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मैं और मेरा परिवार

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मैं ने शीला को बेड पर लिटा दिया. और शीला के उपर आ गया.

शीला ने अपनी आँखे बंद करके रखी थी. जिस से उसका मासूम चेहरा देख कर उसके प्यार मे डूब जाने का मन हो रहा था.

शीला के बूब्स जिसे किसी ने टच नही किया था.उसको देख कर मेरे मुँह मे पानी आ गया.

मैं उसके बूब्स को चूसना चाहता था पर मैं उपर से नीचे जाने का सोच रहा था.

मैं ने शीला की आँखो पर किस किया फिर उसके माथे पर किस किया.

और उसको विश्वास दिलाया कि वो सेफ हाथो मे है

शीला मेरे किस करते समझ गयी कि अब वो किसी और की होने वाली है.

खुद को किसी और के नाम कर देना मतलब उस पे खुद से ज़्यादा विश्वास करना उसे खुद से ज़्यादा प्यार करना.

शीला ने अपने शरीर के साथ अपनी आत्मा भी मेरे नाम कर दी.

खुद को मेरे नाम करने के ख़याल से शीला की साँसे तेज चलने लगी.

मैं ने उसके होंठो पर एक हल्का किस किया. ऐसा करते शीला के होंठ उपर उठ कर मेरे होंठो से मिलना चाह रहे थे.

मतलब वो चाहते थे कि मैं उनको प्यार करता रहूं

मेरे किस तोड़ते उसके होंठ उपर उठ कर मुझे किस करने लगे

जैसे शीला मेरे प्यार के नशे मे डूब कर मेरे इशारो पे नाच रही हो.

वैसे मैं भी उसके बदन की खुषभू के नशे मे डूब कर उसको प्यार करने लगा.

मैं ने उसको जो चाहिए वो दे दिया .मैं ने हमारे होंठो को एक कर दिया.

हमारे होंठ एक होते हम एक दूसरे का रस पीने लगे.

उसके दोनो होंठो मे रस की कोई कमी नही थी. और मेरे पेट मे कुछ नही था.

किस करते हुए हम एक दूसरे की जीभ को चूसने लगे.

शीला जिस ने कुछ दिन पहले अपना पहला किस किया था.आज वो मुझसे अच्छा किस कर रही थी

ये थी 2 दिन की जुदाई ,

उस 2 दिन मे शीला काफ़ी मेच्यूर बन गयी थी

वो मुझे ऐसी वैसी हरकत करके नाराज़ नही करना चाहती थी.

प्यार करते हुए पार्टनर टक्कर देने वाला हो तो प्यार करने मे मज़ा आता है.

वरना ऐसा लगता है कि एक बेजान जिस्म को प्यार कर रहा हूँ.

शीला की जवानी तो आग उगल रही थी.

ऐसी आग जिस मे मेरा शरीर जल रहा था

और इस जलन पे हमारा किस करना मल्लम जैसा लग रहा था.

किस करने से शीला खुश हो गयी. होंठो पे किस करते हुए मैं गर्दन पे किस करने लगा.

गर्दन पे किस करते वो उस तरफ गर्दन घुमा देती जिस तरफ मैं किस करता था.

शीला के ऐसा करने से मैं उसके होंठो पे किस करके दूसरी तरफ गर्दन पे किस करने लगा.

गर्दन पे किस करने से शीला को गुदगुदी होनेलगि.

जिस से उसके चेहरे पे स्माइल आती मुझे अच्छा लगने लगा.

मैं लगातार गर्दन पे किस करके उसको हंसाने लगा.

इस खेल मे मज़ा आ रहा था. मैं शीला को ऐसे प्यार करता गया.

गर्दन से बूब्स तक जाने मे कितनी देर लगती है. लाइट की स्पीड से भी कम टाइम लगता है.

शीला के निपल पर किस करते शीला की शीष्कारी निकल गयी.

शीला के बूब्स ऐसे थे कि बस प्यार करता रहूं

पूरी शीला उन्छुई थी. जिस से शीला के बदन के हर एक अंग को प्यार करने मे मज़ा आ रहा था.

मैं तो प्यार करने मे सब से आगे रहता था.

मैं ने शीला को ज़्यादा तड़पाना ठीक ना समझते हुए उसके बूब्स को मुँह मे ले के चूस ने लगा.

वाउ ,शीला के बूब्स को मुँह मे लेते ऐसा लग रहा था जैसे इस सेशन का पहला आम मैं चूस रहा हूँ

शीला के मीडियम साइज़ के बूब्स चूस ने के लिए मैं साल भर बिना बूब्स चूसे रह सकता हूँ.

इतने मस्त थे शीला के बूब्स

सिंपल पर किसी की भी नज़रों को खुद से अलग नही होने देती थी.

शीला तो मुझसे प्यार करने का सोच कर गरम हो चुकी थी.

उसकी गरमी कम होने की जगह बढ़ रही थी

मैं शीला को प्यार के गहराई मे ले जाना चाह रहा था. इसी की शुरुआत बूब्स से की.

मैं एक बूब्स को धीरे धीरे हाथ से मसल ने लगा और दूसरे बूब्स को चूस ने लगा.

दोनो बूब्स पर मेरा क़ब्ज़ा था ऐसे मे शीला अपने सर को इधर उधर घुमा रही थी.

शीला मुझसे कितनी खुश है ये दिखाने के लिए मेरे सर को अपने बूब्स पे दबाने लगी.मेरे सर पे अपनी उंगलिया घुमाने लगी.

साथ ही शीला ने अपनी शरम को मार के शीष्कारिया लेनी सुरू किया. शीला के मुँह से अयाया अया की आवाज़ आने लगी

उसकी शीष्कारिया मेरा जोश बढ़ा रही थी.

शीका की बेशर्मी मेरे लिए अच्छी साबित हो रही थी.

बेशरम पार्टनर हो तो बेशरमि करने मे मज़ा आता है.

पर शरम हो तो बेशरमि करके पार्टनर को बेशरम बनाने मे डबल मज़ा आता है.

शीला 75% बेशरम बन गयी थी क्यूँ कि वो मुझे नाराज़ करना नही चाहती थी. और 25% शरम जो औरत का गहना होती है वो शीला अपने साथ लेकर आई थी

एक बूब्स का रस पीने के बाद दूसरे बूब्स को चूसना सुरू किया.

शीला के बूब्स को चूसने मे मज़ा आ रहा था पर मसल्ने मे मेहनत करनी पड़ रही थी.

उसके बूब्स पे मैं पूरी मेहनत करने लगा.

ऐसे मेहनत हर कोई करना चाहता है. मेहनत मे मज़ा जो मिल रहा था.

जैसे जिम मे मेहनत करना हर कोई पसंद करता है पर घर का सामान इधर उधर रखने मे हाथ नही लगाते.

शीला पे मेहनत तो तन मन और दिल लगा कर कर रहा था

बूब्स चूसने के बाद मसल ने मे आसानी हो रही थी. और मसले हुए बूब्स को चूसने मे मज़ा डबल आ रहा था

शीला को असली प्यार चाहिए था.इस लिए मैं ने बूब्स चूसना जल्दी बंद किया.

शीला के बूब्स चूसने के बाद मैं उसकी नाभि पर किस करने लगा.

पेट पर किस करने से शीला को गुदगुदी हो रही थी.

उसको मछलि की तरह मचलते हुए देख कर मुझे मज़ा आ रहा था.

वो बार बार कहने लगी कि वहाँ मत करो गुदगुदी हो रही है.

मैं ने उसकी बात सुन ली.क्यूँ कि अब चूत की बारी थी.

मैं नीचे आकर सलवार के उपर से उसकी चूत पे किस किया.

ऐसा करते शीला ने मेरी तरफ देखा. शीला के मेरी तरफ देखने तक उसके सलवार का नाडा मेरे दातों मे आ गया था.

मेरे मुँह मे नाडा देखते उसने अपनी आँखे बंद कर ली

मैं ने सलवार का नाडा खोल दिया और उसकी सलवार निकालने लगा.

अवी-शीला सलवार निकालने दो

शीला ने अपनी गंद उपर कर ली और मैं ने सलवार निकाल दी. सलवार निकालते हुए शीला ने पैंटी के उपर हाथ रख दिया.

जैसे मुझे इतने आसानी से अपना खजाना लूटने नही देगी.

पर मैं भी वो चोर था जो आँखो के सामने से आँसू चुरा लेता हूँ और आँखो को पता भी नही चलता.

पर यहाँ सिर्फ़ मनाने से काम हो रहा है तो चोरी करने की ज़रूरत क्या है.

मुझे उसका ऐसा करना अच्छा लगा.पैंटी को उसके हाथ छुपा नही पा रहे थे फिर भी वो पूरी कोशिस कर रही थी अपना खजाना आसानी से मुझे ना मिले

मैं ने शीला की गोरी जाँघो पे हाथ से सहलाना सुरू किया.

हाथ से सहलाने के बाद मैं ने उसकी जाँघो पे किस करना सुरू किया.

खजाना नही मिल रहा था तो मैं खजाने को लूटने की पूरी कोशिस करने लगा.

शीला का हाथ अभी तक पैंटी के उपर था.

मैं ने जाँघो पर किस करते हुए उसकी चूत पर जाने का फ़ैसला किया.

मैं ने शीला के हाथो पर किस किया और उसे हाथ निकालने को कहा.

शीला ने ना ना करते हुए फॉयनली अपना हाथ निकाल दिया .

अब समझा वो पैंटी छुपा क्यूँ रही थी. मेरे प्यार मे वो इतनी पिघल गयी कि उसकी पैंटी गीली हो गयी.

मैं ने उसकी गीली पैंटी पर किस किया .

मेरे ऐसा करते शीला ने चद्दर को पकड़ लिया .और खुद को मेरे नाम करने के लिए खुद तय्यार करने लगी.

फिर मैं ने धीरे धीरे शीला की पैंटी निकालना सुरू किया.

मुझे पता था कि उसकी चूत मे देखने लायक कुछ नही होगा. क्यूँ कि उसने चूत पर बड़ा जंगल बना कर रखा था शीला ने.

फिर भी उसकी चूत मैं धीरे धीरे देखना चाहता था.

शीला शरमा रही थी. जिस से उस ने गंद नही उठाई.

अवी-शीला मुझे प्यार करने दो

शीला ने हाँ मे गर्दन घुमा दी. फिर से मैं उसकी पैंटी निकालने लगा.शीला ने अपनी गंद उपर कर दी.

पैंटी घुटने तक आते ही शीला की चूत मेरे सामने आ गयी.

शीला की चूत देखते मैं देखता रह गया.

