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मैं और मेरा परिवार

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रानी को बाइ बोल कर मैं कोमल को लेकर गाओं की तरफ जाने लगा.

कोमल कुछ उदास लग रही थी. वो चुप चाप बैठी थी.

मैं ने कोमल को ऐसा चुप चाप पहली बार देखा. वो भी मेरी बाइक पे ,मैं ने बाइक रोक दी

बाइक रुकते कोमल होश मे आ गयी

अवी-कोमल क्या हुआ

कोमल-कुछ भी तो नही.

अवी-तुम्हारा चेहरा कुछ और बता रहा है. क्या हुआ

कोमल-कितनी जल्दी समय बीत जाता है.

अवी-क्या हुआ ,तुम ऐसे क्यू बोल रही हो

कोमल-कुछ नही. एग्ज़ॅम हो गये और नये साल के लिए बिज़ी भी हो गये

अवी-तुम चाहो तो कोचिंग मत जाना ,पर तुम्हें डॉक्टर बनना है.

कोमल-तुम्हारे लिए ही तो डॉक्टर बनना चाहती हूँ.

अवी-तो ज़्यादा मत सोचो ,तुम्हें ऐसा उदास देख कर मुझे अच्छा नही लगता

कोमल-देखो ना रानी भी घूमने जा रही है.और मैं वापस अपने कमरे मे बंद हो जाउन्गी

अवी-वही तो तुम्हें पसंद है. अपने कमरे मे बैठ कर कर किताबें पढ़ना.

कोमल-पहले था पर रानी ने मुझे बताया कि वो कितना एंजाय करती है .तब से मुझे भी एंजाय करना का दिल कर रहा है

अवी-तुम क्या चाहती हो

कोमल-मैं पंछी की तरह आसमान मे उड़ना चाहती हूँ ,मछली की तरह समंदर मे तैरना चाहती हूँ.

अवी-तो ये बात है, हम भी कही घूमने चलते है

कोमल-सच

अवी-हाँ, कल हम घूमने जाएँगे. सिर्फ़ हम दोनो

कोमल-लेकिन कहाँ जाएँगे

अवी-यही शहर मे घूमेंगे और मस्ती करेंगे

मेरे साथ घूमने जाने की बात से कोमल खुश हो गयी और मेरे गले लग गयी.

अवी-क्या कर रही हो, कहीं भी गले लग जाती हो कंट्रोल रखा करो, लोग क्या कहेंगे

कोमल-मैं लोगो से क्यूँ डरूँ

अवी-कोमल

कोमल-सॉरी नेक्स्ट टाइम ध्यान रखूँगी.

अवी-चले अब

कोमल-हाँ, लेकिन कल कितने बजे निकलेंगे ,कहाँ जाएँगे ,खाना साथ लेना होगा , कब आएँगे

अवी-ब्रेक मारो, कितने सवाल एक साथ पूछ रही हो

कोमल-प्लॅनिंग तो करनी होगी.

अवी-बिना प्लॅनिंग के घूमने जाएँगे. जहाँ लगा कि मस्ती कर सकते है वहाँ मस्ती करेंगे. होटेल दिखा तो खाना खाएँगे.डब्बा दिखा वहाँ पर खाना खाएँगे

कोमल-सुनने मे अच्छा लग रहा है.

अवी-कल ज़्यादा अच्छा लगेगा .बस नेहा बुआ से पर्मिशन लेना

कोमल-हाँ, माँ मुझे जाने नही देंगी. पहले कभी उनको छोड़ कर गयी नही ना

अवी-ये तो तुम्हें करना होगा.

कोमल-मैं माँ से बात कर लूँगी. लेकिन कविता घूमने जाने का नाम सुन कर हमारे साथ आई तो

अवी-कविता और लीना को मैं संभाल लूँगा.

कोमल-तो कल पक्का ना

अवी-हाँ, कुछ भी हो जाए हम कल घूमने जाएँगे.

कोमल कभी बाहर घूमने नही गयी थी. कभी जाती है तो नेहा बुआ साथ रहती थी.

रानी के घूमने जाने के नाम से कोमल को भी मस्ती करने का मन हो रहा था.

मैं कविता और लीना को घुमाने ले जाता तो कोमल का दिल भी करता था कि मेरे साथ चले

आज एग्ज़ॅम ख़तम हो जाने के बाद फिर से कोचिंग मे बिज़ी हो जाने से पहले कोमल को रिलॅक्स होने की ज़रूरत थी.

ऐसे मे कोमल के नाम मैं अपना एक दिन तो कर सकता हूँ.

कोमल का सब कुछ मैं था. वो मेरे सिवा कुछ नही करती है.

आज की कोमल जो है वो मेरे वजह से ऐसी बनी है.

ऐसे मे कोमल के खुशी के लिए मुझे इतना तो करना था.

कोमल को कल घुमा कर लाता हूँ. कुछ पल भी मेरे साथ रही तो वो खुश हो जाती है.

देखो घूमने जाने के नाम से कोमल का चेहरा पे एक रोनक आ गयी.

कोमल को कल का प्रॉमिस कर के मैं अपने घर चला गया.

घर मे आते ही चाची एग्ज़ॅम के बारे मे पूछने लगी.

ब चाची-अवी

अवी-जी चाची

ब चाची-एग्ज़ॅम कैसे गये

अवी-पेपर अच्छे गये .

ब चाची-अब क्या करने का सोचा है.

अवी-पढ़ाई करता रहूँगा .पता नही कब किसी काम मे बिज़ी हो जाउ

सी चाची-कुछ दिन आराम कर ले

अवी-नही, मुझे एंटरेस की पढ़ाई भी करनी है.

ब चाची-ठीक है. पर अपनी सेहत का ध्यान रखना

अवी-जी

म चाची-अवी एग्ज़ॅम ख़तम होने की खुशी मे फ्रेंड के साथ मस्ती नही कर रहा.

अवी-उनके एग्ज़ॅम अभी चल रहे है

ब चाची-सीमा, जा अवी के लिए खाना लेकर आ

अवी-चाची मैं आराम करना चाहता हूँ.

ब चाची-क्या हुआ तबीयत तो ठीक हैना

अवी-हाँ, थोड़ा थक गया हूँ.

ब चाची-इस लिए कह रही हूँ कि अपना ध्यान रखा कर, थोड़ी देर आराम कर ले

मैं अपने कमरे मे जाकर आराम करने लगा.

मेरे इस तरह आराम करने से छोटी चाची मेरे कमरे मे आ गयी.

सी चाची-अवी क्या हुआ

अवी-कुछ नही, थोड़ा सर दर्द कर रहा है.

सी चाची-मैं दबा देती हूँ.

मैं चाची की गोद मे सर रख लेट गया. चाची मेरे सर पर हाथ घुमाने लगी.

सी चाची-अवी तेरे पेपर खराब गये ना.

अवी-हाँ

सी चाची-इसमे टेन्षन लेने जैसी क्या बता है.वो तो खराब जाने वाले थे

अवी-क्या मतलब

सी चाची-तूने इतना काम जो किया है. ऐसे मे कम मार्क मिले तो भी कोई कुछ नही कहेगा.

अवी-मुझे लगता है बहोट कम मार्क मिलेंगे

सी चाची-पेपर मे मार्क लेके क्या करेगा .तूने सब के दिल मे जो जगह बना रखी है. सबको खुशिया दी है. उनके सामने ये पेपर कुछ भी नही. तू अपनी ज़िंदगी के पेपर मे 1स्ट आ रहा है ये ज़्यादा इम्पोर्टेंट है. पेपर मे मार्क तो कोई भी ले सकता है पर तूने जो किया वो कोई और नही कर सकता था.तुम टेन्षन मत ले ,मैं हूँ ना ,

अवी-आपने ही तो कहा था कि काम के साथ पढ़ाई भी करनी चाहिए जो मैं ने नही की

सी चाची-तूने क्या किया है मुझे सब पता है. तेरे जैसा बेटा पाकर मैं बहोत खुश हूँ. अब मुझे खुश देखना चाहता है तो टेन्षन लेना बंद करो, वरना मैं तुझसे बात नही करूँगी.

अवी-आपसे बात किए बिना मेरा दिन शुरू नही होता,

सी चाची-देख तू टेन्षन भुलाने के लिए कहीं घूमने चला जा ,या फिर दोस्तो के साथ पार्टी कर.

अवी-घूमने ,मैं बताना तो भूल गया. कल कोमल को लेकर बाहर जा रहा हूँ

सी चाची-ये तो अच्छी बात है. एग्ज़ॅम ख़तम होने की खुशी मना लो,कोमल के साथ जाकर तुम अच्छा कर रहे हो ,उसे भी रिलॅक्स होने की ज़रूरत है.

अवी-कल कोमल के नाम अपना दिन किया है

सी चाची-ठीक है, अब सो जा ,और उठने के बाद मुझे टेन्षन फ्री अवी चाहिए

अवी-ज़रूर मिलेगा.

मैं चाची के गोद मे सर रख कर लेट गया.

 
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नेक्स्ट डे मैं कोमल के साथ घूमने जाने के लिए तैयार हो गया.

बड़ी चाची मुझे घूमने जाते हुए देख कर खुश हो गयी.

कोमल को अपने साथ ले जाने से उनको लगने लगा कि कोमल को खुश रखने से नेहा बुआ की नफ़रत कम हो जाए.

वैसे छोटी चाची ने बड़ी चाची को बता दिया कि एग्ज़ॅम का टेन्षन को दूर करने के लिए मैं घूमने जा रहा हूँ.

बड़ी चाची भी तो यही चाहती थी कि मैं कुछ दिन आराम करूँ. बड़ी चाची की इजाज़त मिलते ही मैं कोमल के साथ घूमने जाने को तैयार हो गया.

मैं तैयार होके सुबह सुबह नेहा बुआ के घर चला गया.

कोमल अभी तक तैयार नही हुई थी.

अवी-क्या हुआ अभी तैयार क्यूँ नही हुई. इरादा बदल दिया

कोमल-आज मुझे उड़ने से कोई नही रोक सकता.तुम बैठो मे फ्रेश होके आती हूँ

मेरे आते कोमल फ्रेश होने चली गयी.और नेहा बुआ मुझ घूर के देखने लगी

नेहा बुआ-कहाँ जा रहे हो,

अवी-कुछ सोचा नही है ,पर शहर के बाहर नही जाएँगे.

नेहा बुआ-तुम से उम्मीद ही क्या की जा सकती है.कोमल ज़िद्द ना करती तो कभी तुम्हारे साथ जाने नही देती.

अवी-बुआ कोमल मेरी बहन है, उसका ध्यान मैं रख सकता हूँ

नेहा बुआ-ये बात तुम्हारे मूह से अच्छी नही लगती. कोमल को जैसे लेकर जा रहे हो वैसे वापस लाना ,वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा.

अवी-जी बुआ

बीच मे कविता के आने से नेहा बुआ ने बात करना बंद की.

कविता-भैया आप, इतनी सुबह, मुझसे मिलने आए है

अवी-नही, कोमल के साथ बाहर जा रहा हूँ. घूमने जा रहे है हम.

कविता-मैं भी चलती हूँ

अवी-पिछली बार तुम्हें ले गया था ना ,आज कोमल को ले जाता हूँ,

कविता मेरे पास आ गयी. और मेरे कान मे कहा

कविता-दीदी को प्यार करने ले जा रहे हो

ये कविता भी ना कुछ भी बोलती है

अवी-नही. वो प्यार सिर्फ़ तुम्हारे साथ करता हूँ.

कोमल-चलो अवी ,मैं रेडी हो गयी.

कविता-भैया मेरे लिए चॉक्लेट लाना

नेहा बुआ-कोमल ठीक से जाना. कुछ भी हुआ तो मुझे कॉल करना.और अपना ख़याल रखना.

कोमल-एक दिन के लिए तो जा रही हूँ ,आप भी ना, चलो अवी

नेहा बुआ ने मुझे फिर से घूर के देखा जैसे कह रही हो कि अगर कोमल को कुछ हुआ तो मुझे कच्चा खा जाएगी.

मैं कोमल को लेकर शहर की तरफ निकल पड़ा.

कोमल ने गाओं से बाहर निकलते ही मुझे बाइक रोकने को कहा.और बाइक रोकते ही कोमल बाइक पर दोनो तरफ पैर रख कर बैठ कर गयी.

कोमल-अब चलो. मुझे बोरिंग दुनिया से खुशियो के महल मे ले चलो

अवी-तुम्हें खुशियो के महल मे जाना है.

कोमल-हाँ, जहाँ खुशिया ही खुशिया हो. खाने मे स्वीट्स सी हसी मिले, पीने के लिए शानदार स्माइल मिले,सपने इतने हसीन हो कि आँखे खोलने का मन ना हो.

अवी-ऐसा महल तो पहले बनाना होगा.

कोमल- तुम जहाँ होते हो वहाँ खुशिया होती है.

अवी-फिर तो तुम्हें मेरी हर बात माननी होगी.

कोमल-तुम जो कहोगे वो करूँगी.

अवी-कोमल अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दो

कोमल ने बिना कुछ कहे मोबाइल स्विच ऑफ किया .

अवी-अब पूरा दिन अपने बारे मे सोचना. सिर्फ़ अपने

कोमल-आज का दिन स्पेशल बना दो.

कोमल का दिन स्पेशल बनाने के लिए हम शहर की तरफ निकल पड़े.

कोमल ने अपने हाथ मेरी कमर मे डाल कर मुझसे चिपक गयी.

मुझे पता नही था कि कोमल को कहाँ लेकर जाना है,

मैं ने पेट्रोल टांक फुल कर दी. और 2 गॉगल खरीद लिए .और बाइक हाइवे की तरफ ले गया.

कोमल-अवी हम कहाँ जा रहे है.

अवी-तुम्हारे लिए महल ढूँढने जा रहे है.

कोमल-ये गॉगल किस लिए लिए.

अवी-तुम ने कभी फास्ट बाइक को एंजाय करने का सोचा है

कोमल-नही.

अवी-ये गॉगल पहन लो ,तुम्हें पंछी की तरह उड़ना हैना .तुम्हें आसमान की शायर करता हूँ.

कोमल ने गॉगल पहन लिया .और मैं ने बाइक को फुल स्पीड से चलना शुरू किया.

बाइक की स्पीड बढ़ते ही कोमल ने अपने बाल खोल दिए .और मुझे कस के पकड़ लिया.

और तेज हवा के साथ कोमल मस्ती करने लगी.

हवा मे पंछी की तरह उड़ने को तैयार हो गयी.

कोमल के रेशमी बाल हवा मे उड़ रहे थे.मैं मिरर मे कोमल के चेहरे पे खुशी देख रहा था.

कोमल के रेशमी बाल हवा मे लहरा रहे थे ,तो कोमल ने मुझे कस के पकड़ लिया ताकि हवा उसे उड़ा ना ले जाए.

कोमल चिल्ला रही थी. अपनी खुशी का इज़हार कर रही थी. सब को बता रही थी कि वो आज आज़ाद हुई है. और आज वो बादलों मे अपना महल बनाने जा रही है.

कोमल ने आज अपने दिमाग़ से डर ,टेन्षन, कौन क्या कहेगा, सब कुछ निकाल दिया था.

कॉलेज जाते समय स्पीड ज़्यादा की तो कोमल डर जाती थी.

पर आज बाइक की स्पीड 80+ होने के बाद भी मेरे साथ बाइक राइड का मज़ा लेने लगी.

दूसरे वेहिकल को कट मारते समय कोमल चिल्ला कर मज़ा करती. वो डर की वजह से नही मस्ती मे चिल्ला रही थी.

किसी बाइक को ओवर्टेक करते समय अगर उस पे कपल हुए तो उनको अंगूठा दिखा देती.

जैसे उनको चॅलेंज कर रही हो , और बता रही है कि वो लूसर है.

कोमल ने आज खुल कर मस्ती करने का सोचा है.

कोमल अपने दुपट्टे को हवा मे उड़ा देती जिस से वो थोड़ा उपर हो जाती.

कोमल बाइक पे खड़ी होकर मेरे कंधे को पकड़ कर हवाओं के साथ रेस लगा रही थी.

अपनी आँखे बंद कर पंछी की तरह आसमान मे उड़ने लगी.

उसके ऐसा करने से मैं स्पीड कम कर देता जिस से कोमल खड़ी होकर अपने हाथो मे दुपट्टा लेकर हवा मे उड़ाने लगती.

उसको इस बात से कुछ लेना नही था कि लोग उसे ऐसा करते हुए क्या कहेंगे.

उसे इतना पता था कि उसे आज आज़ादी से जीना है.

कोमल तो आज काफ़ी खुश दिख रही थी.

मैं कोमल को मस्ती करते हुए देख कर खुश था.

अवी-देखो कोमल मैं ने हाथ छोड़ दिए है.

मेरे हाथ छोड़ते कोमल ने हाथ आगे बढ़ा कर हॅंडल पकड़ लिया.

