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मैं और मेरा परिवार

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710

सुबह अलार्म की आवाज़ सुनकर मेरी नींद खुल गयी.

दोनो के पैर मेरे उपर थे .सारा और ज़ोया मुझसे चिपक कर सो रही थी.

मैं ने दोनो को अपने उपर से हटाया और ज़ोया की गंद पर थप्पड़ मारकर उठाया

अवी-ज़ोया उठो, सुबह हो गयी.

ज़ोया-इतनी जल्दी अभी तो सोई थी

अवी-उठो 7.00 बज रहे है

ज़ोया-तुम फ्रेश होकर आओ तब तक मैं सोती हूँ

अवी-उठो, जल्दी, वरना मैं पानी डालूँगा तुम्हारे उपर

ज़ोया-उठ रही हूँ ,तुम जाकर फ्रेश हो जाओ

मैं बाथरूम मे जाकर फ्रेश हो गया. ज़ोया अभी तक सो रही थी.

मेरे बेडरूम मे आते ज़ोया ने कपड़े पहन लिए और फ्रेश होने चली गयी.

मेरे कपड़े पहने तक ज़ोया फ्रेश होकर आ गयी. ज़ोया ने सिर्फ़ मुँह धोया था और बाल ठीक किए

ज़ोया-चलो

अवी-फ्रेश तो हो जाओ

ज़ोया-तुम्हारा काम करके वापस सो जाउन्गी

अवी-जैसा तुम्हे ठीक लगे

मैं ज़ोया के साथ कुवरसिंघ के पास आ गया .आते हुए मैं ने सारा की गंद पर थप्पड़ मारकर उसे बताया कि आराम से सोना

ज़ोया-तुम उसके पास जाओ मैं पेपर लेकर आती हूँ

मैं कुवरसिंघ के रूम मे चला.कुवरसिंघ उठ चुका था और फ्रेश भी हो चुका था.

अवी-

सारा-

अवी-कैसे हो

कुवरसिंघ ने मेरी तरफ देखा

कुवरसिंघ-तुम ,तुम कब आए

अवी-अभी थोड़ी देर पहले

कुवरसिंघ-इतनी सुबह. ऐसे अचानक

अवी-कल तुम्हारा कॉल आते मैं निकल पड़ा .आते हुए देर हो गयी तो फ्रेंड के घर चला गया .और सुबह होते इधर आ गया

कुवरसिंघ-मेरे एक बार कहने पे आ गये

अवी-हम फ्रेंड है. फ्रेंड के लिए आना तो पड़ेगा.

कुवरसिंघ-थॅंक्स, डॉक्टर से मिले

अवी-हाँ.डॉक्टर डिसचार्ज के पेपर बना रहे है.

कुवरसिंघ-मुझे डिसचार्ज कर रहे है

अवी-हाँ, तुम से बात करने के बाद डॉक्टर को कॉल किया था.डॉक्टर ने कहा कि डिसचार्ज कर सकते है. तो मैं आ गया

कुवरसिंघ-मुझे तो कुछ नही बताया डॉक्टर ने

अवी-पेशेंट की जगह मुझसे बात की. बताओ सब ठीक हुआ ना

कुवरसिंघ-हाँ, पहले जैसा फिट हो गया

अवी-दिख तो रहे हो

कुवरसिंघ-देखो चल क्या भाग सकता हूँ

अवी-तुम्हारे बाल भी आने लगे है.

कुवरसिंघ-वो मेरी नयी लाइफ की शुरुआत के सबूत है

अवी-बाकी ,वो पीछे का कैसा है.

कुवरसिंघ-वो भी पहले जैसा हो गया. पर बैठने मे प्राब्लम होती है

अवी-कुछ नही होता ,एक दिन वो भी ठीक हो जाएगा.और कैसे बीते10 दिन

कुवरसिंघ-बोरिंग थे. पर रेशमा को कॉल करके सब दर्द ख़तम हो जाते थे.

अवी-भाभी मुझे रोज पूछती थी कि तुम कब आओगे. तुम ने कुछ बताया तो नही

कुवरसिंघ-कैसे बताता

अवी-बताना भी मत ,हम गुन्डो वाली कहानी बता देंगे.

कुवरसिंघ-वो ठीक रहेगा.

अवी-अपने भाई को भी मत बताना .मैं सब को ठीक से बता दूँगा

कुवरसिंघ-तुम जैसा कहोगे वैसा करूँगा.

अवी-तो तय्यार हो जाओ भाभी से मिलने के लिए.

कुवरसिंघ बाथरूम मे चला गया कपड़े पहने के लिए

ज़ोया भी रूम मे आ गयी.

ज़ोया-ये लो कुछ मेडिसिन है. टाइम टाइम पर लेते रहना .और ये रही पूरी रिपोर्ट.

कुवरसिंघ-डॉक्टर मैं ठीक हूँ ना

ज़ोया-पहले की तरह फिट हो गये हो ,बस कुछ सीपीशॅस्ट से चेक कर लेना जिस से सब ठीक हो जाएगा.

कुवरसिंघ-थॅंक यू डॉक्टर, बिल कितना हुआ

अवी-हाँ ,बिल कितना हुआ

ज़ोया-25 लाख

कुवरसिंघ-25 लाख?

अवी-कुछ ज़्यादा नही हुआ

ज़ोया-सीक्रेट रखा, ओपरेशन किए ,इतना तो होगा ही

कुवरसिंघ-अभी तो मेरे पास इतने पैसे नही है.

ज़ोया-अवी को मैं ने अकाउंट नंबर दिया है.उसको पैसे दे देना ,वो मेरे अकाउंट मे डाल देगा.

कुवरसिंघ-मैं घर जाते ही पैसे दे दूँगा.

ज़ोया-चलो ड्रेसिंग कर देती हूँ

कुवरसिंघ-वो किस लिए

अवी-ताकि कोई तुम्हे पहचाने ना ,

कुवरसिंघ-ये ठीक रहेगा.

ज़ोया ने कुवरसिंघ के चेहरे पे पट्टी बाँध दी.

ज़ोया से मिलने के बाद मैं कुवरसिंघ के साथ सिटी हॉस्पिटल आ गया.

अवी-ये लो कॅप पहन लो

कुवरसिंघ-हम यहाँ क्यूँ आए है

अवी-ताकि उस हॉस्पिटल के बारे में किसी को पता ना चले.

कुवरसिंघ-यहाँ से गाओं कैसे जाएँगे

अवी-टॅक्सी है

मैं ने टॅक्सी वाले हो कॉल किया और गेट के पास आने को कहा.

टॅक्सी वाला कार लेकर आ गया.

हम कार मे बैठ कर गाओं की तरफ जाने लगे.

अवी-पिछली बार की तरह जल्दी पहुँचा दो,

टॅक्सी वाला-साब उस टाइम हम रात मे सफ़र कर रहे थे

अवी-तुम ने जल्दी पहुँचा दिया तो पिछली बार जितने पैसे दिए उतने दूँगा.

टॅक्सी वाला-ऐसा बोलो ना साब

,

फिर टॅक्सी वाले ने स्पीड बढ़ा दी.

मैं ने चाची को कॉल करके बता दिया कि मैं शहर एक काम से आया हूँ

टॅक्सी वाले ने हम समय पर शहर2 से शहर पहुँचा दिया.

पिछली बार की तरह कॉलेज के पास छोड़ कर वो चला गया .और मैं कुवरसिंघ को लेकर बाइक से गाओं आ गया.

कुवरसिंघ को बैठने मे प्राब्लम हो रही थी. और होती रहेगी.

मैं कुवरसिंघ को लेकर घर3 आ गया और खिड़की से जाकर गेट खोल कर कुवरसिंघ को अंदर ले लिया

कुवरसिंघ-हम यहाँ क्यूँ आए है

अवी-ये तुम्हारा पॉकेट और ये नेकक्लेस मेरे पास था.

कुवरसिंघ-ये तो रेशमा का है ,अच्छा हुआ मिल गया

अवी-ये पट्टी निकाल दो

कुवरसिंघ ने पट्टी निकाल ली

अवी-चलें हवेली

कुवरसिंघ-चलो, कितने दिन हो गये रेशमा से मिलकर ,अपने बेटे को देखे हुए.जल्दी चलो हवेली.

मैं कुवरसिंघ को लेकर हवेली आ गया.

 


711

मैं कुवरसिंघ को लेकर हवेली आ गया.

हवेली के हॉल मे ठाकुर,ठकुराइन , रणजीतसिंघ और कामिनी बैठ कर बाते कर रहे थे.

जैसे मुझे कुवरसिंघ के साथ देखा तो सब हमे देखते रहे.

कुवरसिंघ की हालत देखते हुए सब खड़े हो गये.

कुवरसिंघ के सर पर बाल नही थे और हाथ पर पट्टी लगी हुई थी.

ठाकुरजी-ये क्या हुआ तुम्हे ,

ठकुराइन-इतने दिन कहाँ थे

कुवरसिंघ ने कोई जवाब नही दिया और रोते हुए ठाकुरजी के पैरो मे गिर कर माफी माँगने लगा.

कुवरसिंघ-पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए, मैं ने आज तक आपको बहुत परेशान किया, मेरी वजह से आपको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, मैं ने आपके नाम को मिट्टी मे मिलाया ,मुझे माफ़ कर दो

कुवरसिंघ आने की बात रेशमा तक पहुँच गयी. रेशमा अपने बेटे के साथ नीचे आ गयी.

रेशमा ने कुवरसिंघ को ठाकुरजी के पैरो मे गिर कर रोते हुए देखा तो वो कुछ समझ नही पाई.

कुवरसिंघ-पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए. मैं ने बहुत बुरे काम किए है, मैं ने ठाकूरो के नाम पे दाग लगाया है. मैं ठाकुर के नाम पर कलंक हूँ. मुझे माफ़ कर दीजिए

ठाकुरजी-उठो, आज ये अच्छे बन ने का नाटक क्यूँ कर रहे हो, इस हवेली को पाने के लिए

कुवरसिंघ-नही पिताजी, मुझे कुछ नही चाहिए.मैं ठाकुर बनने के लायक नही हूँ, मैं अपनी ग़लती का पश्चाताप करना चाहता हूँ,

ठाकुरजी-मुझे तो तुम्हारी ये कोई चाल लग रही है. सूरज वेस्ट से निकल सकता है पर तुम बदल नही सकते

कुवरसिंघ-ये मेरे पाप है जो आज मुझ पे कोई विश्वास नही कर रहा ,मैं

ठाकुरजी-तूने विश्वास करने जैसे कोई काम किया हो तो बता

कुवरसिंघ-मैं ने हमेशा दूसरो को बुरा चाहा था और आज अच्छा कर रहा हूँ तो मेरा अतीत मेरा पीछा नही छोड़ रहा.मैं बदल गया हूँ पिताजी

ठाकुरजी-तुम वो गिरगिट हो जो अपने रंग बदलती है. क्या पता अब क्या करना चाहता हो.

ठाकुरजी के माफ़ ना करने से कुवरसिंघ ठकुराइन के पैरो मे गिर कर माफी माँगने लगा.

कुवरसिंघ-माँ ,आप ही पिताजी को कहो ना कि मुझे माफ़ कर दें

ठकुराइन-माँ, मैं ने सही सुना या तूने ग़लती से माँ कहा

कुवरसिंघ-माँ, मुझे और शर्मिंदा मत करो, मैं ने आपको ग़लत समझा था. मुझे माफ़ कर दो, अपने बेटे को

ठकुराइन -तेरे मुँह से माँ वर्ड अच्छा नही लगता

कुवरसिंघ-माँ, ऐसा मत कहो, चाहे तो मार लो ,मार डालो पर ऐसा मत कहो,

ठकुराइन-मैं क्यूँ मारु, मुझे तुमने कभी कुछ समझा ही नही. मैं कौन हूँ तुम्हारी

कुवरसिंघ-माँ, ऐसा मत कहो, तुम मेरी माँ हो,

ठकुराइन-मुझे तो हँसी आ रही है तेरी बात सुनकर, क्या कहा था मुझे बाज़ारु औरत ,अब वही बोल

कुवरसिंघ ने ठकुराइन की बात सुनकर ठकुराइन के हाथ पकड़ कर अपने गाल पर थप्पड़ मारना शुरू किया.

कुवरसिंघ के ऐसा करने से ठकुराइन के साथ हॉल मे खड़े सब शॉक्ड हो गये.

कुवरसिंघ लगातार अपने गाल पर थप्पड़ मार कर रो रहा था

ठकुराइन ने अपने हाथ छुड़ा लिए फिर भी कुवरसिंघ अपने हाथ से गाल पर थप्पड़ मारने लगा.

हाथ पर लगी हुई पट्टी से खून निकलने लगा. पर कुवरसिंघ रुका नही.

कुवरसिंघ को ऐसा रोते हुए देख कर रेशमा भी रोने लगी.

रेशमा-माँ, इनको माफ़ कर दो, इनके हाथ से खून निकल रहा है

रेशमा की बात सुनकर सब की नज़र खून पर गयी. पर कुवरसिंघ थप्पड़ मारता गया.

ठकुराइन कुवरसिंघ के थप्पड़ मारने से पिघल गयी.

ठकुराइन-रुक जा बेटा ,मैं ने तुझे माफ़ किया.अब रुक जा

कुवरसिंघ रुक गया और ठकुराइन के पैरो मे गिर कर रोने लगा.

रणजीतसिंघ-कुंवर को हुआ क्या है.

अवी-मैं बताता हूँ,मुझे पता है कुवरसिंघ को क्या हुआ है.

कुवरसिंघ अभी भी ठकुराइन के पैरो मे बैठ कर रोता रहा.

अवी-कुछ दिन पहले कुवरसिंघ पे कुछ गुन्डो ने हमला किया था.

ठाकुरजी-क्या कहा

रणजीतसिंघ-किस की इतनी हिम्मत हुई जो मेरे भाई मे हाथ उठा सके

रणजीतसिंघ की आवाज़ सुनते कुवरसिंघ रणजीतसिंघ के पास आकर उसके पैर पकड़ कर माफी माँगने लगा.