शीला की चूत पर बाल का एक भी निशान नही था.शीला ने अपनी चूत शेव की थी. मेरे लिए

ज़रूर शीला की सहेली ने मेरे लिए शीला को तय्यार किया होगा.

मैं शीला की चूत को देखने लगा. गुलाबी,चिकनी जिस पे कल तक जंगल था. वो बिना जंगल की चूत देख कर मैं खुश हो गया.

मैं सोच रहा था कि शीला की चूत चूसने मे प्राब्लम होगी. पर शीला ने अपनी चूत चिकनी कर के मुझे खुश कर दिया.

शीला की गीली चूत देख कर मैं खुद को रोक नही पाया और ओरल सेक्स का लास्ट पार्ट शुरू करने लगा.

मैं शीला के पैरो की बीच मे आ गया.

मैं ने चूत के होंठो को अपने उंगली मे लेकर दबाना शुरू किया. उंगलियो से चूत को खोल कर अंदर का लाल भाग देखने लगा.

उंगलियो से चूत के साथ खेलने से शीला का बुरा हाल होने लगा.

उसको ज़्यादा तड़पाने से अच्छा है कि मैं उसको वो सुख दूं जिसे हर लड़की पाना चाहती है

मैं ने देर ना करते हुए शीला की चूत से उंगली हटा ली .और चूत को अपने हाथ से मसल्ने लगा.

शीला ने उस्दिन अपने हाथ से चूत को मसला था.जिस से उंगली की जगह हाथ से मसलाना फमिलेर लग रहा था.

चूत को हाथ से मसल ने के साथ अपना दूसरा हाथ शीला की जाँघो पर फेरने लगा.

चूत मसल ने से शीला के बदन मे बिजली दौड़ने गयी.शीला फिर से अपने सर को इधर उधर करने लगी.

मैं ने शीला को ज़्यादा देर तड़प ने नही दिया और शीला की चूत की गरमी शांत करने के लिए अपनी जीभ से शीला की चूत को चाटने लगा .

जीभ का गीला पन अपनी चूत पर महसूस करते शीला के मुँह से शीष्कारी निकल गयी.

जिस तरह बूब्स चूस्ते हुए मेरे सर को अपने बूब्स पे दबा रही थी ठीक उसी तरह चूत को चाटने से मेरे सर को अपनी चूत पे दबाने लगी .

शीला की चूत भट्टी की तरह गरम हो चुकी थी.

जिस पे मेरी जीभ चूत को ठंडक पहुँचाने का काम कर रही थी.

जीभ से चाटने के साथ चूत के साथ छेड़खानी भी कर रहा था.

किस करने से उसकी चूत गीली हो चुकी थी . जिस से मैं ने चूत को चाट कर साफ करने लगा.

चाटने के बाद मैं शीला की चूत को चूस ने लगा.

शीला की चूत के होंठ जीभ की वजह से थोड़े खुल गये

ऐसे मे मैं शीला की चूत का मज़ा लेने लगा.

चूत की गर्माहट मेरे मुँह को जला रही थी.

मेरा गला सुख रहा था.

मेरा सारा थूक शीला की गरम चूत के वजह से हवा मे उड़ गया.

मुझे पानी पीने की सख़्त ज़रूरत थी.

ऐसे मे शीला मेरी मदद कर सकती थी.

और उसने ऐसा किया भी मेरी प्यास बुझाने के लिए चूत से पानी निकाल ने को तय्यार हो गयी.

शीला ने मेरी प्यास बुझा दी.

शीला ने अपनी चूत का पानी मुझे पिला दिया.

शीला की कुवारि चूत का पानी पीने मे मज़ा आ गया.

शीला की चूत का पानी अमृत था .

और वो अमृत पीकर मैं मस्त हो गया. और शीला अपना पानी मुझे पिला कर ठंडी पड़ गयी

 


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शीला का पानी पीकर दिल खुश हो गया.

शीला का अमृत पी कर तो मेरी प्यास हमेशा के लिए बुझ गयी.

मैं तो अब तक कितनी कुवारि चूत का पानी पी चुका था पर शीला पहली बार किसी को अपना पानी पिला हल्का महसूस कर रही थी.

शीला की खुशी का कोई ठिकाना नही था.

मैं ने शीला का पानी पीने के बाद भी अपना काम जारी रखा. शीला की चूत का लास्ट ड्रॉप भी पी लिया.

चूत को साफ करने के बाद मैं वापस उपर की तरफ जाने लगा.

शीला अपना पानी पिला कर हवा मे उड़ रही थी.उसको ज़मीन पर लाना ज़रूरी था.

शीला को पूरे होशो आवाज़ मे प्यार करना चाहता था.

और शीला को हँसते हुए ज़मीन पर लाना सबसे अच्छा होगा.

मैं ने उसके नाभि पर किस किया .जिस से शीला को गुदगुदी होने लगी. और वो हँसते हुए होश मे आ गयी.

शीला के चेहरे पे स्माइल देख कर मेरे दिल को सुकून मिला

शीला के होश मे आते मैं ने उसके निपल पर किस करके वापस उसकी होंठो का रस पीने लगा.

इस बार मेरे होंठो मे उसके होंठो से ज़्यादा रस था.

मेरे प्यार करने से उसका रस ख़तम हो चुका था और उसकी चूत का पानी पीने से मेरी प्यास बढ़ गयी.

मेरे होंठो पे उसकी चूत का नशीला पानी लगा हुआ था .जो उसे किस करने से वो फिर से सेक्स के नशे मे डूब गयी.

शीला मेरे प्यार से इतनी खुश थी कि मैं उसे नही वो मुझे किस कर रही थी.

कोई भी किस करे ,मज़ा दोनो को आ रहा था.

शीला अपनी सहेलियो की रास लीला सुन सुन कर पीएच.डी कर चुकी थी जिस से उसके गरम होते पूरा मज़ा ले रही थी.

शीला आज मेरे साथ रासलीला कर रही थी.

शीला मुझे किस करके अपनी चूत का पानी पीने लगी.

शीला इतनी सेक्स मे डूब गयी कि वो मेरे होंठो को काटने लगी.

जंगली बिल्ली बन चुकी थी .मेरे होंठो को काटने के साथ मेरी पीठ को नोच रही थी.

उसका दर्द मुझे अच्छा लग रहा था क्यूँ की थोड़ी देर बाद मैं उसको दर्द देने वाला था.

शीला भी मेरे हथियार का वॉर बर्दास्त करने को पूरी तय्यार हो चुकी थी.

लोहा गरम है तो हथौड़ा मार देना चाहिए.

और लोहा इतना हसीन हो तो उस पे अपने हथौड़े से डिज़ाइन बना कर सुंदर मूर्ति बनाने को मैं तय्यार था.

मैं ने थोड़ी देर शीला को किस किया और फिर उसके आँखो मे देखने लगा.

अवी-शीला वक्त आ गया कि हम एक हो जाए

शीला-मैं कब से इसका इंतज़ार कर रही हूँ. मुझे अपना बना लो.

शीला के हाँ करते मैं ने जीन्स और अंडरवेर निकाल दी.

शीला को ना मैं ने लंड देखने दिया और ना चूसने के लिए कहा.

अपने कपड़े निकालने के बाद शीला की गंद के नीचे पिल्लो रख दिया.

शीला को मेरा गन्ना कैसा है वो बता दिया था.

अब दिखाने की जगह सीधा फील करवाता हूँ.

शीला ने नेक्स्ट हमले के लिए अपनी आँखे बंद की.

मैं ने लंड पर थोड़ा तेल लगा लिया. मैं शीला को ज़्यादा दर्द नही देना चाहता था.

लंड पर तेल लगाने के बाद मैं ने शीला के पैरो को फैला दिया .और उसकी कुवारि चूत को आख़िरी बार देखने लगा.क्यूँ की थोड़ी देर बाद उसकी चूत पर मेरे लंड का स्टंप लगेगा.

मैं ने उसकी चूत पर हाथ रख कर उसकी गर्मी का पता किया और लंड को चूत के उपर रगड़ने लगा.

मेरे लंड की हार्डनेस से उसकी चूत डर के मारे ढीली पड़ रही थी.

मैं ने उसकी चूत को डराना बंद किया और लंड को चूत अच्छे से सेट किया.

लंड को देख कर अगर चूत डर जाएगी तो उनको एक होने मे मुश्किल होगी.

लंड को देखते ही चूत को उछल कर खुश होनी चाहिए तभी उनका एक होना हमेशा याद रहेगा.

ये बात शीला की चूत समझ गयी कि उसे डरना नही चाहिए .क्यूँ कि लंड उसको डराने नही अपना बनाने आया है.

लंड और चूत मे म्यूचुयल अंडरस्टॅंडिंग ज़रूरी है.ताकि वो एक दूसरे को अपना प्यार दे सके.

मेरे लंड का तेल शीला की चूत पर लग गया और जैसे ही मैने हल्का पुश किया लंड का टोपा तेल की वजह से शीला की चूत मे चला गया.

लंड का टोपा अंदर जाते ही शीला को दर्द हुआ . उसके मुँह से हल्की चीख निकल गयी. पर ये तो होता ही है.

इस चीख से चूत और लंड का रिश्ता मज़बूत होता है.

जैसे ठोकर खा कर इंसान मज़बूत होता है वैसे लंड के दिए हुए दर्द से चूत और लंड का रिश्ता मज़बूत होता है.

पसीने और खून से इस रिश्ते की शुरुआत होती है.

चलो खून निकाल कर रिश्ता बना लेता हूँ.

मैं लंड को हाथ मे पकड़ कर वाइब्रट करने लगा जिस से लंड का टॉप चूत को खोलने लगा.

मेरा ऐसा करते शीला ने फिर से अपनी आँखे बंद कर ली. और सहेली की बाते याद करने लगी कि पहली बार दर्द होता है.

पहली चुदाई मे सहेलियो की टिप्स बहुत काम आती है.

शीला के आँखे बंद करते ही मैं ने उसकी सील तोड़ दी.

एक प्यार भरा झटका जिस से हम एक हो गये.

जैसे पहली बार बच्चा इस दुनिया मे रोते हुए आता है तो माँ को खुशी होती है पर ज़िंदगी भर बेटे के रोने से पहले माँ रोती है. वैसे ही पहली बार प्यार करने से दर्द होता है पर बाद मे मज़ा ही मज़ा आता है.

शीला की चूत ने मेरे लंड का स्वागत खून का तिलक लगा कर किया.

इधर चूत खून के आसू रो रही थी तो उधर शीला की आँखो से खुशी के आसू निकलने लगे.

ऐसे आसू जिसमे दर्द था पर खुशी वाला दर्द था.

खुशी वाला दर्द हो तो ऐसी खुशी सब के साथ शेयर करने का दिल करता है.

