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मैं और मेरा परिवार

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अपडेट 287

{ रीया(ज़्)-रीया को ज़ीया

ज़ीया(र)-ज़ीया को रीया बना दिया }

घर आकर मैं खाना खा कर सो गया. मोबाइल मे 2.30 बजे का अलार्म लगा दिया.

आज रीया(ज़्) की गंद मार कर अपना खेल ख़तम कर दूँगा.

फिर दोपेहर मे मैं उठकर फ्रेश होगया और छत पर चला गया. अभी 3.00 बज रहे थे पर वो अभी तक आई नही.

मैं ने स्टोर रूम मे जाकर ज़रूरत का समान रख दिया और वापस अपनी छत पर आ गया.

3.10 हो गये पर वो आई नही. मैं छत पर घूमने लगा. 5 मिनट के बाद वो आ गयी. मैं उसकी छत पर चला गया.

अवी-हाई ज़ीया

रीया(ज़्)-हाई

अवी-रीया कहाँ है

रीया(ज़्)-वो सो रही है

अवी-(मतलब ज़ीया सो रही है) चले फिर

रीया(ज़्)-पर पहले ये बताओ इतनी जल्दी क्यू बुलाया

अवी-आज ज़्यादा मज़े करेंगे. अब चलो जल्दी.

मैं रीया(ज़्) को लेकर स्टोर रूम मे चला गया.

रीया(ज़्)-आज करने क्या वाले हो

अवी- तुम्हारी गंद मारने वाला हू

रीया(ज़्)-गंदा क्यू बोल रहे हो

अवी-उस्ड गंद ही तो कहते है

रीया(ज़्)-मैं वहाँ नही करूँगी

अवी-क्यू?

रीया(ज़्)-वहाँ ज़्यादा दर्द होता है

अवी-किसने कहा

रीया(ज़्)-वो ब्लू फिल्म मे देखा है

अवी-ब्लू फिल्म मे कुछ भी दिखाते है.तोड़ा दर्द होगा .जैसे उस्दिन हुआ था

रीया(ज़्)-पक्का ज़्यादा दर्द नही होगा

अवी-देखो मैं तेल लाया हू. जिससे तुम्हे दर्द कम होगा.

रीया(ज़्)-अगर ज़्यादा दर्द हुआ तो

अवी-नही करूँगा

रीया(ज़्)-पक्का ना

अवी-हाँ.अब जल्दी से कपड़े निकालो

रीया(ज़्)-तुम भी निकालो ना

अवी-मैं तो निकाल रहा हू

फिर मैं ने और रीया(ज़्) ने कपड़े निकाल दिए.

हम दोनो नंगे हो गये.रीया(ज़्) की चूत खुली हुई थी. गुलाबी चूत देख कर मेरे मुँह मे पानी आ गया और मेरे लंड पे भी पानी आ गया.

मैं रीया(ज़्) के गले लग गया और होंठो को चूसने लगा.मेरा लंड रीया(ज़्) की चूत पर रगड़ रहा था.

मैं ने किस करते हुए अपना एक हाथ मे लंड पकड़ लिया और रीया(ज़्) की चूत पर रख दिया .

लंड चूत पर रखते ही मैं थोड़ा आगे सरक गया. लंड का टोपा अंदर गया.

मैं ने लंड के टोपा अंदर रहने दिया और रीया(ज़्) के होंठो को चूसने लगा.थोड़ी देर तक हम एक दूसरे के होंठो को चूस्ते रहे.

फिर मैं अलग हो गया. अलग होते ही लंड का टोपा चूत से बाहर आ गया.

फिर मैं ने ज़मीन पर बेडशीट डाल दी जो मैं अपने साथ लाया था

और रीया(ज़्) के आने से पहले स्टोर रूम मे रख दी थी.

मैं ने रीया(ज़्) को 69 पोज़िशन मे आने को कहा. पहले मैं बेडशीट पर लेट गया.

मेरे मुँह पर चूत रख कर रीया(ज़्) ने मेरे लंड के पास अपना मुँह ले गयी.

रीया(ज़्) ने मेरे लंड को चाटना सुरू किया.पूरे टोपे पर रीया(ज़्) अपनी जीभ घुमा रही थी.

मुझे तड़फ़ा कर लंड चूस रही थी.

मैं ने भी रीया(ज़्) की चूत पर किस किया. फिर दाने को जीभ से चाटने लगा. जीभ से चूत के दाने के साथ खेलने लगा.

मेरी जीभ दाने को छूते ही रीया(ज़्) ने लंड को मुँह मे ले लिया फिर लंड को चूसने लगी.

मैं ने अपनी जीभ रीया(ज़्) की गुलाबी चूत मे डाल दी और चूत को चाटने लगा ,जीभ से चोदने लगा. कभी चूत को चूस लेता.

ऐसे तो टाइम लगेगा. क्यू ना रीया(ज़्) की चूत चूस्ते हुए गंद मे तेल लगा लू, रीया(ज़्) तो उधर लंड चूस रही है, अभी गंद पर तेल लगाया तो रीया(ज़्) को ज़्यादा दर्द नही होगा.

फिर मैं ने तेल की बॉटल से तेल निकाल कर उंगली पे डाल दिया. और उंगली से रीया(ज़्) के गंद के छेद को नरम करने लगा.

चूत मे जीभ और गंद के छेद पर उंगली इस से रीया(ज़्) गरम हो गयी और लंड को ज़ोर से चूसने लगी.

मैं ने उंगली को रीया(ज़्) की गंद के छेद मे डाल दी. रीया(ज़्) ने मेरे लंड को दबा दिया.

पर मैं कहाँ रुकने वाला था.मैं चूत मे जीभ डाल कर चाटने लगा और उंगली को गंद मे अंदर बाहर करने लगा.

मैं ज़ोर से रीया(ज़्) की चूत चाटने लगा जिस से रीया(ज़्) मज़े मे गंद का दर्द भूल जाए

थोड़ी देर रीया(ज़्) की गंद मे उंगली करने के बाद मैं ने उंगली बाहर निकाल ली.

और 2 उंगली पे तेल लगा लिया और रीया(ज़्) की गंद पर भी तेल लगा लिया.मैं ने तेल को चूत पर आने नही दिया.

फिर मैं ने धीरे धीरे 2 उंगली गंद मे डाल दी.रीया(ज़्) ने लंड पर दाँतों से काट लिया.

मुझे दर्द हुआ पर रीया(ज़्) ने लंड को मुँह मे जल्दी से बाहर निकाल लिया.

और हल्की आअहह भरी.पर मैं ने उंगली और जीभ बाहर नही निकाली.उंगली को गंद मे डाल कर चोदने लगा.और जीभ से चूत चाटने लगा.

रीया(ज़्) शीष्कारिया लेने लगी.

मैं ने तब तक उंगली बाहर नही निकाली जब तक रीया(ज़्) ने पानी नही छोड़ा.

रीया(ज़्) ने पानी छोड़ दिया मैं ने सारा पानी पी लिया और उंगली को बाहर निकाला

अवी-दर्द हुआ

रीया(ज़्)-नही.

अवी-मज़ा आया

रीया(ज़्) -हाँ

अवी-सोचो उंगली से इतना मज़ा आया तो लंड से कितना आएगा.

रीया(ज़्) -वो तो उंगली से बड़ा है

अवी-जिस तरह चूत मे जाने के बाद मज़ा आया वैसे ही गंद मे जाने के बाद मज़ा आएगा. मैं तुम पर फ़ैसला छोड़ता हू ,

रीया(ज़्) सोचने लगी.

अवी-(बोल तो दिया ,हाँ कर दो)

रीया(ज़्) -दर्द हुआ तो रुक जाना

अवी-मैं क्या तुम्हे दर्द होने दूँगा.

