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मैं और मेरा परिवार

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फ्लॅशबॅक 856

शालिनी की बात ही अलग थी

प्यार का दूसरा नाम थी शालिनी

किसी को भी बड़े प्यार से समझाती है

शालिनी की सोच और समझदारी की गाँव मिसाल देते है

शालिनी के पिताजी तो अपनी लाडली पे अपनी जान कुर्बान करते थे

शालिनी की माँ बस शालिनी की शादी करवाना चाहती है

पर शालिनी को अपने राजकुमार का इंतज़ार था

शालिनी को ऐसे जीवन साथी की तलाश मे थी जो उसको इतना प्यार दे कि वो सब कुछ भूल जाए , यहाँ तक कि वो कौन है वो भी भूल जाए

शालिनी अपनी भाभी को अपनी फ्रेंड अपनी बहन मानती थी

दोनो की बहुत बनती थी

शालिनी की भाभी को तो अपने बच्चों की टेन्षन नही थी

क्यू कि उनके बच्चों का ध्यान शालिनी रखती थी , शालिनी फिर तो समझ लो की टेन्षन लेने की बात नही है

शालिनी पढ़ाई मे भी काफ़ी तेज़ थी

बी.ए किया था उसने

उसको तो ऑफर आया था टीचर बनके का पर शालिनी को अपने गाँव से दूर जाने का मन नही हो रहा था तो उसने ऑफर ठुकरा दिया

शालिनी को तो शादी से पहले पूरा समय अपने फॅमिली को देना था

और शादी के बाद अपने ससुराल को पूरा समय देना चाहती थी

अब तो शालिनी खुशी ख़ुसी जीना चाहती थी

और जी भी रही थी

अपने पिताजी के साथ मूवी देखने जा रही है

मोंटू सोनू तो अपनी बुआ के साथ ही रहते थे

शालिनी को आज मूवी देखने का दिल किया तो पिताजी उसको शहर लेके जा रहे थे

शहर आते ही शालिनी मूवी का मज़ा लेने लगी

शालिनी के पिताजी- शालिनी

शालिनी - पिताजी मूवी देखने दीजिए

शालिनी के पिताजी- शालिनी मुझे तुमसे कुछ पूछना था

शालिनी - जी

शालिनी के पिताजी- तुमने शादी का क्या सोचा है

शालिनी - पिताजी आप भी शुरू हो गये

शालिनी के पिताजी- बेटा तुम्हारी उमर बढ़ रही है

शालिनी - तो क्या हुआ पिताजी , अभी तक मुझे पसंद आए ऐसा लड़का आप तो लेकर नही आए

शालिनी के पिताजी- तूने सबको रिजेक्ट रखने का फ़ैसला जो किया है

शालिनी - पिछली बार जिस लड़के को लाए थे वो तो एक नंबर का ठरकी था, वो तो भाभी पे बुरी नज़र डाल रहा था ,आप ऐसे लड़के देख रहे है

शालिनी के पिताजी- ग़लती से उसको बुला लिया था

शालिनी - आप ढूँढते रहिए अगर पसंद आया तो शादी कर लुगी

शालिनी के पिताजी- तू बता ना तुझे कैसा लड़का चाहिए मैं वैसा लड़का लेकर आउगा

शालिनी - मुझे तो ऐसा लड़का चाहिए जिसके कुछ सपने हो और कुछ सपने हम.मिलके देखे , और मैं उसके साथ मिलके वो सपने पूरे करू ,

शालिनी के पिताजी- मेरी तो कुछ समझ मे नही आया

शालिनी - मुझे तो जेंटेल्मन लड़का चाहिए ,

शालिनी के पिताजी- शहर वाला लड़का चाहिए पहले क्यू नही बताया

शालिनी -मुझे तो ऐसा लड़का चाहिए जिसका दिल गाँव की मीट्टी से बना हो

शालिनी के पिताजी- ये क्या था

शालिनी - मुझे तो ऐसा ही लड़का चाहिए

शालिनी के पिताजी- अच्छे से बताना

शालिनी - वो मुझसे ज़्यादा पड़ा लिखा हो , जेंटलमेन हो , और दिल का अच्छा हो

शालिनी के पिताजी- और कुछ

शालिनी - और हाँ , मुझे ऐसे लड़के से शादी करनी है जिसकी बड़ी फेमिली हो हमारे जैसी फॅमिली हो , एक ननद एक देवर भी चाहिए वरना मैं तो भोर हो जाउन्गि अपने ससुराल मे

शालिनी के पिताजी- तुझे लड़का मिल गया इतना काफ़ी हैना फिर ये बाकी के क्या चक्कर है

शालिनी - पिताजी देखिए ना , भाभी को मेरी जैसी ननद मिली है तो वो कितनी खुश है , मुझे भी ऐसी ही ननद चाहिए जो मेरी फ्रेंड बन कर रहे ,

शालिनी के पिताजी- तूने तो मुझे मुसीबत मे फसा दिया है

शालिनी - आपने पूछा और मैं ने बता दिया

शालिनी के पिताजी- ये भी बता दे सास ससुर चाहिए कि नही

शालिनी - मुझे नही चाहिए सास ससुर

शालिनी के पिताजी- इसके लिए तो तूने मना कर दिया

शालिनी - मुझे माँ और पिताजी चाहिए

शालिनी के पिताजी- मतलब तुझे शादी नही करनी है

शालिनी - ऐसा मैं ने कब कहा

शालिनी के पिताजी- फिर तेरी सारी इच्छा पूरी होगी ऐसा लड़का मिलना मुश्किल है

शालिनी - पर नामुमकिन नही है

शालिनी के पिताजी- पर ऐसा लड़का कहाँ मिलेगा

शालिनी - माँ ने कहा था कि भगवान सब के लिए एक जीवन साथी बनाता है मेरे लिए भी किसी ना किसी को बनाया होगा

शालिनी के पिताजी- वो तो ऐसे ही कहाँ होगा

शालिनी - ऐसी ही कैसे , ऐसा होता है , बस आप मेरे जीवन साथी को ढूँढ लीजिए

शालिनी के पिताजी- अब तो ढूँढना होगा

शालिनी - और हाँ 3 साल मे नही मिला तो फिर आप जिस से कहेंगे उस से शादी कर लुगी

शालिनी के पिताजी- ऐसे कैसे किसी से भी शादी करेगी ,, अब तो तेरे लिए तेरा मनपसंद लड़का ढूँढ कर रहूँगा

शालिनी - सच

शालिनी के पिताजी- मेरी बेटी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ

शालिनी - फिर क्या है लग जाइए काम पे

शालिनी के पिताजी- भगवान का नाम लेकर लग जाता हूँ काम पे

शालिनी - माँ को मत बताना

शालिनी के पिताजी- तुम्हारी माँ को तो अच्छा लगेगा ये सुनकर की तुमने अपने राजकुमार के बारे मे बताया है

शालिनी - अगर माँ को पता चल गया तो मैं माँ को कल्लू पहलवान के नाम से परेशान कैसे करूगी

शालिनी के पिताजी- तू क्यूँ अपनी माँ के पीछे पड़ी है

शालिनी - मुझे मज़ा आता है

शालिनी के पिताजी- वो तो ठीक है पर तेरी माँ कल्लू पहलवान के नाम से नफ़रत करने लगी है

शालिनी - कुछ नही होता , माँ को भी पता है मैं बस चिड़ा रही हूँ

शालिनी के पिताजी- जैसा तू ठीक समझे , मैं आज से लड़का ढूँढने मे लग जाता हू

शालिनी - जी

शालिनी के पिताजी- वैसे तुम्हारी भाभी का भाई कैसा रहेगा ,

शालिनी- क्या कहा

शालिनी के पिताजी-बता ना तेरे भाभी का भाई कैसा है

शालिनी - भाभी का भाई , मुझे नही पता

शालिनी के पिताजी- देख दिखने मे जेंटलमेन है , तेरी भाभी तेरी ननद बनेगी

शालिनी - हाँ ,है तो अच्छा

शालिनी के पिताजी- और उसकी फॅमिली हमारी जैसी है

शालिनी - पर उसका दिल कैसा है उसके सपने क्या है ये मुझे नही पता

शालिनी के पिताजी- वो भी देख लेंगे तू हाँ तो कर मैं जल्दी उसे ही बुला लूँगा

शालिनी - देख लेंगे , पर फाइनल मैं करूगी

शालिनी के पिताजी- हाँ हाँ, तेरी मर्ज़ी के बिना तेरे भाई की शादी नही की थी तो तेरी कैसे करूँगा

शालिनी - बुला लीजिए

शालिनी के पिताजी- ये सुनकर तेरी भाभी और तेरी माँ खुश हो जाएगी

शालिनी - मतलब आप ने पहले ही बात की है

शालिनी के पिताजी- हाँ , पर सोचा कि पिछले वाले लड़के की तरह गड़बड़ ना हो इस लिए तेरी पसंद पूछ ली

शालिनी - ठीक है बुला लीजिए

शालिनी के पिताजी- तेरी माँ तेरे इस फ़ैसले खुश होगी

शालिनी - अब मूवी देखु

शालिनी के पिताजी- ऐसा क्या है मूवी मे

शालिनी - देखो ना पिताजी हीरो एक गाँव से शहर जाता है और अपनी मेहनत से कितना बड़ा आदमी बन गया है ,

शालिनी के पिताजी- देखना तेरे लिए भी ऐसा ही राजकुमार आएगा

शालिनी - फिर तो मैं उसी से शादी कर लूँ

और शालिनी मूवी देखने लगी

शालिनी ने अपने पिताजी को अपने जीवन साथी कैसा चाहिए वो बता दी

पिताजी खुश थे अब वो शालिनी के लिए जीवन साथी ढूँढ सकते है

शालिनी की भी शादी हो जाएगी

मोंटू सोनू तो पॉपकॉर्न खाते हुए मूवी देख रहे थे

शालिनी अपनी दुनिया मे खुश थी

उसके लिए जन्नत उसका घर था उसका गाँव था

इधर जयसिंघ के पिताजी ठाकुर के साथ लड़की ढूँढने मे लगे हुए थे

कभी इस गाँव मे तो कभी उस गाँव मे

लड़किया देख देख कर ठाकुरजी थक गये थे

पर पिताजी को उनके पसंद की लड़की नही.मिली

15 दिन तो कब के गुजर गये

पर पिताजी इस बार खुश खबरी घर लेकर जाएँगे ऐसा सोच लिया था

ठाकुर अपने दोस्त का पूरा साथ दे रहे थे

पिताजी ऐसे ही लड़की को ढूँढते हुए सिटी की तरफ जा रहे थे

वही जहाँ शालिनी अपने पिताजी के साथ मूवी देखने आई थी
 
फ्लॅशबॅक 857

शालिनी मूवी देखने मे बिज़ी हो गयी

शालिनी के पिताजी को अब शालिनी के लिए लड़का ढूँढने मे आसानी होगी

अब वो शालिनी की माँ से बात कर पाएँगे

शालिनी की माँ की टेंशन ख़तम हो जाएगी

मूवी ख़तम हो गयी

शालिनी - पिताजी मूवी बहुत अच्छी थी

शालिनी के पिताजी- तू कितनी मूवी देखती है , अगर शादी के बाद मूवी देखने को नही मिला तो

शालिनी -वो मैं देख लुगी , तभी तो कहा कि मुझे ननद या देवर चाहिए जो मूवी देखने को ले जाए

मोंटू- दादा जी मूवी हो गयी अब हमे आइस क्रीम चाहिए

सोनू - मुझे भी

शालिनी - पिताजी मुझे भी चाहिए

शालिनी के पिताजी- तू भी बच्ची बन गयी मोंटू सोनू के साथ

शालिनी - चलो ना पिताजी

शालिनी ने अपने भतीजों के साथ आइस क्रीम खा ली

शालिनी के पिताजी- अब चले गाँव

शालिनी - पिताजी पैदल चलते है

शालिनी के पिताजी- 4 किमी है गाँव

शालिनी - पिताजी रास्ते मे बैलगाड़ी मिल जाएगी , बस से तो हम रोज जाते है

शालिनी के पिताजी- मैं तो चल जाउन्गा पर सोनू का क्या

शस्लिनी - सोनू को मैं गोद मे लेती हूँ

मोंटू - मुझे और आइस क्रीम चाहिए तभी आउन्गा

शालिनी - गाँव जाके चॉक्लेट दूँगी

शालिनी हमेशा कुछ नया करने का सोचती है

कभी बस से जाती तो कभी पैदल तो कभी बैल गाड़ी तो कभी कार से ,

कुछ ना कुछ नया करती है

घर पे कार होने के बाद भी आज बस से मूवी देखने आई थी और अब पैदल गाँव जाने का सोच रही थी

