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मैं और मेरा परिवार

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चॅप्टर 935आ

खेतो मे जनमदिन मनाना एक नया अनुभव था .

सब के चेहरे पे खुशी दिख रही थी.

मुझे तो रानी के बर्तडे की दावत याद आ गयी. वहाँ पर भी हमने ऐसे ही साथ साथ प्यार भरा पल बिताया था.

रानी की मम्मी को भी उस दिन चाची और बुआ के मदद याद रही जिस से आज आंटी नेहा बुआ के साथ काम करने मे अपना हाथ बटा रही थी.

रानी को तो चाची और बुआ अपनी बेटी मानती थी.

कोमल ने आज फिर से सबको अपना नया रूप दिखाया. कोमल रानी के साथ खाना बनाने मे मदद कर रही थी.

चाची को लगा नही था कि बगीचे मे जनमदिन मनाना इतनी खुशिया लेकर आएगा.

छोटी चाची को तो यही चाहिए था कि पूरी फॅमिली ऐसे हसीन पल साथ मे सेलेब्रेट करे

चाचा भी मेहमान को मानसम्मान का ध्यान रख रहे थे.

उधर खेतो मे चाचा ने बावरची को गाँव वालो को खाना बनाने को बोल दिया.

बावरची तो काफ़ी खुश दिख रहा था. काले मोटे बावरची को ज्योति बुआ जैसी शहर 2 की माल मिले तो वो खुश तो दिखेगा ही.

बावरची गाँव वालो का खाना बना रहा था और हम इधर जनमदिन की तैयारी कर रहे थे.

थोड़ी देर बाद पुराने ठाकुर ठकुराइन आ गये.

ठाकुरजी और ठकुराइन का स्वागत चाचा और बड़ी चाची ने किया.

पूजा बुआ ने तो ठाकुरजी के पैर छु कर आशीर्वाद लिया.

ठाकुरजी के आने से सब खुश थे . दादाजी के दोस्त के आने से ऐसा लग रहा था कि दादाजी आए हो.

चाचा ने ठाकुरजी और ठकुराइन शाही इंतज़ाम किया था .

जिसे देख कर ठाकुरजी ने चाचा की तारीफ की.

ठकुराइन को यहाँ बोर ना हों इस लिए पूजा बुआ उनका खास ख़याल रख रही थी. रानी की मम्मी ने इसमे पूजा बुआ का पूरा साथ दिया.

मुझे तो ठाकुरजी ने गले लगा कर आशीर्वाद दिया जिस से देख कर बड़ी चाची का सर उचा हो गया.

ठाकुरजी ठकुराइन ने आते ही पहले बच्चों को अपने गोद मे लेकर प्यार किया .और अपने गले की चैन निकाल कर बच्चों को पहना दी.

ठाकुरजी-योगेंद्रसिंघ के पोते को उनके जैसा तेज मिला है. ये बड़े होकर योगेंद्रसिंघ का नाम उचा करेंगे

चाचा-आपका आशीर्वाद बच्चों को मिला तो उनकी किस्मत अच्छी हो जाएगी.

ठाकुरजी-मेरा आशीर्वाद सदा इनके साथ रहेगा. आज योगेंद्रसिंघ यहाँ होते तो कितने खुश होते ये हमे पता है . आज तुम ने उनकी इच्छा पूरी की.

चाचा-भगवान के आशीर्वाद से ये खुशी हमे मिली है.

ठकुराइन-सुमन इनको अवी जैसा बनाना ,

ब चाची-जी,मीना सुना ठकुराइन ने क्या कहा

सी चाची-दीदी ,इसमे हमे कुछ नही करना होगा. अवी अपने छोटे भाई बहन को इतना प्यार देगा कि हमारा प्यार कम पड़ जाएगा.

नीता बुआ-अवी बहुत प्यार करता है अमित सुमित और परी से ,जब देखो तब उनके साथ खेलता रहता है.

पूजा बुआ-बड़ा भाई होने की ज़िम्मेदारी अवी अच्छे से उठा रहा है

स्वेता दीदी-भाई किसका है.

कविता लीना-हमारा भाई है.

सीतल दीदी-हम सब का भाई है.

कोमल ने ना मे गर्दन घुमाई. उसने मुझे अपना भाई कभी समझा ही नही. अच्छा हुआ किसी ने कोमल की तरफ देखा नही.और ना ही मेरा ध्यान उसकी तरफ गया

रानी ने स्माइल के साथ मेरी तारीफ मे अपना हाथ बढ़ाया.

इसी तरह बातें करते हुए , काम करते हुए, मस्ती मज़ाक करते हुए हम अपने प्यार को नया नाम दे रहे थे.

हर कोई खुश था ,हर किसी के आँख मे ख़ुसी के आँसू थे.

मैं तो इतना प्यार वो भी एक साथ मिलने से खुद के भावनाओं को रोक नही पाया.

मैं वहाँ से बगीचे के अंदर चला गया.

और अपनी खुशी के आँसू को बहाने देने लगा.

मैं थोड़ी देर बगीचे मे अकेला रह कर अपनी फॅमिली के प्यार को फील करने लगा.

हमारे प्यार को किसी की नज़र ना लगे ये दुआ कर रहा था.

पर ज्योति बुआ हमारी फॅमिली पे ग्रहण बन के बैठी थी.

उस ग्रहण को छोटी चाची दूर कर सकती है.

मुझे छोटी चाची की मदद लेनी होगी तभी ज्योति बुआ के नाम का ग्रहण दूर जाएगा हमारी फॅमिली से.

मैं अपनी फॅमिली के बारएमए सोच रहा था कि मुझे किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी.

मैं ने छुप कर देखा तो नेहा बुआ और नीता बुआ छुपते छुपाते बगीचे के अंदर जा रही थी.

बुआ को ऐसे चुपके से बगीचे मे जाने की क्या ज़रूरत थी.

मैं बुआ का पीछा करने लगा.देखु तो सही बात क्या है.

मैं बुआ का पीछा करने लगा.

बुआ सब की नज़ारे बचा कर उसी पेड़ के पास आ गयी जहाँ कल चाचा मुझे लेकर आए थे.

चाचा बुआ और मेरे पापा के प्यार की निशानी. उनके बचपन की याद का ठिकाना ,आम का पेड़

ये वही पेड़ था जो चाचा बुआ और मेरे पापा ने मिलके लगाया था.

नेहा बुआ-नीता कोई हमारा पीछा तो नही कर रहा.

नीता-नही. तुम उस बॉक्स को निकालो मैं नज़र रखती हूँ.

तो ये बात है.

बुआ अपने बचपन को फिर से जीने के लिए यहाँ आई है.

बुआ कभी कभी तो बगीचे मे आती है ऐसे मे आज वो अपने बचपन के दिनो याद करना कैसे भूल सकती है.

उनका ये सीक्रेट मुझे पता चल गया है. पर मैं ये सीक्रेट अपने सीने मे दफ़न करके रखूँगा.

नेहा बुआ ने पेड़ मे छुपा हुआ वो बॉक्स निकाल लिया.

बॉक्स निकालते ही नीता बुआ उस बॉक्स को खोलने लगी.

बॉक्स खोलते ही उनकी आँख मे आँसू आ गये.

नेहा बुआ-नीता तुम्हें याद है ये डॉल

नीता बुआ-इस डॉल को कैसे भूल सकती हूँ. माँ ने कितने प्यार से हमारे लिए बनाई थी.

नेहा बुआ-और हम दोनो डॉल को फिर से सिलाई करके एक बनाया था.

नीता बुआ-कैसे ना बनाते .हम दो नही एक है.

नेहा बुआ-हम 2 जिस्म एक जान है.

नीता बुआ-तूने मेरे लिए कितने दर्द झेले है मुझे पता है.

नेहा बुआ-ये देख राजेश खन्ना का फोटो उनकी सिग्नेचर के साथ.

नीता बुआ-मेरा हीरो ,मेरे सपना का राजा था

नेहा बुआ-कितनी दीवानी थी तू राजेश खन्ना की.

नीता बुआ-वो तो मेरा बच्पना था.

नेहा बुआ-बड़ी आई बच्पना वाली. अपने बेटे का नाम राजेश क्यूँ रखा .

नीता बुआ-इतना अच्छा नाम है राजेश , मैं तो अवी का नाम राजेश रखने वाली थी

नेहा बुआ-पता है मुझे, वैसे पिताजी ने तेरा रोना कैसे बंद किया था.

नीता बुआ-पिताजी ने कहा कि मेरी शादी राजेश खन्ना के बेटे से कराएँगे. पर राजेश खन्ना को बेटा नही हुआ

नेहा बुआ-पर तेरी किस्मत मे भगवान ने राजेश खन्ना ही लिखा था. जीजाजी का नाम वही तो है.

नीता बुआ-उनका नाम जतिन है (लीना के पापा)

नेहा बुआ-राजेश खन्ना का पहले जतिन नाम था.

नीता बुआ-वो पता है मुझे ,लीना के पापा मेरे सूपरस्टार है.

कितना प्यार है नेहा बुआ और नीता बुआ मे

नेहा बुआ की जान है नीता बुआ. अगर नेहा बुआ गुस्सा हुई तो नीता बुआ को देखते ही उनका गुस्सा ख़तम होता है.

कविता लीना मे इसी लिए इतना प्यार है. उनको ये प्यार उनके माँ से विरासत मे मिला था.

नेहा बुआ की कविता और नीत बुआ की लीना, इनके रूप मे उनका प्यार जेनरेशन टू जेनरेशन चल रहा है.

नेहा बुआ-ये रिब्बिन ,तूने मुझे गिफ्ट की थी. और मेरी चुटिया तुम बनाती थी.

नीता बुआ-तेरे बाल मुझे बहुत पसंद थे.