अवी-अब तो तुम्हें चलाना होगा.

कोमल-अवी पकडो ना, बाइक गिर जाएगी.

अवी-कुछ नही होगा, बस हाथ मत छोड़ना

मैं आगे झुक गया और कोमल बाइक चलाने लगी.

पहले तो कोमल डर गयी.

लेकिन उसे याद आ गया कि वो आज अपने साथ ऐसी डिस्कनरी लेके आई है जिसमे सिर्फ़ मस्ती, मज़ा, धमाल जैसे वर्ड है.

डर क्या होता है उसे कोमल भूल गयी थी.

फिर क्या था कोमल बाइक चलाने लगी.

कोमल-य्ाआ हुउऊउ मैंन्न्न् बाइकीयेयी चलाआ रहियिइ हुउऊ

कोमल के कंट्रोल मे बाइक आते वो चिल्लाने लगी.

और बाइक चलते हुए लाइफ को एंजाय कर रही थी.

कोमल को इस तरह बाइक चलाते हुए मस्ती करने मे मज़ा आ रहा था.

लेकिन इस तरह उसे बाइक चलाने पे थोड़ी परेशानी हो रही थी.

मैं ने जल्दी बाइक अपने कंट्रोल मे ले ली

अवी-कैसाआ लयग रहाा हाईí

कोमल-मेरीए पंख निकले आईए हाईईइ औरर्र मैं हाआवा मे उड़ रहिी हुउऊउ ऐसाआ लग रहाा हाईईइ

कोमल सुबह की ठंडी हवा का मज़ा ले रही थी.

हम काफ़ी दूर निकल आए हमे पता ही नही चला.

एक छोटे पहाड़ की टेडी मेडी रोड पे बाइक चलते हुए कोमल घाटी का मज़ा ले रही थी.

कुछ मोड़ ऐसे थे कि जहाँ से गुजरते समय कोमल को ऐसा लगता वो पहाड़ो की खाई मे गिर जाएगी.

कोमल इतना चिल्ला रही थी कि पहाड़ो को डर लगने लगा.

ऐसे मस्ती करते हुए काफ़ी दूर निकल आए.

हमे तो पता ही नही चला कि अपनेगाओं अपने शहर को कितना पीछे छोड़ आए है.

सुबह की ठंडी ठंडी पहाड़ो की हवा हमे गुदगुदी कर रही थी.

एक छोटा ढाबा देख कर मैं ने अचानक ब्रेक मार दिया .जिस से कोमल मुझसे और चिपक गयी.

पीछे का टाइयर थोड़ा उपर हो गया .

और कोमल कुछ सेकेंड के लिए उपर हो गयी. कोमल ने मुझे पकड़ के रखा था जिस से उसको ऐसे बाइक के साथ हवा मे उड़ना अच्छा लगा.

कोमल-अवेसम, एक बार और करते है.

अवी-पहले नाश्ता करते है

कोमल-कहाँ पर

अवी-वो देखो ढाबा, वहाँ पर परान्ठे खाते है

कोमल-वहाँ पर...हाँ चलो आज यहाँ खा लेते है.

फिर मैं कोमल को लेकर ढाबे पर आ गया. और गरम गरम परान्ठे ऑर्डर किए.

पपाजी ने गरम गरम पराठे एक्सट्रा मक्खन मार कर हमे दिए.

कोमल-ये इतना मक्खन ,

अवी-खा कर देखो, एक दिन मे मोटी नही हो जाओगी.

कोमल पहली बार ढाबे पे खा रही थी. मेले मे स्टॉल पे खाया था पर ढाबा तो ढाबा है.

ढाबे के खाने को मैं 5 स्टार होटेल से ज़्यादा मार्क दूँगा.

ढाबे के खाने की बात ही अलग होती है .

कोमल-वाव क्या टेस्टी परान्ठे है. ऐसे टेस्टी परान्ठे तो होटेल मे भी नही मिलते .मैं तो एक और लूँगी.

अवी-मैं पॅक करके लाता हूँ.

कोमल-फिर तो ज़्यादा लेना मैं तो परान्ठे ही खाउन्गी.

ढाबे पे गरम गरम परान्ठे का मज़ा लेने के बाद हम जा रहे थे कि ढाबे वाले ने कहा की आगे एक गाओं है वहाँ पर पहाड़ो मे एक झरना है.अच्छी जगह है.

जैसे ढाबे वाले ने बताया हम उसी गाओं की तरफ जाने लगे.

ढाबे वाले ने कहा कि गाओं वाले वहाँ ज़्यादा लोगो को जाने नही देते .अगर गाओं वालो की इजाज़त मिली तो हमारा काम बन सकता है.

हम उसी तरफ चल दी.

गाओं छोटा था .और जंगल का एरिया था. ये हमारे गाओं के जंगल का दूसरा एंड था.

जंगल काफ़ी बड़ा था ,ये तो मुझे पता था पर इतना बड़ा होगा वो आज देख लिया.

ये हमारा जंगल है तो हमे इजाज़त मिल जाएगी.

गाओं मे आते ही मैं ने गाओं वालो को अपना परिचय दिया .तो गाओं वालो ने मुझे पहचान लिया मेले की वजह से पर कोमल को मेरी फ्रेंड की तरह समझने लगे वो लोग.

हम गाओं वालो से पूछ कर झरने के पास चले गये.

झरना थोड़ा अंदर था पर वहाँ तक बाइक ले जा सकते थे.

झरने के पास आते हमे पानी के गिरने की मधुर आवाज़ सुनाई दी.

हम उसी आवाज़ की दिशा मे जाने लगे.

पंछी हमे झरने का रास्ता बता रहे थे.

पंछी हमारे साथ साथ उड़ रहे थे .जिसे देख कर कोमल ने पन्छियो से दोस्ती कर ली.

कोमल के नये दोस्त हमे झरने तक ले आए.

झरना देखते ही कोमल और मैं , हम दोनो खुश हो गये.

झरने से गिरता हुआ पानी, पानी के गिरने से आ रही मधुर आवाज़, जंगल की शांति ,हर तरहफ़ हर्याली.पन्छियो का मधुर आवाज़ मे गाना

झरने की वजह से छोटा तालाब बन गया था जिस मे मछलिया अपना खेल खेल रही थी.

हर तरफ हरियाली थी ऐसे मे झरने का निर्मल पानी देख कर हमे प्यास लग गयी.

सूरज का प्रतिबंब तालाब की सुंदरता को बढ़ा रहा था.

झरने के पानी के गिरने की म्यूज़िक के साथ पंछी मधुर आवाज़ मे गाना गा रहे थे.

जैसा कोमल को खुशियो का महल चाहिए था ये बिल्कुल वैसी जगह थी.

हमारे अंतर मन को शांत करने के लिए ये जगह सही थी.

कोमल इस जगह की संदरता मे पूरी तरह से खो गयी

 
776

हम दोनो ये सुंदर जगह देख कर अपनी आँखो मे क़ैद करने लगे

हम कुछ देर बिना पलकें झुकाए झरने की सुंदरता को देखते रह गये

कोमल-अवी ये जगह कितनी सुंदर है.कितनी शांति है यहाँ पर.

अवी-हाँ, देखो कितना निर्मल पानी है. मछली देखो कैसे करतब कर रही है.पन्छियो को देखो कैसे झरने के चक्कर लगा रहे हैं .

मैं जगह की तारीफ कर रहा था कि कोमल तालाब के पास गयी और तालाब की मछलियो की तरफ अपनी दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया.

कोमल से हाथ मिलाने के लिए तालाब की मछलिया तैरते हुए कोमल के पास आने लगी.

और तालाब से बाहर निकल कर जंप मार कर पानी मे वापस जाने लगी.

कोमल मछलियो की तरफ पानी उड़ाने लगी. उनके साथ खेलने लगी.

मुझे भूल कर अपने नये दोस्तो के साथ मस्ती करने लगी.

अपने पैरो को तालाब मे डाल कर पानी कितना ठंडा है ये चेक करने लगी.

मछलिया कोमल के पैरो को किस करके भाग जाती .जिस से कोमल को गुदगुदी होने लगी. और कोमल पन्छियो के साथ अपनी हसी जंगल को सुनाने लगी.

मैं तो कोमल को इस तरह सब कुछ भूल कल खुले दिल से एंजाय करते हुए देखने लगा.

कोमल के चेहरे पे जो खुशी झलक रही थी वो देखने लायक थी.

अगर नेहा बुआ यहाँ होती. और कोमल को मस्ती करते हुए देखती तो सारी नफ़रत भुला कर मुझे प्यार से गले लगाती.

मैं तो कोमल के ख़यालो मे खो गया.

अचानक मेरे उपर पानी गिरने से मैं होश मे आ गया.

कोमल ने मेरे उपर पानी उड़ा दिया और हँसने लगी.

अवी-कोमल तुम ने मुझे भिगो दिया .अब देखो मैं क्या करता हूँ.

और मैं कोमल की तरफ बढ़ने लगा और कोमल मुझसे दूर भागने लगी.

कोमल सब टेन्षन को दूर रख कर खुल कर एंजाय कर रही थी.

कोमल हरी हरी घास पर इस तरह भाग रही थी जैसे वो डॅन्स कर रही हो.

कोमल के भागने से उसकी पायल की छम छम से जंगल कोमल के साथ ताल से ताल मिला कर पेड़ो को लहरा रहा था. जैसे कि पेड़ कोमल के पायल की छम छम पे डॅन्स कर रहे हो.

मैं कोमल को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागने लगा.

कोमल मुझे अंगूठा दिखा कर मेरे हाथ से निकल जाती. और हँसने लगती.

मैं जानबूझ कर कोमल को पकड़ नही रहा था ,उसको मज़ा करने दे रहा था

कोमल कभी इधर तो कभी उधर जंप मारने लगी.कोमल मोरनी की तरह नाच रही थी.

कोमल अपनी पहचान भूल गयी थी. आज वो ऐसा महसूस कर रही थी कि उसका नया जनम हुआ है.

मैं भी हस्ती खेलती कोमल को देख कर पहले तो शॉक्ड हो गया. हमारी कोमल इस तरह मस्ती कर सकती है ये कोई सोच भी नही सकता.

किताब की दुनिया मे डूबी रहने वाली कोमल को इस तरह नेचर के साथ खेलते हुए देकना ,किसी अप्सरा को देखने जैसा था.

कोमल के साथ मैं भी मस्ती करने लगा.

फाइनली मैं ने कोमल को पकड़ लिया और अपनी गोद मे उठा लिया.

अवी-अब मैं क्या करने वाला हूँ पता है

कोमल-क्या करने वाले हो.

मैं कोमल को उठा कर झरने के पास ले गया.

अवी-तुम को पानी मे डालने वाला हूँ

मैं कोमल को पानी मे पकडने वाला था कि कोमल ने मुझे रोक लिया.

कोमल-मेरे पास ड्रेस नही है.

अवी-हमे ड्रेस लाना चाहिए था.

कोमल-हाँ, इस तालाब मे मस्ती करने का दिल कर रहा है. मुझे जलपरी बना दिया है.

अवी-पहले तो तुम्हें पंछी बनाना था.

कोमल-पंछी बन कर मैं आसमान मे उड़ चुकी हूँ अब तो मुझे जलपरी बनना है.

अवी-मुझे सोचने दो .कि तुम्हें जल परी कैसे बनाऊ

कोमल-जल्दी सोचो. मेरी सहेलिया मुझे बुला रही है.

अवी-कौन सी सहेली

कोमल-तालाब की मछलिया मेरी सहेली बन गयी है.

अवी-फिर तो कुछ सोचना होगा.

कोमल-जल्दी सोचो

अवी-यहाँ सिर्फ़ हम दोनो है,यहाँ कोई आने वाला नही है. गाओं वालो ने बताया कि उनके गाओं मे पूजा है ,तो यहाँ वो किसी और को आने नही देंगे

कोमल-तो

अवी-मैं तो कपड़े निकाल कर नहाने वाला हूँ,

और मैं ने कोमल को वही पर बैठा दिया और ,अपने कपड़े निकालने लगा.

कोमल-मैं क्या करूँ ,

अवी-यहाँ सिर्फ़ हम दोनो है.

कोमल-मुझसे नही होगा

अवी-तो तुम जलपरी नही बन सकती

कोमल-कुछ और सोचो ना.

अवी-यही रास्ता है.

और मैं अपने कपड़े निकालने लगा.

कोमल-कुछ तो शरम करो

अवी-एक दिन के लिए बेशरम बन जाते है. ट्राइ करके देखो. और जलपरी बन जाओ

मैं अंडरवेर मे हो गया .और पानी मे छलाँग लगाई.

तालाब मे छलान्ग लगाते ही पानी मे तैरना शुरू कर दिया.

कोमल वहाँ बैठी हुई थी ,और मैं खुले आसमान मे सुंदर झरने के तालाब मे तैरने का मज़ा ले रहा था.

मैं तालाब के ठंडे ठंडे पानी मे मछलियो के साथ तैरने लगा.

मैं तो मज़ा करने लगा पर कोमल वही बैठी मुझे देख रही थी.

मैं कोमल को तालाब मे आने को बोल रहा था.

अवी-कोमल ,अगर सोचती रहोगी तो कैसे चलेगा.

कोमल-मुझे कुछ देर सोचने दो

अवी-आज सोचने मे टाइम वेस्ट मत करो .देखो तुम्हारी सहेलियाँ मुझे कितना तंग कर रही है

कोमल-उनको कहो ,मैं उनके साथ नही खेल सकती.

अवी-फिर तो तुम्हारी सहेलिया रूठ जाएगी.

कोमल-मैं यहाँ ,खुले मे ,मुझसे नही होगा.

अवी-एक दिन के लिए मैं जैसा कहता हूँ वैसा करो फिर देखना कितना मज़ा आता है

कोमल-अगर किसी को पता चला तो

अवी-कौन बताएगा.

कोमल-तुम मस्ती करो मैं यही ठीक हूँ.

अवी-सोच लो. इस तरह मस्ती करने का दुबारा मोका नही मिलेगा.

कोमल-तुम मुझे कन्फ्यूज़ मत करो

अवी-ठीक है. मैं तो इतना अच्छा मोका गवाउन्गा नही.

और मैं तालाब मे स्विम करने लगा.

इधर से उधर मछलियो के साथ तैरने लगा.

मैं ज़्यादा मस्ती कर रहा था ताकि कोमल को भी तालाबमे एंजाय करने का दिल करे

मैं तालाब मे तैरने के साथ झरने के नीचे जाकर नॅचुरल शवर को एंजाय करने लगा.

पत्थरों के उपर जाके उचाई से तालाब मे जंप मारने लगा.

कोमल मुझे मस्ती करते हुए देखने लगी .

उसकी आँखो से पता चल रहा था कि उसे भी मेरी तरह एंजाय करना है.

उसको तालाब मे मछलियो के साथ नये नये खेल खेलने है.

उसका दिल कह रहा था उठो और तालाब मे जाकर जलपरी बन जाओ

पर उसके आँखो के सामने शरम का परदा लगा हुआ था.

मैं तो अपनी मस्ती मे खोया था.

मैं ने एक पल के लिए कोमल की तरफ देखा.

उसे देख कर लग रहा था कि वो मुझे कहना चाहती हो मुझे उठा कर तालाब मे ले जाओ. मैं कुछ नही कहूँगी , बस एक बार मुझे भिगो कर मेरी शरम ख़तम कर दो

बस एक बार मुझे तालाब की गहराई मे ले जाओ. और मुझे बेशरम बना दो.

मैं यहाँ किस लिए आया था. मैं अपने एंजाय करने के लिए नही आया था.

मैं तो कोमल को खुशिया देने के लिए यहाँ लाया था.

कोमल को लाइफ एंजाय करना सिखाने लाया था.

और मैं क्या कर रहा हूँ.

मुझे कुछ सोचना होगा.

मैं कोमल को इस तरह उदास कैसे रहने दे सकता हूँ.

मैं कोमल को तालाब मे लाने के लिए उसके पास जाने लगा.

 
777

ये मैं क्या कर रहा हूँ. मैं कोमल को मज़ा करवाने लाया था.और अकेले एंजाय कर रहा हूँ

कोमल की आँखे मुझे शिकायत भरी नज़रों से देख रही थी.

वो कह रही है कि मुझमे इतनी हिम्मत नही,तुम मेरी हिम्मत बन जाओ.

वो कहते हैना क़ाबलियत सबमे होती बस उनको एक स्ट्रॅट की ज़रूरत होती है.

कोमल का दिल उसे जलपरी बनने को कह रहा था पर उसका मन उसे ऐसा करने से रोक रहा था.

ऐसे मे मुझे पता था कि मुझे क्या करना है. मैं तालाब से बाहर आ गया.

मेरा कसरती शरीर पानी मे भीगा हुआ था जिसे कोमल बिना पलकें झुकाए देख रही थी.