आज शालिनी को आम तोड़ने का दिल कर रहा था

और पैदल जाने से रास्ते मे आम का खेत था जिस के आम तोड़ने थे शालिनी को

पिताजी को ये बात पता थी जिस से पिताजी ने हाँ कर दी

शालिनी पिताजी पैदल पैदल गाँव जाने लगे

मोंटू - दादा जी हम बस से क्यूँ नही जा रहे है

शालिनी - मोंटू पता है रास्ते मे आम का खेत है ,

मोंटू- फिर तो जल्दी चलिए , मुझे आम तोड़ने है

शालिनी- मुझे भी , वो देख आम का खेत

और शालिनी और मोंटू भाग कर खेत मे जाने लगे

शालिनी के पिताजी- ये शालिनी भी ना , कभी कभी बच्ची बन जाती है

पिताजी भी आम के खेत मे चले गये

शालिनी खुद पेड़ पे चढ़ कर आम तोड़ने लगी

और सोनू आम जमा करने लगा

शालिनी के पिताजी के ज़मींदार होने से कोई उनको रोकेगा क्यूँ

शालिनी तो आम खा भी रही थी और और घर लेने जाने को जमा कर रही थी

पिताजी अपने बेटी को मस्ती करते हुए देख कर खुश हो गये

शालिनी पेड़ के उपर थी और आम तोड़ रही थी

अचानक एक जोरदार आवाज़ हुई

शालिनी ने रोड की तरफ देखा तो एक कार ने एक साइकल वाले को उड़ा दिया

शालिनी -पिताजी

और शालिनी जल्दी से नीचे उतर गयी

शालिनी - पिताजी रोड पे आक्सिडेंट हुआ है

शालिनी के पिताजी- तुझे क्या है तू आम तोड़ , कोई और उसकी मदद कर देगा

शालिनी - पिताजी ये आप क्या बोल रहे है ,वो मर जाएगा

शालिनी के पिताजी-होगा कोई , तू उस लफडे मे मत पड़

शालिनी - क्या पता कोई अपना गाँव का हो क्या पता अपने घर का हो , क्या पता मेरा भाई हो , फिर भी आप ऐसा कहते हैं

पिताजी - चल मेरी माँ , तुम दोनो यही रूको

मोंटू और सोनू को आम के खेत मे रोक कर शालिनी के साथ रोड पे आ गये

रोड पे वो साइकल वाला खून से लत्पथ पड़ा हुआ था

वो तड़फ़ रहा था

शालिनी - पिताजी कुछ कीजिए ना

शालिनी के पिताजी- अगर हमने हाथ भी लगाया तो पोलीस हमे पकड़ लेगी

शालिनी - पर पिताजी हम उसको ऐसे छोड़ नही सकते

शालिनी के पिताजी- तुझे डर नही लग रहा ये सब देख कर

शालिनी - पिताजी मुझे उस आदमी की फिकर हो रही है , कुछ कीजिए ना

शालिनी के पिताजी- मैं क्या करूँ

शालिनी ने अपना दुपट्टा निकाल कर उस साइकल वाले के सर पे लगा दिया

पिताजी - शालिनी बिना वजह तू मुसीबत मे फस जाएगी

.

शालिनी- पिताजी मैं इसे ऐसे हालत मे छोड़ कर नही जा सकती , अगर आज मैं ने इसकी मदद नही की तो मुझे ये बात जीने नही देगी

शालिनी के पिताजी- कर जो करना है

शालिनी - वो कार आ रही है उसको रोकते है , हॉस्पिटल लेकर जाएँगे

ठाकुरजी- योगेंद्रसिंघ वो देख सामने किसी का आक्सिडेंट हुआ है

पिताजी - किसीने उड़ा दिया होगा

ठाकुरजी- वो देख एक आदमी और एक लड़की खड़ी है वहाँ पर

पिताजी - उस आदमी के रिस्तेदार होंगे

ठाकुरजी- ये लड़की तो रोड के बीच मे आकेर खड़ी हो गयी है

पिताजी - वो शायद मदद माँग रही है

ठाकुरजी- क्या करूँ

पिताजी- रोक दे , देखते है क्या चक्कर है

ठाकुरजी ने कार रोक दी

शालिनी कार रोकते ही कार के पास आ गयी

शालिनी- हमा

शालिनी- हमारी मदद कीजिए ,उस साइकल वालो को कोई उड़ा कर भाग गया है

पिताजी - तुम जानती नही इस आदमी को

शालिनी - नही , पर इस से क्या फ़र्क पड़ता है , इंसानियत के नाते तो ये मेरा भाई हो गया

पिताजी ये सुनते ही शालिनी को देखते रह गये

शालिनी के पिताजी- शालिनी क्या हुआ

शालिनी- एक मिनिट पिताजी

शालिनी- इसकी मदद कीजिए आपको जन्नत मिल जाएगी

ठाकुरजी- जान ना पहचान , ऐसे कैसे मदद कर दे , तुम्हारा भाई होता तो ज़रूर ले जाते

शालिनी- ऐसे तो ये मर जाएगा

पिताजी - हम मदद करेंगे

ठाकुरजी- अबे तू ये क्या बोल रहा है

पिताजी - तू चुप कर , चलो उसको कार मे लेकर आते है

शालिनी- आप का बहुत बहुत शुक्रिया

और पिताजी शालिनी के साथ उस साइकल वाले के पास आ गये

पिताजी- आप कौन

शालिनी के पिताजी- मैं शालिनी का पिता हूँ

पिताजी- (शालिनी नाम है ) चलिए इसको कार मे डाल कर हॉस्पिटल लेकर जाते है

शालिनी के पिताजी- पर पोलीस वो तो हमे गुनहगार समझ लेगी

पिताजी- पोलीस को मेरा दोस्त संभाल लेगा

पिताजी और शालिनी के पिताजी ने उस साइकल वाले को कार मे डाल दिया

शालिनी के पिताजी- आप उसको हॉस्पिटल लेकर जाइए

पिताजी- हम यहाँ नये है हमे यहाँ के बारे मे कुछ पता नही है अगर आप मे से कोई चलता तो

शालिनी- मैं चलती हूँ

शालिनी के पिताजी- शालिनी , कुछ तो सोच कर बोला कर

और शालिनी के पिताजी शालिनी को साइड मे ले गये

शालिनी के पिताजी- तू पागल है क्या किसी भी अंज़ान आदमी के साथ जाने का बोल रही है

शालिनी - पिताजी वो मदद करने को तय्यार हुए इस बात से पता चलता है कि वो अच्छे आदमी है ,

शालिनी के पिताजी- तू लोगो को जानती नही ये दुनिया बहुत खराब है

शालिनी - मैं इसका सामना कर सकती हूँ ,आप मोंटू और सोनू के साथ गाँव जाइए मैं जल्दी आ जाउन्गी

शालिनी के पिताजी- तू घर जा मैं उनके साथ जाता हूँ

शालिनी - आप रहने दीजिए आप से नही होगा , अब बाते करने मे टाइम वेस्ट किया तो वो मर जाएगा

शालिनी के पिताजी- मैं गाँव जाते ही कार से हॉस्पिटल आ जाउन्गा

शालिनी - ये ठीक रहेगा

पिताजी- क्या हुआ

.शालिनी- चलिए मैं आती हूँ हॉस्पिटल मे

और शालिनी पिताजी और ठाकुरजी के साथ हॉस्पिटल आ गयी

.पिताजी शालिनी को देखते ही रह गये

एक अंजान आदमी की मदद करना

पोलीस की टेन्षन लिए बिना

शालिनी से प्रभावित हुए पिताजी

पिताजी तो मिरर मे शालिनी को देख रहे थे

ठाकुरजी अपने दोस्त के सामने चुप चाप कार चला रहे थे

पिताजी - तुम्हारा नाम शालिनी है

शालिनी - हाँ ,और आपका

स्पिटाजी - मैं योगेंद्रसिंघ और ये प्रतापसिंघ

शालिनी - आप दोनो भाई हो

पिताजी - नही तो

शालिनी - सिंग सिंग सुना तो लगा आप भाई हो

पिताजी - हम दोस्त है , तुम अच्छा काम कर रही हो

शालिनी - राइट

पिताजी - क्या

शालिनी - राइट टर्न पे हॉस्पिटल है

और हॉस्पिटल आ गया

पर हॉस्पिटल मे डॉक्टर बिना पोलीस केस के पेशेंट को अड्मिट नही कर रहे थे

शालिनी- कैसे डॉक्टर हो आप , वो वहाँ तड़फ़ रहा है और आप पोलीस का इंतज़ार कर रहे है

डॉक्टर- ये पोलीस केस है

शालिनी- तो क्या ये ऐसे ही मरता रहेगा

डॉक्टर- सॉरी मैं कुछ नही कर सकता

पिताजी- तुम डरो मत मैं कुछ करता हूँ

शालिनी- जो करना है थोड़ा जल्दी करेंगे

पिताजी- प्रतापसिंघ डॉक्टर को देख लो

ठाकुरजी- तू भी ना कुछ भी करवाता है मुझसे

और ठाकुर ने डॉक्टर से बात की और डॉक्टर उस साइकल वाले को ओपरेशन थियेटर मे ले गये

और शालिनी रिलॅक्स हो गयी

शालिनी- आप का बहुत बहुत शुक्रिया

फिराजी- इतनी जल्दी क्या है शुक्रिया की

शालिनी- क्या मतलब

पिताजी- पोलीस आएगी तो उनको भी देखना होगा , तुम पानी पी लो और खुद को शांत करो

शालिनी - आप नही होते तो मुश्किल होता उस आदमी को बचना

पिताजी - मैं ने कुछ नही किया जो किया तुमने किया , बिना पहचान के उसकी मदद की

शालिनी - वैसे आप यहाँ के है नही ऐसा कहा था आपने

पिताजी - हम तो यहाँ ऐसे ही घूमने आए थे , और ये सब हो गया

शालिनी - सॉरी मेरी वजह से आपको तकलीफ़ हुई

पिताजी - कोई बात नही , वैसे तुम जैसी लड़की मिलना मुश्किल है

शालिनी - मैं समझी नही

पिताजी - मेरा मतलब कि आदमी ऐसा आक्सिडेंट देख कर डर कर मदद नही करते और तुमने लड़की होकर बिना डरे मदद कर दी

शालिनी - मैं उसको तड़फ़्ते हुए देख नही सकती थी , अगर मैं उसकी मदद नही करती तो मैं ज़िदगी भर इस बोझ के साथ जी नही पाती

पिताजी - तुम्हारे माता पिता ने अच्छे संस्कार दिए है तुम्हे

शालिनी - जी

डॉक्टर- वो बच गया , आपने सही समय लाया उसको

पिताजी- अब तो तुम इस बोझ से आज़ाद हो गयी ,वो बच गया

शालिनी- अब अच्छा लग रहा है

.ठाकुरजी- मैं ने पोलीस को समझा दिया है .

पिताजी- लो हो गयी तुम्हारी सारी प्राब्लम सॉल्व

शालिनी - आपका बहुत बहुत शुक्रिया

पिताजी - बस शुक्रिया से काम चलाना पड़ेगा

शालिनी - क्या

पिताजी - मुझे तो लगा तुम अपने घर बुला कर टी पिलाओगी

शालिनी - क्यूँ नही ज़रूर ,

पिताजी - तो चले तुम्हारे घर , तुम्हारे पिताजी तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे

शालिनी - हाँ चलिए ,मेरे कपड़े भी खराब हो गये है

पिताजी - चलो पहले तुम्हारे लिए नये कपड़े ले देता हूँ

शालिनी - नही नही मैं ठीक हूँ

पिताजी - ऐसे कैसे , इतनी प्यार लड़की खून के कपड़ो मे अच्छी नही दिखती

शालिनी -मैं आपसे कपड़े कैसे ले सकती हूँ

पिताजी - मुझे अपने पिताजी समझ लो , फिर तो एक पिता से एक बेटी कपड़े ले सकती है

ठाकुरजी- तू कर क्या रहा है

पिताजी - तू चुप रह

शालिनी - चलिए , पर आपको भी मैं खाना खाए बिना जाने नही दूँगी

पिताजी - फिर तो कपड़ो के पैसे वसूल हो जाएँगे

और पिताजी ने शालिनी को नया ड्रेस दिया

और शालिनी को लेकर उसके गाँव आ गये

ठाकुरजी एक ड्राइवर की तरह कार चला रहे थे

और पिताजी शालिनी के साथ बात कर रहे थे

शालिनी को भी पिताजी के साथ बात करना अच्छा लग रहा था
 
फ्लॅशबॅक 858

शालिनी ने एक अंजन आदमी की मदद की

पिताजी ये देख कर काफ़ी प्रभावित हुए शालिनी से

शालिनी को भी पिताजी की बातों से उनका स्वाभाव पता चला

पिताजी और शालिनी बाप बेटी जैसे बाते करते हुए गाँव जाने लगे

ठाकुरजी चुप चाप कार चलाते हुए उनकी बात सुनने लगे

ठाकुरजी समझ गये कि पिताजी के दिमाग़ मे क्या चल रहा है

चलो अच्छा है एक उम्मीद की किरण तो दिखी

पिताजी ने जानबूझ कर टी पीने की बात कही ताकि शालिनी के घर को देख सके

और शालिनी के माता पिता से मिल सके

और बाते करते करते कार शालिनी के घर के सामने रोक दी

शालिनी के पिताजी अपनी कार को स्टार्ट करने की कॉसिश कर रहे थे पर दूसरी कार घर के सामने देख कर कार के पास आगये

शालिनी के पिताजी- शालिनी मैं आ ही रहा था तुम्हारे पास

शालिनी- पिताजी सब ठीक हो गया , इन्होने सब संभाल लिया ,

शालिनी के पिताजी- क्या हुआ

शालिनी- वो बच गया अब ख़तरे से बाहर है

शालिनी के पिताजी- जा अपनी माँ से मिल ले , उसको जब से पता चला वो भगवान के सामने बैठी है

शालिनी- अभी जाती हूँ माँ के पास ,, आप कार मे क्यूँ बैठे है आइए ,

शालिनी के पिताजी- तुम जाओ मैं इनको लेकर आता हूँ

शालिनी घर मे चली गयी

शालिनी के पिताजी- चलिए टी पीते है

पिताजी- चलिए

पिताजी ठाकुर के साथ शालिनी के घर मे आ गये

शालिनी के पिताजी ने उनको बैठा दिया और अपनी बहू को बताने गये कि टी बना दो

पिताजी तो शाकिनी को घर को अच्छे से देखने लगे

फॅमिली की फोटो देख कर समझ गये कि एक बिग फॅमिली है

ठाकुरजी- क्या सोच रहा है

पिताजी - कुछ नही

ठाकुरजी- तेरा दोस्त हूँ

पिताजी - शालिनी अच्छी लड़की है

ठाकुरजी- दिल की अच्छी है

पिताजी - सुलझी हुई लड़की है

ठाकुरजी- तो बात कर

पिताजी - अभी नही ,

ठाकुरजी- क्यूँ ?