नेहा बुआ-कितने अच्छे दिन थे वो

नीता बुआ-हाँ, एक एक पल याद है मुझे ,वो स्कूल बंक करके खेतो मे जाना, पिताजी की उंगली पकड़ के पूरा गाँव घूमना

नेहा बुआ-शहर मे घूमना, सिनिमा देखना, माँ की मदद करना, छोटू को तंग करना.

नीता बुआ-छोटू मत बोल उसे गुस्सा आता है.

नेहा बुआ-छोटू बोलने से उसे गुस्सा नही .हमारा प्यार दिखता है. वो बस नाटक करता है गुस्सा होने का.

नीता बुआ-एक मिनिट

नेहा बुआ-क्या हुआ

नीता बुआ-लगता कोई इधर आ रहा है. जल्दी छुपा बॉक्स को

नेहा बुआ-बॉक्स को बाद मे छुपाते है. पहले हम छुप जाते है

नेहा बुआ और नीता बुआ ने उस जगह को पत्तो से छुपा दिया. और बॉक्स लेके पेड़ के पीछे छुप गयी.

कौन आया होगा .

बुआ को उनके प्यार को याद करने के बीच मे कौन आ गया.

ये क्या ,ये तो पूजा बुआ है.

पूजा बुआ भी यहाँ अपने बचपन को याद करने आई है.

पूजा बुआ उसी पेड़ के पास आ गयी और उस बॉक्स को निकालने लगी.

पर बॉक्स तो नीता बुआ के पास था.

पूजा बुआ को बॉक्स अपनी जगह पर नही मिला.

बॉक्स को अपनी जगह पर ना देख कर पूजा बुआ इधर उधर देखने लगी.पास की जगह मे ढूँढने लगी.

उनके बचपन की यादो को कौन चुराके ले गया.

बॉक्स का ना देख कर पूजा का चेहरा रोने जैसा हो गया.

अपने बचपन को खोने से दिल पे जो चोट लगती है उसका दर्द ज़्यादा होता है.

पूजा बुआ-बॉक्स यही तो था कहाँ चला गया. कौन ले जा सकता है.

नीता बुआ-दीदी बॉक्स मेरे पास है.

नेहा बुआ और नीता बुआ बॉक्स लेकर पूजा बुआ के पीछे खड़ी हो गयी.

पूजा बुआ-बॉक्स तुम्हारे पास है .मैं कितना डर गयी थी.

नेहा बुआ-आप खुद को यहाँ आने से रोक नही पाई ना

पूजा बुआ-तुम भी तो आई हो. कितने दिनो बाद यहाँ आई हूँ. ऐसे थोड़े जाती.

नेहा बुआ-दीदी

नीता बुआ-दीदी आपकी डॉल नही है

पूजा बुआ-कहाँ गयी. ऐसे कैसे नही मिल रही दिखा मुझे

पूजा बुआ बॉक्स मे डॉल ढूँढने लगी. और डॉल मिल गयी.

पूजा बुआ-यही तो है

नीता बुआ-हम तो शरारत कर रहे थे

पूजा बुआ-तुम्हारे शरारत करने की आदत गयी नही.बचपन मे भी तुम ऐसे शरारत करती थी.

नेहा बुआ-दीदी बचपन मे हम कितनी मस्ती करते थे.

नीता बुआ-आप हमे कितनी तंग करती थी.

पूजा बुआ-मैं तंग करती थी,मेरा खिलोना तो तुम दोनो तोड़ देती

नेहा बुआ-पिताजी आपको हमसे ज़्यादा खिलोने क्यूँ देते थे.

पूजा बुआ-मैं पिताजी का शेर बेटा थी

इतना बोल कर पूजा बुआ रोने लगी

पूजा बुआ-सब कुछ कितना अच्छा चल रहा था. किस की नज़र लगी और सब कुछ बिखर गया.

नेहा बुआ-दुश्मन के घर मे ऐसा ना हो जैसा हमारे फॅमिली के साथ हुआ

नीता बुआ-भैया भाभी हमे छोड़ कर चले गये.

पूजा बुआ-शालिनी भाभी आज हमारे साथ होती तो सब कुछ ठीक होता.

नेहा बुआ-माँ के बाद भाभी भी हमे छोड़ कर चली गयी.

नीता बुआ-पिताजी भी हमारे साथ यहाँ नही है.

नेहा बुआ-दीदी ऐसा क्यूँ हुआ हमारे साथ ,

नीता बुआ-हमारे पाप होंगे जिस की वजह से माँ पिताजी भैया भाभी का प्यार हम से छीन लिया भगवान ने

पूजा बुआ-अब वो खुशिया हमारी जीवन मे वापस आ रही है.

नीता बुआ-दीदी हमे खुशी एक दिन की मिलती है और गम ज़िंदगी भर का मिलता है

नेहा बुआ-खुशी क्या होती है मैं तो भूल ही गयी हूँ

पूजा बुआ-भाभी ने कहा था कि हम साथ रहेंगे तो हर बात का सामना कर सकते है. हमे साथ रहना है.फिर देखना ख़ुसीया ही ख़ुसीया मिलेगी

नेहा बुआ-सुमन ने घर को फिर से बिखरने नही दिया.

नीता बुआ-मीना ने पूरी फॅमिली को फिर से खुशी क्या होती है वो बताया.

पूजा बुआ-तुम दोनो तो बड़ी हो गयी बड़े बड़े बातें करने लगी हो

नेहा बुआ-हालात ने हमे बड़ा बना दिया.

नीता बुआ-पर हम है तो आपकी छोटी नटखट चंचल बहनें

नेहा बुआ और नीता बुआ पूजा बुआ के गले लग कर एक दूसरे को रोने से रोकने लगी.

बुआ का आपस मे इतना प्यार देख कर मेरी आँख मे पानी आ गया.

बुआ की आँख मे जो दर्द था वो मैं ने आज देख लिया.

बुआ की आँख मे जो प्यार था वो देख लिया मैं ने

बुआ और चाची की एकता के पीछे मेरी माँ का हाथ है ये पता चला मुझे.

ज़िंदगी हमारे साथ सुख दुख का खेल खेलती है ये पता चला मुझे.

हसाना और रोना ये एक काय्न के 2 बाजू है.

आज प्यार मिल रहा है तो कल नफ़रत मिलेगी.

लेकिन आज तो बुआ के लिए खुशी का दिन है.

बुआ कुछ देर अपने बचपन की यादो को याद करने लगी.

मैं ने दूसरी तरफ देखा तो चाचा मेरी तरह चुपके से बुआ को देख रहे थे .

चाचा की आँख मे भी आँसू दिख रहे थे.

चाचा की हिम्मत नही हुई बुआ के पास जाकर उनका दर्द कम करे. चाचा वही से वापस चले गये.

मैं बुआ के पास जाकर उनके बचपन के सीक्रेट को ओपन नही करना चाहता था

मैं अपने आँसू साफ करते हुए चाचा के पीछे पीछे वापस जाने लगा

बुआ को उनकी बचपन की यादो के साथ अकेला छोड़ना ठीक था.

कुछ देर के लिए उनको अकेले मे ,उनको अपना बचपन फिर से जीने देना चाहता था.

बुआ अपने बचपन को कुछ पल के लिए क्यूँ ना हो फिर से जी कर खुश थी.
 
चॅप्टर 935ब

बुआ अपने बचपन के दिनो को याद कर रही थी.

और मैं वापस फंक्षन वाली जगह पे आ गया.

बुआ के ना होते हुए भी काम अच्छे से चल रहा था.

सुबह से दोपेहर होने को आ गयी.

खाना लगभग बन चुका था. और बावरची गाँव वालो के लिए खाना बना रहा था.

गाँव वालो की दावत शाम मे थी. पर हमारा फॅमिली फंक्षन तो दोपेहर मे करने वाले थे.

पूरा इंतज़ाम हो चुका था.

कविता लीना राज और राजेश ने आस पास के पेड़ो को सज़ा दिया था.

इतना बढ़िया सजाया था की फिर से कविता लीना को सबकी तारीफ मिल गयी.

आगे के प्रोग्राम का क्या करना ये पूछने के लिए छोटी चाची मेरे पास आ गयी.

सी चाची-अवी

अवी-जी चाची

सी चाची-खाना तो बन गया है. अब जनमदिन मनाना है.

अवी-केक तो घर पे है

सी चाची-केक से पहले मंदिर जाके पूजा करनी है.

अवी-उसका इंतज़ाम मैं ने कर दिया है. पंडितजी पूरी तैयारी के साथ हमारा इंतज़ार कर रहे हैं

सी चाची-पर मंदिर तक जाएँगे कैसे

अवी-कार से, ठाकुरजी की कार है ,रानी की मम्मी की कार है, और बड़ी चाची के पिताजी की कार है.

सी चाची-तो क्या तू ठाकुरजी और मेहमानो को ड्राइवर बनाएगा.

अवी-उनकी कार तो उनका ड्राइवर चलाएगा. मैं बड़ी चाची के पिताजी की कार लूँगा. और रानी की मम्मी खुद की कार जिसमे बुआ होगी.

सी चाची-ये तो तीही है. पर तेरी दूसरी बेटी कहाँ है.

अवी-किरण प्रिया को लेकर अभी तक आई नही.

सी चाची-शायद उनको लगा होगा फंक्षन शाम मे है.

अवी-मैं लेकर आता हूँ, साथ मे केक भी ले आउन्गा

सी चाची-जल्दी आना ,देर मत करना

अवी-30 मिनिट मे उनको सीधा मंदिर मे लेकर आता हूँ .बस आप यहाँ संभाल लेना और तैयारी मे रहना.

सी चाची-यहाँ की टेन्षन तू मत ले .मैं हूँ यहा पर. जा जल्दी प्रिया को लेकर आ .उसके बिना केक कैसे काटेगा.

अवी-प्रिया सबके सामने केक काटेगी.