उसकी आँखें मेरे शरीर को देख कर ये भूल गयी कि उसे तालाब मे जाना है.उसे जलपरी बनना है.

पर मुझे याद था. मैं कोमल के पास जाकर चुटकी बजा कर उसे होश मे लाया.

होश मे आते ही मुझे अपने इतने करीब देख कर कोमल ने शरम से अपनी आँखे नीचे की.

मैं ने अपने कपड़ो मे से बनियान उठा ली और फिर से चुंटकी बजा कर उसे होश मे लाया

अवी-कहाँ खो गयी

कोमल-तुम फिल्म के हीरो की तरह दिख रहे हो.

अवी-ये हीरो तुम्हे हीरोइन बनाने आया है.

कोमल-मैं समझी नही.

अवी-मेरे साथ तालाब मे चलो ,साथ मे एंजाय करते है

कोमल-मेरे पास दूसरा ड्रेस नही है.

अवी-देखो यहाँ सिर्फ़ हम दोनो है. तुम ये बनियान पहन लो और मेरे साथ तालाब मे चलो,

कोमल-नही. मैं ठीक हूँ.

अवी-मेरे लिए ,प्लीज़ ,ये हमारा सीक्रेट रहेगा.

कोमल-नही,

अवी-मेरी ग़लती है .मुझे तुम्हे यहाँ लाना नही चाहिए था.

कोमल-ऐसा क्यूँ बोल रहे हो. मैं तो बहुत खुश हूँ.

अवी-मुझसे झूठ बोल के क्या मिलेगा तुम्हे ,तुम मुझसे नही खुदसे झूठ बोल रही हो. तुम भी तालाब मे स्विम करना चाहती हो

कोमल-मैं ऐसे खुश हूँ

अवी-वही करो जो तुम्हे अच्छा लगता है. कल से अपनी किताबो मे खो जाना.

और मैं गुस्से मे वापस जाने लगा.

कोमल के मना करने के बाद मैने निराश होकर तालाब मे जंप मारी. और तैरने लगा.

मेरे नाराज़ होने पे कोमल पे असर ज़रूर होगा.

मैं ने जानबूझ कर नाराज़ होने का नाटक किया.

और बिना कोमल के तरफ देखे तालाब मे डुबकी मारने लगा.

थोड़ी देर बाद कोमल ने मुझे आवाज़ दी

कोमल-अवी

मैं ने कोमल की तरफ देखा .वो मेरी बनियान पहन कर खड़ी थी.बनिया के अंदर उसने ब्रा पैंटी पहन रखी थी.

मेरा प्लान कामयाब हुआ. अब तो कोमल जलपरी बन के तालाब मे अपनी सहेलियो से मिल सकती है.

कोमल को इस रूप मे मैं पहली बार देख रहा था.

मेरी आँखे कोमल के उपर से हट नही रही थी.

सर से लेके पैरो तक कोमल की खूबसूरती को अपने आँखे मे क़ैद करने लगा.

कोमल के चेहरे जो शरम दिख रही थी, मेरे सामने इस रूप मे आकर मुझे इस तरह घूरता हुआ देख कर कोमल अपने पैरो के साथ खेल रही थी.

मैं तो कोमल की खूबसूरती मे खो गया.

कोमल को इस तरह देख कर मैं एक पल के लिए भूल गया कि वो मेरी बहन है.

कोमल की खूबसूरती को देखने से मेरे दिल की घंटियाँ बजने लगी. जैसे मेरे दिल के मंदिर मे रहने वाली देवी के दर्शन हो गये हो .

कोमल की खूबसूरती को देखते मेरे चारो तरफ म्यूज़िक बजने लगा. कोयल मधुर आवाज़ मे गाना गा रही थी.

मेरे इस तरह देखने से कोमल शरमा गयी. और बनियान से अपने बदन को छुपाने लगी.

उसकी इसी मासूमियत पे दिल आ गया.

कोमल का नाम उसे सूट करता है. गुलाब के फूलो की तरह कोमल थी हमारी कोमल,

जब उसे लगा कि ऐसा करने से फ़ायदा नही हो रहा है तो उसने तालाब मे जंप मारी.और अपने खूबसूरत बदन को झरने के निर्मल पानी से छुपा लिया

पानी मे गिरने की आवाज़ से,कोमल के तालाब मे जंप मारने से मेरे उपर पानी के बूदे गिर गयी जिस से मैं होश मे आ गया.

होश मे आते मैं कोमल को ढूँढने लगा.

कोमल पानी के अंदर छुपी हुई थी.

कोमल को अपने आँखो के सामने ना देख कर मुझे एक अजीब सा डर लगने लगा.

ऐसा डर कि मेरे शरीर से मेरी आत्मा दूर हो गयी हो.

मैं कोमल को इधर उधर ढूँढने लगा, कोमल की सहेलियो से पूछने लगा पर कोमल की सहेलियो भी गायब हो गयी.

अब तो तालाब की मछलिया मेरे साथ खेल रही थी. फिर अचानक कहाँ चली गयी.

तालाब मे कोमल नाम की खूबसूरत जलपरी आई थी उसके पास गयी थी तालाब की मछलिया.

पर मैं उस जलपरी को देख नही पा रहा था.

मेरा दिल घबरा रहा था. अपनी धड़कने तेज करके कोमल को पुकार रहा था.

अवी-कोमल कहाँ हो. बाहर आ जाओ ,

कोमल झरने के पास वाले पत्थर पे जाके बैठी थी. और मुझे देख कर हंस रही थी.

कोमल-मैं इधर उधर. पानी मे कहाँ ढूँढ रहे हो

मैं ने कोमल की तरफ देखा वो आराम से बैठ कर मुझे देख रही थी.

अवी-तुम वहाँ हंस रही हो और यहाँ मेरी जान जा रही थी.

कोमल-तुम तो इतने जल्दी डर गये. मैं जलपरी हूँ तालाब मेरा घर है मुझे क्या हो सकता है.

अवी-जलपरी की बच्ची. रूको तुम्हे अभी दिखाता हूँ.

और मैं तैरते हुए कोमल के पास जाने लगा.

कोमल ने फिर से तालाब मे जंप मारी

और मछलि की तरह स्विम करते हुए मुझसे दूर भागने लगी.

कोमल अपने लचीले बदन के मदद से इतनी अच्छी टायर रही थी कि वो सच मे जलपरी लग रही थी.

कोमल इस तरह स्विम कर सकती है ये मुझे पता नही था.

कोमल जलपरी जैसी स्विम कर रही थी. कोमल के साथ तालाब मे स्विम करने मे मज़ा आ रहा था.

स्विम करते हुए हम एक दूसरे के साथ पकड़ा पकड़ी खेल रहे थे

तालाब तो कोमल का घर था वो मेरे हाथ मे नही आ रही थी.

कोमल की सहेलिया मुझे कोमल से मिलने से रोक रही थी.

सूरज की किरणें जब कोमल के चेहरे पड़ती तो वो गोल्ड की तरह चमकने लगती.

आज तो तालाब मे कोमल नाम का कीमती मोती आ गया था. उस मोती को पाने की मैं कोशिश कर रहा था.

कोमल ने मुझे हरा दिया. कितने भी तरीके ईस्तमाल किए पर वो मेरे हाथ मे नही आ रही थी.

हम ऐसे कभी पानी के अंदर डुबकी मारकर मस्ती करने लगे तो कभी मछलिया को पकड़ने की कोशिश करने लगे.

कोमल तालाब मे आकर फिर से खुद को भूल गयी कि वो कौन है.

उसने तो हमेशा के लिए यही रहने का इरादा बना लिया था.

तालाब मे ना आती तो वो क्या मिस करती ये वो जान गयी थी.

थोड़ी देर हम तालाब मे स्विम करते रहे

फिर स्विम करते हुए हम झरने के नीचे जाकर नहाने लगे. झरने का गिरता हुआ पानी हमारे बदन पर गिर रहा था.

झरने के पानी मे नहाने से हम पवित्र हो रहे थे.

इतना मज़ा आ रहा था कोमल के साथ झरने मे मस्ती करने मे की बता नही सकता.

झरने का गिरता हुआ पानी कोमल के बदन को छु कर अमृत बन रहा था.

मैं तो उस अमृत को पी कर अमर हो जाना चाहता था.

कोमल झरने की एक तरफ थी और मैं दूसरी तरफ था.

कोमल को इस हालत मे और झरने के गिरते हुए पानी मे नहाते हुए देख कर मैं उसकी तरफ अट्रॅक्ट होने लगा.

उसके खूबसूरत मे फिर से खोने लगा.

मैं एक खूबसूरत लड़की को एक लड़के के नज़रिए से देखने लगा.

मेरे अंदर के लड़के को प्यार हो गया इस खूबसूरत लड़की से.

मेरे अंदर का लड़का बाहर आकर इस खूबसूरती लड़की को प्यार करने को बेताब हो रहा था.

मैं तो भूल गया कि मैं अवी हूँ और वो मेरी बहन कोमल है. बस मुझे याद था कि मैं एक लड़का हूँ और वो एक लड़की है. और हमे प्यार करना है

मैं तो हमारे रिश्ते को भूलता जा रहा था.

भगवान ने मेरे साथ ऐसा क्यूँ किया, क्यू कोमल को मेरी बहन बनाया.

कोमल मेरी बहन ना होती तो वो मेरी लाइफ पार्टनर होती. मेरे ज़िंदगी के सफ़र का साथी होती.

भगवान चाहता क्या है ,एक तो कोमल को मेरी बहन बनाया और दूसरी तरफ मेरे अंदर कोमल के लिए जीवनसाथी वाली प्यार की फीलिंग पैदा कर रहा है.

क्या भगवान मेरे परीक्षा ले रहा है ,या भगवान ने मेरी किस्मत मे कुछ ऐसा लिखा है जो मैं देख नही पा रहा हूँ.

क्या लिखा है भगवान ने मेरी किस्मत मे ,क्यू मैं कोमल की तरफ खिचा जा रहा हूँ.क्यू कोमल को प्यार करने का दिल कर रहा है.

मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा ,मेरी किस्मत मेरे साथ ऐसा खेल क्यू खेलती है जिस मे मैं हमेशा हार जाता हूँ.

मैं अपना दिल हार रहा हूँ.

कोमल मुझे एक खूबसूरत देवी की तरह दिख रही थी,जिसकी मुझे पूजा करनी है.

मैं इस जलपरी की पूजा करने के लिए उसके पास जाने लगा.

मेरे इस तरह उसके पास जाने से कोमल मुझे देखती रह गयी.

उसके दिल मे मेरे लिए क्या था ये मुझे नही पता पर उसके लिए मेरे दिल मे नयी फीलिंग पैदा हो रही थी.

मेरे दिल मे तो घंटियाँ बज रही थी. झरना कोमल का अभिषेक कर रहा था ताकि मैं उसे प्यार करू

कोमल की धड़कने तेज चल रही थी.ये उसके चेस्ट को देख कर पता चल रहा था.

मैं कोमल के पास चला गया .हमारे बीच मे कुछ फीट का फासला था.

कोमल इस बार मुझसे दूर नही गयी. वो वही खड़ी रही जैसे उसे किसी सख्ती ने पकड़ रखा हो.

मैं कोमल की खूबसूरती मे खोता जा रहा था

मैं कोमल के पास जाकर उसके हाथो को पकड़ किया

और मैं कोमल के बदन पे अपना हाथ घुमाने लगा जिस से कोमल ने अपनी आँखे बंद की.

कोमल के आँखे बंद करने से मैं ने उसकी बनियान निकालना शुरू किया.

कोमल ने मुझे रोका नही. और मैं भी रुका नही.

ऐसा लग रहा था कि ये हम नही एक शक्ति हमसे करवा रही हो.

एक नया रिश्ता जुड़ने जा रहा था जिसकी हमे कल्पना नही थी.

एक नया अध्याय लिखने जा रहा था मैं ,क्या मुझे रुकना चाहिए पर मैं खुद को रोक नही पा रहा था.

झरने की तरह अपनी फीलिंग को बहने दे रहा था.

एक स्ट्रॉंग फीलिंग हमारे अंदर पैदा हो रही थी.

ये इस जगह की शक्ति थी या कुछ और हमे नही पता ,हम तो एक दूसरे के आँखे मे खोते जा रहे थे

कोमल ने अपनी आँखे बंद कर ली थी फिर भी उसे मैं दिखाई दे रहा था. और मुझे कोमल नही मेरे दिल के मंदिर की देवी दिखाई दे रही थी.

मैं ने धीरे धीरे कोमल की बनियान निकल दी.

कोमल ने मेरा पूरा साथ दिया.

कोमल मेरे सामने ब्रा और पैंटी मे थी. उसका गीला बदन उसकी खूबसूरत को चार चाँद लगा रहा था.

कोमल की जितनी तारीफ करू उतनी कम थी. सर से लेके पैरो तक कोमल का बदन बड़ी फ़ुर्सत से बनाया गया था.

कोमल को आज मैं सब रिश्ते भूला कर सिर्फ़ एक रिश्ता बनाने के नज़रिए से देख रहा था .

वो लड़की और मैं लड़का.ये था वो रिश्ता, प्यार का रिश्ता ,

कोमल तो प्यार के मंदिर की देवी की मूर्ति की तरह मेरे सामने खड़ी थी. और मैं उस मंदिर का पुजारी बनके उसकी पूजा करने को तैयार था.

मैं ने कोमल का हाथ पकड़ कर अपने कंधे पे रखे और अपने हाथ से उसकी कमर पकड़ ली.

और झरने के मधुर म्यूज़िक मे मैं कोमल के साथ डॅन्स करने लगा.

कोमल धीरे धीरे मेरे साथ अपनी कमर हिलाने लगी.

कोमल के साथ इस तरह नंगे बदन पानी मे डॅन्स करके हम एंजाय करने लगे.

हम एक दूसरे मे इतना खो गये कि गले लग कर कब डॅन्स करने लगे पता नही चला.

कोमल के गीले बदन से चिपक कर डॅन्स करने मे मुझे अलग आनंद मिल रहा था.

उसकी खूबसूरती के सिवा मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था.

मेरे चारो तरफ म्यूज़िक बाज रहा था.

झरने के पानी के गिरने का म्यूज़िक, पेड़ो के हिलने से निकल रहा म्यूज़िक, पन्छियो का मधुर गाना, मछलियो का तालाब मे डॅन्स करना. इन सब से हमे प्यार करने की शक्ति मिल रही थी.

हम एक नये रिश्ते को, एक शक्ति को जनम देने जा रहे थे

हमारे दिल की धड़कने एक हो रही थी.

हमारे प्यार का ये जंगल बन रहा था.

मैं कोमल के साथ डॅन्स करते हुए उसके भीगे होंठो को देखने लगा.

उसके भीगे होंठो को प्यार करने का दिल कर रहा था.

कोमल के होंठो पे जो पानी के बूंदे गिर के अमृत हो गयी थी उसको पीना चाहता था.

मैं उसके होंठो को अपने होंठो से मिलाने जा रहा था.

तालाब की जलपरी को प्यार करने वाला था.

इस झरने की रानी को उसका राजा प्यार करने वाला था.

रानी

रानी

प्यार

रानी से मैं प्यार करता हूँ

रानी

रानी का नाम आते मैं रुक गया. कोमल के होंठो मे और मेरे होंठो मे कुछ इंच का फ़ैसला था.

मेरे इस तरह रुकते ही कोमल ने अपनी आँखे खोल दी.

सब अच्छा चल रहा था पर रानी का ख़याल मेरे दिल मे आते मैं रुक गया .और कोमल भी होश मे आ गयी.

कोमल ने मुझे उसके इतने करीब देख कर कुछ नही कहा.

पर कोमल ने मुझे धक्का दिया .और अंगूठा दिखा कर तालाब मे जंप मार कर फिर पानी मे चली गयी.

और मुझे अंगूठा दिखा कर हँस रही थी.

मैं तो वैसे खड़ा रह कर कोमल को देखता रह गया.

मुझे तो लगा कि कोमल मेरी इस हरकत से गुस्सा होगी.

पर वो तो नॉर्मल दिख रही है. शायद उसे लगा होगा कि उसकी ग़लती होगी. इस लिए वो नॉर्मल बिहेव कर रही है.ताकि मैं गिल्टी फील ना करू.

मुझे रानी ने बचा लिया .वरना मैं क्या करने वाला था.

भगवान मुझसे क्या करवाने वाला था.

अच्छा है की कोमल नॉर्मल बिहेव कर रही है.

मैं कोमल के दिन को अपने वजह से खराब नही होने दूँगा

मैं ने भी तालाब मे जंप मारी और उसको बनियान दिखाने लगा जो मेरे हाथ मे थी.

