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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 1039

जतिन-ये कैसे हुआ,

नीता-दीदी ने बताया था ना, मेरे सामने

जतिन-मैं समझ सकता हूँ ,तुम्हें कैसा लग रहा होगा.मैं ने भी अपनी माँ को बचपन मे खो दिया था.

नीता-नेहा इस बात से बहुत दुखी है. वो तो वहाँ रहना नही चाहती

जतिन-फिर कहाँ रहेगी.

नीता-पिताजी उसके लिए यहाँ घर बना रहे है

जतिन-मैं समझ सकता हूँ. मुझे भी बचपन मे माँ के जाने के बाद अपने घर मे रहने से डर लगता था.

नीता-मैं कह रही थी कि

जतिन-तुम नेहा के बिना नही रह सकती पता है मुझे

नीता-आप कहो तो

जतिन-मैं ने देखा है तुम नेहा से कितना प्यार करती हो.नेहा यहा रहेगी तो तुम शहर2 मे नही रह सकती.

नीता-शहर2 मे वो घर हम ने प्यार से बसाया है

जतिन-घर बसने के लिए हम दोनो का खुश रहना ज़रूरी होता है. तुम नेहा के बिना खुश नही रह सकती. और तुम्हें उदास मैं नही देख सकता

नीता-वो आपके पिताजी का घर है.

जतिन-हम घर बेच नही रहे है. मेरे माता पिता तो चले गये. मेरा सब कुछ तुम हो. तुम खुश रहा करो

नीता-आप बहुत अच्छे है.

जतिन-तुम बहुत प्यारी हो

जतिन नीता को खुश देखना चाहता है. और नीता तभी खुश रह सकती है जब वो नेहा के साथ रहेगी.

जतिन को कोई अतराज़ नही था. उनका प्यार का घर उसी दिन बन गया था जिस दिन उनकी शादी हो गयी थी.

सुरेश रमेश से बात करने के लिए चला गया

सुरेश-रमेश

रमेश-हाँ

सुरेश-नेहा बहुत दुखी है .वो उस घर मे जाना नही चाहती.

रमेश-तू भी तो वहाँ नही रहना चाहता था, इसी लिए तो हम दुबई गये थे

सुरेश-ये क्या हो रहा है.मेरे साथ

रमेश-सब ठीक हो जाएगा .

सुरेश-नेहा तो वहाँ नही रह सकती. नेहा यहा गाँव मे रहना चाहती है. मैं भी वहाँ नही रहना चाहता.उस घर मे रहूँगा तो मुझे अपने माता पिता की याद आएगी और नेहा को उसकी माँ की

रमेश-गाँव मे रहेगा.

सुरेश-हाँ, नेहा अपने गाँव मे रहेगी तो अच्छा महसूस करेगी. मैं भी शहर के कंपनी मे तो कभी दुबई जाउन्गा.

रमेश-मुझे छोड़ कर जाएगा .

सुरेश-तू भी यहाँ आ जा, पूजा भाभी चोर की वजह से डर गयी है.

रमेश-ये घरदमाद जैसा नही हो जाएगा .

सुरेश-इसी गाँव मे नया घर बना लेंगे. और बच्चे शहर मे पढ़ लेंगे. तू भी आ जाता तो

रमेश-पूजा ने मुझे पूछा है इस बारे में

जतिन-सुरेश मैं तेरे साथ गाँव मे रहूँगा.

सुरेश-क्या कहा

जतिन-मैं तुझे अपना भाई मानता हूँ .तू जहाँ रहेगा मैं वही रहूँगा. नीता भी नेहा के बिना नही रह सकती. मैं पिताजी से बात करने जा रहा हूँ.

सुरेश-रमेश तू क्या कहता है.

रमेश-मुझे सोचने दो

सुरेश और जतिन ने पिताजी को अपनी रज़ामंदी बता दी.

पिताजी दोनो को लेकर घर की जगह दिखाने चले गये.

पिताजी ने घर थोड़ा दूर रखा ताकि उनको घरदमाद जैसा ना लगे.पर गाँव मे रहने से सब पिताजी के आँखो के सामने रहेंगे

रमेश दूसरे दिन अपनी बहन से मिलने चला गया.

ज्योति ने रमेश के सामने अपने ग़रीबी के बारे में बताना सुरू किया.

जब पूजा ने ज्योति से शहर2 वाले घर मे उसके रहने की बात की तो ज्योति बहुत खुश हो गयी थी

ज्योति को तो यही चाहिए था

पूजा ने ज्योति के सामने एक शरत रखी कि वो रमेश को मनाए

ज्योति को पता था कि रनेश उसका रोना नही देख पाएगा

रमेश की कमज़ोरी ज्योति थी ,

ज्योति रमेश के सामने अपने मगर मच्छ के आसू बहाने लगी

रमेश ने ज्योति को कुछ पैसे निकाल कर दे दिए.

ज्योति का रोना रमेश को बर्दास्त नही हुआ .और उसने गाँव जाने का फ़ैसला किया.

पूजा को पता था कि रमेश ज्योति को रोता हुआ नही देख सकते है.

रमेश ने भी हाँ कर दी.

दामाद के हाँ करते पिताजी ने जल्द से जल्द घर बनाने मे लग गये.

कुछ दिन बाद रमेश सुरेश और जतिन वापस दुबई चले गये.

पिताजी ने अपनी बेटियो के लिए शहर जैसा घर बना दिया.
 
फ्लॅशबॅक 1040

उस दिन की घटना के बाद कुमार और अजीत भी डरे हुए थे

अजीत ने सब संभाल तो लिया था पर जब उनको पता चला कि जयसिंघ की माँ की डेत हुई तो वो और ज़्यादा डर गये

उस घटना के दूसरे दिन जयसिंघ की माँ की डेत होने से अजीत को शक हुआ कि उस रात को दोनो ने जो किया उसी से जयसिंघ की माँ की डेत हुई है

और जयसिंघ जब शहर3 आया तो उसकी हालत देख कर अजीत समझ गया कि बात क्या है

अजीत ने जयसिंघ की हालत का फ़ायदा उठाने का सोचा

जयसिंघ तो अब कंपनी मे आएगा नही ऐसे मे कंपनी अपने हाथो मे लेने का अजीत सोच रहा था

अजीत ने कुमार को डरा दिया कि अगर वो जयसिंघ के सामने गया तो जयसिंघ उसकी जान ले लेगा

और उस दिन जो मीटिंग थी उसका कांट्रॅक्ट कुमार को मिल गया था

ऐसे मे अजीत ने कुमार को एक सजेशन दिया कि उस कांट्रॅक्ट के लिए तुम फॉरेन चले जाओ

अगर तुम यहाँ रहे तो जयसिंघ तुम्हें मार डालेगा

और जयसिंघ के पिताजी तो तुम्हें ढूँढ रहे होंगे

कुमार डर गया

और अजीत ने जैसा कहा वैसा करना सुरू किया

कुमार जयसिंघ की माँ की डेत के 2 दिन बाद विदेश चला गया 3 साल के लिए

कुमार को भी जयसिंघ से डर लग रहा था

अगर उसको जयसिंघ ने देख लिया तो उसकी जान ले लेगा

कुमार अपनी जान बचाने के लिए विदेश चला गया

और बाकियो को ऐसा लगा कि कांट्रॅक्ट के लिए , कंपनी के काम से कुमार विदेश गया है

जयसिंघ तो कंपनी मे आएगा नही और कुमार विदेश गया है ऐसे मे पूरी कंपनी अजीत के हाथो मे आ गयी

अजीत बॉस की चेर पे बैठ कर अपनी बीवी के साथ जशन मनाने लगा

उस दिन के बाद जयसिंघ ने कभी कंपनी मे पैर भी नही रखा और ना अजीत कुमार से कभीं मिला

इधर गाँव मे पिताजी अपनी बेटियो के बारे में सोच रहे थे

पिताजी कुमार को मारने का सोच रहे थे

पर उनको खबर मिली की कुमार विदेश गया है

पिताजी कुमार के विदेश से आने का इंतज़ार करने लगे

जिस दिन कुमार यहाँ आएगा उस दिन उसके ज़िंदगी का आख़िरी दिन होगा

तब तक पिताजी अपनी बेटियो के बारे में सोच रहे थे

बेटियो का घर बनते ही पिताजी खुश हो गये.

तीनो बेटियो को आँख के सामने रखने से पिताजी उनके सुख दुख पे नज़र रख सकते थे.

पूजा नेहा नीता अपने नये घर मे अपने गाँव मे रहने से काफ़ी दिनो बाद खुश हो गयी.

बेटियो को सेट्ल करते ही पिताजी ने छोटू से दूसरी शादी की बात की.

पिताजी-छोटू तुम्हें दूसरी शादी करनी होगी

पिताजी के कहते ही छोटू ने इतना कहा

छोटू-सुमन

पिताजी-उसे कोई प्राब्लम नही है,

छोटू ने सुमन की तरफ देखा और शादी के लिए हाँ कर दी.

