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पंकज के घर से निकल कर पहले मैं शॉप मे जाकर माउत फ्रेशनेर ले लिया.
बीयर की स्मेल मेरे घर जाने तक चली जाएगी.
अगर रानी यहाँ होती तो उसके घर चला जाता. पर रानी अपनी मम्मी के साथ घूमने गयी थी.
रानी पूरा समय अपनी मम्मी के साथ बिताना चाहती थी जिस की वजह से मैं ने उसको कॉल करने से मना किया था.
रानी फिर भी मुझे एक मेसेज कर देती.
रानी को आने मे और 3 दिन बाकी थे , और मिसेज़ वर्मा ने सनडे को बुलाया है, तब तक घर मे आराम करता हूँ.
आराम करते हुए पढ़ाई भी कर लेता हूँ, और थोड़ा टाइम कोमल के लिए निकाल लूँगा.
रानी के जाने की वजह से कोमल भी बोर हो रही है.
मैं घर जाते ही सीधा अपने कमरे मे चला गया.
विद्या मेरे लिए पानी लेकर आ गयी.
विद्या-पानी पी लो ,
अवी-थॅंक्स, कितना ध्यान रखती हो मेरा
विद्या-तुम्हारा ध्यान रखने के लिए तो हूँ यहाँ पर,
विद्या को एक किस करके पानी लाने का इनाम दिया .और मैं सो गया.
फिर शाम मे बच्चो के साथ खेलने के बाद मैं पढ़ाई करने लगा.
सी चाची-अवी
अवी-जी चाची
सी चाची-अभी तो एग्ज़ॅम हुई है .और पढ़ाई कर रहे हो
अवी-चाची कुछ मत पूछिए ,मुझे पढ़ाई करने दो
सी चाची-कक्षा हुआ
अवी-चाची आपको तो पता है कि मेरा ये साल कैसा गया है. अगर 12थ क्लास मे पढ़ाई नही की तो पूरा फ्यूचर खराब हो जाएगा.
सी चाची-इतना टेन्षन क्यूँ ले रहा है
अवी-चाची अभी से पढ़ाई करूँगा तो आगे जाकर आसानी होगी. और आगे किसी काम मे बिज़ी हो गया तो गयी भैंस पानी मे
सी चाची-ये सही सोचा तूने. कर पढ़ाई ,पर ज़्यादा टेन्षन मत लेना.
अवी-थोड़ी पढ़ाई करके रखता हूँ जिस से आगे जाकर ज़्यादा प्राब्लम ना हो.
सी चाची-कसरत पढ़ाई और आराम ,करने का प्लान बनाया है तूने
अवी-हाँ
सी चाची-अच्छा है.
रात मे थोड़ी बहुत पढ़ाई करने के बाद मैं सो गया.
सुबह उतना जो था कसरत करने के लिए.
दोपेहर मे मिसेज़ वर्मा की चुदाई करने से रात मे नींद अच्छी आई.
सुबह उठ कर कसरत करने के बाद मैं रणजीतसिंघ को मिलने के लिए हवेली चला गया.
रणजीतसिंघ ने मुझे एक काम से बुलाया था.
जिस कंपनी मे मुझे 50%पार्ट्नरशिप दी थी उसका प्रॉफिट मुझे देने के लिए बुलाया था.
हवेली मे मेरे आते सब के चेहरे पे खुशी झलकने लगी.
खास करके पायल के चेहरे पे,
मैं ने पहले रणजीतसिंघ को अपना अकाउंट नंबर दे दिया.
रणजीतसिंघ ने कहा कि 2 3 दिन मे मेरा हिस्सा मुझे मिल जाएगा.
रणजीतसिंघ और ठाकुरजी से बाते करने के बाद पायल मुझे अपने कमरे मे ले गयी.
ठाकुरजी और ठकुराइन को इस पे कुछ भी ऐतराज़ नही था . वो मुझे और पायल को भाई बहन की तरह देख रहे थे
पायल के कमरे मे जाते ही पायल मे अपने कपड़े निकालने सुरू किए
मैं पायल को देखता रह गया. पायल पूरी नंगी होकर मेरे उपर बैठ गयी.
और बिना कुछ कहे मेरे लंड को जीन्स से बाहर निकाल कर अपनी चूत मे ले लिया.
और खड़े खड़े चुदाई करने लगी.