कोमल मेरे हाथ मे बनियान देख कर अपने हाथो से अपने बदन को छुपाने लगी

कोमल-तुम ने कब. तुम बहुत गंदे हो

अवी-तुम ऐसी अच्छी लग रही हो

कोमल-जाओ मैं तुमसे बात नही करती.

अवी-लो मैं अपनी आँखे बंद कर रहा हूँ

मैं आँखे बंद करके खड़ा हो गया .और कोमल मेरे पास आ गयी.

कोमल ने मेरे हाथ से बनियान ले ली.और मे गले लग गयी.

कोमल-आइ लव यू

इतना बोल कर कोमल ने मुझे धक्का दे कर पानी मे गिरा दिया और खुद पानी मे गायब हो गयी.

मैं कुछ समझ पाता या सोच पाता उस से पहले कोमल पानी मे गायब हो गयी.

मैं कोमल की बात पे ध्यान दे पाता ,उस पे सोचता उस से पहले कोमल फिर गायब हो गयी.

और मैं कोमल को ढूँढने लगा.

कोमल फिर से मेरे साथ शरारत करने लगी.

और मैं पागलो की तरह उसे ढूँढने लगा.

फिर से वही डर मुझपे हांवि हो रहा था.

ये डर मेरे सोचने समझ की शक्ति ख़तम कर रहा था.

कोमल की बात से ज़्यादा मुझे कोमल को अपने आँखे के सामने ना देख कर डर लग रहा था.

मेरी जान लेकर रहेगी कोमल.

मैं उसे यहंपागलो की तरह ढूँढ रहा था और वो झरने के पास पत्थर पे बैठ कर हंस रही थी.

उसे हँसता हुआ देख कर उस पे गुस्सा आ रहा था पर उसकी हसी पे प्यार आ रहा था.

मैं फिर से उसे पकड़ने के लिए उसके पास जाने लगा.

वो मेरे हाथ कैसे आएगी वो तो जलपरी है .

कोमल तालाब मे स्विम करते हुए मुझसे दूर जा रही थी.

कोमल ने बनियान नही पहनी .बनियान को पत्थर पे रख कर मे वो तालाब मे स्विम कर रही थी.

वो जलपरी बन गयी.

कोमल और मैं काफ़ी देर तक तालाब मे जलक्रीड़ा करते रहे.

 
777 आ

मैं और कोमल जलक्रीड़ा का पूरा मज़ा ले रहे थे.

कोमल को अब फरक नही पड़ रहा था कि उसने क्या पहना है

कोमल तो मस्ती करने मे खोई हुई थी.

उसका हसना ,उसकी खुशी, देखने लायक थी.

कोमल क्यू खुद का ये रूप छुपा कर रखा था .

कोमल का तालाब से बाहर निकलने का मन नही हो रहा था .

उसे जैसा खुशियो का महल चाहिए था वैसा महल उसे मिल गया था.

वो जलपरी बन के खुश थी पर उसे तो आज अपनी सारी इच्छाए पूरी करनी थी.

नयी मस्ती नया मज़ा नयी खुशी की तलाश मे कोमल तालाब से बाहर जाने लगी.

मैं कोमल को तालाब से बाहर जाते हुए देख रहा था .कोमल की वो लचकती हुई चाल देख कर मैं कोमल का दीवाना हो गया.

कोमल तो कॅट्वाक करते हुए जा रही थी.

पता नही कोमल ने कितनी खूबिया अपने अंदर छुपा के रखी है.

उसने बनियान नही पहनी थी.

कोमल के खूबसूरत बदन से गिरते हुए पानी की बूंदे उसकी खूबसूरत को चार चाँद लगा रही थी.

कोमल के गीले बाल उसकी कमर तक लंबे थे जो कोमल की खूबसूरती को छुपा रहे थे या खूबसूरती बढ़ा रहे थे.

मैं तो उसे ऐसे देखते रहना चाहता था. कोमल बीच बीच मे पलट कर मेरी तरफ देख कर स्माइल कर रही थी

मुझे घूरता हुआ देख कर कोमल ने आँखे बंद करने को कहा .

मैं ने हल्के से आँखे बंद की .और कोमल अपने कपड़े उठा कर झाड़ियों मे चली गयी.

मैं कोमल के इस अदा पे लट्तू हो गया.

और तालाब मे स्विम करने लगा.

अपने टेन्षन ,ज़िम्मेदारी को भूल कर एक दिन के लिए मैं भी खुद को आराम देने लगा.

कोमल ने दुपट्टे से अपने बदन को पोछ दिया .और सूखे पकड़ पहन कर गीले कपड़े सुखाने के लिए धूप मे डाल दिए

और मुझे स्विम करते हुए देखने लगी.

कोमल के साथ इतना फ्रॅंक होने का मेरा 1स्ट टाइम था.

मुझे लगा था कि कोमल मुझ पे गुस्सा करेगी.या फिर नाराज़ होगी. पर उसने ऐसा कुछ नही किया .बल्कि मेरे साथ तालाब मे एंजाय करने लगी.

अपने कल को भूल कर आज को जीना सीख गयी कोमल.

किताब के बाहर की दुनिया कितनी खूबसूरत है वो कोमल जान गयी थी.

कोमल मुझे स्विम करते हुए देख रही थी.

थोड़ी देर स्विम करने के बाद मैं तालाब से बाहर आ गया.

मेरी बॉडी देख कर कोमल इशारे कर रही थी कि मुझे 10/10 मिल गये है.

मैं अपने शरीर को छुपाने का नाटक करते हुए कोमल के पास चला गया. कोमल मेरी हरकत पे हँसने लगी.

मैं कोमल के पास जाकर बैठ गया.

मेरे आते ही कोमल ने अपने दुपट्टे से मेरा सर पोछना शुरू किया.

हर कोई यही तो चाहता है कि उसका कोई अपना उसे इस तरह प्यार करे

कोमल के इस तरह मेरे बाल और शरीर को पौन्छने से लगा कि हम मिया बीवी हो.

"कोमल मेले के बाद कितनी बदल गयी."

हम फ्रेंड से बेस्ट फ्रेंड बन गये.एक दूसरे को कितना समझने लगे है

कोमल बड़े प्यार से मेरे सर को पोछ रही थी.

मैं अभी तक सिर्फ़ अंडरवेर मे था फिर भी कोमल मेरे पास थी. कोमल शर्मा ने की जगह मेरा शरीर पर अपना हाथ घुमाने लगी.

कोमल तो अपनी खूबसूरती ,अपने नये अंदाज़ से मेरी जान ले लेगी.

कोमल मेरे करीब आती जा रही थी. मैं उसको एंजाय करना सिखा रहा था पर उसके दिल मे क्या चल रहा है ये मुझे पता नही था.

जो भी हो कोमल का नया रूप मुझे अच्छा लगा. कोमल अब लड़की लग रही थी.वरना किताब पढ़ने वाली रोबेट बन चुकी थी.

कोमल इतनी संदर है ये मुझे आज पता चला था. कोमल का बदन उसके नाम की तरह कोमल(नाज़ुक) था.

कोमल की खूबसूरती को ये नॅचुरल बॅकग्राउंड चार चाँद लगा रहा था.

कोमल-ऐसा क्या देख रहे हो, कभी देखा नही मुझे जो घूर घूर के देख रहे हो.

अवी-आज मैं नयी कोमल को देख रहा हूँ. नयी कोमल की खूबसूरती को देख रहा हूँ. कोमल तुम ऐसी रहना ,तुम्हे ऐसा हँसता हुआ देख कर मुझे अच्छा लगता है.

इस बार मेरी बात सुनकर शरमा गयी.

अवी-तुम शरमाना भी सीख गयी. मुझे तो लगा था कि मेरी कोमल बिंदास है. कैसे मेरे साथ तालाब....

कोमल ने मेरे मूह पर हाथ रख दिया.मेरी बात पूरी नही होने दी.

कोमल-कुछ मत कहना,

अवी-क्यू ,तुम्हे बुरा लगा मेरा इस तरह तालाब मे करना.

कोमल-बुरा लगता तो ,सर पोछने की जगह फोड़ देती.

अवी-मतलब मेरा सर फूटने से बच गया.

कोमल-अवी ये बात माँ को मत बताना ,वो गुस्सा करेगी.

अवी-तुम पे कोई गुस्सा करे ऐसा मैं कोई काम नही करूँगा.

कोमल-वैसे तुम ने बॉडी अच्छी बनाई है. मैं ने कभी इस बात पर ध्यान नही दिया था. इस रूप मे हॅंडसम दिख रहे हो.

अवी-तुम्हारी रक्षा करने के लिए बनाई है.

कोमल-मेरे बॉडीगार्ड ,कुछ तो शर्म करो ,पूरा दिन का नगा पुगा रहने का इरादा है.

अवी-अभी तो बॉडी की तारीफ कर रही थी .इतनी जल्दी ...तुम बैठो मैं कपड़े पहन कर आता हूँ

कोमल-तुम ऐसे अच्छे लग रहे हो पर ऐसे बैठ रहोगे तो ठंड लग जाएगी.मैं तो तुम्हारे अच्छे के लिए कह रही थी.

अवी-मैं मज़ाक कर रहा था. तुम्हारी बात सही है. कपड़े सुखाने भी तो चाहिए

फिर मैं ने झाड़ियों मे जाकर कपड़े पहन लिए .और अंडरवेर सूखने के लिए डाल दी.

मेरे आते ही कोमल मेरे हाथ पर सर रख लेट गयी.

कोमल-अवी ,यहाँ कितनी शांति है, ऐसा लग रहा है कि हमेशा के लिए हम यही पर रुक जाए ,

अवी-ऐसा सोचना भी मत ,नेहा बुआ मेरी जान ले लेगी.

कोमल-माँ इतनी भी बुरी नही जितना तुम सोचते हो.

अवी-बुआ तो मुझ पे हमेशा गुस्सा करती रहती है

कोमल-प्यार भी उतना करती है.माँ तुम्हे बुरा कहती है पर उस से तुम्हे पता चलता है कि तुम ग़लती कहाँ करोगे.

अवी-ये कैसा प्यार है

कोमल-मैं भी माँ को समझ नही पा रही हूँ. तुम ने यहाँ आने से पहले उनके पैर छुए थे ,देखा नही उनका हाथ अपने आप तुम्हारे सर पे चला गया. और अंदर जाकर जब मैं ने देखा तो माँ की आँखे मे पानी था .

अवी-सच कह रही हो

कोमल-हाँ, उनके अलमारी मे तुम्हारे पिछले बर्तडे को लिया हुआ गिफ्ट पड़ा है.माँ ने तुम को दिया नही पर तुम्हारे लिए खरीदा था.

अवी-मुझे बात करनी चाहिए नेहा बुआ से

कोमल-क्या बात करोगे, माँ को समझना मुश्किल है. तुम उन से कुछ मत कहना वरना मुझ पे गुस्सा करेगी.

अवी-नेहा बुआ मुझे प्यार करती है पर मैं ने तो सिर्फ़ उनकी नफ़रत देखी है

कोमल-मुझे लगता है माँ तुम्हारे लिए कन्फ्यूज़ है, कि तुम्हे प्यार करे या नफ़रत करे. वो डिसाइड नही कर पाती है जिस से तुम को ऐसा लगता है.

अवी-इस बात को यही ख़तम करते है. और इस हरियाली मे मज़ा लेते है

कोमल-मैं तो यहाँ आकर बहुत खुश हूँ. कुछ देर ऐसे लेटे रहते है. और इस खुंबसुरती को आँखे मे क़ैद कर लेते है.

कोमल के साथ तालाब किनारे आराम करते हुए कभी पेड़ो की कभी पन्छियो की बातें करने लगे.

तालाब की रगबिरंगी मछलियो को देखते हुए झरने के गिरते हुए पानी मे निर्मलता का आनंद लेने लगा.

कोमल मुझे पन्छियो और पेड़ो के बारे मे बताने लगी.

कोमल का नेचर के बारे मे इतना नॉलेज देख कर दिल खुश हो गया.

कोमल जैसी बहन मुझे मिली है, कोमल जैसी बेस्ट फ्रेंड मिली है, मैं कोमल का साथ पा कर खुश था.

कोमल इस नेचर मे खोती जा रही थी. मेरा हाथ पकड़ कर दुनिया घूम रही थी.

कोमल इतनी प्यारी बातें कर सकती है ,वो भी इतनी सारी ,कोमल तो पूरी ज़िंदगी को एक दिन मे जीने की बातें कर रही थी.

कोमल अचानक उठ कर मेले की बातें शुरू कर देती तो अचानक कॉलेज मे बिताए हुए हसीन पलों की यादे ताज़ा कर देती.

कोमल मेरी बिना बिताए हुआ कॉलेज का 1 महीना बता रहा थी(चाची की डेलिवरी का 1 महीना). ये बताए हुए उसकी आँखो मे अकेलेपन का दर्द दिख रहा था.

तो कभी कोमल कॉलेज की मस्ती, रानी के साथ घूमना, मेरे साथ बाइक पर कॉलेज जाना ,हर किस्से को मुझे बता रही थी.

कैसे उसने अपना अकेलापन दूर करने के लिए किताबो का सहारा लिया.

खुद को अपने कमरे मे बंद करके अपनी बोरिंग लाइफ को जिया.

ना बाहर जाना ,ना कहीं घूमने जाना. बस पढ़ाई करते रहना यही उसकी दुनिया थी.

आज मेरे साथ खूबसूरत दुनिया देख कर उसे कितनी खुशी मिली होगी ये मैं उसके आँखे मे देख रहा था.

कोमल ने पूरी ज़िंदगी मे जितनी बातें नही की होगी उस से ज़्यादा आज बातें कर रहे थे.

कोमल की बातें सुनकर मैं भावुक हो रहा था. कोमल के अकेलेपन उसके फीके दिनो के बारे मे सुनकर मेरी आँखे मे पानी आ रहा था.

मैं इतना बहक हो गया कि कोमल को गले लगा लिया.

मेरे इस तरह अचानक गले लगाने से कोमल ने बातें करना बंद किया

अवी-कोमल मुझे पता नही था कि तुम इतनी अकेली थी. एक बार तो मुझे बता देती

कोमल-मैं इस अकेलेपन के साथ जीना सीख गयी थी.

अवी-ऐसा करके तुम खुद को दर्द दे रही थी.

कोमल-तुम भी तो खुद को दर्द दे रहे थे. 3 साल तुम अपने माता पिता को याद करके खुद को दर्द दे रहे थे.

अवी-वो मैं...

कोमल-जाने दो ,वो दर्द भर दिन चले गये. हम साथ मिल गये तो अकेलापन दूर चला गया.

अवी-वो तो है. पर तुम ने अपने अकेलेपन को दूर करने की कोशिश क्यू नही की. कोई फ्रेंड बना लेती

कोमल-मैं बेस्ट फ्रेंड की तलाश मे थी. जो मुझे तुम्हारे रूप मे मिल गया.

अवी-मैं तुम्हारा 1स्ट फ्रेंड हूँ

कोमल-मेरे पापा और तुम

,दोनो मेरे लिए खास हो.एक भी दूर गया तो मुझे अच्छा नही लगता. और अब तो पापा हमेशा के लिए यहाँ आ रहे है.और तुम भी हो.

अवी-मैं प्रॉमिस करता हूँ कि मैं तुम्हे कभी अकेला नही छोड़ूँगा.चाहे कुछ भी हो

कोमल-काश पापा भी ऐसा प्रॉमिस करे,

अवी-वो अगले साल आ रहे हैं ना

कोमल-हाँ, पर यहाँ आने के नाम सुनकर उनके चेहरे पे कुछ अजीब सी कसमस देखी थी. पापा कोई टेन्षन मे है, मैं ने फोन पर बात करने की कोशिश की थी वो कह रहे थे कि आकर बात करेंगे.

अवी-तुम फिकर मत करो, मैं हूँ ना, हम मिलकर हल ढूंढ़ेंगे. तुम्हारा पापा आते हम मिलकर बात करेंगे.

कोमल-ये बात मैं ने मा से भी नही की पर तुम्हे बताने से रोक नही पाई. ऐसा क्यूँ हुआ ये तुम्हारी बातों से पता चला.

अवी-हम कहाँ से कहाँ चले गये

कोमल-हाँ, हम पेड़ो की बात करते हुए पापा तक चले गये.

अवी-अच्छा हुआ इसी बहाने से तुम ने दिल की बात मुझे बता कर अपना बोझ हल्का कर लिया.

कोमल-तुमसे बात करके अब अच्छा लग रहा है. ऐसा लग रहा है कि सर से बड़ा बोझ निकल गया है.

अवी-इसी लिए तो फ्रेंड होते है. बातें करके दुख और सुख शेयर करना चाहिए.