छोटू को यकीन नही हो रहा था की सुमन ने हाँ कहा

छोटू को सुमन पर बहुत गुस्सा आया

पर माँ के लिए छोटू भी खुशी खुशी घोड़ी चढ़ने को तय्यार हो गया

पिताजी ने छोटू की शादी एक ग़रीब लड़की से कर ने का सोचा

बड़े घर की देखी तो वो सुमन केसाथ अड्जस्ट नही कर पाएगी.

बिना वजह बहू मे झगड़ा हो जाएगा .

पिताजी ने छोटू के लिए सीमा को सेलेक्ट किया

हंसमुख ,चंचल, सिंपल सी ,छोटी छोटी बातों पे मस्ती करने वाली सीमा के लिए छोटू का रिश्ता लेकर पिताजी उसके गाँव गये.

सीमा को झगड़ा करना क्या होता है पता नही था

हँसते रहना और सबको हसते रहना यही सीमा को आता था

इस लिए पिताजी ने सीमा की छोटू के लिए पसंद किया

इतने बड़े घर का रिस्ता आते ही सीमा के पिता ने हाँ कर दी.

पिताजी ने बता दिया कि उनके बेटे की पहली शादी हो चुकी है.

सीमा के पिता को भी प्राब्लम नही थी , सीमा भी शादी के लिए तय्यार हो गयी.

पिताजी ने गाँव के मंदिर मे कुछ लोगो के सामने सिंपल तरीके से शादी कर दी.

छोटू के दिमाग़ मे क्या चल रहा था ,ये बस उसको पता था.

छोटू ने सीमा से शादी कर ली और सुहागरात मे सीमा को सोने नही दिया.

सीमा अपने पति से खुश हो गयी.

सुमन ने अपनी सौतन को बहन बनाने का सोचा.

जैसे शालिनी ने सुमन को सिखाया था वैसा सुमन करने वाली थी

जैसे शालिनी ने सुमन को अपनी बहन बनाया वैसे सुमन भी सीमा को बहन बना कर रखना चाहती थी

सुमन की बड़ी बहन ने उनको कभी बहन का प्यार नही दिया.वो प्यार सुमाम को शालिनी ने दिया
 
सुमन ने सीमा के आते ही उसका ख़याल रखना सुरू किया.

सीमा को बताया गया था कि सौतन बुरी होती है पर सुमन का प्यार देखते ही सीमा खुश हो गयी.

सुमन ने सीमा को घर की के देख कर उसका दिल जीत लिया

सीमा इतनी खुश थी कि वो दिन भर सुमन को दीदी दीदी कहते हुए बिता देती.

पिताजी अपनी बहू का प्यार देख कर टेन्षन फ्री हो गये.उनको लगा था कि 2सरी बहू आएगी तो घर मे झगड़े होगे पर सुमन ने सब अच्छे से संभाल लिया. अपने सुमन बहू को देख कर पिताजी को शालिनी बहू की याद आ गयी.

सुमन छोटू को सीमा के पास ज़्यादा रहने को कहती .जिस से छोटू गुस्सा हो जाता.

छोटू गुस्से मे अपने दोस्तो के पास जाने लगा.

सुमन के आते छोटू ने दोस्त से रिस्ता तोड़ दिया था

पर अब पता नही छोटू के दिमाग़ मे क्या चल रहा था जो वो वापस अपने दोस्तो के पास जाने लगा

भोला ने छोटू को सलाह दी कि दोनो के साथ एक एक रात बिताया कर

छोटू ने वैसा ही करना सुरू किया.पर वो फिर से दोस्तो के साथ रहने लगा.

पिताजी ने इस बात पे ध्यान नही दिया. वो बस खूसखबरी सुन ने का इंतज़ार कर रहे थे.

उधर शालिनी ने जयसिंघ को माँ की डेत के सदमे से बाहर निकालना सुरू किया

जयसिंघ को अपनी माँ की डेत की वजह से ऐसा झटका लगा कि उस ने घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था.

पर शालिनी ने हिम्मत नही हारी ,अगर वो कमज़ोर पड़ जाती तो जयसिंघ और अवी का क्या हो जाता.

शालिनी ये सुनकर खुश हुई कि पूजा नेहा और नीता गाँव मे रहने आ गयी है.

शालिनी ने जो कभी सोचा नही था वो हुआ.उसकी ननंद खुशी खुशी गाँव मे रहने लगी थी.

शालिनी अपनी ननंद और सुमन के फ़ैसले से खुश हुई. छोटू की दूसरी शादी के बाद वो सीमा को देखना चाहती थी पर वो गाँव कैसे जाती.

जयसिंघ को अकेला छोड़ना रिस्की था

शालिनी के पिता और ना ने उसकी बहुत मदद की, जयसिंघ धीरे धीरे नॉर्मल हो रहा था.

6महीने मे जयसिंघ एक भी बार कंपनी मे नही गया था.

उस दिन जो मीटिंग थी उसका कांट्रॅक्ट मिलते ही उसके 2 दिन बाद कुमार विदेश चला गया .अजीत यहाँ की कंपनी को देख रहा था.

कुमार के विदेश जाने से उसके लिए अच्छा हुआ .अजीत ने भी इधर सब संभाल लिया था.

शालिनी ने जयसिंघ को नॉर्मल करने मे दिन रात एक कर दिया.

जयसिंघ धीरे धीरे ठीक हो गया.

जयसिंघ के ठीक होते ही शालिनी की खुशी का कोई ठिकाना नही था

जयसिंघ ने ठीक होते शालिनी से पिताजी के बारे में पूछा.

जयसिंघ-पिताजी कैसे है

शालिनी-वो ठीक है.

जयसिंघ-नेहा ,वो कैसी है.

नेहा के शादी के बाद पहली बार जयसिंघ ने नेहा के बारे में पूछा था

जयसिंघ सब कुछ भूल कर नेहा के साथ पुराना रिस्ता सुरू कर देना चाहता था

शालिनी-वो भी ठीक है. अब वो गाँव मे रहती है.

जयसिंघ-गाँव मे

शालिनी-हाँ, पिताजी ने उनके लिए गाँव मे घर बनाया है. पूजा और नीता भी वही रहती है

जयसिंघ-सब खुश है ना

शालिनी-हाँ, छोटू की दूसरी शादी हुई है. सीमा के साथ. अच्छी है वो

जयसिंघ-तुम मिली थी.

शालिनी-नही पर सुना है सुमन ने उसको घर मे खास जगह दी है.

जयसिंघ-चलो हम भी गाँव चलते है.

शालिनी-पिताजी का गुस्सा अभी शांत नही हुआ

जयसिंघ-कब होगा. मैं उनसे माफी माँग लूँगा.मैं.नेहा से माफी माँग लूँगा , वो जो कहेगे वो करूँगा , मैं गाँव मे भी रह लूँगा , मुझे पिता जी के पास जाना है

शालिनी-अभी आपको कोई माफ़ नही करेंगे ,हम मेले मे जाएँगे, शायद बात बन जाए

जयसिंघ-ठीक है. मैं नया काम ढूँढने जा रहा हू.

शालिनी-कंपनी मे नही जाओगे

जयसिंघ-पिताजी को जो पसंद नही है वो मैं नही करूँगा. मैं नयी जगह काम करूँगा.कुमार और अजीत से सारे रिस्ते तोड़ दूँगा , उनकी शकल भी देखूँगा

शालिनी-ये आपने सही सोचा.

जयसिंघ-तुम मेरे साथ हो ना

शालिनी-मैं तो हमेशा आपकी साथ थी. और रहूंगी

शालिनी अपने पति के नये फ़ैसले से खुश थी.

शालिनी को लगने लगा कि जयसिंघ के बदले हुए रूप से पिताजी का गुस्सा कम हो जाएगा .

जयसिंघ ने नया काम ढूँढ लिया.और कंपनी से दूर रहने लगा. पर उसके शेयर 40 %थे.

अजीत को ये बात हजम नही हुई. उसे लग रहा था कि जयसिंघ ने अपने शेयर माँग लिए तो.

जो होगा सो होगा .अब तो जयसिंघ दूसरे काम मे लग गया था.

शालिनी अपने पति के साथ खुश रहने लगी.

अवी ने कई बार अपने दादाजी के बारे में पूछा तो शालिनी ने उसे बता दिया कि हम जल्दी गाँव जाएँगे.

अवी का मन बहलाने के लिए शालिनी ने अवी को एक बुक बनाकर दी " माइ फॅमिली " नाम से. जिसमे पूरी फॅमिली के फोटो लगा दिए.

ऐसे दिन निकलते गये.

नेहा अपने नये घर मे खुश थी.

सुमन सीमा को घर मे अपनी बहन की तरह रखने लगी .जिस से पिताजी खुश थे.

अपने पति का नया रूप देख कर शालिनी खुश थी.
 