सी चाची-तू उसकी टेन्षन मत ले. प्रिया मेरी भी बेटी है .मैं ने सब मेनेज कर लिया है.तू मेरी बेटी को लेकर आ

अवी-अभी लाता हूँ

और मैं कार लेकर गाँव की तरफ जाने लगा

राजेश मुझे आवाज़ दे रहा था तो छोटी चाची ने उसका दूसरा काम बता दिया.

मैं कार लेकर सीधा प्रिन्सिपल सर के घर चला गया.

मैं ने किरण को आवाज़ दी तो उसकी माँ बाहर आ गयी.

अवी-नमस्ते काकी. किरण भाभी है घर मे

किरण की माँ-किरण .अवी आया है.

मेरा नाम सुनते ही मेरी बेटी की माँ भाग कर मेरे पास आ गयी.

किरण-अवी खड़े क्यूँ हो ,बैठो ना

मैं ने किरण को उसकी माँ की तरफ इशारा किया

किरण-माँ तुम प्रिया के पास बैठो .वो अकेली है

किरण की माँ के जाते ही मैं किरण पे गुस्सा हो गया

अवी-किरण ये सब क्या है

किरण-क्या हुआ

अवी-तुम नाइटी मे हो. तुम्हें अबी तक तैयार नही हुई .बताया था ना कि फंक्षन है

किरण-फंक्षन तो शाम मे हैं ना

अवी-मैं ने क्या कहा था. तुम्हें दोपेहर मे आना होगा.

किरण-मैं तो दोपेहर मे आने को तैयार थी. पर तुम्हारे बुआ के बेटे ने आकर बताया कि फंक्षन शाम मे है.

अवी-मेरी माँ, वो गाँव वालो के लिए था. तुम्हें मुझे फोन तो करना चाहिए था

किरण-मैं ने पिताजी से कहा पर वो कहने लगे कि फंक्षन शाम मे है.

अवी-सर कहाँ है

किरण-पिताजी तो शहर गये है फंक्षन शाम मे होने से. वो शाम तक आ जाएँगे

अवी-पर तुम्हें अभी चलना होगा.सर ना होने से अच्छा हो गया.

किरण-अभी कैसे आ सकती हूँ

अवी-मुझे कुछ नही सुनना है. तुम्हें 15 मिनिट तैयार होना है. 2 घंटे की बात है मैं तुम्हें वापस छोड़ दूँगा.

किरण-माँ को साथ लेती हूँ

अवी-ले लो .पर जल्दी तैयार हो जाओ. मैं थोड़ी देर मे आता हूँ

किरण-कपड़े पहना है.मेकप तो कर चुकी हूँ.

अवी-मैं आता हूँ थोड़ी देर मे

किरण को तैयार रहने का बोल कर मैं अपने घर चला गया.

पहले तो हमे मंदिर मे पूजा करनी होगी उसके बाद जनम दिन सेलेब्रेट करना है

इतनी देर तक तो केक खराब हो जाएगा.

मंदिर मेपूज़ा करने के बाद राजेश को बाइक से कार लाने भेज दूँगा.

ये ठीक रहेगा.

लेकिन किरण के तैयार होने तक मैं क्या करूँ

ज्योति बुआ को बता देता हूँ की प्रोग्राम चालू हो गया है.

राज की बुआ है वो फंक्षन मे नही रहेगी तो सब बातें करेंगे.

मुझे उनको बता देना होगा.

चाचा तो ज्योति बुआ के तरफ देखेंगे भी नही तो उनको ले जाने से प्राब्लम नही होगी.

मैं पूजा बुआ के घर के तरफ जाने लगा.

मैं ने अपनी कार नेहा बुआ के घर के सामने रोकी और मैं कार से उतरने वाला था कि सामने का सीन देख कर वापस कार मे बैठ गया.

कार मे बैठने से मैं छुपा रह सकता न

पूजा बुआ के घर से सरपंच बाहर निकल रहा था

सरपंच चोरो की तरह घर से बाहर निकल रहा था.

सरपंच पूजा बुआ के घर मे क्या कर रहा है.

सरपंच चाचा का खास दोस्त है.

पर वो पूजा बुआ के घर पे क्या कर रहा है. और वो चोरों की तरह कहाँ जा रहा है.

एक मिनिट, घर पूजा बुआ का है पर घर मे ज्योति बुआ है.

सरपंच चाचा का दोस्त है. चाचा बावरची के साथ ज्योति बुआ को शेयर कर सकते है तो सरपंच तो चाचा का खास दोस्त है.

मेले के समय पूजा बुआ ने कहा था कि उन्होने ज्योति बुआ को सरपंच केसाथ देखा था.

तो ये ड्रामा था.

इस लिए ज्योति बुआ फंक्षन मे नही आई . वो यहाँ सरपंच के साथ चुदाई कर रही थी.

ज्योति बुआ किसी के साथ भी चुदाई करे मुझे क्या करना है. पर लोगो ने सरपंच को ऐसे चोरो की तरह पूजा बुआ के घर से निकलते हुए देखा तो पूजा बुआ बदनाम होगी.

ज्योति बुआ की वजह से पूजा बुआ बदनाम होगी. मेरी फॅमिली पे दाग लगेगा. मुझे ज्योति बुआ का कुछ करना होगा.

आज मैं कोई सीन नही करना चाहता था .

ज्योति बुआ को कल देख लूँगा.

लेकिन एक अच्छी बात थी कि चाचा फंक्षन मे थे ज्योति बुआ के साथ नही थे.

जाकर देखता हूँ ज्योति बुआ किस हाल मे है.

मैंपूजा बुआ के घर आ गया .और डोर खटखटाया.

ज्योति बुआ डोर खोलते ही मुझे सरपंच समझ कर बात करने लगी थी.

ज्योति बुआ-इतनी जल्दी मेरी याद आ गयी.अभी तूऊओ

ज्योति बुआ मुझे देखते ही चुप हो गयी. और शॉक्ड हो गयी.

ज्योति बुआ नाइटी मे थी. नाइटी के 2 बटन खुले थे जिस से उसके बूब्स दिख रहे थे

बाल बिखरे हुए थे. उनकी लिपस्टिक गालो पे लगी हुई थी.

उनके गाल पे सफेद सफेद वीर्य लगा हुआ था जो ताज़ा था.

उनका ये रूप देख कर मैं समझ गया कि सरपंच ने ज्योति बुआ के साथ कुश्ती खेली है.

मैं ने अंदर देखा तो सोफे पर ब्रा और पैंटी पड़ी हुई हुई थी

टेबल पे पैसे और कॉंडम रखा था.

मुझे अंदर झाँकते हुए देख कर बुआ ने डोर थोड़ा बंद किया.

ज्योति बुआ-तुम .तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

अवी-आप यहाँ क्या रही है.

मेरी बात सुनते ही ज्योति बुआ के पसीने निकलने लगे.

ज्योति बुआ-मैं तो मैं तो

अवी-क्या

ज्योति बुआ-मेरा सर दर्द कर रहा था तो मैं सो रही थी.

अवी-दोपेहर मे सो रही थी.

ज्योति बुआ-गोली खा कर सो गयी थी.

अवी-ये आपके गालो पे सफेद सफेद क्या लगा है

ज्योति बुआ मेरी बात सुनते ही डर गयी. पर ज्योति बुआ कच्ची खिलाड़ी नही थी.

ज्योति बुआ-मैं दूध पी रही थी ये उसी का होगा

और ज्योति बुआ की हिम्मत तो बहुत बढ़ गयी.

मेरे सामने अपने गालो पे लगा हुआ वीर्य अपनी उंगली पे लेकर चाट लिया.

ज्योति बुआ-बहुत टेस्टी है

अवी-(क्या औरत है.) अब तो आप ठीक होगी ना

ज्योति बुआ-हाँ ,पूरे बदन का दर्द ख़तम कर दिया उसने

अवी-उसने किसने

ज्योति बुआ-(सरपंच ने)टॅबलेट ने ,पर तुम यहाँ क्या कर रहे हो

अवी-आपको बुलाने आया था. फंक्षन चालू हो गया.

ज्योति बुआ-तुम चलो, मैं थोड़ी देर मे आ जाउन्गी.

अवी-जल्दी आना .फिर से दूध पीते मत रहना.

मैं ने जाते हुए ज्योति बुआ को झटका दिया.

ज्योति बुआ मेरी तरफ देखती रह गयी.

मुझे सब पता है ऐसा झटका ज्योति बुआ को देना ज़रूरी था.

मुझे जल्दी कुछ करना होगा. वरना ज्योति बुआ मेरा सर दर्द बन जाएगी.

मैं ज्योति बुआ को सोच पे डाल कर किरण के पास आ गया.

किरण प्रिया के साथ तैयार होके मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मैं तीनो को लेकर मंदिर की तरफ जाने लगा.

किरण-हम मंदिर क्यूँ जा रहे है.

अवी-मंदिर मे पूजा है.

और हम मंदिर मे पहुँच गये.

किरण-यहाँ तो कोई नही है

अवी-तुम मंदिर मे रुकना मैं बाकियो को लेकर आता हूँ

किरण-जल्दी आना

और मैं प्रिया को एक किस करके आम के बगीचे मे चला गया.
 
चॅप्टर 935सी

मेरे आते ही सब मुझे पूछने लगे कि मैं कहाँ गया था.

मैं ने बताया कि केक लाने गया था पर इतनी जल्दी लाकर फ़ायदा नही होगा तो ऐसे ही खाली हाथ वापस आ गया.

आज का केक भी रानी और कोमल ने बनाया था. जिस से मेरे लिए वो केक वेरी वेरी स्पेशल था.

बड़ी चाची-यहाँ का काम तो हो गया.

सी चाची-फिर मंदिर चलते है ,वहाँ पूजा करने के बाद हम केक काट लेंगे.