पिताजी - मैं बिना बताए उसकी खूबिया देखना चाहता हूँ

ठाकुरजी- जैसा तू ठीक समझे

पिताजी - तू इन्फोर्मेशन निकाल

ठाकुरजी- कल तक सब पता लगा लूँगा

पिताजी - वैसे ये तो ज़मींदार लग रहा है

ठाकुरजी- वो तो है , पर तू टेन्षन मत ले मैं भी ठाकुर हूँ , और तू भी कुछ कम नही है

पिताजी - शालिनी ,

ठाकुरजी- जयसिंघ

पिताजी -तू कुछ नही बोलेगा , मुझे अपने तरीके से हॅंडल करने दे

ठाकुरजी- ये लास्ट है ऐसा समझ कर बात करना

पिताजी - मेरी तलाश ख़तम हो गयी है , बस कुछ बाते चेक करनी है

शालिनी के पिताजी- माफ़ करना , मैं ने कुछ ज़्यादा देर कर दी

शालिनी का भाई- नमस्ते , मैं शालिनी का बड़ा भाई हूँ

ठाकुरजी- नमस्ते

पिताजी - आप गाँव के ज़मींदार हो

शालिनी के पिताजी- हाँ ,, मेरे पिताजी भी ज़मींदार थे , और मेरा बेटा भी ज़मींदार बनेगा

पिताजी - आप को एक बेटा और एक बेटी है

शालिनी के पिताजी- नही नही , मेरे बाकी के बेटे और बेटियाँ सिटी मे रहते है , यहाँ सिर्फ़ मेरा बड़ा बेटा और शालिनी बेटी है

पिताजी - शालिनी शायद आपकी छोटी बेटी है

शालिनी के पिताजी- हाँ , छोटी बेटी है ,पर सबकी नानी है ,

पिताजी - बड़ी प्यारी बेटी है आपकी

ठाकुरजी- और बहादुर भी

शालिनी के पिताजी- आप ना होते तो शालिनी को मुश्किल हो जाती , शालिनी ने बताया कि आपने बहुत मदद की

पिताजी - वो तो मेरा दोस्त ठाकुर है , उसने मदद कर दी

शालिनी के पिताजी- आप ठाकुर हो , कहाँ से है आप

त्सकुर- प्रतापसिंघ ठाकुर नाम है मेरा

शालिनी के पिताजी- हाँ याद आ गया , आपके बारे मे बहुत सुना है चलो आज दर्शन हो गये , आपके पिताजी एक बार हमारे यहाँ आए थे , मेरे पिताजी को जानते थे वो

ठाकुर- फिर तो हमे भी पहचान बढ़ानी होगी ,

शालिनी- क्या बातें हो रही है

और शालिनी टी लेकर आ गयी

शालिनी- लीजिए टी, मैं ने खुद टी बनाई है

पिताजी-तुम टी भी बनाती हो, पर तुम्हारी बहादुरी देख कर लगा कि तुम रशोई घर मे पैर नही रखती होगी

शालिनी- आप को अब मेरे हाथ का खिला खा कर भेजुगी तब आपको पता चलेगा मैं क्या क्या कर सकती हूँ

शालिनी की माँ- शालिनी ऐसे बात नही करते

पिताजी- हमारी बात तो हो चुकी है , खाना खाने की

शालिनी- माँ इन्होने मुझे नया ड्रेस दिया तो मैं ने इनको खाने पे बुला लिया

शालिनी के पिताजी- ये अच्छा किया , वरना सिर्फ़ ड्रेस लेती तो मैं गुस्सा होती

पिताजी - कुछ भी कहिए आपकी बेटी है बहुत प्यारी , पर अब तक आपने इनकी शादी नही की

शालिनी- शादी की बात करेंगे तो खाने मे ज़्यादा मिर्च डालुगी

पिताजी- तुम्हे शादी नही करनी है

शालिनी के पिताजी- आप इसकी बात का बुरा मत मानिए ,इसको हमे छोड़ कर जाना नही है इस लिए शादी का नाम पे गुस्सा होती है

पिताजी- इसमे बुरा क्यू मानना , मेरी बेटी भी ऐसी ही है , वो तो शादी होते ही अपने कमरे मे बंद हो गयी और बोल रही थी मैं उसके ससुराल चलूँगा तभी वो दूल्हे के साथ जाएगी (पूजा)

शालिनी- अब तो मैं भी ऐसा ही करूगी

शालिनी की माँ- ज़ोर देते हुए शालिनी

शालिनी- माँ , मैं तो बस ऐसे ही

पिताजी- कोई बात नही , पता है मैं ने उसको कैसे मनाया

शालिनी- कैसे

पिताजी - अपनी छोटी बेटी को बड़ी बेटी के साथ ससुराल भेज दिया तब जाके वो तय्यार हुई

शालिनी- बहुत प्यार करती होगी आपकी बेटी आप से

ठाकुर- बहुत , तुम्हारी जैसी है

शालिनी के पिताजी- शालिनी तुम्हे खाना नही बनाना

शालिनी- अभी बनाती हूँ , फिर बात करेंगे

पिताजी- यहीं रोकने का इरादा है

.शालिनी- आप से बात करते रहने का मन करता है , आप पिताजी जैसे बात करते है

पिताजी- अब तो बाते होती रहेगी , मुझे ज़्यादा तेज़ खाना नही पसन्द है

शालिनी- आप खाने के टेन्षन मत लीजिए अभी बनाती हूँ

और शालिनी खाना बनाने चली गयी

शालिनी के पिताजी- लगता है शालिनी ने आपको अपना फ्रेंड बना लिया

पिताजी - आपको कैसा पता

शालिनी के पिताजी- वो ऐसी ही है , जिसको फ्रेंड बनाती है उसके साथ नया रिस्ता जोड़ देती है

पिताजी - वैसे एक बात पुछु

शालिनी के पिताजी- हाँ पूछिए

पिताजी - शालिनी की अब तक शादी क्यूँ नही की

शालिनी के पिताजी- शालिनी से मैं बहुत प्यार करता हूँ और वो भी हमे बहुत प्यार करती है इस लिए वो हमसे दूर नही जाना चाहती है , और दूसरी वजह ये है कि उसको अपने राजकुमार का इंतज़ार है

पिताजी - कैसा राजकुमार चाहिए , अगर मुझे मिल गया तो मैं लेकर आ सकता हूँ

शालिनी के पिताजी- अब ढूँढने की ज़रूरत नही , एक लड़का देखने आ रहा है , मेरी बड़ी बहू का भाई , उसी से शादी हो जाएगी शालिनी की

ये सुनते ही पिताजी को झटका लगा

पिताजी ने कितना कुछ सोच रखा था

पर यहाँ तो सब कुछ टूट गया

अब क्या करेंगे पिताजी

ठाकुरजी ने पिताजी के कान मे कुछ कहा

ठाकुर- बस देखने आ रहा है अभी फिक्स नही हुई है शादी

पिताजी ठाकुर की तरफ देखने लगे

ठाकुर- तू ज़्यादा सोच मत , कल की कल देखेंगे

पिताजी नॉर्मल हो गये

पिताजी - ये तो अच्छी बात है , फिर तो हम सही समय पर आए है

शालिनी के पिताजी- जी हाँ , अगर बात बन गयी तो खुश खबरी मिल जाएगी

शालिनी के पिताजी- वैसे आप ने बताया नही कि आप यहाँ किस काम से आए है

पिताजी ऐसा कुछ बताना चाहते थे जिस से वो शालिनी के घर रोज आ सके और शालिनी के पिताजी खुद उनको बुलाए

पिताजी-मेरा दोस्त यहाँ एक कंपनी खोलना चाहता है , जगह देख रहा था

शालिनी के पिताजी- फिर तो आप सही आदमी से मिले हो , मेरे पास बहुत सी ऐसी ज़मीन है जहाँ कंपनी बना सकते है

ठाकुर- फिर तो आपकी ज़मीन देखनी होगी

पिताजी - आप बाते करो , मैं थोड़ा बाहर घूम कर आता हूँ

शालिनी के पिताजी- आप घूम लो , ठाकुरजी आप तो यहीं कंपनी लगा लीजिए

पिताजी ने उनको अकेला छोड़ दिया

क्यूँ कि उनको शालिनी से बात करनी थी

शालिनी तो रशोई घर मे थी

पिताजी शालिनी के घर को देखने लगे

मोंटू और सोनू आम खा रहे थे आगन मे बैठ कर

पिताजी उनके पास चले गये

पिताजी - तुम शालिनी के भतीजे हो

मोंटू- जी

पिताजी- क्या मैं एक आम लूँ

मोंटू- नही ये हमारे है ,

पिताजी- मेरे घर मे तो इतने सारे पेड़ है आम के ,कि आम पूरा घर भर जाता है

मोंटू- सच , फिर लीजिए आम

पिताजी- ये तो टेस्टी नही है , मेरे यहाँ इस से भी अच्छे आम है

मोंटू ये सुनते ही भाग कर अंदर गया और शालिनी को लेकर बाहर आ गया

मोंटू- बुआ देखो ये कह रहे हैं कि ये आम अच्छे नही है , हमे दूसरे आम चाहिए

शालिनी-ये अपने क्या किया अब तो ये दोनो कुछ नही सुनेगे , अब इनको दूसरे आम चाहिए

पिताजी- मैं तो बस इतना कह रहा था कि मेरे यहाँ आम का बगीचा है

शालिनी- सच

पिताजी- हाँ क्यू तुम्हे आम पसंद है

शालिनी- बहुत पसंद है ,

पिताजी- तो मेरे घर चलोगि ,

शालिनी- एक दिन ज़रूर आउगि ,अभी तो इनको संभालना होगा

पिताजी- मैं कुछ मदद करूँ

शालिनी- मुझे पता है इनको कैसे मनाना है

और शालिनी मोंटू और सोनू को मनाने लगी

शालिनी- ये आम सबसे मीठे है

मोंटू- नही , इन्होने कहा कि ये मीठे नही है

शालिनी- इनको तो कुछ पता नही , तुम सोचो अगर ये आम मीठे नही होते तो मैं पैदल चल कर आम नही तोड़ती

मोंटू- ये तो हमने सोचा ही नही

शालिनी- पता है इनकी टी मे मैं ने नमक डाल दिया था जिस से इनको आम फीके लग रहे है

मोंटू- सच बुआ ,

शालिनी- हाँ अब आम खा लो वरना मैं खा लुगी

और सोनू मोंटू आम खाने लगे

पिताजी - तुम्हारी हर बात मानते है ये दोनो

शालिनी- हाँ , इनके लिए तो मैं बुआ नही माँ हूँ

पिताजी - तो इनकी दो माँ है

शालिनी- मेरी भाभी ने इनकी ज़िम्मेदारी मुझे दी है

पिताजी- तभी दोनो इतने प्यारे है

शालिनी- वैसे आप मुझसे इतने सवाल क्यूँ पूछ रहे हो

पिताजी - तुम मुझे अपनी बेटी की याद दिलाती हो

शालिनी- फिर ठीक है मुझे लगा कि आप मेरी शादी की बात करेंगे

पिताजी - मैं ने सुना है एक लड़का तुम्हे देखने आ रहा है

शालिनी- भाभी का भाई देखने आने वाला है

पिताजी - फिर तो तुम्हारी शादी हो जाएगी

शालिनी- सिर्फ़ देखने आ रहा है मैं शादी नही करने वाली

पिताजी - पर क्यूँ

शालिनी- वो कैसा है वो देखना होगा , मैं बीए पढ़ी हूँ तो वो मुझसे ज़्यादा पढ़ा लिखा होना चाहिए वरना बाद मे ईगो प्राब्लम ही जाती है

पिताजी - जैसे बी ए

शालिनी- हाँ ऐसा ही कुछ , पर आप बताना मत किसी को

पिताजी - क्यूँ ?