कुवरसिंघ-भैया, मुझे माफ़ कर दो ,मैं आपको ग़लत समझता था.आपको मारने की कोशिश की थी, फिर भी आप मेरी मदद करते है. मेरा ख़याल रखते रहे. मेरी ग़लती पे परदा डालते रहे. और मैं ने आप को अपना दुश्मन समझा था.मुझे माफ़ कर दो भैया.

रणजीतसिंघ-वो तेरी नादानियाँ थी. तू ग़लत रास्ते पर गया था. ग़लत दोस्त बनाए थे. इसमे तेरी ग़लती नही है

कुवरसिंघ-भैया मेरी ग़लती है जो देवता जैसे भाई को मारने की कोशिश की थी .मुझे माफ़ कर दो,

रणजीतसिंघ-मैं ने तो तुझे कब का माफ़ किया है. ये रोना बंद कर,देख बहू भी रो रही है.

कुवरसिंघ-रेशमा मैं तुम्हारा भी गुनहगार हूँ ,मैं ने तुम्हे कभी समझा नही. कभी तुम्हारी कदर नही की. मुझे माफ़ कर दो ,

रेशमा-ये आप क्या कर रहे है. मुझ से माफी क्या माँग रहे है. मैं आप के साथ जैसी हूँ ,खुश हूँ

कुवरसिंघ-ये तुम्हारा बड़प्पन है. मुझे पता है मैं ने तुम्हारे साथ क्या किया है. मैं किस्मत वाला हूँ जो मुझे तुम मिली हो.

रेशमा-आप मुझसे पाप करवा रहे हो, मुझसे माफी मत मांगिए.

अवी-भाभी माफ़ कर दो ,वरना कुवरसिंघ पैर नही छोड़ेगा.

रेशमा-मैं ने आपको माफ़ किया.

कुवरसिंघ उठ कर ठाकुरजी के पैरो मे गिर गया.

कुवरसिंघ-पिताजी मुझे माफ़ कर दीजिए ,मैं अपने पापों की शमा माँगता हूँ. और दुबारा ऐसा कोई काम ना करने का वचन देता हूँ.जिस से आपका नाम बदनाम हो. एक अच्छा ठाकुर, ठाकुर नही, एक अच्छा बेटा बन ने का वचन देता हूँ

ठाकुरजी ने कुवरसिंघ को पकड़ कर खड़ा किया.

ठाकुरजी-बहू मलम पट्टी लेकर आओ,मेरे बेटे का खून निकल रहा है

रेशमा भागते हुए जाकर मलम पट्टी लेकर आ गयी. और कुवरसिंघ को मलम लगाने लगी.

ठाकुरजी-अवी,क्या हुआ था मेरे बेटे के साथ

अवी-मेले मे कुछ गुन्डो ने कुवरसिंघ को जंगल मे ले जाकर बहुत मारा.

मैं वही खेतो मे रुका था ,मुझे कुवरसिंघ की एक चीख सुनाई दी.

मैं ने जंगल मे जाकर देखा तो, कुछ गुंडे गाड़ी लेकर जा रहे थे. और खंडहर मे कुवरसिंघ खून से लथपथ पड़ा था.

मैं ने कुवरसिंघ को पहचान लिया और अपने साथ खेत वाले घर3 ले आया

ठाकुरजी-कब हुआ था ये सब.

अवी-जी, 15 16 दिन हो गये

ठाकुरजी-और तुम अब बता रहे हो,

रणजीतसिंघ-पिताजी अवी की बात तो सुन लीजिए

ठाकुरजी-बोलो

अवी-मैं आपको बताने वाला था कि कुवरसिंघ ने मना किया. किसी को पता चलता कि ठाकुर के बेटे को लोगो ने मारा है तो बदनामी होती.इस लिए मैं कुवरसिंघ को सिटी हॉस्पिटल की जगह एक प्राइवेट हॉस्पिटल मे लेकर गया था. जहाँ कुवरसिंघ का इलाज हो और बदनामी ना हो

ठाकुरजी-कुंवर कौन थे वो

कुवरसिंघ-कोई भी हो, इस बात को बढ़ाने से क्या फ़ायदा. झगड़े से कोई लाभ नही होता है.

ठाकुरजी-ये कैसी बात कर रहे हो तुम

अवी-जिस प्राइवेट हॉस्पिटल मे कुवरसिंघ ले गये थे वहाँ कुवरसिंघ का इलाज हो रहा था और मेडिटेशन भी हो रहा था. जिस से कुवरसिंघ को अपनी ग़लती का अहसास हुआ और आपके सामने नया कुवरसिंघ खड़ा है.

ठाकुरजी-तुम्हारे दादाजी ने मेरी जान बचाई थी. और तुम ने मेरे बेटे की जान बचाई. तुम ने मेरे बेटे की जान बचा कर हम पे अहसान किया.

कुवरसिंघ-मुझे जीने का नया रास्ता दिखाया अवी ने,ये ना होता तो मर जाता या फिर से पाप करता रहता

अवी-ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

ठाकुरजी-तुम ने हमे हमारा बेटा वापस लौटाया है. हम तुम्हारा अहसान ज़िंदगी भर नही भूलेंगे.तुम योगेंद्रसिंघ का खून हो .तुम्हारे दादाजी को तुम पे नाज़ होगा.

रणजीतसिंघ-पिताजी अवी हमेशा दूसरो की मदद करता है

अवी-मैं ने कुछ नही किया. कुवरसिंघ की जान रेशमा भाभी ने बचाई है. रेशमा भाभी ने कुवरसिंघ को टूटने नही दिया.हमेशा उनको हिम्मत देती रही .

ठाकुरजी-हम ने जब बहू को पहली बार देखा था तभी समझ गये थे कि कुंवर कोई सुधार सकता है तो वो यही है

ठकुराइन-सही कहा आपने, हमारी दोनो बहू लाखों मे एक है.

ठाकुरजी-बहू कुंवर को उपर लेकर जाओ ,उसे आराम की ज़रूरत है

अवी-मैं भी चलता हूँ

ठाकुरजी-तुम कहाँ जा रहे हो, तुम खाना खा कर जाना

अवी-जी,वैसे ये गोलिया कुवरसिंघ को देते रहना होगा.

कुवरसिंघ-उपर चल कर रेशमा को बता दो

ठाकुरजी-तुम उपर जाओ ,और बहू को समझा दो

रेशमा कुवरसिंघ को उपर ले जाने लगी.कि कुवरसिंघ रुक गया.

और सीढ़ियों से वापस नीचे आकर कामिनी के पैर छु लिए.

कामिनी-ये क्या कर रहे हो

कुवरसिंघ-भाभी मुझे माफ़ करदो, मैं ने आपके साथ भी ग़लत किया था.

कामिनी-तुम्हारी ग़लतिया माफी के काबिल नही है. पर तुम सुधारना चाहते हो तो तुम्हे एक चान्स देना चाहिए. उठो और नयी ज़िंदगी जीना शुरू करो

ठाकुरजी-कुँवर ने तो सब से माफी माँग ली.

अवी-ये तो कुछ नही. मेले मे भी लोगो से माफी माँगी है. जिस के साथ ग़लत किया उन सबसे माफी माँगी है

ठाकुरजी-नया कुंवर देख कर अच्छा लगा.अब सुकून से मर सकता हूँ

ठकुराइन-मरे आपके दुश्मन

फिर मैं और रेशमा कुवरसिंघ के साथ उपर आ गया.
 
712

मैं रेशमा और कुवरसिंघ के साथ उपर आ गया.

कमरे मे आते ही कुवरसिंघ रेशमा के गले लग गया.

और रोने लगा

कुवरसिंघ-रेशमा मुझे माफ़ कर देना,मैं ने तुम्हे कभी समझा नही.

रेशमा-आप फिर शुरू हो गये

कुवरसिंघ-रेशमा ,तुमसे रोज बात करने से मुझे हिम्मत मिलती थी. अगर तुम ना होती तो मैं टूट जाता.

रेशमा-मैं आप से बहुत नाराज़ हूँ.

कुवरसिंघ-मुझे माफ़ कर दो, मैं अब बदल गया

रेशमा-इसके लिए नही. आपने मुझे फोन पर बताया क्यूँ नही. मैं कितनी डर गयी थी. वो अच्छा हुआ अवी ने मुझे हिम्मत दी.

कुवरसिंघ-आज से मैं तुम्हे सब कुछ बताया करूँगा. और मैं तुम्हे बहुत प्यार करूँगा.

और कुवरसिंघ ने रेशमा को किस करना शुरू किया.

इनकी तो, मैं ने ख़ास कर बताया कि मैं भी कमरे मे हूँ

मेरे खांसने से रेशमा कुवरसिंघ से दूर हो गयी. और शरमा कर कमरे से बाहर चली गयी.

कुवरसिंघ-तुम्हारा जितना शुक्रिया अदा करूँ उतना कम है.

अवी-ये बोल कर तुम मुझे शर्मिंदा कर रहे हो

कुवरसिंघ-तुम ने मेरी मदद की है. रेशमा की मदद की है. हमे मिलाया है.

अवी-वो तो अपने आप हो गया

कुवरसिंघ-तुम बहुत अच्छे हो ,तुम्हारा जैसा दोस्त पा कर मैं खुश हूँ

अवी-वैसे ये हाथ पर चोट कैसे लगी.पहले तो नही थी.

कुवरसिंघ-ये हॉस्पिटल मे लग गयी.

अवी-कैसे

कुवरसिंघ-वो डॉक्टर ने मेरा लंड चेक करने के लिए नर्स को मेरे साथ सेक्स करने को कहा. और सेक्स करते हुए चोट लग गयी.

अवी-कंट्रोल रखा करो

कुवरसिंघ-कंट्रोल नही, ये सब बंद ,अब मैं अपने पत्नी के साथ ही करूँगा. उसे हमेशा खुश रखूँगा.

अवी-अच्छा सोचा तुम ने.

हम बात कर रहे थे कि रेशमा नाश्ता लेकर आ गयी.और नाश्ता रख कर जाने लगी.

अवी-भाभी रुकिये आप से एक बात करनी है

रेशमा कुवरसिंघ के पास बैठ गयी

अवी-भाभी, आपको क्या लगता है कुवरसिंघ बदल कैसे गया.

रेशमा-तुम ने बताया ना मेडिटेशन की वजह से हुआ है

कुवरसिंघ-रेशमा मेडिटेशन की बात झूठी है.

रेशमा-मैं समझी नही

अवी-भाभी मुझे माफ़ करना.मैं ने कुवरसिंघ को सब बता दिया है

रेशमा-घबराते हुए ,क्या बताया

अवी-आपके साथ कुवरसिंघ के दोस्तो ने क्या किया , वो बता दिया है

मेरी बात सुनते रेशमा के आँखो मे पानी आ गया.

रेशमा-मुझे माफ़ करना मेरे पास दूसरा रास्ता नही था

कुवरसिंघ-देखा मैं ने

अवी-मैं ने कुवरसिंघ को वो वीडियो दिखाया था

रेशमा-मैं क्या करती ,उन लोगो ने आपको मारने की धमकी दी थी.

कुवरसिंघ-रेशमा ,सब मेरी ग़लती है. जिस पे मैं ने विश्वास किया उन्होने ने मेरे पीठ मे खंजर खोपा है

रेशमा-मुझे माफ़ कर दो, मैं वो करना नही चाहती थी,मेरे पास दूसरा रास्ता नही था.

कुवरसिंघ-पता है मुझे. मैं किस्मतवाला हूँ जो मुझे तुम मिली हो.

अवी-ये रोना बंद करो. जो हो गया सो हो गया.

कुवरसिंघ-अवी ने सही कहा. उसे बुरा सपना समझ कर भूल जाओ. देखो मैं भी गुन्डो की मार को भूल गया ना.

रेशमा-पर

कुवरसिंघ-पर वर छोड़ दो, अब हम नयी ज़िंदगी शुरू करेंगे. जिसमे मैं तुम और हमारा बेटा होगा.

रेशमा-और पिताजी माजी

कुवरसिंघ-हम यहाँ से दूर चले जाएँगे. और अपनी नयी दुनिया बसाएँगे.तुम मेरा साथ दोगि ना

रेशमा-मैं आपके साथ हमेशा रहूगी

कुवरसिंघ-तुम अवी से गोलियाँ लो ,मैं बाथरूम होकर आता हूँ

कुवरसिंघ बाथरूम मे चला गया.

अवी-मैं ने कहा था ना कि सब ठीक कर दूँगा

रेशमा-तुम्हारा शुक्रिया कैसे अदा करू समझ नही आ रहा

अवी-जब कभी मोका मिले तो कर देना

रेशमा-मैं तुम्हारा शुक्रिया ज़रूर अदा करूँगी.

अवी-वैसे आपने सिर्फ़ नाश्ता खिलाया ,टी नही पिलाई

रेशमा-अभी पिलाती हूँ,

और रेशमा टी बनाने के लिए जाने लगी थी कि मैं ने रेशमा को रोक लिया

अवी-भाभी. टी फिर कभी पिला देना

रेशमा-मैं अभी बनाकर लाती हूँ

अवी-थोड़ी देर मे खाना खाना है ,रहने दीजिए

रेशमा-ठीक है. पर किसी दिन टी पीने ज़रूर आना.

अवी-वो तो आना ही होगा

रेशमा-वैसे अवी तुम ने उनको बता कर अच्छा किया.वरना मैं उनको वो घटना कभी बता नही पाती.

अवी-मुझे तो लगा था कि आप गुस्सा करेंगी

रेशमा-मैं क्यूँ गुस्सा करती. मैं तो यही सोच रही थी उनको कैसे बताउन्गी

अवी-आप कुवरसिंघ को बताने वाली थी

रेशमा-हाँ. ऐसी बाते बाहर से पता चली तो वो मुझे ग़लत समझते .इसी लिए मैं बताने वाली थी.

अवी-देखा जाए तो आपके साथ जो हुआ वो अच्छा हुआ

रेशमा-तुम्हे वो सब अच्छा लग रहा था.

अवी-हाँ, उसकी वजह से कुवरसिंघ बदल गया. बुरे दोस्तो की संगत से दूर रहेगा.उस वीडियो को देख कर कुवर बदल गया.

रेशमा-तुम सही कह रहे हो.