पूजा बुआ-तो चलो

म चाची-मुझे तो खाने की बढ़िया खुसबु से भूक लग गयी. जल्दी चलो वरना मैं सारा खाना खा लूँगी.

सीमा चाची की बात सुनकर सब हँसने लगे.

चाचा-अवी जल्दी चलो वरना सीमा हमे ना खा ले

ये क्या चाचा ने जोक मारा. सब चाचा की तरफ देखते रह गये.

राज चाचा के जोक पे हंस कर सबको होश मे लाया.

चाचा का ये नया रूप देख कर मैं खुश था. यही तो मैं चाहता था

फिर बड़ी चाची ने खाना एक प्लेट मे डाल कर ,प्लेट को सज़ा कर मंदिर ले जाने के लिए तैयार किया.

छोटी चाची ज़रूरत का समान लिया और हम मंदिर के लिए निकल गये.

सबके मंदिर आने तक पूजा शुरू नही की

मंदिर मे किरण को देख कर छोटी चाची खुश हो गयी.

छोटी चाची ने बड़ी चाची को बता दिया कि मैं ने प्रिन्सिपल सर को इन्वाइट किया था पर सर किसी वजह से नही आए तो उनकी बहू आ गयी.

बड़ी चाची क्या कहेंगी उनको तो अच्छा लगा कि मैं अपने टीचर को भुला नही. उनको भी इन्वाइट किया.

अच्छा हुआ चाची ने ये नही पूछा कि किरण बगीचे मे आने की जगह मंदिर मे कैसे आ गयी.

सब के आते ही पंडितजी ने पूजा शुरू की.

बड़ी चाची की गोद मे सुमित था,सीमा चाची की गोद मे परी थी ,और छोटी चाची के गोद मे अमित था.

चाची चाचा के साथ एक लाइन मे बैठी थी , उनके सामने हवन और पंडितजी मन्त्र पढ़ रहे थे.

मंदिर मे जहाँ जगह मिली वहाँ बैठ गया.

मैं ने किरण को इशारा करके छोटी चाची के बाजू मे बैठने को कहा.

देखने मे ऐसा लगता कि किरण भी पूजा कर रही है.पर वो थोड़ा डिस्टेन्स बना कर बैठी थी.

छोटी चाची के दिमाग़ मे हर बात का सल्यूशन था.

पंडितजी सभी बच्चों को टीका लगा रहे थे तो ,टीका लगाते लगाते प्रिया को भी टीका लगा दिया.

बड़ी चाची ने मुझे अपने पास बैठने को बोला.

ब चाची-पंडितजी अवी को भी टीका लगा दो ,अवी मेरा बड़ा बेटा है.

चाची की बात सुनकर सब को अच्छा लगा. चाची आज भी मुझे उतना ही प्यार करती है जितनी पहले करती थी.

मुझे टीका लगाने के बाद पूजा शुरू हुई.

बच्चे ज़्यादा देर पूजा मे नही बैठ पाएँगे इस बात को ध्यान मे रख कर पंडितजी ने जल्दी पूजा ख़तम की.

चाची ने एक एक करके चाचा के साथ भगवान का आशीर्वाद लिया

मैं मे चाची चाचा बुआ और सभी का आशीर्वाद लिया तो मेरे भाई बहनों ने भी मेरे साथ सबका आशीर्वाद लिया.

किरण तो कन्फ्यूज़ थी कि ये हो क्या रहा है.

मैं ने उसे कन्फ्यूज़ मे ही रहने दिया. बस इतना कहा कि प्रिया का जो हक है वो उसे दे रहा था.

मंदिर मे पूजा करने के बाद हम आम के बगीचे मे वापस आ गये.

नीता बुआ-पूजा तो हो गयी. अब केक काटेंगे

म चाची-केक कहाँ है

राजेश-ये रहा केक

मैं ने राजेश को मंदिर से घर भेज दिया था केक लाने.

केक आते ही रानी और कोमल ने मोर्चा अपने हाथ मे लिया.

केक को देखते ही हमारे मूह मे तो पानी आ गया.

तीनो चाची ने अपने अपने हाथ मे केक लिया.

केक के 4 साइड मे चाचा और चाची खड़े हो गये.

चाची ने बच्चे का एक हाथ चाकू को लगा कर केक काट कर पहला जनमदिन सेलेब्रेट किया.

बच्चों की वजह से ज़्यादा मस्ती नही की , आराम से बिना ज़्यादा शोर शराबे के केक सबको खिलाया.

जैसे चाची ने बच्चों को पालने मे डाला तो हम ने मस्ती करना शुरू किया.

छोटी चाची को केक खिलाते हुए मैं ने उनके गालो पे केक लगा दिया.

ये देख कर सीमा चाची हँसने लगी तो छोटी चाची ने उनके गालो पे केक लगाया.

ये क्या कर डाला छोटी चाची ने. अब तो वॉर शुरू हो जाएगा.सीमा चाची ने सबको केक लगाना शुरू कर डाला.

बुआ ,मेरी बहनें इधर उधर भागने लगी. पर सीमा चाची के हाथो से कोई बच सकता है.

जिसके गाल पे केक लगा वो दूसरो को केक लगाने मे लग जाते.

इसमे बहुत मज़ा आ रहा था.

सब छोटी बच्चे बन गये थे.

ठाकुरजी ठकुराइन भी इस खेल को एंजाय करने लगे.

चाचा तो बड़ी चाची के पीछे हाथ दो कर लग गये थे.

खाना बनाने वाले ,खेतो के मज़दूर हमे इस तरह मस्ती करते हुए देख रहे थे.

राज कविता लीना को तो यही चाहिए था ,केक लगाना ,बलून फोड़ना ,एक दूसरे को गुदगुदी करना इन सब मे हम जनमदिन सेलेब्रेट करने लगे.

छोटे बच्चों केजनमदिन पे बच्चे बन जाने का मज़ा अलग होता है.

रानी की मम्मी हमारी फॅमिली का इस तरह का प्यार देख कर खुद बच्ची बन कर मस्ती कर रही थी

ऐसा ही मस्ती करने मे हम बच्चे हो गये.

जब सीमा चाची थक गयी तब जाके ये मस्ती का खेल ख़तम हुआ.

इतनी मस्ती कर ने के बाद भूक तो लगती है.

और खाने की खुषभू से भूख तो और बढ़ गयी.

ऐसे फंक्शन मे थकने से काम नही चलता.

रानी कोमल विद्या और स्वेता दीदी ने अपनी कमर कस ली और अपने काम मे लग गयी.

पहली पंगत आदमियो की लगाई .जिसमे मैं चाचा ठाकुरजी और बाकी मेहमानों की पंगत बैठ गयी.

और शुरू हो गयी हमारी फॅमिली दावत ,

ऐसे दावत जिसमे खाने के लिए प्यार था पीने को प्यार था. प्यार और सिर्फ़ प्यार था.

स्वादिष्ट खाना था पर हम शाम मे गाँव वालो को दावत देने तक तब मेहनत करनी होगी इस लिए मैं ज़्यादा खाना नही खाया.

पर सभी पकवानो का स्वाद लिया.

ऐसे एक एक करके सभी ने प्यार की दावत का आनंद उठाया.

दोपहर काफ़ी लंबी थी जिस से हमारी दावत होने के बाद हमारे पास काफ़ी समय बच गया.

किरण का खाना खाकर होते ही मैं ने चाची का दिया हुआ तोहफा प्रिया को दिया और किरण को प्यारा किस दे कर उसके घर छोड़ आया.

शाम की गाँव वालो की दावत मे अभी टाइम था तो हम वही बगीचे मे आराम करने लगे.

आराम करते हुए बातें करने लगे

ठाकुरजी और ठकुराइन दावत होते ही हवेली चले गये.

सबने बच्चों को महनेगे महँगे गिफ्ट दिए थे.

मैं ने गिफ्ट मे अपना प्यार दिया अपने बेटो को.

चाचा तो हमारे साथ ही थे वो अपने दोस्तो के पास नही गये.

मैं ने ज्योति बूआको देखा ही नही. शायद वो नही आई होगी.

दावत की वजह से ध्यान नही गया किसी का ज्योति बुआ पे.

ये क्या पूनम दीदी भी गायब थी.

पूनम दीदी ज़रूर अपनी माँ के पास गयी होगी.

जाने दो मुझे क्या करना है उन सब से.

मैं तो रानी को लेकर गया पेड़ो के पीछे

रानी-तुम एक दिन पकड़े जाओगे ऐसे इशारे करने से

अवी-कैसे इशारा कर रहा था मैं

रानी-जल्दी किस लो मुझे जाना है

अवी-जल्दी कुछ नही होता

रानी-वहाँ कितना मज़ा आ रहा है. अवी आज जाने दो प्यार तो हम रोज करते हैं ना

अवी-एक शरत पे जाने दूँगा.

रानी-क्या?

अवी-जिनका जनमदिन है उनको यहाँ से जाते ही किस करना होगा.

रानी-वो तो मैं करूँगी कितनी क्यूट है परी.

अवी-तुम्हें भी उतनी क्यूट बेबी दूँगा.

रानी-हटो कुछ भी बोलते हो.

अवी-मैं तो फॅमिली प्लॅनिंग नही करूँगा. शादी के बाद नों स्टॉप प्रोडक्षन करेंगे

रानी-मुझे क्या मशीन समझा है.

अवी-तुम इतनी खूबसूरत हो कि मैं तो कंट्रोल नही करूगा. दिन रात प्यार करूँगा.

रानी-दिन रातप्यार करोगे तो अपने बेबी को खिलाओगे कैसे

अवी-उनके लिए मेरे पास एक काउ है

रानी-काउ

अवी-हाँ, उसका दूध पिलाउन्गा .पता है उस काउ का नाम भी है

रानी-क्या?

अवी-रानी

रानी-तुम ने मुझे काउ कहा ,मैं तुमसे बात नही करती जाओ.