और फिर मैं ने रीया(ज़्) को बेडशीट पर लिटा दिया और मैं रीया(ज़्) के साइड मे आ गया.

मैं ने उंगली पर तेल लिया और उंगली को रीया(ज़्) की गंद मे डाल दिया. रीया(ज़्) उछल पड़ी. मैं ने लंड को रीया(ज़्) की चूत मे डाल दिया.

फिर रीया(ज़्) उछल पड़ी

मैं ने लंड और उंगली हिलाना सुरू किया .रीया(ज़्) डबल मज़ा ले रही थी.मैं धक्के लगाता रहा .

रीया(ज़्) आवाज़े निकालती रही. उुउऊहही माआअ बसस्सस्स आसस्रसे हहिईीईई और ज्ज्जजूर्र्र ज़ोर से करो. हााआ बस कर्र्रते रहो

मैं धक्के लगाता गया और उंगली को बाहर निकाल कर फिर तेल लगा कर अंदर डाल देता

5 मिनट तक मैं रीया(ज़्) की चुदाई करता रहा. फिर रीया(ज़्) ने पानी छोड़ दिया.और मैं ने लंड बाहर निकाल लिया.

 


अपडेट 288

{ रीया(ज़्)-रीया को ज़ीया

ज़ीया(र)-ज़ीया को रीया बना दिया }

रीया(ज़्) की चूत मार कर उसका पानी निकाल दिया

फिर मैं खड़ा हो गया. मैं ने सोफे पर जो गद्दा था उसे नीचे ज़मीन पर डाल दिया

और उसके उपर बेडशीट डाल दी. और रीया(ज़्) को उसपर लेटा दिया.

अवी-ज़ीया मैं तुम्हारी गंद मारने वाला हू. ज़्यादा चीखना मत .

रीया(ज़्)-आराम से करना और ज़्यादा दर्द हुआ तो निकाल लेना.

अवी-मैं तुम्हे दर्द नही होने दूँगा.

फिर मैं अपने लंड पर तेल लगा लिया और थोड़ा तेल

रीया(ज़्) की गंद पर डाल दिया.

फिर मैं ने अपने लंड को

रीया(ज़्) के गंद के छेद पे रख दिया और फिर लंड को

रीया(ज़्) की गंद के छेद पर रगड़ने लगा.

थोड़ी देर रगड़ने के बाद मैं धीरे धीरे लंड को अंदर प्रेस करने लगा .मेरा लंड उसकी गंद पे फिसलने लगा

मैं थोड़ा ज़ोर लगाया और मेरे लंड का टोपा रीया(ज़्) की गंद मे घुस गया .

रीया(ज़्) चीख पड़ी….आई…..आर्र…ई………दर्द हो रहा है...

रीया(ज़्) छटपटाने लगी मैं ने रीया(ज़्) की कमर को पकड़ लिया और अपने नीचे दबाए रखा .

अछा हुआ रीया(ज़्) को घोड़ी नही बनाया,वरना वो आगे सरक कर लंड को बाहर निकाल लेती

फिर मैं ने एक साथ 2 काम किए. पहला एक झटका मारा और दूसरा झटका मारते ही रीया(ज़्) के उपर आकर होंठो को चूसने लगा

मैं ने जो एक जोरदार झटका मारा था उस से मेरा लंड रीया(ज़्) की गंद मे 4 इंच अंदर घुस गया .

मेरे रीया(ज़्) के उपर गिरने से पहले वो तेज़ी से कराही… छटपटाई…..

रीया(ज़्) की जो चीख निकली वो अधूरी थी. चीख को पूरा होने से पहले मैं ने

रीया(ज़्) के होंठो पर क़ब्ज़ा कर लिया. रीया(ज़्) के होंठो को चूसने लगा.

रीया(ज़्) की पहली चीख आधी कमरे मे गूँज गयी और आधी मेरे मुँह मे .और

रीया(ज़्) की दूसरी चीख पूरी मेरे मुँह मे दब गयी.

रीया(ज़्) नीचे से निकलने की कोशिस कर रही थी. पर मैं रीया(ज़्) की कमर को अपने हाथो से पकड़ रखा था.

मैं ने रीया(ज़्) को हिलने नही दिया. थोड़ी देर होंठो को चूसने से रीया(ज़्) शांत होने लगी.

रीया(ज़्) को शांत होता देख कर मैं ने आख़िरी झटका मारा .इसी के साथ अब मेरा पूरा लंड रीया(ज़्) की गंद मे घुस गया .

रीया(ज़्) ज़ोर ज़ोर से कराह रही थी .रीया(ज़्) की साँसे तेज़ चल रही थी .रीया(ज़्) को बहुत दर्द हो रहा था .उसकी आँखो से पानी निकल रहा था.

पर मैं ने रीया(ज़्) को अपने नीचे कस के दबा रखा था. रीया(ज़्) का बदन काप रहा था. रीया(ज़्) के बदन के कापने से मेरा बदन भी उसकी तरह कापने लगा था.

रीया(ज़्) की धड़कने इतनी तेज चल रही थी कि मैं बता नही सकता था.

मेरी चेस्ट रीया(ज़्) की चेस्ट से चिपकी थी. रीया(ज़्) के धड़कानो की आवाज़ इतनी थी कि मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा दिल धड़क नही रहा है.मुझे अपनी धड़कने महसूस नही हो रही थी.

मैं रीया(ज़्) के होंठो को चूस्कर रीया(ज़्) की चीखे बंद करने की कोशिस कर रहा था.

मैं ने रीया(ज़्) कमर पे जो हाथ थे उसे रीया(ज़्) के बूब्स पर रख कर बूस को दबा रहा था.

बूब्स पे हाथ रखने के लिए मुझे अपनी चेस्ट उपर करनी पड़ी. जब चेस्ट उपर हुई तब मुझे अपनी धड़कने चलने का पता चला.

मेरा 8 इंच लंबा मोटा लंड रीया(ज़्) की गंद मे था.

मैं पूरी कोशिस कर रहा था कि रीया(ज़्) का दर्द जल्दी ख़तम हो जिस से मैं रीया(ज़्) की गंद मारना शुरू करू.

 
मेरी मेहनत रंग लाई. 15 मिनट तक होंठो को चूसने से और बूब्स को दबाने से रीया(ज़्) का दर्द कम हुआ.

मैं ने 15 मिनट मे रीया(ज़्) को कुछ बोलने का मोका नही दिया. रीया(ज़्) अपना मुँह खोलती तो मैं उसके मुँह मे अपनी जीभ डाल देता.

रीया(ज़्) को अगर कुछ बोलने का मोका मिलता तो वो मुझे लंड बाहर निकाल ने को कहती जो मैं कभी नही करने वाला था.

15मिनट मे मैं कभी रीया(ज़्) के बूब्स दबाता तो कभी उसकी गंद पर हाथ डाल कर सहला देता.

रीया(ज़्) के शांत होते ही मैं ने अपने लंड को अंदर बाहर करना सुरू कर दिया.

रीया(ज़्) की गंद ने मेरे लंड को कस के जाकड़ रखा था. जिस से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था

मैं ने थोड़ी देर रीया(ज़्)की गंद को धीरे धीरे पेलने के बाद अपना लंड निकाल लिया.

और रीया(ज़्) की गंद को देखने लगा. रीया(ज़्) के गंद से हल्का हल्का खून निकल रहा था और थोड़ा खून मेरे लंड पे भी लगा हुआ था.

मैं ने तेल की बॉटल लेकर तेल को रीया(ज़्) के खुली हुए गंद मे डाल दिया. तेल की ठंडक से रीया(ज़्) की गंद की जलन कम हुई.

ये सब करते हुए मैं ने रीया(ज़्) को पकड़ के रखा था और उसके उपर अपना वेट बनाए रखा.