शीला अपने प्यार को चिल्लाकर सब को बताना चाहती थी. कि वो मेरी हो गयी.

शीला चिल्लाने लगी

उसकी चीखो मे जो दर्द था उसको कम करने के लिए मैं ने शीला के बूब्स दबाना सुरू किया.

ऐसा करने से उसका दर्द तो कम हो जाएगा पर मुझे उसे उसकी मनपसंद चीज़ उसे दे कर दर्द ख़तम करना था.

शीला को दर्द देने का दिल नही कर रहा था. पर ये दर्द ही उसके लिए जन्नत के गेट खोलने वाले थे.

दर्द के बाद अगर जन्नत मिलती है तो क्या कहना

पर शीला को जन्नत मे ले जाने के लिए आख़िरी बार दर्द देना होगा.

मैं ने एक और झटका मार कर पूरा लंड शीला की चूत मे डाल दिया.

और उसके उपर आख़िर उसकी चीखो को पीने लगा.

अब तक उसका रस पी रहा था अब उसकी चीखे पीने लगा.

शीला अपने दर्द को मुझे बताने के लिए मुझे किस करने लगी.

शीला की आँखो मे पानी मेरे किस करने से बंद होने लगा

शीला दर्द के वजह से मेरे होंठो को काट रही थी.

मैं उसके होंठो को चूसने के साथ बूब्स भी दबा रहा था

ऐसा करने से शीला को मेरे प्यार ने दर्द को बर्दास्त करना सिखा दिया.

मेरा लंड के लॉक सिस्टम की तरह शीला की चूत मे पर्फेक्ट फिट हो गया.

जैसे शीला की चूत सिर्फ़ मेरे लंड के लिए बनी हो.

शीला की टाइट चूत ने मेरे लंड को हिलने भी नही दिया.

शीला को मुझे किस करते हुए देख कर मैं ने अपने कमर को हिलाना शुरू किया.

कमर को हिलाते हुए शीला ने किस करने मे ज़्यादा जोश दिखाया.

क्यूँ की लंड चूत मे पर्फेक्ट फिट हो गया था.जिस से लंड थोड़ा हिलने से शीला को दर्द होने लगा.

और अपना दर्द कम करने के लिए मेरे होंठो को ज़्यादा जोश मे आकर चूसने लगी.

मैं धीरे धीरे अपनी कमर हिलाने लगा. ताकि उसको ज़्यादा दर्द ना हो

मैं ऐसे ही शीला की चुदाई करने लगा.

शीला को किस करते हुए कमर को हिला रहा था ,लंड को एक बार भी बाहर नही निकाला.

शीला ने किस करने के बाद मुझे गले लगा लिया.

शीला के गले लगा ने से मैं लंड को शीला की चूत मे पेलता गया.

शीला ने अपने पैरो से और हाथो से मुझे पकड़ रखा था.

जिस से मेरे धक्के से हम दोनो आगे की तरफ सरकने लगे.

मेरे कमर हिलाने से उसकी चूत मे जगह बन ने लगी.

चूत के खुलते ही शीला ने अपनी पकड़ ढीली की.

शीला को धीरे धीरे मज़ा मिलना सुरू हो गया.

और मैं ने अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकाला.

मेरे लंड पे हमारे प्यार का निशाना लगा हुआ था.

शीला की जवानी का खून मेरे लंड पे लगा हुआ था.

मैं ने लंड को वापस उसकी चूत मे पेल दिया.

ऐसे लंड बाहर निकाल कर फिर से चूत मे पेलने लगा.

हमारा प्यार ऐसे चल रहा था कि शीला ने अपने नाख़ून मेरी पीठ मे फसाने सुरू किए .

शीला के ऐसा करते मैं ने धक्के मारने की गति बढ़ा दी.

अवईीईईईईईईईईईईईईईईईईई

मेरा नाम लेकर शीला झड गयी.

शीला ने पानी निकालते उसने अपनी पकड़ ढीली की और मैं उसके उपर से उठ गया.पर लंड को उसकी चूत मे रहने दिया.

शीला के पैर को पकड़ कर खुद को पोज़िशन मे लाकर शीला की चूत से लंड बाहर निकाल कर फिर अंदर डालने लगा.

पहले पानी की चुदाई प्यार वाली थी. अब प्यार के साथ मज़े वाली चुदाई करने की बारी थी.

मैं ने धीरे धीरे लंड को इन आउट करना शुरू किया .

ऐसा करते शीला भी मस्ती मे आ गयी.

मैं स्लोली स्लोली लंड को शीला की चूत मे डाल कर प्यार करने लगा.

शीला ने शरमाना छोड़ कर शीष्कारियाँ लेनी शुरू की.

मैं ने शीला की शीष्कारियो का वॉल्यूम बढ़ाना शुरू किया.

मैं ने धक्को की गति बढ़ा दी.

शीला ने अपनी गंद को उछालना सुरू किया.

अब चुदाई मे मज़ा आने लगा.

शीला का 1स्ट टाइम था. उसे इतने प्यार की आदत नही थी.

शीला इतना प्यार संभाल नही पाई और फिर झड गयी.

शीला के झाड़ते ही मैं उसके उपर से अलग हो गया. और उसको अपनी गोद मे अपनी तरफ मुँह करके बैठा दिया.

मेरा लंड चूत पे था और वो मेरी गोद मे बैठ कर अपनी कमर हिलाने लगी.

मैं भी उसकी गर्दन पे किस करते हुए उसे प्यार करने लगा.

किस करने से शीला चुदाई मे पूरा साथ देने लगी.

चुदाई और ज़्यादा लंबी चलने वाली थी. मेरा वीर्य निकलने तक शीला एक और बार अपना पानी निकालेगी. ऐसा मुझे लग रहा था.

ऐसा हो इस लिए रहा था कि मैं शीला को किस करके उतेज़ित कर रहा था.

शीला के फॉर्म मे आते मैं ने उसकी चुदाई की गति बढ़ा दी.

अब सिर्फ़ चूत और लंड का खेल शुरू हो गया.

खेल मे सिर्फ़ चूत और लंड रह गये थे.

कौन अपना पानी पहले निकाल कर खेल हार कर जीतना चाहता है ये देखना बाकी था

मैं अपने लंड को जिताने की पूरी कोशिश कर रहा था.

इसमे ऐसा लग रहा था कि शीला भी मेरा साथ दे रही है.

इस प्यार भरे खेल मे हम दोनो जीत गये और हार गये.

शीला और मैं एक साथ झड गये

मैं ने अपना गरम लावा शीला की चूत मे डाल दिया.

शीला ने मेरे वीर्य के लिए अपना पानी निकाल कर जगह बना दी.

शीला का पानी और मेरा वीर्य एक होते ही हमारे शरीर भी एक हो गये.

मैं शीला के उपर गिर गया.

शीला मेरे गले लग गयी.

मैं ने शीला को पकड़ कर पलटा दिया. जिस से मैं नीचे और शीला मेरे उपर आ गयी.

ऐसा करने से शीला की चूत से लंड बाहर निकल गया.

शीला की कमर का नीचे का भाग मेरे उपर से हट गया.और शीला मेरे चेस्ट पे सर रख कर लेट गयी.

 
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शीला की चूत मे वीर्य डालने के बाद वो मेरे चेस्ट पे सर रख लेट गयी.

थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे.

फिर नॉर्मल होते ही मैं शीला के सर पे हाथ से सहलाने लगा.

अवी-शीला

शीला-ह्म्म्मम

अवी-प्यार करके कैसा लग रहा है.

शीला-पता नही

अवी-फिर से शुरू मत हो जाना

शीला मेरी बात सुनकर हँसने लगी

शीला-आज पता चला कि मैं तुमसे प्यार ना करती तो मेरा क्या होता.

अवी-क्या होता

शीला-इस रात मे जो मिला वो ज़िंदगी भर नही मिलेगा ,

अवी-क्या मिला

शीला-मैं ने तुम्हे प्यार करके कोई ग़लती नही की.अगर ना करती तो ज़िंदगी भर पछताती रहती.

अवी-चलो अच्छा हुआ तुम समझ गयी.

शीला-समझ गयी कि मेरी सहेलिया मुझे लकी क्यूँ कहती है

अवी-क्यूँ कहती है

शीला-क्यूँ कि मुझे तुम्हारा प्यार मिला है

अवी-प्यार तो तुम्हारी सहेली को भी किया है.

शीला-वो प्यार नही था. मेरे साथ जो किया वो प्यार था

अवी-तुम्हे कैसे पता चला

शीला-मैं ने उस प्यार को महसूस किया है

अवी-और क्या महसूस किया

शीला-बहुत कुछ

अवी-चलो बाथरूम मे जाकर फ्रेश होते है.

शीला-नही. मैं ऐसे ठीक हूँ

अवी-नीचे खून लगा हुआ है.

शीला-पता है. पर मैं ऐसे रहना चाहती हूँ

अवी-इन्फेक्षन हो जाएगा.

शीला-नही होगा.

अवी-फ्रेश क्यूँ नही होना चाहती,

शीला-क्यूँ की मैं तुम्हारा प्यार और निशानी अपने साथ मेले से लेकर जाउन्गी

अवी-निशानी

शीला-मैं तुम्हारी बच्चे की माँ बन ना चाहती हूँ. अपने प्यार की निशानी हमेशा अपने साथ रखना चाहती हूँ

अवी-तुम्हे पता है तुम क्या कह रही हो

शीला-हाँ,प्ल्ज़ मना मत करना.

अवी-ऐसा करोगी तो तुम बदनाम हो जाओगी.

शीला-उसके बारे में मैं ने सोच लिया है जिस से मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनूँगी और बदनाम भी नही होउंगी

अवी-वो कैसे

शीला-थोड़ी देर पहले तुम्हे कहा था ना कि मैं गाओं जाकर शादी करूँगी

अवी-फिर भी रिश्क है

शीला-वो मैं देख लूँगी.यहाँ से जाते 1 हफ्ते के अंदर शादी कर लूँगी.

अवी-ठीक है. पर कोई मुसीबत हुई तो मुझे कॉल करना.(शीला के साथ प्यार करके इतना सुकून मिला कि मैं उसे ना कैसे कर सकता था)

शीला-वो तो करूँगी ही

और शीला मेरे उपर से उठ कर खड़ी हुई.

वो अपने पैरो को फैला कर खड़ी हुई.और अपने कपड़े पहने ने लगी

अवी-क्या कर रही हो

शीला-मुझे अब जाना होगा.

अवी-इतनी जल्दी

शीला-क्या मतलब

अवी-फिर से प्यार नही करोगी

शीला-दर्द होगा और देर भी होगी

अवी-दर्द की दवा है मेरे पास, और तुम रात भर यहीं रुकने वाली हो

शीला-रात भर ,ये नही कर सकती.मेरे माता पिता मेरा इंतज़ार कर रहे होगे

अवी-वो तुम्हारी सहेली संभाल लेंगी.मैं ने उनको सब समझा दिया है.