अवी-पर एक बात है

रेशमा-क्या

अवी-आप पे ब्लॅक कलर की जगह पिंक कलर अच्छा दिखता है

मेरी बात सुनकर रेशमा शरमा गयी

अवी-आप आज ने येल्लो कलर पहना है. ये भी अच्छा है पर पिंक होता तो आप कमाल की लगती

रेशमा-तुम मेरे साथ ऐसी बाते क्यूँ करते हो.

अवी-क्यूँ कि ऐसी बाते करने से आपका मूड ठीक हो जाता है

रेशमा-वैसे तुम्हारी इच्छा कभी पूरी नही होगी. आइ हटे पिंक कलर

अवी-ये तो बड़ी मुश्किल हो गयी

रेशमा-एक मिनिट तुम ने कहा था कि उनको वीडियो दिखाया ,क्या वो वीडियो तुम्हारे पास है.

अवी-हाँ

रेशमा-उसे डेलीट कर दो

अवी-मैं नही करूँगा

रेशमा-प्लीज़

अवी-ठीक है कर दूँगा.

कुवरसिंघ-क्या बाते हो रही है.

रेशमा-कुछ नही, वो अवी को टी पीने बुला रही थी.

कुवरसिंघ-टी ,

रेशमा-अवी को मेरे हाथ की टी पसंद है ,

कुवरसिंघ-इसने कब पी

रेशमा-वो उस्दिन मेरे साथ जो हुआ था उसके बाद मैं ने आपके बारे में पूछने के लिए अवी को बुलाया था.तब पिलाई थी

कुवरसिंघ-अवी को कभी नाराज़ मत करना. अवी मेरा दोस्त और भाई दोनो है.

रेशमा-मैं तो अभी पिलाने वाली थी पर पिताजी ने कहा ना कि अवी को खाना खिलाना है.

कुवरसिंघ-फिर कभी पिला देना. अब तो अवी से मिलना जुलना चलता रहेगा.

अवी-ये लो गोलियाँ

कुवरसिंघ-गोलियों की ज़रूरत नही है मैं ठीक हूँ

रेशमा-अवी मुझे दो, मैं देखती हूँ कैसे नही खाते

कुवरसिंघ-मेडम ने कहा तो खाना पड़ेगा

फिर हम ऐसे ही इधर उधर की बाते करते रहे .

फिर मैं खाना खाने के लिए नीचे चला गया. पायल सो रही थी जिस से उस से मिलने नही गया.

खाना खाने के बाद कुवरसिंघ मुझे फिर अपने कमरे मे ले गया.

कुवरसिंघ-अवी मैं पैसे कल दे दूँगा.

रेशमा-कैसे पैसे

कुवरसिंघ- हॉस्पिटल का बिल, उसके पैसे

अवी-कभी भी देना ,ये लो तुम्हारा नेक्लेस

रेशमा-ये तो मेरा है. कुछ दिन से दिख नही रहा था .तुम्हे कहाँ मिला

कुवरसिंघ-मैं बताता हूँ. मैं ने चुराया था ,एक औरत को देने के लिए.

रेशमा-आपने

कुवरसिंघ-वो मेरी सब से बड़ी ग़लती थी. मैं दुबारा ऐसा नही करूँगा. माफ़ कर दो

रेशमा-ये तो पुरानी बात है. पर फिरसे मत कीजिएगा.

अवी-आप बाते करो मुझे घर जाना है

कुवरसिंघ-रूको .तुम कहाँ जा रहे हो

अवी-मुझे घर भी तो जाना है. कल से घर नही गया.

कुवरसिंघ-ठीक है,अब तो हम मिलते रहेंगे

अवी-ज़रूर ,और तुम्हारी कार शाम तक हवेली भेज दूँगा

कुवरसिंघ-मैं तो भूल ही गया था. कहाँ है मेरी कार

अवी-मैं ने छुपा दी थी. मैं शाम तक भेज दूँगा

कुवरसिंघ के काम निपटा कर मैं उसके कमरे से जाने लगा.

रेशमा पे मैं ने कलर के बहाने ट्राइ किया पर कुछ फ़ायदा नही हुआ.

जाने दो पहले घर जाता हूँ

 


713

कुवरसिंघ के कमरे से निकल कर मैं ठकुराइन के नज़रों से बच कर निकल जाना चाहता था पर ठकुराइन ने मुझे पकड़ लिया.

ठकुराइन-कहाँ भाग रहे हो

अवी-मैं वो...घर जा रहा था

ठकुराइन-मेला ख़तम हुआ और तुम्हे क्या करना है पता हैना

अवी-हा, 1 महीना यही रुकना है

ठकुराइन-कब आ रहे हो

अवी-1 2 दिन मे आ जाउन्गा

ठकुराइन-तुम ने कुवर की मदद की इस लिए तुम्हे 2 3 दिन का टाइम दे रही हूँ. वरना पता है ना मैं क्या कर सकती हूँ.

अवी-जी पता है. मैं जल्दी आ जाउन्गा

ठकुराइन तो मेरे पीछे हाथ धो कर लगी है.

कुछ ना कुछ करना होगा. रणजीतसिंघ को बता देता हूँ .पर पहले घर जाता हूँ.

मैं घर की तरफ निकल गया और रणजीतसिंघ मेले मे चला गया.

घर जाते चाची ने मुझे सवाल पूछने शुरू किए कि हम सुबह से कहाँ था.

मैं ने बता दिया कि हवेली पे था ,हवेली का नाम सुनते ही चाची का गुस्सा कम हुआ.

मैं ने चाची को बता दिया कि मैं हवेली से खाना खा कर आया हूँ. बस आराम करना चाहता हूँ

मैं अपने कमरे मे जाकर सो रहा था कि छोटी चाची कमरे मे आ गयी.

अवी-चाची मुझे सोना है

सी चाची-सो लेना थोड़ी देर मुझसे बात तो कर

अवी-जल्दी कहिए क्या कहना है.

सी चाची-जल्दी, लो अब तो मेरे लिए तुम्हारे पास टाइम भी नही है. मैं चली जाती हूँ

अवी-आप भी ना, लो उठ गया ,

सी चाची-रहने दे अब

अवी-अब तो आपकी बात सुनकर ही सोउंगा वरना नही.

सी चाची-मैं कह रही थी कि मेला ख़तम हो गया

अवी-हो तो गया,

सी चाची-तो शुरू हो जाओ

चाची के कहते मैं चाची को किस करने आगे आ गया.

सी चाची-ये क्या कर रहा है

अवी-आप ही ने तो कहा कि शुरू हो जाओ. तो मैं आपको किस कर रहा था.

सी चाची-मैं ने उसके लिए नही कहा

अवी-फिर किस लिए

सी चाची-मेले मे क्या किया है वो बताने को कह रही थी

अवी-वो नही बताउन्गा.

सी चाची-क्यूँ?

अवी-क्यूँ कि वो आपको दिखाउन्गा.मैं ने वीडियो बनाए है.

सी चाची-ये तो बढ़िया काम किया.दिखाना

अवी-कुछ वीडियो इधर उधर हो गये है. उनको अच्छे से अरेंज करके आपको दिखा दूँगा.

सी चाची-ठीक है पर जल्दी बताना

अवी-कुछ दिन मे हो जाएगा.

सी चाची-अब सो जा

अवी-चाची वो मेले का काम अच्छे से किया तो मैं सोच रहा था कि...

सी चाची-क्या सोच रहा था

अवी-मैं सोच रहा था कि

सी चाची-तू बस सोचता रह

और छोटी चाची उठ कर गेट के पास गयी और गेट बंद कर दिया .और मेरे पास आ कर बेड पर लेट गयी.

सी चाची-तू कुछ कहेगा नही पर मुझे पता है तुझे क्या चाहिए.आज मैं तेरी हूँ ,सिर्फ़ अंदर मत डालना

अवी-फिर रहने दीजिए

सी चाची-मेरा पानी नही पिएगा.जितनी बार पीना है पी ले, बस अंदर मत डालना

अवी-कोई आ गया तो

सी चाची-तेरे कमरे मे आते सब पूजा के घर गये है. और अमित के पास विद्या है.

चाची के इतना कहते मैं चाची के पैर के पास आ गया.

और चाची के पैर पे किस किया. पैरो के अंगूँथे पे किस करके मुँह मे लेकर चूसने लगा.

सी चाची-अवी ये क्या कर रहा है.

अवी-आप कुछ मत कहिए

चाची के अंगूठे को सक करने के बाद मैं धीरे धीरे पैर पर किस करने लगा.

चाची की पायल पे किस करके पैर पर हाथ घूमाते हुए साड़ी को उपर घुटने तक कर लिया.और किस करते हुए घुटने तक आ गया.

घुटने तक आने तक चाची मस्ती मे आ गयी. और मेरा नाम लेने लगी.

अवईिइ...जल्दी...करूऊ....अवी

मैं चाची की बात सुनकर धीरे धीरे सारी को जाँघो के उपर से सरकाने लगा और साथ मे चाची की नरम नरम जाँघो पर किस करने लगा.

जाँघो पर किस करने से चाची शीष्कारिया लेने लगी. और मैं अपने काम मे लग गया.

जैसे जैसे मैं उपर आ रहा था वैसे वैसे मेरी और छोटी चाची की धड़कने तेज चलने लगी थी.

मैं चाची के चूत के पास पहुँचते ऐसा लग रहा था कि मेरी मंज़िल मिल गयी है मेरी लाइफ सफल हो गयी.

चाची ने पैंटी नही पहनी थी. और चाची को चूत पर बाल पसंद नही थे,मुझे चाची की चूत को प्यार करने मिलने वाला था.

मैं ने चूत के उपर सेपेटीकोट और साड़ी निकाल दी.

चाची की प्यारी गुलाबी चिकनी, रसभरी, चूत मेरे सामने आ गई.

आज बड़े दिनो बाद मैं चाची की चूत को आराम से देख रहा था.

चाची की चूत के होंठो ने मुझे देखते खुलना शुरू किया.

चाची की चूत मुझे अब तक भूली नही थी.मुझे देखते ही गीली होकर मेरा स्वागत कर रही थी.

चाची की बड़ी जाँघो के बीच छोटी सी चूत की लकीर मुझे दीवाना बना रही थी.

चाची आराम से लेट कर मेरे कुछ करने का इंतज़ार कर रही थी.

मुझे तो लगा रहा था कि चूत को बस देखता रहूं. पर इसको प्यार करने के लिए मैं 1 साल से इंतज़ार कर रहा था.

इस मंथ मे पहली बार चाची की चूत से मेरी फ्रेंडशिप हुई थी.

और आज देखो, 1 साल बाद ,पहली अनीवेरसी के मंथ मे फिर मिल रहे थे.

मैं खुद को रोक नही पा रहा था. मैं धीरे धीरे चाची की चूत के इतने नज़दीक आया कि चूत के होंठ और मेरे होंठो के बीच कुछ सेंटीमीटर का फासला था.

मैं ने चूत पर अपनी गरम सासो की फूँक मारी.

अवईीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

चाची मेरे नाम की शीष्कारी ले रही थी.

चाची का अभी ये हाल है तो मेरी जीभ चूत मे जाते ही क्या होगा

चलो ये भी करके देखते है.

मैं ने चूत के होंठो से अपने होंठ मिला दिए और एक सॉफ्ट किस किया.

आआआआआआअहह.....

अवईीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.....आआआआआहह....

चाची की चूत के नरम होंठो को छुते ही मैं ज़्यादा तर चूत से दूर नही रह सकता.

मैं ने चूत पर सॉफ्ट सॉफ्ट किस करना शुरू किया

चाची मेरे ऐसे किस करने से पहले मेरी दीवानी थी और अब तो चाची जन्नत मे थी.

और मैं अपनी मनपसंद चूत को किस करने से सातवे आसमान पर था

चाची के साथ जब पहली बार मिलन किया था उस दिन से मेरी ज़िंदगी बदल गयी.

चाची ने मेरी ज़िंदगी को एक नयी दिशा दिखाई .जिस से मैं आज इस उँचाई तकपहुँच पाया.

चाची मेरे लिए भगवान से कम नही थी. उनकी रोज पूजा करते रहूं ऐसा लगता है.

उनके चेहरे पे एक स्माइल देखने के लिए मैं अपनी जान दे सकता हूँ.

मेरे लिए चाची माँ के साथ साथ पापा भी थी. चाचा ने मुझ पर ख़भी ध्यान नही दिया पर चाची ने उनकी कमी भी पूरी कर दी.

मुझे जितना खुद के बारे में पता नही था उस से ज़्यादा चाची को पता था. वो मेरे मन की बाते जान लेती है.

हम दोनो एक दूसरे को इतना प्यार करते है कि उसकी कोई सीमा नही थी.और आज वो सीमा को तोड़ने का पहले चरम पर आकर हम दोनो खुश थे

किस करने से चाची शीष्कारिया लेते हुए मेरे सर पर हाथ लेकर सहलाने गयी.

चाची के ऐसा करते मैं ने अपनी जीभ को चूत से मिला दिया

मेरी जीभ चाची की चूत को टच होते मेरी जीभ खुशी मे लपलपाने लगी.

मेरी जीभ ने अब तक कहीं चूत का रस पिया था .पर अब तक चाची की चूत के रस का स्वाद भुला नही था.

जिस से मेरे तन मन मे आग लग गयी. और उस आग को भुज़ाने के लिए मुझे चूत का पानी चाहिए था.

मेरी जीभ उस काम मे लग गयी.

मेरी जीभ चूत मे जाने लगी तो चूत के होंठ अपने आप खुल कर मेरे जीभ को अंदर आने दिया.

जीभ अंदर जाते ही दाने के पास चली गयी.और दाने के साथ कबड्डी खेलने लगी.

कबड्डी की शुरुआत होते चाची ने शीष्कारियाँ लेनी शुरू की

चूत के नाज़ुक हिस्से से जीभ छुते ही मैं मस्ती मे आ जाता और चाची डबल मस्ती मे आकर शीष्कारी लेते हुए बालो मे हाथ घुमाने लगी.

चाचा आज जिस तरह मेरा मुँह मीठा कर रही है .उस से मेले के काम करने का पल मिल गया.

अगर मुझे पता होता कि मेला ख़तम होते ही मुझे इतना अच्छा फल मिलेंगा तो मैं और भी अच्छा काम करता

अब तक मैं अधूरा था पर चाची से प्यार करके मैं कंप्लीट महसूस करने लगा.