मैं ने फिर से अपने लंड पे ढेर सारा तेल लगाया और रीया(ज़्) की कमर को दोनो हाथो से पकड़ के अपने लंड को रीया(ज़्) के गंद के छेद पे टिका दिया

और हल्का झटका मारा तो मेरा आधा लंड रीया(ज़्) की गंद मे घुस गया. रीया(ज़्) की हल्की चीख निकल गयी.

मैं ने फिर लंड को बाहर निकाल लिया . मैं मे फिर से अपने लंड पे तेल लगा दिया

फिर से रीया(ज़्) की गंद मे अपना लंड घुसा दिया. लंड फिर से आधा अंदर चला गया.इस बार मेरा लंड आराम से अंदर बाहर हो रहा था.

फिर मैं ने पूरा लंड रीया(ज़्) की गंद मे डाल दिया. और फिर धीरे धीरे रीया(ज़्) की गंद मारने लगा.

रीया(ज़्) श्हशकारिया लेने लगी

रीया(ज़्) की शीष्कारिया सुनकर मैं समझ गया कि रीया(ज़्) को मज़ा आ रहा था.

रीया(ज़्) का मज़ा देख कर मैं ने अपनी गति(स्पीड) बढ़ा दी और तेज तेज झटके मारने लगा .

जब मेरा लंड पूरा अंदर जाता है तो मुझे महसूस होता कि मेरा लंड रीया(ज़्) की गंद के छेद के एंड तक पहुच जा रहा है और वहाँ किसी दीवार से टकरा रहा है. जब भी मेरा लंड रीया(ज़्) के गंद की दीवार से टकराता रीया(ज़्) कराह उठती और थोड़ी उच्छल जाती थी

अब रीया(ज़्) को भी पूरा मज़ा आने लगा था .अब रीया(ज़्) अपनी गंद को हिलाने लगी थी

मैं उसे और मज़ा देने के लिए अपने हाथ से उसके बूब्स को भी दबाने लगा सहलाने लगा.

10 मिनट तक मैं रीया(ज़्) की गंद इस तरह मारता रहा

फिर मैं ने रीया(ज़्) को घोड़ी बना दिया. और पीछे आकर लंड को 2 झटको मे गंद के अंदर डाल दिया और रीया(ज़्) की गंद मारने लगा.

रीया(ज़्) की गंद मे धक्के लगाने वक्त मैं रीया(ज़्) की गंद पर थप्पड़ मार देता जिससे से रीया(ज़्) की मुलायम गंद लाल हो गयी.

जब भी मेरा धक्का लगता तो रीया(ज़्) की गंद के दोनो चूतड़ हिलने लगते

फिर मैं ने रीया(ज़्) की कमर को दोनो हाथ से पकड़ के ज़ोर दार धक्के पे धक्के मारने लगा.

मेरे हर धक्के के साथ रीया(ज़्) के दोनो बूब्स खूब हिल रहे. जैसे गंद की गंद फट रही थी और बूब्स को मज़ा आ रहा था और मज़े मे झूम रहे थे.

मैं धक्के मार रहा था और रीया(ज़्) मज़े मे गंद हिला रही थी और साथ ही शीष्कारिया ले रही थी .

अब मैं ने अपनी गति बढ़ा दी जिस से रीया(ज़्) की भी शीष्कारिया बढ़ गयी .

रीया(ज़्) की गंद हिलाने की गति भी बढ़ गयी

थोड़ी देर मे रीया(ज़्) की बदन अकड़ गया और चूत से पानी निकल गया.

रीया(ज़्) अपने दर्द को कम करने के लिए चूत मे उंगली कर रही थी.जिस से चूत ने पानी छोड़ दिया.

पानी निकलते ही रीया(ज़्) नीचे गिर गयी. मैं भी रीया(ज़्) के साथ उपर गिर गया. जैसे गंद लंड को बाहर निकलने नही देना चाहता था और अपने साथ नीचे ले गया.

रीया(ज़्) नीचे पेट के बल गिर गयी और मैं उसके उपर गिर कर धक्के मार रहा था. अब मैं पूरी ताक़त के साथ धक्के मार रहा था .

रीया(ज़्) का मेरे धक्के से बुरा हाल हो रहा था मैने आख़िरी बार अपनी गति बढ़ा दी क्यू कि मैं अब झड्ने वाला था .

मैं तेज़ी से उसके गंद के अंदर तक लंड पेल रहा था.

अब मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है तो मैं लंड बाहर निकाल लिया.और हाथ से हिलाकर रीया(ज़्) की गंद के उपर अपना वीर्य डाल दिया.

रीया(ज़्) तो वैसी ही लेटी रही. उसे पता चल गया कि चुदाई ख़तम हो गयी.और आराम से लेटी रही.

मैं भी सोफे पर जाकर बैठ गया. सोफे पर गद्दा नही था पर मुझे कुछ फ़र्क नही पड़ा और मैं नॉर्मल होने की कोशिस कर रहा था.

 


अपडेट 289

{ रीया(ज़्)-रीया को ज़ीया

ज़ीया(र)-ज़ीया को रीया बना दिया }

15 मिनट के बाद मैं नॉर्मल हो गया.

रीया(ज़्) अभी भी पेट के बल लेती थी. उस ने दोनो पैर फैला दिए थे.

मैं रीया(ज़्) के पास चला गया और पैंटी से रीया(ज़्) की गंद साफ कर दी.

फिर रीया(ज़्) की गंद को हाथो से मसल्ने लगा. गंद मसल्ने से रीया(ज़्) होश मे आ गयी.

रीया(ज़्)-ये क्या कर रहे

अवी-जो दर्द दिया उसे कम कर रहा हू

रीया(ज़्)-ऐसे दर्द कम होगा

अवी-हाँ,गंद मसलने से दर्द कम होगा

रीया(ज़्)-मुझे तो लग रहा है कि तुम फिर से करना चाहते हो

अवी-क्यू तुम नही चाहती.

रीया(ज़्)-मुझे भी करना है पर ये दर्द इस का क्या करे

अवी-मैं पेन किल्लर देता हू खा लो

रीया(ज़्)-मतलब तुम फिर से करना चाहते हो

अवी-हाँ,इसलिए तो जल्दी बुलाया है तुम्हे

रीया(ज़्)-जब पेन किल्लर का असर ख़तम होगा तब मुझे कितना दर्द होगा पता है तुम्हे

अवी-उस दर्द के लिए फिर पेन किल्लर खा लेना उसके बाद तो आराम ही करना है

रीया(ज़्)-दर्द से जो मेरी हालत होगी.अगर वो हालत मेरी मम्मी ने देख ली तो या रीया ने पूछ लिया तो.

अवी-उतना तुम संभाल नही सकती. बस रूम मे जाकर सो जाना

रीया(ज़्)-फिर भी

अवी-मेरे लिए बस एक बार और

रीया(ज़्)-इस बार आराम से करना

अवी-प्यार से करूँगा

रीया(ज़्)-और आगे से करना पीछे नही

अवी-ठीक है

रीया(ज़्)-दो पेन किल्लर

रीया(ज़्) ने पेन किल्लर खा ली. रीया(ज़्) को मनाने मे फिर 15 मिनट चले गये.

अब बस 1 घंटा 15 मिनट बाकी थे. और पेन किल्लर का असर होने मे और 15 मिनट लगने वाले थे.

मैं ने रीया(ज़्) को पीठ के बल लिटा दिया.और उसकी गंद के नीचे अपनी टी-शर्ट और लोवर को पिल्लो की तरह रख दिया. जिस से रीया(ज़्) को गंद मे दर्द नही होगा.

रीया(ज़्) कुछ करने के हालत मे नही थी. जब तक कि उसका दर्द ख़तम ना हो जाए.जो करना था वो मुझे करना था.

