .अगर किसी की तरफ बुरी नज़र से देखता तो मैं उसकी आँख फोड़ देता.
चाचा ने बावरची को वापस भेज दिया और हमे बताया कि खाना तैयार हो गया है.
चाचा-खाना तैयार हो गया है. गाँव वाले आते ही होंगे हमे काम पे लग जाना चाहिए
अवी-राजेश ,मस्ती टाइम ख़तम
राजेश ने पेड़ से जंप मारी और काम करने को तैयार हुआ.
रानी-हम भी मदद करेंगे
चाचा-पूरे गाँव को खाना खिलाना है. तुम सब से नही होगा.
रानी-दावत का मज़ा तभी आता है जब मेजमान खुद खाना सर्वे करे
सी चाची-रानी की बात सही है. अगर मुझ को काम पे लगाया तो इस दावत का मज़ा ख़तम हो जाएगा.
पूजा बुआ-मीना ठीक कह रही है. खाना तो बावरची ने बनाया है हम गाँव वालो को सर्वे करेंगे
ब चाची-हम ने जो खाना बनाया उसको मिक्स करके काला बना दो ,उसमे मंदिर का प्रसाद मिक्स करके लोगो मे प्रसाद की तरह बाटेंगे
नीता बुआ-हम सब मदद करेंगे.
कविता लीना-हम भी मदद करेंगे
चाचा-जैसा तुम सब चाहते हो वैसा होगा.
राज-पर मैं मदद नही करूँगा.
नेहा बुआ-क्यूँ ?
म चाची-नेहा समझा कर राज को इम्पोर्टेंट काम मिला है. फोटो निकालने का
राज-मामी ,मैं तो फन्टो निकालूँगा.
सी चाची-हम गिफ्ट का देखते है. बाकी खाने का देखो
सीतल दीदी-साथी हाथ बटाना साथी से .गाना शुरू करो
बड़ी चाची का इशारा मिलते ही हम काम पर लग गये.
पहले हम जहाँ थे वहाँ गाँव वालो को गिफ्ट देने के लिए जगह बना दी.
बच्चों को उसी जगह रखना था .बच्चों का हाथ लगाके गिफ्ट देने थे.
राजेश चाचा और मैं ने गिफ्ट को घर3 से चाची के पास ले जाने लगे.
चाची आदमी और अओरत की एक एक जोड़ी बनाने लगी .गिफ्ट पे राइस और हल्दी कुमकुम डालके उनको तैयार राक रहे थे.
बुआ और बाकी सब खाने को छोटे बर्तन मे डालने लगे.
सबको एक एक काम दिया गया.
राइस ,सब्जी,रोटी, स्वीट्स, सबने अपने हिसाब से डिपार्टमेंट सेलेक्ट किया.
बावरची और उसके वर्कर अलग जाके बैठ गये .उनका काम हम कर रहे थे.
पूनम दीदी ज्योति बुआ को अपने साथ खेत मे लेकर आ गयी.
हमे काम करते हुए देख कर पूनम दीदी भाग कर हमारा हाथ बटाने मे लग गयी.
पर ज्योति बुआ तो महारानी की तरह चेयर पे जाके पैर फैला कर बैठ गयी.
वो हमारी मेहमान थी. मेहमान को काम नही बताया जाता ,वो अपनी मर्ज़ी से करे तो करने देते है.
ऐसे चाची के माता पिताजी ,रानी मम्मी खुद की मर्ज़ी से मदद कर रही थी.
लोगो का आना शुरू हुआ.
पूजा बुआ घर मे बड़ी होने से सबका हाथ जोड़ कर स्वागत कर रही थी.
पंगत थी. जिस से जो गाँव वाले आते गये उनको खाना परोसा गया.
हम सबको खाना परोसते हुए देख कर गाँव वाले शॉक्ड हो गये.
उनको अच्छा लगा होगा कि हम इतनी मेहनत कर रहे है उनके लिए .
मेरी बहन भाग भाग कर लोगो को खाना परोस रही थी.
इस तरह पूरी फॅमिली को साथ मे काम करके एक दूसरे की मदद करते हुए देख कर अच्छा लग रहा था.
जिनका खाना हो गया उनको चाचा के पास भेजने लगे.