अवी-मेरी प्यारी काउ

रानी-मुझे काउ मत बुलाओ

अवी-रानी काउ

रानी-मैं काउ तो तुम सांड़ हो. अब बोलो

अवी-ये क्या बोल दिया.

रानी-अवी सांड़

अवी-तुम्हें पता है सांड़ क्या करता है.

रानी-नही.

अवी-वो दिन रात प्यार करता है काउ को. उसका काम प्यार करके बेबी पैदा करना होता है

मेरी बात सुनते ही रानी शरमा गयी.

अवी-रानी तुम ने मेरी साथ सच कर दी

रानी-कौन सी

अवी-की शादी के बाद प्रोडक्षन शुरू करेंगे.तुम काउ मैं सांड़

रानी-तुम तो बस वही सोचते रहते हो.

अवी-तो क्या सोचु,

रानी-कुछ और अच्छे अच्छे बातें करो. जैसे चाँद तारे तोड़ के लाओगे ऐसा बोलो

अवी-जो हो नही सकता वो बोलने का क्या फ़ायदा .चाँद तारे तो मैं कभी नही तोड़ पाउन्गा पर क्यूट बेबी दे सकता हूँ उसकी का नाम चाँद तारों पे रख देना.

रानी-ये भगवान ,घुमा फिरके उसी बात पे आ जाते हो. क्या करू मैं तुम्हारा.

अवी-एक किस दे दो

और रानी ने मुझे किस किया.

अवी-कहा था ना जल्दी कुछ नही होता. और तुम कह रही थी जल्दी किस करो

रानी-तुम्हारी बातों मे मैं फिर भूल गयी. मुझे तो जल्दी जाना था.

अवी-अब जा सकती हो

रानी-मैं इसका बदला ज़रूर लूँगी.

अवी-कब लोगि.

रानी-आज तुम्हारे सपने मे नही आउन्गि.

अवी-तो

रानी-आज मैं फॅमिली के सपने देखूँगी.

अवी-हमारे बच्चों के

रानी-तुम नही सुधरोगे, मैं चाची बुआ की बात कर रही थी.

अवी-तुम्हें देर नही हो रही

रानी भागते हुए चाची के पास चली गयी.

मैं बगीचे मे इधर उधर घूमने लगा.
 
चॅप्टर 935 डी

हमारी फॅमिली दावत तो हो गयी.

गाँव के लिए जो दावत रखी थी उसके लिए टाइम था

हम घर जाने के बजाय आम के बगीचे मे आराम करते हुए बातें करने लगे.

यहाँ लॅडीस ज़्यादा थी , लॅडीस ,वो भी इतनी सारे एक साथ मिल जाए तो, जो बातों को सिलसिला शुरू हुआ नोन स्टॉप चलता रहा.

कचछर कछर पछर पचछर.

छोटी हो या बड़ी हो, हम उमर हो तो बातें तो कहाँ से शुरू होती है और कहाँ ख़तम हो जाती पता नही चलता.

बातें आज के जनमदिन से शुरू हुई फिर लीना के बर्तडे से होते हुए 1980 मे नेहा बुआ और नीता बुआ के बर्तडे तक चली गयी. वहाँ से जो टॉप गियर डाला तो बच्चो के 18थ बर्तडे की बात शुरू हुई.

बर्तडे की बातें शादी मे कॉनवर्ट हुए, स्वेता दीदी की शादी मे ये करेंगे वो करेंगे. उनके बच्चों का बर्तडे ऐसे ही मानाएँगे.

बातें स्वेता दीदी के होने वाले बच्चों तक चली गयी. वहाँ से यू तुर्न ऐसा लिया कि गाँव के बारे मे बातों को सिलसिला रानी की मम्मी ने शुरू किया.

गाँव से शहर,शहर से पढ़ाई, पढ़ाई ने बचपन, बचपन से मैं, मुझसे चाची. चाची से उनके फॅमिली के बारे मे बातें शुरू हो गयी.

ऐसा लग रहा था पूरी ज़िंदगी की बातें आज कर लेगी.

मैं तो पक गया, इतना पक गया कि जलने लगा.

राजेश ने तो बढ़िया आइडिया सोचा था. राज के साथ वो पेड़ पे चढ़ कर फोटो देखने लगा.

मुझे तो ज़िम्मेदार लड़के की तरह अपनी गर्दन हाँ मे घुमाने के लिए चाची के पास बैठना पड़ा.

वो अच्छा हुआ बावरची आ गया.

बावरची ने बताया कि खाना तैयार हो गया.

बावरची को देखते ही मुझे गुस्सा आया .पर वो अपना सर नीचे झुका कर बात कर रहा था जिस से मेरा गुस्सा कम हुआ .अगर किसी की तरफ बुरी नज़र से देखता तो मैं उसकी आँख फोड़ देता.

चाचा ने बावरची को वापस भेज दिया और हमे बताया कि खाना तैयार हो गया है.

चाचा-खाना तैयार हो गया है. गाँव वाले आते ही होंगे हमे काम पे लग जाना चाहिए

अवी-राजेश ,मस्ती टाइम ख़तम

राजेश ने पेड़ से जंप मारी और काम करने को तैयार हुआ.

रानी-हम भी मदद करेंगे

चाचा-पूरे गाँव को खाना खिलाना है. तुम सब से नही होगा.

रानी-दावत का मज़ा तभी आता है जब मेजमान खुद खाना सर्वे करे

सी चाची-रानी की बात सही है. अगर मुझ को काम पे लगाया तो इस दावत का मज़ा ख़तम हो जाएगा.

पूजा बुआ-मीना ठीक कह रही है. खाना तो बावरची ने बनाया है हम गाँव वालो को सर्वे करेंगे

ब चाची-हम ने जो खाना बनाया उसको मिक्स करके काला बना दो ,उसमे मंदिर का प्रसाद मिक्स करके लोगो मे प्रसाद की तरह बाटेंगे

नीता बुआ-हम सब मदद करेंगे.

कविता लीना-हम भी मदद करेंगे

चाचा-जैसा तुम सब चाहते हो वैसा होगा.

राज-पर मैं मदद नही करूँगा.

नेहा बुआ-क्यूँ ?

म चाची-नेहा समझा कर राज को इम्पोर्टेंट काम मिला है. फोटो निकालने का

राज-मामी ,मैं तो फन्टो निकालूँगा.

सी चाची-हम गिफ्ट का देखते है. बाकी खाने का देखो

सीतल दीदी-साथी हाथ बटाना साथी से .गाना शुरू करो

बड़ी चाची का इशारा मिलते ही हम काम पर लग गये.

पहले हम जहाँ थे वहाँ गाँव वालो को गिफ्ट देने के लिए जगह बना दी.

बच्चों को उसी जगह रखना था .बच्चों का हाथ लगाके गिफ्ट देने थे.

राजेश चाचा और मैं ने गिफ्ट को घर3 से चाची के पास ले जाने लगे.

चाची आदमी और अओरत की एक एक जोड़ी बनाने लगी .गिफ्ट पे राइस और हल्दी कुमकुम डालके उनको तैयार राक रहे थे.

बुआ और बाकी सब खाने को छोटे बर्तन मे डालने लगे.

सबको एक एक काम दिया गया.

राइस ,सब्जी,रोटी, स्वीट्स, सबने अपने हिसाब से डिपार्टमेंट सेलेक्ट किया.

बावरची और उसके वर्कर अलग जाके बैठ गये .उनका काम हम कर रहे थे.

पूनम दीदी ज्योति बुआ को अपने साथ खेत मे लेकर आ गयी.

हमे काम करते हुए देख कर पूनम दीदी भाग कर हमारा हाथ बटाने मे लग गयी.

पर ज्योति बुआ तो महारानी की तरह चेयर पे जाके पैर फैला कर बैठ गयी.

वो हमारी मेहमान थी. मेहमान को काम नही बताया जाता ,वो अपनी मर्ज़ी से करे तो करने देते है.

ऐसे चाची के माता पिताजी ,रानी मम्मी खुद की मर्ज़ी से मदद कर रही थी.

लोगो का आना शुरू हुआ.

पूजा बुआ घर मे बड़ी होने से सबका हाथ जोड़ कर स्वागत कर रही थी.

पंगत थी. जिस से जो गाँव वाले आते गये उनको खाना परोसा गया.

हम सबको खाना परोसते हुए देख कर गाँव वाले शॉक्ड हो गये.

उनको अच्छा लगा होगा कि हम इतनी मेहनत कर रहे है उनके लिए .

मेरी बहन भाग भाग कर लोगो को खाना परोस रही थी.

इस तरह पूरी फॅमिली को साथ मे काम करके एक दूसरे की मदद करते हुए देख कर अच्छा लग रहा था.

जिनका खाना हो गया उनको चाचा के पास भेजने लगे.

चाचा और तीनो चाची गाँव वालो को बच्चों के हाथो से गिफ्ट देने लगे.

गाँव वाले बच्चों को खुशी खुशी आशीर्वाद देने लगे.

सब कुछ सही चल रहा था.

ना ज़्यादा शोर सराबा रहा था जिसे जो लगता वो काम करने लग जाता.

कविता लीना अपनी फुर्ती का ईस्तमाल करके पूरे जोश्के साथ खाना खिला रही थी.

रति ने आते ही खाना खाने की जगह हमारी मदद करने लगी.

सब बच्चों के जनमदिन की बातें कर रहे थे.

ठाकुरजी ने अपने पोते के लिए ऐसी दावत नही रखी थी पर हम ने पूरे गाँव को दावत दे कर अपना मान अपनी फॅमिली का मान उचा किया.

मैं दोनो तरफ मदद कर रहा था. चाचा के पास गिफ्ट पहुँचाने लगा तो खाना परोसने मे मदद करने लगा.

सरबत ,स्वीट्स , पान सुपारी सबका इंतज़ाम किया था.