मैं रीया(ज़्) के उपर आकर रीया(ज़्) के होंठो को चूसने लगा.

रीया(ज़्) मेरा बस थोड़ा सा साथ दे रही थी. मैं रीया(ज़्) मे जोश बढ़ाने के लिए होंठो को चूसने के साथ बूब्स भी दबा रहा था.

और साथ मे अपने शरीर को हिला रहा था .शरीर हिलने से लंड रीया(ज़्) की चूत पर रगड़ रहा था.

लंड चूत पे रगड़ने से रीया(ज़्) गरम हो रही थी. साथ ही मेरा लंड भी पूरा खड़ा हो रहा था.

 
थोड़ी देर मे पूरा लंड खड़ा हो गया.

लंड खड़े होते ही मैं ने होंठो को छोड़ दिया.

और मैं ने अपना सर रीया(ज़्) की चूत पर और लंड रीया(ज़्) के मुँह पर रख दिया.

मैं रीया(ज़्) की 4 दिन मे फटी हुई चूत चाटने लगा.

रीया(ज़्) भी मेरे लंड को मुँह मे लेकर चूसने लगी.

मैं जो भी कर रहा था उसमे रीया(ज़्) को हिलने की ज़रूरत नही थी जिस से रीया(ज़्) को दर्द नही हो रहा था.

मैं ने अपना मुँह एक मिनट के लिए रीया(ज़्) की चूत से अलग किया

और रीया(ज़्) की चूत देखने लपा.

4 दिन पहले पिंक कलर की बिना बालो की कुँवारी चूत थी. पर अब चूत लाल हो गयी थी,4 दिन मे हल्के हल्के बाल आ गये थे. और अब रीया(ज़्)कुँवारी लड़की से एक औरत बन गयी थी.

मैं ने फिर से रीया(ज़्) की चूत को चूसना सुरू किया.थोड़ी देर मे रीया(ज़्) ने पानी छोड़ दिया.

रीया(ज़्) का पानी पीने के बाद मैं रीया(ज़्) की टाँगो के बीच आकर लंड को रीया(ज़्) की चूत पर रख दिया

एक बार रीया(ज़्) की तरफ देखा फिर एक झटके मे पूरा लंड अंदर डाल दिया.रीया(ज़्) की चीख निकल गयी पर मैं रुका नही और धक्के लगाने लगा .

गंद मे दर्द तो हो रहा था और अब चूत मे दर्द हो रहा था.

मैं धक्के के साथ रीया(ज़्) के बूब्स लाल कर रहा था.रीया(ज़्) थोड़ी देर चिल्लाई फिर रीया(ज़्) की चीखे शीष्कारियो मे बदल गयी.

मैं धक्के लगाता गया रीया(ज़्) आवाज़े निकालती गयी. पेन किल्लर अपना असर दिखा रहा था.

जिस से रीया(ज़्) कह रही थी ज़ोर ज़ोर से मारो ...इतन्न्णना धीरे क्यू कार्ररर रहे हो

मुझे पता था ये सब पेन किल्लर की वजह से था .मैं ने धक्के मारने की गति बढ़ा दी.

20 मिनट तक रीया(ज़्) की चूत मारता रहा .इस बीच रीया(ज़्) ने 2 बार पानी छोड़ा.

पेन किल्लर का असर हो चुका था. रीया(ज़्) को दर्द नही हो रहा था. मैं ने लंड बाहर निकाल लिया और गंद मे डाल दिया.

गंद मे लंड डालते ही रीया(ज़्) को थोड़ा दर्द हुआ पर मैं रीया(ज़्) के बूब्स को दबा रहा था जिस से वो दर्द भी ख़तम हो गया.

मैं रीया(ज़्) की गंद मारने लगा. ज़ोर ज़ोर से रीया(ज़्) की गंद मारने लगा. साथ मे रीया(ज़्) भी कह रही थी कि ज़ोर से मारो

पेन किल्लर के वजह से उसको लंड फील नही हो रहा था. इस लिए वो मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने को कह रही थी.

20 मिनट तक रीया(ज़्) की गंद मारने के बाद मैं ने अपना पानी रीया(ज़्) की गंद मे डाल दिया. और जल्दी से लंड बाहर निकाल कर रीया(ज़्) के बाजू मे लेट गया.

मैं रीया(ज़्) के उपर गिर जाता तो रीया(ज़्) को नॉर्मल होने मे टाइम लग जाता.

15 मिनट के बाद मैं नॉर्मल हो गया और अपने कपड़े पहन लिए.

अवी-ज़ीया जल्दी कपड़े पहन लो देर हो गयी

रीया(ज़्)-हाँ,शायद मम्मी मुझे ढूँढ रही होगी

रीया(ज़्) ने कपड़े पहन लिए पर पैंटी अपने हाथ मे लेकर खड़ी हो गयी.

उसके पैरो मे ताक़त नही थी फिर भी वो खड़ी हो गयी. मैं ने उसे फिर नीचे बैठा दिया

अवी-ये लो मेडिसिन

रीया(ज़्)-इतनी सारी

अवी-एक प्रेग्नेन्सी के लिए. एक पेन किल्लर और एक पैरासीटामोल है अगर बुखार आया तो खा लेना

रीया(ज़्)-थॅंक्स

अवी-कल दिन भर आराम करना .कॉलेज मत जाना .मैं तो कहता हू रूम से बाहर मत आना

रीया(ज़्)-मैं कल रूम मे दिन भर आराम करूँगी

अवी-हम अब परसो मिलेंगे

रीया(ज़्)-कितने बजे

अवी-3.00पीएम बजे

रीया(ज़्)-क्या फिर से 2 बार करोगे

अवी-नही,एक बार और आराम से करेंगे

रीया(ज़्)-ठीक है पर अब मुझे जाना होगा

मैं ने गेट खोला .एक बार बाहर देखा बाहर कोई नही था. फिर मैं रीया(ज़्) को पकड़ कर सीडियो तक ले गया.

रीया(ज़्) धीरे धीरे नीचे चली गयी. और मैं स्टोर रूम मे जाकर जगह साफ कर दी और ताला लगाकर अपने कमरे मे चला गया..

 


अपडेट 290

मैं कमरे मे आकर फ्रेश हो गया.

और सोचने लगा.आज तो मैं मुसीबत मे फँस गया.

मैं ने ज़ीया से गोलगप्पे की शॉप पर मिलने का वादा किया है पर चाचा ने हॉस्पिटल जल्दी आने को कहा है.

अब मैं क्या करूँ. एक काम हो सकता है.हॉस्पिटल जाते वक्त ज़ीया से मिल लूँगा. फिर हॉस्पिटल चला जाउन्गा.

मैं हॉल मे आकर सीतल से बाते करने लगा. फिर खाना खा कर हॉस्पिटल के लिए निकल गया.

हॉस्पिटल जाने से पहले गोलगप्पे की शॉप पर रुक गया. शॉप पर बैठ कर ज़ीया मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मेरे शॉप पर जाते ही ज़ीया मेरे पास आ गयी.

अवी-कैसी हो रीया

ज़ीया(र)-ठीक हूँ

अवी-रीया

ज़ीया(र)-हाँ

अवी-एक बुरी खबर है

ज़ीया(र) का चेहरा पीला पड़ा गया .उसे लगा कि कही किसी को कुछ पता तो नही चला.

अवी-क्या हुआ रीया

ज़ीया(र)-कुछ नही तुम बोलो

अवी-मुझे बाहर जाना है .आज हम प्यार नही कर सकते

ज़ीया(र)-नॉर्मल होते हुए कहाँ जाना है

अवी-हॉस्पिटल

ज़ीया(र)-हॉस्पिटल क्यूँ?