शीला-ये पहले क्यूँ नही बताया

अवी-अब बताया ना,चलो फ्रेश होते है.

शीला-पर मेरी निशानी

अवी-फिर से प्यार करेंगे,

शीला-ले चलो मुझे

मैं ने शीला को अपनी गोद मे उठा कर बाथरूम ले गया.

फिर शीला को गरम पानी से नहला दिया.

उसकी चूत को अच्छे से साफ करके थोड़ी देर गरम पानी से सिकाई करने लगा.

ऐसा करने से शीला मुझ पे फिदा हो गयी.टवल से शीला को पोछ दिया.

मैं ने शीला को उठा कर वापस बेड पर लिटा दिया.

और उसे पेन किल्लर खिला दी.

और मैं वापस बाथरूम मे आ गया और लंड को साफ करने लगा.

मेरे फ्रेश होने तक शीला ने आराम किया

मेरे आते शीला ने अपने उपर की चद्दर थोड़ी उपर की

और मुझे चद्दर के अंदर लेके मुझे प्यार करने लगी.

शीला को पता था कि कल के बाद उसे यहाँ से मेले से वापस जाना हॉंगा .इस लिए उसने अपने दर्द की परवाह किए बिना मुझे फिर से प्यार करने दिया.

शीला को फिर से प्यार करने से पूरी रात यादगार हो गयी.

दूसरी बार प्यार करके हम दोनो इतने एक दूसरे के प्यार मे डूब गये कि प्यार करके वैसे सो गये.

 


698

शीला और मैं सो गये. पहली चुदाई के सपने देखते हुई शीला मुझसे चिपक कर सो गयी

मैं भी शीला के नंगे बदन की गर्मी मे आराम से सो गया.

मैं अलार्म लगा कर रखा था कि मैं सुबह शीला की एक और बार चुदाई कर सकूँ.

एक नींद पूरी करने के बाद हम दोनो अलार्म की आवाज़ सुनकर उठ गये.

मैं तो थकावट की वजह से फिर से सोने वाला था पर शीला ने मुझे सोने नही दिया.

उसे पता था कि ये हमारी पहली और आख़िरी रात है.

इस लिए वो मुझे और एक बार प्यार करना चाहती थी.

पेन किल्लर की वजह से उसका दर्द कम हो चुका था.

मेरे साथ 2 बार चुदाई करके वो अपनी शरम ख़तम कर चुकी थी जिस से शीला खुद लंड लेना चाहती थी.

और शीला मेरे उपर आ गयी.

उसकी शरम पहली चुदाई के साथ गायब हो गयी.थी

शीला-अवी उठो ना ,तुम ने कहा था कि एक और बार करेंगे

अवी-हाँ कहा था, पर अब मुझे नींद आ रही है

शीला-ऐसा मत कहो, तुम ने कहा था कि हम रात भर प्यार करेंगे

अवी-अब तुम्हारी बारी है ,तुम मुझे प्यार करो

शीला-मैं ने कभी किया नही

अवी-सुना तो होगा अपनी सहेली से .

शीला-हाँ ,वो कहती थी कि गन्ना चूस्कर खड़ा करना पड़ता है

अवी-वो रहा गन्ना ,उसे प्यार करो, प्यार करने लायक बनाओ ,

शीला-ट्राइ करती हूँ

शीला मेरे लंड के पास बैठ कर लंड को देखने लगी.

अभी तो लंड खड़ा नही हुआ था जिस से शीला सोच रही थी कि ये कितना बड़ा होगा ,उसे कितना बड़ा करना होगा.

शीला लंड को हाथ मे लेकर दबा कर देखने लगी.

फिर शीला ने लंड की चमड़ी को पीछे करके लंड का टोपा देखने लगी.

टोपे की खूबसूरती देख कर शीला खुद को रोक नही पाई मेरे लंड को प्यार करने से

टोपा देखने के बाद शीला ने हिम्मत कर टोपे को जीभ से टच किया

शीला की जीभ के टोपे को टच करते ही लंड ने एक झटका मारा.

मेरे शरीर मे एक लहर दौड़ गयी.और मेरे मुँह से आह निकल गया

शीला को मेरे लंड का टेस्ट पसंद आया जिस से उसने फिर से ,इस बार पूरे टोपे को चाट लिया.

शीला को मेरा गन्ना पसंद आया.

शीला ने टोपा मुँह मे भर लिया और ज़ोर से चूसने लगी .जैसे सच मे गन्ना चूस रही हो.

उसके ऐसा करने से लंड खड़ा होने लगा.

शीला को हाथ मे मेरा लंड अपना साइज़ बढ़ाने लगा. जिस से शीला को पता चलने लगा कि लंड को उसका चूसना पसंद आया

शीला अपना काम करती गयी.

पहले तो पूरा लंड मुँह मे लेकर चूस रही थी. पर जैसे जैसे लंड खड़ा हो रहा था उसके मुँह मे से लंड बाहर निकल रहा था

ऐसा होते शीला जितना हो सके उतना लंड मुँह मे भर कर चूसने लगी.

अब तो शीला गन्ने को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी

शीला के ऐसा करते मैं उठ कर बैठ गया.

और शीला के सर को पकड़ कर लंड पर आगे पीछे करने लगा.

शीला ने बस लंड चूसने पे ध्यान दिया.

क्यूँ कि उसने गन्ने चूसने के बारे में बहुत बार सुना था.

आज गन्ना देख कर वो बिना चूसे कैसे रहती.

शीला मेरा गन्ना चूस कर इसकी कहानी अपनी सहेली को बताना चाहती थी.

अब ऐसा लग रहा था मुँह लंड पर उछल कर अपनी चुदाई कर रहा हो

मैं नीचे से गंद उपर कर के शीला के मुँह को चोदने लगा.

शीला के मुँह से गू गू गून की आवाज़े आ रही थी .

थोड़ी देर शीला लंड को चूस्ति रही फिर लंड को बाहर निकाला

शीला के थूक लंड से चमक रहा था और ज़्यादा मोटा लग रहा

शीला मेरे लंड की तरफ देखती गयी.

शीला-इतना बड़ा ,मैं चूस रही थी. ये अंदर कैसे गया.

अवी-तुम्हे पसंद आया

शीला-गन्ना पसंद आया.

अवी-फिर मेरे उपर आकर इस पे बैठ जाओ

मैं ने वैसे बैठते हुए शीला को मेरी गोद मे बैठा दिया. और धीरे धीरे लंड उसकी चूत मे जाने लगा.

पेन किल्लर का असर अब तक था जिस से शीला ने आराम से लंड चूत मे ले लिया.

लंड उसकी चूत मे जाते हम आमने सामने आ गये.

उस ने देर ना करते हुए मुझे किस करना सुरू किया .और मैं उसके दोनो बूब्स को हाथो से दबाना सुरू किया.

और नीचे से लंड को उसकी चूत मे पेलने लगा.

बूब्स को दबाने से शीला की चीख निकल गयी.उसने किस करना बंद किया. आराम से अओउू मेरी चूंचिया

मैं ने बूब्स छोड़ दिए,और पीछे गिर गया. ऐसा करते शीला मेरे लंड पे बैठी रही.

मैं शीला को गाइड कर रहा था .मैं ने उसे लंड पर उछलने को कहा.

वो पहले ज़ोर से उछलने गयी जब उसे दर्द हुआ तो वो धीरे धीरे लंड पे उछल कर चुदाई करने लगी.

लंड पर उछलने के साथ शीला शीष्कारिया लेने लगी.

अया आआआः आआआः की आवाज़े करने लगी

कभी वो मेरे लंड पे उछलने लगती तो कभी मैं उसे अपने उपर झुका कर किस करते हुए नीचे से धक्का मारने लगता.

शीला के पानी निकलते ही मैं ने उसे अपने उपर से उतरने को कहा.

शीला को घोड़ी बना कर उसकी चूत मारने लगा.

शीला मेरी घोड़ी बन कर खुश थी.

मेरी नज़र उसकी गंद पर गयी पर गंद मार कर उसे दर्द नही देना चाहता था.

मैं उसकी चूत मारकर उसे अपनी निशानी देने के काम मे लग गया.

घोड़ी बन कर शीता के पैर दुखने लगे.

जिस से मैं शीला को बेड पर लिटा कर उसकी चूत मे वीर्य डालने की तय्यारी करने लगा.

फिर से चूत मे वीर्य डाल कर शीला को खुश कर दिया.

सुबह सुबह चुदाई करके शीला खुश हो गयी.

वो थक कर वापस सो गयी और मैं मंदिर मे जाने की तैयारी करने लगा

 


698

शीला और मैं सो गये. पहली चुदाई के सपने देखते हुई शीला मुझसे चिपक कर सो गयी

मैं भी शीला के नंगे बदन की गर्मी मे आराम से सो गया.

मैं अलार्म लगा कर रखा था कि मैं सुबह शीला की एक और बार चुदाई कर सकूँ.

एक नींद पूरी करने के बाद हम दोनो अलार्म की आवाज़ सुनकर उठ गये.

मैं तो थकावट की वजह से फिर से सोने वाला था पर शीला ने मुझे सोने नही दिया.

उसे पता था कि ये हमारी पहली और आख़िरी रात है.

इस लिए वो मुझे और एक बार प्यार करना चाहती थी.

पेन किल्लर की वजह से उसका दर्द कम हो चुका था.

मेरे साथ 2 बार चुदाई करके वो अपनी शरम ख़तम कर चुकी थी जिस से शीला खुद लंड लेना चाहती थी.

और शीला मेरे उपर आ गयी.

उसकी शरम पहली चुदाई के साथ गायब हो गयी.थी

शीला-अवी उठो ना ,तुम ने कहा था कि एक और बार करेंगे

अवी-हाँ कहा था, पर अब मुझे नींद आ रही है

शीला-ऐसा मत कहो, तुम ने कहा था कि हम रात भर प्यार करेंगे

अवी-अब तुम्हारी बारी है ,तुम मुझे प्यार करो

शीला-मैं ने कभी किया नही

अवी-सुना तो होगा अपनी सहेली से .

शीला-हाँ ,वो कहती थी कि गन्ना चूस्कर खड़ा करना पड़ता है

अवी-वो रहा गन्ना ,उसे प्यार करो, प्यार करने लायक बनाओ ,

शीला-ट्राइ करती हूँ

शीला मेरे लंड के पास बैठ कर लंड को देखने लगी.