गाँव वाले धीरे धीरे आ रहे थे जिस से हम पे ज़्यादा प्रेसर नही आ रहा था.

चाचा और चाची सबको गिफ्ट दे रहे थे .अपने लिए साड़ी देख कर गाँव की औरतें बच्चों की नज़र उतार कर पैसे बावरची के वर्कर को देती.

सब कितना अच्छा लग रहा था.

ना किसी के चेहरे पे काम की थकावट दिख रही थी और ना कोई बैठ कर आराम कर रहा था .

सिवाय ज्योति बुआ. अरे ज्योति बुआ कहाँ चली गयी. यही तो थी.

मैं ने बावरची की तरफ देखा तो वो भी गायब था.मैं समझ गया कि ज्योति बुआ कहाँ गयी.

चाचा ज्योति बुआ से दूर है यही तो चाहिए था. फिर भाड़ मे जाए ज्योति बुआ मुझे क्या करना है.

मैं तो अपने बेटो का जनम दिन मनाने लगा.

प्रिन्सिपल सर के आने से उनका आशीर्वाद बच्चों को मिला.

थोड़ी देर बाद ज्योति बुआ अपनी जगह पे दिखाई दी. साथ मे बावरची भी आ गया.

ये क्या ज्योति बुआ के गले मे जो गोल्ड की चैन है वो थोड़ी देर पहले बावरची के गले मे थी.

ज्योति बुआ बावरची को लूट रही थी. लूटने दो चाचा को तो नही लूट रही

हम सूरज डूबने के बाद भी लोगो को खाना खिलाते गये.

हमे ने खाना ज़्यादा बनाया था ताकि कम ना पड़ जाए जो खाना बच गया वो गाँव वालो को पॅक करके दे दिया.

गिफ्ट जो बच गये थे वो वर्कर को दे दिए.

मेहमानो के लिए गिफ्ट लिए वो घर पे रखे हुए थे.

पूरी दावत अच्छे से पूरी हो गयी.

चाचा चाची के चेहरे पे समाधान दिख रहा था.

मेरे भाई बहन थक गये थे .उनको आइस क्रीम तो देनी होगी.

अंधेरा हो गया था. हम घर जाना होगा ,बाकी का काम बातें वही करेंगे.

मैं और राजेश सबको घर ले जाने लगे.

बुआ ने आज हमारे घर पे सोने का प्लान बनाया.

फिर तो मज़ा आ जाएगा.

हम थक कर घर आ गये.

पूरे दिन को एंजाय करने की खुशी हमारे चेहरे पे दिख रही थी.

घर आते ही सब फ्रेश हो गये तो छोटी चाची ने तब तक कड़क टी बना दी.

गरम गरम टी पीते ही हमारी एनर्जी वापस आ गयी.

अच्छा हुआ आज बारिश नही आई.

रानी की मम्मी वापस जाने की बात कर रही थी तो रानी और मैं अपनी कसम दे कर रोक लिया.

टी पीते हुए सब हॉल मे बैठ कर बातें कर रहे थे.

कविता-भैया हम थक गये

अवी-ऐसे कैसे थक गये तुम्हारे लिए एक खास चीज़ लाने वाला हूँ

कविता-क्या

अवी-आइस क्रीम कैसी रहेगी.

लीना-कहाँ है आइस क्रीम

अवी-अभी लेकर आता हूँ .चलो राजेश

और मैं राजेश के साथ शहर चला गया.

कार चलाने का चान्स मिल गया और सबके लिए आइस क्रीम ले ली.

आइस क्रीम लेकर जल्दी घर आ गया. सब मेरा इंतज़ार कर रहे थे.

मैं ने राजेश को आइस्क्रीम अंदर ले जाने को कहा. और कार पार्क करके मैं अपनी आइस क्रीम खाते हुए अंदर जाने लगा

मैं आज के फंक्षन के बारे मे सोचते हुए आइस क्रीम खाते हुए घर के अंदर जा रहा था कि किसी ने मुझे ज़ोर से टक्कर मारी

मैं गिरते गिरते बच गया पर मेरी आइस क्रीम गिर गयी.

मैं ने उस टक्कर मारने वाले शक्स को देखा तो वो भी पड़ते पड़ते बच गया.

ये तो चाचा है. चाचा इतनी रात मे इस तरह गुस्से मे कहाँ जा रहे है.

चाचा का गुस्सा शायद मुझसे टकराने से आया होगा.

चाचा ने मुझे गुस्से से देखा और बिना कुछ कहे अपने पैर पटकते हुए गाँव की गलियों मे गायब हो गये.

चाचा को क्या हुआ वो इतनी रात मे कहाँ जा रहे है.

चाची से पूछ लूँगा.

मैं अंदर गया तो सब आइस क्रीम खा रहे थे.

मेरी बहनों ने आइस क्रीम के लिए थॅंक्स कहा.

मैं छोटी चाची को ढूँढने लगा तो वो सबके लिए बिस्तेर लगा रही थी.

मैं ने चाची से बात करनी चाही तो वहाँ नीता बुआ गद्दे लेकर आ गयी.

फिर कभी बात कर लूँगा.

मैं बड़ी चाची के पास गया तो वो उदास दिख रही थी.

अवी-चाची क्या हुआ .आपका चेहरे पे परेशानी क्यूँ दिख रही है.

ब चाची-मैं और परेशान ,तेरे होते हुए मैं परेशान कैसे हो सकती हूँ

अवी-आपके चेहरे पे परेशानी साफ झलक रही थी.

ब चाची-ये परेशानी नही थकान है. मैं थक गयी ना काम करके

अवी-आपको आराम करना चाहिए

ब चाची-मेहमान के सोने से पहले मैं कैसे आराम कर सकती हूँ.

अवी-तो काम मत करना .कुछ लगे तो मुझे बताना

ब चाची-तू भी तो थक गया होगा.

अवी-मैं थक गया तो मेरे भाई बहन थक जाएँगे. मुझे उनका जोश बनाए रखने को कभी थकने की बात नही करनी चाहिए.

ब चाची-मेरा बेटा तो बड़ा हो गया. तेरी शादी करनी पड़ेगी.

अवी-अबी नही. पहले तो मुझे आपकी सेवा करनी है,अपनी बहनों की शादी करवानी है फिर मैं अपने बारे मे सोचूँगा.

ब चाची-काश सब तेरे जैसे सोचते

अवी-क्या कहा आपने

ब चाची-कुछ नही. जा मीना की मदद कर ,इतने मेहमानो के लिए अकेली बिस्तेर लगा रही होगी.

अवी-जी

ब चाची-(अवी को मैं अपनी परेशानी बता कर उसकी नींद खराब कैसे कर सकती हू)जाना अब

और मैं छोटी चाची की मदद करने लगा.

मेहमानो के लिए बेड पे बिस्तेर लगाया था और हम ज़मीन पर बिस्तेर डाल कर सोने वाले थे.

मेरे कमरे मे छोटी चाची के रिश्ते दार थे .और बाकी कमरो मे सीमा चाची और बड़ी चाची के मेहमान थे.

हम तो हॉल मे सो गये

रानी की मम्मी के लिए बेड पे बिस्तर लगाया था पर वो हमारे साथ, नेहा बुआ के साथ सो गयी.

सब थक गये थे. जिस से गद्दे पे सर रखते ही सब सो गये.
 
चॅप्टर 936

सुबह सब देर तक सोते रहे .

घोड़े बेच कर सो रहे थे. पूरी थकावट निकाल रहे थे.

चाची को आदत थी कि वो कितनी भी थकि हो ,देर से क्यूँ ना सोई हो वो सुबह अपने टाइम पे उठ जाती है.

चाची ने सबको थोड़ी देर सोने दिया और फ्रेश होके नाश्ता बनाने मे लग गयी

साथ मे खाना बनाने मे लग गयी उनको पता था कि उनके माता पिता जल्दी निकल जाएँगे तो उनके लिए खाना बना कर रख रही थी.

जैसे सूरज निकलना शुरू हुआ वैसे एक एक करके सबकी नींद खुलने लगी.

लास्ट मे हम बच्चा गॅंग उठ गयी.

चाची सबको चाइ नाश्ता करवा रही थी. पर बड़ी चाची की आँख बार बार घर के गेट की तरफ जा रही थी. शायद किसी के आने का इंतज़ार कर रही हो.

बुआ तो टी नाश्ता करके अपने घर जाने लगी तो बड़ी चाची ने टीका लगा कर साड़ी गिफ्ट दी. बाकी मेहमानो को भी साड़ी गिफ्ट की.

पहले बड़ी चाची के माता पिता अपने गाँव चले गये. फिर मैं सीमा चाची और छोटी चाची के माता पिता को छोड़ने चला गया.

चाची ने किसी को खाली हाथ जाने नही दिया ,सबको गिफ्ट दिए.

चाचा जी पता नही नही कहाँ चले गये .उनकी तो कोई खबर ही नही.

रात से वापस नही आए या फिर सुबह किसी काम से चले गये होंगे.

मेहमान एक एक करके जा रहे थे .

रानी की मम्मी-सुमन जी ,मुझे इजाज़त दीजिए .मैं भी चलती हूँ.

ब चाची-आप कहाँ जा रही है. कल आप से मेहमानो की वजह से बात नही कर पाई. आपको आज यही रुकना होगा.

रानी की मम्मी-सुमन जी मैं तो रुक जाती पर मुझे जॉब पे जाना होगा.

ब चाची-मीना ये देख ,रानी की मम्मी जाने की बात कर रही है.

सी चाची-दीदी फिकर मत करो. ये कही नही जाएगी. और जा भी नही सकती. इनकी कार अवी लेकर गया है.

रानी की मम्मी-मज़बूरी है. आज एक मीटिंग है

नेहा बुआ-मीटिंग को कॅन्सल कर दीजिए. और आप कल यहाँ आई थी. और आज मेरे यहाँ रुकेंगी.