फ्लॅशबॅक 1041

पिताजी सीमा से खुशख़बरी सुन ने का इंतज़ार कर रहे थे

शादी को 1 साल हो गया पर पिताजी को खुशख़बरी नही मिली.

पिताजी छोटू को बार बार पूछते क्या हो रहा है. छोटू क्या कहता ,वो पिताजी के बार बार पूछने से परेशान हो गया.

छोटू इतना परेशन हो गया की वो कुछ रात तो घर ही नही आया.

सुमन को छोटू की फिकर होने लगी

छोटू बाप नही बन रहा उस ने छोटू क्या करता

पिताजी को तो बस माँ का सपना पूरा करना था , छोटू को बाप कहने वाले को देखना था पिता जी को

छोटू कुछ दिनो तक घर ही नही आया

फिर तो पिताजी ने छोटू को परेशान करना बंद किया.

पर छोटू ने अपना गुस्सा सीमा पर निकालना सुरू किया.

छोटू को भी अपनी माँ की इच्छा पूरी करनी थी

सीमा के माँ ना बन ने से छोटू इसका ज़िम्मेदार उस को मान रहा था

पिताजी ठंडे दिमाग़ से काम ले रहे थे. अपनी बेटियो को इस बात का ज़्यादा पता नही चलने दे रहे थे.

सुमन सीमा को होसला दे रही थी कि वो माँ ज़रूर बनेगी.

फिर से कुछ साल बीत गये.

छोटू सीमा के माँ ना बन ने से गुस्से मे रहने लगा.

पिताजी समझ गये कि कुछ प्रॉब्लम ज़रूर होगी.

पिताजी छोटू से बात करके उसे और परेशान नही करना चाहते थे.

पर पिताजी माँ की इच्छा पूरी करना चाहते थे.ऐसे मे वो छोटू के बारे में कुछ सोचते रहते थे

नेहा सब कुछ भूल कर अपनी बेटियो के साथ खुशी खुशी अपने नये घर मे रह रही थी.

नीता नेहा के साथ रहने से खुश तो थी और साथ मे गाँव मे रहना उसे अच्छा लग रहा था.

पूजा भी गाँव मे रह कर खुश हो गयी. पूजा की सहेली मंदा उस से रोज मिलने आती थी.

कभी कभी राकेश भी अपनी बहन के साथ पूजा से मिलने आ जाता.

पूजा राकेश को देख कर पिछले दिनो को याद करके उसकी खिचाई लेती थी.

पूजा की सहेली अभी भी अपने भाई राकेश के साथ चुदाई करती थी.

अपनी सहेली मंदा की बाते सुनकर पूजा का दिल चुदाई करने का करता था. पर वो कंट्रोल कर लेती.रमेश उस से दूर था और पूजा को ऐसे मे बड़ी मुश्किल होती थी

पर पूजा को शालिनी भाभी की बात याद आती कि कंट्रोल करना

रमेश के ना होने से पूजा बड़ी मुश्किल से कंट्रोल करती थी.पर सहेली के जाते ही उंगली ज़रूर करती थी.

पूजा अपनी भाभी की बात मान कर कंट्रोल कर रही थी. पर पूजा को पता था कि वो ज़्यादा दिन कंट्रोल नही रख पाएगी.

देखते देखते रमेश को दुबई गये हुए 3 साल हो गये.

रमेश साल मे 1 महीने के लिए घर ज़रूर आता था फिर भी 3साल बाद अग्रीमेंट ख़तम होते ही पूजा ने पूरी कसर निकालनी सुरू की.

3 दिन तक ना पूजा घर से बाहर निकली और ना रमेश को बेडरूम से बाहर निकलने दिया.

स्वेता सीतल को भी ज़्यादा रमेश के साथ खेलने नही दिया.

3 दिन के बाद पूजा ने चैन की सास ली. और रमेश को आज़ाद किया.

पूजा-अब मैं आपको जाने नही दूँगी.

रमेश-वहाँ दुबई मे पैसे अच्छे मिलते है.

पूजा-मुझे कुछ नही सुन ना

रमेश-2 साल मैं यही रहूँगा. फिर दुबई का अग्रीमेंट साइन करूँगा.

पूजा-2 साल के बाद भी नही जाने दूँगी.

रमेश-लंबा अग्रीमेंट नही करूँगा1 या 2 साल के लिए जाउन्गा .फिर तो जाने दोगि ना.

पूजा-नही.

रमेश-देखो ऐसे अच्छे अच्छे ड्रेस कैसे लाउन्गा मैं तुम्हारे लिए.

पूजा-इस नाइटी से तो सब कुछ दिख रहा है.

रमेश-इसी मे तो मज़ा है. तुम्हें पसंद नही आया.

पूजा-इसमे हवा बहुत लग रही है. पर अच्छा है ,नंगी सोने से ये पहन कर सोने मे ज़्यादा मज़ा आएगा.

रमेश-क्या अब मैं अपने बच्चो के साथ खेल सकता हूँ

पूजा-दिन मे उनके साथ और रात मे मेरे साथ खेलना,

रमेश ने शहर2 की कंपनी से शहर की कंपनी मे ट्रान्स्फर कर लिया.

सुरेश और जतिन रमेश को अपना बड़ा भाई मानते थे ऐसे मे उन्होने भी वैसा ही किया.

जिस तरह पूजा रमेश के आते ही उसको प्यार करने लगी. वैसे ही नेहा और नीता ने भी अपने अपने पति को आते ही प्यार करना सुरू किया.

नेहा सुरेश के आने से काफ़ी खुश रहने लगी.

नीता और जतिन तो पति पत्नी कम फ्रेंड ज़्यादा थे. जब पति पत्नी फ्रेंड होते है तो एक दूसरे को अच्छे से समझते है.

अपने दामाद के आने से अपनी बेटियो के चेहरे पे खुशी देख कर पिताजी को अच्छा लगा.

पिताजी ने अपनी बेटियो को खुश रखा पर अपने बेटो के वजह से पिताजी हमेशा परेशान रहते थे

पिताजी ठाकुरजी के साथ जाकर अपना दुख बाँट लेते थे.

पिताजी ने ठाकुरजी की जान बचा कर जो मदद की थी उस से ठाकुरजी ने पिताजी को अपना भाई मान लिया था.

दोनो एक दूसरे की मदद करते थे

ऐसे मे ठाकुरजी पिताजी के बुरे वक्त मे उनके साथ कैसे ना रहते.

पिताजी अवी को कितना याद करते थे ये सिर्फ़ ठाकुरजी जानते थे .

पर जो हुआ उसके बाद पिताजी जयसिंघ का चेहरा देखना भी पसंद नही करते थे.

ऐसे मे छोटू के बाप ना बनने से वो अवी को और ज़्यादा याद करके रोते रहते थे.

सुमन ने सीमा को ऐसे मुश्किल समय मे पूरा सपोर्ट किया.

सीमा तो कुँए मे कूद कर जान देना चाहती थी पर सुमन ने उसको रोक लिया.

सुमन सीमा के दर्द कम करने की पूरी कोशिश करती रहती थी.

सुमन के प्यार की वजह से सीमा ने सुमन को अपना सब कुछ मान लिया.

सीमा सुमन के प्यार से कुछ हद तक नॉर्मल होकर सुमन जैसा कहती वैसा करती जाती.

सीमा ने सुमन को अपने वजह से दुखी करना बंद किया .और छोटू की बाते चुप चाप सुन लेती.

ऐसे मे वो दिन भी आ गया जिसके लिए पिताजी और ठाकुरजी इंतज़ार करते थे.

गाँव मे मेला लगने वाला था
 
फ्लॅशबॅक 1042

गाँव मे मेला होने वाला था.

पिताजी का ये पहला मेला था जब वो माँ के बिना पूजा करने वाले थे.

पिताजी इस मेले का इंतज़ार इस लिए कर रहे थे कि भगवान से छोटू के लिए बच्चा माँग सके.

मेले की तय्यारी 1 महीना पहले से सुरू हो गयी.

मेले की वजह से पिताजी हवेली मे ज़्यादा रहने लगे.

माँ को भुलाने के लिए पिताजी अपना ध्यान दूसरी तरफ करने लगे

ऐसे मे एक लड़की ऐसी थी जिसकी चुदाई पिताजी ने अकेले की

चुदाई करने के बाद उस लड़की ने ध्यान नही रखा और ठाकुरजी होते तो ध्यान ज़रूर रखते ,पर पिताजी ने अकेले चुदाई की तो वो प्रेग्नेंट हो गयी.

पिताजी ये खबर सुनते टेन्षन मे आ गये. छोटू को बेटा नही हो रहा था और वो इस उमर मे फिर से बाप बन गये.

कुवारि लड़की होने से पिताजी डर गये

पिताजी ये बच्चा गिराना चाहते थे पर वो लड़की इसके लिए तय्यार नही थी.