कोमल-मेरे बारे मे तो तुम्हे सब पता चल गया. अपने बारे मे भी तो बताओ, तुम्हे डायरेक्ट बड़ा देखा है अपने बचपन के बारे मे बताओ

अवी-सच कहूँ ,मेरे बचपन के बारे मे मैं भूल गया हूँ.माँ ,और पापा के डेत के बाद 3 साल गुम्सुम रहने से पिछली बातें भूल गया हूँ. थोड़ी बातें याद है पर उसे याद करता हूँ तो आँखे मे पानी आ जाता है.इस लिए उनको याद करना बंद कर दिया है.

कोमल-अच्छा किया ,जो बातें दर्द देती है उनको याद करके रोने से अच्छा है कि उनको भूल जाओ

अवी-तुमने इतनी अच्छी बातें करना कहाँ से सीखा है

कोमल-तुम पास होते हो तो अपने आप अच्छी बातें निकल जाती है.

अवी-ऐसे अच्छी अच्छी बातें करते रहना .

कोमल-तुम्हे अच्छी लगती है तो ऐसे ही बातें करती रहूंगी.

हम ऐसे इधर उधर की बातें, पुरानी बातें याद करने लगे.

जंगल की शांति मे हम खुद को टेन्षन फ्री फील कर रहे थे.

हम घास पे लेट कर जंगल की हरियाली मे खो गये.

 
777 ब

हम इस जंगल की हरियाली, झरने का सुरीला म्यूज़िक, पन्छियो का मधुर गाना. सुनने मे ऐसे खो गये कि हमे समय का पता ही नही चला.

हम ने तो आज टाइम को पीछे छोड़ दिया.

इस शांत जगह से हम अपने अंतर आत्मा को आराम दे रहे थे.

कोमल मेरी बाहों मे लेट कर नॅचुरल ब्यूटी का आनंद ले रही थी.

मैं अपने आँखे बंद करके रिलॅक्स हो रहा था कि कोमल की आवाज़ सुनकर मैं अपने सपने से बाहर आ गया.

कोमल-अवी वो देखो रॅबिट

अवी-कहाँ है,

कोमल-वो देखो पानी पी रहा है.

अवी-पीने दो उसे पानी. तंग मत करो उसे

कोमल-मुझे रॅबिट से दोस्ती करनी है.

अवी-अब क्या बनना है ,वो बता दो

कोमल-पंछी तो मैं बन गयी. जलपरी बनके नयी सहेलिया बनाई है. अब मुझे इस जंगल की रानी बनना है.

अवी-इतने बड़े जंगल की रानी बन कर क्या करोगी

कोमल-जंगल के अनिमल से दोस्ती करूँगी.

अवी-जंगल की रानी की जगह वनरानी कैसे रहेगा

कोमल-दोनो का मीनिंग एक है. मुझे वनरानी बना दो ,

अवी-वनरानी की सेवा मे ये गुलाम हाज़िर है. मेरे लिए क्या हुंकुम है.

कोमल-गुलाम मुझे वो रॅबिट चाहिए

अवी-वनरानी रॅबिट को पकड़ ने मे आपको मेरी मदद करनी होगी. आप उधर से जाइए मैं इधर से रॅबिट को पकड़ता हूँ

कोमल वनरानी बनते ही रॅबिट से दोस्ती करने के लिए , उसको पकड़ने के लिए उसके पीछे भागने लगी.

मैं रॅबिट को झाड़ियों मे जाने नही दे रहा था.

कोमल भी रॅबिट को पकड़ ने की बजाय उसे पीछे भाग कर पकड़ा पकड़ी खेलना पसंद किया.

रॅबिट तुनुक तुनुक जंप मार रहा था.

कभी इधर तो कभी उधर.

कोमल भी रॅबिट की तरह इधर उधर फुदक रही थी.

कोमल की पायल की छम छम सुनकर रॅबिट नाच रहा था ऐसा लग रहा था.

कोमल ने पन्छियो के साथ उड़ना सीखा ,मछलियो के साथ स्विम करना सीखा अब रॅबिट के साथ चलना भागना उछलना सीख रही थी.

कोमल आज सबको अपना दोस्त बनाना चाहती है.

सबको अपनी सहेली बना कर उनके साथ खेलना चाहती है.

पंछी, जलपरी और अब वनरानी बन कर कोमल खुश थी.

मैं रॅबिट को उसी जगह पर भागने दे रहा था .जिस से कोमल उसके साथ खेल सके

कोमल फिर से एक बार खुद को भूल गयी थी.

छोटी बच्ची बनकर रॅबिट के साथ खेल रही थी.

उसके पायल की छम छम के म्यूज़िक पे जंगल नाच रहा था.

कोमल का बच्पना देख कर ,उसके रॅबिट के साथ खेलते हुए देख कर मेरे आँखे मे खुशी के आसू आ गये.

कोमल ने अपने लाइफ का ज़्यादा समय अकेले मे बिताया है .पर आज कोमल अकेली नही है. उसने नये दोस्त ,नयी सहेलिया मिल गयी है.

उनके साथ खेल कर कोमल ने अपने पास्ट को पीछे छोड़ कर आज के साथ जीना सीख लिया.

रॅबिट कोमल के हाथ नही आ रहा था. इतनी आसानी से जंगल के अनिमल दोस्त नही बनते .पर एक बार दोस्त बन गये तो दोस्ती निभाना जानते है.

रॅबिट ने कोमल को थका दिया. कोमल थक कर बैठ गयी.

कोमल-गुलाम हम तो थक गये. तुम पकड़ लो रॅबिट को

मैं ने वनरानी के हुंकुम मानते हुए मैं ने रॅबिट को पकड़ लिया .और कोमल के पास ले गया.

कोमल के हाथो मे रॅबिट आते उसके चेहरे की खुशी को मैं ने मोबाइल मे क़ैद कर लिया.

रॅबिट को अपने हाथो मे पकड़ते कोमल उसे प्यार करने लगी.

कोमल जिस तरह रॅबिट के साथ खेल रही उसे मैं ने अपने मोबाइल मे क़ैद कर लिया.

मोबाइल को ऑफलाइन पे करके कोमल के हसीन पल को कमेरे मे क़ैद कर लिया.

कोमल ने थोड़ी देर रॅबिट को प्यार किया फिर उसे छोड़ दिया .इतने मेहनत से पकड़ा और कोमल ने इतनी जल्दी छोड़ दिया .

कोमल ने रॅबिट के साथ खेलने के लिए उसे छोड़ दिया. रॅबिट के भागते ही कोमल फिर से उसके पीछे भागने लगी.

कोमल को रॅबिट के साथ खेल ने मे मज़ा आ रहा था.

रॅबिट झाड़ियों मे जाने की बजाय कोमल के साथ खेल रहा था.

कोमल ने सोचा नही था कि उसे आज इतनी खुशी मिलेगी.

उसके लिए तो ये एक सपने जैसा था.

मैं ने उसके सपने को हक़ीकत मे बदल दिया

थोड़ी देर रॅबिट के साथ खेलने के बाद कोमल ने रॅबिट को झाड़ियो मे जाने दिया.

रॅबिट तो झाड़ियो मे गायब हो गया .और कोमल मेरे पास आकर हाँफने लगी.

और हान्फते हुए मेरे गले लग गयी.

अवी-वनरानी ये आप क्या कर रही है.

कोमल-गुलाम तुम ने हमे खुश कर दिया..ये हमारे थॅंक्स कहने का तरीका है.

अवी-पर वनरानी. किसी ने हमे ऐसे देख लिया तो क्या कहेगा

कोमल-हम वनरानी है.हमसे कुछ कहने की किसी मे हिम्मत नही है.

अवी-आप वनरानी है .मैं तो एक मामूली सा गुलाम हूँ. आपके जंगल की प्रजा तो मुझे गुनहगार समझेगी

कोमल-तुम गुलाम नही हो .हम तुमसे प्यार करते है

अवी-ये आप क्या बोल रही है वनरानी. आप कहाँ और मैं कहाँ. हमारा मिलन नही हो सकता

कोमल-हमारा मिलन होगा.

अवी-ये दुनिया वाले हमे एक नही होने देंगे

कोमल-मैं तुम्हारे लिए दुनिया से लड़ सकती हूँ.

अवी-दुनिया वालो से लड़ना आसान नही होता.

कोमल-मैं सब का सामना करके तुम्हे वनराजा बनाउन्गी.

अवी-मैं गुलाम से वनराजा बन जाउन्गा.

कोमल-मैं वनरानी हूँ तो तुम वनराजा होगे ना

अवी-वनरानी ये सुनने मे अच्छा लग रहा है.पर मैं एक गुलाम हूँ ये आप भूल रही है.

कोमल-तुम्हे वनराजा बनना है कि नही.

अवी-आपका हुंकुम मैं कैसे टाल सकता हूँ. ये देखिए मैं क्या लाया हूँ.

मैं ने अपना हाथ आगे किया. कोमल ने मुट्ठी ओपन की.

मेरे हाथो मे एक रिंग थी.

जब कोमल फिर से रॅबिट के साथ खेल रही थी तो मैं ने पेड़ के पत्तो (लीव्स) से एक रिंग बना ली थी,

पेड़ो के पत्तो की रिंग देख कर कोमल खुश हो गयी.

कोमल-ये रिंग हमारे लिए है

अवी-वनराजा की तरफ से वनरानी को एक छोटी सी भेट

कोमल-वनरानी खुश हुई.

अवी-वनरानी आपका ताज कहाँ गया.

कोमल-वो तो

मैं ने जंगल के फूलो की मदद से एक संदर सा ताज बनाया .

कोमल के वनरानी बनते ताज का आइडिया मेरे दिमाग़ मे आया.

मैं ने अपने दूसरे हाथ मे रखा हुआ वनरानी का ताज कोमल के सामने लाया

मेरे हाथो मे ताज देख कर कोमल खुश हो गयी.

अवी-वनरानी का ताज तैयार है.

कोमल-वनराजा अपने हाथो से पहनाएँगे तो वनरानी खुश होगी.

मैं ने कोमल को वनरानी का ताज पहना दिया.

ताज पहनते कोमल खुश हो गयी. अब वो सच मे वनरानी बन गयी.

कोमल-वनराजा ये कौन्से फूल है

अवी- ये वन्फूल है

कोमल-वनराजा को हमने तो कुछ नही दिया.

अवी-वनरानी ने हमे गुलाम से वनराजा बनाया ये हमारे लिए सब कुछ है.

कोमल-हमे भी आपको कुछ देना चाहते है.

अवी-जैसी वनरानी की इच्छा .

कोमल ने मेरे लिए पेड़ के पत्तो से रिंग बनाई

अवी-आपने भी रिंग बनाई

कोमल-आप हमे रिंग पहना दीजिए ,हम आपको पहना देते है

अवी-ये तो अच्छा रहेगा. वनरानी और वनराजा एक हो जाएँगे

वनरानी ने अपना लेफ्ट हाथ आगे बढ़ाया .और मैं ने वनरानी को रिंग पहना दी.

वनरानी ने भी वनराजा को रिंग पहना कर अपना बना लिया.

एक दूसरे को रिंग पहनते एक हवा का झौंका आया .और पेड़ से फूल हमारे उपर गिरने लगे.

ये तो ऐसे हुआ जैसे हमारी शादी हुई हो और भगवान ने फूलो को हम पे गिरा कर हमे आशीर्वाद दिया हो.

वनराजा और वनरानी की शादी मे पंछी. तालाब की मछलिया , और जंगल की प्रजा मोजूद थी.

कोयल ने तो सुरीली आवाज़ मे गाना शुरू किया.

.

बेखुदी में सनम, उठ गये जो कदम

आ गये, आ गये, आ गये पास हम

आग ये कैसी मन में लगी है, मन से बढ़ी तो तन में लगी है

आग नहीं ये दिल की लगी है, जितनी बुझाई, उतनी जली है

दिल की लगी ना हो तो क्या जिंदगी है

साथ हम जो चले, मिट गये फ़ासले

खोई नज़र थी, सोये नज़ारे, देखा तुम्हे तो जागे ये सारे

दिल ने किये जो दिल को इशारे, मिलके चले हम साथ तुम्हारे

आज खुशी से मेरा दिल ये पुकारे

तेरा दामन मिला, प्यार मेरा खिला

दिल की कहानी पहुची ज़ुबां तक,

किसको खबर अब पहुचे कहाँ तक

,प्यार के राही आये यहाँ तक,

जायेंगे दिल की हद है जहाँ तक

तुम साथ दो तो चले हम आसमां तक

दिल में अरमां लिये, लाख तूफां लिये

पेड़ हवा के झोंको से लहराते हुए नाच रहे थे.

ऐसा लग रहा था कि सच मे मेरी और कोमल की शादी हुई है.

नेचर को साक्षी मान कर हमारी शादी हुई है ऐसा लग रहा था.

कोमल तो इन सब से काफ़ी खुश दिख रही थी.

कोमल की खुशी से मुझे ऐसा फील हो रहा था जैसे उसे जो चाहिए था वो मिल गया हो.

कोमल बार बार अपने उंगली मे पहनी हुई पत्तो की रिंग को देख रही थी.

उसे तो यकीन नही हो रहा था कि हम एक हो गये.

वो तो कोयल के गाने से खुश होकर नाचने लगी.

कोमल अपना होश खो कर नाच रही थी.

कोमल को इस तरह खुश देख कर मैं भी खुश था

कोमल वनरानी बन कर खुश थी.

मुझे गुलाम और वनराजा बनने का नाटक करके अच्छा लगा.

मेरे इस नाटक से कोमल कितनी खुश है.

मैं ने उसे वनरानी जैसा फील करने के लिए इस तरह का कॅरक्टर प्ले किया.

ऐसे कॅरक्टर प्ले करना मैं और छोटी चाची हमेशा करते है.

बातो बातो मे मैं चाची, कभी पति पत्नी बन जाते है तो कभी माँ बेटा तो कभी गर्लफ्रेंड बाय्फ्रेंड बन जाते है.

ऐसे ही आज वनराजा बन गया.

इस तरह का रोल प्ले करना मुझे अच्छा लगता है.

देखो कोमल कितनी खुश है.वनरानी बन कर

बचपन मे पति पत्नी वाला खेल खेलते है वैसे आज वनराजा वनरानी का खेल खेला है.

मैं तो घास पे लेट कर वनरानी का डॅन्स देखने लगा.

कोमल उस ताज से खूबसूरत दिख रही थी. और ताज के वजह से वनरानी दिख रही थी.

वनरानी डॅन्स करके थक कर मेरे साथ घास पे लेट गयी.

और अपने वनराजा के साथ अपने जंगल की खूबसूरती मे खो गयी.

( नोट-कोई खेल को सिर्फ़ खेल के नज़रिए से देखता है .तो कोई खेल खेल मे अपने दिल की बात बता देता है.

खेल खेल मे पति पत्नी बनने को एक बच्पना समझ कर भूल जाते है.तो कोई उसे सच मान लेता है.और नये सपने सज़ा लेता है.

किसी को खुश करने के लिए नाटक किया जाता है. तो कोई उस नाटक को रियल लाइफ से जोड़ लेता है.और उस लाइफ को जीने लगता है.

कुछ रिश्ते हम बनाते है और कुछ रिश्ते भगवान बनाता है.

 
777 सी

कोमल ने पहले पंछी बन कर आसमान मे उड़ने का आनंद लिया.

फिर जलपरी बन कर तालाब की मछलियो को अपनी सहेली बना लिया.

अब वनरानी बन कर जंगल के अनिमल से दोस्ती की.

अभी तक कोमल खुश थी ,उसने जैसा सोचा था उस से ज़्यादा उसे मिल गया.

नये दोस्त नयी सहेलियो के साथ कोमल को लाइफ जीने का नया तरीका पता चला.

कोमल तो आज थकने का नाम नही ले रही थी.

उसे आज लाइफ कितनी संदर होती है ये पता चला.

मैं ने दिया हुआ ताज पहन कर वनरानी बन कर झरने को ,पेड़ो को ,पंछी को ,मछलियो को, और जंगल को कुछ बता रही थी.अपने उंगली की रिंग सब को दिखा रही थी.

कोमल ने कोयल के गाने मे डॅन्स करके पूरे जंगल को अपना दीवाना बना दिया.

जब कोमल के पैर रुके तो उसको गिरने से बचाने के लिए मैं ने अपना हाथ आगे किया.

कोमल मेरी बाहों मे आकर हाँफने लगी.

मैं ने कोमल को पानी दिया . और उसको अपने पास बैठा दिया

कोमल-अवी आज मैं बहुत खुश हूँ.

अवी-तुम खुश तो मैं खुश

कोमल-ये दिन मेरे ज़िंदगी का यादगार दिन होगा.

अवी-सच,

कोमल-हाँ, ये दिन मैं कभी नही भूलूगी.

अवी-भूल गयी तो याद करने के लिए मेरे पास एक चीज़ है.

कोमल-क्या?

अवी-ये देखो वीडियो, वनरानी का वीडियो बनाया है

और मैं ने कोमल को उसका वीडियो दिखाया.

वीडियो देख कर कोमल खुश हो गयी.