रानी-मम्मी रुक जाओ ना,

रानी की मम्मी-ठीक है. मैं रुक जाती हूँ ,पर एक घंटे के लिए जाना होगा. मीटिंग की फाइल मेरे पास है उनको ऑफीस देख कर आ जाउन्गी.

नेहा बुआ-ये हो सकता है. मीना ,इनको मैं अपने घर ले जा रही हूँ

ब चाची-हाँ हाँ ले जाओ, हम भी दोपेहर उधर ही आएँगे.

मैं मेहमान को उनके गाँव की बस मे बैठा कर वापस आ गया.

दोपहर मे चाचा घर आए .खाना खा कर वापस खेत मे चले गये.

कल तो चाचा कितने अच्छे बिहेव कर रहे थे .आज क्या हुआ चाचा को.

चाचा गिरगिट की तरह थे, हमेशा रंग बदलते है

चाचा को समझना मुश्किल ही नही नामुमकिन है.

रानी और कोमल ने आज छुट्टी मार ली कॉलेज को. वैसे भी अगले हफ्ते से एग्ज़ॅम चालू होंगे सब उसकी तैयारी मे लगे हुए थे.

रानी और कोमल एग्ज़ॅम की टेन्षन नही ले रहे थे उनको तो फॅमिली के साथ वक्त बिताना था.

मैं भी इस बार कॉन्फिडेन्स मे था कि मेरा रिज़ल्ट अच्छा आएगा.

मैं काम करने के साथ पढ़ाई भी कर रहा था.

मेरी सारी बहनें रानी के साथ रहती जिस से मुझे टाइम नही मिला अकेले मे रानी के साथ बातें करने का .

मैं रिस्क भी नही लेना चाहता था.

मेरा मिशन था ज्योति बुआ पे नज़र रखना.इस बार मैं किसी बात को नज़र अंदाज़ नही करूँगा

कल हम सब खेत मे थे तो ज्योति बुआ को पूरा टाइम मिला मस्ती करने का.

पर अब मेरी आँख ज्योति बुआ पे लगी रहेगी.

पूनम दीदी से बात करनी थी. उनके दिमाग़ मे क्या चल रहा है वो जानना था

पूनम दीदी को ज्योति बुआ के बारे मे सब पता है. ऐसे मे वो चुप क्यूँ है.

आज रानी और रानी की मम्मी रुकी थी जिस से मैं आज पूनम दीदी से कुछ नही पूछूँगा.

लेकिन कल मैं पूनम दीदी से बात करूँगा.

स्वेता दीदी सीतल दीदी तो अपनी एग्ज़ॅम दे कर आई थी ऐसे मे वो दीवाली के बाद वापस जाएगी. मतलब पूनम दीदी और ज्योति बुआ दीवाली तक रुकेंगी.

राजेश तो आज रात मे अपने हॉस्टिल चला जाएगा उसकी भी एग्ज़ॅम थी. कविता लीना की एग्ज़ॅम थी .

ऐसे मे आज सब स्वेता दीदी के यहाँ मस्ती कर रहे थे.

मैं ने ट्राइ किया था कि रोहन सोहन फंक्षन मे आए पर वो आ नही सके.

टाइम पर सोहन को एक मीटिंग के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा. और सारा प्लान चोपट हो गया.

वरना रोहन सोहन के आने से सब कितने खुश हो जाते.

रोहन सोहन भी निराश हो गये उनको यहाँ आने को नही मिला.

अच्छा हुआ मैं ने किसी को बताया नही था वरना सबका मूड ऑफ हो जाता.

बच्चा पार्टी स्वेता दीदी के यहाँ होने से ज्योति बुआ आज कुछ नही कर पाई.

पर ज्योति बुआ कल कुछ ना कुछ ज़रूर करेंगी.

नेहा बुआ रानी की मम्मी के साथ इतनी घुल मिल गयी कि वो बहनों की तरह बातें कर रही थी.

मेहमानो के जाते ही चाची दोपेहर मे थोड़ी देर सोने के बाद ,नेहा बुआ के घर चली गयी.

बच्चा पार्टी पूजा बुआ के घर थी और बड़े सब नेहा बुआ के घर थे.

मैं खाली था तो खेतो का एक चक्कर लगाया तो चाचा घर3 मे सो रहे थे.

चाचा भी आराम कर रहे है.

मैं ने गाँव मे चक्कर लगाया तो गाँव वाले कल के फंक्षन के बारे मे बातें कर रहे थे

फिर से हमारी फॅमिली का नाम उचा हो रहा था.

दादाजी के ना होने से कुछ सालो के लिए गाँव वाले तो हमे भूल गये थे

पर वापस हमारी फॅमिली को मान समान मिलने से चाची मुझपे खुश थी.

हर तरफ फंक्षन की बातें हो रही थी.

हमारे घर पे भी फंक्षन की बातें हो रही थी.

चाची और बुआ घंटों तक बातें करती रही

मेरी बहन कल की फोटो देखने मे बिज़ी थी.

मैं ने फ़ोन करके विद्या को बुआ केघर से अपने पास बुला लिया.

विद्या के आते ही मेरा लंड खुश हो गया.

और विद्या की चूत से पानी निकालने लगा.

घर पे कोई नही था इस का फ़ायदा मैं उठा रहा था.

विद्या की चुदाई करके खुद को हल्का कर रहा था.

विद्या की कल की थकान मैं ने उसकी जोरदार चुदाई करके ख़तम कर दी

विद्या ने गंद मारने से माना किया .उसे काम करते रहना था जिस मे उसे परेशानी ना हो.

मैं ने विद्या की पलंग तोड़ चुदाई की.

विद्या की चूत मे अपना गरम गरम लावा डाल कर मैंठंडा हो गया.

तो विद्या मेरा प्यार पा कर खुश हो गयी.

विद्या की चुदाई करके मुझे सुकून मिला.

मैं तो एक और राउंड करना चाहता था पर विद्या ने कहा कि ज़्यादा लालच करने से सोने की मुर्गी हाथ से निकल जाएगी

2न्ड राउंड करते हुए पकड़ने जाने का डर था तो मैं ने विद्या को एक किस करके जाने दिया.

विद्या के साथ प्यार करके मैं विद्या के साथ अपनी बहनों के पास गया.

और अपनी दोपेहर और शाम उनकेनाम कर दी
 
अपडेट 936आ

आज रानी और रानी की मम्मी नेहा बुआ के घर रुक गयी.

दिन भर तो आंटी और बुआ ने काफ़ी बातें की पर रात होते ही बुआ ने रानी की मम्मी को अपनी बातों मे ऐसा फ़ैसाया कि रानी की मम्मी को टाइम का पता नही चला.

और रानी की मम्मी को रात मे नेहा बुआ के घर पे रुकना पड़ा.

अच्छा हुआ बुआ और रानी की मम्मी की इतनी बनती है. आगे जाके मेरा और रानी का रास्ता साफ होगा.

चाची तो रात होते अपने घर आ गयी. पर पूजा बुआ और नीता बुआ का खाने का प्रोग्राम नेहा बुआ के घर पे रानी की मम्मी के साथ.

चाची भी नेहा बुआ के घर रुक जाती पर चाचा की वजह से उनको वापस घर आना पड़ा.

चाची ने मुझे नेहा बुआ के घर रुकने को कहा.

मैं अपनी बहनों के साथ रुकने को तो हमेशा तैयार रहता हूँ.

पर राजेश शाम होते ही हॉस्टिल वापस चला गया. उसका कॉलेज स्ट्रिक्ट था .बड़ी मुश्किल से वो 2 दिन की छुट्टी पे वो भी एग्ज़ाम के समय आया था.

हमारे कॉलेज ने 1 हफ्ते की छुट्टी दी थी एग्ज़ॅम की तैयारी के लिए. ये एग्ज़ॅम इतना इम्पोर्टेंट नही था बस चेक करने के लिए था कि हमारी फाइनल एग्ज़ॅम की तैयारी कैसी चल रही है

चाची के कहने पे मैं बुआ के घर रुक गया .

पता नही उधर घर पे चाचा का कौन सा ड्रामा चालू होगा.

मैं ने कल शाम के बाद से चाचा से बात भी नही की.और ना चाचाने मुझे हिसाब पूछा.

मैं इस बात से अंजान था कि घर पे क्या चल रहा है.

मैं तो अपनी बहनों के साथ मस्ती कर रहा था.

बुआ अपने कमरे मे बातें कर रही थी.

और हम कविता के कमरे मस्ती मज़ा मूवी गेम ,खाना पीना, हसी मज़ाक कर रहे थे.

पूनम दीदी फिज़िकली हमारे साथ थी पर मेंटली वो कहीं और थी.

क्यूँ की ज्योति बुआ सर दर्द का बहाना करके पूजा बुआ के घर रुकी थी.

मुझे लगा ज्योति बुआ ,नेहा बुआ के कमरे मे होगी पर मैं ग़लत था.

वो तो मुझे बाद मे पता चला जब हम खाना खाने एक जगह जमा हुए.

पूजा बुआ-चलो खाने का टाइम हुआ है. 10 बज गये है

स्वेता दीदी-बातों बातों मे समय का पता नही चला .चलो खाना खाते है

कविता-खाना तो रोज खाते है,आज बातों से पेट भरते है

सीतल दीदी-कविता तू क्या दादी माँ हो गयी .जो बातों सेपेट भरने की बात कर रही हो

रानी-जल्दी खाना खा कर फिर रात भर बातें करेंगे

कोमल-आज कोई नही सोएगा.

लीना-या हुउऊ, आज रात भर मस्ती करेंगे. फ्रेंड्स ग्रूप ज़िंदाबाद

और हम हॉल मे जमा हो गये .