अभी तो लंड खड़ा नही हुआ था जिस से शीला सोच रही थी कि ये कितना बड़ा होगा ,उसे कितना बड़ा करना होगा.

शीला लंड को हाथ मे लेकर दबा कर देखने लगी.

फिर शीला ने लंड की चमड़ी को पीछे करके लंड का टोपा देखने लगी.

टोपे की खूबसूरती देख कर शीला खुद को रोक नही पाई मेरे लंड को प्यार करने से

टोपा देखने के बाद शीला ने हिम्मत कर टोपे को जीभ से टच किया

शीला की जीभ के टोपे को टच करते ही लंड ने एक झटका मारा.

मेरे शरीर मे एक लहर दौड़ गयी.और मेरे मुँह से आह निकल गया

शीला को मेरे लंड का टेस्ट पसंद आया जिस से उसने फिर से ,इस बार पूरे टोपे को चाट लिया.

शीला को मेरा गन्ना पसंद आया.

शीला ने टोपा मुँह मे भर लिया और ज़ोर से चूसने लगी .जैसे सच मे गन्ना चूस रही हो.

उसके ऐसा करने से लंड खड़ा होने लगा.

शीला को हाथ मे मेरा लंड अपना साइज़ बढ़ाने लगा. जिस से शीला को पता चलने लगा कि लंड को उसका चूसना पसंद आया

शीला अपना काम करती गयी.

पहले तो पूरा लंड मुँह मे लेकर चूस रही थी. पर जैसे जैसे लंड खड़ा हो रहा था उसके मुँह मे से लंड बाहर निकल रहा था

ऐसा होते शीला जितना हो सके उतना लंड मुँह मे भर कर चूसने लगी.

अब तो शीला गन्ने को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी

शीला के ऐसा करते मैं उठ कर बैठ गया.

और शीला के सर को पकड़ कर लंड पर आगे पीछे करने लगा.

शीला ने बस लंड चूसने पे ध्यान दिया.

क्यूँ कि उसने गन्ने चूसने के बारे में बहुत बार सुना था.

आज गन्ना देख कर वो बिना चूसे कैसे रहती.

शीला मेरा गन्ना चूस कर इसकी कहानी अपनी सहेली को बताना चाहती थी.

अब ऐसा लग रहा था मुँह लंड पर उछल कर अपनी चुदाई कर रहा हो

मैं नीचे से गंद उपर कर के शीला के मुँह को चोदने लगा.

शीला के मुँह से गू गू गून की आवाज़े आ रही थी .

थोड़ी देर शीला लंड को चूस्ति रही फिर लंड को बाहर निकाला

शीला के थूक लंड से चमक रहा था और ज़्यादा मोटा लग रहा

शीला मेरे लंड की तरफ देखती गयी.

शीला-इतना बड़ा ,मैं चूस रही थी. ये अंदर कैसे गया.

अवी-तुम्हे पसंद आया

शीला-गन्ना पसंद आया.

अवी-फिर मेरे उपर आकर इस पे बैठ जाओ

मैं ने वैसे बैठते हुए शीला को मेरी गोद मे बैठा दिया. और धीरे धीरे लंड उसकी चूत मे जाने लगा.

पेन किल्लर का असर अब तक था जिस से शीला ने आराम से लंड चूत मे ले लिया.

लंड उसकी चूत मे जाते हम आमने सामने आ गये.

उस ने देर ना करते हुए मुझे किस करना सुरू किया .और मैं उसके दोनो बूब्स को हाथो से दबाना सुरू किया.

और नीचे से लंड को उसकी चूत मे पेलने लगा.

बूब्स को दबाने से शीला की चीख निकल गयी.उसने किस करना बंद किया. आराम से अओउू मेरी चूंचिया

मैं ने बूब्स छोड़ दिए,और पीछे गिर गया. ऐसा करते शीला मेरे लंड पे बैठी रही.

मैं शीला को गाइड कर रहा था .मैं ने उसे लंड पर उछलने को कहा.

वो पहले ज़ोर से उछलने गयी जब उसे दर्द हुआ तो वो धीरे धीरे लंड पे उछल कर चुदाई करने लगी.

लंड पर उछलने के साथ शीला शीष्कारिया लेने लगी.

अया आआआः आआआः की आवाज़े करने लगी

कभी वो मेरे लंड पे उछलने लगती तो कभी मैं उसे अपने उपर झुका कर किस करते हुए नीचे से धक्का मारने लगता.

शीला के पानी निकलते ही मैं ने उसे अपने उपर से उतरने को कहा.

शीला को घोड़ी बना कर उसकी चूत मारने लगा.

शीला मेरी घोड़ी बन कर खुश थी.

मेरी नज़र उसकी गंद पर गयी पर गंद मार कर उसे दर्द नही देना चाहता था.

मैं उसकी चूत मारकर उसे अपनी निशानी देने के काम मे लग गया.

घोड़ी बन कर शीता के पैर दुखने लगे.

जिस से मैं शीला को बेड पर लिटा कर उसकी चूत मे वीर्य डालने की तय्यारी करने लगा.

फिर से चूत मे वीर्य डाल कर शीला को खुश कर दिया.

सुबह सुबह चुदाई करके शीला खुश हो गयी.

वो थक कर वापस सो गयी और मैं मंदिर मे जाने की तैयारी करने लगा

 
699

मैं ने फ्रेश होकर शीला को उठा दिया.

शीला अपनी पहली चुदाई से खुश दिख रही थी.

रात की मस्ती मे शीला बेशरम बन गयी थी.

पर सुबह होते ही वो अपने नंगे बदन को छुपाने लगी.

उसके कपड़े इधर उधर पड़े थे. शीला ने चद्दर से अपने बदन को छुपा दिया .और अपने कपड़े उठाने लगी.

मैं ने शीला को फिर से नंगा करना चाहा तो उसने मना किया.

अवी-चद्दर से अपने बदन को छुपा क्यूँ रही हो

शीला-मैं बेशरम नही हूँ.

अवी-रात मे तो एक बार भी कपड़ो का ख़याल नही आया तुम्हे ,रात मे तो तुम

शीला-रात के अंधेरे और सुबह की रोशनी मे फरक होता है.

अवी-सही कहा .रात के अंधेरे मे तो तुम्हे देख लिया है. अब सुबह की रोशनी मे देखना है

शीला-अभीतो देखा था. और प्यार भी किया

अवी-फिर से देखना है. तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि फिर से देखने का मन हो रहा है.

शीला-तुम खुद देख लो ,मुझे शरम आ रही है.

अवी-मेरे पास आओ

शीला मेरे पास आकर खड़ी हो गयी. उसने चद्दर से अपने बदन को छुपा कर रखा था.

मैं ने चद्दर को उपर किया और उसकी प्यारी चूत को देखने लगा.

उसकी चूत फट गई थी. सूज भी गयी थी.

मैं ने उसकी चूत को टच किया कि उसे दर्द हुआ

शीला-हाथ मत लगाओ ,दर्द हो रहा है

अवी-तुम तो बड़ी चालू हो.हाथ लगाने पे दर्द हो रहा है ,मतलब गन्ना लगाने को कह रही हो.

शीला-सच मे दर्द हो रहा है

अवी-देखो अभी तुम्हारा दर्द मेरे मल्लम से गायब करता हूँ.

और मैं ने शीला की चूत पे किस करके अपने प्यार का मलम लगा कर उसका दर्द कम किया.

उसको ज़्यादा परेशान नही किया .और से कपड़े जमा करने मे मदद की.

फिर मैं ने शीला को जल्दी फ्रेश होने को कहा .शीला ने मुँह धो कर अपने कपड़े पहन लिए

शीला -इतनी जल्दी कहाँ जा रहे हो

अवी-आख़िरी दिन है. मुझे घर जाकर मंदिर जाना है

शीला-हम फिर कब मिलेंगे

अवी-किस्मत मे होगा तब मिलेंगे

शीला-मतलब

अवी-नेक्स्ट मेले मे या फिर कही किसी और जगह ,जहाँ किस्मत मिलाना चाहती हो

शीला-अगर हमारी किस्मत ने सिर्फ़ एक मुलाकात लिखी हो तो

अवी-मुझे नही लगता हमारी किस्मत कितनी खराब होगी

शीला-मुझे भी लगता है हम जल्दी मिलेंगे

अवी-जब मिलेंगे तब फिर से तुम्हे प्यार करूँगा.

शीला-और अपनी निशानी को मिलने नही आओगे

अवी-तुम्हे लगता है एक बार मे तुम्हे मेरी निशानी मिल जाएगी

शीला-मुझे हमारे प्यार पे पूरा विश्वास है.

अवी-अगर तुम मेरी ज़िंदगी मे पहले आई होती तो तुम्हे खुद से दूर नही करता

शीला-मेरी किस्मत मे तुम्हारा प्यार इतना लिखा है तो उसे हम बदल नही सकते

अवी-चलो तुम तुम्हारी फॅमिली के पास छोड़ देता हूँ

शीला-मैं चली जाउन्गी

अवी-ध्यान से जाना .

और शीला मेरे गले लग गयी. उसकी आँखो मे हल्के आसू आ गये

अवी-तुम रोती हुई अच्छी नही लगती

शीला-मैं रो नही रही हूँ. बस तुम से दूर जाने का सोच कर आसू आ गये.

अवी-अब हँस कर मुझे अलविदा कहो वरना मुझे अच्छा नही लगेगा.

और शीला ने हँसते हुए मुझे गुड बाइ किस किया.

और प्रॉमिस किया कि वो मुझे याद करके कभी रोएगी नही.

शीला को उसके फॅमिली के पास छोड़ कर मैं घर आ गया.

घर आकर मैं ने मंदिर जाने की तय्यारी की और अपनी फॅमिली के साथ मंदिर आ गया.

सुबह की पूजा जल्दी हो गयी. आज शाम की पूजा जल्दी सुरू होने वाली थी और लंबी चल कर मेले के ख़तम होने की घोषणा होने वाली थी.

पूजा हो जाने के बाद चाची जल्दी घर चली गयी .शाम की पूजा की बहुत तय्यारी करनी थी.

मैं चाची को घर छोड़ कर वापस मंदिर मे आकर रणजीतसिंघ की मदद करने लगा.

आज बहुत काम था .रणजीतसिंघ ने अपनी आदमियो को भी काम मे लगा दिया.

मैं रणजीतसिंघ के साथ काम कर रहा था की पायल को कॉल आ गया. पायल को बताना भूल गया कि आज मैं कार सीखने नही आ सकता था.

अवी-हेलो पायल

पायल-अवी मुझे तुम से अर्जेंट मिलना है.

अवी-आज नही, और आज मैं कार सीखने नही आ सकता

पायल-अवी मुझे तुमसे अभी मिलना है. मैं मैदान पे तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ

और पायल ने कॉल कट किया .