शालिनी- मेरा राजकुमार कैसा होगा ये मैं ने सोच रखा है

पिताजी - कैसा होगा

शालिनी- भूल गयी

पिताजी - क्या ?

शालिनी- भूल गयी कि सब्जी गॅस पे रखी है

और शालिनी भाग गयी , और पिताजी रिलॅक्स हो गये , शालिनी की शादी अभी तक फिक्स नही हुई

फिर शालिनी के हाथ का खाना ,

पिताजी के इस टेस्ट ने भी शालिनी पास हो गयी

खाना बहुत अच्छा बना

फिर पिताजी ने शालिनी से फिर मिलने का वादा किया

और वापस ठकुराइन के गाँव आ गये
 
फ्लॅशबॅक 859

पिताजी और ठाकुरजी शालिनी से मिलने के बाद ठकुराइन के गाँव आ गये

पिताजी को शालिनी पहली नज़र मे पसंद आ गयी

शालिनी ने जिस तरह उस आदमी की मदद की उस से तो पिताजी को शालिनी मे अपनी बहू नज़र आने लगी

शालिनी पिताजी के 2, 3 टेस्ट मे पास भी हो गयी

पिताजी - शालिनी बहुत अच्छी लड़की है , साफ दिल की है

ठाकुरजी-तेरे दिमाग़ मे क्या चल रहा है वो बता

पिताजी - तू यहाँ कंपनी खोलेगा

ठाकुरजी-मैं क्यूँ , और मुझे कहाँ फसा रहा है

पिताजी - तेरी वजह से शालिनी के घर जा पाएँगे

ठाकुरजी-तो कंपनी खोलने की ज़रूरत क्या है , तू सीधा सीधा बोलना कि तू शालिनी के लिए अपने बेटे का रिस्ता माँगना चाहता है

पिताजी - अभी नही

ठाकुरजी- अगर शालिनी को वो लड़का पसनद आ गया तो

पिताजी - शालिनी ने कहा है कि वो बस देख रही है

ठाकुरजी-पर तू क्यूँ सच नही बता रहा है

पिताजी - अब तक सारी लड़कियो से डाइरेक्ट सवाल पूछे और कुछ लड़कियो ने ग़लत जवाब दिए और और कुछ ने तो ऐसे जवाब दिए कि उनको हाँ कर दूं पर शालिनी अपने संसकारो से जवाब दे रही है , मैं ऐसे ही सेलेक्ट करना चाहता हूँ शालिनी को

ठाकुरजी-ठीक है जैसा तुझे ठीक समझे

पिताजी - तू बस शालिनी के पिताजी से कॉंटॅक्ट बनाए रख , और मुझे कल तक सारी इन्फो चाहिए

ठाकुरजी-मिल जाएगी , अब कल ही बात करेंगे

और ठाकुरजी ठकुराइन के साथ प्यार करने के लिए चले गये

और पिताजी शालिनी के बारे मे सोचने लगे

शालिनी से पिताजी और मिलना चाहते थे , शालिनी के बारे मे बाते जाना चाहते थे

ठाकुरजी ने सुबह शालिनी और उसके फॅमिली की सारी इन्फो निकाल ली

शालिनी के बारे मे सुनकर पिताजी खुश हो गये

पूरा दिन पिताजी शालिनी के बारे मे सुन रहे थे

शालिनी के घर भी गये जहा पे ठाकुरजी कंपनी खोलने की बात कर रहे थे तो पिताजी शालिनी से बाते करके उसके गुणों के बारे मे पता लगा रहे थे

पिताजी को ये भी पता चल गया कि शालिनी के भाभी का भाई कल शालिनी को देखने आ रहा है

ये बात सुनकर पिताजी को डर भी लग रहा था कि अगर शालिनी ने हाँ कर दी तो

इस वजह से पिताजी रात भर नही सो पाए

सुबह होते ही पिताजी को जल्द से जल्द शालिनी के गाँव जाकर पता करना था कि शालिनी ने हाँ की या ना की

पिताजी - चल जल्दी तय्यारी कर ,हमे शालिनी के गाँव जाना है

ठाकुरजी-नाश्ता तो कर ले

पिताजी - कर जल्दी , मुझे जानना है कि शालिनी ने उस लड़के को पसंद किया कि नही

ठाकुरजी-चलते है

और पिताजी नाश्ता कर के शालिनी के गाँव चले गये

आज शालिनी के घर जाना ठीक नही होगा

शालिनी को लड़का देखने आने वाला है

अगर पिताजी आज वहाँ गये तो वो क्या सोचेंगे

पिताजी गाँव मे रह कर शालिनी के घर पे नज़र रखने लगे

लड़के वाले को आने मे टाइम था

शालिनी अपने घर से बाहर निकली

और शॉप मे जाकर कुछ लेने लगी

पिताजी छुप गये ,

वो शालिनी को शक नही होने दे सकते थे कि वो उसपे नज़र रखे हुए है

ठाकुरजी-तू मुझे जुटे पड़वायेगा

पिताजी - कुछ नही होगा

ठाकुरजी-गाँव वालो को पता चला कि हम लड़की पे नज़र रख रहे हैं तो लोग कुछ नही सोचेंगे कि मैं कौन हूँ , सीधा मारने लग जाएँगे

पिताजी - मेरे लिए इतना नही कर सकता

ठाकुरजी-तेरे लिए तो कुछ भी पर ये छुपा छुपी का खेल मुझे पसंद नही आ रहा है

पिताजी - इसी से सब पता चलेगा

ठाकुरजी-कर जो करना है

पिताजी - शालिनी यहाँ क्यू आई , उसको तो तय्यार होना चाहिए

ठाकुरजी-शाम को आ रहे होंगे लड़के वाले

पिताजी - अब सही बोला ,

पिताजी शालिनी पे नज़र रख रहे थे कि एक चीख सुनकर वो दूसरी तरफ देखने लगे

एक आदमी एक औरत को घर से बाहर निकाल रहा था

ऐसा लग रहा था एक बेटा अपनी बूढ़ी माँ को घर से बाहर निकाल रहा था

उस बढ़ी औरत की बात सुनकर गाँव वाले जमा हो गये

शालिनी भी वहाँ चली गयी

वो बूढ़ी औरत अपने बेटे को बोल रही थी कि उसको घर से मत निकालो

शालिनी ये सब गोर से देख रही थी

पिताजी और ठाकुरजी भीड़ मे जाकर खड़े हो गये

पिताजी देखना चाहते थे कि शालिनी अंजान आदमी की जान बचा सकती है तो

तो अब अपने गाँव की समस्या कैसे सॉल्व करती है , ये शालिनी देख नही पाएगी ,

पिताजी शालिनी की तरफ देख रहे थे

शालिनी उस बूढ़ी औरत की मदद नही कर रही थी

शालिनी बस देख रही थी

इस से पिताजी को अजीब सा लगा

आदमी- निकाल जाओ मेरे घर से

बूढ़ी- बेटा मैं तेरी माँ हूँ

आदमी- तो क्या करूँ , अब मैं तुम्हारा खर्च नही उठा सकता

बूढ़ी- मैं एक कौने मे पड़ी रहूगी मुझे घर से मत निकालो

आदमी- नही तुम यहाँ नही रह सकती

औरत- धक्के मार कर निकाल दो

लगता है ये औरत उस बूढ़ी औरत की बहू होगी

शालिनी अब भी कुछ नही बोल रही थी

गाँव वाले भी देख रहे थे

ठाकुरजी-हम यहाँ क्या कर रहे

पिताजी - मुझे देखना है कि शालिनी क्या करती है

ठाकुरजी-वो क्या करेगी , वो दूसरो के घर के मामले मे क्यूँ पड़ेगी

पिताजी - वही तो देखना है शालिनी क्या करती है

ठाकुरजी-तू देख मैं चला

पिताजी - टाँग तोड़ूँगा यहाँ से कहीं गया तो

ठाकुरजी को वही रुकना पड़ा

वो आदमी अपनी बूढ़ी माँ को धक्के दे कर घर से निकालने लगा

वो बूढ़ी औरत घर के दरवाजे के सामने गिर गयी और घर से ना निकालने की बात कर रही थी

आदमी- तुम्हे समझ नही आ रहा कि तुम यहाँ नही रह सकती

बूढ़ी- बेटा मेरी डोली आई थी इस घर मे अब मेरी अरथी जाएगी , मुझे मत निकाल यहाँ से

औरत- इसको निकाल रहे हो या मैं चली जाउ

आदमी-क्यूँ मेरे घर को तोड़ना चाहती हो , जाओ यहाँ से

बूढ़ी- ऐसा मत कर

आदमी- जा यहाँ से वरना मेरा हाथ उठ जाएगा

बूढ़ी - मुझे मार दे , पर मैं यहाँ से कही नही जाउन्गी

वो आदमी अपनी माँ का हाथ पकड़ खिच कर घर से बाहर निकालने लगा

पर वो बुद्दी अओआर्ट जाने का नाम नही के रही थी

बूढ़ी- तेरे बाप ने अपनी मेहनत से बाँधा है ये घर , तू मुझे एक कौना नही दे सकता

आदमी- नही दे सकता तू कही और जा

बूढ़ी- कहाँ जाउ मैं , मेरी यादे जुड़ी है इस घर से

शालिनी रो रही थी , पर कुछ नही कर रही थी

गाँव वाले भी कुछ नही कर रहे थे

जैसे ये रोज का नाटक हो

पर शालिनी कुछ क्यूँ कर नही रही है इस बात से पिताजी को झटका लगा

आदमी- तू जाती है या

औरत- ये ऐसी नही जाएगी ,

और उस औरत ने उस बूढ़ी औरत के पति की फोटो बाहर फेक दी जिस से वो बूढ़ी औरत उस फोटो को उठाने के लिए भाग गयी

तब तक वो आदमी और औरत घर के अंदर चले गये और डोर बंद कर दिया

उस बूढ़ी औरत के पोते खिड़की से अपनी दादी को आवाज़ दे रहे थे

पर उस आदमी ने खिड़की भी बंद कर दी

अब वो बूढ़ी औरत अपने पति के फोटो के साथ आगन मे रो रही थी

जिस बेटे को इतना प्यार दिया वो घर मे एक कोना नही दे रहा था अपनी माँ को

पूरे गाँव वाले देख रहे थे

पता नही ये कैसा गाँव है कोई मदद करने नही आया

वो बूढ़ी औरत उठ कर डोर को पीटने लगी रोने लगी

पर उसके बेटे और बहू ने डोर नही खोला

वो बूढ़ी औरत रो रो कर अपने बेटे को आवाज़ दे रही थी

और थक कर वो वही बैठ कर रोने लगी अपने पति के फोटो को सीने से लगा कर

गाँव वालो ने एक दूसरे की तरफ देखा

शालिनी की आँखो से आसू निकल रहे थे

पिताजी कन्फ्यूज़ थे कि गाँव का सरपंच भी आगे नही आया

सब शांत होते ही , उस बूढ़ी औरत का रोना कम होते ही शालिनी आगे आई

शालिनी ने उसके कपड़ो का बॅग उठा लिया

और उस बूढ़ी औरत को खड़ा करने लगी

वो बूढ़ी औरत खड़ी होते ही शालिनी के गले लग कर रोने लगी

पिताजी टोटली कन्फ्यूज़ थे

शालिनी उस बूढ़ी औरत को अपने साथ के जाने लगी

और बाकी लोग भी शालिनी के पीछे पीछे जाने लगे

शालिनी उस बूढ़ी औरत को अपने घर ले गयी

बाकी गाँव वाले कुछ देर शालिनी के घर पे रुके और बाद मे अपने अपने घर चले गये

पिताजी - ये हो क्या रहा है

ठाकुरजी-चूतिया गाँव है

पिताजी - मेरी तो कुछ समझ मे नही आया

ठाकुरजी-मुझे लगता है वो घर का मामला होने से कोई कुछ नही बोला

पिताजी - पर पंचायत बुलाते

ठाकुरजी-यहाँ अलग तरह से हॅंडल करते होंगे तभी तो सरपंच भी देखता रहा

पिताजी - पर मेरी कुछ समझ मे नही आया

ठाकुरजी-देखो दुख सबको हुआ , देखा नही सभी औरतें रो रही थी , सभी आदमियों की मुट्ठी बंद थी गुस्से से

पिताजी - तूने कब देखा ये सब

ठाकुरजी-तू बस अपनी बहू को देख रहा था मैं बाकियो को देख रहा था

पिताजी - क्या पता चला तुझे

ठाकुरजी-औरतो का रोना मतलब उनको दर्द हुआ , और आदमियो की मुट्ठी बंद होने का मतलब उनको गुस्सा आया