पिताजी ने उस लड़की को समझाया पर वो कुछ सुन नही रही थी.

ऐसे मे पिताजी ने उसको मेले तक रुकने को कहा .मेले के बाद पिताजी ने कोई रास्ता निकालने का सोचा.

वो लड़की मेले तक रुक गयी .फिर पिताजी वापस मेले का काम करने लगे

नेहा नीता और पूजा मेले के लिए काफ़ी खुश थी. क्यूँ कि उनके पति मेले मे उनके साथ रहेंगे.

मेले मे पिताजी की मदद उनके दामाद भी कर रहे थे.

मेले का इंतज़ार शालिनी भी कर रही थी.

जयसिंघ ने भी मेले के लिए छुट्टी ले ली.

शालिनी मेले मे अवी के ज़रिए पिताजी का जयसिंघ के लिए जो गुस्सा है उसको कम करना चाहती थी

शालिनी पूरी तय्यारी के साथ मेले मे जाना चाहती थी.

पिताजी मेले का काम मन लगा कर कर रहे थे.

सुमन का ये पहला मेला था ,और पूरे घर की ज़िम्मेदारी उसपर थी.

जिस से सुमन को काफ़ी कसरत करनी पड़ रही थी.

ऐसे मे पिताजी उसको गाइड कर रहे थे. पर मेले के 2 दिन पहले पिताजी हवेली पर ज़्यादा देर तक रुक गये.

सुमन मंदिर मे पूजा के बारे में अपनी ननंद को पूछ रही थी पर उनको भी ज़्यादा पता नही था.जितना था वो तो पिताजी ने सुमन को बता दिया था.

ऐसे मे सुमन हवेली चली गयी पिताजी से पूछने के लिए

सुमन ने हवेली जाकर पिताजी को ठाकुर के साथ औरतों के साथ देख लिया.

सुमन पिताजी को ऐसे देख कर शॉक्ड हो गयी. पर पिताजी के मूह से माँ का नाम सुनकर सुमन समझ गयी कि पिताजी को माँ की कितनी याद आ रही है.

पिताजी सबकी चुदाई माँ को याद करके करते थे

सुमन ने पिताजी से बात छुपा कर रखी कि उसने पिताजी और ठाकुरजी को देख लिया है.

पर सुमन ने पूजा से एक बार ऐसे पूछ कर देखा तो ,सुमन को पता चल गया कि पूजा को भी थोड़ा बहुत पता है.

पिताजी जिस समय से गुजर रहे थे ऐसे मे सुमन पिताजी के दर्द को समझ सकती थी.

सुमन ने चुप रह कर मेले की पूजा की तय्यारी करनी सुरू की.

उसके बाद सुमन ने हवेली जाना बहुत कम कर दिया.

और वो दिन भी आ गया जिसका सबको इंतज़ार था.

मेले सुरू हो गया. मेले के पहले दिन का सबको इंतज़ार होता है.

पिताजी को भी इसका इंतज़ार था.पर मेले मे पहली पूजा जोड़ी मे करनी पड़ती है.

माँ के जाने से पिताजी किसके साथ पूजा करेंगे. अपनी बहू के साथ नही, क्या छोटू को पूजा करने देनी चाहिए पर जयसिंघ आ गया तो लोग क्या कहेंगे बड़ा बेटा होते हुए भी छोटा बेटा पूजा करेगा.

पिताजी ने अपनी बेटी के साथ पूजा करने का फ़ैसला किया. रिश्तेदार के साथ पूजा की जा सकती थी.

पिताजी ने अपनी तीनो बेटियो के साथ पूजा करने का डिसाइड किया.

पिताजी पूरी फॅमिली के साथ मंदिर मे चले गये.

मंदिर मे ठाकुरजी अपनी फॅमिली के साथ पिताजी का इंतज़ार कर रहे थे.

पिताजी के आते ठाकुरजी मंदिर मे चले गये.

मंदिर मे जाते ही पिताजी की नज़र जयसिंघ और शालिनी पे पड़ी जो पूजा करने आए थे.

जयसिंघ और पिताजी के बीच मे क्या हुआ है किसी को पता नही था ,उनके दामाद को भी पता नही था

अवी अपने दादाजी को देखते ही उनके पास जाने की ज़िद करने लगा.

शालिनी पिताजी के कहे बिना कुछ नही करने वाली थी.

दर्द दोनो तरफ होना चाहिए ये शालिनी सोचा था

पिताजी माँ के जाने का दर्द को अवी के बिछड़ने के दर्द से ख़तम करना चाहती थी

.शालिनी दर्द से दर्द को ख़तम करना चाहती थी

शालिनी और जयसिंघ पिताजी की तरफ देखते हुए माफी माँग रहे थे

पिताजी अवी को देखते ही एक मिनिट के लिए सब भूल गये थे .पर जयसिंघ को देखते ही पिताजी का दिल पत्थर का हो गया.

पिताजी ने जयसिंघ और शालिनी को ऐसे नज़र अंदाज़ कर दिया जैसे वो उनके कोई ना हो.

पर शालिनी एक अच्छी बहू की तरह घर की बाते बाहर ना जाए इस लिए सुमन के बाजू मे जाकर खड़ी हो गयी.

रमेश अपने साले को देखते ही उसे से बाते करने लगा.

जयसिंघ को अच्छा लगा कि उसके जीजाजी उस पे नाराज़ नही है.

पर नेहा जयसिंघ को देखते ही गुस्सा हो गयी पर शालिनी भाभी के प्यार ने उसे कंट्रोल मे रखा.

शालिनी को देखते ही हर कोई खुश था.

पर जयसिंघ को देख कर नेहा गुस्से मे थी. पूजा समझदार बनते हुए समझ गयी कि इस मे भैया की ज़्यादा ग़लती नही थी. .नीता भी उसको एक आक्सिडेंट मानती थी.

पिताजी का मन हो रहा था कि अवी के साथ पूजा करे पर वो किसी को कैसे कह सकते थे

ठाकुरजी पिताजी के दिल की बात समझ गये .

ठाकुरजी ने शालिनी के पास जाकर अवी को अपने साथ ले कर पिताजी के पास खड़ा कर दिया.

अवी ने अपने दादाजी का हाथ पकड़ लिया

अवी के प्यार ने पिताजी के पत्थर दिल मे प्यार जगा दिया

पिताजी ने अवी को अपने पास ले लिया और पूजा करनी सुरू की.

पिताजी को अवी के साथ पूजा करते हुए देख कर शालिनी और जयसिंघ को अच्छा लगा.

पिताजी ने अवी को अपने साथ रख कर अपनी बेटियो के साथ मिलकर पूजा की.

शालिनी को उम्मीद थी कि उसका बेटा अवी अपने पापा के दिए हुए दर्द को अपने प्यार से भर देगा.
 
फ्लॅशबॅक 1043

पिताजी अपने पोते के साथ मंदिर मे पूजा करके माँ के जाने के बाद पहली बार इतने खुश हुए

शालिनी सुमन के साथ बात करने लगी.

सुमन-भाभी कैसी है आप

शालिनी-मैं ठीक ,तू बता तू कैसी है घर कैसा है

सुमन-मैं भी ठीक हूँ ,और पिताजी भी अच्छे है.

शालिनी-तूने घर को अच्छे से संभाला है

सुमन-आप होती तो ,घर को और अच्छे से संभालती.

शालिनी-मैं जल्दी आउन्गि. तब तक तुम ऐसे फॅमिली का ध्यान रखना

सुमन-जी भाभी.

शालिनी-वैसे सीमा कहाँ है.

सुमन-भाभी ये है सीमा, सीमा ये है शालिनी भाभी,

सीमा ने शालिनी के पैर छु लिए.

शालिनी-हम बहनें है. और बहनें गले लगती है.

शालिनी ने सीमा को गले लगा लिया

सीमा-दीदी आपने जैसा बताया शालिनी भाभी उससे भी अच्छी है.

सुमन-इसी लिए तो सब इनको इतना प्यार करते है.

शालिनी-ऐसा कुछ नही है. तो सीमा हमारी फॅमिली कैसी लगी.

सीमा-सब बहुत अच्छे है. खास करके सुमन दीदी,वो भी अच्छे है पर

शालिनी-सीमा भगवान पर भरोसा रखो ,सब ठीक हो जाएगा . और सुमन है ना

सीमा-सुमन दीदी है तभी तो मैं जिंदा हूँ वरना

शालिनी-सीमा ऐसा नही सोचते , मैं आउन्गि तो सब ठीक कर दूँगी.

सुमन-भाभी आप जल्दी अपने घर वापस आ जाओ ना, आपके बिना घर खाली खाली लगता है

शालिनी-जल्दी ही हम साथ होंगे.

पिताजी अपनी बहू शालिनी को सुमन के साथ गले लगते हुए देख कर सोचने लगे कि उन्होने पिछले जनम मे कोई अच्छा काम किया होगा तभी शालिनी जैसी बहू मिल गयी.