अपना और मेरा पानी निकलने तक लंड पर उछलती रही
मेरा वीर्य अपनी चूत मे लेते ही वो बोलने लगी.
पायल-इतने दिन कहाँ थे
अवी-एग्ज़ॅम था मेरा
पायल-एग्ज़ॅम होने के बाद आज मिलने आए हो
अवी-तुम भी तो कॉल कर सकती थी
पायल-मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी.
अवी-अब आ गया ना
पायल-कार सीखना कब सुरू करना है
अवी-हफ्ते मे एक बार ,
पायल-बस एक बार
अवी-रोज रोज मिलना ठीक नही होगा. समझा करो
पायल-समझ गयी.
अवी-मेरे कॉल का इंतज़ार करना.
पायल-जल्दी कॉल करना .
अवी-इस हफ्ते का हो गया. अब नेक्स्ट हफ्ते मे करेंगे
पायल-अभी हुआ कहाँ है. एक और बार करते है
अवी-थोड़ी देर और रुका तो सबको शक होगा .अब उठो ,और कपड़े पहनो
पायल ने कपड़े पहन लिए और गेट खोल कर थोड़ी देर मुझे कंप्यूटर के बारे मे बताने लगी.
ठकुराइन हमे देखने के लिए पायल के कमरे मे आ गयी. हमे कंप्यूटर ईस्तमाल करते हुए देख कर रिलॅक्स हो गयी.
ठकुराइन के आते ही मैं नीचे चला गया.और रणजीतसिंघ के साथ बाते करने के बाद घर चला गया.
सम्मर मे आम के बगीचे मे जाने का मन हो रहा था.
मेले के बाद खेतो मे गया ही नही था.
आम के बगीचे की ठंडी हुआ का मज़ा लेने के लिए मैं ने शाम मे बगीचे मे जाने का सोच लिया.
चाची को मेरे खेतो मे जाने से कोई अतराज़ नही था.
शाम मे नींबू शरबत पीकर मैं आम के बगीचे मे जाने के लिए तय्यार हो गया.
मैं घर से बाहर निकला था कि कोमल मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी.
कोमल के कुछ पूछने से पहले मैं ने उसे बता दिया कि मैं खेत मे जा रहा हूँ
अवी-अच्छा हुआ तुम यही आ गयी .मैं तुम्हारे पास आ रहा था.
कोमल- मेरे पास किस लिए
अवी-मैं खेत मे घूमने जा रहा था तो सोचा तुम्हे ले चालू अपने साथ .चलॉगी.
कोमल- खेत मे ,आम के बगीचे मे ,हाँ चलो
अवी-बुआ से पूछ लो
कोमल- माँ को बता कर आई हूँ की विद्या से मिलने जा रही हूँ
अवी-विद्या से मिलने आई हो,पर किस लिए
कोमल- विद्या ने कहा की वो मुझे मेडिकल के बारे मे कुछ बाते सिखाना चाहती है.
अवी-फिर तो तुम विद्या के पास जाओ
कोमल- नही. विद्या से कल सीख लूँगी ,चलो अब
अवी-तुम्हारी तबीयत ठीक हैना
कोमल- हाँ, ऐसा क्यू पूछ रहे हो
अवी-तुम पढ़ाई को मना कर रही हो और ऐसा बहुत कम बार हुआ है.
कोमल-पढ़ाई तो होती रहेगी. पढ़ाई से ज़्यादा इम्पोर्टेंट लाइफ को एंजाय करना होता है
कोमल की नयी ,समझदारी की बाते सुनकर मैं खुश हो गया.
और इसी खुशी के साथ हँसते हुए बाते करते हुए हम खेत मे आ गये
खेत मे मैं सीधा कोमल को घर3 मे लेकर नही जा सकता था.क्या पता चाचा क्या कर रहे होंगे.
खेत मे आते मैं कोमल को आम के बगीचे मे ले गया.
बगीचे मे कमला काकी मुझे देख कर खुश हो गयी. पर कोमल के देख कर उनका चेहरा उतर गया.
अवी-चलो कोमल बगीचे मे घूमते है.
कोमल-इतनी गरमी मे यहाँ ठंडी हुआ चल रही है.
अवी-ये बगीचे और जंगल की वजह से हो रहा है.