चाचा और तीनो चाची गाँव वालो को बच्चों के हाथो से गिफ्ट देने लगे.
गाँव वाले बच्चों को खुशी खुशी आशीर्वाद देने लगे.
सब कुछ सही चल रहा था.
ना ज़्यादा शोर सराबा रहा था जिसे जो लगता वो काम करने लग जाता.
कविता लीना अपनी फुर्ती का ईस्तमाल करके पूरे जोश्के साथ खाना खिला रही थी.
रति ने आते ही खाना खाने की जगह हमारी मदद करने लगी.
सब बच्चों के जनमदिन की बातें कर रहे थे.
ठाकुरजी ने अपने पोते के लिए ऐसी दावत नही रखी थी पर हम ने पूरे गाँव को दावत दे कर अपना मान अपनी फॅमिली का मान उचा किया.
मैं दोनो तरफ मदद कर रहा था. चाचा के पास गिफ्ट पहुँचाने लगा तो खाना परोसने मे मदद करने लगा.
सरबत ,स्वीट्स , पान सुपारी सबका इंतज़ाम किया था.
गाँव वाले धीरे धीरे आ रहे थे जिस से हम पे ज़्यादा प्रेसर नही आ रहा था.
चाचा और चाची सबको गिफ्ट दे रहे थे .अपने लिए साड़ी देख कर गाँव की औरतें बच्चों की नज़र उतार कर पैसे बावरची के वर्कर को देती.
सब कितना अच्छा लग रहा था.
ना किसी के चेहरे पे काम की थकावट दिख रही थी और ना कोई बैठ कर आराम कर रहा था .
सिवाय ज्योति बुआ. अरे ज्योति बुआ कहाँ चली गयी. यही तो थी.
मैं ने बावरची की तरफ देखा तो वो भी गायब था.मैं समझ गया कि ज्योति बुआ कहाँ गयी.
चाचा ज्योति बुआ से दूर है यही तो चाहिए था. फिर भाड़ मे जाए ज्योति बुआ मुझे क्या करना है.
मैं तो अपने बेटो का जनम दिन मनाने लगा.
प्रिन्सिपल सर के आने से उनका आशीर्वाद बच्चों को मिला.
थोड़ी देर बाद ज्योति बुआ अपनी जगह पे दिखाई दी. साथ मे बावरची भी आ गया.
ये क्या ज्योति बुआ के गले मे जो गोल्ड की चैन है वो थोड़ी देर पहले बावरची के गले मे थी.
ज्योति बुआ बावरची को लूट रही थी. लूटने दो चाचा को तो नही लूट रही
हम सूरज डूबने के बाद भी लोगो को खाना खिलाते गये.
हमे ने खाना ज़्यादा बनाया था ताकि कम ना पड़ जाए जो खाना बच गया वो गाँव वालो को पॅक करके दे दिया.
गिफ्ट जो बच गये थे वो वर्कर को दे दिए.
मेहमानो के लिए गिफ्ट लिए वो घर पे रखे हुए थे.
पूरी दावत अच्छे से पूरी हो गयी.
चाचा चाची के चेहरे पे समाधान दिख रहा था.
मेरे भाई बहन थक गये थे .उनको आइस क्रीम तो देनी होगी.
अंधेरा हो गया था. हम घर जाना होगा ,बाकी का काम बातें वही करेंगे.
मैं और राजेश सबको घर ले जाने लगे.
बुआ ने आज हमारे घर पे सोने का प्लान बनाया.
फिर तो मज़ा आ जाएगा.
हम थक कर घर आ गये.
पूरे दिन को एंजाय करने की खुशी हमारे चेहरे पे दिख रही थी.
घर आते ही सब फ्रेश हो गये तो छोटी चाची ने तब तक कड़क टी बना दी.
गरम गरम टी पीते ही हमारी एनर्जी वापस आ गयी.
अच्छा हुआ आज बारिश नही आई.
रानी की मम्मी वापस जाने की बात कर रही थी तो रानी और मैं अपनी कसम दे कर रोक लिया.
टी पीते हुए सब हॉल मे बैठ कर बातें कर रहे थे.
कविता-भैया हम थक गये
अवी-ऐसे कैसे थक गये तुम्हारे लिए एक खास चीज़ लाने वाला हूँ
कविता-क्या
अवी-आइस क्रीम कैसी रहेगी.