मैं ने वापस कॉल किया तो लग नही रहा था.पायल ने मोबाइल स्विचऑफ किया.

अब ये क्या मुसीबत है.जाकर देखता हूँ. कि पायल ने क्यूँ बुलाया है.

मैं ने रणजीतसिंघ को बताया कि मैं घर जाकर आता हूँ और पायल से मिलने चला गया

 


699 ए

पायल मैदान मे कार के पास खड़ी होकर मेरा इंतज़ार करने लगी.

पायल ने सलवार कमीज़ पहन रखा था. इस ड्रेस मे पायल की खूबसूरती निखर रही थी. स्कर्ट से ज़्यादा हॉट सलवार कमीज़ मे लग रही थी.

पायल का ये नया रूप देख कर मैं डर गया था. सलवार कमीज़ मे देख कर लग रहा था कि आज बहुत कुछ होने वाला है

मैं ने मोबाइल पे वाय्स रेकॉर्डिंग स्टार्ट की. मैं पायल के साथ रिस्क नही लेना चाहता था.

अचानक बदला हुआ रूप देख कर डर तो लगता है. ऐसे मे सेफ्टी ज़रूरी है.

मैं पायल के पास आ गया.

पायल-बैठो

मैं ड्राइविंग सीट पर बैठ गया .और पायल मेरी गोद मे,मेरी तरफ मुँह कर के बैठ गयी.

ये भी अलग था.

स्कर्ट की जगह सलवार कमीज़, और मेरी गोद मे ऐसे बैठना ,मुझे तो तूफान आने का डर लग रहा था.

मुझे लग रहा था कि पायल कुछ अलग मूड मे है ,अच्छा हुआ रेकॉर्डिंग स्टार्ट की

अवी-पायल ये सब क्याआअ

मेरी बात पूरी होने पहले पायल ने मुझे किस करना सुरू किया.

पायल के ऐसे अचानक किस करने से मैं शॉक्ड हो गया.

हर बार मैं सब को शॉक्ड करता हूँ आज पायल ने मुझे किस करके शॉक्ड कर दिया.

मैं ने पायल का साथ नही दिया. पायल ने मुझे कुछ ना करते हुए देख कर किस करना बंद किया.

अवी-पायल ये सब क्या है

पायल-मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ, आइ लव यू,

अवी-प्यार

पायल-हां, मैं तुमसे प्यार करती हूँ

अवी-ये हो नही सकता

पायल-क्यूँ नही हो सकता, मैं क्या इतनी बुरी हूँ जो मेरी तरफ देखते भी नही.

अवी-तुम बहुत खूबसूरत हो.

पायल-फिर क्या कमी है मुझमें ,जो तुम प्यार नही कर सकते

अवी-तुम ठाकुर हो और मैं एक आम लड़का,हमारा मिलन नही हो सकता.

पायल-वो मुझे पता है.

अवी-तुम मुझसे बड़ी हो मैं तुमसे शादी नही कर सकता

पायल-मैं ने कब कहा कि शादी करनी है ,मैं प्यार की बात कर रही हूँ

अवी-फिर भी ये पासिबल नही है

पायल-क्यूँ नही है,

अवी-तुम मेरे दोस्त की बहन हो ,मैं दोस्त को धोका नही दे सकता .

पायल-अगर कुछ हुआ तो भैया से मैं बात करूँगी.

अवी-ठकुराइन ,वो तो मुझे मार डालेंगी

पायल-तुम्हे मारने से पहले उनको मुझे मारना होगा.

अवी-ये सब तुम जल्दबाज़ी मे कह रही हो, क्या पता कल मुझे फँसा दो

पायल-मैं प्रॉमिस करती हूँ

अवी-तुम्हे मुझसे अच्छा लड़का मिलेगा.

पायल-वो तो शादी के लिए मिल जाएगा. पर मैं प्यार तुमसे करना चाहती हूँ

अवी-मुझ मे ऐसा क्या देखा जो मेरे लिए इतना पागल हो रही हो

पायल-तुम ने मेरे दिल को जीत कर मुझे हरा दिया है.

अवी-मैं समझा नही

पायल-मैं समझा दूँगी. पहले बताओ मुझसे प्यार करने को तय्यार हो.

अवी-अगर ना कहूँ तो

पायल-तो मैं माँ से कह कर तुमसे शादी करूँगी.और मेरी बात मैं मनवा कर रहती हूँ. तुम्हे मुझसे शादी करनी ही होगी

अवी-अगर हाँ कहूँ तो

पायल-मैं तुम्हारी गुलाम बन ने को भी तय्यार हूँ

अवी-(गुलाम ) पहले ये बताओ मुझसे प्यार करने की क्या वजह है

पायल-तुम ने मेरा दिल जीत लिया है.

अवी-ये मुझे पता है. पर कैसे मैं ने तो कुछ नही किया.

पायल-तुम ने अपना प्रॉमिस ना तोड़ कर मेरा दिल जीत लिया है.

अवी-कैसा प्रॉमिस

पायल-कार चलते हुए हाथ ना लगाने का प्रॉमिस

अवी-ये कैसी वजह हुई

पायल-मैं सुरू से बताती हूँ

मैं ने आजतक किसी लड़के को हाथ लगाने नही दिया. शहर मे लड़के मुझे एक बार देखने के लिए लाइन लगाते थे .और तुम हो कि मेरे साथ कुछ करना तो दूर की बात है हाथ भी नही लगाया.

उस्दिन तुम्हारा आक्सिडेंट करने के बाद हवेली मे पहली बार देखा तो तुम मुझे अच्छे लगने लगे.

जब पहली बार तुमसे बात की तो लगा कि तुम बाकी लड़को की तरह हो .जो लड़की को फसाना चाहते हो. इसी लिए मुझे अपने उसकी फोटो दी.

मुझे लगा कि तुम उसकी फोटो दिखा कर

अवी-उसकी किस की

पायल-पेनिस, पेनिस की फोटो दिखा कर मुझे फसाना चाहते हो ऐसा लगा . पर तुम्हारा ऐसा बिंदास नेचर भी अच्छा लग रहा था.

फिर तुम्हारी बाते करने का स्टाइल अच्छा लगा.ऐसा लगा तुम मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे हो. पर तुम अपने लिमिट मे थे.

अवी-(लिमिट मे रहना पड़ता है)

पायल-तुम ने जब कहा कि मुझे कार चलाना सिख़ाओ तो लगा कि इसी बहाने से तुम मुझ पर ट्राइ करोगे पर मैं ग़लत थी.

तुम सच मे कार चलाना सीखना चाहते थे.

फिर तुम्हारा फोर्स करना कि एक सीट पर बैठ कर कार चलाते है.

मैं देखना चाहती कि तुम क्या करते हो. अगर तुम कुछ करते तो मैं तुम्हे थप्पड़ मार देती पर तुम्हारे कुछ ना करने से मेरे गाल पर थप्पड़ लगा.

तुम्हारा अपनी फॅमिली का प्यार .मेले मे मुझसे ऐसे बाते करते थे कि मेरी रेस्पेक्ट करते हो और कार चलाते वक्त बिंदास बाते करते थे.

मुझे ऐसा ही प्यार करने वाला बाय्फ्रेंड चाहिए था जो मेरी फॅमिली के पीछे बिंदास प्यार करे, और सामने ऐसा दिखाए कि हम एक दूसरे को जानते नही

अवी-ये सब हुआ मुझे पता नही था (नेग्लेक्ट करके लड़की को पटाना कहते है)

पायल-अभी बहुत कुछ बाकी है.

अवी-अब क्या रह गया

पायल-उसके बाद मैं ने तुम्हे सिड्यूस करना स्टार्ट किया. पर तुम हो की पत्थर बने हुए थे.

मैं ने स्कर्ट की साइज़ कम की. तुम्हे बताया कि 3 स्कर्ट खरीदे है .पर 5 दिन स्कर्ट पहन कर आई थी

अवी-ये मुझे पता था. मैं तुम से कहने वाला था पर तुम्हारा सपना था कि स्कर्ट पहन कर देखना ,उसे मैं कैसे टूटने देता

पायल-देखो ,मेरा इतना ध्यान रखते हो ,कैसे प्यार नही होता तुमसे.

तुम्हे बताया कि मैं तुम्हे दिखाने के लिए इतनी मेहनत करके स्कर्ट पहन कर आती हूँ पर तुम थे कि वो भी समझ नही पाए

अवी-वो भी पता था पर प्रॉमिस प्रॉमिस होता है

पायल-पहले मुझे लगा था तुम ईडियट हो पर बाद मे प्रॉमिस की बात याद आ गयी.और देखो तुम्हे पता था फिर भी तुम ने कुछ नही किया.

मुझे लगा कि कहीं ऐसा तो नही कि तुम्हे लड़किया पसंद ना हो

अवी-ये क्या बोल रही है

पायल-मुझे पहले लगता था. पर तुम्हारा पेनिस और झाड़ियों मे भाग कर जाना ये बता रहा था कि तुम नॉर्मल हो बस प्रॉमिस पूरा कर रहे हो

फिर मैं बिना ब्रा के आई बिना पैंटी के आई. सब कुछ दिखा दिया फिर भी तुम ने अपना प्रॉमिस नही तोड़ा ,

तुम ने मेरा दिल जीत लिया.

अवी-(मैं ने जैसा सोचा था वैसा ही हुआ) तो तुम मुझसे प्यार करना चाहती हो

पायल-हाँ

अवी-और शादी

पायल-वो नही कर सकती.

अवी-प्यार कब तब करना चाहोगी

पायल-जब तक तुम चाहो. मैं तो तुम्हारी गुलाम बन गयी हूँ.

अवी-ज़िंदगी भर गुलाम बन के रहना होगा.

पायल-मेरी लाइफ उसका क्या.

अवी-वो जियो ,शादी करो पर मेरे साथ भी प्यार करते रहना होगा. जब मैं कहूँ तब मेरे साथ प्यार करना होगा.कहीं पर भी

पायल-वो तुम पे डिपंड करता है.

अवी-फिर तो तुम्हे ज़िंदगी भर मेरी गुलाम बन के रहना होगा.

पायल-रख पाओगे

अवी-क्यूँ नीचे कुछ महसूस नही हो रहा

पायल-हो रहा है. पर दिखता कैसा है मुझे कहाँ पता है

अवी-तुम देख कर खुश हो जाओगी

पायल-फिर तो देखना होगा.

अवी-जल्दी दिखा दूँगा

पायल-मतलब तुम मुझे प्यार करने को तय्यार हो

अवी-हाँ, पर मैं राजा और तुम दासी

पायल-ठीक है, पर फ्रेंड की तरह भी तो कर सकते है.