अवी-काम है हॉस्पिटल मे

ज़ीया(र)-उदास होते हुए ठीक है

अवी-उदास मत हो

ज़ीया(र)-क्यू ना होउ. इतनी मुश्किल से अकेली आई हू और तुम हो कि

अवी-आज के लिए माफ़ कर दो कल ज़्यादा देर करेंगे

ज़ीया(र)-ज़्यादा देर

अवी-हाँ,कल तुम कॉलेज से आने के बाद 3.00 बजे छत पर आ जाना

ज़ीया(र)-अगर ज़ीया को पता चला तो

अवी-बोल देना बाहर जा रही हूँ और छत पर आ जाना

ज़ीया(र)-ठीक है

अवी-कल शाम 3.00 बजे मिलते है

ज़ीया(र)-ओके बाइ

अवी-बाइ

मैं हॉस्पिटल की तरफ निकल पड़ा.

हॉस्पिटल पहोच कर चाची के रूम मे चला गया.

चाचा-समय पर आया तू

अवी-आपने ही तो कहा कि जल्दी आना

चाचा-तू संभाल अपनी चाची को मैं चला घर

और चाचा जी घर चले गये

हर दिन की तरह ज़ोया ने चाची को चेक किया .

मैं ने 2 दिन से ज़ोया के साथ बात नही की थी.

ज़ोया ने मेरी तरफ देखा मैं ने ज़ोया की तरफ ध्यान नही दिया .ज़ोया उदास होकर चली गयी.

फिर मैं ने चाची को खाना खिला दिया. और मोबाइल पर गेम खेलने लगा.

रात मे माला आ गयी. मैं ने माला की एक बार गंद मार ली.और फिर माला के साथ बाते करने लगा.

अवी-माला मेरा एक काम करोगी

माला-हाँ कहो

अवी-तुम परसो से हॉस्पिटल जल्दी आ जाया करोगी

माला-जल्दी क्यूँ?

अवी-चाची की डेलिवरी पास आ गयी है .अगर तुम जल्दी आओगी तो मुझे मदद होगी

माला-कब आना होगा

अवी-तुम रोजाना रात 10.00 बजे आती हो ना

माला-हाँ

अवी-जब तक मैं यहा हू तुम तब तक 8.00 बजे आ सकती हो

माला-आ जाउन्गि

अवी-अगर तुम आ गयी तो मैं तुम्हे पार्क मे नही ले जाउन्गा जो तुम नही चाहती थी

माला-मैं जल्दी आउन्गि और पार्क मे भी आउन्गि.

अवी-थॅंक्स

माला-थॅंक्स की कोई ज़रूरत नही है. एक तो मेरा काम है और दूसरा मुझे पार्क मे मज़ा मिलेगा.

अवी-पार्क मे मिलेंगा .पर हम 2 दिन के बाद चुदाई नही कर पाएँगे

माला-क्यू?

अवी-चाची की डेलिवरी है

माला-ठीक है पर उसके बाद

अवी-उसके बाद मिलेंगे पर 1 हफ्ते तक कुछ नही कर सकते

माला-मैं 1 हफ़्ता निकाल लूँगी

अवी-थॅंक्स अब मुझे रूम मे जाना होगा

और मैं चाची के रूम मे आ गया और एक बार चाची को देखा और फिर सोफे पर सो गया.

 


अपडेट 291

रेड- अपडेट 286 सारा

10थ डे

मैं ने सुबह उठ कर चाची को नाश्ता दिया. नाश्ता करने से पहले सारा ने चाची चेक कर लिया. फिर चाचा के आने के बाद मैं सारा के कॅबिन मे चला गया.

अवी-गुड मॉर्निंग सेक्सी

सारा-क्या कहा

अवी-जो आपने सुना

सारा-तुमने मुझे क्या समझा है .पहले हॉट बना दिया और अब सेक्सी

अवी-मैं तो आपको सिर्फ़ फ्रेंड समझता हू .आपका पता नही आपने मुझे क्या समझा है

सारा-ठीक है. पर आज सेक्सी किस खुशी मे कहा है

अवी-इतनी पर्फेक्ट फिगर जिसकी हो उसे सेक्सी ही कहूँगा ना

सारा-तुम्हे कहाँ से पर्फेक्ट लग रही है. मेरी फिगर 36-24 -36 थोड़ी है

अवी-वो फिगर किसे पसंद आती है मुझे तो आपकी पर्फेक्ट लग रही है

सारा-थॅंक्स.पर आज इतनी तारीफ क्यू कर रहे हो

अवी-तारीफ कहाँ मैं तो आपको हॉट बनाने की कोशिस कर रहा हू

सारा-वो क्यू?

अवी-आप हॉट हो गयी तो आपकी फिगर देखने मे मज़ा आएगा

सारा-मैं क्यू तुम्हे फिगर दिखाउन्गि

अवी-आपने कल कहा था ना

सारा-और आज कह रही हू नही दिखाउन्गि

अवी-आप प्रॉमिस तोड़ नही सकती

सारा-अगर तोड़ दिया तो

अवी-तो फिर ....मैं घर चला जाउन्गा. और क्या कर सकता हूँ

सारा-तो चले जाओ

अवी-बाइ और मैं जाने लगा

सारा-रूको

अवी-अब क्या है

सारा-बैठो

अवी-बैठ के क्या करूँ

सारा-गुस्सा क्यू हो रहे हो मैं तो मज़ाक कर रही थी

अवी-मुझे पता था कि आप मज़ाक कर रही है.

सारा-वो कैसे

अवी-इतना प्यारा संदर सेक्सी ड्रेस पहनकर आई हो मुझे दिखाने के लिए,इस से पता लगा लिया कि आप मज़ाक कर रही हो.और मैं भी जाने का नाटक कर रहा था.

सारा-स्मार्ट हो

अवी-अब देखने दो अपनी फिगर

सारा-मैं खड़ी हो जाती हू .तुम देख लो

सारा खड़ी हो गयी.मैं भी खड़ा हो गया .और गेट बंद कर दिया

सारा-गेट क्यू बंद किया

अवी-अगर किसीने हमे ऐसे देखा तो क्या सोचेगा

सारा-ठीक है अब जल्दी से देखो मुझे पेशेंट भी देखने है

मैं सारा को देखने लगा .उपर से नीचे तक ,नीचे से उपर तक.सारा का चेहरा लाल हो गया था

अवी-ज़रा घूम जाइए

सारा घूम गयी. सारा की गंद मेरी तरफ थी. सारा की गंद ऐसी थी कि कोई भी देखे तो उसका पानी निकल जाए.

मैं सारा के पास चला गया. मेरे कदमो की आहट सुनकर सारा की धड़कने तेज चलने लगी.

अवी-सारा

सारा-ह्म्म्म

अवी- तुम्हारी फिगर सच मे अच्छी है.

सारा-ह्म्म्म्

अवी-मैं छूकर देखता हू

सारा ने कुछ नही कहा. मैं समझ गया सारा गरम हो गयी है.

मैं ने सारा के हाथो को सारा के बदन से दूर किया. फिर अपना हाथ बूब्स के बाजू मे रख दिया.

मेरा हाथ सारा के बदन पर रखते ही सारा के बदन मे लहर दौड़ गयी.

मेरी उंगलिया बूब्स को छू रही थी. मैं ने धीरे धीरे अपना हाथ सारा के बदन पर घूमाते हुए नीचे लाने लगा.

जैसा जैसा मेरा हाथ नीचे आ रहा था सारा की साँसे तेज चल रही थी.

फिर मैं ने अपना हाथ सारा की गंद पर रख दिया. सारा ने अपनी आँख बंद कर दी.

मैं अपने हाथ को सारा की गंद पर घुमाने लगा.बीच बीच मे दबा रहा था.