पिताजी - फिर कुछ किया क्यूँ नही

ठाकुरजी-किसी के घर के मामले मे कोई नही पड़ता ,

पिताजी - सरपंच किस लिए होता है

ठाकुरजी-देखते है आगे क्या होता है

पिताजी - पर शालिनी ने कुछ किया नही और बाद मे उस बूढ़ी औरत को अपने घर लेकर गयी

ठाकुरजी-ये तो वही बताएगी

पिताजी - मैं खुद शालिनी से पूछ लूँगा , चल

ठाकुरजी-कहाँ

पिताजी - कार मे बैठ कर नज़र रखते है

ठाकुरजी-ठीक है ,

पिताजी - और जा कुछ चॉक्लेट ला , हम मोंटू को चॉक्लेट देख कर पूछेंगे कि घर मे क्या हो रहा है

ठाकुरजी- जल्दी शादी ही जाए तेरे बेटे की जिस से मैं आज़ाद हो जाउ

और पिताजी नज़र रखने लगे

शाम मे लड़के वाले आ गये

शालिनी की भाभी की फॅमिली होने से घर का हिस्सा हो गये

अच्छी मेहमान नवाज़ी कर रहे थे

लड़का दिखने मे अच्छा था

शालिनी ने अगर हाँ कर दी तो

ये तो शालिनी की भाभी का भाई है

ना करेगी कैसे , शालिनी अगर पसंद आ गयी तो

पिताजी को बहुत टेन्षन हो रही थी

घर से कोई बाहर नही निकल रहा था कि जिस से पूछ सके

प्रोग्राम हो चुका पर लड़के वाले बाहर नही आए

लगता है आज यहीं रुकेंगे

पर शालिनी ने कहा क्या होगा

सब रिस्तेदार है तो चान्स कम है ना करने के

पर शालिनी ने ना कहा तो उसके पिताजी ये शादी कभी नही होने देंगे

फिर शाम मे मोंटू बाहर आ गया

ठाकुर ने चॉक्लेट दे कर मोंटू से पूछा कि अंदर क्या हुआ

तो मोंटू ने कहा सब खुश है

ये सुनते पिताजी समझ गये कि ये रिश्ता होकर रहेगा

पिताजी - चल अब वापस चलते है

ठाकुरजी-पर क्यूँ ?

पिताजी - शालिनी अपने भाभी के भाई को ना कैसे कहेगी

ठाकुरजी-जब तक कुछ पता नही चलेगा तब तक कुछ नही कहेंगे

पिताजी - पर

ठाकुरजी-देख ऐसे अंदाज़ा लगाना ठीक नही होगा हम कल फिर से आएँगे

पिताजी - ठीक है , कल आकर देखेंगे कि हुआ क्या है और उस बूढ़ी का केस भी देखना है

और पिताजी ठाकुरजी के साथ वापस ठकुराइन के मायके आ गये
 
फ्लॅशबॅक 860

कल पिताजी शालिनी मे कुछ ना करने से शॉक्ड मे थे

शालिनी ने कुछ किया क्यूँ नही

पर पिताजी को अच्छा भी लगा कि शालिनी ने उस बूढ़ी औरत को अपने घर लेकर गयी

पर जो लड़का शालिनी को देखने आया था उसके बारे मे कुछ पता नही चला

पिताजी नेक्स्ट दिन भी शालिनी के गाँव गये पर शालिनी ने क्या कहा उस लड़के से कुछ पता नही चला

शायद अभी और मुलाकात करना चाहती होगी शालिनी अपने भाभी के भाई से

पर उस बूढ़ी औरत का कुछ पता नही चला

ना पंचायत बुलाई गयी

पिताजी और ठाकुरजी नेक्स्ट दिन शालिनी के घर गये

ठाकुरजी को कंपनी जो खोलनी थी

वहाँ से पता चला कि अब तक ना शालिनी ने मना किया रिश्ते को और ना हाँ कहा

शालिनी ने सोचने के लिए टाइम माँगा है

पिताजी ने शालिनी से पूछना चाहा पर कोई जवाब नही मिला

शालिनी अपने ख़यालो मे खोई थी

ऐसे करते करते उस बूढ़ी के साथ जो हुआ उस दिन के बाद 7 दिन बीत गये

इस 7 दिन मे पिताजी और शालिनी मे बहुत सी बाते हुई

पिताजी अपने तरीके से शालिनी के बारे मे जान लिया

शालिनी को भी पिताजी से बात करना अच्छा लग रहा था

ठाकुरजी ज़्यादा से ज़्यादा समय शालिनी के पिताजी के साथ बाते करके पिताजी को शालिनी के साथ बाते करने को टाइम देते

इस बीच ठाकुरजी ने शालिनी के पिताजी के मदद से एक ज़मीन का टुकड़ा भी खरीद लिया

शालिनी के पिताजी तो इस कंपनी मे ज़्यादा इंटेरेस्ट ले रहे थे उनको पता था कि इस कंपनी से उनको बहुत प्रॉफिट होगा

पिताजी और शालिनी मे भी अच्छी ख़ासी दोस्ती हो गयी

मोंटू और सोनू को भी खेलने के लिए नया दोस्त मिल गया

पिताजी ज़िद मे जोश मे कोई काम नही करना चाहते थे , वो शालिनी के दिमाग़ मे कोई अपना काम कर रहे थे

मोंटू- बुआ , आज कितनी धूप है

शालिनी- तो खेलना कॅन्सल

सोनू- मुझे और खेलना है

शालिनी- सोनू आज बहुत गर्मी हो रही है , शाम मे खेलते है

मोंटू-मैं तो अंदर जा रहा हूँ

सोनू- मुझे और खेलना है

शालिनी- घर मे जाकर लुडडो खेलते है

और शालिनी अपने भतीजे को लेकर घर के अंदर चली गयी और लुडडो खेलने लगी

पिताजी भी ठाकुरजी के साथ शालिनी के यहाँ आ गये

शालिनी के पिताजी- अच्छा हुआ आप आ गये ,

ठाकुरजी- मुझे तो आना ही था , मैं कंपनी जल्द से जल्द खोलना चाहता हूँ

शालिनी के पिताजी- कंपनी खुल गयी तो मुझे और उस गाँव को बहुत फ़ायदा होगा , इस लिए मैं ने आपके लिए सारी इन्फ़ॉर्मेशन निकालने के लिए कुछ लोगो से बात की है

ठाकुरजी- ये आपने अच्छा किया , कब मिलना होगा उन लोगो से

शालिनी के पिताजी- आज ही मिलते है , अच्छे काम के लिए देर करनी अच्छी बात नही है

ठाकुरजी- तो चलिए

पिताजी- तुम जाओ , मैं इतनी धूप मे नही आउन्गा

ठाकुरजी- फिर तू यहाँ रुकेगा ,तुझे ठकुराइन के गाँव छोड़ने मे देर हो जाएगी

शालिनी के पिताजी- आप यहीं रुक जाइए , शाम तक हम आ जाएँगे उसके बाद रात का खाना खा कर आप ठाकुरजी के साथ चले जाना

ठाकुरजी- ये ठीक रहेगा

और ठाकुरजी ने पिताजी को आँख मार दी

पिताजी ऐसे ही बहाने करके शालिनी से बात करने के लिए उसके घर रुक जाते

शालिनी के पिताजी को उस से कोई अतराज़ नही था

शालिनी के पिताजी को तो अपने बड़े बेटे के अच्छे फ्यूचर के लिए ये कंपनी फ़ायदेमंद दिख रही थी

शालिनी का बड़ा भाई ज़्यादा पढ़ा लिखा नही था जिस से वो गाँव मे रह गया था अब उसके फ्यूचर के लिए शालिनी के पिताजी इस कंपनी मे ज़्यादा इंटेरेस्ट ले रहे थे

शालिनी के पिताजी और ठाकुरजी चले गये ,

पिताजी थोड़ी देर शालिनी के बड़े भाई के साथ बाते करते रहे फिर उसके किसी काम से बाहर जाते पिताजी शालिनी के पास चले गये

पिताजी- यहाँ तो लुडडो खेला जा रहा है

शालिनी- अरे आप , आप कब आए

पिताजी- मुझे इस दुनिया मे आए तो बहुत साल हो गये

शालिनी- नाइस जोक , यहाँ कब आए

पिताजी- थोड़ी देर पहले ,

शालिनी- तुम दोनो खेलो

मोंटू- बुआ आप आधा गेम खेलके जा नही सकती

पिताजी- तुम्हे कहीं जाने की ज़रूरत नही है , मैं भी लुडडो खेलूँगा

शालिनी- आप भी खेलेंगे ,

पिताजी- क्यूँ मैं नही खेल सकता

शालिनी- आपकी एज के हिसाब से ये गेम कुछ अजीब नही लगेगा

पिताजी- मैं बूढ़ा हो रहा हूँ ऑर मेरा दिल तो अभी बच्चा है ,

शालिनी- क्या खूब कहा

मोंटू- लेकिन ये हमारे साथ नही खेल सकते

पिताजी- क्यू नही खेल सकता

मोंटू- हमारा गेम ख़तम होने तक आपको रुकना होगा

पिताजी- तब तक तो मैं और बूढ़ा हो जाउन्गा

शालिनी- आप हँसाते बहुत है

सोनू- बुआ पासा फेको ना

पिताजी- तुम सब एक तरह खेल खेल कर बोर नही हो गये

शालिनी- क्या मतलब

पिताजी- हमारे यहाँ तो अलग तरह से लुडडो खेलते है

मोंटू- अलग तरह , क्या वो मज़ेदार होता है

पिताजी- मज़ेदार और मीठा भी होता है

सोनू- मीठा , मुझे बताइए

सोनू और मोंटू हमेशा शालिनी के साथ रहते थे जिस से पिताजी ठीक से बात नही कर पाते शालिनी से

इस लिए पिताजी सोनू और मोंटू के लिए चॉक्लेट लाते जिससे से दोनो चॉक्केट मे बिज़ी रहते और पिताजी शालिनी से बात करते

पिताजी भी लुडडो खेलने के लिए तय्यार हो गये

मोंटू-आओ कैसे खलते है लुडडो

पिताजी- सिंपल और मीठे तरीके से , जो पासे फेकेंगे उसके सामने वाला एक क्वेस्चन पूछेगा , सही जवाब देने पे एक चॉक्लेट मिलेगा

सोनू- फिर तो मैं खेलूँगा

शालिनी- ये कैसा गेम है

पिताजी-ये गेम मेरे बेटे ने सोचा है

शालिनी- लेकिन सवाल ही क्यूँ कुछ करने को बोल सकते है

पिताजी- मेरा बेटा सब मे बड़ा है , वो अपने भाई बहनो को पढ़ाने के लिए ये तरीका ईस्तमाल करता था , , सब सवाल वही पूछता था , और सही जवाब पर एक चॉक्लेट या लड्डू देता ,इस से खेल भी मीठा जाता और पढ़ाई भी होती , और चॉक्लेट पाने के लिए सब खेलने से पहले किताबें पढ़ लेते और ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ाई होती ,

शालिनी- आपका बेटा तो बहुत स्मार्ट है ,

पिताजी- हाँ लेकिन वो चॉक्लेट के समय मुश्किल सवाल पूछता ताकि चॉक्लेट खाने से टीत खराब ना हो और लड्डू के समय आसान सवाल पूछता क्यूँ कि उसकी माँ लड्डू इतने छोटे बनाती कि हमारे नॉर्मल लड्डू = 5लड्डू हो जाते लुडडो गेम के

शालिनी-मिलना पड़ेगा आपके बेटे से

पिताजी- मुझसे मिल लिया मतलब मेरे बेटे से मिल लिया

शालिनी- आपकी बाते बहुत अच्छी होती है

पिताजी- तुम से भी बहुत कुछ सीख लिया है

शालिनी- आप मेरे टाँग खीच रहे है

सोनू- बुआ गेम खेलते है

पिताजी- स्टार्ट करते है पर सवाल मैं और शालिनी पूछेगे ,

मोंटू- हमे तो चॉक्लेट चाहिए

शालिनी- चलो खेलते है

पहले सोनू ने पासा फेका

सोनू- मेरे नंबर सिक्स आए

पिताजी- तुम्हारा सवाल है 5+5=

सोनू सोचने लगा , अपने फिंगर काउंट करने लगा

शालिनी- सोनू कल ही तो बताया था तुम्हे

सोनू- 10

पिताजी- सही जवाब , ये रहा तुम्हारा चॉक्लेट

सोनू- मुझे चॉक्लेट मिल गया , बुआ अब आपकी बारी है

शालिनी ने पासे फेके यहाँ भी सिक्स निकले

शालिनी- मुझे मुश्किल सवाल पूछना

पिताजी- तुम्हे कैसा सवाल पुच्छू समझ नही आ रहा है

शालिनी- मेरी पढ़ाई तो हो गयी

पिताजी- तुम ही कुछ बता दो

शालिनी- मैं पढ़ाई के बारे मे बताती हूँ , मैं ने 7थ क्लास तक इसी गाँव मे पढ़ाई की , फिर मेरे टीचर के कोर्स पे मेरे पिताजी ने सिटी के स्कूल मे भेज दिया , जहाँ मुझे न्यू फ्रेंड मिले , नयी बाते सीखने को मिली , जब मैं कॉलेज मे थी तो एक गेस्ट लेक्चर अटेंड किया सोशियल इश्यू वाला जिस से मेरी सोच मे बहुत चेंज हुआ, मैं खुद से ज़्यादा दूसरो के बारे मे सोचने लगी ,