पूजा होते ही पिताजी अवी के साथ वहाँ से चले गये.

शालिनी ने अवी को पिताजी के साथ जाने दिया और नेहा नीता के साथ बाते करने लगी.

नेहा तो अपनी भाभी के गले लग कर रोने लगी.

शालिनी-तू ऐसे रोएगी तो मैं वापस जाउन्गी.

नेहा-मैं आपको कही जाने नही दूँगी.

शालिनी-तो अपने पिताजी को बोलना अवी के पापा को माफ़ कर दे

नेहा भैया के बारे में सुनते ही वहाँ से जाने लगी

शालिनी-नेहा

नेहा-भाभी मैं भैया को कभी माफ़ नही करूँगी.

शालिनी-तुम्हारे भैया बदल गये है.

नेहा-वो कभी बदल नही सकते

शालिनी-मेरी बात पे विश्वास नही है तुम्हें

नेहा-आप पे जान से ज़्यादा विश्वास करती हूँ पर भैया पे नही.

शालिनी-मेरे लिए

नेहा-आप मेरी जान माँग लो मैं हँसते हुए दे दूँगी. पर उनको माफ़ नही कर सकती.

शालिनी-माफ़ नही कम से कम एक बार उनके तरफ देख तो लो, उनको अच्छा लगेगा ,मेरे लिए

नीता-मैं हूँ ना भाभी ,मैं नेहा का गुस्सा ख़तम कर दूँगी.

शालिनी-तुम मेरा ये काम कर दो ,मैं ज़िंदगी भर तेरे अहसान नही भूलूंगी.

नीता-माँ के बाद मैं ने आप को मा माना है. मैं आपके लिए इतना तो कर ही सकती हूँ

शालिनी-पूजा तुम कैसी है

पूजा-आपको मैं याद तो रही वरना लगा कि नेहा नीता के चक्कर मे मुझे भूल ही गयी.

शालिनी-तुझे कैसे भूल सकती हूँ, आ मेरे गले लग जा ,

पूजा अपनी भाभी के गले लग गयी.

शालिनी-मुझे अपना घर नही दिखाओगी.

नेहा-पहले मेरा घर,

शालिनी जयसिंघ के पास चली गयी.

शालिनी-मैं पूजा के घर जाकर आती हूँ

जयसिंघ-तुम जाकर आओ मैं यही रुकता हूँ.

शालिनी-आप भी चलते तो

जयसिंघ-तुम जाओ मैं यही रुकता हूँ.

शालिनी अपनी ननंद के साथ उनके घर चली गयी.

जयसिंघ मंदिर मे बैठ कर अपने गुनाह का पश्चाताप करने लगा.

अपने साले को ऐसा अकेला मंदिर मे बैठा हुआ देख कर रमेश उसके पास आ गया.

रमेश-तुम यहाँ क्या कर रहे हो घर चलो

जयसिंघ-कुछ देर मंदिर मे बैठना चाहता हूँ.

रमेश-मंदिर मे फिर कभी बैठ लेना. चलो घर

जयसिंघ-जीजाजी आप समझ नही रहे है.

रमेश-मैं सब समझता हूँ. उस शादी मे जो हुआ उसको भूल जाओ, और चलो ,मेरे साथ

रमेश-सुरेश

रमेश-देखो तुम्हारी वजह से साले साब घर नही आ रहे हैं

सुरेश-अभी तक नेहा से गुस्सा हो, नेहा की तरफ से मैं तुमसे माफी माँगता हूँ.

जयसिंघ-ये आप क्या कर रहे हो ,माफी तो मुझे माँगनी चाहिए, जो हुआ मेरे वजह से हुआ है.मुझे माफ़ कर दो

सुरेश-कर दिया .चलो अब

रमेश-देखो ,सुरेश ने एक झटके मे माफ़ कर दिया

जयसिंघ समझ गया कि सुरेश को कुछ पता नही है. जयसिंघ ने चुप रहना सही समझा.

जयसिंघ-आप अच्छे हो. आपके साथ नेहा बहुत खुश होगी.

सुरेश-तुम खुद चल के देख लो

जयसिंघ-नही, मैं यही ठीक हूँ.

जतिन-अपने जीजाजी को नाराज़ कर रहे हो.

रमेश-चलो ,अब बहुत हो गया. जतिन इसका हाथ पकडो उठा के ले जाएँगे

जयसिंघ-(इसी बहाने से नेहा से बात कर लूँगा,और माफी माँग लूँगा) मैं चलता हूँ

रमेश-ये हुई ना बात

जयसिंघ अपने जीजाजी के साथ उनके घर जाने लगा.

रमेश सुरेश को असली बात पता नही थी वरना जयसिंघ को अपने साथ लेकर नही जाते.

जाने दो कुछ भी हो ,जयसिंघ और नेहा का आमना सामना तो होगा.

पिताजी ने जयसिंघ को सुरेश के साथ उसके घर जाते हुए देख कर चुपके से देखने लगे.

अवी भी अपने दादाजी जैसे छुप कर देखने लगा

अवी- दादाजी हम छुप क्यूँ रहे हैं

पिताजी- हम लूका छुपी खेल रहे है छुप जाओ

शालिनी नेहा के घर मे बैठ कर सब कुछ भुला कर बाते कर रही थी.

नेहा अपनी भाभी के आने से काफ़ी खुश थी.

शालिनी सोच रही थी कि नेहा की नफ़रत कम कैसे करे

ऐसे मे सुरेश की आवाज़ सुनकर सब गेट की तरफ देखने लगे

गेट पर सुरेश के साथ जयसिंघ को देख कर सब शॉक्ड हो गये. शालिनी तो खुश हो गयी क्यूँ कि सुरेश जयसिंघ को लेकर आया था

नेहा जयसिंघ को देखते ही गुस्सा होकर अंदर जाने लगी

सुरेश-नेहा रूको

नेहा सुरेश की बात सुनकर रुक गयी.

सुरेश-किस बात का कितना गुस्सा है. ये तुम्हारा भाई है. भाई पे कोई गुस्सा थोड़े ही होते है.

सुरेश के मूह से ये बात सुनकर सब के चेहरे देखने लायक थे.

शालिनी बात को समझने की कोशिश कर रही थी.

नेहा और पिताजी को कुछ समझ नही आ रहा था.कि दामाद जी ने ऐसा क्यूँ कहा

सुरेश-नेहा अब गुस्सा थूक भी दो

नेहा पूजा की तरफ देखने लगी. सुरेश क्या बोल रहा है. इनको कैसे पता चला जयसिंघ ने माँ को मारा है

सुरेश-उस बात को इतने दिन हो गये फिर भी तुम वही बात पकड़े हुई हो

नेहा-आपको कुछ पता नही है.

सुरेश-मुझे पता है, तुम उस शादी के दिन जो हुआ उसके वजह से नाराज़ हो. उस बात को इतने दिन हो गये .अब भूल जाओ,माफ़ कर दो जयसिंघ को, देखो जयसिंघ भी माफी माँगने आया है

शालिनी सुरेश की बात सुनकर निराश हो गयी. उसको लगा था कि नेहा सुरेश की बात सुनकर जयसिंघ को माफ़ कर देगी.

पर सुरेश को तो कुछ पता नही है. कुछ भी हो कम से कम नेहा सुरेश की बात तो मान लेगी.शादी के दिन के लिए सही नेहा का गुस्सा कम तो होगा.

पिताजी समझ गये कि दामाद को कुछ पता नही है. वो तो नेहा की शादी की बात कर रहे है.

सुरेश-नेहा मैं ने क्या कहा सुना नही तुम ने, बात करो जयसिंघ से

नेहा जयसिंघ की तरफ गुस्से से देख रही थी.

पिताजी नही चाहते थे कि जयसिंघ को लेकर नेहा और सुरेश मे झगड़ा हो

सुरेश-नेहा ,

नेहा रोने लगी.

जयसिंघ-जाने दीजिए ,ग़लती मेरी थी ,नेहा हो सके तो मुझे माफ़ कर देना ,मैं माफी के काबिल नही हूँ फिर भी हो सके तो मुझे माफ़ करना.

नेहा ने जयसिंघ की तरफ देख कर अंदर भाग गयी और रोने लगी.

सुरेश-तुम टेन्षन मत लो ,मैं नेहा का गुस्सा कम दूँगा

जयसिंघ ने सुरेश को गले लगा लिया.

नेहा ने रोने के बाद किचेन से 2 कप टी लेकर आई और टेबल पर रख दी.और वापस अपने कमरे मे चली गयी

सुरेश-लो नेहा के हाथ की टी पी लो, और गुस्सा ख़तम करो

जयसिंघ नेहा के हाथ की टी पीने लगा.

पहला सीप पीते ही जयसिंघ को टी मे नेहा के आसू का पता चल गया.