फिर मैं ने उंगलियो को गंद के दरार मे डाल रहा था कि किसीने गेट पे नॉक किया.

सारा होश मे आ गयी. मैं सारा से अलग हो गया और चेअर पे जाकर बैठ गया.

सारा ने खुद को नॉर्मल करके गेट खोला.

नर्स कॉफी लेकर आई थी .कॉफी टेबल पर रख कर चली गयी.

अवी-कॉफी कब मंगाई थी

सारा-होश मे आकर, क्या?

अवी-मैं ने पूछा कॉफी कब मंगाई थी

सारा-तुम्हारे आने से पहले मॅंगा ली थी.

अवी-क्यू मँगाई

सारा-तुम कॉफी पीते हो इस लिए पहले मॅंगा ली

अवी-कॉफी की वजह से मैं आपकी फिगर नही देख पाया

सारा-देख तो लिया

अवी-कहाँ देखी एक तो नर्स बीच आ गयी और आप भी

सारा-मैं ने क्या किया

अवी-आपको फिगर दिखाना आता ही नही

सारा-मैं डॉक्टर हू मॉडेल नही मुझे कैसे पता होगा फिगर कैसे दिखाते है

अवी-मैं कल आपको बता दूँगा और देख भी लूँगा

सारा-क्या करने वाले हो कल

अवी-वो कल बताउन्गा.आप टेन्षन मत लो मैं ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा

सारा-पर करने क्या वाले हो

अवी-कल बताउन्गा अब मैं चलता हू

सारा-ठीक है बाइ

अवी-मैं गेट के पास आ गया. कल रेड ड्रेस पहन कर आना

और मैं घर चला आया.घर आकर खाना खा लिया और मोबाइल मे अलार्म लगा कर सो गया.

 


अपडेट 292

{ रीया(ज़्)-रीया को ज़ीया

ज़ीया(र)-ज़ीया को रीया बना दिया }

फिर दोपहर मे मैं छत पर चला गया. मैं ने कल की तरह स्टोर रूम मे जाकर गद्दे को ज़मीन पर डाल दिया फिर उस पर बेडशीट जो मैं अपने साथ लाया था उसे गद्दे पर डाल दिया.

और स्टोर रूम से बाहर आकर अपने छत पे आ गया.और ज़ीया के आने का इंतज़ार करने लगा

10 मिनट बाद ज़ीया अपनी छत पर आ गयी. रीया तो आराम कर रही होगी मतलब ये ज़ीया है.

मैं ज़ीया के छत पर आ गया.

अवी-रीया कितनी देर कर दी तुमने आने मे

ज़ीया(र)-10 मिनट तो देर से आई हू

अवी-फिर भी टाइम पर आ सकती थी

ज़ीया(र)-वो मम्मी और ज़ीया के सोने का इंतज़ार कर रही थी

अवी-ज़ीया सो गयी

ज़ीया(र)-हाँ,तभी तो आई हू

अवी-तुम मुझसे नाराज़ तो नही हो ना

ज़ीया(र)-नाराज़ किस लिए

अवी-कल के लिए

ज़ीया(र)-नाराज़ तो थी पर तुम्हे भी तो काम था

अवी- तुम्हारी नाराज़ी आज दूर कर देता हू

ज़ीया(र)-कर पाओगे

अवी-आज 2 बार करूँगा .

ज़ीया(र)-फिर ठीक है

अवी-पर आज कुछ नया करूँगा

ज़ीया(र)-क्या?

अवी-वो अंदर जाकर बताता हू

ज़ीया(र)-चलो ना फिर

मैं ज़ीया(र) को लेकर स्टोर रूम मे आ गया.

ज़ीया(र) ,स्टोर मे जो मैं ने जगह बना कर रखी थी उसे देख कर खुश हो गयी.

मैं ने गेट बंद कर दिया और पीछे से ज़ीया(र) को पकड़ लिया.

ज़ीया(र)-ये था सर्प्राइज़

अवी-ये तो मैं तुम्हे आराम से प्यार करने के लिए किया

ज़ीया(र)-फिर नया क्या करने वाले हो

मैं ज़ीया(र) की गंद की दरार मे हाथ डाल दिया

अवी-आज तुम्हारी गंद मारूँगा

ज़ीया(र)-वहाँ थोड़े कोई करता है

अवी-जिनको पसंद होता है वो करते है.तुमने ब्लू फिल्म मे देखा होगा

ज़ीया(र)-देखा है पर वो तो फॉरिन मे करते है. हमारे वहाँ ये सब नही होता

अवी-वो सब छोड़ो.मुझे तो करना है बस तुम कहो करने दोगि कि नही

ज़ीया(र)-पर वहाँ दर्द होगा.

अवी-पहली बार दर्द होता है. फिर नही.और मैं तुम्हे दर्द होने कैसे दूँगा. आराम से करूँगा तुम्हे पता भी नही चलेगा.

ज़ीया(र)-अगर दर्द हुआ तो

अवी-नही करूँगा

ज़ीया(र)-तुम्हारा बड़ा है और वो जगह छोटी है

अवी-जगह अपने आप बन जाती है.बस मुझे पर भरोसा रखो जैसे मैं तुम पर करता हू

ज़ीया(र)-ठीक है.

फिर क्या था मैं नीचे बैठ कर ज़ीया(र) की गंद पर कपड़ो के उपर से किस करने लगा .

साथ ही हाथो से गंद को दबाने लगा.

ज़ीया(र)-कुछ अजीब सा लग रहा है

अवी-मज़ा आ रहा है

ज़ीया(र)-हाँ

अवी-कपड़ो के उपर से इतना मज़ा आ रहा है तो सोचो बिना कपड़ो के कितना आएगा.

ज़ीया(र)-निकालो ना जल्दी

ये हुई ना बात ,ज़ीया(र) तय्यार हो गयी.

मैं ने लोवर के साथ पैंटी भी निकाल दी. ज़ीया(र) की कुँवारी गंद मेरे सामने थी.

ज़ीया(र) की गंद देख कर मुझे हीना की गंद की याद आ गयी. हीना की गंद की तरह थी ज़ीया(र)की गंद ,

रीया की गंद से ज़ीया(र) की गंद बड़ी थी.और सेक्सी थी.

मैं ने ज़ीया(र) के चूतड़ को अपने हाथो मे पकड़ कर खोल दिया.

जिस से ज़ीया(र) की गंद का छेद जो भूरे रंग का था वो मेरी आँख के सामने था.

ज़ीया(र) की गंद का छेद देख कर ही मेरे मुँह मे पानी आ गया. पर मुझे सब कुछ आराम से करना था जल्द बाज़ी करने से ज़ीया(र) मना कर सकती है.

मैं ने ज़ीया(र) की गंद को छोड़ दिया और खड़ा हो गया.फिर मैं ने ज़ीया(र) की टी-शर्ट निकाल दी.ज़ीया(र) नंगी हो गयी.

फिर मैं ने अपने कपड़े निकाल दिए और ज़ीया(र) को गद्दे पर लेटा दिया और खुद ज़ीया(र) के उपर आ गया.

फिर मैं ने ज़ीया(र) के होंठो पर किस करना शुरू कर दिया. ज़ीया(र) के होंठ इतने मस्त और मुलायम थे कि मैं होंठो को किस करने के बाद चूसने लगा.

ज़ीया(र) के होंठो को चूसने से ज़ीया(र) गरम हो रही थी. ज़ीया(र) ने अपने हाथ मेरी पीठ पर फिराना सुरू कर दिया.

और मेरे किस का जवाब मेरे होंठो को चूस कर दे रही थी.

करीब 5 मिनट के बाद हमने किस ख़तम कर दिया.

आज मैं ज़ीया(र) को पूरा गरम करके चुदाई करना चाहता था.इसी लिए मैं ज़ीया(र) की गर्दन पर किस करने लगा.