लीना-कहाँ है आइस क्रीम
अवी-अभी लेकर आता हूँ .चलो राजेश
और मैं राजेश के साथ शहर चला गया.
कार चलाने का चान्स मिल गया और सबके लिए आइस क्रीम ले ली.
आइस क्रीम लेकर जल्दी घर आ गया. सब मेरा इंतज़ार कर रहे थे.
मैं ने राजेश को आइस्क्रीम अंदर ले जाने को कहा. और कार पार्क करके मैं अपनी आइस क्रीम खाते हुए अंदर जाने लगा
मैं आज के फंक्षन के बारे मे सोचते हुए आइस क्रीम खाते हुए घर के अंदर जा रहा था कि किसी ने मुझे ज़ोर से टक्कर मारी
मैं गिरते गिरते बच गया पर मेरी आइस क्रीम गिर गयी.
मैं ने उस टक्कर मारने वाले शक्स को देखा तो वो भी पड़ते पड़ते बच गया.
ये तो चाचा है. चाचा इतनी रात मे इस तरह गुस्से मे कहाँ जा रहे है.
चाचा का गुस्सा शायद मुझसे टकराने से आया होगा.
चाचा ने मुझे गुस्से से देखा और बिना कुछ कहे अपने पैर पटकते हुए गाँव की गलियों मे गायब हो गये.
चाचा को क्या हुआ वो इतनी रात मे कहाँ जा रहे है.
चाची से पूछ लूँगा.
मैं अंदर गया तो सब आइस क्रीम खा रहे थे.
मेरी बहनों ने आइस क्रीम के लिए थॅंक्स कहा.
मैं छोटी चाची को ढूँढने लगा तो वो सबके लिए बिस्तेर लगा रही थी.
मैं ने चाची से बात करनी चाही तो वहाँ नीता बुआ गद्दे लेकर आ गयी.
फिर कभी बात कर लूँगा.
मैं बड़ी चाची के पास गया तो वो उदास दिख रही थी.
अवी-चाची क्या हुआ .आपका चेहरे पे परेशानी क्यूँ दिख रही है.
ब चाची-मैं और परेशान ,तेरे होते हुए मैं परेशान कैसे हो सकती हूँ
अवी-आपके चेहरे पे परेशानी साफ झलक रही थी.
ब चाची-ये परेशानी नही थकान है. मैं थक गयी ना काम करके
अवी-आपको आराम करना चाहिए
ब चाची-मेहमान के सोने से पहले मैं कैसे आराम कर सकती हूँ.
अवी-तो काम मत करना .कुछ लगे तो मुझे बताना
ब चाची-तू भी तो थक गया होगा.
अवी-मैं थक गया तो मेरे भाई बहन थक जाएँगे. मुझे उनका जोश बनाए रखने को कभी थकने की बात नही करनी चाहिए.
ब चाची-मेरा बेटा तो बड़ा हो गया. तेरी शादी करनी पड़ेगी.
अवी-अबी नही. पहले तो मुझे आपकी सेवा करनी है,अपनी बहनों की शादी करवानी है फिर मैं अपने बारे मे सोचूँगा.
ब चाची-काश सब तेरे जैसे सोचते
अवी-क्या कहा आपने
ब चाची-कुछ नही. जा मीना की मदद कर ,इतने मेहमानो के लिए अकेली बिस्तेर लगा रही होगी.
अवी-जी
ब चाची-(अवी को मैं अपनी परेशानी बता कर उसकी नींद खराब कैसे कर सकती हू)जाना अब
और मैं छोटी चाची की मदद करने लगा.
मेहमानो के लिए बेड पे बिस्तेर लगाया था और हम ज़मीन पर बिस्तेर डाल कर सोने वाले थे.
मेरे कमरे मे छोटी चाची के रिश्ते दार थे .और बाकी कमरो मे सीमा चाची और बड़ी चाची के मेहमान थे.
हम तो हॉल मे सो गये
रानी की मम्मी के लिए बेड पे बिस्तर लगाया था पर वो हमारे साथ, नेहा बुआ के साथ सो गयी.
सब थक गये थे. जिस से गद्दे पे सर रखते ही सब सो गये.