अगर मेले का काम करने से मुझे चाची मिलने वाली है पता होता तो मैं मेले का काम और अच्छे से करता

चाची ने मुझे ऐसा इनाम दिया जिस के सामने हर इनाम मिट्टी के बराबर था

चाची के साथ 1 साल मे मैं इतना प्यार करने लगा कि मैं चाची के बिना रह नही सकता था.

ऐसा प्यार आज पूरा हो रहा था.मैं चाची को प्यार करता गया.

मैं चाची की चूत को चूसने लगा. चाची अपना प्यार मेरे बालों मे हाथ घुमा कर बया कर रही थी.

चाची ने खुद को कंट्रोल करके रखा था.ताकि इतने दिनो बाद मुझे ज़्यादा से ज़्यादा उनका पानी पीने को मिले

मैं ज़्यादा से ज़्यादा समय तक उनको प्यार करता रहूं इस लिए वो कंट्रोल किए हुई थी.

लेकिन हम दोनो कुछ ज़्यादा ही एग्ज़ाइट हो गये थे.

चाची अपनी कमर उपर उठा रही थी.

मैं भी एग्ज़ाइट हो कर चूत को चूस रहा था.

और चाची ने कंट्रोल खो दिया

चाची के कंट्रोल खोते ही मैं ने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

और चाची की चूत से निकला हुआ पानी पीने लगा.

चाची ने पानी निकालते ही मेरे सर को अपनी चूत पर दबा दिया था.

चाची की चूत के पानी की एक भी बूँद मैं नीचे नही गिरने देने वाला था.

चाची का पानी मेरे मुँह मे जाते ही मैं खुद को अमर महसूस करने लगा .चाची का पानी अमृत से कम नही था.

चाची का पानी जो बाहर निकला वो मैं ने सारा पी लिया.

और जो पानी चूत मे रुक गया था उसे उंगली और जीभ डाल कर पीने लगा.

खाना अच्छा लगता है तो हम जैसे उंगली को चाट कर साफ करते है वैसे मैं चाची की चूत का पानी साफ कर रहा था.

जब दिल और दिमाग़ दोनो को ये यकीन हो गया कि सारा पानी पी लिया है तब मैं ने चाची की चूत को चूसना बंद किया.

चाची के पानी के सामने कुवारि चूत का पानी भी फीका लग जाए.

चाची मेरे लिए देवी थी. और मैं उनका पुजारी था.

मैं उनका ऐसा पुजारी था जो उनकी एक स्माइल के लिए अपनी जान दे दे

मैं उनका ऐसा पुजारी था जो उनको मंदिर मे नही अपने दिल मे रखता था

अपने दिल मे रख कर उनकी पूजा करता रहूं. मैने उनकी प्यारी सी हसी को अपनी आँखो मे क़ैद करके रखा है.

मैं अपनी देवी की पूजा कर आज धन्य हो गया.

मेरे 1 साल की तपस्या पूरी हो गयी.

मेरी देवी ने मेरी तपस्या का इतना मीठा फल दिया कि मैं आज के बाद कभी पानी ही ना पिउ

चाची को प्यार करके मैं उनके साथ आकर लेट गया.

सी चाची-अवी

अवी-चाची आज दिल खुश हो गया

सी चाची-तुम खुश तो मैं खुश

अवी-चाची अंदर डालने दो ना

सी चाची-अभी नही. पर जल्दी ही.

अवी-इंतज़ार करूँगा.

सी चाची-चलो अब सो जाओ

चाची के साथ प्यार करने के बाद मैं चैन से सो गया.

 
714

चाची के साथ प्यार करने के बाद मैं चैन से सो गया.

कल की थकावट भी निकल गयी.

ज़्यादा देर तक सोने से मैं शाम मे मेले मे नही जा सका. मतलब गया था और रणजीतसिंघ के साथ थोड़ी देर काम करने के बाद घर3 चला गया.

आज मुझे ज़रूरी काम था. मैं ने पूरे मेले के वीडियो दिन की हिसाब से अरेंज किए. जिस के वीडियो नही थे उनके बारे में चाची को बताना पड़ेगा.

वीडियोज को मैं ने हार्ड डिस्क मे कॉपी कर लिया .और रानी का लॅपटॉप पहले जैसा कर दिया.रानी का डाइयरी वाला फोल्डर अपने पास रख लिया. लेकिन रानी के कहने से पहले पढ़ुंगा नही.

सारे काम करने के बाद मैं सो गया.

नेक्स्ट डे

मेले की वजह से सुबह जल्दी उठने की आदत लग गयी. जिस से मैं सुबह उठ कर फ्रेश होकर घर चला गया.

चाची के साथ नाश्ता करने के बाद मैं हवेली चला गया.

हवेली से रणजीतसिंघ को लेकर मेले का काम ख़तम करने मे लग गया.

अवी के हवेली जाने के बाद हवेली मे

ठकुराइन-ये कुवर तो एक दम बदल गया .वो तो मुझसे माफी माँग रहा था. कुछ भी हो मैं उसकी माँ हूँ ,उसके लिए खुश हूँ

चलो परसो अवी के साथ मस्ती करूँगी. अच्छा लड़का है ,कुवर की मदद की, मैं इस बार अवी के साथ प्यार से करूँगी. अगर वो नही चाहेगा तो जाने दूँगी. उसने मेरे बेटे की मदद जो की है.

ये पायल को क्या हुआ ,अचानक बीमार पड़ गयी. मैं कह रही थी कि मेले मे ज़्यादा घूमना मत ,देख कर कुछ खाना ,होगी बीमार, और इतना उछल कर चलने से गिर गयी. उसका उछलना बंद करना होगा. ठाकुर से बात करके पायल की शादी की बात छेड़ दूँगी.

अब इस वक्त फोन किसका आ गया.

अननोन नंबर

कौन होगा, होगा कोई पहचान वाला

ठकुराइन-हेलो कौन

अननोन-तुम्हारे चाहने वाला

ठकुराइन-चाहने वाले का नाम जान सकती हूँ

अननोन-नाम से ज़्यादा काम इम्पोर्टेंट है,जानेमन

ठकुराइन-मज़ाक बहुत हो गयी, कौन हो तुम

अननोन-तुम्हारा चाहने वाला

ठकुराइन-तुम्हे पता है किस से बात कर रहे हो , एक मिनिट मे गायब कर दूँगी.

अननोन-कर दो गायब

ठकुराइन-तुम्हे ऐसा सबक सिखाउन्गी की याद रखोगे

अननोन-तुम्हे याद ही तो रखना चाहता हूँ

ठकुराइन-यू बस्टर्ड

और ठकुराइन ने फोन रख दिया

कौन था बदतमीज़, ठाकुर को बोल के अभी पता लगाती हूँ. ऐसा सबक सिखाउन्गी कि याद रखेगा.

फिर से फोन बजने लगा .ये तो वही नंबर है.अभी देखती हूँ कौन है जो गाओं की ठकुराइन को मुझे परेशान कर रहा है

ठकुराइन-तुम जानते नही मैं कौन हूँ

अननोन-ये जान पहचान बाद मे करना पहले अपने रूम की बाल्कनी मे जाकर जो वहाँ एन्वोल्प है वो देखो

ठकुराइन-मेरे रूम की बाल्कनी मे ,ये हो ही नही सकता.मेरे रूम मे कोई नही जा सकता.

अननोन-देख तो लो जानेमन और फोन बंद मत करना

जाकर देखती हूँ कि क्या है. एनव्ल्प है या नही.

ठकुराइन बाल्कनी मे चली गयी. वहाँ पर ठकुराइन को एनव्ल्प मिल गया.

ठकुराइन = क्या हो सकता है एनव्ल्प मे ,खोल कर देखती हूँ.

जैसे एनव्ल्प खोला तो ठकुराइन की आँखे खुली की खुली रह गयी.

एनव्ल्प मे पायल की नंगी फोटो थी.

पायल की नंगी फोटो देख कर ठकुराइन को साप सूंघ गया.

ठकुराइन के हाथ से एनव्ल्प गिर गया

ठकुराइन-कौन हो तुम ,और इन सब का क्या मतलब है

अननोन-इतनी भी नादान मत बनो ,कि तुम्हे मतलब बताना पड़े

ठकुराइन-ये जो तुम कर रहे हो बहुत बड़ी ग़लती कर रहे हो

अननोन-अगर मेरी बात ना मानने की ग़लती की तो तुम्हारी बेटी को दुनिया के सामने नंगी कर दूँगा

ठकुराइन-ऐसा मत करना

अननोन-तो जैसा मैं कहता हूँ वैसा करो

ठकुराइन-कितने पैसे चाहिए बोलो

अननोन-पहले आकर तो मिलो ,फिर बात करते है

ठकुराइन-कहाँ मिलना होगा.

अननोन-पहले घर से निकलो और शहर मे जाकर मेरे कॉल का इंतज़ार करो

ठकुराइन-तुम हो कौन .और ये सब करके तुम्हे क्या मिलेगा.

अननोन-मिलेगा तो बहुत कुछ , मुझे जो चाहिए वो तुम दोगि

ठकुराइन-तुम बहुत ग़लत कर रहे हो.किसके साथ पंगा ले रहे हो ये पता है तुम्हे

अननोन-मेरे पास टाइम कम है. तुम सोच लो अपनी बेटी को नंगा करना चाहती हो या मुझसे मिलना

ठकुराइन-मैं आ रही हूँ

अननोन- अकेले आना ,और पोलीस के पास गयी तो तुम समझदार हो

ठकुराइन-अकेले आउन्गि.

अननोन-घर पे भी किसी को बताया तो पायल रांड़ बन जाएगी

ठकुराइन-किसी को नही बताउन्गी.मैं अभी निकलती हूँ

अननोन-मेरे कॉल का इंतज़ार करना.

कॉल कट हो गया.

ठकुराइन=ये कौन हो सकता है. किस की इतनी हिम्मत है जो मुझसे ठाकुर से पंगा ले

कोई पहचान वाला होगा. या फिर हमारा दुश्मन

पर इसके पास पायल की ऐसी तस्वीर आई कहाँ से

पायल से जाकर पूछती हूँ ,

ठकुराइन पायल के रूम मे चली गयी. पायल सो रही थी.

ठकुराइन=पायल तो सो रही है. पायल को इसके बारे में अभी बताया तो इसकी तबीयत और खराब हो जाएगी.

लेकिन पायल की ऐसी तस्वीर, जाकर देखती हूँ कौन है वो जो मेरी बेटी के साथ गेम खेल रहा है. फिर पायल से पूछूंगी.

नही नही पायल को इस से दूर रखूँगी. उस पे इसका बुरा असर हो सकता है

पहले तो जाकर देखती हूँ क्या कहता है.

ठकुराइन ने अपना पर्स लिया .पर्स मे फोटो डाल कर कार लेकर निकल पड़ी.

हवेली मे सबको कार चलानी आती है.

ठकुराइन कार को फास्ट चलाते हुए शहर मे पहुँच गयी.

ठकुराइन=इसने बताया नही कि शहर मे कहाँ आना है ,शायद इस खेल मे नया हो. खेल को इसके हाथ से अपने हाथ मे लूँगी. फिर ऐसा सबक सिखाउन्गी कि इसकी दस जेनरेशन याद रखेंगी.

या फिर शहर मे आकर अड्रेस देगा.

ठकुराइन कॉल का इंतजार कर रही थी.

मोबाइल बजते ठकुराइन ने कॉल पिक अप किया

ठकुराइन-मैं शहर मे आ गयी हूँ,कहाँ आना होगा.

अननोन-इतनी जल्दी है मुझसे मिलने की

ठकुराइन-बोलो कहाँ आना है.

अननोन-हाइवे की तरफ आ जाओ .

ठकुराइन-हाइवे की तरफ कहाँ

उँख्नोवन्-हाइवे पर तो आ जाओ,फिर आगे का रास्ता बताता हूँ.

ठकुराइन ने अपनी कार हाइवे पर ले ली.

ये है कौन,

ठकुराइन-आ गयी हाइवे पे

उँख्नोवन्-अब आगे जो लेफ्ट टर्न आएगा वहाँ मत जाना उसके सामने राइट टर्न आएगा उधर मूड जाना

ठकुराइन ने स्पीड बढ़ा दी और राइट टर्न पर मूड गयी

ठकुराइन-अब कहाँ

अननोन-आगे जाती रहो. तुम्हारे लेफ्ट साइड मे एक फार्महाउस होगा .उस से आगे चलती रहना

ठकुराइन ने फार्महाउस पार किया

ठकुराइन-फार्महाउस चला गया

उँख्नोवन्-अब राइट टर्न लेकर जंगल मे घुस जाओ

ठकुराइन-जंगल मे क्यूँ

अननोन-जितना कहा है उतना करो

ठकुराइन-लो जंगल मे घुस आ गयी.

अननोन-आगे चलती रहो. आगे तुम्हे फोरेस्ट डेंपर्टमेंट का बोर्ड दिखेगा वहाँ कार रोक दो

ठकुराइन ने बताई हुए जगह पर कार रोक ली

ठकुराइन-मैं पहुँच गयी.

अननोन-अब साइड चलते हुए आ जाओ, आगे तुम्हे मिट्टी का डॅम दिखेगा जिस मे पानी नही है वही आ जाओ

ठकुराइन को डर लग रहा था ,पर इसके सिवा दूसरा रास्ता नही था.

ठकुराइन दम मे पहुँच गयी

ठकुराइन-कहाँ हो तुम

अननोन-डॅम के दूसरी तरफ आ जाओ ,वही पर हूँ

ठकुराइन डॅम की दूसरी तरफ आ गयी.

अननोन-जंगल मे ठकुराइन का स्वागत है

ठकुराइन-कौन हो तुम ये नकाब क्यूँ पहना है.

 
715

ठकुराइन-कौन हो तुम

अननोन-ठकुराइन ये तुम्हारा गाओं नही जंगल है .यहाँ सवाल मैं पूछूँगा जवाब तुम दोगि

ठकुराइन-बोलो क्या चाहते हो.

अननोन-पैसे

ठकुराइन-कितने

अननोन-1 करोड़

ठकुराइन-पागल हो गये हो तुम ,मेरे पास इतने पैसे नही है

अननोन-तेरे पास कितने पैसे है मुझे पता है

ठकुराइन-मैं उतने पैसे नही दे सकती .मुझे ठाकुर से बात करनी होगी.