गर्दन पर किस करने से ज़ीया(र) की हालत खराब हो गयी.ज़ीया(र) सेक्स के नशे मे डूब गयी.

ज़ीया(र) शीष्कारिया लेने लगी और मुँह से सस्स्स्शह….. आआअहह की आवाज़ करने लगी.

मैं अपने काम मे लगा हुआ था.

मैं गर्दन पर किस कर रहा था और उधर मेरा लंड ज़ीया(र) की चूत पर किस कर रहा था.

लंड चूत पर रगड़ने से ज़ीया(र) की शीष्कारिया निकलने लगी.

ज़ीया(र) की शीष्कारिया पूरे रूम मे गूँज रही थी.

ज़ीया(र) ने अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया.और अपनी चूत पर अच्छे से रगड़ ने लगी .

ज़ीया(र) के ऐसा करने से मेरा काम आसान हो गया. ज़ीया(र) जितना गरम हो जाएगी उतना मेरे लिए अच्छा था.

थोड़ी देर किस करने के बाद मैं ज़ीया(र) के बूब्स चूसने लगा. ज़ीया(र) फिर गरम हो गई. बूब्स को दबाने से और चूसने से ज़ीया(र) शीष्कारिया लेने लगी. मुँह से सस्स्स्शह….. आआअहह की आवाज़े निकालते हुए मेरा साथ दे रही थी.

थोड़ी देर बूब्स के साथ खेलने के बाद मैं ज़ीया(र) की चूत को चाटने लगा. 3 बार चुदि हुई चूत चाट कर मज़ा आ रहा था.

ज़ीया(र) के दाने के साथ खेलने लगा .जीभ को जितना अंदर डाल सकूँ उतना अंदर डालने लगा.

ज़ीया(र) मेरे सर को पकड़ कर चूत पर दबा रही थी.

मैं ने यही सही मोका सोच कर उंगली पर तेल डाल कर उंगली को गंद मे डाल दिया.

गंद मे उंगली जाते ही ज़ीया(र) उछल पड़ी. मैं जितनी गति से जीभ अंदर डाल कर चाट रहा था उतनी की गति से उंगली को गंद मे डाल कर गंद मार रहा था.

ज़ीया(र) शीष्कारिया लेने लगी. आअहह ऐसे ही उूउउ आअहह आवाज़े लेने लगी.

फिर मैं धीरे धीरे उंगली को गंद मे अंदर बाहर करने लगा.

फिर मैं ने उंगली को बाहर निकाल लिया. और 2 उंगली पर तेल लगा कर धीरे धीरे अंदर डालने लगा. इधर मैं जीभ से चूत को चाट भी रहा था.

मैं ने एक साथ 2 उंगली गंद मे डाल कर गंद के छेद को खोलने लगा...साथ ही चूत भी चूस रहा था.

5 मिनट तक डबल मज़ा लेने के बाद ज़ीया(र) ने पानी छोड़ दिया. और मैं ने पूरा पानी पी लिया. और अपनी जीभ और उंगली ,चूत और गंद से बाहर निकाल ली.

 


अपडेट 293

{ रीया(ज़्)-रीया को ज़ीया

ज़ीया(र)-ज़ीया को रीया बना दिया }

जितना गरम करना था कर दिया.

फिर मैं ज़ीया(र) की टाँगो के बीच आ गया .लंड को ज़ीया(र) की चूत पर रख दिया. और एक झटके मे पूरा लंड चूत मे डाल दिया.

ज़ीया(र) की 4 दिन से चुदाई कर रहा था फिर भी ज़ीया(र) को दर्द हुआ.दर्द तो होगा ही ना ,3 बार तो चुदि है.

ज़ीया(र) की चूत पानी निकल ने से ,गीली होने के बाद भी उसको काफ़ी दर्द हुआ और ज़ीया(र) की चीख निकल गयी.

मैं ने ज़ीया(र) के मुँह को अपने मुँह से बंद कर दिया.

और धक्के मारने लगा .

ज़ीया(र) मस्ती मे आहहे भर रही थी. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था. पर मुझे चूत मारने मज़ा नही आ रहा था.

मैं सिर्फ़ ज़ीया(र) का पानी निकाल ना चाहता था.

5 मिनट के बाद ज़ीया(र) का पानी निकलने वाला था पर मैं ने लंड बाहर निकाल लिया.

ज़ीया(र) भूकि शेरनी की तरह मेरी तरफ देखने लगी.

अवी-घोड़ी बनो जल्दी

ज़ीया(र) को अपना पानी निकालना था. इस लिए वो घोड़ी बन गयी.

ज़ीया(र) को जल्दी से अपना रुका हुआ पानी निकालना था इस लिए ज़ीया(र) घोड़ी बन गयी.

मैं ने लंड पर तेल लगा लिया और कुछ तेल गंद की छेद पर डाल दिया. गंद पर तेल गिरते ही ज़ीया(र) समझ गयी कि मैं क्या करने वाला हू.

मैं ने लंड को ज़ीया(र) की गंद के छेद पर रख दिया.और ज़ीया(र) से कहा चीखना मत थोड़ा दर्द होगा.

ज़ीया(र) ने हाँ मे गर्दन हिला दी.

मैं ने लंड को पकड़ के एक झटका मारा कि लंड को टोपा अंदर चला गया.

ज़ीया(र) के मुँह से आहह निकल गया.

मैं ने अपना नॅपकिन निकाल कर उस से ज़ीया(र) के मुँह को बाँध दिया.

ज़ीया(र) ने कुछ नही कहा वो चुप चाप मेरा साथ दे रही थी.

फिर मैं ने ज़ीया(र) की कमर को पकड़ कर एक ज़ोर दार झटका मारा कि लंड 5 इंच तक अंदर चला गया.

अब सस्स्स्शह आआअहह सस्स्शह की आवाज़े निकाल रही थी. मैं ने लंड को थोड़ा सा पीछे खींच कर एक जोरदार झटका मारा कि पूरा लंड गंद के अंदर तक घुस गया.

ज़ीया(र) के मुँह से मुश्किल से नॅपकिन को चीर कर चीख निकल गयी.नॅपकिन और बंद कमरे की वजह से ज़ीया(र) की आवाज़ बाहर नही गयी.

ज़ीया(र) मुझेसे अलग होने की कोशिस कर रही थी.उसका बदन काप रहा था. 3 झटकों मे मैं ने पूरा लंड उसकी गंद मे डाला था.

उसकी गंद तो खून से लाल हो गयी.

मैं ने उसे कस के पकड़ लिया और फिर मैं 2 उंगली को ज़ीया(र) की चूत मे डाल कर तेज़ी से हिलाने लगा. जो पानी 1 मिनट से रुका हुआ था वो ज़ीया(र) की चूत से निकल गया.

पानी निकल ने से ज़ीया(र) का बदन ढीला पड़ गया. इस का फ़ायदा उठाते हुए मैं ने लंड को धीरे धीरे हिलाना सुरू किया. साथ ही कमर को छोड़ कर अपने होंठो से ज़ीया(र) के बूब्स दबाने लगा.

ज़ीया(र) को साँस लेने मे तकलीफ़ हो रही थी. वो अपना हाथ नॅपकिन खोलने के लिए उठा रही थी कि मैं ने उसे रोक दिया.

मैं ने खुद ज़ीया(र) के मुँह को आज़ाद कर दिया. ज़ीया(र) ने मुँह से एक लंबा दम छोड़ दिया.

और ज़ीया(र)ने मुझसे कहा दर्द हो रहा है. तुम बाहर नही निकालोगे मुझे पता है बस धीरे धीरे करना.मुझे दर्द हो रहा है

.प्ल्ज़ धीरे धीरे करना.