कोमल- जंगल ,तुम कभी इस जंगल मे गये हो
अवी-हाँ एक बार गया था. वो देखो पका हुआ आम
कोमल-आम ,दिखा क्या रहे हो तोडो ना
अवी-वो बहुत उपर है
कोमल- मुझे वो आम खाना है.
अवी-कोई और ढूंढते है
कोमल-मुझे वही चाहिए
अवी-तुम भी ना,
और मैं पेड़ पर चढ़ने लगा.
कोमल- आराम से चढ़ना
अवी-डिस्ट्रब मत करो ,मुझे पता है
कोमल- संभाल के
अवी-डरा मत
कोमल-रहने दो ,वो काफ़ी उपर है. तुम्हे चोट लग जाएगी
अवी-तुम्हे वो आम पसंद है ना ,तुम्हे मिल जाएगा
बड़ी मुश्किल से मैं ने वो आम तोड़ लिया.
अवी-लो तुम्हारा आम
कोमल-रहने देते
अवी-मत खाओ ,मैं खा लेता हूँ.
कोमल ने मेरे हाथ से आम छीन लिया.
कोमल- आधा आधा खाएँगे
अवी-मुझे दो मैं उसको चूसने लायक बनाता हूँ.
कोमल-मैं कर लूँगी.
कोमल आम को मसल्ने लगी .और मैं हमारे लिए बैठ ने के लिए जगह बनाने लगा.
जगह बनते ही कोमल के साथ मैं पेड़ के नीचे बैठ गया
कोमल- यहाँ आकर कितनी शांति मिलती है
अवी-उस झरने की तरह यहाँ भी मन शांत हो रहा है
कोमल- उस झरने पे हम फिर कब जाएँगे
अवी-जल्दी जाएँगे
कोमल- वो झरना ,वो जंगल मुझे आज भी मेरे आँखो के सामने दिखता है
और कोमल ने आधा आम खा कर मुझे दिया.
मैं ने सिर्फ़ एक बाइट लिया और कोमल को वो आम वापस कर दिया.
अवी-तुम्हे पता है .इस जंगल मे एक तालाब है.
कोमल- तुम्हे कैसे पता
अवी-मैं जंगल मे गया हूँ
कोमल- कैसा है वो तालाब उस झरने की तरह है
अवी-उतना कुछ खास नही है पर अच्छा है.
कोमल- मुझे दिखाओगे
अवी-दिखा तो दूँगा पर तालाब देख कर मुझे नहाने के मन होता है. और मैं ने बनियान नही पहनी है.
कोमल- बनियान, मैं समझी नही.
अवी-तुम कैसे नहाओगी तालाब मे ,तुम्हे तो मेरी बनियान चाहिए ना ,
कोमल को वो झरने का सीन याद आ गया .जब मैं ने उसको अपने करीब लाकर उसे ब्रा पैंटी मे कर दिया था.
और उसकी खूबसूरती मैं खो रहा था.
अवी-क्या हुआ कहाँ खो गयी.
कोमल- तुम बहुत गंदे हो
अवी-मैं ने क्या किया
कोमल- उस दिन झरने मे तुम ने
अवी-क्या किया मैं ने
कोमल- कुछ नही
अवी-बोलो भी.
कोमल- मैं एक्सट्रा कपड़े लेकर आउन्गि तब दिखाना तालाब
अवी-फिर तो रहने दो,
कोमल-तुम बहुत गंदे हो,
अवी-और तुम बहुत खूबसूरत हो,
अपनी तारीफ सुनकर कोमल शरमा गयी.
अवी-तुम शरमाती हो ना तो और भी हसीन लगती हो
कोमल के गाल शरम के मारे लाल हो गये
अवी-तुम्हारी गाल की लाली को देख कर सूरज भी लाल हो गया,
इतना ना शरमाओ वरना सूरज तुम्हे देख कर शरमा कर छुप जाएगा.
कोमल से अब बर्दास्त नही हो रहा था. कोमल मुझसे आँखे नही मिला पा रही थी.
जिस से कोमल ने अपना चेहरा मेरी बाहों मे छुपा दिया.
और मेरे चेस्ट पे मुक्का मारने लगी.
अवी-क्या हुआ. मुझे मार क्यूँ रही हो.
कोमल-तुम
अवी-मैं
कोमल- मुझे आम खाना है. (कोमल ने बात बदल दी)
अवी-आम ,चलो ढूँढते है.तुम दिखाना मैं तोड़ दूँगा.