मोंटू- बुआ आप फिर शुरू हो गयी

पिताजी- क्या हुआ

शालिनी- मैं भी ना , जब भी मैं अपने कॉलेज की बाते याद करती हूँ तो बस बताते ही जाती हूँ , भूल ही जाती हूँ कि मैं कहाँ हूँ

पिताजी- अच्छा हैना कि तुम खुद से ज़्यादा दूसरो के बारे मे सोचती हो

मोंटू- अब मेरी बारी

मोंटू ने पासे फेक दिए पर सिक्स ना आने से पिताजी की बारी आई ,

पिताजी के भी सिक्स नही आए जिस से उनको भी सवाल नही पूछा गया

सोनू ने पासा फेका पर सवाल का जवाब नही दिया

पिताजी- शालिनी अब तुम्हारी बारी

शालिनी के पासे फैंकते ही पिताजी ने सवाल पूछ लिया

पिताजी- तुम सिटी मे रहना पसंद करोगी या गाँव मे

शालिनी-गाँव मे , गाँव की बात ही कुछ अलग है , अपना अपना सा लगता है गाँव

पिताजी- इसका मतलब है तुम सिटी मे रहना पसंद नही करती

शालिनी- ऐसा नही है , जहाँ रहूगी उसको स्वर्ग समझूंगी , लेकिन जब दो मे से किसी एक को सेलेक्ट करना हो तो गाँव को सेलेक्ट करूगी

पिताजी- मैं यही सुनना चाहता था

शालिनी- क्या कहा आपने

पिताजी- कुछ नही

फिर पिताजी की बारी आई जवाब देने की

शालिनी- आप मुझे इतने सवाल क्यूँ पूछते हो

पिताजी- सिंपल है , जब कोई मिलता है तो सवाल ही पूछते है , कैसे हो , कहाँ थे इतने दिन , कुछ खबर ही नही थी , क्या चल रहा है , घर पे सब कैसे है , फिर कब मिलोगे एट्सेटरा , ऐसे मैं ने सवाल पूछ लिए

शालिनी-यही है या कुछ और बात है

पिताजी- एक बार एक सवाल

शालिनी- आपने भी तो 2 सवाल पूछे थे

पिताजी- तुमने जवाब क्यूँ दिए

एक राउंड के बाद शालिनी का नंबर आया

इस बार पिताजी ऐसा वैसा सवाल पूछ कर शक पैदा होने नही देना चाहते थे

इस बार शालिनी के बारे मे पिताजी ने नही पूछा

पिताजी- मैं ने सुना है कि कुछ दिन पहले एक बेटे ने अपनी माँ को घर से बाहर निकाल दिया , फिर गाँव वालो ने कुछ किया क्यूँ नही

शालिनी- सही समय का इंतज़ार कर रहे है ,

पिताजी- ये कैसा जवाब हुआ

शालिनी- आप रूल तोड़ रहे है

फिर शालिनी की बारी आई सवाल पूछने की

शालिनी- आप अपने बेटो से ज़्यादा प्यार करते है या अपनी बेटी से

पिताजी- इस सवाल का कोई जवाब नही होता , फिर भी एक जवाब देता हूँ , दुनिया को ये दिखता है कि माँ बेटे से ज़्यादा प्यार करती है और पिता अपनी बेटी से ज़्यादा प्यार करते है पर सच ये है कि माता पिता अपने सभी बच्चों से एक जैसा प्यार करते है

शालिनी- आपके जवाब सही है , मैं भी यही सोच रही थी

सोनू- अब मेरी बारी है

पिताजी- सोनू बताओ , तुम्हारे सामने 10 गुठलियाँ है तो तुमने कितने आम खाए है

सोनू-मैं तो 4 आम से ज़्यादा खा ही नही पाता

पिताजी- सही जवाब

फिर शालिनी की बारी आई

पिताजी- तुम कैसे समझाती उस औरत के बेटे को

शालिनी-वो कल आपको पता चलेगा

पिताजी- कल क्या है

मोंटू- कल बुआ

शालिनी- श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अभी नही ,

पिताजी-क्या बात है

शालिनी- कल बताउन्गी

सोनू- मुझे और चॉक्लेट चाहिए , मुझे और खेलना है

पिताजी- चॉक्लेट तो ख़तम हो गये

सोनू- मुझे और चाहिए

पिताजी- कल खेलेंगे , और कल लड्डू मिलेंगे

सोनू- फिर ठीक है , मेरे पास 6 चॉक्लेट है

मोंटू- मेरे पास सिर्फ़ 4 , बुआ ने मुश्किल सवाल पूछे मुझे

शालिनी- मुझे तो कोई चॉक्लेट नही मिला

सोनू- बुआ को चॉक्लेट नही मिला , मैं जीत गया

और सोनू अपनी माँ को बताने गया मोंटू भी चला गया

शालिनी- मुझे ये गेम पसंद आया

पिताजी- तो कल और खेलेंगे

शालिनी- अब तो सोनू यही गेम खेलेगा उसे चॉक्लेट जो मिलेंगे पर अच्छा है कि उसकी पढ़ाई भी होगी

पिताजी- घर मे स्वीट तो बनते है उनको इस गेम के साथ ही दिया करो जिस से कोई प्रॉब्लम नही होगी

शालिनी- शाम भी हो रही है

पिताजी- आज खाने मे क्या बनाओगी

शालिनी-नोन वेग ,

पिताजी- फिर तो आज पेट भरके खाना खाउन्गा

पिताजी इसी तरह कोई ना कोई बहाना बना कर शालिनी से बाते करते

पता नही अब कल क्या होगा
 
फ्लॅशबॅक 861

शालिनी आज के लिए स्पेशली पिताजी को इन्वाइट किया था

पिताजी तो सुबह से तय्यार होके बैठ थे शालीजी के गाँव जाने के लिए

पिताजी सुबह ही शालिनी के घर आ गये

ठाकुरजी शालिनी के पिताजी से कंपनी की बात करने लगे और पिताजी शालिनी के पास चले गये

शालिनी -अच्छा हुआ आज आप जल्दी आ गये

पिताजी - क्यू आज कुछ स्पेशल है

शालिनी -आज पंचायत बुलाई गयी है आप ज़रूर आना

पिताजी - मैं तो आ जाउन्गा पर कुछ दिन पहले एक बूढ़ी औरत को घर से निकाला था उसका क्या हुआ

शालिनी -उसी के लिए पंचायत भरी है

पिताजी - इतनी देर से

शालिनी -हाँ , थोड़ा टाइम चाहिए था , जल्द बाज़ी मे कुछ नही होता , सही समय का इंतज़ार करना पड़ता है

पिताजी - मैं ज़रूर आउन्गा

शालिनी -वैसे एक बात कहूँ

पिताजी - हाँ बोलो

शालिनी -आपसे बात करके अच्छा लगता है , मेरे पिताजी भी अच्छे है पर आप मेरे पिताजी होते तो ज़्यादा अच्छा होता ,

पिताजी - मैं तुम्हारे पिता जैसा ही हूँ , और हाँ मैं कल जा रहा हूँ

शालिनी -कहाँ जा रहे हो

पिताजी - वापस अपने गाँव

शालिनी -आपका काम हो गया

पिताजी - कल हो जाएगा

शालिनी -मुझसे मिलके जाना , आप मेरे दोस्त हो भूलना मत

पिताजी - तुम्हे मिलके जाना तो पड़ेगा

शालिनी -अच्छा अब मैं चलती हूँ मुझे पंचायत का काम देखना है

पिताजी - तुम क्या काम देखती हो पंचायत का , तुम क्या करोगी पंचायत मे

शालिनी -वो आज आपको पता चल जाएगा ,

और शालिनी अपने काम मे लग गयी

ठाकुरजी- ये क्या बोल दिया , हम कल जा रहे है

पिताजी- हाँ , मुझे नेहा नीता की बहुत याद आ रही है वो मेरे बिना कैसे रहती होगी

ठाकुरजी- पर तेरी बहू

पिताजी - कल बात करूँगा शालिनी से , और जल्दी अपने घर जाना चाहता हूँ शालिनी को देख कर मुझे अपनी बेटियो की याद आती है

ठाकुरजी- ठीक है , वैसे आज यहाँ की पंचायत देख कर जाते है

शाम मे गाँव मे पंचायत रखी गयी

पंचायत स्कूल के मैदान मे थी ,

गाँव के सभी लोग आए थे

वो आदमी और औरतें भी आई थी

शालिनी उस बूढ़ी औरत को अपने साथ लेकर आई थी , शालिनी की फॅमिली भी थी

पर पाच पॅंच कहाँ है

अजीब पंचायत थी

शालिनी के पिताजी गाँव के ज़मींदार थे तो उनके लिए स्पेशल इंतज़ाम था , सरपंच भी अपनी जगह पे बैठ गया ,

पिताजी और ठाकुरजी को शालिनी के पिताजी ने अपने साथ बिठा दिया

ऐसा लग ही नही रहा था कि पंचायत है

ऐसा लग रहा था कि कोई नाटक का शो चल रहा है और सब स्कूल मे उस शो को देखने आए है

और शालिनी स्टेज पर आ गयी

शालिनी- मेरे प्यारे गाँव वालो

जैसा कि आप सभी को पता है कि हमारे गाँव की पंचायत तभी बुलाई जाती है जब मामला गंभीर हो

और उस प्राब्लम को सॉल्व करने का तरीका हम जिस तरह ईस्तमाल करते है वो देखने के लिए आज दो ठाकुर आए है , योगेंद्रसिंघ और प्रातपासिंघ

और पिताजी और ठाकुर ने सबको शुक्रिया कहा

शालिनी - मैं सीधे मुद्दे पे आउगि

ये गाँव नही हमारी फॅमिली है

गाँव के किसी भी मेंबर को चोट लगती है तो दर्द हम सबको होता है

और हम ने उस दर्द का इलाज़ मिलके ढूँढ निकाला है ,

जैसे कि सरपंचजी ने कहा कि हम सब मिलके प्राब्लम सॉल्व करेंगे

पर कुछ प्राब्लम ऐसे होते है कि जो आज के लिए एक घर की प्राब्लम होती पर कल दूसरे घर मे भी वही प्राब्लम पैदा हो सकती है

इस लिए , ऐसी प्राब्लम को जड़ से उखाड़ना होगा ,

इस प्राब्लम को दूसरे घरो मे होने से पहले ख़तम करना होगा

इस लिए मैं ने एक छोटा सा नाटक बनाया है

ये नाटक नही , ये हमारी प्राब्लम है , जेनरेशन टू जेनरेशन चल रही है आगे जाकर इसका कैसा असर होगा ये बताने के लिए ये नाटक रखा है

तो मैं नाटक शुरू करती हूँ

और नाटक शुरू हो गया

पिताजी को शालिनी की बात सुनकर अच्छा लगा

गाँव को घर समझने वाली बहू चाहिए थी पिताजी को

ठकुज़ी और पिताजी नाटक देखने लगे , देखना चाहते थे कि ऐसी कोन्सि प्रॉबलर्म है जो शुरू होन्से से पहले शालिनी ख़तम करना चाहती है

नाटक शुरू हो गया

नाटक मे कुछ बच्चे थे

एक बूढ़ी औरत बनी थी उस दिन वाली

एक आदमी बना था जिसने अपनी माँ को घर से निकाला था

एक औरत बनी थी , उस आदमी की पत्नी

पार्ट कुछ इस तरहसे था

शालिनी- ये है शांता बाई की फॅमिली ,

तो उस बूढ़ी औरत का नाम शांतबाई था

1======= इसमे शांताबाई अपने पति के साथ अपने बेटे को प्यार से बड़ा करती है

और शालिनी के कहते ही वो बच्चे आक्टिंग करने लगे

वो आदमी उसकी पत्नी औरवो बूढ़ी औरत भी नाटक को देख रहे थे

ये पंचायत थी यहाँ से उठ कर जाने का अधिकार किसी को नही होता

सब वो नाटक देखने लगे

किसी को कुछ बताने का बेस्ट तरीका नाटक होता है

किस तरह शान्ताबाइ और उसका पति अपने बेटे को बड़ा कर रहे थे

खुद भूके रह रहे थे पर अपने बेटे को खाना खिला रहे थे

वो बच्चे अच्छी आक्टिंग कर रहे थे

सब सीरियस्ली नाटक देख रहे थे

शान्ताबाइ ने अपने बेटे के लिए किस तरह घर बनाया वो भी नाटक मे दिखाया

किस तरह अपने बेटे के बीमार पड़ते ही रात भर जागती रही शांतबाई ये भी दिखाया

शांतबाई और उसके बेटे के बचपन की कहानी इस मे बताई गयी

पिताजी ने शांतबाई और उसके बेटे की तरफ देखा तो दोनो की आँखो मे आसू आ रहे थे

शालिनी- ये होती है माँ , जो खुद भूका रहती है पर अपने बच्चों को खिलाती है , खुद बारिश मे भिगति है पर अपने बेटे.पे एक बूँद भी गिरने नही देती