वीडियो मे वो रॅबिट के साथ खेल रही थी. उसके बाद रिंग पहनाना ,ताज ,पूरा वीडियो था.

कोमल ने वो वीडियो अपने मोबाइल मे कॉपी किया .और मोबाइल वैसे ऑफलाइन करके वापस स्विच ऑफ कर दिया.

मैं ने उस वीडियो को कट कर 2 वीडियो मे डिवाइड किया. एक वीडियो रॅबिट के साथ खेलते हुए कट किया. और दूसरा वीडियो वनरानी और वनराजा के मिलन का था.

कोमल-कविता को भेजते है ये वीडियो

अवी-नही, अभी हमे बहुत कुछ करना .अभी तो दोपेहर हुई है.हम रात तक इस दिन को एंजाय करेंगे.

कोमल-मैं तो बाकी का दिन यहीं बिताने वाली हूँ.

अवी-यहाँ की मस्ती हो गयी. अब कहीं और चलते है, क्या पता इस से भी अच्छी जगह मिल जाए

कोमल-ठीक है. पर मुझे भूख लगी है.

अवी-परान्ठे है ,

कोमल-जल्दी लेकर आओ तब तक मैं यहाँ जगह बनाती हूँ.

मैं बाइक के पास चला गया.और परान्ठे लेकर आ गया.

कोमल ने पेड़ के नीचे जगह बना दी. और झरने का पानी पीने के लिए लेकर आई.

कोमल और मैं परान्ठे खा कर नयी मस्ती करने के लिए एनर्जी जमा करने लगे.

हम तो खाना खा रहे थे पर कोमल के दोस्त भूखे थे.

कोमल को अपने नये दोस्तो की याद आते ही ,एक परान्ठे के टुकड़े करके पंछी और मछलियो को खिलाने लगी.

पंछी और मछलिया इस खाने के लिए कोमल का शुक्रिया अदा कर रहे थे.

पंचियो ने खाने के लिए रॅबिट को भूला लिया.

रॅबिट के लिए परान्ठे के साथ जो सलाद दिया था वो कोमल ने रॅबिट को दिया.

रॅबिट तो कोमल के पास आकर खाना खा रहा था.

झरने ने अपनी बेटियो को खाना खिलाने के लिए कोमल का शुक्रिया कहा.

जंगल ने अपने बच्चो को (रॅबिट और पन्छियो) को खाना खिलाने के कोमल के उपर फूल गिरा कर शुक्रिया कहा.

कोमल ने यहाँ आकर अच्छे दोस्त बना लिए.

परान्ठे खाने तक हमारे कपड़े सुख गये थे ,हम ने कपड़े पहन लिए .

कपड़े पहनते ही कोमल समझ गयी कि उसे अपने दोस्तो से अलविदा लेने का समय आ गया.

अलविदा लेने के नाम से कोमल बहक हो गयी.

उसे तो यही रहना था .इस खुशियो के महल को अलविदा कैसे कहेगी कोमल.

यहाँ उसे कुछ पलों मे इतनी खुशिया जो मिली थी.

इस जगह ने ,उसकी नयी सहेलियो ने जीने का नया तरीका बताया था.

कोमल इतनी बहक जाएगी ये मैं ने सोचा नही था.

कोमल-अवी मुझे यहाँ से कही नही जाना है

अवी-जाना तो पड़ेगा .

कोमल-मैं यही रहना चाहती हूँ

अवी-अपनी यादो को यहाँ रहने दो .

कोमल-तुम यहाँ से जाने के बारे मे कैसे सोच सकते हो, कितनी खुशी दी इस जगह ने हमे

अवी-हम वापस आने के लिए जा रहे है

कोमल-मतलब

अवी-ये जगह हमारा सीक्रेट रहेगी. ,हम यहाँ हर साल आएँगे.और हसीन पल बिता कर अपनी दुनिया मे वापस लौट जाएँगे

कोमल-हम फिर आएँगे यहाँ पर

अवी-हाँ, जब तुम्हारा दिल करेगा तब आएँगे

कोमल-सिर्फ़ हम दोनो ,और कोई नही.

अवी-हम दोनो ,यहाँ आते रहेंगे.अब अपने दोस्तो को अलविदा कहो.

कोमल-दिल तो नही कर रहा

अवी-पर करना होगा

कोमल को यहाँ वापस लाने के प्रॉमिस पे वो यहाँ से जाने को तैयार हुई.

कोमल ने अपना मेकप ठीक किया. वो हल्का मेकप करती है. जिस से उसकी नेचर खूबसूरती बरकरार थी.

कोमल के रेडी होते हम यहाँ से जाने लगे.

कोमल ने जाने से पहले एक बार उस जगह को पलट कर देखा.और आँखे बंद करके उस जगह को इतनी खुशी देने के लिए शुक्रिया कहा.

अपने दोस्तो और सहेलियो को फिर मिलने का वादा किया .

झरने को जंगल को इस दिन को स्पेशल बनाने को थॅंक्स कहा.

पन्छियो ने एक सुंदर गाना गा कर कोमल को अलविदा किया.

ये जगह मैं भी नही भूलुगा.

सच मे ये खुशियो का महल था.

कोमल को यहाँ आकर कितनी खुश है

कोमल ने वो वनरानी वाला ताज और रिंग अपने पर्स मे संभाल कर रख दिया.

कोमल के दोस्त ,पंछी हमे गाओं का रास्ता दिखा रहे थे.

मैं कोमल के साथ उस झरने के पास वाले गाओं मे आ गया

गाओं मे पूजा शुरू थी. उस गाओं के लोग मेले मे आए थे जिस से मुझे पहचान गये .

शायद कुछ खास पूजा चल रही थी.

उनके पूर्वज इसी जंगल मे रहते थे.

उनके पूजा करने का तरीका, अलग था.

हमे तो कुछ समझ नही आ रहा था.

इस गाओं मे बाहर के लोगो को ज़्यादा आने नही देते .पर मैं भी इस फोरेस्ट की पूजा मेले के मध्यम से करता हूँ जिस से मुझे गाओं मे आने दिया था.

इस गाओं वालो ने हमे हमारा खुशियो का महल दिया .तो हम भी पूजा मे शामिल हो गये.

कोमल को उनकी अनोखी पूजा देख कर अच्छा लगा. कोमल काफ़ी तारीफ कर रही थी.

गाओं के मुखियों ने हमे भी पूजा करने को कहा

इतना मान सम्मान दे रहे थे तो मैं मना कैसे करता.

मैं पूजा करने के लिए आगे आया तो गाओं के मुखिया ने कोमल के साथ पूजा करने को कहा.

मैं ने और कोमल ने उनके मंदिर मे उनके रीति रिवाज से पूजा की.

सब अपने अपने तरीके से भगवान की पूजा करते है.

हमे कुछ समझ नही आ रहा था ,वो जैसा कहते गये हम वैसा करते गये.

कोमल और मैं ने पूजा की और हम वहाँ से चले गये.

गाओं वालो ने हमे खाना खिला कर भेजा.

कोमल के लिए आज का दिन यादगार हो गया.

कोमल-अवी कितनी अजीब पूजा थी

अवी-वो इसी तरह से भगवान की पूजा करते है

कोमल-अवी ,उन लोगो ने हमारे हाथो को मिला कर उसपे धागा क्यू लपेट रहे थे.

अवी-क्या पता

कोमल-उनकी पूजा अलग थी वैसे हमे कपल की तरह एक साथ बैठना था .और वो मन्त्र ,हमे टिका लगाना, मुझे तो कुछ भी समझ मे नही आया ,पर अच्छा भी लग रहा था.

अवी-जाने दो,

कोमल-अब कहाँ जा रहे है.

अवी-तुम ने लास्ट टाइम थियेटर मे मूवी कब देखी थी.

कोमल-मैं और थियेटर मे ,

अवी-तो चलो मूवी देखते है. तुम्हे 3डी मूवी दिखाता हूँ.

कोमल-3डी मूवी, उसके बारे मे बहुत सुना है. आज तुम्हारे साथ देख भी लेती हूँ.

फिर मैं कोमल को लेकर वापस शहर मे आ गया

 
778

जंगल की मस्ती बहुत हो गयी.

खुंसियो के महल मे जो समय बिताया वो हम कभी नही भूल सकते.

पर अब नयी खुशिया .नयी मस्ती, नये फ्रेंड ,नये अड्वेंचर्ड पे निकल गये.

इस जंगल से अलविदा लेकर हम शहर की तरफ निकल गये.

उस ढाबे वालो को इस खूबसूरत जगह के बारे मे बताने के लिए इनाम दे कर मैं को हवा मे उड़ते हुए शहर ले आया.

कोमल ने कभी थियेटर पे पैर नही रखा होगा. उसे आज इसका भी मज़ा दिलवाता हूँ.

कविता और लीना को मैं पुराने थियेटर मे ले गया था .कोमल को नये थियेटर मे ले गया.जहाँ 3डी मूवी एंजाय कर सकते है.

दोपेहर का शो चालू होने वाला था.मैं ने 2 टिकेट और कुछ स्नॅक ले लिए.

कोमल थियेटर मे मूवी देखने को मिलेगी ये सोच कर काफ़ी खुश थी.

टिकेट लेते मैं कोमल के साथ हॉल मे आ गया.

कोमल-रोमॅंटिक मूवी है

अवी-कार्टून मूवी देखेंगे. तुम ने तो बचपन मे कार्टून देखे नही होगे .आज देख लो

कोमल-कार्टून, पढ़ाई के चक्कर मे ,चलो आज देख लेते है.

मैं ने चश्मा पहन लिया.

कोमल-ये क्या है, चश्मा क्यूँ लगाया है.

अवी-इस लगाकर मूवी देखनी पड़ती है.

मैं ने कोमल को चश्मा पहना दिया.और मूवी चालू हो गयी.

कोमल पहली बार बड़े स्क्रीन पर मूवी देख रही थी .और वो भी 3डी

मोविए चालू होते कार तेज रफ़्तार से चलने का सीन शुरू हुआ.

कोमल को लग रहा था कि कार उसकी तरफ आ रही थी

कोमल ने मेरे हाथ को कस के पकड़ लिया.

कोमल-ज़ोर से अवईिइ,नहियिइ

और कोमल ने अपना चेहरा मेरे छाती मे छुपा दिया.

सब हमारे तरफ देख रहे थे.मैं ने कोमल का चश्मा निकाल दिया.

अवी-क्या हुआ कोमल ,

कोमल-वो कार

और कोमल ने स्क्रीन की तरफ देख ,कार उसकी तरफ नही आ रही थी.

कोमल-अभी तो ये कार

अवी-कोमल ये 3डी मूवी है. तुम डरो मत ,इसमे ऐसे ही होता है.और मेरे होते हुए तुम्हे डरने की ज़रूरत नही.मेरे हाथ पकड़ कर मूवी देखो,

कोमल वापस मूवी देखने लगी. मूवी देखते हुए उसे मेरे हाथ को कस के पकड़ लिया.

शुरुआत मे कोमल डर रही थी जिस से मेरे हाथ मे दर्द हो रहा था .पर जैसे जैसे मूवी आगे बढ़ रही थी कोमल को मज़ा आने लगा.

कोमल समझ गयी कि क्या हो रहा है. अब तो कोमल पॅपकॉर्न खाते हुए मूवी देख रही थी.

फिर कोमल ने मेरा हाथ छोड़ दिया .और मूवी मे पूरी तरह से खो गयी

कोमल-अवी देखो मैं कार चला रही हूँ.भुनररररर

अवी-कोमल धीरे ,दूसरो को परेशानी हो रही है.

कोमल तो अब फुल मस्ती करने की मूड मे थी. उसको रोक कर उसका मज़ा खराब नही करना चाहता था.

पर बाकी लोगो का सामना तो मुझे करना होगा.

लेकिन कोमल के लिए इतना तो करना था.

उसे मस्ती करने मे मज़ा जो आ रहा था. वो आज मस्ती करने का कोई चान्स मिस नही करना चाहती थी.

उसे वापस अपना बचपन जीते हुए देख कर अच्छा लगा.

कितनी खुश है वो यहाँ आकर, मूवी देख कर. कार्टून देखते हुए बच्चा बन कर,

उसे खुश देख कर लोगो की गालियाँ मैं खा रहा था.

इस लिए मैं लोगो से माफी माँग रहा था .और थोड़ा अड्जस्ट करने को कह रहा था. कुछ लोग समझ गये जिस से कोमल अपनी मस्ती करने लगी.

कोमल अपने हाथ घुमा कर कार चलाने को फील कर रही थी.

कोमल को एंजाय करता हुआ देख कर मैं भी उसकी तरह मस्ती करने लगा. हमारा देख कर बाकी बच्चे भीì मस्ती के मूड मे आ गये.

पूरी मूवी हॉल मे शोर शराबा शुरू हुआ. कोमल ने अपने साथ सब को मस्ती करना सिखा दिया.

मूवी ख़तम होते कोमल मेरे गले लग गयी.और इस बढ़िया मूवी के लिए थॅंक्स कहने लगी.

लोगो ने भी मूवी को एंजाय करवाने के लिए हमे थॅंक्स कहा

कोमल-अवी ,मैं ने क्या मिस किया आज पता चला. आज मूवी देख कर कुछ हद तक उसकी कमी पूरी की

अवी-तभी कहता हूँ ,रानी के साथ रहा करो,उस आरती के पीछे लग कर कोई फ़ायदा नही है

कोमल-सही कहा. अब तो मैं महीने मे एक बार मूवी देखने ज़रूर आउगि.

अवी-मूवी से भी बहुत कुछ सीख सकते है हम, मैं नही रहा तो रानी के साथ देख लेना

कोमल-तुम्हारे साथ जो मज़ा आता है वो किसी और के साथ नही आ सकता,फिर भी रानी के साथ मूवी देखने ज़रूर आउगि

अवी-चले अब

कोमल-अब कहाँ ,अब तो शाम हो गयी है.

अवी-घर जाने मे टाइम है. चलो शहर के चक्कर लगाते है.

कोमल ने मुझे ना कहना बंद किया.और हमने बाइक पर शहर घूमना शुरू किया.

इस बीच हम बुआ को कॉल करना भूल गये.

घर जाते बुआ मुझ पे गुस्सा करेगी पर कोमल के खुशी के सामने इतना तो मुझे करना था.

कोमल को लेकर मैं शहर मे घूमने लगा.

कोमल शहर मे ज़्यादातर कॉलेज जाने के लिए आती थी जिस से वो रात की लाइटिंग मे शहर की ब्यूटी को एंजाय करने लगी.

कोमल इधर उधर शॉप को देख रही थी कि मैं ने बाइक रोक दी

कोमल-क्या हुआ

मैं ने कोमल के सवाल का जवाब नही दिया .और उसका हाथ पकड़ कर आगे ले जाने लगा. बाइक वही पर स्टॅंड पे रख दी थी.

सामने दूल्हा बारात लेके अपनी दुल्हन से शादी करने जा रहा था.

दूल्हा घोड़ी पे बैठा हुआ था .और लोग बॅंड पे नाच रहे थे.

मैं कोमल को लेकर उस बारात मे चला गया.

और लोगो के बीच मे ले जाकर रुक गया .कोमल को कुछ समझ नही आ रहा था.

कोमल वहाँ लोगो के बीच चुप चाप खड़ी थी. और मैं ने डॅन्स करना शुरू किया.

बारातियो को हमारे आने से कोई फरक नही पड़ रहा था.वो अपनी धुन मे नाच रहे थे.

मैं ने कोमल के हाथ पकड़ कर उपर किए और डॅन्स करने लगा.

कोमल इधर उधर देख रही थी कि लोग उसके बारे मे क्या सोचेंगे.

मैं ने कोमल को डॅन्स करने को कहा. उसने मेरी तरफ देखा.

मैं ने उसे हिम्मत दी और उसके हाथ पकड़ कर डॅन्स करने लगा

कोमल ने मुझे डॅन्स करते हुए देख कर अपने पैर हिलाने शुरू किए.

चलो अच्छा हुआ कि कोमल ने डॅन्स करना तो शुरू किया.

पैर हिलाते हुए कोमल ने दुपट्टा अपनी कमर पे लपेट लिया.

और बिंदास होकर डॅन्स करने लगी. ठुमके लगाते हुए कोमल डॅन्स कर रही थी.

कोमल के डॅन्स करते ही मैं भी उसके साथ उसी की ताल मे नाचने लगा.

कोमल को डॅन्स करते हुए देख कर बारात मे जो लेडीज़ थी वो भी नाचने लगी.

कोमल को लेडीज़ का साथ मिलते ही वो डॅन्स को एंजाय करने लगी

.

इस तरह बारात मे नाचने की सब की इच्छा होती है. सब का दिल करता है बारात मे डॅन्स करने का.

पर कुछ लोग दूसरे क्या कहेंगे ,इस बात के डर से पीछे हट जाते है. कोई शरम की वजह से ,कोई एज की वजह से, कोई कहता है ये आदमियो का काम है.