अवी-करेंगे फ्रेंड की तरह पर तुम मेरी गुलाम रहोगी

पायल-कब करेंगे

अवी-आज रात मे

पायल-रात मे मैं हवेली से बाहर नही निकल सकती.

अवी-मैं राजा हूँ और तुम मेरी गुलाम

पायल-ठीक है कुछ सोचूँगी.पर कहाँ करेंगे

अवी-राजा खुश हुआ

पायल-बताओ ना कहाँ करेंगे.

अवी-देखो, मैं ना कोई राजा बन ना चाहता हूँ और ना कोई तुम गुलाम हो. तुम अपने टेस्ट मे पास हो गयी

पायल-कैसी टेस्ट

अवी-मैं देखने चाहता था कि तुम मेरे लिए क्या कर सकती हो

पायल-क्या पता चला.

अवी-मैं तुमसे प्यार करूँगा ,पर हम हमेशा फ्रेंड रहेंगे.

पायल-बेस्ट फ्रेंड

अवी-तो सुनो ,आज रात मे हम हवेली मे करेंगे,तुम्हारे रूम मे

पायल-वहाँ तो मुश्किल होगा

अवी-वो मुझ पर छोड़ दो. बस मेरे फोन का इंतज़ार करना

पायल-करने क्या वाले हो

अवी-जो करना है वो पता चल जाएगा.अब मैं चलता हूँ

पायल-ऐसे जाओगे. किस नही करोगे.

अवी-काम ज़्यादा है. और प्यार करने के लिए रात तक रुकना होगा.

पायल-अब तो तुम्हारे साथ कब प्यार करूँगी ऐसा लग रहा है.

अवी-तो अपने कमरे को सजाके रखना. और पहली मलकात यादगार बनाएँगे

पायल-ठीक है. मैं रात का इंतज़ार करूँगी.

पायल को अपनी मुट्ठी मे करने के बाद मैं वापस मंदिर आ गया.

 
700

पायल तो मेरी मुट्ठी मे आ गयी. जैसा पायल के लिए सोचा था वैसा ही हुआ.

पायल जैसी हॉट लड़की को नेग्लेक्ट करने से वो खुद मेरे पास आ गयी.

पायल से मिलने के बाद मैं रणजीतसिंघ को मदद करने लगा.

रणजीतसिंघ ने हिसाब किताब अच्छे से मेन्टेन किया था .जिस से हम ने ज़्यादा काम करने के बाद भी बहुत बचत की थी.

मैं ने रणजीतसिंघ को कल सजेशन दिया था कि आज प्रसाद के साथ लोगो को खाना भी देते है.

रणजीतसिंघ को मेरा आइडिया अच्छा लगा . रणजीतसिंघ ने खाना देने के काम मे आदमियो को लगा दिया.

इतने सारे लोगो को खाना देना मतलब बड़ी मेहनत का काम था .पर हम ने ऐसा करने का ठान लिया. ऐसा करने से ये मेला और हमारा काम सब को याद रहेगा.

रणजीतसिंघ ने अपनी फॅक्टरी के वर्कर जो छुट्टी पर थे उनको वापस बुला के काम पे लगा दिया.

लोगो खाना तो शाम की पूजा ,आज 3.00 बजे पूजा होने वाली है.

सब को अपना अपना काम बता कर रणजीतसिंघ हवेली चला गया और मैं घर चला गया .पूजा के लिए तय्यार होने.

मेरे घर आते ही चाची ने मेरे नहाने का बंदोबस्त कर लिया था.

पानी को शुद्ध करके चाची मुझे नहला रही थी.

नहाने के बाद मैं ने मंदिर जाने वाले कपड़े पहन लिए.

फिर चाची ने मुझे पहले दिन की तरह घर मे जो मंदिर था वहाँ रंगोली मे लाकर बैठा दिया.

और मेरी पूजा करने लगी.मुझे मंदिर जाने के लिए तय्यार करवा दिया.

फिर मैं ने एक एक करके सबका आशीर्वाद लिया.

ब चाची-अवी ,तूने अपनी फॅमिली का नाम रोशन किया. आज मैं बहुत खुश हूँ

अवी-चाची सब आपके प्यार और आशीर्वाद की वजह से हुआ है

ब चाची-तेरी मेहनत ,उसको भूल गया तू

अवी-आपके प्यार के सामने मेरी मेहनत कुछ नही है.

ब चाची-काश आज तुम्हारे माता पिता जिंदा होते तो आज वो तुम्हे देख कर खुश होते

अवी-वो अभी भी मुझे देख रहे होंगे. पर मैं आज जो भी हूँ वो आपकी की वजह से हूँ .आपके और पूरी फॅमिली के प्यार की वजह से मैं मेले के काम पूरा कर पाया.

ब चाची-तुम्हारे दादाजी भी बहुत खुश होंगे उनको जब बताएँगे कि तुम मेले का काम कर रहे हो

म चाची-और देखो हमारे अवी ने मेले का काम इतने अच्छे से कर दिया.

सी चाची-कैसे ना करता ,और वैसे भी ज़्यादातर काम अवी ने किए होगे.

अवी-आइडिया मेरे थे, काम रणजीतसिंघ और मैं ने किया

नीता बुआ-आइडिया इम्पोर्टेंट होता है. बिना आइडिया के तो पिताजी भी काम कर लेते थे

ब चाची-हाँ, अवी को शहर मे पढ़ाई के लिए भेजने से ये सब हो पाया है

नेहा बुआ-अच्छा काम किया है अवी ने ,भैया भी ऐसा काम नही कर पाते

नेहा बुआ के मुँह से मेरी तारीफ सुनकर सब नेहा बुआ की तरफ देखने लगे.

म चाची-वो रहते कहाँ है ,जब देखो तब दोस्तो के साथ रहते है

सी चाची-दीदी मुझे ऐसा लग रहा है कि अवी ने काम इतना अच्छा किया है कि वो अवी से जलने लगे है

पूजा बुआ-मीना ने सही कहा. इसी लिए अवी के आते ही कहीं बाहर जाते है

नीता बुआ-उसकी तो आदत है. पहले बड़े भैया से जलते थे और अब अवी से

नीता बुआ की बात सुनकर नेहा बुआ रसोई घर मे चली गयी.

मेरे पिताजी का नाम सुनकर नेहा रसोई घर मे चली गयी.

ब चाची-चलो बाते बहुत हो गयी. हमे चलना चाहिए

नीता बुआ-मैं सब को बुलाकर लाती हूँ

मेरी सभी बहनों ने साड़ी पहनी थी.

रानी के लिए छोटी चाची ने स्पेशल साड़ी ली थी. जिस मे रानी की खूबसूरती देकने लायक थी.

कोमल भी कुछ कम नही थी. कोमल ने भी अपनी खूबसूरती को अच्छे से मेक अप करके और सुंदर बना दिया.

चाचा के आते हम सब मंदिर की तरफ निकल पड़े.

हमारे आने के कुछ देर बाद ठाकुर की फॅमिली भी आ गयी.

पायल साड़ी मे कमाल की लग रही थी. उसके चेहरे पे एक अजीब चमक थी.

हमारे आते ही मंदिर मे पूजा सुरू हो गयी.

लोग कब से पूजा सुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे.

मेला मे कोई नही गया था. आज मेला बंद रखा गया था. मतलब सुरू था ,मेला रात मे थोड़ी देर के लिए सुरू रहने वाला था.

पंडितजी ने पूजा सुरू की.

पंडितजी बताते गये और हम पूजा करते गये.

फिर पहले दिन की तरह हमारे हाथ मे थाली दी गयी.

रोज हमारे हाथ मे थाली दी जाती थी पर पहले दिन की तरह रानी और कोमल ने हाथ नही लगाया था. पंडितजी ने सिर्फ़ पहले और आख़िरी दिन साथ मे पूजा करने को कहा था

पंडितजी ने कहा कि पहले दिन जिस ने पूजा करते हुए थाली को हाथ लगाया था वही अब पूजा करते हुए लगाएँगे.

कामिनी ने रणजीतसिंघ की थाली पकड़ ली. और मेरी थाली को एक तरफ रानी और दूसरी तरफ कोमल ने पकड़ लिया.

और हम पूजा करते गये.

पूजा 2 घंटे तक चली.

पूजा होते ही हम ने भगवान के दर्शन कर लिए.

हमारी फॅमिली के दर्शन करते ही लोग दर्शन करने लगे.

हम ने प्रसाद लिया और एक जगह पर जाकर बैठ गये.

लोग दर्शन करने के बाद प्रसाद लेके खाना खाने के लिए लाइन मे लग रहे थे.

मैं ने अपनी फॅमिली को थोड़ी देर बैठने दिया.और भीड़ बढ़ते ही उनको घर भेज दिया .

मैं ने और रणजीतसिंघ ने टेंट मे जाकर कपड़े चेंज किए

और लोगो को प्रसाद देने लगे.

लोग खाना खा कर मेले मे जाने लगे जिस से मेला भी शुरू हो गया.

जो लोग भीड़ देख कर एक दिन के लिए दर्शन करने आते थे वो भी आज मंदिर मे आए थे.

शहर का आमिर आदमी हो या गाओं का ग़रीब वो एक साथ बैठ कर खाना खा रहे थे

एक लाइन का खाना पूरा हो जाता तो दूसरी लाइन बैठ जाती.

ये बहुत लंबा चलने वाला था.

एमएलए और एंपी भी अपनी फॅमिली के साथ आए थे.

उनके आने से और परेशानी हो गयी. उनको दर्शन करवाने मे बड़ी मेहनत करने पड़ी.

लोगो की भागदौड़ ना हो इसका पूरा ध्यान रखा गया था.

10 मीटर के गॅप के बाद एक बॅमबू डाल कर गेट बनाया था.

गेट ओपन करके कुछ लोगो को आगे जाने देते थे.

जिस से सब काम ढंग हो रहा था

काम तो चलता रहने वाला था

हम ने काम करते हुए खाना खा लिया था.

कभी हम इधर होते तो कभी उधर

रणजीतसिंघ 25 साल के लड़के की तरह काम कर रहा था.

खाना बनाने और लोगो के आने का कॅल्क्युलेशन ठीक हो रहा था. जैसे लोग बढ़ रहे थे वैसे वैसे खाना बन रहा था.

पर पानी के स्टॉल कम थे. जिस से पानी पीने के लिए परेशानी हो रही थी.

मैं जल्दी गाओं जाकर पंचायत मे रखे हुए ड्रम ले कर आ गया और

2 3 स्टॉल पानी के लगा दिए .शहर से टॅंकर भी आ गये थे.

और एक परेशानी पैदा हो रही थी कि खाने की प्लेट कहाँ फेके. लोग वैसे रख कर चले जा रहे थे.