जयसिंघ ने इसको नेहा की माफी समझ कर उसका गुस्सा टी के साथ पी कर ख़तम किया

जयसिंघ और शालिनी को लगने लगा कि नेहा के दिल से जयसिंघ के लिए नफ़रत धीरे धीरे कम हो सकती है.

जयसिंघ अपनी बहन के हाथ की टी पी के अपने ग़लती की कड़वी चाइ पीने लगा

शालिनी भी इस बात से खुश थी. नीता भी नेहा के लिए खुश थी.

पर पिताजी को डर लग रहा था कि नेहा और सुरेश के बीच मे इसके लिए झगड़ा ना हो.

क्यूँ कि जयसिंघ को नेहा नाफ़ नही करेगी

ऐसे कही ऐसा ना हो जाए कि सुरेश और नेहा के बीच बात बढ़ जाए

अभी तो सब ठीक हुआ है ऐसे मे अगर फिर से कुछ हो गया तो

नेहा अभी तो सुरेश के आने से खुश रहने लगी है ऐसे मे अगर उनमे जयसिंघ की लिए बात ज़्यादा बिगड़ गयी तो

इस बात का डर सबको था

यहाँ तक कि जयसिंघ को भी लग रहा था कि अब वो अपनी वजह से कुछ बुरा नही होने देगा

पर इस तरह सुरेश की बात ना मानना सबके सामने , मुश्किल बढ़ा सकती थी

पिताजी जयसिंघ को नेहा से दूर रखना चाहते थे. अभी तो नेहा कुछ हद तक ठीक हुई है ऐसे मे जयसिंघ की वजह से फिर से कुछ गड़बड़ होने नही देना चाहते थे

सुरेश को अगर पूरी बात पता होती तो वो ऐसा नही करता ,

सुरेश को उस बात का पता नही चलना चाहिए

पिताजी ने सोच लिया कि अब नेहा को जयसिंघ की वजह से रोने नही देंगे

पिताजी-जयसिंघ मेरे साथ चलो

अपने पिताजी के मूह से अपना नाम सुनकर जयसिंघ खुश हो गया.

जयसिंघ-जी पिताजी, जीजाजी मैं आपकी टी को कभी नही भूलूंगा. आप ने ये टी पिला कर मुझे जीने की एक उम्मीद दी है.

सुरेश-ये कैसी बाते कर रहे हो

जयसिंघ ने सुरेश को गले लगा लिया .साथ मे रमेश हो जतिन को भी.

जयसिंघ-कोमल इधर आओ

कोमल-मैं नही आउन्गि

जयसिंघ-मेरे पास चॉक्लेट है.

कोमल जयसिंघ के पास आ गयी और जयसिंघ ने उसके सर पे किस किया.और अपने गले की गोल्ड की चैन कोमल को पहना दी. और कोमल को चॉक्लेट दिया.

नेहा गेट के पीछे छुप कर जयसिंघ को देख रही थी.

जयसिंघ ने एक एक करके सब को गले लगा लिया.

नीता और पूजा रोते हुए जयसिंघ के गले लग गयी.

पूजा के दिल मे थोड़ा गुस्सा था फिर भी पूजा जयसिंघ के गले लग गयी.रमेश था वहाँ पर शालिनी भाभी थी वहाँ पर उनके लिए जयसिंघ को माफ़ कर दिया पूजा ने

जयसिंघ आज खुश था. उसके फॅमिली ने कुछ हद तक उसे अपना लिया था.

फिर जयसिंघ और शालिनी पिताजी के पास गये.
 
फ्लॅशबॅक 1044

पिताजी नही चाहते थे कि जयसिंघ की वजह से फिर से नेहा की आँखो मे आसू आ जाएँ

नेहा और सुरेश मे झगड़ा हो

जयसिंघ जितना दूर रहेगा नेहा से उतना अच्छा होगा

क्यूँ की जब जब वो पास आए तो नेहा मे आँखो मे आसू ही आए

पिताजी ने जयसिंघ को अपने साथ बाहर चलने को कहा

जयसिंघ और शालिनी पिताजी के पास आ गये

पिताजी-तुम यहाँ से चले जाओ

जयसिंघ-पिताजी .अब मैं बदल गया हूँ.

पिताजी-तुम नही बदल सकते

जयसिंघ-मैं ने कुमार का साथ छोड़ दिया है. मैं उनके साथ नही रहता.

पिताजी-पर रहते तो वही हो

जयसिंघ-आप कहो तो मैं यहाँ आ जाता हूँ.हमेशा के लिए

पिताजी-ऐसा सोचना भी मत ,सुरेश को कुछ पता नही है और कुछ पता चलने भी नही देना चाहता. तुम्हारी वजह से नेहा और सुरेश मे झगड़े हो मैं ये नही चाहता, तुम यहाँ से चले जाओ

शालिनी-पिताजी वो बदल गये है

पिताजी-बहू भगवान के लिए यहाँ से चली जाओ,

जयसिंघ-पिताजी मैं ने आजतक आपकी कोई बात नही मानी जिस से आपको हमेशा दुख पहुँचा है. आपको और दुखी नही देख सकता ,आप जैसा चाहेगे वैसा ही करूँगा.

जयसिंघ और शालिनी ने पिताजी के पैर छु लिए

अवी-दादाजी आपको तो कुछ पता नही है, पैर छुने पर उनके सर पे हाथ रखते है. माँ ने कहा है

पिताजी मे अवी की तरफ देखा ,

अवी की बात सुनते ही पिताजी की आँखो मे आसू आ गये

अवी से अपने बेटे बहू से दूर रहने के बारे में पिताजी सोच भी नही सकते आफ़िर भी अपनी बेटियो के लिए पिताजी को ये सब करना था

अवी ने पिताजी का हाथ पकड़ कर जयसिंघ के सर पे रखा .

अपने पिताजी का हाथ अपने सर पे महसूस करते जयसिंघ की आँखो के पानी आ गया.

पिताजी की आँखो से भी पानी निकल रहा था.

पिताजी ने अपने आसू पोछ लिए .

जयसिंघ ने पिताजी के आशीर्वाद को उन्होने माफ़ किया ऐसा समझ कर शालिनी और अवी के साथ वहाँ से निकल गया

पिताजी अपने पोते को जाते हुए देखते रहे जब तक वो आँख से ओझल नही हो गया.

अवी अपने दादाजी के पास जाने के लिए रो रहा था

पिताजी भी अवी के दूर जाने के लिए रो रहे थे

पर सब की भलाई इसी मे थी

छोटू अपने पिताजी को अपने पोते के लिए ऐसा रोता हुआ देख कर समझ गया कि पिताजी को जल्द से जल्द एक पोता चाहिए

पिताजी अवी के बिना नही रह पाएँगे ये छोटू ने देख लिया

छोटू समझ गया कि पिताजी ने उसकी दूसरी शादी क्यूँ करवाई थी , .और वो क्या चाहते थे

छोटू को अहसास हो गया कि पिताजी कितने दर्द बर्दास्त कर रहे है

छोटू ने पिताजी की आँखो के आसू देख लिए

माँ की इच्छा भी छोटू को पता थी

ऐसे मे छोटू ने फ़ैसला किया कि पिताजी को पोता दे कर रहेगा

छोटू ने अपने पिताजी को पोता देने का सोच लिया.

जयसिंघ और शालिनी के जाते ही पिताजी उस रात सो नही पाए.

पिताजी को पता था कि नेहा ने माँ के लिए जयसिंघ को माफ़ नही किया

बिना वजह सुरेश और नेहा मे बात आगे ना बढ़े इस लिए इस बात को यही ख़तम करना ठीक समझा.

नेहा इतनी जल्दी जयसिंघ को माफ़ नही करेगी. और सुरेश नेहा पे प्रेसर डालेगा जो ठीक नही होगा.

इतने दिनो बाद नेहा की लाइफ अच्छी चल रही है ऐसे मे पिताजी जयसिंघ की वजह से फिर से गड़बड़ नही चाहते थे

जयसिंघ के अचानक जाने से सुरेश ने पिताजी से पूछा तो पिताजी ने कहा कि उसको एक ज़रूरी काम था. इस लिए चला गया.

पिताजी का गम तो सिर्फ़ माँ जानती थी .माँ के जाने बाद पिताजी किसके साथ अपना दर्द बाँट ते

पिताजी किसी ना किसी काम मे खुद को बिज़ी रखने लगे.

उधर नेहा अपनी भाभी के जाने से कुछ दिन उदास रही .सुरेश ने भी कुछ दिन नेहा से बात नही की

ये बात जब नीता से पिताजी को पता चली तो उन्होने बात की सुरेश से और समझा दिया

पूजा और नीता उस दिन काफ़ी खुश थी.

जयसिंघ और शालिनी के जाने के बाद पिताजी वापस खुद को मेले मे बिज़ी रखने लगे.

इधर छोटू ने सुमन से बात करनी सुरू की.