ये बात कोमल की दिमाग़ मे भी चल रही होगी. उसे कब इस तरह बारात मे डॅन्स करने मिलेगा. हमारी शादी तक कोमल बड़ी हो जाएगी फिर एज की वजह से डॅन्स करने को नही मिलेगा. बारात को देखते मेरे दिमाग़ मे आया कि कोमल को इसका मज़ा लेने देता हूँ. कोमल इसका पूरा मज़ा लेगी.

कोमल जिस तरह बारात मे नाच रही थी उसे देख कर लग रहा था कि वो अपनी भाई की शादी के बारात मे नाच रही है.

स्टेज पे किसी कॉंपिटिशन मे प्राइज़ के लिए डॅन्स करने मे वो खुशी नही मिलती जो रोड पे बारात या किसी फेस्टिवल मे डॅन्स करने मे मिलती है.

कोमल के ठुमके देख कर मैं पे जेब से पैसे निकाल कर उसकी नज़र उतार ली.

अब तो ऐसा मोड़ आया कि कोमल मुझे डॅन्स करवा रही थी.

कोमल ने आज अपनी शरम को एक तरफ रख कर पूरा दिन खुल के एंजाय कर रही थी.

बारात की लेडीज़ भी कोमल के डॅन्स की तारीफ कर रही थी.

शायद वो दूल्हे की माँ थी ,उसने कोमल के सर के उपर पैसे घुमा कर बॅंड वाले को दिए.

कोमल और मैं पसीने मे भीग चुके थे फिर भी डॅन्स करना बंद नही किया.

कोमल ने डॅन्स करते हुए मुझे गले लगा लिया.

और हमने बारात को अलविदा किया.

बारात से बाहर निकलते ही हम पसीने से भीग चुके थे .और लंबी लंबी साँसे ले रहे थे

कोमल-अवी ,मेरे डॅन्स करने का सपना पूरा हो गया.

अवी- तुम ने एंजाय किया ना

कोमल-इस तरह डॅन्स करके किस को मज़ा नही आएगा.ये देखो पसीने मे भीग चुकी हूँ.

अवी-मेरा भी यही हाल है

कोमल-चलो अब घर चलते है. मुझे नहाने की सख़्त ज़रूरत है.

अवी-इतनी जल्दी क्या है

कोमल-इस तरह कहीं जा नही सकते ,चिप चिपा लग रहा है.

अवी-बस इतना ही ना ,चलो मेरे फ्रेंड के घर चलते है. वहाँ जाकर नहाते है.वहाँ कोई नही होता ,.मेरे पास उसके घर की चाबी है.

कोमल कुछ सोचने लगी. और इधर उधर देखा

कोमल-कुछ पैसे देना

अवी-किस लिए ,

कोमल-दो तो सही. और यही रूको

कोमल पैसे लेकर एक शॉप मे चली गयी. और कुछ देर मे एक बॅग लेकर आ गयी.

अवी-क्या खरीदा

कोमल-कुछ नही, चलो तुम्हारे फ्रेंड के घर

मैं ने बॅग की तरफ देखा ,वो अंडरगारमेंट का बॅग था. मैं समझ गया.

अवी-चलो

मैं कोमल को लेकर घर2 आ गया.

मैं कोमल के साथ घर2 के अंदर चला गया.

अवी-बाथरूम बेडरूम को अटैच है, तुम नहा लो फिर मैं नहा लुगा.और ये लो टवल

कोमल नहाने के लिए चली गयी. कोमल को 10 15 मिनट लगने वाले थे.

तब तक मैं पास के शॉप मे चला गया और कोमल के लिए एक संदर सा ड्रेस खरीद लिया. और अपने लिए टीशर्ट ले लिया.

मुझे खरीदी करने मे ज़्यादा समय लग गया. मैं ड्रेस लेकर घर2 आया तो कोमल नहा चुकी थी .मेरे आते कोमल भाग कर मेरे गले लग गयी.

कोमल-कहा गये थे, मैं कितना डर गयी थी.

कोमल शिकायत करने से ऐसा फील हो रहा था कि वो मुझे कितना प्यार करती

अवी-तुम्हारे लिए ड्रेस लाने गया था,ये कपड़े गंदे हो गये ना

कोमल-बता कर तो जा सकते थे

ये तो एक बीवी की तरह शिकायत करना.

अवी-मुझे लगा कि तुम्हे नहाने मे टाइम लगेगा तब तक ड्रेस खरीद कर तुम्हे सर्प्राइज़्ड दूं. पर मुझे देर हो गयी.

कोमल-ड्रेस, मुझे साथ ले जाते,

अवी-जाने दो, तुम ड्रेस चेंज कर लो ,मैं नहा कर आता हूँ

फिर मैं फ्रेश होने चला गया .और कोमल ने नया ड्रेस पहन लिया.

थोड़ी देर मे हम तैयार हो गये. कोमल नये ड्रेस मे अप्सरा दिख रही थी.

अवी-चले

कोमल-अब कहाँ

अवी-डिन्नर पे

कोमल-चलो

मैं कोमल को लेकर डिन्नर करने के लिए होटेल मे चला गया.

 
779

कोमल के साथ डिन्नर करने के लिए शहर के अच्छे होटेल मे चला गया.

कोमल कॉफी ,नाश्ता ,करनेके लिए होटेल मे गयी थी.

पर 1स्ट टाइम वो इस तरह अकेली ,वो भी डेट टूपे के डिन्नर के लिए होटेल मे आई थी.वरना हमेशा अपने पापा या अपनी माँ के साथ आती है ,पर इस होटेल मे पहली बार आई थी,

कोमल होटेल मे आते ही होटेल की चमक ,सजावट ,और डेकोरेशन से प्रभावित हुई.

होटेल मे टेबल रिज़र्व करना था ,हम ने नही किया ऐसे मे पैसा बोलता है.

मनेजर को पैसे दे कर टेबल बुक किया.और कोमल के साथ कॅंडल लाइट डिन्नर की शुरुआत हुई.

कोमल-कॅंडल लाइट डिन्नर ,वाव,

अवी-तुम्हे पसंद आया

कोमल-टीवी मे देखा था ,मैं ने कभी सोचा नही था कि मुझे कोई कॅंडल लाइट डिन्नर पे ले जाएगा. आज कॅंडल लाइट डिन्नर वो भी तुम्हारे साथ, आज का दिन स्पेशल से भी स्पेशल बना दिया.

अवी-फिर तो तुम्हारी पसंद का खाना ऑर्डर करेंगे

कोमल-मैं करूँ,मुझे तो सब पसंद है जो मेनू मे है.

अवी-तुम बस ऑर्डर करो ,बिल मैं पे करूँगा.(चाचा का एटीएम ईस्तमाल करूँगा.)

कोमल-क्या करूँ,

अवी-एक काम करो कुछ नोन वेज, वेज, स्नॅक,कोल्ड ड्रिंक,स्वीट, और लास्ट मे आइस क्रीम .सब थोड़ा थोड़ा टेस्ट करेंगे.

मेरे कहते कोमल ने वेटर को ऑर्डर देना शुरू किया.वेटर ऑर्डर लेके जाने लगा तो मैं ने एक रोमॅंटिक सॉंग प्ले करने को कहा.

सॉंग शुरू होते ही,डिन्नर मे एक मिठास पैदा हो गयी.

कोमल अपनी खुशी को कंट्रोल नही कर पा रही थी.एक दिन मे इतना कुछ कोमल हजम नही कर पा रही थी.

कोमल-अवी ,चुंटकी काटो

मैं ने कोमल के हाथ पर चुंटकी काट ली.

कोमल-ये सपना नही है,

अवी-इसे सपना बना दो,इस दिन को तुम कभी भूलोगि नही. सपने मे याद रखोगी.

कोमल-अवी, ये दिन मैं मरते दम तक नही भूलूगी.

इसमे और मिठास डालने का वक्त आ गया था.

मैं ने कोमल को डॅन्स करने के लिए पूछा

कोमल-यहाँ पर, यहाँ तो सब खाना खा रहे है.

अवी-वहाँ स्टेज पर सॉंग चल रहा है, चलो ,लोगो का टेन्षन मत लो, हमे डॅन्स करते हुए देख कर वो भी डॅन्स करने आ सकते है.

कोमल ने मेरे हाथ मे अपना हाथ दिया.

हम हाथो मे हाथ डाल कर स्टेज की तरफ चले गये.

मैं ने स्टेज पर जाते हुए मनेजर को इशारा करके लाइट कम करने को कहा.

स्टेज पर जाते ही कोमल और मैं एक दूसरे के सामने खड़े हो गये

कोमल-अवी मुझे डॅन्स नही आता

अवी-हम ने झरने मे जैसा किया था बस वही करेंगे.

मैं ने कोमल का हाथ अपने कंधो पे रखा और अपने हाथ उसकी कमर पे रख कर अपने पास खीच लिया .और डॅन्स करने लगे.

हम स्लो स्लो अपने पैर मूव करते हुए डॅन्स करने लगे.

हमे डॅन्स करता हुआ देख कर एक और कपल स्टेज पर आकर डॅन्स करने लगा.

कोमल और मैं फिर से एक दूसरे मे खोने लगे.

डॅन्स करते हुए कोमल ने अपना सर मेरे कंधे पे रखा और मेरे गले लग कर धीरे धीरे मूव होने लगी.

हमे इस से ज़्यादा कुछ नही आता था जिस से हम आँखे बंद करके एक दूसरे की खुसुबू को फील करते हुए डॅन्स करने लगे.

हमारे पैर अपने आप एक रिदम मे मूव हो रहे थे. हमारा 1स्ट टाइम था फिर भी सब पर्फेक्ट हो रहा था.

मैं ये क्या कर रहा था ये मुझे पता था. कोमल कभी किसी लड़के के साथ ये सब करने की हिम्मत नही कर पाएगी. पर वो ये सब कॅंडल लाइट डिन्नर, मूवी देखना, रोमॅंटिक डॅन्स करने के सपने देखती होगी. ये सपने सिर्फ़ सपने बन कर ना रहे इस लिए मैं ने एक स्टेप आगे बढ़ने का सोचा.

मेरे एक स्टेप आगे बढ़ने से मेरी बहन को वो खुशी मिल जिस के बारे मे वो बस सपने देख सकती थी.

कोमल ने आज वो सब पा लिया जो हर लड़की सपना देखती है. मुझे पता है इसमे बहुत कुछ कमियाँ थी पर कोमल के लिए ये सब पर्फेक्ट लग रहा था.

कोमल के दिल मे क्या चल रहा है इसकी परवाह किए बिना मैं ने इतना बड़ा कदम उठाया है.

कोमल को बेस्टफ्रेंड के नाते जितना हो सका मैं ने उतना किया.

बेल इसमे हम ने अपने रिश्ते की परवाह नही की ,कुछ जगह हम बहक रहे थे पर कभी मैं ने तो कभी कोमल ने कंट्रोल करते हुए ,रिश्ते की दीवार टूटने नही दी

हम डॅन्स करते हुए पूरे दिन की गतिविधियो को याद करने लगे.

इस बीच हम से फिर से एक दूसरे के करीब आ रहे थे.

मेरा हाथ उसकी कमर पे मूव हो रहा था.

हम पूरी तरह से एक दूसरे मे खो चुके थे. हम ये भी भूल चुके थे कि हम कहाँ है. पर स्टेज पे अंधेरा होने से हम बच गये.

और लोगो की तालिया सुनकर हम होश मे आ गये. होश मे आते ही हम अलग हो गये.

मैं ने इधर उधर देखा तो स्टेज पे हमारे साथ 5 कपल और थे. चलो अच्छा हुआ हम पे ज़्यादा फोकस नही हुआ होगा.

मैं कोमल को लेकर अपने टेबल पर आ गया.

कोमल के गाल लाल हो गये थे.

अवी-ये शरमाना बंद करो,नही तो ये डिन्नर कॅन्सल

कोमल मेरी बात सुनकर नॉर्मल हो गयी.

अवी-तुम तो अच्छा डॅन्स कर रही थी. ऐसा डॅन्स कहाँ से सीखा

कोमल-मुझे डॅन्स नही आता ,वो तो अपने आप हो गया.

अवी-और बारात मे जो ठुमके लगा रही थी वो क्या था

कोमल-वो डॅन्स थोड़ी था .बस नॉर्मल से स्टेप थे

अवी-पर कुछ भी हो,तुम डॅन्स अच्छा करती हो,

कोमल-तुम भी तो अच्छा डॅन्स करते हो, तुम गेदरिन्ग मे पार्टिसिपेट कर लेना.

अवी-नही, ये लो ऑर्डर आ गया

हमारे ऑर्डर से पूरी टेबल भर गयी.

कोमल-इतना खाना,

अवी-तुम ही ने तो ऑर्डर किया है.थोड़ा थोड़ा टेस्ट करेंगे

कोमल-ये स्पून ,फोर्क के साथ खाना होगा ,

अवी-ट्राइ करो, आज ही तो खाना है. धीरे धीरे स्लो स्लो सीख जाएँगे

और मैं ने पहला नीवाला उठाकर स्पून कोमल के पास ले गया.

अवी-1स्ट बाइट ,प्रिन्सेस कोमल के लिए

कोमल ने मेरे हाथ से नीवाला खा लिया .और हमारे कॅंडल लाइट डिन्नर की शुरुआत हो गयी.

कोमल और मैं इस कॅंडल लाइट डिन्नर को प्यार के साथ एंजाय कर रहे थे.

हम बातें करते हुए खाना खा रहे थे ताकि हमारा डिन्नर ज़्यादा देर तक चले.

हम बीच बीच मे हसी मज़ाक कर रहे थे .

जैसे मुर्गी तंदूरी मुर्गी बन से पहले शादी शुंदा थी या कुवारि थी.

नॉनवेज मे तंदूरी चिकन था, वो मुर्गी थी या मुर्गा था ,ऐसे ईडियट टाइप की बातें करके हसी मज़ाक कर रहे थे

कोमल कभी अपने प्लेट का खाना मुझे खिला देती तो कभी मैं उसे कोई डिश टेस्ट करने को कह देता.

कॅंडल धीरे धीरे बुझ रही थी, प्लेट मे रखा हुआ खाना ख़तम हो रहा था पर हमारी बातें ख़तम होने का नाम नही ले रही थी.

आज कोमल के चेहरे पे खुशी के सिवा कुछ दिख नही रहा था.

हम डिन्नर इतना स्लो कर रहे थे कि हमे टाइम का पता नही चला.

कोमल का दिन स्पेशल बनाने के लिए मैं नेहा बुआ के गुस्से को भूल गया था.

घर जाते मेरी परेड निकलने वाली थी.

सुबह से एक बार भी हम ने नेहा बुआ को फोन करके बताने का ख़याल अपने दिमाग़ मे आने नही दिया.

अब तो रात बढ़ती जा रही थी ,ऐसे मे हमे नेहा बुआ को बताना चाहिए था.कि हमे देर हो जाएगी.पर डिन्नर के सामने हम भूल गये.

डिन्नर तो हो गया फिर आइस क्रीम खाने मे हम ने आधा घंटा बिता दिया.

कोमल आइस क्रीम का पूरा मज़ा ले रही थी.

आज कोमल ने अपनी नादानियो की लिमिट पार कर ली थी.

कोमल इतनी भी मस्ती कर सकती है ये कभी सोचा नही था.

आइस क्रीम का मज़ा लेने के बाद बिल पे करके हम होटेल से बाहर आए तो हमे समय का पता चला.

कोमल ने टाइम देखा ,रात के 10 बज रहे थे.

कोमल-अवी टाइम देखा तुम ने

अवी-हाँ

कोमल-हम ने डिन्नर करते हुए समय का ध्यान ही नही रखा

अवी-कुछ नही होता ,हम कौनसा बार बार रात मे बाहर जाते है. एक दिन तो सब को माफ़ होता है.

कोमल-लेकिन माँ गुस्सा हो रही होगी.

अवी-कुछ नही होगा मैं हूँ ना

कोमल-तुम क्या करोगे. तुम पर तो ज़्यादा गुस्सा होगी.

अवी-तुम टेन्षन मत लो मैं ने सब सोच रखा है. चुंटकी मे बुआ का गुस्सा गायब कर दूँगा

कोमल-क्या करने वाले हो

अवी-वो घर जाकर तुम्हे पता चल जाएगा

कोमल-मैं माँ को कॉल करती हूँ.

अवी-नही. अब सीधा हम घर जाएँगे. कविता लीना और राज के लिए चॉक्लेट लेते हुए जाएँगे

कोमल-मेरे लिए नही लोगे

अवी-तुम्हारे लिए 2 चॉक्लेट लुगा.

फिर मैं कोमल के साथ गाओं की तरफ जाने लगा.