कोमल-चलो
कोमल के साथ मैं बगीचे मे पके हुए आम ढूँढने लगा.
कोमल मुझे पेड़ पर पका हुआ आम दिखाती और मैं तोड़ देता.
कभी इस पेड़ पे तो कभी दूसरे पेड़ पर मुझे चढ़ा देती.
और मुझे मंकी मंकी बोल कर छिडाने लगती.
कोमल को मुझे छिडाने मे मज़ा आ रहा था.
पता नही पर क्यूँ ,मुझे कोमल के चेहरे पे खुशी देख कर सुकून मिलता है. एक अलग आनंद प्राप्त होता है
कोमल की कोमलता के सामने सब कुछ कुर्बान
कोमल है ही इतनी प्यारी की फॅमिली मे सब उसको इतना प्यार करते हैं. कभी कोई उसे डाँट ता नही है.
कोमल ने मुझे आम के बगीचे के ज़्यादातर पेड़ पर चढ़ा ही दिया.
एक बार तो पका हुआ आम ना होने के बाद भी मुझे पेड़ पर चढ़ा दिया .और हँसने लगी.
कोमल- वो उस पेड़ पे एक आम है
अवी- कहाँ है मुझे नही दिख रहा
कोमल- तुम पेड़ पे जाओ मैं दिखाती हूँ
अवी- कोई शरारत तो नही कर रही
कोमल- तुम्हे शरारत की पड़ी है मुझे आम खाना है
और मैं पेड़ पे चढ़ गया
अवी- कहाँ है आम
कोमल- थोड़ा और उपर
मैं और उपर चला गया
अवी- कहाँ है पका हुआ आम
कोमल- उल्लू बनाया , वहाँ कोई पका हुआ आम नही है
अवी- कोमल
कोमल-तुम तो उल्लू बन गये
और कोमल मुझ पे हँसने लगी
10 12 साल के बच्चे की तरह मुझे उल्लू बना कर हँस रही थी.
मैं भी उसके साथ हँस कर खुद के उल्लू बन ने का मज़ा लेने लगा.
पेड़ से नीचे उतर कर मैं कोमल के पीछे भागने लगा.
कोमल मोरनी की तरह बगीचे मे नाचते हुए भाग रही थी.
कोमल को इस तरह लाइफ को एंजाय करते हुए देख कर मैं ने ये हसीन पल केमरे मे क़ैद कर लिए.
कोमल एक आज़ाद पंछी की तरह खुद को आज़ाद महसूस कर रही थी.
बगीचे को अपना घर समझ कर बिना किसी फिकर के घूम रही थी.
जब वो थक गयी तो मैं उसे अपने पीठ पर लेकर बगीचा घूमने लगा.
कोमल- अवी तुम तक जाओगे ,
अवी-तुम्हारा वेट ही क्या है.
कोमल- वो पहलवान रहने दो ,तुम भी पेड़ पर छाड़ कर थक गये होगे.
अवी-पहले मंकी ,फिर उल्लू बना दिया. अब गधा भी बनने दो
कोमल- गधा फिर कभी बन जाना. मुझे नीचे उतारो ,मुझे आम खाने है
अवी-कोई बहाना नही चलेगा.
कोमल- अवी मैं इतनी भी नही थकि हूँ ,
मैं ने कोमल को अपने पीठ से नीचे उतर दिया.
अवी-आ गये हम खेत मे वापस
कोमल- तुम ने मेरी बात नही मानी.
अवी-बाते बाद मे करेंगे पहले पानी पीते है .मैं तो थक गया .कितनी मोटी हो तुम
कोमल- क्या है.
अवी-कितनी मोटी हो तुम, मेरी पीठ दर्द कर रही है
कोमल- मोटी ,रूको अभी दिखाती हूँ
और कोमल मेरे पीछे पीछे भागने लगी. और मैं उसे इसी तरह घर3 ले आया.
चाचा को देखते ही कोमल रुक गयी .और चुप चाप जाकर मेरे लिए पानी लेकर आ गयी.
पानी पीने के बाद हम आम खाते हुएचाचा के साथ बाते करने लगे.
फिर मैं कुछ आम चाची केलिए औरकॉमल बुआ के लिए लेकर घर आ गयी.
इस सेशन का पहला आम खा कर चाची खुश हो गयी.