शालिनी- हम सब अपने बेटो से ऐसा ही प्यार करते है ,जैसा शांतबाई ने किया है

शालिनी- ये सिर्फ़ शांताबाई की कहानी नही है ये हम सबकी कहानी है

शालिनी- उसके बदले मे माँ सिर्फ़ बुडापे मे अपने बेटे से सहारा ही तो मांगती है , पर हम देते नही

शालिनी - इस नाटक का 2न्ड पार्ट शुरू होता है जब बेटे की शादी होती है

2========= बच्चे फिर से आक्टिंग करने लगे

कैसे बहू के आते ही शांतबाई की खुशी ख़तम हो गयी वो दिखा रहे थे

शांताबाई ने फिर भी कुछ नही कहा

कैसे शांताबाई की बहू ने शांतबाई को खाना नही दिया घर के काम करने को कहा

शांतबाई सब कुछ सहती गयी पर उसको क्या मिला पुरानी रोटी और सोने के किए फटी हुई चददर

फिर भी शांतबाई अपने बेटे के लिए सब सहती रही

शांतबाई अपने बेटे अपने पोते के प्यार के वजह से चुप रही

एक माँ को कितना कुछ सहते रहना पड़ता है ये दिखाया 2न्ड पार्ट मे

पिताजी तो शालिनी की तरफ देखते रहे ,कितनी अच्छी सोच है शालिनी की

शालिनी ने सयम से काम लिया

शालिनी - ये है वो माँ जो अपने बेटे के घर को टूटने से रोक ने के लिए हर जुलूम सहती रही अपने पोतो के प्यार के लिए गालियाँ भी खा ली

शालिनी- अब नाटक जा 3 र्ड पार्ट जो कुच्छ दिन पहले सभी गाँव वालो ने देखा था

3======== बच्चे फिर से नाटक करे लगे

वो आदमी अपनी माँ को घर से निकाल रहा था

उस आदमी की पत्नी अपने पति को अपनी सास को बाहर निकालने को बोल रही थी

उस बूढ़ी औरत के पोते खिड़की से देख रहे थे

सब कुछ दिखाया शालिनी ने

कैसे शांतबाई रोई

.शांतबाई के दर्द को अच्छे से दिखाया शालिनी ने

ये देख कर शान्ताबाइ और उसका बेटा तो रोने लगा

अपने बचपन को याद करके शांताबाई का बेटा रो रहा था

शांतबाई अपने बेटे को देख कर रो रही थी , वो माँ थी अपने बेटे को रोता हुआ कैसे देखती

शालिनी एक एक पार्ट अच्छे से दिखा रही थी

यहाँ तक तो शांताबाई ने बताया होगा शालिनी को

पर इस से आगे कौन सा पार्ट दिखाएगी शालिनी वो इम्पोर्टेंट था

शाकिनी की सोच का पता चलेगा नेक्स्ट पार्ट से

शालिनी - यहाँ तक हम सब को पता है ,

शालिनी- नेक्स्ट पार्ट मे आप देखेंगे कि कैसे एक दादी अपने पोतो को छुप कर बड़ा होते हुए देखेगी , और शांतबाई की बेटा और बहू कैसे अपने बेटो को बड़ा करते है वो देखेंगे

4======== और शालिनी के कहते ही बच्चे आक्टिंग करने लगे

शांतबाई को निकाल दिया था जिस से वो दूर से अपने पोतो को बड़ा होते हुए देख रही थी

शांताबाई का बेटा और बहू अपने बच्चों को बड़ा कर रहे थे

जो प्यार शांतबाई ने अपने बेटे को दिया वही शांताबाई का बेटा और बहू अपने बच्चों को

जो प्यार शांतबाई ने आवने बेटे को दिया वही शांताबाई का बेटा और बहू अपने बच्चों को दे रहे थे

शांता बाई दूर से अपने पोतो को प्यार करती

शालिनी- आप सोच रहे होंगे कि मैं ये क्यूँ दिखा रही हूँ

शालिनी- यही रिपीट होता है

शालिनी- .शांतबाई की जगह उसकी बहू ने ली है

शालिनी- शांतबाई के बेटे की जगह शांता बाई के पोते ने ली है

शालिनी- सब कुछ रिपीट होता है

शालिनी- आज हम बेटा या बेटी होते है तो कल हम बाप या माँ बन जाएँगे ,

शालिनी- जो प्यार हमे अपने माता पिता करते है हम वही प्यार अपने बेटे बेटी को देते है

शालिनी - ये लास्ट पार्ट है

5======= बच्चों ने आक्टिंग करनी शुरू की

इस पार्ट को देखते ही शांतबाई का बेटा ज़ोर ज़ोर से रोने लगा

इस पार्ट मे शालिनी ने जो दिखाया वो कभी शांतबाई के बेटा और बहू सोच भी नही सकती थी , अगर सोचती तो वो शांता बाई के साथ ऐसा नही करते

शालिनी ने बहुत दूर का सोचा

इस पार्ट मे जो शांतबाई के बेटे और बहू ने शांतबाई के साथ किया वही शांतबाई के पोते बड़े होने पर अपने माता पिता के साथ कर रहे थे

जैसे शांतबाई रोई थी

वैसे शांतबाई का बेटा और बहू के रोने के दिन आ गये

उनके बेटे ने उनको घर से निकाल दिया

हिस्टरी रिपीट हो गयी

अब शांतबाई की जगह शांता बाई के बेटे और बहू को घर से निकाला जा रहा था

ये पार्ट देखते ही किसी को कुछ बताने की ज़रूरत नही पड़ी

पर शालिनी सब को एक लेशन देना चाहती थी

क्यू कि आज ये शांतबाई के घर मे हुआ था कल किसी के भी घर मे हो सकता है

.

शालिनी-इसको ज़िंदगी का चक्रव्यूह कहते है

ये ऐसे ही हमारे पास्ट को फ्यूचर मे दिखाता है

हम जो करते है उसका भुगतान हमे इस जनम मे करना पड़ता है

जो दूसरो के साथ बुरा करता है उसके साथ उसकी किस्मत बुरा करती है

आज हम खुश होते है दूसरो को दर्द दे कर

पर कल दूसरे खुश होते है और हमको दर्द मिलता है

कल शांतबाई के बेटे और बहू ने शांता बाई को घर से निकाल दिया

क्या पता फ्यूचर मे उनके बच्चे उनको बाहर निकाल दे

क्यू कि हम सीखते है हमारे माता पिता से

जो वो करेंगे हम भी वैसा ही करते है

आज शांतबाई के पास रहने के लिए घर नही है कल को उनके बेटो के पास नही होगा

आज शांतबाई रो रही है

कल शांतबाई का बेटा और बहू रोएगी

इस जनम का पाप हमे उसी जनम मे चुकाना पड़ता है

ये सिर्फ़ शांतबाई के घर की बात नही है

ये हम सब के घर मे भी हो सकता है

जो जैसा पौधा लगाया उसको वैसा पेड़ मिलेगा

ये सिर्फ़ शांतबाई की प्राब्लम नही है

ये हम सब की प्राब्लम है क्या पता कल हमारे साथ ऐसा हो

शांतबाई ने क्या माँगा था सिर्फ़ घर मे एक कोना रहने के लिए

.शांतबाई और उनके पति ने अपनी मेहनत से घर बनाया है उसी घर मे रहने के लिए शांतबाई को भीक माँगनी पड़ रही है

ये प्राब्लम हम उसी दिन सॉल्व कर सकते थे

पर उस से सिर्फ़ शांतबाई का प्रॉब्लम सॉल्व होता

हमे इस प्राब्लम को जड़ से ख़तम करना था

और मुझे लगता है आप सब समझ गये होंगे

शांतबाई के बेटे की आँखो मे जो आसू आए ये उस बात का सबूत है कि वो अपनी ग़लती जका पछतावा करना चाहता है

शांतबाई की बहू जिस तरह रो रही है उसको समझ मे आ गया कि कल ये उनके साथ भी हो सकता है

और आप सब भी समझ गये कि हम जो पाप करते है उसको भुगतना हमे इसी जनम मे पड़ता है

पास्ट थोड़े चेंज के साथ फ्यूचर के रूप मे हमारे सामने आता है

शालिनी की इस शिक्षा से हम ने हाँ मे गर्दन घुमाई ,

शालिनी क्या कहना चाहती थी सब समझ गये
 
फ्लॅशबॅक 862

शालिनी की बातों से पिताजी काफ़ी प्रभावित हुए

पिताजी को लगा कि ये बहू नही बेटी है

काश शालिनी भी मेरी बेटी होती तो ऐसा पिताजी को लग रहा था

बेटी नही हुई तो क्या हुआ अब बना लेंगे

शालिनी को बहू की जगह बेटी बनाने का सोच लिया पिताजी ने

शालिनी ने जिस तरह इस प्राब्लम को सॉल्व किया उस से लग रहा था कि शालिनी सभी प्राब्लम सॉल्व कर सकती है

काफ़ी शांत मिजाज़ की है शालिनी

उस दिन जल्द बाज़ी मे शांतबाई का प्राब्लम सॉल्व करती तो वो सिर्फ़ शांतबाई का प्राब्लम सॉल्व करती

पर आज इस नाटक से सब को एक सीख दी

जो आगे हो सकता है उसके बारे मे सोच कर शालिनी ने गाँव वालो को ये नाटक दिखाया

जेनरेशन बदल रही है

तो ये हर किसी के घर मे हो सकता है

इस लिए शालिनी इस प्राब्लम को जड़ से ख़तम करना चाहती थी

और गाँव वालो ने शालिनी का पूरा साथ दिया

उस दिन भी गाँव वालो को गुस्सा आया था पर सब चुप रहे

शायद वो शालिनी की वजह से चुप होंगे

तभी तो सब बाद मे शांतबाई को लेकर शालिनी के घर गये

जहा शालिनी और शालिनी के पिताजी ने इस प्राब्लम पे सोचा होगा

और शालिनी ने उस नाटक की स्क्रिप्ट लिखी होगी

शालिनी की सोच की दाद देनी पड़ेगी

शालिनी ने फिर से गाँव की प्राब्लम सोल की

गाँव की पड़ी लिखी और प्यारी लड़की होने से सब शालिनी की बात मानते थे

शांतबाई की बहू शांतबाई के पास आकर अपना सर उनके पैरों मे रख कर माफी माँगने लगी

शांतबाई ने अपनी बहू को माफ़ किया क्यूँ कि ग़लती सबसे होती है सबको एक चान्स देना चाहिए ग़लती सुधार ने का

शांतबाई का बेटा किस मूह को लेकर शांतबाई के पास जाता

.ऐसे मे शांतबाई खुद अपने बेटे के पास गयी और उसको माफ़ कर दिया

अपनी माँ के माफ़ करते शांतबाई का बेटा रोने लगा ,

शांतबाई ने उसको शांत किया और शालिनी के पास गयी

शांतबाई- शालिनी बेटी तू मेरे लिए देवी बन कर आई हो , तुम्हारा ये अहसान कभी नही भूलूगी

शालिनी- बेटी भी बोल रही है और अहसान की बात करती है

शांतभई - तेरी जैसी बेटी पा कर मैं खुद को किस्मतवाली मानती हूँ

शालिनी- आज से आप रोना बंद कर देना , और कभी भी कुछ हुआ तो अपनी बेटी को याद करना

शान्ताबाइ- तुम ने तो सारी प्राब्लम सॉल्व की , इस से ज़्यादा कुछ नही चाहिए

और शांता बाई ने शालिनी का फिर से शुक्रिया अदा किया

और शांतबाई अपने बेटे बहू और पोतो के साथ घर चली गयी

और शालिनी पिताजी के पास आ गयी

शालिनी-.तो कैसी लगी पंचायत

पिताजी-बेस्ट ,हर गाँव मे ऐसी पंचायत होनी चाहिए जिसमे फ़ैसला गाँव वाले करे

शालिनी-.वो तो है

पिताजी-तुम ने सही तरीका ईस्तमाल किया उस शांतबाई का प्राब्लम सॉल्व करने का

शालिनी-.वो प्राब्लम ऐसा था कि आज शांतबाई के साथ हुआ कल किसी और के साथ होता , हम हर बार उसी पे तो नही सोच सकते ,इस लिए उस प्राब्लम का पर्मनेट सल्यूशन ढूँढ लिया

पिताजी-तुम्हारी सोच बहुत अच्छी है

शालिनी-.वो तो बस ऐसे ही

पिताजी-नही सच मे , तुम अच्छा सोचती हो , तुम ने फ्यूचर के बारे मे सोच कर प्राब्लम सॉल्व किया