अननोन-किसी को बताने की ग़लती मत करना ,वरना तुम्हारी बेटी ऐसे फोटो देख कर स्यूयिसाइड कर लेंगी

ठकुराइन-पर

अननोन-1 करोड़ से एक पैसा भी कम नही होगा

ठकुराइन-इतने पैसो के लिए तुम्हे 1 हफ़्ता रुकना होगा.

अननोन-मुझे पैसे कल चाहिए

ठकुराइन-कल ,इतनी जल्दी नही दे सकती.

अननोन-ठीक है कल 50 लाख और परसो 50 लाख

ठकुराइन-ये हो सकता है पर तुम्हारा भरोसा क्या है, आधे पैसे लेकर भाग गये तो

अननोन-तुम्हारे पास मुझ पर भरोसा करने के सिवा दूसरा रास्ता नही है

ठकुराइन-ठीक है कल तुम्हे 50 लाख दे दूँगी. और तुम फोटो कब दोगे

अननोन-पूरे 1 करोड़ हो जाने के बाद

ठकुराइन-मुझे फोटो कल चाहिए.

अननोन-पागल समझ रखा है मुझे, वैसे कल तुम्हे फोटो दे सकता हूँ लेकिन

ठकुराइन-लेकिन क्या

अननोन-तुम्हारे फोटो निकालने होगे. अपनी बेटी के फोटो कल और परसो तुम्हारे फोटो जो अभी निकालूँगा.

ठकुराइन-नही मैं कोई फोटो नही निकालने वाली.

अननोन-सोच लो , अगर तुम्हारे फोटो निकाले तो तुम्हारी बेटी के फोटो दे दूँगा वरना

ठकुराइन-मैं कल 1 करोड़ दूँगी.

अननोन-मुझ से चालाकी. नखरे कर रही थी कि 1 हफ़्ता लगेगा.और अब कल पैसे दे रही हो. अब डील चेंज ,तुम्हे 1 करोड़ देना होगा और मेरे साथ अभी सेक्स करना होगा

ठकुराइन-भूल जाओ ,

अननोन-मैं चला

ठकुराइन-(ये मैं ने क्या किया,मेरे फोटो निकलते तो मेरी बेटी के फोटो मिल जाते, अब मैं क्या करूँ) तुम हो कौन

अननोन-तुम्हारा चाहने वाला

ठकुराइन-(रंजीत, रंजीत ऐसा नही कर सकता.) मेरे तो बहुत चाहने वाले है.तुम कौन हो

अननोन-तेरा वो चाहने वाला जो तुझे अपना बनाएगा थोड़ी देर मे

ठकुराइन-मेरे चाहने वाले हो तो मुझसे डरने की क्या बात है. अपना नकाब निकालो

अननोन-नकाब निकाल कर क्या करूँ

ठकुराइन-मैं देखना चाहती हूँ .मेरे चाहने वाले मर्द को

अननोन-अपना दिमाग़ चलाना बंद करो. और बोलो डील मंजूर है या मैं यहाँ से चला जाउ

ठकुराइन-(चालाक लग रहा है. अगर और दिमाग़ लगाया तो पता नही पायल के फोटो के साथ ये क्या करेगा)ठीक है निकालो मेरे फोटो

अननोन-नही. तुम्हारे फोटो का मैं क्या करूँ. मुझे 1 करोड़ और तुम्हारे साथ सेक्स करना है.

ठकुराइन-ये नही हो सकता

अननोन-अब मैं जाने के लिए पलटा तो दुबारा आउन्गा नही

ठकुराइन-मुझे सोचने दो

अननोन-ज़्यादा सोचोगी तो तुम्हारी बेटी उतनी बदनाम होगी

ठकुराइन-क्या मतलब

अननोन-मैं 2 घंटे मे यहाँ से घर नही गया तो मेरा फ्रेंड फोटो इंटरनेट पे डालेगा.

ठकुराइन-ठीक है पर मेरे फोटो निकलने नही चाहिए

अननोन-बस सेक्स करूँगा

ठकुराइन-कॉंडम लगाना होगा

अननोन-यहाँ मेरी मर्ज़ी चलेगी

ठकुराइन-तुम ये सब क्यूँ करे हो.

अननोन-मुझे पैसे चाहिए

ठकुराइन-पैसे लो और सेक्स भूल जाओ

अननोन-गाओं की ठकुराइन के साथ सेक्स करना कौन नही चाहेगा.

ठकुराइन-(आज तेरा दिन है. जब मुझे फोटो मिलेंगे तब तुझे देखूँगी) मैं तय्यार हूँ

अननोन-अपनी साड़ी निकालो

ठकुराइन-ऐसे ही करो ,मैं कपड़े नही निकालने वाली.

अननोन-तुम्हारा गोरा बदन देखे बिना मज़ा कैसे आएगा

ठकुराइन-(अच्छे पैसे दे कर निपटा लेती ,बिना वजा दिमाग़ लगाया ,ये ऐसे नही मानेगा. पायल के लिए करना पड़ेगा.) ठीक है.

ठकुराइन ने साड़ी निकाल ली. ठकुराइन को ब्लाउस और पेटिकोट मे देख कर उसका लंड खड़ा होने लगा.

ठकुराइन की नाभि और चिकना पेट देख कर ऐसा लग रहा था की अभी जाकर ठकुराइन को मसल दे

अननोन-ब्लाउस और पेटिकोट निकालो


ठकुराइन-ये तो रहने दो,

अननोन-जितना कहा है उतना करो, वरना


ठकुराइन-निकालती हूँ

ठकुराइन ने पहले ब्लाउस निकाल लिया. ठकुराइन की ब्लू ब्रा मे उनके गोरे बूब्स कमाल के लग रहे थे.

आधे से ज़्यादा बूब्स ब्रा के बाहर थे .अननोन के इस तरह अपने बूब्स को घूरता हुआ देख कर ठकुराइन अपने बूब्स को छुपाने की कोशिश करने लगी.

अननोन-छुपाने का कोई फ़ायदा नही होगा. पेटिकोट निकालो

ठकुराइन को उसकी बात मान ने के सिवा दूसरा रास्ता नही था.

ठकुराइन ने एक हाथ से अपने बूब्स छुपाए रखे और दूसरे हाथ से नाडा खोल दिया.

नाडा खोलने के बाद ठकुराइन अपना पेटिकोट पकड़ कर खड़ी रही

अननोन-हाथ छोड़ दो ,जितना देर करोगी उतना तुम्हारी बेटी के लिए बुरा होगा.

ठकुराइन ने पेटिकोट छोड़ दिया. पेटिकोट नीचे गिर गया पर ठकुराइन ने अपनी पैंटी को हाथ से छुपा दिया था.

अननोन-जानेमन अपने हाथ हटा दो


ठकुराइन-तुम्हे ये सब कर के क्या मिलेगा.

अननोन-तुम्हारी चूत ,अपने हाथ हटा दो


ठकुराइन ने अपने हाथ अलग कर दिए

ठकुराइन की छोटी पैंटी मे छुपी हुई चूत के उभार को देख कर अननोन का दिल खुश हो गया.

ठकुराइन को ब्लू ब्रा पैंटी मे देख कर उसका लंड झटके मारने लगा.

अननोन का ठकुराइन के पहाड़ो जैसे बूब्स, चिकना पेट, फूली हुई चूत ,और बड़ी बड़ी चिकनी जाँघो को देखते रहने का मन हो रहा था.

अननोन-घूम जाओ

ठकुराइन उसके इशारो पे नाचने लगी.

गाओं की ठकुराइन पे हुकुम चलाने मे उसे मज़ा आ रहा था.

ठकुराइन के घूमते ही उसकी बड़ी गंद देख कर उसके लंड मे दर्द होने लगा.

अब और कंट्रोल नही होगा .उसने सोचा

अननोन-ब्रा और पैंटी भी निकाल दो


ठकुराइन-ये तो रहने दो,

अननोन-चलो ठीक है. चलो उस पेड़ को पकड़ कर झुक जाओ


ठकुराइन-क्या करने वाले हो

अननोन-शादीशुदा हो ,और तुम्हे पता नही ,चलो जल्दी

ठकुराइन पेड़ को पकड़ कर झुक गयी.

अननोन ने अपना नकाब सही किया और ठकुराइन के पास आकर पेटिकोट से नाडा निकाल लिया.

और नाडे से ठकुराइन के हाथो को पेड़ से बाँधने लगा.


ठकुराइन-ये क्या कर रहे हो

अननोन-चुप चाप झुकी रहो, अगर एक वर्ड निकाला तो तुम्हारी बेटी को बदनाम होने से कोई बचा नही पाएगा.

ठकुराइन चुप हो गयी. और उस नकाबपोश ने ठकुराइन के हाथ बाँध दिए.

उसने सोचा अब ठकुराइन को ऐसा चोदुन्गा की वो मुझे याद रखेंगी.

ठकुराइन अब कुछ नही कर सकती थी.

उसने ने ठकुराइन की ब्रा निकाल दी.


ठकुराइन-ये क्या किया .तुम ने तो कहा था कि

अननोन-मैं ने झूठ कहा था.इतने अच्छे आम को क़ैद कैसे रखता

फिर उस ने ठकुराइन की पैंटी भी निकाल दी.

पैंटी निकालते ही ठकुराइन समझ गयी कि उनके हाथ मे अब कुछ नही था.

पहली ग़लती ठकुराइन ने ये की थी वो यहाँ अकेली आई.

दूसरी ग़लती, अपना दिमाग़ लगा कर फोटो निकलवाना चाहती थी.

तीसरी ग़लती नकाबपॉश पे विश्वास किया.

ठकुराइन की पैंटी निकालने के बाद नकाब पोश ने उसके पैर फैला दिए.और चूत को देखने लगा.

ठकुराइन की चूत देखते ही उसके मुँह मे पानी आ गया .चूत फूली हुई थी पर उसका छेद छुपा हुआ था.

गुलाबी चिकनी चूत को देखते ही नकाबपोश का मन उसको खाने का हो रहा था.

चूत को देखते हुए उसकी नज़र ठकुराइन की गंद पर गयी.

ठकुराइन की गंद का तो क्या कहना ,चूत से ज़्यादा कातिल थी.

2 खरबूजों के बीच मे छोटा सा छेद ,क्या कहना, आज तो ठकुराइन की गंद गयी काम से

आज तो गंद का भोसड़ा बना दूँगा.

ठकुराइन की चूत और गंद देख कर लंड जीन्स मे हलचल मचाने लगा.

नकाबपोश ठकुराइन के पैरो को फैला कर चूत के नीचे बैठ गया .और चूत को देखने लगा

इतनी पास से देखने के बाद भी चूत के होंठो ने उसे चूत के अंदर देखने नही दिया.

नकाबपोश ने चूत के होंठो को अपनी उंगली से फैला दिया .अब जाकर चूत को अंदर से देख पाया.

उसका मन हो रहा था कि चूत को चूसना शुरू करे पर ऐसा किया तो उसे नकाब निकाल ना होगा.

लेकिन ऐसी चूत नशीब वालों को देखने को मिलती है.

फाइनली उस ने चूत को अच्छे से देख लिया.

लग तो रहा था कि चूत को कच्चा खा जाएगा .पर उसे कंट्रोल रखना होगा वरना ठकुराइन को उसके बारे में पता चला तो प्लान खराब हो जाएगा.

 
नकाबपोश किसी भी हालत मे ठकुराइन को अपना चेहरा नही दिखा सकता था.

मतलब ना किस कर सकता था. ना बूब्स और ना चूत चूस सकता था.

ऐसे मे पूरा खेल लंड खेलने वाला था.

नकाबपोश ने सोचा पहले खेल तो शुरू करता हूँ पहले गंद को तय्यार तो करूँ

उसने ने पास मे रखी हुई पतली लकड़ी उठा ली. और ठकुराइन की गंद पर घुमाने लगा.


ठकुराइन-ये क्या कर रहे हो

माआआअ...मरररर....

उस ने ठकुराइन की गंद पर लकड़ी मार दी.

लकड़ी गंद पर पड़ते ही ठकुराइन की चीख निकल गयी और गंद पर एक लाल लाइन का निशान बन गया


ठकुराइन-तुम ने मुझे मारा क्यूँ ,दर्द हो रहा है.

अननोन-क्यूँ मज़ा आया,तुम भी तो ऐसे ही दूसरो को मारती हो.


ठकुराइन-यहाँ दर्द हो रहा है. और तुम कहते हो मज़ा आया क्या

अननोन-मैं ऐसे गंद मारता हूँ ,तुम्हारी गंद तो आज फट जाएगी


ठकुराइन-वहाँ मत करो. आगे से करो

अननोन-क्यूँ कभी गंद नही मरवाई


ठकुराइन-किया है पर बहुत साल हो गये वहाँ से नही किया.

और एक बार गंद पर लकड़ी से लाल निशान बनाया


ठकुराइन-मैं ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है मेरे साथ ऐसा क्यूँ कर रहे हो,

अननोन- चलो ठीक है ,गंद मे लंड लेने को तय्यार हो जाओ

उसने सोचा जाने दो ,ठकुराइन को मारने का मन नही हो रहा था.

नकाबपोश ने जीन्स और अंडरवेर नीचे की और लंड पर थूक लगा कर लंड को गंद के छेद पर रखा


ठकुराइन-वहाँ मत करो

ठकुराइन गयी भाड़ मे .उस ने पूरी ताक़त लगा कर जोरदार झटका मारा.

ऐसा झटका मारा कि पूरा लंड ही एक बार मे गंद मे डाल दिया.

लंड ठकुराइन की गंद मे जाते ही जंगल के सन्नाटे मे एक दर्दनाक चीख गूँज उठी

आआहह मर गयी,क्या किया तुम ने आआहह मर गयी....ऐसे...वाााा नहियीई....आआअहह...मर गयी...

चीख सुनते ही जंगल मे पेड़ पर बैठ हुए पंछी उड़ने लगे


ठकुराइन की चीख सुनकर नकाबपोश भी डर गया.

ठकुराइन दर्द की वजह से रो रही थी. चीख रही थी.

उस ने ठकुराइन की कमर को पकड़ लिया.