मैं ने 2 ट्रॅक्टर बुला लिए .और उनसे अंदर प्लेट रखने को कहा .और ट्रॅक्टर दूर जंगल मे जाकर फेक सकता था. जिस से डॉग और स्मेल का प्राब्लम ख़तम हो गया.

लोगो ने हमे ज़्यादा परेशानी नही दी .वो जल्दी रास्ता खाली करने लगे.

मुझे चाची का फोन आया था कि मैं घर आ रहा हूँ कि नही.

मैं ने चाची को बता दिया कि मैं आज नही आ सकता.

फिर हम अपना काम करने लगे.

लोगो को दर्शन करने और खाना खाने मे रात के 10.00 बज गये.

हम ने सब साफ करने को कहा.

सब कुछ वापस रखने और काम ख़तम करने मे12.00 बज गये.

और इसी के साथ हम ने मेले का काम पूरा कर लिया.

कल से लोग वापस चले जाएँगे.

दुकान स्टॉल सब हटाने का काम लग जाएगा.

जब तक सब चले नही जाते हमारा काम पूरा नही होगा.

फिर मैं रणजीतसिंघ को छोड़ने हवेली चला गया.

रणजीतसिंघ काम मे इतना बिज़ी था कि वो कार वापस बुलाना ही भूल गया.

मैं रणजीतसिंघ को अपने बाइक पर हवेली ले आया

हवेली मे सब सो चुके थे

मैं ने रणजीतसिंघ को उसके कमरे मे छोड़ दिया.

और मुझे जो कमरा दिया गया था वहाँ चला गया.

अगर ठकुराइन को पता चला कि मैं हवेली मे हूँ तो वो मेरे पास ज़रूर आएँगी.

मैं कमरे मे चला गया

 


701

रणजीतसिंघ को उसके कमरे तक छोड़ने के बाद मैं अपने कमरे मे चला गया .जहाँ मैं ने पिछली बार ठकुराइन की चुदाई की थी.

आज मेला ख़तम हो गया.

मेले के शुरुआत मे भी मैं यही था और लास्ट के दिन भी मैं यही हूँ.

मेले के शुरुआत मे मैं ने ठकुराइन की चुदाई की और लास्ट मे ठकुराइन की बेटी की चुदाई करने वाला हूँ.

ठकुराइन की बेटी ,पायल

मैं ठकुराइन की चुदाई को याद कर रहा था कि मुझे पायल की याद आ गयी.

मैं पायल को तो भूल गया.मैं ने उसे बताया था कि मैं आज उसे प्यार करने वाला हूँ.

वो मेरा इंतज़ार कर रही होगी.

अगर आज उसके पास नही गया. आज उसे प्यार नही किया तो मैं बुरी तरह से फस जाउन्गा.

चलो .इस मेले को पायल को प्यार करके ख़तम करता हूँ.

मैं पायल के रूम तक जाते हुए उसे फोन किया. एक रिंग मे पायल ने फोन उठा लिया.

अवी-हेलो पायल

पायल-तुम कहाँ हो,कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ.आधी रात हो गयी.

अवी-मुझे बोलने तो दो

पायल-कहाँ हो तुम,

अवी-तुम्हारे रूम के सामने

पायल-मज़ाक नही,बताओ ना कहाँ हो

अवी-अपने रूम का डोर खोल कर देख लो

पायल ने डोर खोल दिया.मुझे सामने देख कर पायल खुश हो गयी.

और खुशी के मार वही पर मेरे गले लग गयी.

मैं ज़्यादा देर यहाँ खड़ा नही रह सकता था.मैं पायल के रूम के अंदर चला गया.

अंदर जाते ही मैं पायल के कमरे को देखने लगा. पायल ने बेड को गुलाब के फूल की पंखुड़ियों से सज़ा रखा था.

रूम मदहोश करने वाली स्मेल से भरा हुआ था.

मैं ने पायल की तरफ देखा ,पायल ने रेड साड़ी पहन रखी थी. और ज्वेल्लरी भी पहन रखी थी.जैसे की उसकी सुहागरात हो.

पायल साड़ी मे अप्सरा से कम नही लग रही थी.

साड़ी की बात ही अलग होती है. साड़ी मे लड़की अप्सरा से कम नही लगती. जीन्स टी शर्ट मे जितनी हॉट लगती है उस से ज़्यादा साड़ी मे हॉट लगती है.

मैं पायल को सर से लेके पैरो तक अच्छे से देखने लगा.

साड़ी थोड़ी ट्रांसपेरेंट थी जिस से पायल का गोरा बदन रेड साड़ी मे बिजलिया गिरा रहा था.

पायल का सेक्सी ब्लाउस जिस से उसके बूब्स बाहर निकलने को मचल रहे थे.

पायल की नाभि .ट्रांसपेरेंट साड़ी से देख कर कातिल लग रही थी.

पायल ने साड़ी काफ़ी नीचे पहनी थी .जिस सेउसका फिगर मैं अच्छे से देख सकता था.

आज तो पायल की जोरदार चुदाई करनी पड़ेंगी.

मैं पायल का ऐसा रूप देख कर खुद पे कंट्रोल नही रख पाउन्गा. पायल आज की चुदाई हमेशा याद रखेगी.

मुझे खुद को ऐसे घूरता हुआ देख कर पायल शरमा गयी.

पायल शरमा भी सकती है. ये मुझे आज पता चला .

अवी-पायल तुम स्कर्ट मे जितनी हॉट लगती हो उस से कही ज़्यादा हॉट साड़ी मे लग रही हो. अगर तुम साड़ी पहन कर मुझे कार चलाना सिखाती तो मैं अपना प्रॉमिस पहले दिन ही तोड़ देता.

पायल अपनी तारीफ सुनकर शरमा गयी.

पायल ने कल मुझे अपनी गंद दिखाई थी. ऐसी बिंदास लड़की का इस तरह शरमाना मुझे पागल कर रहा था.

मैं ने पायल का हाथ पकड़ लिया और अपने तरफ खिच लिया.पायल ने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया जिस से वो मेरे गले लग गयी.

अवी-पायल तुम ने मुझे ऐसा सर्प्राइज़्ड दिया कि क्या बताऊ, आज मैं एक नयी पायल को देख रहा हूँ. मैं चाहता हूँ की आज की रात प्यार करने के बाद मैं हमेशा ऐसी नयी पायल को देखना चाहूँगा.

मेरी बात सुनकर पायल और खुश हो गयी.

अवी-तुम ऐसी रहना ,मॉडर्न ड्रेस से सलवार कमीज़ तुम पे ज़्यादा अच्छी लगती है.मेरे लिए नयी पायल बनोगी

पायल-हाँ, बस मुझे ऐसे ही प्यार करते रहना.

अवी-प्यार तो मैं करता रहूँगा ,तुम्हे प्यार करने से मैं कभी रोक नही पाउन्गा.

पायल-मुझे रोज प्यार चाहिए

अवी-रोज ,रोज तो प्यार नही कर सकता,लेकिन जब भी करूँगा तब तुम्हे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी दूँगा.

पायल-मेरा भी वही मतलब था.

अवी-अभी देखो हम मेले मे मिले है ,इसके बाद मिलना मुश्किल हो सकता है,

पायल-पहले प्यार तो करो ,ये बिछड़ने की बाते फिर कभी करना.

अवी-ओके, वैसे तुम्हारे रूम मे ज़ीरो लाइट है

पायल-हाँ.

अवी-उसे ऑन करो, वरना कोई इधर आ जाएगा.

पायल-आएगा तो भी कुछ पता नही चलेगा. रूम से लाइट और आवाज़ बाहर नही जाती. स्पीकर ऑन करने के बाद आवाज़ बाहर जाती है.

अवी-खिड़की से तो पता चल जाएगा कि लाइट ऑन है

पायल-ये तो मैं भूल गयी. अब ज़ीरो लाइट लगाती हूँ.

पायल ने ज़ीरो लाइट ऑन की.

रेड लाइट मे रेड साड़ी मे पायल कमाल की लग रही थी.

मैं ने पायल को अपने पास बेड पर आने को कहा.

पायल मेरे पास आकर बैठ गयी.

पायल के बदन से आ रही महक को मैं सूंघने लगा.

पायल का बदन मुझे उसे प्यार करने के लिए अपनी सुगंध से मुझे अपनी तरफ अट्रेक्ट कर रहा था.

अवी-पायल तुम्हारी महक मुझे पागल बना रही है.मैं तो तुम्हे आज खा जाउन्गा.

पायल-मैं इसी का इंतज़ार कर रही हूँ कि तुम मुझे खा लो.

अवी-अभी खाने को शुरुआत करता हूँ.पहले मैं फ्रेश हो कर आता हूँ. तुम्हारे बदन से इतनी अच्छी महक आ रही है और मेरे शरीर से बदबू आ रही है

पायल-ये बदबू नही. तुम्हारी मेहनत करने का सबूत है.तुम्हे फ्रेश होने की ज़रूरत नही है. ये मर्दानी खुसबू मुझे उतेज़ित कर रही है.

अवी-मुझे लगा था कि ठाकुर के बेटी, हवेली की रानी को ये पसंद नही आएगा.

पायल-लोगो के लिए मैं हवेली की रानी हूँ पर तुम्हारी तो गुलाम हूँ.

अवी-(ठकुराइन से कितनी अलग है पायल) गुलाम , तुम गुलाम बन ना चाहती हो तो मैं क्या कर सकता हूँ.

और मैं खड़ा हो गया. और अपना मोबाइल और पॉकेट को टेबल पर रख दिया.

सारा की दी हुई गोली खा ली .और अपनी टी शर्ट निकाल कर वापस पायल के पास बैठ गया.

गोली इस लिए खा ली कि पायल की लंबी चुदाई कर सकूँ.और मुझे ताक़त आ सके कि जिस से पायल की चुदाई कर सकूँ

पायल मेरे कसरती शरीर को देखने लगी.

मेरे शरीर के कट्स देख कर पायल की आँखे मेरे शरीर से हट नही रही थी.

मेरे शरीर से पसीने की बदबू आ रही थी

पर कुछ लड़किया और औरते ऐसी होती है कि उनको मर्दानी स्मेल एग्ज़ाइट करती है.

पायल भी उनमे से एक थी. उसको मेरी मर्दानी स्मेल उतेज़ित कर रही थी.

पायल को तो लग रहा था कि कब मैं उसे गले लगाता हूँ.

कब उसे मुझे प्यार करने मिलेगा इस इंतजार मे उसकी आँखे मुझे घूर रही थी.

मैं ने पायल की इच्छा पूरी की और मैं ने पायल को अपने गले लगा लिया.और प्यार करना सुरू किया

 
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