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18थ डे
सुबह नेहा बुआ अपनी पूरी पलटन लेकर हॉस्पिटल मे आ गयी. नेहा बुआ आज वापस गाओं जाने वाली थी.
राज ,कविता ,लीना,और कोमल को स्कूल भी जाना था. वैसे भी ज्योति बुआ के घर इतने लोग नही रह सकते थे.
नेहा बुआ को दोपेहर की बस से सब पलटन के साथ गाओं भेज दिया.
कोमल ने जाते हुए मुझे गले लगा लिया और बस मे बैठ कर गाओं के लिए निकल गयी.
आज मैं टेन्षन फ्री था. चाची खुश थी, मैं खुश था, हम सब खुश थे.
चाची के रूम मे एक बच्चे के रोने की आवाज़ आती फिर दूसरे फिर तीसरे बच्चे के रोने की आवाज़ आती.
रूम की शांति बच्चो की मधुर आवाज़ो से गायब हो गयी.
रात तक बड़ी चाची की फॅमिली भी आ गयी.और सीमा चाची की फॅमिली कल जाने वाली थी.
बड़ी चाची की फॅमिली रिच थी. ज़मींदार की फॅमिली थी.
बड़ी चाची की फॅमिली भी बिग फॅमिली थी.
19थ डे
आज हम सब पूरी तरह से रिलॅक्स होने वाले थे.
दोपहर मे छोटी चाची की माँ और भाई अपने गाओं चले गये.
फिर सीमा चाची की फॅमिली भी जाने के लिए तय्यार थी.
मैं ने उनको गाओं जाने की टिकेट दे दी.
जैसा छोटी चाची ने कहा वैसा ही हो रहा था. सीमा चाची के माता पिता ने टिकेट लेने से मना किया.
मैं भी हार मान ने वाला नही था. मैं ने टिकेट उनके हाथ मे रख कर सीमा चाची की कसम दी. और उनको टिकेट लेनी पड़ी.
अब सिर्फ़ बड़ी चाची की फॅमिली रह गयी थी.
20थ डे
आज बड़ी चाची की फॅमिली भी चली गयी. फिर से मैं और चाचा रह गये.
6 7 दिन से मैं ठीक से सो नही पाया.
इस लिए आज रात मे स्वेता दीदी और नीता बुआ हॉस्पिटल मे रुक गयी. और मैं घर जाकर अपनी नींद पूरी करने लगा
बेड पर लेटते ही नींद आ गयी.
सुबह नेहा बुआ अपनी पूरी पलटन लेकर हॉस्पिटल मे आ गयी. नेहा बुआ आज वापस गाओं जाने वाली थी.
राज ,कविता ,लीना,और कोमल को स्कूल भी जाना था. वैसे भी ज्योति बुआ के घर इतने लोग नही रह सकते थे.
नेहा बुआ को दोपेहर की बस से सब पलटन के साथ गाओं भेज दिया.
कोमल ने जाते हुए मुझे गले लगा लिया और बस मे बैठ कर गाओं के लिए निकल गयी.
आज मैं टेन्षन फ्री था. चाची खुश थी, मैं खुश था, हम सब खुश थे.
चाची के रूम मे एक बच्चे के रोने की आवाज़ आती फिर दूसरे फिर तीसरे बच्चे के रोने की आवाज़ आती.
रूम की शांति बच्चो की मधुर आवाज़ो से गायब हो गयी.
रात तक बड़ी चाची की फॅमिली भी आ गयी.और सीमा चाची की फॅमिली कल जाने वाली थी.
बड़ी चाची की फॅमिली रिच थी. ज़मींदार की फॅमिली थी.
बड़ी चाची की फॅमिली भी बिग फॅमिली थी.
19थ डे
आज हम सब पूरी तरह से रिलॅक्स होने वाले थे.
दोपहर मे छोटी चाची की माँ और भाई अपने गाओं चले गये.
फिर सीमा चाची की फॅमिली भी जाने के लिए तय्यार थी.
मैं ने उनको गाओं जाने की टिकेट दे दी.
जैसा छोटी चाची ने कहा वैसा ही हो रहा था. सीमा चाची के माता पिता ने टिकेट लेने से मना किया.
मैं भी हार मान ने वाला नही था. मैं ने टिकेट उनके हाथ मे रख कर सीमा चाची की कसम दी. और उनको टिकेट लेनी पड़ी.
अब सिर्फ़ बड़ी चाची की फॅमिली रह गयी थी.
20थ डे
आज बड़ी चाची की फॅमिली भी चली गयी. फिर से मैं और चाचा रह गये.
6 7 दिन से मैं ठीक से सो नही पाया.
इस लिए आज रात मे स्वेता दीदी और नीता बुआ हॉस्पिटल मे रुक गयी. और मैं घर जाकर अपनी नींद पूरी करने लगा
बेड पर लेटते ही नींद आ गयी.