ठकुराइन के पैर काप रहे थे. उस ने लंड को वैसे गंद मे रख कर ठकुराइन की चूत मे उंगली डाल दी.

बिचारी ठकुराइन अपना दर्द कम करने के लिए कुछ कर भी नही सकती थी. उसके हाथ जो बाँध रखे थे.

जो दर्द देता है उसे दर्द मिलता है.

नकाबपोश को ठकुराइन पे दया आ गयी उस ने चूत मे उंगली डाल कर उसका दर्द कम करने लगा

चूत मे उंगली जाते ही ठकुराइन को थोडा हल्का महसूस हुआ.

लेकिन गंद मे लंड ऐसे रखने से नकाबपोश को दर्द हो रहा था

मैं क्यूँ दर्द बर्दास्त करूँ ऐसा सोचकर उसने ठकुराइन की चूत से उंगली निकाल ली और ठकुराइन की गंद को पकड़ कर लंड बाहर निकाल लिया.

लंड बाहर निकालने के बाद उस ने फिर से पहली की तरह जोरदार झटका मार कर पूरा लंड गंद मे डाल दिया.

आआहह मर गयी,क्या किया आआहह मार डाला......आआअहह.....मार डॅलाया

अननोन ने फिर से लंड बाहर निकाला और फिर से उसी तरह लंड गंद मे पेलने लगा

ठकुराइन की चीखे धीरे धीरे कम होती गयी.

आआआआहह म्म्म्म ममाआआआआआ म्म्म्मा आआररर्र्र्ररर गग्ग्गाऐयईई

हर बार ऐसे एक बार मे लंड अंदर डालने से गंद जल्दी खुल गयी.

जो गंद कुछ साल से बंद थी उसे नकाबपोश के लंड ने खोल दिया.

गंद खुलते ही ठकुराइन का बदन ढीला पड़ गया .उसकी लड़ने की ताक़त कम हो गयी.

ठकुराइन ने अपनी गंद को ढीला छोड़ दिया जिस से उस ने लंबे झटके मारने के साथ अपनी गति बढ़ा दी

नकाबपोश के धक्को से ठकुराइन का बदन हिलने लगा.

और वो ठकुराइन की गंद की धज्जियाँ उड़ाने लगा

हर धक्का इतना जोरदार पड़ता कि ठकुराइन अपनी माँ को याद करती थी

आआआआहह... म्म्म्मकममाआआआआअ

ठकुराइन की चीख सुनकर जंगल मे बहुत हलचल होने लगी.

जंगल मे जंगली जानवर चिल्ला रहे थे.

यहाँ वो अंजान आदमी ठकुराइन को शेरनी से भीगी बिल्ली बना रहा था.

ठकुराइन को ऐसे दर्द मे देख कर शायद अच्छा लग रहा था.

क्यूँ कि ठकुराइन ने आज तक बहुत लोगो को दर्द दिया है. आज उसकी बारी है.

ठकुराइन की हर एक चीख से उसका जोश बढ़ने लगा

और दूसरा झटका पहले झटके से जोरदार पड़ता

ठकुराइन उसके झटकों के धक्को से बहाल हो गयी.

ठकुराइन उसके धक्को से रोने लगी. रोते हुए अपनी माँ को याद करने लगी.

उस ने जानबूझ कर ठकुराइन के हाथ बाँध रखे थे कि वो दर्द मे तड़पति रहे.

हुआ भी ऐसा ठकुराइन उसके धक्को को किसी भी तरह से रोक नही पा रही थी.

ठकुराइन का बदन धक्को से टूटने लगा था. ठकुराइन के पैर हर धक्के से काँपते हुए चुदाई को मज़ेदार कर रहे थे

नकाबपोश के ऐसे चुदाई से मे बी ठकुराइन को अभी गुस्सा आ रहा था.पर जल्दी वो चुदाई को एंजाय करेगी.और ये चुदाई वो हमेशा याद रखेगी

इतने जबर्जस्त धक्को से ठकुराइन जैसी गरम औरत ना पिघल जाए तो ऐसा लंड किस काम का

उसके धक्को का साथ ठकुराइन ने जल्दी साथ देना शुरू किया.

ठकुराइन की गंद जो कई साल से बंजर थी आज उसमे लंड ने भूचाल ला दिया था.

नकाबपोश के लंड के भूचाल मे ठकुराइन की गंद फट गयी

गंद फट ते ही ठकुराइन की गंद मे आराम से लंड जाने लगा.

ठकुराइन भी शीष्कारी लेते हुए उसका पूरा साथ देने लगी.

.आआअहह ……उूुउऊहह….

……..उूुुउउफफफफफ्फ़……"….आआहह …..उूुुउऊहह….. ऊऊऊहह

ठकुराइन की शीष्कारी सुनकर नकाबपोश को गंद मारने मे मज़ा आने लगा.

उस ने अपने धक्के मारने जारी रखे

मररर...मदर्चोद औरर्र जोर्र्र से फाड़ दीए....आआअहह ……उूुउऊहह….

……..उूुुउउफफफफफ्फ़……"….आआहह …..उूुुउऊहह….. ऊऊऊहह...जोर्र्र्र से मरूऊओ

अननोन-क्या हुआ ठकुराइन

ठकुराइन-कुछ मत कहो बस जो कर रहे है वो करते रहो

अननोन-फाड़ दूं

ठकुराइन-जो करना है करो पर मेरा एक हाथ छोड़ दो

उस ने ठकुराइन की गंद से लंड बाहर निकाला .

ठकुराइन की गंद कुछ देर के लिए खुली रह गयी

अंजान ने ठकुराइन का एक हाथ छोड़ दिया. और वापस ठकुराइन के पीछे आ गया

फिर से ठकुराइन की गंद मे लंड डाल दिया और ठकुराइन एक हाथ से अपनी चूत सहलाने लगी.

आआअहह ……उूुउऊहह….

……..उूुुउउफफफफफ्फ़……"….आआहह …..उूुुउऊहह….. ऊऊऊहह

अब ठकुराइन के रंगत मे आते ही वो गंद मे धक्के मारने के साथ चूतड़ पर थप्पड़ मारने लगा

चूतड़ पर थप्पड़ खाते ठकुराइन शीष्कारी मे जोश आ जाता.

हर्दरर्र और जोर्र्र ,फद्दद्ड ,फाड़ दे गंद को

ठकुराइन के इतना कहते ही वो धक्के मारता गया ,मारता गया और चूतड़ लाल करता गया

कितनी देर हो गयी मुझे पता भी नही चल रहा था.

वो ठकुराइन की गंद का कचुंबर बनाने लगा.

ठकुराइन की गंद उसके धक्को से चटनी हो गयी.

नकाबपोश मन पोज़िशन चेंज करने का हो रहा था पर यही पोज़िशन अच्छी थी.

वो धक्के मारते हुए कुछ देर के लिए रुक कर चूतड़ पे थप्पड़ मारने लगा.

ठकुराइन अपनी चूत सहलाते हुए उसे ज़ोर से धक्के मारने को कहती गयी.

उस ने ठकुराइन की बात सुनकर उसके एक पैर को हाथ मे पकड़ कर उठा लिया

और गंद मे ताक़त लगा कर धक्के मारने लगा.

वो खुद का मज़ा अपना वीर्य निकाल कर डबल करना चाहता था.

.आआअहह ……उूुउऊहह….

……..उूुुउउफफफफफ्फ़……"….आआहह …..उूुुउऊहह….. ऊऊऊहह...मैं आ गाइिईई...मेराअ निकल रहा हाईईईई

ठकुराइन की चूत से पानी निकलने लगा पर मेरा अभी निकलने वाला नही था

और वो इतनी जल्दी गंद मारना बंद करने वाला नही था.

ऐसी गंद बार बार कहाँ मिलती है.

आज मिली है पूरा वाशूल करके ही रहेगा वो.

ठकुराइन बार बार कह रही थी कि चूत मारो पर वो ठकुराइन की बात कैसे मानता

उस ने ठकुराइन के पैर को छोड़ दिया और वो अपना वीर्य निकालने के लास्ट स्टेज पर था

उसके धक्को से ठकुराइन समझ गयी कि काम होने वाला है.

नकाबपोश ठकुराइन की गंद को आख़िर तक फाड़ता रहा.

ऐसा फाडा की वो उसे याद रखेगी.

नकाबपोश ने अपना वीर्य ठकुराइन की गंद मे नही डाला

अपने वीर्य को ठकुराइन की गंद मे डाल कर उसे मज़ा देने का मूड नही था.

जब उसे ऐसा लगने लगा कि वीर्य निकलने वाला है तभी उसने लंड बाहर निकाल लिया

और अपना वीर्य ठकुराइन की चूतड़ो पर डाल दिया.

लंड गंद से निकलते ही ठकुराइन ने राहत की सास ली.

वीर्य निकालने के बाद ठकुराइन की पैंटी से लंड साफ किया.और पैंटी को ठकुराइन के उपर फेक दिया.

चुदाई ख़तम होते ही नकाबपोश ने अंडरवेर और जीन्स उपर कर लिया और वही बैठ कर रिलॅक्स हो ने लगा.

गंद मरवाने के बाद ठकुराइन ने अपना दूसरा हाथ छुड़ा लिया और पेड़ के नीचे बैठ कर हाँफने लगी.

 


717

मैं एक पेड़ के नीचे बैठ कर नॉर्मल हो रहा था

और ठकुराइन उसी पेड़ के नीचे अपनी गंद टेडी कर बैठी थी और लंबी लंबी सासे लेने लगी.

अननोन-कैसा लगा ठकुराइन

ठकुराइन-तुम ने मेरी जान निकाल दी.

अननोन-तुम्हारे बूढ़े पति ने कभी ऐसी तुम्हारी जान निकाली

ठकुराइन-नही, वो तो अब कुछ कर नही पाता

अननोन-मतलब तुम्हे चुदाई पसंद आई

ठकुराइन-तुम असली मर्द हो.पर आगे से करते तो मज़ा आ जाता

अननोन-कल करूँगा ,करवाओगी मुझसे

ठकुराइन-नही. डील आज की हुई थी.

अननोन-सोच लो ,बस एक बार करूँगा

ठकुराइन-(इसने 1 घंटे से ज़्यादा देर तक मेरी गंद मारी है. अगर उतनी देर चूत मारी तो मज़ा आ जाएगा.) सोचूँगी

अननोन-सोच कर बताना,वैसे मैं तुम्हारी गंद मार कर बहुत खुश हुआ

ठकुराइन-आगे से करते तो ज़्यादा मज़ा आता

अननोन-वही तो कह रहा हूँ ,कल तुम्हारी चूत को मैं अभी तुम्हारी बेटी के फोटो जला दूँगा.

ठकुराइन-मज़ाक कर रहे हो तुम

अननोन-मैं तुमसे बहुत खुश हूँ

ठकुराइन-तुम ने कहा था कि फोटो तुम्हारे फ्रेंड के पास है

अननोन-मेरा कोई फ्रेंड नही है. मैं ने झूठ कहा है.

ठकुराइन-तो फोटो जला दो मैं तय्यार हूँ फिर से चुदाई करने के लिए

अननोन-ये देखो

उसने ने पायल के फोटो जेब से निकाल दिए

अननोन-ये है तुम्हारी बेटी के फोटो ,जला दूं

ठकुराइन-जला दो, मैं कल करने को तय्यार हूँ(ये तो ईडियट है, एक बार फोटो जल गये तो फिर देखती हूँ इसको)

अननोन-लो जला दिए

फोटो जलते ही ठकुराइन अपने कपड़े पहनने लगी.

ठकुराइन ने पेटिकोट मे नाडा नही डाला .उसके उपर से नाडा टाइट बाँध लिया.

इधर फोटो जल रहे थे और उधर ठकुराइन ने कपड़े पहन लिए

और लंगड़ाते हुए नकाबपोश के पास गयी

ठकुराइन-तुम ने बहुत बड़ी ग़लती कर दी.

अननोन-क्यूँ गंद नही मारनी चाहिए थी

ठकुराइन-उसकी सज़ा तो तुम्हे ऐसे दूँगी कि तुम मुझे याद रखोगे

अननोन-तुम किस से बात कर रही हो ये भूल रही हो

ठकुराइन-तेरे पास मुझे ब्लॅकमेल करने के लिए कुछ नही है.ये तुम भूल गये हो.

अननोन-मेरे पास तेरी बेटी के ...ये मैं ने क्या किया

ठकुराइन-तू अब पछताएगा कि किस से पंगा लिया है.

अननोन-तू मेरा कुछ नही बिगाड़ सकती.तू मुझे जानती नही

ठकुराइन-वो तो मैं कैसे ना कैसे जान लूँगी .और तेरा ऐसा हाल करूँगी कि तू याद रखेगा.

अननोन-तुम ने तो कहा था कि तुम्हे मेरे साथ मज़ा आया है

ठकुराइन-मज़ा आया है इसी लिए आज तुझे जाने दे रही हूँ पर अपनी बेटी का बदला लेकर रहूंगी

अननोन-मुझे माफ़ कर दो ,मुझसे ग़लती हो गयी

ठकुराइन-तुझे ग़लती की सज़ा मिलेगी. पर मैं तुम्हे एक चान्स दे रही हूँ, अपना चेहरा दिखा दो फिर मैं तुम्हे जाने दूँगी

अननोन-नही दिखा सकता, तुम मुझे ढूँढ कर मार दोगि

ठकुराइन-मैं तुम्हारी जैसी नही हूँ ,मैं देखना चाहती हूँ कि किस मे इतना दम है जिस ने मेरी गंद मारी है

अननोन-ठीक है अभी दिखाता हूँ

मैं पास वाले पेड़ के पास चला गया.

ठकुराइन-वहाँ क्यूँ जा रहे हो

अननोन-तुम्हे अपना चेहरा दिखाने

मैं ने पेड़ पर रखा हुआ कॅमरा उठा लिया और ठकुराइन की चुदाई का वीडियो प्ले किया.

ठकुराइन अपनी चीख सुनकर शॉक्ड हो गयी

अननोन-ठकुराइन देख लो मेरा चेहरा ,इस वीडियो मे देख लो

ठकुराइन वीडियो देख कर शॉक्ड हो गयी.