छोटू-सुमन

सुमन-जी

छोटू-तुम ने देखा पिताजी अवी के साथ कितने खुश थे

सुमन-हाँ

छोटू-मैं पिताजी को पोता देना चाहता हूँ.

सुमन-हम कोशिश कर रहे हैं

छोटू-मैं एक और शादी करने का सोच रहा हूँ.

सुमन-आप ऐसा कैसे सोच सकते हो

छोटू-सुमन पिताजी की हालत तो देखो,

सुमन-आपके इस फ़ैसले से पिताजी गुस्सा होगे

छोटू-मुझे बस तुम्हारी हाँ चाहिए,

सुमन-अगर फिर भी नही हुआ तो

छोटू-तो 4थ शादी करूँगा ,5थ करूँगा पर पिताजी को पोता देख कर रहूँगा, मैं पिताजी को अवी के लिए ऐसा रोता हुआ नही देख सकता ,

सुमन-जैसा आपको ठीक लगे वैसा कीजिए

छोटू-तुम मेरे फ़ैसले से नाराज़ नही हो ना

सुमन-आप पिताजी से बात कीजिए. मैं सीमा से करती हूँ

सुमन ने हाँ तो कर दी पर उसको पता था कि वो क्या करने जा रही है..सुमन के दिल मे क्या था कभी किसी ने पूछा ही नही.

छोटू के दिल मे क्या था वो भी किसी को पता नही था. पहले पिताजी के कहने पे दूसरी शादी की और अब खुद करने जा रहा था. पर वो अपने लिए नही पिताजी के लिए तीसरी शादी कर रहा था

पिताजी को जब छोटू ने बताया कि वो एक और शादी करना चाहता था.

पिताजी पहले तो छोटू की तरफ देखते रह गये.पिताजी ने मना कर दिया

फिर छोटू की ज़िद के सामने हाँ कर दी.

सुमन ने सीमा को मना लिया .सीमा ने सुमन दीदी के लिए हाँ कर दी.

पूजा ने थोड़ा विरोध दिखाया था पर वो भी अपने पिताजी को खुश देखना चाहती थी.

छोटू ने बताया कि वो पिताजी को खुश देखने के लिए शादी कर रहा है

पूजा ने छोटू की बात सुनते ही उसे गले लगा लिया , छोटू आज सही मायने मे बड़ा हो गया था

अपने घर अपने फॅमिली के बारे में सोच रहा था

पिताजी किसी से भी छोटू की शादी नही करवाने चाहते थे. वो अपनी फॅमिली मे झगड़े नही होने देना चाहते थे.

ऐसे मे मेले मे पिताजी की नज़र मीना पर पड़ी.

पिताजी मीना की फॅमिली को अपने घर ले आए.

मीना की फॅमिली को रहने के लिए जगह नही मिल रही थी. पिताजी उनको अपने घर लाकर मीना के नेचर को जान ना चाहते थे.

पिताजी को मीना का नेचर पसंद आगया. मीना जिस तरह बाते करती थी उस से उसकी समझदारी पता चलती थी.

मीना शालिनी जैसी ही थी

पिताजी ने मीना को पसंद कर लिया .और उनकी प्राब्लम को सॉल्व करके मीना का हाथ माँगने का सोचा.

पिताजी ने उस लड़की की शादी मीना के भाई से कर दी और मीना की शादी छोटू से कर दी.

मीना को सुमन ने वही प्यार दिया जो सीमा को दिया .और घर को टूटने नही दिया.

मीना अपने नये घर मे खुश थी. वो खुशी ढूँढना पसंद करती थी.

पिताजी ने छोटू की शादी की बात शालिनी को चिट्ठि लिख कर बता दी.

इस बार चिट्ठि शालिनी के नाम से नही जयसिंघ के नाम से लिखी थी पिताजी ने

पिताजी ने चिट्ठि के ज़रिए जयसिंघ से बात की

जयसिंघ था तो उनका बेटा ही

जयसिंघ ने जब कहा कि उसने सब छोड़ दिया तो और बदल गया है तो सबसे ज़्यादा खुशी पिताजी को हुई पर नेहा के वजह से पिताजी ने जयसिंघ को जाने को कहा

पर जयसिंघ की हिम्मत टूटे ना इस लिए चिट्ठि के ज़रिए बात करते रहे

पिताजी की चिट्ठी आने से जयसिंघ खुश हो गया .उस लगने लगा कि पिताजी ने उसे माफ़ कर दिया.

शालिनी पिताजी की चिट्ठि से खुश थी पर छोटू के शादी से खुश नही थी.

शालिनी ने सुमन को चित्ति लिख कर बताया कि इसके बाद छोटू को शादी करने मत देना. वो छोटू के लिए अच्छा नही होगा.

छोटू बाप ना बन ने से शादी करता जाएगा और एक दिन डेप्रेशन मे चला जाएगा .

सुमन शालिनी की बात समझ गयी. और इसके बाद छोटू न शादी ना करने देने का फ़ैसला किया.

मीना के आने से पिताजी को काफ़ी सहारा मिला.

मीता के तेज दिमाग़ से पिताजी को लगने लगा कि मीना घर को उनके जाने के बाद संभाल सकती है.

सुमन भी संभाल सकती है पर वो जल्दी इमोशनल हो जाती है . घर को संभालने के लिए हिम्मत चाहिए.

मीना के आने से सुमन को भी बहुत मदद होने लगी.

सीमा के आने से सुमन को ज़्यादा मदद नही मिली थी. पर मीना के आते ही सुमन के काम वही करने लगी.

मीना घर की देखभाल करने के साथ छोटू को मदद भी करती थी जिस से पिताजी काफ़ी खुश हुए

मीना ने 2 3 महीने मे सबको अपने प्यार मे ऐसा क़ैद किया की मीना को सब ने अपने घर का सदस्य मान लिया.

छोटू ने अपनी तीनो बीवियों के लिए टाइम निकालना सुरू किया.

छोटू को मीना से काफ़ी उम्मीद थी .और पिताजी के पास होने से छोटू मीना से थोड़ा डरता भी था

उधर शालिनी और जयसिंघ ने मेले से जाने के बाद वो शहर3 छोड़ने का सोचा.

पर वो 2 महीने पहले शहर3 नही छोड़ सकते थे. जयसिंघ का अग्रीमेंट था.

जयसिंघ जल्द से जल्द शहर3 छोड़ कर पिताजी को दिखाना चाहता था कि वो बदल गया है.

पिताजी की चिट्ठि आने से जयसिंघ को यकीन हो गया कि पिताजी उसको समझ रहे है.

ज्जायसिंघ ने अग्रीमेंट ख़तम होते ही शहर3 से जयपुर चला गया.

जयसिंघ ने पिताजी को बता दिया कि वो जयपुर मे रहने चला गया है.

पिताजी को अच्छा लगा कि उसका बेटा उनकी बात मान रहा है.

जयसिंघ शालिनी और अवी के साथ जयपुर चला गया.
 
फ्लॅशबॅक 1045

जैसा पिताजी ने कहा वैसा ही जयसिंघ करने का सोच रहा था

नीता और पूजा के माफ़ करने से जयसिंघ को काफ़ी हिम्मत मिली

नेहा भी जल्दी उसको माफ़ करेगी ये नेहा की टी ने बता दिया

नेहा भी रो रही थी टी बनाते हुए , उससे भी अपने भैया से दूर रहा नही जा सकता ऐसा जयसिंघ को लग रहा था

पिताजी के खत से इतनी उम्मीद तो मिल गयी कि पिताजी अभी तक जयसिंघ को भूले नही

छोटू की शादी के बारे में पिताजी ने जयसिंघ को बताया था

ऐसे अब जयसिंघ को सबका विश्वास जीतना था

ये तभी हॉंगा जब जयसिंघ शहर3 छोड़ देगा

शहर3 छोड़ कर जयसिंघ जयपुर चला गया

जयसिंघ जयपुर मे रह कर नयी शुरुआत करने वाला था

वैसे भी माँ के जाने के बाद जयसिंघ कंपनी मे कभी गया ही नही

जयसिंघ ने दूसरी नौकरी ढूँढ ली थी

पर पिताजी को जयसिंघ का शहर3 मे रहना पसंद नही था जिस से जयसिंघ जयपुर चला गया

जयपुर मे जयसिंघ और शालिनी ने एक छोटा सा घर खरीद लिया

जयसिंघ ने वहाँ पर एक घर लिया.

शहर3 जितना बड़ा नही था पर जयसिंघ के लिए शालिनी ने उसे भी घर बना दिया

जहाँ जयसिंघ ने घर लिया वहाँ उनको पड़ोसी अच्छे मिले.उनकी ही मदद से जयसिंघ जयपुर मे आया और सेट्ल हुआ

शालिनी का नेचर जल्दी लोगो से दोस्ती करवा देता था.शालिनी नयी जगह पर जल्दी घुल मिल गयी.