इस दिन को स्वीट सी किस दे कर हम गाओं की तरफ जाने लगे

पूरा दिन तो अच्छे से हसी खुशी के साथ बिग गया अब रात मेरे लिए भयानक होने वाली थी

मुझे नेहा बुआ के गुस्से का सामना करना था

कोमल को बोल तो दिया कि मैं नेहा बुआ को संभाल लूँगा

पर मेरी गर्दन कटेगी ये मुझे पता था

आज बुआ मुझे सूली पे चढ़ा देगी

कोमल को पूरे दिन उनसे दूर रखा और फोन भी नही किया ,और इतनी रात हो गयी है

मैं तो गया काम से

भगवान मुझे नेहा बुआ के गुस्से से बचा लेना

 


780

मैं कोमल के साथ पूरा दिन बिता कर घर की तरफ जाने लगा.

कोमल को खुश रखने के लिए मैं ने ये बता दिया कि नेहा बुआ को मैं संभाल लुगा.

लेकिन नेहा बुआ से मैं क्या बात करूँगा ये मैं ने सोचा नही था.

नेहा बुआ को मैं क्या कहूँगा. पहले ही मैं उनके सामने जाने से डरता हूँ ,और आज तो इतनी बड़ी ग़लती की ,मेरा क्या होगा इस बात से मुझे डर लग रहा था.

नेहा बुआ हमको फोन लगा रही होगी पर हमारे फोन स्विच ऑफ थे.फोन ना लगने से नेहा बुआ गुस्से मे उबल रही होगी.

कोमल तो मुझसे चिपक कर बैठी थी. और आसमान मे सितारे देख रही थी.

कोमल मेरे साथ रात मे बाइक पर घूमने को एंजाय कर रही थी.

मेरा ज़्यादा ध्यान नेहा बुआ पर था ,मुझ पे नेकुलेर बॉम्ब फटने वाला था.

मैं अपनी धुन मे बाइक चला रहा था की कोमल ने मुझे आवाज़ दी

कोमल-अवी वो देखो टूट ता तारा

मैं आसमान की तरफ देखने लगा. तारा टूटते हुए देखने को कम मिलता है.

कोमल शूटिंग स्टार को देख कर विश माँग रही थी.

आँखे बंद करके हाथ जोड़ कर विश माँग रही थी.

अवी-कोमल का विश मिल जाय

कोमल-विश बताई नही जाती.

अवी-सिर्फ़ अपने लिए मागा ,

कोमल-कहा ना विश के बारे मे बताया नही जाता ,

अवी-ठीक है ,पर जब पूरी होगी तब बता देना

कोमल-तब बता सकती हूँ, अब चलो ,देर हो रही है.

फिर मैं बाइक चलाते हुए अलग अलग तरीके ढूँढ रहा था नेहा बुआ का गुस्सा कम करने के लिए

मुझे आइडिया तो नही मिला पर घर आ गया.

कोमल के घर की लाइट ऑन थी. और अंदर से आवाज़ आ रही थी.

कोमल बाइक से उतर गयी .और अपना पर्स लेकर मुझे अंदर ले गयी.

गेट खुला था जिस से हम अंदर आ गये.अंदर आते मैं शॉक्ड हो गया.

हॉल मे नेहा बुआ ,नीता बुआ, पूजा बुआ,बड़ी चाची,छोटी चाची, कविता लीना राज सब बैठ कर बातें कर रहे थे.

नेहा बुआ गुस्से से अपने मोबाइल को देख रही थी. और कमरे मे इधर से उधर घूम रही थी.

नीता बुआ नेहा बुआ को शांत रहने को कह रही थी

सब को नेहा बुआ के घर मे देख कर मैं समझ गया कि नेहा बुआ हमारे ना आने से सब को बुलाया होगा.

सब यहाँ है, मतलब मेरी अच्छी खातिरदारी होने वाली थी.

हमे देखते नेहा बुआ के आँखे गुस्से से लाल हो गयी थी.

नेहा बुआ के गुस्से से मुझे आज कोई बचा नही सकता था.

मैं नेहा बुआ के गुस्से का सामना करने को तैयार था कि कोमल नेहा बुआ के पास चली गयी.

कोमल-माँ

और कोमल ने नेहा बुआ के हाथ पकड़ कर गोल घुमाना शुरू किया.कोमल नेहा बुआ को गोल गोल घुमाने लगी.

कोमल -माँ आज मैं बहुत खुश हूँ

नेहा बुआ-मैं गिर जाउन्गी , चक्कर आ रहा है

कोमल -आप इतने से डर गयी मैं ने तो आज इस भी ज़्यादा मस्ती की है

कविता -दीदी क्या किया

कोमल-आज मैं बहुत खुश हूँ, मैं ने बाइक चलाई ...वो भी फुल स्पीड मे

और कोमल बाइक चलानेकी आक्टिंग करते हुए हॉल मे भागने लगी

कोमल-भुनररररर भुनररर, कभी इधर तो कभी उधर ,हवा से बातें करते हुए भुनररर ,मैं बाइक चला रही थी, मेरे बाल हवा मे उड़ रहे थे,और मैं बाइक चला रही थी.

और कोमल ने नेहा बुआ की कमर को पीछे से पकड़ लिया और आगे धकेलते हुए बाइक चलने की आक्टिंग करने लगी.

सब कोमल को इस तरह बच्चे की तरह हरकत करते हुए देख कर शॉक्ड हो गये

नेहा बुआ को तो कुछ समझ नही आ रहा था

कोमल-फिर हम ने मक्कन मार के गरम गरम परान्ठे खाए...वाव क्या टेस्टी थे ,मामी मैं तो उंगलिया भी खा जाती इतने टेस्टी थे परान्ठे

कविता फिर पता है हम कहाँ गये थे ,हम जंगल मे बने हुए तालाब के पास गये थे.

मौसी वहाँ पर झरना भी था ,ज़ूरज़ुर ज़ूरज़ुर पानी गिर रहा था , मैं तो खुद को रोक ही नही पाई और तालाब मे जंप मारी

और झरने का पानी कितना ठंडा था और ठंड लगने की आक्टिंग करने लगी

कोमल-माँ कितना ठंडा था पानी, हुण्डड़ड़ हुण्द्ड़द्ड ,निर्मल पानी मे मैं खुद को मछलि समझ रही थी.

मछलि की तरह तालाब मे तैरने लगी. कविता तू आती तो बहुत मज़ा आता,

कविता ने साथ मे ना ले जाने से अपना मूह टेडा किया

कोमल-राज पता है हमे वहाँ रॅबिट मिला था. उसके पीछे जंप मारते हुए भागने मे इतना मज़ा आरहा था कि बता नही सकती

और कोमल रॅबिट की तरह जंप मारने लगी.

राज-वहाँ रॅबिट था.आपने पकड़ा उसे

कोमल-हाँ ,अवी और मैं ने उसे पकड़ा था ,अवी मोबाइल दिखाना.

कोमल ने मेरा मोबाइल ले लिया .और राज को वीडियो दिखाने लगी

कोमल-देखा कितना क्यूट था.मैं तो उसे यहाँ लाने वाली थी पर वो फिर से भाग गया

कोमल की बातें और मस्ती देख कर सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे.

नेहा बुआ बहुत कुछ बोलना चाहती थी पर कोमल को रोकने की हिम्मत बुआ भी जुटा नही रही थी

कोमल-माँ फिर हम मूवी देखने गये.

लीना कितनी बड़ी स्क्रीन थी. और मूवी मे जो कार थी वो ऐसा लग रहा था कि मेरे उपर आ रही है.

मैं ज़ोर से चिल्लाई माआ,और अवी के गले लग गयी, माँ मैं तो डर गयी थी पर अवी ने मुझे संभाल लिया.

कविता-आप 3डी मूवी देखने गयी थी

कोमल-हाँ, पता है ऐसा लग रहा था कि मैं मूवी मे हूँ,इतना मज़ा आ रहा था कि पुछो मत

मेरे साथ सब मस्ती करने लगे थे.

फिर हम एक बारात मे गये. वहाँ डॅन्स किया.

और कोमल ठुमके मार कर डॅन्स करने लगी. और नेहा बुआ के हाथ पकड़ कर नाच रही थी.

नेहा बुआ कोमल को देखती रह गयी.

नेहा बुआ ने अपने बदन को कोमल के हवाले कर दिया

कोमल नेहा बुआ के साथ नाचने लगी

चाची तो ये देख कर मेरी तरफ देखती रह गयी

कोमल-छोटी मामी वहाँ डॅन्स करने मे मुझे बहुत मज़ा आया. आपने जैसा सिखाया था वैसे ठुमके मारने लगी.

अवी ने तो पैसो की बारिश शुरू कर दी.हम पसीने मे भीग गये फिर भी मैं नाचती रही.

और कोमल छोटी चाची को खड़ा करके डॅन्स करने लगी.

कोमल-फिर हम होटेल मे डिन्नर करने गये.

माँ वहाँ एक दरबान था जो हमारे आते गेट खोल कर हमे सॅलुट किया

कविता वो होटेल इतना बड़ा था कि पूछो ही मत, ऐसा होटेल मूवी मे देखा था.

हर टेबल पे कॅंडल थी, उसकिरोशनी मे खाना खा रहे थे

लीना-वाव कॅंडल लाइट डिन्नर

कोमल-हाँ , कॅंडल लाइट डिन्नर,पर उस से पहले वहाँ भी डॅन्स किया फिर

माँ पता है टेबल पे इतना खाना था जिस सेपूरा टेबल भर गया.

सब मेरी पसंद का था. सब मुझे सपने जैसा लग रहा था .

एक सपने जैसा लग रहा था

कोमल- माँ आज मैने ने जीना सीख लिया ,कितनी खूबसूरत है ये दुनिया ये देखा

मौसी मैं ने नये दोस्त बनाए , पता है किसे दोस्त बनाया

नीता बुआ- किस को दोस्त बनाया

कोमल- पहले पन्छियो को , फिर मछलियो को सहेली बनाया फिर जंगल के अनिमल को दोस्त बनाया , मैं ने सब के साथ बहोत मस्ती की ,

राज- दीदी आइस क्रीम नही खाई

क्कमल- खाने के बाद स्वीट के साथ आइस क्रीम ,टेस्टी टेस्टी आइस क्रीम थी

कविता इतनी टेस्टी आइस क्रीम थी कि मैं ने अपनी उंगली भी चाट ली.

कोमल-माँ इतनी मस्ती मैं ने आज तक नही की. बाइक मे घूमना, हवा से बातें करना ,तालाब मे नहाना, मूवी वो भी कार्टून, डिन्नर ,

लीना पता है आते हुए हम ने शूटिंग स्टार देखा था.

लीना-आपने विश मागी

कोमल-हाँ,

कोमल-माँ मुझे तो अभी भी लग रहा है कि ये एक सपना है.

माँ ,चुटकी काटो ना ,मुझे ये बताओ कि ये सपना नही हक़ीकत है.

नेहा बुआ ने चुंटकी काट ली.

कोमल-माँ, आज का दिन मेरे लिए अवी ने स्पेशल बनाया .अवी ने मुझे जिंदा होने का अहसास दिलाया.

अब तक मैं ने क्या मिस किया ये आज पता चला है.अवी ने एक दिन मे पूरी दुनिया दिखा दी.

इस गाओं के बाहर भी दुनिया है ये मैं ने पहली बार देखी है.इतनी बड़ी दुनिया अवी ने एकदिन मे दिखा दी.

कोमल-मामी , अवी ने मुझे जो खुशी दी है वो आज तक मैं ने कभी महसूस नही की थी.

माँ आपको पता है, मैं आज पंछी की तरह हवा मे उड़ रही थी तो मछलि की तरह तालाब मे स्विम कर रही थी.

लोगो की परवाह किए बिना मैं ने जीना सीखा है.

पूरे दिन मे मैं ने एक मिनट के लिए थकावट महसूस नही की. इतनी मस्ती करने के बाद भी अवी ने मुझे थकने नही दिया.

मेरा हाथ पकड़ कर मुझे दुनिया दिखाई, मुझे गिरने नही दिया.

माँ मैं आज बहुत खुश हूँ.

और कोमल ने एक साँस मे सब कुछ बता दिया और हाँफने लगी

कोमल-बाकी की बातें कल बताउन्गी. मुझे अब सोना है. पूरे दिन को सपने मे क़ैद करना है

गुड नाइट माँ

और कोमल अपने कमरे मे चली गयी.सब कोमल की मस्ती, उसको हँसता खेलता देख ,समझ गये कि कोमल ने आज क्या पाया है.

कोमल के जाने के बाद सब नेहा बुआ की तरफ देख रहे थे.

नेहा बुआ ने मुझे अब तक कुछ नही कहा.

राज-कविता दीदी, ये देखो कोमल दीदी कितनी मस्ती कर रही है.

कविता की जगह नेहा बुआ ने राज के हाथ से मोबाइल लिया और वीडियो देखने लगी.

रॅबिट के साथ कोमल को मस्ती करते हुए कोमल को हँसता हुआ देख कर नेहा बुआ पिघल गयी

मैं नेहा बुआ के कुछ कहने का इंतज़ार कर रहा था.पर नेहा बुआ वीडियो देखने मे ब्यस्त थी

सी चाची-अवी तुम इतना बेजिम्मेदार होगा मैं ने सोचा नही था.

अवी-वो मैं

सी चाची-एक फोन तो कर देता ,हम कब से तेरी फिकर कर रहे थे.

अवी-वो मैं

सी चाची-क्या वो मैं ,नेहा कितनी परेशान हो गयी थी. सुबह से खाना भी नही खाया नेहा ने

अवी-चाची वो मैं ने

सी चाची-ये मत कहना कि बॅटरी नही थी. मोबाइल फुल चार्ज दिख रहा है. कहीं कोमल खुल के एंजाय कर सके इस लिए मोबाइल बंद कर के रखा था. बता ना

अवी-आपने जो (चाची जानबूझ कर ऐसा बोल रही थी कि मुझे डाट भी सके और मेरी तरफ से नेहा बुआ को सफाई दे सके )

सी चाची-कुछ मत बोल, अब नेहा तुझे सज़ा देगी तभी तेरी अकल ठिकाने आ जाएगी.नेहा

नेहा बुआ-जाने दो, बच्चे है ग़लती हो जाती है

नेहा बुआ की बात सुनकर सबका मूह खुला का खुला रह गया.

नीता बुआ-ऐसे कैसे ,तुझे अवी को सज़ा देनी होगी

नीता बुआ भी छोटी चाची के ताल मे ताल मिलाने लगी

नेहा बुआ-उसने जान बुझ कर नही किया होगा. कोमल अवी के साथ थी, वो कोमल को कुछ नही होने देता

पूजा बुआ ने ने भी नीता बुआ के सुर मे सुर मिला दिया

पूजा बुआ-रुक ,तू सज़ा नही देगी तो मैं देती हूँ

नेहा बुआ-दीदी बच्चे है.पहली ग़लती समझ कर माफ़ कर देते है.

नेहा बुआ की बात सुनकर सब मन ही मन मे मुश्कुरा रहे थे

पूजा बुआ-तू कह रही है तो जाने देते है .पर थोड़ी देर पहले तो तू बड़ी बड़ी बातें कर रही थी उसका क्या हुआ

नेहा बुआ-वो मैं... कविता तुम्हे सोना नही है चल अपने कमरे मे जा

नेहा बुआ ने बात बदल दी . ये क्यूँ हुआ सब को पता था.

ब चाची-हमे चलना चाहिए ,सीमा बच्चो को अकेली देख रही है.

चाची मे नेहा बुआ से मोबाइल लिया और मेरे पास आ गयी.

नेहा बुआ-अवी

अवी-जी बुआ

नेहा बुआ -कुछ नही

नीता बुआ-नेहा अब बोल भी दे.

नेहा बुआ-कोमल को पहली बार इतना खुश देखा है.उसके लिए तुम ने जो किया है...कोमल के लिए मैं खुश हूँ

नीता बुआ-तू भी ना नेहा , अवी नेहा तुम्हे थॅंक्स कहना चाहती है.

अवी-मुझे पता है

नेहा बुआ-इसका मतलब ये नही है कि दुबारा ऐसी ग़लती करने की इजाज़त मिली है , दुबारा ऐसा किया तो मैं ऐसी सज़ा दुगी कि........

नेहा बुआ की बात सुनकर सब हँसने लगे.

और नेहा बुआ सबको हँसता हुआ देख कर अपने कमरे मे चली गयी

पूजा बुआ- चलो अब रात बहुत हो गयी है ,हमे भी सोना चाहिए

और पूजा बुआ ने मेरे माथे पे किस करके आशीर्वाद दिया या फिर ये बताया कि मैं ने जो किया उस से वो खुश है

नीता बुआ ने मुझे गले लगा कर प्यार किया

और मैं ने कविता लीना और राज को चॉक्लेट दे कर उनको भी खुश कर दिया

और मैं चाची के साथ घर आ गया.

 
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