अननोन-अब बोलो ,क्या कहना है

ठकुराइन-वो मैं ...तुम ने कहा था कि फोटो जला दिए है

अननोन-वो तुम्हारी बेटी के फोटो जलाए है. मुझे पता था कि तुम मुझे धोका दोगि.मुझे क्या ईडियट समझ कर रखा है. तेरी रग रग को पहचानता हूँ. इस लिए तेरा वीडियो बना लिया.

ठकुराइन-मैं तो वो

अननोन-अब गेम किस के हाथ मे है

ठकुराइन-तुम्हारे,

अननोन-तो अब क्या सोचा है

ठकुराइन-सोचना क्या है तुम बोलो मैं करूँगी.

अननोन-कल मुझे 1 करोड़ चाहिए

ठकुराइन-दे दूँगी.

अननोन-और आज की तरह मेरे साथ सेक्स करना होगा

ठकुराइन-फिर से, मैं ने तो तुम्हे जाने दिया था और तुम

अननोन-कल तेरी चूत मारूँगा और वो भी आख़िरी बार

ठकुराइन-(मुझे समझना चाहिए था कि ये इतनी आसानी से फोटो क्यूँ जला रहा है. चलो अच्छा है जो पायल के फोटो जल गये. कल पैसे दे कर मेरा वीडियो ले लूँगी. और अपना दिमाग़ नही चलाउन्गी) ठीक है

अननोन-और कोई चालाकी मत करना

ठकुराइन-नही करूँगी.

अननोन-कर भी नही पाओगी. कल पैसे लेकर कहाँ आना है वो मैं तुम्हे कल फोन करके बताउन्गा

ठकुराइन-कितने बजे आना होगा.

अननोन-12 बजे

ठकुराइन-इतने पैसे निकालने मे समय लगता है.

अननोन-ठीक है 2.00 बजे आ जाना,मैं फोन करूँगा.

ठकुराइन-पैसे लेकर मुझे वीडियो देना

अननोन-बिल्कुल मिलेगा. अब जाओ यहाँ से

फिर ठकुराइन लंगड़ाते हुए अपनी कार के पास चली गयी.

ठकुराइन= बिना वजह अपना दिमाग़ लगाया

अच्छे ख़ासे पैसे दे कर डील हो जाती ,बिना वजह पंगा ले लिया

लेकिन कुछ भी हो क्या चुदाई की उसने .आज तक इतनी लंबी और इतनी जोरदार मेरी कभी चुदाई नही हुई.

अभी तक ऐसा लग रहा है कि गंद मे उसका लंड है

कल पहले डील करूँगी उसके बाद चूत मे लंड तो लेकर रहूंगी.

इतनी लंबी चुदाई ,उसके जोरदार धक्के मेरी चूत मे लगेंगे तो कितना मज़ा आएगा.

कमाल की चुदाई करता है.

पायल के फोटो तो जल गये ,अब पायल से पूछ कर उसे परेशान नही करूँगी.

कल उसे पैसे दे कर पीछा छुड़ा लूँगी.

उसका लंड ,क्या चुदाई करता है वो,

गंद फट गयी ,उसका गम नही है ,लेकिन मज़ा बहुत आया.

क्या लंड था.

हवेली आ भी गयी. पता भी नही चला. चलो कुछ देर आराम करती हूँ फिर सोचती हूँ की उसे पैसे कैसे दूं

 


718

नेक्स्ट डे

ठकुराइन=उसको 1 करोड़ देने है ,क्या करू , बॅंक से निकालती हूँ.

अभी जाना होगा ,इतने ज़्यादा पैसे निकालने मे टाइम लग जाएगा.

आज कोई गड़बड़ नही करूँगी,डील पूरी कर लूँगी. फिर देखूँगी उसे, ऐसा सबक सिखाउन्गा कि मुझे याद रखेगा.

ठकुराइन-सुनो मुझे कुछ पैसे चाहिए थे

ठाकुर-तुम्हे पूछने की ज़रूरत क्या है ,तिजोरी की चाबी तुम्हारे पास होती है ,जितने चाहे ले लो

ठकुराइन-मुझे नेकक्लेस खरीदना है .और उसकी कीमत पता नही है.

ठाकुर-ज़्यादा पैसे लेके जाओ

ठकुराइन-मैं अकेली इतने पैसे कैसे ले जाउ, आप मुझे चेक दे दीजिए मैं शॉप वाले को चेक दे दूँगी.

ठाकुर-ठीक है. मैं साइन कर देता हूँ पैसे तुम भर लेना

ठकुराइन-जी,आप मेरा कितना ख़याल रखते है.

ठाकुर-तुम तो मेरी जान हो ,ये लो चेक ,अच्छा नेकक्लेस लेना

ठकुराइन=चेक तो मिल गया.अब बॅंक जाती हूँ,ये काम जितनी जल्दी हो जाए उतना अच्छा होगा.

बिना वजह मूषिबट मे फसना ठीक नही होगा.पायल जितनी सेफ रहे उतना अच्छा होगा.

एक मिनिट पायल उसके चक्कर मे कैसे फस गयी. मेरी बेटी ऐसा नही करेगी. कुछ तो गड़बड़ है. शायद उसने चुपके से फोटो निकाले होगे.हाँ यही हो सकता है.

उस से आज पूछ लूँगी.

पहले अपना वीडियो तो निकाल लूँ ,पायल के फोटो तो जला दिए है.

ठकुराइन बॅंक मे चली गयी.

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सी चाची-अवी कहाँ जा रहे हो

अवी-रणजीतसिंघ से मिलने, मेले का हिसाब करना है

सी चाची-खाना तो खा कर जा

अवी-अभी तो नाश्ता किया है. और दोपेहर मे उधर ही कुछ खा लूँगा

चाची को बता कर मैं रणजीतसिंघ से मिलने मंदिर आ गया.

और रणजीतसिंघ के साथ काम करने लगा.

आज ठकुराइन ने मुझे हवेली बुलाया है. ठकुराइन की बात रणजीतसिंघ को बता देता हूँ

रणजीतसिंघ-क्या हुआ अवी ,उदास लग रहे हो

अवी-एक बात ने मुझे परेशान करके रखा है.

रणजीतसिंघ-मुझे बताओ ,मैं शायद तुम्हारी मदद कर दूं

अवी-तुम्हे बताया तो तुम गुस्सा हो जाओगे

रणजीतसिंघ-बात क्या है

अवी-तुम्हारी माँ के बारे में है.

रणजीतसिंघ-ठीक से बताओ

अवी-ठकुराइन मुझे परेशान कर रही है.

रणजीतसिंघ-माँ तुम्हे परेशन क्यूँ करेंगी

अवी-मेरे साथ चुदाई करना चाहती है ठकुराइन. और 2 बार कर भी चुकी है.

रणजीतसिंघ-क्या बक रहे हो,तुम ने कुछ किया होगा .माँ ऐसा नही करेंगी

अवी-मैं क्यूँ ठकुराइन के पीछे पड़ूँगा. तुम तो मुझे वर्जिन लड़किया दे रहे थे. ठकुराइन मेरे पीछे पड़ी है, वो मुझे 1 महीना हवेली मे रखना चाहती है

रणजीतसिंघ-अगर ये बात ग़लत निकली तो

अवी-तुम मेरे दोस्त हो. मैं झूठ क्यूँ बोलूँगा ,अगर मैं झूठ बोल रहा हूँ तो मुझे मार डालना

रणजीतसिंघ-चलो मेरे साथ .

मैं रणजीतसिंघ के साथ कार की तरफ जा रहा था क़ी रणजीतसिंघ को बॅंक मेनेज़र का फोन आ गया.

रणजीतसिंघ ने बॅंक मेनेज़र से बात की...

फिर हम शहर की तरफ निकल गये.

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ठकुराइन-मेनेज़र और कितनी देर लगेंगी.

बॅंक मेनेज़र-मेडम बस 1.30 घंटे मे पैसे मिल जाएँगे

ठकुराइन-(1.30 घंटा ,मतलब 1.00 बज जाएगा .उसने 2.00 बजे बुलाया था .)ठीक है मैं यही रुकती हूँ

बॅंक मेनेज़र-मेडम कोल्ड ड्रिंक मँगाऊ

ठकुराइन-आप बस पैसे जल्दी देने का देखिए

ठकुराइन=जल्दी पैसे मिल गये तो अच्छा होगा.

अगर रंजीत को पता चला तो, रंजीत कुछ नही कहेंगा ,वो मुझसे बहुत प्यार करता है. कुंवर की तरह नही है रंजीत ,अगर उसे मैं ने समझा दिया तो वो गुस्सा नही करेगा.

उसके साथ डील हो जाने के बाद मैं रंजीत को बोल दूँगी कि उसका पता लगाएगा .

वो जल्दी पता लगा लेग. फिर उसका ऐसा हाल करूँगी कि वो ज़िंदगी भर याद रखेगा.

ये पैसे मिलने मे इतनी देर क्यूँ हो रही है

ठकुराइन-मेनेज़र क्या हुआ ,इतनी देर क्यूँ लग रही है.

बॅंक मेनेज़र-बस हो गया मेडम, 10 मिनिट और

ठकुराइन-पैसे तो मिल गये ,अब उसके फोन का इंतज़ार है

ठकुराइन पैसे लेकर अपने कार मे बैठ कर फोन का इंतज़ार करने लगी.

ठकुराइन को फोन ठीक अपने समय पर आ गया

अननोन-जानेमन कहाँ हो

ठकुराइन-कहाँ आना है

अननोन-पैसे का इंतज़ाम हुआ

ठकुराइन-हां, पूरे 1 करोड़

अननोन-अच्छा है. फिर अपनी कार से नीचे उतरो

ठकुराइन-तुम्हे कैसे पता कि मैं कार मे हूँ

अननोन-जानेमन मेरी नज़र तुम्हारा पीछा नही छोड़ रही

ठकुराइन-मेरा पीछा कर रहे हो

अननोन-हन भी और ना भी, चलो पैसे लेकर कार से नीचे उतरो

ठकुराइन-लो आ गयी कार से बाहर

अननोन-अब किसी टॅक्सी मे बैठ जाओ

ठकुराइन-आना कहाँ है

अननोन-टॅक्सी मे बैठ कर हाइवे की तरफ निकलो ,फिर आगे कहाँ जाना है उसके बारे में मसाज करूँगा.

ठकुराइन=दिमाग़ खराब करके रखा है.ये क्या नया चक्कर है. टॅक्सी मे बैठना पड़ेगा.

अब उसने कहा है तो करना पड़ेगा.

ठकुराइन टॅक्सी मे बैठ गयी.

ठकुराइन-भैया हाइवे की तरफ चलो

टॅक्सी वाला-मेडम हाइवे पे कहाँ

ठकुराइन-तुम चलो मैं बताती हूँ ,

टॅक्सी वाला-मीटर से चलना होगा.

ठकुराइन-हां चलो

ठकुराइन=क्या मुसीबत है. अच्छी मेरी कार थी बिना वजह टॅक्सी मे बैठना पड़ा.

पता नही आज कहाँ बुला रहा है. टॅक्सी मे आ तो गयी पर अगर उसने जंगल मे बुलाया तो वापस कैसे जाउन्गी.

आ आ गया कमिने का मसाज

"कल जहाँ आई थी वहाँ जो फार्महाउस है वहाँ तक टॅक्सी मे आ जाओ,टॅक्सी को वापस भेज कर ,वहाँ से कल वाली जगह वॉक करके आना'

इसका दिमाग़ तो नही खराब हुआ .फार्महाउस से वो जगह 2 किमी दूर है. इतने दूर मैं चलके आउ

कमिने ने सोचा तो सही है. फार्महाउस पे टॅक्सी रोकी तो टॅक्सी वाले को शक नही होगा .पर वहाँ जाउ कैसे

चलके जाने के सिवा दूसरा रास्ता नही था.

ठकुराइन ने टॅक्सी वाले को फार्महाउस का रास्ता बता दिया.

थोड़ी देर मे ठकुराइन फार्महाउस के पास पहुँच गयी.

टॅक्सी वाले को निपटा कर ठकुराइन जंगल की तरफ जाने लगी.

फार्महाउस जंगल के बॉर्डर पर था. फार्महाउस जिस खेत पर बना था वो बंज़र था ,यहाँ मस्ती करने के लिए फार्महाउस बनाया गया था.

और पास मे जंगल होने से अगर कुछ कांड किया तो ठिकाने लगाने के लिए जंगल सही जगह थी.

ठकुराइन पैसो से भरा हुआ बॅग लेकर जंगल मे आ गयी.

ठकुराइन पसीने से भीग चुकी थी, उसका ब्लाउस पसीने से उसके बदन को चिपक रहा था.

अननोन-आ गयी ठकुराइन, नहा के आ रही हो

ठकुराइन-ये तुम्हारी वजह से ऐसी हालत हुई है.

अननोन-पसीने मे भीगी हो तो कपड़े निकाल दो वरना खराब हो जाएँगे

ठकुराइन-मेरे कपड़ो की परवाह मत करो,मेरा वीडियो दो और अपने पैसे लो

अननोन-लेन देन बाद मे करेंगे पहले तुम्हारे साथ मस्ती करूँगा फिर डील करेंगे

ठकुराइन-(आज कोई गड़बड़ नही करूँगी.पहले डील की फिर सेक्स किया तो वो दुबारा वीडियो बना लिया तो ,पहले सेक्स कर लेती हूँ फिर डील करती हूँ)ठीक है ,

अननोन-उस पेड़ के पास जाकर कपड़े निकालो

ठकुराइन-(उस पेड़ के पास भेज रहा है मतलब वहाँ कॅमरा होगा मैं दूसरे पेड़ के पास जाती हूँ. अगर कॅमरा के बारे में बात की तो फिर भड़क जाएगा)

ठकुराइन दूसरे पेड़ के पास जाकर अपने कपड़े निकालने लगी.

कपड़े निकालते ही पसीने मे भीगा हुआ ठकुराइन का बदन बिजली गिरा रहा था.

कपड़े निकालते ही ठकुराइन झुक गयी.

कल की तरह पेटिकोट का नाडा निकाल कर ठकुराइन के हाथ पेड़ से बाँध दिए.

और ठकुराइन के कपड़ो को उठा कर जलाने लगा.

ठकुराइन-मेरे कपड़े क्यूँ जला रहे हो.