उन पड़ोसी की सिर्फ़ एक लड़की थी.अवी दिन भर उसके साथ खेलता रहता था.पुरानी पहचान थी

अवी उस लड़की के साथ खेलने से अपने दादाजी के बारे में भूल गया

शालिनी को भी पड़ोसी ने अपना बना लिया

ऐसा लग ही नही रहा था कि शालिनी अभी अभी वहाँ रहने आई हो

शालिनी थी ही ऐसी की सब उसे प्यार करने लग जाते

शालिनी की पड़ोसन उसकी दूर की माँ की लड़की थी मतलब वो बहन बन गयी

अवी और वो लड़की एक दूसरे के साथ काफ़ी खुश रहते थे.

जयसिंघ ने अवी को एग्ज़ॅम के लिए शहर3 वापस ले गया था .एग्ज़ॅम होते ही वापस जयपुर आ गया.

अवी स्कूल ना जाने से और उस लड़की के साथ खेलने से अपने पुराने घर को भूल गया.

शालिनी अपने नये पड़ोसी के साथ अपने नये घर मे खुश थी.

शालिनी को जयपुर मे आए हुए 10 महीने हो गये थे.

इन 10 महीनो मे शालिनी ने खुद को जयपुर मे अच्छे से सेट्ल कर लिया था

जयसिंघ भी काम से आने के बाद पड़ोसी के घर मे शाम की टी ज़रूर पीता था.

जयसिंघ का लोगो के साथ घुल मिलना उसके लिए अच्छा था

शालिनी ने जयपुर मे नयी शुरुआत की

पिताजी को खत लिख कर बता दिया कि वो जयपुर मे शिफ्ट हो गये है यहाँ पर जयसिंघ बदल गया है

पिताजी को ये पढ़ कर अच्छा लगा पर जयसिंघ को अभी बहुत कुछ करना होगा

अवी तो पिंक सिटी मे पिंक गर्ल के साथ खेलने मे खुश था

पिंक सिटी की रानी के साथ पिंक सिटी का राजा बन गया था अवी

जयसिंघ को बस नेहा से माफी माँगनी थी

जयसिंघ शालिनी से घंटो नेहा और अपनी फॅमिली की बाते करता

ऑफीस से आते ही अपने पड़ोसी के घर रुक जाता कुछ देर

ऐसे ही एक शाम पड़ोसी के घर मे उनका पहचान वाला आ गया.

जयसिंघ ने पहचान बढ़ाने के लिए उस से बात करनी सुरू की.

जयसिंघ-नमस्ते मैं जयसिंघ ,अभी कुछ महीने पहले यहा शिफ्ट हुआ हूँ.

मुस्कान के पिताजी-नमस्ते, आप पहले कहाँ रहते थे

जयसिंघ-शहर3 मे ,

मुस्कान के पिताजी-वहाँ खुद का बिज़्नेस था या जॉब करते थे

जयसिंघ-देखा जाए तो दोनो था, बिज़्नेस था पर छोड़ दिया और जॉब करने लगा.

मुस्कान के पिताजी-कैसा बिज़्नेस था

जयसिंघ-मुस्कान कंपनी का नाम तो सुना ही होगा आपने ,उसी मे पार्टनर था.कुमार के साथ काम करता था

मुस्कान के पिताजी-उसे कुत्ते कमिने का नाम मत लेना मेरे सामने

पड़ोसी-जयसिंघ ,

जयसिंघ-बात क्या है. ये ऐसी गालियाँ क्यूँ दे रहे है

पड़ोसी-इनके साथ कुमार ने बहुत बुरा किया.

जयसिंघ-क्या किया.

मुस्कान के पिताजी-मेरी बेटी को मार डाला उस कमिने ने

जयसिंघ-क्या?

पड़ोसी-इनकी लड़की से उसने प्यार किया , फिर इनकी लड़की को किडनॅप किया . फिर उसके साथ मंदिर मे शादी की .

जयसिंघ को ये सुनते ही झटका लगा. मतलब नेहा सही कह रही थी.

मतलब कुमार ने शादी की थी

पर कब कैसे

जयसिंघ को खुद पे गुस्सा आ रहा था कि उसने नेहा की बात पे विश्वस क्यूँ नही किया

जयसिंघ- क्या सबूत है कि कुमार ने ऐसा किया है

पड़ोसी- सबूत , एक बेटी के बाप से सबूत कोई नही माँगते

मुस्कान के पिताजी - सबूत होता तो अब तक कुमार जैल मे होता

पड़ोसी- जयसिंघ ये सारी बाते मेरे सामने हुई है

मुस्कान के पिताजी- एक मिनिट , याद आया , 8 9 साल पहले मैं ने तुम्हारे बारे में भी इन्फ़ॉर्मेशन निकाली थी ,

जयसिंघ- मेरे बारे में

मुस्कान के पिताजी- हाँ , मुझे कुमार के बारे में सबूत चाहिए थे , पर कोई सबूत नही मिला , फिर कंपनी के बारे में पूछताछ की तो तुम्हारे बारे में पता चला , पर तुम एक मेहनती इंसान थे ,, पता नही तुमने कुमार के साथ दोस्ती क्यूँ की

जयसिंघ- मैं अँधा हो गया था जो उसके साथ दोस्ती की

मुस्कान के पिताजी- क्यूँ क्या हुआ

जयसिंघ- उस कुत्ते ने मेरी बहन के साथ जबर्जस्ती करनी चाही तभी से मैं ने उसका साथ छोड़ दिया

मुस्कान के पिताजी- उस कुत्ते से यही उम्मीद थी , पर तुमने उसे छोड़ दिया

जयसिंघ- वो उस दिन के बाद विदेश चला गया है

मुस्कान के पिताजी- वो पिछले महीने वापस आ गया है

जयसिंघ- आपको कैसे पता

मुस्कान के पिताजी- मैं उसपे नज़र रखता हूँ , मुझे सबूत चाहिए जिस से मैं अपनी बेटी को इंसाफ़ दिला सकूँ

पड़ोसी- इस बात को कितने साल हो गये अब कुछ नही होगा

जयसिंघ- आप मुझे बताइए मैं आपकी मदद करूँगा (जयसिंघ को पूरा सच जानना था )

मुस्कान के पिताजी- तुम मेरी मदद करोगे

जयसिंघ- मुझे भी उस से बदला लेना है

मुस्कान के पिताजी- ठीक है , मैं बताता हूँ मेरी बेटी की कहानी , पर तुम्हें पता है तुम्हारी कंपनी का नाम मुस्कान क्यूँ है

जयसिंघ- ये नाम कुमार ने रखा था , और शायद पहले उस कंपनी का नाम भी यही था

मुस्कान के पिताजी-वो मेरी बेटी का नाम है , मुस्कान

ये तो जोरदार झटका लगा जयसिंघ को

जयसिंघ- आप झूठ बोल रहे होंगे

मुस्कान के पिताजी- यही सच है , उसने मेरा ध्यान दूसरी तरफ ले जाने के लिए कंपनी जा नाम मुश्कान रखा , कहता था कि उसने मुस्कान की याद मे रखा है

जयसिंघ- आप मुझे पूरी कहानी बताइए , मैं आपकी मदद करूँगा क्यूँ कि उसने कहा . नाम रखने से पुराने क्लाइयेट आ जाएँगे इस नाम का ईस्तमाल कर सकते है

मुस्कान के पिताजी - अजीत ने कुमार की मदद ली थी

जयसिंघ- अजीत बहुत बड़ा कमीना है

मुस्कान के पिताजी- कुमार उस से भी बड़ा कमीना है , तुम्हें सारी बात बताता हूँ

और मुस्कान के पिता ने जयसिंघ को सारी कहानी बता दी

जिसे सुनकर जयसिंघ रोने लगा

जयसिंघ के हाथो से क्या हो गया

जयसिंघ को नेहा पे विश्वास रखना चाहिए था

मुस्कान के पिताजी- ये है मेरी बेटी की कहानी

जयसिंघ- उस कुमार को मैं छोड़ूँगा नही

मुस्कान के पिताजी-ऐसा करना होता तो मैं कब का उसे मार डालता पर उसको जैल मे डालना होगा ताकि पूरी दुनिया उसका सच देखे

पड़ोसी-इनको लगता है कि कुमार ने मारा है उसको, पर पोलीस को कोई सबूत नही मिला. ना उसकी शादी का और ना उसके स्यूयिसाइड का .

जयसिंघ को कुमार की असलियत पता चलते ही जोरदार झटका लगा.

जयसिंघ ने नेहा पे विश्वास नही किया था.

शालिनी ने भी कहा पर उस ने कभी उसकी बात भी नही सुनी.

नेहा को कितना बुरा भला कहा ,नेहा को कभी समझने की कोशिश नही की.

नेहा को कितना दर्द मिला उसकी वजह से.

जयसिंघ ऐसे रोता हुआ अपने घर गया.

और रोते हुए शालिनी के गले लग गया.

 
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