पूजा बुआ-पूनम अपनी माँ को बुला लाना खाने का टाइम हुआ है

पूनम दीदी-जी मामी, अभी बुलाती हूँ

अवी-ज्योति बुआ यहाँ आई नही ,वो कहाँ है

पूजा बुआ-उनके सर मे दर्द है .कल भी था और आज फिर शाम मे शुरू हो गया तो वो आराम कर रही है

अवी-(आराम नही चुदाई कर रही होगी.)

मैं ने पूजा बुआ को इशारा करके पूछा कि बात क्या है

पूजा बुआ ने इशारो मे कहा कि उनको शक है की बात कुछ और है.

मैं ने पूजा बुआ को इशारा करके पूनम दीदी के साथ मुझे भेजने को कहा.

पूजा बुआ-पूनम अवी को अपने साथ लेकर जाओ

पूनम दीदी-मामी मैं माँ को बुला लूँगी, अवी तुम यही रूको

पूजा बुआ-रात हो गयी है. और अवी को अपने साथ लेकर जाओ तब तक हम प्लेट लगाते है

पूजा बुआ के कहने पे पूनम दीदी को मुझे अपने साथ लेकर जाना पड़ा.

पूजा बुआ का घर नेहा बुआ के घर को लगा हुआ था फिर भी मैं पूनम दीदी के साथ जाना चाहता था.

ज्योति बुआ घर मे चुदाई करने के चान्सस ज़्यादा है ऐसे मे मेरे साथ होने से पूनम दीदी का क्या रिक्षन होगा ये देखना था

मैं पूनम दीदी के साथ बाहर आ गया.

पूनम दीदी चुप चाप चल रही थी. वो सोच रही होगी कि उसकी माँ अगर चुदाई कर रही होगी तो वो मेरा सामना कैसे करेंगी.

अपनी माँ की वजह से पूनम दीदी को मेरे सामने शर्मिंदा होना पड़ेगा.

पूनम दीदी पे टेन्षन साफ दिख रहा था.

उनका चेहरा पसीने से भीग चुका था. पाप कोई और करे और शर्मिंदा कोई और हो जाए.

बाहर आते ही मैं ने पूनम दीदी को रोक लिया.

अवी-दीदी क्या बात है.

पूनम दीदी-होश मे आते हुए 'तुम ने कुछ कहा'

अवी-आप क्या सोच रही है.

पूनम दीदी-कुछ भी तो नही

अवी-कुछ तो बात है जो आपको परेशान कर रही है.

पूनम दीदी-तुम्हें ऐसा क्यूँ लग रहा है मैं परेशान हूँ ,

अवी-आपवो पहले वाली पूनम दीदी नही हो जो मेले मे हमारे साथ थी .आप बदल गयी है.

पूनम दीदी-मैं वही पूनम हूँ बस जॉब की वजह से शायद मुझ मे थोड़ा चेंज आया है

अवी-ऐसा नही है. आप यहाँ गाँव मे आकर खुश नही दिख रही.

पूनम दीदी-(अवी को पता तो नही चल गया) मैं खुश हूँ.

अवी-आपको झूठ बोलना भी नही आता

पूनम दीदी-मैं झूठ क्यूँ बोलू, स्वेता से पूछो मैं कितनी खुश हूँ.

अवी-स्वेता दीदी ने मुझे कहा कि आप से पुच्छू कि बात क्या है

पूनम दीदी-स्वेता को कुछ कहना होगा तो वो मुझे साइड साइड पूछेंगी.

अवी-आप की इस तरह की दलीले देने से मैं समझ गया कि आप को कोई तो बात है जो आपको परेशान कर रही है.

पूनम दीदी-कुछ होता तो मैं तुम्हें बता देती.

अवी-आप इस लिए नही बता रही कि आप मुझे अपना भाई नही समझती

पूनम दीदी-ऐसा दुबारा मत कहना. मैं अपने एक भाई को खो चुकी हूँ. तुम्हारे रूप मे मुझे मेरा भाई वापस मिला है.

अवी-तो क्या अपनी बहन को परेशान देख भाई को अच्छा लग रहा होगा.

पूनम दीदी-अवी कुछ परेशानी का सामना खुद करना पड़ता है.

अवी-अगर किसी का साथ मिले तो हिम्मत बढ़ जाती है.

पूनम दीदी-जब मेरी हिम्मत टूट जाएगी तो मैं तुम्हारे पास आउन्गि मदद माँगने.

अवी-जब भी आप मदद माँगेगी तब मैं आपकी मदद करूँगा

पूनम दीदी-चले अब

और हम पूजा बुआ के घर जाने लगे.

मैं ने ट्राइ किया ,पूनम दीदी के मूह से सच निकालवाने का .पर पूनम दीदी इतनी आसानी से नही बताएँगी.

मैं कल फिर ट्राइ करूँगा.

पूनम दीदी के दिल मे मेरे लिए क्या जगह है ये तो पता चल गयी.

उसी का फ़ायदा लेकर पूनम दीदी से सच निकालवा लूँगा.

मुझसे बात करने के बाद पूनम दीदी और परेशान हो गयी.

वो फिर से अपनी ख़यालो मे खो गयी

और हम पूजा बुआ के घर आगये

हम डोर के पास आ तो गये पर पूनम दीदी नॉक नही कर रही.

अगर उसकी माँ ऐसी वैसी हालत मे मिल गयी तो.

पूनम दीदी सोच रही थी कि क्या करें और मैं ने डोर खटखटाया.

एक बार नही कही बार डोर खटखटाया.

पर डोर नही खोला ज्योति बुआ ने, पूनम दीदी के धड़कने तेज चलने लगी. वो समझ गयी कि उसकी माँ क्या कर रही होगी.

मुझे भी अंदाज़ा हो गया कि ज्योति बुआ क्या कर रही थी और अब अपने पाप को पीछे के डोर से बाहर भेज रही होगी.

थोड़ी देर बाद ज्योति बुआ ने डोर खोला.

ज्योति बुआ को कल जिस हालत मे देखा था उस से भी ज़्यादा खराब हालत मे आज देखा.

जल्दी जल्दी मे ज्योति बुआ ने ट्रॅन्स्परेंट नाइटी पहन ली.

बिना ब्रा के ट्रांसपेरेंट नाइटी से सब कुछ दिख रहा था.

उनकी चूत से निकाले हुए पानी की वजह से पैंटी वहाँ पर चिपक गयी थी.

मैं तो उनको घूरता रह गया.

हमे इस तरह घूरता हुआ देख कर ज्योति बुआ को अपनी हालत का अंदाज़ा हुआ .और वो भाग कर बेडरूम मे गयी.

भागते हुए उनकी गंद हिलने से मेरा लंड खड़ा हो गया.

पूनम दीदी तो पानी पानी हो गयी.

पूनम दीदी अपनी माँ को गाली दे रही होगी कि कम से कम अपना पाप तो छुपा के रखती.

बुआ के अंदर जाते ही हम चेर पे जाके बैठ गये.

क्यूँ कि सोफे पे ज्योति बुआ की साड़ी पड़ी थी. उनकी साड़ी को देख कर लग रहा था कि किसी ने जोश मे आकर निकाल कर यहा फेकि है.

मेरी चेयर के पास एक आदमी का कच्छा पड़ा हुआ था.

जल्दबाज़ी मे कच्छा भूल गया होगा.

ज्योति बुआ को पूजा बुआ के घर को रंडीखाना बनाने का हक नही था.

मुझे जल्दी कुछ करना होगा

पूनम दीदी तो शरम के मारे मुझसे अपनी आँख नही मिला रही थी

मैं ने पूनम दीदी से बात करके उनको और शर्मिंदा नही करना चाहता था.

थोड़ी देर बाद ज्योति बुआ गाउन पहन कर आगयि.

ज्योति बुआ-तुम यहाँ कैसे आगये

पूनम दीदी क्या कहेंगी. आपकी रासलीला देखने आए है

पूनम दीदी के पहले मैं बोल पड़ा.

अवी-बुआ ने आपको खाने के लिए बुलाया है.

ज्योति बुआ-बताया ना कि मेरा सर दर्द कर रहा था.मेरा खाना पॅक करके लाने को बोलना

ज्योति बुआ की बात सुनके पूनम दीदी सोच रही होगी. अपनी चूत की प्यसस के सामने पेट की भूख भूल गयी है.

अवी-जी बोल दूँगा.

पूनम दीदी-अवी तुम जाओ मैं थोड़ी देर बाद आती हूँ

अवी-(मैं समझ गया कि दीदी ज्योति बुआ से बात करना चाहती है)

पूनम दीदी-अवी ,तुम जाओ .मैं थोड़ी देर मे आती हूँ.

अवी-जी दीदी

मैं ने माँ बेटी को अकेला छोड़ा और वापस नेहा बुआ के घर आ गया.

मैं पूजा बुआ के घर जो ड्रामा होगा वो देखना चाहता था.पर जाने दो फिर कभी देख लूँगा.

पूनम दीदी तो ज्योति बुआ पे बहुत गुस्सा करेंगी.

या उल्टा भी हो सकता है.

मैं वापस आकर ज्योति बुआ का मेसेज पूजा बुआ को बता दिया.

पूनम दीदी थोड़ी देर मे आ जाएगी ये भी बता दिया

और हम ने खाना शुरू कर दिया.

हमारा खाना हो गया पर पूनम दीदी नही आई

लगता है झगड़ा ज़्यादा बड़ा हो गया.

पूजा बुआ ने उनके लिए खाना पॅक किया .तो पता चला पूनम दीदी सो गयी है.

कल बात करूँगा पूनम दीदी से कि हुआ क्या था.

आज तो मेरी बहनें मुझे छोड़ेगी नही .

खाना खाने के बाद मस्ती करनी फिर शुरू कर दी.

रात मे काफ़ी देर तक मस्ती की फिर थक कर एक एक करके सब सो गये.
 
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