अननोन- तुझे यहाँ से नंगा भेजूँगा

ठकुराइन-कुत्ते कमिने मैं तुझे नही छोड़ूँगी

अननोन-ये खुन्टा पहले तुम्हारी गंद मारेगा फिर जो करना है कर लेना. और तेरा वीडियो मैं अपने वापस रखूँगा वो मेरे लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है. और ये पैसे तो पहला अंडा है.

ठकुराइन-साले मादरचोद तुम्हे मैं नही छोड़ूँगी.

अननोन-पहले खुद को छुड़ा फिर मेरे बारे में सोचना

ठकुराइन-(मुझे इस पे विश्वास करना नही चाहिए था. कल भी धोके से मेरा वीडियो बनाया और अब पैसे लेकर वीडियो देने से मना कर रहा है. तभी इसने मुझे टॅक्सी से आने को कहा.यहाँ से बिना कपड़ो के कैसे जाउन्गी. मादरचोद ने कपड़े भी जला दे)

अननोन-गंद फटवाने को तय्यार हो जाओ ठकुराइन

वो ठकुराइन के पीछे आ गया ठकुराइन की गंद पर थप्पड़ मारा था कि किसी आहट को सुनकर वो रुक गया

अननोन-चुप रहो

ठकुराइन-मादरचोद मुझे छोड़ दे

अननोन ठकुराइन के पीछे से दूर हो गया और दूसरी तरफ भाग गया.

ठकुराइन-इसे क्या हुआ ,ये कहाँ चला गया.

 
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ठकुराइन पेड़ से बाँध दिया था.

ठकुराइन के कपड़े जला दिए थे.

फिर से ठकुराइन की गंद मारने वाला था कि किसी की आहट सुनकर वो जंगल मे गायब हो गया

ठकुराइन उसे आवाज़ देती रही कि उसके हाथ खोल दे

ठकुराइन को पता नही था कि वो जंगल मे गायब क्यूँ हो गया है.

ठकुराइन को थोड़ी देर बाद अपने सामने वाली झाड़ियों मे हलचल महसूस हुई .

झाड़ियों के हिलने से पहले ठकुराइन को लगा कि वो वापस आ गया होगा.

पर वो तो दूसरी तरफ गया था फिर इस झाड़ियों मे कौन है.

ठकुराइन को अब डर लग रहा था.वो इस तरह नंगी पेड़ से बँधी हुई ,अगर किसी उसे ऐसे देख लिया था.

ठकुराइन डर के मारे अपने हाथ छुड़ा रही थी कि झाड़ियों से एक आदमी बाहर आ गया.

ठकुराइन की नज़र उस आदमी के पैरो पे थी पर जैसे उसने आदमी का चेहरा देखा उसका डर गायब हो गया. वो आदमी ठकुराइन का बेटा रणजीतसिंघ था.

रणजीतसिंघ ठकुराइन को इस तरह नंगा झुका हुआ देख कर शोक्ड हो गया.

वो ठकुराइन के बदन को देखता रह गया. जब उसने तकुराइन के हाथो को पेड़ से बाँधा हुआ देखा तो वो समझ गया कि कुछ गड़बड़ है.

रणजीतसिंघ को इस तरह खुद को देखते हुए देख कर ठकुराइन शरमा रही थी. उसने कभी सोचा नही होगा कि उसका बेटा उसे ऐसी हालत मे कभी देखेगा.

रणजीतसिंघ-माँ ये सब क्या है. किस ने तुम्हारे साथ ऐसा किया मुझे बताओ मैं उसे जिंदा नही छोड़ूँगा.

ठकुराइन-सब बताती हूँ पहले मेरे हाथ खोलो ,वो यहीं कही होगा.

रणजीतसिंघ-कौन होगा यहाँ पर

अननोन-वो मेरी बात कर रही है

रणजीतसिंघ ने पलट की आवाज़ की तरफ देखा

अननोन-हाथ उपर करो, वरना गोली मार दूँगा.

रणजीतसिंघ-तुम्हे पता है मैं कौन हूँ

अननोन-इस रांड़ के बेटे हो तुम ,चुप चाप अपने हाथ उपर करो,वरना मैं गन चला दूँगा.

ठकुराइन-उसे कुछ मत करो.रंजीत उसकी बात मान लो

रणजीतसिंघ-ये है कौन ,और आप इस से डर क्यूँ रही है. वो मेरा कुछ नही बिगाड़ सकता

ठकुराइन-रंजीत मैं तुम्हे बाद मे सब बता दूँगी. वो जैसा कह रहा है वैसा करो,वो तुम्हे गोली मार डालेंगा.

अननोन-माँ बेटे का ड्रामा बंद करो, और तुम उस पेड़ के पास जाकर अपने हाथ पेड़ के पीछे ले जाकर खड़े रहो

रणजीतसिंघ ने एक बार ठकुराइन की तरफ देखा फिर उस पेड़ के पास चला गया.

उसने रणजीतसिंघ का बेल्ट निकाल कर रंजीत को पेड़ से बाँध दिया और. अपना बेल्ट निकाल कर रणजीतसिंघ के पैर बाँध दिए.

अननोन-तो ठकुराइन मुझ से चालाकी करती हो ,अपने बेटे को अपने साथ लेकर मुझे पकड़ने आई थी.

ठकुराइन-मैं ने रंजीत को नही बुलाया, वो यहाँ कैसे आया मुझे नही पता,

अननोन-झूठ बोलती है. इसकी सज़ा तुझे ज़रूर मिलेंगी.

ठकुराइन-मुझे मार डालो पर रंजीत को छोड़ दो

अननोन-मारने के बारे मे बाद मे सोचूँगा पहले तेरे बेटे के सामने तेरी गंद मारूँगा

रणजीतसिंघ-हरामजादे मैं तुझे नही छ्चोड़ूँगा.

रणजीतसिंघ के गाल पर एक थप्पड़ पड़ा , फिर ठकुराइन की गंद पर जोरदार थप्पड़ पड़ा

ठकुराइन-ऐसा मत करो तुम्हे पैसे मिल गये ना हमे जाने दो

अननोन-कल तेरी गंद मार कर मज़ा आ गया आज तेरे बेटे के सामने गंद मारूँगा तो डबल मज़ा आएगा.

रणजीतसिंघ-गंद मे दम है तो मेरे हाथ खोल फिर बताता हूँ तुझे

अननोन-तू जितनी गालियाँ देगा उतना ठकुराइन को दर्द दूँगा.

ठकुराइन-ऐसा मत करो. तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ ,

अननोन-पहले हाथ तो छुड़ा लो

और उसने लंड जीन्स बाहर निकाल लिया और ठकुराइन की गंद पर रख दिया

अननोन-देख तेरी माँ की गंद कैसे मारता हूँ

रणजीतसिंघ-मैं तेरा खून पी जाउन्गा.

ठकुराइन-ऐसा मत करो

अननोन-पहले मेरे लंड को तेरी माँ का खून पीने दे फिर तेरा खून पीऊंगा.

रणजीतसिंघ-(कुछ सोच रंजीत ,गुस्सा से कोई फ़ायदा नही होगा ,दिमाग़ लगा) तुझे क्या लगता है मैं अकेला आया हूँ

झटका मारने वाला था कि रुक गया.

अननोन-क्या कहा तूने

रणजीतसिंघ-तू यहाँ से ज़िंदा नही जा पाएगा .10 मिनिट मे मैं कार के पास नही गया तो मेरा दोस्त पोलीस को फोन करेगा.

अननोन-तू झूठ बोल रहा है. तू अकेला आया है

रणजीतसिंघ-10 मिनिट रुक तुझे पता चल जाएगा.

अननोन-इसकी तो ,तेरे दोस्त को अभी ठिकाने लगता हूँ

उसने लंड ठकुराइन की गंद मे डालने की जगह जीन्स मे डाल कर रणजीतसिंघ की कार की तरफ चला गया.

ठकुराइन-रंजीत दोस्त के बारे में उसे क्यूँ बताया ,पोलीस आ जाती तो हम बच जाते.

रणजीतसिंघ-पोलीस आती तो हम बदनाम हो जाते. मेरा दोस्त उसको संभाल लेगा

ठकुराइन-कौन है तुम्हारा दोस्त

रणजीतसिंघ-अवी

ठकुराइन-वो बच्चा क्या कर लेगा. जब हम कुछ नही कर पाए तो वो क्या करेगा.

रणजीतसिंघ-वो स्मार्ट है. कुछ ना कुछ ज़रूर करेगा .उस पे मुझे विश्वास है.

ठकुराइन-अगर उसने अवी को कुछ किया तो,

रणजीतसिंघ-कुछ नही करेगा. उसे कुछ करना होता तो वो मुझे अब तक गोली मार देता,

ठकुराइन-तुम ने इस बीच मे अवी को क्यूँ फसा दिया.

रणजीतसिंघ-क्या करता ,मैं ऐसा नही करता तो वो आपके साथ ,मैं उसे ऐसा करने कैसे देता. आप मेरी हो सिर्फ़ मेरी

ठकुराइन-क्या कहा तुम ने

रणजीतसिंघ-मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ , कामिनी से भी ज़्यादा

ठकुराइन-ये ग़लत है,

रणजीतसिंघ और ठकुराइन दोनो बात कर रहे थे कि एक चीख सुनाई नही दी.

ठकुराइन-कहीं ये चीख अवी की तो नही है.

रणजीतसिंघ-रूको एक मिनिट ,कोई इधर आ रहा है.

मैं उन दोनो के पास आ गया.

अवी-रंजीत ये क्या है. ठकुराइन आप

रणजीतसिंघ-अवी वो आदमी कहाँ है

अवी-वो वहाँ पड़ा है. उसके सर पे मैं ने लकड़ी मार कर बेहोश कर दिया है.

रणजीतसिंघ-मेरे हाथ खोलो जल्दी.उसके होश मे आने से पहले

अवी-ये सब है क्या.

रणजीतसिंघ-पहले हाथो खोलो जल्दी.

मैं ने रणजीतसिंघ के हाथ खोल दिए. रणजीतसिंघ ने अपना कोट निकाल कर ठकुराइन के उपर डाला.

रणजीतसिंघ-अवी तुम माँ को देखो, मैं उसको संभालता हूँ

रणजीतसिंघ मेरी बताई हुई जगह पर चला गया और मैं ने ठकुराइन के हाथ खोल दिए.

ठकुराइन ने हाथ खुलते ही अपने बदन को कोट से छुपा लिया.

ठकुराइन-जल्दी चलो रंजीत के पास

अवी-आपके कपड़े

ठकुराइन-उसने जला दिए. वो बॅग ले लो

मैं ने बॅग उठा लिया .और ठकुराइन के साथ रणजीतसिंघ के पास आ गया.

हमारे आते रणजीतसिंघ ने उस नकाबपोश के चेहरे पर बड़ा सा पत्थर डाल दिया.

ये देखते ही मैं वही रुक गया और ठकुराइन भी शॉक्ड हो गयी.

रणजीतसिंघ ने पत्थर मारने के बाद उसके सीने मे गोलिया मारने लगा.

पत्थर उसके चेहरे पे डालने से उसका चेहरा पूरी तरह से बिगड़ गया था.

उसका नकाब उसके चेहरे पर पार्मेनेंट चिपक गया था

मेरा तो देखते उल्टी करने का मन हो रहा था.

वो तो मर गया .फिर भी रणजीतसिंघ उसे लात से मार रहा था.

रणजीतसिंघ को गुस्सा मे देख हम दोनो देखते रह गये

अवी-ठकुराइन रणजीतसिंघ को रोको

ठकुराइन होश मे आ गयी. और भागते हुए रणजीतसिंघ के पास चली गयी.

ठकुराइन-रूको रंजीत, वो मर गया है.

रणजीतसिंघ-इसने आपके साथ ,मैं इसे नही छोड़ूँगा

ठकुराइन-वो मर गया है.रुक जाओ

रणजीतसिंघ-इतनी आसानी से नही मर सकता वो ,उसने जो आपके साथ किया ,मैं इसको छोड़ूँगा नही.

रणजीतसिंघ उसकी लाश को लातों से मार रहा था.

ठकुराइन रणजीतसिंघ को रोकने की कोशिश करने लगी.

रणजीतसिंघ को होश मे लाने के लिए एक थप्पड़ मारा पर रणजीतसिंघ का गुस्सा ख़तम होने का नाम नही ले रहा था

ठकुराइन को कुछ समझ नही आ रहा था.

फिर रणजीतसिंघ का पागल पन देख कर ठकुराइन ने रणजीतसिंघ को गले लगा लिया.

रणजीतसिंघ ठकुराइन के गले लगने के बाद भी उसको गालियाँ दे रहा था.

ठकुराइन को रंजीत सिंग की फिकर होने लगी.ठकुराइन ने वो किया जो वो करना नही चाहती थी.

ठकुराइन ने रणजीतसिंघ को किस करना शुरू किया. ठकुराइन ने मेरी परवाह किए बिना रणजीतसिंघ को किस करना शुरू किया.

ठकुराइन के किस करने से रणजीतसिंघ पिघल गया और उसका गुस्सा ठंडा हो गया.

रणजीतसिंघ को शांत देख कर ठकुराइन ने किस करना बंद किया

ठकुराइन-चलो यहाँ से

रणजीतसिंघ-इसका क्या करे

ठकुराइन -जला दो इसे ,

अवी-माचिस कहाँ है.

ठकुराइन-इसके जेब मे है. और कॅमरा भी होगा.

रणजीतसिंघ-अवी देखो ज़रा.चेक करो

मैं ने उसकी जेब से मोबाइल ,कॅमरा और माचिस निकाल ली

ठकुराइन-कॅमरा दो मुझे

ठकुराइन ने कॅमरा लेकर पत्थर पे पटक दिया

और रणजीतसिंघ ने उसे आदमी को जला दिया.

मैं ने वो कॅमरा उठा लिया और मोबाइल के साथ अपने पास रख दिया.

कुंवर का तीसरा दोस्त भी मर गया.

अब उस गर्ल को दिया हुआ प्रॉमिस पूरा हुआ.

कुंवर का दोस्त मर गया ,अब टेन्षन फ्री हो गया.

ठकुराइन ने जगह को अच्छे से देखने को कहा , हम ने सारी जगह चेक की .जब लगा कि सब ठीक है तो तक हम ने चैन की सास ली

 
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