ज़ीया(र)की बात सही थी. मैं लंड बाहर नही निकालने वाला था.पर ज़ीया(र) का दर्द देख कर मैने धीरे धीरे गंद मारने का फ़ैसला किया.

मैं धीरे धीरे ज़ीया(र) की गंद मारने लगा. ज़ीया(र) को थोड़ा दर्द होने लगा पर बूब्स दबाने से मज़ा भी आ रहा था.

5 मिनट तक धीरे धीरे चुदाई करने के बाद मैं ने ज़ीया(र) के बूब्स दबाना बंद कर दिया. और कमर पकड़ धक्के मारने लगा.

और 5 मिनट तक मैं ज़ीया(र) की गंद धीरे धीरे मार रहा था. फिर धीरे धीरे ज़ीया(र) को मज़ा आने लगा .

ज़ीया(र) शीष्कारिया लेने लगी.

ज़ीया(र) की शीष्कारिया सुनकर मैं ने धक्के मारने की गति बढ़ा दी. ज़ीया(र) भी मेरे धक्के मारने के साथ अपनी गंद पीछे कर रही थी.

मैं धक्के मारने के साथ ज़ीया(र) की गंद पर 1 2 थप्पड़ मार देता.

थप्पड़ मारने से ज़ीया(र) को मज़ा आ जाता और अपनी गंद को उपर कर के पीछे कर देती

फिर मैं ने अपनी गंद मारने की रफ़्तार बढ़ा दी. और मैं ज़ीया(र) को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

ज़ीया(र) की शीष्कारिया और बीच बीच मे आने वाली चीख से मैं और जोश से ज़ीया(र) की गंद मारने लगा.

मैं 40 मिनट तक लगातार ज़ीया(र) की गंद मार रहा था. इतनी देर से गंद मारने से ज़ीया(र) की हालत पतली हो गयी.

ज़ीया(र) पूरी तरह थक गयी थी. ज़ीया(र) गद्दे पे गिरने वाली थी पर मैं ने ज़ीया(र) की कमर पकड़ रखा था जिस से ज़ीया(र) नीचे नही गिरी.

पर जब मैं ने अपना वीर्य ज़ीया(र) की गंद मे डाला तो हम दोनो एक साथ गद्दे पर गिर गये.

चुदाई से ज़ीया(र) थक गयी थी और जब मैं उसके उपर गिरा तो ज़ीया(र) की हालत और खराब हो गयी. मैं ने जल्दी से लंड ज़ीया(र) की गंद से बाहर निकाल लिया और ज़ीया(र) के उपर से अलग होकर बाजू मे लेट गया.

मैं ने लंड को देखा तो उसपर खून लगा हुआ था और ज़ीया(र) की गंद के छेद पर खून और मेरा वीर्य था.

 


अपडेट 294

मैं ने अपने लंड को अच्छे से देखा तो मुझे लगा मेरा लंड की हालत भी खराब हो गयी है.

6 दिन मे 2 कुँवारी चूत ,2 कुँवारी गंद,1 लगभग 1 कुँवारी गंद और पूरे मिलाकर 15 बार चुदाई की थी.इस 15 चुदाई मे मैं ने अपने लंड को देखा ही नही. लंड की हालत खराब हो गयी थी.

अगर मैने ज़ीया(र) की एक और बार चुदाई की तो मेरा लंड फिर कभी चुदाई की हालत मे नही रहेगा.

पर मैं ने तो ज़ीया(र) को कहा कि मैं उसकी 2 बार चुदाई करूँगा.

30 मिनट तक मैं सोचता रहा ,वही ज़ीया(र) आराम कर रही थी दूसरी चुदाई करने के लिए.

अवी-रीया अब कैसा लग रहा है

ज़ीया(र)-थोड़ा दर्द है

अवी-तुम्हे सेक्स करते हुए ज़्यादा दर्द हुआ

ज़ीया(र)-हुआ था पर पहली बार तो होता है

अवी-क्या फिर करना चाहती हो

ज़ीया(र)-तुम क्या चाहते हो

अवी-तुम्हे देख कर नही लगता कि तुम फिर कर पओगि

ज़ीया(र)-अगर तुम्हे करना है तो मैं कर लूँगी

अवी-(ये तो पीछे ही पड़ गयी) आज रहने देते है

ज़ीया(र)-क्यू?

अवी-तुम दुबारा नही कर पाओगि

ज़ीया(र)-वो तो है. पर तुमने कहा था कि 2 बार करेंगे

अवी-हाँ कहा था पर तुम्हारी ये हालत देख कर मैं ने अपना मन बदल दिया है. तुम्हारी गंद फट गयी है और मेरे लंड की हालत भी खराब हो गयी है .

ज़ीया(र)-कितने गंदी बाते करते हो. और देखु क्या हुआ

ज़ीया(र)-हाँ ,तुम्हारे इसकी तो हालत खराब हो गयी है. और तुमने मेरी भी क्या हालत कर दी

अवी-इसीलिए मैं कह रहा था कि आज रहने देते है

ज़ीया(र)-हाँ अब रहने देते है. मुझे भी आराम करना है और दर्द से छुटकारा पाना है

अवी-ये लो पेन किल्लर .इसे खाने से दर्द ख़तम हो जाएगा.

ज़ीया(र)-तुम कितना ख़याल रखते हो

अवी-ये लो प्रेग्नेन्सी की मेडिसिन

ज़ीया(र)-ये नही चाहिए

अवी-क्यू?

ज़ीया(र)-तुमने आगे से थोड़े ही किया है

अवी-फिर भी खा लेना. रिस्क नही लेना चाहिए

ज़ीया(र)-हाँ,ये सही कहा तुमने

अवी-अब चले

ज़ीया(र)-चलते है पर आज का 1 और बार करना बाकी रह गया

अवी-वो कल कर लेंगे

ज़ीया(र)-कल

अवी-हाँ कल,तुम रात भर और दिन भर आराम करना फिर 5.00 बजे छत पर आ जाना

ज़ीया(र)-मेरा दर्द कल तक कम हो जाएगा?

अवी-थोड़ा उपर से करेंगे जैसे गोलगप्पे की शॉप पर किया था

ज़ीया(र)-ये ठीक रहेंगा

अवी-तो फिर कल आ जाना 5.00 बजे

ज़ीया(र)-ठीक है मैं आ जाउन्गि

अवी-कपड़े पहन लो

ज़ीया(र) और मैं ने कपड़े पहन लिए.मैं ने ज़ीया(र) को सीडियो तक छोड़ दिया.

फिर वापस आकर स्टोर रूम को पहले जैसा बना दिया. और ताला लगा कर अपनी छत पर चला गया.

फिर फ्रेश होकर नीचे चला गया. अभी 5.20 बज रहे थे. सीतल और स्वेता दीदी अभी तक कॉलेज से आई नही थी. उनका कॉलेज 5.00 ख़तम होता है पर वो कॉलेज से हॉस्पिटल जाकर फिर 6.00 बजे घर आ जाती है.

मैं भी हॉस्पिटल की तरफ चला गया. मुझे अब हॉस्पिटल मे ज़्यादा देर रुकना चाहिए क्यू कि छोटी चाची की डेलिवरी 2 दिन के बाद होने वाली है पर कल भी हो सकती है. मुझे अब रीया ज़ीया का खेल ख़तम करना पड़ेगा.

और मैं कल से नही आज से 5.00 बजे हॉस्पिटल जाउन्गा फिर 8.00 बजे चाचा को घर लेकर आने के बाद मैं खाना लेकर वापस चला जाउन्गा.

जब तक मैं खाना लेता हू तब तक माला चाची के पास रहेंगी. मैं ने माला को कल से जल्दी आने को कहा है.

सोचते हुए मैं हॉस्पिटल पहोच गया

 
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