शालिनी-.वो तो

पिताजी-अगर तुम मेरी बेटी होती ना तो तुम्हे सर पे बिठा कर पूरा गाँव घूमता

शालिनी-.आप तो मुझे चने जके पेड़ पे चढ़ा रहे है

पिताजी-तुम कबीले तारीफ हो

शालिनी-.अब बस भी कीजिए

पिताजी-चलो तुम्हारे घर की तरफ चलते हुए बात करते है

ठाकुर जी- तुम चलो मैं थोड़ी देर मे आता हूँ

अउर पिताजी शालिनी के साथ उसके घर की तरफ जाने लगे

शालिनी-आप मेरी कुछ ज़्यादा ही तारीफ कर रहे है

पिताजी-तुमने उस दिन कुछ क्यूँ नही किया था ,इसका जवाब मिल गया

शालिनी-.उस दिन तो मुझे बहुत बुरा लगा था

पिताजी-देखा मैं तुम शांतबाई को देख कर रो रही थी

शालिनी-आप कहाँ थे

पिताजी-मैं भी भीड़ मे था

शालिनी- उस दिन लगा था कि एक थप्पड़ मार दूं शांतभमाई के बेटे को

पिताजी-तुम तो डेंजर हो

शालिनी-सच मे , कोई अपनी माँ के साथ ऐसा कैसे कर सकता है

पिताजी-इस बात मे मैं सहमत हूँ

शालिनी-.पर तब मैं चुप रही , क्यूँ कि उस वक्त कुछ करते तो शांतबाई का बेटा कुछ सुनने की हालत मे नही था

पिताजी-सही कहा , आज शांतबाई के बेटे ने उस पे अच्छे से सोचा होगा , शांत दिमाग़ से

शालिनी-.इसी लिए हम अब तक रुके रहे

पिताजी-वैसे उस दिन मुझे तुम पे बहुत गुस्सा आया था

शालिनी-मुझपे , गुस्सा वो क्यूँ

पिताजी-तुम बस देखती रह गई कुछ किया नही ना इस लिए

शालिनी-.मुझे भी खुद पे गुस्सा आया था

पिताजी-लेकिन आज मैं बहुत खुश हूँ

शालिनी-मैं भी

पिताजी-तुम ने अच्छा काम किया

शालिनी-वो हो गया अपने आप , वैसे एक बात कहूँ आपसे

पिताजी-हाँ कहो

शालिनी-मेरी अब तक बस एक बेस्ट फ्रेंड थी वो मेरी भाभी थी , पर जब से आप से मिली हूँ आप भी मेरे बेस्ट फ्रेंड बन गये हो ,

पिताजी-बेस्ट फ्रेंड

शालिनी-.हाँ , आपसे बात करना भी अच्छा लगता है , आप मेरी तरह सोचते हो , शांत सिंपल

पिताजी-तुम्हे ये सब कहाँ से पता चला

शालिनी-.आपकी बातों से , आप से मैं बहुत कुछ सीख पाउन्गी

पिताजी-पर मैं तो कल जा रहा हूँ

शालिनी-.जाना ज़रूरी है

पिताजी-क्यूँ ?

शालिनी-आप जाएँगे तो मैं अकेली पड़ जाउन्गी

पिताजी-हमे मिले हुए सिर्फ़ 10 12 दिन हुए है और तुम ऐसा बोल रही हो

शालिनी-सिर्फ़ 1 हफ़्ता मुझे तो ऐसा लग रहा है हम सालो से एक दूसरे को जानते हो

पिताजी-मे बी हम पिछले जनम मे बाप बेटी हो

शालिनी-पिछले जनम का किसने देखा है , मैं तो इस जनम मे आपको पिताजी समझने लगी हूँ

पिताजी-मेरी खुशकिस्मती होगी तुम्हारे जैसे बेटी का बाप बन कर

शालिनी-तो अपनी बेटी के लिए कुछ दिन रुक जाते तो

पिताजी-रुक तो जाता पर वहाँ मेरी बीवी मेरी बेटियाँ और मेरा बेटा मेरा इंतज़ार कर रहे है , वो मेरे बिना जी नही सकते और मैं उनके बिना

शालिनी-तो उनको भी यहाँ बुला लीजिए

पिताजी-ऐसा नही हो सकता, तुम भी मेरे साथ चलो

शालिनी-चली जाती पर अभी भाभी , वैसे आपकी बेटियाँ बहुत किस्मतवाली है जो आप जैसे पिता मिले है उनको

पिताजी-मैं किस्मत वाला हूँ जो मुझे इतनी प्यारी बेटियाँ मिली है

शालिनी-.यही बात आपकी मुझे अच्छी लगती है , वैसे आपकी बेटी के बारे मे कुछ बताइए

पिताजी-मेरी बड़ी बेटी का नाम पूजा है , उस के बाद दो जुड़वा बेटी हुई , नेहा और नीता

शालिनी-.जुड़वा बहनें फिर तो वो साथ साथ रहती थी

पिताजी-पूछो ही मत , जहाँ नेहा जाती है वही नीता जाती है , ड्रेस अगर सिर्फ़ नेहा के लिए तो नेहा फाड़ देगी , दर्द अगर नीता को हुआ तो आसू नेहा के निकलते है

शालिनी-.इतना प्यार करती है दोनो

पिताजी-हाँ , और मस्ती तो पूछो ही मत , उनकी मस्ती देख कर मैं भी मस्ती करने लगता हूँ

शालिनी-.आप भी

पिताजी-हाँ , नेहा नीता की एक मस्ती बताता हूँ तुम्हे , दाल मे कुछ काला था

शालिनी-.दाल मे कुछ काला था , बताइए

पिताजी ने नेहा की दाल वाली बात शालिनी को बता दी

शालिनी नेहा नीता की मस्ती सुनकर इतनी खुश हुई कि पूछो ही मत

शालिनी-नेहा से तो मिलना पड़ेगा

पिताजी-नेहा बहुत प्यारी है

शालिनी-.उसकी बाते सुनकर कर पता चल गया होगा वैसे नीता भी कुछ कम नही है

पिताजी-और पूजा भी उनकी बड़ी बहन है पर उनका पूरा साथ देती है मस्ती मे

शालिनी-.पूजा के बारे मे भी बताइए

पिताजी-उसकी शादी की बात बताता हूँ

शालिनी-.पूजा की शादी हो गयी

पिताजी-हाँ , एक दिन मे

शालिनी-.एक दिन मे , बताइए मुझे

पिताजी ने पूजा की शादी की बात बता दी सिर्फ़ जयसिंघ की बात छोड़ कर सब कुछ बता दिया

पूजा की लव स्टोरी सुनकर शालिनी को लगा सब उसकी आँखो के सामने हुआ हो

शालिनी-.पूजा को उसका राजकुमार मिल गया

पिताजी-हाँ

शालिनी-और आपने शादी भी कर दी , आप बहुत अच्छे है वरना प्यार का नाम सुनते लोग शादी करने की जगह मार डालते है लड़कियो को

पिताजी-मैं ने तो आज तक अपनी बेटियो पे हाथ नही उठाया है

शालिनी-काश मैं आपकी बेटी थी , पूजा नेहा नीता की कहानी सुनकर मुझे उनसे मिलने का दिल कर रहा है

पिताजी-तो चलो मेरे यहाँ , कुछ दिन रह लेना

शालिनी-.आ जाती पर अभी मैं नही आ सकती

पिताजी-क्यूँ ?

शालिनी-.कुछ नही

पिताजी-अपने बेस्ट फ्रेंड को नही बताओगी

शालिनी-आप को बता रही हूँ किसी को बताना मत

पिताजी-ये बात मेरे तक रहेगी

शालिनी-और हाँ , मेरी बात सुनकर मुझे बताना कि मैं क्या करूँ

पिताजी-ज़रूर बताउन्गा आख़िर तुम मेरी बेटी हो

शालिनी-आप को पता हैना मेरी भाभी का भाई मुझे देखने आया था

पिताजी-हाँ, क्या हुआ उसका तुमने हाँ कर दी .

शालिनी-.मैं ने सोचने के लिए टाइम माँगा है

पिताजी-मतलब तुम्हे 50% पसंद है

शालिनी-.हाँ , देखने मे अच्छा है पर दिल का कैसा है ये नही पता मुझे , अभी तो वो अच्छा दिखने का दिखावा कर रहा है ऐसा लग रहा था

पिताजी-लड़किया देखने आते है तो ऐसा ही करते है सब लोग,अच्छे बनने का नाटक

शालिनी-और वो अपने पिताजी के भरोसे जी रहा है , ना उसके कुछ सपने है और ना वो खुद कुछ करने का सोच रहा है

पिताजी-तुम्हे कैसे पता चला

शालिनी-.मैं ने उससे बात की तो बोलता है उसे कुछ करने की ज़रूरत क्या है उसके पिता के पास इतने पैसे है कि वो पूरा गाँव खरीद ले

पिताजी-फिर तो तुम्हे एक झटके मे ना करना चाहिए था

शालिनी-.नही कर सकती ना

पिताजी-क्यूँ ?

शालिनी-.एक तो मैं पहले ही बहुत लड़कों को ना कह चुकी हूँ , मेरी माँ बहुत परेशन रहती है शादी को लेकर

पिताजी-हर माँ को चिंता होती है बेटी की शादी की

शालिनी-.उनको लगता है कि मेरी एज ज़्यादा जो गयी है

पिताजी-अब तक तुम्हारी शादी हो जानी चाहिए थी

शालिनी-.मैं भी शादी करना चाहती हूँ पर पूजा जैसा मुझे भी अपने राजकुमार का इंतज़ार है

पिताजी-तो प्राब्लम क्या है तुम परेशान क्यूँ हो

शालिनी-.वो भाभी का भाई है ,उसको ना कैसे कहूँ , भाभी को बुरा लग जाएगा

पिताजी-तो ये बात है , शादी से मना किया तो माँ को बुरा लगेगा , भाभी के भाई को ना कहा तो भाभी को बुरा लगेगा ,और तुम्हारे पिताजी

शालिनी-.मेरे ना करते मेरे पिताजी दूसरा लड़का ढूँढ लेंगे उनसे कोई प्राब्लम नही है

पिताजी-तुम तो बुरी तरह से फस गयी हो .

शालिनी- आप मेरे पिता जैसे हो आप ही कुछ रास्ता बताइए कि मैं क्या करूँ

पिताजी-तुम्हारी भाभी तुम्हे अपनी ननद समझती है

शालिनी-.नही वो मुझे अपनी छोटी बहन समझती है मुझे अपनी फ्रेंड समझती है , अपने बच्चों की माँ समझती है

पिताजी-फिर तो सल्यूशन तुम्हारे सामने है

शालिनी-.क्या ?

पिताजी-अपनी भाभी के पास जाओ , अपनी भाभी की आँखो मे देख कर उनसे पूछो कि तुम्हारे लिए उनका भाई ठीक रहेगा क्या , अगर वो हाँ कहती है तो समझ लेना वो लड़का तुम्हारे लिए पर्फेक्ट है , और ना कहा तो तुम्हे कुछ कहना नही पड़ेगा तुम्हारी भाभी जवाब देगी सबको

शालिनी-.वाउ आपका जवाब नही ,

पिताजी-और अगर तुम्हारी भाभी ने झूठ कहा और अपने भाई से शादी करवाई तो वो अपनी ननद अपनी बहन अपनी फ्रेंड को खो देगी , अपने बच्चों के नज़रिए मे गुनहगार बन जाएगी

शालिनी-.सही कहा , भाभी मेरे बारे मे ग़लत नही सोचेगी , मैं भाभी से बात करती हूँ

पिताजी-आज ही

शालिनी-.वो कल सुबह आ रहे है

पिताजी-तो ठीक है , अभी बात करना जिस से तुम्हारी भाभी रात भर सोचेगी

शालिनी-.थॅंक यू

पिताजी-और हाँ , मैं कल शाम को तुमसे आख़िरी बार मिलने आउन्गा

शालिनी-.आप मुझसे मिले बिना जाना मत ,

पिताजी-नही जाउन्गा , लो तुम्हारा घर आ गया

शालिनी-.अंदर नही आएँगे

पिताजी-नही , आज नही , लेकिन जल्दी आउन्गा ,अपनी फॅमिली को लेकर आउन्गा

शालिनी-.मैं इंतज़ार करूगी

और पिताजी ने शालिनी की परेशानी दूर करने का रास्ता दिखा दिया

पिताजी शालिनी को डाइरेक्ट बोल सकते थे कि ना कर दो उस लड़के को और मेरे बेटे से शादी कर लो

पर पिताजी ने ऐसा नही किया

अगर शालिनी की किस्मत मे उनकी बहू बनना लिखा हो तो वो ज़रूर बनेगी

पिताजी शालिनी से कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नही करना चाहते

वो शालिनी को हँसते हुए ले जाना चाहते है ,

शालिनी की खुशी का ध्यान रखा

शालिनी के घर मे कोई प्राब्लम ना ही इसका ध्यान रखा

अगर शालिनी खुद उस लड़के को मना करती तो उसकी भाभी नाराज़ हो जाती

पिताजी ने शालिनी को ऐसा रास्ता दिखाया जिस से सब खुश रहे

और पिताजी ठाकुरजी के साथ ठकुराइन के मायके आ गये
 
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